कैंसर से डरने की नहीं, सभी को मिलकर लड़ने की ज़रूरत है - पारस एचएमआरआई*
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पटना। विश्व कैंसर दिवस पर पारस एचएमआरआई, पटना में शनिवार 31 जनवरी को कैंसर के प्रति जागरूकता हेल्थ टॉक एंव कैंसर सर्वाइवर मीट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पद्मश्री विमल कुमार जैन, डॉ. ए.ए. हई, राधेश्याम बंसल, अभय प्रकाश डीआईजी एंव जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुरुआत किया। इस दौरान एक हेल्थ टॉक “उम्मीद के सितारे” का भी आयजोन किया गया, जिसमें कैंसर से जंग जीत चुके लगभग 50 मरीजों एंव उनके परिवार के लोग ने अपना अनुभव सांझा किया। उन्होंने शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण पता नहीं चलने की बात पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जब उन्हें इसका पता चला तब तक काफी देर हो चुकी थी, लेकिन पारस एचएमआरआई के डॉक्टरों ने उन्हें बेहतरीन इलाज से बचा लिया। उन्होंने बताया कि कैंसर के बारे में अगर उन्हें भी पहले पता होता तो इलाज जल्द हो जाता। एक सर्वाइवर ने बताया कि कैंसर अब लाइलाज नहीं रहा। इससे लड़ने के लिए ना सिर्फ इलाज बल्कि डॉक्टर से मिल रहे मोटिवेशन की भी जरूरत होती है। पारस एचएमआरआई के डॉक्टर मरीजों को इस बीमारी से जंग जीतने के लिए मोटिवेट करके इलाज करते हैं, जो सबसे ज्यादा जरूरी है। इस दौरान हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से 25 सरवाइवर्स को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पारस एचएमआरआई के *डायरेक्टर जेनेरल सर्जरी डॉ. एए हई* ने कहा कि एक रिपोर्ट के अनुसार 1 साल में लगभग 15 लाख लोग कैंसर की चपेट में आते हैं। खानपान और दिनचर्या में सुधार लाकर और अल्कोहल जैसी चीजों से दूरी बनाकर कैंसर के 50 प्रतिशत तक मामलों को रोका जा सकता है। इस मौके पर *डायरेक्टर हेमेटोओन्कोलॉजी डॉ. अविनाश कुमार सिंह* ने कहा कि कैंसर से बचने के लिए यह जरूरी है कि गुटखा, बीड़ी, सिगरेट या अल्कोहल जैसी किसी भी तरह की नशीली पदार्थ का सेवन न करें। आज मुँह और गले का कैंसर, स्तन के कैंसर और बच्चेदानी के कैंसर से लोग ज्यादा पीड़ित होते हैं। फेफड़े और पित्ताशय के कैंसर के मरीज़ों की संख्या भी कम नहीं है। बच्चेदानी के कैंसर से बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है जो ९-४५ वर्ष की बच्चियाँ और महिलाओं को उचित सलाह के बाद अवश्य लगवानी चाहिए। कैंसर कोई छूआछूत की बीमारी नहीं है और ना कि इसका इलाज संभव नहीं है। ज़रूरत है सही समय पर डायग्नोसिस और विशेषज्ञ से मिलकर उचित इलाज। सही लाइफस्टाइल, हेल्थ चेक अप, स्क्रीनिंग व प्रारंभिक लक्षणों को पहचान कर कैंसर को होने से रोका जा सकता है । पारस हेल्थ के *जोनल डायरेक्टर अनिल कुमार* ने बताया कि “ हमारा मकसद है कि ज्यादा – से- ज्यादा और दूर-दराज के लोगों तक कैंसर से जुड़े जागरूकता संदेशों को पहुंचाया जाय”। इसलिए इस कार्यक्रम में अन्य सामाजिक संगठनों को भी आमंत्रित किया गया। पारस एचएमआरआई कैंसर रोग के समुचित निदान के लिए जाना जाता है। यहां अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से कैंसर का इलाज किया जाता है। 24 घंटे यहां कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम मौजूद रहती है। इस कार्यक्रम में डायरेक्टर व एचओडी मेडिकल ओन्कोलॉजी डॉ. अभिषेक आनंद, सीनियर कंसल्टेंट व डायरेक्टर रेडिएशन ओन्कोलॉजी डॉ. शेखर कुमार केशरी, मुख्य कंसल्टेंट मेडिकल ऑनकोलॉजी डॉ. आर.एन. टैगोर ने भी अपने विचार रखे। वहीं सीनियर कंसल्टेंट हेड एंड नेक सर्जरी ओन्कोलॉजी डॉ. मिताली दांडेकर लाल, कंसलटेंट ऑनकोसर्जन डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. मोसर्रत शाहीन, डॉ. हरिहर नाथ तिवारी, डॉ. चिन्मय बिसवाल, डॉ. केतन चन्द्र नथानी एंव डॉ. मोफिजुर रहमान, एनसीसी के कैडेट्स, अलय फातिमा हई नर्सिंग कॉलेज की छात्राएं, गुरुदेव पारा मेडिकल कॉलेज के छात्र, सीआरपीएफ के जवान और आंगनबाड़ी सेविकाएं आदि भी शामिल रहीं। *पारस एचएमआरआई के बारे में* पारस एचएमआरआई पटना ने 2013 में परिचालन शुरू किया। यह बिहार का पहला कॉर्पोरेट अस्पताल है जिसके पास परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा लाइसेंस प्राप्त कैंसर उपचार केंद्र है। जून 2024 में एक्सेस किए गए एनएबीएच पोर्टल के अनुसार, पारस एचएमआरआई अस्पताल, पटना 2016 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त करने वाला बिहार का पहला अस्पताल था। इस अस्पताल की बेड क्षमता 400 से ज्यादा की है, जिसमें 80 आईसीयू बेड शामिल हैं साथ ही 2 LINAC मशीन एंव PET-CT की सुविधा भी उपलब्ध है।
2 hours and 30 min ago
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