1984 दंगों में उम्रकैद काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में थे बंद

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पूर्व सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर तिहाड़ जेल में काट रहे थे सजा।

7 सालों से तिहाड़ जेल में थे बंद

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार 7 सालों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी। लेकिन उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। 27 अप्रैल 2022 को उन्हें दंगों से संबंधित एक मामले में जमानत मिली, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने की वजह से वह जेल में ही बंद रहे।

सिख दंगों में क्या रही थी भूमिका?

कोर्ट ने उनको 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया था। तीन बार सांसद रह चुके सज्जन कुमार को भीड़ को जसवंत सिंह और उनके परिवार को निशाना बनाने वाली भीड़ को उकसाने का दोषी पाए जाने पर उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तौर पर सिखों के घरों की पहचान करवाकर भीड़ को हमले के लिए उकसाया था। आरोप ये भी थे कि सज्जन सिंह के समर्थकों ने दिल्ली में वोटर लिस्ट के जरिए सिखों के घर और बिजनेस की पहचान की और उनमें तोड़फोड़ की या आग लगा दी। कई सिखों को उनके घरों से निकालकर मारा गया।

पाकिस्तान फिर हुआ बेनकाब, पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद ने हाफिज सईद को बताया अपना ‘आका’

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पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है। एक बार फिर ये बात जगजाहिर हो गई है कि पाकिस्तान आतंकियों का सरपरस्त है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कथित तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के साथ अपने रिश्ते की बात करते नजर आ रहे हैं।

आतंकियों के साथ मंच साझा

पाक के पूर्व मंत्री शेख रशीद अहमद प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में शामिल हुए और आतंकियों के साथ एक मंच पर देखे गए हैं। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसमें रशीद खालिद मसूद संधू और कारी मोहम्मद याकूब शेख के साथ पर दिख रहे हैं। संधू लश्कर-ए-तैयबा का एक वरिष्ठ कमांडर और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) का अध्यक्ष है और याकूब शेख आतंकी समूह की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है।

खुद को बताया हाफिज सईद का गुलाम

कार्यक्रम में बोलते हुए राशिद ने हाफिज सईद की तारीफ की और खुद को उसका ‘गुलाम’ तक कह डाला। सभा को संबोधित करते हुए रशीद ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद की प्रशंसा कर कहा, "मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं।"

भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहे शेख राशिद अहमद ने सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर न सिर्फ आदर भरी बातें कीं बल्कि भारत के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा, "अगर भारत पाकिस्तान की ओर देखता है तो अल्लाह उसे नष्ट कर देगा। भारत में न पक्षी चहचहाएंगे, न मंदिरों में घंटियां बजेंगी। हम हाफिज सईद के साथ हैं।"

कौन है शेख रशीद?

शेख रशीद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में 2020 से 2022 तक गृह मंत्री रहा। वह अवामी मुस्लिम लीग पार्टी का संस्थापक नेता भी है। शेख रशीद इससे पहले भी अपने भारत विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। 2019 में भी शेख रशीद ने भारत के खिलाफ बेहद उग्र बयान दिए थे और युद्ध और परमाणु हथियारों की बात की थी।

हाफिज सईद है भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी

बता दें कि शेख रशीद खुद को जिस हाफिज सईद का गुलाम बता कर भारत को धमका रहा है, उसको संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। हाफिज सईद आंतकी संगठन लश्कर एक तैयबा का प्रमुख है और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है। वह भारत में हुए कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इनमें 2008 का मुंबई आतंकी हमला भी शामिल है, जिसमें 26/11 के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। साथ ही पुलवामा में हुए हमले का मास्टरमाइंड भी उसे ही माना जाता है। हाफिज सईद जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकी समूहों को फंडिंग करता है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

छात्रों के विधानसभा मार्च के बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, CID की बड़ी कार्रवाई

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झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को कथित परीक्षा अनियमितता के मामले में सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच हुई है। सीआईडी की टीम पिछले दिनों उनसे तीन दिन पूछताछ कर चुकी थी।

सीआईडी ने पहली ही की थी ख्यांगते से पूछताछ

14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में सीआईडी ने पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इससे पहले उनके सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेज, OMR शीट और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे। हालांकि ख्यांगते ने किसी भी गड़बड़ी में संलिप्तता से इनकार किया था।

पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच जारी

परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच एजेंसी पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच कर रही थी। इससे पहले जांच एजेंसी ने एल खियांग्ते के आवास समेत उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई थी।अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

जांच के बीच खियांग्ते ने दिया था इस्तीफा

एल. खियांग्ते ने हाल ही में जेपीएसी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया था। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया, जब जेपीएसी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा था। छात्रों ने परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं।

शहबाज शरीफ की विदाई पक्की...’, पाकिस्तानी के पूर्व मंत्री के दावे से बढ़ी हलचल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदाई तय है। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं।

शहबाज नहीं जनरल मुनीर ले रहे अहम फैसले

एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के तौर पर शहबाज शरीफ का ये आखिरी साल होगा। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।

मिफ्ताह इस्माइल के दावे के पीछे का तर्क

मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक्स पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक उनकी पोस्ट में नहीं था। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है। उन्होंने इसके पीछे ये तर्क भी दिया कि पिछले चार साल में पाकिस्तान इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गरीबी और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है और विकास 4 फीसदी भी नहीं हुआ।

शहबाज से अहम फैसला लेने का अधिकार छीन लिया

इस्माइल ने इसके आगे बताया कि पाकिस्तानी राजनीति में इस वक्त स्थिति ही अलग है। इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज शरीफ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं, यही वजह है कि वो टिके हुए भी हैं। हालांकि वे ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रहने वाले हैं।

दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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मशहूर भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं।

सिर्फ 49 साल की उम्र में निधन

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ। हाल ही में इस दिग्गज शूटर की सर्जरी भी हुई थी बड़ी बात यह है कि जशपाल की उम्र अभी सिर्फ 49 साल ही थी और वे आमतौर पर काफी फिट भी थे। हालांकि, अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के मुताबिक म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय निशानेबाजी टीम वापस घर लट रही थी तभी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच और दिग्गज पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।

1984 दंगों में उम्रकैद काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का निधन, तिहाड़ जेल में थे बंद

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पूर्व सांसद और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सज्जन कुमार का निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल लाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार 1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर तिहाड़ जेल में काट रहे थे सजा।

7 सालों से तिहाड़ जेल में थे बंद

1984 सिख विरोधी दंगा मामले में वह तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सज्जन कुमार 7 सालों से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे। दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। उन्होंने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी। लेकिन उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। 27 अप्रैल 2022 को उन्हें दंगों से संबंधित एक मामले में जमानत मिली, लेकिन दूसरे मामले में दोषी ठहराए जाने की वजह से वह जेल में ही बंद रहे।

सिख दंगों में क्या रही थी भूमिका?

कोर्ट ने उनको 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुंदीप सिंह की हत्या में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया था। तीन बार सांसद रह चुके सज्जन कुमार को भीड़ को जसवंत सिंह और उनके परिवार को निशाना बनाने वाली भीड़ को उकसाने का दोषी पाए जाने पर उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। तौर पर सिखों के घरों की पहचान करवाकर भीड़ को हमले के लिए उकसाया था। आरोप ये भी थे कि सज्जन सिंह के समर्थकों ने दिल्ली में वोटर लिस्ट के जरिए सिखों के घर और बिजनेस की पहचान की और उनमें तोड़फोड़ की या आग लगा दी। कई सिखों को उनके घरों से निकालकर मारा गया।

पाकिस्तान फिर हुआ बेनकाब, पूर्व मंत्री शेख राशिद अहमद ने हाफिज सईद को बताया अपना ‘आका’

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पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है। एक बार फिर ये बात जगजाहिर हो गई है कि पाकिस्तान आतंकियों का सरपरस्त है। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री शेख रशीद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में वह कथित तौर पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज सईद के साथ अपने रिश्ते की बात करते नजर आ रहे हैं।

आतंकियों के साथ मंच साझा

पाक के पूर्व मंत्री शेख रशीद अहमद प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा के एक कार्यक्रम में शामिल हुए और आतंकियों के साथ एक मंच पर देखे गए हैं। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर आया है, जिसमें रशीद खालिद मसूद संधू और कारी मोहम्मद याकूब शेख के साथ पर दिख रहे हैं। संधू लश्कर-ए-तैयबा का एक वरिष्ठ कमांडर और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) का अध्यक्ष है और याकूब शेख आतंकी समूह की केंद्रीय सलाहकार समिति का सदस्य है।

खुद को बताया हाफिज सईद का गुलाम

कार्यक्रम में बोलते हुए राशिद ने हाफिज सईद की तारीफ की और खुद को उसका ‘गुलाम’ तक कह डाला। सभा को संबोधित करते हुए रशीद ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद की प्रशंसा कर कहा, "मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं।"

भारत के खिलाफ भड़काऊ बयान

पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहे शेख राशिद अहमद ने सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद को लेकर न सिर्फ आदर भरी बातें कीं बल्कि भारत के खिलाफ धमकी भरे बयान दिए। उन्होंने भारत को धमकी देते हुए कहा, "अगर भारत पाकिस्तान की ओर देखता है तो अल्लाह उसे नष्ट कर देगा। भारत में न पक्षी चहचहाएंगे, न मंदिरों में घंटियां बजेंगी। हम हाफिज सईद के साथ हैं।"

कौन है शेख रशीद?

शेख रशीद पाकिस्तान की इमरान खान सरकार में 2020 से 2022 तक गृह मंत्री रहा। वह अवामी मुस्लिम लीग पार्टी का संस्थापक नेता भी है। शेख रशीद इससे पहले भी अपने भारत विरोधी बयानों को लेकर चर्चा में रहा है। 2019 में भी शेख रशीद ने भारत के खिलाफ बेहद उग्र बयान दिए थे और युद्ध और परमाणु हथियारों की बात की थी।

हाफिज सईद है भारत का मोस्ट वांटेड आतंकवादी

बता दें कि शेख रशीद खुद को जिस हाफिज सईद का गुलाम बता कर भारत को धमका रहा है, उसको संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर रखा है। हाफिज सईद आंतकी संगठन लश्कर एक तैयबा का प्रमुख है और भारत के मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल है। वह भारत में हुए कई आतंकी हमलों का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है। इनमें 2008 का मुंबई आतंकी हमला भी शामिल है, जिसमें 26/11 के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। साथ ही पुलवामा में हुए हमले का मास्टरमाइंड भी उसे ही माना जाता है। हाफिज सईद जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आतंकी समूहों को फंडिंग करता है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

छात्रों के विधानसभा मार्च के बीच जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, CID की बड़ी कार्रवाई

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झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ी खबर आई है। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते को कथित परीक्षा अनियमितता के मामले में सीआईडी ने गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई जेपीएससी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच के बीच हुई है। सीआईडी की टीम पिछले दिनों उनसे तीन दिन पूछताछ कर चुकी थी।

सीआईडी ने पहली ही की थी ख्यांगते से पूछताछ

14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में सीआईडी ने पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांगते को 28 जुलाई को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। इससे पहले उनके सरकारी आवास और जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी कर दस्तावेज, OMR शीट और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए थे। हालांकि ख्यांगते ने किसी भी गड़बड़ी में संलिप्तता से इनकार किया था।

पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच जारी

परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच एजेंसी पहले से ही एल खियांग्ते की भूमिका की जांच कर रही थी। इससे पहले जांच एजेंसी ने एल खियांग्ते के आवास समेत उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच के दौरान परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े पहलुओं को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई गई थी।अब गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

जांच के बीच खियांग्ते ने दिया था इस्तीफा

एल. खियांग्ते ने हाल ही में जेपीएसी के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने ई-मेल के जरिए अपना इस्तीफा राजभवन भेजा था, जिसे राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वीकार कर लिया था। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया, जब जेपीएसी की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर विवाद चल रहा था। छात्रों ने परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इसे लेकर छात्र लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग उठा रहे हैं।

शहबाज शरीफ की विदाई पक्की...’, पाकिस्तानी के पूर्व मंत्री के दावे से बढ़ी हलचल

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की विदाई तय है। पाकिस्तान के पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने ये दावा किया है। उन्होंने कहा है यह साल प्रधानमंत्री के रूप में शाहबाज शरीफ का आखिरी साल होने जा रहा है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय में किया है, जब शहबाज शरीफ ईरान को लेकर कूटनीतिक सफलताओं का जश्न मना रहे हैं।

शहबाज नहीं जनरल मुनीर ले रहे अहम फैसले

एक पॉडकास्ट में पूर्व पाकिस्तानी मंत्री ने दावा किया है कि पाकिस्तान में प्रधानमंत्री के तौर पर शहबाज शरीफ का ये आखिरी साल होगा। उन्होंने कहा कि शाहबाज शरीफ देश में कोई फैसले नहीं ले रहे हैं। देश में सभी अहम फैसले जनरल मुनीर ले रहे हैं।

मिफ्ताह इस्माइल के दावे के पीछे का तर्क

मिफ्ताह इस्माइल ने पाकिस्तान के केंद्रीय गृह मंत्री मोहसिन नकवी की एक्स पर एक पोस्ट का हवाला दिया और कहा कि नकवी ने ईरान समझौते के लिए फील्ड मार्शल को बधाई दी और प्रधानमंत्री का नाम तक उनकी पोस्ट में नहीं था। उन्होंने इसे संकेत बताया कि कैबिनेट में बैठे लोग भी अब मान रहे हैं कि शहबाज शरीफ की विदाई पक्की है। उन्होंने इसके पीछे ये तर्क भी दिया कि पिछले चार साल में पाकिस्तान इतिहास के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। गरीबी और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है और विकास 4 फीसदी भी नहीं हुआ।

शहबाज से अहम फैसला लेने का अधिकार छीन लिया

इस्माइल ने इसके आगे बताया कि पाकिस्तानी राजनीति में इस वक्त स्थिति ही अलग है। इस समय सारे अहम फैसले पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व से लिए जा रहे हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि कुछ घरेलू फैसले शहबाज शरीफ खुद से कर रहे हैं लेकिन कोई भी अहम फैसला लेने का अधिकार उनसे छीन लिया गया है। शहबाज शरीफ पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के सामने सरेंडर कर चुके हैं, यही वजह है कि वो टिके हुए भी हैं। हालांकि वे ज्यादा दिनों तक पद पर नहीं रहने वाले हैं।

दिग्गज शूटर जसपाल राणा का निधन, 49 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, खेल जगत में शोक

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मशहूर भारतीय निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का शुक्रवार को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि जर्मनी से लौटने के बाद अचानक ही उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। राणा एशियाई खेलों के पूर्व स्वर्ण पदक विजेता हैं और ओलंपिक में दो बार पदक जीत चुकीं स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच रह चुके हैं।

सिर्फ 49 साल की उम्र में निधन

जसपाल राणा का निधन दिल्ली के मैक्स अस्पताल में हुआ। हाल ही में इस दिग्गज शूटर की सर्जरी भी हुई थी बड़ी बात यह है कि जशपाल की उम्र अभी सिर्फ 49 साल ही थी और वे आमतौर पर काफी फिट भी थे। हालांकि, अब उनके अचानक निधन की खबर ने खेल जगत को हिलाकर रख दिया है।

फ्लाइट में बिगड़ी थी तबीयत

जानकारी के मुताबिक म्यूनिख में हुए आईएसएसएफ वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ी थी। म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय निशानेबाजी टीम वापस घर लट रही थी तभी टीम के हाई-परफॉर्मेंस कोच और दिग्गज पूर्व निशानेबाज जसपाल राणा की तबीयत अचानक बिगड़ गई।

दिल्ली पहुंचते ही अस्पताल में कराया गया भर्ती

भारतीय दल के साथ स्वदेश लौटते समय उड़ान के दौरान ही उन्हें अस्वस्थता महसूस हुई। जिसके तुरंत बाद उन्हें दिल्ली के अस्पताल ले जाया गया। दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहीं पर उनका इलाज चल रहा था।

शूटिंग में शानदार करियर

उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए बड़ा झटका है। जसपाल राणा ने इस खेल को तीन दशक से भी ज्यादा समय तक बतौर खिलाड़ी और कोच समर्पित किया। भारत के सबसे सफल पिस्टल शूटर्स में से एक जसपाल राणा ने 1990 के दशक में अपनी पहचान बनाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबदबा कायम किया। उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में शुमार हुए।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से थे सम्मानित

शूटिंग रेंज पर उनकी उपलब्धियों ने उन्हें काफी पहचान दिलाई और युवा शूटर्स की एक पीढ़ी को इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया। खेल और शूटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करने में उनके बड़े योगदान के लिए सरकार ने उन्हें 2020 में प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया। राणा ने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही रूपों में तीन दशकों से ज्यादा समय तक अपना योगदान दिया।