दिल्ली सेवा बिल को लेकर विपक्ष की उम्मीदों पर पानी, केंद्र ने राज्यसभा में भी किया बहुमत का जुगाड़, जानें वोटों का पूरा गणित

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दिल्ली सरकार के अधिकारों और सेवा से जुड़े विधेयक 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 को लेकर विपक्ष की उम्मीद पर पानी फिरता नज़र आ रहा है। आम आदमी पार्टी के तमाम दावों के उलट बीजेपी ने उच्च सदन राज्यसभा में भी दिल्ली सेवा बिल को पारित करवाने के लिए बहुमत का जुगाड़ कर लिया है। संख्याबल के आधार पर माना जा रहा है कि लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी दिल्ली सरकार के अधिकारों और सहयोग से जुड़े विधेयक को पारित करवाने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होगी, क्योंकि उच्च सदन में भी बहुमत का आंकड़ा बिल के साथ है।

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली (संशोधन) विधेयक पेश किया। इस पर आज से चर्चा होनी है। इस विधेयक के ज़रिए मोदी सरकार उस अध्यादेश को क़ानून बनाना चाहती है, जिसमें दिल्ली के उपराज्यपाल के पास दिल्ली में अधिकारियों की पोस्टिंग या ट्रांसफ़र का आखिरी अधिकार होगा। विपक्ष को उम्मीद थी कि इस विधेयक को लोकसभा में ना सही तो राज्यसभा में पूरा दम दिखा कर पारित होने से रोका जाएगा। लेकिन मंगलवार को जब जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस और नवीन पटनायक के बीजू जनता दल ने इस बिल पर मोदी सरकार के समर्थन करने का एलान किया तो अब विपक्ष की उम्मीद पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।

दरअसल, लोकसभा में भाजपा के अपने 301 सांसद हैं और इस वजह से वहां सरकार को किसी भी विधेयक को पारित करवाने में कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन, उच्च सदन राज्यसभा में एनडीए गठबंधन के सांसदों को शामिल कर लेने के बावजूद भी एनडीए गठबंधन बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रह जाता है। इसी आधार पर आम आदमी पार्टी और विपक्षी गठबंधन में शामिल दल दावा कर रहे हैं कि वे राज्यसभा में बिल को गिरा देंगे। हालांकि, भाजपा ने विपक्षियों की घेरेबंदी को तोड़ते हुए राज्यसभा में इस बिल को पारित करवाने के लिए बहुमत का जुगाड़ कर लिया है। ऐसे में जानते हैं कि दोनों सदनों में अब नंबरगेम क्या होगा? 

क्या है लोकसभा का गणित?

लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है, जहां उसके 301 सांसद हैं। अगर बीजेपी के सहयोगी दलों के गठबंधन एनडीए की बात करें, तो सांसदों की संख्या और भी ज्यादा बढ़ जाती है। एनडीए के सांसदों की संख्या 333 है, जो बहुमत के आंकड़े से बहुत ज्यादा है। दूसरी ओर विपक्ष के पास सिर्फ 142 सांसद हैं, जिसमें से अकेले 50 सांसद तो कांग्रेस से ही हैं। इस तरह लोकसभा में बीजेपी के पास बहुमत है।

सरकार के पास कितने सांसदों का समर्थन

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस विधेयक के ख़िलाफ़ समर्थन जुटाने के लिए बीते दिनों अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से मिल रहे थे। लेकिन आँकड़ों का जो समीकरण अब बनता दिख रहा है वो केजरीवाल सरकार के पक्ष में नहीं जा रहा है।राज्यसभा में बीजेपी के पास 92 सांसद हैं, जिनमें पांच नॉमिनेटेड सदस्य हैं. एनडीए के पास कुल 103 सांसद हैं। एआईएडीएमके का पास चार सांसद हैं। आरपीआई (अठावले), असम गण परिषद, पट्टाली मक्कल काची, तमिल मनीला कांग्रेस (मूपनार), नेशनल पीपल्स पार्टी, मिज़ो नेशनल फ्रंट, यूनाइटेड पीपल्स पार्टी (लिबरल) के पास 1-1 सांसद हैं। बीजेडी और वाईएसआर के पास पास 9-9 सदस्य हैं यानी 18 सदस्यों का समर्थन बीजेपी के पास है।मोदी सरकार के पास अब तक के गणित के हिसाब से 121 का संख्या बल है।बीएसपी, टीडीपी और जेडीएस जिनके पास एक-एक सदस्य हैं वो भी सरकार को समर्थन दे सकते हैं।

विपक्ष के साथ कौन-कौन

अब बात करते हैं विपक्ष के पास मौजूद संख्या बल की. 26 पार्टियों के गठबंधन वाले इंडिया के कुल 98 सदस्य सदन में हैं. अकेले कांग्रेस के पास 31 सांसद हैं। आम आदमी पार्टी के पास 10 और डीएमके पा पास 10 सदस्य हैं। टीएमसी के पास 13 और आरजेडी के पास 6 सदस्य हैं। सीपीआई(एम) और जेडीयू के पास 5-5 सदस्य हैं।एनसीपी के पास चार और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के पास तीन सांसद हैं। जेएमएम और सीपीआई के पास 2-2 सांसद हैं। आईयूएमएल, केरल कांग्रेस (एम), आरएलडी और एमडीएमके के पास 1-1 सांसद हैं। बीआरएस इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है लेकिन अगर वो भी अरविंद केजरीवाल के समर्थन में वोट देता है तो 7 वोट विपक्ष को और मिल सकते हैं। यानी अधिक से अधिक विपक्ष के पास 105 सदस्यों का समर्थन ही हो सकता है।

बता दें कि केंद्र सरकार ने दिल्ली सरकार के अधिकारों और सेवा से जुड़े विधेयक - 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 ' को मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। इस विवादित बिल के जरिए उस अध्यादेश को बदल दिया जाएगा, जो केंद्र सरकार को दिल्ली के नौकरशाहों के ट्रांसफर और नियुक्तियों की शक्ति देती है। इस बिल के कानून बनने के बाद उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के अधिकारियों के ट्रांसफर और तैनाती के लिए अंतिम फैसला लेने की शक्ति मिलेगी। कांग्रेस, डीएमके और टीएमसी सहित कई विपक्षी दलों ने बिल को संघवाद की भावना और संविधान के खिलाफ बताते हुए इसे सदन में पेश करने का विरोध किया।

पीएम मोदी ने एक बार फिर की एनडीए सांसदों के साथ बैठक, दिया मिशन 2024 के लिए जीत का मंत्र

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2024 लोकसभा चुनाव के लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एनडीए में शामिल दलों के बीच समन्वय बढ़ाने और 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर एनडीए सांसदों को एक बार फिर संबोधित किया। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के 48 सांसदों के साथ बैठक की। पीएम मोदी ने बुधवार पहले उत्तर प्रदेश के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों के 45 से अधिक सांसदों की एक बैठक को संबोधित किया और फिर दक्षिणी राज्यों के सांसदों के एक अन्य समूह से बात की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने एनडीए सांसदों को विपक्षी की जातीय सियासत में उलझने के बजाय गरीबों के कल्याण के लिए काम करने और क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजराने की सलाह दी।इस दौरान मोदी ने कहा कि गरीब ही सबसे बड़ी जाति है।

गरीबों के लिए काम करने से ही वोट मिलेगा-पीएम मोदी

बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के सांसदों के साथ लगातार पीएम मोदी संवाद कर रहे हैं और उन्हें 2024 में जीत का मंत्र दे रहे हैं। पीएम मोदी ने बुधवार को एनडीए गठबंधन के सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव करीब हैं, इसलिए आप सभी इसकी तैयारियों में जुट जाएं। ज्यादा से ज्यादा वक्त जनता के बीच बिताएं और अपने-अपने क्षेत्र का भ्रमण करें। पीएम मोदी ने एनडीए के सासंदों से गरीबों के कल्याण के लिए काम करने की नसीहत दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की जो भी कल्याणकारी योजनाएं हैं, उन्हें गरीबों तक पहुंचाएं, जिससे उनका कल्याण हो। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि गरीबों के लिए काम करने से ही वोट मिलेगा। इसलिए ज्यादा से ज्यादा वक्त उनलोगों के साथ बिताए। उनकी समस्याओं को सुनें और उस पर काम करने की कोशिश करें। हमें गरीब कल्याण के लिए काम करना है और हम वही करते रहेंगे। गरीबी ही सबसे बड़ी जाति है।

सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में कॉल सेंटर लगवाएं-पीएम मोदी

चुनाव की तैयारी में जुटने की नसीहत देते हुए पीएम ने कहा कि सभी सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्र में कॉल सेंटर लगवाएं। इस कॉल सेंटर के जरिए सरकार और खुद के द्वारा किए कामों को लोगों तक पहुंचे और प्रचार करें। प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा है कि सरकार की योजनाओं को एक-एक लाभार्थी तक पहुंचाने के लिए जनता से लगातार संपर्क में रहे। कॉल सेंटर के जरिए ये चीजें आसान होंगी।

लोगों के फीडबैक का भी पता करना है-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने मीटिंग के दौरान कहा कि पब्लिक में ज्यादा से ज्यादा सक्रियता बढ़ाने के लिए सांसदों को जमीनी स्तर पर पहुंच बनानी होगी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को जरूरतमंद लोगों तक तक तो पहुंचाना ही है, लेकिन उनका फीडबैक भी पता करना है। जिससे लोगों की सोच का अंदाजा भी रहे।

पीएम मोदी लगातार कर रहे हैं बैठक

इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोमवार को दो समूहों के सांसदों से बात की थी। पहले समूह में उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्रों के सांसदों ने भाग लिया, जबकि दूसरे में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के सांसदों ने भाग लिया। ये बैठक बंद कमरे में हुई। पीएम मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला था कि कैसे भाजपा के नेतृत्व वाले राजग ने अपने 25 वर्षों से अधिक के अस्तित्व में समावेशिता और विकास का एजेंडा तैयार किया है। उन्होंने देश के विकास को ऊपर उठाने और समाज के सभी वर्गों को सकारात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए अपनी सरकार की विभिन्न पहलों के बारे में बात की।

ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका, इलाहाबाद कोर्ट का एएसआई सर्वे पर रोक लगाने से इनकार

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वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के एएसआई सर्वे को लेकर मुस्लिम पक्ष को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने एएसआई सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे के खिलाफ अपील की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। अब अदालत के फैसले के बाद ज्ञानवापी में सर्वे तुरंत शुरू होगा।

इससे पहले 27 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान सभी पक्षों की जिरह सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था और अगले आदेश तक एएसआई सर्वे पर रोक बरकरार रखा था। लेकिन आज अदालत में अपने फैसले में एएसआई को ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करने की इजाजत दे दी है।21 जुलाई को मुस्लिम पक्ष ने ज्ञानवापी का सर्वे कराए जाने के जिला अदालत के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

मुस्लिम पक्ष ने सर्वे से ढांचे को नुकसान होने की बात कही थी, जिसके बाद एएसआई की ओर से एक एफिडेविट दाखिल कर कहा गया था कि सर्वे से कोई नुकसान नहीं होगा, जिसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये फैसला सुनाया।

इससे पहले वाराणसी जिला कोर्ट ने एएसआई सर्वे की मंजूरी दी थी। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित मां श्रृंगार गौरी-ज्ञानवापी मस्जिद मामले में विवादित हिस्से को छोड़कर पूरे ज्ञानवापी परिसर की पुरातात्विक जांच का आदेश दिया गया था। वाराणसी जिला कोर्ट ने एएसआई को 4 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। लेकिन इस मामले में अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में अपील की और एएसआई सर्वे पर रोक लगाने की मांग की थी।

नूंह हिंसा के बाद इंटरनेट पर बढ़ी पाबंदी, हरियाणा के कई जिलों में सेवाएं 5 अगस्त तक निलंबित, एसआईटी करेगी मामले की जांच

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हरियाणा के नूंह जिले में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। सांप्रदायिक हिंसा सबसे पहले यहीं भड़की। यहां बड़े स्तर पर आगजनी की गई। जिसका असर हरियाणा के दूसरे जिलों में बी देखा जा रहा है। हालात को सामान्य करने की कोशिशों के तहत कर्फ्यू लगाया गया वहीं शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए नूंह, फरीदाबाद और पलवल और गुरुग्राम जिले के सोहना, पटौदी और मानेसर उप-मंडलों में 5 अगस्त तक इंटरनेट सेवाओं को बंद रखने का फैसला हरियाणा सरकार ने लिया है। सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

हिंसा के बाद हरियाणा पुलिस का एक्शन

हिंसा के बाद हरियाणा पुलिस ने 139 लोगों को गिरफ्तार किया है और 45 एफआईआर दर्ज की हैं तीन एफआईआर सोशल मीडिया पर भड़काऊ चीजें पोस्ट करने वालों के खिलाफ हैं।वहीं सांप्रदायिक हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया गया है। नूह हिंसा की जांच के लिए 10 एसआईटी बनाई गई हैं। हर टीम पांच एफआईआर की जांच करेगी।

नुकसान की वसूली उपद्रवियों से होगी

वहीं, मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने हिंसा में हुए नुकसान की वसूली उपद्रवियों से ही करने का एलान किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि उपद्रव के दौरान जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई दंगाइयों की ही करवाई जाएगी।

नूंह में केंद्रीय बलों की 14 टीमें तैनात

हिंसा नूंह में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद की शोभा यात्रा के दौरान हुई। स्थानीय मुस्लिम समुदाय का दावा है कि वे तलवार और बंदूक लहराते यात्रा कर रहे थे। मुस्लिम विरोधी नारेबाजी कर रहे थे। बाद में इस यात्रा पर पथराव हो गया जो हिंसा में तब्दील हो गया। हिंसाओं को काबू करने के लिए नूंह समेत गुरुग्राम तक भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। अकेले नूंह में केंद्रीय बलों की 14 टीमें तैनात की गई है। इनके अलावा पलवल में तीन, गुरुग्राम में दो और फरीदाबाद में एक टीम की तैनाती हुई है।

कूनो में नहीं रुक रहा चीतों की मौत का सिलसिला, नामीबिया से लाई गई मादा चीता ने तोड़ा दम, पिछले चार महीने में नौ की गई जान

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मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को एक और मादा चीता की मौत हो गई।बताया जा रहा है कि मादा चीता तब्लीशी पार्क में मृतक पाई गई।यहां पिछले चार महीनों में 9 चीतों की मौत हो चुकी है। इनमें से 6 वयस्‍क जबकि 3 शावक हैं।

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राज्य के वन विभाग की ओर से जारी बयान में एक और चीते के मौत की जानकारी दी गई। कूनो नेशनल पार्क में आज सुबह मादा चीता 'धात्री' मृत पाई गई। उसकी मौत कैसे हुई इसका अभी कुछ पता नहीं चल पाया है। मौक के मामले पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि दो दिनों से चीते का लोकेशन नहीं मिल रहा था। पार्क प्रबंधन उसकी तलाश में जुटा हुआ था। आज कूनो के बाहरी इलाके में चीते की बॉडी मिली।

9 चीतों की हो चुकी है मौत

कूनो नेशनल पार्क में बीते 4 महीने में अब तक 6 चीतों और तीन शावकों समेत कुल 9 चीतों की मौत हो चुकी है। फिलहाल कूनो नेशनल पार्क में अब 14 चीते और एक शावक ही बचा है। जिससे इस प्रोजेक्ट को लेकर भी अब पार्क प्रबंधन की परेशानियां बढ़ गई हैं।

हर चीते के मौत की अलग-अलग वजह

बता दें कि अब तक कूनों में जिन चीतों की मौत हुई है, उनमें सबके अलग-अलग कारण रहे हैं। कुछ चीते आपसी झगड़े के बाद बुरी तरह से घायल हो गए थे। जबकि कुछ चीते डिहाइड्रेशन का शिकार हुए थे। इसके अलावा हाल ही में एक चीते की मौत की वजह गले में लगी कॉलर आईडी की वजह से हुआ इन्फेंशन भी था।

राजेंद्र गुढ़ा ने जारी किए ‘लाल डायरी’ के अंश, सीएम गहलोत के बेटे का नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप, कहा-मुझे माफी मांगने के लिए बनाया जा रहा दबाव

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राजस्थान सरकार से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा इन दिनों अपनी लाल डायरी को लेकर खासे चर्चा में हैं। झुंझुनूं की उदयपुरवाटी विधानसभा सीट के विधायक राजेंद्र गुढ़ा की लाल डायरी ने राजस्थानी की सियासत में तूफान मचा दिया है। अब लाल डायरी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।दरअसल, बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने बुधवार को अपने घर पर मीडिया से बातचीत में विवादास्पद लाल डायरी के कुछ अंश जारी किए हैं।

सीएम के बेटे का नाम लेकर किया आरसीए में करप्शन का जिक्र

प्रेसवार्ता में गुढ़ा ने कहा,’लाल डायरी में जो तथ्य थे, उसके कुछ अंश मैं आपके सामने रख रहा हूं।’ इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र राठौड़ की हैंड राइटिंग दिखाई। राजेंद्र गुढ़ा ने कहा,’डायरी में लिखा है राजस्थान क्रिकेट संघ( आरसीए) को लेकर मेरी वैभव से बात हुई। भवानी सामोता किस तरह तय करके लोगों को अब तक पैसा नहीं दे रहा। सामोता ने वादा पूरा नहीं किया। डायरी में सौभाग का भी नाम है।

बता दें कि उन्होंने जिस डायरी के अंश जारी किए हैं। उसमें सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और राजस्थान क्रिकेट संघ के सचिव और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के करीबी भवानी सामोता का जिक्र है।

मीडिया में समय-समय पर जानकारी देने की बात

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि विधासनभा में डायरी को टेबल पर रखना चाहता था, मेरे खिलाफ झूठे मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। राजेंद्र गुढ़ा ने आगे कहा कि मैं इस डायरी को विधानसभा की पटल पर रखना चाहता था जिससे सारे तथ्य आधिकारिक रूप से सामने आ जाएं। उन्होंने कहा कि मेरे विश्वस्त के पास डायरी की पूरी डिटेल है। उन्होंने कहा कि अगर मुझे जेल में डाल दिया जाता है तो मीडिया के सामने समय-समय पर जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुझ पर दबाव बना रही है। गुढ़ा ने कहा कि मुझे माफी मांगने के लिए सरकार की ओर से दबाव बनाया गया। 

आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट का दावा

गुढ़ा ने कहा कि सरकार मुझे ब्लैकमेल कर रही है। मंत्री ने दावा किया कि डायरी में सीएम के करीबी और आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट है। डायरी में आरसीए को लेकर लेनदेन की बातें कोडवर्ड में हैं। इसके अलावा सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के सचिव को लेकर भी बातें लिखी गई हैं।

24 जुलाई को सदन में लहराई थी लाल डायरी

बता दें कि मानसून सत्र के पहले चरण में राजेंद्र गुढ़ा ने सदन में मणिपुर हिंसा पर चर्चा के दौरान राजस्थान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अपनी ही सरकार निशाना साधा था। इसके बाद सीएम गहलोत ने उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद वे 24 जुलाई को कथित लाल डायरी लेकर सदन पहुंचे थे और उसे विधानसभा पटल पर रखने की मांग कर रहे थे। इसके बाद स्पीकर के आदेश पर गुढ़ा को सदन से निष्कासित कर दिया गया था।

दिल्ली अध्यादेश कानून बिल पर राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने कहा, लोगों को गुलाम बनाने और लोकतांत्रिक अधिकार छिनने के लिए ये कानून लेकर आई है भाजपा


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आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश कानून बिल के पेश होने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि, 'दिल्लीवाले सीएम अरविंद केजरीवाल से बहुत प्यार करते हैं। इसलिए ही 10 साल से उन्हें हर बार वोट देते आए हैं। ये राष्ट्र विरोधी बिल है, जो इस बिल के समर्थन करेंगे, देश उन्हें राष्ट्र विरोधी के नाम से याद रखेगा. जो बिल के खिलाफ हैं वो देशभक्त कहलाएंगे।

विपक्षी दल INDIA को लेकर भी बोले चड्ढा

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने विपक्षी दलों के गठबंधन INDIA को लेकर कहा कि सभी सांसद एकजुट है। राज्यसभा में कांटे की टक्कर होने वाली है। हम देश के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए ये लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि ये मात्र एक छोटे से बिल पर मतदान की बात नहीं है। बल्कि ये एक धर्मयुद्ध है, जिसमें धर्म हमारे साथ है और अच्छाई हमारे साथ है, सत्य हमारे साथ है अधर्म बुराई और असत्य बीजेपी के खेमें में है और जब धर्म आपके साथ हो तो इस ब्रह्मांड की तमाम शक्तियां जिताने में लग जाती है। वहीं राघव चड्ढा ने कहा कि दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने के लिए उनका लोकतांत्रिक अधिकार छिनने के लिए बीजेपी ये कानून लेकर आई है।

संजय सिंह ने भी बीजेपी सरकार को घेरा

वहीं आम आदमी पार्टी के कद्दावर नेता और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने लोकसभा में दिल्ली अध्यादेश कानून बिल को पेश करने को लेकर कहा कि देश के संविधान और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। राज्यसभा में यह बिल गिर जाएगा। संजय सिंह ने दावा किया है कि राज्यसभा में विधेयक के विरोध में मतदान करने वाले दलों के पास पर्याप्त संख्या बल है। उन्होंने दिल्ली अध्यादेश को विधेयक सुप्रीम कोर्ट के फैसले, संविधान और देश के संघीय ढांचे के खिलाफ बताया है।

रैली और प्रदर्शन पर कोई रोक नहीं, बस भड़काऊ भाषण नहीं दिया जाए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए, पढ़िए, देश की सबसे बड़ी अदालत ने और क्या दिया अहम


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मेवात में हिंसा के बाद दिल्ली में हो रहे प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। अदालत में अर्जी दायर कर कहा गया था कि दिल्ली में नूंह हिंसा के बाद हो रहे प्रदर्शन और रैली पर रोक लगाई जाए। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण ना दिया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि धारा-144 समेत अन्य उपाय अपनाए जा सकते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, यूपी और हरियाणा सरकार को नोटिस भी भेजा है। अदालत ने कहा है कि संवेदनशील जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और वीडियोग्राफी कराई जाए। इस मामले पर सुनवाई के दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत ने दिल्ली में प्रदर्शन और रैली पर रोक नहीं लगाई। अदालत ने कहा कि रैली, प्रदर्शन के दौरान किसी भी समुदाय के खिलाफ भड़काऊ भाषण ना दिया जाए। अदालत ने कहा है कि यह आदेश सभी राज्यों पर लागू होगा।

अदालत में याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील सी. यू सिंह ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली में 23 स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं। इसपर अदालत ने कहा है कि हेट स्पीच नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस संजीव खन्ना और एसवीएन भाटी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान रैली, प्रदर्शन पर तो रोक नहीं लगाई लेकिन इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती की जाए। इस मामले में अब अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।

देश की सबसे बड़ी अदालत में जो याचिका लगाई गई थी उसमें यह भी कहा गया था कि वीएचपी और बजरंग दल के विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई जाए क्योंकि इससे तनाव और भी ज्यादा बढ़ सकता है और माहौल बिगड़ सकता है। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिेये हैं। अदालत ने कहा है कि कानून व्यवस्था को सुनिश्चित करना पुलिस का काम है। अदालत ने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जानमाल का नुकसान ना हो।

अदालत में तुरंत सुनवाई को लेकर शाहीन अबदुल्ला ने यह याचिका अदालत में लगाई थी। इस याचिका में देश के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष यह गुहार लगाई गई थी कि देश भर में हेट स्पीच पर रोक लगे और यह भी अपील की गई थी कि कुछ प्रदर्शन को लेकर तुरंत सुनवाई की जाए क्योंकि इन प्रदर्शनों से दो समुदायों के बीच तनाव फैल सकता है। अदालत की बेंच ने इस याचिका पर कहा कि कोई हेट स्पीच और कोई हिंसा खासकर महिलाओं के खिलाफ कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए। 

वरिष्ठ वकील सी यू सिंह ने अदालत का ध्यान इस बात पर दिलाया कि शाम को कुछ बैठकें भी होनी हैं। अदालत को बताया गया कि नूंह और गुरुग्राम में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। रैलियों की वजह से जान माल का नुकसान हो सकता है। जिसपर अदालत ने प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि जानमाल का नुकसान नहीं हो।

बता दें कि सोमवार को हरियाणा के नूंह में एक धार्मिक यात्रा के दौरान हिंसा फैली थी। इस दौरान कई जगहों पर सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं और आगजनी भी की गई थी। इसके बाद देखते ही देखते यह हिंसा गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल तक पहुंच गई। इस हिंसा में कुल 6 लोगों की जान अब तक जा चुकी है। इसके अलावा कई लोग घायल भी हुए हैं। मृतकों में एक इमाम के अलावा होम कार्ड के जवान भी शामिल हैं। बजरंग दल के एक कार्यकर्ता की भी मौत हो चुकी है। 

दिल्ली में वीएचपी का प्रदर्शन

इसी नूंह हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में बुधवार को जमकर प्रदर्शन किया है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वीएचपी और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली की सड़क पर हनुमान चालीसा भी पढ़ा और जय श्री राम के नारे लगाए। इस प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये थे।

SIT का गठन

हरियाणा पुलिस प्रमुख पी के अग्रवाल ने बुधवार को यहां कहा कि राज्य में साम्प्रदायिक हिंसा के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया जाएगा और इसमें बजरंग दल के सदस्य मोनू मानेसर की भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम पूरी तरह सुरक्षित है और हिंसा की कोई खबर नहीं है। उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों को नूंह में तैनात किया गया और पुलिस बल को प्रशासन के आदेशों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया गया है।

*नूंह हिंसा के विरोध में बजरंग दल और विहिप की रैलियों पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, यूपी, हरियाणा, दिल्ली सरकार को नोटिस*

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हरियाणा के नूंह जिले में हिंसा फैलने के बाद देश के अलग-अलग जगहों पर बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद द्वारा निकाली जा रही रैलियों को रोकने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसपर दो जजों की पीठ ने सुनवाई की। रैलियों पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को बड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने आज हो रही रैली और प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए हरियाणा सरकार और राज्य की पुलिस से कहा कि ये सुनिश्चित किया जाए कि किसी तरह की हिंसा ना हो और ना ही कोई हेट स्पीच हो। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, हरियाणा, दिल्ली सरकार को भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को करने का फैसला किया है।

हरियाणा के नूंह में हुई हिंसा के विरोध में विश्व हिंदू परिषद आज दिल्ली में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन और रैली निकाल रहा है। इन रैलियों पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल दिल्ली में 23 जगहों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। याचिका में इस मामले पर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की। 

विरोध प्रदर्शनों की वीडियोग्राफी कराने का निर्देश

याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया लेकिन कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ बयानबाजी या कोई हिंसा नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह सुनिश्चित करें कि सर्वोच्च अदालत के 21 अक्तूबर, 2022 के फैसले (हेट स्पीच) के दिशानिर्देशों का अनुपालन करें. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हेट स्पीच पर हमारा 11 सदस्यीय पीठ का फैसला है। कोर्ट ने सीसीटीवी कैमरों से विरोध प्रदर्शनों की निगरानी करने और वीडियोग्राफी के निर्देश दिया और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती का भी निर्देश दिया। 

बता दें कि मंगलवार को हरियाणा के नूंह में एक धार्मिक यात्रा के दौरान दो समुदायों के बीच हिंसा हो गई थी। हिंसा में छह लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। नूंह, मेवात, गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में अभी भी तनाव बना हुआ है।

राजेंद्र गुढ़ा ने जारी किए ‘लाल डायरी’ के अंश, सीएम गहलोत के बेटे का नाम लेकर लगाए गंभीर आरोप, कहा-मुझे माफी मांगने के लिए बनाया जा रहा दबाव*

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राजस्थान सरकार से बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा इन दिनों अपनी लाल डायरी को लेकर खासे चर्चा में हैं। झुंझुनूं की उदयपुरवाटी विधानसभा सीट के विधायक राजेंद्र गुढ़ा की लाल डायरी ने राजस्थानी की सियासत में तूफान मचा दिया है। अब लाल डायरी से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है।दरअसल, बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने बुधवार को अपने घर पर मीडिया से बातचीत में विवादास्पद लाल डायरी के कुछ अंश जारी किए हैं।

सीएम के बेटे का नाम लेकर किया आरसीए में करप्शन का जिक्र

प्रेसवार्ता में गुढ़ा ने कहा,’लाल डायरी में जो तथ्य थे, उसके कुछ अंश मैं आपके सामने रख रहा हूं।’ इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र राठौड़ की हैंड राइटिंग दिखाई। राजेंद्र गुढ़ा ने कहा,’डायरी में लिखा है राजस्थान क्रिकेट संघ( आरसीए) को लेकर मेरी वैभव से बात हुई। भवानी सामोता किस तरह तय करके लोगों को अब तक पैसा नहीं दे रहा। सामोता ने वादा पूरा नहीं किया। डायरी में सौभाग का भी नाम है।

बता दें कि उन्होंने जिस डायरी के अंश जारी किए हैं। उसमें सीएम अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत और राजस्थान क्रिकेट संघ के सचिव और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के करीबी भवानी सामोता का जिक्र है।

मीडिया में समय-समय पर जानकारी देने की बात

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि विधासनभा में डायरी को टेबल पर रखना चाहता था, मेरे खिलाफ झूठे मुकदमें दर्ज किए जा रहे हैं। राजेंद्र गुढ़ा ने आगे कहा कि मैं इस डायरी को विधानसभा की पटल पर रखना चाहता था जिससे सारे तथ्य आधिकारिक रूप से सामने आ जाएं। उन्होंने कहा कि मेरे विश्वस्त के पास डायरी की पूरी डिटेल है। उन्होंने कहा कि अगर मुझे जेल में डाल दिया जाता है तो मीडिया के सामने समय-समय पर जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार मुझ पर दबाव बना रही है। गुढ़ा ने कहा कि मुझे माफी मांगने के लिए सरकार की ओर से दबाव बनाया गया। 

आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट का दावा

गुढ़ा ने कहा कि सरकार मुझे ब्लैकमेल कर रही है। मंत्री ने दावा किया कि डायरी में सीएम के करीबी और आरटीडीसी के चैयरमेन धर्मेंद्र राठौड़ की लिखावट है। डायरी में आरसीए को लेकर लेनदेन की बातें कोडवर्ड में हैं। इसके अलावा सीएम गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत के सचिव को लेकर भी बातें लिखी गई हैं।

24 जुलाई को सदन में लहराई थी लाल डायरी*

बता दें कि मानसून सत्र के पहले चरण में राजेंद्र गुढ़ा ने सदन में मणिपुर हिंसा पर चर्चा के दौरान राजस्थान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अपनी ही सरकार निशाना साधा था। इसके बाद सीएम गहलोत ने उन्हें कैबिनेट से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद वे 24 जुलाई को कथित लाल डायरी लेकर सदन पहुंचे थे और उसे विधानसभा पटल पर रखने की मांग कर रहे थे। इसके बाद स्पीकर के आदेश पर गुढ़ा को सदन से निष्कासित कर दिया गया था।