गोविंदपुर ग्लोबल स्कूल ऑफ़ इंडिया में GSI शाहीन' का भव्य शुभारंभ: ग्रामीण छात्रों के लिए NEET-JEE की राह हुई आसान
धनबाद, कोयलांचल की शैक्षणिक धरती धनबाद के गोविंदपुर में आज शिक्षा के एक नए अध्याय की शुरुआत हुई। ग्लोबल स्कूल ऑफ़ इंडिया इंडिया परिसर में, ग्लोबल स्कूल ऑफ करियर इंस्टीच्यूट (GSI) शाहीन का विधिवत उद्घाटन हुआ. यह संस्थान ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी छात्रों के लिए NEET और JEE की तैयारी हेतु एक मील का पत्थर साबित होगा। ALLEN के सहयोग और शाहीन संस्थान समूह की संयुक्त पहल से यह संचालित होगा।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो और शाहीन ग्रुप के चेयर मैंन (इंजीनियर) अब्दुल कादिर के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
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इस गरिमामयी अवसर पर शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें डॉ. दिनेश गरिंदोरिया, प्रो. एस. के. एल. दास और जिला परिषद सदस्य सोहराब अंसारी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
संस्थान के निदेशक डॉ. एस खालिद ने विजन स्पष्ट करते हुए कहा कि GSI शाहीन का मुख्य उद्देश्य आर्थिक और भौगोलिक बाधाओं को दूर करना है। यहाँ कोटा- की तर्ज पर नींट औऱ औऱ इंजिनियरिंग कॉलेज के लिए तैयारी की आवासीय व्यवस्था के साथ-साथ ऑनलाइन और ऑफलाइन कोचिंग की सुविधा दी जाएगी, ताकि ग्रामीण छात्र भी डॉक्टर, इंजीनियर और IPS जैसे शीर्ष पदों तक पहुँच सकें।
इस अवसर पर विधायक चंद्रदेव महतो ने अपने संबोधन में कहा कि
"यह पहल विशेष रूप से हमारी ग्रामीण बेटियों के लिए वरदान साबित होगी। अब उन्हें उच्च शिक्षा के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बनेंगी और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगी।"
समारोह में वक्ताओं ने GSI शाहीन और अलीगढ़ कॉलेज के समन्वय को धनबाद के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। जिला परिषद सदस्य सोहराब अंसारी ने इसे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बेहतर मार्गदर्शन से अब यहाँ के छात्रों का भविष्य और भी उज्ज्वल होगा।








ओमप्रकाश वर्मा नगरा(बलिया)।बेटियां अब केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं रहीं—बल्कि वो आज पूरे देश में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से परचम लहरा रही हैं। इसी की जीती-जागती मिसाल बनी हैं नगरा क्षेत्र की संस्कृति सिंह, जिन्होंने NEET 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 720 में से 616 अंक प्राप्त किए और ऑल इंडिया में 1200वीं रैंक हासिल कर क्षेत्र का नाम रोशन किया। बलिया जिले के इनामीपुर गांव निवासी संस्कृति ने यह सफलता कोटा, राजस्थान में रहकर कठिन परिश्रम और अनुशासन के बल पर हासिल की है। उनके पिता अजीत सिंह व माता किरण सिंह की आँखों में बेटी की सफलता से गर्व और आंसू दोनों थे। संस्कृति की इस कामयाबी पर गांव, समाज और पूरे जिले में जश्न का माहौल है। संस्कृति के बलिया आगमन पर जैसे ही वह नरहीं चहटी (नगरा) पहुंचीं, वहां क्षेत्रवासियों ने उनका भव्य स्वागत किया। ढोल-नगाड़े, फूल-मालाएं और मिठाइयों के साथ संस्कृति का अभिनंदन किया गया। चारों तरफ सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा था—"संस्कृति सिंह ज़िंदाबाद!" इस अवसर पर उनकी बड़ी बहन रजनी सिंह ने उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाकर आशीर्वाद दिया। ग्रामीणों ने गर्व से कहा कि आज इनामीपुर की बेटी नहीं, बल्कि पूरे बलिया की बेटी बन गई है संस्कृति। वर्तमान ग्राम प्रधान राजू सिंह, जो खुद शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय माने जाते हैं, ने भी इस सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि "संस्कृति जैसे बच्चों से ही गांव की तक़दीर बदलेगी।" संस्कृति, पूर्व प्रधान राजन सिंह की भतीजी हैं, जिन्होंने शुरू से ही उनकी पढ़ाई को लेकर विशेष रुचि ली। इस मौके पर सतीश सिंह, उमेश पांडे, राजीव सिंह, विजय प्रकाश प्रजापति, राजन सिंह सहित अनेक क्षेत्रीय गणमान्य लोगों ने उनकी इस कामयाबी को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत है। वर्तमान समय में जब गांवों की बेटियों को आगे बढ़ने के मौके कम मिलते हैं, ऐसे में संस्कृति की ये उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती। गांव के छोटे-छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने उनके घर पहुंचकर उन्हें बधाइयाँ दीं। खास बात यह रही कि संस्कृति की सफलता को सिर्फ शैक्षणिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। संस्कृति सिंह का सपना है कि वह डॉक्टर बनकर ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवा में योगदान दें। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सहयोग को दिया। बलिया के शिक्षा जगत में संस्कृति की यह कामयाबी एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है। निस्संदेह, इनामीपुर गांव की बेटी ने इस बार NEET की बाजी मार ली है—और पूरे जनपद को गर्व से भर दिया है।





मोतिहारी NEET परीक्षा 2025 में विशाखा वैभव ने 720 के बिरुध 550 अंक प्राप्त कर शानदार सफलता हासिल की है ।माता माधुरी कुमारी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बेलहिया में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है,जबकि पिता बैजू कुमार गुप्ता,+2 विद्यालय पंचरुखा,बंजरिया में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं ।विशाखा वैभव का कहना है कि उनकी सफलता का श्रेय माता, पिता और गुरुजनों का है ।विशाखा डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती है ।इन्होंने सफलता हासिल कर जिला का नाम रोशन किया है।विशाखा वैभव स्थानीय एसपीएन महाविधालय के पूर्व प्रो० किशोरी भारती के नातीन है . प्रसन्नता जाहिर करने वालों में किशोरी प्रसाद भारती,प्रभु साह, सोनालाल साह,डॉ.प्रभात कुमार,पंकज कुमार एव प्रदीप कुमार आदि शामिल हैं ।
Mathiit


भारतीय प्रशासन और पुलिस (प्राचीन काल से आधुनिक काल तक)”तथा“कुछ यादे कुछ बातें भी–माई डेज विद पुलिस” का हुआ विमोचन डॉ.पन्ना लाल एवं डॉ.अजय कुमार की पुस्तकों को मिला पाठको का स्नेह।




Dec 27 2025, 20:15
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