भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

ভারতকে ৪-০ হারিয়েও ব্রাজিলকে ধুয়ে দিল নিজের দেশের মিডিয়া! ভিনিদের ফুটবলকে বলা হল 'ঘুমপাড়ানি'*
*খেলা*

*কলকাতা ডেস্ক:* র‍্যাঙ্কিংয়ে ব্যবধান ১৩২ ধাপ। একদিকে বিশ্বের ৬ নম্বর ব্রাজিল, অন্যদিকে ১৩৮ নম্বরে থাকা ভারত। যুবভারতীতে ৪-০ ফল ভারতের জন্য লড়াই করেই হার। কিন্তু ব্রাজিলের জন্য? জিতেও চরম অস্বস্তিতে সেলেকাওরা।

৪ গোল দেওয়ার পরও দেশের মিডিয়ার কাছে তুলোধোনা হচ্ছে কার্লো আনচেলোত্তির দল। ব্রাজিলের সংবাদমাধ্যমের চোখে ভারতের বিরুদ্ধে এই জয় মোটেও জয় নয়, বরং ঘুমিয়ে ঘুমিয়ে খেলা ৯০ মিনিটের এক বিরক্তিকর প্রদর্শনী।

*ভিনিসিয়াসকে নিয়ে তীব্র সমালোচনা*

ব্রাজিলের জনপ্রিয় পোর্টাল UOL সরাসরি লিখেছে, "আবারও হতাশ করল ব্রাজিল। ১৩৮ নম্বর দলের বিরুদ্ধে ৪-০ জয়টা নিতান্তই নিয়মরক্ষা।" তাদের বিশ্লেষণে, বাঁ-দিকে প্রচুর জায়গা পেয়েও সুপারস্টার ভিনিসিয়াস জুনিয়র ছিলেন সম্পূর্ণ ব্যর্থ। ভুল পাস, ছন্নছাড়া ড্রিবল ছাড়া কিছুই দিতে পারেননি।

আরেক সংবাদমাধ্যম Terra-র খোঁচা, "ব্রাজিলের ইতিহাসে অন্যতম দুর্বল প্রতিপক্ষকে পেয়েও মন ভরাতে পারল না দল।" দেশের প্রথম সারির কাগজ O Globo তো এই ম্যাচকে 'অনুশীলন ম্যাচ' বলেই উড়িয়ে দিয়েছে। তাদের মতে, বল দখলে থাকলেও গোল করার কোনও তাগিদই ছিল না।

*ক্ষোভ উগরে দিলেন ফেলিপে মেলো*

প্রাক্তন তারকা ফেলিপে মেলো Sportv-তে বিস্ফোরক। তিনি বলেন, "ব্রাজিল শুধু পিছিয়ে যাচ্ছে। বিশ্বকাপের শেষ ষোলোয় নরওয়ের কাছে হারের পর অস্ট্রেলিয়ার সঙ্গে দুটো প্রীতি ম্যাচে (১-১ ও ৪-২) বাজে খেলেছে। কলকাতায় ৪ গোল দিলেও খেলা ছিল কুৎসিত।"

কলকাতার গরমকে অজুহাত মানতে নারাজ মেলো। তাঁর সাফ কথা, "খারাপ খেলতে পারো, কিন্তু লড়াইয়ের মানসিকতা কোথায়? বদলি হিসেবে নামা মার্টিনেলি এবং জোড়া গোল করা সামুয়েল লিনো কিছুটা চেষ্টা করেছে। লিনো আরও সময় পেলে আরও গোল পেত।"

*CBF-কেও একহাত নিল ব্রাজিলের মিডিয়া*

শুধু ফুটবলার নয়, কাঠগড়ায় ব্রাজিল ফুটবল ফেডারেশন (CBF)-ও। ফুটবল পোর্টাল Trivela প্রশ্ন তুলেছে, ফাঁকা গ্যালারিতে এই ম্যাচ খেলার মানে কী? তাদের সাংবাদিক কার্লোস ভিনিসিয়াসের লেখায়, "টিকিটের দাম আকাশছোঁয়া। স্টেডিয়াম ভর্তি হয়নি। ভারতের মতো দেশে খেলতে এলে টিকিট সাধারণ মানুষের নাগালে রাখা উচিত ছিল।" তাদের আরও অভিযোগ, ব্রাজিলের বহু রাজ্যে বছরের পর বছর জাতীয় দলের খেলা হয় না। দেশের সমর্থকদের বঞ্চিত করে শুধু টাকার জন্য এশিয়া সফর করছে CBF। বিশ্বকাপের আগে সভাপতি বলেছিলেন দল সাধারণ মানুষের কাছে যাবে, কিন্তু বাস্তবে তা ফাঁকা প্রতিশ্রুতি।

সব মিলিয়ে যুবভারতীতে স্কোরবোর্ডে ৪-০ জিতলেও, পারফরম্যান্সের বিচারে দেশে ফিরে প্রবল চাপে আনচেলোত্তির ব্রাজিল।
ছবি:সঞ্জয় হাজরা।

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যুবভারতীতে ইতিহাস! প্রথমবার ভারতের মুখোমুখি পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল, রায়ানকে নিয়ে সতর্ক আন্সেলোত্তি
*খেলা*


*নিজস্ব প্রতিনিধি,কলকাতা:* শনিবার সন্ধ্যায় কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে শুধু একটি ফুটবল ম্যাচ নয়, লেখা হতে চলেছে ভারতীয় ফুটবলের নতুন ইতিহাস। কলকাতার বুকে প্রথমবার মুখোমুখি ভারত এবং পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল।

ম্যাচ ঘিরে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে সাম্বার উন্মাদনা তুঙ্গে। হলুদ-সবুজ জার্সিতে সেজে উঠেছে কলকাতা। ভিনিসিয়াসদের এক ঝলক দেখার অপেক্ষায় প্রহর গুনছে ফুটবলপাগল শহর। কিন্তু এই উৎসবের আবহের মধ্যেও ভারতকে এক মুহূর্তের জন্যও হালকা ভাবে নিচ্ছে না ব্রাজিল শিবির।
*আন্সেলোত্তির মুখে রায়ান-স্তুতি, গুরপ্রীতকে কুর্নিশ মার্কুইনহোসের*

শুক্রবার বাইপাসের ধারে একটি পাঁচতারা হোটেলে সাংবাদিক বৈঠকে হাজির হয় ব্রাজিল দল। মঞ্চে উঠে পর্তুগিজ বা ইংরেজির বদলে ‘নমস্তে’ বলে বক্তব্য শুরু করেন ব্রাজিল কোচ কার্লো আন্সেলোত্তি।

তিনি বলেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের সঙ্গে এখানে আসতে পারা আমাদের কাছে সত্যিই গর্বের। আমরা জানি, এখানকার মানুষ ফুটবল আর জাতীয় দলকে কতটা ভালোবাসেন।”

ভারতকে নিয়ে আন্সেলোত্তি স্পষ্ট বার্তা দেন, “আমরা ভারতের শেষ ম্যাচটি দেখেছি। পানামা ভালো দল। ভারতের একজন স্ট্রাইকার রায়ান উইলিয়ামস রয়েছে, যে আমাদের জন্য বিপজ্জনক হতে পারে। তাই ওকে নিয়ে আমরা ভাবছি।” তিনি আরও যোগ করেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের কাছে কোনও ম্যাচই শুধু প্রীতি ম্যাচ নয়। প্রতিপক্ষ যখন ভারত, তখন তাদের যথাযথ সম্মান দিয়েই আমরা মাঠে নামব।”

অন্যদিকে, ভারতীয় ফুটবলারদের লড়াইকে কুর্নিশ জানিয়েছেন ব্রাজিল অধিনায়ক মার্কুইনহোস। তিনি বলেন, “ভারতীয় দলে এমন কয়েকজন ফুটবলার আছেন, যাঁদের সম্মান করতেই হবে। গোলকিপার রয়েছেন, যিনি জাতীয় দলের হয়ে প্রায় ৯০টি ম্যাচ খেলতে চলেছেন। এটা বড় অর্জন।”

কলকাতার আকাশে এখন সাম্বার সুর। তবে বিশ্ব ফুটবলের অন্যতম সেরা দলের কোচ ও অধিনায়কের মুখে ভারতের নাম ও ভারতীয় ফুটবলারের প্রশংসা, যুবভারতীর মহারণের আগে সেটাও কম বড় প্রাপ্তি নয়। ছবি: সঞ্জয় হাজরা।

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ISL সম্প্রচারে বড় বদল, YouTube-এর পাশাপাশি Sony Sports-এও দেখা যাবে ম্যাচ
*খেলা*
*স্পোর্টস ডেস্ক, কলকাতা:* ১০ অক্টোবর, মহালয়ার দিন থেকে শুরু হচ্ছে ISL। গতবার সিঙ্গেল লিগ হলেও এবার হোম-অ্যাওয়ে ফর্ম্যাটে দুই লিগে হবে টুর্নামেন্ট। চলবে ২০২৭ সালের মে মাস পর্যন্ত। অংশ নিচ্ছে ১৩টি দল - ইস্টবেঙ্গল, মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট, বেঙ্গালুরু এফসি, কেরালা ব্লাস্টার্স, এফসি গোয়া, মুম্বই সিটি এফসি, নর্থ ইস্ট ইউনাইটেড, ওডিশা এফসি, পাঞ্জাব এফসি, ইন্টার কাশী, চেন্নাইয়িন এফসি, চার্চিল ব্রাদার্স ও স্পোর্টস ক্লাব দিল্লি। জামশেদপুর এফসি নাম তুলে নেওয়ায় তাদের লাইসেন্সে খেলবে চার্চিল। ডায়মন্ড হারবার এফসি যোগ্যতা অর্জন করেও পার্টিসিপেশন ফি জমা দিতে পারেনি। প্লে-অফ মিলিয়ে মোট ১৬৩টি ম্যাচ হবে।

এবার ISL-এর আয়োজক ক্লাবগুলি নিজেরাই। ফলে সম্প্রচার নিয়ে ছিল জল্পনা। Khel Now-এ প্রকাশিত রিপোর্ট অনুযায়ী, এবার ISL দেখা যাবে দুটি প্ল্যাটফর্মে। YouTube-এ স্ট্রিমিংয়ের পাশাপাশি স্যাটেলাইট টিভি রাইটস পেতে চলেছে Sony Sports Network।  রিপোর্টে দাবি, Sony-কে রাইটস দেওয়ার বিষয়ে সব পক্ষ রাজি, শুধু চূড়ান্ত কাগজপত্র বাকি। প্রথমে Zee-র নাম শোনা গেলেও তা বাতিল হয়েছে।

অতীতে Star Sports এবং Hotstar-এ দেখানো হতো ISL, গত বছর দেখানো হয়েছিল FanCode-এ। রিপোর্ট বলছে, বেশিরভাগ ক্লাব বেশি দর্শকের কাছে পৌঁছতে YouTube-এর পক্ষে, আবার কিছু ক্লাব স্পনসরশিপের কারণে প্রথাগত টিভি সম্প্রচার চাইছে। তাই দুই পথেই হাঁটার সিদ্ধান্ত।

ভারতীয় ফুটবলে Sony Sports দীর্ঘদিন ধরেই রয়েছে, ইউরোপের একাধিক লিগ ও সম্প্রতি ডুরান্ড কাপও তারাই সম্প্রচার করেছে। অন্যদিকে YouTube-ও ইতিমধ্যেই প্রাইম ভলিবল লিগ ও তামিলনাড়ু প্রিমিয়ার লিগ দেখাচ্ছে।

ছবি: সংগৃহীত।

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रूसी सेना में भर्ती को लेकर भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी, भारतीयों को दी सख्त चेतावनी

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रूस में नौकरी के नाम पर भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद जोखिम भरा है। मंत्रालय ने भारतीयों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऑफर के झांसे में न आएं।

पिछले दो सालों में कई मौकों पर दी सतर्कता की सलाह

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान सरकार ने कई मौकों पर रूस की सेना में शामिल होने से जुड़े जोखिम और खतरों को रेखांकित किया है। भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के अवसर तलाशते समय सावधानी बरतने और असत्यापित व्यक्तियों की ओर से दिए गए नौकरी के ऑफर के झांसे में नहीं आने की सलाह दी गई है।

मंत्रीलय ने कहा- कुछ भारतीय ऐसे ऑफर तलाश रहे

मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिक ऐसे ऑफर खुद तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सेना में शामिल होने के बदले अच्छा पैसा मिलेगा और फिर भारत सरकार के दखल से वे वहां से निकल जाएंगे। सरकार ने इस सोच को खतरनाक बताते हुए भारतीय नागरिकों से ऐसे कदम से दूर रहने को कहा है।

भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने की कोशिश

एडवाइजरी में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट हासिल करने और उसके बाद रूसी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के लालच में बिना भारतीय अधिकारियों से सलाह किए ऐसे कदम उठा चुके हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को इस फैसले की गंभीरता समझने की सलाह दी है।

नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले सतर्कता बरतने की सलाह

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि गैर-सार्वजनिक संस्थाएं, जिनमें स्वैच्छिक समूह भी शामिल हैं, विदेशी नागरिकों को रूसी सेना में सेवा देने के लिए भर्ती कर रही हैं। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऐसे एजेंटों से नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे एजेंट जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं, उनके ऑफर को लेकर विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा गया है।

एशियन गेम्स में भारत की गोल्डन हैट्रिक, आर्चरी में पुरुष कंपाउंड टीम ने चीन को हरा जीता सोना

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भारतीय तीरंदाजों ने एशियन गेम्स में बुधवार की सुबह भारत को शानदार रहा। कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीत लिया। भारतीय आर्चरी की पुरुष कंपाउंड टीम ने बेहद रोमांचक मुकाबले में चीन को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया है।

तीरंदाजी में ट्रिपल गोल्ड

पुरुष टीम ने फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर दिन का तीसरा तीरंदाजी गोल्ड अपने नाम किया। साहिल राजेश, कुशल दलाल और मणि रत्नम गणेश की भारतीय तिकड़ी ने चीन के खिलाफ फाइनल में शानदार जुझारूपन दिखाया। 21 वर्षीय कुशल दलाल, 25 वर्षीय साहिल राजेश और 20 वर्षीय मणि रत्नम गणेश थिरुमुरु की तिकड़ी ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और भारत को गोल्ड दिलाया।

आखिरी राउंड में बाजी पलटी

तीन राउंड यानी 18 शॉट के बाद भारत एक अंक से पीछे चल रहा था। तब चीन का स्कोर 179 और भारत का 178 था। इसके बाद आखिरी राउंड में भारतीय टीम ने मुकाबला पलट दिया। आखिरी छह शॉट में चीन के एक तीरंदाज ने आठ अंक का निशाना लगाया। इसका फायदा भारत को मिला और भारतीय टीम एक अंक की बढ़त पर पहुंच गई। अंत में भारत ने 238 अंक बनाए, जबकि चीन 237 अंक ही हासिल कर सका। इस तरह भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण

बता दें कि भारत ने आज कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण जीता। सबसे पहले चिकिथा तानिपर्थी, पृथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम की महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर गोल्ड अपने नाम किया था। इसके बाद चिकिथा और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। पुरुष टीम ने भी चीन के खिलाफ फाइनल में जीत दर्ज कर तीरंदाजी में भारत का गोल्डन हैट्रिक पूरा कर दिया।

১-১ ড্র, তবুও আইএফএ শিল্ডের সেমিফাইনালে মোহনবাগান, সঙ্গী নর্থইস্ট*

*স্পোর্টস ডেস্ক,কলকাতা* : নর্থইস্ট ইউনাইটেডকে হারাতে না পারলেও আইএফএ শিল্ডের শেষ চারে পৌঁছে গেল মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট। ম্যাচ ১-১ গোলে শেষ হল। এই ড্রয়ের ফলে গ্রুপ চ্যাম্পিয়ন হিসেবেই সেমিতে উঠল সবুজ-মেরুন ব্রিগেড। এক পয়েন্ট পেয়ে নক-আউটে জায়গা করে নিল নর্থইস্টও।

অথচ ম্যাচটা জিততেই পারত মোহনবাগান। ঘরের মাঠে একাধিক সুযোগ তৈরি করেও কাজে লাগাতে ব্যর্থ হন ফুটবলাররা। সবচেয়ে বড় আক্ষেপ হয়ে থাকবে মিগুয়েল ফিগুয়েরার পেনাল্টি মিস।

এদিন কোচ পানাজিওটিস দিমপেরিস চমক দিয়ে শুরুতে জেমি ম্যাকলারেনকে বেঞ্চে রেখে লি আরউইনকে নামান। আক্রমণে ছিলেন দেজান দ্রাজিচও। ম্যাচের ৯ মিনিটেই গোল পেয়ে যেতে পারত বাগান। সমির জেলকোভিচের বাড়ানো বল ধরে বক্সে ঢুকে নর্থইস্ট কিপার দীপেশ চৌহানকে চিপ করেন আরউইন, কিন্তু বল অল্পের জন্য বারের উপর দিয়ে বেরিয়ে যায়।

প্রথম ৪৫ মিনিটে বলের দখল ও আক্রমণে এগিয়ে ছিল মোহনবাগান। নর্থইস্ট শুরু থেকেই ডিফেন্সিভ খেলে চার ডিফেন্ডার নিয়ে রক্ষণ সামলায়। ফলে বিরতি পর্যন্ত স্কোরলাইন ০-০ থাকে।

বিরতির পরই খেলার রং বদলান দিমপেরিস। মাঠে নামান মিগুয়েল ও ম্যাকলারেনকে। ৪৯ মিনিটে তার সুফল পায় দল। দ্রাজিচের লং বল হেড করে আরউইনের জন্য সাজিয়ে দেন ম্যাকলারেন। ঠান্ডা মাথায় ফিনিশ করে দলকে এগিয়ে দেন স্কটিশ ফরোয়ার্ড। মোহনবাগানের জার্সিতে পরপর দুই ম্যাচে গোল করলেন আরউইন।

পিছিয়ে পড়ে গোল শোধে ঝাঁপায় নর্থইস্ট। এর মাঝেই পাল্টা আক্রমণ থেকে পেনাল্টি পায় বাগান। দ্রাজিচের শট থইবা সিংয়ের হাতে লাগলে পেনাল্টির নির্দেশ দেন রেফারি। কিন্তু স্পটকিক থেকে দুর্বল শট নেন মিগুয়েল, যা সহজেই আটকে দেন দীপেশ।

ছবি: AI দ্বারা নির্মিত।

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ব্রাজিল ম্যাচের আগে যুদ্ধকালীন তৎপরতায় সেজে উঠল যুবভারতী, পর্দার আড়ালে ব্রাজিলিয়ান জাদু
*খেলা*


*স্পোর্টস ডেস্ক,কলকাতা:* আগামী ৩ অক্টোবর কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে ভারতের বিরুদ্ধে প্রীতি ম্যাচ খেলতে নামবে পাঁচ বারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল। এই ম্যাচের ঘোষণার পর থেকেই ফুটবলপ্রেমীদের মধ্যে উন্মাদনা তুঙ্গে। তবে খুব কম মানুষই জানেন, কয়েক সপ্তাহ আগেও যুবভারতীর মাঠ নিয়ে খুশি ছিল না ব্রাজিলিয়ান ফুটবল কনফেডারেশন। মাঠের অবস্থা দেখে উদ্বেগ প্রকাশ করেছিলেন ব্রাজিলের প্রতিনিধিরা। এরপরই শুরু হয় যুদ্ধকালীন তৎপরতা।

মাঠ সংস্কারের জন্য ব্রাজিলের রাজধানী ব্রাসিলিয়া থেকে বিশেষভাবে আনা হয় মাঠ বিশেষজ্ঞ ইভান নাসিমেন্তোকে। প্রায় এক মাস কলকাতায় থেকে তিনি পুরো সংস্কারের কাজ তদারকি করেন।

তাঁর কথায়, মাঠের মাটি সমান ছিল না, জায়গায় জায়গায় ঢেউয়ের মতো উঁচুনিচু অংশ ছিল। ঘাসও অনেক বেশি বড় হয়ে গিয়েছিল।

নাসিমেন্তো বলেন, "আমাদের প্রথম লক্ষ্য ছিল মাঠের মাটি ও রক্ষণাবেক্ষণের প্রক্রিয়াকে ঠিক করা। মাটির স্তর সমান ছিল না, অনেক জায়গায় উঁচুনিচু ছিল। ঘাসও অনেক বেশি বড় হয়ে গিয়েছিল। তাই আমরা প্রথমে মাঠের পরিচর্যার কাজ শুরু করি। তার পর পুরো অপারেশন এমন ভাবে পরিচালনা করি যাতে এটিকে আন্তর্জাতিক মানের মাঠে পরিণত করা যায়।"

জানা গেছে, মাঠের সবচেয়ে বড় সমস্যা ছিল অসমান মাটি। বিশেষ যন্ত্র দিয়ে মাটির মধ্যে বাতাস প্রবেশ করানো হয়। এর পর রোলার ব্যবহার করে মাঠকে অনেক বেশি সমতল করা হয়। যেখানে মাঠের লাইন আঁকা হয়, সেখানে জমে থাকা পুরনো রঙ মাটিকে শক্ত করে ফেলেছিল। সেই অংশও নতুন করে ঠিক করা হয়েছে। এর পাশাপাশি নিয়মিত সার দেওয়া, ঘাস কাটা, ছত্রাক ও পোকামাকড় নিয়ন্ত্রণের কাজও করা হয়েছে। মাঠকে আরও আকর্ষণীয় করে তুলতে পরিচিত হালকা ও গাঢ় সবুজ ডোরার নকশাও তৈরি করা হয়েছে।

এই পুরো কাজে ব্রাজিলের বিশেষজ্ঞ দলের পাশাপাশি স্থানীয় কর্মীরাও গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছেন। নাসিমেন্তো বলেন, "আমরা ব্রাজিল থেকে দুটি দল নিয়ে এসেছিলাম। কিন্তু স্থানীয় কর্মীদের সাহায্য না পেলে এতো দ্রুত কাজ শেষ করা সম্ভব হতো না। ওরা অসাধারণ কাজ করেছে।"

ছবি : AI দ্বারা নির্মিত।

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भारतीय मूल की नावी पिल्ले को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को फिर निराशा लगी हाथ

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मानवाधिकारों की रक्षा और न्याय के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी ज्यूरिस्ट नवेनेथम 'नावी' पिल्ले को प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसी के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप का नोबेल वाला सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है।

क्यों मिला पुरस्कार?

महात्मा गांधी के नक्शेकदम पर चलने वाली नवनेथेम नावी पिल्लई को शांति का नोबल पुरस्कार देने की घोषणा हुई है। यह घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की गई। अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को बढ़ावा देने के उनके असाधारण प्रयासों के लिए उन्हें वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार प्रदान किया गया है।

विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए

नोबेल प्राइज़ समिति ने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा कि नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने की कोशिशों के लिए नवनेथम 'नावी' पिल्लई को 2026 का शांति का नोबेल पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है। पिल्लई 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में काम किया है और विश्व में शांति के लिए कई अहम काम किए हैं।

कौन हैं नावी पिल्ले?

88 वर्ष की नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनका परिवार 136 साल पहले तमिलनाडु से दक्षिण अफ्रीका गया था। उनका जन्म भारतीय तमिल मूल के परिवार में 23 सितंबर 1941 दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ। उन्होंने 2008 से 2014 तक संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हाई कमिश्नर के रूप में काम किया। उन्होंने नटाल यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली और हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर एवं डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर के दौरान राजनीतिक कार्यकर्ताओं, कैदियों और मानवाधिकारों के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाइयां लड़ीं। नवनेथेम नावी पिल्ले दक्षिण अफ्रीका की एक प्रमुख कानूनी एक्सपर्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

ट्रंप के हाथ फिर से खाली

नोबेल सांति पुरस्कार की घोषणा के साथ ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी है। ट्रंप लंबे समय से नाबेल का शांति पुरस्कार मांग रहे हैं। ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने कई देशों के युद्ध रुकवाए हैं। इसलिए उन्हें शांति का नोबेल मिलना चाहिए।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

एशियन गेम्स 2026: भारतीय महिला खिलाड़ियों का दिखा दम, 21 गोल्ड मेडल में 11 किया अपने नाम

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जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में भारत ने शानदार परफॉर्मेंस किया और कुल 85 मेडल जीते। इनमें 21 गोल्ड, 27 सिल्वर और 37 ब्रॉन्ज़ मेडल शामिल हैं।भारत इस बार एशियन गेम्स में चौथे नंबर पर रहा है। हालांकि, भारत पिछली बार के 106 पदकों का आंकड़ा पार नहीं कर सका

21 गोल्ड मेडल में 11 महिला खिलाड़ियों ने जीते

भारत द्वारा जीते गए कुल 21 गोल्ड मेडलों में से 11 गोल्ड अकेले महिला खिलाड़ियों ने जीते।महिलाओं ने कुल 11 स्वर्ण, 11 रजत और 16 कांस्य जीते। वहीं पुरुषों के खाते में 7 स्वर्ण, 14 रजत और 17 कांस्य आए। मिश्रित स्पर्धाओं से भारत को तीन स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य मिले। इस तरह कुल 85 पदकों में महिलाओं और पुरुषों की हिस्सेदारी बराबर रही, लेकिन भारत के 21 स्वर्ण में महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा रहा। महिलाओं ने पुरुषों के बराबर पदक जीते, लेकिन उनके स्वर्ण पदकों की संख्या पुरुषों से चार ज्यादा रही। भारत के कुल 21 स्वर्ण में महिलाओं की हिस्सेदारी आधे से ज्यादा रही।

युवा एथलीटों ने दिखाया दम

इन खेलों में युवा स्टार 17 साल की रिकर्व आर्चर कुमकुम मोहौड़ ने ओलंपिक चैंपियन ओ येजिन को हराकर दुनिया को चौंका दिया। वहीं दूसरी ओर, गोल्फ में प्रणवी उर्स ने वर्ल्ड नंबर-6 और मेजर चैंपियन चीन की यिन रुओनिंग को शिकस्त देकर एशियन गेम्स का ऐतिहासिक गोल्फ गोल्ड अपने नाम किया। युवा स्क्वॉश प्लेयर अनाहत सिंह जैसी खिलाड़ियों ने भी दिखाया कि भारतीय महिला खेलों की अगली पीढ़ी तैयार है। युवा एथलीटों की आत्मविश्वास से भरी तस्वीरों ने यह साफ कर दिया कि भारतीय एथलीट अब दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों को हराने का माद्दा रखते हैं।

अनुभवी खिलाड़ियों का भी दिखा दम

शियन गेम्स सिर्फ युवा खिलाड़ियों के अलावा मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन सरीखी ओलंपिक मेडलिस्ट ने भी अपने अनुभव का जलाव दिखाया। स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने सिल्वर मेडल अपने नाम कर 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के बाद एशियन गेम्स वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल पुराना मेडल का सूखा खत्म कर दिया। बॉक्सिंग रिंग में लवलीना बोरगोहेन (75 किग्रा) ने गोल्ड मेडल जीतकर मैरी कॉम के बाद एशियन गेम्स गोल्ड जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बॉक्सर बनने का गौरव हासिल किया। उनके साथ परवीन हुड्डा ने भी वापसी करते हुए गोल्ड मेडल जीता। एथलेटिक्स ट्रैक पर वीथ्या रामराज ने 400 मीटर बाधा दौड़ में 54.75 सेकंड का समय निकालकर पीटी उषा का 42 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड तोड़कर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

क्रिकेट-कबड्डी में दबाव झेला, हॉकी में इतिहास रचा

महिला क्रिकेट और कबड्डी टीमों से स्वर्ण की उम्मीद थी और दोनों ने इसे पूरा किया। महिला हॉकी टीम ने तो 44 साल का इंतजार खत्म करते हुए एशियाई खेलों का स्वर्ण जीता। फाइनल में चीन को हराकर टीम ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

ভারতকে ৪-০ হারিয়েও ব্রাজিলকে ধুয়ে দিল নিজের দেশের মিডিয়া! ভিনিদের ফুটবলকে বলা হল 'ঘুমপাড়ানি'*
*খেলা*

*কলকাতা ডেস্ক:* র‍্যাঙ্কিংয়ে ব্যবধান ১৩২ ধাপ। একদিকে বিশ্বের ৬ নম্বর ব্রাজিল, অন্যদিকে ১৩৮ নম্বরে থাকা ভারত। যুবভারতীতে ৪-০ ফল ভারতের জন্য লড়াই করেই হার। কিন্তু ব্রাজিলের জন্য? জিতেও চরম অস্বস্তিতে সেলেকাওরা।

৪ গোল দেওয়ার পরও দেশের মিডিয়ার কাছে তুলোধোনা হচ্ছে কার্লো আনচেলোত্তির দল। ব্রাজিলের সংবাদমাধ্যমের চোখে ভারতের বিরুদ্ধে এই জয় মোটেও জয় নয়, বরং ঘুমিয়ে ঘুমিয়ে খেলা ৯০ মিনিটের এক বিরক্তিকর প্রদর্শনী।

*ভিনিসিয়াসকে নিয়ে তীব্র সমালোচনা*

ব্রাজিলের জনপ্রিয় পোর্টাল UOL সরাসরি লিখেছে, "আবারও হতাশ করল ব্রাজিল। ১৩৮ নম্বর দলের বিরুদ্ধে ৪-০ জয়টা নিতান্তই নিয়মরক্ষা।" তাদের বিশ্লেষণে, বাঁ-দিকে প্রচুর জায়গা পেয়েও সুপারস্টার ভিনিসিয়াস জুনিয়র ছিলেন সম্পূর্ণ ব্যর্থ। ভুল পাস, ছন্নছাড়া ড্রিবল ছাড়া কিছুই দিতে পারেননি।

আরেক সংবাদমাধ্যম Terra-র খোঁচা, "ব্রাজিলের ইতিহাসে অন্যতম দুর্বল প্রতিপক্ষকে পেয়েও মন ভরাতে পারল না দল।" দেশের প্রথম সারির কাগজ O Globo তো এই ম্যাচকে 'অনুশীলন ম্যাচ' বলেই উড়িয়ে দিয়েছে। তাদের মতে, বল দখলে থাকলেও গোল করার কোনও তাগিদই ছিল না।

*ক্ষোভ উগরে দিলেন ফেলিপে মেলো*

প্রাক্তন তারকা ফেলিপে মেলো Sportv-তে বিস্ফোরক। তিনি বলেন, "ব্রাজিল শুধু পিছিয়ে যাচ্ছে। বিশ্বকাপের শেষ ষোলোয় নরওয়ের কাছে হারের পর অস্ট্রেলিয়ার সঙ্গে দুটো প্রীতি ম্যাচে (১-১ ও ৪-২) বাজে খেলেছে। কলকাতায় ৪ গোল দিলেও খেলা ছিল কুৎসিত।"

কলকাতার গরমকে অজুহাত মানতে নারাজ মেলো। তাঁর সাফ কথা, "খারাপ খেলতে পারো, কিন্তু লড়াইয়ের মানসিকতা কোথায়? বদলি হিসেবে নামা মার্টিনেলি এবং জোড়া গোল করা সামুয়েল লিনো কিছুটা চেষ্টা করেছে। লিনো আরও সময় পেলে আরও গোল পেত।"

*CBF-কেও একহাত নিল ব্রাজিলের মিডিয়া*

শুধু ফুটবলার নয়, কাঠগড়ায় ব্রাজিল ফুটবল ফেডারেশন (CBF)-ও। ফুটবল পোর্টাল Trivela প্রশ্ন তুলেছে, ফাঁকা গ্যালারিতে এই ম্যাচ খেলার মানে কী? তাদের সাংবাদিক কার্লোস ভিনিসিয়াসের লেখায়, "টিকিটের দাম আকাশছোঁয়া। স্টেডিয়াম ভর্তি হয়নি। ভারতের মতো দেশে খেলতে এলে টিকিট সাধারণ মানুষের নাগালে রাখা উচিত ছিল।" তাদের আরও অভিযোগ, ব্রাজিলের বহু রাজ্যে বছরের পর বছর জাতীয় দলের খেলা হয় না। দেশের সমর্থকদের বঞ্চিত করে শুধু টাকার জন্য এশিয়া সফর করছে CBF। বিশ্বকাপের আগে সভাপতি বলেছিলেন দল সাধারণ মানুষের কাছে যাবে, কিন্তু বাস্তবে তা ফাঁকা প্রতিশ্রুতি।

সব মিলিয়ে যুবভারতীতে স্কোরবোর্ডে ৪-০ জিতলেও, পারফরম্যান্সের বিচারে দেশে ফিরে প্রবল চাপে আনচেলোত্তির ব্রাজিল।
ছবি:সঞ্জয় হাজরা।

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যুবভারতীতে ইতিহাস! প্রথমবার ভারতের মুখোমুখি পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল, রায়ানকে নিয়ে সতর্ক আন্সেলোত্তি
*খেলা*


*নিজস্ব প্রতিনিধি,কলকাতা:* শনিবার সন্ধ্যায় কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে শুধু একটি ফুটবল ম্যাচ নয়, লেখা হতে চলেছে ভারতীয় ফুটবলের নতুন ইতিহাস। কলকাতার বুকে প্রথমবার মুখোমুখি ভারত এবং পাঁচবারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল।

ম্যাচ ঘিরে ইতিমধ্যেই শহরজুড়ে সাম্বার উন্মাদনা তুঙ্গে। হলুদ-সবুজ জার্সিতে সেজে উঠেছে কলকাতা। ভিনিসিয়াসদের এক ঝলক দেখার অপেক্ষায় প্রহর গুনছে ফুটবলপাগল শহর। কিন্তু এই উৎসবের আবহের মধ্যেও ভারতকে এক মুহূর্তের জন্যও হালকা ভাবে নিচ্ছে না ব্রাজিল শিবির।
*আন্সেলোত্তির মুখে রায়ান-স্তুতি, গুরপ্রীতকে কুর্নিশ মার্কুইনহোসের*

শুক্রবার বাইপাসের ধারে একটি পাঁচতারা হোটেলে সাংবাদিক বৈঠকে হাজির হয় ব্রাজিল দল। মঞ্চে উঠে পর্তুগিজ বা ইংরেজির বদলে ‘নমস্তে’ বলে বক্তব্য শুরু করেন ব্রাজিল কোচ কার্লো আন্সেলোত্তি।

তিনি বলেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের সঙ্গে এখানে আসতে পারা আমাদের কাছে সত্যিই গর্বের। আমরা জানি, এখানকার মানুষ ফুটবল আর জাতীয় দলকে কতটা ভালোবাসেন।”

ভারতকে নিয়ে আন্সেলোত্তি স্পষ্ট বার্তা দেন, “আমরা ভারতের শেষ ম্যাচটি দেখেছি। পানামা ভালো দল। ভারতের একজন স্ট্রাইকার রায়ান উইলিয়ামস রয়েছে, যে আমাদের জন্য বিপজ্জনক হতে পারে। তাই ওকে নিয়ে আমরা ভাবছি।” তিনি আরও যোগ করেন, “ব্রাজিল জাতীয় দলের কাছে কোনও ম্যাচই শুধু প্রীতি ম্যাচ নয়। প্রতিপক্ষ যখন ভারত, তখন তাদের যথাযথ সম্মান দিয়েই আমরা মাঠে নামব।”

অন্যদিকে, ভারতীয় ফুটবলারদের লড়াইকে কুর্নিশ জানিয়েছেন ব্রাজিল অধিনায়ক মার্কুইনহোস। তিনি বলেন, “ভারতীয় দলে এমন কয়েকজন ফুটবলার আছেন, যাঁদের সম্মান করতেই হবে। গোলকিপার রয়েছেন, যিনি জাতীয় দলের হয়ে প্রায় ৯০টি ম্যাচ খেলতে চলেছেন। এটা বড় অর্জন।”

কলকাতার আকাশে এখন সাম্বার সুর। তবে বিশ্ব ফুটবলের অন্যতম সেরা দলের কোচ ও অধিনায়কের মুখে ভারতের নাম ও ভারতীয় ফুটবলারের প্রশংসা, যুবভারতীর মহারণের আগে সেটাও কম বড় প্রাপ্তি নয়। ছবি: সঞ্জয় হাজরা।

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ISL সম্প্রচারে বড় বদল, YouTube-এর পাশাপাশি Sony Sports-এও দেখা যাবে ম্যাচ
*খেলা*
*স্পোর্টস ডেস্ক, কলকাতা:* ১০ অক্টোবর, মহালয়ার দিন থেকে শুরু হচ্ছে ISL। গতবার সিঙ্গেল লিগ হলেও এবার হোম-অ্যাওয়ে ফর্ম্যাটে দুই লিগে হবে টুর্নামেন্ট। চলবে ২০২৭ সালের মে মাস পর্যন্ত। অংশ নিচ্ছে ১৩টি দল - ইস্টবেঙ্গল, মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট, বেঙ্গালুরু এফসি, কেরালা ব্লাস্টার্স, এফসি গোয়া, মুম্বই সিটি এফসি, নর্থ ইস্ট ইউনাইটেড, ওডিশা এফসি, পাঞ্জাব এফসি, ইন্টার কাশী, চেন্নাইয়িন এফসি, চার্চিল ব্রাদার্স ও স্পোর্টস ক্লাব দিল্লি। জামশেদপুর এফসি নাম তুলে নেওয়ায় তাদের লাইসেন্সে খেলবে চার্চিল। ডায়মন্ড হারবার এফসি যোগ্যতা অর্জন করেও পার্টিসিপেশন ফি জমা দিতে পারেনি। প্লে-অফ মিলিয়ে মোট ১৬৩টি ম্যাচ হবে।

এবার ISL-এর আয়োজক ক্লাবগুলি নিজেরাই। ফলে সম্প্রচার নিয়ে ছিল জল্পনা। Khel Now-এ প্রকাশিত রিপোর্ট অনুযায়ী, এবার ISL দেখা যাবে দুটি প্ল্যাটফর্মে। YouTube-এ স্ট্রিমিংয়ের পাশাপাশি স্যাটেলাইট টিভি রাইটস পেতে চলেছে Sony Sports Network।  রিপোর্টে দাবি, Sony-কে রাইটস দেওয়ার বিষয়ে সব পক্ষ রাজি, শুধু চূড়ান্ত কাগজপত্র বাকি। প্রথমে Zee-র নাম শোনা গেলেও তা বাতিল হয়েছে।

অতীতে Star Sports এবং Hotstar-এ দেখানো হতো ISL, গত বছর দেখানো হয়েছিল FanCode-এ। রিপোর্ট বলছে, বেশিরভাগ ক্লাব বেশি দর্শকের কাছে পৌঁছতে YouTube-এর পক্ষে, আবার কিছু ক্লাব স্পনসরশিপের কারণে প্রথাগত টিভি সম্প্রচার চাইছে। তাই দুই পথেই হাঁটার সিদ্ধান্ত।

ভারতীয় ফুটবলে Sony Sports দীর্ঘদিন ধরেই রয়েছে, ইউরোপের একাধিক লিগ ও সম্প্রতি ডুরান্ড কাপও তারাই সম্প্রচার করেছে। অন্যদিকে YouTube-ও ইতিমধ্যেই প্রাইম ভলিবল লিগ ও তামিলনাড়ু প্রিমিয়ার লিগ দেখাচ্ছে।

ছবি: সংগৃহীত।

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रूसी सेना में भर्ती को लेकर भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी, भारतीयों को दी सख्त चेतावनी

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रूस में नौकरी के नाम पर भारतीय नागरिकों के रूसी सेना में भर्ती होने को लेकर विदेश मंत्रालय ने कड़ी चेतावनी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि रूसी सेना में भर्ती होना बेहद जोखिम भरा है। मंत्रालय ने भारतीयों से अपील की है कि वे विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले ऑफर के झांसे में न आएं।

पिछले दो सालों में कई मौकों पर दी सतर्कता की सलाह

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो सालों के दौरान सरकार ने कई मौकों पर रूस की सेना में शामिल होने से जुड़े जोखिम और खतरों को रेखांकित किया है। भारतीय नागरिकों को विदेश में नौकरी के अवसर तलाशते समय सावधानी बरतने और असत्यापित व्यक्तियों की ओर से दिए गए नौकरी के ऑफर के झांसे में नहीं आने की सलाह दी गई है।

मंत्रीलय ने कहा- कुछ भारतीय ऐसे ऑफर तलाश रहे

मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिक ऐसे ऑफर खुद तलाश रहे हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सेना में शामिल होने के बदले अच्छा पैसा मिलेगा और फिर भारत सरकार के दखल से वे वहां से निकल जाएंगे। सरकार ने इस सोच को खतरनाक बताते हुए भारतीय नागरिकों से ऐसे कदम से दूर रहने को कहा है।

भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट लेने की कोशिश

एडवाइजरी में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। मंत्रालय के मुताबिक, कुछ भारतीय नागरिकों ने भारतीय नागरिकता छोड़कर रूसी पासपोर्ट हासिल करने और उसके बाद रूसी सशस्त्र सेनाओं में भर्ती होने की कोशिश की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग आर्थिक फायदे के लालच में बिना भारतीय अधिकारियों से सलाह किए ऐसे कदम उठा चुके हैं। सरकार ने ऐसे लोगों को इस फैसले की गंभीरता समझने की सलाह दी है।

नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले सतर्कता बरतने की सलाह

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि गैर-सार्वजनिक संस्थाएं, जिनमें स्वैच्छिक समूह भी शामिल हैं, विदेशी नागरिकों को रूसी सेना में सेवा देने के लिए भर्ती कर रही हैं। मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को ऐसे एजेंटों से नौकरी के ऑफर स्वीकार करने से पहले पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी है। ऐसे एजेंट जो विदेश मंत्रालय के साथ पंजीकृत नहीं हैं, उनके ऑफर को लेकर विशेष रूप से सावधानी बरतने को कहा गया है।

एशियन गेम्स में भारत की गोल्डन हैट्रिक, आर्चरी में पुरुष कंपाउंड टीम ने चीन को हरा जीता सोना

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भारतीय तीरंदाजों ने एशियन गेम्स में बुधवार की सुबह भारत को शानदार रहा। कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक जीत लिया। भारतीय आर्चरी की पुरुष कंपाउंड टीम ने बेहद रोमांचक मुकाबले में चीन को पछाड़कर स्वर्ण पदक पर कब्जा जमा लिया है।

तीरंदाजी में ट्रिपल गोल्ड

पुरुष टीम ने फाइनल में चीन को 238-237 से हराकर दिन का तीसरा तीरंदाजी गोल्ड अपने नाम किया। साहिल राजेश, कुशल दलाल और मणि रत्नम गणेश की भारतीय तिकड़ी ने चीन के खिलाफ फाइनल में शानदार जुझारूपन दिखाया। 21 वर्षीय कुशल दलाल, 25 वर्षीय साहिल राजेश और 20 वर्षीय मणि रत्नम गणेश थिरुमुरु की तिकड़ी ने दबाव में धैर्य बनाए रखा और भारत को गोल्ड दिलाया।

आखिरी राउंड में बाजी पलटी

तीन राउंड यानी 18 शॉट के बाद भारत एक अंक से पीछे चल रहा था। तब चीन का स्कोर 179 और भारत का 178 था। इसके बाद आखिरी राउंड में भारतीय टीम ने मुकाबला पलट दिया। आखिरी छह शॉट में चीन के एक तीरंदाज ने आठ अंक का निशाना लगाया। इसका फायदा भारत को मिला और भारतीय टीम एक अंक की बढ़त पर पहुंच गई। अंत में भारत ने 238 अंक बनाए, जबकि चीन 237 अंक ही हासिल कर सका। इस तरह भारतीय टीम ने स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण

बता दें कि भारत ने आज कंपाउंड तीरंदाजी के तीनों इवेंट में स्वर्ण जीता। सबसे पहले चिकिथा तानिपर्थी, पृथिका प्रदीप और ज्योति सुरेखा वेन्नम की महिला कंपाउंड टीम ने चीन को हराकर गोल्ड अपने नाम किया था। इसके बाद चिकिथा और साहिल जाधव की मिश्रित टीम ने दक्षिण कोरिया को हराकर भारत को दूसरा स्वर्ण दिलाया। पुरुष टीम ने भी चीन के खिलाफ फाइनल में जीत दर्ज कर तीरंदाजी में भारत का गोल्डन हैट्रिक पूरा कर दिया।

১-১ ড্র, তবুও আইএফএ শিল্ডের সেমিফাইনালে মোহনবাগান, সঙ্গী নর্থইস্ট*

*স্পোর্টস ডেস্ক,কলকাতা* : নর্থইস্ট ইউনাইটেডকে হারাতে না পারলেও আইএফএ শিল্ডের শেষ চারে পৌঁছে গেল মোহনবাগান সুপার জায়ান্ট। ম্যাচ ১-১ গোলে শেষ হল। এই ড্রয়ের ফলে গ্রুপ চ্যাম্পিয়ন হিসেবেই সেমিতে উঠল সবুজ-মেরুন ব্রিগেড। এক পয়েন্ট পেয়ে নক-আউটে জায়গা করে নিল নর্থইস্টও।

অথচ ম্যাচটা জিততেই পারত মোহনবাগান। ঘরের মাঠে একাধিক সুযোগ তৈরি করেও কাজে লাগাতে ব্যর্থ হন ফুটবলাররা। সবচেয়ে বড় আক্ষেপ হয়ে থাকবে মিগুয়েল ফিগুয়েরার পেনাল্টি মিস।

এদিন কোচ পানাজিওটিস দিমপেরিস চমক দিয়ে শুরুতে জেমি ম্যাকলারেনকে বেঞ্চে রেখে লি আরউইনকে নামান। আক্রমণে ছিলেন দেজান দ্রাজিচও। ম্যাচের ৯ মিনিটেই গোল পেয়ে যেতে পারত বাগান। সমির জেলকোভিচের বাড়ানো বল ধরে বক্সে ঢুকে নর্থইস্ট কিপার দীপেশ চৌহানকে চিপ করেন আরউইন, কিন্তু বল অল্পের জন্য বারের উপর দিয়ে বেরিয়ে যায়।

প্রথম ৪৫ মিনিটে বলের দখল ও আক্রমণে এগিয়ে ছিল মোহনবাগান। নর্থইস্ট শুরু থেকেই ডিফেন্সিভ খেলে চার ডিফেন্ডার নিয়ে রক্ষণ সামলায়। ফলে বিরতি পর্যন্ত স্কোরলাইন ০-০ থাকে।

বিরতির পরই খেলার রং বদলান দিমপেরিস। মাঠে নামান মিগুয়েল ও ম্যাকলারেনকে। ৪৯ মিনিটে তার সুফল পায় দল। দ্রাজিচের লং বল হেড করে আরউইনের জন্য সাজিয়ে দেন ম্যাকলারেন। ঠান্ডা মাথায় ফিনিশ করে দলকে এগিয়ে দেন স্কটিশ ফরোয়ার্ড। মোহনবাগানের জার্সিতে পরপর দুই ম্যাচে গোল করলেন আরউইন।

পিছিয়ে পড়ে গোল শোধে ঝাঁপায় নর্থইস্ট। এর মাঝেই পাল্টা আক্রমণ থেকে পেনাল্টি পায় বাগান। দ্রাজিচের শট থইবা সিংয়ের হাতে লাগলে পেনাল্টির নির্দেশ দেন রেফারি। কিন্তু স্পটকিক থেকে দুর্বল শট নেন মিগুয়েল, যা সহজেই আটকে দেন দীপেশ।

ছবি: AI দ্বারা নির্মিত।

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ব্রাজিল ম্যাচের আগে যুদ্ধকালীন তৎপরতায় সেজে উঠল যুবভারতী, পর্দার আড়ালে ব্রাজিলিয়ান জাদু
*খেলা*


*স্পোর্টস ডেস্ক,কলকাতা:* আগামী ৩ অক্টোবর কলকাতার বিবেকানন্দ যুবভারতী ক্রীড়াঙ্গনে ভারতের বিরুদ্ধে প্রীতি ম্যাচ খেলতে নামবে পাঁচ বারের বিশ্বচ্যাম্পিয়ন ব্রাজিল। এই ম্যাচের ঘোষণার পর থেকেই ফুটবলপ্রেমীদের মধ্যে উন্মাদনা তুঙ্গে। তবে খুব কম মানুষই জানেন, কয়েক সপ্তাহ আগেও যুবভারতীর মাঠ নিয়ে খুশি ছিল না ব্রাজিলিয়ান ফুটবল কনফেডারেশন। মাঠের অবস্থা দেখে উদ্বেগ প্রকাশ করেছিলেন ব্রাজিলের প্রতিনিধিরা। এরপরই শুরু হয় যুদ্ধকালীন তৎপরতা।

মাঠ সংস্কারের জন্য ব্রাজিলের রাজধানী ব্রাসিলিয়া থেকে বিশেষভাবে আনা হয় মাঠ বিশেষজ্ঞ ইভান নাসিমেন্তোকে। প্রায় এক মাস কলকাতায় থেকে তিনি পুরো সংস্কারের কাজ তদারকি করেন।

তাঁর কথায়, মাঠের মাটি সমান ছিল না, জায়গায় জায়গায় ঢেউয়ের মতো উঁচুনিচু অংশ ছিল। ঘাসও অনেক বেশি বড় হয়ে গিয়েছিল।

নাসিমেন্তো বলেন, "আমাদের প্রথম লক্ষ্য ছিল মাঠের মাটি ও রক্ষণাবেক্ষণের প্রক্রিয়াকে ঠিক করা। মাটির স্তর সমান ছিল না, অনেক জায়গায় উঁচুনিচু ছিল। ঘাসও অনেক বেশি বড় হয়ে গিয়েছিল। তাই আমরা প্রথমে মাঠের পরিচর্যার কাজ শুরু করি। তার পর পুরো অপারেশন এমন ভাবে পরিচালনা করি যাতে এটিকে আন্তর্জাতিক মানের মাঠে পরিণত করা যায়।"

জানা গেছে, মাঠের সবচেয়ে বড় সমস্যা ছিল অসমান মাটি। বিশেষ যন্ত্র দিয়ে মাটির মধ্যে বাতাস প্রবেশ করানো হয়। এর পর রোলার ব্যবহার করে মাঠকে অনেক বেশি সমতল করা হয়। যেখানে মাঠের লাইন আঁকা হয়, সেখানে জমে থাকা পুরনো রঙ মাটিকে শক্ত করে ফেলেছিল। সেই অংশও নতুন করে ঠিক করা হয়েছে। এর পাশাপাশি নিয়মিত সার দেওয়া, ঘাস কাটা, ছত্রাক ও পোকামাকড় নিয়ন্ত্রণের কাজও করা হয়েছে। মাঠকে আরও আকর্ষণীয় করে তুলতে পরিচিত হালকা ও গাঢ় সবুজ ডোরার নকশাও তৈরি করা হয়েছে।

এই পুরো কাজে ব্রাজিলের বিশেষজ্ঞ দলের পাশাপাশি স্থানীয় কর্মীরাও গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছেন। নাসিমেন্তো বলেন, "আমরা ব্রাজিল থেকে দুটি দল নিয়ে এসেছিলাম। কিন্তু স্থানীয় কর্মীদের সাহায্য না পেলে এতো দ্রুত কাজ শেষ করা সম্ভব হতো না। ওরা অসাধারণ কাজ করেছে।"

ছবি : AI দ্বারা নির্মিত।

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