दिल्ली ब्लास्ट: आतंकी डॉ. शाहीन की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में अलमारी, जहां से मिले 18 लाख कैश
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दिल्ली में हुए ब्लास्ट केस की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को एक के बाद एक बड़े खुलासे हाथ लग रहे हैं। एनआईए ने अब दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट मामले में मुख्य आरोपी और जैश-ए-मोहम्मद की कथित महिला कमांडर डॉ. शाहीन के ठिकाने से 18 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। माना जा रहा है कि बकामद की गई इतनी बड़ी रकम आतंकी फंडिंग का हिस्सा हो सकता है।
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए कार ब्लास्ट के जांच की जिम्मेदारी नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को सौंपी गई है। एनआईए की टीम कार ब्लास्ट की आरोपी डॉ. शाहीन शाहिद को लेकर मौका मुआयना करने के लिए फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ले गई थी। शाहीन यूनिवर्सिटी के हॉस्टल के जिस रूम नंबर-22 में रहती थी, उसकी छानबीन गई। इस दौरान आलमारी से 18 लाख रुपये नकद मिले।
शाहीन के पास कहां से आई इतनी बड़ी रकम?
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी राशि शाहीन के पास कहां से आई? सूत्रों के मुताबिक यह पैसा आतंकी फंडिंग का हिस्सा हो सकता है। अलमारी में मिले इन भारी भरकम अंदेशा है कि इन पैसों का इस्तेमाल टेरर मॉड्यूल की गतिविधियों को फंड करने में किया जाना था। यह पैसा विश्वविद्यालय के भीतर से संचालित हो रहे ‘सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल’ को वित्तपोषित करने के लिए रखा गया होगा।
डॉक्टर मुजम्मिल अहमद ने खोले राज
यह कार्रवाई आतंक मॉड्यूल से जुड़े डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनई को फरीदाबाद लाकर पूछताछ के एक दिन बाद हुई। डॉक्टर मुजम्मिल ने पूछताछ में उन दो दुकानों की पहचान की जहां से उसने अमोनियम नाइट्रेट खरीदा था। जांच में पता चला है कि मुजम्मिल ने यूनिवर्सिटी से कुछ किलोमीटर दूर दो अलग-अलग कमरों में करीब 2,900 किलो अमोनियम नाइट्रेट जमा कर रखा था। इसके अलावा उसने इस विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा हिस्सा पास के गांव के खेतों में छुपाया था, जिसे बाद में वह फतेहपुर टैगा में किराये पर लिए एक मौलवी के घर में ले गया। एनआईए को आशंका है कि अभी और भी विस्फोटक सामग्री छुपाई गई हो सकती है, जिसके लिए तलाशी अभियान जारी है।
शाहीन ने जांच एजेंसियों के सामने किया बड़ा खुलासा
इधर, आतंकी डॉक्टर शाहीन ने जांच एजेंसियों को बताया कि वह आतंकी मॉड्यूल में डॉक्टर मुजम्मिल के कहने पर शामिल हुई थी और वही करती थी जो मुजम्मिल उसे निर्देश देता था। इसके अलावा, एजेंसियों को डॉक्टर अबू उकाशाह नाम के हैंडलर का टेलीग्राम अकाउंट भी मिला है। इसी अकाउंट के माध्यम से डॉक्टर मुजफ्फर, डॉक्टर उमर और डॉक्टर आदिल साल 2022 में तुर्किए गए थे।






Nov 29 2025, 15:03
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