फैंटेसी और दर्शन का विलक्षण संगम : कुमार पंकज की “एल्गा-गोरस”

कल्पना, विचार और मानवीय संवेदनाओं को नया आयाम देती एक चर्चित कृति

पुस्तक समीक्षा

लखनऊ । हिंदी साहित्य जगत में इन दिनों लेखक कुमार पंकज की चर्चित कृति “एल्गा-गोरस” स्याह मिथकों की रहस्य गाथा और उसके दूसरे भाग “अग्निशास्त्र की रक्तगाथा” को लेकर व्यापक चर्चा देखने को मिल रही है। दोनों पुस्तकों के एक साथ प्रकाशित होने ने हिंदी फैंटेसी साहित्य में नई जिज्ञासा और उत्साह पैदा किया है। लॉन्च के कुछ ही घंटों के भीतर यह कृति सोशल मीडिया और डिजिटल मंचों पर छा गई। इसके वीडियो ट्रेलर को फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों दर्शकों ने देखा, जबकि पहले ही दिन यह अमेज़न की “हॉट न्यू रिलीज़” सूची में शीर्ष स्थान तक पहुँच गई। हिंदी साहित्य में किसी फैंटेसी कृति को इतनी तेज़ लोकप्रियता मिलना अपने आप में उल्लेखनीय माना जा रहा है।

मेरठ निवासी गीतकार और लेखक कुमार पंकज की लेखन शैली इस कृति को सामान्य फैंटेसी उपन्यासों से अलग पहचान देती है। “एल्गा-गोरस” केवल युद्ध, रोमांच और रहस्य की कहानी नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष, भावनात्मक उलझनों और अस्तित्व संबंधी प्रश्नों की भी गंभीर पड़ताल करती है। कथा कई स्तरों पर विकसित होती है, जिससे पाठक केवल घटनाओं का साक्षी नहीं बनता, बल्कि विचारों और अनुभूतियों की यात्रा का सहभागी बन जाता है। इसके पात्र मात्र काल्पनिक चरित्र नहीं, बल्कि मानवीय मनःस्थितियों और जीवन-दृष्टियों के प्रतीक बनकर उभरते हैं।

कृति का सबसे प्रभावशाली पक्ष उसका दार्शनिक स्वर है। “जंग कभी नहीं मरती, केवल योद्धा मरते हैं” जैसी पंक्तियाँ कथा को व्यापक मानवीय संदर्भ प्रदान करती हैं। वहीं “फुसफुसाहट, कभी भीतरी बेइमानी के बिना पैदा नहीं होती” और “इंतज़ार, वक़्त क़त्ल करने का सबसे फूहड़ तरीका है” जैसे विचार पाठक को भीतर तक प्रभावित करते हैं। लेखक ने जीवन, युद्ध, प्रेम और अहं जैसे जटिल विषयों को सहज लेकिन गहन भाषा में प्रस्तुत किया है।

प्रेम और रिश्तों का चित्रण भी इस कृति की बड़ी विशेषता है। यहाँ प्रेम किसी आदर्शवादी कल्पना के रूप में नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक जटिलताओं, अपेक्षाओं, निर्भरता और टूटन के साथ सामने आता है। यही संवेदनात्मक ईमानदारी पाठक को कथा से भावनात्मक रूप से जोड़ती है।

सरल, प्रवाहपूर्ण और प्रभावशाली भाषा इस कृति को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाती है। “एल्गा-गोरस” केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्ममंथन और वैचारिक अनुभव बनकर सामने आती है। यही कारण है कि कुमार पंकज की यह कृति हिंदी साहित्य में फैंटेसी और दर्शन के अद्भुत संगम के रूप में नई संभावनाओं का द्वार खोलती दिखाई देती है। — प्रशांत आर्यप्रियम्
राम परिवार प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ 25 मई को, अयोध्या में होगा भव्य आयोजन

गंगा दशहरा पर विशेष पूजन, हवन और भजन-कीर्तन की तैयारी; सीएम योगी के शामिल होने की संभावना

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में 25 मई को श्रीराम मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई जाएगी। गंगा दशहरा के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले इस समारोह को भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

बताया जा रहा है कि इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि उनके कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट स्तर पर तैयारियों का सिलसिला शुरू हो गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष गंगा दशहरा के दिन ही श्रीराम मंदिर के प्रथम तल पर राम परिवार की भव्य प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। उस ऐतिहासिक आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे थे। इस वर्ष भी गंगा दशहरा 25 मई को पड़ने के कारण मंदिर ट्रस्ट ने इसी दिन वर्षगांठ समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया है।

बुधवार देर शाम राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की बैठक में कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा हुई। बैठक में वैदिक मंत्रोच्चार, विशेष पूजन, हवन, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाने तथा श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया।

ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार, राम परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ को यादगार बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। समारोह में बड़ी संख्या में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं और विशिष्ट अतिथियों के शामिल होने की संभावना है।

पेट्रोल-डीजल के दामों में ₹3 प्रति लीटर तक बढ़ोतरी

नई दिल्ली /लखनऊ। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी गई है। लगभग चार साल बाद ईंधन दरों में यह बड़ा बदलाव किया गया है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

दिल्ली में नई कीमतें

नॉर्मल पेट्रोल: ₹94.77 से बढ़कर ₹97.77 प्रति लीटर

प्रीमियम पेट्रोल: लगभग ₹105 से ₹107 प्रति लीटर के बीच

* डीजल: ₹87.67 से बढ़कर ₹90.67 प्रति लीटर

तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया संकट के चलते यह फैसला लिया गया है।

पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 17 मई तक बढ़ी, छात्रहित में परिषद का फैसला

लखनऊ। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पॉलीटेक्निक)-2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी गई है। अब अभ्यर्थी 17 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे।
परिषद के सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अभ्यर्थियों और विभिन्न शिक्षण संस्थाओं की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 11 मई किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा था।
परिषद के अनुसार 11 मई 2026 तक 2,71,093 सीटों के सापेक्ष चार लाख से अधिक अभ्यर्थी आवेदन कर चुके हैं, जो परीक्षा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे विस्तारित समयसीमा का लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन परिषद की आधिकारिक वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in पर जाकर किए जा सकते हैं।
परीक्षा से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी परिषद के हेल्पलाइन नंबर 0522-2630106, 2630695, 2630667 और 2636589 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
ई-रिक्शा से दफ्तर पहुंचे उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, ‘नो व्हीकल डे’ की अपील
* ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्वजनिक परिवहन अपनाने का दिया संदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने ईंधन बचत और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में नई पहल करते हुए गुरुवार को अपने 19, गौतमपल्ली स्थित सरकारी आवास से उद्यान निदेशालय तक ई-रिक्शा से यात्रा की।
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में की गई। मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर की गई अपील को जन-जन तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत करना, प्रदूषण कम करना और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। यदि लोग सप्ताह में कुछ दिन भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें तो ईंधन की खपत और ट्रैफिक दबाव दोनों में कमी लाई जा सकती है।
उद्यान मंत्री ने आमजन से निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करने और अधिक से अधिक सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवाओं, नागरिकों तथा सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों से भी सार्वजनिक परिवहन को अपनाने का आह्वान किया। इसी क्रम में उद्यान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक कर विभाग में ईंधन और ऊर्जा बचत के लक्ष्य तय किए गए।
मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी अधिकारी और कर्मचारी सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” के रूप में मनाएं और उस दिन सार्वजनिक परिवहन से कार्यालय आएं-जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि अन्य दिनों में भी एक ही रूट से आने वाले अधिकारी एवं कर्मचारी समन्वय बनाकर एक ही वाहन का उपयोग करें, ताकि ईंधन की बचत हो सके।
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
* आयुष मंत्री ने कहा, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो

* निर्माण कार्य समय पर पूरे हों, जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लगाए जाएं स्वास्थ्य शिविर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्रा दयालु ने गुरुवार को एनेक्सी भवन सभागार में प्रदेश के राजकीय आयुष महाविद्यालयों और 50 शैय्या युक्त आयुष एकीकृत चिकित्सालयों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की।
बैठक में राजकीय आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों के कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्माणाधीन छात्रावासों और अन्य परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और मानकों में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
आयुष मंत्री ने अस्पतालों में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि जिन दवाओं की मांग अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों को बाहर की दवा लिखने से बचा जाए, ताकि उन्हें इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
डॉ. दयाशंकर मिश्र ने ओपीडी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने अस्पतालों की आईपीडी सेवाओं को मजबूत करने और बेहतर उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही सभी चिकित्सालयों में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की व्यवस्था सुदृढ़ कर अधिक से अधिक माइनर सर्जरी करने पर बल दिया। मंत्री ने कहा कि ओपीडी, सर्जरी और स्वास्थ्य शिविरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन चिकित्सालयों को सम्मानित भी किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने विभागीय प्रगति की जानकारी दी और मंत्री के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. पी.के. सिंह, निदेशक यूनानी प्रो. जमाल अख्तर समेत प्रदेश के सभी आयुष महाविद्यालयों और चिकित्सालयों के प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश
* आयुष मंत्री ने कहा, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो

* निर्माण कार्य समय पर पूरे हों, जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लगाए जाएं स्वास्थ्य शिविर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्रा दयालु ने गुरुवार को एनेक्सी भवन सभागार में प्रदेश के राजकीय आयुष महाविद्यालयों और 50 शैय्या युक्त आयुष एकीकृत चिकित्सालयों के मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों के साथ वर्चुअल समीक्षा बैठक की।
बैठक में राजकीय आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी मेडिकल कॉलेजों के कार्यों की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्माणाधीन छात्रावासों और अन्य परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और मानकों में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।
आयुष मंत्री ने अस्पतालों में दवाइयों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि जिन दवाओं की मांग अधिक है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि मरीजों को बाहर की दवा लिखने से बचा जाए, ताकि उन्हें इलाज में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
डॉ. दयाशंकर मिश्र ने ओपीडी सेवाओं को और प्रभावी बनाने तथा अधिक से अधिक मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से समय-समय पर स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से लोगों को उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने अस्पतालों की आईपीडी सेवाओं को मजबूत करने और बेहतर उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही। साथ ही सभी चिकित्सालयों में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) की व्यवस्था सुदृढ़ कर अधिक से अधिक माइनर सर्जरी करने पर बल दिया। मंत्री ने कहा कि ओपीडी, सर्जरी और स्वास्थ्य शिविरों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष तीन चिकित्सालयों को सम्मानित भी किया जाएगा।
बैठक में प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने विभागीय प्रगति की जानकारी दी और मंत्री के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का भरोसा दिलाया।
इस अवसर पर निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथिक डॉ. पी.के. सिंह, निदेशक यूनानी प्रो. जमाल अख्तर समेत प्रदेश के सभी आयुष महाविद्यालयों और चिकित्सालयों के प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा 2026: आवेदन की अंतिम तिथि 17 मई तक बढ़ी,छात्रहित में परिषद का फैसला

लखनऊ। संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पॉलीटेक्निक)-2026 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि एक बार फिर बढ़ा दी गई है। अब अभ्यर्थी 17 मई 2026 तक आवेदन कर सकेंगे।
परिषद के सचिव संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अभ्यर्थियों और विभिन्न शिक्षण संस्थाओं की मांग को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रैल निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 11 मई किया गया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया जा रहा था।
परिषद के अनुसार 11 मई 2026 तक 2,71,093 सीटों के सापेक्ष चार लाख से अधिक अभ्यर्थी आवेदन कर चुके हैं, जो परीक्षा की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे विस्तारित समयसीमा का लाभ उठाते हुए जल्द से जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। आवेदन परिषद की आधिकारिक वेबसाइट jeecup.admissions.nic.in पर जाकर किए जा सकते हैं।
परीक्षा से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी परिषद के हेल्पलाइन नंबर 0522-2630106, 2630695, 2630667 और 2636589 पर भी संपर्क कर सकते हैं।
प्रदेश के 8 संरक्षित स्मारकों का संरक्षण कार्य पूरा, 712.40 लाख रुपये खर्च
* ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को सहेजने में जुटी योगी सरकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के अधीन पुरातत्व निदेशालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 8 संरक्षित स्मारकों एवं पुरास्थलों के संरक्षण और पुनरुद्धार कार्य पूरे कराए गए हैं। इन कार्यों पर मार्च 2026 तक कुल 712.40 लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई है।
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने यह जानकारी देते हुए कहा कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक पुरास्थल हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत भी हैं। इन धरोहरों का संरक्षण कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि सीतापुर के अलावलपुर स्थित संरक्षित शिव मंदिर के संरक्षण एवं पेंटिंग कंजर्वेशन सहित सभी कार्य 93.76 लाख रुपये की लागत से पूर्ण कराए गए हैं। वहीं फतेहपुर स्थित तुलाराम तालाब एवं शिव मंदिर परिसर में तालाब की सीढ़ियों के पुनरुद्धार समेत अन्य कार्य 133.83 लाख रुपये से पूरे किए गए।
इसके अलावा लखनऊ मोहनलालगंज स्थित संरक्षित पुरास्थल हुलासखेड़ा के सभी कार्य 167.74 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुए हैं। संतकबीर नगर में कबीरदास की समाधि एवं मजार का संरक्षण कार्य 16.78 लाख रुपये में कराया गया।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के महत्वपूर्ण संरक्षित स्मारकों पर सांस्कृतिक सूचना पट्ट लगाने का कार्य भी 18.31 लाख रुपये की लागत से पूरा कराया गया है।
इसी क्रम में महाराजगंज के बनरसिहा कला उत्खनन स्थल पर 146.73 लाख रुपये तथा कानपुर नगर के बिठूर स्थित टिकैत राय शिव मंदिर पर 78.96 लाख रुपये और अन्य संरक्षण कार्यों पर 56.29 लाख रुपये खर्च कर कार्य पूर्ण कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐतिहासिक महत्व के प्राचीन स्थल मौजूद हैं, जो सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन स्थलों के संरक्षण से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और शोधकर्ताओं व पर्यटकों का आकर्षण भी बढ़ेगा।
लखनऊ में प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार संपन्न, नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के भैंसाकुंड स्थित बैकुंठधाम श्मशान घाट पर गुरुवार को प्रतीक यादव का अंतिम संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। भाजपा नेत्री अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव को परिजनों, समर्थकों और शुभचिंतकों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
प्रतीक यादव को उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट पर बेहद भावुक माहौल देखने को मिला। पत्नी अपर्णा यादव और उनकी दोनों बेटियां भी अंतिम संस्कार में मौजूद रहीं।
इस दौरान अखिलेश यादव, शिवपाल यादव समेत पूरा यादव परिवार बैकुंठधाम पहुंचा। बड़ी संख्या में समर्थक और आम लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
प्रतीक यादव की अंतिम यात्रा में लोगों का भारी हुजूम उमड़ा और पूरे श्मशान घाट पर गमगीन माहौल बना रहा। बुधवार को उनके निधन के बाद गुरुवार को उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिवार और समर्थकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।