UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र की चौखट पर पहुंचा पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के निलंबन UNSC के सामने लगाई गुहार

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सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पाकिस्तान चाहता है कि UNSC इस मामले में दखल दे और भारत को रोके।

इशार डार ने सुरक्षा परिषद को लिखा पत्र

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशार डार ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत से आने वाली नदियों के बहाव को बदलने की भारत की कोशिशों पर ध्यान देने की अपील की गई है। डार ने चिनाब नदी पर बन रही भारत की दो परियोजनाओं को जिक्र किया है और इसे पाकिस्तान की जल, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

भारत पर जल प्रवाह बदलने की कोशिश का आरोप

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह और उपयोग के स्थापित ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत को जवाबदेह ठहराने की अपील

पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद से इस मामले का संज्ञान लेने और भारत को कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया की स्थिति और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।

बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 65 साल से चली आ रही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं

पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'

शशि थरूर ने क्या कहा?

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।

MEDIN EXPO Chennai 2026 में LABOLIT को मिला सम्मान, उमा साइंटिफ़िक ने बढ़ाया भारतीय लैब उपकरण उद्योग का गौरव
चेन्नई । देश की अग्रणी पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण निर्माता कंपनी LABOLIT, जो UMA SCIENTIFIC द्वारा संचालित है, को MEDIN EXPO Chennai 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचारपूर्ण प्रयोगशाला समाधानों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक एवं पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है।
प्रदर्शनी के दौरान LABOLIT के स्टॉल पर बड़ी संख्या में देश ही नहीं अपितु विदेश के   पैथालॉजी प्रयोगशाला विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं व्यवसायिक आगंतुकों ने पहुंचकर कंपनी के उत्पादों और तकनीकी नवाचारों की सराहना की। कंपनी ने अपने उन्नत Micropipettes, Multichannel Micropipettes, Bottle Top Dispensers सहित विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों का प्रदर्शन किया, जिन्हें आगंतुकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। कंपनी प्रबंधन ने इस सम्मान को अपने ग्राहकों, व्यापारिक सहयोगियों और शुभचिंतकों के विश्वास एवं सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि LABOLIT का उद्देश्य भारतीय पैथालॉजी प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय गुणवत्ता के उपकरण उपलब्ध कराना है, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और परीक्षण कार्यों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
LABOLIT – Pulse of World Sciences के संकल्प के साथ कंपनी लगातार नवाचार, गुणवत्ता और ग्राहक संतुष्टि के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है। MEDIN EXPO Chennai 2026 में प्राप्त यह सम्मान कंपनी की बढ़ती प्रतिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली का प्रमाण है। कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक शुभम पांडेय ने इस अवसर पर कहा,
“यह सम्मान केवल LABOLIT का नहीं, बल्कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नवाचार और गुणवत्ता के प्रति हमारे संकल्प का सम्मान है। हमारा लक्ष्य ‘Made in India’ उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। हम ऐसे वैज्ञानिक उपकरण विकसित कर रहे हैं जो गुणवत्ता, सटीकता और विश्वसनीयता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें। आने वाले वर्षों में LABOLIT को वैश्विक प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के अग्रणी ब्रांडों में शामिल करना हमारा संकल्प है।”
इस अवसर पर LABOLIT एवं UMA SCIENTIFIC की पूरी टीम को उद्योग जगत एवं शुभचिंतकों द्वारा बधाइयाँ दी गईं ।
इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो राहुल गांधी बनेंगे प्रधानमंत्री,निषादों को मिलेगा आरक्षण: सहनी
रिपोर्ट : लालजी राम मंदिर,जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा पर बरसे- मुकेश सहनी।  सुल्तानपुर,विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने सुल्तानपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार, जातिगत जनगणना, निषाद समाज के आरक्षण तथा आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर कई बड़े बयान दिए। मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान जुटाए गए चंदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले भी मंदिर निर्माण के नाम पर लगभग 1400 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप सामने आए थे। उन्होंने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। सहनी ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल करती है, जबकि आम जनता की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जातिगत जनगणना के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी का प्रमुख एजेंडा रहा है। सहनी ने दावा किया कि केंद्र सरकार राजनीतिक दबाव के चलते इस विषय पर आगे बढ़ी है, लेकिन उसकी नीयत साफ नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि जातिगत जनगणना के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन की सरकार बनने पर सही और पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के लिए वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। सहनी ने घोषणा की कि 25 जुलाई के बाद प्रदेशभर में 101 दिनों की "संकल्प यात्रा" निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर निषाद समाज को संगठित किया जाएगा तथा आरक्षण के मुद्दे पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। मुकेश सहनी ने कहा कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं दिया गया तो समाज भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने डॉ. संजय निषाद पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाज के हितों के लिए सत्ता पर प्रभावी दबाव बनाया जाना चाहिए। यदि सरकार आरक्षण की मांग पूरी नहीं करती है तो समाजहित में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। सहनी ने कहा कि INDIA गठबंधन सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में भागीदारी जैसे मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में यही मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि INDIA गठबंधन की सरकार बनती है तो राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं और निषाद समाज को आरक्षण दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रेस वार्ता में पार्टी के कई पदाधिकारी,कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना विमान क्रैश में 5 जवान शहीद, लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

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असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में वायुसेना के पांच कर्मी शहीद हो गए, जबकि सह-पायलट गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गए। उनका इलाज चल रहा है।

वायुसेना जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया

वायुसेना की तरफ से जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया गया है। वायुसेना का कहना है कि स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के हादसा

बता दें कि, असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के तुरंत बाद आग की चपेट में आ गया था। इस घटना के बाद एयरबेस पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने अपना काम शुरू कर दिया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जैसे ही विमान रनवे पर उतरा, उसमें अचानक आग लग गई और उससे घना धुआं उठने लगा।

हादसे के वक्त दो टुकड़ों में टूट गया विमान

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, AN-32 परिवहन विमान अरुणाचल प्रदेश से जोरहाट लौट रहा था। इसी दौरान लैंडिंग के समय विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान एयरबेस पर उतर रहा था, तभी यह क्रैश हो गया। हादसे की वजह से एयरफोर्स का विमान दो टुकड़ों में टूट गया और वहां से आग और धुएं का गुबार उठता दिखा। यह नजारा काफी भयावह था, जिसे देखते ही एयरपोर्ट और वायुसेना की फायर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया था।

'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का आदेश

वायु सेना ने इस दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (जांच समिति) बनाई जा रही है। भारतीय वायु सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। वायु सेना ने कहा, 'आज जोरहाट में लैंडिंग के दौरान आईएएफ के एक एएन-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का गठन किया जा रहा है'।

दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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मशहूर भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं।

सिर्फ 49 साल की उम्र में निधन

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ। हाल ही में इस दिग्गज शूटर की सर्जरी भी हुई थी बड़ी बात यह है कि जशपाल की उम्र अभी सिर्फ 49 साल ही थी और वे आमतौर पर काफी फिट भी थे। हालांकि, अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के मुताबिक म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय निशानेबाजी टीम वापस घर लट रही थी तभी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच और दिग्गज पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।

सत्यांजल पांडे होंगे इस्लामाबाद में भारत के अगले कार्यवाहक उच्चायुक्त, जानें क्यों अहम है ये नियुक्ति?

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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तल्ख बने हुए हैं। इस बीच सरकार ने वरिष्ठ राजनयिक डॉ. सत्यांजल पांडेय को पाकिस्तान में भारत के दूतावास का प्रभारी नियुक्त किया है. डिप्‍लोमेटिक सूत्रों के अनुसर पाकिस्तान ने उनकी नियुक्ति को स्वीकार कर लिया है और वे अगले कुछ सप्ताह में इस्लामाबाद पहुंचकर नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ वाले अधिकारी

सत्याजंल फिलहाल श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त हैं। विदेश सेवा में लंबे अनुभव वाले डॉ. पांडेय को दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने राजनयिक करियर के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका क्यों अहम?

जानकारों का मानना है कि श्रीलंका में उनकी तैनाती के दौरान उन्हें दक्षिण एशियाई राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका में भी उपयोगी साबित हो सकता है

गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे पांडे

सत्याजंल पांडे इस्लामाबाद में गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। गीतिका ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

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दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

दिल्ली में विपक्षी दलों का महाजुटान, INDIA गठबंधन की बैठक आज, मीटिंग से पहले CPM ने दिखाए तेवर

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरने के लिए 2 साल बाद विपक्षी दल एक बार फिर साथ आ रहे हैं। I.N.D.I.A ब्लॉक की आज दोपहर 12 बजे दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि इसमें 23 विपक्षी दल शामिल होंगे। हालांकि, बैठक से पहले सीपीआईएम ने कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई है।

भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट विपक्ष

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 23 दल भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में 'इंडिया' को 'इंडिया जनबंधन' लिखा। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले दल भी मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं और संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि I.N.D.I.A. अपनी विविधता के बावजूद एकजुट है।

कौन-कौन से दलों के बैठक में होंगे शामिल

कांग्रेस ने 23 राजनीतिक दलों विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। इनमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, माकपा, पीडीपी, राजद, भाकपा, टीवीके जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य छोटे दलों जैसे- भाकपा-माले, आरएसपी, वीसीके, एमडीएमके, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, असम जातीय परिषद समेत कई और दलों ने इस बैठक में शामिल होने के संकेत दिए हैं।

DMK-आप बैठक में नहीं होंगे शामिल

डीएमके ने साफ कर दिया है कि वह इस विशेष बैठक में शामिल नहीं होगी। यह विपक्षी रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। विपक्ष की चिंता का कारण संसद का गणित भी है। इससे पहले परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष के 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण बीजेपी सरकार यह विधेयक पारित नहीं करा सकी थी। अब यदि सरकार मॉनसून सत्र में फिर से इस मुद्दे को लेकर आती है तो विपक्ष के लिए पिछली बार जैसी एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

सीपीएम ने कांग्रेस को पुराने आरोपों की याद दिलाई

बैठक से पहले सीपीएम ने कांग्रेस को उसके पुराने आरोपों की याद दिलाई है। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कहा कि उनकी पार्टी इस बैठक में शामिल होगी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास उसका प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, उन्होंने केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा सीपीएम और बीजेपी के बीच कथित समझौते के आरोपों पर आपत्ति जताई। बेबी ने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव प्रचार में पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समझौते की बात कही थी।

विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम है बैठक

INDIA गठबंधन की सोमवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। लगभग दो वर्षों के बाद हो रही इस बैठक को विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और कई राज्यों में चुनावी झटकों के बाद गठबंधन के सामने अपनी एकजुटता और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की चुनौती है।

UN में भारत ने फिर पाकिस्‍तान को लताड़ा, कश्मीर के जिक्र पर सीखा दिया सबक

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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान को फिर कड़ा जवाब दिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर पर की गई पाकिस्तान की टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और यह भारत का आंतरिक मामला है।

जम्मू-कश्मीर पर पाक की टिप्पणी को बताया गैर जरूरी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में चीन और पाकिस्तान की ओर से आयोजित एरिया फॉर्मूला बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया। भारतीय राजदूत ने हरीश पर्वतनेनी कहा, "यह हैरानी की बात है कि सह अध्यक्ष होने के बावजूद पाकिस्तान ने एरिया फॉर्मूला बैठक का राजनीतिक करण किया और भारत के जम्मू-कश्मीर इलाके पर गैर जरूरी टिप्पणियां कीं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का मामला पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। यह हमेशा से ऐसा ही रहा है, अभी भी है और आगे भी ऐसा ही रहेगा।"

यूएन को भी दिखाया आईना

भारत ने इस मौके पर सुरक्षा परिषद के पुराने प्रस्तावों और मध्यस्थता तंत्रों की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठाए। पी. हरीश ने कहा कि समय के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां बदलती हैं, ऐसे में सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और मध्यस्थता ढांचों की भी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्‍टर-6 के तहत बनाए गए मध्यस्थता तंत्र स्थायी नहीं माने जा सकते और बदलते वैश्विक परिदृश्य में उनकी उपयोगिता का आकलन जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र की चौखट पर पहुंचा पाकिस्तान, सिंधु जल समझौते के निलंबन UNSC के सामने लगाई गुहार

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सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का दरवाजा खटखटाया है। पाकिस्तान ने भारत पर संधि के उल्लंघन का आरोप लगाया है। पाकिस्तान चाहता है कि UNSC इस मामले में दखल दे और भारत को रोके।

इशार डार ने सुरक्षा परिषद को लिखा पत्र

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशार डार ने सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है। इसमें भारत से आने वाली नदियों के बहाव को बदलने की भारत की कोशिशों पर ध्यान देने की अपील की गई है। डार ने चिनाब नदी पर बन रही भारत की दो परियोजनाओं को जिक्र किया है और इसे पाकिस्तान की जल, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

भारत पर जल प्रवाह बदलने की कोशिश का आरोप

पाकिस्तान का आरोप है कि भारत चिनाब नदी प्रणाली से जुड़ी दो परियोजनाओं के जरिए पश्चिमी नदियों के जल प्रवाह और उपयोग के स्थापित ढांचे को बदलने की कोशिश कर रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि ऐसी गतिविधियां सिंधु जल संधि के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं और इनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

भारत को जवाबदेह ठहराने की अपील

पाकिस्तानी राजदूत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि सुरक्षा परिषद से इस मामले का संज्ञान लेने और भारत को कथित उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की गई है। साथ ही उन्होंने दक्षिण एशिया की स्थिति और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।

बता दें कि अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाते हुए पाकिस्तान के साथ 65 साल से चली आ रही सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। इसके बाद से ही पाकिस्तान बौखलाया हुआ है।

अमेरिका ने सबसे बड़े सैन्य कमांड से क्यों 'इंडो' शब्द हटाया? भारत की रणनीतिक भूमिका पर उठे सवाल

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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड का नाम बदलकर फिर से यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया गया है। अब इस कमांड से 'इंडो' शब्द हटा दिया गया है। 'इंडो' शब्द को वर्ष 2018 में तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान जोड़ा गया था। इस तरह अमेरिका ने आठ साल पहले लिए गए अपने फैसले को उलट दिया है। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है।

पेंटागन ने क्या कहा?

पेंटागन के अनुसार यह बदलाव केवल ऐतिहासिक पहचान को सम्मान देने के उद्देश्य से किया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। विभाग का कहना है कि इसे पुनः अपनाने से सैनिकों के बीच गौरव और परंपरा की भावना मजबूत होगी। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस नाम परिवर्तन से कमांड की जिम्मेदारियों, क्षेत्राधिकार या सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियां नहीं

पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता।

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर निशाना साधा

अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड से जुड़े मुद्दे को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने यूएस इंडो-पैसिफिक का नाम बदलकर यूएस पैसिफिक कमांड कर दिया है। यानी इसके नाम से 'Indo' शब्द हटा दिया है। 2018 में इस क्षेत्र पर हिंदुस्तान के प्रभाव का सम्मान करते हुए अमेरिका ने अपने कमांड का नाम यूएस पैसिफिक कमांड रखा था। उस वक्त मोदी सरकार ने इसे अपनी जीत बताया था और मोदी के विश्वगुरु बनने का ढोल पीटा था। अब जब अमेरिका ने इस क्षेत्र का नाम बदल दिया है, तो सुई टपक सन्नाटा है। मोदी सरकार की ओर से एक शब्द नहीं कहा जा रहा है। नरेंद्र मोदी पूरी तरह से कंप्रोमाइज्ड हैं, जो ट्रंप के सामने एक शब्द नहीं बोल पा रहे हैं। इसका खामियाजा पूरा देश भुगत रहा है।'

शशि थरूर ने क्या कहा?

अमेरिका की इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर लिखा, "क्वाड के ताबूत में एक और कील?" उन्होंने इस पोस्ट के साथ अमेरिका के युद्ध विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ वॉर) के आदेश का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इस विभाग ने कहा कि नाम में बदलाव कमांड के ऐतिहासिक महत्व का सम्मान करने के लिए किया गया है। इस कमांड की स्थापना 1947 में तब के अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने की थी।

यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है?

अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।

MEDIN EXPO Chennai 2026 में LABOLIT को मिला सम्मान, उमा साइंटिफ़िक ने बढ़ाया भारतीय लैब उपकरण उद्योग का गौरव
चेन्नई । देश की अग्रणी पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण निर्माता कंपनी LABOLIT, जो UMA SCIENTIFIC द्वारा संचालित है, को MEDIN EXPO Chennai 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन और नवाचारपूर्ण प्रयोगशाला समाधानों के लिए सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि कंपनी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक एवं पैथालॉजी प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के लिए भी गर्व का विषय है।
प्रदर्शनी के दौरान LABOLIT के स्टॉल पर बड़ी संख्या में देश ही नहीं अपितु विदेश के   पैथालॉजी प्रयोगशाला विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों एवं व्यवसायिक आगंतुकों ने पहुंचकर कंपनी के उत्पादों और तकनीकी नवाचारों की सराहना की। कंपनी ने अपने उन्नत Micropipettes, Multichannel Micropipettes, Bottle Top Dispensers सहित विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों का प्रदर्शन किया, जिन्हें आगंतुकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई। कंपनी प्रबंधन ने इस सम्मान को अपने ग्राहकों, व्यापारिक सहयोगियों और शुभचिंतकों के विश्वास एवं सहयोग का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि LABOLIT का उद्देश्य भारतीय पैथालॉजी प्रयोगशालाओं को विश्वस्तरीय गुणवत्ता के उपकरण उपलब्ध कराना है, जिससे वैज्ञानिक अनुसंधान और परीक्षण कार्यों को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
LABOLIT – Pulse of World Sciences के संकल्प के साथ कंपनी लगातार नवाचार, गुणवत्ता और ग्राहक संतुष्टि के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर रही है। MEDIN EXPO Chennai 2026 में प्राप्त यह सम्मान कंपनी की बढ़ती प्रतिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली का प्रमाण है। कंपनी के संस्थापक एवं निदेशक शुभम पांडेय ने इस अवसर पर कहा,
“यह सम्मान केवल LABOLIT का नहीं, बल्कि भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, नवाचार और गुणवत्ता के प्रति हमारे संकल्प का सम्मान है। हमारा लक्ष्य ‘Made in India’ उत्पादों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। हम ऐसे वैज्ञानिक उपकरण विकसित कर रहे हैं जो गुणवत्ता, सटीकता और विश्वसनीयता के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरें। आने वाले वर्षों में LABOLIT को वैश्विक प्रयोगशाला उपकरण उद्योग के अग्रणी ब्रांडों में शामिल करना हमारा संकल्प है।”
इस अवसर पर LABOLIT एवं UMA SCIENTIFIC की पूरी टीम को उद्योग जगत एवं शुभचिंतकों द्वारा बधाइयाँ दी गईं ।
इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो राहुल गांधी बनेंगे प्रधानमंत्री,निषादों को मिलेगा आरक्षण: सहनी
रिपोर्ट : लालजी राम मंदिर,जातिगत जनगणना और आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा पर बरसे- मुकेश सहनी।  सुल्तानपुर,विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने सुल्तानपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार, जातिगत जनगणना, निषाद समाज के आरक्षण तथा आगामी राजनीतिक रणनीति को लेकर कई बड़े बयान दिए। मुकेश सहनी ने आरोप लगाया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान जुटाए गए चंदे में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले भी मंदिर निर्माण के नाम पर लगभग 1400 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप सामने आए थे। उन्होंने कहा कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। सहनी ने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति कर सत्ता हासिल करती है, जबकि आम जनता की मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। जातिगत जनगणना के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह राहुल गांधी का प्रमुख एजेंडा रहा है। सहनी ने दावा किया कि केंद्र सरकार राजनीतिक दबाव के चलते इस विषय पर आगे बढ़ी है, लेकिन उसकी नीयत साफ नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि जातिगत जनगणना के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन की सरकार बनने पर सही और पारदर्शी तरीके से जातिगत जनगणना कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि पार्टी संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित करने के लिए वह उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं। सहनी ने घोषणा की कि 25 जुलाई के बाद प्रदेशभर में 101 दिनों की "संकल्प यात्रा" निकाली जाएगी। इस यात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर निषाद समाज को संगठित किया जाएगा तथा आरक्षण के मुद्दे पर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। मुकेश सहनी ने कहा कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं दिया गया तो समाज भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि निषाद समाज अपने संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी के लिए लगातार संघर्ष करता रहेगा। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने डॉ. संजय निषाद पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि समाज के हितों के लिए सत्ता पर प्रभावी दबाव बनाया जाना चाहिए। यदि सरकार आरक्षण की मांग पूरी नहीं करती है तो समाजहित में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता होगी। सहनी ने कहा कि INDIA गठबंधन सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और आबादी के अनुपात में भागीदारी जैसे मुद्दों को मजबूती से उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में यही मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि INDIA गठबंधन की सरकार बनती है तो राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं और निषाद समाज को आरक्षण दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रेस वार्ता में पार्टी के कई पदाधिकारी,कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।
असम के जोरहाट में भारतीय वायुसेना विमान क्रैश में 5 जवान शहीद, लैंडिंग के दौरान हुआ हादसा

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असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरफोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का एक AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में वायुसेना के पांच कर्मी शहीद हो गए, जबकि सह-पायलट गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद जीवित बच गए। उनका इलाज चल रहा है।

वायुसेना जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया

वायुसेना की तरफ से जवानों के बलिदान पर गहरा दुख जताया गया है। वायुसेना का कहना है कि स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। भारतीय वायु सेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में मजबूती से उनके साथ खड़ी है।

जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के हादसा

बता दें कि, असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर शनिवार को भारतीय वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के तुरंत बाद आग की चपेट में आ गया था। इस घटना के बाद एयरबेस पर अफरा-तफरी मच गई और तुरंत इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने अपना काम शुरू कर दिया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जैसे ही विमान रनवे पर उतरा, उसमें अचानक आग लग गई और उससे घना धुआं उठने लगा।

हादसे के वक्त दो टुकड़ों में टूट गया विमान

भारतीय वायुसेना के अधिकारियों के अनुसार, AN-32 परिवहन विमान अरुणाचल प्रदेश से जोरहाट लौट रहा था। इसी दौरान लैंडिंग के समय विमान हादसे का शिकार हो गया। विमान एयरबेस पर उतर रहा था, तभी यह क्रैश हो गया। हादसे की वजह से एयरफोर्स का विमान दो टुकड़ों में टूट गया और वहां से आग और धुएं का गुबार उठता दिखा। यह नजारा काफी भयावह था, जिसे देखते ही एयरपोर्ट और वायुसेना की फायर और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच गईं। उन्होंने तुरंत आग बुझाने का अभियान शुरू किया था।

'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का आदेश

वायु सेना ने इस दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (जांच समिति) बनाई जा रही है। भारतीय वायु सेना ने एक्स पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। वायु सेना ने कहा, 'आज जोरहाट में लैंडिंग के दौरान आईएएफ के एक एएन-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया। दुर्घटना का कारण पता लगाने के लिए 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' का गठन किया जा रहा है'।

दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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मशहूर भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं।

सिर्फ 49 साल की उम्र में निधन

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ। हाल ही में इस दिग्गज शूटर की सर्जरी भी हुई थी बड़ी बात यह है कि जशपाल की उम्र अभी सिर्फ 49 साल ही थी और वे आमतौर पर काफी फिट भी थे। हालांकि, अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के मुताबिक म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय निशानेबाजी टीम वापस घर लट रही थी तभी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच और दिग्गज पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।

सत्यांजल पांडे होंगे इस्लामाबाद में भारत के अगले कार्यवाहक उच्चायुक्त, जानें क्यों अहम है ये नियुक्ति?

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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते बेहद तल्ख बने हुए हैं। इस बीच सरकार ने वरिष्ठ राजनयिक डॉ. सत्यांजल पांडेय को पाकिस्तान में भारत के दूतावास का प्रभारी नियुक्त किया है. डिप्‍लोमेटिक सूत्रों के अनुसर पाकिस्तान ने उनकी नियुक्ति को स्वीकार कर लिया है और वे अगले कुछ सप्ताह में इस्लामाबाद पहुंचकर नई जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।

दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ वाले अधिकारी

सत्याजंल फिलहाल श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त हैं। विदेश सेवा में लंबे अनुभव वाले डॉ. पांडेय को दक्षिण एशिया के मामलों की अच्छी समझ रखने वाले अधिकारियों में गिना जाता है। उन्होंने अपने राजनयिक करियर के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं और पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया है।

पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका क्यों अहम?

जानकारों का मानना है कि श्रीलंका में उनकी तैनाती के दौरान उन्हें दक्षिण एशियाई राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यही अनुभव पाकिस्तान में उनकी नई भूमिका में भी उपयोगी साबित हो सकता है

गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे पांडे

सत्याजंल पांडे इस्लामाबाद में गीतिका श्रीवास्तव की जगह लेंगे, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। गीतिका ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया है।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

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दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

दिल्ली में विपक्षी दलों का महाजुटान, INDIA गठबंधन की बैठक आज, मीटिंग से पहले CPM ने दिखाए तेवर

#indiablocmeeting_today

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को घेरने के लिए 2 साल बाद विपक्षी दल एक बार फिर साथ आ रहे हैं। I.N.D.I.A ब्लॉक की आज दोपहर 12 बजे दिल्ली में अहम बैठक होने जा रही है। कांग्रेस का दावा है कि इसमें 23 विपक्षी दल शामिल होंगे। हालांकि, बैठक से पहले सीपीआईएम ने कांग्रेस को खूब खरी-खोटी सुनाई है।

भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट विपक्ष

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बताया कि 23 दल भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने एक्स पोस्ट में 'इंडिया' को 'इंडिया जनबंधन' लिखा। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले दल भी मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करते हैं और संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मताधिकार से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के साथ खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि I.N.D.I.A. अपनी विविधता के बावजूद एकजुट है।

कौन-कौन से दलों के बैठक में होंगे शामिल

कांग्रेस ने 23 राजनीतिक दलों विपक्षी गठबंधन की बैठक में शामिल होने की पुष्टि कर दी है। इनमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी), झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, माकपा, पीडीपी, राजद, भाकपा, टीवीके जैसे प्रमुख दल शामिल हैं। इसके अलावा कुछ अन्य छोटे दलों जैसे- भाकपा-माले, आरएसपी, वीसीके, एमडीएमके, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, असम जातीय परिषद समेत कई और दलों ने इस बैठक में शामिल होने के संकेत दिए हैं।

DMK-आप बैठक में नहीं होंगे शामिल

डीएमके ने साफ कर दिया है कि वह इस विशेष बैठक में शामिल नहीं होगी। यह विपक्षी रणनीति के लिए झटका माना जा रहा है। विपक्ष की चिंता का कारण संसद का गणित भी है। इससे पहले परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर लोकसभा में सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष के 230 सांसदों ने इसके खिलाफ मतदान किया था। दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण बीजेपी सरकार यह विधेयक पारित नहीं करा सकी थी। अब यदि सरकार मॉनसून सत्र में फिर से इस मुद्दे को लेकर आती है तो विपक्ष के लिए पिछली बार जैसी एकजुटता बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।

सीपीएम ने कांग्रेस को पुराने आरोपों की याद दिलाई

बैठक से पहले सीपीएम ने कांग्रेस को उसके पुराने आरोपों की याद दिलाई है। सीपीएम महासचिव एमए बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कहा कि उनकी पार्टी इस बैठक में शामिल होगी और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास उसका प्रतिनिधित्व करेंगे। हालांकि, उन्होंने केरल चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा सीपीएम और बीजेपी के बीच कथित समझौते के आरोपों पर आपत्ति जताई। बेबी ने कहा कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव प्रचार में पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच समझौते की बात कही थी।

विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम है बैठक

INDIA गठबंधन की सोमवार को नई दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। लगभग दो वर्षों के बाद हो रही इस बैठक को विपक्षी एकता के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और कई राज्यों में चुनावी झटकों के बाद गठबंधन के सामने अपनी एकजुटता और रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने की चुनौती है।