29 जुलाई 2026 को दिखेगा वर्ष का आकर्षक 'बक मून',/ फुल मून

 
गुरु पूर्णिमा पर बनेगा दुर्लभ
खगोलीय-सांस्कृतिक संयोग।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की शाम आकाश प्रेमियों और सामान्य जनमानस के लिए विशेष रहने वाली है क्योंकि इस दौरान भारतीय समयानुसार रात 8:06 बजे जुलाई की पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस दौरान चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में रहेगा तथा लगभग –12.7 मैग्नीट्यूड की चमक से दमकेगा एवं इसी पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से 'बक मून' (Buck Moon) कहा जाता है। इसका विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यही दिन आषाढ़ पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा का भी है। इस प्रकार एक ही दिन खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण संयोग देखने को मिलेगा।

*क्या होती है पूर्णिमा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा वह खगोलीय अवस्था है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं तथा पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। इस स्थिति में चंद्रमा का सूर्य से प्रकाशित पूरा निकटवर्ती भाग पृथ्वी की ओर दिखाई देता है, इसलिए वह पूर्ण गोलाकार एवं अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है। या कुछ यूं कहें कि पूर्णिमा वह समय होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशाओं में एक सीध में होते हैं, जिसे खगोलविज्ञान की भाषा में' सिज़ीगी' कहते हैं।उस समय, चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है जबकि दूसरा भाग अंधकार में होता है। अमावस्या के समय इसका ठीक विपरीत होता है।

*कब होगा बक मून का चरम समय।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही चंद्रमा, पूरब -दक्षिण पूर्वी आकाश में नज़र आने लगेगा लेकिन रात 8:06 बजे वह सटीक क्षण होगा जब पूर्णिमा अपनी चरम अवस्था में पहुँचेगी, लेकिन सामान्य दर्शकों को चंद्रमा एक दिन पहले एवं एक दिन बाद की रातों में भी लगभग पूर्ण जैसा ही दिखाई देगा, क्योंकि प्रकाशित भाग में परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है।

*कहाँ और किस दिशा में दिखाई देगा बक मून?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 29 जुलाई को सूर्यास्त के तुरंत बाद चंद्रमा पूर्व–दक्षिण-पूर्व (East-Southeast) दिशा में उदित होगा। रात बढ़ने के साथ वह आकाश में ऊँचा उठेगा, लगभग मध्यरात्रि में सर्वोच्च ऊँचाई पर पहुँचेगा और सूर्योदय के आसपास पश्चिम दिशा में अस्त होगा।

*किस तारामण्डल में दिखाई देगा बक मून।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा के चरम के समय चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में स्थित रहेगा, साथ ही पृथ्वी से उसकी औसत दूरी लगभग 3,99,600 किलोमीटर होगी तथा उसका प्रत्यक्ष कोणीय व्यास लगभग 0.5 डिग्री दिखाई देगा।

*चंद्रमा कितना चमकीला/ कितने मैग्नीट्यूड पर होगा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.7 रहेगा, जो इसे रात्रि आकाश की सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तुओं में शामिल करता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का अर्थ है कि वस्तु अत्यंत अधिक चमकीली है। पूर्णिमा के समय चंद्रमा का प्रकाश इतना प्रबल होता है कि अत्यंत हल्के बादलों के बीच भी दिखाई देता है।

' *बक मून' नाम कैसे पड़ा?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जुलाई की पूर्णिमा को बक मून (Buck Moon) नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी (Native American) जनजातियों द्वारा दिया गया था, क्योंकि वर्ष के इसी समय नर हिरण (Buck) के नए सींग तेज़ी से विकसित होते हैं और मखमली आवरण से ढके दिखाई देते हैं। इसी मौसमी परिवर्तन के आधार पर जुलाई की पूर्णिमा को "बक मून" कहा जाने लगा साथ ही इसके अन्य पारंपरिक नाम भी प्रचलित हैं, जिनमें थंडर मून , हे मून,शैलमन मून, रस्पवेरी मून, हॉफ वे समर मून तथा कुछ क्षेत्रों में मियड मून भी शामिल हैं। ये नाम विभिन्न संस्कृतियों की कृषि, मौसम और प्राकृतिक चक्रों से जुड़े हैं।

*बक मून/ पूर्णिमा का पृथ्वी पर क्या पर प्रभाव होगा।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा और अमावस्या के समय सूर्य एवं चंद्रमा का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण प्रभाव समुद्रों में स्प्रिंग टाइड (Spring Tide) अथवा उच्च ज्वार उत्पन्न करता है। इन दिनों उच्च और निम्न ज्वार के बीच का अंतर सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होता है। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पूर्णिमा का मानव व्यवहार या मानसिक स्वास्थ्य पर कोई निर्णायक प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। लेकिन फिर भी पुराने जमाने से ही कई देशों ख़ासकर प्राचीन यूरोप में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को लूना भी कहा जाता है एवं उसी के आधार पर बना था *ल्यूनेटिक* शब्द जिसका मतलब ही होता है कि *चांदमारा* या पागल होना। लेकिन आधुनिक खगोल वैज्ञानिक अनुसंधानों में चंद्रमा का आपने शरीर के ऊपर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता है। इसीलिए यहां घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है, इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि *पहले जानें उसके बाद ही मानें और सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान।*

*हर पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं होता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है। इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5.1° झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। चंद्र ग्रहण केवल तभी होता है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपने कक्षीय नोड के निकट हो और सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा लगभग एक सीध में हों।

*चंद्रमा हमेशा एक जैसा क्यों नहीं दिखता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 27.32 दिनों में करता है, जबकि एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक का औसत समय 29.53 दिन (सिनोडिक मास) होता है। यही कारण है कि चंद्रमा की कलाएँ लगातार बदलती रहती हैं। एक चंद्र चक्र में अमावस्या, बढ़ता अर्धचंद्र, प्रथम चतुर्थांश, बढ़ता गिबस मून, पूर्णिमा, घटता गिबस मून, तृतीय चतुर्थांश और घटता अर्धचंद्र जैसी आठ प्रमुख अवस्थाएँ आती हैं। इन्हीं समस्त चंद्रकलाओं के कारण चन्द्रमा, पृथ्वी से हमेशा एक ही आकर में नहीं दिखाई देता है और अपनी कलाएँ बदलता रहता है।

*क्या वास्तव में हम चंद्रमा का केवल आधा भाग ही देखते हैं?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यद्यपि किसी भी समय चंद्रमा का लगभग 50 प्रतिशत भाग ही पृथ्वी से दिखाई देता है, लेकिन चंद्र लिब्रेशन (Libration) नामक हल्के डगमगाने वाले प्रभाव के कारण समय के साथ हम उसकी सतह का लगभग 59 प्रतिशत भाग देख पाते हैं।

*गुरु पूर्णिमा का वैज्ञानिक एवं पौराणिक महत्व क्या होता है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की पूर्णिमा भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। पौराणिक रूप में यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती से जुड़ा माना जाता है और ज्ञान, शिक्षा तथा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का पर्व है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से यह केवल पूर्णिमा का एक विशेष क्षण होता है, साथ ही इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जबकि सांस्कृतिक रूप से यह भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति हमेशा अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसीलिए सभी को अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए क्योंकि बिन गुरु ज्ञान कहां।

*कैसे देखें बक मून और तस्वीर कैसे लें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बक मून/पूर्णिमा को देखने के लिए किसी दूरबीन / टेलीस्कोप या विनॉकुलर आदि की आवश्यकता नहीं होती है सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्वी क्षितिज का खुला स्थान चुनें। यदि आपके पास कोई टेलीस्कोप/दूरबीन या विनोकुलर एवं कैमरा आदि उपकरण मौजूद हैं और आप फोटोग्राफी करना चाहें तो ट्राइपॉड का उपयोग करें तथा कैमरे या मोबाइल में एक्सपोज़र कम रखें, जिससे चंद्रमा की सतह के गड्ढे और पर्वतीय संरचनाएँ स्पष्ट दिखाई दें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 का बक मून केवल एक सुंदर पूर्णिमा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, प्रकृति, संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम है। यह अवसर हमें चंद्रमा की वैज्ञानिक समझ के साथ-साथ प्रकृति के उन मौसमी संकेतों की भी याद दिलाता है जिनके आधार पर विभिन्न सभ्यताओं ने सदियों तक समय और ऋतुओं का निर्धारण किया था। इसीलिए मौसम साफ़ होने पर आप इस बक मून/ गुरु पूर्णिमा की चाँदनी रात्रि का लुत्फ़ जरुर उठाएं साथ ही बच्चों को इसके वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक कारणों से भी अवगत ज़रूर करवाएं,जिस से समाज में व्यापक रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पुष्ट होता रहे।
        
कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

#americadonaldtrumpassassinationplotisraelintelligence_warning

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

#middleeastamericairandeal14points_mou

आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

#middleeastiranamericapeacedealcomplete

फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

अमेरिका के आज्ञाकारी नौकर की तरह कर रहे हैं काम”, राहुल गांधी की पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी

#rahulgandhislammedpmmodisaidheactinglikeanobedientservantof_america

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोराद हमला बोला है। राहुल गांधी ने खाड़ी क्षेत्र में हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर पीएम मोदी की कूटनीति पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को अमेरिका का 'आज्ञाकारी नौकर' तक बता दिया।

आज्ञाकारी नौकर की तरह आदेश मान लेते हैं- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफसोस, न माफी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए-अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें। कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक आजाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे कंप्रोमाइज्ड पीए चुप साधे बैठे हैं। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं। कंप्रोमाइज्ड पीएम देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।

तीन भारतीयों की मौत के बाद भड़के राहुल गांधी

बता दें कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी खाड़ी में हुई घटना के बाद आई है। दरअसल, ओमान की खाड़ी (डुक्म) में एक कमर्शियल तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना का शिकार हो गया। हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। MT सेटेबेलो नाम का यह जहाज बुधवार को निशाना बना, क्योंकि अमेरिका ने आरोप लगाया था कि वह बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। इनमें से 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन नाविकों की बाद में मौत की पुष्टि हुई।

29 जुलाई 2026 को दिखेगा वर्ष का आकर्षक 'बक मून',/ फुल मून

 
गुरु पूर्णिमा पर बनेगा दुर्लभ
खगोलीय-सांस्कृतिक संयोग।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की शाम आकाश प्रेमियों और सामान्य जनमानस के लिए विशेष रहने वाली है क्योंकि इस दौरान भारतीय समयानुसार रात 8:06 बजे जुलाई की पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस दौरान चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में रहेगा तथा लगभग –12.7 मैग्नीट्यूड की चमक से दमकेगा एवं इसी पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से 'बक मून' (Buck Moon) कहा जाता है। इसका विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि यही दिन आषाढ़ पूर्णिमा अथवा गुरु पूर्णिमा का भी है। इस प्रकार एक ही दिन खगोलीय और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण संयोग देखने को मिलेगा।

*क्या होती है पूर्णिमा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा वह खगोलीय अवस्था है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं तथा पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच स्थित होती है। इस स्थिति में चंद्रमा का सूर्य से प्रकाशित पूरा निकटवर्ती भाग पृथ्वी की ओर दिखाई देता है, इसलिए वह पूर्ण गोलाकार एवं अत्यधिक चमकीला दिखाई देता है। या कुछ यूं कहें कि पूर्णिमा वह समय होता है जब सूर्य और चंद्रमा पृथ्वी के विपरीत दिशाओं में एक सीध में होते हैं, जिसे खगोलविज्ञान की भाषा में' सिज़ीगी' कहते हैं।उस समय, चंद्रमा का प्रकाशित भाग पृथ्वी की ओर होता है जबकि दूसरा भाग अंधकार में होता है। अमावस्या के समय इसका ठीक विपरीत होता है।

*कब होगा बक मून का चरम समय।?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बैसे तो सूर्यास्त के बाद से ही चंद्रमा, पूरब -दक्षिण पूर्वी आकाश में नज़र आने लगेगा लेकिन रात 8:06 बजे वह सटीक क्षण होगा जब पूर्णिमा अपनी चरम अवस्था में पहुँचेगी, लेकिन सामान्य दर्शकों को चंद्रमा एक दिन पहले एवं एक दिन बाद की रातों में भी लगभग पूर्ण जैसा ही दिखाई देगा, क्योंकि प्रकाशित भाग में परिवर्तन बहुत धीमी गति से होता है।

*कहाँ और किस दिशा में दिखाई देगा बक मून?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 29 जुलाई को सूर्यास्त के तुरंत बाद चंद्रमा पूर्व–दक्षिण-पूर्व (East-Southeast) दिशा में उदित होगा। रात बढ़ने के साथ वह आकाश में ऊँचा उठेगा, लगभग मध्यरात्रि में सर्वोच्च ऊँचाई पर पहुँचेगा और सूर्योदय के आसपास पश्चिम दिशा में अस्त होगा।

*किस तारामण्डल में दिखाई देगा बक मून।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा के चरम के समय चंद्रमा, मकर (Capricornus) तारामंडल की दिशा में स्थित रहेगा, साथ ही पृथ्वी से उसकी औसत दूरी लगभग 3,99,600 किलोमीटर होगी तथा उसका प्रत्यक्ष कोणीय व्यास लगभग 0.5 डिग्री दिखाई देगा।

*चंद्रमा कितना चमकीला/ कितने मैग्नीट्यूड पर होगा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस पूर्णिमा के दौरान चंद्रमा का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 12.7 रहेगा, जो इसे रात्रि आकाश की सबसे चमकीली प्राकृतिक वस्तुओं में शामिल करता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऋणात्मक (Negative) मैग्नीट्यूड का अर्थ है कि वस्तु अत्यंत अधिक चमकीली है। पूर्णिमा के समय चंद्रमा का प्रकाश इतना प्रबल होता है कि अत्यंत हल्के बादलों के बीच भी दिखाई देता है।

' *बक मून' नाम कैसे पड़ा?*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जुलाई की पूर्णिमा को बक मून (Buck Moon) नाम उत्तरी अमेरिका की मूल निवासी (Native American) जनजातियों द्वारा दिया गया था, क्योंकि वर्ष के इसी समय नर हिरण (Buck) के नए सींग तेज़ी से विकसित होते हैं और मखमली आवरण से ढके दिखाई देते हैं। इसी मौसमी परिवर्तन के आधार पर जुलाई की पूर्णिमा को "बक मून" कहा जाने लगा साथ ही इसके अन्य पारंपरिक नाम भी प्रचलित हैं, जिनमें थंडर मून , हे मून,शैलमन मून, रस्पवेरी मून, हॉफ वे समर मून तथा कुछ क्षेत्रों में मियड मून भी शामिल हैं। ये नाम विभिन्न संस्कृतियों की कृषि, मौसम और प्राकृतिक चक्रों से जुड़े हैं।

*बक मून/ पूर्णिमा का पृथ्वी पर क्या पर प्रभाव होगा।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि पूर्णिमा और अमावस्या के समय सूर्य एवं चंद्रमा का संयुक्त गुरुत्वाकर्षण प्रभाव समुद्रों में स्प्रिंग टाइड (Spring Tide) अथवा उच्च ज्वार उत्पन्न करता है। इन दिनों उच्च और निम्न ज्वार के बीच का अंतर सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होता है। हालांकि वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार पूर्णिमा का मानव व्यवहार या मानसिक स्वास्थ्य पर कोई निर्णायक प्रत्यक्ष प्रभाव सिद्ध नहीं हुआ है। लेकिन फिर भी पुराने जमाने से ही कई देशों ख़ासकर प्राचीन यूरोप में प्रचलित मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को लूना भी कहा जाता है एवं उसी के आधार पर बना था *ल्यूनेटिक* शब्द जिसका मतलब ही होता है कि *चांदमारा* या पागल होना। लेकिन आधुनिक खगोल वैज्ञानिक अनुसंधानों में चंद्रमा का आपने शरीर के ऊपर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं होता है। इसीलिए यहां घबराने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है, इसीलिए खगोलविद अमर पाल सिंह कहते हैं कि *पहले जानें उसके बाद ही मानें और सही ज्ञान सभी समस्याओं का समाधान और यही है विज्ञान।*

*हर पूर्णिमा पर ग्रहण क्यों नहीं होता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बहुत से लोग मानते हैं कि हर पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण होना चाहिए, जबकि ऐसा नहीं है। इसका कारण यह है कि चंद्रमा की कक्षा पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर की कक्षा (क्रांतिवृत्त) से लगभग 5.1° झुकी हुई है। इसलिए अधिकांश पूर्णिमाओं पर चंद्रमा पृथ्वी की छाया के ऊपर या नीचे से निकल जाता है। चंद्र ग्रहण केवल तभी होता है जब पूर्णिमा के समय चंद्रमा अपने कक्षीय नोड के निकट हो और सूर्य, पृथ्वी तथा चंद्रमा लगभग एक सीध में हों।

*चंद्रमा हमेशा एक जैसा क्यों नहीं दिखता?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा, पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 27.32 दिनों में करता है, जबकि एक पूर्णिमा से अगली पूर्णिमा तक का औसत समय 29.53 दिन (सिनोडिक मास) होता है। यही कारण है कि चंद्रमा की कलाएँ लगातार बदलती रहती हैं। एक चंद्र चक्र में अमावस्या, बढ़ता अर्धचंद्र, प्रथम चतुर्थांश, बढ़ता गिबस मून, पूर्णिमा, घटता गिबस मून, तृतीय चतुर्थांश और घटता अर्धचंद्र जैसी आठ प्रमुख अवस्थाएँ आती हैं। इन्हीं समस्त चंद्रकलाओं के कारण चन्द्रमा, पृथ्वी से हमेशा एक ही आकर में नहीं दिखाई देता है और अपनी कलाएँ बदलता रहता है।

*क्या वास्तव में हम चंद्रमा का केवल आधा भाग ही देखते हैं?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यद्यपि किसी भी समय चंद्रमा का लगभग 50 प्रतिशत भाग ही पृथ्वी से दिखाई देता है, लेकिन चंद्र लिब्रेशन (Libration) नामक हल्के डगमगाने वाले प्रभाव के कारण समय के साथ हम उसकी सतह का लगभग 59 प्रतिशत भाग देख पाते हैं।

*गुरु पूर्णिमा का वैज्ञानिक एवं पौराणिक महत्व क्या होता है।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 की पूर्णिमा भारतीय परंपरा में गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी। पौराणिक रूप में यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती से जुड़ा माना जाता है और ज्ञान, शिक्षा तथा गुरु-शिष्य परंपरा के सम्मान का पर्व है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोलीय दृष्टि से यह केवल पूर्णिमा का एक विशेष क्षण होता है, साथ ही इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जबकि सांस्कृतिक रूप से यह भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति हमेशा अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। इसीलिए सभी को अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञ होना ही चाहिए क्योंकि बिन गुरु ज्ञान कहां।

*कैसे देखें बक मून और तस्वीर कैसे लें?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बक मून/पूर्णिमा को देखने के लिए किसी दूरबीन / टेलीस्कोप या विनॉकुलर आदि की आवश्यकता नहीं होती है सूर्यास्त के तुरंत बाद पूर्वी क्षितिज का खुला स्थान चुनें। यदि आपके पास कोई टेलीस्कोप/दूरबीन या विनोकुलर एवं कैमरा आदि उपकरण मौजूद हैं और आप फोटोग्राफी करना चाहें तो ट्राइपॉड का उपयोग करें तथा कैमरे या मोबाइल में एक्सपोज़र कम रखें, जिससे चंद्रमा की सतह के गड्ढे और पर्वतीय संरचनाएँ स्पष्ट दिखाई दें।

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 29 जुलाई 2026 का बक मून केवल एक सुंदर पूर्णिमा नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, प्रकृति, संस्कृति और भारतीय परंपरा का अद्भुत संगम है। यह अवसर हमें चंद्रमा की वैज्ञानिक समझ के साथ-साथ प्रकृति के उन मौसमी संकेतों की भी याद दिलाता है जिनके आधार पर विभिन्न सभ्यताओं ने सदियों तक समय और ऋतुओं का निर्धारण किया था। इसीलिए मौसम साफ़ होने पर आप इस बक मून/ गुरु पूर्णिमा की चाँदनी रात्रि का लुत्फ़ जरुर उठाएं साथ ही बच्चों को इसके वैज्ञानिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक कारणों से भी अवगत ज़रूर करवाएं,जिस से समाज में व्यापक रूप से वैज्ञानिक दृष्टिकोण पुष्ट होता रहे।
        
कौन रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजरायल के अलर्ट से अमेरिका में हड़कंप

#americadonaldtrumpassassinationplotisraelintelligence_warning

इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कुछ खुफिया जानकारी सौंपी है। मोसाद ने दावा किया गया है कि ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति की हत्या की साजिश रच रहा है। जराइल के इस दावे से अमेरिका में हड़कंप मच गया है। इजरायली एजेंसी ने ये दावा तब किया है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ ही दिन पहले दावा किया था कि वो 'ईरान की हिट लिस्ट में टॉप पर हैं।

इजरायल के रिपोर्ट में क्या?

द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने अमेरिका को एक ईरानी प्लान की जानकारी दी है। वहीं CNN की रिपोर्ट कहती है कि इजरायल ने अमेरिका को एक खास साजिश की चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस पिछले कई हफ्तों से ट्रंप को निशाना बनाने से जुड़ी जानकारियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि इजरायल का इनपुट इन सबसे अलग एक नए और विशेष तरह के प्लान से जुड़ा बताया गया है।

ट्रंप कई बार कह चुके हैं ‘जान को खतरा’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार कह चुके हैं कि ईरान की तरफ से उनकी जान को खतरा है। हाल ही में ट्रंप ने नाटो समिट में ही अपने हत्या की साजिश का जिक्र किया था। नाटो शिखर सम्मेलन के बाद तुर्की के अंकारा में ट्रंप ने कहा था कि ईरान उन्हें खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने कहा, ‘ईरान अमेरिका के नेता को खत्म करना चाहते हैं, यानी मुझे। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं।’ जिसके बाद अटकलें लग रही हैं कि उन्हें भी खुफिया जानकारी मिल चुकी थी।

ईरान के निशाने पर ट्रंप!

यह बात तब सामने आई जब नाटो समिट के दौरान अचान ट्रंप ने अपना नया एयरफोर्स वन छोड़कर पुराने अयरफोर्स वन से सफर करने का फैसला किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान के खतरे की वजह से उन्होंने तुर्किये से लौटते समय अपना विमान बदला था, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया, लेकिन यह जरूर माना कि वह ईरान के निशाने पर हैं।

अमेरिका-ईरान में हुआ समझौता, ट्रंप और पेजेश्कियान ने MoU पर किए साइन

#middleeastamericairandeal14points_mou

आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर शांति समझौता हो गया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने जंग खत्म करने के लिए समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस दस्तावेज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए हैं।

अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर

अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के पैलेस ऑफ वर्सेलिस में मैक्रों के साथ डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान का एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कर दिए है। समझौते के वक्त ईरान और अमेरिका आमने-सामने नहीं थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अलग-अलग जगहों से दोनों देशों के बीच 3 महीने से अधिक समय से जारी जंग को खत्म करने के लिए एमओयू पर औपचारिक तौर पर हस्ताक्षर कर दिए। ईरानी राष्ट्रपति यहां से 5000 किमी दूर तेहरान में बैठकर डील साइन कर रहे थे।

खुल जाएगा होर्मुज

फिलहाल बताया जा रहा है कि इस समझौते का ज्यादातर हिस्सा युद्ध से पहले की स्थिति को बहाल करेगा। इसमें जंग को खत्म करना, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिर से शुरू करना और होर्मुज़ स्ट्रेट को फिर से खोलना शामिल है. होर्मुज एक अहम समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के कई देशों के लिए तेल और प्राकृतिक गैस पहुंचाए जाते हैं और इसके बंद होने से ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया था।

तेहरान को यूरेनियम के भंडार कम करना होगा

दोनों देशों की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस समझौते के तहत तेहरान को अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना होगा और अमेरिका की ओर से लगाए गए बैन को हटा लिया जाएगा। इस करार के तहत ईरान को तुरंत अपना तेल स्वतंत्र रूप से बेचने की अनुमति मिल जाएगी।

ईरान के लिए 300 अरब डॉलर

इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का भी प्रावधान है। हालांकि, इसमें अमेरिका को योगदान करने की जरूरत नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन आधारित बताया है, जिसमें ईरान को तभी लाभ मिलेगा जब वह अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते का मकसद चार महीने से चल रहे टकराव को खत्म करना और दुनिया के लिए ऊर्जा की सप्लाई के अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है।

ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते का एलान, जानें पीस डील की अहम बातें

#middleeastiranamericapeacedealcomplete

फारस की खाड़ी में जंग खत्म करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो गया है। बातचीत की मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी। शुक्रवार 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में दोनों पक्षों की ओर से इस पीस डील पर औपचारिक हस्‍ताक्षर किया जाएगा।

ट्रंप ने शांति समझौते को लेकर क्या कहा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकार की ओर से समझौते की पुष्टि कर दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि "सभी को समझौते की बधाई देते हुए मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं। साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं।"

ईरान ने क्या कहा है

ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सरकारी टेलीविजन पर समझौते की पुष्टि की है। गरीबाबादी ने कहा है कि डील हो गई है लेकिन शुक्रवार को हस्ताक्षर होने तक तेहरान इसे लागू करना शुरू नहीं करेगा। उन्होंने बताया कि यह समझौता तेहरान में कतर के प्रतिनिधि के साथ 14 घंटे से ज्यादा चली बातचीत के बाद हुआ है। पाकिस्तान के अलावा कतर एक और अहम मध्यस्थ है।

समझौते के बाद शहबाज शरीफ का पोस्ट

इस समझौते के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक्स पर लिखा, "लंबी बातचीत के बाद, हमें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है। दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा की है।"

US-ईरान शांति डील में क्या-क्या शामिल है?

1- लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना

2- अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा

3- दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाया जाएगा

4- अमेरिका ने यह वादा किया है कि वह ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना हटा लेगा

5- ईरान की 'व्यवस्थाओं' के तहत 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाएगा

6- तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और उनसे होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी

7- अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए ईरान के पुनर्निर्माण के वास्ते कम से कम 300 अरब डॉलर की योजनाएं पेश करना जरूरी होगा।

8- परमाणु मुद्दों और अमेरिका के प्राथमिक और माध्यमिक प्रतिबंधों, साथ ही UN सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और IAEA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों को पूरी तरह से हटाने के आधार पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों की बातचीत।

9- NPT के तहत परमाणु हथियार न बनाने के अपने वादे को ईरान का फिर से दोहराना।

10- बातचीत के दौरान अमेरिका ने वादा किया है कि वह इस क्षेत्र में अपनी सेना नहीं बढ़ाएगा और कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

11- अंतिम बातचीत की 60 दिनों की अवधि के दौरान ईरान के फ्रीज किए गए 24 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे। इस राशि का आधा हिस्सा बातचीत शुरू होने से पहले ही ईरान को उपलब्ध कराया जाएगा।

12- समझौते को लागू करने के लिए एक निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।

13- अंतिम समझौते को UN सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के माध्यम से मंजूरी दी जाएगी।

14- अंतिम बातचीत तब तक शुरू नहीं होगी जब तक ईरान के फ्रीज किए गए फंड का आधा हिस्सा जारी नहीं हो जाता ईरान पर तेल प्रतिबंध हटा नहीं दिए जाते और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म नहीं हो जाती।अंतिम समझौता केवल संवर्धित यूरेनियम और संवर्धन, प्रतिबंधों से राहत और ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण के कार्यक्रम तक ही सीमित रहेगा। ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और प्रतिरोध समूहोंको समर्थन देने के बारे में चर्चा को एजेंडे से पूरी तरह हटा दिया गया है।

अमेरिका के आज्ञाकारी नौकर की तरह कर रहे हैं काम”, राहुल गांधी की पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी

#rahulgandhislammedpmmodisaidheactinglikeanobedientservantof_america

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जोराद हमला बोला है। राहुल गांधी ने खाड़ी क्षेत्र में हुए तीन भारतीय नाविकों की मौत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर पीएम मोदी की कूटनीति पर सवाल उठाए हैं। राहुल गांधी ने पीएम मोदी को अमेरिका का 'आज्ञाकारी नौकर' तक बता दिया।

आज्ञाकारी नौकर की तरह आदेश मान लेते हैं- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक्स हैंडल पर लिखते हुए कहा कि अमेरिकी हमलों में तीन भारतीय नाविकों की हत्या के चंद दिन बाद - न अफसोस, न माफी। उल्टा, अमेरिका ने आदेश देना जारी रखा है। उनके शब्द पढ़िए-अमेरिकी सेना के आदेश तुरंत मानें। कोई उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक आजाद देश इस तरह की भाषा कभी नहीं सहेगा। लेकिन हमारे कंप्रोमाइज्ड पीए चुप साधे बैठे हैं। एक आज्ञाकारी नौकर की तरह सुनते हैं, और आदेश मान लेते हैं। कंप्रोमाइज्ड पीएम देश के सम्मान की रक्षा नहीं करेगा - क्योंकि जो देश का अपमान करते हैं, वो उन्हीं के वश में हैं।

तीन भारतीयों की मौत के बाद भड़के राहुल गांधी

बता दें कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी खाड़ी में हुई घटना के बाद आई है। दरअसल, ओमान की खाड़ी (डुक्म) में एक कमर्शियल तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना का शिकार हो गया। हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। MT सेटेबेलो नाम का यह जहाज बुधवार को निशाना बना, क्योंकि अमेरिका ने आरोप लगाया था कि वह बंदरगाहों पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। जानकारी के मुताबिक, जहाज पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। इनमें से 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि तीन नाविकों की बाद में मौत की पुष्टि हुई।