माल ढुलाई और नदी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी

कोच्चि, केरल, 23 जनवरी, 2026: अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) की तीसरी बैठक भारत के अंतर्देशीय जल परिवहन नेटवर्क के विस्तार, प्रमुख अवसंरचना निवेशों को मंजूरी देने और देश की नदियों की पूरी आर्थिक क्षमता को उजागर करने के लिए केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के लिए एक व्यापक रोडमैप के साथ संपन्न हुई। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंदा सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई इस पूर्ण दिवसीय बैठक में हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री; बिहार सरकार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार; नागालैंड सरकार के विद्युत और संसदीय कार्य मंत्री के. जी. केन्ये; अरुणाचल प्रदेश सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री ओजिंग तासिंग; और पंजाब सरकार के जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल; उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह भी उपस्थित थे। यह बैठक सतत और कुशल लॉजिस्टिक के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में अंतर्देशीय जल परिवहन को मजबूत करने की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। आईडब्ल्यूडीसी 3.0 ने हरित परिवहन को गति देने, बहुआयामी लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और नदी आधारित आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की पहचान की। केरल, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना में नदी क्रूज जेटियों सहित 150 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, जो देश भर में क्रूज पर्यटन सर्किट के विस्तार में सहायक होंगी। परिषद ने आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी (रा.ज.-4) पर स्थित मुक्त्याला और हरिश्चंद्रपुरम में रो-रो और कार्गो टर्मिनलों के विकास की घोषणा की जिससे 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ कम दूरी के कार्गो परिवहन को मजबूती मिलेगी। जम्मू और कश्मीर में झेलम नदी (रा.ज.49) पर तटवर्ती सुविधाओं को भी यात्री परिवहन और पर्यटन अवसंरचना को समर्थन देने के लिए मंजूरी दी गई। नौगम्यता, सुरक्षा और साल भर परिचालन को बेहतर बनाने के लिए ₹465 करोड़सेअधिककीपरिसंपत्तिखरीदकोमंजूरीदीगई।इनमेंकेरलमेंसर्वेक्षणजलयान; बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रो-पैक्स बर्थिंग जेट्टी; उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में फ्लोटिंग पोंटून और क्विक पोटून ओपनिंग सिस्टम; हाइब्रिड सर्वेक्षण जलयान; उभयचर और कटर सक्शन ड्रेजर; और टग-बार्ज इकाइयां शामिल हैं। परिषद ने 900 करोड़ रुपये से अधिक की कई बड़ी नई परियोजनाओं को भी मंजूरी दी, जिनमें कोच्चि में स्लिपवे सुविधा का विकास, ओडिशा (25) और पूर्वोत्तर (85) में 110 जेट्टी का निर्माण, जम्मू-कश्मीर में 10 हाइब्रिड इलेक्ट्रिक जलयानों की तैनाती और महाराष्ट्र में राष्ट्रीय नदी यातायात और नौवहन प्रणाली (एनआरटीएनएस) का कार्यान्वयन शामिल है। असम के लिए, आईडब्ल्यूडीसी ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल के विकास और बोगीबील तक 144 करोड़ रुपये की एप्रोच रोड संपर्क परियोजना  ब्रह्मपुत्र नदी (रा.ज.-2) पर डिब्रूगढ़ में नदी बंदरगाह का निर्माण असम के अंतर्देशीय जलमार्ग अवरंचना ढांचे और पर्यटन क्षमता को और मजबूत करेगा। परिषद को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अंतर्देशीय जलमार्ग भारत के परिवहन और लॉजिस्टिक परिवर्तन के एक कार्यनीतिक स्तंभ के रूप में उभरे हैं। हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अंतर्देशीय जलमार्गों को विशेष प्रोत्साहन दिया है, जिससे सड़कों पर भीड़ कम हुई है, लॉजिस्टिक लागत में कमी आई है और व्यापार करने में सुगमता बढ़ी है। इस दूरदृष्टि से प्रेरित होकर, नदियों को अब केवल प्राकृतिक संसाधन के रूप में नहीं बल्कि विकास, स्थिरता और संपर्क को गति देने वाली आर्थिक जीवनरेखा के रूप में देखा जाता है। बैठक में पिछले दशक में इस क्षेत्र के तीव्र विस्तार की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय जलमार्गों पर माल ढुलाई 2013-14 में 18 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 145.84 मिलियन टन हो गई है, जबकि परिचालन में मौजूद राष्ट्रीय जलमार्गों की संख्या तीन से बढ़कर 32 हो गई है, यानी दस गुना वृद्धि हुई है। लक्जरी नदी क्रूज जलयानों की संख्या पांच से बढ़कर 25 हो गई है, जो उद्योग, निवेशकों और राज्य सरकारों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है। केरल के विशाल बैकवाटर और नहर नेटवर्क को अंतर्देशीय जलमार्गों के लिए एक प्रमुख अवसर के रूप में उजागर किया गया। परिषद ने भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर, डिब्रूगढ़ सहित 18 शहरों मेंशहरी जल परिवहन के विकास की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की। बैठक में इस बात पर फिर से जोर दिया गया कि अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन का सबसे अधिक ईंधन-कुशल, लागत-प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल साधन बने हुए हैं, जो कार्बन उत्सर्जन को कम करने, सड़कों और रेलवे पर भीड़भाड़ कम करने और समग्र लॉजिस्टिक लागत को घटाने में सहायक हैं। नदी क्रूज पर्यटन को समुद्री अर्थव्यवस्था के सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना गया, जिसके लिए सरकार आधुनिक क्रूज टर्मिनल, उन्नत नौवहन प्रणाली और समर्पित क्रूज सर्किट विकसित कर रही है। "हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग हरित विकास, डिजिटल परिवर्तन और पर्यटन आधारित विकास के शक्तिशाली कारक के रूप में उभर रहे हैं। माल ढुलाई, यात्री सेवाओं और क्रूज पर्यटन में तीव्र विस्तार के साथ, हमारी नदियाँ सतत गतिशीलता और आर्थिक अवसरों का इंजन बन रही हैं। स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले जलयानों, स्मार्ट नेविगेशन प्रणालियों और विश्व स्तरीय यात्री अवसंरचना को एकीकृत करके, हम लॉजिस्टिक लागत को कम करने, उत्सर्जन में कटौती करने और नई आजीविका सृजित करने के लिए जलमार्गों की पूरी क्षमता का उपयोग कर रहे हैं। कोच्चि वाटर मेट्रो जैसी पहलों की सफलता दर्शाती है कि नदियाँ शहरी गतिशीलता को कैसे बदल सकती हैं, और हम गुवाहाटी, वाराणसी, पटना, तेजपुर और डिब्रूगढ़ सहित अन्य शहरों में इस मॉडल को दोहराने के लिए प्रतिबद्ध हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत के जलमार्ग विकसित भारत के पथ पर समावेशी विकास को गति प्रदान करें," सोनोवाल ने कहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया, जहां जलमार्ग परियोजनाओं से संपर्क, व्यापार, पर्यटन और नदी किनारे बसे समुदायों की आजीविका में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। सरकार ने पूर्वोत्तर में 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 घाटों का विकास करने की योजना बनाई है, जिससे क्षेत्रीय लॉजिस्टिक एकीकरण को मजबूती मिलेगी।  “भारतकीअंतर्देशीयजलमार्गयोजनामेंपूर्वोत्तरकाकेंद्रीयस्थानहै।अपनेविशालनदीनेटवर्ककेसाथ, यह क्षेत्र सतत परिवहन, व्यापार और पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से 85 जेटियों का विकास संपर्क को काफी मजबूत करेगा, क्षेत्रीय लॉजिस्टिक को एकीकृत करेगा और नदी किनारे बसे समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करेगा। अंतर्देशीय जलमार्ग न केवल पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय बाजारों के करीब लाएगा बल्कि विकास, समृद्धि और क्षेत्रीय एकीकरण के प्रवेश द्वार के रूप में इसकी भूमिका को भी उजागर करेगा,” सर्वानंदा सोनोवाल। असम के लिए, परिषद ने गुवाहाटी के उजान बाजार घाट पर 70 करोड़ रुपये के क्रूज टर्मिनल और डिब्रूगढ़ के बोगीबील नदी बंदरगाह तक 144 करोड़ रुपये की पहुंच मार्ग संपर्क परियोजना को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं राज्य के अंतर्देशीय जलमार्ग अवसंरचना को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत करेंगी, नदी क्रूज पर्यटन को बढ़ावा देंगी और अंतिम-मील संपर्क (कनेक्टिविटी) में सुधार करेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्वोत्तर को विकास के अष्ट लक्ष्मी इंजन के रूप में देखने के दृष्टिकोण से प्रेरित ये पहल ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे व्यापार, रोजगार और सतत विकास के नए अवसर पैदा करेंगी। (असम के लिए) परिषद ने सरकार की दूरदर्शी प्राथमिकताओं की पुष्टि की, जिनमें हरित और संकर जहाजों की तैनाती, डिजिटल नेविगेशन और यातायात प्रबंधन प्रणालियों का विस्तार, आधुनिक अंतर्देशीय टर्मिनलों का विकास, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत सुविधाओं को सुदृढ़ करना और समुद्री कौशल विकास को बढ़ावा देना शामिल है। बैठक में सरल शहरी जल परिवहन प्रणालियों के निर्माण, माल परिवहन दक्षता में सुधार, यात्री आवागमन के लिए हरित और संकर जहाजों को बढ़ावा देने, नदी क्रूज पर्यटन का विस्तार करने और डिजिटल और टिकाऊ प्रथाओं को सुदृढ़ करने पर विस्तृत विचार-विमर्श भी हुआ। राज्यों द्वारा चल रही और प्रस्तावित अंतर्देशीय जल परिवहन परियोजनाओं के संबंध में उठाई गई चिंताओं की समीक्षा की गई, जिसमें समन्वित प्रयासों के माध्यम से कार्यान्वयन में तेजी लाने पर जोर दिया गया। आइडब्ल्यूडीसी3.0, 2024 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी1.0 और 2025 में आयोजित आइडब्ल्यूडीसी2.0 के दौरान रखी गई नींव पर आधारित है, जिसमें स्थिरता, प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान और परियोजनाओं के त्वरित कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बैठक में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के सचिव विजय कुमार, अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आइडब्ल्यूएआइ) के अध्यक्ष सुनील पालीवाल, उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह सहित केंद्र और राज्य सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और विशेषज्ञ उपस्थित थे। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद (आइडब्ल्यूडीसी) 1.0 और 2.0 के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई और अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के अगले चरण की रूपरेखा तैयार की गई। दिन भर चली इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों की समीक्षा की गई, प्रमुख निवेशों और परियोजनाओं की घोषणा की गई और देश भर में अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के लिए एक दूरदर्शी रोडमैप प्रस्तुत किया गया। अंतर्राष्ट्रीय जल परिवहन परिषद (आईडब्ल्यूडीसी 3.0) का समापन केंद्र और राज्यों द्वारा अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने, स्वच्छ परिवहन समाधानों को प्रोत्साहित करने और नदियों को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। बैठक में अंतर्देशीय जलमार्गों को माल और यात्रियों दोनों के लिए परिवहन के एक रुचिकर, भविष्य के लिए तैयार साधन के रूप में पुनः स्थापित किया गया, जो स्वच्छ परिवहन, बेहतर लॉजिस्टिक्स और एक मजबूत भारत में योगदान देगा। भारत के अंतर्देशीय जलमार्ग ईंधन-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन उपलब्ध कराकर सड़क और रेल नेटवर्क पर भीड़ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। 23 राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में फैले 111 राष्ट्रीय जलमार्गों के साथ, अंतर्देशीय जलमार्ग रो-रो वाहन तथा, क्रूज पर्यटन जैसी पहलों को तेजी से समर्थन दे रहे हैं।पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अधीन आइडब्ल्यूएआइ, राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास, रखरखाव और विनियमन के लिए जिम्मेदार नोडल एजेंसी बनी हुई है।
*कैसे करोड़ों भारतीयों के सुरक्षा कवच बन गए मोदी!*

- डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

भारतीय राजनीति के वर्तमान युग को यदि किसी एक शब्द में समझा जाए, तो वह शब्द है – मोदी मैजिक। यह शब्द केवल किसी नेता की लोकप्रियता को नहीं दर्शाता, बल्कि उस गहरे भावनात्मक, सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन को भी बयान करता है जो पिछले एक दशक में भारत के मतदाता के भीतर घटित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह राजनीति, नेतृत्व और जनता के रिश्ते को पुनर्परिभाषित किया है, उसने भारत के लोकतांत्रिक व्यवहार को एक नई दिशा दी है।

मोदी की लोकप्रियता किसी एक चुनाव या किसी एक योजना का परिणाम नहीं है। यह वर्षों की सुनियोजित छवि- निर्माण, निरंतर संवाद, मजबूत संगठनात्मक शक्ति और सबसे बढ़कर जनता की भावनाओं को समझने की कला का संयुक्त परिणाम है। मोदी आज सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं हैं, वे करोड़ों भारतीयों के लिए एक उम्मीद, एक पहचान और एक सुरक्षा कवच बन चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें पहले यह समझना होगा कि भारतीय राजनीति केवल नीतियों से नहीं चलती, वह भावनाओं से चलती है। भारत का मतदाता जब वोट डालता है, तो वह केवल सरकार नहीं चुनता, वह अपने भविष्य, अपनी पहचान और अपने सम्मान पर निर्णय करता है। मोदी इस मनोविज्ञान को गहराई से समझते हैं।

नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा साधारण नहीं है। एक चाय बेचने वाले से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर एक ऐसी कहानी है जिसमें संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भरता का संदेश छिपा है। यह कहानी करोड़ों गरीब, निम्न मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों के दिल को छूती है। उन्हें लगता है कि मोदी उनमें से एक हैं। यही भावनात्मक रिश्ता मोदी को बाकी नेताओं से अलग बनाता है। मोदी ने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है जो सत्ता से नहीं, बल्कि सेवा से जुड़ा है। उनका सादा जीवन या लगातार काम करना, यह सब मिलकर उन्हें एक त्यागी और समर्पित नेता के रूप में दर्शाता है। यह छवि उस आम नागरिक के लिए बहुत आकर्षक है जो लंबे समय से नेताओं को सुविधा और भ्रष्टाचार में डूबा देखता आया है।

इस भावनात्मक जुड़ाव को मोदी ने निरंतर संवाद के माध्यम से और मजबूत किया। *"मन की बात"* जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने प्रधानमंत्री पद को एक दूर की कुर्सी से निकालकर घर की बैठक तक पहुंचा दिया। लोग रेडियो पर उनकी आवाज सुनते हैं, अपने जैसे लोगों की कहानियां सुनते हैं और महसूस करते हैं कि देश का नेता उनकी दुनिया को समझता है। सोशल मीडिया ने इस जुड़ाव को और गहरा किया है। मोदी आज भारत के सबसे बड़े डिजिटल रूप से सक्रीय राजनेता हैं। वे ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अपने मोबाइल ऐप के जरिए हर दिन करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं। इस निरंतर उपस्थिति ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया है जो हमेशा जनता के साथ और उनसे घिरा हुआ नजर आता है।

यह केवल प्रचार नहीं है, यह एक मनोवैज्ञानिक जुड़ाव है। जब कोई व्यक्ति रोज आपके सामने आता है, आप उसकी बातें सुनते हैं, तो वह आपके जीवन का हिस्सा बन जाता है। मोदी इस मनोविज्ञान को बहुत अच्छे से समझते हैं। मोदी मैजिक के एक और बड़े आधार के रूप में तकनीक व डेटा के उपयोग को समझा जा सकता है। 2014 के बाद से भारतीय राजनीति में एक नई शैली आई है जिसे डिजिटल राजनीति कहा जा सकता है। भाजपा ने लोगों की पसंद, उनकी जरूरतों और उनकी सोच को समझने के लिए बड़े पैमाने पर डेटा का इस्तेमाल किया। इसके आधार पर अलग-अलग वर्गों के लिए अलग-अलग संदेश तैयार किए गए। किसी युवा से नौकरी और स्टार्टअप की बात की गई, तो किसी किसान से सम्मान निधि और फसल बीमा की। महिलाओं के लिए उज्ज्वला और शौचालय जैसी योजनाओं को सामने रखा गया। इससे हर वर्ग को लगा कि सरकार सीधे उससे बात कर रही है।

व्हाट्सएप जैसे माध्यमों ने इस संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाया। पारंपरिक मीडिया पर निर्भर रहने के बजाय भाजपा ने अपने समर्थकों के नेटवर्क को ही एक बड़ा संचार तंत्र बना दिया। इससे मोदी का संदेश बिना रुके, बिना बदले, सीधे लोगों तक पहुंचा। मोदी मैजिक का एक बहुत बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय गर्व और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है। मोदी ने भारत की प्राचीन संस्कृति, परंपरा और इतिहास को गर्व का विषय बनाया। राम मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक न्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया। सेना के साहसिक कदमों और सीमा पर की गई कार्रवाइयों को *"मजबूत भारत"*  की पहचान के रूप में दिखाया गया। इससे लोगों को लगा कि अब देश कमजोर नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास से भरा हुआ है। मोदी ने भारत को एक ऐसे देश के रूप में प्रस्तुत किया है जो दुनिया में सम्मान चाहता है और सम्मान पाता भी है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी सक्रियता ने इस छवि को और मजबूत किया है।

हालाँकि इन सबके पीछे एक मजबूत संगठन भी काम करता है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन गांव से लेकर महानगर तक फैले हुए हैं। हर कार्यकर्ता मोदी के संदेश को आगे बढ़ाने का काम करता है। पार्टी में अनुशासन और नेतृत्व की स्पष्टता है, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनती है। मोदी की राजनीति ने विपक्ष को भी एक तरह से परिभाषित कर दिया है।
उन्होंने खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश किया है जो देश को खतरों से बचा सकता है। ऐसे में जो भी उनकी आलोचना करता है, वह कई बार जनता की नजर में देश के खिलाफ खड़ा दिखने लगता है। सही मायने में देखें तो इस पूरी प्रक्रिया में मोदी एक ऐसे केंद्र बन गए हैं जिसके चारों ओर राजनीति घूमती है। चुनाव अब केवल पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि मोदी बनाम बाकी सब के रूप में देखे जाने लगे हैं। मोदी ने राजनीति को एक भावनात्मक अनुभव में बदल दिया है, जहां नेता केवल सरकार नहीं चलाता, बल्कि लोगों की उम्मीदों और सपनों का प्रतिनिधि बन जाता है। जब तक मोदी इस भावनात्मक जुड़ाव, राष्ट्रीय गर्व और निरंतर संवाद को बनाए रखेंगे, तब तक मोदी मैजिक भारतीय राजनीति की सबसे शक्तिशाली ताकत बना रहेगा।
*आज के युवाओं के, कल के लक्ष्यों को ध्यान में रखेगा आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस*
*आज के युवाओं के लिए, कल के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बनाया गया आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस*

*नई दिल्ली, जनवरी 2026* : भारत आज एक अहम् मोड़ पर खड़ा है। आने वाले दस वर्ष देश के युवाओं को समर्पित हैं, जो सपने देखने वाले भी हैं और उन्हें पूरा करने वाले भी और साथ ही जो देश की आर्थिक दिशा तय कर रहे हैं। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के अनुसार, करीब 65% भारतीयों की उम्र 35 वर्ष से कम है। चाहे पहला घर खरीदना हो या जल्दी रिटायरमेंट की योजना बनाना, सपनों को हकीकत में बदलने के लिए लंबे समय तक अनुशासित वित्तीय योजना और बचत बेहद जरूरी है।
इसी सोच के साथ तैयार किया गया, आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस एक ऐसा मार्केट-लिंक्ड जीवन बीमा उत्पाद है, जो कमाने वाले युवाओं की सुविधाओं को ध्यान में रखता है। यह न सिर्फ लंबे समय में संपत्ति बनाने में मदद करता है, बल्कि परिवार को वित्तीय सुरक्षा भी देता है। सिर्फ 1,000 रुपए प्रति माह से शुरू होने वाला यह किफायती प्लान युवा प्रोफेशनल्स और पहली बार निवेश करने वालों को जल्दी शुरुआत करने, निवेश बनाए रखने और भारत की विकास कहानी का लाभ लेने का मौका देता है।
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर श्री विकास गुप्ता ने कहा, "आईसीआईसीआई प्रू स्मार्ट इंश्योरेंस प्लान प्लस एक किफायती उत्पाद है, जिसमें ग्राहक द्वारा चुने गए एसेट एलोकेशन के अनुसार पूरा प्रीमियम निवेश किया जाता है। इसमें ग्राहकों के लिए 25 अलग-अलग फंड और चार पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजीस का विकल्प शामिल है। यह आंशिक निकासी की सुविधा भी देता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत वित्तीय जरुरत पूरी हो सके। इसके अलावा इसमें 'वेवर ऑफ प्रीमियम' का अतिरिक्त लाभ की सुविधा भी मिलती है, जिससे जीवन में किसी अनचाही स्थिति में भी परिवार के वित्तीय लक्ष्य सुरक्षित रहते हैं।"
यूलिप की संरचना ऐसी होती है कि यह लंबे समय तक निवेश करने और एसेट बनाने की आदत को बढ़ावा देती है। यह ग्राहकों के लिए इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि मॉर्गन स्टैनली के अनुसार भारत 2028 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर है। यूलिप में ग्राहकों को एसेट क्लास चुनने की आज़ादी मिलती है और वे बिना किसी अतिरिक्त लागत या टैक्स के एक एसेट से दूसरे एसेट में स्विच भी कर सकते हैं।
*केविनकेयर का चिक क्रेम हेयर कलर कैटेगरी में प्रवेश; पटना में  लॉन्च किया चिक क्विक क्रेम हेयर कलर*
* गुणवत्ता  के प्रति जागरूक और किफायती विकल्प चाहने वाले उपभोक्ताओं के लिए तैयार किया गया यह उत्पाद सिर्फ 10 मिनट में आसान और बेहतर हेयर कलरिंग अनुभव देता है, वह भी मात्र 10 रुपए में।
* यह तीन लोकप्रिय शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में उपलब्ध है। यह सिंगल-यूज़ सैशे में आता है और राज्य भर के जनरल ट्रेड दुकान पर आसानी से मिलेगा।
* टीवी की मशहूर हस्ती श्वेता तिवारी को ब्रांड एंबेसडर लेकर, चिक ने एक व्यापक 360° मार्केटिंग कैंपेन भी शुरू किया है, जिसमें प्रिंट, डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
*पटना, जनवरी 2026:* केविनकेयर का चिक ब्रांड, पटना के बाजार में हेयर कलर कैटेगरी में एक क्राँतिकारी उत्पाद- चिक क्विक क्रेम हेयर कलर लेकर आया है। इस घोषणा के साथ चिक ने क्रेम हेयर कलर कैटेगरी में अपनी एंट्री दर्ज की है। यह उत्पाद एक अनोखे 10-मिनट के फास्ट एक्शन फॉर्मूले से लैस है, जो क्रेम हेयर कलरिंग को और आसान और समय-बचाने वाला बनाता है। इसमें आंवला और भृंगराज जैसे प्राकृतिक तत्वों की अच्छाई शामिल है, जिससे यह गहरे, नैचुरल दिखने वाले रंग का अनुभव देता है। यह लॉन्च चिक के उस मिशन में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें हर घर तक इनोवेटिव और आसान हेयर कलरिंग सॉल्यूशंस पहुँचाना शामिल है। ब्रांड ने लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी को ब्रांड एंबेसडर बनाया है और राज्य में एक व्यापक मार्केटिंग कैंपेन शुरू किया है, जिसमें प्रिंट, ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम शामिल हैं।
चिक क्विक क्रेम हेयर कलर एक सिंगल-यूज़ सैशे में उपलब्ध है, जो अन्य क्रेम हेयर कलर्स से अलग एक सुविधाजनक पैक है। यह उपभोक्ताओं की मुख्य समस्याओं- लंबे समय तक लगने वाली एप्लीकेशन, रूखापन और पाउडर फॉर्मेट में होने वाली गंदगी को दूर करता है। यह प्रोडक्ट कम तैयारी के साथ एक स्मूद कलरिंग अनुभव सुनिश्चित करता है। तीन आकर्षक शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में उपलब्ध यह रेंज उपभोक्ताओं की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। मात्र 10 रुपए की कीमत में यह क्रेम फॉर्मेट पटना के किफायती उपभोक्ताओं के लिए हेयर कलरिंग को और सुलभ और समावेशी बनाता है। 10 मिनट की फास्ट एक्शन टेक्नोलॉजी के साथ, चिक क्विक क्रेम हेयर कलर गहरे रंग और चमकदार फिनिश के साथ हेयर कलरिंग अनुभव को नया रूप देता है, बिना इंतजार, बिना झंझट।
लॉन्च पर बोलते हुए, केविनकेयर के बिजनेस हेड- पर्सनल केयर, श्री रजत नंदा ने कहा, “पटना में हेयर कलर बाजार तेजी से बदल रहा है। उपभोक्ता अब ऐसे समाधान चाहते हैं, जो गुणवत्ता, सुविधा और किफायत को एक साथ लाएं। अब तक कई उपभोक्ता पारंपरिक हेयर कलर फॉर्मेट पर निर्भर रहे हैं, जिनमें उपयोग की आसानी और अनुभव की कमी रहती है। चिक क्विक क्रेम हेयर कलर के साथ, हम गर्व से कह सकते हैं कि हम इस अंतर को दूर कर रहे हैं। यह सच में एक ऐसा क्रेम फॉर्मेट है, जो केवल 10 मिनट में गहरे और शानदार परिणाम देता है। पटना के सबसे भरोसेमंद हेयर केयर ब्रांड्स में से एक होने के नाते, चिक हमेशा ब्यूटी को सबके लिए सुलभ बनाने के लिए खड़ा रहा है, और यह लॉन्च हमारे इनोवेशन और वैल्यू-ड्रिवन समाधानों की दिशा में एक और कदम है।”
चिक क्विक क्रेम हेयर कलर पटना के सभी रिटेल आउटलेट्स और किराना स्टोर्स पर सिंगल-यूज़ सैशे पैक में उपलब्ध होगा। उपभोक्ता अपनी पसंद के अनुसार तीन लोकप्रिय शेड्स- नेचुरल ब्लैक, नेचुरल ब्राउन और बरगंडी में से चुन सकते हैं। इस लॉन्च के साथ केविनकेयर पर्सनल केयर श्रेणी में चिक की उपस्थिति को और मजबूत करता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि गुणवत्तापूर्ण हेयर कलरिंग अब हर घर तक पहुँचे।

चिक के विषय में: चिक शैम्पू केविनकेयर की यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है। इस ब्रांड ने एफएमसीजी उद्योग में सैशे रिवॉल्यूशन लाया और आज यह केविनकेयर का प्रमुख ब्रांड है। इनोवेटिव सैशे पैकेजिंग, रणनीतिक मूल्य निर्धारण, व्यापक वितरण नेटवर्क और तेजी से बदलती उपभोक्ता जरूरतों को समझने की क्षमता ने चिक को आज देश के सफलतम ब्रांड्स में शामिल किया है।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक तिमाही एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए

* वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में वितरण रिकॉर्ड स्तर 8,293 करोड़ रुपए
* जमा 7.7% तिमाही दर तिमाही बढ़ी, ऋण पुस्तिका वृद्धि 7.1% तिमाही दर तिमाही से आगे
* सकल ऋण पुस्तिका (दिसंबर’25) 37,057 करोड़ रुपए, 21.6% सालाना वृद्धि; जमा 42,223 करोड़ रुपए, 22.4% सालाना वृद्धि
* सुरक्षित ऋण पुस्तिका 17,825 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 48.7% सालाना वृद्धि; कुल ऋण में सुरक्षित ऋण का हिस्सा 48.1%
* माइक्रो बैंकिंग सकल ऋण पुस्तिका 19,372 करोड़ रुपए (दिसंबर’25); 4.1% सालाना वृद्धि
*मुंबई, , जनवरी, 2026* :उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड [BSE: 542904; NSE: UJJIVANSFB] ने आज 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा की।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक- व्यवसाय प्रदर्शन सारांश
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही एवं वित्त वर्ष 26 के 9 महीने
❖ परिसंपत्तियाँ
सकल ऋण पुस्तिका 37,057* करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 21.6% सालाना / 7.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
सुरक्षित ऋण पुस्तिका का हिस्सा 48.1% (दिसंबर’25) बनाम 39.3% (दिसंबर’24) और 46.8% (सितंबर’25)
अब तक का सर्वाधिक तिमाही वितरण 8,293 करोड़ रुपए; 54.7% सालाना / 4.5% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
माइक्रो बैंकिंग वितरण 4,688 करोड़ रुपए; 62.4% सालाना / 10.1% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
❖ संग्रह एवं परिसंपत्ति गुणवत्ता
समूह एवं व्यक्तिगत ऋण बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता में सुधार; दिसंबर’25 में 99.7%
जोखिमग्रस्त पोर्टफोलियो*/जीएनपीए*/एनएनपीए* क्रमशः 3.98% / 2.39% / 0.58% (दिसंबर’25); जबकि दिसंबर’24 में 5.36% / 2.68% / 0.66%
प्रोविजन कवरेज रेशियो दिसंबर’25 में बढ़कर 76%
❖ जमा
जमा 42,223 करोड़ रुपए (दिसंबर’25), 22.4% सालाना / 7.7% तिमाही दर तिमाही वृद्धि
कासा 11,535 करोड़ रुपए; 33.2% सालाना वृद्धि, कासा अनुपात 27.3% (दिसंबर’25)
रिटेल टर्म डिपॉजिट^ + कासा 29,395 करोड़ रुपए; 16.3% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में फंड की लागत (सीओएफ) 7.09%, वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही की तुलना में 25 बीपीएस कम

❖ वित्तीय प्रदर्शन
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में अब तक का सर्वाधिक एनआईआई 1,000 करोड़ रुपए; 12.8% सालाना वृद्धि
एनआईएम 33 बीपीएस बढ़कर वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 8.23%
कॉस्ट-टू-इनकम अनुपात तिमाही के लिए 66% पर स्थिर; हालाँकि नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च समायोजन के बाद 65% से नीचे
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में पीएटी 186 करोड़ रुपए; 70.8% सालाना वृद्धि
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में आरओए 1.5% (सालाना 45 बीपीएस वृद्धि); आरओई 11.5% (सालाना 423 बीपीएस वृद्धि)
❖ पूँजी एवं तरलता
पूँजी पर्याप्तता अनुपात 21.6%
मजबूत तरलता; दिसंबर’25 के लिए औसत दैनिक एलसीआर 165.6%
* जहाँ लागू हो, शर्तें/परिभाषाएँ बैंक की रिपोर्टिंग के अनुसार।
उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्री संजीव नौटियाल ने कहा, “भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 8.2% की मजबूत जीडीपी वृद्धि ने ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के लिए सहायक माहौल तैयार किया है।
उज्जीवन एसएफबी में जमा वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 7.7% तिमाही दर तिमाही और 22.4% सालाना बढ़कर 42,223 करोड़ रुपए हो गई, जबकि दिसंबर’25 के अंत में क्रेडिट–डिपॉजिट अनुपात 88% रहा। गुणवत्ता वाले ‘न्यू-टू-बैंक’ ग्राहकों को जोड़ने तथा ‘एग्ज़िस्टिंग-टू-बैंक’ ग्राहकों से बेहतर जुड़ाव के लिए समर्पित चैनलों पर स्पष्ट फोकस के चलते कासा अनुपात लगातार दो तिमाहियों से 27% से ऊपर बना हुआ है। वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में किए गए जमा दरों में कटौती और बेहतर तरलता प्रबंधन के कारण फंड की लागत में गिरावट का रुझान जारी रहा। तिमाही के लिए सीआईएफ 7.08% रहा, जो सालाना आधार पर 49 बीपीएस कम है।
तिमाही के दौरान सकल ऋण पुस्तिका 7.1% तिमाही दर तिमाही और 21.6% सालाना बढ़कर 37,057 करोड़ रुपए हो गई, जिसे 8,293 करोड़ रुपए के अब तक के सर्वाधिक तिमाही वितरण का सहारा मिला। यह असुरक्षित और सुरक्षित, दोनों श्रेणियों के उत्पादों में सर्वांगीण प्रदर्शन का परिणाम रहा। आवास, एमएसएमई, गोल्ड, वाहन और कृषि ऋण जैसे सुरक्षित पोर्टफोलियो हमारी दीर्घकालिक विविधीकरण रणनीति के अनुरूप विस्तार करते रहे, जिससे दिसंबर’25 तक सुरक्षित ऋण का हिस्सा बढ़कर 48% हो गया।
बैंक का पीएआर 4% से नीचे रहा। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में स्लिपेज घटकर 221 करोड़ रुपए रहा, जबकि दिसंबर’25 के अंत में जीएनपीए 2.39% और एनएनपीए 0.58% रहा। तिमाही के लिए क्रेडिट लागत ₹195 करोड़ रही और हमें मौजूदा परिचालन तिमाही में इसमें और कमी की उम्मीद है। दिसंबर’25 तक पीसीआर बढ़कर 76% हो गया। माइक्रोफाइनेंस बकेट-एक्स की संग्रह दक्षता दिसंबर’25 में 99.7% तक पहुँचने के साथ प्रावधान आवश्यकताएं घटने लगी हैं।
वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में हमारी नेट इंटरेस्ट मार्जिन (एमआईएम) 33 bps तिमाही दर तिमाही बढ़कर 8.23% हो गई, जिसे कम CoF, अनुकूल उत्पाद मिश्रण, कम ब्याज रिवर्सल और सीआरआर में ढील का समर्थन मिला। हमने तिमाही में ₹1,000 करोड़ का अब तक का सर्वाधिक एनआईआई दर्ज किया। इसके परिणामस्वरूप लाभप्रदता मजबूत हुई और वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में कर पश्चात लाभ (पीएटी) ₹186 करोड़ रहा, जो सालाना आधार पर 70.8% की स्वस्थ वृद्धि दर्शाता है। नवंबर’25 से लागू नए श्रम संहिता के तहत एकमुश्त ग्रेच्युटी खर्च को समायोजित करने पर हमारा पीएटी लगभग ₹200 करोड़ होता। वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही में 1.5% का आरओए और 11.5% का आरओई हमारे रिटर्न मेट्रिक्स में निरंतर सुधार को रेखांकित करता है।
21.6% की स्वस्थ पूंजी पर्याप्तता, मजबूत तरलता बफर और वृद्धि के प्रति अनुशासित दृष्टिकोण के साथ बैंक आने वाली तिमाहियों में टिकाऊ और लाभकारी वृद्धि देने के लिए सुदृढ़ स्थिति में है।”
राज अमित कुमार के हिट शो 'बिंदिया के बाहुबली' का सीज़न 2 पारिवारिक जंग में फँसे एक पूरे इलाके की कहानी लेकर लौट रहा है

मुंबई, जनवरी 2026: 'बिंदिया के बाहुबली' की दमदार दुनिया एक बार फिर वापसी के लिए तैयार है। 21 जनवरी को रिलीज़ होने जा रहे इसके दूसरे सीज़न का ट्रेलर साफ इशारा करता है कि अब बिंदिया की लड़ाई सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही, यह अब बेहद निजी, खतरनाक और जानलेवा हो चुकी है।

राज अमित कुमार द्वारा लिखित और निर्देशित पहले सीज़न में काल्पनिक कस्बे 'बिंदिया की कहानी' को एक ब्लैक कॉमेडी के अंदाज़ में सामने आई थी, जहाँ अपराध और राजनीति अजीबोगरीब तरीके से साथ-साथ चलते हैं। चुनाव के दौरान खौफनाक माफिया डॉन बड़े दवन की गिरफ्तारी से सत्ता का संतुलन बिगड़ जाता है। इस मौके को भाँपते हुए उसका महत्वाकांक्षी बेटा छोटे दवन सत्ता हथियाने की कोशिश करता है, भले ही इसके लिए उसे अपने ही परिवार के खिलाफ क्यों न जाना पड़े।

सीज़न 2 में पिता-पुत्र के इस टूटे रिश्ते और पारिवारिक टकराव को और भी गहराई से दिखाया गया है, जो अब एक भीषण सत्ता संघर्ष में बदल चुका है। ट्रेलर में बड़े दवन और छोटे दवन के बीच एक क्रूर आमना-सामना देखने को मिलता है, जिसमें बिंदिया बीच में फँस जाता है। गठजोड़ बदलते हैं, धोखे बढ़ते हैं और हर चाल जानलेवा साबित होती है। अब यह लड़ाई विरासत की नहीं, बल्कि खून-पसीने से सत्ता छीनने की है।

सीज़न 2 पर बात करते हुए निर्देशक राज अमित कुमार ने कहा, "सीज़न 1 कॉमेडी था, लेकिन सीज़न 2 में कॉमेडी त्रासदी में बदल जाती है। यदि पहला सीज़न सेट-अप था, तो यह उसका पे-ऑफ है। यदि सीज़न 1 नमक था, तो सीज़न 2 टकीला शॉट है। इस बार संघर्ष भावनात्मक और नैतिक रूप से कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। पारिवारिक सत्ता संघर्ष अब सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि बेहद निजी और मानवीय हो गया है।"

रणवीर शौरी और सौरभ शुक्ला के साथ इस सीरीज़ में सीमा बिस्वास, सई ताम्हणकर, तनिष्ठा चटर्जी, क्रांति प्रकाश झा, दिब्येंदु भट्टाचार्य और शीबा चड्ढा अहम भूमिकाओं में नज़र आएँगे।

'बिंदिया के बाहुबली' सीज़न 2, 21 जनवरी, 2026 से अमेज़न प्राइम वीडियो और अमेज़न एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम होने जा रहा है।
सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट्स प्राइवेट लिमिटेड ने नागपुर के ग्रामीण अस्पतालों को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण सौंपे*

*नागपुर, जनवरी 2026:* घातक सड़क दुर्घटनाओं के इतिहास वाले उच्च जोखिम वाले गलियारों में आपातकालीन चिकित्सा देखभाल और आघात देखभाल सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन ने पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक सीएसआर साझेदारी में, महाराष्ट्र सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से, नागपुर ग्रामीण जिले में एनएच-353डी (उमरेड-भीवापुर रोड) पर स्थित उमरेड ग्रामीण अस्पताल और आघात देखभाल इकाई और एनएच-44 (नागपुर-देओलापार रोड) पर स्थित देओलापार ग्रामीण अस्पताल को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण सौंपे।
उमरेड ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रभाकर वंजारी और देओलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने सेवलाइफ फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ संबंधित कार्यक्रमों में भाग लिया।
इस कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए उमरेड ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रभाकर वंजारी ने कहा, "सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने पर समय पर हस्तक्षेप करना महत्वपूर्ण है, इसलिए इस शल्य चिकित्सा उपकरण के जुड़ने से उमरेड ग्रामीण अस्पताल की आपातकालीन आघात के मामलों से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।"
देवलापार ग्रामीण अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मेश्राम ने प्रकाश डालते हुए कहा,“यह सहयोग हमारे अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करता है और एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में घायल हुए मरीजों को सीधे तौर पर लाभ पहुँचाएगा। ग्रामीण स्तर पर आघात देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने में सेवलाइफ फाउंडेशन और पार्ले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड के प्रयासों की हम सराहना करते हैं।”
एनएच-353डी और एनएच-44 पर यातायात बहुत अधिक रहता है और यहाँ गंभीर सड़क दुर्घटनाओं का खतरा अधिक रहता है। जनवरी-नवंबर 2025 के बीच, एनएच-44 पर सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 104% की वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024 में 24 से बढ़कर 2025 में 49 हो गईं। वहीं, एनएच-353डी पर मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 10% की कमी दर्ज की गई, जो 2024 में 30 से घटकर 2025 में 27 रह गईं। कुल मिलाकर, नागपुर ग्रामीण क्षेत्र के उच्च मृत्यु दर वाले गलियारों में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में पिछले वर्ष की तुलना में 7.3% की वृद्धि दर्ज की गई, जो जनवरी-नवंबर 2024 के बीच 233 से बढ़कर इस वर्ष इसी अवधि में 250 हो गईं। ग्रामीण अस्पतालों को आवश्यक शल्य चिकित्सा और आपातकालीन देखभाल उपकरणों से लैस करके, इस पहल का उद्देश्य आघात देखभाल की तैयारियों में सुधार करना और सड़क दुर्घटनाओं के कारण होने वाली रोकी जा सकने वाली मौतों और गंभीर चोटों को कम करना है।
पारले बिस्कुट प्राइवेट लिमिटेड द्वारा अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) प्रयासों के तहत समर्थित, जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम उन्नत दुर्घटना डेटा विश्लेषण, सामुदायिक सहभागिता, बेहतर आघात देखभाल और क्षमता निर्माण के माध्यम से उच्च जोखिम वाले राजमार्गों को सुरक्षित गलियारों में बदलने पर केंद्रित है।
उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल को महत्वपूर्ण शल्य चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की पहल से सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए आपातकालीन देखभाल की तैयारी और समय पर उपचार सुनिश्चित होगा। जीरो फैटैलिटी कॉरिडोर कार्यक्रम के तहत यह पहल रोकी जा सकने वाली मौतों को कम करने और अधिक प्रभावी आपातकालीन देखभाल प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक कदम है।
इस पहल के बारे में बात करते हुए, सेवलाइफ फाउंडेशन की कार्यक्रम प्रमुख डॉ. इलिया जाफर ने कहा, ”विशेषीकृत आघात देखभाल सुविधाओं की अनुपलब्धतादुर्घटनास्थलों के निकट स्थित अस्पताल सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण है। उमरेड ग्रामीण अस्पताल और देओलापार ग्रामीण अस्पताल की आपातकालीन चिकित्सा और आघात संबंधी देखभाल प्रदान करने की क्षमता को मजबूत करके, हम बेहतर उत्तरजीविता परिणामों को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त हैं।”
सेवलाइफ फाउंडेशन भारत के राजमार्गों पर शून्य मौतों के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से डेटा-आधारित साक्ष्यों का लाभ उठाते हुए सड़क सुरक्षा और आघात देखभाल के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
डर और हँसी का धमाकेदार संगम: नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी की 'भानुप्रिया भूतोर होटल' का ट्रेलर हुआ रिलीज़

मुंबई, जनवरी, 2026: बहुप्रतीक्षित फिल्म 'भानुप्रिया भूतोर होटल' का ट्रेलर आखिरकार रिलीज़ हो गया है और यह डरावने माहौल के साथ ठहाकों से भरपूर मनोरंजन का वादा करता है। रहस्यमय वातावरण, चुटीला हास्य और अप्रत्याशित मोड़ों से सजा यह ट्रेलर ऐसी दुनिया की झलक दिखाता है, जहाँ हॉरर और कॉमेडी का मज़ेदार टकराव देखने को मिलता है।

फिल्म में मिमी चक्रवर्ती, सोहम मजूमदार, बॉनी सेनगुप्ता और स्वस्तिका दत्ता अहम भूमिकाओं में नज़र आ रहे हैं। ट्रेलर में दिलचस्प किरदार, शानदार कॉमिक टाइमिंग और डर पैदा करने वाले विज़ुअल्स देखने को मिलते हैं, जो दर्शकों को डरते-डरते हँसने पर मजबूर कर देते हैं। चतुर संवादों से लेकर अलौकिक अराजकता तक, ट्रेलर एक ताज़ा और मनोरंजक सिनेमाई सफर का संकेत देता है।

फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए सोहम मजूमदार ने कहा, "इस फिल्म ने मुझे इसलिए आकर्षित किया, क्योंकि यह हॉरर को बहुत ही खेल-खेल में पेश करती है। यह सिर्फ डर पर निर्भर नहीं है, बल्कि ऐसा माहौल रचती है, जहाँ हास्य और भय साथ-साथ चलते हैं। ट्रेलर उस संतुलन को बखूबी दर्शाता है, और मुझे लगता है दर्शकों के लिए यह एक बेहद मनोरंजक अनुभव होगा।"

वहीं मिमी चक्रवर्ती ने कहा, "भानुप्रिया भूतोर होटल मेरे लिए बिल्कुल अलग अनुभव है। यह डरावनी भी है, अजीब-सी भी और साथ ही बेहद मज़ेदार भी। ट्रेलर उस पागलपन की झलक देता है, जिसकी उम्मीद दर्शक फिल्म से कर सकते हैं। मैं उत्साहित हूँ कि दर्शक बड़े पर्दे पर हॉरर और कॉमेडी के इस अनोखे मेल का आनंद लें।"

हॉरर-कॉमेडी जॉनर में अपनी पहली कोशिश को लेकर निर्देशक अरित्र मुखर्जी ने कहा, "भानुप्रिया भूतोर होटल’ के साथ हम ऐसे जॉनर को एक्सप्लोर करना चाहते थे, जहाँ कल्पना, हास्य और भावनाएँ एक साथ मौजूद हों। हॉरर-कॉमेडी हमें यह आज़ादी देती है कि हम एक ऐसी कहानी कह सकें, जो मनोरंजक भी हों और किरदारों व परिस्थितियों के ज़रिए दर्शकों से जुड़ भी सकें। ट्रेलर को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया ने हमें और उत्साहित किया है।"

निर्माता नंदिता रॉय और शिबोप्रसाद मुखर्जी के लिए भी यह फिल्म हॉरर-कॉमेडी स्पेस में पहली पेशकश है। कंटेंट-समृद्ध और दर्शकों द्वारा पसंद की जाने वाली फिल्मों के लिए पहचाने जाने वाले इस जोड़ी के लिए, यह जॉनर उनकी कहानी कहने की विरासत में एक नया और रोमांचक अध्याय जोड़ता है। हॉरर-कॉमेडी पर उनका चंचल लेकिन सधा हुआ अंदाज़ इस फिल्म को खास बनाता है।

विंडोज़ प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी 'भानुप्रिया भूतोर होटल' 23 जनवरी, 2026 को छुट्टियों के मौके पर रिलीज़ होने के लिए तैयार है। ट्रेलर को देखकर इतना तय है कि दर्शकों को एक डरावना, हँसी से भरपूर और पूरी तरह मनोरंजक अनुभव मिलने वाला है।
आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता ने रचा अहम् चिकित्सकीय मुकाम, स्तन कैंसर मरीज की सफल सर्जरी

आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए, स्तन कैंसर मरीज की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी की सफल सर्जरी की

*कोलकाता, जनवरी 2026* : आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता ने अपने आरजी इंस्टिट्यूट ऑफ एडवांस्ड ब्रेस्ट केयर के माध्यम से दाहिने स्तन के कैंसर से पीड़ित 68 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया। वरिष्ठ ब्रेस्ट सर्जन डॉ. ताप्ती सेन के नेतृत्व में मरीज की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी के साथ बगल की लिम्फ नोड्स की सफाई (लेवल थ्री तक) की गई। यह सफल सर्जरी अस्पताल की ब्रेस्ट कैंसर के उन्नत इलाज में मजबूत विशेषज्ञता को दर्शाती है, जहाँ सटीक उपचार के साथ मरीज की जल्दी रिकवरी पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है।
प्रक्रिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता की ब्रेस्ट सर्जरी कंसल्टेंट डॉ. ताप्ती सेन ने कहा, "लिम्फ नोड्स से जुड़े स्तन कैंसर के मरीजों के लिए मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी आज भी एक अहम् उपचार विकल्प है। समय पर उचित जाँच, उपयुक्त सर्जरी और सर्जरी के बाद की व्यवस्थित देखभाल से बेहतर परिणाम मिलते हैं और साथ ही मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है।"
मरीज पिछले एक वर्ष से दाहिने स्तन में बिना दर्द की सूजन की शिकायत लेकर आई थीं, जिसका आकार धीरे-धीरे बढ़ रहा था। जाँच और इमेजिंग में स्तन के उनके निचले हिस्से में 3.3 x 3 सेमी की सख्त और अनियमित गाँठ पाई गई, जो त्वचा या अंदर की गहरी संरचनाओं तक नहीं फैली थी। मैमोग्राम और दाहिने स्तन से की गई ट्रू-कट बायोप्सी में कार्सिनोमा राइट ब्रेस्ट की पुष्टि हुई। पूरे शरीर की पीईटी-सीटी जाँच में बीमारी सिर्फ उसी क्षेत्र तक सीमित पाई गई और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलाव नहीं दिखा।
इसके बाद आईएचसी जाँच के बाद मरीज की दाहिने स्तन की मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी और बगल के लिम्फ नोड्स की सफाई की सर्जरी की गई। सर्जरी से पहले सभी जरूरी जाँचें और एनेस्थीसिया की अनुमति ली गई। ऑपरेशन से पहले मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट की राय भी ली गई। मरीज और उनके परिजनों को इलाज की पूरी प्रक्रिया और सर्जरी के बाद होने वाली सावधानियों, जैसे कि लिम्फ सूजन या घाव में संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तार से समझाया गया। सर्जरी के 48 घंटे बाद ड्रेन के साथ मरीज को छुट्टी दे दी गई। फिलहाल मरीज की हालत अच्छी है। मेडिकल ऑन्कोलॉजी सहित पूरी मल्टीडिसिप्लिनरी टीम की देखरेख से बेहतर और लंबे समय तक अच्छे परिणाम सुनिश्चित किए जा रहे हैं।
*पतंगों से लेकर तिल-गुड़ तक: सन नियो कलाकारों ने साझा की मकर संक्रांति से जुड़ी खुशियाँ*

*उत्तर प्रदेश, जनवरी 2026:* आसमान में उड़ती रंग-बिरंगी पतंगें, तिल-गुड़ की मिठास और बचपन की प्यारी यादें, मकर संक्रांति वह त्यौहार है, जो दिल के बहुत करीब होता है। इस खास मौके पर सन नियो के कलाकार मेघा रे, भाग्यश्री मिश्रा और गौरी शेलगांवकर ने अपने बचपन की यादें, त्यौहार से जुड़ी परंपराएँ और इस साल के जश्न की झलक साझा की।

दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शो में दिव्या का किरदार निभा रहीं मेघा रे कहती हैं, "मुझे मकर संक्रांति हमेशा से बहुत पसंद रही है, क्योंकि यह अपने साथ ढेर सारी खुशिया, उम्मीद और अपनों के साथ होने का एहसास कराती है। बचपन में परिवार के साथ पतंग उड़ाना और तिल-गुड़ बाँटना मेरी सबसे प्यारी यादों में शामिल है। इस साल काम की वजह से थोड़ी व्यस्त रहूँगी, लेकिन दिव्या प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी के सेट पर अपनी टीम के साथ मिठाइयाँ बाँटकर अपना त्यौहार ज़रूर मनाऊँगी। संक्रांति मुझे सिखाती है कि नकारात्मकता छोड़कर विश्वास, कृतज्ञता और खुशी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मैं सभी को रंगों से भरी, खुशहाल मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ देती हूँ। यह पर्व आपके जीवन में नई शुरुआत, सफलता, शांति, अच्छी सेहत और ढेर सारी मुस्कान लाए।"

सत्या साची में साची की भूमिका निभा रहीं भाग्यश्री मिश्रा ने कहा, "मकर संक्रांति मुझे इसलिए खास लगती है, क्योंकि यह नई शुरुआत और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। बचपन की वो यादें आज भी मन को खुश कर देती हैं, यानि रंगीन पतंगें उड़ाना और फिर कटी हुई पतंगों के पीछे पूरे जोश के साथ दौड़ना। वह मस्ती अब सोचने पर और भी खास लगती है। आज हम सब बड़े हो गए हैं और काम की वजह से समय कम मिल पाता है, लेकिन यदि इस साल मौका मिला तो हम 'सत्या साची' के सेट पर पतंग जरूर उड़ाएँगे और साथ में कुछ खुशनुमा पल बिताएँगे।"

प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी में घेवर का किरदार निभा रहीं गौरी शेलगांवकर ने अपने दिल की बात साझा करते हुए कहा, "मेरे लिए मकर संक्रांति हमेशा सादगी भरी खुशियों का त्यौहार रही है, जिसमें परिवार के साथ खाना, हँसी-मजाक करना और लोगों को बाँटकर खाने की कला को सीखना। मुझे याद है, बड़े हमें तिल-गुड़ देते हुए कहते थे कि हमेशा मीठा बोलो, सकारात्मक सोचो और खुश रहो। इस साल मैं सादगी से त्यौहार मनाऊँगी, अपने करीबियों को फोन करुँगी और उनके प्यार व सपोर्ट के लिए उन्हें धन्यवाद कहूँगी। साथ ही, मेरी माँ के हाथों से बने तिल के लड्डू 'प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी' के सेट पर ले जाकर सबके साथ बाटूँगी। बचपन में अपने पापा के साथ पतंग उड़ाने की यादें आज भी दिल को छू जाती हैं, वह पूरा दिन हमारे साथ पतंग उड़ाते थे।"

देखिए दिव्य प्रेम: प्यार और रहस्य की कहानी शाम 7:30 बजे, सत्या साची शाम 8:00 बजे, प्रथाओं की ओढ़े चुनरी: बींदणी- रात 9:00 बजे, सिर्फ सन नियो पर।