सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत, निचली अदालत की कार्यवाही पर लगाई रोक, जानें पूरा मामला

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राहुल गांधी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। इस बीच उन्हें सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ ट्रायल पर रोक लगा दी है। ये मामला महाराष्ट्र की एक ट्रायल कोर्ट से जुड़ा है।

यह मामला राहुल गांधी के उस कथित बयान से जुड़ा है जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए कथित अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। मामला निचली अदालत तक पहुंचा और राहुल गांधी को समन जारी किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट में आगे की कार्यवाही फिलहाल नहीं होगी। हालांकि यह राहत अभी अंतरिम है। मामले में अंतिम फैसला आना बाकी है।

चार सप्ताह में मांगा जवाब

मंगलवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता महेश श्रीश्रीमल को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा। राहुल ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 8 सितंबर के आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करते हुए मानहानि केस रद्द करने से इनकार कर दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

राहुल गांधी ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आठ सितंबर 2026 के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने राहुल गांधी को 2019 में जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। यह समन मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 28 अगस्त 2019 को शिकायत पर कार्रवाई करते हुए जारी किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट को शिकायत पर सुनवाई छह सप्ताह तक टालने का अपना 2021 का आदेश जारी रखने को कहा था, जिससे राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट जा सकें।

पीएम मोदी पर लगाया था आरोप

याचिका श्रीमाल नाम के एक शख्स ने लगाई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने 20 सितंबर 2018 को राजस्थान में एक सार्वजनिक भाषण में पीएम मोदी की बदनामी की थी। दावा किया गया था कि राहुल गांधी के बयानों का मतलब बीजेपी के सभी सदस्यों और पीएम मोदी से जुड़े भारतीय नागरिकों पर सीधे आरोप लगाना था।

राहुल गांधी ने गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का मारा', बीजेपी का बड़ा आरोप

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बीजेपी ने दिल्ली में कांग्रेस के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी पर एक प्रेग्नेंट महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी का आरोप लगाया है। बीजेपी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया है कि मार्च के दौरान राहुल ने गर्भवती महिला पत्रकार संग बदसलूकी की। बीजेपी ने महिला पत्रकार संग बदसलूकी वाले वीडियो भी शेयर किया है।

बीजेपी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 12 अक्टूबर को एक विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही एक गर्भवती महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी की। उन्होंने दावा किया कि इस घटना के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बीजेपी ने अस्पताल में भर्ती महिला पत्रकार का एक वीडियो भी एक्स अकाउंट पर शेयर किया है, जिसमें उसने रोते हुए कांग्रेस सांसद पर बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया।

महिला पत्रकार के दुर्व्यवहार का आरोप

बीजेपी विधायक उमंग बजाज ने मीडिया से कहा कि रात 10 बजे उन्हें जानकारी मिली कि महिला पत्रकार रिचा पराशर के साथ दुर्व्यवहार हुआ है। उनसे मिलने के लिए बजाज अस्पताल पहुंचे। उनके साथ बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी, राजेश भाटिया और स्थानीय मंडल अध्यक्ष भी थे। उन्होंने पत्रकार की हालत का जायजा लेने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। बजाज ने इस कथित घटना की निंदा करते हुए पोस्ट किया, “जो व्यक्ति ‘पितृसत्ता को तोड़ने’ की बात करता है, वह एक महिला पत्रकार के साथ, जो सिर्फ अपना काम कर रही थी, ऐसा व्यवहार कैसे कर सकता है? मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।”

महिला पत्रकार ने सुनाई आपबीती

वहीं, महिला पत्रकार ने भी आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी ने खुद उनके कंधे से पकड़ा, फिर उन्हें जोर से खींचा जिससे वह जमीन पर गिड़ गईं और उनके ऊपर भी 4 से 5 लोग गिर गए। वह उनसे कोई सवाल भी नहीं पूछ रही थीं; वह बस विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पत्रकार की मदद के लिए कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता आगे नहीं आया और इसके बजाय उन पर आरोप लगाने की कोशिश की।

दिल्ली में विपक्ष का आंदोलन

बता दें कि देश की राजधानी दिल्ली में कई दिनों से सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा है। सोमवार को विपक्षी नेता और समर्थक दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर ‘लोकतंत्र के लिए मार्च’ निकाल रहे थे। मार्च का नेतृत्व राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर रहे थे। इसमें प्रियंका गांधी वाड्रा, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, सीपीआई नेता डी. राजा सहित इंडिया गठबंधन के कई नेता शामिल थे।

राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी नेताओं की बैठक, 'चाय' पार्टी में तय होगी सरकार के खिलाफ आगे की रणनीति

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ के आरोप में सरकार की जड़े हिलाने के लिए कमर कस ली है। चुनाव आयोग में कथित गड़बड़ी और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफी की मांग को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व में इंडिया गठबंधन लगातार सरकार पर दबाव बना रही है। इस आंदोलन को और धार देने के लिए राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में शामिल नेताओं को अपने आवास पर 'चाय' के लिए बुलाया है। उन्होंने शाम 4 बजे हाई टी पार्टी का आयोजन किया है। बताया जा रहा है कि आगे की रणनीति यही से तैयार होगी।

छात्र संगठनों को भी चाय पर बुलाया

राहुल गांधी ने इंडिया ब्लॉक के सांसदों, नागरिक समाज के सदस्यों और छात्र संगठनों को चाय पर बुलाया है। यह कार्यक्रम उनके आवास पर होगा। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों ने बताया कि मंगलवार दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस भी होगी। इसके बाद राहुल गांधी के 5, सुनहरी बाग रोड स्थित आवास पर चाय का कार्यक्रम रखा गया है।

निमंत्रण पत्र में क्या

निमंत्रण में लिखा है, आज (सोमवार) लोकतंत्र बचाओ मार्च और याचिका सौंपने के बाद, कल दोपहर इंडिया ब्लॉक के नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी। इसके बाद चाय का कार्यक्रम होगा। मैं आपको मंगलवार, 13 अक्तूबर को शाम 4 बजे, 5, सुनहरी बाग रोड, नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर आने के लिए आमंत्रित करता हूं'।

सोमवार को राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च

राहुल गांधी के घर पर होने वाली यह 'हाई टी' उस घटनाक्रम के एक दिन बाद होगी, जब वोट चोरी के आरोपों को लेकर हो रहे जोरदार विरोध-प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए थे। विपक्ष के दिग्गज नेताओं ने कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ मिलकर राष्ट्रीय राजधानी में अपनी ताकत दिखाते हुए भारी बैरिकेडिंग वाले रास्ते पर "लोकतंत्र के लिए मार्च" (मार्च फॉर डेमोक्रेसी) निकाला और कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ संयुक्त याचिका दायर की।

सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने किया डिटेन, बैर‍िकेड तोड़कर पहुंचे थे जंतर-मंतर*

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर मंगलवार सुबह तिरंगा लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के कुछ कार्यकर्ता पहुंचे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। सौरव दास और आशुतोष रांका सीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ बैर‍िकेड तोड़कर जंतर-मंतर की तरफ बढ़ रहे थे। यहां से दिल्ली पुलिस की टीम ने उन्हें डिटेन कर लिया।

सौरव दास ने खुद ट्वीट कर दी जानकारी

अपनी हिरासत का वीडियो सौरव दास ने खुद सोशल मीडिया अकाउंट से शेयर किया है। वीडियो में सौरव दास अपने साथियों के साथ 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाते नजर आ रहे हैं। सीजेपी के दोनों नेताओं के साथ प्रदर्शन कर रहे युवा इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफ मांगते भी नजर आ रहे हैं। सौरव दास कहते दिख रहे है कि हम जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। अब हमें हिरासत में लिया जा रहा है, लेकिन यह हम सभी युवाओं के लिए एक संदेश है। हम यह कर सकते हैं। ज्ञानू, अब तुम्हारा खेल खत्म।

प्रतिरोध की आवाज को खत्म नहीं कर सकते-दिपके

इस कार्रवाई के बाद सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, 'आप प्रतिरोध को खत्म नहीं कर सकते।' पोस्ट में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाया गया है।

जंतर-मंतर नहीं रहा प्रदर्शन स्‍थल

द‍िल्‍ली पुल‍िस ने यह कार्यवाही जंतर-मंतर के प्रदर्शन स्‍थल न रहने के चलते की है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारतीय न्‍याय संह‍िता की धारा 163 लागू है और यहां क‍िसी भी तरह के प्रदर्शनों पर रोक लगा दी गई है। 12 अक्‍टूबर को खुद केंद्र सरकार ने अपने नोट‍िफ‍िकेशन में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्‍थल के तौर पर प्रत‍िबंध‍ित कर द‍िया है। सरकार ने प्रदर्शनकार‍ियों को व‍िरोध प्रदर्शन के लिए तीन नई जगहें सोमवार को दी हैं। इनमें बुराड़ी मैदान, रामलीला मैदान और सीबीडी ग्राउंड हैं।

राहुल गांधी नक्सलियों की विचारधारा की तरह अराजकता से सत्ता में काबिज होना चाहते है : प्रतुल शाह देव

झारखंड भाजपा के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने राहुल गांधी के सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च करने के ऐलान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास उठता जा रहा है। कांग्रेस अब चुनावी प्रक्रिया के जरिए जनता का विश्वास जीतने के बजाय सड़कों पर दबाव और अराजकता की राजनीति से सत्ता हासिल करना चाहती है।

प्रतुल ने कहा कि कभी महात्मा गांधी के सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने वाली कांग्रेस अब नक्सलियों के विचारधारा से प्रभावित दिखती प्रतीत हो रही है।अब तो कांग्रेस ने अपना मास्क भी हटा दिया। जिस तरीके से नक्सली अराजकता पैदा कर सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं,उसी तरीके का व्यवहार कांग्रेस का दिख रहा है।

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट मार्च महज एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि न्यायपालिका पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों से असहमति हो सकती है, लेकिन क्या किसी फैसले को प्रभावित करने के लिए न्यायपालिका तक मार्च निकालना उचित है?

राहुल गांधी को समझना चाहिए कि सर्वोच्च न्यायालय कोई राजनीतिक अखाड़ा नहीं, बल्कि देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है।प्रतुल ने कहा कि इस मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में पहले से हो रही है।तो फिर राहुल गांधी का यह धरना प्रदर्शन को कोर्ट पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जाना चाहिए

प्रतुल ने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में अब विरोध के नाम पर टकराव और संस्थाओं पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति लगातार दिखाई दे रही है। जब चुनावी व्यवस्था उनके अनुकूल परिणाम नहीं देती, तब चुनाव आयोग पर सवाल उठाए जाते हैं और अब न्यायपालिका को भी राजनीतिक विरोध के दायरे में खींचने की कोशिश हो रही है।

यह लोकतंत्र में विश्वास का नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति का संकेत है।आज उसके नेतृत्व में विरोध की राजनीति किस दिशा में जा रही है, यह देश देख रहा है। राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करना है या राजनीतिक लामबंदी के जरिए न्यायपालिका पर दबाव बनाना।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का रास्ता जनता के वोट से होकर गुजरता है, न कि सड़क पर अराजकता फैलाकर या संवैधानिक संस्थाओं को दबाव में लेकर। कांग्रेस को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि राजनीतिक शोर-शराबे से जनादेश को बदला जा सकता है।

विभिन्न दलों के दिग्गज नेता भाजपा में शामिल, बाबूलाल मरांडी ने दिलाया सदस्यता, कहा- सेवा और अंत्योदय भाजपा का मूलमंत्र

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय में विभिन्न दलों को छोड़कर कई नेताओं और नेत्रियों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। पार्टी की ओर से आयोजित मिलन समारोह कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में इन नए सदस्यों ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। बाबूलाल मरांडी ने इस सभी नेताओं का स्वागत किया। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वालों में सरायकेला, हजारीबाग, बोकारो एवं जमशेदपुर जिला के विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी शामिल हैं।

इस मौके पर बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पार्टी में शामिल होने वाले कई नेता जनसंघ और भाजपा से जुड़े परिवारों की पृष्ठभूमि से आते हैं। इसलिए ये कोई नए सदस्य नहीं, बल्कि अपने परिवार में वापस आए सदस्य हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि इनके जुड़ने से संगठन मजबूत होगा और भाजपा की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

मरांडी ने कहा कि भाजपा का मूलमंत्र सेवा और अंत्योदय है। जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और अंत्योदय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना पार्टी का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि देशभर में चल रहे सेवा संकल्प अभियान से प्रेरित होकर लोग संगठन से जुड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने 13 साल मुख्यमंत्री और 12 साल पीएम के रूप में देश की जनता की सेवा करने का काम कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐतिहासिक कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मरांडी ने अनुच्छेद 370 हटाने, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, तीन तलाक के खिलाफ कानून, आधारभूत संरचना के विस्तार, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और गरीबों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को केंद्र सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में गिनाया। उन्होंने कहा कि आवास, मुफ्त राशन, शौचालय और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से गरीबों तक सरकारी सहायता पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि देश के कई राज्य उग्रवाद से प्रभावित थे। शाम होते ही झारखंड़ भी ठहर जाता था लेकिन आज चारों तरफ शांति है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उग्रवाद लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने विकास को लेकर भी कई उल्लेखनीय कार्य किये हैं।

उन्होंने देश में झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर अराजकता फैलाने वालों दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ये लोग बिना सत्ता के रह नहीं सकते है।। देश की जनता ने कांग्रेस को बंगाल, बिहार, उड़ीसा, गुजरात, तमिलनाडु से कब का बाहर कर दिया है। कांग्रेस परिवार और पैसे के लिए सिर्फ राजनीति करती है।

उन्होंने झारखंड़ के सत्ताधारी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग झारखंड़ में लूट मचाये हुए हैं। राज्य में बालू, पत्थर, कोयला, लोहा, जमीन की लूट मची हुई है। थाना और ब्लॉक के बीच जनता पीस रही है।

उन्होंने आह्वान करते हुए कहा कि अब समय आ गया है देशविरोधी ताकतों को देश की जनता स्वयं जबाब दे।

अतः हम सबकी जिम्मेदारी और फर्ज बनता है कि झारखंड़ से भ्रष्टाचार को समाप्त करने हेतु इस सरकार को उखाड़ फेंके।

भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने पार्टी में योगदान देने वालों का स्वागत और अभिनंदन करते हुए आग्रह किया कि आप सभी लोग पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करेंगे और 2029 में राज्य में भाजपा की सरकार बनाने में अपनी भूमिका को निभाएंगे।

भाजपा में योगदान करने वाले नेता खगेन महतो ने कहा कि वे भाजपा और जनसंघ के नेता हिकीम चंद्र महतो के परिवार से आते हैं। लिहाजा उनके रग रग में ही भाजपा है। आज भाजपा के झंडे के नीचे आकर गर्व की अनुभूति हो रही है। उन्होंने कहा कि जबतक जीवित हूं, भाजपा संगठन के लिए काम करूंगा।

झारखंड़ के दिग्गज नेता रहे समरेश सिंह की बहू परिंदा सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों, सिद्धांतों और राष्ट्रहित में लिए गए संकल्पों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्हीं संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए राष्ट्रीय एकता, सुशासन, आत्मनिर्भरता और जनकल्याण को केंद्र में रखकर देश को विकास की नई ऊँचाइयों तक ले जाने का प्रयास हो रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी संकल्पित होकर इसी दिशा में काम कर रहे हैं। मैं भी इसी विचारधारा तथा सेवा के संकल्प को लेकर संगठन के लिए काम करूंगी।

बरकट्ठा की नेत्री कुमकुम देवी ने कहा कि यह भाजपा का कार्यालय हमारे लिए मंदिर के समान है, भाजपा मेरा परिवार है। चाहूंगी कि मेरी अर्थी भी भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में काम करते हुए निकले। राज्य की स्थिति भयावह है। पार्टी जो भी जिम्मेवारी देगी, ईमानदारी पूर्वक निभाऊंगी।

बिमल बैठा ने कहा कि जब तक शरीर में रक्त है तक भाजपा के नीति सिद्धान्त से जुड़ा रहूंगा और भाजपा को शीर्ष पर पहुंचाने के लिए काम करूंगा।

पार्टी में योगदान करने वाले सभी नए कार्यकर्ताओं को भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद ने ऑनलाइन सदस्यता ग्रहण करायी। भवानी गोप, हरि सिंह, हरिपाल महतो, कैलाश प्रामाणिक, उत्तम कुमार, मिंटू गुप्ता, संजय मंडल, क्षितिज कुमार, मालिन्दर कालिंदी, छूटूलाल महतो, सुभाष महतो, बिंदु देवी, हरिपद सिंह, जितेंद्र प्रामाणिक, पवन शर्मा, रामकृष्ण सिंह, हरिनारायण सिंह आदि भी मुख्य रुप से पार्टी में शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रंजय भारती ने किया।

मौके पर सरायकेला खरसावां के जिला अध्यक्ष हरेकृष्ण प्रधान, पप्पू वर्मा, प्रतुल शाहदेव, सूरज चौरसिया, सूरज शाहदेव, बिजय कोइरी आदि उपस्थित रहे।

जंतर मंतर पर अब नहीं होगा धरना-प्रदर्शन, सरकार ने प्रोटेस्ट के लिए तय किए तीन नए स्थल

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दिल्ली में अब जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन नहीं होगा। इसके बजाय तीन नए स्थान निर्धारित किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया है। अब रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को धरना-प्रदर्शन के लिए नए स्थल के रूप में निर्धारित किया गया है। सरकार का यह फैसला तब सामने आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर मंतर जाने की कॉकरोच जनता पार्टी मांग कर रही है।

धरना-प्रदर्शन के लिए तीन नए स्थान

आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की समीक्षा करने के वास्ते एक समिति गठित की थी। आदेश में कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में गैर अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों के तौर पर तय किया गया है।

प्रदर्शन के लिए अलग से जारी होगी प्रक्रिया

दिल्ली पुलिस के आदेश में कहा गया है कि इन तीनों स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अलग से जारी की जाएगी। यानी प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया और उससे जुड़े दिशा-निर्देशों की जानकारी बाद में दी जाएगी। फिलहाल आदेश में नए नियमों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए प्रदर्शन से जुड़ी शर्तों, अनुमति लेने की प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में अलग आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

विपक्ष के प्रदर्शन के बीच फैसला

दिल्ली पुलिस का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय राजधानी में निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है। विपक्ष ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी ने सोमवार को कहा कि वह जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिल्ली पुलिस को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय देगी क्योंकि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखे हुए है।

विपक्ष के मार्च पर भड़के हरीश साल्‍वे, बोले-सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल किया जा रहा

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देश के जाने-माने वकील और भारत के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक किए जाने वाले मार्च को लेकर तीखी टिप्पणी की है। उन्‍होंने विपक्ष के इस कदम को परम मूर्खता बताते हुए कहा कि न्‍यायपालिका को पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा रहा है।

विपक्ष के इस कदम को बताया ‘सरासर मूर्खता’

आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में कानूनी मामलों के जानकार और देश के पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्‍वे ने विपक्ष के सीजेपी से मुलाकात की कोशिश और सुप्रीम कोर्ट तक के मार्च को ‘सरासर मूर्खता’ बताते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संविधान अधिकार देता है, लेकिन उनका इस्तेमाल कानून और संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए।

विपक्ष के रुख पर कड़ी टिप्पणी

साल्वे ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के बजाय राजनीतिक दलों को स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष का रुख ऐसा प्रतीत होता है, मानो उसे संविधान और व्यवस्था पर भरोसा नहीं है और वह अपनी इच्छा के अनुसार काम करना चाहता है।

अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर किया जाए-साल्वे

विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर साल्वे ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही किया जा सकता है। अगर पुलिस प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है, तो उसके फैसले को उचित कानूनी प्रक्रिया के जरिए अदालत में चुनौती दी जा सकती है। कोई व्यक्ति खुद ही पुलिस के आदेश को गलत मानकर प्रतिबंध तोड़ नहीं सकता और फिर रोके जाने पर अपने अधिकारों के उल्लंघन का दावा नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार किसी को कानून से ऊपर नहीं बनाता।

विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के ऐलान पर टिप्पणी

पूर्व सॉलिसिटर जनरल की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोमवार को कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की घोषणा की है। राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और आम नागरिकों से भी मार्च में शामिल होने की अपील की थी।

ओवैसी ने की सीईसी की नियुक्ति से जुड़ा कानून रद्द करने की मांग, बोले- एसआईआर भी खत्म किया जाए

#owaisisayslawregardingappointmentofcecshouldbestruckdown

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष के दबाव के कारण देश का सिसायी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को रद्द करने की मांग की है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर एतराज

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा नया विधेयक लोकसभा में पेश किया गया था, तभी उन्होंने सरकार को आगाह किया था कि इसके प्रावधानों से आम जनता के बीच चुनाव आयोग की निष्पक्षता और विश्वसनीयता कम होगी। उन्होंने कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि इस कानून में सेवानिवृत्ति के बाद चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा देने का प्रावधान किया गया है, जो बिल्कुल सही नहीं है। ओवैसी ने मांग की कि नियुक्ति प्रक्रिया में फिर से बदलाव किया जाना चाहिए और चयन समिति में प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के साथ-साथ देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

एसआईआर पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने एसआईआर पर भी सवाल उठाया है। एसआईआर के मुद्दे पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा कि आखिर यह प्रक्रिया कहां से आई। उन्होंने दावा किया कि 10 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इसके बावजूद फॉर्म-6 के आवेदनों की प्रक्रिया के दौरान आवेदकों की मैपिंग पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने एसआईआर को भी बंद करने की मांग की। उन्होंने मांग की कि इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।

‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं-ओवैसी

एआईएमआईएम प्रमुख ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के विरोध प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए ओवैसी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विरोध जताना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है और देश की सर्वोच्च अदालत भी इस बात की पुष्टि कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह खुद ‘इंडिया’ ब्लॉक का हिस्सा नहीं हैं, इसलिए वे इस गठबंधन के आंतरिक कार्यक्रमों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं।

इंडिया गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट मार्च आज, छह मेट्रो स्टेशन बंद

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चुनाव आयोग में कथित अनियमितता को लेकर विपक्ष लामबंद दिख रहा है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ दिल्ली में आंदोलन हो रहा है। विपक्षी दलों का इंडिया गठबंधन अपनी मांग को लेकर लगातार सड़कों पर है। आज फिर दिल्ली में इंडिया ब्लॉक का सुप्रीम कोर्ट तक विरोध मार्च प्रस्तावित है।

राहुल गांधी की युवाओं से प्रोटेस्ट में भाग लेने की अपील

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बड़ी संख्या में देश के लोगों और युवाओं से इस प्रोटेस्ट में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि यह किसी राजनीतिक दल का कार्यक्रम नहीं है। राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवा, तमाम विपक्षी दल, सिविल सोसाइटी और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी लोग इस मार्च में शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि संविधान के साथ खड़े सभी लोग इस पहल का हिस्सा बनेंगे।

राहुल गांधी ने डरो मत का नारा भी दिया

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये लोग भारत की आवाज को दबा नहीं सकते। उन्होंने कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है और सरकार को पीछे हटना होगा। राहुल गांधी ने लिखा कि सभी लोग मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ एक साथ मार्च करेंगे। राहुल गांधी ने अपने संदेश में 'डरो मत' का नारा भी दिया और कहा कि सोमवार को पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।

इंडिया ब्लॉक के मार्च में कौन-कौन से नेता होंगे शामिल?

प्रस्तावित मार्च में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हो सकते हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में यह मार्च सुप्रीम कोर्ट तक निकाला जाना है। इसमें तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वाम दलों, आरजेडी, एनसीपी (एसपी), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वीसीके और आईयूएमएल के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। केरल के कुछ क्षेत्रीय दल भी मार्च में हिस्सा ले सकते हैं। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा है।

मार्च से पहले सुरक्षाबल मुस्तैद

दिल्ली में आज सुप्रीम कोर्ट तक इंडिया ब्लॉक के प्रस्तावित विरोध मार्च से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के पास सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। यहां दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मी भी तैनात हैं। प्रस्तावित मार्च को देखते हुए इन इलाकों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ाई गई है। हालांकि, विरोध मार्च में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या, मार्च के निर्धारित मार्ग और यातायात व्यवस्था को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

दिल्ली के 6 मेट्रो स्टेशन आज रहेंगे बंद

विपक्षी दलों के मार्च को देखते हुए आज सुबह 6 बजे से लेकर शाम के 4 बजे तक पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट मेट्रो स्टेशन, बाराखंभा रोड मेट्रो स्टेशन बंद रहेंगे।