राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता’ वाले बयान पर मचा बवाल, शहजाद पूनावाला बोले-बकलोली मचा रखी है

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राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति का एक श्लोक उद्धृत किया था। अब राहुल गांधी के बयान पर शहजाद पूनावाला ने बहुत ही जोरदार हमला बोला है।

'स्मैश द पैट्रियार्की' वाली राहुल गांधी की टिप्पणी पर निशाना साधते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी को आईना दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा है, 'राहुल घैंडी बकलोली बंद कीजिए। पहले अपने परिवार और पार्टी में पितृसत्ता को तोड़ें!'

इटली पीएम मेलोनी को लेकर भी उठाया सवाल

शहजाद पूनावाला वीडियो में बोलते दिखते हैं कि राहुल गांधी ये जो बकलोली तुमने लगा रखी है,स्मैश द पैट्रियार्की आदि,ये तब ठीक लगती जब तुम और संदीप दीक्षित स्टेज पर खड़े होकर एक विदेशी महिला प्रधानमंत्री मेलोनी के बारे में सेक्सिस्ट, पेट्रियार्कल और मिस्थोजेनिस्टिक कमेंट नहीं करते।

राहुल को घर में पैट्रियार्की खत्म करने की सलाह

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपने घर में तो पैट्रियार्की खत्म कर नहीं पा रहे हैं और दूसरों को ज्ञान देने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, बेटे को आगे बढ़ाने के चक्कर में बेटी को तो आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रियंका को नेतृत्व में आगे लेकर आइए।

कांग्रेस के अंदर कास्टिंग काउच का आरोप

पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी के अंदर कास्टिंग काउच को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। पूनावाला ने कहा, 'शारदा राठौर से लेकर सिमोन रोजवेल जॉन से लेकर बाकी जो महिलाएं कास्टिंग काउच का शिकार बनी हैं, यौन उत्पीड़न का शिकार बनी हैं, उनसे जाकर पूछिए।'

हलाला और यूसीसी पर का भी जिक्र

शहजाद पूनावाला नयहीं नहीं रूके। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू रीति रिवाज और मनुस्मृति को महिला विरोधी बताते हैं और गाली देते हैं, लेकिन अपने बगल में हिजाब डाली खड़ी मुस्लिम महिला पर राहुल गांधी की जुबान नहीं खुली।

पुणे के कार्यक्रम में राहुल ने दिया था बयान

बता दें कि पुणे में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश में पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि पिता, पति और बेटे के अलावा महिलाओं की अपनी अलग पहचान है। इसी बयान का जवाब देते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला।

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले बवाल, ABVP-NSUI के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प

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लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आज 22 अगस्त को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से एक दिन पहले पुणे में हंगामा हो गया। शुक्रवार को पुणे के सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों के बीच झड़प हो गई। घटना के बाद परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

दोनों गुटों ने लगाए एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ। इसके बाद दोनों गुट आमने-सामने आ गए और स्थिति बिगड़ गई। घटना में एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। एबीवीपी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे की छात्राओं पर शनिवार को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव बना रहे थे। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के समर्थन में बोलने वाली दो छात्राओं को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल के अंदर रोक लिया और उन्हें धमकी दी।

विरोध में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार मौके पर पहुंचे। विजय वडेट्टीवार ने घटना के बाद हॉस्टल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि एबीवीपी कार्यकर्ता दोनों छात्राओं को धमका रहे थे। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विजय वडेट्टीवार, सतेज पाटील और विश्वजीत कदम धरने पर बैठ गए।

पुलिस कर रही मामले की जांच

घटना के बाद परिसर में तनाव का माहौल बन गया। विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि और झड़प किस कारण से शुरू हुई, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुणे के डीसीपी हसन गौहर ने कहा, "हमें दो गुटों के बीच झड़प की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर हमने कुछ लोगों को नारे लगाते और सड़क जाम करने की कोशिश करते हुए पाया; उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी, पैलेट गन फायरिंग मामले में FIR दर्ज करने की मांग*

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब थाने तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पीड़ित छात्र साहिल और उसके परिवार के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। राहुल गांधी की मांग है कि छात्र को लगी चोटों की जांच हो और इस मामले में FIR दर्ज की जाए।

पैलेट गन पीड़ित साहिल लोचब का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है। राहुल और साहिल पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन बाद में FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में DCP ऑफिस गए। इस दौरान, राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी।

पैलेट गन फायरिंग में घायल युवक के साथ धरने पर बैठे

कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए युवक के साथ राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हें चार्ज संभाले अभी दो दिन ही हुए हैं। मुलाकात के बाद राहुल गांधी बाहर आए और यहां पहुंचने के बाद अचानक बाहर ही बैठ गए।

राहुल पहले भी उठे चुके हैं ये मामला

राहुल गांधी के साथ मौजूद साहिल वही छात्र है, जिसे लेकर कांग्रेस नेता पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। राहुल गांधी ने उस दौरान छात्र के शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए दावा किया था कि ये पैलेट गन के छर्रों से लगी चोटें हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और साहिल की आंख की रोशनी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। अब राहुल गांधी चाहते हैं कि पुलिस मेडिकल जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर यह साफ करे कि छात्र को चोट किस चीज से लगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए गठित की हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी (एचपीईसी) का गठन किया है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं किया। इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडे, लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच होगी। यह देखा जाएगा कि इनका इस्तेमाल पर्याप्त चेतावनी दिए बिना या जरूरत से अधिक तो नहीं किया गया।

क्या है पैलेट गन विवाद?

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे। रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया और कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं।

जाति जनगणना में OBC का कॉलम नहीं होने पर भड़के राहुल गांधी, पूछा-Gen-Z की राह पर OBC निकल पड़े तो?

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जनगणना 2027 को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने एक गहरी साजिश के तहत जाति जनगणना से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी को जान-बूझकर हटा दिया है। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं रखे जाने को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। जेन जी आंदोलन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तरह ओबीसी समाज उठ गया तो?

ओबीसी कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार पहले जाति जनगणना नहीं कराना चाहती थी और जब हम उसकी मांग कर रहे थे, मांग करने वाले लोगों को पीएम मोदी ने अर्बन नक्सल बताया था। बाद में ओबीसी की संख्या और प्रेशर में सरकार मानी तो सही, लेकिन जाति जनगणना को वो सही तरीके से नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे एससी (SC) और एसटी (ST) का कॉलम रखा है, वैसे ओबीसी (OBC) का नहीं रखा है।

ओबीसी कॉलम को लेकर आंदोलन की चेतावनी

राहुल ने ओबीसी विभाग के नेताओं को निर्देश दिए कि अपने इलाकों में लोगों को जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं होने को लेकर जागरूक करें। राहुल बोले कुछ दिनों पहले छात्रों के आंदोलन में लोग सड़कों पर आए और सरकार को झुकना पड़ा। ओबीसी समाज की आबादी पचास फीसदी से ज्यादा है। अगर वो सड़क पर आ गए तो मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा। 

पहली बार जाति जनगणना

पिछले साल मोदी सरकार ने आजाद भारत में पहली बार जाति जनगणना करवाने का फैसला किया था। जनगणना के पहले चरण में मकानों की गिनती का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के लिए चालीस सवालों की सूची पी पिछले हफ्ते जारी की गई थी। इस सूची में एससी, एसटी की तरह ओबीसी के लिए अलग से कोई श्रेणी नहीं है बल्कि जाति बताने का विकल्प दिया गया है। देश के पहाड़ी राज्यों में जनगणना का दूसरा चरण एक सितंबर से शुरू होगा। महीने भर चलने वाली यह प्रक्रिया देश के बाकी हिस्सों में एक फरवरी से शुरू होगी।

हम इस ‘वसूली तंत्र’ को जड़ से बदलकर रहेंगे…झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर बोले राहुल गांधी

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झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कर दी है। बीती रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसका ऐलान किया है। इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर खुशी जताई है।

छात्र सवाल उठाएं तो जवाब मिलना चाहिए-राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम बरता और अपनी बात रखी। यही सही तरीका है, जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए।

वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, वो इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे, ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक मिले। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ये सिस्टम बदलेगा। अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।

देवेंद्र महतो ने खत्म की 16 दिन से चल रही भूख हड़ताल

झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। महतो ने कहा, "आज झारखंड के लिए एक बड़ी जीत का दिन है। हालांकि मैं अपना विरोध प्रदर्शन अभी रोक रहा हूं, लेकिन अन्य सुधारों के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।"

रांची में जारी छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, बोले- खुद जाकर मिलिए

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलनरत छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की अपील की है।

प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने की सलाह

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण है और मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे पत्र में कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संविधान में दिया गया शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र के मुख्य स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस ने अपना पूरा समर्थन दिया है।

राहुल गांधी की सीएम हेमंत सोरेन से खास अपील

राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं; मेरी सलाह है कि आप प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनने और समस्या के समाधान के लिए कृपया उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की मुलाकात से छात्रों को भरोसा मिलेगा। उनकी बाकी मांगों का हल निकालने में भी मदद मिलेगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा उसका भविष्य हैं। ऐसे समय में उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

लाल किले पर ध्वजारोहण से इस बार भी शामिल नहीं हुए राहुल गांधी, पूरा विपक्ष रहा नदारद

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देशभर में आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। देशभर में आज के दिन तिरंगा फहराया गया। स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। लाल किले के समारोह में सरकार और विपक्ष दोनों ही नेता पहुंचते हैं। हालांकि, इस समारोह में लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी नहीं पहुंचे।

लगातार दूसरे साल समारोह में नहीं पहुंचे राहुल गांधी

इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिसा नहीं लिया। कई अन्य विपक्षी नेता भी नदारद रहे।

साल 2024 के इस मामले पर नाराजगी?

रक्षा मंत्रालय द्वारा औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद दोनों नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। अब तक कांग्रेस की तरफ से दोनों नेताओं के लाल किले पर अनुपस्थित होने के पीछे की वजह नहीं बताई गई है। हालांकि, संभावना यह जताई जा रही है कि साल 2024 में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर दोनों नेताओं में अभी तक नाराजगी है।

सिटिंग अरेंजमेंट पर हुआ था विवाद

बता दें कि साल 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी को विपक्ष के नेता होने के बावजूद कथित तौर पर पांचवीं कतार (सिटिंग अरेंजमेंट) में सीट दी गई थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखते हैं। विपक्ष ने कांग्रेस सांसद को ये सीट दिया जाना, देश की जनता का अपमान बताया था। जिसे लेकर कांग्रेस ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। इसी विवाद को इस साल भी कार्यक्रम में न पहुंचने की वजह माना जा रहा है।

सरकार और विपक्ष के बीच खराब होते रिश्ते

इस बार का मानसून सत्र 13 अगस्त गुरुवार को खत्म हुआ। संसद के मैनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच रिश्ते ने और खराब होने का संकेत दिया। सत्र के दौरान बारह बिल पास किए गए, लेकिन उनमें से सिर्फ एक, पेपर लीक रोकने वाले कानून पर ही विस्तार से चर्चा हुई। सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद, स्पीकर ओम बिरला द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बहिष्कार किया।

पीएम मोदी के खिलाफ राहुल के बयान पर भड़की भाजपा, निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर शेयर कर पूछा सवाल

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बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। साथ ही उन पर ‘अभद्र और अशोभनीय’ भाषा का इस्तेमाल करने व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया।

पीएम मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर राहुल का बयान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में विदेशी नेताओं को गले लगाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उन्होंने दावा किया कि यह नीति सिर्फ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है। इसी दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मेलोनी का जिक्र किया तो राहुल गांधी हंस पड़े। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस को 'जोकरों का झुंड' भी कहा, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।

बांसुरी स्वराज ने बताया-एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, उससे वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे।'

इंदिरा गांधी के क्यूबा यात्रा की तस्वीर पर उठाया सवाल

वहीं, बीजेपी के झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?

राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत दी। जोशी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राहुल गांधी, आप कब बड़े होंगे। भारत को चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत होती है न कि नौसिखिया ड्रामेबाजी की। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को 'जोकर और मसखरे' कहना साबित करता है कि आप अपनी समझ से बाहर की बातें कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, डेटा जुटाने के तरीके का किया विरोध, दिए ये सुझाव

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कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जाति जनगणना की मौजूदा प्रक्रिया पर गंभीर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इसे बनाने से पहले राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से सलाह ली जानी चाहिए।

मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट में कहा, “ओपन-एंडेड सवालों के जरिए जातियों की सही गिनती संभव नहीं है। खड़गे और राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाई रूपों से जानी जाती है। एक ही जाति अलग-अलग नामों और उपजातियों में दर्ज हुई तो आंकड़े बिखरेंगे और सबसे बड़ा नुकसान ओबीसी, अति पिछड़े और वंचित समुदायों को होगा। हमारी मांग स्पष्ट है कि मौजूदा प्रश्नावली रद्द हो, जातियों की प्रमाणित सूची के आधार पर नई प्रश्नावली बने और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से व्यापक परामर्श किया जाए।”

पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव

खड़गे और राहुल गांधी ने जातियों की पहचान के लिए पहले से तैयार और प्रमाणित सूची इस्तेमाल करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में इसी तरह की सूची का इस्तेमाल किया जाता है। सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की मौजूदा सरकारी सूचियों तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण की सूची के आधार पर ऐसी सूची तैयार की जा सकती है।

बिहार-तेलंगाना जैसी प्रक्रिया अपनाने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री को दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई सूचियों की प्रतियां भी भेजी हैं। दोनों नेताओं ने स्पष्ट कहा कि मौजूदा तरीके से हो रही जाति जनगणना उन्हें स्वीकार नहीं है और सरकार को नई प्रक्रिया तैयार करनी चाहिए।

राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता’ वाले बयान पर मचा बवाल, शहजाद पूनावाला बोले-बकलोली मचा रखी है

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राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति का एक श्लोक उद्धृत किया था। अब राहुल गांधी के बयान पर शहजाद पूनावाला ने बहुत ही जोरदार हमला बोला है।

'स्मैश द पैट्रियार्की' वाली राहुल गांधी की टिप्पणी पर निशाना साधते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस नेता और उनकी पार्टी को आईना दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा है, 'राहुल घैंडी बकलोली बंद कीजिए। पहले अपने परिवार और पार्टी में पितृसत्ता को तोड़ें!'

इटली पीएम मेलोनी को लेकर भी उठाया सवाल

शहजाद पूनावाला वीडियो में बोलते दिखते हैं कि राहुल गांधी ये जो बकलोली तुमने लगा रखी है,स्मैश द पैट्रियार्की आदि,ये तब ठीक लगती जब तुम और संदीप दीक्षित स्टेज पर खड़े होकर एक विदेशी महिला प्रधानमंत्री मेलोनी के बारे में सेक्सिस्ट, पेट्रियार्कल और मिस्थोजेनिस्टिक कमेंट नहीं करते।

राहुल को घर में पैट्रियार्की खत्म करने की सलाह

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपने घर में तो पैट्रियार्की खत्म कर नहीं पा रहे हैं और दूसरों को ज्ञान देने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा, बेटे को आगे बढ़ाने के चक्कर में बेटी को तो आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रियंका को नेतृत्व में आगे लेकर आइए।

कांग्रेस के अंदर कास्टिंग काउच का आरोप

पूनावाला ने कांग्रेस पार्टी के अंदर कास्टिंग काउच को लेकर बहुत ही गंभीर आरोप लगाए हैं। पूनावाला ने कहा, 'शारदा राठौर से लेकर सिमोन रोजवेल जॉन से लेकर बाकी जो महिलाएं कास्टिंग काउच का शिकार बनी हैं, यौन उत्पीड़न का शिकार बनी हैं, उनसे जाकर पूछिए।'

हलाला और यूसीसी पर का भी जिक्र

शहजाद पूनावाला नयहीं नहीं रूके। उन्होंने कांग्रेस पर दोहरी मानसिकता का आरोप लगाते हुए कहा कि हिंदू रीति रिवाज और मनुस्मृति को महिला विरोधी बताते हैं और गाली देते हैं, लेकिन अपने बगल में हिजाब डाली खड़ी मुस्लिम महिला पर राहुल गांधी की जुबान नहीं खुली।

पुणे के कार्यक्रम में राहुल ने दिया था बयान

बता दें कि पुणे में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने देश में पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का आह्वान किया था। राहुल गांधी ने कहा था कि इसमें महिला को बचपन में पिता, युवावस्था में पति और पति की मृत्यु के बाद पुत्रों के अधीन बताया गया है। उन्होंने इस व्यवस्था को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि पिता, पति और बेटे के अलावा महिलाओं की अपनी अलग पहचान है। इसी बयान का जवाब देते हुए शहजाद पूनावाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखा हमला बोला।

पुणे में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले बवाल, ABVP-NSUI के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प

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लोकसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आज 22 अगस्त को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम से एक दिन पहले पुणे में हंगामा हो गया। शुक्रवार को पुणे के सीओईपी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के हॉस्टल परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के सदस्यों के बीच झड़प हो गई। घटना के बाद परिसर में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

दोनों गुटों ने लगाए एक-दूसरे पर मारपीट के आरोप

‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की पृष्ठभूमि में छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद शुरू हुआ। इसके बाद दोनों गुट आमने-सामने आ गए और स्थिति बिगड़ गई। घटना में एबीवीपी और एनएसयूआई दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। एबीवीपी के सदस्यों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, पुणे की छात्राओं पर शनिवार को होने वाले 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का दबाव बना रहे थे। वहीं, कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के समर्थन में बोलने वाली दो छात्राओं को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हॉस्टल के अंदर रोक लिया और उन्हें धमकी दी।

विरोध में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

घटना की जानकारी मिलते ही कांग्रेस नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वडेट्टीवार मौके पर पहुंचे। विजय वडेट्टीवार ने घटना के बाद हॉस्टल का दौरा किया। उन्होंने दावा किया कि एबीवीपी कार्यकर्ता दोनों छात्राओं को धमका रहे थे। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विजय वडेट्टीवार, सतेज पाटील और विश्वजीत कदम धरने पर बैठ गए।

पुलिस कर रही मामले की जांच

घटना के बाद परिसर में तनाव का माहौल बन गया। विवाद की वास्तविक पृष्ठभूमि और झड़प किस कारण से शुरू हुई, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। पुणे के डीसीपी हसन गौहर ने कहा, "हमें दो गुटों के बीच झड़प की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर हमने कुछ लोगों को नारे लगाते और सड़क जाम करने की कोशिश करते हुए पाया; उन्हें हिरासत में ले लिया गया है।

संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी, पैलेट गन फायरिंग मामले में FIR दर्ज करने की मांग*

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जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा अब थाने तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को पीड़ित छात्र साहिल और उसके परिवार के साथ संसद मार्ग थाने पहुंचे। राहुल गांधी की मांग है कि छात्र को लगी चोटों की जांच हो और इस मामले में FIR दर्ज की जाए।

पैलेट गन पीड़ित साहिल लोचब का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया है। राहुल और साहिल पहले कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशन गए थे, लेकिन बाद में FIR दर्ज कराने के लिए पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में DCP ऑफिस गए। इस दौरान, राहुल गांधी ने पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी।

पैलेट गन फायरिंग में घायल युवक के साथ धरने पर बैठे

कथित पैलेट गन फायरिंग में घायल हुए युवक के साथ राहुल गांधी पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर उन्होंने अधिकारियों से फायरिंग करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हें चार्ज संभाले अभी दो दिन ही हुए हैं। मुलाकात के बाद राहुल गांधी बाहर आए और यहां पहुंचने के बाद अचानक बाहर ही बैठ गए।

राहुल पहले भी उठे चुके हैं ये मामला

राहुल गांधी के साथ मौजूद साहिल वही छात्र है, जिसे लेकर कांग्रेस नेता पहले भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं। राहुल गांधी ने उस दौरान छात्र के शरीर पर चोटों के निशान दिखाते हुए दावा किया था कि ये पैलेट गन के छर्रों से लगी चोटें हैं। उनका आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ और साहिल की आंख की रोशनी भी बुरी तरह प्रभावित हुई। अब राहुल गांधी चाहते हैं कि पुलिस मेडिकल जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर यह साफ करे कि छात्र को चोट किस चीज से लगी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए गठित की हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय हाई पावर एक्सपर्ट कमेटी (एचपीईसी) का गठन किया है। कमेटी यह जांच करेगी कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने जरूरत से ज्यादा या अनुचित बल का इस्तेमाल तो नहीं किया। इसमें पैलेट गन, बिजली के डंडे, लाठी और आंसू गैस के इस्तेमाल की परिस्थितियों की भी जांच होगी। यह देखा जाएगा कि इनका इस्तेमाल पर्याप्त चेतावनी दिए बिना या जरूरत से अधिक तो नहीं किया गया।

क्या है पैलेट गन विवाद?

बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा NEET पेपर लीक को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट में घायलों के बयानों और मेडिकल रिकॉर्ड का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 20 जुलाई के मार्च के दौरान कई प्रदर्शनकारी पैलेट गन से घायल हुए थे। रिपोर्ट्स में दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल की बात कही जा रही है, जबकि दिल्ली पुलिस ने इस तरह के हथियार के इस्तेमाल से इनकार किया और कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए उनके पास न तो पैलेट गन हैं और न ही वे इनका इस्तेमाल करते हैं।

जाति जनगणना में OBC का कॉलम नहीं होने पर भड़के राहुल गांधी, पूछा-Gen-Z की राह पर OBC निकल पड़े तो?

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जनगणना 2027 को लेकर केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर आ गई है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा ने एक गहरी साजिश के तहत जाति जनगणना से अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) कैटेगरी को जान-बूझकर हटा दिया है। कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं रखे जाने को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। जेन जी आंदोलन का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की तरह ओबीसी समाज उठ गया तो?

ओबीसी कांग्रेस के एक कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार पहले जाति जनगणना नहीं कराना चाहती थी और जब हम उसकी मांग कर रहे थे, मांग करने वाले लोगों को पीएम मोदी ने अर्बन नक्सल बताया था। बाद में ओबीसी की संख्या और प्रेशर में सरकार मानी तो सही, लेकिन जाति जनगणना को वो सही तरीके से नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे एससी (SC) और एसटी (ST) का कॉलम रखा है, वैसे ओबीसी (OBC) का नहीं रखा है।

ओबीसी कॉलम को लेकर आंदोलन की चेतावनी

राहुल ने ओबीसी विभाग के नेताओं को निर्देश दिए कि अपने इलाकों में लोगों को जाति जनगणना में ओबीसी कॉलम नहीं होने को लेकर जागरूक करें। राहुल बोले कुछ दिनों पहले छात्रों के आंदोलन में लोग सड़कों पर आए और सरकार को झुकना पड़ा। ओबीसी समाज की आबादी पचास फीसदी से ज्यादा है। अगर वो सड़क पर आ गए तो मोदी सरकार को झुकना ही पड़ेगा। 

पहली बार जाति जनगणना

पिछले साल मोदी सरकार ने आजाद भारत में पहली बार जाति जनगणना करवाने का फैसला किया था। जनगणना के पहले चरण में मकानों की गिनती का काम पूरा हो चुका है। दूसरे चरण के लिए चालीस सवालों की सूची पी पिछले हफ्ते जारी की गई थी। इस सूची में एससी, एसटी की तरह ओबीसी के लिए अलग से कोई श्रेणी नहीं है बल्कि जाति बताने का विकल्प दिया गया है। देश के पहाड़ी राज्यों में जनगणना का दूसरा चरण एक सितंबर से शुरू होगा। महीने भर चलने वाली यह प्रक्रिया देश के बाकी हिस्सों में एक फरवरी से शुरू होगी।

हम इस ‘वसूली तंत्र’ को जड़ से बदलकर रहेंगे…झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर बोले राहुल गांधी

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झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द कर दी है। बीती रात मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसका ऐलान किया है। इसके बाद भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने झारखंड में छात्र आंदोलन खत्म होने पर खुशी जताई है।

छात्र सवाल उठाएं तो जवाब मिलना चाहिए-राहुल गांधी

लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी और झारखंड सरकार ने बातचीत का रास्ता चुना और समाधान निकाला। छात्रों ने संयम बरता और अपनी बात रखी। यही सही तरीका है, जब छात्र सवाल उठाएं, तो उन्हें जवाब मिलना चाहिए।

वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे-राहुल गांधी

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा, वो इस वसूली तंत्र को जड़ से बदलकर रहेंगे, ताकि हर छात्र को उसकी मेहनत का पूरा फल और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का हक मिले। उन्होंने कहा कि पूरे देश में ये सिस्टम बदलेगा। अब ऐसी व्यवस्था बनेगी जो छात्रों को आगे बढ़ाए, उन्हें पीछे न खींचे।

देवेंद्र महतो ने खत्म की 16 दिन से चल रही भूख हड़ताल

झारखंड सरकार द्वारा जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा और TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी है। महतो ने कहा, "आज झारखंड के लिए एक बड़ी जीत का दिन है। हालांकि मैं अपना विरोध प्रदर्शन अभी रोक रहा हूं, लेकिन अन्य सुधारों के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा।"

रांची में जारी छात्र आंदोलन को लेकर राहुल गांधी ने सीएम हेमंत सोरेन को लिखी चिट्ठी, बोले- खुद जाकर मिलिए

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झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आंदोलनरत छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की अपील की है।

प्रदर्शनकारी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से मिलने की सलाह

राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री सोरेन को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में छात्र राज्य भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं का विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध शांतिपूर्ण है और मांगें जायज हैं। राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेजे पत्र में कहा कि कांग्रेस पार्टी का मानना है कि संविधान में दिया गया शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार लोकतंत्र के मुख्य स्तंभों में से एक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस ने अपना पूरा समर्थन दिया है।

राहुल गांधी की सीएम हेमंत सोरेन से खास अपील

राहुल गांधी ने आगे कहा कि कुछ छात्र भूख हड़ताल पर हैं; मेरी सलाह है कि आप प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। विरोध कर रहे छात्रों की बात सुनने और समस्या के समाधान के लिए कृपया उचित कदम उठाने की पूरी कोशिश करें। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री की मुलाकात से छात्रों को भरोसा मिलेगा। उनकी बाकी मांगों का हल निकालने में भी मदद मिलेगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा उसका भविष्य हैं। ऐसे समय में उनके साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और उनकी समस्याओं का समाधान करने की अपील की।

लाल किले पर ध्वजारोहण से इस बार भी शामिल नहीं हुए राहुल गांधी, पूरा विपक्ष रहा नदारद

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देशभर में आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है। देशभर में आज के दिन तिरंगा फहराया गया। स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री लाल किले पर झंडा फहराते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं। लाल किले के समारोह में सरकार और विपक्ष दोनों ही नेता पहुंचते हैं। हालांकि, इस समारोह में लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी नहीं पहुंचे।

लगातार दूसरे साल समारोह में नहीं पहुंचे राहुल गांधी

इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुए 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह कार्यक्रम आयोजित किया गया। विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दूसरे साल लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में हिसा नहीं लिया। कई अन्य विपक्षी नेता भी नदारद रहे।

साल 2024 के इस मामले पर नाराजगी?

रक्षा मंत्रालय द्वारा औपचारिक निमंत्रण भेजे जाने के बावजूद दोनों नेताओं ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। अब तक कांग्रेस की तरफ से दोनों नेताओं के लाल किले पर अनुपस्थित होने के पीछे की वजह नहीं बताई गई है। हालांकि, संभावना यह जताई जा रही है कि साल 2024 में सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर दोनों नेताओं में अभी तक नाराजगी है।

सिटिंग अरेंजमेंट पर हुआ था विवाद

बता दें कि साल 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह में राहुल गांधी को विपक्ष के नेता होने के बावजूद कथित तौर पर पांचवीं कतार (सिटिंग अरेंजमेंट) में सीट दी गई थी। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कैबिनेट मंत्री का दर्जा रखते हैं। विपक्ष ने कांग्रेस सांसद को ये सीट दिया जाना, देश की जनता का अपमान बताया था। जिसे लेकर कांग्रेस ने तीखा विरोध दर्ज कराया था। इसी विवाद को इस साल भी कार्यक्रम में न पहुंचने की वजह माना जा रहा है।

सरकार और विपक्ष के बीच खराब होते रिश्ते

इस बार का मानसून सत्र 13 अगस्त गुरुवार को खत्म हुआ। संसद के मैनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच रिश्ते ने और खराब होने का संकेत दिया। सत्र के दौरान बारह बिल पास किए गए, लेकिन उनमें से सिर्फ एक, पेपर लीक रोकने वाले कानून पर ही विस्तार से चर्चा हुई। सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित होने के बाद, स्पीकर ओम बिरला द्वारा आयोजित पारंपरिक चाय पार्टी का कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बहिष्कार किया।

पीएम मोदी के खिलाफ राहुल के बयान पर भड़की भाजपा, निशिकांत दुबे ने इंदिरा गांधी की तस्वीर शेयर कर पूछा सवाल

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बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। साथ ही उन पर ‘अभद्र और अशोभनीय’ भाषा का इस्तेमाल करने व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को कम करने का आरोप लगाया।

पीएम मोदी के विदेशी नेताओं को गले लगाने पर राहुल का बयान

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने गुरुवार को विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने रचनात्मक कांग्रेस सम्मेलन में विदेशी नेताओं को गले लगाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। उन्होंने दावा किया कि यह नीति सिर्फ नेताओं को गले लगाने तक ही सीमित है। इसी दौरान कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मेलोनी का जिक्र किया तो राहुल गांधी हंस पड़े। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीजेपी-आरएसएस को 'जोकरों का झुंड' भी कहा, जिन्हें भारत की कोई समझ नहीं है।

बांसुरी स्वराज ने बताया-एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन

बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'राहुल गांधी ने जिस तरह की असभ्य, भद्दी और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं, उससे वे विपक्ष के नेता कम और एक फेल स्टैंड-अप कॉमेडियन ज्यादा लग रहे थे। वे हल्की और छिछोरी बातें कर रहे थे।'

इंदिरा गांधी के क्यूबा यात्रा की तस्वीर पर उठाया सवाल

वहीं, बीजेपी के झारखंड के गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर क्यूबा यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी का एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में इंदिरा गांधी से क्यूबा के राष्ट्रपति फिडेल कास्त्रो गले मिल रहे हैं। निशिकांत दुबे ने इस वीडियो-फोटो को शेयर करते हुए पूछा कि राहुल गांधी आप बताएं इसे गले पड़ने को जठराग्नि कहते हैं कि कामाग्नि?

राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत

वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी को बड़े होने की नसीहत दी। जोशी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "राहुल गांधी, आप कब बड़े होंगे। भारत को चलाने के लिए परिपक्व नेतृत्व की जरूरत होती है न कि नौसिखिया ड्रामेबाजी की। लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को 'जोकर और मसखरे' कहना साबित करता है कि आप अपनी समझ से बाहर की बातें कर रहे हैं।