यूपी के अटल और विहान आवासीय विद्यालयों तक पहुंचेगी ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस
* *तकनीकी शिक्षा विभाग की पहल, छात्रों को मिलेगी आधुनिक मोबाइल प्रयोगशाला की सुविधा*

**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश के सभी अटल और विहान आवासीय विद्यालयों के छात्रों को अब अत्याधुनिक मोबाइल प्रयोगशाला ‘लैब ऑन व्हील्स’ का लाभ मिलेगा। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेशभर के आवासीय विद्यालयों में इस सुविधा को पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रमुख सचिव (तकनीकी शिक्षा) डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम् ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस का निरीक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. पांडे से अटल आवासीय विद्यालय, लखनऊ में भी इस बस को भेजने का अनुरोध किया।
प्रमुख सचिव के अनुरोध पर 14 मई को ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस अटल आवासीय विद्यालय, लखनऊ पहुंची, जहां छात्रों ने उत्साहपूर्वक आधुनिक प्रयोगशाला का अनुभव लिया। बच्चों ने वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकी सुविधाओं को करीब से देखा तथा कई सवाल भी पूछे।
छात्रों के उत्साह को देखते हुए प्रमुख सचिव ने अब प्रदेश के सभी 17 अटल आवासीय विद्यालयों और 24 विहान आवासीय विद्यालयों में भी इस मोबाइल लैब को भेजने का अनुरोध किया है।

* *श्रमिकों और कोविड प्रभावित बच्चों के लिए संचालित हैं अटल विद्यालय*
प्रमुख सचिव ने बताया कि अटल आवासीय विद्यालय निर्माण श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक विद्यालय के हिसाब से कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय चल रहे हैं।
इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाती है तथा प्रत्येक विद्यालय में 1000 विद्यार्थियों के आवास की सुविधा है। यहां नवोदय, केंद्रीय और सैनिक विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ चयनित परिषदीय शिक्षक अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अटल आवासीय विद्यालयों के पहले बैच के 2178 विद्यार्थियों ने इस वर्ष कक्षा 10 की सीबीएसई परीक्षा में 93.15 प्रतिशत सफलता हासिल की। प्रयागराज और वाराणसी के विद्यालयों का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा, जबकि 15 विद्यालयों का पास प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया।

* *24 विहान आवासीय विद्यालयों में भी पहुंचेगी सुविधा*
प्रमुख सचिव ने बताया कि विहान आवासीय विद्यालय श्रम विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के 12 जिलों में कुल 24 विद्यालय संचालित हैं, जहां बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग विद्यालय बनाए गए हैं।
राज्य पाठ्यक्रम से संबद्ध इन विद्यालयों में हिंदी माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक शिक्षा दी जाती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की तर्ज पर संचालित इन संस्थानों में प्रत्येक कक्षा में 100 विद्यार्थियों की क्षमता निर्धारित है।
यूपी के अटल और विहान आवासीय विद्यालयों तक पहुंचेगी ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस
* *तकनीकी शिक्षा विभाग की पहल, छात्रों को मिलेगी आधुनिक मोबाइल प्रयोगशाला की सुविधा*

**लखनऊ।** उत्तर प्रदेश के सभी अटल और विहान आवासीय विद्यालयों के छात्रों को अब अत्याधुनिक मोबाइल प्रयोगशाला ‘लैब ऑन व्हील्स’ का लाभ मिलेगा। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेशभर के आवासीय विद्यालयों में इस सुविधा को पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है।
प्रमुख सचिव (तकनीकी शिक्षा) डॉ. एम. के. शन्मुगा सुन्दरम् ने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यकारी समिति की बैठक के दौरान ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस का निरीक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ए.के. पांडे से अटल आवासीय विद्यालय, लखनऊ में भी इस बस को भेजने का अनुरोध किया।
प्रमुख सचिव के अनुरोध पर 14 मई को ‘लैब ऑन व्हील्स’ बस अटल आवासीय विद्यालय, लखनऊ पहुंची, जहां छात्रों ने उत्साहपूर्वक आधुनिक प्रयोगशाला का अनुभव लिया। बच्चों ने वैज्ञानिक उपकरणों और तकनीकी सुविधाओं को करीब से देखा तथा कई सवाल भी पूछे।
छात्रों के उत्साह को देखते हुए प्रमुख सचिव ने अब प्रदेश के सभी 17 अटल आवासीय विद्यालयों और 24 विहान आवासीय विद्यालयों में भी इस मोबाइल लैब को भेजने का अनुरोध किया है।

* *श्रमिकों और कोविड प्रभावित बच्चों के लिए संचालित हैं अटल विद्यालय*
प्रमुख सचिव ने बताया कि अटल आवासीय विद्यालय निर्माण श्रमिकों के बच्चों और कोविड काल में अपने माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक विद्यालय के हिसाब से कुल 18 अटल आवासीय विद्यालय चल रहे हैं।
इन विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा दी जाती है तथा प्रत्येक विद्यालय में 1000 विद्यार्थियों के आवास की सुविधा है। यहां नवोदय, केंद्रीय और सैनिक विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ चयनित परिषदीय शिक्षक अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि अटल आवासीय विद्यालयों के पहले बैच के 2178 विद्यार्थियों ने इस वर्ष कक्षा 10 की सीबीएसई परीक्षा में 93.15 प्रतिशत सफलता हासिल की। प्रयागराज और वाराणसी के विद्यालयों का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा, जबकि 15 विद्यालयों का पास प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया।

* *24 विहान आवासीय विद्यालयों में भी पहुंचेगी सुविधा*
प्रमुख सचिव ने बताया कि विहान आवासीय विद्यालय श्रम विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के 12 जिलों में कुल 24 विद्यालय संचालित हैं, जहां बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग विद्यालय बनाए गए हैं।
राज्य पाठ्यक्रम से संबद्ध इन विद्यालयों में हिंदी माध्यम से कक्षा 6 से 8 तक शिक्षा दी जाती है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की तर्ज पर संचालित इन संस्थानों में प्रत्येक कक्षा में 100 विद्यार्थियों की क्षमता निर्धारित है।
यूपी का एआई विजन बना राष्ट्रीय मॉडल, लखनऊ उभर रहा देश का नया टेक्नोलॉजी हब
* एआई ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्क्लेव में जुटे वरिष्ठ नौकरशाह, भविष्य की डिजिटल गवर्नेंस पर हुआ मंथन
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी और एआई इनोवेशन हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘एआई ट्रांसफॉर्मेशन कॉन्क्लेव 2026’ में देशभर से 50 से अधिक आईएएस अधिकारियों और वरिष्ठ लोक प्रशासकों ने भाग लिया।
कॉन्क्लेव के दौरान ‘द एआई-पावर्ड पब्लिक एडमिनिस्ट्रेटरः कॉम्पिटेंसीज फॉर ए न्यू एरा ऑफ गवर्नेंस’ विषय पर उच्च स्तरीय कैपेसिटी बिल्डिंग वर्कशॉप आयोजित की गई। वर्कशॉप का संचालन डॉ. सुबी चतुर्वेदी ने किया।
डॉ. सुबी चतुर्वेदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ, भारत में एआई इनोवेशन का सबसे संभावनाशील केंद्र बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले लखनऊ तहज़ीब के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह नवाचार, तकनीक और नई सोच का भी प्रतीक बन रहा है। उन्होंने बताया कि InMobi जैसी कंपनियों के डीपटेक ऑपरेशन्स शुरू होने से प्रदेश में रिसर्च, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट डेवलपमेंट और आंत्रप्रेन्योरशिप का मजबूत इकोसिस्टम तैयार हो रहा है।
कॉन्क्लेव में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी एआई नीति और टेक्नोलॉजी विजन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। हाल ही में लखनऊ की वृंदावन योजना में ₹368 करोड़ की लागत से देश की पहली एआई सिटी को मंजूरी दी गई है, जबकि यूपी एआई मिशन के लिए ₹225 करोड़ का विशेष बजट आवंटित किया गया है।
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकारी कार्यप्रणालियों में एआई ट्रांसफॉर्मेशन का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल राज्य की ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को भी नई गति देगी।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने कहा कि सरकार एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और डीपटेक जैसी उभरती तकनीकों के लिए मजबूत आधारभूत संरचना तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि हालिया बजट में यूपी एआई मिशन, एआई सिटी और नई तकनीकों के विकास के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
वर्कशॉप में एआई इकोसिस्टम, साइबर सुरक्षा, डिजिटल गवर्नेंस, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नागरिक सेवाओं में एआई की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। डॉ. चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘MANAV’ फ्रेमवर्क का उल्लेख करते हुए नैतिक, जवाबदेह और मानव-केंद्रित एआई के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सुरक्षित और भरोसेमंद एआई तकनीक के जरिए ही समावेशी विकास और भविष्य की प्रभावी डिजिटल गवर्नेंस सुनिश्चित की जा सकती है।
NIHIT प्लेटफॉर्म इंडिया-यूएस सीईओ फोरम के तहत संचालित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे Mastercard और Tata Sons का सहयोग प्राप्त है। यह मंच भारत और अमेरिका के बीच इनोवेशन, स्टार्टअप्स, साइबर सुरक्षा, एमएसएमई और ग्लोबल सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
प्राकृतिक खेती और फार्मर रजिस्ट्री पर सरकार का फोकस, खरीफ उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति तय
* कानपुर में संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी सम्पन्न, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने किसानों को दिया प्राकृतिक खेती का संदेश
कानपुर/लखनऊ। कानपुर के चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में शुक्रवार को कानपुर, चित्रकूटधाम और झांसी मण्डल की संयुक्त मण्डलीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने की।
कार्यक्रम में तीनों मण्डलों के 13 जनपदों से आए किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने खरीफ फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और आधुनिक कृषि तकनीकों पर चर्चा की।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्राकृतिक खेती भारतीय कृषि परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है और यह मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, इसलिए प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए चालू वित्तीय वर्ष में 95 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 110 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खाद्यान्न उत्पादन विस्तार का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही दलहनी फसलों का आच्छादन 4 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
प्रमुख सचिव कृषि रवीन्द्र ने किसानों से हरी खाद और जैविक खाद के अधिक प्रयोग की अपील करते हुए कहा कि इससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य होगा।
कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने चित्रकूटधाम और झांसी जैसे कम वर्षा वाले क्षेत्रों में दलहन, तिलहन और रागी जैसी फसलों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने जल संरक्षण के लिए चेकडैम निर्माण और वर्षा जल संचयन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
गोष्ठी के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को उन्नत बीज, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और पशुपालन से जुड़ी तकनीकी जानकारियां दीं। वहीं ई-लाटरी के माध्यम से चयनित चार किसानों को ढैचा बीज मिनीकिट वितरित किए गए।
कार्यक्रम में श्याम बिहारी गुप्ता, कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता, बीज विकास निगम के निदेशक टी.एम. त्रिपाठी सहित विभिन्न मण्डलों के मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
फैंटेसी और दर्शन का विलक्षण संगम : कुमार पंकज की “एल्गा-गोरस”

कल्पना, विचार और मानवीय संवेदनाओं को नया आयाम देती एक चर्चित कृति

पुस्तक समीक्षा

लखनऊ । हिंदी साहित्य जगत में इन दिनों लेखक कुमार पंकज की चर्चित कृति “एल्गा-गोरस” स्याह मिथकों की रहस्य गाथा और उसके दूसरे भाग “अग्निशास्त्र की रक्तगाथा” को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। दोनों पुस्तकों के एक साथ प्रकाशित होने ने हिंदी फैंटेसी साहित्य में नई जिज्ञासा और उत्साह पैदा किया है। लॉन्च के कुछ ही घंटों के भीतर यह कृति सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर छा गई। इसके वीडियो ट्रेलर को फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों दर्शकों ने देखा, जबकि पहले ही दिन यह अमेज़न की “हॉट न्यू रिलीज़” सूची में शीर्ष स्थान तक पहुँच गई। हिंदी साहित्य में किसी फैंटेसी कृति को इतनी तेज़ लोकप्रियता मिलना अपने आप में उल्लेखनीय माना जा रहा है।

मेरठ निवासी गीतकार और लेखक कुमार पंकज की लेखन शैली इस कृति को सामान्य फैंटेसी उपन्यासों से अलग पहचान देती है। “एल्गा-गोरस” केवल युद्ध, रोमांच और रहस्य की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, भावनात्मक उलझनों और अस्तित्व संबंधी प्रश्नों की भी गंभीर पड़ताल करती है। कथा कई स्तरों पर विकसित होती है, जिससे पाठक केवल घटनाओं का साक्षी नहीं बनता, बल्कि विचारों और अनुभूतियों की यात्रा का सहभागी बन जाता है। इसके पात्र मात्र काल्पनिक चरित्र नहीं, बल्कि मानवीय मनःस्थितियों और जीवन-दृष्टियों के प्रतीक बनकर उभरते हैं।

कृति का सबसे प्रभावशाली पक्ष उसका दार्शनिक स्वर है। “जंग कभी नहीं मरती, केवल योद्धा मरते हैं” जैसी पंक्तियाँ कथा को व्यापक मानवीय संदर्भ प्रदान करती हैं। वहीं “फुसफुसाहट, कभी भीतरी बेइमानी के बिना पैदा नहीं होती” और “इंतज़ार, वक़्त क़त्ल करने का सबसे फूहड़ तरीका है” जैसे विचार पाठक को भीतर तक प्रभावित करते हैं। लेखक ने जीवन, युद्ध, प्रेम और अहं जैसे जटिल विषयों को सहज लेकिन गहन भाषा में प्रस्तुत किया है।

प्रेम और रिश्तों का चित्रण भी इस कृति की बड़ी विशेषता है। यहाँ प्रेम किसी आदर्शवादी कल्पना के रूप में नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक जटिलताओं, अपेक्षाओं, निर्भरता और टूटन के साथ सामने आता है। यही संवेदनात्मक ईमानदारी पाठक को कथा से भावनात्मक रूप से जोड़ती है।

सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा इस कृति को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाती है। “एल्गा-गोरस” केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्ममंथन और वैचारिक अनुभव बनकर सामने आती है। यही कारण है कि कुमार पंकज की यह कृति हिंदी साहित्य में फैंटेसी और दर्शन के अद्भुत संगम के रूप में नई संभावनाओं का द्वार खोलती दिखाई देती है। — प्रशांत आर्यप्रियम्
राम परिवार प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ 25 मई को, अयोध्या में होगा भव्य आयोजन

गंगा दशहरा पर विशेष पूजन, हवन और भजन-कीर्तन की तैयारी; सीएम योगी के शामिल होने की संभावना

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में 25 मई को श्रीराम मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले इस समारोह को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

बताया जा रहा है कि इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनके कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट स्तर पर तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष गंगा दशहरा के दिन ही श्रीराम मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। उस ऐतिहासिक आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे थे। इस वर्ष भी गंगा दशहरा 25 मई को पड़ने के कारण मंदिर ट्रस्ट ने इसी दिन वर्षगांठ समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है।

बुधवार देर शाम राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा हुई। बैठक में वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजन, हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाने तथा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी

नई दिल्ली /लखनऊ। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। लगभग चार साल बाद ईंधन दरों में यह बड़ा बदलाव किया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

दिल्ली में नई कीमतें

नॉर्मल पेट्रोल: ₹94.77 से बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर

प्रीमियम पेट्रोल: लगभग ₹105 से ₹107 प्रति लीटर के बीच

* डीजल: ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर

तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया संकट के चलते यह फैसला लिया गया है।

पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 17 मई तक बढ़ी, छात्रहित में परिषद का फैसला

लखनऊ। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पॉलीटेक्निक)-2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी गई है। अब अभ्यर्थी 17 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे।
परिषद के सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अभ्यर्थियों और विभिन्न शिक्षण संस्थाओं की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 11 मई किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा था।
परिषद के अनुसार 11 मई 2026 तक 2,71,093 सीटों के सापेक्ष चार लाख से अधिक अभ्यर्थी आवेदन कर चुके हैं, जो परीक्षा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे विस्तारित समयसीमा का लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन परिषद की आधिकारिक वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in पर जाकर किए जा सकते हैं।
परीक्षा से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी परिषद के हेल्पलाइन नंबर 0522-2630106, 2630695, 2630667 और 2636589 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचे उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, ‘नो व्हीकल डे’ की अपील
* ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्वजनिक परिवहन अपनाने का दिया संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल करते हुए गुरुवार को अपने 19, गौतमपल्ली स्थित सरकारी आवास से उद्यान निदेशालय तक ई-रिक्शा से यात्रा की।
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में की गई। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर की गई अपील को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत करना, प्रदूषण कम करना और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। यदि लोग सप्ताह में कुछ दिन भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें तो ईंधन की खपत और ट्रैफिक दबाव दोनों में कमी लाई जा सकती है।
उद्यान मंत्री ने आमजन से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवाओं, नागरिकों तथा सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से भी सार्वजनिक परिवहन को अपनाने का आह्वान किया। इसी क्रम में उद्यान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर विभाग में ईंधन और ऊर्जा बचत के लक्ष्य तय किए गए।
मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” के रूप में मनाएं और उस दिन सार्वजनिक परिवहन से कार्यालय आएं-जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्य दिनों में भी एक ही रूट से आने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी समन्वय बनाकर एक ही वाहन का उपयोग करें, ताकि ईंधन की बचत हो सके।
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
* आयुष मंत्री ने कहा, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो

* निर्माण कार्य समय पर पूरे हों, जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लगाए जाएं स्वास्थ्य शिविर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्रा दयालु ने गुरुवार को एनेक्सी भवन सभागार में प्रदेश के राजकीय आयुष महाविद्यालयों और 50 शैय्या युक्त आयुष एकीकृत चिकित्सालयों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की।
बैठक में राजकीय आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों के कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्माणाधीन छात्रावासों और अन्य परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और मानकों में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
आयुष मंत्री ने अस्पतालों में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि जिन दवाओं की मांग अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों को बाहर की दवा लिखने से बचा जाए, ताकि उन्हें इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
डॉ. दयाशंकर मिश्र ने ओपीडी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने अस्पतालों की आईपीडी सेवाओं को मजबूत करने और बेहतर उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही सभी चिकित्सालयों में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की व्यवस्था सुदृढ़ कर अधिक से अधिक माइनर सर्जरी करने पर बल दिया। मंत्री ने कहा कि ओपीडी, सर्जरी और स्वास्थ्य शिविरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन चिकित्सालयों को सम्मानित भी किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने विभागीय प्रगति की जानकारी दी और मंत्री के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. पी.के. सिंह, निदेशक यूनानी प्रो. जमाल अख्तर समेत प्रदेश के सभी आयुष महाविद्यालयों और चिकित्सालयों के प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।