ब्रिक्स समिट: 11-13 सितंबर तक दिल्ली जुटेंगे दिग्गज, पुतिन-जिनपिंग समेत आएंगे 10 देशों के मेहमान

#bricssummit2026delhi1113september

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है।

पुतिन और जिनपिंग आ सकते हैं दिल्ली

11 से 13 सितंबर तक होने जा रहे इस आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और डेलीगेट्स आएंगे। इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे। इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं।

ब्रिक्स देशों में कितने नाम?

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे।

यातायात व्यवस्था को लेकर एडवाइजरी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व यातायात व्यवस्था के संबंध में एक नई और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।राष्ट्रीय राजधानी के लिए जारी इस एडवाइजरी में, दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के दौरान राजधानी और उसके आसपास की कुछ सड़कों पर ट्रैफिक को अस्थायी रूप से नियंत्रित या डायवर्ट कियाएगा। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर नागरिकों से अपील की है कि वे शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले रूट डायवर्जन को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की प्लानिंग करें।

Homeopathy in Hyderabad for Eczema: Supporting Healthier Skin

Learn about homeopathy in Hyderabad for eczema, including common symptoms, triggers, personalized care, skincare guidance, and holistic support for recurring concerns.

Introduction

Eczema is a skin condition that can cause repeated periods of itching, dryness, redness, inflammation, and irritation. It may affect children as well as adults and can occur on the face, hands, elbows, knees, neck, or other areas. When symptoms continue or frequently return, they may affect comfort, sleep, and quality of life. Those considering homeopathy in Hyderabad for eczema may benefit from an individualized consultation focused on their unique symptoms.

Recognizing Eczema Symptoms

Eczema does not look exactly the same in everyone. Depending on the individual, symptoms may include:

  • Persistent or intense itching
  • Dry, rough, or flaky skin
  • Red or inflamed patches
  • Skin sensitivity and irritation
  • Small bumps or affected areas
  • Cracks or burning sensations
  • Thickened skin from frequent scratching

Symptoms can vary in intensity and may become more noticeable during periods of increased irritation.

Why Does Eczema Occur?

Eczema can be associated with a combination of genetic, immune, and environmental factors. Everyday exposure to certain irritants may contribute to flare-ups. Possible triggers include dry weather, excessive sweating, dust, stress, soaps, detergents, fragrances, skincare products, allergens, and rough fabrics.

Understanding when and where flare-ups occur can help identify individual patterns and support better skin-care practices.

Homeopathy Treatment for Eczema

Homeopathy in Hyderabad may provide a personalized approach for people dealing with recurring eczema. During a consultation, the overall nature of the complaint may be assessed, including the location of affected areas, type and intensity of itching, duration of symptoms, factors that worsen or improve the condition, lifestyle habits, and general health history.

A personalized approach to homeopathy in Hyderabad considers the individual rather than focusing solely on the visible skin changes. Along with professional guidance, simple measures such as regular moisturizing, gentle cleansing, avoiding known irritants, adequate hydration, sufficient sleep, stress management, and a balanced lifestyle can support skin health.

Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy offers personalized consultation for chronic and recurring health concerns. For people seeking homeopathy in Hyderabad for eczema, the consultation considers individual symptoms, health history, lifestyle, and possible triggers. Spiritual Homeopathy has branches in KPHB, Dilsukhnagar, Chandanagar, and Nallagandla.

If you are exploring homeopathy in Hyderabad for recurring eczema symptoms, professional consultation can help you understand your concerns and available care options.

Contact Spiritual Homeopathy at 9069176176 to schedule your consultation.

दिल्ली में 12-13 सितंबर को जुटेगा BRICS का शीर्ष नेतृत्व
- भारत की मेजबानी में 18वां शिखर सम्मेलन, गुटेरेस होंगे शामिल; पुतिन, जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति के आने की भी संभावना

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इन नेताओं की संभावित मौजूदगी से शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
BRICS सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वैश्विक विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की मेजबानी में होने वाली यह बैठक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नजरें रहेंगी। भारत BRICS के मंच के जरिए विकासशील देशों के हितों और वैश्विक सहयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखने की तैयारी में है।
एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

गोल्डन जुबली संस्करण): एशिया के सबसे बड़े कालीन मेले की तैयारियां तेज*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) द्वारा वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से कारपेट एक्सपो मार्ट, कारपेट सिटी, भदोही में 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो–2026 का आयोजन 04 से 07 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। यह आयोजन भारतीय हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट बुनाई कौशल और आधुनिक डिजाइन को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है।
इंडिया कारपेट एक्सपो अंतरराष्ट्रीय कालीन खरीदारों, एजेंटों, आर्किटेक्ट्स, डिजाइनरों तथा भारतीय कालीन निर्माताओं और निर्यातकों को एक ही मंच पर लाकर व्यापारिक संपर्क एवं दीर्घकालीन व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष आयोजित होने वाला एक्सपो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इंडिया कारपेट एक्सपो का 50वां और गोल्डन जुबली संस्करण है।
56 देशों से 400 विदेशी खरीदारों के आने की संभावना
50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में लगभग 56 देशों से 400 विदेशी खरीदारों तथा करीब 350 खरीदार प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से देश के विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम निर्यातकों को अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रदर्शित करने, नए बाजार तलाशने तथा व्यापारिक अवसर बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे कालीन उद्योग से जुड़े लाखों कारीगरों और बुनकरों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिलेगी।
गोल्डन जुबली संस्करण में हाथ से बने कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के प्रमुख भारतीय निर्माता और निर्यातक एक साथ आएंगे। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को भारत के प्रमुख कालीन निर्माण क्लस्टरों से उत्पादों की सोर्सिंग करने तथा नवीनतम कलेक्शन, डिजाइन, रंग संयोजन, कारीगरी और उत्पाद नवाचार को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
BRICS देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा
भारत द्वारा वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाले जाने के अवसर को देखते हुए CEPC द्वारा BRICS सदस्य देशों के खरीदारों को 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित एवं सुविधा प्रदान की जा रही है। इसका उद्देश्य BRICS अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार एवं बिजनेस-टू-बिजनेस लिंकेज को मजबूत करना है।
इस पहल के माध्यम से BRICS देशों जैसे ब्राज़ील रुस  चीन, यू ए इ, साउथ अफ्रीका, इजिप्त, सऊदी अरबिया इत्यादि देशो  के खरीदारों को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के प्रमुख निर्माताओं और निर्यातकों के साथ सीधे जुड़ने, नए सोर्सिंग अवसर तलाशने, भारतीय उत्पादों की विविधता एवं गुणवत्ता को समझने तथा दीर्घकालीन व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे भारतीय कालीन उद्योग के निर्यात बाजार में विविधता आएगी तथा भारत को हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत करने में मदद मिलेगी ।
उद्योग की मांग पर एक्सपो की अवधि चार दिन की गई
कालीन उद्योग की मांग एवं उद्योग जगत से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए, परिषद के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार गोम्बर की अध्यक्षता में आयोजित 210वीं बैठक में इंडिया कारपेट एक्सपो की अवधि को तीन दिन से बढ़ाकर चार दिन करने का निर्णय लिया गया। अब 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन 04 अक्टूबर से 07 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा तथा वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से इस एक्सपो में निर्यातको को सब्सिडी के आधार पर छुट भी दिया जा रहा है।
देश-विदेश के खरीदारों में उत्साह, बायर्स रजिस्ट्रेशन शुरू
50वें इंडिया कारपेट एक्सपो को लेकर देश-विदेश के खरीदारों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में विदेशी खरीदारों के मेले में भाग लेने की संभावना है। खरीदारों की बढ़ती रुचि को देखते हुए परिषद द्वारा बायर्स रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय कालीन निर्माताओं एवं निर्यातकों के साथ सीधे व्यापारिक संपर्क स्थापित कर सकेंगे।
वहीं, इंडिया कारपेट एक्सपो–2026 में भाग लेने वाले भारतीय निर्यातकों के लिए स्टॉल बुकिंग की प्रक्रिया 20  अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे से ऑनलाइन खोली गई थी, जिसके माध्यम से इच्छुक निर्यातकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण एवं स्टॉल बुकिंग कराने का अवसर प्रदान किया गया।
भारतीय कालीन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर
CEPC के अनुसार, 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो भारतीय कालीन उद्योग के लिए विशेष महत्व रखता है। गोल्डन जुबली संस्करण के माध्यम से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की गुणवत्ता, डिजाइन, विविधता और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक खरीदारों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।
परिषद को उम्मीद है कि ICE–50 में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं भारतीय निर्यातकों की भागीदारी होगी। यह आयोजन नए व्यापारिक अवसरों के सृजन, भारतीय कालीनों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा वैश्विक बाजार में भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की पहचान और विश्वसनीयता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
ब्रिक्स समिट: 11-13 सितंबर तक दिल्ली जुटेंगे दिग्गज, पुतिन-जिनपिंग समेत आएंगे 10 देशों के मेहमान

#bricssummit2026delhi1113september

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए तैयार है. ब्रिक्स की अध्यक्षता इस साल भारत कर रहा है और अध्यक्ष के नाते इस बार के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की जिम्मेदारी भी भारत की है। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होना है।

पुतिन और जिनपिंग आ सकते हैं दिल्ली

11 से 13 सितंबर तक होने जा रहे इस आयोजन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, प्रधानमंत्री और डेलीगेट्स आएंगे। इस शिखर सम्मेलन में शिरकत करने के लिए ब्रिक्स के सदस्य देशों के साथ ही कई अन्य कद्दावर भी नई दिल्ली में होंगे। इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नई दिल्ली आ सकते हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी भारत आ सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी इसमें शामिल होने भारत आ सकते हैं।

ब्रिक्स देशों में कितने नाम?

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा ब्रिक्स देशों में साल 2024 में पांच और देश- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जुड़े। 2025 में इंडोनेशिया को भी इस समूह से जोड़ा गया। ऐसे में 11 देशों के इस समूह के प्रतिनिधि भारत की राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगे।

यातायात व्यवस्था को लेकर एडवाइजरी

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व यातायात व्यवस्था के संबंध में एक नई और विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।राष्ट्रीय राजधानी के लिए जारी इस एडवाइजरी में, दिल्ली पुलिस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों की आवाजाही के दौरान राजधानी और उसके आसपास की कुछ सड़कों पर ट्रैफिक को अस्थायी रूप से नियंत्रित या डायवर्ट कियाएगा। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा कर नागरिकों से अपील की है कि वे शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाले रूट डायवर्जन को ध्यान में रखकर अपनी यात्रा की प्लानिंग करें।

Homeopathy in Hyderabad for Eczema: Supporting Healthier Skin

Learn about homeopathy in Hyderabad for eczema, including common symptoms, triggers, personalized care, skincare guidance, and holistic support for recurring concerns.

Introduction

Eczema is a skin condition that can cause repeated periods of itching, dryness, redness, inflammation, and irritation. It may affect children as well as adults and can occur on the face, hands, elbows, knees, neck, or other areas. When symptoms continue or frequently return, they may affect comfort, sleep, and quality of life. Those considering homeopathy in Hyderabad for eczema may benefit from an individualized consultation focused on their unique symptoms.

Recognizing Eczema Symptoms

Eczema does not look exactly the same in everyone. Depending on the individual, symptoms may include:

  • Persistent or intense itching
  • Dry, rough, or flaky skin
  • Red or inflamed patches
  • Skin sensitivity and irritation
  • Small bumps or affected areas
  • Cracks or burning sensations
  • Thickened skin from frequent scratching

Symptoms can vary in intensity and may become more noticeable during periods of increased irritation.

Why Does Eczema Occur?

Eczema can be associated with a combination of genetic, immune, and environmental factors. Everyday exposure to certain irritants may contribute to flare-ups. Possible triggers include dry weather, excessive sweating, dust, stress, soaps, detergents, fragrances, skincare products, allergens, and rough fabrics.

Understanding when and where flare-ups occur can help identify individual patterns and support better skin-care practices.

Homeopathy Treatment for Eczema

Homeopathy in Hyderabad may provide a personalized approach for people dealing with recurring eczema. During a consultation, the overall nature of the complaint may be assessed, including the location of affected areas, type and intensity of itching, duration of symptoms, factors that worsen or improve the condition, lifestyle habits, and general health history.

A personalized approach to homeopathy in Hyderabad considers the individual rather than focusing solely on the visible skin changes. Along with professional guidance, simple measures such as regular moisturizing, gentle cleansing, avoiding known irritants, adequate hydration, sufficient sleep, stress management, and a balanced lifestyle can support skin health.

Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy offers personalized consultation for chronic and recurring health concerns. For people seeking homeopathy in Hyderabad for eczema, the consultation considers individual symptoms, health history, lifestyle, and possible triggers. Spiritual Homeopathy has branches in KPHB, Dilsukhnagar, Chandanagar, and Nallagandla.

If you are exploring homeopathy in Hyderabad for recurring eczema symptoms, professional consultation can help you understand your concerns and available care options.

Contact Spiritual Homeopathy at 9069176176 to schedule your consultation.

दिल्ली में 12-13 सितंबर को जुटेगा BRICS का शीर्ष नेतृत्व
- भारत की मेजबानी में 18वां शिखर सम्मेलन, गुटेरेस होंगे शामिल; पुतिन, जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति के आने की भी संभावना

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन होगा। सम्मेलन में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दुनिया के प्रमुख नेताओं के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस भी शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इन नेताओं की संभावित मौजूदगी से शिखर सम्मेलन का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
BRICS सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, वैश्विक विकास और बहुपक्षीय व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श हो सकता है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की मेजबानी में होने वाली यह बैठक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नजरें रहेंगी। भारत BRICS के मंच के जरिए विकासशील देशों के हितों और वैश्विक सहयोग को लेकर अपनी प्राथमिकताओं को प्रमुखता से रखने की तैयारी में है।
एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

चीन जा रहे हैं अजीत डोभाल, जानें क्यों अहम है NSA का बीजिंग दौरा?

#nsaajitdovalvisitto_china

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चीन जा रहे हैं। अजीत डोभाल आज बिजिंग के लिए रवाना हो चुके हैं। वे मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ 25वें दौर की स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेंगे। इस हाईलेवल मीटिंग का मुख्य फोकस वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिरता बहाल करने और दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद का शांतिपूर्ण हल निकालने पर रहेगा।

2003 में शुरू हुई थी ये वार्ता

मंगलवार को चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा विवाद पर 'विशेष प्रतिनिधियों' (SR) की वार्ता के 25वें दौर के लिए बैठक करेंगे। डोभाल और वांग 'विशेष प्रतिनिधियों' के तौर पर काम करते हैं। यह व्यवस्था 2003 में शुरू हुई थी, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा के विवाद को सुलझाना था।

गलवान झड़प के बाद पांच साल बंद रही वार्ता

2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प और उसके बाद पूर्वी लद्दाख में बने तनावपूर्ण हालात के कारण यह बातचीत लगभग पांच साल तक रुकी रही। यह बातचीत दिसंबर 2024 में फिर से शुरू हुई, जब बीजिंग में 23वां दौर हुआ। इसके बाद 24वां दौर पिछले साल अगस्त में नई दिल्ली में हुआ था।

एजेंडा में क्या-क्या हो सकता है

उम्मीद है कि दोनों पक्ष अक्टूबर 2024 के डिसइंगेजमेंट (सेना पीछे हटाने के) समझौते का जायजा लेंगे। क्या पिछली बातचीत के बाद से 'लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल' (LAC) पर शांति बनी हुई है? बीजिंग का कहना है कि बॉर्डर पर हालात "आमतौर पर स्थिर" हैं, दोनों पक्षों के अधिकारियों का कहना है कि 24वें दौर की बातचीत के बाद से वे समझौते पर अमल करने और अगली बैठक की तैयारी में जुटे रहे हैं

बेहद अहम है डोबाल का ये दौरा

यह बातचीत कूटनीतिक लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि जल्द ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आने वाले हैं। 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट के लिए शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले एक सकारात्मक माहौल बनाना और सीमा पर तनाव कम करना है। इनमें सीमा प्रबंधन, आपसी भरोसा बढ़ाने वाले उपाय और सीमा-पार सहयोग जैसे मुद्दे भी शामिल होंगे। हालांकि, बीजिंग और नई दिल्ली ने चीनी राष्ट्रपति शी के शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि वह आएंगे। उनके दौरे से समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात का रास्ता बन सकता है।

गोल्डन जुबली संस्करण): एशिया के सबसे बड़े कालीन मेले की तैयारियां तेज*

रिपोर्टर -‌ नितेश श्रीवास्तव

भदोही। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (CEPC) द्वारा वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से कारपेट एक्सपो मार्ट, कारपेट सिटी, भदोही में 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो–2026 का आयोजन 04 से 07 अक्टूबर 2026 तक किया जा रहा है। यह आयोजन भारतीय हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, उत्कृष्ट बुनाई कौशल और आधुनिक डिजाइन को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है।
इंडिया कारपेट एक्सपो अंतरराष्ट्रीय कालीन खरीदारों, एजेंटों, आर्किटेक्ट्स, डिजाइनरों तथा भारतीय कालीन निर्माताओं और निर्यातकों को एक ही मंच पर लाकर व्यापारिक संपर्क एवं दीर्घकालीन व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्रदान करता है। इस वर्ष आयोजित होने वाला एक्सपो विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इंडिया कारपेट एक्सपो का 50वां और गोल्डन जुबली संस्करण है।
56 देशों से 400 विदेशी खरीदारों के आने की संभावना
50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में लगभग 56 देशों से 400 विदेशी खरीदारों तथा करीब 350 खरीदार प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी से देश के विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम निर्यातकों को अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रदर्शित करने, नए बाजार तलाशने तथा व्यापारिक अवसर बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे कालीन उद्योग से जुड़े लाखों कारीगरों और बुनकरों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसरों को भी मजबूती मिलेगी।
गोल्डन जुबली संस्करण में हाथ से बने कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के प्रमुख भारतीय निर्माता और निर्यातक एक साथ आएंगे। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को भारत के प्रमुख कालीन निर्माण क्लस्टरों से उत्पादों की सोर्सिंग करने तथा नवीनतम कलेक्शन, डिजाइन, रंग संयोजन, कारीगरी और उत्पाद नवाचार को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
BRICS देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मिलेगा बढ़ावा
भारत द्वारा वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाले जाने के अवसर को देखते हुए CEPC द्वारा BRICS सदस्य देशों के खरीदारों को 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित एवं सुविधा प्रदान की जा रही है। इसका उद्देश्य BRICS अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार एवं बिजनेस-टू-बिजनेस लिंकेज को मजबूत करना है।
इस पहल के माध्यम से BRICS देशों जैसे ब्राज़ील रुस  चीन, यू ए इ, साउथ अफ्रीका, इजिप्त, सऊदी अरबिया इत्यादि देशो  के खरीदारों को भारतीय हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के प्रमुख निर्माताओं और निर्यातकों के साथ सीधे जुड़ने, नए सोर्सिंग अवसर तलाशने, भारतीय उत्पादों की विविधता एवं गुणवत्ता को समझने तथा दीर्घकालीन व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने का अवसर मिलेगा। इससे भारतीय कालीन उद्योग के निर्यात बाजार में विविधता आएगी तथा भारत को हस्तनिर्मित कालीन एवं फ्लोर कवरिंग के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक सोर्सिंग डेस्टिनेशन के रूप में और मजबूत करने में मदद मिलेगी ।
उद्योग की मांग पर एक्सपो की अवधि चार दिन की गई
कालीन उद्योग की मांग एवं उद्योग जगत से प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए, परिषद के अध्यक्ष श्री मुकेश कुमार गोम्बर की अध्यक्षता में आयोजित 210वीं बैठक में इंडिया कारपेट एक्सपो की अवधि को तीन दिन से बढ़ाकर चार दिन करने का निर्णय लिया गया। अब 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन 04 अक्टूबर से 07 अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा तथा वाणिज्य मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से इस एक्सपो में निर्यातको को सब्सिडी के आधार पर छुट भी दिया जा रहा है।
देश-विदेश के खरीदारों में उत्साह, बायर्स रजिस्ट्रेशन शुरू
50वें इंडिया कारपेट एक्सपो को लेकर देश-विदेश के खरीदारों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। विभिन्न देशों से बड़ी संख्या में विदेशी खरीदारों के मेले में भाग लेने की संभावना है। खरीदारों की बढ़ती रुचि को देखते हुए परिषद द्वारा बायर्स रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार भारतीय कालीन निर्माताओं एवं निर्यातकों के साथ सीधे व्यापारिक संपर्क स्थापित कर सकेंगे।
वहीं, इंडिया कारपेट एक्सपो–2026 में भाग लेने वाले भारतीय निर्यातकों के लिए स्टॉल बुकिंग की प्रक्रिया 20  अगस्त 2026 को प्रातः 11:30 बजे से ऑनलाइन खोली गई थी, जिसके माध्यम से इच्छुक निर्यातकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पंजीकरण एवं स्टॉल बुकिंग कराने का अवसर प्रदान किया गया।
भारतीय कालीन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण अवसर
CEPC के अनुसार, 50वां इंडिया कारपेट एक्सपो भारतीय कालीन उद्योग के लिए विशेष महत्व रखता है। गोल्डन जुबली संस्करण के माध्यम से भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों की गुणवत्ता, डिजाइन, विविधता और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक खरीदारों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।
परिषद को उम्मीद है कि ICE–50 में बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों एवं भारतीय निर्यातकों की भागीदारी होगी। यह आयोजन नए व्यापारिक अवसरों के सृजन, भारतीय कालीनों के निर्यात को बढ़ावा देने तथा वैश्विक बाजार में भारतीय हस्तनिर्मित कालीन उद्योग की पहचान और विश्वसनीयता को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।