पश्चिम बंगाल में ओवैसी की एंट्री, ममता की बढ़ाएंगे मुश्किल, इस पार्टी से मिलाया हाथ

#westbengalelectionsaimimasaduddinowaisidealwithhumayun_kabir 

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर एक ऐसी चाल चली गई है, जिसने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

औवैसी ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया

ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो। 

25 मार्च को कोलकाता में होगा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा हमारा नुमायेंदे मुल्क के कोने कोने में कामयाब होकर गरीब की आवाज उठाएं। ममता बनर्जी बंगाल में हैं, 30 फीसदी मुस्लिम की आबादी है, लेकिन 5 लाख के करीब बैकवर्ड क्लास सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया। बहुत सी नाइंसाफियों की कहानियां भी हैं, मालदा में पंचायत इलेक्शन में मजलिस को 60 हजार वोट मिले थे, हम इस कहानी को आगे बढ़ाएंगे। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।

हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इस गठबंधन में AIMIM भी साझेदार है। ओवैसी की पार्टी लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इधर, कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। हुमायूं ने भगवानगोला, नौदा, राजीनगर और मुर्शिदाबाद की सीट पर अपने प्रत्याशी के नामों का ऐलान कर दिया है।

ममता के “M” फैक्टर में सेंधमारी

ओवैसी का यह दांव सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बंगाल के उस ‘मुस्लिम वोटबैंक’ के किले में सेंधमारी की कोशिश है, जिसे ममता बनर्जी की अजेय सत्ता की सबसे बड़ी रीढ़ माना जाता है। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत का फैसला करते हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में यह आबादी बहुसंख्यक की भूमिका में है। 

बीजेपी के लिए खुशी की खबर

पिछले कई चुनावों से यह वोटबैंक एकमुश्त होकर टीएमसी के पक्ष में मतदान करता आ रहा है, जिसने बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी को सत्ता के शिखर पर बनाए रखा है। लेकिन अब ओवैसी और हुमायूं कबीर के एक साथ आने से इस वोटबैंक में बिखराव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। अगर यह गठबंधन इन इलाकों में 10 से 15 हजार वोट भी काट ले जाता है, तो दर्जनों सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार औंधे मुंह गिर सकते हैं। इसल‍िए ओवैसी का यह बयान बीजेपी को भी खुश करने वाला है।

NIFT Situation Test in Patna | RFS NIFT NID Coaching Institute

Full Guarrantee 100% selection. RFS NIFT Coaching offers the best preparation NIFT situation Test in Patna. This is the best place to learn lots of creativity and design.

The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

#rajyasabhaelection2026finalresults37_seats

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म, महागठबंधन के चार MLA ने नहीं किया मतदान

#4mlaofmahagathbandhanabstainrajyasabha_elections

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुका है। शाम 4 बजे तक वोटिंग का समय था, लेकिन विपक्ष के चार विधायक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें तीन कांग्रेस के विधायक और एक आरजेडी का विधायक शामिल है। वहीं, एनडीए के सभी 202 विधायक ने अपना मतदान पूरा कर लिया। इससे महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने डाला वोट

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने अपना मतदान पूरा कर लिया है, जबकि महागठबंधन की ओर से अब तक सिर्फ 37 विधायकों ने ही वोट डाला है। महागठबंधन के चार विधायक अभी तक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें आरजेडी के फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिश्वास शामिल हैं। इनकी अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन में कोई अंदरूनी खींचतान चल रही है।

चार वोट नहीं मिलने से महागठबंधन को हो गया नुकसान

बिहार राज्यसभा में 5 सीटों के लिए मतदान हुआ। पेंच पांचवीं सीट को लेकर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र सिंह धारी के बीच मुकाबला था। महागठबंधन के 4 विधायकों के वोट नहीं डालने के कारण पूरा समीकरण ही बदल गया है। क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई लेकिन मतदान से दूर रहने का सीधा फायदा एनडीए को होगा। एनडीए के खाते में बिहार की पांचों सीटें आ जाएंगी।

एनडीए का तेजस्वी यादव पर हमला

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा और कहा कि उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी और अपनी राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एनडीए राज्यसभा की सभी पांच सीट पर जीत हासिल करेगा।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीतेंगे। विपक्षी दल क्या दावा कर रहे हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,डीजीपी समेत कई पुलिस अधिकारियों के तबादले

#westbengalelectionadministrativereshufflenewdgpsiddhnath_gupta 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव दो चरणों में होंगे। पहला 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल, नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।

सिद्धनाथ गुप्ता राज्य के नए डीजीपी

पश्चिम बंगाल के डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) कोलकाता पुलिस कमिश्नर, आईजीपी समेत कई अफसरों का तबादला किया है। सिद्धनाथ गुप्ता राज्य के नए डीजीपी बनाए गए हैं। अजय नंद को कोलकाता पुलिस कमिश्नर का दियात्व सौंपा गया है। चुनाव आयोग ने 27 पुलिस इंस्पेक्टर्स के ट्रांसफर भी किए हैं।

मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए गए

चुनाव शेड्यूल की घोषणा के बाद मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादलों का आदेश दिया। यह भी आदेश दिया कि दोनों किसी भी प्रकार के चुनाव संबंधी कार्य में शामिल नहीं होंगे। अब दुष्यंत नारियावाला राज्य के नए मुख्य सचिव होंगे और संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव बनाया गया है।

चुनावी माहौल के बीच प्रशासनिक बदलाव की अहमियत

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए यह प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। राज्य में चुनावी माहौल के बीच सरकार और प्रशासन दोनों सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल मुख्य सचिव को इस आदेश का पालन आज दोपहर 3 बजे तक करने आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में ये भी कहा गया है कि जिन पुलिस अधिकारियों का तबादला हुआ है उन्हें चुनाव से जुड़ी हुई कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

चुनाव तारीख ऐलान से पहले ममता बनर्जी के किए गए ट्रांसफर रोके

पश्चिम बंगाल में कई अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के तबादले पर रोक लग गई है। इन तबादलों का आदेश रविवार दोपहर को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से राज्य में दो चरणों में होने वाले मतदान की तारीखों की घोषणा किए जाने से ठीक एक घंटे पहले दिया गया था। चुनाव की घोषणा के बाद से ही राज्य में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू हो गई है, जिसके चलते पश्चिम बंगाल सरकार ईसीआई की अनुमति के बिना कोई भी प्रशासनिक निर्णय नहीं ले सकती।

राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान जारी, बिहार पर टिकी सबकी नजर

#rajyasabhaelection2026votingresult 

तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान है। जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं।

इस बार बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इन सभी 5 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। एनडीए की ओर से प्रमुख उम्मीदवारों में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी नेता नितिन नवीन और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार भी मैदान में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए समर्थन जुटाने में जुटा है।

ओडिशा की चार सीटों पर मुकाबला

ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

हरियाणा में मुकाबला दिलचस्प

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं। राज्यसभा पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है।

लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

#chiefelectioncommissionergyaneshkumaroppositionnoconfidencemotion

लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए क्यों है अहम?

#nepalelectionsonmarch5whynewgovtmatterstoindia

भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहा है, जिन्होंने मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली के प्रशासन को गिरा दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया था और पुलिस ने गोलीबारी की थी।

तय होगी भारत-नेपाल संबंध की दिशा

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लिखित इतिहास से भी पुराना भारत-नेपाल संबंध

भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

1,850 किमी लंबी खुली सीमा की चिंता

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है।

भारत के लिए स्थिर नेपाल जरूरी

भारत की अपने संबंधों के भविष्य के लिहाज से नेपाल के चुनाव पर नजर लगी हुई है। भारत को एक शांतिपूर्ण पड़ोस की आवश्यकता है। अशांति से ग्रस्त पड़ोस भारत की ऊर्जा को सोख लेगा। इसलिए पड़ोस भारत के अपने विकास, क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका, और राजनीतिक और भू-रणनीतिक भूमिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेपाल में बढ़ी चीन की दखल

वहीं, पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

चीन की दखल भारत के लिए चिंता का विषय

बता दें कि नेपाल की खुली सीमा तीन दिशाओं में भारत के पाँच अलग-अलग राज्यों से जुड़ी है। उत्तर में तिब्बत के पठार से सीमा जुड़ने के कारण नेपाल की रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति और यहाँ बढ़ते दिख रहे चीनी प्रभाव को लेकर पश्चिमी देश भी रुचि दिखाते रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) में शामिल हुआ था। बाद में 2024 के अंत में के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल ने बीआरआई कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर किए। चीन के सहयोग से नेपाल में रेलमार्ग निर्माण पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि नेपाल द्वारा दी गई कोई भी रियायत भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है, तो वहीं हमारी चिंता शुरू होगी।

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा, जानें कब वोटिंग और रिजल्ट?

#rajyasabhaelectiondateannounced37seatsonmarch_16

राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी शाम मतगणना की जाएगी।

चुनाव 16 मार्च को

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे। 37 सीटों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। अप्रैल महीने की अलग-अलग तारीखों पर कई सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 5 मार्च नामांकन भरने की आखिरी तारीख होगी। 9 मार्च तक कैंडिडेट अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। 16 मार्च को सुबह 9 से 4 के बीच वोटों की गिनती होगी और उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी।

किन राज्यों की है ये सीटें?

बता दें कि 10 राज्यों से राज्यसभा की कुल 37 सीटें खाली हो रही है। जिसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की सात है। वहीं तमिलनाडु की 6, ओडिशा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, असम की 3, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 2, तेलंगाना की 2 और हिमाचल प्रदेश की एक सीट खाली हो रही है।

किस पार्टी के पास कितनी सीट?

छत्तीसगढ़ में जो सीट खाली हो रही है उसमें 1-1 बीजेपी और कांग्रेस के पास है। वहीं बिहार में 2 राजद, 1 जदयू और 1 राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास है। हरियाणा की दोनों सीटों बीजेपी के पास हैं। उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी से 1, एनसीपी 1, कांग्रेस से 1, शरद गुट वाली एनसीपी से 1 और आरपीआई के पास 1 सीट है। इसके साथ ही हिमाचल में खाली हो रही सीट बीजेपी के पास है।

2020 में एनडीए का रहा दबदबा

2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुआ था तब बीजेपी और उसके सहयोगियों ने असम, बिहार, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों में अच्छी बढ़त हासिल की थी। महाराष्ट्र में सीटें अविभाजित शिवसेना, अविभाजित एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटी थीं। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अधिकतर सीटें जीतीं। वहीं बंगाल में टीएमसी का दबदबा बना रहा। इस बार समीकरण अलग हैं और कई सांसदों के भविष्य पर सवालिया निशान है। शरद पवार ने पहले संन्यास के संकेत दिए थे लेकिन अब माना जा रहा है कि वह दोबारा राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। वहीं प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर भी सवाल है। ओडिशा में बीजू जनता दल के कमजोर होने के बाद अलग समीकरण हैं।

पश्चिम बंगाल में ओवैसी की एंट्री, ममता की बढ़ाएंगे मुश्किल, इस पार्टी से मिलाया हाथ

#westbengalelectionsaimimasaduddinowaisidealwithhumayun_kabir 

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर एक ऐसी चाल चली गई है, जिसने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।

औवैसी ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया

ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो। 

25 मार्च को कोलकाता में होगा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा हमारा नुमायेंदे मुल्क के कोने कोने में कामयाब होकर गरीब की आवाज उठाएं। ममता बनर्जी बंगाल में हैं, 30 फीसदी मुस्लिम की आबादी है, लेकिन 5 लाख के करीब बैकवर्ड क्लास सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया। बहुत सी नाइंसाफियों की कहानियां भी हैं, मालदा में पंचायत इलेक्शन में मजलिस को 60 हजार वोट मिले थे, हम इस कहानी को आगे बढ़ाएंगे। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।

हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इस गठबंधन में AIMIM भी साझेदार है। ओवैसी की पार्टी लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इधर, कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। हुमायूं ने भगवानगोला, नौदा, राजीनगर और मुर्शिदाबाद की सीट पर अपने प्रत्याशी के नामों का ऐलान कर दिया है।

ममता के “M” फैक्टर में सेंधमारी

ओवैसी का यह दांव सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बंगाल के उस ‘मुस्लिम वोटबैंक’ के किले में सेंधमारी की कोशिश है, जिसे ममता बनर्जी की अजेय सत्ता की सबसे बड़ी रीढ़ माना जाता है। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत का फैसला करते हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में यह आबादी बहुसंख्यक की भूमिका में है। 

बीजेपी के लिए खुशी की खबर

पिछले कई चुनावों से यह वोटबैंक एकमुश्त होकर टीएमसी के पक्ष में मतदान करता आ रहा है, जिसने बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी को सत्ता के शिखर पर बनाए रखा है। लेकिन अब ओवैसी और हुमायूं कबीर के एक साथ आने से इस वोटबैंक में बिखराव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। अगर यह गठबंधन इन इलाकों में 10 से 15 हजार वोट भी काट ले जाता है, तो दर्जनों सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार औंधे मुंह गिर सकते हैं। इसल‍िए ओवैसी का यह बयान बीजेपी को भी खुश करने वाला है।

NIFT Situation Test in Patna | RFS NIFT NID Coaching Institute

Full Guarrantee 100% selection. RFS NIFT Coaching offers the best preparation NIFT situation Test in Patna. This is the best place to learn lots of creativity and design.

The Bhopal Shift: How Definite Success Classes Is Turning the City into India’s New NEET Preparation Hub

For decades, the path for medical aspirants in India was predictable: if you wanted a top-tier rank in NEET-UG, you packed your bags for established coaching hubs like Kota or Delhi. However, over the last few years, a significant shift has been brewing in Central India. Bhopal, once seen primarily as a regional academic center, has transformed into a high-performance hub that is now outperforming legacy cities in "selection-to-enrollment" ratios.This transition is backed by a series of high-stakes results and a growing reputation for academic excellence that has caught the attention of education analysts nationwide.

Breaking the "AIIMS Delhi" Barrier

The most telling indicator of a city's academic depth is its ability to place students in AIIMS Delhi—the most competitive medical institution in the country. For Bhopal, this was a rare feat, with the city often going seven or eight years without a single selection to the premier institute.

That cycle was decisively broken in the 2025 results. Aagam Jain, a student from the premier educational organization Definite Success Classes, secured All India Rank 45, earning a seat at AIIMS Delhi. For observers, this was a "proof of concept" for the city's evolving academic infrastructure, proving that the highest level of conceptual mastery required for top national ranks is now available within Bhopal through elite-level mentorship.

A Growing Magnet for National Student Migration

One of the most remarkable highlights of Bhopal’s rise is the changing geography of its student population. No longer just a center for local talent, Bhopal has become a "magnet city," drawing students from across the Indian map.

Enrollment data reveals a significant trend of student migration to the city, specifically to study under the guidance of Definite Success Classes. Families are now bypassing closer, traditional options to send their children to Bhopal from diverse regions, including:

● North & West: Rajasthan (Jaipur, Alwar, Jhalawar), Uttar Pradesh (Agra, Pratapgarh, Jhansi, Raebareli), and Punjab (Amritsar).

● East & South: West Bengal (Kolkata, Jalpaiguri), Bihar (Rohtas, Katihar), Jharkhand (Jamtara), and Maharashtra (Amravati).

● Remote Frontiers: Even students from the J&K region (Ladakh) and Himachal Pradesh (Kangra) are now choosing the academic stability of Bhopal over larger, more crowded metros.

Education professionals suggest this cross-state movement occurs because families perceive Bhopal to offer a balanced academic ecosystem—combining the high-intensity preparation of a legacy hub with a more supportive, less overwhelming environment.

A Legacy of Excellence: The Multi-Year Record

This national trust is built on a foundation of consistent, verified results. At the center of this trend is the focused approach of Definite Success Classes, which prioritizes academic stability and actual college conversion.

● The 2024 Performance: The city maintained its momentum with over 116 MBBS selections from this prestigious organization. This included elite placements such as Akshar Dubey (AIIMS Bhopal, 705/720), Aashna Jain (GGMC Mumbai, 700/720), and Nandini Jain (AIIMS Rajkot, 696/720).

● The 2023 Foundation: In this cycle, Definite Success Classes recorded a massive surge in students crossing the 650-mark threshold, resulting in 5 AIIMS selections (including the city topper Samridhi Saxena at 693/720) and over 70 Government Medical College seats.

The "Bhopal Factor": Transparency and Well-being

Beyond the numbers, the human factor plays a major role in why families are choosing Bhopal. In an era of high-pressure advertising, Definite Success Classes has set a standard for transparency by publicly verifying results with confirmed college allotments.

Furthermore, Bhopal offers a high quality of life with significantly lower stress and living costs compared to Tier-1 cities. This allows medical aspirants to focus entirely on their preparation in a safe, conducive environment, supported by a healthy student-to-teacher ratio that ensures they are never treated as "just another number."

The New Educational Map

The data suggests that the days of a few cities holding a monopoly on medical education are ending. Bhopal’s ascent—spearheaded by the consistent performance of prestigious organizations like Definite Success Classes—signals a new era where quality is determined by actual college conversion rates rather than the size of a billboard.

As more students from every corner of India choose Bhopal for their NEET journey, the city is no longer just a regional player; it is firmly established on the national map as a premier destination for the next generation of India’s doctors.

राज्यसभा चुनाव में विपक्ष को तगड़ा झटका, 37 सीटों में से 22 पर एनडीए का कब्जा

#rajyasabhaelection2026finalresults37_seats

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए हुए सोमवार के हुए चुनावों के नतीजों ने विपक्षी कांग्रेस, आरजेडी और बीजेडी को बड़ी टेंशन दे दी है। कुल 10 राज्यों में हुई इस चुनाव प्रक्रिया में 26 सीटें पहले ही निर्विरोध तय हो चुकी थीं, जबकि तीन राज्यों बिहार, ओडिशा, और हरियाणा की 11 सीटों के लिए सोमवार मतदान कराया गया। इन 11 सीटों में से 9 पर एनडीए ने कब्जा कर लिया।

11 सीटों में से 9 एनडीए के खाते में

राज्यसभा के चुनाव के लिए सोमवार को तीन राज्यों ओडिशा, हरियाणा और बिहार की 11 सीटों के लिए मतदान हुआ। इनमें ओडिशा में दो बीजेपी और एक बीजेपी समर्थक निर्दलीय उम्मीदवार और एक बीजेडी के उम्मीदवार ने जीत हासिल की। बिहार की सभी पांचों सीटों पर एनडीए उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। हरियाणा में 2 सीटों के लिए मतदान हुआ। जिसमें से भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध ने एक-एक सीट जीत ली।

बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इस बार देशभर में राज्यसभा की कुल 37 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं, जिनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों में भाजपा के सात, कांग्रेस के पांच, तृणमूल कांग्रेस के चार, डीएमके के तीन उम्मीदवार शामिल हैं। इसके अलावा शिवसेना, आरपीआई (ए), एनसीपी, एनसीपी (एसपी), एआईएडीएमके, पीएमके और यूपीपीएल के एक-एक उम्मीदवार भी बिना मुकाबले के राज्यसभा पहुंच चुके हैं। इस तरह से 37 राज्यसभा सीटों के चुनाव का फाइनल नतीजे देखें तो बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए ने 22 सीटें जीती हैं तो विपक्ष के खाते में 15 सीटें आईं हैं।

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म, महागठबंधन के चार MLA ने नहीं किया मतदान

#4mlaofmahagathbandhanabstainrajyasabha_elections

बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुका है। शाम 4 बजे तक वोटिंग का समय था, लेकिन विपक्ष के चार विधायक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें तीन कांग्रेस के विधायक और एक आरजेडी का विधायक शामिल है। वहीं, एनडीए के सभी 202 विधायक ने अपना मतदान पूरा कर लिया। इससे महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने डाला वोट

एनडीए के सभी 202 विधायकों ने अपना मतदान पूरा कर लिया है, जबकि महागठबंधन की ओर से अब तक सिर्फ 37 विधायकों ने ही वोट डाला है। महागठबंधन के चार विधायक अभी तक मतदान करने नहीं पहुंचे। इनमें आरजेडी के फैसल रहमान के अलावा कांग्रेस के तीन विधायक मनोहर प्रसाद, सुरेंद्र कुशवाहा और मनोज बिश्वास शामिल हैं। इनकी अनुपस्थिति को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और सवाल उठने लगे हैं कि क्या महागठबंधन में कोई अंदरूनी खींचतान चल रही है।

चार वोट नहीं मिलने से महागठबंधन को हो गया नुकसान

बिहार राज्यसभा में 5 सीटों के लिए मतदान हुआ। पेंच पांचवीं सीट को लेकर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र सिंह धारी के बीच मुकाबला था। महागठबंधन के 4 विधायकों के वोट नहीं डालने के कारण पूरा समीकरण ही बदल गया है। क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई लेकिन मतदान से दूर रहने का सीधा फायदा एनडीए को होगा। एनडीए के खाते में बिहार की पांचों सीटें आ जाएंगी।

एनडीए का तेजस्वी यादव पर हमला

राज्यसभा चुनाव को लेकर बिहार मंत्री अशोक चौधरी ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधाराओं की लड़ाई है। तेजस्वी यादव पर भी तंज कसा और कहा कि उन्हें दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय अपनी पार्टी और अपनी राजनीति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि एनडीए राज्यसभा की सभी पांच सीट पर जीत हासिल करेगा।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने पत्रकारों से कहा, एनडीए के सभी पांच उम्मीदवार जीतेंगे। विपक्षी दल क्या दावा कर रहे हैं, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता।

विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल,डीजीपी समेत कई पुलिस अधिकारियों के तबादले

#westbengalelectionadministrativereshufflenewdgpsiddhnath_gupta 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। चुनाव दो चरणों में होंगे। पहला 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल, नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है।

सिद्धनाथ गुप्ता राज्य के नए डीजीपी

पश्चिम बंगाल के डीजीपी, एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) कोलकाता पुलिस कमिश्नर, आईजीपी समेत कई अफसरों का तबादला किया है। सिद्धनाथ गुप्ता राज्य के नए डीजीपी बनाए गए हैं। अजय नंद को कोलकाता पुलिस कमिश्नर का दियात्व सौंपा गया है। चुनाव आयोग ने 27 पुलिस इंस्पेक्टर्स के ट्रांसफर भी किए हैं।

मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए गए

चुनाव शेड्यूल की घोषणा के बाद मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा के तबादलों का आदेश दिया। यह भी आदेश दिया कि दोनों किसी भी प्रकार के चुनाव संबंधी कार्य में शामिल नहीं होंगे। अब दुष्यंत नारियावाला राज्य के नए मुख्य सचिव होंगे और संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव बनाया गया है।

चुनावी माहौल के बीच प्रशासनिक बदलाव की अहमियत

माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कानून-व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए यह प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। राज्य में चुनावी माहौल के बीच सरकार और प्रशासन दोनों सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल मुख्य सचिव को इस आदेश का पालन आज दोपहर 3 बजे तक करने आदेश दिया है। चुनाव आयोग ने अपने आदेश में ये भी कहा गया है कि जिन पुलिस अधिकारियों का तबादला हुआ है उन्हें चुनाव से जुड़ी हुई कोई भी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।

चुनाव तारीख ऐलान से पहले ममता बनर्जी के किए गए ट्रांसफर रोके

पश्चिम बंगाल में कई अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के तबादले पर रोक लग गई है। इन तबादलों का आदेश रविवार दोपहर को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की ओर से राज्य में दो चरणों में होने वाले मतदान की तारीखों की घोषणा किए जाने से ठीक एक घंटे पहले दिया गया था। चुनाव की घोषणा के बाद से ही राज्य में आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) लागू हो गई है, जिसके चलते पश्चिम बंगाल सरकार ईसीआई की अनुमति के बिना कोई भी प्रशासनिक निर्णय नहीं ले सकती।

राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान जारी, बिहार पर टिकी सबकी नजर

#rajyasabhaelection2026votingresult 

तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान है। जिनमें बिहार की पांच, ओडिशा की चार और हरियाणा की दो सीटें शामिल हैं। इस चुनाव में देश की राजनीति के हालात पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि राज्यसभा में बहुमत के समीकरण सीधे केंद्र की नीतियों और विधायी शक्ति पर असर डालते हैं। इस बार कुल 37 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन इनमें से 26 सीटों पर उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण पहले ही स्पष्ट हो चुके हैं।

इस बार बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के चुनाव में दिलचस्प मुकाबला दिख रहा है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन इन सभी 5 सीटों पर जीत का दावा कर रहा है। एनडीए की ओर से प्रमुख उम्मीदवारों में जदयू प्रमुख नीतीश कुमार, बीजेपी नेता नितिन नवीन और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (जेडीयू) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार भी मैदान में हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए समर्थन जुटाने में जुटा है।

ओडिशा की चार सीटों पर मुकाबला

ओडिशा की चार सीटों पर भाजपा दो सीटें निर्विरोध जीत सकती है और बीजेडी एक सीट। ऐसे में मुकाबला चौथे सीट को लेकर तेज हो गया है। इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि ओडिशा विधानसभा में कुल 147 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, 15 जनवरी को अपने दो विधायकों के निलंबन के बाद बीजद के 48 सदस्य बचे हैं। कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं और एक सदस्य सीपीआई (एम) का है। चुनाव का समीकरण दिलचस्प हो गया है क्योंकि न तो सत्ताधारी भाजपा और न ही मुख्य विपक्षी बीजद के पास चौथी सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक संख्या है। ऐसे में क्रॉस-वोटिंग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।

हरियाणा में मुकाबला दिलचस्प

हरियाणा में दो राज्यसभा सीटों के लिए मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां भाजपा के संजय भाटिया, कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध और भाजपा समर्थित निर्दलीय सतीश नांदल चुनाव मैदान में हैं। राज्यसभा पहुंचने के लिए हर उम्मीदवार को 31 वोटों की जरूरत है।

लोकसभा स्पीकर के बाद अब सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी, एकजुट हुआ विपक्ष

#chiefelectioncommissionergyaneshkumaroppositionnoconfidencemotion

लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद विपक्षी दल देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकजुट होते दिख रहे हैं। संभावना है कि तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट विपक्ष गुरुवार को सीईसी के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देगा। मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर भी कर दिया है। उनकी तैयारी संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की है।

हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने वाले नोटिस को गुरुवार यानी आज संसद से दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर जरूरी हस्ताक्षर की प्रक्रिया बुधवार को पूरी कर ली गई। बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे। नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं।

सीईसी के खिलाफ टीएमसी को मिला कांग्रेस-सपा का साथ

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस मुहिम पर बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के चैंबर में हुई बैठक में सहमति बनी। बैठक में राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तृणमूल के प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद नोटिस देने के लिए जरूरी सांसदों के हस्ताक्षर कराए गए। इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं।

क्या है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया?

कानून के मुताबिक, सीईसी को हटाने के लिए वही प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता। न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, जज को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे। जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है। समिति में मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के जज, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं। नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।

नेपाल में 5 मार्च को चुनाव, भारत के लिए क्यों है अहम?

#nepalelectionsonmarch5whynewgovtmatterstoindia

भारत से सटे देश नेपाल में 5 मार्च को राष्ट्रीय चुनाव होने जा रहा है। यह चुनाव युवाओं के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के छह महीने बाद हो रहा है, जिन्होंने मार्क्सवादी नेता केपी शर्मा ओली के प्रशासन को गिरा दिया था। इस प्रदर्शन के दौरान दर्जनों लोग मारे गए थे और सैकड़ों घायल हुए थे क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमला किया था और पुलिस ने गोलीबारी की थी।

तय होगी भारत-नेपाल संबंध की दिशा

इस बार के चुनाव में मुख्य मुकाबला केपी शर्मा ओली और काठमांडू के पूर्व मेयर और राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी के युवा चेहरे बालेंद्र शाह के बीच है। पड़ोसी देश होने के नाते इस चुनाव के परिणाम का सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। काठमांडू की सत्ता में कौन बैठेगा, यह तय करेगा कि आने वाले समय में भारत-नेपाल संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

लिखित इतिहास से भी पुराना भारत-नेपाल संबंध

भारत के लिए नेपाल केवल एक पड़ोसी नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच 'रोटी-बेटी' का पुराना नाता है। दोनों देशों के बीच का संबंध लिखित इतिहास से भी पुराना बताया जाता है, जिसकी छवि आज भी खुली सीमाओं में नजर आती है। इसलिए नेपाल से जुड़ा हर अहम विषय भारत को बहुत ही गहराई से प्रभावित करता है।

1,850 किमी लंबी खुली सीमा की चिंता

भारत और नेपाल के बीच 1,850 किलोमीटर से अधिक लंबी खुली सीमा है। नेपाल में राजनीतिक स्थिरता भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। अगर नेपाल में एक मजबूत और भारत-समर्थक सरकार बनती है, तो सीमा पार से होने वाली तस्करी, जाली नोटों के कारोबार और घुसपैठ जैसी समस्याओं पर लगाम लगाना आसान हो जाता है।

भारत के लिए स्थिर नेपाल जरूरी

भारत की अपने संबंधों के भविष्य के लिहाज से नेपाल के चुनाव पर नजर लगी हुई है। भारत को एक शांतिपूर्ण पड़ोस की आवश्यकता है। अशांति से ग्रस्त पड़ोस भारत की ऊर्जा को सोख लेगा। इसलिए पड़ोस भारत के अपने विकास, क्षेत्रीय और वैश्विक भूमिका, और राजनीतिक और भू-रणनीतिक भूमिका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नेपाल में बढ़ी चीन की दखल

वहीं, पिछले कुछ वर्षों में नेपाल की राजनीति में चीन की दखलंदाजी तेजी से बढ़ी है। बीजिंग लगातार बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए काठमांडू को लुभाने की कोशिश कर रहा है। नेपाल के चुनावों में अक्सर वामपंथी गठबंधन (जिनका झुकाव कभी-कभी चीन की तरफ होता है) और लोकतांत्रिक ताकतों (जो भारत के करीब माने जाते हैं) के बीच कड़ी टक्कर होती है। नई दिल्ली की नजर इस बात पर है कि चुनाव जीतकर आने वाली नई सरकार का कूटनीतिक झुकाव किस तरफ होगा।

चीन की दखल भारत के लिए चिंता का विषय

बता दें कि नेपाल की खुली सीमा तीन दिशाओं में भारत के पाँच अलग-अलग राज्यों से जुड़ी है। उत्तर में तिब्बत के पठार से सीमा जुड़ने के कारण नेपाल की रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति और यहाँ बढ़ते दिख रहे चीनी प्रभाव को लेकर पश्चिमी देश भी रुचि दिखाते रहे हैं। साल 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल की सरकार के दौरान नेपाल चीन की परियोजना बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव (बीआरआई) में शामिल हुआ था। बाद में 2024 के अंत में के पी शर्मा ओली के नेतृत्व में नेपाल ने बीआरआई कार्यान्वयन ढांचे पर हस्ताक्षर किए। चीन के सहयोग से नेपाल में रेलमार्ग निर्माण पर भारत को कोई आपत्ति नहीं होगी। लेकिन यदि नेपाल द्वारा दी गई कोई भी रियायत भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है, तो वहीं हमारी चिंता शुरू होगी।

राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव की घोषणा, जानें कब वोटिंग और रिजल्ट?

#rajyasabhaelectiondateannounced37seatsonmarch_16

राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी। राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं। मतदान 16 मार्च को होगा और उसी शाम मतगणना की जाएगी।

चुनाव 16 मार्च को

चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि 10 राज्यों में खाली हो रही 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे। 37 सीटों के लिए 26 फरवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। अप्रैल महीने की अलग-अलग तारीखों पर कई सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। 5 मार्च नामांकन भरने की आखिरी तारीख होगी। 9 मार्च तक कैंडिडेट अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। 16 मार्च को सुबह 9 से 4 के बीच वोटों की गिनती होगी और उसी दिन शाम 5 बजे से वोटों की गिनती शुरू होगी।

किन राज्यों की है ये सीटें?

बता दें कि 10 राज्यों से राज्यसभा की कुल 37 सीटें खाली हो रही है। जिसमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र की सात है। वहीं तमिलनाडु की 6, ओडिशा की 4, पश्चिम बंगाल की 5, असम की 3, बिहार की 5, छत्तीसगढ़ की 2, तेलंगाना की 2 और हिमाचल प्रदेश की एक सीट खाली हो रही है।

किस पार्टी के पास कितनी सीट?

छत्तीसगढ़ में जो सीट खाली हो रही है उसमें 1-1 बीजेपी और कांग्रेस के पास है। वहीं बिहार में 2 राजद, 1 जदयू और 1 राष्ट्रीय लोक मोर्चा के पास है। हरियाणा की दोनों सीटों बीजेपी के पास हैं। उधर, महाराष्ट्र में शिवसेना यूबीटी से 1, एनसीपी 1, कांग्रेस से 1, शरद गुट वाली एनसीपी से 1 और आरपीआई के पास 1 सीट है। इसके साथ ही हिमाचल में खाली हो रही सीट बीजेपी के पास है।

2020 में एनडीए का रहा दबदबा

2020 में जब इन सीटों पर चुनाव हुआ था तब बीजेपी और उसके सहयोगियों ने असम, बिहार, हरियाणा और हिमाचल जैसे राज्यों में अच्छी बढ़त हासिल की थी। महाराष्ट्र में सीटें अविभाजित शिवसेना, अविभाजित एनसीपी, बीजेपी और कांग्रेस के बीच बंटी थीं। तमिलनाडु में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अधिकतर सीटें जीतीं। वहीं बंगाल में टीएमसी का दबदबा बना रहा। इस बार समीकरण अलग हैं और कई सांसदों के भविष्य पर सवालिया निशान है। शरद पवार ने पहले संन्यास के संकेत दिए थे लेकिन अब माना जा रहा है कि वह दोबारा राज्यसभा का चुनाव लड़ेंगे। वहीं प्रियंका चतुर्वेदी को लेकर भी सवाल है। ओडिशा में बीजू जनता दल के कमजोर होने के बाद अलग समीकरण हैं।