ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर ऑनलाइन सत्र: लॉन्च हुआ 'ग्रीन विजन 2027', जुटे IIT और पर्यावरण क्षेत्र के दिग्गज
ग्रीष्मावकाश होने के कारण 'ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया' द्वारा 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' पर एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'जलवायु परिवर्तन - धरती के संकेतों का जवाब' पर केंद्रित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल परिसर में निदेशक डॉ. एस. खालिद, चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन एवं प्राचार्या श्रीमती चाँदनी त्रिगुणायत द्वारा वृक्षारोपण से किया गया।
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गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
सत्र में शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हुए:
- मुख्य अतिथि: प्रो. प्रमोद पाठक, IIT(ISM)
- विशिष्ट अतिथि: प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित, प्राचार्य, बी.एड. कॉलेज, पुरुलिया
- चेयरपर्सन: डॉ. निखत परवीन
- मैनेजर: डॉ. ममता सिन्हा
- डायरेक्टर: डॉ. एस. खालिद
- प्रिंसिपल: श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत
कार्यक्रम की मुख्य झलकियां
उद्घाटन संबोधन
चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने स्कूल की ग्रीन इनिशिएटिव्स की जानकारी दी। 'Clean Campus-Green Campus' के साथ ही उन्होंने बच्चों से 'Clean Home-Green Home' पर अमल करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि का वक्तव्य
प्रो. प्रमोद पाठक ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला और युवाओं से 'क्लाइमेट एक्शन' में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को 'Change Agent' के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने Reduce, Reuse और Recycle का महत्वपूर्ण फॉर्मूला भी साझा किया।
विशेषज्ञ व्याख्यान
प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित ने पर्यावरण अध्ययन को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए कहा, "छात्र ही पर्यावरण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। NSS के माध्यम से हमने हजारों छात्रों को पर्यावरण से जोड़ा है। हर स्कूल को अपना 'ईको-क्लब' बनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने Activity Based Teaching Method के द्वारा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स देने की सलाह दी।
प्रिंसिपल का संदेश
प्रिंसिपल चांदनी त्रिगुणायत ने स्कूल का 'ग्रीन विजन 2027' लॉन्च किया, जिसके तहत 500 पेड़ लगाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना और परिसर को जीरो वेस्ट बनाना शामिल है।
डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने अपने वक्तव्य में कहा, "आज का यह सत्र सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है।"
कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक श्री अरविंद कुमार रजक, श्री राकेश अरोरा,ताहिर अंसारी तथा IT हेड इंजी. काशिफ खान की सराहनीय भूमिका रही।




झारखंड राज्य के मनरेगा कर्मी पिछले लगभग तीन महीनों से अपनी लंबित एवं न्यायोचित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल, विपक्षी विचारधारा अथवा बाहरी प्रभाव का परिणाम नहीं है, बल्कि उन हजारों मनरेगा कर्मियों की वास्तविक पीड़ा और वर्षों की उपेक्षा का परिणाम है, जिन्होंने लगभग दो दशकों से ग्रामीण विकास एवं मनरेगा योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हाल के दिनों में कुछ ऐसे वक्तव्य सामने आए हैं जिनमें मनरेगा कर्मियों के आंदोलन को अनुचित बताने तथा आंदोलनरत कर्मियों की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाने का प्रयास किया गया है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह आंदोलन किसी सरकार के विरोध का आंदोलन नहीं है, बल्कि सम्मानजनक सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण व्यवस्था की मांग का आंदोलन है। हमारा सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि एक ही मनरेगा व्यवस्था में कार्यरत कर्मियों के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है? एक ओर राज्य मनरेगा कोषांग में कार्यरत कर्मियों को ग्रेड-पे की सुविधा प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय स्तर पर कार्यरत हजारों मनरेगा कर्मी आज भी मात्र 12000 रुपये प्रतिमाह मानदेय पर पूर्णकालिक सेवाएं देने को विवश हैं। एक ही परिवार के दो सदस्यों के साथ इस प्रकार का व्यवहार स्वाभाविक रूप से असंतोष और पीड़ा को जन्म देता है। हम सरकार और विभागीय अधिकारियों को अपना अभिभावक मानते हैं। इसलिए हमारी अपेक्षा टकराव नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और न्याय की है। यदि सरकार को योजनाओं के प्रभावित होने की चिंता है तो उसे उन मनरेगा कर्मियों की भी चिंता करनी चाहिए जिनके परिवार लगातार आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। यह भी विचारणीय है कि क्या वर्तमान समय में 12000 रुपये प्रतिमाह पर किसी परिवार का सम्मानजनक जीवन-यापन संभव है? यह भी एक कटु सत्य है कि वर्षों की सेवा के दौरान 156 मनरेगा कर्मियों का निधन हो चुका है। उनके परिवार आज भी आर्थिक और सामाजिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यदि मनरेगा कर्मी राज्य के विकास के सहभागी हैं, तो उनके परिवारों की सुरक्षा और सम्मान भी राज्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए। हम यह भी कहना चाहते हैं कि आंदोलन की वर्तमान स्थिति के लिए केवल कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। अतीत में कई बार मनरेगा कर्मियों के आंदोलनों के दौरान सरकार एवं कर्मचारी प्रतिनिधियों के बीच लिखित समझौते हुए, मांगों पर सहमति बनी और आश्वासन दिए गए, लेकिन दुर्भाग्यवश उन समझौतों का पूर्ण क्रियान्वयन आज तक नहीं हो सका। यही कारण है कि कर्मचारियों के बीच विश्वास का संकट उत्पन्न हुआ है। जब बार-बार लिखित सहमति के बावजूद मांगें लंबित रह जाती हैं, तो स्वाभाविक रूप से कर्मचारियों का भरोसा कमजोर होता है। फिर भी हम संवाद के मार्ग में विश्वास रखते हैं। हम माननीय ग्रामीण विकास मंत्री महोदया, विभागीय सचिव एवं आयुक्त महोदय से विनम्र अपील करते हैं कि वे मनरेगा कर्मियों की पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ समझें और आंदोलन को केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से भी विचार करें। हम मंत्री महोदया से विशेष आग्रह करते हैं कि वे स्वयं पहल कर कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ सार्थक एवं परिणामोन्मुखी संवाद सुनिश्चित करें, ताकि वर्षों से लंबित समस्याओं का स्थायी समाधान निकल सके। यदि सरकार और कर्मचारी पक्ष आपसी विश्वास के साथ बातचीत करें तो समाधान का मार्ग अवश्य प्रशस्त होगा। हम पुनः स्पष्ट करना चाहते हैं कि मनरेगा कर्मी सरकार से संघर्ष नहीं, समाधान चाहते हैं; टकराव नहीं संवाद चाहते हैं; विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा और न्यायपूर्ण सेवा व्यवस्था चाहते हैं। मनरेगा को मजबूत बनाने के लिए मनरेगा कर्मियों को मजबूत बनाना आवश्यक है। यही राज्यहित, जनहित और ग्रामीण विकास के हित में भी होगा। झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ
विश्व पर्यावरण दिवस समारोह मदर्स टच स्कूल द्वारा 5 जून 2026 को नंदन पहाड़ ऑक्सीजन पार्क में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण अभियान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बच्चों, अभिभावकों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों द्वारा पौधारोपण किया गया तथा उन्हें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से प्लास्टिक के कम उपयोग एवं स्वच्छ पर्यावरण का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों द्वारा हरित, स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण के निर्माण का संकल्प लेकर किया गया। डॉ rupashree ने बताया कि बच्चों में शुरुआती दिनों में ही प्रकृति से जुड़ा रहने से उनकी संवेदना प्राकृतिक होती जायेगी. पूजा प्रिया अनन्या का सहयोग सराहनीय रहा। मदर्स टच स्कूल



उपेन्द्र कुमार पांडेय
जनपद प्रभारी मंत्री जी द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर कार्यक्रम का किया गया शुभारम्भ।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण,प्रशासनिक अधिकारी व नागरिकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल,प्रतिनिधि विधायक लम्भुआ पंकज पटेल,जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह,पुलिस अधीक्षक चारू निगम,मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह,बार एसोसिएशन अध्यक्ष दिनेश कुमार दुबे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। जिलाधिकारी द्वारा मा0 प्रभारी मंत्री जी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। तत्पश्चात मा0 जनपद प्रभारी मंत्री जी द्वारा बेल का पौधा रोपित कर ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान का शुभारम्भ किया गया।
कार्यक्रम के दौरान अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा आंवला,पीपल,सीता अशोक, बरगद,महोगनी सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया। वृक्षारोपण के उपरांत आयोजित हस्ताक्षर अभियान में उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों ने पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लेते हुए हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने जनपद प्रभारी मंत्री को चंदन का पौधा एवं विरासत वृक्ष का स्मृति चिन्ह स्वरूप भेंट किया। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा भाजपा जिलाध्यक्ष को चंदन का पौधा एवं विरासत वृक्ष चित्र स्मृति चिन्ह स्वरूप भेंट किया गया। वहीं प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग ने जिलाधिकारी,पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य विकास अधिकारी को विरासत वृक्ष का चित्र स्मृति चिन्ह के रूप में प्रदान किया।
6 hours ago
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