सर्राफा बाजार समीक्षा: सोने की कीमतों में गिरावट, चांदी में भारी उतार-चढ़ाव जारी

रांची 14 मार्च 2026 : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और घरेलू मांग में आए बदलावों के बीच 14 मार्च 2026 को जारी बाजार भाव के अनुसार सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में महत्वपूर्ण हलचल देखी गई। शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमती धातुओं के रुख में नरमी के कारण सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई | जबकि चांदी के भाव में पूरे दिन उतार-चढ़ाव का सिलसिला बना रहा।

सोने के भाव में गिरावट: 22 कैरेट और 24 कैरेट का रुख

14 मार्च 2026 को घरेलू सर्राफा बाजार खुलते ही सोने में सुस्ती देखी गई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण भारतीय बाजारों में भी इसका सीधा असर पड़ा:

• 22 कैरेट सोने का भाव: आभूषण निर्माताओं और खुदरा खरीदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत 14,729 रुपये प्रति ग्राम के आसपास दर्ज की गई। प्रति 10 ग्राम (एक तोला) के हिसाब से यह भाव लगभग 1,47,290 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

झारखंड विधानसभा बजट सत्र 2026 का समापन: सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा संबोधन, चतरा में नए विश्वविद्यालय की घोषणा

रांची 20 मार्च 2026 : झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दिशा देने वाला विधानसभा का बजट सत्र 20 मार्च 2026 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य के आर्थिक विकास का एक विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया और विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। 

अपने इस विदाई भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछले छह वर्षों में राज्य की वित्तीय प्रगति की सराहना की और शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए चतरा जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना करने की एक ऐतिहासिक घोषणा की।झारखंड के बजट में 85% की ऐतिहासिक वृद्धि : सदन में राज्य की आर्थिक प्रगति के आंकड़े रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि झारखंड वित्तीय रूप से आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है: बजट का आकार: पिछले 6 वर्षों में झारखंड का कुल बजटीय आकार ₹86,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,58,560 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

झारखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा: रांची सहित 14 जिलों में आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात का 'अलर्ट' जारी

रांची 21 मार्च 2026 :अचानक आए इस मौसमी बदलाव के कारण 21 मार्च 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया। एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण के सक्रिय होने के कारण झारखंड के उत्तरी, मध्य और पूर्वी जिलों में मौसम के अत्यधिक आक्रामक होने की चेतावनी दी गई।

60 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार: मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया कि इस दौरान राज्य के प्रभावित हिस्सों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी-तूफान और तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

झारखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा: रांची सहित 14 जिलों में आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात का 'अलर्ट' जारी


झारखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा: रांची सहित 14 जिलों में आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात का 'अलर्ट' जारी

रांची : 19 मार्च 2026: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में कथित तौर पर बढ़ते जातिगत भेदभाव और केंद्र सरकार की नई नीतियों के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन की गूंज 19 मार्च 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में भी पुरजोर तरीके से सुनाई दी। रांची के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र संगठनों ने एकजुट होकर सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। छात्रों ने हाल ही में आए 'यूजीसी रेगुलेशन 2026' पर तुरंत रोक लगाने और परिसरों में छात्रों की सुरक्षा के लिए 'रोहित एक्ट' को अविलंब लागू करने की पुरजोर मांग की।

क्या है यूजीसी रेगुलेशन 2026 और छात्रों का विरोध?

प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में जारी किए गए नए नियम और रेगुलेशन उच्च शिक्षा में वंचित, पिछड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST/OBC) वर्ग के छात्रों के अधिकारों को सीमित करते हैं।

• स्वायत्तता और फेलोशिप पर संकट: छात्रों का आरोप है कि नए नियमों के तहत फेलोशिप की प्रक्रियाओं को जटिल बनाया जा रहा है और विश्वविद्यालयों के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

• रेगुलेशन पर रोक की मांग: रांची विश्वविद्यालय (RU) और अन्य संबद्ध कॉलेजों के छात्रों ने मार्च करते हुए राजभवन के समीप प्रदर्शन किया और मांग की कि जनविरोधी यूजीसी रेगुलेशन 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

झारखंड में मौसम का मिजाज बिगड़ा: रांची सहित 14 जिलों में आंधी, ओलावृष्टि और वज्रपात का 'ऑранже अलर्ट' जारी

झारखंड : 21 मार्च 2026

मार्च महीने में अचानक आए इस मौसमी बदलाव के कारण 21 मार्च 2026 को भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के रांची केंद्र ने राज्य के एक बड़े हिस्से के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' (Orange Alert) जारी किया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के सक्रिय होने के कारण राजधानी रांची सहित झारखंड के उत्तरी, मध्य और पूर्वी जिलों में मौसम के अत्यधिक आक्रामक होने की चेतावनी दी गई।

इस मौसमी चेतावनी और सुरक्षा से जुड़ी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

तेज हवाएं और ओलावृष्टि का अलर्ट

• 60 से 70 किमी/घंटे की रफ्तार: मौसम विभाग ने पूर्वानुमान जताया कि इस दौरान राज्य के प्रभावित हिस्सों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी-तूफान और तेज हवाएं चल सकती हैं, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

• ओलावृष्टि (Hailstorm) की संभावना: आंधी के साथ-साथ कई इलाकों में तेज गर्जना के साथ ओले गिरने की भी आशंका जताई गई, जो खेतों में खड़ी रबी और तैयार फसलों (विशेषकर दलहन और आम के मोजर) के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकती है।

इन 14 जिलों के लिए विशेष चेतावनी

मौसम केंद्र ने राज्य के जिन जिलों को इस ऑरेंज अलर्ट के दायरे में रखा, वे निम्नलिखित हैं:

• मध्य व राजधानी क्षेत्र: रांची, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग।

• संथाल परगना प्रमंडल: दुमका, देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज।

• उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र: धनबाद, गिरिडीह, कोडरमा और चतरा।

⚡ वज्रपात (आकाशीय बिजली) को लेकर प्रशासन मुस्तैद

झारखंड में मानसून से पहले और मार्च-अप्रैल के महीनों में वज्रपात (Lightning) से जान-माल का काफी नुकसान होता है। इसे देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग और मौसम विभाग ने आम नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की:

1. पेड़ों के नीचे शरण न लें: कड़कड़ाती धूप के बाद अचानक आने वाले तूफान के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या ट्रांसफार्मर के पास खड़े होने से सख्त मना किया गया।

2. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी: तेज गर्जना के समय घरों के भीतर टीवी, फ्रिज और मोबाइल चार्जिंग जैसे बिजली के उपकरणों का प्लग निकाल देने की सलाह दी गई।

3. किसानों को हिदायत: खेतों में काम कर रहे किसानों और चरवाहों को मौसम खराब होते ही तुरंत पक्के मकानों या सुरक्षित स्थानों पर चले जाने को कहा गया।

मौसम विभाग के अनुसार, इस आंधी-बारिश और ओलावृष्टि के कारण दिन के तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को मार्च की शुरुआती गर्मी से तो तात्कालिक राहत मिलेगी, लेकिन तेज हवाओं के कारण जनजीवन आंशिक रूप से प्रभावित हो सकता है।

यदि आप इस तूफान के कारण विभिन्न जिलों में फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट या आगामी 2-3 दिनों के मौसम के विस्तृत पूर्वानुमान के बारे में जानना चाहते हैं, तो कृपया मुझे बताएं।

झारखंड विधानसभा बजट सत्र 2026 का समापन: सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा संबोधन, चतरा में नए विश्वविद्यालय की घोषणा

झारखंड : 20 मार्च 2026

झारखंड की राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को दिशा देने वाला विधानसभा का बजट सत्र 20 मार्च 2026 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सदन को संबोधित करते हुए राज्य के आर्थिक विकास का एक विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया और विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। अपने इस विदाई भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछले छह वर्षों में राज्य की वित्तीय प्रगति की सराहना की और शिक्षा क्षेत्र के विकास के लिए चतरा जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय की स्थापना करने की एक ऐतिहासिक घोषणा की।

झारखंड के बजट में 85% की ऐतिहासिक वृद्धि

सदन में राज्य की आर्थिक प्रगति के आंकड़े रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि झारखंड वित्तीय रूप से आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है:

• बजट का आकार: पिछले 6 वर्षों में झारखंड का कुल बजटीय आकार ₹86,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,58,560 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

• 85% की भारी बढ़ोतरी: सीएम ने रेखांकित किया कि यह करीब 85% की कुल वृद्धि दर्शाती है कि विपरीत वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद राज्य का राजस्व संग्रह, केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और योजना व्यय का ग्राफ काफी मजबूत हुआ है। इस बढ़े हुए बजट का सीधा लाभ ग्रामीण विकास, कृषि, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मिल रहा है।

चतरा को मिला डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय का तोहफा

शिक्षा के लोकतंत्रीकरण और सुदूरवर्ती इलाकों तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा ऐलान किया:

• चतरा में नया विश्वविद्यालय: चतरा और इसके आस-पास के आदिवासी व पिछड़े बहुल इलाकों के छात्रों को अब उच्च शिक्षा (Higher Education) के लिए रांची, हजारीबाग या राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा। चतरा में 'डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय' की स्थापना की जाएगी।

• सामाजिक न्याय का प्रतीक: मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान निर्माता बाबासाहेब के नाम पर बनने वाला यह विश्वविद्यालय राज्य में सामाजिक न्याय, समानता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का एक बड़ा केंद्र बनेगा, जिसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष में भूमि आवंटन और बजटीय प्रावधानों की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

रांची में छात्रों का भारी आक्रोश: यूजीसी रेगुलेशन 2026 और जातिगत भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन, 'रोहित एक्ट' लागू करने की उठी मांग

रांची : 19 मार्च 2026

देश के उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में कथित तौर पर बढ़ते जातिगत भेदभाव और केंद्र सरकार की नई नीतियों के खिलाफ चल रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलन की गूंज 19 मार्च 2026 को झारखंड की राजधानी रांची में भी पुरजोर तरीके से सुनाई दी। रांची के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र संगठनों ने एकजुट होकर सड़कों पर उतरकर केंद्र सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। छात्रों ने हाल ही में आए 'यूजीसी रेगुलेशन 2026' पर तुरंत रोक लगाने और परिसरों में छात्रों की सुरक्षा के लिए 'रोहित एक्ट' (Rohit Act) को अविलंब लागू करने की पुरजोर मांग की।

इस छात्र आंदोलन और प्रदर्शन से जुड़े मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

क्या है यूजीसी रेगुलेशन 2026 और छात्रों का विरोध?

प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा वर्ष 2026 में जारी किए गए नए नियम और रेगुलेशन उच्च शिक्षा में वंचित, पिछड़े और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST/OBC) वर्ग के छात्रों के अधिकारों को सीमित करते हैं।

• स्वायत्तता और फेलोशिप पर संकट: छात्रों का आरोप है कि नए नियमों के तहत फेलोशिप की प्रक्रियाओं को जटिल बनाया जा रहा है और विश्वविद्यालयों के निजीकरण को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।

• रेगुलेशन पर रोक की मांग: रांची विश्वविद्यालय (RU) और अन्य संबद्ध कॉलेजों के छात्रों ने मार्च करते हुए राजभवन के समीप प्रदर्शन किया और मांग की कि जनविरोधी यूजीसी रेगुलेशन 2026 को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।

झारखंड में इको टूरिज्म को रफ्तार: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बड़ी बैठक, रोजगार और पर्यटन विकास के लिए जारी हुए अहम निर्देश

झारखंड : 18 मार्च 2026

झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती, जंगलों, झरनों और समृद्ध जैव विविधता को वैश्विक पटल पर लाने के लिए 17 मार्च 2026 को राजधानी रांची में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 'झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी' (JETA) के शासी निकाय (Governing Body) की चौथी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्य में पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटन (Eco-Tourism) को बढ़ावा देने और इसके जरिए स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार खोलने की एक वृहद कार्ययोजना पर मुहर लगाई गई।

इस महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ी मुख्य नीतियां और निर्देश निम्नलिखित हैं: |

बैठक के मुख्य एजेंडे और फोकस क्षेत्र

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि झारखंड में पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर इसे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए:

• रोजगार के नए अवसरों का सृजन: इको टूरिज्म स्थलों के विकास के दौरान स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को गाइड, होमस्टे संचालक, और हस्तशिल्प विक्रेता के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे गांवों से पलायन रुकेगा।

• प्रमुख पर्यटन स्थलों का कायाकल्प: नेतरहाट, बेतला नेशनल पार्क, दलमा वन्यजीव अभयारण्य, पतरातू घाटी, मैथन और चांडिल डैम जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को इको-फ्रेंडली तरीके से मजबूत करने का निर्देश दिया गया।

• प्रकृति के साथ तालमेल: सीएम ने स्पष्ट किया कि पर्यटन स्थलों पर कंक्रीट के बड़े ढांचे बनाने के बजाय प्राकृतिक और पारंपरिक शैली के कॉटेज (Bamboo/Wooden Huts) को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

झारखंड में इको टूरिज्म को रफ्तार: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में बड़ी बैठक, रोजगार और पर्यटन विकास के लिए जारी हुए अहम निर्देश

झारखंड : 17 मार्च 2026

झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती, जंगलों, झरनों और समृद्ध जैव विविधता को वैश्विक पटल पर लाने के लिए 17 मार्च 2026 को राजधानी रांची में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में 'झारखंड इको टूरिज्म अथॉरिटी' (JETA) के शासी निकाय (Governing Body) की चौथी बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में राज्य में पर्यावरण को बिना नुकसान पहुंचाए पर्यटन (Eco-Tourism) को बढ़ावा देने और इसके जरिए स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए द्वार खोलने की एक वृहद कार्ययोजना पर मुहर लगाई गई।

इस महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ी मुख्य नीतियां और निर्देश निम्नलिखित हैं:|

बैठक के मुख्य एजेंडे और फोकस क्षेत्र

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि झारखंड में पर्यटन को केवल मनोरंजन तक सीमित न रखकर इसे पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ा जाए:

• रोजगार के नए अवसरों का सृजन: इको टूरिज्म स्थलों के विकास के दौरान स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों को गाइड, होमस्टे संचालक, और हस्तशिल्प विक्रेता के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे गांवों से पलायन रुकेगा।

• प्रमुख पर्यटन स्थलों का कायाकल्प: नेतरहाट, बेतला नेशनल पार्क, दलमा वन्यजीव अभयारण्य, पतरातू घाटी, मैथन और चांडिल डैम जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को इको-फ्रेंडली तरीके से मजबूत करने का निर्देश दिया गया।

• प्रकृति के साथ तालमेल: सीएम ने स्पष्ट किया कि पर्यटन स्थलों पर कंक्रीट के बड़े ढांचे बनाने के बजाय प्राकृतिक और पारंपरिक शैली के कॉटेज (Bamboo/Wooden Huts) को प्राथमिकता दी जाए, ताकि जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।