भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।

मोगैंबो खुश हुआ...', रूसी तेल की खरीद पर ट्रंप के बयान पर भड़के खरगे, पीएम मोदी पर कसा तंज*

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रूस से भारत द्वारा की जा रही कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्रंप के बयान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा है। खरगे ने सोमवार को हिंदी फिल्म के एक चर्चित डायलॉग का जिक्र करते हुए कटाक्ष करते हुए कहा 'ट्रंप मोदी को लेकर यह कहना चाह रहे हैं कि 'मोगैम्बो खुश हुआ'।

देश ने आपको पीएम सिर हिलाने के लिए नहीं चुना-खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को लेकर सोमवार को पीएम मोदी पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, मैं नहीं समझ पा रहा कि मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुक रहे हैं। यह देश के लिए ठीक नहीं है। आपको देश के लिए खड़ा होना चाहिए। देश ने आपको प्रधानमंत्री सिर हिलाने के लिए नहीं चुना। खरगे ने कहा, 'मिस्टर इंडिया फिल्म का एक डायलॉग है कि 'मोगैम्बो खुश हुआ'। इसी तरह ट्रंप ने कहने की कोशिश की है कि मोगैम्बो खुश हुआ। इस तरह की सोच रखने वाले डराने की कोशिश करते हैं, तो भारत झुकने वाला नहीं है।

क्या था ट्रंप का बयान

दरअसल खड़गे का बयान ट्रम्प के दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात पर अमेरिकी नाराजगी के बाद भारत ने तेल खरीद घटाई, क्योंकि मोदी मुझे (ट्रम्प) खुश करना चाहते थे। रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'वे (भारत) मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, वह अच्छे व्यक्ति हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना जरूरी था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।

दुनिया ट्रंप के सामने नहीं झुकेगी- खरगे

खड़गे ने ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें वे बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने की बात कहते हैं। खड़गे बोले, ट्रंप कम से कम 70 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच शांति कराई। क्या इसका मतलब है कि दुनिया उनके आगे झुक जाए? दुनिया नहीं झुकेगी।

टैरिफ अब मेरा 5वां पसंदीदा शब्द...’ ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कर दिया ये बड़ा ऐलान

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार ने सत्ता में दोबारा आने के बाद से टैरिफ को बड़े र्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। एक बार फिर ट्रंप ने टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है।नॉर्थ कैरोलिना में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पहले ‘टैरिफ’ उनका पसंदीदा शब्द था, लेकिन अब वह इसे अपना पांचवां पसंदीदा शब्द मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नए साल से लागू होने वाले बड़े टैक्स कट्स की भी घोषणा की।

अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरूआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कैरोलिना में अपने भाषण में कहा चार साल के संकट और गिरावट के दौरान पूरी दुनिया हमारी हंसी उड़ाती रही। लेकिन अब हम अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरुआत कर रहे हैं। इसे 'अमेरिका का गोल्डन एज' कहा जाता है। पिछले 10 महीनों में हमारी सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, महंगाई रुक गई है, मजदूरी बढ़ी है और कीमतें कम हुई हैं। हमारा राष्ट्र मजबूत है, अमेरिका वापस आ गया है।

पहले टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द था-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने करों पर अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मैं पहले कहता था कि टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द है, लेकिन इससे मुझे परेशानी हो गई। फेक न्यूज वालों ने मुझ पर सवाल उठा दिए-धर्म का क्या, भगवान का क्या, परिवार का क्या, पत्नी और बच्चों का क्या? इसलिए अब टैरिफ मेरा पांचवां पसंदीदा शब्द है।

ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा

ट्रंप ने अपने बयान में मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अब वह अपने शब्दों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं, ताकि अनावश्यक विवाद न खड़े हों।

टैक्स कट्स का ऐलान

अपने भाषण में ट्रंप ने नए साल से देश में लागू होने वाले टैक्स कट्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े टैक्स कट होंगे और इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। ट्रंप ने घोषणा की कि अब टिप्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को भी टैक्स से छूट दी जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, इससे मेहनत करने वाले लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और काम करने का उत्साह बढ़ेगा।

सीनियर सिटीजंस के लिए बड़ी राहत

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे अमेरिका के वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ट्रंप ने कहा कि नए साल से नॉर्थ कैरोलिना के लोग इन नीतियों के 'ड्रामेटिक नतीजे' देखेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियां आम अमेरिकियों की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।

अमेरिकी संसद में छाई मोदी-पुतिन की सेल्फी वाली फोटो, डेमोक्रेट सांसद बोलीं- ये तस्वीर हजार शब्दों के बराबर

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हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार में एक सेल्फी ली थी। दोनों नेताओं की सेल्फी वाली फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर ने अमेरिकी संसद के हॉल के अंदर भी नई बहस छेड़ दी है। अब इस फोटो को दिखाकर अमेरिकी कांग्रेस के अंदर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरा जा रहा हैष

मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो से ट्रंप को घेरा

अमेरिकी संसद में एक कांग्रेसी सांसद ने ही मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो लहराई है। अमेरिकी संसद में कांग्रेस वुमन सिडनी कामलेवगर डोव ने मोदी-पुतिन की सेल्फी वाला पोस्टर दिखाकर डोनाल्ड ट्रंप को कोसा। उन्होंने इस फोटो के जरिए अमेरिका की विदेश नीति की खूब आलोचना की है। सिडनी कामलेगर डोव ने इस तस्वीर को दिखाकर अमेरिका को चेताया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन भारत को मॉस्को के करीब धकेल रहा है। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि नई दिल्ली नहीं, अमेरिका ही भारत-यूएस पार्टनरशिप को कमजोर कर रहा है।

ट्रंप पर अमेरिका-भारत के रिश्ते को नुकसान पहुंचाने का आरोप

सांसद सिडनी कामलेगर-डोव ने कहा कि जिस तरह से पुतिन का स्वागत हुआ और पीएम मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी दिखी, वो दिखाता है कि ट्रंप ने किस तरह का नुकसान अमेरिका-भारत के रिश्ते को पहुंचा दिया है।

ट्रंप-पुतिन की सेल्फी ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सबूत-डोव

डोव ने अपने बयान में कहा, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की साथ में आई तस्वीरें हमें बहुत कुछ दिखा रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप को समझना चाहिए कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती हैं। ट्रंप-पुतिन की सेल्फी और गले मिलते हुए तस्वीरें ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सीधा सबूत हैं।

भारत पर टैरिफ गलत

विपक्षी पार्टी की नेता डोव ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत पर टैरिफ लगाना बेवजह लगता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ बिजनेस डील के लिए पुतिन के सलाहकारों के साथ मिलकर यूक्रेन को बेच रहे हैं।

सांसद प्रमिला जयापल ने भी जताई चिंता

इस दौरान सांसद प्रमिला जयापल ने व्यापार और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के कारण भारत-अमेरिका आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में लगे टैरिफ कारोबार और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सांसद जयापल की यह टिप्पणी ट्रंप के हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत से चावल के आयात पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए सस्ते चावल निर्यात कर रहा है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद पैकेज की घोषणा भी की।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस साल 85 हजार वीजा किए कैंसिल, छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

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अमेरिका ने इमिग्रेशन नियम कड़े करने के बाद जनवरी से अब तक 85 हजार वीजा रद्द किए हैं। जिनमें 8 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया है कि यह कार्रवाई इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी पर ट्रम्प प्रशासन के बढ़ते फोकस का हिस्सा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद से इमिग्रेशन मुद्दे पर लगातार सख्त रुख अपनाया हुआ है। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार क एक्स पर लिखा, 'जनवरी से अब तक 85,000 वीजा कैंसिल किए गए हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप और सेक्रेटरी रुबियो एक आसान से आदेश का पालन करते हैं और वे जल्द ही रुकने वाले नहीं हैं।' पोस्ट में ट्रंप की तस्वीर के साथ 'मेक अमेरिका सेफ अगेन' का स्लोगन दिया गया है। यानी अमेरिका को सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रद्द किए गए वीजा में 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के

विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, हमने सभी कैटेगरी के 85,000 वीजा रद्द कर दिए हैं। जिनमें 8,000 से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। रद्द किए गए वीजा में से 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के थे। इसकी प्रमुख वजह नशे में गाड़ी चलाना, चोरी और हमला जैसे अपराध थे, जो पिछले साल के लगभग आधे कैंसिलेशन का हिस्सा थे।

वीजा रद्द की क्या हैं वजहें?

वीजा रद्द करने के कारणों में पहले अवधि से अधिक समय रुकना, आपराधिक चिंताएं और आतंकवाद का समर्थन शामिल रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने गाजा को लेकर हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निशाना बनाया गया है। इन छात्रों को यहूदी-विरोधी करते हुए वीजा पर सख्ती की गई है।

सोशल मीडिया अकाउंट की जांच के बाद मिलेगा H-1B वीजा

इधर, अमेरिका लगातार वीजा नियमों को भी सख्त कर रहा है। 5 दिसंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती के आदेश दिए थे। इसके तहत H-1B आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा, ताकि अमेरिकी अधिकारी आवेदक की प्रोफाइल, सोशल मीडिया पोस्ट और लाइक्स को देख सकें। यदि आवेदक की कोई भी सोशल मीडिया एक्टिविटी अमेरिकी हितों के खिलाफ दिखी तो H-1B वीजा जारी नहीं किया जाएगा। H-1B के आश्रितों (पत्नी, बच्चों और पेरेंट्स) के लिए H-4 वीजा के लिए भी सोशल मीडिया प्रोफाइल को पब्लिक करना जरूरी होगा। ऐसा पहली बार है, जब H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच जरूरी की गई है। नए नियम 15 दिसंबर से लागू होंगे। ट्रम्प प्रशासन ने सभी दूतावासों को निर्देश जारी किए हैं।

भारत को फिर झटका देंगे ट्रंप! भारत से निर्यात होने वाले चावल पर सख्ती के दिए संकेत

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ मामले में भारत को एक और झटका दे सकते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका प्रशासन विदेशी कृषि उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने पर विचार कर सकता है, जिसमें भारतीय चावल और कनाडाई उर्वरक शामिल हैं। ट्रंप का ये बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल ही में भारत दौरे के बाद आया है।

भारत के सस्ते चावल से अमेरिकी उत्पादक परेशान

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद करने का ऐलान करते हुए कहा कि भारत से सस्ता चावल आने की वजह से अमेरिका के चावल उत्पादक परेशान हैं और उनके दाम गिर रहे हैं। ये बात उन्हें अमेरिका की बड़ी चावल कंपनी कैनेडी राइस मिल्स की मालकिन और सीईओ मेरिल कैनेडी ने बताई, जिसके बाद ट्रंप ने साफ कहा कि वे भारतीय चावल पर और ज्यादा टैरिफ लगाने का प्लान बना रहे हैं ताकि अमेरिकी किसानों को बचाया जा सके।

अमेरिकी किसानों को ट्रंप ने दिया भरोसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक लिस्ट दी गई जिसमें भारत, थाईलैंड और चीन जैसे देशों पर अमेरिका में सस्ता चावल डंप करने का आरोप लगा था। लिस्ट देखकर ट्रंप ने नाराजगी जताई और अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से पूछा, “भारत के बारे में बताओ, भारत ऐसा क्यों कर रहा है? क्या चावल पर कोई टैरिफ छूट है?” ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी किसानों को बचाने के लिए अब भारतीय चावल पर और सख्त टैरिफ लग सकता है।

ट्रंप बोले- भारतीय चावल की डंपिंग पर ध्यान देंगे

अमेरिकी किसानों ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि सब्सिडी वाले चावल के बेशुमार आयात से मार्किट पर असर पड़ रहा है। इससे घरेलू फसलों की कीमतें नीचे जा रही हैं। इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि यह धोखा है और इस पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में भारतीय चावल की डंपिंग पर जरूर ध्यान देंगे।

अमेरिका में 19 देशों के ग्रीन कार्ड होल्डर्स की फिर होगी जांच, नेशनल गार्ड पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला

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वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड पर हुए हमले के बाद अब अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 19 देशों से आने वाले सभी लोगों के ग्रीन कार्ड की दोबारा गहन जांच की जाएगी। यह फैसला वॉशिंगटन में नेशनल गार्ड सैनिकों पर हुए हमले के बाद आया है, जिसमें एक महिला सैनिक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है।

अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह जांच ‘पूरी तरह कठोर और फुल-स्केल’ होगी। सीएनएन के मुताबिक, जिन 19 देशों को ‘कंट्रीज ऑफ कंसर्न’ की सूची में रखा गया है, उन्हें ट्रंप प्रशासन ने जून में ही चिन्हित किया थ। जिसमें अफगानिस्तान, क्यूबा, हैती, ईरान, सोमालिया और वेनेजुएला, बर्मा, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो और लीबिया शामिल थे। अमेरिका ने अफगानिस्तान से सभी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट को प्रोसेस करना भी रोक दिया है।

अफगान नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें

वहीं, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी कहा है कि बाइडेन प्रशासन के दौरान मंजूर किये गये सभी आश्रय मामलों की समीक्षा की जा रही है। DHS ने बताया कि अफगान नागरिकों के इमिग्रेशन अनुरोधों की प्रोसेसिंग तात्कालिक रूप से रोक दी गयी है जब तक सुरक्षा और वेटिंग प्रोटोकॉल की समीक्षा पूरी नहीं होती। प्रशासन ने यह कदम ‘बैकलॉग और संभावित गलत वेटिंग’ का हवाला देकर लिया है।

एफबीआई कर रही हमले की जांच

हमले की जांच अब एफबीआई संभाल रही है। एफबीआई निदेशक कश पटेल ने कहा कि यह हमला ‘आतंक की घटना’ के रूप में जांचा जा रहा है और कई राज्यों में सर्च वारंट जारी किए गए हैं। उन्होंने इसे ‘कोस्ट-टू-कोस्ट इन्वेस्टिगेशन’ बताया।

ट्रंप ने बदले सुर, बोले-कुशल विदेशी लोगों का अमेरिका आना जरूरी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आव्रजन (इमिग्रेशन) पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, अब उनके सुर बदले-बदले से लग रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हाई-स्किल्ड विदेशी कामगार अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की टेक कंपनियों को विदेशी कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। उनके बिना अमेरिकी लोगों को कंप्यूटर चिप्स और दूसरी तकनीकी चीजें बनाना सीखना मुश्किल होगा।

अमेरिका में आयोजित यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में उनके "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" (MAGA) समर्थकों द्वारा कुछ कुशल प्रवासियों को देश में आने की अनुमति देने के उनके बयान की आलोचना की गई है। ट्रंप ने व्यावसायिक अधिकारियों के एक समूह से कहा कि अमेरिका को ऐसे प्रवासियों की जरूरत है जो उच्च तकनीक वाली फैक्टरियों में घरेलू कामगारों को प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करना उनके मूल राजनीतिक विश्वासों के साथ असंगत नहीं है।

विरोधियों को ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने कहा, मुझे अपने रूढ़िवादी दोस्त पसंद हैं। मुझे MAGA पसंद है, लेकिन यही MAGA है। ट्रंप ने यूएस-सऊदी निवेश फोरम को संबोधित करते हुए कहा, वे लोग हमारे लोगों को कंप्यूटर चिप बनाना सिखाएंगे, और कुछ ही समय में हमारे लोग बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। और वे लोग घर जा सकेंगे। इस टिप्पणी पर कमरे में तालियां बजीं।

ट्रंप ने जताई H-1B वीज़ा की जरूरत

पिछले हफ्ते, ट्रंप ने इसी मुद्दे पर फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम से बहस की। इंग्राहम ने ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार में सुझाव दिया कि आप देश में लाखों विदेशी कर्मचारियों की बाढ़ नहीं ला सकते, जिस पर राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा। ट्रंप ने कहा था कि H-1B वीज़ा की जरूरत इसलिए है क्योंकि अमेरिका में हर तरह की तकनीकी प्रतिभा मौजूद नहीं है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को छह साल तक विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।

H-1B वीजा को लेकर है विवाद

दक्षिणपंथी अमेरिकी लंबे समय से H-1B वीजा को अमेरिकी कामगारों के खिलाफ मानता रहा है। उनका आरोप है कि इस कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से सस्ता कामगार लाकर अमेरिकी इंजीनियरों और प्रोग्रामर्स को रिप्लेस कर देती हैं। कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में अमेरिकियों की छंटनी और फिर उन्हें H-1B कर्मचारियों को ट्रेन देने के लिए कहे जाने ने इस गुस्से को और बढ़ाया। ट्रंप ने अपने पिछले चुनाव अभियानों के दौरान कई बार H-1B पर सवाल उठाए थे। लेकिन सितंबर 2025 में उन्होंने एक नया आदेश साइन किया जिसमें अमेरिका के बाहर से दायर होने वाले हर नए H-1B आवेदन पर एक बार का 100,000 डॉलर शुल्क लगाने की घोषणा की गई।

पाकिस्तान भी कर रहा परमाणु परीक्षण, ट्रंप ने किया बड़ा खुलासा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो सक्रिय रूप से परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की यही प्रवृत्ति दर्शाती है कि अमेरिका के लिए भी अपने परमाणु परीक्षण को फिर से शुरू करना जरूरी हो गया है।

पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे-ट्रंप

रविवार को सीबीएस न्यूज़ को दिए 60 मिनट के साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। लेकिन वो इसके बारे में बात नहीं करते हैं, लेकिन हम एक खुला समाज हैं, हम इसपर बात करते हैं। और हमें इसपर बात करनी होगी नहीं तो आप लोग (मीडिया) इसपर रिपोर्ट करेंगे। इसीलिए वो टेस्ट करते हैं, बार बार टेस्ट करते हैं। निश्चित तौर पर उत्तर कोरिया टेस्ट कर रहा है। पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है।

हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए परमाणु हथियार-ट्रंप

सीबीएस चैनल के खास कार्यक्रम '60 मिनट्स' को दिए गये एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने विशाल परमाणु भंडार के बावजूद एकमात्र ऐसा देश नहीं हो सकता जो परीक्षण न करे। मैंने राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों के साथ इस पर चर्चा की है। हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं। रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत सारे होंगे।" उन्होंने आगे कहा कि "अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं होना चाहिए जो परीक्षणों से परहेज करे।

रूस ने अपने सबसे घातक मिसाइल का किया परीक्षण

यह बयान उस वक्त आया है जब ट्रंप ने पहले ही रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे तुरंत परमाणु परीक्षण शुरू करें। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 30 सालों के बाद अमेरिका को फिर से परमाणु हथियारों की रेस में उस वक्त उतारा है, जब रूस ने अपनी सबसे घातक मिसाइल का परीक्षण किया है। ये परमाणु ऊर्जा से चलने वाली मिसाइल है, जो 15 घंटे से ज्यादा वक्त तक उड़ान भर सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी आसियान समिट में शामिल होंगे या नहीं? मलेशिया के पीएम ने दी जानकारी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के लिए कुआलालंपुर नहीं जाएंगे। मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। उन्होने बताया कि पीएम मोदी आसियान शिखर सम्मेलन के लिए कुआलालंपुर नहीं जाएंगे, बल्कि वर्चुअली इसमें शामिल होंगे। मलयेशियाई प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के एक करीबी सहयोगी से फोन पर हुई बातचीत के बाद ये जानकारी दी। इस तरह मलेशिया दौरा न होने की वजह से पीएम मोदी और ट्रंप मुलाकात की संभावना भी खत्म हो गई है।

मलयेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम पीएम मोदी के साथ फेन पर हुई बातचीत के बाद कहा, हमने इस महीने के अंत में कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के आयोजन पर चर्चा की। उन्होंने मुझे बताया कि इस समय भारत में चल रहे दीपावली समारोह के कारण प्रधानमंत्री वर्चुअली इसमें शामिल होंगे। मलयेशियाई पीएम ने कहा, मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं और उन्हें और भारत के सभी लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं देता हूं।

आसियान शिखर सम्मेलन क लेकर पीएम मोदी ने दिया अपडेट

वहीं, आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल होने को लेकर पीएम मोदी ने अपडेट दिया है। उन्होंने इस सम्मेलन में वर्चुअल शामिल होने की बात कही है। अपने एक्स हैंडल पर जानकारी देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे प्रिय मित्र, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ गर्मजोशी से बातचीत हुई। उन्हें मलेशिया की आसियान अध्यक्षता के लिए बधाई दी और आगामी शिखर सम्मेलनों की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से शामिल होने और आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए उत्सुक हूं।

एस जयशंकर कर सकते हैं भारत का प्रतिनिधित्व

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर इन बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बता दें कि हाल के कुछ बैठकों में पीएम मोदी की जगह एस जयशंकर या दूसरे मंत्री ही भाग ले रहे हैं।

ट्रंप-मोदी मुलाकात के आसार प फिरा पानी

बता दें कि आसियान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हिस्सा ले रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यहां ट्रंप की मुलाकात पीएम मोदी और शी जिनपिंग से होगी। मगर पीएम मोदी की ओर से यह कन्फर्म हो गया है वह इस समिट में भाग नहीं ले रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समिट में शामिल होंगे। ट्रंप शी जिनपिंग से भी मुलाकात को लेकर आतुर हैं। बहरहाल, आसियान समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पीएम मोदी संग संभावित मुलाकात की राहें अब बंद हो गई हैं।

भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।

मोगैंबो खुश हुआ...', रूसी तेल की खरीद पर ट्रंप के बयान पर भड़के खरगे, पीएम मोदी पर कसा तंज*

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रूस से भारत द्वारा की जा रही कच्चे तेल की खरीद पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर एक बार फिर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्रंप के बयान का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर निशाना साधा है। खरगे ने सोमवार को हिंदी फिल्म के एक चर्चित डायलॉग का जिक्र करते हुए कटाक्ष करते हुए कहा 'ट्रंप मोदी को लेकर यह कहना चाह रहे हैं कि 'मोगैम्बो खुश हुआ'।

देश ने आपको पीएम सिर हिलाने के लिए नहीं चुना-खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों को लेकर सोमवार को पीएम मोदी पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, मैं नहीं समझ पा रहा कि मोदी ट्रंप के सामने क्यों झुक रहे हैं। यह देश के लिए ठीक नहीं है। आपको देश के लिए खड़ा होना चाहिए। देश ने आपको प्रधानमंत्री सिर हिलाने के लिए नहीं चुना। खरगे ने कहा, 'मिस्टर इंडिया फिल्म का एक डायलॉग है कि 'मोगैम्बो खुश हुआ'। इसी तरह ट्रंप ने कहने की कोशिश की है कि मोगैम्बो खुश हुआ। इस तरह की सोच रखने वाले डराने की कोशिश करते हैं, तो भारत झुकने वाला नहीं है।

क्या था ट्रंप का बयान

दरअसल खड़गे का बयान ट्रम्प के दावे पर आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात पर अमेरिकी नाराजगी के बाद भारत ने तेल खरीद घटाई, क्योंकि मोदी मुझे (ट्रम्प) खुश करना चाहते थे। रविवार को फ्लोरिडा से वॉशिंगटन डीसी जाते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, 'वे (भारत) मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं, वह अच्छे व्यक्ति हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था और मुझे खुश करना जरूरी था। वे व्यापार करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।

दुनिया ट्रंप के सामने नहीं झुकेगी- खरगे

खड़गे ने ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें वे बार-बार भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कराने की बात कहते हैं। खड़गे बोले, ट्रंप कम से कम 70 बार कह चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच शांति कराई। क्या इसका मतलब है कि दुनिया उनके आगे झुक जाए? दुनिया नहीं झुकेगी।

टैरिफ अब मेरा 5वां पसंदीदा शब्द...’ ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कर दिया ये बड़ा ऐलान

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार ने सत्ता में दोबारा आने के बाद से टैरिफ को बड़े र्थिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। एक बार फिर ट्रंप ने टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है।नॉर्थ कैरोलिना में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पहले ‘टैरिफ’ उनका पसंदीदा शब्द था, लेकिन अब वह इसे अपना पांचवां पसंदीदा शब्द मानते हैं। इसके साथ ही उन्होंने नए साल से लागू होने वाले बड़े टैक्स कट्स की भी घोषणा की।

अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरूआत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ कैरोलिना में अपने भाषण में कहा चार साल के संकट और गिरावट के दौरान पूरी दुनिया हमारी हंसी उड़ाती रही। लेकिन अब हम अमेरिका के सबसे शानदार वर्षों की शुरुआत कर रहे हैं। इसे 'अमेरिका का गोल्डन एज' कहा जाता है। पिछले 10 महीनों में हमारी सीमाएं सुरक्षित हुई हैं, महंगाई रुक गई है, मजदूरी बढ़ी है और कीमतें कम हुई हैं। हमारा राष्ट्र मजबूत है, अमेरिका वापस आ गया है।

पहले टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द था-ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप ने करों पर अपनी प्राथमिकता बताते हुए कहा कि मैं पहले कहता था कि टैरिफ मेरा पसंदीदा शब्द है, लेकिन इससे मुझे परेशानी हो गई। फेक न्यूज वालों ने मुझ पर सवाल उठा दिए-धर्म का क्या, भगवान का क्या, परिवार का क्या, पत्नी और बच्चों का क्या? इसलिए अब टैरिफ मेरा पांचवां पसंदीदा शब्द है।

ट्रंप ने मीडिया पर निशाना साधा

ट्रंप ने अपने बयान में मीडिया पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से अब वह अपने शब्दों को लेकर ज्यादा सतर्क रहते हैं, ताकि अनावश्यक विवाद न खड़े हों।

टैक्स कट्स का ऐलान

अपने भाषण में ट्रंप ने नए साल से देश में लागू होने वाले टैक्स कट्स का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े टैक्स कट होंगे और इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा। ट्रंप ने घोषणा की कि अब टिप्स पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे होटल, रेस्तरां और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों को भी टैक्स से छूट दी जाएगी। ट्रंप के मुताबिक, इससे मेहनत करने वाले लोगों को सीधे लाभ मिलेगा और काम करने का उत्साह बढ़ेगा।

सीनियर सिटीजंस के लिए बड़ी राहत

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि सोशल सिक्योरिटी पर भी टैक्स नहीं लगेगा। इससे अमेरिका के वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। ट्रंप ने कहा कि नए साल से नॉर्थ कैरोलिना के लोग इन नीतियों के 'ड्रामेटिक नतीजे' देखेंगे। उन्होंने दावा किया कि उनकी आर्थिक नीतियां आम अमेरिकियों की जेब में ज्यादा पैसा छोड़ेंगी और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगी।

अमेरिकी संसद में छाई मोदी-पुतिन की सेल्फी वाली फोटो, डेमोक्रेट सांसद बोलीं- ये तस्वीर हजार शब्दों के बराबर

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हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार में एक सेल्फी ली थी। दोनों नेताओं की सेल्फी वाली फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इस तस्वीर ने अमेरिकी संसद के हॉल के अंदर भी नई बहस छेड़ दी है। अब इस फोटो को दिखाकर अमेरिकी कांग्रेस के अंदर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को घेरा जा रहा हैष

मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो से ट्रंप को घेरा

अमेरिकी संसद में एक कांग्रेसी सांसद ने ही मोदी-पुतिन की सेल्फी फोटो लहराई है। अमेरिकी संसद में कांग्रेस वुमन सिडनी कामलेवगर डोव ने मोदी-पुतिन की सेल्फी वाला पोस्टर दिखाकर डोनाल्ड ट्रंप को कोसा। उन्होंने इस फोटो के जरिए अमेरिका की विदेश नीति की खूब आलोचना की है। सिडनी कामलेगर डोव ने इस तस्वीर को दिखाकर अमेरिका को चेताया है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन भारत को मॉस्को के करीब धकेल रहा है। उन्होंने साफ आरोप लगाया कि नई दिल्ली नहीं, अमेरिका ही भारत-यूएस पार्टनरशिप को कमजोर कर रहा है।

ट्रंप पर अमेरिका-भारत के रिश्ते को नुकसान पहुंचाने का आरोप

सांसद सिडनी कामलेगर-डोव ने कहा कि जिस तरह से पुतिन का स्वागत हुआ और पीएम मोदी के साथ उनकी गर्मजोशी दिखी, वो दिखाता है कि ट्रंप ने किस तरह का नुकसान अमेरिका-भारत के रिश्ते को पहुंचा दिया है।

ट्रंप-पुतिन की सेल्फी ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सबूत-डोव

डोव ने अपने बयान में कहा, नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन की साथ में आई तस्वीरें हमें बहुत कुछ दिखा रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप को समझना चाहिए कि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती हैं। ट्रंप-पुतिन की सेल्फी और गले मिलते हुए तस्वीरें ट्रंप की नाकाम विदेश नीति का सीधा सबूत हैं।

भारत पर टैरिफ गलत

विपक्षी पार्टी की नेता डोव ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का भारत पर टैरिफ लगाना बेवजह लगता है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ बिजनेस डील के लिए पुतिन के सलाहकारों के साथ मिलकर यूक्रेन को बेच रहे हैं।

सांसद प्रमिला जयापल ने भी जताई चिंता

इस दौरान सांसद प्रमिला जयापल ने व्यापार और आव्रजन (इमिग्रेशन) नीतियों के कारण भारत-अमेरिका आर्थिक और लोगों के बीच संबंधों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों में लगे टैरिफ कारोबार और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सांसद जयापल की यह टिप्पणी ट्रंप के हालिया बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने भारत से चावल के आयात पर नए टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचाते हुए सस्ते चावल निर्यात कर रहा है। इस दौरान ट्रंप ने अमेरिकी कृषि उत्पादकों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद पैकेज की घोषणा भी की।

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इस साल 85 हजार वीजा किए कैंसिल, छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

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अमेरिका ने इमिग्रेशन नियम कड़े करने के बाद जनवरी से अब तक 85 हजार वीजा रद्द किए हैं। जिनमें 8 हजार से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया है कि यह कार्रवाई इमिग्रेशन और बॉर्डर सिक्योरिटी पर ट्रम्प प्रशासन के बढ़ते फोकस का हिस्सा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जनवरी में राष्ट्रपति बनने के बाद से इमिग्रेशन मुद्दे पर लगातार सख्त रुख अपनाया हुआ है। इसी क्रम में अमेरिकी विदेश विभाग ने मंगलवार क एक्स पर लिखा, 'जनवरी से अब तक 85,000 वीजा कैंसिल किए गए हैं। प्रेसिडेंट ट्रंप और सेक्रेटरी रुबियो एक आसान से आदेश का पालन करते हैं और वे जल्द ही रुकने वाले नहीं हैं।' पोस्ट में ट्रंप की तस्वीर के साथ 'मेक अमेरिका सेफ अगेन' का स्लोगन दिया गया है। यानी अमेरिका को सुरक्षित बनाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

रद्द किए गए वीजा में 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के

विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, हमने सभी कैटेगरी के 85,000 वीजा रद्द कर दिए हैं। जिनमें 8,000 से ज्यादा छात्र शामिल हैं, जो पिछले साल की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। रद्द किए गए वीजा में से 8 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स के थे। इसकी प्रमुख वजह नशे में गाड़ी चलाना, चोरी और हमला जैसे अपराध थे, जो पिछले साल के लगभग आधे कैंसिलेशन का हिस्सा थे।

वीजा रद्द की क्या हैं वजहें?

वीजा रद्द करने के कारणों में पहले अवधि से अधिक समय रुकना, आपराधिक चिंताएं और आतंकवाद का समर्थन शामिल रहा है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने गाजा को लेकर हो रहे छात्र विरोध प्रदर्शनों में शामिल अंतरराष्ट्रीय छात्रों को निशाना बनाया गया है। इन छात्रों को यहूदी-विरोधी करते हुए वीजा पर सख्ती की गई है।

सोशल मीडिया अकाउंट की जांच के बाद मिलेगा H-1B वीजा

इधर, अमेरिका लगातार वीजा नियमों को भी सख्त कर रहा है। 5 दिसंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने H-1B वीजा नियमों में सख्ती के आदेश दिए थे। इसके तहत H-1B आवेदकों को अपना सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक करना होगा, ताकि अमेरिकी अधिकारी आवेदक की प्रोफाइल, सोशल मीडिया पोस्ट और लाइक्स को देख सकें। यदि आवेदक की कोई भी सोशल मीडिया एक्टिविटी अमेरिकी हितों के खिलाफ दिखी तो H-1B वीजा जारी नहीं किया जाएगा। H-1B के आश्रितों (पत्नी, बच्चों और पेरेंट्स) के लिए H-4 वीजा के लिए भी सोशल मीडिया प्रोफाइल को पब्लिक करना जरूरी होगा। ऐसा पहली बार है, जब H-1B वीजा के लिए सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच जरूरी की गई है। नए नियम 15 दिसंबर से लागू होंगे। ट्रम्प प्रशासन ने सभी दूतावासों को निर्देश जारी किए हैं।

भारत को फिर झटका देंगे ट्रंप! भारत से निर्यात होने वाले चावल पर सख्ती के दिए संकेत

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ मामले में भारत को एक और झटका दे सकते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया है कि उनका प्रशासन विदेशी कृषि उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने पर विचार कर सकता है, जिसमें भारतीय चावल और कनाडाई उर्वरक शामिल हैं। ट्रंप का ये बयान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हाल ही में भारत दौरे के बाद आया है।

भारत के सस्ते चावल से अमेरिकी उत्पादक परेशान

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में अमेरिकी किसानों के लिए 12 अरब डॉलर की मदद करने का ऐलान करते हुए कहा कि भारत से सस्ता चावल आने की वजह से अमेरिका के चावल उत्पादक परेशान हैं और उनके दाम गिर रहे हैं। ये बात उन्हें अमेरिका की बड़ी चावल कंपनी कैनेडी राइस मिल्स की मालकिन और सीईओ मेरिल कैनेडी ने बताई, जिसके बाद ट्रंप ने साफ कहा कि वे भारतीय चावल पर और ज्यादा टैरिफ लगाने का प्लान बना रहे हैं ताकि अमेरिकी किसानों को बचाया जा सके।

अमेरिकी किसानों को ट्रंप ने दिया भरोसा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक लिस्ट दी गई जिसमें भारत, थाईलैंड और चीन जैसे देशों पर अमेरिका में सस्ता चावल डंप करने का आरोप लगा था। लिस्ट देखकर ट्रंप ने नाराजगी जताई और अपने वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से पूछा, “भारत के बारे में बताओ, भारत ऐसा क्यों कर रहा है? क्या चावल पर कोई टैरिफ छूट है?” ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी किसानों को बचाने के लिए अब भारतीय चावल पर और सख्त टैरिफ लग सकता है।

ट्रंप बोले- भारतीय चावल की डंपिंग पर ध्यान देंगे

अमेरिकी किसानों ने डोनाल्ड ट्रंप से कहा है कि सब्सिडी वाले चावल के बेशुमार आयात से मार्किट पर असर पड़ रहा है। इससे घरेलू फसलों की कीमतें नीचे जा रही हैं। इस पर ट्रंप ने जवाब दिया कि यह धोखा है और इस पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिका में भारतीय चावल की डंपिंग पर जरूर ध्यान देंगे।

अमेरिका में 19 देशों के ग्रीन कार्ड होल्डर्स की फिर होगी जांच, नेशनल गार्ड पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा फैसला

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वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड पर हुए हमले के बाद अब अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि 19 देशों से आने वाले सभी लोगों के ग्रीन कार्ड की दोबारा गहन जांच की जाएगी। यह फैसला वॉशिंगटन में नेशनल गार्ड सैनिकों पर हुए हमले के बाद आया है, जिसमें एक महिला सैनिक की मौत हो गई और दूसरा गंभीर रूप से घायल है।

अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के निदेशक जोसेफ एडलो ने कहा कि राष्ट्रपति के निर्देश पर यह जांच ‘पूरी तरह कठोर और फुल-स्केल’ होगी। सीएनएन के मुताबिक, जिन 19 देशों को ‘कंट्रीज ऑफ कंसर्न’ की सूची में रखा गया है, उन्हें ट्रंप प्रशासन ने जून में ही चिन्हित किया थ। जिसमें अफगानिस्तान, क्यूबा, हैती, ईरान, सोमालिया और वेनेजुएला, बर्मा, चाड, रिपब्लिक ऑफ कांगो और लीबिया शामिल थे। अमेरिका ने अफगानिस्तान से सभी इमिग्रेशन रिक्वेस्ट को प्रोसेस करना भी रोक दिया है।

अफगान नागरिकों की बढ़ी मुश्किलें

वहीं, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने भी कहा है कि बाइडेन प्रशासन के दौरान मंजूर किये गये सभी आश्रय मामलों की समीक्षा की जा रही है। DHS ने बताया कि अफगान नागरिकों के इमिग्रेशन अनुरोधों की प्रोसेसिंग तात्कालिक रूप से रोक दी गयी है जब तक सुरक्षा और वेटिंग प्रोटोकॉल की समीक्षा पूरी नहीं होती। प्रशासन ने यह कदम ‘बैकलॉग और संभावित गलत वेटिंग’ का हवाला देकर लिया है।

एफबीआई कर रही हमले की जांच

हमले की जांच अब एफबीआई संभाल रही है। एफबीआई निदेशक कश पटेल ने कहा कि यह हमला ‘आतंक की घटना’ के रूप में जांचा जा रहा है और कई राज्यों में सर्च वारंट जारी किए गए हैं। उन्होंने इसे ‘कोस्ट-टू-कोस्ट इन्वेस्टिगेशन’ बताया।

ट्रंप ने बदले सुर, बोले-कुशल विदेशी लोगों का अमेरिका आना जरूरी

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आव्रजन (इमिग्रेशन) पर सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, अब उनके सुर बदले-बदले से लग रहे हैं। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि हाई-स्किल्ड विदेशी कामगार अमेरिका की टेक इंडस्ट्री के लिए जरूरी हैं। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की टेक कंपनियों को विदेशी कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। उनके बिना अमेरिकी लोगों को कंप्यूटर चिप्स और दूसरी तकनीकी चीजें बनाना सीखना मुश्किल होगा।

अमेरिका में आयोजित यूएस-सऊदी इन्वेस्टमेंट फोरम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को उन्होंने स्वीकार किया कि हाल ही में उनके "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" (MAGA) समर्थकों द्वारा कुछ कुशल प्रवासियों को देश में आने की अनुमति देने के उनके बयान की आलोचना की गई है। ट्रंप ने व्यावसायिक अधिकारियों के एक समूह से कहा कि अमेरिका को ऐसे प्रवासियों की जरूरत है जो उच्च तकनीक वाली फैक्टरियों में घरेलू कामगारों को प्रशिक्षित कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करना उनके मूल राजनीतिक विश्वासों के साथ असंगत नहीं है।

विरोधियों को ट्रंप का जवाब

ट्रंप ने कहा, मुझे अपने रूढ़िवादी दोस्त पसंद हैं। मुझे MAGA पसंद है, लेकिन यही MAGA है। ट्रंप ने यूएस-सऊदी निवेश फोरम को संबोधित करते हुए कहा, वे लोग हमारे लोगों को कंप्यूटर चिप बनाना सिखाएंगे, और कुछ ही समय में हमारे लोग बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे। और वे लोग घर जा सकेंगे। इस टिप्पणी पर कमरे में तालियां बजीं।

ट्रंप ने जताई H-1B वीज़ा की जरूरत

पिछले हफ्ते, ट्रंप ने इसी मुद्दे पर फॉक्स न्यूज की होस्ट लॉरा इंग्राहम से बहस की। इंग्राहम ने ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार में सुझाव दिया कि आप देश में लाखों विदेशी कर्मचारियों की बाढ़ नहीं ला सकते, जिस पर राष्ट्रपति ने जवाब दिया कि आपको प्रतिभाओं को भी लाना होगा। ट्रंप ने कहा था कि H-1B वीज़ा की जरूरत इसलिए है क्योंकि अमेरिका में हर तरह की तकनीकी प्रतिभा मौजूद नहीं है। H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को छह साल तक विदेशी कुशल कर्मचारियों को काम पर रखने की अनुमति देता है।

H-1B वीजा को लेकर है विवाद

दक्षिणपंथी अमेरिकी लंबे समय से H-1B वीजा को अमेरिकी कामगारों के खिलाफ मानता रहा है। उनका आरोप है कि इस कार्यक्रम के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से सस्ता कामगार लाकर अमेरिकी इंजीनियरों और प्रोग्रामर्स को रिप्लेस कर देती हैं। कुछ हाई-प्रोफाइल मामलों में अमेरिकियों की छंटनी और फिर उन्हें H-1B कर्मचारियों को ट्रेन देने के लिए कहे जाने ने इस गुस्से को और बढ़ाया। ट्रंप ने अपने पिछले चुनाव अभियानों के दौरान कई बार H-1B पर सवाल उठाए थे। लेकिन सितंबर 2025 में उन्होंने एक नया आदेश साइन किया जिसमें अमेरिका के बाहर से दायर होने वाले हर नए H-1B आवेदन पर एक बार का 100,000 डॉलर शुल्क लगाने की घोषणा की गई।

पाकिस्तान भी कर रहा परमाणु परीक्षण, ट्रंप ने किया बड़ा खुलासा

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि पाकिस्तान परमाणु परीक्षण कर रहा है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि पाकिस्तान उन देशों में शामिल है जो सक्रिय रूप से परमाणु हथियारों का परीक्षण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ देशों की यही प्रवृत्ति दर्शाती है कि अमेरिका के लिए भी अपने परमाणु परीक्षण को फिर से शुरू करना जरूरी हो गया है।

पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे-ट्रंप

रविवार को सीबीएस न्यूज़ को दिए 60 मिनट के साक्षात्कार में, ट्रंप ने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया और पाकिस्तान सहित कई देश परमाणु परीक्षण कर रहे हैं। लेकिन वो इसके बारे में बात नहीं करते हैं, लेकिन हम एक खुला समाज हैं, हम इसपर बात करते हैं। और हमें इसपर बात करनी होगी नहीं तो आप लोग (मीडिया) इसपर रिपोर्ट करेंगे। इसीलिए वो टेस्ट करते हैं, बार बार टेस्ट करते हैं। निश्चित तौर पर उत्तर कोरिया टेस्ट कर रहा है। पाकिस्तान न्यूक्लियर टेस्ट कर रहा है।

हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए परमाणु हथियार-ट्रंप

सीबीएस चैनल के खास कार्यक्रम '60 मिनट्स' को दिए गये एक इंटरव्यू के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अपने विशाल परमाणु भंडार के बावजूद एकमात्र ऐसा देश नहीं हो सकता जो परीक्षण न करे। मैंने राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों के साथ इस पर चर्चा की है। हमारे पास दुनिया को 150 बार उड़ाने के लिए पर्याप्त परमाणु हथियार हैं। रूस के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं और चीन के पास भी बहुत सारे होंगे।" उन्होंने आगे कहा कि "अमेरिका अकेला ऐसा देश नहीं होना चाहिए जो परीक्षणों से परहेज करे।

रूस ने अपने सबसे घातक मिसाइल का किया परीक्षण

यह बयान उस वक्त आया है जब ट्रंप ने पहले ही रक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि वे तुरंत परमाणु परीक्षण शुरू करें। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 30 सालों के बाद अमेरिका को फिर से परमाणु हथियारों की रेस में उस वक्त उतारा है, जब रूस ने अपनी सबसे घातक मिसाइल का परीक्षण किया है। ये परमाणु ऊर्जा से चलने वाली मिसाइल है, जो 15 घंटे से ज्यादा वक्त तक उड़ान भर सकती है।

प्रधानमंत्री मोदी आसियान समिट में शामिल होंगे या नहीं? मलेशिया के पीएम ने दी जानकारी

#pmmodiwillnotattendaseansummithopesfortrumpmeeting

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के लिए कुआलालंपुर नहीं जाएंगे। मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बुधवार को इसकी पुष्टि की। उन्होने बताया कि पीएम मोदी आसियान शिखर सम्मेलन के लिए कुआलालंपुर नहीं जाएंगे, बल्कि वर्चुअली इसमें शामिल होंगे। मलयेशियाई प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी के एक करीबी सहयोगी से फोन पर हुई बातचीत के बाद ये जानकारी दी। इस तरह मलेशिया दौरा न होने की वजह से पीएम मोदी और ट्रंप मुलाकात की संभावना भी खत्म हो गई है।

मलयेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम पीएम मोदी के साथ फेन पर हुई बातचीत के बाद कहा, हमने इस महीने के अंत में कुआलालंपुर में होने वाले 47वें आसियान शिखर सम्मेलन के आयोजन पर चर्चा की। उन्होंने मुझे बताया कि इस समय भारत में चल रहे दीपावली समारोह के कारण प्रधानमंत्री वर्चुअली इसमें शामिल होंगे। मलयेशियाई पीएम ने कहा, मैं उनके फैसले का सम्मान करता हूं और उन्हें और भारत के सभी लोगों को दीपावली की शुभकामनाएं देता हूं।

आसियान शिखर सम्मेलन क लेकर पीएम मोदी ने दिया अपडेट

वहीं, आसियान शिखर सम्मेलन में शामिल होने को लेकर पीएम मोदी ने अपडेट दिया है। उन्होंने इस सम्मेलन में वर्चुअल शामिल होने की बात कही है। अपने एक्स हैंडल पर जानकारी देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे प्रिय मित्र, मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ गर्मजोशी से बातचीत हुई। उन्हें मलेशिया की आसियान अध्यक्षता के लिए बधाई दी और आगामी शिखर सम्मेलनों की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में वर्चुअल रूप से शामिल होने और आसियान-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने के लिए उत्सुक हूं।

एस जयशंकर कर सकते हैं भारत का प्रतिनिधित्व

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार इस मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर इन बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। बता दें कि हाल के कुछ बैठकों में पीएम मोदी की जगह एस जयशंकर या दूसरे मंत्री ही भाग ले रहे हैं।

ट्रंप-मोदी मुलाकात के आसार प फिरा पानी

बता दें कि आसियान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हिस्सा ले रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यहां ट्रंप की मुलाकात पीएम मोदी और शी जिनपिंग से होगी। मगर पीएम मोदी की ओर से यह कन्फर्म हो गया है वह इस समिट में भाग नहीं ले रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के अलावा, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समिट में शामिल होंगे। ट्रंप शी जिनपिंग से भी मुलाकात को लेकर आतुर हैं। बहरहाल, आसियान समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पीएम मोदी संग संभावित मुलाकात की राहें अब बंद हो गई हैं।