भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान पर बोले-अरुण वर्मा पूर्व सपा विधायक*
सुल्तानपुर,समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज हम लोगों ने प्रेसवार्ता की है,30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक दिल्ली में हुई थी। उसमें निर्णय लिया गया था कि पूरे देश में 2 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च के तहत कार्यक्रम किया जाएगा। उसी के तहत जनपद सुल्तानपुर में जिला अध्यक्ष जी के नेतृत्व में प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ। श्री वर्मा ने आज एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि हम लोगों का कार्यक्रम चल रहा है। जयसिंहपुर,सुल्तानपुर,कादीपुर और इसौली विधानसभा में हम लोगों ने गोष्ठी करके चुनाव आयोग के खिलाफ कार्यक्रम किया। कल हम लोग समाजवादी पार्टी कार्यालय सुपरमार्केट से जिले की पाँचों विधानसभा के नेता पैदल मार्च करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए DM कार्यालय को ज्ञापन देंगे। SIR और वोट कटने के आरोप पर*

पूर्व विधायक बोले SIR को लेकर और ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। UP में जब SIR चल रहा था, उस दौरान समाजवादी पार्टी ने कई केस पकड़े। सबसे बड़ा उदाहरण सुल्तानपुर की जयसिंहपुर विधानसभा से है। ककरावरपुर गांव में एक बूथ पर नंदलाल निषाद जो अंगूठा लगाता है, पढ़ा-लिखा नहीं है, उस व्यक्ति के नाम से साइन करके 30 फॉर्म BLO को दिया गया। वो फॉर्म भाजपा के मंडल अध्यक्ष ने दिया था और वो तीसों फॉर्म सिर्फ एक मुस्लिम समाज के थे। नंदलाल निषाद को लखनऊ माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने बुलाया, उन्होंने प्रेस के सामने कहा, लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई की? उसी तरह लखनऊ में एक व्यक्ति दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म पकड़ा गया, जबकि एक व्यक्ति 5-6 से ज्यादा फॉर्म नहीं दे सकता। चुनाव अधिकारियों ने माना भी, लेकिन कार्रवाई क्या हुई? हम लगातार इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। वोट बचाओ अभियान पर

पूर्व विधायक अरुण वर्मा बोले कि प्रारूप शाखा फॉर्म पर अमेंडमेंट किया गया है, इससे SIR में काटे गए नाम आपस में जुड़ पाएंगे। समाजवादी पार्टी लगातार लड़ रही है कि कैसे हम अपना वोट बचाएं। वोट बचेगा तो देश बचेगा, वोट बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा। हम गांव-गांव जाएंगे और एक भी वोट कटने नहीं देंगे। सेवा पखवाड़ा और 2027 पर

श्री वर्मा बोले कि सेवा पखवाड़ा चल रहा है, देश के प्रधानमंत्री हैं। कौन सी सेवा? आप सोचिए, महंगाई, आरक्षण लूटा जा रहा है, 69 हजार भर्ती में घोटाला हुआ, हर व्यक्ति परेशान है और समय और तारीख का इंतजार कर रहा है। जिस तरह 2024 के चुनाव में मिलकर भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से रोका था, उसमें सबसे बड़ा योगदान माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी और UP की जनता का था, उसी तरह 2027 के चुनाव में भी भाजपा को बुरी तरह हराने का काम समाजवादी पार्टी करेगी।
2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
इंडिया गठबंधन का मार्च जारी, कई बड़े नेता हिरासत में, आकाशवाणी के सामने राहुल-प्रियंका का धरना

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भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में विरोध मार्च निकाला। तिरंगा झंडा और 'लोकतंत्र बचाओ' लिखे बैनर लिए, इंडी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक अपना विरोध मार्च शुरू किया। चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ते हुए विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भाजपा और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए।

राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए

विपक्षी दलों के 300 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया। प्रदर्शन के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडी गठबंधन के कई अन्य नेताओं को भी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने से रोके जाने के बाद कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद छोड़ दिया गया।

बैरिकेड पर चढ़ राहुल गांधी ने लहराया तिरंगा

राहुल गांधी जब चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें पुलिस की कई बैरिकेड्स ने रोक दिया। इसके बाद वे एक बैरिकेड पर चढ़ गए और एक राष्ट्रीय ध्वज लहराया, वहां जमा हुए इंडी गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर उनका समर्थन किया।

राहुल गांधी ने पुलिस पर लगाया धमकाने का आरोप

इस बीच राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि यह नेता करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयुक्त उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें रोक रही है और धमकी दे रही है। हम सिर्फ उनका मुकाबला नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें खत्म कर देंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश के साथ जो किया गया है, उसे देशद्रोह कहा जाता है और इसके लिए कोई बच नहीं पाएगा।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

ভারতকে ৪-০ হারিয়েও ব্রাজিলকে ধুয়ে দিল নিজের দেশের মিডিয়া! ভিনিদের ফুটবলকে বলা হল 'ঘুমপাড়ানি'*
*খেলা*

*কলকাতা ডেস্ক:* র‍্যাঙ্কিংয়ে ব্যবধান ১৩২ ধাপ। একদিকে বিশ্বের ৬ নম্বর ব্রাজিল, অন্যদিকে ১৩৮ নম্বরে থাকা ভারত। যুবভারতীতে ৪-০ ফল ভারতের জন্য লড়াই করেই হার। কিন্তু ব্রাজিলের জন্য? জিতেও চরম অস্বস্তিতে সেলেকাওরা।

৪ গোল দেওয়ার পরও দেশের মিডিয়ার কাছে তুলোধোনা হচ্ছে কার্লো আনচেলোত্তির দল। ব্রাজিলের সংবাদমাধ্যমের চোখে ভারতের বিরুদ্ধে এই জয় মোটেও জয় নয়, বরং ঘুমিয়ে ঘুমিয়ে খেলা ৯০ মিনিটের এক বিরক্তিকর প্রদর্শনী।

*ভিনিসিয়াসকে নিয়ে তীব্র সমালোচনা*

ব্রাজিলের জনপ্রিয় পোর্টাল UOL সরাসরি লিখেছে, "আবারও হতাশ করল ব্রাজিল। ১৩৮ নম্বর দলের বিরুদ্ধে ৪-০ জয়টা নিতান্তই নিয়মরক্ষা।" তাদের বিশ্লেষণে, বাঁ-দিকে প্রচুর জায়গা পেয়েও সুপারস্টার ভিনিসিয়াস জুনিয়র ছিলেন সম্পূর্ণ ব্যর্থ। ভুল পাস, ছন্নছাড়া ড্রিবল ছাড়া কিছুই দিতে পারেননি।

আরেক সংবাদমাধ্যম Terra-র খোঁচা, "ব্রাজিলের ইতিহাসে অন্যতম দুর্বল প্রতিপক্ষকে পেয়েও মন ভরাতে পারল না দল।" দেশের প্রথম সারির কাগজ O Globo তো এই ম্যাচকে 'অনুশীলন ম্যাচ' বলেই উড়িয়ে দিয়েছে। তাদের মতে, বল দখলে থাকলেও গোল করার কোনও তাগিদই ছিল না।

*ক্ষোভ উগরে দিলেন ফেলিপে মেলো*

প্রাক্তন তারকা ফেলিপে মেলো Sportv-তে বিস্ফোরক। তিনি বলেন, "ব্রাজিল শুধু পিছিয়ে যাচ্ছে। বিশ্বকাপের শেষ ষোলোয় নরওয়ের কাছে হারের পর অস্ট্রেলিয়ার সঙ্গে দুটো প্রীতি ম্যাচে (১-১ ও ৪-২) বাজে খেলেছে। কলকাতায় ৪ গোল দিলেও খেলা ছিল কুৎসিত।"

কলকাতার গরমকে অজুহাত মানতে নারাজ মেলো। তাঁর সাফ কথা, "খারাপ খেলতে পারো, কিন্তু লড়াইয়ের মানসিকতা কোথায়? বদলি হিসেবে নামা মার্টিনেলি এবং জোড়া গোল করা সামুয়েল লিনো কিছুটা চেষ্টা করেছে। লিনো আরও সময় পেলে আরও গোল পেত।"

*CBF-কেও একহাত নিল ব্রাজিলের মিডিয়া*

শুধু ফুটবলার নয়, কাঠগড়ায় ব্রাজিল ফুটবল ফেডারেশন (CBF)-ও। ফুটবল পোর্টাল Trivela প্রশ্ন তুলেছে, ফাঁকা গ্যালারিতে এই ম্যাচ খেলার মানে কী? তাদের সাংবাদিক কার্লোস ভিনিসিয়াসের লেখায়, "টিকিটের দাম আকাশছোঁয়া। স্টেডিয়াম ভর্তি হয়নি। ভারতের মতো দেশে খেলতে এলে টিকিট সাধারণ মানুষের নাগালে রাখা উচিত ছিল।" তাদের আরও অভিযোগ, ব্রাজিলের বহু রাজ্যে বছরের পর বছর জাতীয় দলের খেলা হয় না। দেশের সমর্থকদের বঞ্চিত করে শুধু টাকার জন্য এশিয়া সফর করছে CBF। বিশ্বকাপের আগে সভাপতি বলেছিলেন দল সাধারণ মানুষের কাছে যাবে, কিন্তু বাস্তবে তা ফাঁকা প্রতিশ্রুতি।

সব মিলিয়ে যুবভারতীতে স্কোরবোর্ডে ৪-০ জিতলেও, পারফরম্যান্সের বিচারে দেশে ফিরে প্রবল চাপে আনচেলোত্তির ব্রাজিল।
ছবি:সঞ্জয় হাজরা।

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भारत ने एशियन गेम्स में दिन का तीसरा गोल्ड जीता, लवलीना के बाद परवीन हुड्‌डा का गोल्डन पंच

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भारत ने एशियन गेम्स में शुक्रवार को तीसरा गोल्ड जीत लिया है। एशियाई खेलों में आज चौदहवें दिन आर्चरी के बाद बॉक्सिंग में ये दिन का दूसरा स्वर्ण पदक है। स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने जन्मदिन पर गोल्ड दिलाया। उसके बाद परवीन हुड्‌डा महिलाओं की 65 किग्रा में एशियन चैंपियन बनी। एक गोल्ड मेडल तीरंदाजी में आया।

परवीन हुड्डा का पहला एशियन गेम्स मेडल

परवीन हुड्डा ने महिलाओं की 65 किलो वेट कैटेगरी के फाइनल में चाइनीज ताइपे की मुक्केबाज चिन नीन-चिन को कड़े मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, ये भारत को मिलने वाला कुल 13वां स्वर्ण पदक था। हरियाणा के रोहतक की 26 वर्षीय इस युवा बॉक्सर का यह पहला एशियन गेम्स मेडल है।

बॉक्सर लवलीना ने एशियन गेम्स में पहली बार जीता गोल्ड

इससे पहले भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की बाओ जियाओजी को 5-0 के एकतरफा फैसले से शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। जन्मदिन के खास मौके पर उतरी लवलीना ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन संयम का परिचय दिया और बाओ को आगे बढ़ने का मौका देकर बेहद प्रभावी काउंटर-पंचों के जरिए अंक बटोरे। शुरुआती दो राउंड जीतने के बाद उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में भी अपनी शानदार पकड़ बनाए रखी और इस तरह एक आसान व आधिपत्य भरी जीत दर्ज करते हुए देश के लिए यह स्वर्ण पदक पक्का किया।

भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर

एशियन गेम्स में भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर है। उसके पास 13 गोल्ड, 25 रजत और 35 कांस्य जीते हैं। भारत के कुल 73 मेडल हैं। वहीं, मुक्केबाजी में 5 मेडल आ चुके हैं। इनमें 3 ब्रॉन्ज भी शामिल हैं।

যুবভারতীতে ইতিহাস! প্রথমবার ভারতের মুখোমুখি পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল, রায়ানকে নিয়ে সতর্ক আন্সেলোত্তি
*খেলা*


*নিজস্ব প্রতিনিধি,কলকাতা:* শনিবার সন্ধ্যায় কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে শুধু একটি ফুটবল ম্যাচ নয়, লেখা হতে চলেছে ভারতীয় ফুটবলের নতুন ইতিহাস। কলকাতার বুকে প্রথমবার মুখোমুখি ভারত এবং পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল।

ম্যাচ ঘিরে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে সাম্বার উন্মাদনা তুঙ্গে। হলুদ-সবুজ জার্সিতে সেজে উঠেছে কলকাতা। ভিনিসিয়াসদের এক ঝলক দেখার অপেক্ষায় প্রহর গুনছে ফুটবলপাগল শহর। কিন্তু এই উৎসবের আবহের মধ্যেও ভারতকে এক মুহূর্তের জন্যও হালকা ভাবে নিচ্ছে না ব্রাজিল শিবির।
*আন্সেলোত্তির মুখে রায়ান-স্তুতি, গুরপ্রীতকে কুর্নিশ মার্কুইনহোসের*

শুক্রবার বাইপাসের ধারে একটি পাঁচতারা হোটেলে সাংবাদিক বৈঠকে হাজির হয় ব্রাজিল দল। মঞ্চে উঠে পর্তুগিজ বা ইংরেজির বদলে ‘নমস্তে’ বলে বক্তব্য শুরু করেন ব্রাজিল কোচ কার্লো আন্সেলোত্তি।

তিনি বলেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের সঙ্গে এখানে আসতে পারা আমাদের কাছে সত্যিই গর্বের। আমরা জানি, এখানকার মানুষ ফুটবল আর জাতীয় দলকে কতটা ভালোবাসেন।”

ভারতকে নিয়ে আন্সেলোত্তি স্পষ্ট বার্তা দেন, “আমরা ভারতের শেষ ম্যাচটি দেখেছি। পানামা ভালো দল। ভারতের একজন স্ট্রাইকার রায়ান উইলিয়ামস রয়েছে, যে আমাদের জন্য বিপজ্জনক হতে পারে। তাই ওকে নিয়ে আমরা ভাবছি।” তিনি আরও যোগ করেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের কাছে কোনও ম্যাচই শুধু প্রীতি ম্যাচ নয়। প্রতিপক্ষ যখন ভারত, তখন তাদের যথাযথ সম্মান দিয়েই আমরা মাঠে নামব।”

অন্যদিকে, ভারতীয় ফুটবলারদের লড়াইকে কুর্নিশ জানিয়েছেন ব্রাজিল অধিনায়ক মার্কুইনহোস। তিনি বলেন, “ভারতীয় দলে এমন কয়েকজন ফুটবলার আছেন, যাঁদের সম্মান করতেই হবে। গোলকিপার রয়েছেন, যিনি জাতীয় দলের হয়ে প্রায় ৯০টি ম্যাচ খেলতে চলেছেন। এটা বড় অর্জন।”

কলকাতার আকাশে এখন সাম্বার সুর। তবে বিশ্ব ফুটবলের অন্যতম সেরা দলের কোচ ও অধিনায়কের মুখে ভারতের নাম ও ভারতীয় ফুটবলারের প্রশংসা, যুবভারতীর মহারণের আগে সেটাও কম বড় প্রাপ্তি নয়। ছবি: সঞ্জয় হাজরা।

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ISL সম্প্রচারে বড় বদল, YouTube-এর পাশাপাশি Sony Sports-এও দেখা যাবে ম্যাচ
*খেলা*
*স্পোর্টস ডেস্ক, কলকাতা:* ১০ অক্টোবর, মহালয়ার দিন থেকে শুরু হচ্ছে ISL। গতবার সিঙ্গেল লিগ হলেও এবার হোম-অ্যাওয়ে ফর্ম্যাটে দুই লিগে হবে টুর্নামেন্ট। চলবে ২০২৭ সালের মে মাস পর্যন্ত। অংশ নিচ্ছে ১৩টি দল - ইস্টবেঙ্গল, মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট, বেঙ্গালুরু এফসি, কেরালা ব্লাস্টার্স, এফসি গোয়া, মুম্বই সিটি এফসি, নর্থ ইস্ট ইউনাইটেড, ওডিশা এফসি, পাঞ্জাব এফসি, ইন্টার কাশী, চেন্নাইয়িন এফসি, চার্চিল ব্রাদার্স ও স্পোর্টস ক্লাব দিল্লি। জামশেদপুর এফসি নাম তুলে নেওয়ায় তাদের লাইসেন্সে খেলবে চার্চিল। ডায়মন্ড হারবার এফসি যোগ্যতা অর্জন করেও পার্টিসিপেশন ফি জমা দিতে পারেনি। প্লে-অফ মিলিয়ে মোট ১৬৩টি ম্যাচ হবে।

এবার ISL-এর আয়োজক ক্লাবগুলি নিজেরাই। ফলে সম্প্রচার নিয়ে ছিল জল্পনা। Khel Now-এ প্রকাশিত রিপোর্ট অনুযায়ী, এবার ISL দেখা যাবে দুটি প্ল্যাটফর্মে। YouTube-এ স্ট্রিমিংয়ের পাশাপাশি স্যাটেলাইট টিভি রাইটস পেতে চলেছে Sony Sports Network।  রিপোর্টে দাবি, Sony-কে রাইটস দেওয়ার বিষয়ে সব পক্ষ রাজি, শুধু চূড়ান্ত কাগজপত্র বাকি। প্রথমে Zee-র নাম শোনা গেলেও তা বাতিল হয়েছে।

অতীতে Star Sports এবং Hotstar-এ দেখানো হতো ISL, গত বছর দেখানো হয়েছিল FanCode-এ। রিপোর্ট বলছে, বেশিরভাগ ক্লাব বেশি দর্শকের কাছে পৌঁছতে YouTube-এর পক্ষে, আবার কিছু ক্লাব স্পনসরশিপের কারণে প্রথাগত টিভি সম্প্রচার চাইছে। তাই দুই পথেই হাঁটার সিদ্ধান্ত।

ভারতীয় ফুটবলে Sony Sports দীর্ঘদিন ধরেই রয়েছে, ইউরোপের একাধিক লিগ ও সম্প্রতি ডুরান্ড কাপও তারাই সম্প্রচার করেছে। অন্যদিকে YouTube-ও ইতিমধ্যেই প্রাইম ভলিবল লিগ ও তামিলনাড়ু প্রিমিয়ার লিগ দেখাচ্ছে।

ছবি: সংগৃহীত।

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रूसी सेना में भर्ती को लेकर भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी, भारतीयों को दी सख्त चेतावनी

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रूस में नौकरी के नाम पर भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद जोखिम भरा है। मंत्रालय ने भारतीयों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऑफर के झांसे में न आएं।

पिछले दो सालों में कई मौकों पर दी सतर्कता की सलाह

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान सरकार ने कई मौकों पर रूस की सेना में शामिल होने से जुड़े जोखिम और खतरों को रेखांकित किया है। भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के अवसर तलाशते समय सावधानी बरतने और असत्यापित व्यक्तियों की ओर से दिए गए नौकरी के ऑफर के झांसे में नहीं आने की सलाह दी गई है।

मंत्रीलय ने कहा- कुछ भारतीय ऐसे ऑफर तलाश रहे

मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिक ऐसे ऑफर खुद तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सेना में शामिल होने के बदले अच्छा पैसा मिलेगा और फिर भारत सरकार के दखल से वे वहां से निकल जाएंगे। सरकार ने इस सोच को खतरनाक बताते हुए भारतीय नागरिकों से ऐसे कदम से दूर रहने को कहा है।

भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने की कोशिश

एडवाइजरी में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट हासिल करने और उसके बाद रूसी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के लालच में बिना भारतीय अधिकारियों से सलाह किए ऐसे कदम उठा चुके हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को इस फैसले की गंभीरता समझने की सलाह दी है।

नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले सतर्कता बरतने की सलाह

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि गैर-सार्वजनिक संस्थाएं, जिनमें स्वैच्छिक समूह भी शामिल हैं, विदेशी नागरिकों को रूसी सेना में सेवा देने के लिए भर्ती कर रही हैं। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऐसे एजेंटों से नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे एजेंट जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं, उनके ऑफर को लेकर विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा गया है।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

चुनाव आयोग के खिलाफ अभियान पर बोले-अरुण वर्मा पूर्व सपा विधायक*
सुल्तानपुर,समाजवादी पार्टी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर आज हम लोगों ने प्रेसवार्ता की है,30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक दिल्ली में हुई थी। उसमें निर्णय लिया गया था कि पूरे देश में 2 अक्टूबर से लेकर 8 अक्टूबर तक लोकतंत्र बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ मार्च के तहत कार्यक्रम किया जाएगा। उसी के तहत जनपद सुल्तानपुर में जिला अध्यक्ष जी के नेतृत्व में प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ। श्री वर्मा ने आज एक प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि हम लोगों का कार्यक्रम चल रहा है। जयसिंहपुर,सुल्तानपुर,कादीपुर और इसौली विधानसभा में हम लोगों ने गोष्ठी करके चुनाव आयोग के खिलाफ कार्यक्रम किया। कल हम लोग समाजवादी पार्टी कार्यालय सुपरमार्केट से जिले की पाँचों विधानसभा के नेता पैदल मार्च करके मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए DM कार्यालय को ज्ञापन देंगे। SIR और वोट कटने के आरोप पर*

पूर्व विधायक बोले SIR को लेकर और ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है। UP में जब SIR चल रहा था, उस दौरान समाजवादी पार्टी ने कई केस पकड़े। सबसे बड़ा उदाहरण सुल्तानपुर की जयसिंहपुर विधानसभा से है। ककरावरपुर गांव में एक बूथ पर नंदलाल निषाद जो अंगूठा लगाता है, पढ़ा-लिखा नहीं है, उस व्यक्ति के नाम से साइन करके 30 फॉर्म BLO को दिया गया। वो फॉर्म भाजपा के मंडल अध्यक्ष ने दिया था और वो तीसों फॉर्म सिर्फ एक मुस्लिम समाज के थे। नंदलाल निषाद को लखनऊ माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष जी ने बुलाया, उन्होंने प्रेस के सामने कहा, लेकिन आज तक चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई की? उसी तरह लखनऊ में एक व्यक्ति दशरथ के नाम पर 100 फॉर्म पकड़ा गया, जबकि एक व्यक्ति 5-6 से ज्यादा फॉर्म नहीं दे सकता। चुनाव अधिकारियों ने माना भी, लेकिन कार्रवाई क्या हुई? हम लगातार इसके खिलाफ लड़ रहे हैं। वोट बचाओ अभियान पर

पूर्व विधायक अरुण वर्मा बोले कि प्रारूप शाखा फॉर्म पर अमेंडमेंट किया गया है, इससे SIR में काटे गए नाम आपस में जुड़ पाएंगे। समाजवादी पार्टी लगातार लड़ रही है कि कैसे हम अपना वोट बचाएं। वोट बचेगा तो देश बचेगा, वोट बचेगा तो लोकतंत्र बचेगा। हम गांव-गांव जाएंगे और एक भी वोट कटने नहीं देंगे। सेवा पखवाड़ा और 2027 पर

श्री वर्मा बोले कि सेवा पखवाड़ा चल रहा है, देश के प्रधानमंत्री हैं। कौन सी सेवा? आप सोचिए, महंगाई, आरक्षण लूटा जा रहा है, 69 हजार भर्ती में घोटाला हुआ, हर व्यक्ति परेशान है और समय और तारीख का इंतजार कर रहा है। जिस तरह 2024 के चुनाव में मिलकर भाजपा को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से रोका था, उसमें सबसे बड़ा योगदान माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी और UP की जनता का था, उसी तरह 2027 के चुनाव में भी भाजपा को बुरी तरह हराने का काम समाजवादी पार्टी करेगी।
2026 में भौतिक विज्ञान के नोबेल पुरस्कार पर विशेष विज्ञान लेख



*भौतिकी का नोबेल 2026: फ्रांसिस हाल्जेन और 'भूतिया कणों' की खोज।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 6 अक्टूबर 2026 को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने भौतिकी का नोबेल पुरस्कार बेल्जियम मूल के अमेरिकी वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को घोषित किया है। उन्हें यह सम्मान "आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में निर्णायक योगदान और ब्रह्मांडीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज" के लिए दिया गया है।
नोबेल समिति ने इन न्यूट्रिनो कणों को "अंतरिक्ष से आने वाले भूतिया संदेश" (Ghostly messages from space) करार दिया है,जो ब्रह्मांड के सबसे रौद्र और रहस्यमयी हिस्सों से सीधी सूचना लेकर आते हैं।

*विजेता और पुरस्कार का कारण क्या है।* खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन वर्तमान में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन-मैडिसन में प्रोफेसर हैं। उनका जन्म 1944 में बेल्जियम के टिएनेन शहर में हुआ था एवं
आधिकारिक घोषणा के अनुसार, हाल्जेन को यह पुरस्कार उनके उस अभूतपूर्व विचार और वैज्ञानिक नेतृत्व के लिए मिला है जिसके तहत उन्होंने दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) की बर्फ का उपयोग न्यूट्रिनो कणों को पकड़ने के लिए किया।  नोबेल समिति के अध्यक्ष मार्क पियर्स ने कहा, "फ्रांसिस हाल्जेन ने शोधकर्ताओं और इंजीनियरों की एक अंतरराष्ट्रीय टीम का नेतृत्व किया है जिसने हमें एक शानदार उपकरण दिया है। उनकी दृढ़ता और वैज्ञानिक दृष्टि ने एक नए प्रकार के खगोल विज्ञान का मार्ग प्रशस्त किया है।" और इस वर्ष भौतिकी की नोबेल पुरस्कार राशि 12 मिलियन स्वीडिश क्रोनर (लगभग 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है, जो पूरी तरह से हाल्जेन को दी जाएगी क्योंकि इस वर्ष यह पुरस्कार केवल एक ही वैज्ञानिक को दिया गया है।
*क्या होते हैं,न्यूट्रिनो: ब्रह्मांड के 'भूतिया कण'।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो, ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है क्योंकि इन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता और इनका द्रव्यमान लगभग न के बराबर होता है।
ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली भीषण घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल, सक्रिय आकाशगंगाओं के केंद्र) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं। चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं, या कुछ यूं कहें कि बिल्कुल भी नहीं के बराबर प्रतिक्रिया करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं। और यह तक भी पता नहीं चलता कि कब यह कण उनको पार कर रहे हैं। और यह भी जानना ज़रूरी है कि हर सेकंड अरबों-खरबों न्यूट्रिनो हमारे शरीर और पृथ्वी से होकर गुजरते रहते हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश बिना किसी क्रिया के निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था।
*क्या है,आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी: बर्फ का विशाल दूरबीन* ।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि नोबेल पुरस्कार समिति के अनुसार फ्रांसिस हाल्जेन ने 1988 में एक अभूतपूर्व विचार रखा कि अंतरिक्ष से आने वाले इन रहस्यमयी कणों को पकड़ने के लिए दक्षिणी ध्रुव (South Pole, अंटार्कटिका) की विशाल बर्फ का उपयोग किया जा सकता है।उनके इसी दृष्टिकोण के कारण अंटार्कटिका की गहराई में बर्फ के नीचे 1 क्यूबिक किलोमीटर के दायरे में दुनिया का पहला विशालकाय न्यूट्रिनो डिटेक्टर बनाया गया, जिसे आइसक्यूब (IceCube) कहा जाता है। *आइसक्यूब कैसे काम करता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की आधिकारिक सूची के अनुसार आइसक्यूब में बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर या Digital Optical Modules) लगाए गए हैं, जिन्हें लगभग 1,450 से 2,450 मीटर की गहराई पर बर्फ में लगाया गया है।
जब कोई,उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी जिसे खगोलविज्ञान में (Cherenkov radiation) चेरेनकोव विकिरण कहा जाता है। यह तब उत्पन्न होता है जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) किसी माध्यम (जैसे पानी या काँच) में लगभग प्रकाश की गति से यात्रा करता है। इसके कारण आमतौर पर पानी के भीतर एक चमकदार नीली रोशनी दिखाई देती है,(Cherenkov radiation) पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। फिर वैज्ञानिक उस सिग्नल से पता लगाते हैं कि कण कहाँ से आया, उसकी दिशा क्या थी, उसकी ऊर्जा कितनी थी और संभवतः वह किस खगोलीय स्रोत से आया। साथ ही यह भी जानना ज़रूरी है कि दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग करने के कई फायदे हैं जैसे कि यह बर्फ विभिन्न प्रकार के हस्तक्षेप से मुक्त है और यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है, यहाँ कोई भूकंप नहीं आते। अगर हम इस आइसक्यूब के निर्माण की बात करें तो पाते हैं कि आइसक्यूब का निर्माण दिसंबर 2010 में पूरा हुआ था और इसकी कुल लागत लगभग 279 मिलियन डॉलर थी।
*2013 की ऐतिहासिक खोज और महत्व क्या है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला (IceCube Neutrino Observatory)  की आधिकारिक विश्व वैज्ञानिक समुदाय की पुष्टि के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2013 में उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो (high-energy astrophysical neutrinos) का पहली बार स्पष्ट अवलोकन था।
इनमें कुछ न्यूट्रिनो की ऊर्जा पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट Petaelectronvolt (PeV) स्तर तक थी,(पेटाइलेक्ट्रॉनवोल्ट (Petaelectronvolt) ऊर्जा को मापने की एक अत्यंत विशाल इकाई (यूनिट) है)।अर्थात अत्यंत विशाल ऊर्जा। इस खोज ने यह प्रमाणित किया कि हमारे ब्रह्मांड में ऐसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं जो अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो उत्पन्न करते हैं। *इस खोज का विज्ञान की दुनिया में क्या महत्व है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि फ्रांसिस हाल्जेन के इस काम ने खगोल विज्ञान (Astronomy) के एक बिल्कुल नए युग की शुरुआत की है। इस खोज से आगे आने वाले समय में ब्रह्मांड के कई अनसुलझे रहस्यों से पर्दा उठ सकता है क्योंकि न्यूट्रिनो अंतरिक्ष के उन सुदूर और रौद्र एवं अज्ञात कोनों की जानकारी लाते हैं, जहाँ से प्रकाश भी बाहर नहीं आ पाता (जैसे कि एक्टिव गैलेक्टिक न्यूक्लिआई या विशाल ब्लैक होल)। अब अगर हम बात करें पारंपरिक दूरबीनों एवं अन्य विधाओं की तो पाते हैं कि उनसे न्यूट्रिनों को पूरी तरीके से समझना आसान नहीं था या इसको और भी आसान भाषा में समझने की कोशिश करें तो पाते हैं कि अछूते ब्रह्मांड को देखने के साथ ही पारंपरिक टेलिस्कोप केवल प्रकाश या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणों को देख सकते हैं, लेकिन आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी की मदद से वैज्ञानिक अब उन अनदेखी घटनाओं का अध्ययन कर पा रहे हैं जो अरबों प्रकाश वर्ष दूर उस काले घने अंधकारमय ब्रह्मांडीय गुफाओं में घटित हो रही हैं। साथ ही इसे मल्टी-मैसेंजर एस्ट्रोनॉमी के व्यापक विकास के संदर्भ में भी देखा जा सकता है,जहाँ प्रकाश, गुरूत्वीय तरंगें ( gravitational waves), कॉस्मिक रेज (cosmic rays)और न्यूट्रिनों (neutrinos) जैसे अलग-अलग ब्रह्मांडीय संदेशबाहकों (cosmic messengers) से ब्रह्मांड की जानकारी प्राप्त की जाती है। साथ ही यह भी ज्ञात हो कि 2018 में,आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी ने एक अत्यंत उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो को TXS 0506+056 नामक ब्लेज़र (blazar) तक ट्रेस किया,जो ओरायन तारामंडल की दिशा में 3.7 अरब प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। यह पहली बार था जब किसी न्यूट्रिनो को उसके विशिष्ट खगोलीय स्रोत से जोड़ा गया।
*क्यों इतना अनोखा है, न्यूट्रिनो और इन्हें खोजना भी इतना मुश्किल क्यों था* ?।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो,ब्रह्मांड के सबसे बुनियादी और रहस्यमयी उप-परमाणु कणों (Subatomic particles) में से एक हैं। इन्हें 'घोस्ट पार्टिकल्स' (Ghost Particles या भूतिया कण) भी कहा जाता है, इन कणों पर कोई विद्युत आवेश (Charge) नहीं होता और इनका द्रव्यमान (Mass) लगभग न के बराबर ही होता है या कुछ यूं कहें कि लगभग कोई द्रव्यमान नहीं है और ये कण सुदूर अंतरिक्ष में होने वाली उग्र घटनाओं (जैसे सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल आदि) से पैदा होते हैं और प्रकाश की गति से यात्रा करते हैं चूंकि ये सामान्य पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया भी प्रदर्शित नहीं करते हैं इसलिए ये बिना रुके पृथ्वी, इंसानों, चट्टानों ,पहाड़ों और ग्रहों आदि के पार निकल जाते हैं, इसी वजह से इन्हें सामान्य टेलिस्कोप से देख पाना या पकड़ पाना नामुमकिन था, इसलिए इसमें बर्फ के अंदर हजारों बेहद संवेदनशील लाइट सेंसर्स (प्रकाश डिटेक्टर) लगाए गए हैं। जब कोई उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो बर्फ के परमाणुओं से टकराता है, तो एक हल्की नीली रोशनी पैदा होती है, जिसे ये सेंसर रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसीलिए इन उच्च ऊर्जा यूट्रिनो को खोजना इतना अनोखा और इतना मुश्किल एवं चुनौतीपूर्ण था। और यही कार्य एवं इनकी खोज करने के लिए बर्ष 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए देने की घोषणा की गई है। उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों न्यूट्रिनो को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा है एवं आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी जहां उन्होंने दक्षिण ध्रुव (Antarctic) की गहरी बर्फ में हजारों लाइट सेंसर लगाकर दुनिया की पहली विशाल न्यूट्रिनो वेधशाला की नींव रखी, जिससे ब्रह्मांड की ऊर्जावान प्रक्रियाओं का अध्ययन संभव हुआ। साथ ही नई प्रकार की खगोल विज्ञान को भी जन्म दिया है या कुछ यूं कहें कि इस खोज ने खगोल विज्ञान (Astronomy) की एक बिल्कुल नई विधा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे दूरस्थ आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलती है।

*क्या है न्यूट्रिनो (Neutrino) कण की कहानी ? ।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि न्यूट्रिनो (Neutrino) कण का सबसे पहले सैद्धांतिक अनुमान वर्ष 1930 में वोल्फगैंग पाउली (Wolfgang Pauli) ने लगाया था,जबकि वर्ष 1956 में क्लाइड कोवान (Clyde Cowan) और फ्रेडरिक रेइन्स (Frederick Reines) ने इसका प्रयोगात्मक रूप से पता लगाया (खोज की) अब अगर हम बात करें न्यूट्रिनो से जुड़े मुख्य तथ्य सैद्धांतिक प्रस्ताव की तो पाते हैं कि 1930 में वोल्फगैंग पाउली ने बीटा क्षय (beta decay) में ऊर्जा संरक्षण के नियम को समझाने के लिए इस काल्पनिक कण का सुझाव दिया था एवं इसके नामकरण की बात करें तो पाते हैं कि इसका नामकरण एक इतालवी भौतिक विज्ञानी एनरिको फर्मी ने इस कण का नाम 'न्यूट्रिनो' रखा, जिसका अर्थ "छोटा उदासीन कण" है। साथ ही इसके प्रयोगात्मक खोज की बात करें तो पाते हैं कि 1956 में क्लाइड कोवान और फ्रेडरिक रेइन्स ने परमाणु रिएक्टर का उपयोग करके पहली बार न्यूट्रिनो का प्रायोगिक प्रमाण प्राप्त किया। इस खोज के लिए फ्रेडरिक रेइन्स को 1995 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला  और अब वर्ष 2026 की बात करें तो पाते हैं कि 2026 का भौतिकी (फिजिक्स) का नोबेल पुरस्कार वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को अंतरिक्षीय मूल के उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो (high-energy neutrinos of astrophysical origin) की खोज और आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी (IceCube Neutrino Observatory) में उनके निर्णायक योगदान के लिए दिया गया है,क्योंकि उन्होंने अंतरिक्ष से धरती तक आने वाले बेहद ताकतवर और मायावी कणों जिन्हें न्यूट्रिनो कहा जाता है को पकड़ने और उनका पता लगाने का तरीका खोजा।

*भारत के शोधकर्ताओं के लिए इस खोज का क्या महत्व हो सकता है?।*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह दर्शाती है कि कैसे एक साधारण विचार (दक्षिणी ध्रुव की बर्फ का उपयोग) और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्यों को सुलझाया जा सकता है।
आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग है, जिसमें लगभग 450 भौतिक विज्ञानी, 58 संस्थान और 14 देश शामिल हैं। साथ ही अंटार्कटिका के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित IceCube Neutrino Observatory (आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला) के संदर्भ में भारत का महत्व भी कुछ मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है। जैसा कि हम जानते हैं कि आइसक्यूब एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परियोजना है, लेकिन वैसे तो भारत का इस वेधशाला से प्रत्यक्ष या सीधे तौर पर संबंध नहीं है, लेकिन भारतीय वैज्ञानिक, शोधकर्ता और संस्थान वैश्विक स्तर पर इस प्रयोग के डेटा विश्लेषण, कोडिंग और इसके माध्यम से की जाने वाली ब्रह्मांडीय खोजों (जैसे "घोस्ट पार्टिकल्स" या न्यूट्रिनो की पहचान) में अनुसंधान के ओपन-सोर्स डेटा का विश्लेषण करते हैं।और साथ में यह भी जानना आवश्यक है कि भारत भी अपना न्यूट्रिनो प्रोजेक्ट  INO (India-based Neutrino Observatory) बनाने के लिए प्रयास कर रहा है इसीलिए जब भी विज्ञान में आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी (IceCube Observatory) की बात होती है, तो उसके समानांतर भारत के अपने प्रोजेक्ट INO (इंडिया-बेस्ड न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी) की चर्चा जरूर होती है। लेकिन दोनों में अंतर क्या है? यह भी जानना ज़रूरी है,जहाँ आइस क्यूब अंटार्कटिका की गहरी बर्फ (Ice) के नीचे न्यूट्रिनो ढूंढता है, वहीं भारत का आई०एन० ओ०,(INO)  प्रोजेक्ट तमिलनाडु के थेनी जिले की बोदी पश्चिम पहाड़ियों में जमीन के नीचे एक विशाल प्रयोगशाला बनाने की योजना है एवं इसके लोकेशन के महत्व की बात करें तो पाते हैं कि भारत की भौगोलिक स्थिति भूमध्य रेखा (Equator) के पास है,यहाँ बनाई जाने वाली ऑब्जर्वेटरी से वैज्ञानिकों को उन न्यूट्रिनो कणों का भी अध्ययन करने में मदद मिल मिलेगी जो पृथ्वी के कोर (केंद्र) से होकर गुजरते हैं साथ ही यह डेटा,आइस क्यूब जैसी ध्रुवीय (Polar) ऑब्जर्वेटरी के पूरक के रूप में काम आ सकता है। लेकिन अभी तो इस प्रोजेक्ट की संपूर्ण स्थापना को कई चुनौतियों से निबटना बाकी है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अब हम पुनः संक्षेप में फ्रांसिस हाल्जेन एवं आइस क्यूब ऑब्जर्वेटरी की बात करें तो पाते हैं कि फ्रांसिस हाल्जेन ने अंटार्कटिका की बर्फ को एक अनोखी विशाल दूरबीन में बदल दिया, जिसने विज्ञान को ब्रह्मांड के उन सबसे रहस्यमयी 'भूतिया कणों' को पकड़ने और समझने की शक्ति दी,जो अब तक इंसान की पहुंच से पूरी तरह बाहर थे। इसीलिए यह भी समझना ज़रूरी है कि यह नोबेल पुरस्कार केवल किसी एक व्यक्ति द्वारा अकेले किए गए प्रयोग के लिए नहीं है बल्कि हाल्जेन का सम्मान उनके निर्णायक वैज्ञानिक योगदान, दृष्टि और आइसक्यूब के नेतृत्व तथा उच्च-ऊर्जा खगोलीय न्यूट्रिनो की खोज से जुड़ा है। जो निश्चित तौर पर यह दर्शाता है कि अगर टीम भावना से एवं समग्र रूप से दृढ़ संकल्प और सकारात्मकता से लगातार कोई भी कार्य किया जाता है तो एक दिन उन अच्छे कार्यों का फल और किसी भी समस्या का हल भी अवश्य ही प्राप्त होता है।और इसी को सार्थक होता हुआ देख सकते है कि नोबेल पुरस्कार समिति द्वारा 2026 के भौतिकी के नोबेल पुरस्कार को देने की घोषणा, फ्रांसिस हाल्जेन (Francis Halzen) को की गई है।
इंडिया गठबंधन का मार्च जारी, कई बड़े नेता हिरासत में, आकाशवाणी के सामने राहुल-प्रियंका का धरना

#oppositionindiablocmpsmarch

भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ इंडी गठबंधन के सांसदों ने दिल्ली में विरोध मार्च निकाला। तिरंगा झंडा और 'लोकतंत्र बचाओ' लिखे बैनर लिए, इंडी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक अपना विरोध मार्च शुरू किया। चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ते हुए विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त, भाजपा और आरएसएस के खिलाफ नारे लगाए।

राहुल-प्रियंका समेत विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए

विपक्षी दलों के 300 से ज्यादा सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च किया। प्रदर्शन के लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और इंडी गठबंधन के कई अन्य नेताओं को भी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जाने से रोके जाने के बाद कुछ देर के लिए हिरासत में लिया गया था। इसके बाद छोड़ दिया गया।

बैरिकेड पर चढ़ राहुल गांधी ने लहराया तिरंगा

राहुल गांधी जब चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तो उन्हें पुलिस की कई बैरिकेड्स ने रोक दिया। इसके बाद वे एक बैरिकेड पर चढ़ गए और एक राष्ट्रीय ध्वज लहराया, वहां जमा हुए इंडी गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर उनका समर्थन किया।

राहुल गांधी ने पुलिस पर लगाया धमकाने का आरोप

इस बीच राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि यह नेता करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं और चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयुक्त उनसे मुलाकात क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें रोक रही है और धमकी दे रही है। हम सिर्फ उनका मुकाबला नहीं करेंगे, बल्कि उन्हें खत्म कर देंगे। राहुल गांधी ने आगे कहा कि देश के साथ जो किया गया है, उसे देशद्रोह कहा जाता है और इसके लिए कोई बच नहीं पाएगा।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

ভারতকে ৪-০ হারিয়েও ব্রাজিলকে ধুয়ে দিল নিজের দেশের মিডিয়া! ভিনিদের ফুটবলকে বলা হল 'ঘুমপাড়ানি'*
*খেলা*

*কলকাতা ডেস্ক:* র‍্যাঙ্কিংয়ে ব্যবধান ১৩২ ধাপ। একদিকে বিশ্বের ৬ নম্বর ব্রাজিল, অন্যদিকে ১৩৮ নম্বরে থাকা ভারত। যুবভারতীতে ৪-০ ফল ভারতের জন্য লড়াই করেই হার। কিন্তু ব্রাজিলের জন্য? জিতেও চরম অস্বস্তিতে সেলেকাওরা।

৪ গোল দেওয়ার পরও দেশের মিডিয়ার কাছে তুলোধোনা হচ্ছে কার্লো আনচেলোত্তির দল। ব্রাজিলের সংবাদমাধ্যমের চোখে ভারতের বিরুদ্ধে এই জয় মোটেও জয় নয়, বরং ঘুমিয়ে ঘুমিয়ে খেলা ৯০ মিনিটের এক বিরক্তিকর প্রদর্শনী।

*ভিনিসিয়াসকে নিয়ে তীব্র সমালোচনা*

ব্রাজিলের জনপ্রিয় পোর্টাল UOL সরাসরি লিখেছে, "আবারও হতাশ করল ব্রাজিল। ১৩৮ নম্বর দলের বিরুদ্ধে ৪-০ জয়টা নিতান্তই নিয়মরক্ষা।" তাদের বিশ্লেষণে, বাঁ-দিকে প্রচুর জায়গা পেয়েও সুপারস্টার ভিনিসিয়াস জুনিয়র ছিলেন সম্পূর্ণ ব্যর্থ। ভুল পাস, ছন্নছাড়া ড্রিবল ছাড়া কিছুই দিতে পারেননি।

আরেক সংবাদমাধ্যম Terra-র খোঁচা, "ব্রাজিলের ইতিহাসে অন্যতম দুর্বল প্রতিপক্ষকে পেয়েও মন ভরাতে পারল না দল।" দেশের প্রথম সারির কাগজ O Globo তো এই ম্যাচকে 'অনুশীলন ম্যাচ' বলেই উড়িয়ে দিয়েছে। তাদের মতে, বল দখলে থাকলেও গোল করার কোনও তাগিদই ছিল না।

*ক্ষোভ উগরে দিলেন ফেলিপে মেলো*

প্রাক্তন তারকা ফেলিপে মেলো Sportv-তে বিস্ফোরক। তিনি বলেন, "ব্রাজিল শুধু পিছিয়ে যাচ্ছে। বিশ্বকাপের শেষ ষোলোয় নরওয়ের কাছে হারের পর অস্ট্রেলিয়ার সঙ্গে দুটো প্রীতি ম্যাচে (১-১ ও ৪-২) বাজে খেলেছে। কলকাতায় ৪ গোল দিলেও খেলা ছিল কুৎসিত।"

কলকাতার গরমকে অজুহাত মানতে নারাজ মেলো। তাঁর সাফ কথা, "খারাপ খেলতে পারো, কিন্তু লড়াইয়ের মানসিকতা কোথায়? বদলি হিসেবে নামা মার্টিনেলি এবং জোড়া গোল করা সামুয়েল লিনো কিছুটা চেষ্টা করেছে। লিনো আরও সময় পেলে আরও গোল পেত।"

*CBF-কেও একহাত নিল ব্রাজিলের মিডিয়া*

শুধু ফুটবলার নয়, কাঠগড়ায় ব্রাজিল ফুটবল ফেডারেশন (CBF)-ও। ফুটবল পোর্টাল Trivela প্রশ্ন তুলেছে, ফাঁকা গ্যালারিতে এই ম্যাচ খেলার মানে কী? তাদের সাংবাদিক কার্লোস ভিনিসিয়াসের লেখায়, "টিকিটের দাম আকাশছোঁয়া। স্টেডিয়াম ভর্তি হয়নি। ভারতের মতো দেশে খেলতে এলে টিকিট সাধারণ মানুষের নাগালে রাখা উচিত ছিল।" তাদের আরও অভিযোগ, ব্রাজিলের বহু রাজ্যে বছরের পর বছর জাতীয় দলের খেলা হয় না। দেশের সমর্থকদের বঞ্চিত করে শুধু টাকার জন্য এশিয়া সফর করছে CBF। বিশ্বকাপের আগে সভাপতি বলেছিলেন দল সাধারণ মানুষের কাছে যাবে, কিন্তু বাস্তবে তা ফাঁকা প্রতিশ্রুতি।

সব মিলিয়ে যুবভারতীতে স্কোরবোর্ডে ৪-০ জিতলেও, পারফরম্যান্সের বিচারে দেশে ফিরে প্রবল চাপে আনচেলোত্তির ব্রাজিল।
ছবি:সঞ্জয় হাজরা।

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भारत ने एशियन गेम्स में दिन का तीसरा गोल्ड जीता, लवलीना के बाद परवीन हुड्‌डा का गोल्डन पंच

#Indiawonitsthirdgoldofthedayattheasian_games

भारत ने एशियन गेम्स में शुक्रवार को तीसरा गोल्ड जीत लिया है। एशियाई खेलों में आज चौदहवें दिन आर्चरी के बाद बॉक्सिंग में ये दिन का दूसरा स्वर्ण पदक है। स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने जन्मदिन पर गोल्ड दिलाया। उसके बाद परवीन हुड्‌डा महिलाओं की 65 किग्रा में एशियन चैंपियन बनी। एक गोल्ड मेडल तीरंदाजी में आया।

परवीन हुड्डा का पहला एशियन गेम्स मेडल

परवीन हुड्डा ने महिलाओं की 65 किलो वेट कैटेगरी के फाइनल में चाइनीज ताइपे की मुक्केबाज चिन नीन-चिन को कड़े मुकाबले में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, ये भारत को मिलने वाला कुल 13वां स्वर्ण पदक था। हरियाणा के रोहतक की 26 वर्षीय इस युवा बॉक्सर का यह पहला एशियन गेम्स मेडल है।

बॉक्सर लवलीना ने एशियन गेम्स में पहली बार जीता गोल्ड

इससे पहले भारतीय मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 75 किलोग्राम वर्ग के फाइनल मुकाबले में चीन की बाओ जियाओजी को 5-0 के एकतरफा फैसले से शिकस्त देकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। जन्मदिन के खास मौके पर उतरी लवलीना ने पूरे मुकाबले के दौरान बेहतरीन संयम का परिचय दिया और बाओ को आगे बढ़ने का मौका देकर बेहद प्रभावी काउंटर-पंचों के जरिए अंक बटोरे। शुरुआती दो राउंड जीतने के बाद उन्होंने तीसरे और अंतिम राउंड में भी अपनी शानदार पकड़ बनाए रखी और इस तरह एक आसान व आधिपत्य भरी जीत दर्ज करते हुए देश के लिए यह स्वर्ण पदक पक्का किया।

भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर

एशियन गेम्स में भारत मेडल टैली के छठे स्थान पर है। उसके पास 13 गोल्ड, 25 रजत और 35 कांस्य जीते हैं। भारत के कुल 73 मेडल हैं। वहीं, मुक्केबाजी में 5 मेडल आ चुके हैं। इनमें 3 ब्रॉन्ज भी शामिल हैं।

যুবভারতীতে ইতিহাস! প্রথমবার ভারতের মুখোমুখি পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল, রায়ানকে নিয়ে সতর্ক আন্সেলোত্তি
*খেলা*


*নিজস্ব প্রতিনিধি,কলকাতা:* শনিবার সন্ধ্যায় কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে শুধু একটি ফুটবল ম্যাচ নয়, লেখা হতে চলেছে ভারতীয় ফুটবলের নতুন ইতিহাস। কলকাতার বুকে প্রথমবার মুখোমুখি ভারত এবং পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল।

ম্যাচ ঘিরে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে সাম্বার উন্মাদনা তুঙ্গে। হলুদ-সবুজ জার্সিতে সেজে উঠেছে কলকাতা। ভিনিসিয়াসদের এক ঝলক দেখার অপেক্ষায় প্রহর গুনছে ফুটবলপাগল শহর। কিন্তু এই উৎসবের আবহের মধ্যেও ভারতকে এক মুহূর্তের জন্যও হালকা ভাবে নিচ্ছে না ব্রাজিল শিবির।
*আন্সেলোত্তির মুখে রায়ান-স্তুতি, গুরপ্রীতকে কুর্নিশ মার্কুইনহোসের*

শুক্রবার বাইপাসের ধারে একটি পাঁচতারা হোটেলে সাংবাদিক বৈঠকে হাজির হয় ব্রাজিল দল। মঞ্চে উঠে পর্তুগিজ বা ইংরেজির বদলে ‘নমস্তে’ বলে বক্তব্য শুরু করেন ব্রাজিল কোচ কার্লো আন্সেলোত্তি।

তিনি বলেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের সঙ্গে এখানে আসতে পারা আমাদের কাছে সত্যিই গর্বের। আমরা জানি, এখানকার মানুষ ফুটবল আর জাতীয় দলকে কতটা ভালোবাসেন।”

ভারতকে নিয়ে আন্সেলোত্তি স্পষ্ট বার্তা দেন, “আমরা ভারতের শেষ ম্যাচটি দেখেছি। পানামা ভালো দল। ভারতের একজন স্ট্রাইকার রায়ান উইলিয়ামস রয়েছে, যে আমাদের জন্য বিপজ্জনক হতে পারে। তাই ওকে নিয়ে আমরা ভাবছি।” তিনি আরও যোগ করেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের কাছে কোনও ম্যাচই শুধু প্রীতি ম্যাচ নয়। প্রতিপক্ষ যখন ভারত, তখন তাদের যথাযথ সম্মান দিয়েই আমরা মাঠে নামব।”

অন্যদিকে, ভারতীয় ফুটবলারদের লড়াইকে কুর্নিশ জানিয়েছেন ব্রাজিল অধিনায়ক মার্কুইনহোস। তিনি বলেন, “ভারতীয় দলে এমন কয়েকজন ফুটবলার আছেন, যাঁদের সম্মান করতেই হবে। গোলকিপার রয়েছেন, যিনি জাতীয় দলের হয়ে প্রায় ৯০টি ম্যাচ খেলতে চলেছেন। এটা বড় অর্জন।”

কলকাতার আকাশে এখন সাম্বার সুর। তবে বিশ্ব ফুটবলের অন্যতম সেরা দলের কোচ ও অধিনায়কের মুখে ভারতের নাম ও ভারতীয় ফুটবলারের প্রশংসা, যুবভারতীর মহারণের আগে সেটাও কম বড় প্রাপ্তি নয়। ছবি: সঞ্জয় হাজরা।

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ISL সম্প্রচারে বড় বদল, YouTube-এর পাশাপাশি Sony Sports-এও দেখা যাবে ম্যাচ
*খেলা*
*স্পোর্টস ডেস্ক, কলকাতা:* ১০ অক্টোবর, মহালয়ার দিন থেকে শুরু হচ্ছে ISL। গতবার সিঙ্গেল লিগ হলেও এবার হোম-অ্যাওয়ে ফর্ম্যাটে দুই লিগে হবে টুর্নামেন্ট। চলবে ২০২৭ সালের মে মাস পর্যন্ত। অংশ নিচ্ছে ১৩টি দল - ইস্টবেঙ্গল, মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট, বেঙ্গালুরু এফসি, কেরালা ব্লাস্টার্স, এফসি গোয়া, মুম্বই সিটি এফসি, নর্থ ইস্ট ইউনাইটেড, ওডিশা এফসি, পাঞ্জাব এফসি, ইন্টার কাশী, চেন্নাইয়িন এফসি, চার্চিল ব্রাদার্স ও স্পোর্টস ক্লাব দিল্লি। জামশেদপুর এফসি নাম তুলে নেওয়ায় তাদের লাইসেন্সে খেলবে চার্চিল। ডায়মন্ড হারবার এফসি যোগ্যতা অর্জন করেও পার্টিসিপেশন ফি জমা দিতে পারেনি। প্লে-অফ মিলিয়ে মোট ১৬৩টি ম্যাচ হবে।

এবার ISL-এর আয়োজক ক্লাবগুলি নিজেরাই। ফলে সম্প্রচার নিয়ে ছিল জল্পনা। Khel Now-এ প্রকাশিত রিপোর্ট অনুযায়ী, এবার ISL দেখা যাবে দুটি প্ল্যাটফর্মে। YouTube-এ স্ট্রিমিংয়ের পাশাপাশি স্যাটেলাইট টিভি রাইটস পেতে চলেছে Sony Sports Network।  রিপোর্টে দাবি, Sony-কে রাইটস দেওয়ার বিষয়ে সব পক্ষ রাজি, শুধু চূড়ান্ত কাগজপত্র বাকি। প্রথমে Zee-র নাম শোনা গেলেও তা বাতিল হয়েছে।

অতীতে Star Sports এবং Hotstar-এ দেখানো হতো ISL, গত বছর দেখানো হয়েছিল FanCode-এ। রিপোর্ট বলছে, বেশিরভাগ ক্লাব বেশি দর্শকের কাছে পৌঁছতে YouTube-এর পক্ষে, আবার কিছু ক্লাব স্পনসরশিপের কারণে প্রথাগত টিভি সম্প্রচার চাইছে। তাই দুই পথেই হাঁটার সিদ্ধান্ত।

ভারতীয় ফুটবলে Sony Sports দীর্ঘদিন ধরেই রয়েছে, ইউরোপের একাধিক লিগ ও সম্প্রতি ডুরান্ড কাপও তারাই সম্প্রচার করেছে। অন্যদিকে YouTube-ও ইতিমধ্যেই প্রাইম ভলিবল লিগ ও তামিলনাড়ু প্রিমিয়ার লিগ দেখাচ্ছে।

ছবি: সংগৃহীত।

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रूसी सेना में भर्ती को लेकर भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी, भारतीयों को दी सख्त चेतावनी

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रूस में नौकरी के नाम पर भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद जोखिम भरा है। मंत्रालय ने भारतीयों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऑफर के झांसे में न आएं।

पिछले दो सालों में कई मौकों पर दी सतर्कता की सलाह

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान सरकार ने कई मौकों पर रूस की सेना में शामिल होने से जुड़े जोखिम और खतरों को रेखांकित किया है। भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के अवसर तलाशते समय सावधानी बरतने और असत्यापित व्यक्तियों की ओर से दिए गए नौकरी के ऑफर के झांसे में नहीं आने की सलाह दी गई है।

मंत्रीलय ने कहा- कुछ भारतीय ऐसे ऑफर तलाश रहे

मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिक ऐसे ऑफर खुद तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सेना में शामिल होने के बदले अच्छा पैसा मिलेगा और फिर भारत सरकार के दखल से वे वहां से निकल जाएंगे। सरकार ने इस सोच को खतरनाक बताते हुए भारतीय नागरिकों से ऐसे कदम से दूर रहने को कहा है।

भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने की कोशिश

एडवाइजरी में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट हासिल करने और उसके बाद रूसी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के लालच में बिना भारतीय अधिकारियों से सलाह किए ऐसे कदम उठा चुके हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को इस फैसले की गंभीरता समझने की सलाह दी है।

नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले सतर्कता बरतने की सलाह

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि गैर-सार्वजनिक संस्थाएं, जिनमें स्वैच्छिक समूह भी शामिल हैं, विदेशी नागरिकों को रूसी सेना में सेवा देने के लिए भर्ती कर रही हैं। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऐसे एजेंटों से नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे एजेंट जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं, उनके ऑफर को लेकर विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा गया है।