आप के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी, राज्यसभा चेयरमैन ने दी अनुमति, बीजेपी हुई मजबूत

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आम आदमी पार्टी में हुई बगावत के बाद राज्यसभा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आप से अलग हुए सभी 7 सांसदों को अब औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा मान लिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप को बड़ा झटका लगा है।

राज्यसभा सचिवालय ने दी विलय को मंजूरी

शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में विलय करने का ऐलान किया था। राघव चड्ढा ने इसे 'आप' के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का भाजपा में विलय बताया। साथ ही राज्यसभा को लेटर लिख विलय की अनुमति मांगी थी। ऐसे में सोमवार को राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर इस विलय को मंजूरी दे दी है।

राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़कर 113 पहुंची

वहीं, इस बदलाव से बीजेपी को सीधा फायदा हुआ है और उसकी संख्या राज्यसभा में बढ़कर 113 पहुंच गई है। इसके साथ ही एनडीए का आंकड़ा 148 पहुंच गया। वहीं, इस फैसले के बाद आप की ताकत राज्यसभा में सिमटकर बेहद कम हो गई है। अब आप पार्टी के पास महज तीन सांसद ही बचे हैं। इनमें एक सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब से हैं, जबकि दो सदस्य संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से आते हैं।

इन सांसदों का बीजेपी में विलय

जिन सात सांसदों का बीजेपी में विलय हुआ है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी को बीजेपी सांसदों की सूची में दिखाया जा रहा है।

आप ने की थी सदस्यता खत्म करने की मांग

दरअसल, पार्टी से बागी हुए तीन सांसदों के खिलाफ राज्य सभा के चेयरमैन को अर्जी भी दी थी। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की भी मांग की। पार्टी ने दलील दी थी जब इन तीन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान किया था, उस समय 4 अन्य सांसद मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये अल्पमत में है और इनका पार्टी छोड़ना दल-बदल कानून के तहत आता है।

आप के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून नहीं होगा लागू

बता दें कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के बावजूद आप के सांसदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक की सांसदी रद्द करने की मांग, पार्टी छोड़ने वालो के लिए आप का दांव

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आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। शुक्रवार 24 अप्रैल आप को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। इस बगावत की अगुवाई राघव चड्ढा ने किया।

इन सांसदों ने दिया आप को झटका

राघव चड्ढा के साथ जिन सांसदों ने आप छोड़ी, उनमें संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं। इनमें से 6 सांसद पंजाब से और एक दिल्ली से है, जिससे पंजाब की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग

अब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण उनकी राज्यसभा सदस्यता अयोग्य घोषित करने की मांग की है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वह बीजेपी में शामिल होने के लिए राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे।

संजय सिंह ने क्या कहा?

संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, "मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूंगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है।"

क्या है दल-बदल कानून?

भारतीय संविधान के 10वीं अनुसूची के तहत 'दल-बदल विरोधी कानून' को 1985 में लाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में पार्टी बदलने वाले चलन को रोकना और जनता के द्वारा चुनी गई सरकारों में स्थिरता लाना है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई सांसद या विधायक अपनी मर्जी से उस पार्टी को छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता है या सदन में अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उसकी सदन की सदस्यता खत्म की जा सकती है। 10वीं अनुसूची का खंड 4 कहता है कि अगर किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ टूटकर किसी अन्य दल में मिलते हैं तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।

हरिवंश फिर बने राज्यसभा के उपसभापति, पीएम मोदी ने दी बधाई

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राज्यसभा सांसद हरिवंश लगातार तीसरी बार संसद के उच्च सदन में उपसभापति चुन लिए गए हैं। शुक्रवार को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। इसके साथ हरिवंश नारायण सिंह ने इतिहास दर्ज कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि हाल ही में हरिवंश को हाल ही में द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था।

पीएम मोदी ने ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि मैं हरिवंश जी को बधाई देता हूं। राज्य सभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना अपने आप में इस सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास है। सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है उसको एक प्रकार से सदन ने आज मुहर लगा दी है। ये एक सहज कार्यशैली का सम्मान है। हम सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति हो और प्रभावित होते देखा है। ये अपने आप में इस सदन का जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसपर एक प्रकार से सदन ने आज एक मुहर लगा दी है

निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपाध्यक्ष

राज्यसभा के मनोनीत सांसद हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए हैं। राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में वह निर्विरोध चुने गए हालांकि, विपक्षी खेमे से किसी उम्मीदवार को न उतारे जाने के बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय था, जिसकी औपचारिक रूप से आज शुक्रवार को घोषणा की गई।

आप सांसद अशोक मित्तल के घर ईडी की रेड, राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में बने थे डिप्टी लीडर

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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। अशोक मित्तल के घर पर ईडी ने सुबह-सुबह छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के गुरुग्राम समेत करीब 8 से 9 ठिकानों पर यह रेड चल रही है। इसमें अशोक मित्तल के अलावा उनके बेटे से जुड़े ठिकाने भी शामिल हैं। खास बात यह है कि हाल ही में उन्हें राघव चड्डा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था।

न्यूज एजेंसी ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की है। जानकारी के मुताबिक, अशोक मित्तल एक यूनिवर्सिटी चलाते हैं, इसमें फंड से रिलेटेड कुछ गड़बड़ी पाई गई हैं।अशोक मित्तल पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फंड से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फंड से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर की जा रही है। हालांकि, एजेंसी की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीमें दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि फंड फ्लो और संभावित अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।

मान बोले-“टिपिकल मोदी स्टाइल”

इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा पंजाब चुनाव की तैयारी में लगी है और इसी वजह से इस तरह की कार्रवाई हो रही है। उन्होंने इसे “टिपिकल मोदी स्टाइल” भी बताया।

बीजेपी को इसका करारा जवाब देंगे-केजरीवाल

वहीं पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल (ने अपने एक्स पर भगवंत मान के पोस्ट रीपोस्ट करते हुए लिखा: "मोदी जी ने पंजाब में चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन पंजाब के लोग ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। बीजेपी को इसका करारा जवाब देंगे।"

ईडी के एक्शन के सियासी मायने

अशोक मित्तल हाल ही में तब सुर्खियों में आए थे, जब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को हटाकर उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर नियुक्त किया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति के कुछ समय बाद ही ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है।

नीतीश कुमार की नई संसदीय पारी, राज्यसभा सदस्य की शपथ ली

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बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा से अपनी नई सियासी पारी शुरू की। आज दोपहर 12:12 बजे उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। संसद भवन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह के दौरान शपथ दिलाई गई। राज्यसभा के सभापति एवं देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण ने नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

चारों सदनों के सदस्य बने नीतीश

राज्यसभा की शपथ लेते ही नीतीश कुमार देश के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जो विधायक, एमएलसी, लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सांसद रहे हैं। नीतीश ने पहली बार 1985 में विधायक का चुनाव जीता, फिर 1989 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने उसके बाद 2006 में एमएलसी बने और अब राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है।

30 साल से ज्यादा समय से राजनीति में

नीतीश कुनार 30 साल से ज्यादा समय से राजनीति की मुख्य धारा में हैं। पहले बिहार की राजनीति की, फिर केंद्र की। बिहार में मंत्री कभी नहीं बने और मुख्यमंत्री बनने से पहले वह केंद्रीय मंत्री की ताकत हासिल कर चुके थे। 2005 से अब तक वह कुछ समय को छोड़ बाकी समय मुख्यमंत्री रहे। जिस समय सीएम नहीं थे, उस समय भी सारी शक्तियां उनके पास ही समाहित नजर आ रही थीं। सत्ता में कोई रहा, सीएम नीतीश कुमार ही रहे। अब वह सीएम की कुर्सी छोड़ने वाले हैं। इसके लिए उन्होंने विधान परिषद् की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

नीतीश कुमार आज लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ, 2 दशक बाद दिल्ली की सियासत में वापसी

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लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन के कक्ष में उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही नीतीश कुमार के सियासी सफर का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

चारों सदनों के सदस्य होने का बनेगा अनोखा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम अब एक दुर्लभ संसदीय रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। वह विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा के सदस्य बनकर भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों का हिस्सा बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे।

बिहार में जल्द होगा नेतृत्व परिवर्तन

इससे पहले गुरूवार को सीएम नीतीश कुमार ने नई दिल्ली पहुंचते ही साफ कर दिया कि बिहार में अब नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि 'मैंने बिहार में बहुत काम किया है। अब मुझे लगा कि मुझे यहां रहना चाहिए, और मैं यही कर रहा हूं।' नीतीश कुमार ने आगे कहा, 'मैं वहां अपने पद से हट जाऊंगा और यहां काम करूंगा। मैं तीन या चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा। नए लोगों को मुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा।'

30 मार्च को विधान परिषद से दिया इस्तीफा

नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद की सदस्यता से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। जनता दल (यूनाइटेड) सुप्रीमो 16 मार्च को संसद के ऊपरी सदन के लिए निर्वाचित हुए थे।

दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, कल राज्यसभा सदस्‍य के तौर पर लेंगे शपथ

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द‍िल्‍ली पहुंच चके हैं। नीतीश कल यानी 10 अप्रैल को राज्‍यसभा सदस्‍य के तौर पर शपथ लेंगे। राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार के पटना लौटने पर बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं। जानकारी के अनुसार पटना वापस आकर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

आज जेडीयू के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहले से दिल्ली में मौजूद हैं। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू की भूमिका, मंत्री और डिप्टी सीएम के पद पर विचार विमर्श किया जाएगा। निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी? इस पर भी चर्चा की जाएगी।

पीएम मोदी और अमित शाह से करेंगे मुलाकात

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलकात करेंगे। बिहार में नई एनडीए सरकार के प्रारूप को लेकर सीएम नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर सकते हैं। नई सरकार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? कौन रिपीट होंगे? किस नए चेहरे को मौका दिया जाएगा? इस पर सीएम नीतीश कुमार अपनी राय रखेंगे।

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बिहार में नई सरकार के गठन के लिए कवायद तेज है लगातार बिहार में सर्गर्मिया तेज है। आज जहां नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना हुए राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। वहीं भाजपा के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी दिल्ली रवाना हुए। कल भाजपा की बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री शामिल होंगे। जिस तरह से नई सरकार के गठन की कवायद् है उसको लेकर बैठकों का दौर लगातार जारी है। 48 से 72 घंटे के अंदर नए मुख्यमंत्री के नाम से पर्दा हटने की संभावना जताई जा रही है। सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

अगले सीएम के नामों की चर्चा

बिहार के सियासी गलियारों में अगले सीएम के नामों की चर्चा हो रही। सबसे आगे जिन नामों को माना जा रहा है,उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। सम्राट चौधरी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर उन्हें आक्रामक और फैसले लेने वाला नेता माना जाता है। दूसरे नंबर पर, यानी मजबूत दावेदार के रूप में विजय कुमार सिन्हा का नाम लगातार चर्चा में है। विजय सिन्हा को संघ के करीब और अनुशासित नेता के रूप में देखा जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, जो संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रख सकते हैं।

​Boardrooms to Film Sets: Rajesh Babu K Sooranad Expands Creative Footprint in Malayalam Cinema

Kozhikode: The inspiring journey of Rajesh Babu K Sooranad continues to gain momentum as the multi-talented creative professional strengthens his presence in the Malayalam film industry. Transitioning from a successful career in human resources to cinema, Sooranad is now making his mark as a music director, producer, singer, and filmmaker.

Hailing from Sooranad village in Kerala's Kollam district, his story reflects determination, versatility, and a deep passion for storytelling. Over the years, he has steadily built a reputation for his creative excellence while maintaining a strong foundation in management and leadership.

Strong Portfolio as Music Director

​In a significant achievement, Rajesh Babu K Sooranad has completed work on 20 films as a music director, marking a consistent rise in his musical journey. His compositions are known for their emotional depth, blending traditional Malayalam elements with modern cinematic sound.

​His notable projects include Perfume: Her Fragrance, Anandakalyanam, Binary, and Zha – The Incessant Rain, all of which have contributed to his growing recognition in the industry.

Expanding Role as Film Producer

​Alongside music, Sooranad has also emerged as a proactive film producer. Under his banner, VOC Media Private Limited, he has produced six films, supporting independent cinema and new talent.

​Among these, Perfume: Her Fragrance, Binary, and Zha – The Incessant Rain have already been released and have received attention for both their storytelling and musical quality. Meanwhile, his upcoming films—INI: The Unknown Tomorrow, Better Half, and Ennum: Forever—are currently in the post-production stage, creating anticipation among audiences and industry observers.

Directorial Debut with Ennum: Forever

​In a major milestone, Rajesh Babu K Sooranad is stepping into direction with his first directorial venture, Ennum: Forever. The project holds special significance as he is writing, directing, and producing the film himself.

​This move marks his evolution into a complete filmmaker and highlights his growing influence in the Malayalam cinema landscape.

A Voice Beyond Composition

​Beyond films, Sooranad has also made a strong impression as a singer and independent music creator. He has released 10 music albums, contributing both as composer and vocalist.

​His albums—including A Tribute to Kerala 60, Hridayame, Ponnonam, Ente Keralam, Nammude Kozhikode, Miss You Maveli, Makarachyothi, Sangeetha Samrajya, Karppooradeepam, and Perunnal Nilavu—reflect Kerala's cultural richness and emotional depth, resonating widely with audiences.

Blending Management with Creativity

​What distinguishes Sooranad is his ability to merge his HR expertise with creative execution. His background in HR and competence in Team Management have helped him efficiently coordinate productions and mentor emerging talent.

​Through his projects, he has opened doors for numerous new artists and technicians, reinforcing his reputation as a creator who believes in giving back to the industry.

Recognition and Future Outlook

​With growing recognition, including accolades for music direction and increasing visibility on OTT and theatrical platforms, Sooranad is steadily building a strong creative ecosystem. His upcoming films are expected to further strengthen his position, while his continued work in independent music keeps him connected to grassroots audiences.

A Modern Multi-Talent

​Rajesh Babu K Sooranad's journey exemplifies how passion and discipline can lead to success across multiple domains. From HR professional to filmmaker, his evolution reflects the changing face of Indian cinema.

​As Malayalam cinema continues to expand globally, his growing body of work positions him as one of the promising multi-faceted talents to watch in the coming years.

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राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

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राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

आप के 7 सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी, राज्यसभा चेयरमैन ने दी अनुमति, बीजेपी हुई मजबूत

#numberofbjpmpsintherajyasabhahasreached113withanewnotification

आम आदमी पार्टी में हुई बगावत के बाद राज्यसभा में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। आप से अलग हुए सभी 7 सांसदों को अब औपचारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी का हिस्सा मान लिया गया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने आम आदमी पार्टी (आप) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद उच्च सदन में आप को बड़ा झटका लगा है।

राज्यसभा सचिवालय ने दी विलय को मंजूरी

शुक्रवार को राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में विलय करने का ऐलान किया था। राघव चड्ढा ने इसे 'आप' के दो-तिहाई से ज्यादा सांसदों का भाजपा में विलय बताया। साथ ही राज्यसभा को लेटर लिख विलय की अनुमति मांगी थी। ऐसे में सोमवार को राज्यसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी कर इस विलय को मंजूरी दे दी है।

राज्यसभा में BJP की ताकत बढ़कर 113 पहुंची

वहीं, इस बदलाव से बीजेपी को सीधा फायदा हुआ है और उसकी संख्या राज्यसभा में बढ़कर 113 पहुंच गई है। इसके साथ ही एनडीए का आंकड़ा 148 पहुंच गया। वहीं, इस फैसले के बाद आप की ताकत राज्यसभा में सिमटकर बेहद कम हो गई है। अब आप पार्टी के पास महज तीन सांसद ही बचे हैं। इनमें एक सांसद बलबीर सिंह सीचेवाल पंजाब से हैं, जबकि दो सदस्य संजय सिंह और नारायण दास गुप्ता दिल्ली से आते हैं।

इन सांसदों का बीजेपी में विलय

जिन सात सांसदों का बीजेपी में विलय हुआ है, उनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं। अब राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन सभी को बीजेपी सांसदों की सूची में दिखाया जा रहा है।

आप ने की थी सदस्यता खत्म करने की मांग

दरअसल, पार्टी से बागी हुए तीन सांसदों के खिलाफ राज्य सभा के चेयरमैन को अर्जी भी दी थी। पार्टी ने इन सांसदों की सदस्यता खत्म करने की भी मांग की। पार्टी ने दलील दी थी जब इन तीन सांसदों ने AAP छोड़ने का ऐलान किया था, उस समय 4 अन्य सांसद मौजूद नहीं थे। ऐसे में ये अल्पमत में है और इनका पार्टी छोड़ना दल-बदल कानून के तहत आता है।

आप के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून नहीं होगा लागू

बता दें कि दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के बावजूद आप के सांसदों पर दल-बदल कानून लागू नहीं होगा, क्योंकि इसमें यह प्रावधान है कि यदि किसी विधायक दल के कम से कम दो-तिहाई सदस्य अलग या किसी अन्य पार्टी में विलय कर लेते हैं, तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।

राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक की सांसदी रद्द करने की मांग, पार्टी छोड़ने वालो के लिए आप का दांव

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आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने बगावत कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। शुक्रवार 24 अप्रैल आप को तब बड़ा झटका लगा जब उसके 7 राज्यसभा सदस्यों ने पार्टी छोड़ने और बीजेपी में शामिल होने की घोषणा की। इस बगावत की अगुवाई राघव चड्ढा ने किया।

इन सांसदों ने दिया आप को झटका

राघव चड्ढा के साथ जिन सांसदों ने आप छोड़ी, उनमें संदीप पाठक, स्वाति मालीवाल, अशोक मित्तल, विक्रमजीत साहनी, राजेंद्र गुप्ता और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह शामिल हैं। इनमें से 6 सांसद पंजाब से और एक दिल्ली से है, जिससे पंजाब की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है।

उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग

अब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण उनकी राज्यसभा सदस्यता अयोग्य घोषित करने की मांग की है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वह बीजेपी में शामिल होने के लिए राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को उच्च सदन से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे।

संजय सिंह ने क्या कहा?

संजय सिंह ने एक्स पर लिखा, "मैं माननीय राज्यसभा सभापति को एक पत्र प्रस्तुत करूंगा, जिसमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल और संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के कारण राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की जाएगी, क्योंकि यह संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता त्यागने के समान है।"

क्या है दल-बदल कानून?

भारतीय संविधान के 10वीं अनुसूची के तहत 'दल-बदल विरोधी कानून' को 1985 में लाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राजनीति में पार्टी बदलने वाले चलन को रोकना और जनता के द्वारा चुनी गई सरकारों में स्थिरता लाना है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई सांसद या विधायक अपनी मर्जी से उस पार्टी को छोड़ता है जिसके टिकट पर वह चुनाव जीता है या सदन में अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ जाकर वोट करता है तो उसकी सदन की सदस्यता खत्म की जा सकती है। 10वीं अनुसूची का खंड 4 कहता है कि अगर किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य एक साथ टूटकर किसी अन्य दल में मिलते हैं तो उन पर यह कानून लागू नहीं होता और उनकी सदस्यता बरकरार रहती है।

हरिवंश फिर बने राज्यसभा के उपसभापति, पीएम मोदी ने दी बधाई

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राज्यसभा सांसद हरिवंश लगातार तीसरी बार संसद के उच्च सदन में उपसभापति चुन लिए गए हैं। शुक्रवार को उन्हें निर्विरोध राज्यसभा का उपसभापति चुना गया है। इसके साथ हरिवंश नारायण सिंह ने इतिहास दर्ज कर दिया। ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी मनोनीत सांसद को उपसभापति पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बता दें कि हाल ही में हरिवंश को हाल ही में द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया था।

पीएम मोदी ने ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश को तीसरे कार्यकाल के लिए राज्यसभा का उपसभापति चुने जाने पर बधाई दी। पीएम मोदी ने कहा कि मैं हरिवंश जी को बधाई देता हूं। राज्य सभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना अपने आप में इस सदन का आपके प्रति गहरा विश्वास है। सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है उसको एक प्रकार से सदन ने आज मुहर लगा दी है। ये एक सहज कार्यशैली का सम्मान है। हम सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति हो और प्रभावित होते देखा है। ये अपने आप में इस सदन का जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का सदन को जो लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसपर एक प्रकार से सदन ने आज एक मुहर लगा दी है

निर्विरोध चुने गए राज्यसभा के उपाध्यक्ष

राज्यसभा के मनोनीत सांसद हरिवंश नारायण सिंह लगातार तीसरी बार राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए हैं। राज्यसभा के उपाध्यक्ष के रूप में वह निर्विरोध चुने गए हालांकि, विपक्षी खेमे से किसी उम्मीदवार को न उतारे जाने के बाद उनका निर्विरोध चुना जाना तय था, जिसकी औपचारिक रूप से आज शुक्रवार को घोषणा की गई।

आप सांसद अशोक मित्तल के घर ईडी की रेड, राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में बने थे डिप्टी लीडर

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आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। अशोक मित्तल के घर पर ईडी ने सुबह-सुबह छापेमारी की है। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के गुरुग्राम समेत करीब 8 से 9 ठिकानों पर यह रेड चल रही है। इसमें अशोक मित्तल के अलावा उनके बेटे से जुड़े ठिकाने भी शामिल हैं। खास बात यह है कि हाल ही में उन्हें राघव चड्डा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था।

न्यूज एजेंसी ANI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन को लेकर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल से जुड़े कई परिसरों पर छापेमारी की है। जानकारी के मुताबिक, अशोक मित्तल एक यूनिवर्सिटी चलाते हैं, इसमें फंड से रिलेटेड कुछ गड़बड़ी पाई गई हैं।अशोक मित्तल पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक हैं।

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फंड से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच

बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के फंड से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर की जा रही है। हालांकि, एजेंसी की ओर से अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीमें दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं। इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि फंड फ्लो और संभावित अनियमितताओं का पता लगाया जा सके।

मान बोले-“टिपिकल मोदी स्टाइल”

इस मामले पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भाजपा पंजाब चुनाव की तैयारी में लगी है और इसी वजह से इस तरह की कार्रवाई हो रही है। उन्होंने इसे “टिपिकल मोदी स्टाइल” भी बताया।

बीजेपी को इसका करारा जवाब देंगे-केजरीवाल

वहीं पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल (ने अपने एक्स पर भगवंत मान के पोस्ट रीपोस्ट करते हुए लिखा: "मोदी जी ने पंजाब में चुनावों की तैयारी शुरू कर दी। लेकिन पंजाब के लोग ये बर्दाश्त नहीं करेंगे। बीजेपी को इसका करारा जवाब देंगे।"

ईडी के एक्शन के सियासी मायने

अशोक मित्तल हाल ही में तब सुर्खियों में आए थे, जब आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को हटाकर उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर नियुक्त किया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति के कुछ समय बाद ही ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक तौर पर भी अहम मानी जा रही है।

नीतीश कुमार की नई संसदीय पारी, राज्यसभा सदस्य की शपथ ली

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बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने आज राज्यसभा से अपनी नई सियासी पारी शुरू की। आज दोपहर 12:12 बजे उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। संसद भवन में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह के दौरान शपथ दिलाई गई। राज्यसभा के सभापति एवं देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण ने नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

चारों सदनों के सदस्य बने नीतीश

राज्यसभा की शपथ लेते ही नीतीश कुमार देश के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं जो विधायक, एमएलसी, लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सांसद रहे हैं। नीतीश ने पहली बार 1985 में विधायक का चुनाव जीता, फिर 1989 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने उसके बाद 2006 में एमएलसी बने और अब राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है।

30 साल से ज्यादा समय से राजनीति में

नीतीश कुनार 30 साल से ज्यादा समय से राजनीति की मुख्य धारा में हैं। पहले बिहार की राजनीति की, फिर केंद्र की। बिहार में मंत्री कभी नहीं बने और मुख्यमंत्री बनने से पहले वह केंद्रीय मंत्री की ताकत हासिल कर चुके थे। 2005 से अब तक वह कुछ समय को छोड़ बाकी समय मुख्यमंत्री रहे। जिस समय सीएम नहीं थे, उस समय भी सारी शक्तियां उनके पास ही समाहित नजर आ रही थीं। सत्ता में कोई रहा, सीएम नीतीश कुमार ही रहे। अब वह सीएम की कुर्सी छोड़ने वाले हैं। इसके लिए उन्होंने विधान परिषद् की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

नीतीश कुमार आज लेंगे राज्यसभा सदस्य की शपथ, 2 दशक बाद दिल्ली की सियासत में वापसी

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लगभग दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तैयारी में हैं। नीतीश कुमार आज राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। नीतीश कुमार को राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन के कक्ष में उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ दिलाई जाएगी। इसके साथ ही नीतीश कुमार के सियासी सफर का एक नया अध्याय शुरू हो जाएगा।

चारों सदनों के सदस्य होने का बनेगा अनोखा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार के नाम अब एक दुर्लभ संसदीय रिकॉर्ड दर्ज होने जा रहा है। वह विधानसभा, विधान परिषद और लोकसभा के बाद अब राज्यसभा के सदस्य बनकर भारतीय लोकतंत्र के चारों सदनों का हिस्सा बनने वाले नेताओं की फेहरिस्त में शामिल हो जाएंगे।

बिहार में जल्द होगा नेतृत्व परिवर्तन

इससे पहले गुरूवार को सीएम नीतीश कुमार ने नई दिल्ली पहुंचते ही साफ कर दिया कि बिहार में अब नए मुख्यमंत्री होंगे। उन्होंने कहा कि 'मैंने बिहार में बहुत काम किया है। अब मुझे लगा कि मुझे यहां रहना चाहिए, और मैं यही कर रहा हूं।' नीतीश कुमार ने आगे कहा, 'मैं वहां अपने पद से हट जाऊंगा और यहां काम करूंगा। मैं तीन या चार दिनों में इस्तीफा दे दूंगा। नए लोगों को मुख्यमंत्री और मंत्री बनाया जाएगा।'

30 मार्च को विधान परिषद से दिया इस्तीफा

नीतीश कुमार राज्य विधान परिषद की सदस्यता से पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचन के बाद उन्होंने 30 मार्च को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। जनता दल (यूनाइटेड) सुप्रीमो 16 मार्च को संसद के ऊपरी सदन के लिए निर्वाचित हुए थे।

दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, कल राज्यसभा सदस्‍य के तौर पर लेंगे शपथ

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द‍िल्‍ली पहुंच चके हैं। नीतीश कल यानी 10 अप्रैल को राज्‍यसभा सदस्‍य के तौर पर शपथ लेंगे। राज्यसभा सदस्य पद की शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार के पटना लौटने पर बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत हैं। जानकारी के अनुसार पटना वापस आकर वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। जिसके बाद राज्य में नई सरकार के गठन की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

आज जेडीयू के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने से पहले जनता दल यूनाईटेड के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक करेंगे। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह पहले से दिल्ली में मौजूद हैं। बैठक में राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सभी नेता मौजूद रहेंगे। इस बैठक में सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू की भूमिका, मंत्री और डिप्टी सीएम के पद पर विचार विमर्श किया जाएगा। निशांत कुमार की क्या भूमिका होगी? इस पर भी चर्चा की जाएगी।

पीएम मोदी और अमित शाह से करेंगे मुलाकात

शुक्रवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलकात करेंगे। बिहार में नई एनडीए सरकार के प्रारूप को लेकर सीएम नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत कर सकते हैं। नई सरकार का मंत्रिमंडल कैसा रहेगा? कौन रिपीट होंगे? किस नए चेहरे को मौका दिया जाएगा? इस पर सीएम नीतीश कुमार अपनी राय रखेंगे।

बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज

बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दिल्ली रवाना होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बिहार में नई सरकार के गठन के लिए कवायद तेज है लगातार बिहार में सर्गर्मिया तेज है। आज जहां नीतीश कुमार दिल्ली के लिए रवाना हुए राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। वहीं भाजपा के नेता और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा भी दिल्ली रवाना हुए। कल भाजपा की बैठक में दोनों उप मुख्यमंत्री शामिल होंगे। जिस तरह से नई सरकार के गठन की कवायद् है उसको लेकर बैठकों का दौर लगातार जारी है। 48 से 72 घंटे के अंदर नए मुख्यमंत्री के नाम से पर्दा हटने की संभावना जताई जा रही है। सियासी गलियारों में चर्चाओं का दौर जारी है।

अगले सीएम के नामों की चर्चा

बिहार के सियासी गलियारों में अगले सीएम के नामों की चर्चा हो रही। सबसे आगे जिन नामों को माना जा रहा है,उनमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रमुख है। सम्राट चौधरी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और पार्टी के भीतर उनका प्रभाव लगातार बढ़ा है। वे पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक तौर पर उन्हें आक्रामक और फैसले लेने वाला नेता माना जाता है। दूसरे नंबर पर, यानी मजबूत दावेदार के रूप में विजय कुमार सिन्हा का नाम लगातार चर्चा में है। विजय सिन्हा को संघ के करीब और अनुशासित नेता के रूप में देखा जाता है। वे पहले विधानसभा अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव रखते हैं। पार्टी के भीतर उन्हें एक संतुलित नेता के रूप में देखा जाता है, जो संगठन और सरकार के बीच तालमेल बनाए रख सकते हैं।

​Boardrooms to Film Sets: Rajesh Babu K Sooranad Expands Creative Footprint in Malayalam Cinema

Kozhikode: The inspiring journey of Rajesh Babu K Sooranad continues to gain momentum as the multi-talented creative professional strengthens his presence in the Malayalam film industry. Transitioning from a successful career in human resources to cinema, Sooranad is now making his mark as a music director, producer, singer, and filmmaker.

Hailing from Sooranad village in Kerala's Kollam district, his story reflects determination, versatility, and a deep passion for storytelling. Over the years, he has steadily built a reputation for his creative excellence while maintaining a strong foundation in management and leadership.

Strong Portfolio as Music Director

​In a significant achievement, Rajesh Babu K Sooranad has completed work on 20 films as a music director, marking a consistent rise in his musical journey. His compositions are known for their emotional depth, blending traditional Malayalam elements with modern cinematic sound.

​His notable projects include Perfume: Her Fragrance, Anandakalyanam, Binary, and Zha – The Incessant Rain, all of which have contributed to his growing recognition in the industry.

Expanding Role as Film Producer

​Alongside music, Sooranad has also emerged as a proactive film producer. Under his banner, VOC Media Private Limited, he has produced six films, supporting independent cinema and new talent.

​Among these, Perfume: Her Fragrance, Binary, and Zha – The Incessant Rain have already been released and have received attention for both their storytelling and musical quality. Meanwhile, his upcoming films—INI: The Unknown Tomorrow, Better Half, and Ennum: Forever—are currently in the post-production stage, creating anticipation among audiences and industry observers.

Directorial Debut with Ennum: Forever

​In a major milestone, Rajesh Babu K Sooranad is stepping into direction with his first directorial venture, Ennum: Forever. The project holds special significance as he is writing, directing, and producing the film himself.

​This move marks his evolution into a complete filmmaker and highlights his growing influence in the Malayalam cinema landscape.

A Voice Beyond Composition

​Beyond films, Sooranad has also made a strong impression as a singer and independent music creator. He has released 10 music albums, contributing both as composer and vocalist.

​His albums—including A Tribute to Kerala 60, Hridayame, Ponnonam, Ente Keralam, Nammude Kozhikode, Miss You Maveli, Makarachyothi, Sangeetha Samrajya, Karppooradeepam, and Perunnal Nilavu—reflect Kerala's cultural richness and emotional depth, resonating widely with audiences.

Blending Management with Creativity

​What distinguishes Sooranad is his ability to merge his HR expertise with creative execution. His background in HR and competence in Team Management have helped him efficiently coordinate productions and mentor emerging talent.

​Through his projects, he has opened doors for numerous new artists and technicians, reinforcing his reputation as a creator who believes in giving back to the industry.

Recognition and Future Outlook

​With growing recognition, including accolades for music direction and increasing visibility on OTT and theatrical platforms, Sooranad is steadily building a strong creative ecosystem. His upcoming films are expected to further strengthen his position, while his continued work in independent music keeps him connected to grassroots audiences.

A Modern Multi-Talent

​Rajesh Babu K Sooranad's journey exemplifies how passion and discipline can lead to success across multiple domains. From HR professional to filmmaker, his evolution reflects the changing face of Indian cinema.

​As Malayalam cinema continues to expand globally, his growing body of work positions him as one of the promising multi-faceted talents to watch in the coming years.

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राघव चड्डा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए गए, क्या है AAP के एक्शन के पीछे की वजह?

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर इन दिनों सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में बीजेपी से मिली करारी हार के बाद पार्टी दबाव में है। इस बीच राज्यसभा में एक बड़ा बदलाव हुआ है, जिसने पार्टी के अंदरखाने की खींचतान को सतह पर ला दिया है। दरअसल आप ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया है। इतना ही नहीं, राज्यसभा में उनके बोलने पर भी रोक लगा दी गई है।

अशोक मित्तल को मिली राघव चड्ढा की जगह

आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटा दिया है। पार्टी ने राज्य सभा सचिवालय को इस संदर्भ में एक पत्र भेजा। वहीं अब अशोक मित्तल राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की ओर से उपनेता होंगे। आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सांसद अशोक मित्तल को पार्टी का उप-नेता नियुक्त करने का आग्रह किया है।

राघव चड्ढा के बोलने पर भी रोक

आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को सूचित किया है कि सांसद राघव चड्ढा को संसद में बोलने के लिए समय आवंटित न किया जाए। राघव चड्ढा पर यह एक्शन ऐसे वक्त में हुआ है, जब वह लगातार राज्यसभा में जनहित के मुद्दों पर वोकल थे। लगातार जनहित के मुद्दों को उठा रहे थे। चाहे वो एयरपोर्ट पर 10 रुपए की चाय हो या डिलीवरी बॉयज के मुद्दे हों।

मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए डाटा रोलओवर की सुविधा की मांग

राघव चड्ढा ने बीते दिनों राज्यसभा में दूरसंचार कंपनियों के डाटा इस्तेमाल के तरीके पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि जो डाटा उपभोक्ता इस्तेमाल नहीं कर पाते, वह खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि अगले दिन के लिए बचा रहना चाहिए। अभी रोजाना मिलने वाला डाटा रात 12 बजे के बाद खत्म हो जाता है, जबकि इसके लिए उपभोक्ता पैसे चुका चुके होते हैं। इसलिए इसका फायदा कंपनियों को नहीं, बल्कि ग्राहकों को मिलना चाहिए। चड्ढा ने सुझाव दिया था कि बचे हुए डाटा के आधार पर अगले महीने रिचार्ज में छूट दी जाए और ग्राहकों को डाटा रोलओवर की सुविधा मिले।

राघव चड्ढा पर एक्शन की वजह क्या?

लगातार जनगित के मुद्दों को उठाने के बाद भी आम आमदी पार्टी की ओर से कुए गए एक्शन पर सवाल उठ रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी हाई कमान ने उन्हें चेतावनी दी थी कि वे बिना चर्चा के कुछ मुद्दों पर बोल रहे हैं। वह राज्यसभा में किस मुद्दे को उठाएंगे, इसकी जानकारी भी पार्टी को नहीं देते थे। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का पालन न करने के आरोप में लिया गया हो सकता है। राघव चड्ढा पर आरोप लगते रहे हैं कि वह आम आदमी पार्टी की लाइन से अलग बात करते हैं। अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को जब राउज एवेन्यू कोर्ट बरी किया था, तब भी राघव चड्ढा का बयान सामने नहीं आया था।

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

#rajyasabhaelection2026finalresults37_seats

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।