बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने मोहम्मद यूनुस पर लगाया गंभीर आरोप, तारिक राज में बड़ा खुलासा

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

यूनुस पर संविधान पालन नहीं करने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश में सरकार बदलते ही एक ऐसा खुलासा किया है। कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने 18 महीने की अपनी अंतरिम सरकार में संविधान का पालन नहीं किया। यूनुस ने अपना पद संभालते हुए न तो संस्थागत समन्वय बनाए रखा और न ही उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की जानकारी दी।

यूनुस ने विदेश यात्राओं की नहीं दी जानकारी

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संविधान कहता है कि विदेश यात्रा की जानकारी राष्ट्रपति को देनी चाहिए और दौरे के बाद भी राष्ट्रपति को बताया जाना चाहिए। यूनुस के 14-15 विदेशी दौरों के बारे में मुझे कभी नहीं बताया गया। इसमें अमेरिका से हुआ व्यापार समझौता भी शामिल है। बांग्लादेशी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को बिना पूछे रद्द कर दिया गया। कोसोवो और कतर से मिले निमंत्रणों को उनके नाम से यह कहकर ठुकरा दिया गया कि राष्ट्रपति राज्य कार्यों में बहुत व्यस्त हैं।

सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश का आरोप

शहाबुद्दीन ने तंज करते हुए कहा कि क्या हमारे संविधान में राष्ट्रपति इतने व्यस्त रहते हैं कि उनसे पूछा भी न जाए? राष्ट्रपति का आरोप है कि देश और विदेश में उनकी सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश की गई। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया, जबकि परंपरा के अनुसार इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।

पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस का पूरा ध्यान उनको पद से हटाने पर रहा, वो अपने कार्यकाल में सिर्फ मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहें। यूनुस ने ना सिर्फ मेरे खिलाफ राजनीतिक स्तर पर साजिशें रचीं बल्कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश भी रची।

पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
मसीही नेतृत्व,अंतरराष्ट्रीय दावे और वित्तीय अनियमित की जांच हो:- सी. एन. आई.

रायपुर- छत्तीसगढ़ में मसीही नेतृत्व को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। स्वयं को समुदाय का प्रतिनिधि बताकर दिए जा रहे सार्वजनिक बयान व सोशल मीडिया पर सक्रिय अभियान और विदेशी संपर्क के दावों ने प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने इन घटनाक्रमों पर प्रेसवार्ता कर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जांच की मांग की है।

उक्त विवाद उस समय और गहरा गया जब सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित किए जा सकते हैं, यहां तक कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल बुलाने की बात भी कही गई। मसीह समुदाय का कहना है कि ऐसे दावे तब और गंभीर हो जाते हैं जब संबंधित व्यक्ति को किसी भी आधिकारिक चर्च संरचना द्वारा अधिकृत प्रतिनिधित्व प्राप्त न हो।

इसी के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर यूट्यूब चैनल के माध्यम से क्यूआर कोड द्वारा धन संग्रह के मुद्दे ने भी नए सवाल खड़े किए हैं। डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने प्रशासन से मांग की है कि डिजिटल लेन-देन, सार्वजनिक दावों और संबंधित बयानों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि विरुद्ध तत्व पाया जाए तो कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डायोसिस के अनुसार चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की प्रशासनिक एवं धार्मिक व्यवस्था एक विधिवत संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत संचालित होती है। किसी भी व्यक्ति को अध्यक्ष या प्रतिनिधि के रूप में मान्यता केवल निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत नियुक्ति के माध्यम से दी जाती है। जारी बयान में बताया गया है कि पन्नालाल को मसीह समुदाय द्वारा ऐसी कोई अधिकृत मान्यता प्रदान नहीं दी गई है।

सिनड के आधिकारिक पत्र

इस विवाद पर नई दिल्ली के जनरल सेक्रेटरी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र का भी उल्लेख किया गया है जिसमें संबंधित प्रसारित दावों को तथ्यहीन बताया गया है। डायोसिस का कहना है कि डायोसिस के नाम पर भ्रम फैलाने वाले कथनों का आधिकारिक संरचना से कोई संबंध नहीं है।

सोशल मीडिया गतिविधियों पर आपत्ति

डायोसिस ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम नामक संस्था के माध्यम से स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि घोषित कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर यूट्यूब चैनल पर विभिन्न विषयों पर बयान बाजी दिए जा रहे हैं। इन गतिविधियों को लेकर समाज में भ्रम और संभावित तनाव की आशंका जताई गई है।

मसीह समुदाय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की ऐसी बयानबाजी जिससे विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो ये चर्च की शिक्षाओं एवं मूल्यों के विपरीत है। सी.एन.आई ने दोहराया कि वह सदैव शांति व सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने इस मामले में रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपे जाने की पुष्टि की है। शिकायत में संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की जांचए आवश्यक होने पर चैनल को प्रतिबंधित करने तथा विधि अनुसार अपराध दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।

साथ ही प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की विभाजनकारी या राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त पाए जाने पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मीडिया से सत्यापन की अपील

डायोसिस ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि मसीही समुदाय के नाम पर दिए जा रहे किसी भी सार्वजनिक बयान को आधिकारिक मानने से पूर्व चर्च की अधिकृत संरचना से सत्यापन अवश्य किया जाए।

व्यापक सामाजिक संदर्भ

विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक पहचान के नाम पर की जा रही बयान बाजी अक्सर संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक संस्थाओं द्वारा स्पष्ट रुख अपनाना सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने अंत में सभी समुदायों से शांति, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मर्यादा की अपील की है।

अतिरिक्त तथ्य एवं गंभीर आपत्तियाँ

डायोसिस के संज्ञान में एक वीडियो आया है। जिसमें अरुण पन्नालाल द्वारा यह दावा करते लिख रहें है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पत्र लिखकर भारत में प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया है और कथित रूप से प्रतिनिधि यह आया था।

डायोसिस स्पष्ट करना चाहता है कि अरुण पन्नालाल का न तो किसी चर्च से आधिकारिक संबंध है न ही वे किसी अधिकृत चर्च निकाय के सदस्य या नियुक्त प्रतिनिधि हैं। ऐसी स्थिति में स्वयं को मसीही समाज का अध्यक्ष बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दावा करना भ्रामक एवं गंभीर विषय है। जिससे समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी प्रकार के एक अन्य वीडियो में मसीही समुदाय के राष्ट्रीय स्तर के मॉडरेटर के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। डायोसिस का मानना है कि इस प्रकार की भाषा न केवल संस्थागत मर्यादा के विपरीत है बल्कि समुदाय की गरिमा को भी आहत करती है।

अंतरराष्ट्रीय दावे एवं राष्ट्रीय हित से जुड़ी गंभीर चिंता

डायोसिस के संज्ञान में आए एक वीडियो में अरुण पन्नालाल द्वारा यह कथन किया गया है कि वे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से संपर्क कर सकते हैं तथा व्हाइट हाउस से प्रतिनिधियों को बुलाने की क्षमता रखते हैं। इस प्रकार के दावों को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है।

डायोसिस ने स्पष्ट किया कि अरुण पन्नालाल किसी भी चर्च डायोसिस या राष्ट्रीय स्तर के मसीही निकाय के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं। ऐसे में स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार का संपर्क या प्रतिनिधित्व का दावा करना भ्रामक स्थिति उत्पन्न कर सकता है। डायोसिस ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत से संबंधित विषयों पर अप्रमाणित अथवा भ्रामक जानकारी यदि किसी अंतरराष्ट्रीय मंच या व्यक्ति तक पहुंचाई जाती है तो इससे देश की छवि सामाजिक एकता एवं संवेदनशील हित प्रभावित हो सकते हैं।

नितिन लॉरेंस ने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके विषय में किसी भी प्रकार की अपुष्ट या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत की गई जानकारी राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार के दावों की गंभीर जांच होना आवश्यक है।

डायोसिस ने प्रशासन एवं पुलिस विभाग से आग्रह किया है कि

संबंधित वीडियो और बयानों की विधिवत जांच की जाए।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत परीक्षण किया जाए।

यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि.विरुद्ध तत्व पाया जाए तो उचित कार्रवाई की जाए।

डायोसिस पुनः स्पष्ट करता है कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया भारत के संविधान, उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या विभाजनकारी गतिविधि का समर्थन नहीं करता।

वित्तीय पारदर्शिता एवं जांच से संबंधित गंभीर प्रश्न डायोसिस के संज्ञान में यह भी आया है कि संबंधित यूट्यूब चैनल के माध्यम से क्यूआर कोड एवं अन्य डिजिटल भुगतान साधनों द्वारा धनराशि एकत्रित की जा रही है। चूंकि यह गतिविधि सार्वजनिक मंच पर की जा रही है, अतः इसकी वैधानिकताए लेखा परीक्षण एवं धन के उपयोग की पारदर्शिता की जांच किया जाना आवश्यक है।

डायोसिस ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि उक्त डिजिटल लेन.देन की विधिवत जांच की जाए। यह परीक्षण किया जाए कि धनराशि किस उद्देश्य से एकत्रित की गई तथा उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।

यदि कोई अनियमितता पाई जाए तो संबंधित कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके अतिरिक्त यह भी चर्चा में आया है कि सालेम स्कूल से संबंधित एक प्रकरण में वित्तीय लेन.देन और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठे थे। जनसामान्य के बीच इस विषय में विभिन्न आरोप एवं आशंकाएँ व्यक्त की गई हैं। डायोसिस का मत है कि उक्त प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की जाए। विद्यालय की फीस से संबंधित समस्त वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण किया जाए।

यदि कोई अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो विधि अनुसार कार्रवाई की जाए।

डायोसिस स्पष्ट करता है कि उसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहींए बल्कि पारदर्शिता एवं विधिसम्मत जांच सुनिश्चित करना है। समाज एवं समुदाय के हित में यह आवश्यक है कि सभी वित्तीय गतिविधियाँ विधि के अनुरूप एवं पारदर्शी हों।

आधिकारिक अपील

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह विषय केवल व्यक्तिगत बयान बाजी का मामला नहीं है। बल्कि सामाजिक सौहार्दए संस्थागत मर्यादाए वित्तीय पारदर्शिता और राष्ट्रीय संवेदनशीलता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

डायोसिस ने रायपुर पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि संबंधित वीडियो सार्वजनिक दावों डिजिटल धन संग्रह एवं अन्य गतिविधियों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की जाए। यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि.विरुद्ध तत्व पाया जाए तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही राज्य सरकार से भी अनुरोध किया गया है कि धर्म और समुदाय के नाम पर भ्रामक दावे कर सामाजिक तनाव उत्पन्न करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कदम उठा जाये ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

डायोसिस ने चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया भारत के संविधान राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनधिकृत विभाजनकारी या भ्रामक गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सीएम योगी आज सिंगापुर-जापान दौरे पर रवाना
यूपी को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने की मुहिम तेज, 33 वैश्विक कंपनियों से करेंगे संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चार दिवसीय सिंगापुर और जापान दौरे पर रवाना होंगे। वर्ष 2017 में म्यांमार यात्रा के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

* जी-टू-बी और राउंड टेबल मीटिंग में होगा सीधा संवाद
दौरे की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। वे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास की संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणामोन्मुख चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को संबोधित करने के साथ स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की बदली तस्वीर साझा करेंगे।

* सिंगापुर में 25 कंपनियों से मुलाकात
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे।

* डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी: Google, ST Telemedia Global Data Centres

* एग्रीबिजनेस: Japfa, Olam International

* लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: Mapletree Investments, SATS Ltd

* ग्रीन और सौर ऊर्जा: AVPN, EDP Renewables

* इंडस्ट्रियल पार्क और एविएशन: Sembcorp Industries, Singapore Airlines Engineering Company

* ग्लोबल फंड्स: Temasek Holdings, GIC, Blackstone Inc.

* फिनटेक व बैंकिंग: DBS Bank

* जापान में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर पर फोकस
जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों से निवेश वार्ता करेंगे।

* ऑटोमोबाइल: Kubota, Suzuki

* सेमीकंडक्टर: Tokyo Electron

* इलेक्ट्रॉनिक्स: Toshiba

- ग्रीन हाइड्रोजन व रियल एस्टेट: Marubeni

* वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर कदम
प्रदेश सरकार का मानना है कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश उत्पादन और उपभोग दोनों का बड़ा केंद्र बन सकता है। मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तीव्र कनेक्टिविटी के आधार पर यह दौरा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।मुख्यमंत्री की यह विदेश यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
दिल्ली पुलिस ने 8 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, ISI से जुड़े तार

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्धों में एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है। पुलिस सभी आरोपियों को दिल्ली ला रही है।

दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली में संभावित आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लाल किले के आसपास के इलाकों और चांदनी चौक क्षेत्र में आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा इस क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

आतंकी हमले के अलर्ट के बाद कार्रवाई

खुफिया एजेंसियों से आतंकी हमले का अलर्ट मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु से छह तो पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों के समर्थन से देश में बड़ी आतंकी वारदात की योजना बना रहे थे। तमिलनाडु से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक बांग्लादेश का नागरिक भी शामिल है।

इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु से मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्ज्वल समेत छह आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जो असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। इसमें दो आरोपियों की गिरफ्तारी तमिलनाडु के उथुकुली से, तीन को पल्लाडम से और एक को थिरुमुरुगनपुंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया है।

संदिग्धों के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद

गिरफ्तार संदिग्धों के पास से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन उपकरणों का उपयोग आतंकी संगठनों के समर्थन में संदेश फैलाने और संदिग्ध हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस इन मोबाइल फोन और सिम कार्ड की गहन जांच कर रही है ताकि इनके नेटवर्क, संपर्कों और साजिश के पूरे ताने-बाने का पता लगाया जा सके।

Bangkok, Thailand:Prof. Dr. Prakash Divakaran, Vice-Chancellor of Himalayan University, has been conferred with the Prestigious Indo–Thai Educational Excellence Award in recognition of his iconic leadership and remarkable contribution to higher education.

The award was presented by Asst. Prof. Dr. Thanapon Sarunburana, Vice-Chancellor of Rajapark University, during a distinguished academic gathering in Bangkok. The ceremony brought together leading academicians, administrators, and international delegates from India and Thailand.

The event commenced with a Welcome Address by Dr. J. P. Bhosale, Patron, GRCF, Savitribai Phule Pune University. The Presidential Address was delivered by Prof. Dr. Gowri Ramesh, Registrar of The Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University. Prof. Dr. Prakash Divakaran graced the occasion as Chief Guest and delivered the Inaugural Address.

Among the distinguished dignitaries present were Dr. R. Thippa Reddy, Chairman & Director, Dr. Ambedkar Global Law Institute; Assoc. Prof. Dr. Chaiwat Phuakkhong; Asst. Prof. Dr. Arun Chainit; Dr. Jidapa Thavarit; Dr. Gireesh Kumar J; Dr. Shibu Dharmarajan; Dr. Seema Vijay Medhe; and Ms. Ashsagan Ashghari, Chairman, Phoenix Global Gold Co. Ltd., Bangkok.

The formal Vote of Thanks was proposed by Dr. Cholaraja Mudimannan, Assistant Professor of Law (Senior Scale), University of Delhi.

The award highlights Prof. Dr. Divakaran’s visionary leadership in promoting academic excellence, research innovation, and international collaboration. Under his stewardship, Himalayan University has expanded its global academic partnerships and strengthened its commitment to quality higher education.

The Indo–Thai Educational Excellence Award marks a significant milestone for Himalayan University and reflects the growing academic cooperation between India and Thailand.

क्या है “पैक्स सिलिका” जिसमें आज शामिल होगा भारत, यूएस के साथ एक और डील

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भारत और अमेरिका व्‍यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाने वाला है। ट्रेड डील पर अंतिम साइन से ठीक पहले अमेरिका के टॉप लेवल के अधिकारी भारत पहुंच रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी और सप्लाई-चेन की नई राजनीति की ओर इशारा है।

दरअसल, भारत आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने जा रहा है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। यह घोषणा दिल्ली में चल रहे ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान की गई है।

पिछले महीने हुई थी गठबंधन में शामिल होने का घोषणा

अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पैक्स सिलिका की शुरूआत की थी। पैक्स सिलिका सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में हुआ था, जहां साझेदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली को रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की घोषणा की।

घोषणा पर किन देशों ने किया हस्ताक्षर?

इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इस्राइल, कतर और ग्रीस शामिल हैं। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश इसमें भागीदार के रूप में जुड़े हैं।

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

कहा जा रहा है कि यह गठबंधन चीन के तकनीकी प्रभुत्व को कम करने के लिए बनाया गया है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। अब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ नया आर्थिक गठबंधन खड़ा कर रहा है। यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित साझेदारी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।

विश्व मानवविज्ञान दिवस पर जनजातीय अध्ययन की प्रासंगिकता पर विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन

रायपुर- पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की मानवविज्ञान अध्ययनशाला में विश्व मानवविज्ञान दिवस के अवसर पर “जनजातीय अध्ययन एवं इसका मानवशास्त्रीय प्रासंगिकता और मूलभूत परिप्रेक्ष्य” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डाॅ. टी. के. वैष्णव ने अपने व्याख्यान में कहा कि मानवविज्ञान जनजातीय समुदायों के समग्र अध्ययन के लिए प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने बताया कि मानवशास्त्री जनजातीय समाज के बीच रहकर उनके जीवन के विविध पहलुओं का अनुभवजन्य अध्ययन करते हैं, जिससे उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को समझने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान, औषधीय ज्ञान और पारिस्थितिकीय ज्ञान जैसी महत्वपूर्ण विरासत सामने आती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल या अपवर्जित करने, नाम संबंधी त्रुटियों के सुधार तथा नृजातीय स्थिति के सत्यापन जैसे प्रशासनिक निर्णयों में मानवविज्ञान की अहम भूमिका रहती है, लेकिन वर्तमान समय में प्रशासनिक क्षेत्रों में इस विषय की अनदेखी चिंता का विषय है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र कुमार प्रेमी ने स्वागत उद्बोधन में विश्व मानवविज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 2026 की थीम “सेलिब्रेट, इंगेज एवं इंस्पायर” की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्वभर के मानववैज्ञानिक सांस्कृतिक विविधता और मानव ज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व में एक संस्कृति द्वारा दूसरी संस्कृति को कमतर आँकने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. आई. सी. अग्रवाल ने जनजातीय अध्ययन में जनगणना आँकड़ों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रिटिश काल से लेकर आज तक जनजातीय विकास और समस्याओं के समाधान में जनगणना के आँकड़ों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए जनजातीय अध्ययन में इन आँकड़ों का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. अशोक प्रधान ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवविज्ञान विषय जनजातीय विकास और प्रशासन के लिए अत्यंत उपयोगी रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासनिक स्तर पर इसके महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आँकड़ों और तथ्यों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति अकादमिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टि से चिंताजनक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. अरुण कुमार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मानवविज्ञान दिवस की आवश्यकता, उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि मानवविज्ञान जैसे उपयोगी विषय के प्रति समाज में जागरूकता का अभाव मानव प्रगति के साथ-साथ विश्व शांति के लिए भी बाधक है। उन्होंने सांस्कृतिक सापेक्षवाद के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी संस्कृति अपने आप में न तो उच्च होती है और न निम्न, बल्कि प्रत्येक संस्कृति अपने परिवेश में पूर्ण होती है। इसलिए किसी भी समुदाय की संस्कृति को उसके अपने दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही तथा जनजातीय अध्ययन के समसामयिक मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।

आजमगढ़ : शमसाबाद महुआरा में हुआ मां देवरती शिक्षण संस्थान का शिलान्यास,असहायों की शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास : राज मनि यादव
सिद्धेश्वर पाण्डेय
   व्यूरो चीफ
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के  महुवारा शमसाबाद गांव में मां देवरती शिक्षण संस्थान के निर्माण कार्य का शुभारंभ विधिवत शिलान्यास एवं भूमिपूजन के साथ बुधवार को  किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति रही। संस्थान के संस्थापक रामजस यादव ने वैदिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कर विद्यालय भवन निर्माण की आधारशिला रखी।
इस अवसर पर संस्थान के प्रबंधक और रॉयल ओसियन ग्रुप के सी एम डी राजमनि यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मां देवरती शिक्षण संस्थान की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र के असहाय, गरीब एवं वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि महुवारा एवं आसपास का इलाका शैक्षिक दृष्टि से अभी भी पिछड़ा हुआ है, जहां संसाधनों की कमी के कारण अनेक बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में यह संस्थान शिक्षा की ज्योति जलाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करेगा।
राज मनि यादव ने कहा, “हमने अपने जीवन में गरीबी और अभाव को बहुत करीब से देखा है। इसलिए हमारा संकल्प है कि क्षेत्र का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।” उन्होंने बताया कि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और संस्कारों पर विशेष बल दिया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राएं सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर हो सकें।
भूमिपूजन कार्यक्रम पंडित रमाशंकर दुबे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। पूरे वातावरण में धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। इस दौरान महाप्रधान विजय बहादुर सिंह, संतोष कुमार सिंह, पारस नाथ यादव, ओमकार यादव, रणजीत यादव, विंद्रा प्रसाद, श्रवण शुक्ला, राज किशोर यादव, रागिनी ,सत्यम,अजीम अली,रामरूप,शेष नाथ यादव सहित अनेक ग्रामीण व क्षेत्रीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रबंधक राजमनि यादव ने सभी आगंतुकों, ग्रामीणों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही यह संस्थान क्षेत्र में शिक्षा का नया अध्याय लिखेगा। ग्रामीणों ने भी संस्थान की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक', किरेन रिजिजू का नेता प्रतिपक्ष पर बड़ा हमला

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। रिजिजू ने राहुल गांधी पर ‘भारत विरोधी ताकतों’ से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए ‘सबसे खतरनाक व्यक्ति’ बन चुके हैं।

राहुल का व्यवहार काफी बचकाना-रिजिजु

केंद्रीय मंत्री का आरोप है कि राहुल का व्यवहार काफी बचकाना है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की हरकत काफी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता एक बड़ा चेहरा होता है। सदन के बाहर जाना, लोगों को देशद्रोही कहना, नाटकीय धरना देना और एक अनपब्लिश्ड किताब से सरकार को बेवजह घेरना, दिखाता है कि राहुल किस तरह व्यवहार करते हैं। उनका व्यहार बच्चों जैसा होता है। हमने भारत के इतिहास में ऐसा LoP कभी नहीं देखा था।

भारत विरोधी ताकतों से जुड़े होने का आरोप

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश और विदेश में नक्सलियों, अतिवादियों, वैचारिक समूहों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मुलाकात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं, क्योंकि वे भारत विरोधी ताकतों के साथ जुड़ते हैं।

संसद में सिर्फ हंगामा करती है कांग्रेस-रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि सरकार पर आरोप लगाती है कि हम उन्हें संसद में बोलने नहीं देते हैं। विपक्ष के ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं। सरकार कांग्रेस को हर बात बोलने का मौका देती है, लेकिन मुद्दों पर बोलने की बजाए वो हंगामा शुरू कर देते हैं। नारों के साथ बैनर लहराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कागज फेंकना, नारेबाजी करना और बैनर दिखाना ज्यादातर कांग्रेस का तरीका है। यह विपक्ष की गंभीरता को दर्शाता है।

जबरदस्ती पीएम के खिलाफ बयानबाजी का आरोप

रिजिजू ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल के समर्थक इन बातों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि वे बिना सच और आधार के बोलते हैं। अगर कोई दस्तावेज है या पीएम किसी से मिले हैं, तो सबूत पेश करें। बिना आधार के पीएम का नाम जोड़ना निराशा और हताशा पैदा करता है। उन्होंने कहा, "वे जबरदस्ती प्रधानमंत्री का नाम घसीटते हैं, बिना किसी आधार के। इससे देश में निराशा फैलती है।"

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने मोहम्मद यूनुस पर लगाया गंभीर आरोप, तारिक राज में बड़ा खुलासा

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बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि यूनुस ने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाया। राष्ट्रपति को न सिर्फ अहम चर्चाओं से दूर रखा बल्कि उन्हें हटाने तक की साजिश रच देश को अस्थिर करने का प्रयास किया।

यूनुस पर संविधान पालन नहीं करने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने देश में सरकार बदलते ही एक ऐसा खुलासा किया है। कालेर कंठो के साथ इंटरव्यू में बांग्लादेश के राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने कहा है कि मोहम्मद यूनुस ने 18 महीने की अपनी अंतरिम सरकार में संविधान का पालन नहीं किया। यूनुस ने अपना पद संभालते हुए न तो संस्थागत समन्वय बनाए रखा और न ही उन्हें महत्वपूर्ण सरकारी फैसलों की जानकारी दी।

यूनुस ने विदेश यात्राओं की नहीं दी जानकारी

राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि संविधान कहता है कि विदेश यात्रा की जानकारी राष्ट्रपति को देनी चाहिए और दौरे के बाद भी राष्ट्रपति को बताया जाना चाहिए। यूनुस के 14-15 विदेशी दौरों के बारे में मुझे कभी नहीं बताया गया। इसमें अमेरिका से हुआ व्यापार समझौता भी शामिल है। बांग्लादेशी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उनकी विदेश यात्राओं को बिना पूछे रद्द कर दिया गया। कोसोवो और कतर से मिले निमंत्रणों को उनके नाम से यह कहकर ठुकरा दिया गया कि राष्ट्रपति राज्य कार्यों में बहुत व्यस्त हैं।

सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश का आरोप

शहाबुद्दीन ने तंज करते हुए कहा कि क्या हमारे संविधान में राष्ट्रपति इतने व्यस्त रहते हैं कि उनसे पूछा भी न जाए? राष्ट्रपति का आरोप है कि देश और विदेश में उनकी सार्वजनिक पहचान कम करने की कोशिश की गई। उन्हें विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह और अन्य राष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने से रोका गया, जबकि परंपरा के अनुसार इन कार्यक्रमों की अध्यक्षता राष्ट्रपति करते हैं।

पद से हटाने की साजिश रचने का आरोप

बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने कहा कि यूनुस का पूरा ध्यान उनको पद से हटाने पर रहा, वो अपने कार्यकाल में सिर्फ मेरे खिलाफ साजिशें रचते रहें। यूनुस ने ना सिर्फ मेरे खिलाफ राजनीतिक स्तर पर साजिशें रचीं बल्कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि अंतरिम सरकार ने एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश को लाकर मुझे असंवैधानिक तरीके से हटाने की साजिश भी रची।

पीजीआई के ट्रॉमा सेंटर की रिपोर्ट: रात की दुर्घटनाओं में शराब और बिना हेलमेट बड़ी वजह
लखनऊ। राजधानी स्थित एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पीजीआई लखनऊ की एक अध्ययन रिपोर्ट में सामने आया है कि रात के समय होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शराब पीकर वाहन चलाना और हेलमेट न पहनना बड़ी वजह बन रहे हैं। वर्ष 2018 से 2024 के बीच रात में भर्ती हुए घायलों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।डॉ. एके सिंह और डॉ. पीके मिश्रा द्वारा तैयार यह शोध रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय जर्नल Cureus में प्रकाशित हुई है। अध्ययन में कुल 3,705 घायलों को शामिल किया गया। रिपोर्ट की प्रमुख बातें रात में लाए गए घायलों में से लगभग हर दूसरे व्यक्ति ने शराब पी रखी थी। केवल एक तिहाई दोपहिया सवारों ने हेलमेट पहना था। चार पहिया वाहन चालकों में सिर्फ 41% ने सीट बेल्ट लगाई थी। कुल मामलों में 67.3% सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े थे। इनमें से 84.7% दोपहिया वाहन दुर्घटनाएं थीं। 78.3% मरीज पुरुष थे, औसत आयु 37.5 वर्ष। 44.5% मामलों में सिर की चोट पाई गई। आईसीयू और मृत्यु दर अध्ययन में पाया गया कि 58.4% मरीजों को आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। 45.8% को मैकेनिकल वेंटिलेशन की जरूरत हुई। कुल मृत्यु दर 4% रही, जिनमें से 42.2% मौतें 24 घंटे के भीतर हुईं। बुजुर्गों में बाथरूम में गिरने की घटनाएं रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि काफी बुजुर्ग बाथरूम में फिसलकर घायल हो रहे हैं। इसकी बड़ी वजह चिकनी टाइल्स को बताया गया है, जिनकी फिसलन से गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेषज्ञ की राय ट्रॉमा सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. वैभव जायसवाल के अनुसार, दुर्घटनाओं में तेज रफ्तार, लापरवाही और जागरूकता की कमी बड़ी वजह है। बेहतर सड़कें और एक्सप्रेसवे यात्रा का समय तो कम कर रहे हैं, लेकिन सावधानी न बरतने पर हादसों का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जगह-जगह ट्रॉमा सेंटर बनाने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
मसीही नेतृत्व,अंतरराष्ट्रीय दावे और वित्तीय अनियमित की जांच हो:- सी. एन. आई.

रायपुर- छत्तीसगढ़ में मसीही नेतृत्व को लेकर उठे विवाद ने अब गंभीर रूप ले लिया है। स्वयं को समुदाय का प्रतिनिधि बताकर दिए जा रहे सार्वजनिक बयान व सोशल मीडिया पर सक्रिय अभियान और विदेशी संपर्क के दावों ने प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया ने इन घटनाक्रमों पर प्रेसवार्ता कर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए जांच की मांग की है।

उक्त विवाद उस समय और गहरा गया जब सार्वजनिक मंचों पर यह दावा किया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित किए जा सकते हैं, यहां तक कि विदेशी प्रतिनिधिमंडल बुलाने की बात भी कही गई। मसीह समुदाय का कहना है कि ऐसे दावे तब और गंभीर हो जाते हैं जब संबंधित व्यक्ति को किसी भी आधिकारिक चर्च संरचना द्वारा अधिकृत प्रतिनिधित्व प्राप्त न हो।

इसी के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर यूट्यूब चैनल के माध्यम से क्यूआर कोड द्वारा धन संग्रह के मुद्दे ने भी नए सवाल खड़े किए हैं। डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने प्रशासन से मांग की है कि डिजिटल लेन-देन, सार्वजनिक दावों और संबंधित बयानों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि विरुद्ध तत्व पाया जाए तो कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

डायोसिस के अनुसार चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया की प्रशासनिक एवं धार्मिक व्यवस्था एक विधिवत संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत संचालित होती है। किसी भी व्यक्ति को अध्यक्ष या प्रतिनिधि के रूप में मान्यता केवल निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत नियुक्ति के माध्यम से दी जाती है। जारी बयान में बताया गया है कि पन्नालाल को मसीह समुदाय द्वारा ऐसी कोई अधिकृत मान्यता प्रदान नहीं दी गई है।

सिनड के आधिकारिक पत्र

इस विवाद पर नई दिल्ली के जनरल सेक्रेटरी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र का भी उल्लेख किया गया है जिसमें संबंधित प्रसारित दावों को तथ्यहीन बताया गया है। डायोसिस का कहना है कि डायोसिस के नाम पर भ्रम फैलाने वाले कथनों का आधिकारिक संरचना से कोई संबंध नहीं है।

सोशल मीडिया गतिविधियों पर आपत्ति

डायोसिस ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम नामक संस्था के माध्यम से स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि घोषित कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विशेषकर यूट्यूब चैनल पर विभिन्न विषयों पर बयान बाजी दिए जा रहे हैं। इन गतिविधियों को लेकर समाज में भ्रम और संभावित तनाव की आशंका जताई गई है।

मसीह समुदाय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की ऐसी बयानबाजी जिससे विभिन्न धर्मों के बीच वैमनस्य या विवाद की स्थिति उत्पन्न हो ये चर्च की शिक्षाओं एवं मूल्यों के विपरीत है। सी.एन.आई ने दोहराया कि वह सदैव शांति व सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों के पक्ष में रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की मांग

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने इस मामले में रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपे जाने की पुष्टि की है। शिकायत में संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की जांचए आवश्यक होने पर चैनल को प्रतिबंधित करने तथा विधि अनुसार अपराध दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।

साथ ही प्रशासन से यह भी आग्रह किया गया है कि धर्म के नाम पर किसी भी प्रकार की विभाजनकारी या राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त पाए जाने पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मीडिया से सत्यापन की अपील

डायोसिस ने मीडिया संस्थानों से अपील की है कि मसीही समुदाय के नाम पर दिए जा रहे किसी भी सार्वजनिक बयान को आधिकारिक मानने से पूर्व चर्च की अधिकृत संरचना से सत्यापन अवश्य किया जाए।

व्यापक सामाजिक संदर्भ

विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर धार्मिक पहचान के नाम पर की जा रही बयान बाजी अक्सर संवेदनशील सामाजिक मुद्दों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में आधिकारिक संस्थाओं द्वारा स्पष्ट रुख अपनाना सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने अंत में सभी समुदायों से शांति, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मर्यादा की अपील की है।

अतिरिक्त तथ्य एवं गंभीर आपत्तियाँ

डायोसिस के संज्ञान में एक वीडियो आया है। जिसमें अरुण पन्नालाल द्वारा यह दावा करते लिख रहें है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को पत्र लिखकर भारत में प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया है और कथित रूप से प्रतिनिधि यह आया था।

डायोसिस स्पष्ट करना चाहता है कि अरुण पन्नालाल का न तो किसी चर्च से आधिकारिक संबंध है न ही वे किसी अधिकृत चर्च निकाय के सदस्य या नियुक्त प्रतिनिधि हैं। ऐसी स्थिति में स्वयं को मसीही समाज का अध्यक्ष बताकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व का दावा करना भ्रामक एवं गंभीर विषय है। जिससे समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है।

इसी प्रकार के एक अन्य वीडियो में मसीही समुदाय के राष्ट्रीय स्तर के मॉडरेटर के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। डायोसिस का मानना है कि इस प्रकार की भाषा न केवल संस्थागत मर्यादा के विपरीत है बल्कि समुदाय की गरिमा को भी आहत करती है।

अंतरराष्ट्रीय दावे एवं राष्ट्रीय हित से जुड़ी गंभीर चिंता

डायोसिस के संज्ञान में आए एक वीडियो में अरुण पन्नालाल द्वारा यह कथन किया गया है कि वे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से संपर्क कर सकते हैं तथा व्हाइट हाउस से प्रतिनिधियों को बुलाने की क्षमता रखते हैं। इस प्रकार के दावों को सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है।

डायोसिस ने स्पष्ट किया कि अरुण पन्नालाल किसी भी चर्च डायोसिस या राष्ट्रीय स्तर के मसीही निकाय के अधिकृत प्रतिनिधि नहीं हैं। ऐसे में स्वयं को मसीही समाज का प्रतिनिधि बताते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी प्रकार का संपर्क या प्रतिनिधित्व का दावा करना भ्रामक स्थिति उत्पन्न कर सकता है। डायोसिस ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत से संबंधित विषयों पर अप्रमाणित अथवा भ्रामक जानकारी यदि किसी अंतरराष्ट्रीय मंच या व्यक्ति तक पहुंचाई जाती है तो इससे देश की छवि सामाजिक एकता एवं संवेदनशील हित प्रभावित हो सकते हैं।

नितिन लॉरेंस ने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके विषय में किसी भी प्रकार की अपुष्ट या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत की गई जानकारी राष्ट्रीय हितों को प्रभावित कर सकती है। इस प्रकार के दावों की गंभीर जांच होना आवश्यक है।

डायोसिस ने प्रशासन एवं पुलिस विभाग से आग्रह किया है कि

संबंधित वीडियो और बयानों की विधिवत जांच की जाए।

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत परीक्षण किया जाए।

यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि.विरुद्ध तत्व पाया जाए तो उचित कार्रवाई की जाए।

डायोसिस पुनः स्पष्ट करता है कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया भारत के संविधान, उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय एकता के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक या विभाजनकारी गतिविधि का समर्थन नहीं करता।

वित्तीय पारदर्शिता एवं जांच से संबंधित गंभीर प्रश्न डायोसिस के संज्ञान में यह भी आया है कि संबंधित यूट्यूब चैनल के माध्यम से क्यूआर कोड एवं अन्य डिजिटल भुगतान साधनों द्वारा धनराशि एकत्रित की जा रही है। चूंकि यह गतिविधि सार्वजनिक मंच पर की जा रही है, अतः इसकी वैधानिकताए लेखा परीक्षण एवं धन के उपयोग की पारदर्शिता की जांच किया जाना आवश्यक है।

डायोसिस ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि उक्त डिजिटल लेन.देन की विधिवत जांच की जाए। यह परीक्षण किया जाए कि धनराशि किस उद्देश्य से एकत्रित की गई तथा उसका उपयोग किस प्रकार किया गया।

यदि कोई अनियमितता पाई जाए तो संबंधित कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

इसके अतिरिक्त यह भी चर्चा में आया है कि सालेम स्कूल से संबंधित एक प्रकरण में वित्तीय लेन.देन और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर प्रश्न उठे थे। जनसामान्य के बीच इस विषय में विभिन्न आरोप एवं आशंकाएँ व्यक्त की गई हैं। डायोसिस का मत है कि उक्त प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की जाए। विद्यालय की फीस से संबंधित समस्त वित्तीय अभिलेखों का परीक्षण किया जाए।

यदि कोई अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो विधि अनुसार कार्रवाई की जाए।

डायोसिस स्पष्ट करता है कि उसका उद्देश्य किसी पर आरोप लगाना नहींए बल्कि पारदर्शिता एवं विधिसम्मत जांच सुनिश्चित करना है। समाज एवं समुदाय के हित में यह आवश्यक है कि सभी वित्तीय गतिविधियाँ विधि के अनुरूप एवं पारदर्शी हों।

आधिकारिक अपील

डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह विषय केवल व्यक्तिगत बयान बाजी का मामला नहीं है। बल्कि सामाजिक सौहार्दए संस्थागत मर्यादाए वित्तीय पारदर्शिता और राष्ट्रीय संवेदनशीलता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

डायोसिस ने रायपुर पुलिस प्रशासन से आग्रह किया है कि संबंधित वीडियो सार्वजनिक दावों डिजिटल धन संग्रह एवं अन्य गतिविधियों की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की जाए। यदि प्रथम दृष्टया कोई विधि.विरुद्ध तत्व पाया जाए तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम तथा अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं के अंतर्गत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

साथ ही राज्य सरकार से भी अनुरोध किया गया है कि धर्म और समुदाय के नाम पर भ्रामक दावे कर सामाजिक तनाव उत्पन्न करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त कदम उठा जाये ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

डायोसिस ने चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया भारत के संविधान राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की अनधिकृत विभाजनकारी या भ्रामक गतिविधि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

सीएम योगी आज सिंगापुर-जापान दौरे पर रवाना
यूपी को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने की मुहिम तेज, 33 वैश्विक कंपनियों से करेंगे संवाद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज चार दिवसीय सिंगापुर और जापान दौरे पर रवाना होंगे। वर्ष 2017 में म्यांमार यात्रा के बाद यह उनका पहला विदेशी दौरा है, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के अवसरों पर चर्चा करेंगे।

* जी-टू-बी और राउंड टेबल मीटिंग में होगा सीधा संवाद
दौरे की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के माध्यम से निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। वे उत्तर प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास की संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणामोन्मुख चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश मूल के लोगों को संबोधित करने के साथ स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की बदली तस्वीर साझा करेंगे।

* सिंगापुर में 25 कंपनियों से मुलाकात
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे।

* डेटा सेंटर और टेक्नोलॉजी: Google, ST Telemedia Global Data Centres

* एग्रीबिजनेस: Japfa, Olam International

* लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर: Mapletree Investments, SATS Ltd

* ग्रीन और सौर ऊर्जा: AVPN, EDP Renewables

* इंडस्ट्रियल पार्क और एविएशन: Sembcorp Industries, Singapore Airlines Engineering Company

* ग्लोबल फंड्स: Temasek Holdings, GIC, Blackstone Inc.

* फिनटेक व बैंकिंग: DBS Bank

* जापान में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर पर फोकस
जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों से निवेश वार्ता करेंगे।

* ऑटोमोबाइल: Kubota, Suzuki

* सेमीकंडक्टर: Tokyo Electron

* इलेक्ट्रॉनिक्स: Toshiba

- ग्रीन हाइड्रोजन व रियल एस्टेट: Marubeni

* वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की ओर कदम
प्रदेश सरकार का मानना है कि 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश उत्पादन और उपभोग दोनों का बड़ा केंद्र बन सकता है। मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तीव्र कनेक्टिविटी के आधार पर यह दौरा राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।मुख्यमंत्री की यह विदेश यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त पहचान दिलाने की दिशा में भी एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
दिल्ली पुलिस ने 8 संदिग्धों को किया गिरफ्तार, ISI से जुड़े तार

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को बड़ी कामयाबी मिली है। दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु के तिरुपुर जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार संदिग्धों में एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है। पुलिस सभी आरोपियों को दिल्ली ला रही है।

दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली में संभावित आतंकी हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने अलर्ट जारी किया है। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लाल किले के आसपास के इलाकों और चांदनी चौक क्षेत्र में आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा इस क्षेत्र को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

आतंकी हमले के अलर्ट के बाद कार्रवाई

खुफिया एजेंसियों से आतंकी हमले का अलर्ट मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने रविवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तमिलनाडु से छह तो पश्चिम बंगाल से दो संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और बांग्लादेश के आतंकी संगठनों के समर्थन से देश में बड़ी आतंकी वारदात की योजना बना रहे थे। तमिलनाडु से गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक बांग्लादेश का नागरिक भी शामिल है।

इन आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने तमिलनाडु से मिजानुर रहमान, मोहम्मद शबात, उमर, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद शाहिद और मोहम्मद उज्ज्वल समेत छह आतंकियों को गिरफ्तार किया है, जो असामाजिक गतिविधियों में शामिल हैं। इसमें दो आरोपियों की गिरफ्तारी तमिलनाडु के उथुकुली से, तीन को पल्लाडम से और एक को थिरुमुरुगनपुंडी इलाके से गिरफ्तार किया गया है।

संदिग्धों के पास से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद

गिरफ्तार संदिग्धों के पास से कई मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इन उपकरणों का उपयोग आतंकी संगठनों के समर्थन में संदेश फैलाने और संदिग्ध हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए किया जा रहा था। दिल्ली पुलिस इन मोबाइल फोन और सिम कार्ड की गहन जांच कर रही है ताकि इनके नेटवर्क, संपर्कों और साजिश के पूरे ताने-बाने का पता लगाया जा सके।

Bangkok, Thailand:Prof. Dr. Prakash Divakaran, Vice-Chancellor of Himalayan University, has been conferred with the Prestigious Indo–Thai Educational Excellence Award in recognition of his iconic leadership and remarkable contribution to higher education.

The award was presented by Asst. Prof. Dr. Thanapon Sarunburana, Vice-Chancellor of Rajapark University, during a distinguished academic gathering in Bangkok. The ceremony brought together leading academicians, administrators, and international delegates from India and Thailand.

The event commenced with a Welcome Address by Dr. J. P. Bhosale, Patron, GRCF, Savitribai Phule Pune University. The Presidential Address was delivered by Prof. Dr. Gowri Ramesh, Registrar of The Tamil Nadu Dr. Ambedkar Law University. Prof. Dr. Prakash Divakaran graced the occasion as Chief Guest and delivered the Inaugural Address.

Among the distinguished dignitaries present were Dr. R. Thippa Reddy, Chairman & Director, Dr. Ambedkar Global Law Institute; Assoc. Prof. Dr. Chaiwat Phuakkhong; Asst. Prof. Dr. Arun Chainit; Dr. Jidapa Thavarit; Dr. Gireesh Kumar J; Dr. Shibu Dharmarajan; Dr. Seema Vijay Medhe; and Ms. Ashsagan Ashghari, Chairman, Phoenix Global Gold Co. Ltd., Bangkok.

The formal Vote of Thanks was proposed by Dr. Cholaraja Mudimannan, Assistant Professor of Law (Senior Scale), University of Delhi.

The award highlights Prof. Dr. Divakaran’s visionary leadership in promoting academic excellence, research innovation, and international collaboration. Under his stewardship, Himalayan University has expanded its global academic partnerships and strengthened its commitment to quality higher education.

The Indo–Thai Educational Excellence Award marks a significant milestone for Himalayan University and reflects the growing academic cooperation between India and Thailand.

क्या है “पैक्स सिलिका” जिसमें आज शामिल होगा भारत, यूएस के साथ एक और डील

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भारत और अमेरिका व्‍यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दिया जाने वाला है। ट्रेड डील पर अंतिम साइन से ठीक पहले अमेरिका के टॉप लेवल के अधिकारी भारत पहुंच रहे हैं। अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी जैकब हेलबर्ग भारत दौरे पर आ रहे हैं। यह दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं माना जा रहा बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी और सप्लाई-चेन की नई राजनीति की ओर इशारा है।

दरअसल, भारत आज औपचारिक रूप से अमेरिका की अगुवाई वाली पहल 'पैक्स सिलिका' में शामिल होने जा रहा है। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बनाई गई है। यह घोषणा दिल्ली में चल रहे ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान की गई है।

पिछले महीने हुई थी गठबंधन में शामिल होने का घोषणा

अमेरिका ने दिसंबर 2025 में पैक्स सिलिका की शुरूआत की थी। पैक्स सिलिका सम्मेलन 12 दिसंबर को वाशिंगटन में हुआ था, जहां साझेदार देशों ने पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए थे। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने पिछले महीने नई दिल्ली को रणनीतिक गठबंधन में शामिल होने के लिए आमंत्रित करने की घोषणा की।

घोषणा पर किन देशों ने किया हस्ताक्षर?

इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले देशों में ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, यूएई, सिंगापुर, इस्राइल, कतर और ग्रीस शामिल हैं। जबकि कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स और ताइवान जैसे देश इसमें भागीदार के रूप में जुड़े हैं।

चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

कहा जा रहा है कि यह गठबंधन चीन के तकनीकी प्रभुत्व को कम करने के लिए बनाया गया है। ग्लोबल सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन में चीन की बड़ी भूमिका रही है। अब अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ नया आर्थिक गठबंधन खड़ा कर रहा है। यह पहल अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और टेक्नोलॉजी-आधारित साझेदारी मॉडल का हिस्सा मानी जा रही है।

विश्व मानवविज्ञान दिवस पर जनजातीय अध्ययन की प्रासंगिकता पर विशेष व्याख्यान का हुआ आयोजन

रायपुर- पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय की मानवविज्ञान अध्ययनशाला में विश्व मानवविज्ञान दिवस के अवसर पर “जनजातीय अध्ययन एवं इसका मानवशास्त्रीय प्रासंगिकता और मूलभूत परिप्रेक्ष्य” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डाॅ. टी. के. वैष्णव ने अपने व्याख्यान में कहा कि मानवविज्ञान जनजातीय समुदायों के समग्र अध्ययन के लिए प्रशासनिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने बताया कि मानवशास्त्री जनजातीय समाज के बीच रहकर उनके जीवन के विविध पहलुओं का अनुभवजन्य अध्ययन करते हैं, जिससे उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और अपेक्षाओं को समझने के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान, औषधीय ज्ञान और पारिस्थितिकीय ज्ञान जैसी महत्वपूर्ण विरासत सामने आती है। उन्होंने यह भी कहा कि जनजातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल या अपवर्जित करने, नाम संबंधी त्रुटियों के सुधार तथा नृजातीय स्थिति के सत्यापन जैसे प्रशासनिक निर्णयों में मानवविज्ञान की अहम भूमिका रहती है, लेकिन वर्तमान समय में प्रशासनिक क्षेत्रों में इस विषय की अनदेखी चिंता का विषय है।

कार्यक्रम के संयोजक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. जितेन्द्र कुमार प्रेमी ने स्वागत उद्बोधन में विश्व मानवविज्ञान दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वर्ष 2026 की थीम “सेलिब्रेट, इंगेज एवं इंस्पायर” की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि इस वर्ष विश्वभर के मानववैज्ञानिक सांस्कृतिक विविधता और मानव ज्ञान को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व में एक संस्कृति द्वारा दूसरी संस्कृति को कमतर आँकने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक असंतुलन उत्पन्न हो रहा है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसार की आवश्यकता पर भी बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. आई. सी. अग्रवाल ने जनजातीय अध्ययन में जनगणना आँकड़ों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ब्रिटिश काल से लेकर आज तक जनजातीय विकास और समस्याओं के समाधान में जनगणना के आँकड़ों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसलिए जनजातीय अध्ययन में इन आँकड़ों का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

विभाग के वरिष्ठ प्राध्यापक डाॅ. अशोक प्रधान ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवविज्ञान विषय जनजातीय विकास और प्रशासन के लिए अत्यंत उपयोगी रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासनिक स्तर पर इसके महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आँकड़ों और तथ्यों को राजनीतिक सुविधा के अनुसार प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति अकादमिक और प्रशासनिक दोनों ही दृष्टि से चिंताजनक है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डाॅ. अरुण कुमार ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मानवविज्ञान दिवस की आवश्यकता, उद्देश्य और महत्व पर विस्तार से विचार रखते हुए कहा कि मानवविज्ञान जैसे उपयोगी विषय के प्रति समाज में जागरूकता का अभाव मानव प्रगति के साथ-साथ विश्व शांति के लिए भी बाधक है। उन्होंने सांस्कृतिक सापेक्षवाद के सिद्धांत पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी संस्कृति अपने आप में न तो उच्च होती है और न निम्न, बल्कि प्रत्येक संस्कृति अपने परिवेश में पूर्ण होती है। इसलिए किसी भी समुदाय की संस्कृति को उसके अपने दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही तथा जनजातीय अध्ययन के समसामयिक मुद्दों पर सार्थक चर्चा हुई।

आजमगढ़ : शमसाबाद महुआरा में हुआ मां देवरती शिक्षण संस्थान का शिलान्यास,असहायों की शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास : राज मनि यादव
सिद्धेश्वर पाण्डेय
   व्यूरो चीफ
आजमगढ़। फूलपुर तहसील क्षेत्र के  महुवारा शमसाबाद गांव में मां देवरती शिक्षण संस्थान के निर्माण कार्य का शुभारंभ विधिवत शिलान्यास एवं भूमिपूजन के साथ बुधवार को  किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य लोगों एवं ग्रामीणों की उपस्थिति रही। संस्थान के संस्थापक रामजस यादव ने वैदिक विधि-विधान के साथ भूमि पूजन कर विद्यालय भवन निर्माण की आधारशिला रखी।
इस अवसर पर संस्थान के प्रबंधक और रॉयल ओसियन ग्रुप के सी एम डी राजमनि यादव ने अपने संबोधन में कहा कि मां देवरती शिक्षण संस्थान की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र के असहाय, गरीब एवं वंचित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि महुवारा एवं आसपास का इलाका शैक्षिक दृष्टि से अभी भी पिछड़ा हुआ है, जहां संसाधनों की कमी के कारण अनेक बच्चे उच्च शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में यह संस्थान शिक्षा की ज्योति जलाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करेगा।
राज मनि यादव ने कहा, “हमने अपने जीवन में गरीबी और अभाव को बहुत करीब से देखा है। इसलिए हमारा संकल्प है कि क्षेत्र का कोई भी बच्चा केवल आर्थिक तंगी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे।” उन्होंने बताया कि विद्यालय में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और संस्कारों पर विशेष बल दिया जाएगा, ताकि छात्र-छात्राएं सर्वांगीण विकास की ओर अग्रसर हो सकें।
भूमिपूजन कार्यक्रम पंडित रमाशंकर दुबे द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया गया। पूरे वातावरण में धार्मिक और उत्साहपूर्ण माहौल बना रहा। इस दौरान महाप्रधान विजय बहादुर सिंह, संतोष कुमार सिंह, पारस नाथ यादव, ओमकार यादव, रणजीत यादव, विंद्रा प्रसाद, श्रवण शुक्ला, राज किशोर यादव, रागिनी ,सत्यम,अजीम अली,रामरूप,शेष नाथ यादव सहित अनेक ग्रामीण व क्षेत्रीय गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में प्रबंधक राजमनि यादव ने सभी आगंतुकों, ग्रामीणों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से ही यह संस्थान क्षेत्र में शिक्षा का नया अध्याय लिखेगा। ग्रामीणों ने भी संस्थान की स्थापना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे क्षेत्र के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक', किरेन रिजिजू का नेता प्रतिपक्ष पर बड़ा हमला

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केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। रिजिजू ने राहुल गांधी पर ‘भारत विरोधी ताकतों’ से संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी देश की सुरक्षा के लिए ‘सबसे खतरनाक व्यक्ति’ बन चुके हैं।

राहुल का व्यवहार काफी बचकाना-रिजिजु

केंद्रीय मंत्री का आरोप है कि राहुल का व्यवहार काफी बचकाना है। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष के पद पर बैठे किसी व्यक्ति के लिए इस तरह की हरकत काफी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता एक बड़ा चेहरा होता है। सदन के बाहर जाना, लोगों को देशद्रोही कहना, नाटकीय धरना देना और एक अनपब्लिश्ड किताब से सरकार को बेवजह घेरना, दिखाता है कि राहुल किस तरह व्यवहार करते हैं। उनका व्यहार बच्चों जैसा होता है। हमने भारत के इतिहास में ऐसा LoP कभी नहीं देखा था।

भारत विरोधी ताकतों से जुड़े होने का आरोप

किरेन रिजिजू ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश और विदेश में नक्सलियों, अतिवादियों, वैचारिक समूहों और जॉर्ज सोरोस जैसे लोगों से मुलाकात करते रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी भारत की सुरक्षा के लिए सबसे खतरनाक व्यक्ति बन गए हैं, क्योंकि वे भारत विरोधी ताकतों के साथ जुड़ते हैं।

संसद में सिर्फ हंगामा करती है कांग्रेस-रिजिजू

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे कहा कि सरकार पर आरोप लगाती है कि हम उन्हें संसद में बोलने नहीं देते हैं। विपक्ष के ये आरोप पूरी तरह से गलत हैं। सरकार कांग्रेस को हर बात बोलने का मौका देती है, लेकिन मुद्दों पर बोलने की बजाए वो हंगामा शुरू कर देते हैं। नारों के साथ बैनर लहराने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कागज फेंकना, नारेबाजी करना और बैनर दिखाना ज्यादातर कांग्रेस का तरीका है। यह विपक्ष की गंभीरता को दर्शाता है।

जबरदस्ती पीएम के खिलाफ बयानबाजी का आरोप

रिजिजू ने राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल के समर्थक इन बातों को गंभीरता से नहीं लेते क्योंकि वे बिना सच और आधार के बोलते हैं। अगर कोई दस्तावेज है या पीएम किसी से मिले हैं, तो सबूत पेश करें। बिना आधार के पीएम का नाम जोड़ना निराशा और हताशा पैदा करता है। उन्होंने कहा, "वे जबरदस्ती प्रधानमंत्री का नाम घसीटते हैं, बिना किसी आधार के। इससे देश में निराशा फैलती है।"