पटना और दिल्ली में पत्रकारों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा, पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग
पटना एवं दिल्ली में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर हुए हमलों की घटना अत्यंत चिंताजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात है। पत्रकार समाज और लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसका दायित्व निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित से जुड़ी सूचनाओं को आम लोगों तक पहुंचाना है। पत्रकार बिना किसी पक्षपात के सत्ता पक्ष, विपक्ष और आम जनता—सभी की बात को सामने लाने का कार्य करता है।
रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार अक्सर कठिन और संवेदनशील परिस्थितियों में काम करते हैं। दुर्घटनाएं हों, प्राकृतिक आपदाएं, अपराध, आंदोलन या अन्य संवेदनशील घटनाएं—हर परिस्थिति में पत्रकार अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना जनता तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाने का प्रयास करता है। ऐसे में यदि पत्रकारों पर जानलेवा हमला, मारपीट, अभद्र व्यवहार या उनके उपकरणों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं होती हैं, तो यह न केवल एक व्यक्ति पर हमला है बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर भी हमला माना जाना चाहिए।

किसी भी पत्रकार—चाहे वह पुरुष हो या महिला—के साथ हिंसा, धमकी या दुर्व्यवहार किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है। कैमरा तोड़ना, रिपोर्टिंग से रोकना, धमकी देना या शारीरिक हमला करना असहिष्णुता और संकीर्ण मानसिकता का परिचायक है। ऐसे कृत्य लोकतंत्र की उस भावना को कमजोर करते हैं, जिसमें मीडिया की स्वतंत्र भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
हम बिहार सरकार एवं भारत सरकार से मांग करते हैं कि पत्रकारों पर हमला करने वाले असामाजिक तत्वों की शीघ्र पहचान कर उनके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था, त्वरित कानूनी संरक्षण और पत्रकारों की सुरक्षा संबंधी ठोस नीति बनाई जाए, ताकि वे निर्भय होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। हम सभी सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों, प्रशासन और आम नागरिकों से भी अपील करते हैं कि वे पत्रकारों के कार्य का सम्मान करें तथा लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता की रक्षा में सहयोग दें। एक सुरक्षित पत्रकार ही समाज तक सत्य, तथ्य और जनहित की आवाज़ निर्भीकता से पहुंचा सकता है।
2 hours and 40 min ago
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