भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका', रूसी तेल खरीद को लेकर ईरान के मंत्री का बड़ा दावा

#iranfmsaysusbeggingindiaandtheworldtobuyrussianoil

ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य मोर्चे पर तो लड़ाई जारी है, जुबानी जंग भी तेज हो गई है। एक दूसरे पर वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूसी तेल खरीदने की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील पर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उन पर तीखा हमला बोला है। अराघची ने अमेरिका पर हमला बोलते हुए कहा कि वॉशिंगटन, भारत समेत दुनिया भर के देशों के सामने रूसी तेल खरीदने के लिए गिड़गिड़ा रहा है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा- अमेरिका महीनों से भारत पर रूसी तेल नहीं खरीदने का दबाव बना रहा था, लेकिन ईरान के साथ दो सप्ताह की जंग में ही व्हाइट हाउस अब भारत सहित दुनिया के सामने गिड़गिड़ा रहा हैष वह भीख मांग रहा है कि दुनिया रूस से तेल खरीदे। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी के साथ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट शेयर की है, जिसमें कहा गया है कि ईरान युद्ध रूस की ऑयल इंडस्टी के लिए संजीवनी बनकर आया है।

यूरोपीय देशों पर भी साधा निशाना

अरगची ने अपनी पोस्ट में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यूरोप ने ईरान पर 'अवैध युद्ध' का साथ देकर सोचा था कि अमेरिका उसके बदले रूस के खिलाफ उनका साथ देगा, लेकिन अब वे निराश हैं। मंत्री ने लिखा, 'यूरोप ने सोचा कि ईरान पर अवैध युद्ध का समर्थन करने से अमेरिका रूस के खिलाफ उसकी मदद करेगा। यह बहुत दयनीय है।'

रूसी तेल खरीदने पर अमेरिका ने दी छूट

अराघची की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एक दिन पहले ही अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगा प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाने की जानकारी दी थी। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि वित्त विभाग ने रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की मंजूरी देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा था कि यह मंजूरी केवल उस रूसी तेल के लिए होगी जो पहले से ही समुद्र में मौजूद है। अमेरिका ने कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की छूट दी थी।

बदायूं हत्याकांड के बाद बड़ा एक्शन, कई जिलों के पुलिस कप्तान बदले
लखनऊ । उत्तर प्रदेश सरकार ने बदायूं में दो अधिकारियों की हत्या की सनसनीखेज वारदात के बाद पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। Hindustan Petroleum Corporation Limited (एचपीसीएल) के दो अधिकारियों की हत्या के बाद राज्य सरकार ने बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. बृजेश कुमार सिंह को पद से हटा दिया है। उन्हें डीजीपी मुख्यालय की लॉजिस्टिक शाखा में तैनात किया गया है।
सरकार ने इस मामले के बाद कई जिलों के पुलिस कप्तानों के तबादले करते हुए नई नियुक्तियां की हैं। कासगंज की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा को बदायूं का नया एसएसपी बनाया गया है। वहीं फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार सिंह को उनके पद से हटाकर डीजीपी मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
इसके अलावा भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक को फतेहपुर का नया एसपी बनाया गया है। वहीं एसपी लॉजिस्टिक ओम प्रकाश सिंह प्रथम को कासगंज जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्रशासनिक फेरबदल के तहत गोरखपुर में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी को भदोही का नया पुलिस अधीक्षक बनाया गया है। वहीं गाजियाबाद में तैनात आईपीएस अधिकारी पाटिल निमिष दशरथ को गोरखपुर भेजा गया है।
सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। बदायूं में हुई दो अधिकारियों की हत्या की घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश भी दिए गए हैं कि मामले की जांच तेजी से पूरी की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Club 50Plus Ahmedabad – Creating an Active and Joyful Life for Seniors

In today’s fast-paced world, maintaining a healthy and socially connected life after the age of 50 has become increasingly important. Club 50Plus Ahmedabad is a unique initiative designed to help senior citizens stay active, engaged, and happy during their golden years.

Club 50Plus is not just a recreational group; it is a supportive senior community where individuals aged 50 and above can come together to enjoy meaningful experiences, build friendships, and participate in fun-filled activities. The club focuses on promoting healthy aging, emotional well-being, and social connectivity among its members.

The club regularly organizes picnics, day trips, social gatherings, games, music, dance events, and festive celebrations. These activities provide members with opportunities to relax, explore new places, and stay physically and mentally active. Such events play a vital role in reducing loneliness and encouraging seniors to lead positive and energetic lifestyles.

One of the most appreciated aspects of Club 50Plus is its transparent and genuine approach. For picnics and outings, the club only charges the actual cost, ensuring complete affordability and trust. Social gatherings and celebrations are organized on a shared contribution basis, typically ranging between ₹500 and ₹1500 depending on the event.

The club also offers lifetime membership at a reasonable fee of ₹5000, which is used to manage common expenses such as celebration arrangements, gifts, and cakes for members.

Club 50Plus is led by Mr. Akshay Mohnot, a Chartered Accountant who started this initiative with a sincere intention to bring happiness and engagement to senior citizens. His goal is not profit but creating a platform where seniors can enjoy entertainment, companionship, and a fulfilling lifestyle.

Since its launch in June 2024, Club 50Plus has received excellent feedback from members and continues to grow as a trusted senior activity club in Ahmedabad.

Club 50Plus strongly believes that age is just a number and that life after 50 can be full of excitement, laughter, and new friendships.

Club 50Plus – Be Young Forever!

आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की समस्याओं को लेकर विधानसभा में उठा मुद्दा – विधायक प्रदीप प्रसाद

हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने झारखंड विधानसभा में राज्य में कार्यरत आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारीगण (AYUSH Community Health Officers) की समस्याओं और उनकी लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ की तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं।विधानसभा में इस विषय को उठाते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार से मांग की कि आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनकी लंबित मांगों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी विशेष रूप से ग्रामीण और दूर-दराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आम लोगों तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लगातार समर्पण के साथ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि उनकी सेवा शर्तों, मानदेय, स्थायीकरण तथा अन्य सुविधाओं से संबंधित मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यदि आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की मांगों को समय रहते पूरा किया जाता है, तो इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक पहल करते हुए इनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।

प्रमंडलीय आयुक्त ने नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को दिलाई शपथ

हजारीबाग: नगर निगम, हजारीबाग के नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को आज प्रमंडलीय आयुक्त, श्री मनोज कुमार उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों ने विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं निष्ठा रखते हुए तथा भारत की सार्वभौमिकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करने की शपथ ली।इस अवसर पर प्रमंडलीय आयुक्त ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि नगर के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी जनप्रतिनिधि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनहित को सर्वोपरि रखते हुए नगर निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करेंगे।

इस अवसर पर हजारीबाग के उपायुक्त ने भी नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि नगर निगम क्षेत्र के समग्र विकास, स्वच्छता, आधारभूत संरचना तथा नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी जनप्रतिनिधि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए नगर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

शपथ समारोह में, निर्वाची पदाधिकारी उपमहापौर, सहायक निर्वाची पदाधिकारी, नगर निंगम, हजारीबाण, तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

भारत की जनगणना 2027 हेतु जिला एवं प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों का प्रशिक्षण प्रारम्भ

भारत की आगामी जनगणना 2027 के सफल संचालन के उद्देश्य से जिला एवं प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों तथा तकनीकी सहायकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 13 मार्च 2026 से 15 मार्च 2026 तक प्रमण्डलीय पंचायत प्रशिक्षण संस्थान, जबरा, हजारीबाग में आयोजित किया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर, हजारीबाग, अनुमण्डल पदाधिकारी, बरही, सहायक समाहर्त्ता सह प्रशिक्षु आईएएस, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी तथा जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड के संयुक्त निदेशक सह मास्टर प्रशिक्षक एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षक के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके आधार पर विभिन्न विकास योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन किया जाता है। इसलिए प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित पदाधिकारियों एवं तकनीकी सहायकों को जनगणना से संबंधित प्रक्रियाओं, तकनीकी पहलुओं तथा डाटा संकलन की विधियों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि जनगणना कार्य को पारदर्शी, सटीक एवं प्रभावी तरीके से संपन्न कराया जा सके।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जनगणना के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा डाटा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखण्डों से आए पदाधिकारी एवं तकनीकी सहायक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के माध्यम से जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु आवश्यक दक्षता विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कोई नौकरी नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा', पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसा करने से अनजाने में रूढ़िवादिता को बढ़ावा मिलेगा, इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।

सीजेआई सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है।

पीरियड्स लीव को अनिवार्य बनाने को लेकर चेताया

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि कुछ राज्य सरकारों और संगठनों ने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि केरल ने स्कूलों में ऐसी छूट दी है और कई निजी कंपनियों ने स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश नीतियां लागू की हैं। इस दलील के जवाब में, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियोक्ताओं द्वारा स्वैच्छिक उपाय स्वागत योग्य हैं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने आगाह किया कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य बनाने के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं।

महिलाओं के विकास क्या होगा असर?

सीजेआई ने कहा, स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा। उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा। पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी के मुरीद हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम, बोले-एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में, फिर भी अहंकार नहीं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता लगातार शिखर पर है। पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता के रूप में उभरे हैं। मोदी जितने आम जनता के बीच पसंद किए उतने ही वैश्विक स्तर के नेताओं के बीच भी उन्होंने अपना स्थान बनाया है। अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, पीएम मोदी ने खुद को ‘सत्ता के अहंकार’ (घमंड) से दूर रखा है।

मोदी के नेतृत्व की सराहना

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दिल्ली में होने वाले 'रायसीना डायलॉग' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर मार्च में आयोजित हो रहा है। यह एक सोच का शानदार नतीजा है। एबॉट ने इसकी तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से की। उन्होंने इसे स्विट्जरलैंड के दावोस और चीन के बोआओ फोरम से बेहतर बताया।

'रायसीना डायलॉग' को बताया दावोस से बेहतर

एबॉट ने कहा, “2016 से हर मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग होता आ रहा है। यह नरेंद्र मोदी के लंबे समय तक विदेश मंत्री रहे सुब्रह्मण्यम जयशंकर का विचार है। दूसरे ग्लोबल जमावड़ों की तरह, यह राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स, जाने-माने बिजनेसमैन, जाने-माने पत्रकारों और थिंक टैंक प्रमुखों को जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एक साथ लाता है; लेकिन यह दावोस से बेहतर है क्योंकि यह असल में मेजबानी करने वाली सरकार की सराहना करने का अभियान नहीं है।”

मोदी में दूसरों को सुनने का बड़ा गुण- एबॉट

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए एबॉट ने कहा, मोदी दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं। इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने का बड़ा गुण है। वे हर साल मुख्य अतिथि को सुनने के लिए कार्यक्रम में बैठते हैं, लेकिन खुद भाषण नहीं देते। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति को पूरे धैर्य के साथ सुना। एबॉट ने कहा कि शायद एक हिंदू संन्यासी के रूप में बिताए समय की वजह से मोदी में सत्ता का अहंकार नहीं आया है। वे एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में हैं, फिर भी बहुत विनम्र हैं।

भारत के कम लोकतांत्रिक होने के दावे को किया खारिज

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने कुछ इंटरनेशनल ऑब्जर्वर की इस आलोचना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के तहत भारत कम लोकतांत्रिक हो गया है। उन्होंने कहा, “जहां तक इस सोच की बात है कि भाजपा के राज में भारत किसी तरह एक तानाशाही देश बन गया है, यह पूरी तरह से बकवास है। जिस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनाव, पूरी तरह से आजाद मीडिया और मजबूती से आजाद न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का गंभीर खतरा नहीं है। और कोई भी तानाशाही ऐसी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी जहां कुछ भी मना न हो और किसी को चुप न कराया जाए। आखिरकार, इस साल की बातचीत में इजरायली विदेश मंत्री (वर्चुअली) और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री दोनों ने हिस्सा लिया।”

मांसपेशी-संरक्षण तकनीक से सफल घुटना प्रत्यारोपण मरीज अगले दिन से चलने लगा।

संजय द्विवेदी प्रयागराज।स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में 60 वर्षीय मरीज के बाएं घुटने का सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) किया गया। यह सर्जरी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आनंद कुमार की टीम ने आधुनिक सबवास्टस एप्रोच (Subvastus Approach) तकनीक से की।मरीज लंबे समय से घुटने के तीव्र दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई से परेशान थे। जांच में घुटने के जोड़ में उन्नत स्तर का ऑस्टियोआर्थराइटिस पाया गया, जिसके बाद टोटल नी रिप्लेसमेंट का निर्णय लिया गया।डॉ.

आनंद कुमार ने बताया कि सबवास्टस एप्रोच एक मसल-स्पेरिंग तकनीक है, जिसमें जांघ की मुख्य मांसपेशियों को काटे बिना ऑपरेशन किया जाता है। इससे मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र पुनर्वास का लाभ मिलता है। इस तकनीक की खासियत यह है कि मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन सहारे से चलना शुरू कर देता है।सर्जरी टीम में डॉ. सैफ और डॉ. रंजीत शामिल रहे, जबकि एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. नितिन और डॉ. अंकित ने सहयोग दिया।

ऑपरेशन थिएटर स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो.डॉ. वी.के. पांडेय ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि स्वरूप रानी चिकित्सालय में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की स्थिति स्थिर है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ ही दिनों में मरीज सामान्य गतिविधियों में लौट सकेगा।

संसद के नियम किसी भी व्यक्ति से सर्वोपरि, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों”, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद बोले ओम बिरला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया। इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने वापसी के बाद सदन को संबोधित किया।

सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखे-ओम बिरला

स्पीकर ओम बिरला ने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उम्मीदों को लेकर सदन में आता है और उनकी कोशिश हमेशा रही है कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार खुलकर रख सकें।

स्पीकर ने बताया क्यों लेने पड़े मुश्किल फैसले

इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है। बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े।

यह आसन लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधि-ओम बिरला

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, यह लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।

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आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की समस्याओं को लेकर विधानसभा में उठा मुद्दा – विधायक प्रदीप प्रसाद

हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने झारखंड विधानसभा में राज्य में कार्यरत आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारीगण (AYUSH Community Health Officers) की समस्याओं और उनकी लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए कहा कि राज्य के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी सेवाएं दे रहे आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ की तरह कार्य कर रहे हैं, लेकिन लंबे समय से उनकी कई महत्वपूर्ण मांगें लंबित हैं।विधानसभा में इस विषय को उठाते हुए विधायक प्रदीप प्रसाद ने सरकार से मांग की कि आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनकी लंबित मांगों का जल्द से जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी विशेष रूप से ग्रामीण और दूर-दराज़ के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और आम लोगों तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लगातार समर्पण के साथ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। ऐसे में सरकार का दायित्व बनता है कि उनकी सेवा शर्तों, मानदेय, स्थायीकरण तथा अन्य सुविधाओं से संबंधित मांगों पर सकारात्मक निर्णय ले।

विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि यदि आयुष सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की मांगों को समय रहते पूरा किया जाता है, तो इससे न केवल उनका मनोबल बढ़ेगा बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था भी और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक पहल करते हुए इनकी समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जाए।

प्रमंडलीय आयुक्त ने नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को दिलाई शपथ

हजारीबाग: नगर निगम, हजारीबाग के नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को आज प्रमंडलीय आयुक्त, श्री मनोज कुमार उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल, हजारीबाग द्वारा पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों ने विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा एवं निष्ठा रखते हुए तथा भारत की सार्वभौमिकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए अपने कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करने की शपथ ली।इस अवसर पर प्रमंडलीय आयुक्त ने नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि नगर के विकास में जनप्रतिनिधियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी जनप्रतिनिधि पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनहित को सर्वोपरि रखते हुए नगर निगम क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करेंगे।

इस अवसर पर हजारीबाग के उपायुक्त ने भी नवनिर्वाचित महापौर एवं वार्ड पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि नगर निगम क्षेत्र के समग्र विकास, स्वच्छता, आधारभूत संरचना तथा नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी जनप्रतिनिधि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए नगर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

शपथ समारोह में, निर्वाची पदाधिकारी उपमहापौर, सहायक निर्वाची पदाधिकारी, नगर निंगम, हजारीबाण, तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

भारत की जनगणना 2027 हेतु जिला एवं प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों का प्रशिक्षण प्रारम्भ

भारत की आगामी जनगणना 2027 के सफल संचालन के उद्देश्य से जिला एवं प्रखण्ड स्तरीय पदाधिकारियों तथा तकनीकी सहायकों के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिनांक 13 मार्च 2026 से 15 मार्च 2026 तक प्रमण्डलीय पंचायत प्रशिक्षण संस्थान, जबरा, हजारीबाग में आयोजित किया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर, हजारीबाग, अनुमण्डल पदाधिकारी, बरही, सहायक समाहर्त्ता सह प्रशिक्षु आईएएस, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी तथा जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड के संयुक्त निदेशक सह मास्टर प्रशिक्षक एवं राष्ट्रीय प्रशिक्षक के द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं सांख्यिकीय प्रक्रिया है, जिसके आधार पर विभिन्न विकास योजनाओं का निर्माण एवं क्रियान्वयन किया जाता है। इसलिए प्रशिक्षण के माध्यम से संबंधित पदाधिकारियों एवं तकनीकी सहायकों को जनगणना से संबंधित प्रक्रियाओं, तकनीकी पहलुओं तथा डाटा संकलन की विधियों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि जनगणना कार्य को पारदर्शी, सटीक एवं प्रभावी तरीके से संपन्न कराया जा सके।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जनगणना के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा डाटा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के विभिन्न प्रखण्डों से आए पदाधिकारी एवं तकनीकी सहायक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम के माध्यम से जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु आवश्यक दक्षता विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कोई नौकरी नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा', पीरियड्स लीव पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसा करने से अनजाने में रूढ़िवादिता को बढ़ावा मिलेगा, इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं।

सीजेआई सूर्यकांत की अहम टिप्पणी

देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है।

पीरियड्स लीव को अनिवार्य बनाने को लेकर चेताया

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक याचिकाकर्ता की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एम.आर. शमशाद ने दलील दी कि कुछ राज्य सरकारों और संगठनों ने इस दिशा में पहले ही कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि केरल ने स्कूलों में ऐसी छूट दी है और कई निजी कंपनियों ने स्वेच्छा से मासिक धर्म अवकाश नीतियां लागू की हैं। इस दलील के जवाब में, सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि नियोक्ताओं द्वारा स्वैच्छिक उपाय स्वागत योग्य हैं। हालांकि, शीर्ष अदालत ने आगाह किया कि कानून के माध्यम से मासिक धर्म अवकाश को अनिवार्य बनाने के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं।

महिलाओं के विकास क्या होगा असर?

सीजेआई ने कहा, स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा। उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा। पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया।

पीएम मोदी के मुरीद हुए पूर्व ऑस्ट्रेलियाई पीएम, बोले-एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में, फिर भी अहंकार नहीं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक लोकप्रियता लगातार शिखर पर है। पीएम मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता के रूप में उभरे हैं। मोदी जितने आम जनता के बीच पसंद किए उतने ही वैश्विक स्तर के नेताओं के बीच भी उन्होंने अपना स्थान बनाया है। अब ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि 10 साल से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बावजूद, पीएम मोदी ने खुद को ‘सत्ता के अहंकार’ (घमंड) से दूर रखा है।

मोदी के नेतृत्व की सराहना

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने दिल्ली में होने वाले 'रायसीना डायलॉग' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर मार्च में आयोजित हो रहा है। यह एक सोच का शानदार नतीजा है। एबॉट ने इसकी तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से की। उन्होंने इसे स्विट्जरलैंड के दावोस और चीन के बोआओ फोरम से बेहतर बताया।

'रायसीना डायलॉग' को बताया दावोस से बेहतर

एबॉट ने कहा, “2016 से हर मार्च में दिल्ली में रायसीना डायलॉग होता आ रहा है। यह नरेंद्र मोदी के लंबे समय तक विदेश मंत्री रहे सुब्रह्मण्यम जयशंकर का विचार है। दूसरे ग्लोबल जमावड़ों की तरह, यह राजनीतिक नेताओं, वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स, जाने-माने बिजनेसमैन, जाने-माने पत्रकारों और थिंक टैंक प्रमुखों को जरूरी मुद्दों पर बात करने के लिए एक साथ लाता है; लेकिन यह दावोस से बेहतर है क्योंकि यह असल में मेजबानी करने वाली सरकार की सराहना करने का अभियान नहीं है।”

मोदी में दूसरों को सुनने का बड़ा गुण- एबॉट

प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए एबॉट ने कहा, मोदी दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हैं। इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने का बड़ा गुण है। वे हर साल मुख्य अतिथि को सुनने के लिए कार्यक्रम में बैठते हैं, लेकिन खुद भाषण नहीं देते। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री और इस साल फिनलैंड के राष्ट्रपति को पूरे धैर्य के साथ सुना। एबॉट ने कहा कि शायद एक हिंदू संन्यासी के रूप में बिताए समय की वजह से मोदी में सत्ता का अहंकार नहीं आया है। वे एक दशक से ज्यादा समय से सत्ता में हैं, फिर भी बहुत विनम्र हैं।

भारत के कम लोकतांत्रिक होने के दावे को किया खारिज

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने कुछ इंटरनेशनल ऑब्जर्वर की इस आलोचना को भी पूरी तरह से खारिज कर दिया कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के तहत भारत कम लोकतांत्रिक हो गया है। उन्होंने कहा, “जहां तक इस सोच की बात है कि भाजपा के राज में भारत किसी तरह एक तानाशाही देश बन गया है, यह पूरी तरह से बकवास है। जिस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनाव, पूरी तरह से आजाद मीडिया और मजबूती से आजाद न्यायपालिका हो, वहां तानाशाही का गंभीर खतरा नहीं है। और कोई भी तानाशाही ऐसी ग्लोबल कॉन्फ्रेंस नहीं करेगी जहां कुछ भी मना न हो और किसी को चुप न कराया जाए। आखिरकार, इस साल की बातचीत में इजरायली विदेश मंत्री (वर्चुअली) और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री दोनों ने हिस्सा लिया।”

मांसपेशी-संरक्षण तकनीक से सफल घुटना प्रत्यारोपण मरीज अगले दिन से चलने लगा।

संजय द्विवेदी प्रयागराज।स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय में 60 वर्षीय मरीज के बाएं घुटने का सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट (TKR) किया गया। यह सर्जरी ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आनंद कुमार की टीम ने आधुनिक सबवास्टस एप्रोच (Subvastus Approach) तकनीक से की।मरीज लंबे समय से घुटने के तीव्र दर्द और चलने-फिरने में कठिनाई से परेशान थे। जांच में घुटने के जोड़ में उन्नत स्तर का ऑस्टियोआर्थराइटिस पाया गया, जिसके बाद टोटल नी रिप्लेसमेंट का निर्णय लिया गया।डॉ.

आनंद कुमार ने बताया कि सबवास्टस एप्रोच एक मसल-स्पेरिंग तकनीक है, जिसमें जांघ की मुख्य मांसपेशियों को काटे बिना ऑपरेशन किया जाता है। इससे मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और शीघ्र पुनर्वास का लाभ मिलता है। इस तकनीक की खासियत यह है कि मरीज ऑपरेशन के अगले ही दिन सहारे से चलना शुरू कर देता है।सर्जरी टीम में डॉ. सैफ और डॉ. रंजीत शामिल रहे, जबकि एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. नितिन और डॉ. अंकित ने सहयोग दिया।

ऑपरेशन थिएटर स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो.डॉ. वी.के. पांडेय ने टीम को बधाई देते हुए कहा कि स्वरूप रानी चिकित्सालय में आधुनिक तकनीकों के माध्यम से मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।ऑपरेशन सफल रहा और मरीज की स्थिति स्थिर है। चिकित्सकों के अनुसार कुछ ही दिनों में मरीज सामान्य गतिविधियों में लौट सकेगा।

संसद के नियम किसी भी व्यक्ति से सर्वोपरि, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों”, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद बोले ओम बिरला

#ombirlacomebackinloksabhasaysallmembersmustfollow_rules

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया। इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव खारिज होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने वापसी के बाद सदन को संबोधित किया।

सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार रखे-ओम बिरला

स्पीकर ओम बिरला ने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि यह सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि हर सांसद अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और उम्मीदों को लेकर सदन में आता है और उनकी कोशिश हमेशा रही है कि सभी सदस्य नियमों के तहत अपने विचार खुलकर रख सकें।

स्पीकर ने बताया क्यों लेने पड़े मुश्किल फैसले

इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है। बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी। उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े।

यह आसन लोकतंत्र की भावना का प्रतिनिधि-ओम बिरला

उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों। उन्होंने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, यह लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।