टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन सस्पेंड, राज्यसभा से पूरे सत्र के लिए निलंबित

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टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन को राज्यसभा सभापति ने पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया है।राज्यसभा में आज सभापति जगदीप धनखड़ और टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन के बीच तीखी नोकझोंक हुई। डेरेक चेयर की तरफ चिल्लाने लगे। इसके बाद सभापति ने उन्हें सस्पेंड कर दिया।डेरेक लगातार चेयरमैन की तरफ चिल्लाते हुए नियम 267 के तहत मणिपुर पर चर्चा की मांग कर रहे थे। डेरेक बार-बार मणिपुर पर चर्चा की मांग कर रहे थे, सभापति ने पहले चेतवानी दी। इसके बाद पीयूष गोयल ने उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश किया और फिर डेरेक को मौजूदा सत्र के बचे समय के लिए निलंबित कर दिया गया।

दरअसल, बहस एक पॉइंट ऑफ ऑर्डर से शुरू हुई थी। डेरेक ने कहा तो धनखड़ ने पूछा कि आपका पॉइंट ऑफ ऑर्डर क्या है? ब्रायन की आवाज तेज होती चली गई। उन्होंने कहा कि सर, हमें कम्युनिकेट करना है कि हम मणिपुर पर चर्चा के लिए तैयार हैं लेकिन वैसे नहीं, जैसा वे (सत्तापक्ष के लोग) चाहते हैं। इस पर सभापति नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि मैं सदस्यों से स्पष्ट कहना चाहता हूं कि अगर वे पॉइंट ऑफ ऑर्डर चाहते हैं और खड़े होकर पॉइट ऑफ ऑर्डर नहीं देते हैं... उस पर भाषण देने लगते हैं। अगर आप सिर्फ स्पेस चाहते हैं तो यह ठीक नहीं है। धनखड़ ने आगे पूछा, 'मुझे बताइए कि किस रूल के तहत आप पॉइंट ऑफ ऑर्डर दे रहे हैं।' इस पर डेरेन ने जवाब दिया, 'रूल पेज 92 पर है... रूल 267 है विपक्ष के नेता लगातार मणिपुर पर चर्चा के लिए कह रहे हैं।' यह कहते हुए ब्रायन चीखने लगे। इसके बाद उन्हें सभापति ने सस्पेंड कर दिया।

आपको बता दें इससे पहले आप नेता संजय सिंह को पूरे सत्र के सस्पेंड किया जा चुका है। जब सदन की कार्यवाही चल रही थी और सांसद सवाल पूछ रहे थे, इसी दौरान आप सांसद संजय सिंह चेयरमैन की कुर्सी के सामने आकार जोर-जोर से कुछ बोल रहे थे। वो आसन की तरफ हाथ किए हुए थे। इस दौरान सभापति जगदीप धनखड़ लगातार उन्हें अपनी सीट पर बैठने को कह रहे थे।

90 साल के मनमोहन सिंह व्हीलचेयर से राज्यसभा पहुंचे, बीजेपी ने बताया सनक

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दिल्ली सेवा बिल कल यानी सोमवार रात को राज्यसभा में पारित हो गया। सोमवार को राज्यसभा में रात 10 बजे इस पर वोटिंग हुई। सत्तासीन एनडीए और विपक्षी गठबंधन INDIA दोनों ही पक्षों ने अपनी ओर से पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि एनडीए को 102 के मुकाबले 131 वोटों से जीत हासिल हुई।इस दौरान वोट करने के लिए कांग्रेस की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी सदन पहुंचे। खराब तबीयत के चलते वे व्हीलचेयर पर बैठकर आए थे। 

कांग्रेस ने इस बिल को पारित करने से रोकने के लिए खराब सेहत के बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी राज्यसभा में वोटिंग के लिए बुलाया था। मनमोहन सिंह की उम्र 90 साल की है। उनके खराब स्वास्थ्य के बावजूद संसद में आना राजनीतिक गलियारों में बहस का मुद्दा बन गया। जहां विपक्षी गठबंधन के नेता तारीफ करते नहीं थक रहे तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे शर्मनाक बताया।

बीजेपी बोली-बेईमान गठबंधन जिंदा रखने के लिए

भाजपा ने भी मनमोहन सिंह की तस्वीर शेयर की। इसमें पार्टी ने लिखा कि ये कांग्रेस की सनक है, जो स्वास्थ्य की ऐसी स्थिति में भी एक पूर्व प्रधानमंत्री को देर रात व्हीलचेयर पर बैठाए रखा वो भी सिर्फ अपना बेईमान गठबंधन जिंदा रखने के लिए।

कांग्रेस ने बीजेपी को दिया यह जवाब

इस पर कांग्रेस ने जवाब देते हुए मनमोहन सिंह के सदन में पहुंचने को संविधान के सम्मान से जोड़कर बात कही है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि लोकतंत्र के लिए डॉक्टर साहब का यह समर्पण बताता है कि वे देश के संविधान में कितनी आस्था रखते हैं।श्रीनेत ने इस बात को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के सम्मान से भी जोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि ऐसे वक्त में जब बीजेपी ने अपने सीनियर नेताओं को मानसिक तौर पर 'कोमा' में भेज दिया है, तो वहीं दूसरी ओर मनमोहन सिंह हमारे लिए प्रेरणा और साहस बने हुए हैं। अपने मास्टर को बताइए कि वे कुछ सीखें।

कांग्रेस बोली- पीएम हालात से भाग रहे हैं

कांग्रेस ने इंस्टाग्राम पर भी ये फोटो शेयर की। लिखा- हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, एक जिम्मेदार नेता, मनमोहन सिंह की उम्र 90 साल है। अपने खराब स्वास्थ्य और उम्र के बावजूद वे खुद को संसद आने से और अपनी जिम्मेदारी पूरी करने से नहीं रोक पाए। इसे सच्चाई और ईमानदारी कहते हैं।

दूसरी तरफ हमारे देश के प्रधानमंत्री, जिनकी इस देश के प्रति कर्तव्य और जिम्मेदारी है, वे अब तक संसद से दूर बने हुए हैं। वो भी तब, जब दो राज्य हिंसा की आग में जल रहे हैं। हालत से भागना इसे कहते हैं।

आप ने की तारीफ

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने 90 वर्षीय कांग्रेस नेता की तारीफ की। उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि आज राज्यसभा में डॉ. मनमोहन सिंह ईमानदारी की मिसाल बनकर खड़े हुए और विशेष रूप से काले अध्यादेश के खिलाफ वोट करने आए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संविधान के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता एक गहन प्रेरणा है। चड्ढा ने पूर्व पीएम के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। कहा कि मैं हृदय से उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। 

दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा से भी पास

बता दें कि, राज्यसभा में सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा हुई। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया। अमित शाह के जवाब के बाद इस बिल पर वोटिंग हुई। विपक्षी नेताओं की ओर से प्रस्तावित किए गए सभी संशोधन ध्वनिमत से नकार दिए गए। बिल पर हुए मतदान में पक्ष में 131 और विपक्ष में 102 वोट पड़े। इसी के साथ बिल को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई।

राघव चड्ढा पर सदन में फर्जी हस्ताक्षर कराने का आरोप, आप सांसद के खिलाफ लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव

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लोकसभा के बाद अब दिल्ली सेवा बिल सोमवार को राज्यसभा से भी पास हो गया। सोमवार देर शाम तक इस पर चर्चा हुई और यह बिल पास हो गया। इस दौरान दिल्ली सेवा बिल के पक्ष में कुछ 131 वोट डाले गए, जबकि इसके विरोध में विपक्षी सांसदों की तरफ से महज 102 वोट पड़े। अब इस बिल पर राष्ट्रपति की मुहर लगना बाकी है। इसके बाद यह बिल कानून का रूप ले लेगा।आम आदमी पार्टी इस बिल का कड़ा विरोध कर रही थी, इसके बावजूद बिल पास हो गया। इस दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा विवाद में घिर गए। उन पर पाँच राज्यसभा सांसदों ने फ़र्ज़ी हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाकर विशेषाधिकार हनन की शिकायत की है। 

दरअसल, राघव चड्ढा इस विधेयक को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजने का प्रस्ताव लेकर आए थे। 7 अगस्त को आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा पर आरोप लगा कि उन्होंने गलत तरीके से पांच सांसदों के नाम का प्रस्ताव दिल्ली ट्रांसफर-पोस्टिंग बिल को सेलेक्ट कमेटी में शामिल किया। राघव चड्ढा ने सदन में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें दिल्ली से जुड़े बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की सिफारिश की और इस प्रस्ताव में उनके अलावा 4 अन्य सांसदों के हस्ताक्षर थे। लेकिन जब चेयर की तरफ से हरिवंश ने सांसदों के नाम पढ़े तो सांसदों ने अपना नाम सलेक्ट कमेटी में देने इनकार कर दिया। 

बिना जानकारी के डाला गया नाम?

सलेक्ट कमेटी के लिए आप सांसद राघव चड्ढा ने सुधांशु त्रिवेदी, नरहरि अमीन, थम्बी दुरई, सस्मित पात्रा और नागालैंड की सांसद पी कोन्याक के नाम का प्रस्ताव रखा था।बीजेपी सांसद नरहरी अमीन ने कहा कि राघव चड्ढा ने मेरा नाम इस लिस्ट में लिया, उन्होंने इस बारे में मुझसे बात नहीं की और ना ही मैंने किसी तरह की सहमति दी है। राघव चड्ढा ने जो किया है वह पूरी तरह से गलत है। उनके अलावा अन्य सांसदों ने भी इस मसले की जांच की बात कही है। 

संसद के अंदर फर्जीवाड़ा-अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में इसका जिक्र किया। अमित शाह ने कहा कि इन सदस्यों ने खुद कहा है कि उन्होंने कोई हस्ताक्षर नहीं किए हैं। ये जांच का विषय है कि इनके साइन कहां से आए, ये मामला अब सिर्फ दिल्ली में फर्जीवाड़े का नहीं है बल्कि संसद के अंदर फर्जीवाड़े का हो गया है। अमित शाह ने मांग करते हुए कहा कि सदस्यों का बयान रिकॉर्ड किया जाए और इसकी जांच भी की जाए।

राघव चड्ढा ने कोर्ट में लड़ाई लड़ने की कही बात

अब भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी व नरहरि अमीन द्वारा यह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है।हालांकि आप सांसद राघव चड्ढा का कहना है, ''नोटिस आने दीजिए मैं जवाब दे दूंगा।'' राघव ने कहा कि इस बिल पर हम संसद में हार गए, लेकिन कोर्ट में लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ फिर से अरविंद केजरीवाल के पक्ष में फैसला सुनाएगी।

क्या है पूरा मामला?

इस साल 11 मई को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने दिल्ली में अधिकारियों के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग के अधिकार को लेकर केजरीवाल सरकार के समर्थन में फ़ैसला सुनाया था। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि ज़मीन, पुलिस और सार्वजनिक आदेश को छोड़कर अधिकारियों के ट्रांसफ़र और पोस्टिंग का अधिकार समेत सभी मामलों पर दिल्ली सरकार का पूरा अधिकार होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ में चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एम आर शाह, जस्टिस कृष्ण मुरारी, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल थे। हफ़्ते भर बाद, केंद्र सरकार ने 19 मई को राष्ट्रीय राजधानी से संबंधित संविधान के विशेष प्रावधान अनुच्छेद- 239एए के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफ़र और पोस्टिंग को लेकर एक अध्यादेश जारी किया था। अध्यादेश के ज़रिए सेवाओं के नियंत्रण को लेकर आख़िरी फैसला लेने का अधिकार उपराज्यपाल को वापस दे दिया गया था।

सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा आज, लोकसभा में केन्द्र को घेरने के लिए राहुल गांधी तैयार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ लोकसभा में लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर आज से चर्चा शुरू होगी। तीन दिन तक चलने वाली बहस का जवाब गुरुवार को पीएम मोदी दें सकते हैं। वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी, संसद सदस्यता बहाल होने के बाद विपक्ष की तरफ से चर्चा की शुरुआत कर सकते हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता ऐसे समय में बहाल हुई है, जब मंगलवार को संसद में केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। कांग्रेस ने कहा है कि पार्टी चाहती है कि सरकार के खिलाफ इस अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान वह पार्टी की ओर से मुख्य वक्ता की भूमिका निभाएं। ऐसे में इस बात की ज्यादा संभावना है कि राहुल लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस की शुरुआत कर सकते हैं।  

मोदी सरनेम से जुड़े आपराधिक मानहानि के मामले में अपनी सदस्यता गंवाने के बाद यह पहला मौका होगा जब राहुल लोकसभा में बोल रहे होंगे। इसी साल फरवरी में उनको अपनी सदस्यता तब गंवानी पड़ी थी जब गुजरात की एक ट्रायल कोर्ट ने मोदी सरनेम आपराधिक मानहानि मामले में उनको दो सालों की अधिकतम सजा सुनाई थी। हाल ही में उनको सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है।राहुल गांधी को मिली दो साल की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसके बाद कल लोकसभा सचिवालय की ओर से उनकी संसदीय सदस्यता बहाल कर दी। राहुल गांधी 137 दिनों बाद लोकसभा पहुंचे। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से ठीक एक दिन पहले राहुल की संसदीय सदस्यता बहाल होना इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस (इंडिया) के हौसले को बढ़ाने वाला है।

बीजेपी की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव पर निशिकांत दुबे पहले वक्ता होंगे। दुबे के अलावा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, निर्मला सीतारमण, ज्योतिरादित्य और राजवर्धन राठौर भी सदन में अपनी बात रखेंगे। बीजेपी की ओर से करीब 10 वक्ता अविश्वास प्रस्ताव चर्चा में पार्टी की तरफ से पक्ष रखेंगे।सूत्रों ने कहा कि श्रीकांत शिंदे और राहुल शेवाले शिवसेना (शिंदे) समूह से वक्ता होंगे। चिराग पासवान (एलजेपी) और अनुप्रिया पटेल (अपना दल) के अन्य प्रमुख वक्ता होने की संभावना है।

मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रही है। मणिपुर हिंसा के बीच 26 जुलाई को कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।इससे पहले साल 2018 में मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में भी एक बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था।

मणिपुर हिंसा मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई समिति, सीबीआई जांच को आईपीएस अधिकारियों द्वारा निगरानी के निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मणिपुर हिंसा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह हिंसा प्रभावित मणिपुर में राहत, पुनर्वास आदि जैसे मानवीय मुद्दों को देखने के लिए तीन जजों की एक समिति का गठन करेगा। समिति की अध्यक्षता जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल करेंगी। बॉम्बे हाई कोर्ट की रिटायर जज जस्टिस शालिनी जोशी और दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस आशा मेनन भी समिति का हिस्सा होंगी। ये कमेटी सीबीआई और पुलिस जांच से अलग मामलों को देखेगी।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने यह आदेश जारी किया। पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत का प्रयास राज्य में कानून के शासन में विश्वास की भावना बहाल करना है। उसने कहा कि न्यायिक समिति राहत एवं पुनर्वास कार्यों के अलावा अन्य चीजों की निगरानी करेगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आईपीएस अधिकारी सीबीआई जांच की निगरानी करें। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि जांच के मामले को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन कानून के शासन में विश्वास सुनिश्चित करने के लिए यह निर्देश देने का प्रस्ताव है कि कम से कम डिप्टी एसपी रैंक के पांच अधिकारी होंगे, जिन्हें विभिन्न राज्यों से सीबीआई में लाया जाएगा।। ये अधिकारी सीबीआई के बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक ढांचे के चारों कोनों में भी काम करेंगे। 42 एसआईटी ऐसे मामलों को देखेंगी जो सीबीआई को हस्तांतरित नहीं किए गए हैं।

मई से जारी है मणिपुर में हिंसा

3 मई को आदिवासी समाज की एक रैली के बाद मणिपुर में हिंसा भड़क गई थी। ये रैली मणिपुर में मैतेई समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के अदालत के आदेश के विरोध में निकाली गई थी। इसके बाद भड़की जातीय हिंसा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं। 50 हजार से ज्यादा लोगों को घरों से निकलकर आश्रय स्थलों में शरण लेनी पड़ी है। मणिपुर में 5 अगस्त को पांच और लोगों की मौत के बाद 800 और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

कन्‍नड़ एक्‍टर विजय राघवेंद्र की पत्‍नी स्‍पंदना की 41 की उम्र में मौत, थाइलैंड में आया हार्ट अटैक


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मनोरंजन जगत से दुखद खबर सामने आई है। कन्नड़ के मशहूर एक्टर विजय राघवेंद्र पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनकी पत्नी स्पंदना राघवेंद्र की हार्ट अटैक से मौत हो गई है। स्पंदना की मौत बेंकॉक के अस्पताल में हुई। इस खबर के सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

विजय राघवेंद्र की पत्नी अभी महज 41 साल की थी। जब उन्हें हार्ट अटैक आया तब स्पंदना अपने परिवार के साथ थाइलैंड में थीं। हालांकि, उन्हें हार्ट अटैक कैसे आया, इस बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिली है। लेकिन कहा जा रहा है कि उनका ब्लड प्रेशर कम था, जिसकी वजह से हार्ट अटैक आ गया।

विजय राघवेंद्र फिलहाल बेंगलुरु में हैं। वह वहां अपनी फिल्म Kadda के प्रमोशन के लिए गए थे, लेकिन पत्नी की मौत के कारण फिल्म का प्रमोशन रोक दिया गया है। विजय राघवेंद्र की पत्नी के पार्थिव शरीर को 8 अगस्त को बेंगलुरु लाया जा सकता है।

बता दें, विजय राघवेंद्र और स्पंदना की शादी 2007 में हुई थी और उनका एक बेटा और बेटी भी है। स्पंदना 2016 में आई फिल्म 'अपूर्वा' में नजर आई थी। वहीं, विजय राघवेंद्र की बात करें, तो वह कन्नड़ सिनेमा के स्टार रहे डॉ. राजकुमार के भांजे और प्रोड्यूसर एस.ए. चिन्नी गोड़ा के बेटे हैं। उनकी अपमकिंग फिल्म Kadda 25 अगस्त को रिलीज होगी।

उत्तरप्रदेश में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो साल की सजा पाए भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को आगरा की जिला अदालत ने दी बड़ी राहत


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एमपी-एमएलए कोर्ट से दो साल की सजा पाए भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया को आगरा की जिला अदालत ने सोमवार को बड़ी राहत दी। दो साल की सजा मिलने के बाद रामशंकर कठेरिया की लोकसभा सदस्यता जाना तय माना जा रहा था लेकिन सोमवार को जिला अदालत के आदेश के बाद उनकी सांसदी जाते-जाते बच गई। भाजपा सांसद को अगर सजा होती तो वह अगले आठ साल तक चुनाव भी नहीं लड़ पाते।

आगरा की जिला अदालत ने सोमवार को सुनाए फैसले में सजा पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा, जब तक अपील का निस्तारण नहीं हो जाता तब तक उनकी सजा पर रोक बरकरार रहेगी। बता दें कि दो दिन पहले मारपीट और बलवे के मामले में आगरा की एमपी/एमएलए कोर्ट ने रामशंकर कठेरिया को दो साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, सांसद को तुरंत जमानत भी मिल गई थी। सांसद ने एमपी एमएलए कोर्ट के फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी थी।

लोकसभा सदस्यता जाने का बढ़ गया था खतरा

एमपीएलए कोर्ट से दो साल की सजा मिलने के बाद रामशंकर कठेरिया की सांसदी पर खतरा बढ़ गया था। हालांकि सोमवार को जिला अदालत ने अपील के निस्तारण होने तक सजा पर रोक लगाई तो रामशंकर कठेरिया को बड़ी राहत मिली। कानून के जानकारों की मानें तो अगर एमपीएमएल के कोर्ट से मिली दो साल की सजा पर जिला अदालत भी हामी भरती तो उनकी लोकसभा सदस्यता जा सकती थी। साथ ही वह अगले आठ साल तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ पाते। रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपुल्स एक्ट 1951 की धारा 8 (3) के अनुसार अगर किसी सांसद या विधायक को किसी अपराध में दोषी ठहराया जाता है और उसे दो साल या इससे ज्यादा समय के लिए सजा सुनाई जाती है तो उसकी संसद या विधानसभा की सदस्यता ख़त्म हो जाती है। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी कहते हैं कि सजा पूरी होने के बाद भी वह अगले छह साल तक चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाता। यानी सजा शुरू होने के बाद आठ साल तक चुनाव नहीं लड़ पाता, लेकिन इसी एक्ट की धारा 8 (4) कहती है कि सदस्यता तुरंत ख़त्म नहीं होती। अपील कोर्ट भी सजा पर स्टे कर दे तब भी सदस्यता समाप्ति के नियम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क तब पड़ता है, जब अपील कोर्ट इस केस में दोष सिद्धि को ही गलत ठहरा दे, या इस पर स्टे दे दे।

अब तक किन नेताओं को गंवानी पड़ी सदस्यता?

सांसद रामशंकर कठेरिया पहले नेता नहीं हैं, जो किसी मामले में फंसे हैं। इससे पहले कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव सजा पाने के बाद अपनी संसद सदस्यता गंवा चुके हैं। वहीं, एमबीबीएस सीट घोटाले में चार साल की सजा पाने के बाद कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य काजी रशीद अपनी सदस्यता गंवा चुके हैं। हमीरपुर के विधायक अशोक कुमार सिंह चंदेल, कुलदीप सेंगर और अब्दुल्ला आज़म को भी इसी एक्ट के तहत अपनी सदस्यता से हाथ धोना पड़ा है।

रशीद मसूद (कांग्रेस) को साल 2013 में एमबीबीएस सीट घोटाले में दोषी ठहराया गया और उन्हें राज्यसभा की अपनी सदस्यता गंवानी पड़ी। लालू प्रसाद यादव को भी साल 2013 में चारा घोटाले में दोषी ठहराया गया और उनकी भी लोकसभा की सदस्यता समाप्त हो गई। उस समय वे बिहार में सारण से सांसद थे। जनता दल यूनाइटेड के जगदीश शर्मा भी चारा घोटाले के मामले में दोषी ठहराए गए और 2013 में उन्हें भी लोकसभा की सदस्यता छोड़नी पड़ी। उस समय वे बिहार के जहानाबाद से सांसद थे।

समाजवादी पार्टी के नेता आज़म ख़ान को एक मामले में दोषी होने के बाद विधानसभा की सदस्यता गंवानी पड़ी थी। रामपुर की एक अदालत ने उन्हें साल 2019 के एक हेट स्पीच के मामले में दोषी ठहराया था और तीन साल की सज़ा सुनाई थी। सपा नेता आज़म ख़ान के बेटे अब्दुल्ला आज़म की भी विधानसभा सदस्यता रद्द हुई। चुनाव लड़ते समय उन्होंने अपनी उम्र अधिक बताते हुए गलत शपथपत्र दिया था। उत्तर प्रदेश में बीजेपी के विधायक रहे विक्रम सैनी की भी सदस्यता ख़त्म कर दी गई थी। उन्हें 2013 के दंगा मामले में दो साल की सज़ा दी गई थी।

दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में पेश, कवि दिनकर की कविता का जिक्र कर राघव चड्ढा ने बीजेपी को घेरा

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दिल्ली सेवा बिल को आज राज्यसभा में पेश किया गया।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली सेवा बिल पेश किया।बिल पर चर्चा हो रही है। सभी सांसद बिल पर अपना-अपना पक्ष रख रहे हैं। हालांकि इस दौरान कांग्रेस की तरफ से बोलते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने बिल का विरोध करते हुए इसे असंवैधानिक बताया और कहा कि ये बिल खौफ पैदा करने वाला बिल है। वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने अपनी पार्टी की बात रखी।उन्होंने बिल का विरोध करते हुए मोदी सरकार पर निशाना साधा।

आप सांसद राघव चड्ढा ने कवि रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।राघव चड्ढा ने कहा, मैं केवल दिल्ली के लोगों की ओर से नहीं बल्कि पूरे देश की जनता की तरफ से बोल रहा हूं। आज से पहले शायद ही कभी असंवैधानिक, गैर कानूनी कागज का टुकड़ा बिल के माध्यम से सदन में लाया गया होगा।आम आदमी पार्टी के सांसद ने कहा, मैं महाभारत के अंश का जिक्र करना चाहूंगा जिसे कवि रामधारी सिंह दिनकर ने एक बड़ी अच्छी कविता में लिखकर बताया है। जिसमें भगवान श्री कृष्ण एक शांति दूत बनकर पाड़वों की ओर से शांति का प्रस्ताव लेकर हस्तिनापुर गए थे।

आप सांसद ने संसद में दिनकर की कविता पढ़ते हुए कहा, दुर्योधन को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को, भगवान हस्तिनापुर आए, पांडव का संदेशा लाये. दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो, तो दे दो केवल पांच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम। उन्होंने आगे सुनाया, हम वहीं खुशी से खायेंगे, परिजन पे असी ना उठाएंगे। दुर्योधन वह भी दे ना सका, आशीष समाज की न ले सका उलटे हरि को बांधने चला, जो था असाध्य साधने चला। जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।

राघव चड्ढा ने कहा कि ये बिल राजनीतिक धोखा

आप सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि सभापति को संबोधित करते हुए कहा कि हम न्याय मांगने के लिए आपके सामने आए हैं। जो हमारा हक है हम वो मांगने आए हैं। राघव चड्ढा ने कहा कि ये बिल राजनीतिक धोखा है। 1989 से लेकर 2015 तक बीजेपी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग करती आई। 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने कहा था कि वो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएगी। इतने साल होते-होते मैं बीजेपी का 1989 का मेनिफेस्टो लाया हूं। यानि 1989 से लेकर बीजेपी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग करती रही है।

बीजेपी ने वाजपेयी-आडवाणी की मेहनत को मिट्टी में मिलाया-राघव चड्ढा

उन्होंने कहा कि 1991 में मुदन लाल खुराना, लाल कृष्ण आडवाणी ने बयान दर्ज कराए थे कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए। इसके लिए हम आंदोलन भी करेंगे। लगातार इन लोगों ने संघर्ष किया और आंदोलन किया। आप सांसद ने कहा कि 1998-99 में बीजेपी ने फिर से अपने मेनिफेस्टो में कहा कि वो दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाएगी। इन लोगों ने दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया। और अंत में वो दिन आया जब वाजपेयी सरकार के उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी सदन में दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने वाला बिल लाए। इस बिल को लाते हुए आडवाणी जी ने कहा था कि दिल्ली को अधिकार देने की जरूरत है। आज बीजेपी ने अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी जी की दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की 40 साल की मेहनत को मिट्टी में मिला दिया है।

नेहरूवादी मत बनिए, आडवाणीवादी, वाजपेयीवादी बनिए-राघव चड्ढा

आप सांसद ने कहा,जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलना चाहिए। मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कहना चाहूंगा कि आप नेहरूवादी मत बनिए, आडवाणीवादी, वाजपेयीवादी बनिए। आज आपके पास दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का ऐतिहासिक मौका है, ये काम करिए।

बेंगलुरु में 60 फ्लाई ओवर होने के बावजूद बेहाल ट्रैफिक, हर साल हो रहा 19,725 करोड़ रुपये का नुकसान; स्टडी में दावा

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बेंगलुरु में केवल ट्रैफिक के कारण हर साल 19,725 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। एक स्टडी में यह दावा किया गया है। यातायात में देरी, भीड़भाड़, सिग्नलों के रुकने, समय की हानि, ईंधन की हानि इसके प्रमुख कारण है। प्रसिद्ध यातायात और गतिशीलता विशेषज्ञ एमएन श्रीहरि और उनकी टीम ने ये अनुमान जताया है। परिवहन के लिए कई सरकारों और स्मार्ट शहरों के सलाहकार श्रीहरि ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक रिपोर्ट सौंपी है। इस रिपोर्ट में यातायात प्रबंधन, सड़क योजना, फ्लाईओवर और अन्य चीजों की सिफारिशें शामिल हैं।

फ्लाईओवर होने के बावजूद हाल-बेहाल

बेंगलुरु में 60 फ्लाईओवर होने के बावजूद, श्रीहरि और उनकी टीम ने पाया कि आईटी हब को देरी, भीड़भाड़, सिग्नल, तेज गति से धीमी गति से चलने वाले वाहनों के कारण 19,725 करोड़ रुपये का नुकसान होता है। रिपोर्ट के अनुसार, आईटी क्षेत्र में बढ़ती नौकरी के कारण आवास, शिक्षा जैसी सभी संबंधित सुविधाओं में वृद्धि हुई है। इसके परिणामस्वरूप जनसंख्या में 14.5 मिलियन की तेजी से वृद्धि हुई और वाहन जनसंख्या 1.5 करोड़ के करीब हो गई है।

क्या कहता है रिपोर्ट?

रिपोर्ट में कहा गया है कि बेंगलुरु 2023 में 88 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 985 वर्ग किलोमीटर हो गया है। इसे 1,100 वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करने का भी प्रस्ताव है। दूसरी ओर,सड़क की कुल लंबाई लगभग 11,000 किलोमीटर है जो परिवहन मांग और यात्राओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। देरी, भीड़, उच्च यात्रा समय और प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लागत के मामले में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

श्रीहरि ने शहर के रेडियल, बाहरी और परिस्थितिजन्य विकास के अनुरूप सड़कों की योजना बनाने और निर्माण करने की आवश्यकता पर जोर दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा सीआरएस (कम्यूटर रेल सिस्टम) को भी भारतीय रेलवे ने बेंगलुरु के परिवहन नेटवर्क का समर्थन करने की अनुमति दी है।

क्या दिए गए सुझाव?

यातायात को कम करने के लिए, टीम ने सड़क के किनारे की पार्किंग को हटाने का सुझाव दिया है।

श्रीहरि ने कहा कि एक परिवहन विशेषज्ञ के रूप में, 'मैं बेंगलुरु में पार्किंग के बिना एक भी सड़क दिखाने में विफल रहा हूं।'

मेट्रो, मोनोरेल, उच्च क्षमता वाली बसों जैसे बड़े पैमाने पर परिवहन में वृद्धि की सिफारिश

कैमरा और सेंसर सिस्टम के अलावा पर्याप्त व्यक्तिगत तैनाती करें

अगले 10 वर्षों में हवाई परिवहन को प्रोत्साहित करने का भी सुझाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए निजी परिवहन को हतोत्साहित करने और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित किए जाने का सुझाव

पहले श्री गणेश और अब भगवान परशुराम का अपमान..! केरल की वामपंथी सरकार पर हमलावर हुई भाजपा

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भाजपा के राष्ट्रीय सचिव अनिल के एंटनी ने हिंदू देवताओं का अपमान करने के लिए केरल की पिनाराई विजयन सरकार पर निशाना साधा है। स्थानीय समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए, भाजपा नेता अनिल एंटनी ने कहा कि यह निराशाजनक और चौंकाने वाला है कि केरल की सत्तारूढ़ पार्टी के शीर्ष नेता लगातार दुनिया भर में करोड़ों हिंदू विश्वासियों की भावनाओं का अपमान कर रहे हैं।

उन्होंने रविवार को ट्वीट करते हुए लिखा कि, 'कुछ दिन पहले केरल विधानसभा के अध्यक्ष श्री. शमसीर ने भगवान गणेश को मिथ्या कहकर उनका अपमान किया। आज एक और वरिष्ठ CPIM Kerala नेता श्री पी जयराजन ने भी कुछ इसी तरह की बात करके भगवान परशुराम का अपमान किया है। यह देखना बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाला है कि केरल की सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेता अपनी अल्पकालिक राजनीतिक लाभ के लिए और अल्पसंख्यकों के एक निश्चित वर्ग को खुश करने के लिए दुनिया भर में करोड़ों हिंदू विश्वासियों की भावनाओं का लगातार अपमान कर रहे हैं, जिन्हें वे अपने महत्वपूर्ण वोट बैंक के रूप में देखते हैं। उन सभी को अपने बयानों के लिए बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।'

उन्होंने आगे लिखा कि, 'क्या कोई अन्य I.N.D.I.A. राहुल गाँधी और कांग्रेस सहित इस पार्टी के साथ मंच साझा करने वाले गठबंधन सहयोगी इन विचारों का समर्थन करते हैं? क्या कोई इन्हें सही करने/इन बयानों को खारिज करने को तैयार है?' एंटनी का यह बयान कन्नूर के वरिष्ठ CPI (M) नेता पी जयराजन द्वारा 5 अगस्त, शनिवार को कासरगोड में भाषण देते समय कथित तौर पर भगवान परशुराम का अपमान करने के एक दिन बाद आया है। जयराजन ने कहा था कि भगवान परशुराम एक मिथक हैं और केरल की उत्पत्ति की कहानी ब्राह्मणों द्वारा गढ़ी गई है। जातिवादी टिप्पणी करते हुए, जयराजन ने कहा कि केरल मूल की कहानी "ब्राह्मणों द्वारा लोगों को गुलाम बनाने और पूरे केरल में ब्राह्मणों को अधिकार देने के लिए गढ़ी गई थी।" उन्होंने केरल की उत्पत्ति के बारे में हिंदू मान्यता को भी मिथक करार दिया।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई को केरल विधानसभा अध्यक्ष एएन शमसीर ने एर्नाकुलम के एक स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान भाषण देते हुए हिंदू देवता भगवान गणेश के लिए इसी तरह की अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि केंद्र को बच्चों को हिंदू मिथकों के बजाय विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उपलब्धियों के बारे में पढ़ाना चाहिए। उन्होंने "हिंदू मिथकों" को सामने लाने के लिए उदाहरण के तौर पर भगवान गणेश और पुष्पक विमान का इस्तेमाल किया था। हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया, इस सवाल के जवाब में शमसीर ने कहा कि राइट बंधुओं ने। उन्होंने कहा कि हिंदू पुष्पक विमान को पहला हवाई जहाज मानते हैं, जैसा कि रामायण में बताया गया है। इसके बाद उन्होंने भगवान गणेश की कहानी को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हिंदुओं का मानना है कि उन्होंने अपना हाथी का चेहरा प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से प्राप्त किया था, जिसे उन्होंने एक मिथक कहा। शमसीर ने कहा कि, ''केंद्र सरकार विज्ञान की जगह ऐसे मिथकों को बढ़ावा दे रही हैं। ''

इसके बाद भाजपा द्वारा एक शिकायत दर्ज की गई थी और टिप्पणियों का नायर सर्विस सोसाइटी (NSS) द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया था, जिसने 2 अगस्त को "विश्वास संरक्षण दिवस" ​​का आयोजन किया था। संगठन ने अपने सभी सदस्यों को गणेश मंदिरों में जाने के लिए कहा था। बाद में उन पर केरल सरकार द्वारा "गैरकानूनी सभा" के लिए मामला दर्ज किया गया। NSS महासचिव जी सुकुमारन नायर ने कथित तौर पर कहा था कि, “यह मूर्खतापूर्ण है, इसके बारे में उन्हें किसे पता चला? ये लोग कहते हैं कि जन्नत में जाओ तो वहां हूरें होती हैं, कौन जन्नत गया और लौटकर उन्हें बताया कि जन्नत में हूरियां हैं? इसलिए उस पर टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है।' 

भाजपा ने भी केरल विधानसभा अध्यक्ष से बिना शर्त माफी की मांग करते हुए कहा था कि CPM नेता ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। शमसीर ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि वह किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं। हालाँकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि उन्होंने विज्ञान को "हिंदू" मिथकों के खिलाफ खड़ा किया और इस तरह केवल हिंदू धर्म को ही निशाना बनाया। शमसीर के अपमानजनक बयान पर विवाद बढ़ने के बीच, केरल CPIM के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने भी कहा कि भगवान गणेश एक मिथक हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जब उनसे अल्लाह के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि सभी मान्यताएं मिथक नहीं हैं। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा की गई विवादास्पद टिप्पणी पर एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, गोविंदन ने कहा कि, “क्या गणपति विज्ञान हैं? आइये मिथकों को मिथक के रूप में ही देखें। केरल का गठन भी एक मिथक है, है ना? हम विश्वासियों के ख़िलाफ़ नहीं हैं।'

 जब उनसे पूछा गया कि क्या अल्लाह एक मिथक है, तो उन्होंने कहा कि, “मैंने यह नहीं कहा कि सभी भगवान मिथक हैं। हिंदुओं के विपरीत, मुसलमानों के पास हज़ारों भगवान नहीं हैं। वे एक उच्च अवधारणा एकल ईश्वर में विश्वास करते हैं।' केरल विधानसभा में आज हंगामा होने की संभावना है क्योंकि भाजपा ने हिंदू आस्था को निशाना बनाने वाले नेताओं की लगातार विवादास्पद टिप्पणियों पर सीपीआई (एम) सरकार को घेरने की योजना बनाई है। यहाँ ये भी गौर करने वाली बात है कि, केरल में कांग्रेस भी सक्रीय है, लेकिन इन मुद्दों पर वो बिलकुल खामोश है, हालाँकि, अन्य धर्मों पर टिप्पणी होने पर कांग्रेस फ़ौरन प्रतिक्रिया देती है।