ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, पूरा देश देखेगा’ केंद्र के माइनिंग बिल पर सीएम हेमंत की चेतावनी

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केंद्र सरकार के खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलन के ऐलान एक्स पर किए एक पोस्ट में दी।

हेमंत सोरेन ने पूछा- हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा, झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा- खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम सोरेन ने बताई आंदोलन की वजह

अपने पोस्ट में सीएम सोरेन ने आंदोलन की वजह भी बताई। उन्होंने लिखा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है। यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। सीएम ने पोस्ट में यह भी लिखा कि इस बिल के कारण झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।

हर जिला-प्रखंड और पंचायत में होगा कड़ा विरो- हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। पोस्ट के आखिर में सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।

माइनिंग बिल के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों, विधायकों और पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई।

चमोली हादसे में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर सीएम सोरेन ने पुष्कर धामी से की बात, हेल्पलाइन नंबर जारी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल के धंसने से कई मजदूरों की मौत हो गई है। उनमें झारखंड के भी मजदूर शामिल हैं। वहीं, इस हादसे में कई श्रमिक अंदर फंसे हुए हैं। झारखंड के खूंटी, गुमला आदि जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की खबर है। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात की।

सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि झारखंड के खूंटी और गुमला जिले के कई मजदूरों के टनल में फंसे रहने की खबर मिलने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कंट्रोल रूम नंबर 1.हेल्पलाइन नंबर (टोल फ्री): 1800-3456-526 2.हेल्पलाइन व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427 पर संपर्क कर कृपया जानकारी साझा करें। सरकार हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने ये भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। हेमंत सोरेने ने लिखा, बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसे होने की खबरें मन को व्यथित करती हैं। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं।

Studying Abroad Sounds Exciting. But Where Should You Actually Go?

There is a particular kind of excitement that happens when a student says:“I want to study abroad.”

Suddenly, the family WhatsApp group is full of university rankings, YouTube campus tours, tuition fees and somebody's friend's cousin who apparently knows everything about studying in Europe.

Then comes the slightly less exciting question:

“Okay. Where exactly?”

With thousands of universities, courses and destinations to choose from, finding the right university can quickly become overwhelming.

And the biggest university name isn't necessarily the best answer.

Start With the Student, Not the University

A good university on paper can still be the wrong choice for a particular student.

The course may not fit their career goals. The cost may not work for the family. The country may offer an exciting opportunity but an environment the student isn't prepared for.

That is why university admissions should begin with a few more important questions:

Is the student eligible? What do they want to study? Can they afford it? Are they ready to live independently? And what kind of environment will help them thrive?

AdmissionsNest begins with understanding the student before moving into university shortlisting.

Through eligibility and readiness assessments and personalised admissions counselling, students can explore courses and universities based on their academic profile, goals, circumstances and aspirations.

Because Studying Abroad Is More Than Getting on a Plane

Getting admission to a university in Europe is an achievement.

But then comes the part nobody puts on the university brochure.

The weather may be completely different. Classroom expectations may change. Food, communication styles and social norms may be unfamiliar. Students may suddenly be managing their own money, accommodation, travel and daily life.

And then there is culture.

Europe offers an enormous variety of languages, traditions, communities and ways of life. For a student coming from India, that can be an incredible opportunity to discover new perspectives and people.

It can also take some getting used to.

AdmissionsNest therefore looks beyond academic eligibility to student readiness, helping students think about whether they are prepared for the independence, cultural adjustment and new environment that come with studying abroad.

Because getting there is one thing.

Being comfortable enough to thrive there is another.

Finding the Right Option Without Getting Lost in the Options

Students don't always need the same pathway.

For one, the right choice might be a university in the UK or elsewhere in Europe.

For another, it could be one of India's leading institutions.

For a working professional looking to change careers, upskill or pursue a promotion, an online degree may be the smarter option, allowing education to fit around an existing career.

AdmissionsNest helps students explore these different pathways through its university and course options, filtering possibilities based on relevant factors and providing one-to-one admissions counselling to help narrow the field.

And because higher education is a significant financial commitment, the conversation also needs to include scholarships, education loans, living costs and available work-and-study opportunities, where applicable.

From Shortlisting to the Admission Letter

Once a student has identified suitable options, AdmissionsNest can support the next steps, including applications, documentation, scholarship guidance, education-loan assistance and visa support.

The goal isn't to send every student abroad.

It is to help each student find a pathway that makes sense for their education, career goals, finances and readiness.

And the support doesn't necessarily stop when the admission letter arrives.

Through the wider Crescet ecosystem and its connection with TutorsNest, students can continue accessing academic guidance and support after they begin their studies.

Because admission is not the finish line.

It's the starting point.

So, Where Should You Go?

Maybe the answer is a university in Europe.

Maybe it's a leading institution in India.

Maybe it's an online degree that lets a working professional build a new career without putting their current one on hold.

The point is that there isn't one “best” university for everyone.

There is a best-fit pathway for each student.

AdmissionsNest is designed to help students and families find it through eligibility assessment, readiness assessment, admissions counselling, university shortlisting and support from application to beyond admission.

Because the question isn't simply:

“Where can I get admitted?”

It's:

“Where can I learn, adapt, grow and build the future I'm actually aiming for?”

That's where the right university search begins.

 

Website link: https://admissionsnest.in/

 

 

 

राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस के अर्न्तगत स्वस्थ बचपन - उज्जवल भविष्य और छोटा कदम, बड़ा स्वास्थ्य लाभ कार्यक्रम का हुआ  शुभारंभ
      
सुल्तानपुर, 10 अगस्त/पेट के कीड़ों से बच्चों को मुक्त कर उन्हें सेहतमंद और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज GD Goenka School Sultanpur Campus में राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल Albendazole की दवा खिलाकर कृमि मुक्त करना है।
      
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्थ बचपन - उज्जवल भविष्य और छोटा कदम, बड़ा स्वास्थ्य लाभ थीम के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में  मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोदय एवं उप जिला विद्यालय निरीक्षक उपस्थित रहे।
       मुख्य अतिथियों ने बच्चों को कृमि संक्रमण के दुष्प्रभाव और उससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पेट के कीड़ों से छुटकारा, सेहतमंद, सशक्त एवं भविष्य हमारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूल, अभिभावक और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर काम करना होगा।
      कार्यक्रम के दौरान स्कूल के छात्र-छात्राओं को मंच पर एल्बेंडाजोल की गोली वितरित की गई। साथ ही हाथ धोने, साफ पानी पीने और स्वच्छता अपनाने पर जोर दिया गया। बड़ी संख्या में बच्चे, शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी (ACMO, Dy- CMO, DIO, DPM, DCPM, DMHC, DEIC, FPLMIS, MOIC, BPM, BCPM ) उपस्थित रहे।
      जनपद में कुल 3521 विद्यालयों एवं 2511 आंगनबाड़ी केन्द्रो के माध्यम से 1120828 बच्चों को एल्बेंडाजोल/ डिवर्मिंग की टेबलेट खिलाई जाएगी।
झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच पीएम मोदी ने सीएम हेमंत सोरेन को दी बधाई, जानें क्या लिखा

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झारखंड में इन दिनों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन के बीच आज राज्यभर से हजारों की संख्या में आए छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शन के बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है।

हेमंत सोरेन को दी बधाई

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।

रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू

इधर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू हो गया है। पुराने विधानसभा मैदान से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च के दौरान छात्र पहले बैरियर तक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरियर तोड़ दिया। छात्रों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।

25 जुलाई है जारी है धरना-प्रदर्शन

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र अब सरकार के साथ आर-पार के मूड में हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बार बातचीत का दौर चल चुका है, हालांकि दोनों के बीच हुई चर्चा बेनतीजा निकली है। दरअसल, छात्र अनियमितताओं के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर छात्र अड़ गए हैं।

77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन: जल, जंगल, जमीन के संरक्षण से ही बनेगा समृद्ध झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना सोरेन आज खेलगांव, रांची स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन ही सतत भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर और चिंताजनक चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसके प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और समग्र विकास प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ लगातार हो रहे हस्तक्षेप, अंधाधुंध दोहन तथा अनियोजित विकास गतिविधियों के कारण जलवायु में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण, खनन गतिविधियों, शहरीकरण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों का पर्यावरण पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ से बचना होगा तथा जल, जंगल और जमीन जैसे अमूल्य संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना होगा। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने के लिए आज से ही ठोस कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण, वन संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक आमजन इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा हरित एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प भी ले। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना, उनका नियमित संरक्षण करना और उन्हें विकसित कर वृक्ष के रूप में स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले समय में झारखंड हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विभिन्न अभियान के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे। साथ ही, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का असर मानव जीवन के साथ पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर भी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति और तीव्रता में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि अनियमित वर्षा, बादल फटने की घटनाएं, अत्यधिक वर्षा, भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखे की स्थिति, बिजली गिरने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन बदलते मौसमीय हालात का सीधा प्रभाव मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों और आजीविका पर पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों को इसका गंभीर प्रभाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन-धन की हानि के साथ-साथ फसलों, पशुधन और आधारभूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्राकृतिक आवासों में बदलाव, जल स्रोतों का प्रभावित होना तथा पर्यावरणीय असंतुलन जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।

पर्यावरण, मानव जीवन और वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रजातियों का चयन करना आवश्यक है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी की प्रकृति तथा क्षेत्र की जैव विविधता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। इसके तहत फलदार, छायादार, औषधीय एवं वन्यजीवों के लिए अनुकूल वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति के अनुकूल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ देने वाली वृक्षारोपण योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, ताकि झारखंड को अधिक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित राज्य बनाया जा सके।

अंत में असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ रहा है। बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा संरक्षित वन क्षेत्रों को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं तथा उनके जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। कई बार वन्यजीवों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में अपने मूल आवास छोड़ने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अस्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि मानव गतिविधियों के विस्तार तथा जंगलों के लगातार घटते क्षेत्रफल के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। यह स्थिति पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत है और हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन की सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का आधार पर्यावरण ही है। स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम या अभियान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग को जनभागीदारी के साथ बढ़ावा देना होगा। तभी हम पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को किया सम्मानित

77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित झारखंड के निर्माण में इनकी भूमिका प्रेरणादायी है।

सम्मानित होने वालों में शामिल हैं

श्रीमती फुलवीन बेरनादेत कुजूर (रांची वन प्रमंडल), श्री टिकैत चन्द्र प्रधान (घाटशिला वन प्रमंडल), श्री बुधदेव चालक (दुमका वन प्रमंडल), श्री पौथीराम हांसदा (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री रमेश नायक (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री निरोज टेटे (गुमला वन प्रमंडल), श्री तारकेश्वर मुंडा (रांची वन प्रमंडल), श्रीमती सोनी देवी (झारखंड जैव-विविधता परिषद, रांची)

श्री लक्ष्मण मुर्मू (साहेबगंज वन प्रमंडल)

श्री राजीव रंजन प्रसाद (साहेबगंज वन प्रमंडल), मो० जैनुल अंसारी (सिमडेगा वन प्रमंडल), श्री कृष्ण सिंह (कोडरमा वन प्रमंडल), श्री मनोज राणा (गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल), श्री मिथिलेश कुमार (मेदिनीनगर वन प्रमंडल), श्री सुरेन्द्र पासवान (मेदिनीनगर वन प्रमंडल)

श्री मुनेश्वर महतो (हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल), श्री खुशीद आलम (चतरा उत्तरी वन प्रमंडल), श्री गुडल सिंह (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री राजु कोरवा (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री नासिर खान (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल)

इस अवसर पर विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विश्वनाथ शाह, श्री ए. टी. मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वेंकटेश लू, श्री जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एस. आर. नेटेशा सहित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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#Team PRD(CMO)

धान खरीद व्यवस्था में सुधार की मांग, राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को सौंपे अहम सुझाव
-  लखनऊ में 39वीं वार्षिक आम सभा संपन्न, कैबिनेट मंत्री मनोज पाण्डेय बोले—किसानों के हित और पारदर्शी खरीद व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन की 39वीं वार्षिक आम सभा गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पाण्डेय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं सुचारु बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने राइस मिलर्स को सरकार का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान राइस मिलर्स एसोसिएशन ने प्रदेश में धान खरीद व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। एसोसिएशन ने मिलर्स को दिए जाने वाले होल्डिंग चार्ज को वर्तमान 30 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर न्यूनतम 75 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की।
इसके अलावा एसोसिएशन ने धान खरीद की अवधि 1 नवंबर से 31 मार्च तक निर्धारित करने तथा कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के पूर्ण निस्तारण की समय-सीमा 30 जून तक तय करने का सुझाव दिया। संगठन ने ठेका एवं बटाईदार किसानों को भी सरकारी धान खरीद व्यवस्था में शामिल करने की मांग की, ताकि उन्हें भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।
राइस मिलर्स एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया कि भविष्य में धान खरीद नीति तैयार करते समय संगठन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर अधिक प्रभावी और क्रियान्वयन योग्य नीति बनाई जा सके।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय शुक्ल, प्रदेश महामंत्री हरि किशोर गुप्ता, प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रमोद सिंह सहित प्रदेशभर से आए राइस मिलर्स, उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
21 करोड़ के तटबंध पर 2 अरब खर्च, फिर भी बाढ़ का संकट

20 साल से बंधे के मरम्मत का धंधा जारी, स्थायी समाधान नहीं

*भिखारीपुर-सकरौर और एल्गिन-चरसड़ी तटबंध हर साल टूटते | डेढ़ लाख आबादी खतरे में

गोंडा।  बाढ़ से बचाव के लिए करीब 20 वर्ष पहले 21 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए
भिखारीपुर-सकरौर और एल्गिन-चरसड़ी तटबंधों की मरम्मत पर अब तक 2 अरब रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।इसके बावजूद हर साल बाढ़ का संकट बरकरार है। इस बार भी सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर डेढ़ लाख से अधिक आबादी की चिंता बढ़ गई है।वर्ष 2005-06 में 22.600 किमी लंबे भिखारीपुर-सकरौर तटबंध का निर्माण करीब 7 करोड़ में शुरू हुआ।इसके बाद 2006-07 में गोंडा, बहराइच और बाराबंकी की सीमा पर 52.400 किमी लंबे एल्गिन-चरसड़ी तटबंध पर करीब 14 करोड़ खर्च हुए। 
दोनों पर कुल 21 करोड़ की लागत आई थी। उद्देश्य था करनैलगंज और तरबगंज तहसील के सैकड़ों गांवों को बाढ़ से बचाना।परन्तु नदी के तेज बहाव और कटान से ये तटबंध हर साल कमजोर होते गए। निर्माण के बाद से ही मरम्मत का सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है।बताया जाता है कि दोनों तटबंधों की मरम्मत और मजबूतीकरण पर हर साल 20 से 25 करोड़ खर्च होते हैं। पिछले 20 साल में 2 अरब से अधिक खर्च हो चुका है।इसके अलावा दोनों तटबंधों पर बने 25 से अधिक स्परों की मरम्मत पर भी हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।

*लोगों का सवाल: 'बंधे का धंधा' कब तक? 
स्थानीय लोग कहते हैं - हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं, पर अगले मानसून में फिर वही स्थिति।गोंडा-बलरामपुर से भाजपा MLC अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह कई बार स्थायी समाधान की मांग कर चुके हैं।

*MLC मंजू सिंह का बयान:* 
*"अब तक मरम्मत पर जितनी धनराशि खर्च हुई, उतने में एक स्थायी पक्का तटबंध बन सकता था।* 
*मैं कई सालों से ऐली माझा से लोलपुर तक पक्का तटबंध की मांग कर रहा हूं।*ऐली माझा से दत्तनगर तक पक्का तटबंध बन जाए तो हर साल बाढ़ से राहत मिलेगी।*मैं फिर CM से मिलकर स्थायी तटबंध की मांग करूंगा, ताकि मरम्मत पर करोड़ों के खर्च और अनियमितताओं पर रोक लगे।"*


21 करोड़ का प्रोजेक्ट, 2 अरब का खर्च। पर बाढ़ आज भी। नेपाल से पानी छूटते ही गोंडा, बाराबंकी, बहराइच, अयोध्या में तबाही। अब सवाल है स्थायी तटबंध का।
विकसित राष्ट्र निर्माण में आर.सी.एम. अभियान सर्वोपरि होगा- डी. कुमार

मुंबई। स्वास्थ्य, सेवा,संस्कार एवं महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य तथा स्वदेशी अपनाओ‌,प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ बनाओ अभियान को लेकर महानगर में मजबूती प्रदान करने एवं बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से अंडरवर्ल्ड प्रांगण गोरेगांव मुंबई में मंगलवार 21 जुलाई 2026 को कोर लीडर एवं स्टार रुबी डी कुमार का वाराणसी उत्तर प्रदेश से मुंबई महानगर में पदार्पण हुआ।जहां उपस्थित अतिथियों ने स्टार रुबी डी कुमार सर का अंगवस्त्र, पुष्पहार के साथ कर्तलध्वनि से स्वागत किया।डी कुमार सर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जनरल मैनेजर पद पर कार्यरत होते हुए पार्ट टाइम आरसीएम से जुड़े पर कुछ वर्षों पश्चात बैंक की नौकरी से ज्यादा आय आरसीएम में होने लगा तो उसे छोड़कर फूलटाइम आरसीएम ज्वाइन करके देश को स्वस्थ एवं सबल बनाने की वीणा उठाई।आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में युवा बेरोजगार पड़े हुए हैं सिर्फ जिविकोपार्जन कर रहें हैं ऐसे में उनका भविष्य क्या होगा पता नहीं।ऐसी स्थिति में आरसीएम पूरे देश में बेरोज़गारी समाप्त करके युवाओं का भविष्य सुनहरा बनाने तथा सपना साकार करने के उद्देश्य को लेकर अपना अभियान चला रही है।उक्त उद्देश्य को लेकर स्टार रुबी डी कुमार सर ने सैकड़ों RCM सेवकों को संबोधित करते हुए आरसीएम के उद्देश्य को समझाया। स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर आरसीएम 450 से अधिक उत्पादों को लेकर देश में हाजिर है जो गुणवत्ता और शुद्धता के हर मानक पर भारत सरकार द्वारा खरा उतरते हुए मान्यता प्राप्त है।सही उत्पादों के चयन एवं उसके उपयोग से देश के हम सभी नागरिक स्वस्थ रह सकते हैं।आप भी स्वस्थ रहें और देश के हर नागरिक को भी स्वस्थ बनाए। अंत उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र निर्माण में आर. सी. एम. अभियान सर्वोपरि होगा।वक्ता डी कुमार के मार्गदर्शन से सैकड़ों लोग लाभान्वित हुए तथा उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की सभी ने वीणा उठाई।डी कुमार ने कहा देश की वर्तमान हालत ऐसी हो गई है कि युवा नौजवान आज नौकरी के लिए परेशान हैं ऐसी स्थिति में आरसीएम ऐसे बेरोजगारों को सुनहरा अवसर प्रदान करने हेतु खड़ी है,आज ज्वाइन करें आपका आने वाला कल बदलिए।उक्त कार्यक्रम का आयोजन दीपक सिंह एवं संयोजन अंडरवर्ल्ड प्राइम गोरेगांव के नरेन्द्र जैन ने किया।उपस्थित अतिथियों में कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप,जौनपुर से रविन्द्र कुमार शर्मा,अनिल गुलाब विश्वकर्मा, नरेन्द्र सिंह तामट्टा,रमेश सिंह, छोटेलाल कोल,अमृता सिंह, शरद मारुति जाधव, मसिलामणी नाडार,अनिता विक्रम सिंह तामट्टा,कुबेर बोरले,देवेन्द्र यादव,कमलेश कुमार,प्रदीप यादव,संदेश एम सिंह,शर्मिला दीपक सिंह, मथुरा नरेन्द्र सिंह तामट्टा प्रमुख रहे।
Nirmal Enterprises Completes 16 Years of Trusted

Home Appliance Repair Services in Pune & PCMCPune, India: Modern homes depend on appliances that make everyday life easier, from

refrigerators and washing machines to kitchen chimneys and dishwashers. When these

essential appliances stop working, homeowners need a repair service they can trust. For the

last 16 years, Nirmal Enterprises has been helping families across Pune and

Pimpri-Chinchwad (PCMC) with professional home appliance repair, installation, and

maintenance services delivered directly at customers' doorsteps.

With a customer-focused approach and experienced technicians, Nirmal Enterprises has

established itself as a reliable service provider for a wide range of kitchen and household

appliances. The company believes that appliance servicing should be simple, transparent,

and hassle-free, ensuring customers receive quality repairs without unnecessary delays.

Doorstep Appliance Repair with Transparent Pricing

One of the biggest reasons behind the company's growing customer base is its convenient

doorstep service model. Customers simply contact the service team, explain the issue, and a

certified technician is assigned based on location.

After inspecting the appliance, the technician provides a detailed quotation before starting

any repair work. This transparent pricing system allows customers to understand the repair

cost in advance, helping them make informed decisions without worrying about hidden

charges.

Complete Solutions for Home & Kitchen Appliances

Over the years, Nirmal Enterprises has expanded its expertise to service multiple home

appliances from leading brands. The company offers repair, installation, and maintenance

services for:

● Kitchen Chimneys

● Built-in Hobs

● Gas Cooktops

● Cooking Ranges

● Dishwashers

● Refrigerators

● Washing Machines

● Built-in Ovens

● Built-in Microwaves

● Air Conditioners

Whether it's a cooling issue in a refrigerator, a dishwasher malfunction, or a chimney that

requires deep servicing, the company provides practical solutions designed to restore

appliances quickly and efficiently. Genuine Spare Parts and Certified Technicians

Quality repairs depend on both technical expertise and reliable replacement parts. According

to the company, every repair is carried out by trained professionals using genuine spare

parts wherever required.

This approach helps improve appliance performance while reducing the chances of recurring

issues. Customers also receive a service warranty, giving them additional confidence in the

repair process.

Preventive Maintenance for Long-Term Performance

Apart from emergency repairs, Nirmal Enterprises encourages homeowners to invest in

regular appliance maintenance. Preventive servicing helps improve efficiency, reduce

unexpected breakdowns, and extend the overall lifespan of appliances.

This is particularly beneficial for premium built-in kitchen appliances, which often require

specialized maintenance to ensure smooth performance over the years.

Customer Satisfaction Remains the Priority

Customer reviews consistently highlight prompt service, transparent pricing, professional

technicians, and timely repairs. Many homeowners appreciate the company's same-day

service availability and clear communication throughout the repair process.

Several long-term customers have also chosen annual maintenance services, allowing them

to keep multiple appliances in excellent working condition throughout the year.

Sharing Knowledge Beyond Repairs

In addition to providing repair services, Nirmal Enterprises regularly publishes helpful blogs

for homeowners. These articles cover practical maintenance tips, appliance care guides,

chimney cleaning methods, and recommendations that help customers maximize appliance

performance between professional service visits.

By educating customers, the company aims to reduce unnecessary breakdowns while

helping homeowners make better decisions about appliance maintenance.

Serving Pune and PCMC for 16 Years

Based in Kothrud, Nirmal Enterprises serves customers throughout Pune and

Pimpri-Chinchwad with seven-day service availability. As the demand for modern kitchen

appliances and premium built-in solutions continues to grow, the company remains

committed to delivering dependable repair services backed by experience, transparency,

and customer satisfaction.

With 16 years of industry experience, Nirmal Enterprises continues to strengthen its

reputation as one of Pune's trusted names in home appliance repair and maintenance. For more information visit: https://nirmal-enterprises.com/

ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, पूरा देश देखेगा’ केंद्र के माइनिंग बिल पर सीएम हेमंत की चेतावनी

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केंद्र सरकार के खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलन के ऐलान एक्स पर किए एक पोस्ट में दी।

हेमंत सोरेन ने पूछा- हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा, झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा- खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम सोरेन ने बताई आंदोलन की वजह

अपने पोस्ट में सीएम सोरेन ने आंदोलन की वजह भी बताई। उन्होंने लिखा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है। यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। सीएम ने पोस्ट में यह भी लिखा कि इस बिल के कारण झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।

हर जिला-प्रखंड और पंचायत में होगा कड़ा विरो- हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। पोस्ट के आखिर में सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।

माइनिंग बिल के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों, विधायकों और पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई।

चमोली हादसे में फंसे झारखंड के मजदूरों को लेकर सीएम सोरेन ने पुष्कर धामी से की बात, हेल्पलाइन नंबर जारी

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उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन टनल के धंसने से कई मजदूरों की मौत हो गई है। उनमें झारखंड के भी मजदूर शामिल हैं। वहीं, इस हादसे में कई श्रमिक अंदर फंसे हुए हैं। झारखंड के खूंटी, गुमला आदि जिलों के कुछ श्रमिकों के फंसे होने की खबर है। इसकी जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से फोन पर बात की।

सभी मजदूरों के सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया एक्स पर बताया कि झारखंड के खूंटी और गुमला जिले के कई मजदूरों के टनल में फंसे रहने की खबर मिलने के बाद उन्होंने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की। उन्होंने आश्वस्त किया है कि सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।

झारखंड सरकार की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी

मुख्यमंत्री ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के कंट्रोल रूम नंबर 1.हेल्पलाइन नंबर (टोल फ्री): 1800-3456-526 2.हेल्पलाइन व्हाट्सएप नंबर: 9470132591, 9431336472, 9431336427 पर संपर्क कर कृपया जानकारी साझा करें। सरकार हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम-हेमंत सोरेन

सीएम सोरेन ने ये भी कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। हेमंत सोरेने ने लिखा, बार-बार निर्माणाधीन सुरंगों में हादसों और श्रमिकों के फंसे होने की खबरें मन को व्यथित करती हैं। विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति के सम्मान और पर्यावरणीय संतुलन के साथ। प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम हमें बार-बार चेताते हैं।

Studying Abroad Sounds Exciting. But Where Should You Actually Go?

There is a particular kind of excitement that happens when a student says:“I want to study abroad.”

Suddenly, the family WhatsApp group is full of university rankings, YouTube campus tours, tuition fees and somebody's friend's cousin who apparently knows everything about studying in Europe.

Then comes the slightly less exciting question:

“Okay. Where exactly?”

With thousands of universities, courses and destinations to choose from, finding the right university can quickly become overwhelming.

And the biggest university name isn't necessarily the best answer.

Start With the Student, Not the University

A good university on paper can still be the wrong choice for a particular student.

The course may not fit their career goals. The cost may not work for the family. The country may offer an exciting opportunity but an environment the student isn't prepared for.

That is why university admissions should begin with a few more important questions:

Is the student eligible? What do they want to study? Can they afford it? Are they ready to live independently? And what kind of environment will help them thrive?

AdmissionsNest begins with understanding the student before moving into university shortlisting.

Through eligibility and readiness assessments and personalised admissions counselling, students can explore courses and universities based on their academic profile, goals, circumstances and aspirations.

Because Studying Abroad Is More Than Getting on a Plane

Getting admission to a university in Europe is an achievement.

But then comes the part nobody puts on the university brochure.

The weather may be completely different. Classroom expectations may change. Food, communication styles and social norms may be unfamiliar. Students may suddenly be managing their own money, accommodation, travel and daily life.

And then there is culture.

Europe offers an enormous variety of languages, traditions, communities and ways of life. For a student coming from India, that can be an incredible opportunity to discover new perspectives and people.

It can also take some getting used to.

AdmissionsNest therefore looks beyond academic eligibility to student readiness, helping students think about whether they are prepared for the independence, cultural adjustment and new environment that come with studying abroad.

Because getting there is one thing.

Being comfortable enough to thrive there is another.

Finding the Right Option Without Getting Lost in the Options

Students don't always need the same pathway.

For one, the right choice might be a university in the UK or elsewhere in Europe.

For another, it could be one of India's leading institutions.

For a working professional looking to change careers, upskill or pursue a promotion, an online degree may be the smarter option, allowing education to fit around an existing career.

AdmissionsNest helps students explore these different pathways through its university and course options, filtering possibilities based on relevant factors and providing one-to-one admissions counselling to help narrow the field.

And because higher education is a significant financial commitment, the conversation also needs to include scholarships, education loans, living costs and available work-and-study opportunities, where applicable.

From Shortlisting to the Admission Letter

Once a student has identified suitable options, AdmissionsNest can support the next steps, including applications, documentation, scholarship guidance, education-loan assistance and visa support.

The goal isn't to send every student abroad.

It is to help each student find a pathway that makes sense for their education, career goals, finances and readiness.

And the support doesn't necessarily stop when the admission letter arrives.

Through the wider Crescet ecosystem and its connection with TutorsNest, students can continue accessing academic guidance and support after they begin their studies.

Because admission is not the finish line.

It's the starting point.

So, Where Should You Go?

Maybe the answer is a university in Europe.

Maybe it's a leading institution in India.

Maybe it's an online degree that lets a working professional build a new career without putting their current one on hold.

The point is that there isn't one “best” university for everyone.

There is a best-fit pathway for each student.

AdmissionsNest is designed to help students and families find it through eligibility assessment, readiness assessment, admissions counselling, university shortlisting and support from application to beyond admission.

Because the question isn't simply:

“Where can I get admitted?”

It's:

“Where can I learn, adapt, grow and build the future I'm actually aiming for?”

That's where the right university search begins.

 

Website link: https://admissionsnest.in/

 

 

 

राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस के अर्न्तगत स्वस्थ बचपन - उज्जवल भविष्य और छोटा कदम, बड़ा स्वास्थ्य लाभ कार्यक्रम का हुआ  शुभारंभ
      
सुल्तानपुर, 10 अगस्त/पेट के कीड़ों से बच्चों को मुक्त कर उन्हें सेहतमंद और सशक्त बनाने के उद्देश्य से आज GD Goenka School Sultanpur Campus में राष्ट्रीय कृमि मुक्त दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल Albendazole की दवा खिलाकर कृमि मुक्त करना है।
      
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वस्थ बचपन - उज्जवल भविष्य और छोटा कदम, बड़ा स्वास्थ्य लाभ थीम के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में  मुख्य चिकित्सा अधिकारी महोदय एवं उप जिला विद्यालय निरीक्षक उपस्थित रहे।
       मुख्य अतिथियों ने बच्चों को कृमि संक्रमण के दुष्प्रभाव और उससे बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पेट के कीड़ों से छुटकारा, सेहतमंद, सशक्त एवं भविष्य हमारा इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्कूल, अभिभावक और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर काम करना होगा।
      कार्यक्रम के दौरान स्कूल के छात्र-छात्राओं को मंच पर एल्बेंडाजोल की गोली वितरित की गई। साथ ही हाथ धोने, साफ पानी पीने और स्वच्छता अपनाने पर जोर दिया गया। बड़ी संख्या में बच्चे, शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी (ACMO, Dy- CMO, DIO, DPM, DCPM, DMHC, DEIC, FPLMIS, MOIC, BPM, BCPM ) उपस्थित रहे।
      जनपद में कुल 3521 विद्यालयों एवं 2511 आंगनबाड़ी केन्द्रो के माध्यम से 1120828 बच्चों को एल्बेंडाजोल/ डिवर्मिंग की टेबलेट खिलाई जाएगी।
झारखंड में छात्रों के विधानसभा घेराव के बीच पीएम मोदी ने सीएम हेमंत सोरेन को दी बधाई, जानें क्या लिखा

#pm_modi_birthday_wishes_to_cm_hemant_soren_amidst_jpsc_protests

झारखंड में इन दिनों छात्रों का प्रदर्शन जारी है। विरोध प्रदर्शन के बीच आज राज्यभर से हजारों की संख्या में आए छात्र विधानसभा का घेराव कर रहे हैं। छात्र प्रदर्शन के बीच राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर उन्हें शुभकामनाएं मिल रही हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोरेन को जन्मदिन की बधाई दी है।

हेमंत सोरेन को दी बधाई

पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया। उन्होंने लिखा- झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर उन्हें लंबी आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करे।

रांची में छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू

इधर, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का विधानसभा मार्च शुरू हो गया है। पुराने विधानसभा मैदान से बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च के दौरान छात्र पहले बैरियर तक पहुंचे और प्रदर्शनकारियों ने पहला बैरियर तोड़ दिया। छात्रों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई है।

25 जुलाई है जारी है धरना-प्रदर्शन

बता दें कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ 25 जुलाई को रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में धरना शुरू हुआ था, जो अब तक जारी है। यहां प्रदर्शन कर रहे छात्र अब सरकार के साथ आर-पार के मूड में हैं। सरकार और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच एक बार बातचीत का दौर चल चुका है, हालांकि दोनों के बीच हुई चर्चा बेनतीजा निकली है। दरअसल, छात्र अनियमितताओं के खिलाफ CBI जांच की मांग कर रहे हैं। इस मांग को लेकर छात्र अड़ गए हैं।

77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन: जल, जंगल, जमीन के संरक्षण से ही बनेगा समृद्ध झारखंड

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना सोरेन आज खेलगांव, रांची स्थित हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम में आयोजित 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव-2026 में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों तथा वृक्षारोपण के महत्व पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए।

मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन एवं विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के बीच वृक्षारोपण पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन ही सतत भविष्य की कुंजी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे गंभीर और चिंताजनक चुनौतियों में से एक बन चुका है। इसके प्रभाव अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों, जैव विविधता और समग्र विकास प्रक्रिया पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के साथ लगातार हो रहे हस्तक्षेप, अंधाधुंध दोहन तथा अनियोजित विकास गतिविधियों के कारण जलवायु में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण, खनन गतिविधियों, शहरीकरण और विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों का पर्यावरण पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में विकास की गति को बनाए रखते हुए पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन के बीच संतुलन स्थापित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक होगा, जब वह प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए आगे बढ़े।

उन्होंने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ से बचना होगा तथा जल, जंगल और जमीन जैसे अमूल्य संसाधनों का विवेकपूर्ण एवं जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना होगा। आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ पर्यावरण प्रदान करने के लिए आज से ही ठोस कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण, वन संरक्षण, जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है। जब तक आमजन इस दिशा में सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का प्रभावी समाधान संभव नहीं होगा। उन्होंने सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने तथा हरित एवं समृद्ध भविष्य के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसके संरक्षण का संकल्प ले

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने राज्यवासियों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प भी ले। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखना, उनका नियमित संरक्षण करना और उन्हें विकसित कर वृक्ष के रूप में स्थापित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनभागीदारी सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि राज्य का प्रत्येक नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाले समय में झारखंड हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मिसाल बन सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में विभिन्न अभियान के तहत लगाए गए पौधों की स्थिति का वे स्वयं जायजा लेंगे। साथ ही, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों, संस्थाओं और समुदायों को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित भी किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन का असर मानव जीवन के साथ पशु-पक्षियों और वन्यजीवों पर भी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम के स्वरूप में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ वर्षों में प्राकृतिक घटनाओं की प्रकृति और तीव्रता में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है, जो पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने कहा कि अनियमित वर्षा, बादल फटने की घटनाएं, अत्यधिक वर्षा, भीषण गर्मी, लंबे समय तक सूखे की स्थिति, बिजली गिरने तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन बदलते मौसमीय हालात का सीधा प्रभाव मानव जीवन, कृषि, जल संसाधनों और आजीविका पर पड़ रहा है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और किसानों को इसका गंभीर प्रभाव झेलना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन-धन की हानि के साथ-साथ फसलों, पशुधन और आधारभूत संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचता है, जिससे लोगों के जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पशु-पक्षियों, वन्यजीवों और अन्य जीव-जंतुओं को भी इसका भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्राकृतिक आवासों में बदलाव, जल स्रोतों का प्रभावित होना तथा पर्यावरणीय असंतुलन जैव विविधता के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाना आवश्यक है।

पर्यावरण, मानव जीवन और वन्यजीवों के लिए उपयोगी वृक्षों के रोपण को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में वृक्षारोपण अभियानों के तहत ऐसे वृक्षों के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ मानव जीवन, वन्यजीवों और जैव विविधता के लिए भी उपयोगी हों। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऐसी प्रजातियों का चयन करना आवश्यक है जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करें तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की योजनाओं के निर्माण और क्रियान्वयन में स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों, जलवायु, मिट्टी की प्रकृति तथा क्षेत्र की जैव विविधता को विशेष रूप से ध्यान में रखा जाएगा। इसके तहत फलदार, छायादार, औषधीय एवं वन्यजीवों के लिए अनुकूल वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आम लोगों, पशु-पक्षियों और अन्य जीवों को भी प्रत्यक्ष लाभ मिल सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए स्थानीय और पारंपरिक वृक्ष प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि भूजल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता, स्वच्छ वायु और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रकृति के अनुकूल और दीर्घकालिक पर्यावरणीय लाभ देने वाली वृक्षारोपण योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है, ताकि झारखंड को अधिक हरित, समृद्ध और पर्यावरण-संतुलित राज्य बनाया जा सके।

अंत में असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की स्थिति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन का प्रभाव केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका गहरा असर वन्यजीवों, जैव विविधता और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ रहा है। बाढ़ जैसी आपदाओं के कारण वन्यजीव अभयारण्यों, राष्ट्रीय उद्यानों तथा संरक्षित वन क्षेत्रों को व्यापक क्षति पहुंचती है। इससे वहां रहने वाले पशु-पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं तथा उनके जीवन पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाता है। कई बार वन्यजीवों को भोजन और सुरक्षित आश्रय की तलाश में अपने मूल आवास छोड़ने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और अस्तित्व दोनों प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि मानव गतिविधियों के विस्तार तथा जंगलों के लगातार घटते क्षेत्रफल के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ता जा रहा है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जंगली जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने को विवश हो रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है। यह स्थिति पर्यावरणीय असंतुलन का स्पष्ट संकेत है और हमें प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव जीवन की सभी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति का आधार पर्यावरण ही है। स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, उपजाऊ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी कार्यक्रम या अभियान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण उपलब्ध कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसके लिए वृक्षारोपण, जल संरक्षण, जैव विविधता के संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत एवं विवेकपूर्ण उपयोग को जनभागीदारी के साथ बढ़ावा देना होगा। तभी हम पर्यावरणीय चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करते हुए एक सुरक्षित और हरित भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को किया सम्मानित

77वें राज्य स्तरीय वन महोत्सव-2026 के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने वन संरक्षण, संवर्धन, जैव विविधता संरक्षण तथा सामुदायिक वन प्रबंधन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों से चयनित 20 वन मित्रों एवं समिति प्रतिनिधियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सम्मानित व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण और हरित झारखंड के निर्माण में इनकी भूमिका प्रेरणादायी है।

सम्मानित होने वालों में शामिल हैं

श्रीमती फुलवीन बेरनादेत कुजूर (रांची वन प्रमंडल), श्री टिकैत चन्द्र प्रधान (घाटशिला वन प्रमंडल), श्री बुधदेव चालक (दुमका वन प्रमंडल), श्री पौथीराम हांसदा (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री रमेश नायक (पोड़ाहाट वन प्रमंडल, चाईबासा), श्री निरोज टेटे (गुमला वन प्रमंडल), श्री तारकेश्वर मुंडा (रांची वन प्रमंडल), श्रीमती सोनी देवी (झारखंड जैव-विविधता परिषद, रांची)

श्री लक्ष्मण मुर्मू (साहेबगंज वन प्रमंडल)

श्री राजीव रंजन प्रसाद (साहेबगंज वन प्रमंडल), मो० जैनुल अंसारी (सिमडेगा वन प्रमंडल), श्री कृष्ण सिंह (कोडरमा वन प्रमंडल), श्री मनोज राणा (गिरिडीह पूर्वी वन प्रमंडल), श्री मिथिलेश कुमार (मेदिनीनगर वन प्रमंडल), श्री सुरेन्द्र पासवान (मेदिनीनगर वन प्रमंडल)

श्री मुनेश्वर महतो (हजारीबाग पूर्वी वन प्रमंडल), श्री खुशीद आलम (चतरा उत्तरी वन प्रमंडल), श्री गुडल सिंह (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री राजु कोरवा (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल), श्री नासिर खान (पलामू व्याघ्र परियोजना, उत्तरी प्रमंडल)

इस अवसर पर विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, सचिव श्री अबू बकर सिद्दीकी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री संजीव कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विश्वनाथ शाह, श्री ए. टी. मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री वेंकटेश लू, श्री जब्बेर सिंह, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एस. आर. नेटेशा सहित वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

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#Team PRD(CMO)

धान खरीद व्यवस्था में सुधार की मांग, राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को सौंपे अहम सुझाव
-  लखनऊ में 39वीं वार्षिक आम सभा संपन्न, कैबिनेट मंत्री मनोज पाण्डेय बोले—किसानों के हित और पारदर्शी खरीद व्यवस्था सरकार की प्राथमिकता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश राइस मिलर्स एसोसिएशन की 39वीं वार्षिक आम सभा गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित हुई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पाण्डेय शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा और धान खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं सुचारु बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने राइस मिलर्स को सरकार का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए उनके सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान राइस मिलर्स एसोसिएशन ने प्रदेश में धान खरीद व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे। एसोसिएशन ने मिलर्स को दिए जाने वाले होल्डिंग चार्ज को वर्तमान 30 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर न्यूनतम 75 रुपये प्रति क्विंटल किए जाने की मांग की।
इसके अलावा एसोसिएशन ने धान खरीद की अवधि 1 नवंबर से 31 मार्च तक निर्धारित करने तथा कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के पूर्ण निस्तारण की समय-सीमा 30 जून तक तय करने का सुझाव दिया। संगठन ने ठेका एवं बटाईदार किसानों को भी सरकारी धान खरीद व्यवस्था में शामिल करने की मांग की, ताकि उन्हें भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके।
राइस मिलर्स एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया कि भविष्य में धान खरीद नीति तैयार करते समय संगठन के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, जिससे व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर अधिक प्रभावी और क्रियान्वयन योग्य नीति बनाई जा सके।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय शुक्ल, प्रदेश महामंत्री हरि किशोर गुप्ता, प्रदेश कोषाध्यक्ष प्रमोद सिंह सहित प्रदेशभर से आए राइस मिलर्स, उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।
21 करोड़ के तटबंध पर 2 अरब खर्च, फिर भी बाढ़ का संकट

20 साल से बंधे के मरम्मत का धंधा जारी, स्थायी समाधान नहीं

*भिखारीपुर-सकरौर और एल्गिन-चरसड़ी तटबंध हर साल टूटते | डेढ़ लाख आबादी खतरे में

गोंडा।  बाढ़ से बचाव के लिए करीब 20 वर्ष पहले 21 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए
भिखारीपुर-सकरौर और एल्गिन-चरसड़ी तटबंधों की मरम्मत पर अब तक 2 अरब रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं।इसके बावजूद हर साल बाढ़ का संकट बरकरार है। इस बार भी सरयू-घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने पर डेढ़ लाख से अधिक आबादी की चिंता बढ़ गई है।वर्ष 2005-06 में 22.600 किमी लंबे भिखारीपुर-सकरौर तटबंध का निर्माण करीब 7 करोड़ में शुरू हुआ।इसके बाद 2006-07 में गोंडा, बहराइच और बाराबंकी की सीमा पर 52.400 किमी लंबे एल्गिन-चरसड़ी तटबंध पर करीब 14 करोड़ खर्च हुए। 
दोनों पर कुल 21 करोड़ की लागत आई थी। उद्देश्य था करनैलगंज और तरबगंज तहसील के सैकड़ों गांवों को बाढ़ से बचाना।परन्तु नदी के तेज बहाव और कटान से ये तटबंध हर साल कमजोर होते गए। निर्माण के बाद से ही मरम्मत का सिलसिला शुरू हुआ जो आज तक जारी है।बताया जाता है कि दोनों तटबंधों की मरम्मत और मजबूतीकरण पर हर साल 20 से 25 करोड़ खर्च होते हैं। पिछले 20 साल में 2 अरब से अधिक खर्च हो चुका है।इसके अलावा दोनों तटबंधों पर बने 25 से अधिक स्परों की मरम्मत पर भी हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।

*लोगों का सवाल: 'बंधे का धंधा' कब तक? 
स्थानीय लोग कहते हैं - हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं, पर अगले मानसून में फिर वही स्थिति।गोंडा-बलरामपुर से भाजपा MLC अवधेश कुमार उर्फ मंजू सिंह और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह कई बार स्थायी समाधान की मांग कर चुके हैं।

*MLC मंजू सिंह का बयान:* 
*"अब तक मरम्मत पर जितनी धनराशि खर्च हुई, उतने में एक स्थायी पक्का तटबंध बन सकता था।* 
*मैं कई सालों से ऐली माझा से लोलपुर तक पक्का तटबंध की मांग कर रहा हूं।*ऐली माझा से दत्तनगर तक पक्का तटबंध बन जाए तो हर साल बाढ़ से राहत मिलेगी।*मैं फिर CM से मिलकर स्थायी तटबंध की मांग करूंगा, ताकि मरम्मत पर करोड़ों के खर्च और अनियमितताओं पर रोक लगे।"*


21 करोड़ का प्रोजेक्ट, 2 अरब का खर्च। पर बाढ़ आज भी। नेपाल से पानी छूटते ही गोंडा, बाराबंकी, बहराइच, अयोध्या में तबाही। अब सवाल है स्थायी तटबंध का।
विकसित राष्ट्र निर्माण में आर.सी.एम. अभियान सर्वोपरि होगा- डी. कुमार

मुंबई। स्वास्थ्य, सेवा,संस्कार एवं महिला सशक्तीकरण के उद्देश्य तथा स्वदेशी अपनाओ‌,प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ बनाओ अभियान को लेकर महानगर में मजबूती प्रदान करने एवं बेरोजगारी दूर करने के उद्देश्य से अंडरवर्ल्ड प्रांगण गोरेगांव मुंबई में मंगलवार 21 जुलाई 2026 को कोर लीडर एवं स्टार रुबी डी कुमार का वाराणसी उत्तर प्रदेश से मुंबई महानगर में पदार्पण हुआ।जहां उपस्थित अतिथियों ने स्टार रुबी डी कुमार सर का अंगवस्त्र, पुष्पहार के साथ कर्तलध्वनि से स्वागत किया।डी कुमार सर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में जनरल मैनेजर पद पर कार्यरत होते हुए पार्ट टाइम आरसीएम से जुड़े पर कुछ वर्षों पश्चात बैंक की नौकरी से ज्यादा आय आरसीएम में होने लगा तो उसे छोड़कर फूलटाइम आरसीएम ज्वाइन करके देश को स्वस्थ एवं सबल बनाने की वीणा उठाई।आर्थिक राजधानी कही जाने वाली मुंबई में युवा बेरोजगार पड़े हुए हैं सिर्फ जिविकोपार्जन कर रहें हैं ऐसे में उनका भविष्य क्या होगा पता नहीं।ऐसी स्थिति में आरसीएम पूरे देश में बेरोज़गारी समाप्त करके युवाओं का भविष्य सुनहरा बनाने तथा सपना साकार करने के उद्देश्य को लेकर अपना अभियान चला रही है।उक्त उद्देश्य को लेकर स्टार रुबी डी कुमार सर ने सैकड़ों RCM सेवकों को संबोधित करते हुए आरसीएम के उद्देश्य को समझाया। स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर आरसीएम 450 से अधिक उत्पादों को लेकर देश में हाजिर है जो गुणवत्ता और शुद्धता के हर मानक पर भारत सरकार द्वारा खरा उतरते हुए मान्यता प्राप्त है।सही उत्पादों के चयन एवं उसके उपयोग से देश के हम सभी नागरिक स्वस्थ रह सकते हैं।आप भी स्वस्थ रहें और देश के हर नागरिक को भी स्वस्थ बनाए। अंत उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र निर्माण में आर. सी. एम. अभियान सर्वोपरि होगा।वक्ता डी कुमार के मार्गदर्शन से सैकड़ों लोग लाभान्वित हुए तथा उनके द्वारा बताए गए मार्ग पर चलने की सभी ने वीणा उठाई।डी कुमार ने कहा देश की वर्तमान हालत ऐसी हो गई है कि युवा नौजवान आज नौकरी के लिए परेशान हैं ऐसी स्थिति में आरसीएम ऐसे बेरोजगारों को सुनहरा अवसर प्रदान करने हेतु खड़ी है,आज ज्वाइन करें आपका आने वाला कल बदलिए।उक्त कार्यक्रम का आयोजन दीपक सिंह एवं संयोजन अंडरवर्ल्ड प्राइम गोरेगांव के नरेन्द्र जैन ने किया।उपस्थित अतिथियों में कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप,जौनपुर से रविन्द्र कुमार शर्मा,अनिल गुलाब विश्वकर्मा, नरेन्द्र सिंह तामट्टा,रमेश सिंह, छोटेलाल कोल,अमृता सिंह, शरद मारुति जाधव, मसिलामणी नाडार,अनिता विक्रम सिंह तामट्टा,कुबेर बोरले,देवेन्द्र यादव,कमलेश कुमार,प्रदीप यादव,संदेश एम सिंह,शर्मिला दीपक सिंह, मथुरा नरेन्द्र सिंह तामट्टा प्रमुख रहे।
Nirmal Enterprises Completes 16 Years of Trusted

Home Appliance Repair Services in Pune & PCMCPune, India: Modern homes depend on appliances that make everyday life easier, from

refrigerators and washing machines to kitchen chimneys and dishwashers. When these

essential appliances stop working, homeowners need a repair service they can trust. For the

last 16 years, Nirmal Enterprises has been helping families across Pune and

Pimpri-Chinchwad (PCMC) with professional home appliance repair, installation, and

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With a customer-focused approach and experienced technicians, Nirmal Enterprises has

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doorstep service model. Customers simply contact the service team, explain the issue, and a

certified technician is assigned based on location.

After inspecting the appliance, the technician provides a detailed quotation before starting

any repair work. This transparent pricing system allows customers to understand the repair

cost in advance, helping them make informed decisions without worrying about hidden

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Quality repairs depend on both technical expertise and reliable replacement parts. According

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service availability and clear communication throughout the repair process.

Several long-term customers have also chosen annual maintenance services, allowing them

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In addition to providing repair services, Nirmal Enterprises regularly publishes helpful blogs

for homeowners. These articles cover practical maintenance tips, appliance care guides,

chimney cleaning methods, and recommendations that help customers maximize appliance

performance between professional service visits.

By educating customers, the company aims to reduce unnecessary breakdowns while

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Based in Kothrud, Nirmal Enterprises serves customers throughout Pune and

Pimpri-Chinchwad with seven-day service availability. As the demand for modern kitchen

appliances and premium built-in solutions continues to grow, the company remains

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With 16 years of industry experience, Nirmal Enterprises continues to strengthen its

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