ट्रंप का यूटर्न! बिना होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाए ही ईरान संग युद्ध खत्म करने को तैयार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ छिड़ी जंग को और खींचने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले बिना ही ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को खत्म करने के लिए तैयार हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की सोमवार को छपी रिपोर्ट में प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

ट्रंप ने होर्मुज पर कदम पीछे खींचा

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे। ट्रंप ने कहा कि इस समुद्री गलियारे को फिर से खोलने के जटिल अभियान को फिलहाल छोड़ देंगे। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि इस अहम तेल मार्ग को खोलना अब जीत के लिए जरूरी नहीं माना जा रहा

बदलाव की क्या है वजह?

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस जलमार्ग को जबरन खुलवाने की कोशिश से संघर्ष के उस समय-सीमा से आगे खिंच जाने की संभावना है, जो प्रशासन ने तय की है। इसके बजाय मौजूदा रणनीति सैन्य अभियानों को कम करने से पहले ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित है।

ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करना होगा टारगेट

वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट की मानें तो अब उन्होंने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करने और युद्ध को खत्म करने के मुख्य टारगेट पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहम जलमार्ग में व्यापार को निर्बाध रूप से फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव डालना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक अगर यह नाकाम रहता है तो वाशिंगटन यूरोप और खाड़ी में अपने सहयोगियों पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने के लिए दबाव डालेगा।

ईरान का दुनिया के अहम ऊर्जा मार्ग पर बना रहेगा नियंत्रण

बता दें कि कुछ दिनों पहले तक अमेरिका के लिए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलना बहुत जरूरी लक्ष्य था, लेकिन अब ट्रंप का रुख बदल गया है और वे बिना इसे पूरी तरह खोले भी युद्ध खत्म करना चाहते हैं। वहीं ईरान इस जलमार्ग को घेरे हुए है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल-गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस बदलाव से ईरान का दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण बना रह सकता है। इस रास्ते में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ता रहेगा क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस आता है।

खर्ग पर कब्जा अमेरिका करेगा? ट्रंप के बयान ने मचाई खलबली

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अमेरिका और इज़रायल का ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का आज 31वां दिन है। अमेरिका और इज़रायल जहाँ लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले कर रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपदावा कर रहे हैं कि युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। 

ईरानी तेल पर कब्जे के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल पर कब्जे करने का संकेत दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान के तेल को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने ईरान के तेल के प्रति रूचि जताते हुए कहा कि वह ईरान के तेल को अपने कब्ज़े में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। खर्ग द्वीप को ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यहीं से देश का करीब 90 फीसदी तेल निर्यात किया जाता है।

मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स के साथ इंटरव्यू में ईरान युद्ध पर कई कमेंट किए हैं। खर्ग पर कब्जे के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना होगी। हालांकि अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग मुझे कहते हैं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। उनको चीजों की समझ नहीं है।'

ट्रंप ने कहा- हमारे पास कई विकल्प

ट्रंप ने कहा कि उनके लिए यह ऑप्शन खुला हुआ है। ट्रंप ने ईरान में अपने सैन्य अभियान पर कहा, 'यह हो सकता है हम खर्ग द्वीप को ईरान से अपने नियंत्रण में ले लें। हालांकि ये भी मुमकिन है कि हम ऐसा नहीं करें। दरअसल हमारे पास कई विकल्प हैं और हम कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि खर्ग पर कंट्रोल के लिए हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।'

खर्ग आइलैंड पर हमला कर चुका है यूएस

बता दें कि ट्रंप की नज़र ईरान के खर्ग आइलैंड पर है, जहाँ ईरान के तेल के कई भंडार हैं। ट्रंप चाहते हैं कि खर्ग आइलैंड पर अमेरिका का कब्ज़ा हो। कुछ दिन पहले अमेरिका ने खर्ग आइलैंड पर हमला भी किया था। हालांकि इस दौरान तेल के भंडारों को निशाना नहीं बनाया गया। इसके अलावा ट्रंप ईरान के कंट्रोल वाली होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़े की इच्छा भी जता चुके हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मज़ाक-मज़ाक में उसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बता दिया था।

ट्रंप ने होर्मुज पर सात देशों से मांगी मदद, सहयोगियों के इनकार के बाद क्या अकेला पड़ा यूएस?

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने के आह्वान किया था। लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने या तो सतर्क रुख अपनाया है या सीधे तौर पर इनकार कर दिया है।

ट्रंप ने कई देशों से मांगा सहयोग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने करीब सात देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए वॉरशिप भेजने की मांग की। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के बारे में कहा, "मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आएं और अपने इलाके की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका अपना इलाका है।" उन्होंने दावा किया कि शिपिंग चैनल ऐसी चीज नहीं है जिसकी अमेरिका को जरूरत है क्योंकि तेल तक उसकी अपनी पहुंच है। ट्रंप ने फ्लोरिडा से एयर फोर्स वन में वाशिंगटन वापस जाते समय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।

अमेरिका के करीबी सहयोगियों का इनकार

हालांकि, अब तक न तो ट्रंप किसी देश का नाम खुलकर बता पाए हैं और न ही किसी बड़े देश ने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने युद्धपोत होर्मुज में भेजने जा रहा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जो अमेरिका के काफी करीबी सहयोगी हैं उन्होंने भी ट्रंप को झटका देते हुए होर्मुज में अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।

जापान ने कहा- नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद में कहा कि टोक्यो के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने अब तक कोई भी फैसला नहीं लिया है कि हम जहाज तैनात करेंगे या नहीं। हम यह देख रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी ढांचे के भीतर क्या संभव है।"

ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह हॉर्मुज जनडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि कर दी है कि वह इस क्षेत्र को नौसैनिक सहायता नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया है कि हालांकि यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कैनबरा को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और फिलहाल उसकी वहां सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है।

हॉर्मुज जलमार्ग की अहमियत

दुनिया के तेल व्यापार के लिए हॉर्मुज जलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। अनुमान है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसके कारण कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मैं दखल न देता तो खतरे में थी शहबाज शरीफ की जान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूकवाने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। कांग्रेस के जॉइंट सेशन में भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया है। यह न्यूक्लियर वॉर हो सकती थी, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाते। अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मारे जाते।

10 महीनों में आठ युद्ध रोकने का दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए फिर भारत और पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए।

‘35 मिलियन लोग मारे गए होते’

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। उन्होंने देश की संसद में दावा किया कि शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर वह दखल नहीं देते तो पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 35 मिलियन लोग मारे गए होते।

बार-बार भारत-पाक जंग रूकवाने का दावा

ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को लेकर इस तरह का दावा किया है। हां, शहबाज शरीफ को लेकर ये दावा बिल्कुल नया है। हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान टकराव को रोका है। उन्होंने लगातार कहा है कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ़ उपायों का इस्तेमाल किया।

भारत ने हमेशा ट्रंप के दावों को नकारा

हालांकि, भारत ने हमेशा से डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकारा है। जबकि पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान युद्ध रूकवाने के लिए क्रेडिट दिया है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों बोर्ड ऑफ गाजा पीस के दौरान भी ट्रंप की तारिफ की थी और कहा था कि ट्रंप की वजह से 35 मिलियन लोगों की जान बच गई।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को लगा झटका, तिलमिलाए यूएस प्रेसिडेंट ने 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का किया ऐलान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को पलट दिया है। इसके बाद से ट्रंप भड़के हुए हैं। ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत दुनिया पर 10 परसेंट टैरिफ लगाया है।

मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश साइन किया। यह शुल्क मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा और 24 फरवरी से लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ट्रंप का फैसला

ट्रंप ने यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद उठाया है, जिसमें टॉप कोर्ट ने दुनिया भर में लगाए गए उनके टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए टैरिफ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर हस्ताक्षर कर दिया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा।' ट्रंप की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए वॉइट हाउस के एक्स हैंडल पर लिखा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया है।

भारत समेत सभी देशों पर असर

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत सहित सभी देशों पर यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा। यह पहले से वसूले जा रहे शुल्कों के ऊपर जोड़ा जाएगा। यानी मौजूदा टैरिफ के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त देना होगा।

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ईरान ने दी ट्रंप की हत्या की धमकी, सरकारी चैनल ने कहा- 'इस बार गोली नहीं चूकेगी'

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अब ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा गया कि ‘इस बार गोली चूकेगी नहीं।’

पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की चुनावी रैली का दिखाया इमेज

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक मैसेज के जरिए ट्रंप को धमकी दी है। इसके लिए टीवी चैनल ने जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई ट्रंप की चुनावी रैली की इमेज दिखाया, जहां ट्रंप पर गोलीबारी का प्रयास हुआ था।

अमेरिका विरोधी नारे और बैनर

यह वीडियो तेहरान में एक सरकारी आयोजन के दौरान दिखाया गया, जहां हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए थे। वहां अमेरिका विरोधी नारे और बैनर भी लगाए गए थे। ईरान की सरकारी टीवी ने फुटेज के साथ एक कैप्शन भी चलाया है, जिसमें कहा गया है कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकने वाली है। यानी अब अगर हमला होता है तो ट्रंप बच नहीं पाएंगे।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे वक्त धमकी दी गई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं की दोबारा तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक से सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

बवाल को लेकर ट्रंप और ईरान आमने-सामने

ईरान में महंगाई को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध दबाने के लिए सरकार ने सख्त एक्शन लेने की बात कही है। वहीं ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान सख्त एक्शन लेता है तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान में अत्याचार को हम चुपचाप नहीं देख सकेंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक कई दौर की हाईलेवल मीटिंग हुई है। जून 2025 में भी परमाणु हथियार बनाने के मसले पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।

ट्रंप का यूटर्न! बिना होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाए ही ईरान संग युद्ध खत्म करने को तैयार

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ छिड़ी जंग को और खींचने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पूरी तरह खुले बिना ही ट्रंप ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान को खत्म करने के लिए तैयार हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की सोमवार को छपी रिपोर्ट में प्रशासनिक अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी दी गई है।

ट्रंप ने होर्मुज पर कदम पीछे खींचा

वॉल स्ट्रीट जर्नल ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे। ट्रंप ने कहा कि इस समुद्री गलियारे को फिर से खोलने के जटिल अभियान को फिलहाल छोड़ देंगे। रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने अपने सहयोगियों से कहा है कि इस अहम तेल मार्ग को खोलना अब जीत के लिए जरूरी नहीं माना जा रहा

बदलाव की क्या है वजह?

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने यह निष्कर्ष निकाला है कि इस जलमार्ग को जबरन खुलवाने की कोशिश से संघर्ष के उस समय-सीमा से आगे खिंच जाने की संभावना है, जो प्रशासन ने तय की है। इसके बजाय मौजूदा रणनीति सैन्य अभियानों को कम करने से पहले ईरान की नौसेना और मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करने पर केंद्रित है।

ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करना होगा टारगेट

वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट की मानें तो अब उन्होंने फैसला किया है कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल भंडारों को कमजोर करने और युद्ध को खत्म करने के मुख्य टारगेट पर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहम जलमार्ग में व्यापार को निर्बाध रूप से फिर से शुरू करने के लिए ईरान पर दबाव डालना चाहिए। अधिकारियों के मुताबिक अगर यह नाकाम रहता है तो वाशिंगटन यूरोप और खाड़ी में अपने सहयोगियों पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने में मदद करने के लिए दबाव डालेगा।

ईरान का दुनिया के अहम ऊर्जा मार्ग पर बना रहेगा नियंत्रण

बता दें कि कुछ दिनों पहले तक अमेरिका के लिए स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को खोलना बहुत जरूरी लक्ष्य था, लेकिन अब ट्रंप का रुख बदल गया है और वे बिना इसे पूरी तरह खोले भी युद्ध खत्म करना चाहते हैं। वहीं ईरान इस जलमार्ग को घेरे हुए है और इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल-गैस के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस बदलाव से ईरान का दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण बना रह सकता है। इस रास्ते में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ता रहेगा क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का 20 फीसदी तेल-गैस आता है।

खर्ग पर कब्जा अमेरिका करेगा? ट्रंप के बयान ने मचाई खलबली

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अमेरिका और इज़रायल का ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध का आज 31वां दिन है। अमेरिका और इज़रायल जहाँ लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं, वहीं ईरान भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले कर रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपदावा कर रहे हैं कि युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत जारी है। 

ईरानी तेल पर कब्जे के संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल पर कब्जे करने का संकेत दिया है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ईरान के तेल को लेकर भी बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने ईरान के तेल के प्रति रूचि जताते हुए कहा कि वह ईरान के तेल को अपने कब्ज़े में ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खर्ग द्वीप पर कब्जा कर सकती है। खर्ग द्वीप को ईरान की तेल आधारित अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है क्योंकि यहीं से देश का करीब 90 फीसदी तेल निर्यात किया जाता है।

मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फाइनेंशियल टाइम्स के साथ इंटरव्यू में ईरान युद्ध पर कई कमेंट किए हैं। खर्ग पर कब्जे के सवाल पर उन्होंने कहा, 'सच कहूं तो मेरी सबसे पसंदीदा चीज ईरान का तेल लेना होगी। हालांकि अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग मुझे कहते हैं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो। उनको चीजों की समझ नहीं है।'

ट्रंप ने कहा- हमारे पास कई विकल्प

ट्रंप ने कहा कि उनके लिए यह ऑप्शन खुला हुआ है। ट्रंप ने ईरान में अपने सैन्य अभियान पर कहा, 'यह हो सकता है हम खर्ग द्वीप को ईरान से अपने नियंत्रण में ले लें। हालांकि ये भी मुमकिन है कि हम ऐसा नहीं करें। दरअसल हमारे पास कई विकल्प हैं और हम कोई भी विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि खर्ग पर कंट्रोल के लिए हमें वहां कुछ समय तक रहना पड़ेगा।'

खर्ग आइलैंड पर हमला कर चुका है यूएस

बता दें कि ट्रंप की नज़र ईरान के खर्ग आइलैंड पर है, जहाँ ईरान के तेल के कई भंडार हैं। ट्रंप चाहते हैं कि खर्ग आइलैंड पर अमेरिका का कब्ज़ा हो। कुछ दिन पहले अमेरिका ने खर्ग आइलैंड पर हमला भी किया था। हालांकि इस दौरान तेल के भंडारों को निशाना नहीं बनाया गया। इसके अलावा ट्रंप ईरान के कंट्रोल वाली होर्मुज स्ट्रेट पर कब्ज़े की इच्छा भी जता चुके हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान मज़ाक-मज़ाक में उसे स्ट्रेट ऑफ ट्रंप बता दिया था।

ट्रंप ने होर्मुज पर सात देशों से मांगी मदद, सहयोगियों के इनकार के बाद क्या अकेला पड़ा यूएस?

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पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब सात देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने के आह्वान किया था। लेकिन अमेरिका के सहयोगी देशों ने या तो सतर्क रुख अपनाया है या सीधे तौर पर इनकार कर दिया है।

ट्रंप ने कई देशों से मांगा सहयोग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने करीब सात देशों से होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने के लिए वॉरशिप भेजने की मांग की। ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट के बारे में कहा, "मैं मांग कर रहा हूं कि ये देश आएं और अपने इलाके की रक्षा करें, क्योंकि यह उनका अपना इलाका है।" उन्होंने दावा किया कि शिपिंग चैनल ऐसी चीज नहीं है जिसकी अमेरिका को जरूरत है क्योंकि तेल तक उसकी अपनी पहुंच है। ट्रंप ने फ्लोरिडा से एयर फोर्स वन में वाशिंगटन वापस जाते समय पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही।

अमेरिका के करीबी सहयोगियों का इनकार

हालांकि, अब तक न तो ट्रंप किसी देश का नाम खुलकर बता पाए हैं और न ही किसी बड़े देश ने साफ तौर पर कहा है कि वह अमेरिका के साथ अपने युद्धपोत होर्मुज में भेजने जा रहा है। जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश जो अमेरिका के काफी करीबी सहयोगी हैं उन्होंने भी ट्रंप को झटका देते हुए होर्मुज में अपनी नौसेना भेजने से इनकार कर दिया है।

जापान ने कहा- नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं

जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद में कहा कि टोक्यो के पास हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अपने नौसैनिक जहाज भेजने की कोई योजना नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, "हमने अब तक कोई भी फैसला नहीं लिया है कि हम जहाज तैनात करेंगे या नहीं। हम यह देख रहे हैं कि जापान स्वतंत्र रूप से क्या कर सकता है और कानूनी ढांचे के भीतर क्या संभव है।"

ऑस्ट्रेलिया ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि ट्रंप के अनुरोध के बाद भी वह हॉर्मुज जनडमरूमध्य में नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया ने पुष्टि कर दी है कि वह इस क्षेत्र को नौसैनिक सहायता नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया के कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ABC को बताया है कि हालांकि यह जलमार्ग बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन कैनबरा को कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला है और फिलहाल उसकी वहां सेना तैनात करने की कोई योजना नहीं है।

हॉर्मुज जलमार्ग की अहमियत

दुनिया के तेल व्यापार के लिए हॉर्मुज जलमार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। अनुमान है कि दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इसके कारण कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मैं दखल न देता तो खतरे में थी शहबाज शरीफ की जान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूकवाने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। कांग्रेस के जॉइंट सेशन में भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया है। यह न्यूक्लियर वॉर हो सकती थी, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाते। अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मारे जाते।

10 महीनों में आठ युद्ध रोकने का दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए फिर भारत और पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए।

‘35 मिलियन लोग मारे गए होते’

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। उन्होंने देश की संसद में दावा किया कि शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर वह दखल नहीं देते तो पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 35 मिलियन लोग मारे गए होते।

बार-बार भारत-पाक जंग रूकवाने का दावा

ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को लेकर इस तरह का दावा किया है। हां, शहबाज शरीफ को लेकर ये दावा बिल्कुल नया है। हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान टकराव को रोका है। उन्होंने लगातार कहा है कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ़ उपायों का इस्तेमाल किया।

भारत ने हमेशा ट्रंप के दावों को नकारा

हालांकि, भारत ने हमेशा से डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकारा है। जबकि पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान युद्ध रूकवाने के लिए क्रेडिट दिया है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों बोर्ड ऑफ गाजा पीस के दौरान भी ट्रंप की तारिफ की थी और कहा था कि ट्रंप की वजह से 35 मिलियन लोगों की जान बच गई।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को लगा झटका, तिलमिलाए यूएस प्रेसिडेंट ने 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का किया ऐलान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को पलट दिया है। इसके बाद से ट्रंप भड़के हुए हैं। ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत दुनिया पर 10 परसेंट टैरिफ लगाया है।

मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश साइन किया। यह शुल्क मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा और 24 फरवरी से लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ट्रंप का फैसला

ट्रंप ने यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद उठाया है, जिसमें टॉप कोर्ट ने दुनिया भर में लगाए गए उनके टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए टैरिफ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर हस्ताक्षर कर दिया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा।' ट्रंप की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए वॉइट हाउस के एक्स हैंडल पर लिखा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया है।

भारत समेत सभी देशों पर असर

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत सहित सभी देशों पर यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा। यह पहले से वसूले जा रहे शुल्कों के ऊपर जोड़ा जाएगा। यानी मौजूदा टैरिफ के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त देना होगा।

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ईरान ने दी ट्रंप की हत्या की धमकी, सरकारी चैनल ने कहा- 'इस बार गोली नहीं चूकेगी'

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अब ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा गया कि ‘इस बार गोली चूकेगी नहीं।’

पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की चुनावी रैली का दिखाया इमेज

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक मैसेज के जरिए ट्रंप को धमकी दी है। इसके लिए टीवी चैनल ने जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई ट्रंप की चुनावी रैली की इमेज दिखाया, जहां ट्रंप पर गोलीबारी का प्रयास हुआ था।

अमेरिका विरोधी नारे और बैनर

यह वीडियो तेहरान में एक सरकारी आयोजन के दौरान दिखाया गया, जहां हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए थे। वहां अमेरिका विरोधी नारे और बैनर भी लगाए गए थे। ईरान की सरकारी टीवी ने फुटेज के साथ एक कैप्शन भी चलाया है, जिसमें कहा गया है कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकने वाली है। यानी अब अगर हमला होता है तो ट्रंप बच नहीं पाएंगे।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे वक्त धमकी दी गई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं की दोबारा तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक से सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

बवाल को लेकर ट्रंप और ईरान आमने-सामने

ईरान में महंगाई को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध दबाने के लिए सरकार ने सख्त एक्शन लेने की बात कही है। वहीं ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान सख्त एक्शन लेता है तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान में अत्याचार को हम चुपचाप नहीं देख सकेंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक कई दौर की हाईलेवल मीटिंग हुई है। जून 2025 में भी परमाणु हथियार बनाने के मसले पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।