I-PAC रेड मामलाः ममता सरकार को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट की ईडी अफसरों पर दर्ज FIR पर रोक

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I-PAC रेड मामले में ED की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने CM ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा और कहा कि केंद्रीय एजेंसी के आरोप गंभीर है। अब इस मामले की सुनवाई 3 फरवरी को होगी।

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जांच एजेंसी के काम में पुलिस दखल गंभीर मामला

ई़डी ने अपने काम में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाया खटखटाया था। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस ममले पर जोरदार सुनवाई हुई। इससे पहले दोनों पक्षों की ओर से जमकर अपनी-अपनी दलीलें दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बहुत ही गंभीर मुद्दा है कि ईडी और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई में क्षेत्रीय पुलिस हस्तक्षेप कर रही है। संविधान हरेक व्यवस्था को स्वतंत्र तरीके से काम करने की छूट देता है। ऐसे में एक राज्य की एजेंसी या पुलिस को इस तरह की गतिविधि करने की छूट नहीं दी जा सकती।

केंद्रीय एजेंसी को चुनावी कार्यक्रम में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं

साथ ही अदालत ने कहा कि स्थितियां और बिगड़ने और कानून का राज खत्म हो जाएगा। किसी भी केंद्रीय एजेंसी को किसी पार्टी के चुनावी कार्यक्रम में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। लेकिन सही तरीके से किसी गैरकानूनी गतिविधि के खिलाफ एक्शन ले सकती है।

3 फरवरी को अगली सुनवाई

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि सरकार ईडी के काम में दखल न डालें। एजेंसी को अपना काम करने दें। कोर्ट ने 3 फरवरी को अगली सुनवाई तक ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर भी रोक लगा दी है।

बता दें कि ईडी ने ने 8 जनवरी को तृणमूल कांग्रेस के आईटी हेड और पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म (I-PAC) डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर और कंपनी से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान सीएम ममता वहां बंगाल पुलिस के अफसरों के साथ पहुंचीं और अपने साथ सबूत लेकर चली गईं।

भारत ने विविधता को ताकत में बदला, सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, CSPOC में बोले पीएम मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। इस कॉन्फ्रेंस में 42 देशों के 61 स्पीकर्स और ऑफिसर्स शामिल हैं। संविधान सदन में आयोजित इस समारोह में पीएम मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा पर कभी संदेह किया गया। लेकिन आज वही लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। यही वजह है कि भारत न सिर्फ स्थिर है बल्कि तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि मैं सबका स्वागत करता हूं। जिस स्थान पर आप सभी बैठे हैं वो भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। गुलामी के आखिरी वर्षों में जब भारत की आजादी तय हो चुकी थी तब इसी सेंटल हॉल में भारत के संविधान की रचना के लिए संविधान सभा की बैठकें हुई। 75 सालों तक ये इमारत भारत की संसद रही। यहां अनेक चर्चाएं हुई, अनेक फैसले लिए गए। अब इसको संविधान सदन का नाम दिया गया है।

डाइवर्सिटी को डेमोक्रेसी की ताकत बना दिया-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि यह चौथा अवसर है, जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रेसिडिंग ऑफिसर्स की कॉन्फ्रेंस भारत में हो रही है। इस बार इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय इफेक्टिव डिलीवरी ऑफ पर्लियामेंट्री डेमोक्रेसी है। भारत ने डाइवर्सिटी को डेमोक्रेसी की ताकत बना दिया। भारत ने साबित किया कि डमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशन और डेमोक्रेटिक प्रॉसेस, डेमोक्रेसी को स्टेबिलिटी, स्पीड और स्केल तीनों देते हैं।

भारत में लोकतंत्र को लेकर गंभीर संदेह था-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा, आज के वैश्विक संदर्भ में बहुत प्रासंगिक है। जब भारत आजाद हुआ था, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात पर गंभीर संदेह था कि इतनी ज़्यादा विविधता वाले देश में लोकतंत्र टिक पाएगा या नहीं। भारत ने इन आशंकाओं को गलत साबित किया और अपनी विविधता को अपने लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। एक और आशंका यह थी कि अगर लोकतंत्र किसी तरह बच भी गया, तो भारत विकास के मामले में कुछ खास नहीं कर पाएगा।

हमारे लोकतंत्र का पैमाना असाधारण-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा की भारत की राष्ट्रपति देश की पहले नागरिक, एक महिला हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री भी महिला हैं। आज, भारतीय महिलाएं न केवल लोकतंत्र में भाग ले रही हैं बल्कि नेतृत्व भी कर रही हैं। आपमें से कई लोग भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र के रूप में जानते हैं। वास्तव में, हमारे लोकतंत्र का पैमाना असाधारण है। उदाहरण के तौर पर, 2024 में हुए भारत के आम चुनाव मानव इतिहास का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक अभ्यास थे। लगभग 98 करोड़ नागरिकों ने वोट के लिए पंजीकरण कराया। यह संख्या कुछ महाद्वीपों की जनसंख्या से भी अधिक है। चुनावों में 8,000 से अधिक उम्मीदवार और 700 से अधिक राजनीतिक पार्टियां भाग लीं। महिलाओं के मतदान में भी रिकॉर्ड भागीदारी देखी गई।

सभी देशों के विकास में योगदान का प्रयास-पीएम मोदी

कॉमनवेल्थ देशों की कुल जनसंख्या का लगभग 50 फीसदी हिस्सा भारत में बसता है। हमारा प्रयास रहा है कि भारत सभी देशों के विकास में अधिक से अधिक योगदान करे। कॉमनवेल्थ के सतत विकास लक्ष्यों में स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक विकास और नवाचार के क्षेत्र में हम पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी प्रतिबद्धता को पूरा कर रहे हैं। भारत सभी साथियों से सीखने का निरंतर प्रयास करता है। हमारा ये भी प्रयास होता है कि हमारे अनुभव अन्य कॉमनवेल्थ साझेदारों के भी काम आए। आज दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में वैश्विक दक्षिण के लिए भी नए रास्ते बनाने का समय है।

ईरान ने दी ट्रंप की हत्या की धमकी, सरकारी चैनल ने कहा- 'इस बार गोली नहीं चूकेगी'

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ईरान और अमेरिका के बीच तनाव गहराता जा रहा है। अब ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जान से मारने की धमकी दी गई है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को एक कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा गया कि ‘इस बार गोली चूकेगी नहीं।’

पेंसिल्वेनिया में ट्रंप की चुनावी रैली का दिखाया इमेज

ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने एक मैसेज के जरिए ट्रंप को धमकी दी है। इसके लिए टीवी चैनल ने जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई ट्रंप की चुनावी रैली की इमेज दिखाया, जहां ट्रंप पर गोलीबारी का प्रयास हुआ था।

अमेरिका विरोधी नारे और बैनर

यह वीडियो तेहरान में एक सरकारी आयोजन के दौरान दिखाया गया, जहां हालिया प्रदर्शनों में मारे गए सुरक्षाकर्मियों और समर्थकों के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए थे। वहां अमेरिका विरोधी नारे और बैनर भी लगाए गए थे। ईरान की सरकारी टीवी ने फुटेज के साथ एक कैप्शन भी चलाया है, जिसमें कहा गया है कि इस बार गोली निशाने से नहीं चूकने वाली है। यानी अब अगर हमला होता है तो ट्रंप बच नहीं पाएंगे।

अमेरिका ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां

डोनाल्ड ट्रंप को ऐसे वक्त धमकी दी गई है, जब अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सेनाओं की दोबारा तैनाती शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, क्षेत्र में स्थित अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक से सैनिकों की आवाजाही देखी गई है। इससे आशंका जताई जा रही है कि अगर अमेरिका हमला करता है तो ईरान जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा।

बवाल को लेकर ट्रंप और ईरान आमने-सामने

ईरान में महंगाई को लेकर पूरे देश में बवाल मचा है। खामेनेई सरकार के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। विरोध दबाने के लिए सरकार ने सख्त एक्शन लेने की बात कही है। वहीं ट्रंप का कहना है कि अगर ईरान सख्त एक्शन लेता है तो हम उस पर कार्रवाई करेंगे। डोनाल्ड ट्रंप के मुताबिक ईरान में अत्याचार को हम चुपचाप नहीं देख सकेंगे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक ईरान पर हमला करने के लिए वाशिंगटन से लेकर तेल अवीव तक कई दौर की हाईलेवल मीटिंग हुई है। जून 2025 में भी परमाणु हथियार बनाने के मसले पर अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था।

उत्तर भारत में महिलाओं का काम रसोई...'डीएमके सांसद की टिप्पणी के बाद गरमाई सियासत

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डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने उत्तर भारत और दक्षिण भारत की महिलाओं की तुलना करते हुए बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। दयानिधि मारन ने क्वैद-ए-मिल्लत गवर्नमेंट कॉलेज फॉर वूमन में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाता है, जबकि उत्तर भारत में महिलाओं से घर में रहने, रसोई संभालने और बच्चे पैदा करने की उम्मीद की जाती है।

मंगलवार को चेन्नई में कायद-ए-मिल्लत गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन में स्टूडेंट्स से बात करते हुए, मारन ने राज्य में महिलाओं की शिक्षा में हुई तरक्की का श्रेय द्रविड़ आंदोलन और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार की नीतियों को दिया। उन्होंने कहा, "हमारी छात्राओं को गर्व महसूस करना चाहिए। हम चाहते हैं कि वे पढ़ाई करें।"

तमिलनाडु की महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर-मारन

दयानिधि मारन ने तमिलनाडु की भारत में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्य के तौर पर तारीफ की। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु एक द्रविड़ राज्य है, जहां महिलाओं की प्रगति को राज्य की प्रगति माना जाता है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि, सीएन अन्नादुरई और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का जिक्र करते हुए कहा कि यही वजह है कि वैश्विक कंपनियां चेन्नई आती हैं, क्योंकि यहां की महिलाएं शिक्षित और आत्मनिर्भर हैं।

उत्तर भारत में महिलाओं से अपेक्षा-मारन

मारन यहीं नहीं रूके। उन्होंने आगे कहा, उत्तर भारत में महिलाओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल किचन में काम करें और बच्चे पैदा करें। उन्होंने कहा, उत्तर में वे क्या कहते हैं? लड़कियां काम पर मत जाओ, घर पर रहो, किचन में रहो, बच्चा पैदा करो, यही तुम्हारा काम है।

बीजेपी का पलटवार

मारन के बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तमिलनाडु बीजेपी प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि यह बयान उत्तर भारत के लोगों का अपमान है। नारायणन तिरुपति ने कहा, "एक बार फिर दयानिधि मारन ने उत्तर भारतीय लोगों को गाली दी है। मुझे बहुत बुरा लगता है कि इन लोगों को ऐसा करने की इजाज़त कैसे दी जाती है, हालांकि डीएमके की तरफ से यह होता रहता है। मुझे नहीं लगता कि दयानिधि मारन में कॉमन सेंस है।

23 जनवरी को अयोध्या जाएंगे राहुल गांधी, क्या रामलला के दर्शन का भी है प्लान?

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और रायबरेली सांसद राहुल गांधी 23 जनवरी को अयोध्या दौरे पर जा रहे हैं। राहुल गांधी 32 सदस्यीय संसदीय समिति के साथ अयोध्या पहुंचेंगे। राहुल गांधी के अयोध्या आगमन की खबर मिलते ही सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई थीं कि क्या वे प्रभु रामलला के दर्शन करेंगे?

रामलला के दर्शन का आधिकारिक कार्यक्रम नहीं

23 जनवरी को संसदीय समिति का अयोध्या दौरा प्रस्तावित है। समिति के पदाधिकारियों में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम भी शामिल है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी अयोध्या एक संसदीय समिति के सदस्य के तौर पर आ रहे हैं। पार्टी का रुख स्पष्ट है कि समिति की बैठक में शामिल होना एक संवैधानिक दायित्व है, जबकि मंदिर जाना एक 'निजी धार्मिक फैसला' होता है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से उनके राम मंदिर जाने का कोई आधिकारिक कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है।

सांसद तनुज पुनिया के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

वहीं, उत्तर प्रदेश की बाराबंकी सीट से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने बड़ा बयान दिया हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जल्द ही अयोध्या भगवान राम के दर्शन करने आ सकते हैं। राम मंदिर अब बनकर तैयार हो गया है। मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज भी फहराने लगा है। अधूरे मंदिर में कोई पूजा करने नहीं जाता है। कांग्रेस सांसद के इस बयान से सियासी हलचल तेज हो गई हैं।

2016 में पहली बार गए थे अयोध्या

बता दें कि 2016 में भी राहुल गांधी अयोध्या आए थे। उस दौरान उन्होंने हनुमानगढ़ी में दर्शन कर संतों से आशीर्वाद लिया था, लेकिन रामलला के दर्शन नहीं किए थे। वहीं राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से राहुल गांधी को प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी आमंत्रित किया गया था। उस समय भी उन्होंने रामलला के दर्शन से परहेज किया था।

थाईलैंड में चलती ट्रेन पर गिरी भारी-भरकम क्रेन, 22 यात्रियों की मौत

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थाईलैंड में एक बड़ा हादसा हो गया है। राजधानी बैंकॉक से थाईलैंड के पूर्वोत्तर प्रांत जा रही एक ट्रेन उस समय पटरी से उतर गई जब एक क्रेन उसके ऊपर गिर गई। इस हादसे में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 30 घायल हो गए।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, स्थानीय अधिकारियों ने थाइलैंड ट्रेन हादसे की डिटेल शेयर की है। यह हादसा सुबह करीब 9 बजे नखोन राचासिमा प्रांत में हुआ। ट्रेन ठीक-ठाक अपनी रफ्तार में चल रही थी। पैसेंजर्स को जरा भी आभास नहीं था कि ऊपर से मौत आ जाएगी। जैसे ही क्रेन ट्रेन पर गिरी, चीख-पुकार मच गई। कुछ देर तक तो लोगों को लगा कि ब्लास्ट हो गया।

ट्रेन में कुल 195 लोग सवार थे

एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार थाईलैंड के परिवहन मंत्री फिफाट रत्चाकिटप्रकर्ण ने कहा कि ट्रेन में 195 लोग सवार थे और अधिकारी मृतकों की पहचान करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

चीन समर्थित हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का हिस्सा

जिस क्रेन की वजह से यह दर्दनाक हादसा हुआ, वह चीन के समर्थन वाले 5.4 अरब डॉलर के हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का हिस्सा थी। मतलब यह क्रेन हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट के काम में लगी थी। यह हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट बैंकॉक को लाओस होते हुए कुनमिंग से जोड़ता है।

एस जयशंकर ने मार्को रुबियो से फोन पर की बात, क्या भारत-अमेरिका ट्रेड डील फाइनल?

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नेताओं के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बात हुई है, जिसके बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि ट्रेड डील को लेकर दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई सहमति बन सकती है। ट्रेड के अलावा दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और स्वतंत्र और सबके लिए खुले इंडो-पैसिफिक को लेकर भी बात की है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों नेताओं के बीच परमाणु सहयोग, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि इसके अलावे भी कई मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं की बातचीत ऐसे समय में हुई है जब भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

यह फोन कॉल इसलिए भी अहम है क्योंकि बीते कुछ महीनों से ट्रेड डील को लेकर बातचीत अटकी हुई थी। हाई इंपोर्ट ड्यूटी, मार्केट एक्सेस और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर मतभेद थे। लेकिन जयशंकर-रुबियो की इस बातचीत ने साफ कर दिया कि दोनों देश अब रुकने के मूड में नहीं हैं।

दोनों देशों ने पिछले साल फरवरी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पदभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद व्यापार वार्ता फिर से शुरू की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ट्रंप ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई में अमेरिका की ओर से भारतीय सामानों पर एकतरफा 25 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद वार्ता रुक गई। इसके बाद रूसी तेल खरीदने को लेकर अगस्त 2025 अमेरिका ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ दंड के तौर पर लगाया। इसके साथ ही भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ कर दी गई है, जो एशिया में सबसे अधिक है।

कहां है शक्सगाम घाटी? जिसे लेकर भारत-चीन फिर आमने सामने

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भारत और चीन के बीच शक्सगाम घाटी का विवाद एक बार फिर गहरा गया है।चीन ने फिर से लद्दाख की शक्सगाम घाटी पर आधिकारिक दावा किया है। मंगलवार को चीन ने फिर से इस घाटी पर अपना दावा दोहराया है और भारत पर पलटवार किया है।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर की शक्सगाम घाटी पर भारत के दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे चीन का क्षेत्र बताया। सीमा विवाद और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर पूछे गए सवालों के जवाब में माओ निंग ने कहा, “जिस क्षेत्र का आपने उल्लेख किया है, वह चीन का है। चीन को अपने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकसित करने का पूरा अधिकार है।”

अपने दावे के पक्ष में चीन ने 1960 के दशक में पाकिस्तान के साथ हुए एक 'सीमा समझौता' का हवाला दिया। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने आगे दावा किया कि चीन और पाकिस्तान ने 1960 के दशक में एक सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत दोनों देशों के बीच सीमा का सीमांकन किया गया था। माओ निंग ने इस समझौते को दो संप्रभु देशों द्वारा अपने अधिकारों के प्रयोग के रूप में बताया।

1963 का समझौता भारत को मंजूर नहीं

वहीं, शक्सगाम घाटी को लेकर भारत ने चीन और पाकिस्तान को एक बार फिर साफ संदेश दिया है। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दोहराया कि 1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच हुआ सीमा समझौता भारत के लिए पूरी तरह गैर-कानूनी और अमान्य है। उन्होंने कहा कि शक्सगाम घाटी भारत का हिस्सा है और वहां किसी भी तरह की गतिविधि को भारत मान्यता नहीं देता। जनरल द्विवेदी ने कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) भी भारत के लिए मान्य नहीं है। उन्होंने इसे दोनों देशों द्वारा किया जा रहा गैर-कानूनी काम बताया और कहा कि यह परियोजना भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरती है।

क्या है 1963 का समझौता ?

शक्सगाम घाटी लद्दाख के सुदूर उत्तरी क्षेत्र में काराकोरम रेंज से भी उत्तर में बहुत ही ऊंचाई पर स्थित घाटी है। यह पाकिस्तानी कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान इलाके के नजदीक और सियाचिन/अक्साई चिन के बेहद पास का क्षेत्र है। अभी इसपर चीन का कब्जा है, जो इसे झिंजियांग का हिस्सा बताता है। भारत का कहना है कि यह पूर्ववर्ती जम्मू और कश्मीर रियासत का हिस्सा है, जिसका 1947 में भारत के साथ कानूनी रूप से विलय हो चुका है। इसलिए यह अब लद्दाख का हिस्सा है। 1947-1948 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर-PoK) पर अवैध कब्जा कर लिया था और 1963 में उसने चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते के नाम पर चीन के हवाले कर दिया।

आवारा कुत्ता मामला: डॉग लवर्स पर बरसा सुप्रीम कोर्ट, पूछा- इंसानों पर हमले का जवाबदार कौन

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आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी मंगलवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों के हमलों से जुड़े एक मामले में तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने सवाल किया कि जब सड़कों पर आवारा कुत्तों के हमले से बच्चे और बुजुर्ग नागरिक मारे जाते हैं या घायल होते हैं, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट में रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के आतंक पर संकेत दिया कि वह आवारा कुत्तों के हमलों से होने वाली किसी भी चोट या मौत के लिए नागरिक अधिकारियों और कुत्ते पालने वालों दोनों को उत्तरदायी ठहरा सकता है।

आवारा कुत्तों को अपने घरों में ले जाएं

शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की है कि जो लोग आवारा कुत्तों को लेकर चिंतित हैं, उन्हें अपने घरों में ले जाना चाहिए, बजाय इसके कि उन्हें 'इधर-उधर घूमने, काटने और जनता को डराने' दिया जाए। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में पूछा कि क्या भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखती हैं, जबकि इंसानों पर हमलों की घटनाओं में अक्सर वैसी ही तेजी देखने को नहीं मिलती।

बाइट मामलों में मुआवजे की जिम्मेदारी तय की जा सकती है

कोर्ट ने कहा कि हम यह कहने जा रहे हैं कि कुत्ते के काटने से होने वाली मौतों और चोटों के मामलों में राज्य को भारी मुआवजा देना होगा। कुत्ते पालने वालों और उनका प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों पर भी जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जाएगी।

भ्रष्टाचार विरोधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट का बंटा हुआ फैसला, जानें अब क्या होगा?

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भ्रष्टाचार रोधी कानून के 2018 के प्रावधान की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को खंडित आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17ए की संवैधानिक वैधता पर विभाजित फैसला सुनाया, जिसके तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है।

जस्टिस बीवी नागरत्ना ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस केवी विश्वनाथ की बेंच ने अलग-अलग फैसला सुनाया। जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 17ए असंवैधानिक है, जिसे निरस्त करने की जरूरत है। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि पूर्वानुमति की आवश्यकता भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विरुद्ध है; इससे जांच में रुकावट आती है और भ्रष्टाचारियों को बचने का मौका मिल जाता है।

जस्टिस विश्वनाथन का क्या फैसला?

जबकि न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन ने भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 17ए को संवैधानिक करार देते हुए ईमानदार अधिकारियों को बचाने की जरूरत रेखांकित की।जस्टिस विश्वनाथन ने इस प्रावधान को इस शर्त के साथ बरकरार रखा कि पूर्व स्वीकृति देने का निर्णय कार्यपालिका से स्वायत्त किसी संस्था द्वारा लिया जाना चाहिए, जैसे कि लोकपाल या लोकायुक्त (राज्य सरकार के कर्मचारी के मामले में) इस प्रावधान की सुरक्षा से ईमानदार अधिकारियों को मजबूती मिलेगी और साथ ही यह भी सुनिश्चित होगा कि भ्रष्ट अधिकारियों को दंडित किया जाए। इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि प्रशासनिक तंत्र राष्ट्र की सेवा के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करे।

अब सीजेआई के समक्ष जाएगा यह मामला

अब यह मामला भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष रखा जाएगा, ताकि इसे सुनवाई के लिए एक वृहद पीठ के सामने रखा जा सके और अंतिम निर्णय लिया जा सके। साल 2018 में पेश की गई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17ए के तहत सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी लोकसेवक पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने एनजीओ ‘सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन’ (सीपीआईएल) की जनहित याचिका (पीआईएल) पर यह निर्णय सुनाया है, जिसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संशोधित धारा 17ए की वैधता को चुनौती दी गई थी।