हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ईरान ने दी ट्रंप की हत्या की धमकी, सरकारी चैनल ने कहा- 'इस बार गोली नहीं चूकेगी'

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अब ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा गया कि ‘इस बार गोली चूकेगी नहीं।’

पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की चुनावी रैली का दिखाया इमेज

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक मैसेज के जरिए ट्रंप को धमकी दी है। इसके लिए टीवी चैनल ने जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई ट्रंप की चुनावी रैली की इमेज दिखाया, जहां ट्रंप पर गोलीबारी का प्रयास हुआ था।

अमेरिका विरोधी नारे और बैनर

यह वीडियो तेहरान में एक सरकारी आयोजन के दौरान दिखाया गया, जहां हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए थे। वहां अमेरिका विरोधी नारे और बैनर भी लगाए गए थे। ईरान की सरकारी टीवी ने फुटेज के साथ एक कैप्शन भी चलाया है, जिसमें कहा गया है कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकने वाली है। यानी अब अगर हमला होता है तो ट्रंप बच नहीं पाएंगे।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे वक्त धमकी दी गई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं की दोबारा तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक से सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

बवाल को लेकर ट्रंप और ईरान आमने-सामने

ईरान में महंगाई को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध दबाने के लिए सरकार ने सख्त एक्शन लेने की बात कही है। वहीं ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान सख्त एक्शन लेता है तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान में अत्याचार को हम चुपचाप नहीं देख सकेंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक कई दौर की हाईलेवल मीटिंग हुई है। जून 2025 में भी परमाणु हथियार बनाने के मसले पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को हर हाल में क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस द्वीप पर कब्जे की धमकी दे चुके हैं। वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप खेल कर चुके हैं। निकोलस मादुरो को उठवाकर अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना कब्जा जमा चुका है। अब अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है।

रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।'

डेनमार्क के दावे पर उठाया सवाल

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता। हमने भी कई नावें भेजी थीं। लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं।'

ट्रंप को किस बात का सता रहा डर

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चीन या रूस वहां अपनी मजबूत मौजूदगी बना सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। मौजूदा सैन्य समझौते अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

टैरिफ अब मेरा 5वां पसंदीदा शब्द...’ ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कर दिया ये बड़ा ऐलान

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार ने सत्ता में दोबारा आने के बाद से टैरिफ को बड़े र्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। एक बार फिर ट्रंप ने टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है।नॉर्थ कैरोलिना में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पहले ‘टैरिफ’ उनका पसंदीदा शब्द था, लेकिन अब वह इसे अपना पांचवां पसंदीदा शब्द मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नए साल से लागू होने वाले बड़े टैक्स कट्स की भी घोषणा की।

अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरूआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कैरोलिना में अपने भाषण में कहा चार साल के संकट और गिरावट के दौरान पूरी दुनिया हमारी हंसी उड़ाती रही। लेकिन अब हम अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरुआत कर रहे हैं। इसे 'अमेरिका का गोल्डन एज' कहा जाता है। पिछले 10 महीनों में हमारी सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, महंगाई रुक गई है, मजदूरी बढ़ी है और कीमतें कम हुई हैं। हमारा राष्ट्र मजबूत है, अमेरिका वापस आ गया है।

पहले टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द था-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने करों पर अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मैं पहले कहता था कि टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द है, लेकिन इससे मुझे परेशानी हो गई। फेक न्यूज वालों ने मुझ पर सवाल उठा दिए-धर्म का क्या, भगवान का क्या, परिवार का क्या, पत्नी और बच्चों का क्या? इसलिए अब टैरिफ मेरा पांचवां पसंदीदा शब्द है।

ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा

ट्रंप ने अपने बयान में मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अब वह अपने शब्दों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं, ताकि अनावश्यक विवाद न खड़े हों।

टैक्स कट्स का ऐलान

अपने भाषण में ट्रंप ने नए साल से देश में लागू होने वाले टैक्स कट्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े टैक्स कट होंगे और इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। ट्रंप ने घोषणा की कि अब टिप्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को भी टैक्स से छूट दी जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, इससे मेहनत करने वाले लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और काम करने का उत्साह बढ़ेगा।

सीनियर सिटीजंस के लिए बड़ी राहत

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे अमेरिका के वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ट्रंप ने कहा कि नए साल से नॉर्थ कैरोलिना के लोग इन नीतियों के 'ड्रामेटिक नतीजे' देखेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियां आम अमेरिकियों की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।

अमेरिकी संसद में छाई मोदी-पुतिन की सेल्फी वाली फोटो, डेमोक्रेट सांसद बोलीं- ये तस्वीर हजार शब्दों के बराबर

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हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार में एक सेल्फी ली थी। दोनों नेताओं की सेल्फी वाली फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर ने अमेरिकी संसद के हॉल के अंदर भी नई बहस छेड़ दी है। अब इस फोटो को दिखाकर अमेरिकी कांग्रेस के अंदर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरा जा रहा हैष

मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो से ट्रंप को घेरा

अमेरिकी संसद में एक कांग्रेसी सांसद ने ही मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो लहराई है। अमेरिकी संसद में कांग्रेस वुमन सिडनी कामलेवगर डोव ने मोदी-पुतिन की सेल्फी वाला पोस्टर दिखाकर डोनाल्ड ट्रंप को कोसा। उन्होंने इस फोटो के जरिए अमेरिका की विदेश नीति की खूब आलोचना की है। सिडनी कामलेगर डोव ने इस तस्वीर को दिखाकर अमेरिका को चेताया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन भारत को मॉस्को के करीब धकेल रहा है। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि नई दिल्ली नहीं, अमेरिका ही भारत-यूएस पार्टनरशिप को कमजोर कर रहा है।

ट्रंप पर अमेरिका-भारत के रिश्ते को नुकसान पहुंचाने का आरोप

सांसद सिडनी कामलेगर-डोव ने कहा कि जिस तरह से पुतिन का स्वागत हुआ और पीएम मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी दिखी, वो दिखाता है कि ट्रंप ने किस तरह का नुकसान अमेरिका-भारत के रिश्ते को पहुंचा दिया है।

ट्रंप-पुतिन की सेल्फी ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सबूत-डोव

डोव ने अपने बयान में कहा, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की साथ में आई तस्वीरें हमें बहुत कुछ दिखा रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप को समझना चाहिए कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती हैं। ट्रंप-पुतिन की सेल्फी और गले मिलते हुए तस्वीरें ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सीधा सबूत हैं।

भारत पर टैरिफ गलत

विपक्षी पार्टी की नेता डोव ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत पर टैरिफ लगाना बेवजह लगता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ बिजनेस डील के लिए पुतिन के सलाहकारों के साथ मिलकर यूक्रेन को बेच रहे हैं।

सांसद प्रमिला जयापल ने भी जताई चिंता

इस दौरान सांसद प्रमिला जयापल ने व्यापार और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के कारण भारत-अमेरिका आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में लगे टैरिफ कारोबार और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सांसद जयापल की यह टिप्पणी ट्रंप के हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत से चावल के आयात पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए सस्ते चावल निर्यात कर रहा है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद पैकेज की घोषणा भी की।

ट्रंप ने बदले सुर, बोले-कुशल विदेशी लोगों का अमेरिका आना जरूरी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आव्रजन (इमिग्रेशन) पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, अब उनके सुर बदले-बदले से लग रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हाई-स्किल्ड विदेशी कामगार अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की टेक कंपनियों को विदेशी कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। उनके बिना अमेरिकी लोगों को कंप्यूटर चिप्स और दूसरी तकनीकी चीजें बनाना सीखना मुश्किल होगा।

अमेरिका में आयोजित यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में उनके "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" (MAGA) समर्थकों द्वारा कुछ कुशल प्रवासियों को देश में आने की अनुमति देने के उनके बयान की आलोचना की गई है। ट्रंप ने व्यावसायिक अधिकारियों के एक समूह से कहा कि अमेरिका को ऐसे प्रवासियों की जरूरत है जो उच्च तकनीक वाली फैक्टरियों में घरेलू कामगारों को प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करना उनके मूल राजनीतिक विश्वासों के साथ असंगत नहीं है।

विरोधियों को ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने कहा, मुझे अपने रूढ़िवादी दोस्त पसंद हैं। मुझे MAGA पसंद है, लेकिन यही MAGA है। ट्रंप ने यूएस-सऊदी निवेश फोरम को संबोधित करते हुए कहा, वे लोग हमारे लोगों को कंप्यूटर चिप बनाना सिखाएंगे, और कुछ ही समय में हमारे लोग बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। और वे लोग घर जा सकेंगे। इस टिप्पणी पर कमरे में तालियां बजीं।

ट्रंप ने जताई H-1B वीज़ा की जरूरत

पिछले हफ्ते, ट्रंप ने इसी मुद्दे पर फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम से बहस की। इंग्राहम ने ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार में सुझाव दिया कि आप देश में लाखों विदेशी कर्मचारियों की बाढ़ नहीं ला सकते, जिस पर राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा। ट्रंप ने कहा था कि H-1B वीज़ा की जरूरत इसलिए है क्योंकि अमेरिका में हर तरह की तकनीकी प्रतिभा मौजूद नहीं है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को छह साल तक विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।

H-1B वीजा को लेकर है विवाद

दक्षिणपंथी अमेरिकी लंबे समय से H-1B वीजा को अमेरिकी कामगारों के खिलाफ मानता रहा है। उनका आरोप है कि इस कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से सस्ता कामगार लाकर अमेरिकी इंजीनियरों और प्रोग्रामर्स को रिप्लेस कर देती हैं। कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में अमेरिकियों की छंटनी और फिर उन्हें H-1B कर्मचारियों को ट्रेन देने के लिए कहे जाने ने इस गुस्से को और बढ़ाया। ट्रंप ने अपने पिछले चुनाव अभियानों के दौरान कई बार H-1B पर सवाल उठाए थे। लेकिन सितंबर 2025 में उन्होंने एक नया आदेश साइन किया जिसमें अमेरिका के बाहर से दायर होने वाले हर नए H-1B आवेदन पर एक बार का 100,000 डॉलर शुल्क लगाने की घोषणा की गई।

पाकिस्तान भी कर रहा परमाणु परीक्षण, ट्रंप ने किया बड़ा खुलासा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो सक्रिय रूप से परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की यही प्रवृत्ति दर्शाती है कि अमेरिका के लिए भी अपने परमाणु परीक्षण को फिर से शुरू करना जरूरी हो गया है।

पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे-ट्रंप

रविवार को सीबीएस न्यूज़ को दिए 60 मिनट के साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। लेकिन वो इसके बारे में बात नहीं करते हैं, लेकिन हम एक खुला समाज हैं, हम इसपर बात करते हैं। और हमें इसपर बात करनी होगी नहीं तो आप लोग (मीडिया) इसपर रिपोर्ट करेंगे। इसीलिए वो टेस्ट करते हैं, बार बार टेस्ट करते हैं। निश्चित तौर पर उत्तर कोरिया टेस्ट कर रहा है। पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है।

हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए परमाणु हथियार-ट्रंप

सीबीएस चैनल के खास कार्यक्रम '60 मिनट्स' को दिए गये एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने विशाल परमाणु भंडार के बावजूद एकमात्र ऐसा देश नहीं हो सकता जो परीक्षण न करे। मैंने राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों के साथ इस पर चर्चा की है। हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं। रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत सारे होंगे।" उन्होंने आगे कहा कि "अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं होना चाहिए जो परीक्षणों से परहेज करे।

रूस ने अपने सबसे घातक मिसाइल का किया परीक्षण

यह बयान उस वक्त आया है जब ट्रंप ने पहले ही रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे तुरंत परमाणु परीक्षण शुरू करें। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 30 सालों के बाद अमेरिका को फिर से परमाणु हथियारों की रेस में उस वक्त उतारा है, जब रूस ने अपनी सबसे घातक मिसाइल का परीक्षण किया है। ये परमाणु ऊर्जा से चलने वाली मिसाइल है, जो 15 घंटे से ज्यादा वक्त तक उड़ान भर सकती है।

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ईरान ने दी ट्रंप की हत्या की धमकी, सरकारी चैनल ने कहा- 'इस बार गोली नहीं चूकेगी'

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अब ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा गया कि ‘इस बार गोली चूकेगी नहीं।’

पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की चुनावी रैली का दिखाया इमेज

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक मैसेज के जरिए ट्रंप को धमकी दी है। इसके लिए टीवी चैनल ने जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई ट्रंप की चुनावी रैली की इमेज दिखाया, जहां ट्रंप पर गोलीबारी का प्रयास हुआ था।

अमेरिका विरोधी नारे और बैनर

यह वीडियो तेहरान में एक सरकारी आयोजन के दौरान दिखाया गया, जहां हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए थे। वहां अमेरिका विरोधी नारे और बैनर भी लगाए गए थे। ईरान की सरकारी टीवी ने फुटेज के साथ एक कैप्शन भी चलाया है, जिसमें कहा गया है कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकने वाली है। यानी अब अगर हमला होता है तो ट्रंप बच नहीं पाएंगे।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे वक्त धमकी दी गई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं की दोबारा तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक से सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

बवाल को लेकर ट्रंप और ईरान आमने-सामने

ईरान में महंगाई को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध दबाने के लिए सरकार ने सख्त एक्शन लेने की बात कही है। वहीं ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान सख्त एक्शन लेता है तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान में अत्याचार को हम चुपचाप नहीं देख सकेंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक कई दौर की हाईलेवल मीटिंग हुई है। जून 2025 में भी परमाणु हथियार बनाने के मसले पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को हर हाल में क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस द्वीप पर कब्जे की धमकी दे चुके हैं। वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप खेल कर चुके हैं। निकोलस मादुरो को उठवाकर अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना कब्जा जमा चुका है। अब अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है।

रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।'

डेनमार्क के दावे पर उठाया सवाल

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता। हमने भी कई नावें भेजी थीं। लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं।'

ट्रंप को किस बात का सता रहा डर

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चीन या रूस वहां अपनी मजबूत मौजूदगी बना सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। मौजूदा सैन्य समझौते अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

टैरिफ अब मेरा 5वां पसंदीदा शब्द...’ ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कर दिया ये बड़ा ऐलान

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार ने सत्ता में दोबारा आने के बाद से टैरिफ को बड़े र्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। एक बार फिर ट्रंप ने टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है।नॉर्थ कैरोलिना में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पहले ‘टैरिफ’ उनका पसंदीदा शब्द था, लेकिन अब वह इसे अपना पांचवां पसंदीदा शब्द मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नए साल से लागू होने वाले बड़े टैक्स कट्स की भी घोषणा की।

अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरूआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कैरोलिना में अपने भाषण में कहा चार साल के संकट और गिरावट के दौरान पूरी दुनिया हमारी हंसी उड़ाती रही। लेकिन अब हम अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरुआत कर रहे हैं। इसे 'अमेरिका का गोल्डन एज' कहा जाता है। पिछले 10 महीनों में हमारी सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, महंगाई रुक गई है, मजदूरी बढ़ी है और कीमतें कम हुई हैं। हमारा राष्ट्र मजबूत है, अमेरिका वापस आ गया है।

पहले टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द था-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने करों पर अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मैं पहले कहता था कि टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द है, लेकिन इससे मुझे परेशानी हो गई। फेक न्यूज वालों ने मुझ पर सवाल उठा दिए-धर्म का क्या, भगवान का क्या, परिवार का क्या, पत्नी और बच्चों का क्या? इसलिए अब टैरिफ मेरा पांचवां पसंदीदा शब्द है।

ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा

ट्रंप ने अपने बयान में मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अब वह अपने शब्दों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं, ताकि अनावश्यक विवाद न खड़े हों।

टैक्स कट्स का ऐलान

अपने भाषण में ट्रंप ने नए साल से देश में लागू होने वाले टैक्स कट्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े टैक्स कट होंगे और इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। ट्रंप ने घोषणा की कि अब टिप्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को भी टैक्स से छूट दी जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, इससे मेहनत करने वाले लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और काम करने का उत्साह बढ़ेगा।

सीनियर सिटीजंस के लिए बड़ी राहत

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे अमेरिका के वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ट्रंप ने कहा कि नए साल से नॉर्थ कैरोलिना के लोग इन नीतियों के 'ड्रामेटिक नतीजे' देखेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियां आम अमेरिकियों की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।

अमेरिकी संसद में छाई मोदी-पुतिन की सेल्फी वाली फोटो, डेमोक्रेट सांसद बोलीं- ये तस्वीर हजार शब्दों के बराबर

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हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार में एक सेल्फी ली थी। दोनों नेताओं की सेल्फी वाली फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर ने अमेरिकी संसद के हॉल के अंदर भी नई बहस छेड़ दी है। अब इस फोटो को दिखाकर अमेरिकी कांग्रेस के अंदर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरा जा रहा हैष

मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो से ट्रंप को घेरा

अमेरिकी संसद में एक कांग्रेसी सांसद ने ही मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो लहराई है। अमेरिकी संसद में कांग्रेस वुमन सिडनी कामलेवगर डोव ने मोदी-पुतिन की सेल्फी वाला पोस्टर दिखाकर डोनाल्ड ट्रंप को कोसा। उन्होंने इस फोटो के जरिए अमेरिका की विदेश नीति की खूब आलोचना की है। सिडनी कामलेगर डोव ने इस तस्वीर को दिखाकर अमेरिका को चेताया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन भारत को मॉस्को के करीब धकेल रहा है। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि नई दिल्ली नहीं, अमेरिका ही भारत-यूएस पार्टनरशिप को कमजोर कर रहा है।

ट्रंप पर अमेरिका-भारत के रिश्ते को नुकसान पहुंचाने का आरोप

सांसद सिडनी कामलेगर-डोव ने कहा कि जिस तरह से पुतिन का स्वागत हुआ और पीएम मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी दिखी, वो दिखाता है कि ट्रंप ने किस तरह का नुकसान अमेरिका-भारत के रिश्ते को पहुंचा दिया है।

ट्रंप-पुतिन की सेल्फी ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सबूत-डोव

डोव ने अपने बयान में कहा, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की साथ में आई तस्वीरें हमें बहुत कुछ दिखा रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप को समझना चाहिए कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती हैं। ट्रंप-पुतिन की सेल्फी और गले मिलते हुए तस्वीरें ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सीधा सबूत हैं।

भारत पर टैरिफ गलत

विपक्षी पार्टी की नेता डोव ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत पर टैरिफ लगाना बेवजह लगता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ बिजनेस डील के लिए पुतिन के सलाहकारों के साथ मिलकर यूक्रेन को बेच रहे हैं।

सांसद प्रमिला जयापल ने भी जताई चिंता

इस दौरान सांसद प्रमिला जयापल ने व्यापार और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के कारण भारत-अमेरिका आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में लगे टैरिफ कारोबार और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सांसद जयापल की यह टिप्पणी ट्रंप के हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत से चावल के आयात पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए सस्ते चावल निर्यात कर रहा है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद पैकेज की घोषणा भी की।

ट्रंप ने बदले सुर, बोले-कुशल विदेशी लोगों का अमेरिका आना जरूरी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आव्रजन (इमिग्रेशन) पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, अब उनके सुर बदले-बदले से लग रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हाई-स्किल्ड विदेशी कामगार अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की टेक कंपनियों को विदेशी कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। उनके बिना अमेरिकी लोगों को कंप्यूटर चिप्स और दूसरी तकनीकी चीजें बनाना सीखना मुश्किल होगा।

अमेरिका में आयोजित यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में उनके "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" (MAGA) समर्थकों द्वारा कुछ कुशल प्रवासियों को देश में आने की अनुमति देने के उनके बयान की आलोचना की गई है। ट्रंप ने व्यावसायिक अधिकारियों के एक समूह से कहा कि अमेरिका को ऐसे प्रवासियों की जरूरत है जो उच्च तकनीक वाली फैक्टरियों में घरेलू कामगारों को प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करना उनके मूल राजनीतिक विश्वासों के साथ असंगत नहीं है।

विरोधियों को ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने कहा, मुझे अपने रूढ़िवादी दोस्त पसंद हैं। मुझे MAGA पसंद है, लेकिन यही MAGA है। ट्रंप ने यूएस-सऊदी निवेश फोरम को संबोधित करते हुए कहा, वे लोग हमारे लोगों को कंप्यूटर चिप बनाना सिखाएंगे, और कुछ ही समय में हमारे लोग बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। और वे लोग घर जा सकेंगे। इस टिप्पणी पर कमरे में तालियां बजीं।

ट्रंप ने जताई H-1B वीज़ा की जरूरत

पिछले हफ्ते, ट्रंप ने इसी मुद्दे पर फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम से बहस की। इंग्राहम ने ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार में सुझाव दिया कि आप देश में लाखों विदेशी कर्मचारियों की बाढ़ नहीं ला सकते, जिस पर राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा। ट्रंप ने कहा था कि H-1B वीज़ा की जरूरत इसलिए है क्योंकि अमेरिका में हर तरह की तकनीकी प्रतिभा मौजूद नहीं है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को छह साल तक विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।

H-1B वीजा को लेकर है विवाद

दक्षिणपंथी अमेरिकी लंबे समय से H-1B वीजा को अमेरिकी कामगारों के खिलाफ मानता रहा है। उनका आरोप है कि इस कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से सस्ता कामगार लाकर अमेरिकी इंजीनियरों और प्रोग्रामर्स को रिप्लेस कर देती हैं। कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में अमेरिकियों की छंटनी और फिर उन्हें H-1B कर्मचारियों को ट्रेन देने के लिए कहे जाने ने इस गुस्से को और बढ़ाया। ट्रंप ने अपने पिछले चुनाव अभियानों के दौरान कई बार H-1B पर सवाल उठाए थे। लेकिन सितंबर 2025 में उन्होंने एक नया आदेश साइन किया जिसमें अमेरिका के बाहर से दायर होने वाले हर नए H-1B आवेदन पर एक बार का 100,000 डॉलर शुल्क लगाने की घोषणा की गई।

पाकिस्तान भी कर रहा परमाणु परीक्षण, ट्रंप ने किया बड़ा खुलासा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो सक्रिय रूप से परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की यही प्रवृत्ति दर्शाती है कि अमेरिका के लिए भी अपने परमाणु परीक्षण को फिर से शुरू करना जरूरी हो गया है।

पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे-ट्रंप

रविवार को सीबीएस न्यूज़ को दिए 60 मिनट के साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। लेकिन वो इसके बारे में बात नहीं करते हैं, लेकिन हम एक खुला समाज हैं, हम इसपर बात करते हैं। और हमें इसपर बात करनी होगी नहीं तो आप लोग (मीडिया) इसपर रिपोर्ट करेंगे। इसीलिए वो टेस्ट करते हैं, बार बार टेस्ट करते हैं। निश्चित तौर पर उत्तर कोरिया टेस्ट कर रहा है। पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है।

हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए परमाणु हथियार-ट्रंप

सीबीएस चैनल के खास कार्यक्रम '60 मिनट्स' को दिए गये एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने विशाल परमाणु भंडार के बावजूद एकमात्र ऐसा देश नहीं हो सकता जो परीक्षण न करे। मैंने राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों के साथ इस पर चर्चा की है। हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं। रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत सारे होंगे।" उन्होंने आगे कहा कि "अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं होना चाहिए जो परीक्षणों से परहेज करे।

रूस ने अपने सबसे घातक मिसाइल का किया परीक्षण

यह बयान उस वक्त आया है जब ट्रंप ने पहले ही रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे तुरंत परमाणु परीक्षण शुरू करें। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 30 सालों के बाद अमेरिका को फिर से परमाणु हथियारों की रेस में उस वक्त उतारा है, जब रूस ने अपनी सबसे घातक मिसाइल का परीक्षण किया है। ये परमाणु ऊर्जा से चलने वाली मिसाइल है, जो 15 घंटे से ज्यादा वक्त तक उड़ान भर सकती है।