24 घंटे में ईरान ने अमेरिकी खेमे में मचाई खलबली, दो लड़ाकू विमान-हेलीकॉप्टर को बनाया निशाना

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ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध में हर दिन हमले तेज हो रहे हैं। ईरान के साथ करीब पांच सप्ताह से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। एक ही दिन में ईरान द्वारा दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिराए जाने की घटना ने पश्चिम एशिया में संकट को और गहरा दिया है।

अमेरिका ने पिछले 24 घंटे में अपन दो फाइटर जेट और दो हेलीकॉप्टर खो दिए हैं। जबकि उसके एफ-15 लड़ाकू विमान का पायलट अभी भी लापता है। ईरान के अंदर उसकी तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

ईरान ने खुजेस्तान में F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया

शुक्रवार को ईरान ने एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल को निशाना बनाया। ईरान ने अपने खुजेस्तान प्रांत F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया। इस घटना में विमान के दो चालक दल सदस्यों में से एक को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अब भी लापता है। चालक की तलाश के लिए ईरान ने इनाम की घोषणा की है।

कुवैत के ऊपर अमेरिकी A-10 को बनाया निशाना

एक दूसरी घटना में ईरान ने कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिका के दो A-10 वॉरथॉग विमानों पर हमला किया था जिनमें से एक विमान समंदर में जा गिरा। इस विमान के पायलट को भी बचा लिया गया है। दूसरा विमान एक इंजन के सहारे बेस पर लौटने में कामयाब रहा।

बचाव मिशन पर भी हमला

F-15E लड़ाकू विमान के लापता पायलट का पता लगाने के प्रयास बेहद खतरनाक साबित हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खोज और बचाव मिशन के लिए ईरानी क्षेत्र में घुसे दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी गोलाबारी हुई। हालांकि वे ईरानी हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। इस मिशन में एक पायलट को रेस्क्यू कर लिया गया था। आशंका जताई गई है कि ये दो हेलीकॉप्टर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

Renowned Actress Kunickaa Sadanand and Dr. Kiran Chachlani Collaborate to Shape the Future of Boss Foods at Dr. A.P.J. Abdul Kalam Bharat Purask

Mumbai, India – At the prestigious Dr. A.P.J. Abdul Kalam Bharat Puraskar award night, an event celebrating exceptional contributions to society, celebrated Indian film and television actress Kunickaa Sadanand joined forces with Dr. Kiran Chachlani, Founder of Boss Chakki Fresh Atta and Boss Foods Products. The distinguished duo engaged in a compelling discussion on innovative strategies poised to redefine the future trajectory of Boss Foods.

Kunickaa Sadanand, widely recognized for her impactful roles in popular Hindi films and television serials, as well as her participation in the renowned reality show Bigg Boss, lent her vision and star power to this groundbreaking initiative. Together with Dr. Kiran Chachlani, a visionary leader committed to social responsibility and entrepreneurship, they unveiled plans that marry quality food production with meaningful community empowerment.

Dr. Chachlani is set to launch her own brand under the "Lady Boss" campaign: Boss Chakki Fresh Atta. This exclusive range includes wheat atta, besan atta, and multigrain atta, promising premium quality and freshness. Beyond delivering superior products, the campaign is dedicated to creating sustainable employment opportunities for women in Navi Mumbai. Furthermore, it supports the education and health of these women’s children, reinforcing a holistic approach to community development.

ट्रंप का यूटर्न! बिना होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाए ही ईरान संग युद्ध खत्म करने को तैयार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ छिड़ी जंग को और खींचने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले बिना ही ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को खत्म करने के लिए तैयार हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की सोमवार को छपी रिपोर्ट में प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

ट्रंप ने होर्मुज पर कदम पीछे खींचा

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे। ट्रंप ने कहा कि इस समुद्री गलियारे को फिर से खोलने के जटिल अभियान को फिलहाल छोड़ देंगे। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि इस अहम तेल मार्ग को खोलना अब जीत के लिए जरूरी नहीं माना जा रहा

बदलाव की क्या है वजह?

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस जलमार्ग को जबरन खुलवाने की कोशिश से संघर्ष के उस समय-सीमा से आगे खिंच जाने की संभावना है, जो प्रशासन ने तय की है। इसके बजाय मौजूदा रणनीति सैन्य अभियानों को कम करने से पहले ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित है।

ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करना होगा टारगेट

वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट की मानें तो अब उन्होंने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करने और युद्ध को खत्म करने के मुख्य टारगेट पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहम जलमार्ग में व्यापार को निर्बाध रूप से फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव डालना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक अगर यह नाकाम रहता है तो वाशिंगटन यूरोप और खाड़ी में अपने सहयोगियों पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने के लिए दबाव डालेगा।

ईरान का दुनिया के अहम ऊर्जा मार्ग पर बना रहेगा नियंत्रण

बता दें कि कुछ दिनों पहले तक अमेरिका के लिए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलना बहुत जरूरी लक्ष्य था, लेकिन अब ट्रंप का रुख बदल गया है और वे बिना इसे पूरी तरह खोले भी युद्ध खत्म करना चाहते हैं। वहीं ईरान इस जलमार्ग को घेरे हुए है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल-गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस बदलाव से ईरान का दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण बना रह सकता है। इस रास्ते में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ता रहेगा क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस आता है।

खर्ग पर कब्जा अमेरिका करेगा? ट्रंप के बयान ने मचाई खलबली

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अमेरिका और इज़रायल का ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का आज 31वां दिन है। अमेरिका और इज़रायल जहाँ लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले कर रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपदावा कर रहे हैं कि युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। 

ईरानी तेल पर कब्जे के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल पर कब्जे करने का संकेत दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान के तेल को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने ईरान के तेल के प्रति रूचि जताते हुए कहा कि वह ईरान के तेल को अपने कब्ज़े में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। खर्ग द्वीप को ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यहीं से देश का करीब 90 फीसदी तेल निर्यात किया जाता है।

मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स के साथ इंटरव्यू में ईरान युद्ध पर कई कमेंट किए हैं। खर्ग पर कब्जे के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना होगी। हालांकि अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग मुझे कहते हैं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। उनको चीजों की समझ नहीं है।'

ट्रंप ने कहा- हमारे पास कई विकल्प

ट्रंप ने कहा कि उनके लिए यह ऑप्शन खुला हुआ है। ट्रंप ने ईरान में अपने सैन्य अभियान पर कहा, 'यह हो सकता है हम खर्ग द्वीप को ईरान से अपने नियंत्रण में ले लें। हालांकि ये भी मुमकिन है कि हम ऐसा नहीं करें। दरअसल हमारे पास कई विकल्प हैं और हम कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि खर्ग पर कंट्रोल के लिए हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।'

खर्ग आइलैंड पर हमला कर चुका है यूएस

बता दें कि ट्रंप की नज़र ईरान के खर्ग आइलैंड पर है, जहाँ ईरान के तेल के कई भंडार हैं। ट्रंप चाहते हैं कि खर्ग आइलैंड पर अमेरिका का कब्ज़ा हो। कुछ दिन पहले अमेरिका ने खर्ग आइलैंड पर हमला भी किया था। हालांकि इस दौरान तेल के भंडारों को निशाना नहीं बनाया गया। इसके अलावा ट्रंप ईरान के कंट्रोल वाली होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़े की इच्छा भी जता चुके हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मज़ाक-मज़ाक में उसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बता दिया था।

क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

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पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत! ईरान ने खोल दिया होर्मुज स्ट्रेट, अब बिना रोक-टोक गुजरेंगे जहाज*

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ईरान में जंग तेज होता जा रहा है। ईरान-अमेरिका के बीचा सीजफायर के आसार बनते नहीं दिख रहे हैं। होर्मुज संकट अब भी बरकरार है। दुनियाभर के जहाजों के लिए ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद कर रखा है। इससे पश्चिम एशिया में ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। हालांकि, इस बीच ईरान ने भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है।

ईरान ने बुधवार को ही यह साफ कर दिया था कि वह मित्र देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोल रहा है। भारत में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से यह जानकारी दी है। मुंबई स्थित ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के फैसले की जानकारी दी।

भारत समेत पांच देशों को राहत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'हमने होर्मुज स्ट्रेट से चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी है।' क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है. इस तरह से पांच देशों के लिए ईरान ने होर्मुज का दरवाजा खोल दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद

यह बयान उस समय आया है, जब ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद है, लेकिन मित्र देशों के जहाज़ों को गुजरने दिया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को शत्रु माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज, जो वर्तमान संकट में भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने होर्मुज खोलने की अपील की

संयुक्त राष्ट्र (यूएन)के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने के आह्वान किया था। गुटेरेस ने कहा था, 'होर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना, वैश्विक बुवाई के मौसम के एक बहुत ही खास मोड़ पर तेल, गैस और उर्वरक की आवाजाही को बाधित कर रहा है। सभी क्षेत्र और उससे भी आगे सामान्य लोग गंभीर मुश्किलें झेल रहे हैं और बहुत ज्यादा असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र युद्ध के प्रभावों को कम करने की कोशिश कर रहा है। और इसके प्रभावों को कम करने का सबसे आसान तरीका है, युद्ध बंद हो- तुरंत।'

भारत के लिए राहत भरी खबर

ईरान के इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारत का काफी तेल इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बंद रहता, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते थे। ईरान ने पहले भी साफ किया था कि गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज (यानी जो ईरान के खिलाफ नहीं हैं) इस रास्ते से गुजर सकते हैं, लेकिन अब यह नियम और सख्त कर दिया गया है, हर जहाज को पहले अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले ट्रंप-नेतन्याहू के बीच हुई बात, फिर मिला हमले का ग्रीन सिग्नल

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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान पर हमले से महज 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी थी। इस ऐतिहासिक फोन कॉल में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का यह सबसे अच्छा मौका हो सकता है।

ट्रंप ने पहले ही ऑपरेशन को मंजूरी दी थी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू और ट्रंप दोनों के पास खुफिया रिपोर्ट थी कि खामेनेई अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ तेहरान में अपने कंपाउंड में बैठक करने वाले थे। यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (खामेनेई की हत्या) का सुनहरा अवसर था। कॉल के दौरान नई खुफिया जानकारी आई कि बैठक शनिवार सुबह कर दी गई है। ट्रंप ने उस समय तक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे रखी थी, लेकिन समय और अमेरिकी भूमिका पर फैसला बाकी था।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और इजराइल को खामेनेई को मारने और 2024 में ट्रंप की हत्या की साजिश का बदला लेने का इससे बेहतर मौका कभी नहीं मिलेगा। नेतन्याहू ने इसे रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूप में जरूरी बताया और ट्रंप को इसे सही ठहराने के लिए प्रेरित किया।

तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की सलाह

नेतन्याहू ने ट्रंप से अपील की कि वे इतिहास रच सकते हैं। उनका तर्क था कि इस हमले से प्रोत्साहित होकर ईरान के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और 1979 से चली आ रही एक रह की तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंक सकते हैं, जो वैश्विक आतंकवाद और अस्थिरता का बड़ा स्रोत रही है।

28 फरवरी को हुआ था पहला हमला

बता दें कि ईरान पर पहला हमला 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि खामेनेई मारे गए। व्हाइट हाउस ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद था ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और उत्पादन क्षमता को खत्म करना, ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से यह खारिज किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए दबाव डाला। उन्होंने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि कोई भी ट्रंप को नहीं बताता कि क्या करना है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला उनका खुद का था।

मिडिल ईस्ट संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, कहा-सरकार के पास ऊर्जा के पर्याप्त भंडार

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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में भारत की स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।लोकसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता को इन जरूरी ईंधनों की कोई कमी न हो।

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरित असर-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। बीते 2-3 हफ्तों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने और हरदीप पुरी ने इस विषय पर संसद को जरूरी जानकारी दी है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।

भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

गैस सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी-पीएम मोदी

लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में बिना किसी रुकावट के जारी रहे। गैस की सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की ऊर्जा आयात की विविधता काफी बढ़ी है। पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों हो गई है। सरकार अलग-अलग सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है और जहां से भी संभव हो, वहां से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 53 लाख टन से अधिक है और इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने का काम तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों के अपने रिजर्व अलग से हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौटे

पीएम मोदी ने बताया कि भारत के करीब 1 करोड़ लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। वहां समुद्री जहाजों पर बहुत से भारतीय काम करते हैं। जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय लोगों को मदद दी जा रही है। मैंने भी दो राष्ट्राध्यक्षों से इसके बारे में बात की है। दुर्भाग्य से इस युद्ध की वजह से कुछ लोगों की मौत है और कुछ लोग घायल हैं। विदेशों में हमारे जितने भी मिशन हैं। वह हमारे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। विदेश में फंसें हमारे लोगों की मदद के लिए भारत में 24 घंटे हेल्पलाइन जारी की गई है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से 1000 से अधिक छात्र लौटे हैं। इसमें से अधिकतक मेडिकल के छात्र हैं।

ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।

24 घंटे में ईरान ने अमेरिकी खेमे में मचाई खलबली, दो लड़ाकू विमान-हेलीकॉप्टर को बनाया निशाना

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ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध में हर दिन हमले तेज हो रहे हैं। ईरान के साथ करीब पांच सप्ताह से चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। एक ही दिन में ईरान द्वारा दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों के गिराए जाने की घटना ने पश्चिम एशिया में संकट को और गहरा दिया है।

अमेरिका ने पिछले 24 घंटे में अपन दो फाइटर जेट और दो हेलीकॉप्टर खो दिए हैं। जबकि उसके एफ-15 लड़ाकू विमान का पायलट अभी भी लापता है। ईरान के अंदर उसकी तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।

ईरान ने खुजेस्तान में F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया

शुक्रवार को ईरान ने एक अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल को निशाना बनाया। ईरान ने अपने खुजेस्तान प्रांत F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया। इस घटना में विमान के दो चालक दल सदस्यों में से एक को बचा लिया गया है, जबकि दूसरा अब भी लापता है। चालक की तलाश के लिए ईरान ने इनाम की घोषणा की है।

कुवैत के ऊपर अमेरिकी A-10 को बनाया निशाना

एक दूसरी घटना में ईरान ने कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया। ईरान ने अमेरिका के दो A-10 वॉरथॉग विमानों पर हमला किया था जिनमें से एक विमान समंदर में जा गिरा। इस विमान के पायलट को भी बचा लिया गया है। दूसरा विमान एक इंजन के सहारे बेस पर लौटने में कामयाब रहा।

बचाव मिशन पर भी हमला

F-15E लड़ाकू विमान के लापता पायलट का पता लगाने के प्रयास बेहद खतरनाक साबित हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खोज और बचाव मिशन के लिए ईरानी क्षेत्र में घुसे दो अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी गोलाबारी हुई। हालांकि वे ईरानी हवाई क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे। इस मिशन में एक पायलट को रेस्क्यू कर लिया गया था। आशंका जताई गई है कि ये दो हेलीकॉप्टर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं।

Renowned Actress Kunickaa Sadanand and Dr. Kiran Chachlani Collaborate to Shape the Future of Boss Foods at Dr. A.P.J. Abdul Kalam Bharat Purask

Mumbai, India – At the prestigious Dr. A.P.J. Abdul Kalam Bharat Puraskar award night, an event celebrating exceptional contributions to society, celebrated Indian film and television actress Kunickaa Sadanand joined forces with Dr. Kiran Chachlani, Founder of Boss Chakki Fresh Atta and Boss Foods Products. The distinguished duo engaged in a compelling discussion on innovative strategies poised to redefine the future trajectory of Boss Foods.

Kunickaa Sadanand, widely recognized for her impactful roles in popular Hindi films and television serials, as well as her participation in the renowned reality show Bigg Boss, lent her vision and star power to this groundbreaking initiative. Together with Dr. Kiran Chachlani, a visionary leader committed to social responsibility and entrepreneurship, they unveiled plans that marry quality food production with meaningful community empowerment.

Dr. Chachlani is set to launch her own brand under the "Lady Boss" campaign: Boss Chakki Fresh Atta. This exclusive range includes wheat atta, besan atta, and multigrain atta, promising premium quality and freshness. Beyond delivering superior products, the campaign is dedicated to creating sustainable employment opportunities for women in Navi Mumbai. Furthermore, it supports the education and health of these women’s children, reinforcing a holistic approach to community development.

ट्रंप का यूटर्न! बिना होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाए ही ईरान संग युद्ध खत्म करने को तैयार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ छिड़ी जंग को और खींचने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले बिना ही ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को खत्म करने के लिए तैयार हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की सोमवार को छपी रिपोर्ट में प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

ट्रंप ने होर्मुज पर कदम पीछे खींचा

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे। ट्रंप ने कहा कि इस समुद्री गलियारे को फिर से खोलने के जटिल अभियान को फिलहाल छोड़ देंगे। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि इस अहम तेल मार्ग को खोलना अब जीत के लिए जरूरी नहीं माना जा रहा

बदलाव की क्या है वजह?

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस जलमार्ग को जबरन खुलवाने की कोशिश से संघर्ष के उस समय-सीमा से आगे खिंच जाने की संभावना है, जो प्रशासन ने तय की है। इसके बजाय मौजूदा रणनीति सैन्य अभियानों को कम करने से पहले ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित है।

ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करना होगा टारगेट

वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट की मानें तो अब उन्होंने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करने और युद्ध को खत्म करने के मुख्य टारगेट पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहम जलमार्ग में व्यापार को निर्बाध रूप से फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव डालना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक अगर यह नाकाम रहता है तो वाशिंगटन यूरोप और खाड़ी में अपने सहयोगियों पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने के लिए दबाव डालेगा।

ईरान का दुनिया के अहम ऊर्जा मार्ग पर बना रहेगा नियंत्रण

बता दें कि कुछ दिनों पहले तक अमेरिका के लिए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलना बहुत जरूरी लक्ष्य था, लेकिन अब ट्रंप का रुख बदल गया है और वे बिना इसे पूरी तरह खोले भी युद्ध खत्म करना चाहते हैं। वहीं ईरान इस जलमार्ग को घेरे हुए है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल-गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस बदलाव से ईरान का दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण बना रह सकता है। इस रास्ते में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ता रहेगा क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस आता है।

खर्ग पर कब्जा अमेरिका करेगा? ट्रंप के बयान ने मचाई खलबली

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अमेरिका और इज़रायल का ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का आज 31वां दिन है। अमेरिका और इज़रायल जहाँ लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले कर रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपदावा कर रहे हैं कि युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। 

ईरानी तेल पर कब्जे के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल पर कब्जे करने का संकेत दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान के तेल को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने ईरान के तेल के प्रति रूचि जताते हुए कहा कि वह ईरान के तेल को अपने कब्ज़े में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। खर्ग द्वीप को ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यहीं से देश का करीब 90 फीसदी तेल निर्यात किया जाता है।

मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स के साथ इंटरव्यू में ईरान युद्ध पर कई कमेंट किए हैं। खर्ग पर कब्जे के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना होगी। हालांकि अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग मुझे कहते हैं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। उनको चीजों की समझ नहीं है।'

ट्रंप ने कहा- हमारे पास कई विकल्प

ट्रंप ने कहा कि उनके लिए यह ऑप्शन खुला हुआ है। ट्रंप ने ईरान में अपने सैन्य अभियान पर कहा, 'यह हो सकता है हम खर्ग द्वीप को ईरान से अपने नियंत्रण में ले लें। हालांकि ये भी मुमकिन है कि हम ऐसा नहीं करें। दरअसल हमारे पास कई विकल्प हैं और हम कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि खर्ग पर कंट्रोल के लिए हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।'

खर्ग आइलैंड पर हमला कर चुका है यूएस

बता दें कि ट्रंप की नज़र ईरान के खर्ग आइलैंड पर है, जहाँ ईरान के तेल के कई भंडार हैं। ट्रंप चाहते हैं कि खर्ग आइलैंड पर अमेरिका का कब्ज़ा हो। कुछ दिन पहले अमेरिका ने खर्ग आइलैंड पर हमला भी किया था। हालांकि इस दौरान तेल के भंडारों को निशाना नहीं बनाया गया। इसके अलावा ट्रंप ईरान के कंट्रोल वाली होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़े की इच्छा भी जता चुके हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मज़ाक-मज़ाक में उसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बता दिया था।

क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

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पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

पहले मीडिल ईस्ट पर सरकार का समर्थन किया, अब किस बात है शशि थरूर हैं असंतुष्ट?

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पाकिस्तान ने औपचारिक तौर पर ईरान और अमेरिका को युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज़बानी की पेशकश कर दी है। कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच यह बातचीत इस्लामाबाद में हो सकती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए 'सार्थक और निर्णायक वार्ता' की मेजबानी को लेकर उनका देश तैयार है। यह घोषणा मीडिया की उन खबरों के बाद आई है जिनमें कहा गया है कि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये परोक्ष रूप से प्रयास कर रहे हैं। अब ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

शांति प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका पर निराश

पश्चिम एशिया संकट पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की रणनीति का अबतक खुलकर समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर निराशा जताई है। उन्होंने इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि भारत को इस मौके पर शांति प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि उन्होंने अब तक केंद्र सरकार की संयमित प्रतिक्रिया का समर्थन किया था, इस उम्मीद में कि भारत इस अवसर का उपयोग शांति स्थापना के लिए करेगा।

थरूर बोले-हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए

शांति के वैश्विक प्रयासों पर थरूर ने भारत सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हम शांति के पक्ष में तो हैं, लेकिन वर्तमान में शांति बहाली के लिए हमारी सक्रिय भागीदारी नहीं दिख रही है। एक राष्ट्र के तौर पर हम इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में से एक हैं, इसलिए हमें हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए।

थरूर बोले-हमें पहल करनी चाहिए थी

थरूर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर भारत को शांति की आवाज के रूप में पेश करते रहे हैं, ऐसे में यह मौका भारत के लिए महत्वपूर्ण था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह पिछले तीन हफ्तों से भारत से अपील कर रहे थे कि वह अपने मजबूत कूटनीतिक संबंधों का इस्तेमाल कर दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रेरित करे। उन्‍होंने कहा कि अगर पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो भारत का उससे कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन हमें पहल करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भले ही पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की इस दिशा में आगे बढ़े हैं, लेकिन भारत को इसका कोई श्रेय नहीं मिल रहा।

भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत! ईरान ने खोल दिया होर्मुज स्ट्रेट, अब बिना रोक-टोक गुजरेंगे जहाज*

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ईरान में जंग तेज होता जा रहा है। ईरान-अमेरिका के बीचा सीजफायर के आसार बनते नहीं दिख रहे हैं। होर्मुज संकट अब भी बरकरार है। दुनियाभर के जहाजों के लिए ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्ता बंद कर रखा है। इससे पश्चिम एशिया में ईंधन का संकट गहराता जा रहा है। हालांकि, इस बीच ईरान ने भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया है।

ईरान ने बुधवार को ही यह साफ कर दिया था कि वह मित्र देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य खोल रहा है। भारत में ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हवाले से यह जानकारी दी है। मुंबई स्थित ईरान के कॉन्सुलेट जनरल ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरान के फैसले की जानकारी दी।

भारत समेत पांच देशों को राहत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'हमने होर्मुज स्ट्रेट से चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान को गुजरने की अनुमति दी है।' क्षेत्र में जारी संघर्ष के बावजूद भारत के साथ-साथ रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सुरक्षित मार्ग प्रदान किया गया है. इस तरह से पांच देशों के लिए ईरान ने होर्मुज का दरवाजा खोल दिया है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद

यह बयान उस समय आया है, जब ईरान ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुश्मन देशों के लिए बंद है, लेकिन मित्र देशों के जहाज़ों को गुजरने दिया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों को शत्रु माना जाता है या जो मौजूदा संघर्ष में शामिल हैं, उनसे जुड़े जहाजों को जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल और कुछ खाड़ी देशों के जहाज, जो वर्तमान संकट में भूमिका निभा रहे हैं, उन्हें जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने होर्मुज खोलने की अपील की

संयुक्त राष्ट्र (यूएन)के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने के आह्वान किया था। गुटेरेस ने कहा था, 'होर्मुज जलडमरूमध्य का लंबे समय तक बंद रहना, वैश्विक बुवाई के मौसम के एक बहुत ही खास मोड़ पर तेल, गैस और उर्वरक की आवाजाही को बाधित कर रहा है। सभी क्षेत्र और उससे भी आगे सामान्य लोग गंभीर मुश्किलें झेल रहे हैं और बहुत ज्यादा असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र युद्ध के प्रभावों को कम करने की कोशिश कर रहा है। और इसके प्रभावों को कम करने का सबसे आसान तरीका है, युद्ध बंद हो- तुरंत।'

भारत के लिए राहत भरी खबर

ईरान के इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि भारत का काफी तेल इसी रास्ते से आता है। अगर यह रास्ता बंद रहता, तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते थे। ईरान ने पहले भी साफ किया था कि गैर-शत्रुतापूर्ण जहाज (यानी जो ईरान के खिलाफ नहीं हैं) इस रास्ते से गुजर सकते हैं, लेकिन अब यह नियम और सख्त कर दिया गया है, हर जहाज को पहले अनुमति और सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा।

खामेनेई की मौत से 48 घंटे पहले ट्रंप-नेतन्याहू के बीच हुई बात, फिर मिला हमले का ग्रीन सिग्नल

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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान पर हमले से महज 48 घंटे से भी कम समय पहले इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। ट्रंप ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ फोन पर हुई बातचीत के बाद ईरान पर संयुक्त सैन्य हमलों को अंतिम मंजूरी दी थी। इस ऐतिहासिक फोन कॉल में नेतन्याहू ने जोर देकर कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का यह सबसे अच्छा मौका हो सकता है।

ट्रंप ने पहले ही ऑपरेशन को मंजूरी दी थी

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू और ट्रंप दोनों के पास खुफिया रिपोर्ट थी कि खामेनेई अपने प्रमुख सहयोगियों के साथ तेहरान में अपने कंपाउंड में बैठक करने वाले थे। यह ‘डेकैपिटेशन स्ट्राइक’ (खामेनेई की हत्या) का सुनहरा अवसर था। कॉल के दौरान नई खुफिया जानकारी आई कि बैठक शनिवार सुबह कर दी गई है। ट्रंप ने उस समय तक सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे रखी थी, लेकिन समय और अमेरिकी भूमिका पर फैसला बाकी था।

नेतन्याहू ने ट्रंप से क्या कहा?

नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और इजराइल को खामेनेई को मारने और 2024 में ट्रंप की हत्या की साजिश का बदला लेने का इससे बेहतर मौका कभी नहीं मिलेगा। नेतन्याहू ने इसे रणनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों रूप में जरूरी बताया और ट्रंप को इसे सही ठहराने के लिए प्रेरित किया।

तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंकने की सलाह

नेतन्याहू ने ट्रंप से अपील की कि वे इतिहास रच सकते हैं। उनका तर्क था कि इस हमले से प्रोत्साहित होकर ईरान के लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और 1979 से चली आ रही एक रह की तानाशाही व्यवस्था को उखाड़ फेंक सकते हैं, जो वैश्विक आतंकवाद और अस्थिरता का बड़ा स्रोत रही है।

28 फरवरी को हुआ था पहला हमला

बता दें कि ईरान पर पहला हमला 28 फरवरी को हुआ। इसके बाद ट्रंप ने घोषणा की कि खामेनेई मारे गए। व्हाइट हाउस ने बताया कि ऑपरेशन का मकसद था ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल और उत्पादन क्षमता को खत्म करना, ताकि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना सके। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से यह खारिज किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध के लिए दबाव डाला। उन्होंने इसे फेक न्यूज कहा और कहा कि कोई भी ट्रंप को नहीं बताता कि क्या करना है। ट्रंप ने भी कहा कि ईरान पर हमला करने का अंतिम फैसला उनका खुद का था।

मिडिल ईस्ट संकट पर लोकसभा में बोले पीएम मोदी, कहा-सरकार के पास ऊर्जा के पर्याप्त भंडार

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पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को लोकसभा में भारत की स्थिति की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर इसका असर पड़ा है।लोकसभा में प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू बनी रहेगी। सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि जनता को इन जरूरी ईंधनों की कोई कमी न हो।

पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही विपरित असर-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा कि इस समय पश्चिमी एशिया की हालत चिंताजनक है। बीते 2-3 हफ्तों में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने और हरदीप पुरी ने इस विषय पर संसद को जरूरी जानकारी दी है। अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है। इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है।

भारत के सामने भी अप्रत्याशित चुनौतियां-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ये चुनौतियां आर्थिक भी हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ी हैं और मानवीय भी हैं। युद्धरत और युद्ध से प्रभावित देशों के साथ भारत के व्यापक व्यापारिक रिश्ते हैं। जिस क्षेत्र में ये युद्ध हो रहा है, वह दुनिया के दूसरे देशों के साथ हमारे व्यापार का भी एक महत्वपूर्ण रास्ता है। विशेष रूप से कच्चे तेल और गैस की हमारी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा यही क्षेत्र पूरा करता है।

गैस सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी-पीएम मोदी

लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर अपने बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है, लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया है कि पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पूरे देश में बिना किसी रुकावट के जारी रहे। गैस की सप्लाई में भी कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। पीएम मोदी ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत की ऊर्जा आयात की विविधता काफी बढ़ी है। पहले भारत सिर्फ 27 देशों से कच्चा तेल आयात करता था, आज यह संख्या बढ़कर 41 देशों हो गई है। सरकार अलग-अलग सप्लायर्स के साथ निरंतर संपर्क में है और जहां से भी संभव हो, वहां से तेल, गैस और फर्टिलाइजर का आयात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) 53 लाख टन से अधिक है और इसे बढ़ाकर 65 लाख टन करने का काम तेजी से चल रहा है। तेल कंपनियों के अपने रिजर्व अलग से हैं. हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं।

3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौटे

पीएम मोदी ने बताया कि भारत के करीब 1 करोड़ लोग खाड़ी देशों में रहते हैं। वहां समुद्री जहाजों पर बहुत से भारतीय काम करते हैं। जब से ये युद्ध शुरू हुआ है, तब से भारतीय लोगों को मदद दी जा रही है। मैंने भी दो राष्ट्राध्यक्षों से इसके बारे में बात की है। दुर्भाग्य से इस युद्ध की वजह से कुछ लोगों की मौत है और कुछ लोग घायल हैं। विदेशों में हमारे जितने भी मिशन हैं। वह हमारे नागरिकों की मदद कर रहे हैं। विदेश में फंसें हमारे लोगों की मदद के लिए भारत में 24 घंटे हेल्पलाइन जारी की गई है। अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से 1000 से अधिक छात्र लौटे हैं। इसमें से अधिकतक मेडिकल के छात्र हैं।

ईरान पर हमले के लिए भारत ने अमेरिका को दिया अपना बेस! विदेश मंत्रालय ने बताई वायरल दावे की सच्चाई

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर चल रहे उस झूठे दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए सैन्य मदद मांगी है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि अमेरिका को भारत की जमीन से ईरान पर हमले के लिए अनुमति दी गई है।

भारत के पश्चिमी हिस्से के सैन्य इस्तेमाल का दावा

सोशल मीडिया के एक पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अमेरिका ने भारत से ईरान पर हमला करने के लिए उसकी जमीन इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। यह दावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तेजी से फैल रहा था। इसमें कहा गया था कि अमेरिका, LEMOA समझौते के तहत भारत के पश्चिमी हिस्से का इस्तेमाल सैन्य कार्रवाई के लिए करना चाहता है और कोंकण तट के पास अपनी सैन्य तैनाती की योजना बना रहा है।

विदेश मंत्रीलय ने कहा-खबरें पूरी तरह फर्जी

विदेश मंत्रालय की आधिकारिक फैक्ट-चेक इकाई ने स्पष्ट किया कि भारत ने किसी भी देश को अपनी धरती का उपयोग किसी तीसरे देश पर सैन्य कार्रवाई के लिए करने की अनुमति नहीं दी है। इस तरह की खबरें पूरी तरह फर्जी हैं और इनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें।

क्या है LEMOA समझौता

बता दें कि Logistics Exchange Memorandum of Agreement (LEMOA) एक समझौता है, जो 2016 में भारत और अमेरिका के बीच हुआ था। इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे की सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे ईंधन भरना, मरम्मत कराना या आराम करना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कोई देश दूसरे देश की जमीन से सीधे हमला कर सकता है। हर बार अलग से अनुमति लेनी होती है और वह भी सीमित कामों के लिए होती है।