तीन राज्यों के बजट से अधिक है 4001 विधायकों की संपत्ति , वाईएसआर कांग्रेस के विधायक हैं सबसे अमीर, एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने जारी की खबर


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एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच ने विधायकों द्वारा जमा किए गए हलफनामों का अध्ययन कर पता लगाया है कि देश के 4001 विधायकों के पास तीन राज्य के बजट से भी अधिक संपत्ति है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वाईएसआरसीपी के विधायक सबसे अमीर हैं।

  चुनाव पर नजर रखने वाली एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईब्ल्यू) ने विधायकों द्वारा जमा कराए गए हलफनामों का अध्यन कर चौंकाने वाला खुलासा किया है। देश के कुल 4033 विधायकों में से 4001 विधायक के पास कुल संपत्ति 54545 करोड़ है। इन सभी विधायकों की संपत्ति तीन राज्य के बजट से भी ज्यादा है। नागालैंड , मिजोरम और सिक्किम तीन राज्यों का कुल सालाना बजट 49103 करोड़ है जो इन विधायकों की संपत्ति से काफी कम है। उल्लेखनीय है कि साल 2023 - 24 में नागालैंड का बजट 23086 करोड़ , मिजोरम का बजट 14210 करोड़ और सिक्किम का बजट 23086 करोड़ पेश किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक देश के हर विधायक के पास औसतन संपत्ति 13.63 करोड़ रुपये है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के 1356 विधायक के पास औसतन 11.97 करोड़ रुपये की संपत्ति है। वहीं कांग्रेस के 719 विधायक के पास 21.97 करोड़ की औसत संपत्ति है। तृणमूल कांग्रेस के 227 विधायक के पास 03.51 करोड़ रुपये की औसत संपत्ति है। वहीं आम आदमी पार्टी के विधायकों की बात करें तो संपत्ति के मामले में यह भी पीछे नहीं हैं। आप के 161 विधायकों के पास 10.20 करोड़ की संपत्ति है। वहीं वाईएसआरसीपी के 146 विधायकों के पास औसतन 23.14 करोड़ रुपये की संपत्ति है जो देश भर के विधायकों में सबसे अधिक है।

 

अगर पार्टी की बात की जाए तो बीजेपी के विधायकों की कुल संपत्ति 16234 करोड़ , कांग्रेस की 15798 करोड़ , वाईएसआरसीपी की 3379 करोड़ , द्रमुक की कुल संपत्ति 1663 करोड़ है। वहीं आम आदमी पार्टी के विधायकों के पास कुल 1642 करोड़ की संपत्ति है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक के विधायकों के पास सबसे ज्यादा संपत्ति पाई गई है। 21 राज्यों के विधायकों की कुल संपत्ति से भी ज्यादा कर्नाटक के विधायकों की संपत्ति पाई गई है। 21 राज्यों के विधायकों की कुल संपत्ति 13976 करोड़ है वहीं कर्नाटक के विधायकों के पास कुल 14359 करोड़ की संपत्ति है।

रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र के 288 में से 284 विधायक के पास 6679 करोड़ की संपत्ति है , आंध्र प्रदेश के 175 में से 174 विधायक के पास 4914 करोड़ रुपये की संपत्ति है। वहीं यूपी के 403 विधायक की कुल संपत्ति 3255 करोड़ , गुजरात के 182 विधायक के पास 2987 करोड़ , तमिलनाडु के 224 विधायक के पास 2767 करोड़ और मध्य प्रदेश के 230 विधायक के पास 2476 करोड़ रुपये की संपत्ति पाई गई है।

बंगले की सच्चाई छुपाने के लिए हो रहा अध्यादेश का विरोध..', आम आदमी पार्टी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बड़ा हमला, विपक्ष पर भी साधा निशाना

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को आम आदमी पार्टी (AAP) पर हमला बोलते हुए उस पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बंगले के नवीनीकरण को छिपाने के लिए दिल्ली अध्यादेश का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने संसद में कहा कि, “वर्ष 2015 में, एक पार्टी दिल्ली में सत्ता में आई, जिसका एकमात्र उद्देश्य सेवा करना नहीं, बल्कि लड़ना था, समस्या ट्रांसफर-पोस्टिंग करने का अधिकार प्राप्त करना नहीं है, बल्कि अपने भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए सतर्कता विभाग पर नियंत्रण प्राप्त करना है, जैसे कि उनके (केजरीवाल के) बंगले का निर्माण करने में किया गया है।'

गृह मंत्री ने दिल्ली अध्यादेश के खिलाफ AAP की लड़ाई का समर्थन करने के लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, ''विपक्ष गठबंधन की खातिर, खर्च किए जा रहे इस करोड़ों रुपये का समर्थन करने के लिए मजबूर है। मैं विपक्ष से गठबंधन के बारे में भूल जाने का अनुरोध करता हूं, क्योंकि नरेंद्र मोदी की जीत निश्चित है।'' शाह, केजरीवाल के बंगले के नवीनीकरण का जिक्र कर रहे थे, जिससे AAP और भाजपा के बीच बड़े पैमाने पर SIYAS खींचतान शुरू हो गई थी। भाजपा और कांग्रेस ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर अपने बंगले को 'सुंदर बनाने' के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने का आरोप लगाया था, जब राजधानी कोविड-19 से जूझ रही थी।

दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय ने उपराज्यपाल को एक 'तथ्यात्मक रिपोर्ट' में कहा था कि केजरीवाल के आधिकारिक आवास के नवीनीकरण पर कुल 52.71 करोड़ रुपये की लागत आई। लोक निर्माण विभाग (PWD) के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें से 33.49 करोड़ रुपए घर के निर्माण पर और 19.22 करोड़ रुपए मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय पर खर्च किए गए। लोकसभा में अध्यादेश का बचाव करते हुए शाह ने कहा कि भारत का संविधान केंद्र को दिल्ली के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है।

 उन्होंने कहा, यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश को संदर्भित करता है जो कहता है कि संसद को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित किसी भी मुद्दे पर कानून बनाने का अधिकार है।

मोदी सरनेम मामले में झुकने को तैयार नहीं राहुल गांधी, सुप्रीम कोर्ट में कहा-माफ़ी नहीं मागूंगा

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी मोदी सरनेम मामले में झुकने को तैयार नहीं है। राहुल गांधी ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मानहानि केस को लेकर एक हलफ़नामा दाख़िल कर कहा है कि केस को रफ़ा-दफ़ा करने के लिए वो माफ़ी नहीं मागेंगे।उनकी ओर से कहा गया है कि यदि उन्हें माफी मांगनी होती तो पहले ही कर लिया होता। राहुल गांधी की ओर से बुधवार सुप्रीम कोर्ट से उनकी दो साल की सजा पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया जिससे कि वह लोकसभा की चल रही बैठकों और उसके बाद के सत्रों में भाग ले सकें।

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अपने जवाबी हलफ़नामें में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सूरत अदालत से मिली सज़ा उचित नहीं है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि देश की सर्वोच्च अदालत में ये अपील सफल साबित होगी, क्योंकि यह एक "असाधारण मामला" है, जहाँ एक मामूली बात की बड़ी क़ीमत चुकायी जा रही है और निर्वाचित सांसद के रूप में उन्हें लंबे वक़्त से अयोग्य ठहरा दिया गया है। यह पहली बार है जब राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह माफ़ी नहीं मांगेंगे। उन्होंने कहा कि भले ही वह ये चाहते हैं कि इस सज़ा पर रोक लगे और वो सांसद का दर्जा फिर से हासिल कर सकें लेकिन इसके लिए वो माफ़ी मांगने को तैयार नहीं हैं।

हलफनामा में राहुल गांधी की तरफ से कहा गया है कि उन्हें अहंकारी कहने पर पूर्णेश मोदी की प्रतिक्रिया "निंदनीय" है।'अहंकारी' जैसे निंदनीय शब्दों का उपयोग केवल इसलिए किया गया है क्योंकि उन्होंने माफी मांगने से इनकार कर दिया है।माफी मांगने के लिए मजबूर करने के लिए आरपी एक्ट के तहत आपराधिक प्रक्रिया और उसके परिणामों का उपयोग करना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है। बिना किसी गलती के माफी मांगने के लिए मजबूर करने के लिए कानूनी प्रक्रिया का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। इस न्यायालय द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से अपनी सज़ा पर रोक लगाने की अपील करते हुए राहुल गांधी ने कोर्ट को बताया कि पूर्णेश मोदी ने उनके कथित आपराधिक इतिहास को दिखाने के लिए उनके ख़िलाफ़ कई लंबित मामलों का सहारा लिया है, लेकिन उन्हें किसी अन्य मामले में दोषी नहीं ठहराया गया है और ज्य़ादातर मामले प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से दर्ज कराए गए हैं। हलफ़नामे में कहा, “याचिकाकर्ता एक सांसद और विपक्ष के नेता हैं और इसलिए सत्ता में बैठे लोगों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करना ज़रूरी था। मानहानि का इरादा था या नहीं इसे समझने के लिए भाषण को पूरा पढ़ना जरूरी होगा। इसके अलावा, ये साफ़ है कि मानहानि एक नॉन-कॉग्निज़ेबल, कंपाउंडेबल और ज़मानती अपराध है।

हलफनामे में दावा किया गया है कि कि रिकॉर्ड में मोदी नाम का कोई समुदाय या समाज नहीं है और इसलिए, समग्र रूप से मोदी समुदाय को बदनाम करने का अपराध नहीं बनता है। हलफनामे में कहा गया है, रिकॉर्ड में कोई मोदी समाज या समुदाय नहीं है और केवल मोदी वणिका समाज या मोध घांची समाज ही अस्तित्व में है... उन्होंने (शिकायतकर्ता) यह भी स्वीकार किया है कि मोदी उपनाम विभिन्न अन्य जातियों के अंतर्गत आता है। यह भी स्वीकारोक्ति है कि नीरव मोदी, ललित मोदी और मेहुल चोकसी सभी एक ही जाति में नहीं आते।

राहुल गांधी के खिलाफ गुजरात के बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था। राहुल गांधी ने कर्नाटक में दिए एक भाषण में कहा था कि सभी चोरों का सरनेम मोदी होता है। शिकायतकर्ता के अनुसार राहुल गांधी ने अपनी टिप्पणी पर माफी मांगने के बजाय अहंकार दिखाया है और उनका रवैया नाराज समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता और कानून की अवमानना को दर्शाता है। उन्होंने अपने किए के लिए माफी नहीं मांगी।

मैं 45 सालों से शादीशुदा हूं, गुस्सा नहीं करता”, जानें राज्यसभा में ऐसा बोले सभापति जगदीप धनखड़

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संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदर की कार्यवाही प्रभावित हो रही है।इस बीच राज्यसभा की कार्यवाही जरूर रुक-रुक कर चल रही है और थोड़ी बहुत चर्चा भी हुई है।गुरुवार को उच्च सदन की कार्यवाही के दौरान सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे अपनी बात रख रहे थे। इस दौरान एक बार फिर मणिपुर मामले को लेकर गहमागहमी दिखी। इस बीच गुरुवार को राज्यसभा में सभापति जगदीप धनखड़ और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के बीच तीखी बहस हुई। तो वहीं, ठहाके भी लगते दिखे। 

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राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद मणिपुर के मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा पर जोर दे रहे नेता विपक्ष खरगे ने कहा कि इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए।मैंने अपने नोटिस में 8 पॉइंट में ये बताया है कि नियम 267 के तहत चर्चा क्यों होनी चाहिए। हमारा सुझाव है कि आप हमें अपने चेंबर में बुलाइए और 1 बजे तक सदन को स्थगित कीजिए। इस मसले पर समाधान होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कल मैंने आपसे अनुरोध किया था, लेकिन आप शायद नाराज थे। 

इस पर धनखड़ ने मजाकिया लहजे में कहा कि मैं 45 सालों से शादीशुदा हूं, गुस्सा नहीं करता। वकील के तौर पर भी हमें गुस्सा करने का अधिकार नहीं है।इसके बाद उन्होंने कांग्रेस नेता पी.चिदंबरम का जिक्र किया और कहा कि चिदंबरम एक प्रख्यात वरिष्ठ वकील हैं। वह जानते हैं कि एक वरिष्ठ वकील के रूप में हमें गुस्सा करने का कोई अधिकार नहीं है, कम से कम प्राधिकार के समक्ष तथा आप (नेता प्रतिपक्ष खरगे) एक प्राधिकार हैं। मैं कभी गुस्सा नहीं करता। सभापति के इस बयान को सुनकर सदन में मौजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ओर के सदस्य खुद को ठहाके मारने से नहीं रोक सके।

खड़गे ने कहा- सभापति प्रधानमंत्री को डिफेंड करते हैं

इसके बाद मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा की सभापति प्रधानमंत्री को डिफेंड करते हैं, पता नहीं क्यों करते हैं? उनकी इस टिप्पणी का जवाब देते हुए सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा, मुझे प्रधानमंत्री को डिफेंड करने की जरूरत नहीं है। मुझे किसी का बचाव करने की आवश्यकता नहीं है।मुझे संविधान…आपके अधिकारों की रक्षा करने की आवश्यकता है। एलओपी का ऐसा अवलोकन अच्छा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिख रहा है, भारत इतनी तेजी से विकास कर रहा है, जितना पहले कभी नहीं करता था। इसको लेकर भी विपक्ष के सांसदों ने हंगामा किया।

सभापति ने कहा-की मौजूदगी को लेकर कोई निर्देश नहीं दे सकते

इससे पहले कल राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सभापति जगदीप धनखड़ के बीच सवाल जवाब देखने को मिला था। खड़गे इस बारे में बातें बता रहे थे कि मणिपुर हिंसा मुद्दे पर सदन में चर्चा क्यों होनी चाहिए और प्रधानमंत्री को सदन में आकर बयान क्यों देना चाहिए। इस पर वीपी जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह सदन में प्रधानमंत्री की मौजूदगी को लेकर कोई निर्देश नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, इस कुर्सी से, यदि मैं माननीय प्रधानमंत्री की सदन में उपस्थिति के लिए कोई निर्देश देता हूं, तो मैं अपनी शपथ का उल्लंघन करूंगा। ऐसा कभी नहीं किया गया। इस सभापति की ओर से इस प्रकार का कोई निर्देश, जो कभी जारी नहीं किया गया हो, जारी नहीं किया जाएगा। आपको अच्छी सलाह नहीं दी जा रही है। मैं ऐसा कोई निर्देश नहीं दे सकता।

संसद में हंगामे से नाराज लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को मनाने की कोशिश, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं ने की मुलाकात

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संसद के मानसून सत्र को शुरू हुए 12 दिन का समय बीत चुका है लेकिन मणिपुर मुद्दे पर हंगामे के चलेत सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। सांसदों के हंगामे से सभापति ओम बिरला भी नाराज हैं और लोकसभा की कार्यवाही का संचालन नहीं कर रहे हैं।लोकसभा में सांसदों द्वारा किए जाने वाले हंगामे से आहत होकर स्पीकर ओम बिरला में कार्रवाई में भाग लेने से इनकार कर दिया था। अब इसके बाद कई सांसद उन्हें मनाने की कवायद में जुट गए हैं। इस क्रम तमाम दलों के सांसद उन्हें मनाने के लिए पहुंचे।

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सांसदों ने की सभापति से मुलाकात

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी, एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले, एनके प्रेमचंद्रन, बसपा के रितेश पांडे, भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल, टीएमसी सांसद सौगत राय, एनसीपी सांसद फारुख अब्दुल्ला और डीएमके सांसद कनिमोझी ने आज लोकसभा सभापति ओम बिरला से मुलाकात की। इस मुलाकात में सांसदों ने लोकसभा स्पीकर से सदन की कार्यवाही का संचालने करने की अपील की गई।इस दौरान सभी ने आश्वासन दिया कि वे सदन की गरिमा बनाए रखेंगे।

लगातार हंगामे के कारण सभापति नाराज

इससे पहले हंगामे से नाराज होकर ओम बिरला ने कहा था कि जब तक दोनों पक्ष संसद सुचारू रूप से चलाने में पहल नहीं करते हैं, तब तक वे सदन की अध्यक्षता नहीं करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पक्ष-विपक्ष के सदस्यों को अपनी नाराजगी जाहिर की थी और कहा उनके लिए सदन की गरिमा सर्वोच्च, है, सदन में मर्यादा कायम करना सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ सदस्यों का व्यवहार सदन की उच्च परपराओं के विपरीत है।

दरअसल, 1 अगस्त को लोकसभा में विपक्ष के नेता नारेबाजी करते हुए न सिर्फ वेल में आ गए गए थे बल्कि चेयर की तरफ पर्चे भी फेंके। ओम बिरला ने कहा कि दिल्ली सेवा बिल पेश करने के दौरान जिस तरह का हंगामा किया गया, एक भी बात नहीं सुनने दी, ऐसे सदन का कामकाज नहीं हो सकता।इसके बाद अगले दिन ओम बिरला लोकसभा में नहीं गए।

बता दें, संसद का मौजूदा सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है और कोई कामकाज नहीं करने दे रहा है। विपक्ष ने पहले मणिपुर हिंसा पर चर्चा की बात की। सरकार भी राजी हो गई तो किस नियम के तहत चर्चा हो, इस पर विवाद शुरू कर दिया। विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि प्रधानमंत्री को सदन में आना चाहिए और जवाब देना चाहिए। जबकि कानून व्यवस्था का मामला होने के कारण यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जिम्मेदारी और वे सदन में बयान देने के लिए तैयार है।

जी20 समिट से पहले हिंसा की चपेट में देश, जैसे ट्रंप के भारत दौरे के दौरान हुआ था दिल्ली दंगा, क्या वैसे ही एक बार फिर रची गई देश को बदनाम करने क

#Was_there_conspiracy_to_defame_country_again

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दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक समूह जी 20 के सालाना शिखर सम्मेलन के लिए भारत पूरी तरह से तैयार है। जी 20 शिखर सम्मेलन का आयोजन 9 और 10 सितंबर को नई दिल्ली में होना है। बतौर अध्यक्ष इस सम्मेलन के लिए एजेंडे को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी भारत के पास ही है। इस मकसद से पिछले 8 महीने से जी 20 से जुड़ी कई बैठकों का आयोजन देश के 50 से भी ज्यादा शहरों में किया गया। हालांकि, जी 20 के सालाना शिखर सम्मेलन के आयोजन से एक महीने पहले देश एक बार फिर हिंसा की चपेट में हैं। राजधानी दिल्ली के आसपास सांप्रदायिक हिंसा भड़ गई है।

इस बीच, भारत के सबसे अच्छे दोस्तों में शामिल देश अमेरिका ने नूंह हिंसा को लेकर प्रतिक्रिया दी है। अमेरिका के विदेश विभाग ने शांति का आह्वान और पार्टियों से हिंसा से दूर रहने का आग्रह किया। अमेरिकी प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा कि हमेशा की तरह हम अब भी शांति बनाए रखने की अपील करते हैं। वहीं, उन्होंने पार्टियों से हिंसक कार्रवाइयों से दूर रहने का आग्रह किया। मिलर ने आगे कहा कि हमें इस बारे में नहीं पता था। अमेरिका के लोगों से सुनने में आया। फिर दूतावास से संपर्क किया है। 

यही नहीं पिछले दो दिनों से ग्लोबल मीडिया में गुरुग्राम हिंसा की खबर छाई हुई है। अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन ने ट्रेन में मुस्लिम समुदाय के लोगों की गोली मारकर हत्या और हिंसाओं को कवर किया। ‘वर्ल्ड लीडर समिट से एक महीने पहले भारत में घातक सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी’ टाइटल के साथ लिखा कि दिल्ली में जी20 नेताओं के स्वागत से कुछ हफ्ते पहले भारत में गहरी सांप्रदायिक दरार उजागर हुई है।

जी हां अगले महीने दुनिया के ताकतवर नेता हिंदुस्तान में होंगे। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली के आसपास फैली हिंसा ने चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में एक बार फिर से 2020 में दिल्ली दंगे की याद हो आई है जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर थे।ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक बार फिर देश को बदनाम करने की साजिश रची गई है? क्या एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सामने देश को कमजोर दिखाने का षडयंत्र किया जा रहा है? 

दरअसल, 2020 में दिल्ली में 23-24 फरवरी को हिंसा भड़क उठी थी। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन के बाद उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए। जिसमें 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन दो दिनों के दौरान दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगे भड़के थे, उस दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत के दौरे पर थे। ट्रम्प 24 और 25 फरवरी 2020 को भारत में थे - दो दिन दिल्ली जली। जाहिर है, चुनावी साल में अंतरराष्ट्रीय मीडिया ट्रंप के पीछे था और उन्मादी दंगाइयों को पता था कि हिंसा और उसके बाद पुलिस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कवरेज मिलेगा। 

दिल्ली में हुए इन दंगों को लेकर पुलिस ने एफआईआर में गहरी साजिश का जिक्र किया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का कहना था कि जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी (जेसीसी), पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई), पिंजरा तोड़, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट से जुड़े लोगों ने साजिश के तहत दिल्ली में दंगे कराए। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इसके पीछे राजनीति का एक ऐसा डिजाइन है जो राष्ट्र के सौहार्द को खंडित करने का इरादा रखता है। यह सिर्फ अगर कानून का विरोध होता तो सरकार के आश्वसान के बाद खत्म हो जाना चाहिए था। पुलिस को शाहीन बाग में ऐसे लोगों के शामिल होने की सूचना मिली थी जिनका संबंध आइएस जैसे संगठन से था। पुलिस का कहना था कि नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए विरोधी प्रदर्शनों का इस्तेमाल मुस्लिम युवाओं को भड़काकर हिंसा के लिए करना चाहते थे।

हरियाणा में दंगाइयों के डर से तीन साल की बच्ची को लेकर भागी महिला जज, भीड़ ने उनकी कार को जलाया

दिल्ली-अलवर रोड पर एक पुरानी वर्कशॉप में जाकर छिपी थीं


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हरियाणा के नूंह जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे की आग में एक महिला जज भी फंस गई थीं। इस दौरान दंगाइयों की भीड़ ने उनकी कार को जला डाला। किसी तरह महिला जज ने खुद की और अपनी तीन साल की बच्ची की जान बचाई। हिंसा के दौरान वह दिल्ली-अलवर रोड पर बनी एक पुरानी वर्कशॉप में जाकर छिपी थीं। जज के साथ उनके गनर, ड्राइवर भी मौजूद थे। इसके बाद भी उन्हें किसी तरह भीड़ से बचकर भागना पड़ा। पुलिस में दर्ज एक एफआईआर से इस घटना का खुलासा हुआ है। नूंह की अडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अंजलि जैन अपने स्टाफ के साथ रास्ते में थीं। वह शहीद हसन खान मेवाती गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से लौट रही थीं।

उनके साथ ड्राइवर, गनर और प्रोसेस सर्वर मौजूद थे। महिला जज पर हुए हमले की जानकारी उनके प्रोसेस सर्वर 48 वर्षीय टेकचंद ने ही दी। उन्होंने कहा कि हम लोग जज अंजलि जैन के साथ कार में आ रहे थे। हमारे साथ ड्राइवर के अलावा जज की तीन साल की बच्ची और एक गनर सियाराम भी थे। टेकचंद ने बताया, 'हम नल्हड़ के अस्पताल से लौट रहे थे। इसी दौरान हमने देखा कि 100 से 150 लोगों की भीड़ सड़क पर है और वे गाड़ियों को जला रहे हैं। पत्थर भी फेंक रहे हैं।' उन्होंने कहा कि इसी दौरान एक पत्थर हमारी कार पर आ लगा और पिछला शीशा टूट गया। दंगाई फायरिंग भी कर रहे थे। 

दहशत में थी छोटी बच्ची, कई घंटे वर्कशॉप में छिपे बैठे रहे 

टेकचंद ने कहा कि गोलियों की आवाज सुनकर हम लोग डर गए थे। टेकचंद बीते 10 सालों से नूंह की जिला अदालत में काम कर रहे हैं। वह इसी साल जून से ही जज अंजलि जैन के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी लोग डरे हुए थे। इससे पहले की दंगाइयों की भीड़ हमें निशाना बनाती, हम लोग कार को छोड़कर भाग गए। इसके बाद दिल्ली-अलवर रोड पर हरियाणा रोडवेज की एक पुरानी वर्कशॉप में जाकर शरण ली। टेकचंद ने वाकये को याद करते हुए बताया, 'स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। हम लोगों को अपनी जिंदगी की फिक्र थी। हमारे साथ एक छोटी बच्ची भी थी, इसलिए जिम्मेदारी कहीं ज्यादा थी। हर तरफ आग थी और हमारे साथ कुछ भी हो सकता था। गाड़ियों को आग लगाई जा रही थी और भीड़ बेकाबू थी।'

घंटों बाद बाहर निकले, वकीलों को बुलाना पड़ गया

टेकचंद ने कहा कि भीड़ के कार तक पहुंचने से पहले ही हम लोग भाग निकले। उन्होंने कहा, 'मैं चाहता था कि जज मैडम और उनकी बच्ची सुरक्षित घर पहुंच जाएं। हमारे पास वर्कशॉप में छिपकर बैठने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। हालात कुछ सामान्य हुए तो हमने स्थानीय वकीलों को घटना के बारे में जानकारी दी। वे लोग आए तो हम बाहर निकले।' उन्होंने कहा कि जब हम वर्कशॉप से निकलकर आए तो देखा की कार पूरी तरह से जल चुकी है। पहचानना भी मुश्किल था कि यह वही गाड़ी है, जिसे हम छोड़कर गए थे। यह जज की पर्सनल कार थी। 

पुलिस ने मंगलवार को दर्ज किया केस, इंटरनेट बैन बढ़ा

पुलिस ने बताया कि उन्हें मंगलवार को इस घटना की जानकारी मिली थी। हमने इस मामले में दंगा फैलाने की धारा 148, गैरकानूनी तौर पर एकत्र होने की धारा 149 समेत कई सेक्शन में केस दर्ज किया है। बता दें कि नूंह में हालात फिलहाल शांत हैं, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हिंसा फिर से न भड़क जाए, इसके लिए भारी फोर्स तैनात की गई है। नूंह में 5 अगस्त तक के लिए इंटरनेट बैन को बढ़ा दिया गया है।

उत्तरप्रदेश के सांसदों से बोले पीएम मोदी, राममंदिर पर नहीं मिलेंगे वोट, गरीबी ही सबसे बड़ी जाति, मुफ्त चीजें बांटने की संस्कृति का करें विरोध

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सांसदों के साथ बैठक में क्रम में उत्तर प्रदेश और दक्षिणी राज्यों के सांसदों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जीत का मंत्र दिया। पीएम मोदी ने उनसे कहा, 'गरीबी सबसे बड़ी जाती है।' पीएम मोदी ने उत्तर प्रदेश के 45 से अधिक सांसदों की एक बैठक को संबोधित किया। इसके बाद सभी दक्षिणी राज्यों के सांसदों के एक समूह को भी संबोधित किया।

पहली बैठक उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र के एनडीए सांसदों के साथ हुई। दूसरी बैठक में दक्षिणी राज्यों के सांसद मौजूद थे, जिनमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं।

पहली बैठक की मेजबानी मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के साथ की। प्रधानमंत्री मोदी भी पूर्वी यूपी से सांसद हैं। इस बैठक को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संबोधित किया। राजनाथ सिंह भी इसी क्षेत्र से सांसद चुने जाते हैं।

प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के सांसदों से कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं को जनता तक ले जाना और विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों को दूर करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, "विपक्ष के झूठे आरोपों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए पेशेवर सोशल मीडिया टीमों के साथ अपने निर्वाचन क्षेत्रों को सशक्त बनाएं।" पीएम मोदी ने सांसदों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और डिजिटल दुनिया में अपना प्रदर्शन बढ़ाने के लिए पेशेवर सोशल मीडिया विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री ने एनडीए सरकार द्वारा किए गए कार्यों के बारे में स्थानीय लोगों के साथ सांसदों को संवाद करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "इसे हासिल करने का एक कॉल सेंटर खोलने पर विचार कर सकते हैं।"

गरीबी उन्मूलन की दिशा में काम पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "गरीबी सबसे बड़ी जाति है"। उन्होंने कहा, "राम मंदिर का वादा बीजेपी की विचारधारा से पैदा हुआ था, लेकिन सांसद यह मानकर संतुष्ट नहीं हो सकते कि इससे वोट मिलेंगे।"

पीएम मोदी ने सांसदों को निर्वाचन क्षेत्रों में नई परियोजनाएं शुरू नहीं करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, "इसके बजाय चल रहे कार्यों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करें और सरकार की उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रचारित करें।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि यह सच है कि अनुच्छेद 370 और राम मंदिर भाजपा की प्रतिबद्धता का हिस्सा रहे हैं, लेकिन वोट सुरक्षित करने के लिए लोगों के लिए लगन से काम करना चाहिए।

पीएम मोदी की नजर दक्षिण भारत पर

दूसरी बैठक की मेजबानी केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने की। इस बैठक को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी संबोधित किया। दक्षिण भारत के सांसदों के साथ बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने पिछले नौ वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला, जिसमें दक्षिण भारत पर विशेष ध्यान दिया गया। उन्होंने विपक्ष शासित राज्यों, विशेषकर दक्षिण में भ्रष्टाचार के स्तर पर भी चिंता व्यक्त की।

पीएम मोदी ने एनडीए सदस्यों से विपक्ष के नेतृत्व वाले राज्यों में प्रचलित मुफ्त चीजें बांटने की संस्कृति का विरोध करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "ऐसी प्रथाओं से लंबे समय में देश को महत्वपूर्ण नुकसान हो सकता है।

पीएम मोदी ने विपक्ष के गुट पर फिर तीखा हमला बोला और कहा कि यह गठबंधन बिना सोचे-समझे स्वार्थी एजेंडे के बनाया गया है। उन्होंने कहा, मैं विपक्षी सांसदों को चुनौती दे सकता हूं। उनमें से किसी से भी पूछने का प्रयास करें कि I.N.D.I.A. का फुल फॉर्म क्या है, उनमें से एक को भी पता नहीं होगा।

हरियाणा के नूंह, गुरुग्राम समेत आसपास के इलाकों में जारी बवाल पर अमेरिकी की अाई प्रतिक्रिया, प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, शांति बनाए रखना ही सर्

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हरियाणा के नूंह, गुरुग्राम समेत आसपास के इलाकों में जारी बवाल पर अमेरिकी की भी प्रतिक्रिया आई है। राष्ट्रपति जो बाइडेन सरकार ने शांति बनाए रखने और हिंसा से बचने की अपील की है। स्थानीय समयानुसार बुधवार को जारी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय ने यह बात कही है। इधर, हरियाणा के कई जिलों में सुरक्षा के मद्देनजर 5 अगस्त तक इंटरनेट पर रोक लगा दी है।

प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, 'हिंसक झड़पों को लेकर मैं कहूंगा कि हमेशा कि तरह हम शांति और पार्टियों को हिंसक गतिविधियों से बचने की अपील करेंगे।' गुरुग्राम की हिंसा में किसी अमेरिकी के प्रभावित होने को लेकर उन्होंने जानकारी दी, 'मुझे इस तरह की कोई जानकारी नहीं है। मैं दूतावास से संपर्क कर खुश हूं।'

हरियाणा में क्या हुआ?

राज्य के नूंह में सोमवार को एक धार्मिक यात्रा पर हुए हमले के बाद दो समूहों में हिंसा भड़क गई। फिलहाल, नूंह, फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम के तीन सब डिवीजन सोहना, पटौदी और मानेसर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। बुधवार को प्रदेश सरकार ने इन सभी जिलों में 5 अगस्त तक के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद करने का फैसला किया है। साथ ही इन जिलों में सुरक्षा व्यवस्था को भी बढ़ा दिया गया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) टी वी एस एन प्रसाद की तरफ से आदेश जारी किए गए। उन्होंने कहा, 'नूंह, फरीदाबाद, पलवल और गुरुग्राम के उपायुक्तों द्वारा मेरे संज्ञान में यह लाया गया है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा की गई है और सूचित किया गया है कि उनके संबंधित जिलों में स्थिति अब भी गंभीर और तनावपूर्ण है।

इसमें कहा गया है, इसलिए, मोबाइल फोन और एसएमएस पर व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर आदि जैसे विभिन्न सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से गलत सूचना और अफवाहों के प्रसार, आंदोलनकारियों और प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संगठित होने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट निलंबन की सीमा को बढ़ाया जा रहा है।

दिल्ली सेवा बिल को लेकर विपक्ष की उम्मीदों पर पानी, केंद्र ने राज्यसभा में भी किया बहुमत का जुगाड़, जानें वोटों का पूरा गणित

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दिल्ली सरकार के अधिकारों और सेवा से जुड़े विधेयक 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को लेकर विपक्ष की उम्मीद पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। आम आदमी पार्टी के तमाम दावों के उलट बीजेपी ने उच्च सदन राज्यसभा में भी दिल्ली सेवा बिल को पारित करवाने के लिए बहुमत का जुगाड़ कर लिया है। संख्याबल के आधार पर माना जा रहा है कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दिल्ली सरकार के अधिकारों और सहयोग से जुड़े विधेयक को पारित करवाने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि उच्च सदन में भी बहुमत का आंकड़ा बिल के साथ है।

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक पेश किया। इस पर आज से चर्चा होनी है। इस विधेयक के ज़रिए मोदी सरकार उस अध्यादेश को क़ानून बनाना चाहती है, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के पास दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफ़र का आखिरी अधिकार होगा। विपक्ष को उम्मीद थी कि इस विधेयक को लोकसभा में ना सही तो राज्यसभा में पूरा दम दिखा कर पारित होने से रोका जाएगा। लेकिन मंगलवार को जब जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और नवीन पटनायक के बीजू जनता दल ने इस बिल पर मोदी सरकार के समर्थन करने का एलान किया तो अब विपक्ष की उम्मीद पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।

दरअसल, लोकसभा में भाजपा के अपने 301 सांसद हैं और इस वजह से वहां सरकार को किसी भी विधेयक को पारित करवाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन, उच्च सदन राज्यसभा में एनडीए गठबंधन के सांसदों को शामिल कर लेने के बावजूद भी एनडीए गठबंधन बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह जाता है। इसी आधार पर आम आदमी पार्टी और विपक्षी गठबंधन में शामिल दल दावा कर रहे हैं कि वे राज्यसभा में बिल को गिरा देंगे। हालांकि, भाजपा ने विपक्षियों की घेरेबंदी को तोड़ते हुए राज्यसभा में इस बिल को पारित करवाने के लिए बहुमत का जुगाड़ कर लिया है। ऐसे में जानते हैं कि दोनों सदनों में अब नंबरगेम क्या होगा? 

क्या है लोकसभा का गणित?

लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है, जहां उसके 301 सांसद हैं। अगर बीजेपी के सहयोगी दलों के गठबंधन एनडीए की बात करें, तो सांसदों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। एनडीए के सांसदों की संख्या 333 है, जो बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है। दूसरी ओर विपक्ष के पास सिर्फ 142 सांसद हैं, जिसमें से अकेले 50 सांसद तो कांग्रेस से ही हैं। इस तरह लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है।

सरकार के पास कितने सांसदों का समर्थन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस विधेयक के ख़िलाफ़ समर्थन जुटाने के लिए बीते दिनों अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से मिल रहे थे। लेकिन आँकड़ों का जो समीकरण अब बनता दिख रहा है वो केजरीवाल सरकार के पक्ष में नहीं जा रहा है।राज्यसभा में बीजेपी के पास 92 सांसद हैं, जिनमें पांच नॉमिनेटेड सदस्य हैं. एनडीए के पास कुल 103 सांसद हैं। एआईएडीएमके का पास चार सांसद हैं। आरपीआई (अठावले), असम गण परिषद, पट्टाली मक्कल काची, तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), नेशनल पीपल्स पार्टी, मिज़ो नेशनल फ्रंट, यूनाइटेड पीपल्स पार्टी (लिबरल) के पास 1-1 सांसद हैं। बीजेडी और वाईएसआर के पास पास 9-9 सदस्य हैं यानी 18 सदस्यों का समर्थन बीजेपी के पास है।मोदी सरकार के पास अब तक के गणित के हिसाब से 121 का संख्या बल है।बीएसपी, टीडीपी और जेडीएस जिनके पास एक-एक सदस्य हैं वो भी सरकार को समर्थन दे सकते हैं।

विपक्ष के साथ कौन-कौन

अब बात करते हैं विपक्ष के पास मौजूद संख्या बल की. 26 पार्टियों के गठबंधन वाले इंडिया के कुल 98 सदस्य सदन में हैं. अकेले कांग्रेस के पास 31 सांसद हैं। आम आदमी पार्टी के पास 10 और डीएमके पा पास 10 सदस्य हैं। टीएमसी के पास 13 और आरजेडी के पास 6 सदस्य हैं। सीपीआई(एम) और जेडीयू के पास 5-5 सदस्य हैं।एनसीपी के पास चार और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास तीन सांसद हैं। जेएमएम और सीपीआई के पास 2-2 सांसद हैं। आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (एम), आरएलडी और एमडीएमके के पास 1-1 सांसद हैं। बीआरएस इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है लेकिन अगर वो भी अरविंद केजरीवाल के समर्थन में वोट देता है तो 7 वोट विपक्ष को और मिल सकते हैं। यानी अधिक से अधिक विपक्ष के पास 105 सदस्यों का समर्थन ही हो सकता है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के अधिकारों और सेवा से जुड़े विधेयक - 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 ' को मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। इस विवादित बिल के जरिए उस अध्यादेश को बदल दिया जाएगा, जो केंद्र सरकार को दिल्ली के नौकरशाहों के ट्रांसफर और नियुक्तियों की शक्ति देती है। इस बिल के कानून बनने के बाद उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के अधिकारियों के ट्रांसफर और तैनाती के लिए अंतिम फैसला लेने की शक्ति मिलेगी। कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी सहित कई विपक्षी दलों ने बिल को संघवाद की भावना और संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे सदन में पेश करने का विरोध किया।