*वेनेज़ुएला पर अमेरिका के सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ़्तारी सही या गलत : एक वैश्विक विवाद - डॉ. अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीति

इंदौर, 04 जनवरी 2026: वैश्विक राजनीति में एक नया, बेहद विवादास्पद तथा इतिहास बनाने वाला अध्याय जुड़ गया है। 3 जनवरी 2026 की रात अमेरिका ने दक्षिण अमेरिकी देश वेनेज़ुएला की राजधानी कराकास पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला किया और मात्र आधे घंटे के भीतर वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ़्तार कर लिया। इस ऑपरेशन ने दुनिया भर में तीखी, गहन तथा बहुआयामी बहस छेड़ दी है। एक तरफ इसे तानाशाही के खिलाफ न्याय की जीत, दमनकारी शासन के अंत तथा लोकतंत्र बहाली की दिशा में निर्णायक कदम बताया जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन, संप्रभुता पर हमला तथा साम्राज्यवादी हस्तक्षेप माना जा रहा है। प्रख्यात राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम का कहना है कि “वेनेज़ुएला पर अमेरिका का हमला और मादुरो की गिरफ़्तारी एक जटिल, बहुआयामी, ऐतिहासिक तथा वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करने वाली घटना है। यह कार्रवाई न केवल वेनेज़ुएला के भविष्य को प्रभावित करेगी, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, अंतरराष्ट्रीय कानून की विश्वसनीयता, क्षेत्रीय स्थिरता, विकासशील देशों की संप्रभुता तथा बड़े देशों की एकतरफा कार्रवाइयों पर भी गहरा, दीर्घकालिक तथा अप्रत्याशित असर डालेगी। भारत जैसे देशों को इस घटना से सतर्कता बरतने, कूटनीतिक सबक लेने तथा अपनी रक्षा, सुरक्षा तथा विदेश नीति की रणनीति को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।”


घटना का पूरा ब्यौरा बेहद चौंकाने वाला तथा फिल्मी पटकथा जैसा है। 3 जनवरी 2026 की रात कराकास में कई जोरदार धमाकों ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। अमेरिकी लड़ाकू विमान तथा हेलीकॉप्टरों ने कराकास के सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। ऑपरेशन इतना तेज तथा सुनियोजित था कि वेनेज़ुएला की रक्षा प्रणाली जवाब नहीं दे सकी। अमेरिकी विशेष बलों ने राष्ट्रपति भवन में घुसकर मादुरो तथा उनकी पत्नी को गिरफ़्तार किया। मादुरो दंपती को अमेरिका ले जाकर न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है, जहां उन पर नारको-टेररिज्म, मादक पदार्थ तस्करी तथा हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर आरोपों में मुकदमा चलेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस ऑपरेशन को “सफल कार्रवाई” बताया और दावा किया कि मादुरो ड्रग तस्करी तथा नारको-टेररिज्म में शामिल थे।


इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि कई वर्षों की है। मादुरो पर 2020 से ही अमेरिकी अदालत में आरोप थे और उनकी गिरफ़्तारी के लिए इनाम घोषित था। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। लेकिन इस कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाईं।

अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई नारको-टेररिज्म के खिलाफ थी। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि मादुरो तथा उनकी सरकार मादक पदार्थ तस्करी में शामिल थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका वेनेज़ुएला में स्थिरता के लिए भूमिका निभाएगा। इस दृष्टिकोण के समर्थकों का मानना है कि मादुरो का शासन दमनकारी था। वेनेज़ुएला में आर्थिक संकट, भुखमरी तथा मानवाधिकार उल्लंघनों की खबरें थीं। लाखों लोग देश छोड़कर भाग गए। समर्थकों का कहना है कि मादुरो की गिरफ़्तारी लोकतंत्र बहाली का कदम हो सकती है।

विरोधी पक्ष इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन मानता है। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, किसी संप्रभु देश पर हमला तभी वैध है जब वह आत्मरक्षा में हो या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी हो। विरोधी कहते हैं कि यह हमला तेल संसाधनों पर कब्जे की साजिश थी। वेनेज़ुएला के पास दुनिया के बड़े तेल भंडार हैं। इतिहास में अमेरिका के हस्तक्षेप अस्थिरता लाए हैं।

भारत ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई और संयम व संवाद की अपील की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत संप्रभुता का सम्मान करता है।

यह कार्रवाई नैतिक रूप से जटिल है। मादुरो का शासन दमनकारी था, लेकिन अमेरिका का तरीका अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन लगता है। कानूनी मानदंड से देखें तो यह गलत प्रतीत होता है। लेकिन सुरक्षा के नजरिए से कुछ के लिए जरूरी था।

वेनेज़ुएला पर अमेरिका का हमला और मादुरो की गिरफ़्तारी एक ऐतिहासिक घटना है। यह वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। डॉ. मलिकराम कहते हैं कि “यह घटना सतर्कता का संदेश है। भारत को अपनी रणनीति मजबूत करनी होगी।”
कोटक म्यूचुअल फंड ने लॉन्च किया कोटक डिविडेंड यील्ड फंड


दिल्ली, जनवरी 2026*:  कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (केएमएएमसी) ने कोटक डिविडेंड यील्ड फंड लॉन्च करने की घोषणा की है। यह एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जो मुख्य रूप से उन शेयरों में निवेश करेगी जो नियमित रूप से अच्छा डिविडेंड देते हैं। इस फंड का उद्देश्य ऐसे कंपनियों के डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो में निवेश कर, लॉन्ग-टर्म कैपिटल ग्रोथ और/या डिविडेंड से आय प्राप्त करना है, जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड लगातार अच्छा रहा है। यह स्कीम 5 जनवरी 2026 से निवेश के लिए खुल चुकी है, 19 जनवरी 2026 को बंद होगी।

कोटक डिविडेंड यील्ड फंड उन कंपनियों में निवेश करने का प्रयास करेगा, जिन्होंने पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से कम से कम किसी एक वर्ष में डिविडेंड दिया हो, ताकि निवेश में स्थिरता और भरोसेमंद प्रदर्शन सुनिश्चित किया जा सके।डिविडेंड यील्ड के साथ-साथ यह स्कीम कैश फ्लो, कमाई बढ़ने की संभावना, बिज़नेस फंडामेंटल्स और मैनेजमेंट क्वालिटी जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देगी। मैच्योर और स्टेबल कंपनियों पर फोकस करते हुए तथा अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश कर, यह फंड डिविडेंड से संभावित आय और लॉन्ग-टर्म कैपिटल एप्रिसिएशन का अवसर देने का प्रयास करेगा।

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री निलेश शाह ने कहा, "कोटक म्यूचुअल फंड में हमारा मानना है कि डिविडेंड देने वाली कंपनियां अक्सर मजबूत बिज़नेस तौर-तरीकों और शेयरहोल्डर्स के हितों पर ध्यान देने का संकेत देती हैं। कोटक डिविडेंड यील्ड फंड को इस तरह तैयार किया गया है कि निवेशक ऐसी कंपनियों की स्थिरता और विकास का लाभ उठा सकें। आज के मार्केट में, सस्टेनेबल डिविडेंड देने वाली कंपनियों को चुनना आपके पोर्टफोलियो में क्वालिटी और मजबूती जोड़ने का एक समझदारी भरा तरीका हो सकता है।"

कोटक डिविडेंड यील्ड फंड उन कंपनियों पर विचार करेगा जिनका डिविडेंड देने का रिकॉर्ड लगातार अच्छा रहा है। इसके साथ ही फाइनेंसियल स्ट्रेंथ और मैनेजमेंट क्वालिटी को परखने के लिए अतिरिक्त फिल्टर्स लगाए जाएंगे। डिविडेंड देने वाले बेहतर अवसरों के लिए पोर्टफोलियो की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी। यह पोर्टफोलियो अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश करके डाइवर्सिफाइड रहेगा और फंड के उद्देश्यों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

कोटक डिविडेंड यील्ड फंड की फंड मैनेजर शिबानी कुरियन सिरकार ने कहा, "हमने एक अनुशासित निवेश प्रक्रिया को गहन रिसर्च के साथ जोड़ा है, ताकि ऐसी कंपनियों को चुना जा सके जो सस्टेनेबल डिविडेंड और स्ट्रांग फंडामेंटल्स प्रदान करती हों। कोटक डिविडेंड यील्ड फंड इस सोच पर आधारित है कि जब कंपनियां लगातार अच्छा कैश फ्लो बनाती हैं और शेयरहोल्डर्स को लाभ देती हैं, तो वे लंबे समय तक मूल्य सृजन करती हैं। सावधानीपूर्वक चुने गए शेयर और डाइवर्सिफिकेशन के माध्यम से हमारा लक्ष्य ऐसा पोर्टफोलियो तैयार करना है, जो आय की संभावना और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के बीच संतुलन बनाए, ताकि निवेशक स्थिरता व अवसर दोनों का लाभ उठा सकें।"

यह स्कीम 5 जनवरी 2026 से आम निवेशकों के लिए खुल चुकी है और 19 जनवरी 2026 को बंद होगी। एनएफओ अवधि के दौरान निवेशक कम से कम ₹100 की राशि से निवेश कर सकते हैं और इसके बाद स्विच के लिए किसी भी राशि का निवेश किया जा सकता है। कोटक डिविडेंड यील्ड फंड से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए कृपया इस लिंक पर जाएं: https://www.kotakmf.com/documents/NFO_DYF

निवेशकों को यह तय करने में यदि कोई संदेह हो कि यह प्रोडक्ट उनके लिए उपयुक्त है या नहीं, तो उन्हें अपने वित्तीय सलाहकार और टैक्स सलाहकार से परामर्श करना चाहिए। कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड (केएएमएएमसी) किसी भी प्रकार के रिटर्न या भविष्य के रिटर्न की गारंटी या वादा नहीं करती है।
खेलो इंडिया बीच गेम्स ने भारतीय खेलों के क्षितिज को विस्तृत किया, प्रतिभा विकास के नए मार्ग खोले: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

• खेलो इंडिया बीच गेम्स के दूसरे संस्करण का उद्घाटन जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने किया

• प्रधानमंत्री मोदी ने घोघला बीच को आयोजन स्थल के रूप में चुनने के लिए आयोजकों की सराहना की

• खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 की रंगारंग शुरुआत, 5 से 10 जनवरी तक 2100 से अधिक प्रतिभागी लेंगे हिस्सा

*भोपाल, जनवरी 2026*: घोघला बीच पर सोमवार को खेलो इंडिया बीच गेम्स के दूसरे संस्करण की रंगारंग शुरुआत हुई। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश पढ़कर सुनाया गया। देशभर से आए 2100 से अधिक प्रतिभागियों की मौजूदगी वाले ये खेल 5 से 10 जनवरी तक आयोजित किए जा रहे हैं।

दीव शहर खेलो इंडिया बीच गेम्स के रंग में रंगा हुआ है। खेलों का शुभंकर ‘पर्ल’ (खुशमिजाज और ऊर्जावान डॉल्फ़िन) एथलीटों, सहयोगी स्टाफ, वॉलंटियर्स और केआईबीजी 2026 से जुड़े सभी हितधारकों का स्वागत कर रहा है।
केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव द्वारा आयोजित खेलो इंडिया बीच गेम्स का आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण और राष्ट्रीय खेल महासंघों के तकनीकी देखरेख में किया जा रहा है।

इन खेलों में 1100 से अधिक खिलाड़ी आठ खेलों—वॉलीबॉल, सॉकर, सेपक टकरॉ, कबड्डी, पेंकक सिलाट, ओपन वॉटर स्विमिंग, मल्लखंब और रस्साकशी—में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इनमें से पहले छह मैडल स्पोर्ट्स होंगे और कुल 32 स्वर्ण पदक दांव पर हैं।

खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए और केंद्र शासित प्रदेश को केआईबीजी 2026 की मेजबानी के लिए बधाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “खेलो इंडिया बीच गेम्स का भारत के खेल परिदृश्य में विशेष स्थान है। समुद्र तट और तटीय खेल शारीरिक सहनशक्ति, मानसिक दृढ़ता और लगातार बदलती परिस्थितियों में परफॉर्म करने की क्षमता की मांग करते हैं। उभरते हुए खेलों को मंच प्रदान कर ये खेल भारतीय खेलों के क्षितिज का विस्तार करते हैं और प्रतिभाओं की खोज, पहचान और उनको निखारने के लिए नए रास्ते खोलते हैं।” प्रधानमंत्री ने घोघला बीच को आयोजन स्थल के रूप में चुने जाने की सराहना करते हुए कहा, “ब्लू फ्लैग प्रमाणित घोघला बीच का चयन विशेष रूप से सराहनीय है। प्रकृति के साथ सामंजस्य में आयोजित खेल न केवल खेल उपलब्धियों को बढ़ावा देते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी सशक्त माध्यम बनते हैं। यह स्थल हमें याद दिलाता है कि उत्कृष्टता और सततता साथ-साथ आगे बढ़ती हैं।” खेलो इंडिया बीच गेम्स 2026 का औपचारिक उद्घाटन जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के माननीय उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने किया। इससे पहले एथलीटों की परेड और बीच गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चार खिलाड़ियों-डॉन रेमेडियोस (बीच फुटबॉल), पायल परमार (बीच वॉलीबॉल), अजीश पटेल और जलपा सोलंकी (दोनों रस्साकशी)-द्वारा पारंपरिक मशाल रिले आयोजित की गई। मशाल को श्री सिन्हा और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन और दीव एवं लक्षद्वीप के माननीय प्रशासक श्री प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक रूप से स्थापित किया।

श्री सिन्हा ने खेलो इंडिया बीच गेम्स के माध्यम से जम्मू-कश्मीर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा,
“मुझे यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इसी घोघला बीच पर आयोजित पहले खेलो इंडिया बीच गेम्स 2025 में जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। पेंकक सिलाट में हमारे खिलाड़ियों ने कुल नौ पदक जीतकर प्रदेश को गौरवान्वित किया।” उन्होंने आगे कहा, “2014 से अब तक केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने दीव में उल्लेखनीय विकास कार्य किए हैं। इनमें आईएनएस खुकरी स्मारक का पुनर्विकास, घोघला बीच को ब्लू फ्लैग प्रमाणन, और शहरी एवं ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना शामिल है। ये प्रयास सतत विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर खेलों की परिवर्तनकारी शक्ति को रेखांकित करते हुए कहा, “आज भारत की खेल संस्कृति में गहरा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। संस्थागत पहुंच, जमीनी स्तर पर भागीदारी और सांस्कृतिक बदलाव पर नए सिरे से जोर दिया जा रहा है, जिससे प्रतिभाओं की पहचान और सहयोग का स्वरूप बदल रहा है। आधुनिक बुनियादी ढांचा, वैज्ञानिक प्रशिक्षण पद्धतियां और पारदर्शी प्रतियोगी मंच अब पृष्ठभूमि या भौगोलिक सीमाओं से परे युवा खिलाड़ियों तक पहुंच रहे हैं।” उन्होंने कहा, “विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, हमारे युवा इस यात्रा के अग्रदूत हैं। खेल हो या विज्ञान, शिक्षा हो या प्रशासन, अंतरिक्ष हो या स्टार्ट-अप-हर क्षेत्र में अवसर बढ़े हैं। इससे ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बन रहा है, जहां आकांक्षाओं के साथ संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित हो रही है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलो इंडिया, सांसद खेल महोत्सव और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) जैसी पहलें भारत के एथलीटों को वैश्विक प्रतिस्पर्धाओं और दीर्घकालिक सफलता के लिए तैयार करने के तरीके को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं।

इससे पहले सोमवार को बीच सॉकर और बीच कबड्डी की प्रतिस्पर्धाओं की शुरुआत हुई, जहां शीर्ष टीमों ने मजबूत प्रदर्शन किया। महिला बीच सॉकर में, गत चैंपियन ओडिशा ने ग्रुप ए में महाराष्ट्र को 11-3 से हराया, जबकि ग्रुप बी में पदार्पण कर रही हिमाचल प्रदेश ने तीसरे क्वार्टर में वापसी करते हुए मेजबान दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 7-5 से मात दी।

बीच कबड्डी में महाराष्ट्र की पुरुष और महिला टीमों ने अपने-अपने मुकाबलों में आसान जीत दर्ज की। महिला वर्ग में महाराष्ट्र ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 64-22 से हराया, जबकि पुरुष वर्ग में महाराष्ट्र ने दिल्ली को 47-20 से पराजित किया। आज के परिणाम :

बीच कबड्डी
(महिला):
पूल ए – हरियाणा ने पंजाब को 51-23 से हराया; महाराष्ट्र ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 71-18 से हराया।
पूल बी – उत्तर प्रदेश ने हिमाचल प्रदेश को 43-35 से हराया; राजस्थान ने आंध्र प्रदेश को 64-22 से हराया।

(पुरुष):
पूल ए – हरियाणा ने आंध्र प्रदेश को 53-16 से हराया; उत्तर प्रदेश ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 55-33 से हराया।
पूल बी – राजस्थान ने उत्तराखंड को 44-36 से हराया; महाराष्ट्र ने दिल्ली को 47-20 से हराया।

बीच सॉकर (महिला):
ग्रुप ए – ओडिशा ने महाराष्ट्र को 11-3 से हराया।
ग्रुप बी – हिमाचल प्रदेश ने दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव को 7-5 से हराया।
आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट बैंकिंग और हुरुन इंडिया ने जारी किया 'टॉप 200 सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द मिलेनिया 2025' का तीसरा संस्करण

*दिल्ली, दिसंबर, 2025:* आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट बैंकिंग (IDFC FIRST Private Banking) और हुरुन इंडिया (Hurun India) ने 'आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट एंड हुरुन इंडिया टॉप 200 सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द मिलेनिया 2025' का तीसरा संस्करण लॉन्च किया। इसमें उन 200 सबसे ज्यादा मूल्य वाली कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनकी स्थापना वर्ष 2000 के बाद हुई है। कंपनियों की रैंकिंग उनके मूल्य के आधार पर की गई है, जिसमें सूचीबद्ध कंपनियों के लिए मार्केट कैपिटलाइज़ेशन और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए वैल्यूएशन को आधार माना गया है। इस सूची के लिए 25 सितंबर, 2025 तक के आँकड़ें लिए गए हैं। इसमें सिर्फ वही कंपनियाँ शामिल हैं, जिनके मुख्यालय भारत में हैं, जबकि सरकारी कंपनियाँ और विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

इस सूची में शामिल सभी कंपनियों का कुल मूल्य करीब 42 लाख करोड़ रुपए है और इसमें देश के 51 शहरों के आंत्रप्रेन्योर्स सम्मिलित हैं। सूची की शुरुआत के बाद पहली बार ईटरनल के संस्थापक दीपिंदर गोयल (42) ने डीमार्ट के आर के दमानी (70) को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। शहरों की बात करें, तो बेंगलुरु सबसे आगे रहा, जहाँ से 88 आंत्रप्रेन्योर्स सूची में शामिल हैं। इसके बाद मुंबई से 83 और नई दिल्ली से 52 आंत्रप्रेन्योर्स शामिल हैं, जो मिलकर सूची का आधा से ज्यादा हिस्सा बनाते हैं। सेक्टर के हिसाब से फाइनेंशियल सर्विसेस सबसे आगे रही, जिसमें 47 कंपनियाँ शामिल हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर और सर्विसेस से 28, हेल्थकेयर से 27 और रिटेल से 20 कंपनियाँ इस सूची का हिस्सा हैं। खास बात यह है कि 200 में से 189 कंपनियों को बाहरी निवेशकों का सहयोग मिला है, जबकि शेष कंपनियाँ अपने दम पर आगे बढ़ीं।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हेड- वेल्थ मैनेजमेंट और प्राइवेट बैंकिंग, श्री विकास शर्मा ने कहा, "आंत्रप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में भारत ने दुनियाभर के प्रमुख देशों में से एक के रूप में पहचान बनाई है। 'आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट एंड हुरुन इंडिया टॉप 200 सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द मिलेनिया 2025' का तीसरा संस्करण भारत की स्टार्टअप और आंत्रप्रेन्योरशिप यात्रा को मनाने का एक और मौका है। यह रिपोर्ट उन खास आंत्रप्रेन्योर्स की कहानी बताती है, जो देश की आर्थिक दिशा को बदल रहे हैं। उनकी मेहनत, नवाचार और उत्कृष्टता लाने की लगातार कोशिशें वही मूल्य दिखाती हैं, जो हमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सोच और मूल्यों से जोड़ती हैं। इस रिपोर्ट के जरिए हम इन अग्रणी उद्यमियों को सम्मान देते हैं और उनके काम को आगे बढ़ाने में सहयोग करने का आश्वासन देते हैं।"

हुरुन इंडिया के फाउंडर और चीफ रिसर्चर, अनस रहमान जुनैद ने कहा, "आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट एंड हुरुन इंडिया टॉप 200 सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द मिलेनिया 2025 यह दर्शाता है कि विगत 25 वर्षों में इन सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स का भारत की आर्थिक तरक्की में कितना बड़ा योगदान है। इन कंपनियों का कुल व्यापार मूल्य 469 अरब डॉलर के बराबर है, जो भारत की 300 सबसे मूल्यवान फैमिली कंपनियों के मूल्य का एक चौथाई हिस्सा है। उन पाँच कंपनियों का कुल मूल्य अब 78,000 करोड़ रुपए तक पहुँच गया है, जिनकी स्थापना वर्ष 2020 के बाद शुरू हुई। ये आंत्रप्रेन्योर्स देश में विकास को बढ़ावा दे रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं। वहीं, कर्मचारियों के लाभ इस साल 54,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 57,200 करोड़ रुपए हो गए हैं, जो उनके द्वारा कर्मचारियों में किए गए निवेश को दर्शाता है।"

कार्यप्रणाली

'आईडीएफसी फर्स्ट प्राइवेट एंड हुरुन इंडिया टॉप 200 सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स ऑफ द मिलेनिया 2025’ सूची उन 200 सबसे मूल्यवान कंपनियों को मान्यता देती है, जिनकी स्थापना भारत में वर्ष 2000 या उसके बाद हुई है। यह सूची भारत के उन सेल्फ-मेड आंत्रप्रेन्योर्स की खास उपलब्धियों पर ध्यान देती है, जिन्होंने इस समयावधि में सबसे मूल्यवान कंपनियों को बनाया और विकसित किया। इस सूची में रैंकिंग कंपनी के मूल्य के आधार पर होती है, न कि संस्थापकों की व्यक्तिगत संपत्ति के आधार पर।

सूचीबद्ध कंपनियों के लिए, मार्केट कैप उनकी तय तारीख के अनुसार की गई कीमत पर आधारित है। जिन कंपनियों की सूची में नाम नहीं है, उनके लिए हुरुन रिसर्च ने उन्हें समान सूचीबद्ध कंपनियों से तुलना करके मूल्य तय किया। इसमें इंडस्ट्री के आम मापदंड, जैसे- प्राइस टू अर्निंग, प्राइस टू सेल्स, ईवी टू सेल्स और ईवी टू एबिट्डा का इस्तेमाल किया गया। वित्तीय जानकारी हालिया वार्षिक रिपोर्ट या ऑडिट किए हुए स्टेटमेंट से ली गई है।

हुरुन रिसर्च टीम ने मूल्यांकन में बराबरी बनाए रखने के लिए हाल की फंडिंग राउंड के आधार पर सबसे नए आँकड़ें लिए हैं। इसके अलावा, कुछ मामलों में निवेशकों द्वारा बताई गई कम कीमत वाली रिपोर्ट को भी शामिल किया गया है, ताकि पूरी जानकारी मिल सके।
जिम कॉर्बेट में बोरोसिल के 'बोरोसिल की रसोई- सीज़न 4' का सफल समापन
दो दिवसीय कार्यक्रम में बोरोसिल के डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने हिस्सा लिया; प्रोडक्ट परफॉर्मेंस और आगे की स्ट्रेटेजी पर हुई चर्चा
देहरादून, दिसंबर 2025: भारत के भरोसेमंद कंज़्यूमर ब्रांड, बोरोसिल लिमिटेड द्वारा आयोजित 'बोरोसिल की रसोई- सीज़न 4' का समापन भव्य रूप से हुआ। यह खास आयोजन 16 और 17 दिसंबर को जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में स्थित आहाना- द कॉर्बेट वाइल्डरनेस रिज़ॉर्ट में हुआ। इस मौके पर बोरोसिल ने अपने चैनल पार्टनर्स के लिए एक खास मिलन समारोह भी आयोजित किया। उत्तराखंड की खूबसूरत प्राकृतिक वादियों के बीच, बोरोसिल के देशभर से आए डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स ने हिस्सा लिया, संवाद किया, अनुभव साझा किए और साझेदारी के रिश्तों को और मजबूत बनाया। इससे एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी बढ़ा।

चैनल पार्टनर्स मीट को खास डेस्टिनेशन इवेंट की तरह प्लान किया गया था। इस मौके ने बोरोसिल को अपने बड़े रिटेल नेटवर्क से जुड़ने और बातचीत करने का बेहतरीन प्लेटफॉर्म दिया। साथ ही, कंपनी ने दिखाया कि वह परफॉर्मेंस-आधारित किचन प्रोडक्ट्स पेश करने के लिए कितनी गंभीर और प्रतिबद्ध है।

बोरोसिल के ग्लास टॉप गैस स्टोव, ट्रिप्लाई कुकवेयर और प्रेशर कुकर की रेंज आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। इसके लिए कुकिंग कॉम्पिटिशन और प्रोडक्ट डेमो रखे गए, जिनमें इन प्रोडक्ट्स की मजबूती, सुरक्षा और बेहतरीन हीट परफॉर्मेंस को बेहतरी से उजागर किया गया। कुकिंग से जुड़ी इन गतिविधियों ने बोरोसिल और उसके चैनल पार्टनर्स के बीच रिश्ता और भी मजबूत किया। इससे ब्रांड पर उनका भरोसा भी बढ़ा और जुड़ाव भी गहरा हुआ।

कार्यक्रम के दौरान बोरोसिल लिमिटेड की वीपी- मार्केटिंग, सुश्री बरनाली शंकर ने कहा, "बोरोसिल की रसोई अब हमारे चैनल पार्टनर्स से जुड़ने के लिए एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन चुकी है। जिम कॉर्बेट में सीज़न 4 आयोजित करने से हमें पारंपरिक फॉर्मेट से हटकर ऐसा माहौल बनाने का मौका मिला, जहाँ सबने सीखने, सहयोग करने और साथ मिलकर जश्न मनाने का अनुभव किया। अपने डीलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलना हमारे लिए सम्मान की बात है।"

कार्यक्रम के बारे में बोलते हुए बोरोसिल के एक पार्टनर ने कहा, "बोरोसिल की रसोई- सीज़न 4 हमारे लिए बेहद दिलचस्प और उपयोगी अनुभव रहा। कुकिंग प्रतियोगिता और प्रोडक्ट डेमो ने हमें परफॉर्मेंस, गुणवत्ता और इस्तेमाल, तीनों ही स्तर पर बोरोसिल के प्रोडक्ट्स को नज़दीक से समझने का मौका दिया। इस अनुभव ने हमारे भरोसे को और मजबूत किया है और ब्रांड के साथ हमारे रिश्ते को और भी बेहतर बनाया है।"

कुकवेयर, किचन अप्लायंसेज़, डिनरवेयर और ग्लासवेयर सेगमेंट में मजबूत उपस्थिति के साथ बोरोसिल लगातार मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। बोरोसिल की रसोई- सीज़न 4 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ब्रांड अपने हुनर, गुणवत्ता और रोज़मर्रा की कुकिंग को बेहतर बनाने के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहा है और इस सफलता का श्रेय उसके चैनल पार्टनर्स के भरोसे और साझेदारी को जाता है।
राजस्थान डिजीफेस्ट और टाई ग्लोबल हैकाथॉन ने घोषित किए विजेता, देशभर से नवाचार और युवाशक्ति का ऐतिहासिक संगम

*जयपुर, दिसंबर 2025* : राजस्थान ने एक बार फिर राष्ट्रीय नवाचार मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराते हुए राजस्थान डिजीफेस्ट और टाई ग्लोबल हैकाथॉन को लॉन्च किया। यह हैकाथॉन विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी (वीजीयू), जयपुर में राजस्थान डिजीफेस्ट 2025 तथा 10वें टाई ग्लोबल समिट के अंतर्गत आयोजित किया गया।
*यह पहल राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित की जा रही है,* जो नवाचार, उद्यमिता और भविष्य के लिए तैयार स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के प्रति राज्य की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इसी प्रयास के तहत, राजस्थान डिजीफेस्ट और टाई ग्लोबल हैकाथॉन के विजेताओं को आकर्षक पुरस्कार राशि, टाई ग्लोबल समिट 2026 में समर्पित बूथ स्थान, प्रमुख निवेशकों से संभावित निवेश तक पहुँच और उनके समाधानों को और आगे बढ़ाने में सहायता के लिए अनुदान-आधारित समर्थन सहित एक व्यापक विकास अवसर पैकेज के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
इस राष्ट्रीय स्तर की नवाचार प्रतियोगिता में देश के 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 54 शहरों से आए 700 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो इसे राजस्थान में आयोजित सबसे व्यापक और विविधतापूर्ण हैकाथॉन्स में से एक बनाता है, जिसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों का मजबूत प्रतिनिधित्व शामिल रहा।

*भागीदारी के प्रमुख आँकड़ें* 
● 700 से अधिक प्रतिभागी
● 250 से अधिक टीमों की भागीदारी
● 150 से अधिक महिला प्रतिभागी
● 550 से अधिक पुरुष प्रतिभागी
● 54 शहरों से प्रतिनिधित्व
● 12 राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश
इस हैकाथॉन का उद्देश्य सरकार के विभिन्न विभागों के साथ मिलकर तय किए गए सात अहम् विषयों से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजना था। ये विषय डिजिटल कृषि और किसान सहायता प्रणाली, स्मार्ट हेल्थ रिकॉर्ड और आपातकालीन सेवाएँ, स्मार्ट सड़क अवसंरचना, स्मार्ट निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यटन से जुड़ा डेटा और भीड़ विश्लेषण, नागरिक शिकायत समाधान प्रणाली, और जल प्रबंधन व स्मार्ट यूटिलिटीज़ थे। प्रतिभागियों ने एआई, डेटा एनालिटिक्स, आईओटी और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी तकनीकों का उपयोग कर ऐसे समाधान तैयार किए, जो बड़े स्तर पर लागू किए जा सकें और राष्ट्रीय व राज्य प्राथमिकताओं के अनुरूप हों।
*सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और टाई इकोसिस्टम से जुड़े विशेषज्ञों की जूरी द्वारा कड़ी समीक्षा के बाद विजेता और उपविजेता टीमों की घोषणा की गई:*

*डिजिटल कृषि एवं किसान सहायता पारिस्थितिकी तंत्र*
*विजेता:* अर्बनफिक्स - टीम लीड: राजवीर सिंह (सेलेबल टेक्नोलॉजी)
*उपविजेता* : ल्यूमिन - टीम लीड: रविना एस. (चेन्नई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)

*स्मार्ट स्वास्थ्य रिकॉर्ड एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रबंधन*
*विजेता:* रोड आरईएसक्यू - टीम लीड: आरियन हरवानी (जोधपुर इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी)
*उपविजेता:* एमएल क्रिएटर्स - टीम लीड: अमन शर्मा (आर्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड आईटी)

*स्मार्ट निगरानी एवं सार्वजनिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण*
*विजेता:* डेज़र्ट इनोवेटर्स - टीम लीड: विशेष जैन (टेक्नो इंडिया एनजेआर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)
*उपविजेता:* कैलरेक्स टेक - टीम लीड: श्रीकृष्ण (कैलरेक्स टेक्नोलॉजीज़ प्रा. लि.)

*जल शासन, शहरी अवसंरचना एवं स्मार्ट यूटिलिटीज*
*विजेता:* स्पैम्बॉट्स - टीम लीड: तुषार चंद्र (आईआईटी दिल्ली)
*उपविजेता:* टीम रॉकेट - टीम लीड: मदन गुप्ता (पूर्णिमा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग)

*पर्यटन इंटेलिजेंस एवं फुटफॉल विश्लेषण प्रणाली*
*विजेता:* एक्सेलर - टीम लीड: कार्तिक रावत (विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर)
*उपविजेता* : स्मार्ट मैट्रिक्स - टीम लीड: सक्षम राज (विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर)

*एकीकृत नागरिक समस्या पहचान एवं शिकायत निवारण प्लेटफॉर्म*
*विजेता:* कोड कैटालिस्ट - टीम लीड: अग्रज सिंह (कलिंगा यूनिवर्सिटी, रायपुर)
*उपविजेता* : रिट्रीवर्स - टीम लीड: अक्षत जैन (आर्य कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड आईटी)

*स्मार्ट सड़क अवसंरचना निगरानी एवं रखरखाव प्रणाली*
*विजेता:* रुद्र एक्स - टीम लीड: अभिषेक वर्मा (विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर)
*उपविजेता:* सेफस्फियर - टीम लीड: उत्तम कुमार गुप्ता (विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर)

*हैकाथॉन को रेस्किल का सहयोग प्राप्त था। विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी* (वीजीयू) इस कार्यक्रम की वैन्यू पार्टनर रही, और इसे सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार विभाग (डूइट एंड सी), राजस्थान सरकार का सशक्त समर्थन मिला।
टाई और राजस्थान डिजीफेस्ट इकोसिस्टम से मिले विशेषज्ञ मार्गदर्शन और जूरी सहभागिता के माध्यम से प्रतिभागियों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का अवसर मिला। इस पहल ने युवाओं के नेतृत्व में नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में राजस्थान की सोच को और मजबूती दी।
सनम बैंड ने हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा यारी जैम शो में दिल छू लेने वाले प्रदर्शन से जयपुर को मंत्रमुग्ध किया

* ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस और प्रमोट किए गए  हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा यारी जैम ने जयपुर में पेश की संगीत और दोस्ती की एक और अविस्मरणीय रात

*जयपुर ,*दिसंबर 2025*:* ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट द्वारा प्रोड्यूस और प्रमोट किए गए हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा यारी जैम, ने 13 दिसंबर 2025 को जयपुर में प्रशंसकों को रोमांचित कर दिया। पूरे भारत में जबरदस्त सफलता के बाद, इस शो ने भारत के सबसे चहेते पॉप-रॉक बैंड्स में शामिल सनम बैंड के जादू को जयपुर तक पहुंचाया। इस दौरान जयपुर ने दिल को छू लेने वाली धुनों, ऊर्जा से ओतप्रोत प्रदर्शन और दोस्ती की यादगार शाम का आनंद लिया।

इस अनोखी शाम ने दोस्ती की भावना और संगीत की ताकत को पूरी तरह से साकार किया। कार्यक्रम के दौरान बने जीवंत माहौल में जहां यार (दोस्त) साथ आए, अपने पसंदीदा गानों पर साथ-साथ गुनगुनाए और अविस्मरणीय यादें बनाईं।

टूर के जयपुर चरण में प्रशसंको की जबरदस्त भीड़ उमड़ी, जिसमें वे ‘गुलाबी आँखें’, ‘लग जा गले’, ‘पहला नशा’, ‘सनम मेन्नू’, ‘ये रातें ये मौसम’, ‘इश्क बुलावां’ जैसे सनम बैंड के चार्ट-टॉपिंग हिट्स के साथ कई अन्य गानों पर झूमते और साथ गाते नजर आए। बैंड ने मेलोडी और इमोशन के अपने सिग्नेचर फ्यूजन के साथ दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसने सदाबहार आकर्षण को कंटेम्पररी पॉप-रॉक साउंड के मिलाकर पीढ़ियों को सहजता से जोड़ा। यह अनूठी शाम संगीत, पुरानी यादों और यारी-दोस्ती के पलों से भरी थी, जिससे आगे एक अविस्मरणीय संगीतमय यात्रा का मंच तैयार हो गया।

टूर के बारे में बात करते हुए, सनम द बैंड ने कहा, “जयपुर में यारी जैम के लिए प्रदर्शन करना वास्तव में अविस्मरणीय था। भीड़ से मिली एनर्जी और दोस्तों के बीच बने कनेक्शन हमें याद दिलाते हैं कि हम जो करते हैं वह हमें इतना पसंद क्यों है। यारी जैम लोगों को जोड़ने वाले संगीत का प्रतीक है और आज रात का शो इसी भावना का उत्सव था।”

डायजो इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट और पोर्टफोलियो हेड, मार्केटिंग, वरुण कूरीच ने अपने उत्साह को साझा करते हुए कहा, “संगीत और दोस्ती हमेशा से हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा के केंद्र में रहे हैं, और ये जुनून भारत के सबसे बड़े ब्रांडेड संगीत आईपी — यारी जैम —  के माध्यम से जीवंत हो उठता है। पिछले साल, हम पाँच शहरों में 50,000 से अधिक कंज्यूमर्स को एक साथ लाए थे। इस साल, हम यारी जैम को 15 शहरों में ले जा रहे हैं, जिसमें कलाकारों की एक अविश्वसनीय श्रृंखला शामिल है जो आज की पीढ़ी की आवाज और भावना को दर्शाते हैं, और हम असली यारी के जश्न को जारी रखते हुए 1,00,000 से अधिक कंज्यूमर्स के साथ जुड़ने की उम्मीद करते हैं।”
ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट के फाउंडर और सीईओ, शोवन शाह ने कहा, “जयपुर में सनम बैंड का प्रदर्शन वास्तव में खास था। इस शहर में हमेशा से लाइव म्यूज़िक के लिए एक अनोखा जोश रहा है और यहां के दर्शक ऐसे प्रोग्राम के साथ पूरे जुनून से जुड़ते हैं। हजारों लोगों को एक साथ गाते हुए देखना इस बात की याद दिलाता है कि ट्राइबवाइब में हम जो करते हैं वह क्यों करते हैं। सनम बैंड को परफॉर्म करते हुए और दर्शकों को इतनी गहराई से जुड़ते और गीत गाते हुए देखना किसी जादू से कम नहीं था। इस टूर में हमारा लक्ष्य हर शहर में ठीक इसी तरह के इमोशन और एनर्जी को बनाए रखना है। हमारे लिए वह पल अहम हैं तो संगीत के फीके पड़ जाने के लंबे समय बाद भी लोगों के ज़ेहन में रहते हैं।”

हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा यारी जैम के सभी शो के टिकट, भारत के लीडिंग एंटरटेनमेंट डेस्टिनेशन, बुकमायशो पर एक्सक्लूसिव लाइव है।
हाउस ऑफ मैकडॉवेल्स सोडा यारी जैम की यह म्यूजिकल जर्नी पूरे भारत में जारी रहेगी। हमारे साथ जुड़े रहें अगल नंबर आपके शहर को हो सकता है!
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डियाजियो इंडिया के बारे में:
डियाज़ियो इंडिया देश की प्रमुख बेवरेज एल्कोहल कंपनी है और यह ग्लोबल लीडर डियाज़ियो पी.एल.सी. की सहायक कंपनी है। कंपनी जॉनी वॉकर, ब्लैक डॉग, ब्लैक ऐंड व्हाइट, वैट 69, एंटिक्विटी, सिग्नेचर, द सिंगलटन, रॉयल चैलेंज, मैकडॉवेल्स नंबर 1, स्मिरनॉफ, केटल वन, टैन्करे, कैप्टन मॉर्गन और भारत की आर्टिसनल सिंगल माल्ट व्हिस्की गोडावन जैसे प्रीमियम ब्रांडों का निर्माण, बिक्री और वितरण करती है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है। कंपनी में 3,000 से अधिक कर्मचारी, पूरे भारत में 35 विनिर्माण इकाइयाँ, एक सशक्त वितरण तंत्र और एक अत्याधुनिक तकनीकी केंद्र है। भारत में यह यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (यू.एस.एल.) के रूप में स्थापित हुई थी और एनएसई तथा बीएसई दोनों पर सूचीबद्ध है। अधिक जानकारी के लिए www.diageoindia.com पर विजिट करें
जानकारी, पहल और सर्वोतम तरीको को शेयर करने के लिए डियाजियो के ग्लोबल रिस्पॉन्सिबल ड्रिंकिंग रिसोर्स http://www.DRINKiQ.com पर विजिट करें।


ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के बारे में:
बुक माई शो की कंपनी ट्राइबवाइब एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड भारत का लीडिंग यूथ व कॉलेज एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म है, जो जेन ज़ी के लाइव इवेंट्स के अनुभव को नया स्वरूप दे रहा है। 2019 में स्थापना के बाद से ट्राइबवाइब ने अपने राष्ट्रीय कैंपस एम्बेसडर कार्यक्रम के माध्यम से कॉलेज फेस्टिवल की दुनिया को बदल दिया है। यह 75 से अधिक शहरों के 750 से ज्यादा कॉलेजों के साथ मिलकर संगीत, हास्य और सांस्कृतिक विधाओं में देश के प्रमुख कलाकारों के अविस्मरणीय प्रदर्शन प्रस्तुत करता रहा है। समय के साथ यह एक मल्टी-वर्टिकल मंच के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें मल्टी-सिटी आर्टिस्ट टूर्स, ब्रांडेड आइ.पी., कैंपस एक्टिवेशन और इसका प्रमुख जेन ज़ी फेस्टिवल ‘वाइबिन’ शामिल है।

150 से अधिक कलाकारों के रोस्टर और 2,500 से ज्यादा आयोजन (जिनमें 1,500 से अधिक कॉलेज इवेंट शामिल हैं) के सफल निष्पादन के साथ, ट्राइबवाइब आर्टिस्ट और ब्रांड्स को भारत के वाइब्रेंट स्टूडेंट कम्युनिटी से सीधे कनेक्ट करते हुए हर साल 1.5 मिलियन से अधिक विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष रूप से इससे जोड़ता है। इसके प्रमुख प्रोजेक्ट्स में वीर दास का ‘माइंडफूल’ टूर, प्रतीक कुहाड़ का 10-सिटी रन, ज़ाकिर खान का 60-सिटी कॉमेटी टूर, तथा आदित्य गढ़वी और नवरात्रि विथ फाल्गुनी पाठक जैसी क्षेत्रीय प्रस्तुतियाँ शामिल हैं।
भारत की लाइव एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री जैसे-जैसे महानगरों से आगे बढ़कर टियर 2 और टियर 3 शहरों तक फैल रही है वैसे ही ट्राइबवाइब इन बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय अनुभव विकसित कर रहा है और दर्शकों को उत्कृष्ट लाइव परफॉर्मेंस से जोड़ रहा है। बुक माई शो की क्षमता और विशेषज्ञता के साथ, ट्राइबवाइब देश में यूथ कल्चर, ग्रीनफील्ड मार्केट और मॉर्डन टूरिंग फॉर्मेट को बढ़ावा देते हुए एंटरटेनमेंट की अगली लहर को आगे बढ़ा रहा है।
भारतीय राजनीति में उपनामों की परंपरा - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

भारत हो या विश्व का कोई भी देश, राजनीति में राजनेताओं को दिए जाने वाले उपनाम केवल संबोधन के लिए नहीं होते, बल्कि जनता के मन में बसे उनके व्यक्तित्व, योगदान और छवि का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। आज़ादी के पहले या बाद में, यह परंपरा निरंतर चलती रही है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बच्चे प्यार से चाचा नेहरू कहकर पुकारते थे। यह उपनाम उनके बच्चों के प्रति विशेष लगाव और उनकी कोमल, सहृदय छवि का प्रतीक बन गया। दूसरी ओर, देश को एकजुट करने वाले प्रथम उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष कहा गया। यह उपनाम उनके कठोर इरादों और देश को सैकड़ों रियासतों से जोड़ने की अद्वितीय क्षमता का परिणाम था।

राजनीति में महिला नेतृत्व की पहचान भी उपनामों के माध्यम से ही मजबूत हुई है। भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके दृढ़ फैसलों और निर्णायक नेतृत्व के कारण आयरन लेडी कहा गया। वहीं तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को जनता अम्मा के रूप में पूजती थी, क्योंकि उन्होंने कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों तक सीधे लाभ पहुंचाने का काम किया था। इसी तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दीदी के नाम से जाना जाता है। यह उपनाम उनकी सादगी और संघर्षशील छवि को दर्शाता है।

बहुजन राजनीति में उपनामों का महत्व और भी अधिक दिखाई देता है। दलित आंदोलन के प्रमुख नेता जगजीवन राम को प्यार से बाबूजी कहा जाता था। उनकी संवेदनशीलता और सिद्धांतवादी राजनीति ने उन्हें देश के सबसे सम्मानित नेताओं में शामिल किया। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को उनकी पार्टी और समर्थकों के बीच बहनजी के नाम से संबोधित किया जाता है, जो उन्हें एक संरक्षक और मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त डॉ. सोनेलाल पटेल के संदर्भ में दूसरी आज़ादी के महानायक जैसे उपनाम यह सिद्ध करते हैं कि क्षेत्रीय राजनीति में भी नेता केवल अपने संगठनात्मक कौशल से नहीं, बल्कि अपने वैचारिक संघर्षों से जनता में अमिट छाप छोड़ सकते हैं। सामाजिक न्याय को लेकर उनका संघर्ष उन्हें ऐसे नेताओं की श्रेणी में लाता है, जिन्हें लोग किसी विचारधारा की ताकत के रूप में याद करते हैं।

समाजवादी राजनीति में भी यह संस्कृति स्पष्ट रही है। यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को उनके अनुयायियों और कार्यकर्ताओं ने नेताजी का दर्जा दिया, क्योंकि वे साधारण कार्यकर्ता से बढ़कर एक बड़े जननेता के रूप में उभरे। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लोग बुलडोजर बाबा कहकर बुलाने लगे हैं, जहां यह उपनाम उनके जीरो-टॉलरेंस मॉडल और माफिया के खिलाफ कार्रवाई के कारण लोकप्रिय हुआ।

इसी क्रम में समकालीन राजनीति में कुछ और नाम भी विशेष रूप से चर्चित हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनकी सादगीपूर्ण जीवनशैली और आम आदमी वाली छवि के कारण मफलर मैन, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को जनता द्वारा स्नेह से मामा, और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उनके प्रशासनिक सुधारों की वजह से सुशासन बाबू कहा जाता है।

यह सभी उदाहरण बताते हैं कि भारत की राजनीतिक संस्कृति में उपनाम केवल संज्ञा नहीं, बल्कि एक प्रतीक होते हैं, जो किसी नेता की विचारधारा, कार्यशैली और जनसंपर्क को समझाने का सरल तरीका समझे जा सकते हैं। यह उपनाम कभी जनता देती है, कभी मीडिया, और कई बार विरोधी दल भी व्यंग्यात्मक रूप से फेंकू या पप्पू जैसे नाम गढ़ते हैं, जो बाद में लोकप्रिय हो जाते हैं।

गुज्जू फिल्म फेस्ट: 10 दिन, 10 हिट फिल्में; हर दिन एक नई गुजराती हिट बिल्कुल मुफ्त, सिर्फ शेमारूमी पर

इस दिसंबर मनाइए गुज्जू फिल्म फेस्ट; हर दिन देखें एक नई गुजराती हिट, बिल्कुल मुफ्त सिर्फ शेमारूमी पर

10 दिन, 10 ब्लॉकबस्टर- 6 से 15 दिसंबर 2025 तक, शेमारूमी पर हर दिन नई गुजराती हिट मुफ्त में हो रही स्ट्रीम

गुजरात, दिसम्बर 2025 : दिसंबर का महीना शेमारूमी ने और भी खास बना दिया है। गुजराती सिनेमा की समृद्ध कला, संस्कृति और मनोरंजन का जश्न मनाते हुए यह प्लेटफॉर्म लेकर आया है ‘गुज्जु फिल्म फेस्ट’, जो 6 दिसंबर, 2025 से शुरू हो चुका है और 15 दिसंबर, 2025 तक चलेगा। इन दस दिनों के दौरान हर दिन एक नई गुजराती सुपरहिट फिल्म बिल्कुल मुफ्त देखने के लिए उपलब्ध है। यह अवसर दर्शकों को, विशेषकर गुजरात के दर्शकों को, उन फिल्मों को फिर से देखने या पहली बार देखने का मौका देता है, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर न सिर्फ सफलता पाई बल्कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर प्रशंसा जीती और दर्शकों के दिलों में जगह बनाई।

इस विशेष महोत्सव में ऐसी फिल्मों का चयन किया गया है, जो गुजराती सिनेमा की विविधता को पूरी तरह दर्शाता है। हर फिल्म गुजरात की किसी न किसी भाव, रंग, परंपरा, हास्य और जीवनशैली को अपने अंदाज़ में पेश करती है। 

हास्य से भरपूर ‘फ़क्त महिलाओं माटे’ में जहाँ एक व्यक्ति को महिलाओं के मन की बातें सुनने की अनोखी शक्ति मिलती है, वहीं ‘झमकुड़ी’ एक रहस्यमयी हवेली में बसे रोमांचक और डरावने अनुभवों को सामने लाती है। ‘बच्चूभाई’ एक बुजुर्ग व्यक्ति की जीवन के नए मोड़ पर शुरू हुई यात्रा को दर्शाती है, जबकि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ‘हेलारो’ कच्छ की महिलाओं की मुक्ति, साहस और अभिव्यक्ति की शक्ति को बेहद प्रभावी ढंग से दिखाती है। ‘मिथाडा मेहमान’ रिश्तों और अपनेपन से भरी एक प्यारी कहानी पेश करती है और ‘नाड़ी दोष’ प्रेम और ज्योतिष मान्यताओं के बीच के टकराव को संवेदनशीलता से उभारती है। ‘कच्छ एक्सप्रेस’ एक महिला की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती प्रेरक यात्रा को दर्शाती है, वहीं ‘ऑल द बेस्ट पंड्या’ परिवार की हँसी-मज़ाक से भरी उलझनों को मजेदार अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। ‘वश’ अपने रोमांचक माहौल और रहस्य से दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है और 'उम्बरो’ सात महिलाओं की उस भावनात्मक यात्रा को दिखाती है जहाँ वे अपने भीतर छिपी हिम्मत और खुशियों को नए सिरे से खोजती हैं।

पिछले दस सालों में गुजराती सिनेमा ने कहानी, प्रस्तुति और दर्शकों की पसंद तीनों ही स्तर पर उल्लेखनीय प्रगति की है। इस फेस्टिवल के ज़रिए शेमारूमी का उद्देश्य इस विकास का सम्मान करना और गुजराती कंटेंट को और अधिक लोगों तक बिना किसी बाधा के पहुँचाना है। यह पहल न केवल गुजराती फिल्मों की नई लहर का जश्न है, बल्कि उन दर्शकों के लिए भी एक अवसर है जिन्होंने इन फिल्मों को प्यार दिया और उन्हें लोकप्रिय बनाया।

इन तारीखों पर उपलब्ध फिल्मों की सूची दी गई है:

गुज्जू फिल्म फेस्ट लाइन-अप

10 दिन। 10 मुफ्त फिल्में

6 दिसंबर

झमकुड़ी

7 दिसंबर

बच्चूभाई

8 दिसंबर

हेलारो

9 दिसंबर

मिथाडा मेहमान

10 दिसंबर

नाड़ी दोष

11 दिसंबर

कच्छ एक्सप्रेस

12 दिसंबर

ऑल द बेस्ट पंड्या

13 दिसंबर

वश

14 दिसंबर

उम्बरो

15 दिसंबर

फ़क्त महिलाओं माटे

अजमेर में वॉटरशेड महोत्सव आयोजित: पिरामल फाउंडेशन के साथ मिलकर दिया समुदाय आधारित जल संरक्षण पर जोर

अजमेर, राजस्थान: राजस्थान सरकार ने शनिवार को अजमेर के जेएलएन मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में वॉटरशेड महोत्सव का आयोजन किया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के जरिए जिले में हुए प्रगति का जश्न मनाने पर आधारित रहा। महोत्सव का मूल विचार यही था कि जल सुरक्षा तभी मजबूत होती है, जब इसे समुदाय खुद आगे बढ़कर लागू करे।

पाँच जिलों की टीमों ने अपने अनुभव साझा किए। पंचायत राज संस्थाओं, स्थानीय नेतृत्व और समुदाय समूहों के प्रतिनिधियों ने बताया कि जमीनी स्तर पर क्या बदलाव आया है और वॉटरशेड कार्यों से लोगों की जिंदगी में कैसे सुधार हुआ। कार्यक्रम में माननीय सांसद श्री भागीरथ चौधरी जी और विधायक वासुदेव देवनानी जी के साथ-साथ अजमेर के अन्य महत्वपूर्ण जिला अधिकारी शामिल रहे।

वॉटरशेड और मृदा संरक्षण विभाग के साझेदार के रूप में पिरामल फाउंडेशन ने कार्यक्रम का संचालन करने में अहम् भूमिका निभाई। समुदाय की भागीदारी से जल स्रोतों को फिर से जीवित करने के प्रयासों पर खास फोकस रहा, ताकि जल सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।

कार्यक्रम में पिरामल फाउंडेशन और ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन (एटीईसीएफ) द्वारा साथ मिलकर बनाई गई एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। इस फिल्म में बताया गया कि यदि तालाबों से गाद निकाल दी जाए, तो कैसे उनमें पानी जमा होने की क्षमता साफ तौर पर बढ़ जाती है। और यह काम मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) के तहत कैसे किया जा सकता है। साथ ही यह भी समझाया गया कि इसके लिए फिफ्टींथ फाइनेंस कमीशन (एफएफसी) की राशि का उपयोग किस तरह होता है। फिल्म के जरिए लोगों के सामने एक ऐसा आसान और कम खर्च वाला मॉडल पेश किया गया, जो जन भागीदारी पर आधारित है और जिसमें समुदाय सिर्फ हिस्सा ही नहीं बने, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी खुद ले।

पिछले तीन वर्षों में ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन और उसके सहयोगी संगठनों ने राजस्थान के 12 जिलों में करीब 1,200 जलाशयों को पुनर्जीवित करने में मदद की। हाल के चरण में यह काम वित्त आयोग (एफएफसी) की मदद से और पिरामल फाउंडेशन के साथ मिलकर और आगे बढ़ाया गया। इस पूरे काम का करीब 14 प्रतिशत हिस्सा नीति आयोग के आकांक्षी जिलों और ब्लॉक्स में हुआ। इससे लगभग 1,200 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी जमा करने की क्षमता बनी, जो 12 लाख से ज्यादा पानी के टैंकर्स के बराबर है। इस पहल से लगभग 1,800 गाँवों के करीब 18 लाख लोगों को फायदा पहुँचा।

डब्ल्यूआरआईएस के आँकड़ों के मुताबिक राजस्थान में करीब 82 हजार जलाशय हैं, जिनमें से लगभग 49 हजार को पुनर्जीवित किया जा सकता है। यदि जल निकायों के पुनरुद्धार (आरडब्ल्यूबी) को मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान (एमजेएसए) के साथ बड़े स्तर पर जोड़ा जाए, तो करीब 26 हजार गाँवों में जल सुरक्षा मजबूत हो सकती है। इससे करीब 33,210 करोड़ लीटर पानी जमा करने की क्षमता बन सकती है, भूजल रिचार्ज बेहतर होगा और पानी के टैंकरों पर होने वाले खर्च में लगभग 9,963 करोड़ रुपये की बचत संभव है।

इस अवसर पर पिरामल फाउंडेशन की स्कूल ऑफ क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी की प्रमुख संगीता ममगैन ने कहा , "पिछले 17 वर्षों से पिरामल फाउंडेशन राजस्थान सरकार के साथ मिलकर स्कूल नेतृत्व, शिक्षकों की क्षमता और छात्रों की पढ़ाई के नतीजों को बेहतर बनाने पर काम करता रहा है। इसी अनुभव के आधार पर अब फाउंडेशन गांधी फेलोशिप मॉडल को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जोड़ रहा है। अजमेर में एमजेएसए के तहत वॉटरशेड विकास एवं मृदा संरक्षण निदेशालय के साथ मिलकर जल स्रोतों के मशीन आधारित पुनर्जीवन में सहयोग किया गया, ताकि राजस्थान को जलवायु के लिहाज से ज्यादा मजबूत बनाया जा सके।"

इस मौके पर ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन की सीओओ अमृता कस्तूरी रंगन ने कहा , "राजस्थान पानी की अहमियत को अच्छी तरह समझता है। जब विभाग और फाउंडेशन एक साथ आते हैं, तो काम का असर कई गुना बढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों में यह साफ दिखा है कि जब लोग, संस्थान और सिस्टम मिलकर काम करते हैं, तो जल स्रोतों का पुनर्जीवन तेजी से होता है। वॉटरशेड महोत्सव उसी साझी मेहनत को सराहने का एक मौका है। ए.टी.ई. चंद्रा फाउंडेशन आगे भी ऐसे ही काम करता रहेगा, जिनमें लोगों को केंद्र में रखा जाए, पर्यावरण की रक्षा हो और आने वाले समय के लिए जल सुरक्षा मजबूत बने।"

वॉटरशेड विकास एवं मृदा संरक्षण विभाग, राजस्थान सरकार के निदेशक, आईएएस श्री मुहम्मद जुनैद पी. पी. ने कहा , "मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के पहले चरण में जमीन पर बेहतर नतीजे मिले हैं, लेकिन आगे का सफर अभी लंबा है। सामाजिक संगठनों और सीएसआर साझेदारों के साथ मिलकर हम सबसे असरदार उपाय और नए प्रयोग पेश करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि अगला चरण सही दिशा में आगे बढ़ सके। उनके अनुसार, मिलकर एक साफ कार्ययोजना तय करने से लंबे समय तक जुड़ाव बना रहेगा और राजस्थान के गाँवों को स्थायी लाभ मिल सकेगा।"

वॉटरशेड महोत्सव का उद्देश्य समाज के लोगों, सरकारी टीमों और साझेदार संगठनों को एक साथ लाना रहा। यहाँ जमीनी स्तर पर हो रहे उत्कृष्ट कार्यों को पहचानने, उनसे सीखने और जल सुरक्षित राजस्थान की ओर और तेजी से बढ़ने पर जोर दिया गया।