दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 13 भारत में, जानें आपकी सांस तो हैं ना सुरक्षित?*


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#mostpollutedcityinthe_world

देश की राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास रहने वालों लोग खुद को सबसे प्रदूषित शहर में रहने वाला मानते हैं। ये सही भी है। हालांकि, भारत में केवल दिल्ली-एनसीआर ही प्रदूषित नहीं है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया को 20 सबसे प्रदूषित शहरों में 13 भारत के हैं। मेघालय का बर्नीहाट शीर्ष पर है। वहीं, दिल्ली सबसे प्रदूषित कैपिटल की कैटेगरी में टॉप पर है। स्विस एयर क्वालिटी टेक्नॉलॉजी कंपनी एक्यू एयर की 2024 की रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है।

ये हैं भारत के सबसे प्रदूषित शहर

रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के 20 देशों में भारत के 13 शहर जो सबसे प्रदूषित हैं, उनमें बर्नीहाट, दिल्ली, मुल्लांपुर (पंजाब), फरीदाबाद, लोनी, नई दिल्ली, गुरुग्राम, गंगानगर, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, मुजफ्फरनगर, हनुमानगढ़ और नोएडा शामिल हैं। इसके अलावा, भारत 2024 में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में 5वें पायदान पर था। पहले स्थान पर चाड, दूसरे पर बांग्लादेश, तीसरे पर पाकिस्तान और चौथे पर कांगो रहा था। वायु प्रदूषण भारत में एक बड़ा खतरा बना हुआ है।

प्रदूषण में सुधार के बाद ऐसे हालात

2023 में हम तीसरे स्थान पर थे यानी पहले से दो स्थान नीचे आए हैं। मतलब भारत में पहले से प्रदूषण को लेकर कुछ सुधार हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में भारत में पीएम 2.5 के स्तर में 7% की गिरावट देखी गई। 2024 में पीएम 2.5 का स्तर औसतन 50.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जबकि 2023 में यह 54.4 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। फिर भी, दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 6 भारत में हैं। दिल्ली में लगातार प्रदूषण का लेवल हाई दर्ज किया गया। यहां पीएम 2.5 का सालाना औसत 91.6 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा।

क्या है पीएम 2.5

पीएम 2.5 हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोन से छोटे सूक्ष्म प्रदूषण कणों को कहते हैं। ये कण फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे सांस लेने में तकलीफ, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर भी हो सकता है। इसके स्रोतों में वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन और लकड़ी या फसल अवशेषों का जलना शामिल है।

वायु प्रदूषण गंभीर समस्या

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है, जिसकी वजह से लोगों की उम्र अनुमानित 5.2 वर्ष कम हो रही है। पिछले साल प्रकाशित लांसेट प्लैनेटरी हेल्थ अध्ययन के मुताबिक साल 2009 से साल 2019 तक भारत में हर साल करीब 15 लाख लोगों की मौत संभावित रूप से दीर्घकाल तक पीएम 2.5 प्रदूषण के संपर्क में रहने की वजह से हुई है।

खड़गे ने राज्यसभा में क्या कह दिया कि हो गया बवाल, बाद में मांगनी पड़ी माफी?


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#khargecontroversialremark

संसद में बजट सत्र की कार्यवाही का दूसरा चरण शुरू हो गया है। ये चरण दूसरे दिन भी हंगामेदार रहा। मंगलवार को भी कार्यवाही के दौरान हंगामा देखने को मिला। राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक बात पर जबरदस्त हंगामा हुआ। ये हंगामा तब शुरू हुआ जब शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर राज्यसभा में चर्चा शुरू हुई। खड़गे ने डिप्टी स्पीकर हरिवंश की ओर बात करते हुए ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर दिया, जिस पर बीजेपी भड़क गई। बीजेपी ने सदन में हंगामा करते हुए माफी की मांग की। इसके बाद खड़गे ने डिप्टी स्पीकर से माफी भी मांगी।

दरअसलस, सदन में नई शिक्षा नीति पर चर्चा हो रही थी। इस पर राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बोलना चाह रहे थे। तभी उपसभापति ने उन्हें रोका। कारण कि वह सुबह एक बार बोल चुके थे। डिप्टी स्पीकर ने कहा, सुबह आपको बोलने का मौका मिला था। डिप्टी स्पीकर की इस बात पर खरगे ने कहा कि तब शिक्षा मंत्री नहीं आए थेष इसके बाद उपसभापति ने उसने बैठने के लिए कहा तो वो भड़क गए। उपसभापति हरिवंश कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह को बोलने का मौका देना चाहते थे। मगर तभी माहौल ऐसा बना कि मल्लिकार्जुन खरगे आग बबूला हो गए। 

...हम ठीक से ठोकेंगे”

मल्लिकार्जुन खरगे अपनी सीट से उठे और बोलने लगे। उपसभापति के रोकने पर उन्होंने डिक्टेटरशिप का आरोप लगा दिया। उन्होंने सीधे चेयर की ओर इशारा कर कहा कि डिक्टेटरशिप हो गया है। मुझे बोलना है। हम बोलने के लिए तैयारी भी किए हैं। और आपको क्या-क्या ठोकना है, हम ठीक से ठोकेंगे। इस पर उपसभापति ने आपत्ति जताई। सत्ता पक्ष के सांसद विरोध करने लगे। पूरा सदन हंगामे से गूंज उठा।

खरगे ने डिप्टी स्पीकर से मांगी माफी

जेपी नड्डा ने बयान की निंदा की और कहा कि नेता विपक्ष तजुर्बेकार हैं लेकिन जिस भाषा का इस्तेमाल किया है वो निंदनीय है। इसके लिए वो माफी मांगेंष इस पर अपनी गलती मानते हुए खरगे ने कहा, उपसभापति जी, मैं माफी मांगता हूं। मैंने ये शब्द आपके लिए नहीं बोला था। मैंने कहा था कि सरकार की पॉलिसी को ठोकेंगे। अगर आपको ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं।

गोल्ड स्मगलिंग में फंसी एक्ट्रेस रान्या राव के पिता भी लपेटे में, कर्नाटक सरकार ने दिए जांच का आदेश


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#gold_smuggling_case_ranya_rao_ips_father_to_be_probed

एक्ट्रेस रान्या राव से जुड़े सोने की तस्करी के केस में लगातार कार्रवाई हो रही है। रान्या राव के सोना तस्करी मामले में उनके पिता और पूर्व पुलिस अधिकारी रामचंद्र राव की भूमिका भी संदेहों के घेरे में है। ऐसे में कर्नाटक सरकार ने पूर्व पुलिस अधिकारी रामचंद्र राव की भूमिका की जांच के आदेश दिए हैं। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी गौरव गुप्ता को जांच की जिम्मेदारी दी गई है और 1 सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा गया है।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि पिछले सप्ताह मीडिया और समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, अभिनेत्री रान्या राव को राजस्व खुफिया निदेशालय के अधिकारियों ने दुबई से बेंगलुरु तक सोने की अवैध रूप से तस्करी करने के प्रयास के दौरान गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान, रिपोर्टों में यह सामने आया है कि अभियुक्त, रान्या राव ने इस अवैध कार्य को अंजाम देने के लिए हवाई अड्डे पर वीआईपी प्रोटोकॉल सुविधाओं का दुरुपयोग किया। इसके अलावा, उन्होंने कर्नाटक राज्य पुलिस हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के पुलिस महानिदेशक (DGP) और उनके पिता, डॉ. के. रामचंद्र राव, आईपीएस का नाम उपयोग करके उच्च स्तरीय प्रोटोकॉल सेवाओं तक पहुंच प्राप्त की। इस प्रकार, उन्होंने सुरक्षा जांच से बचकर तस्करी को अंजाम दिया। इन गंभीर आरोपों को ध्यान में रखते हुए, कर्नाटक सरकार जांच आवश्यक समझती है।

रामचंद्र राव वर्तमान में कर्नाटक राज्य पुलिस आवास एवं अवसंरचना विकास निगम के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। आदेश में कहा गया है कि फिल्म एक्टर रान्या राव को राजस्व खुफिया निदेशालय ने उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह दुबई से बेंगलुरु में अवैध रूप से सोने की छड़ें ले जा रही थी। मामले की जांच के दौरान मीडिया में यह खबर आई थी कि गिरफ्तार रान्या ने एयरपोर्ट पर उच्च पदस्थ अधिकारियों को दी जाने वाली शिष्टाचार सुविधाओं का दुरुपयोग किया है।

बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रान्या से 12.56 करोड़ रुपए मूल्य की सोने की छड़ें जब्त की गई थीं, जिसके बाद उनके आवास पर तलाशी ली गई और अधिकारियों ने बताया कि 2.06 करोड़ रुपए के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपए की भारतीय मुद्रा भी बरामद की गई। सोना तस्करी मामले में गिरफ्तार रान्या राव को सोमवार को आर्थिक अपराधों के लिए विशेष अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एक्टर पूछताछ के लिए तीन दिनों तक राजस्व खुफिया निदेशालय की हिरासत में थी।

पहले की औरंगजेब की तारीफ, अब संभाजी महाराज का गुणगान, सपा नेता अबू आजमी के बदले सुर


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#abuazmipaidtributetochhatrapatisambhaji 

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी के औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान पर विवाद अभी थमा नहीं है। औरंगजेब की तारीफ करने पर विवादों में घिरे सपा नेता अबू आजमी ने अब छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि दी है और उनका गुणगान किया है।

सपा विधायक अबू आजमी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छत्रपति संभाजी महाराज को फोटो पोस्ट किया। सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने संभाजी महाराज को पराक्रमी योद्धा और धर्मवीर छत्रपती बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, स्वराज के दूसरे छत्रपति, पराक्रमी योद्धा, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के शहादत दिन पर विनम्र श्रद्धांजलि।

औरंगजेब ने कराई थी संभाजी महाराज की हत्या

आज 11 मार्च को छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन औरंगजेब ने संभाजी महाराज की हत्या करवा दी थी। कुछ दिन पहले अबू आसिम आजमी ने औरंगजेब को अच्छा शासक बताया था। वहीं आज छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि पर भी अबू आसिम आजमी ने पोस्ट किया है और श्रद्धांजलि ही है।

आजमी ने की थी औरंगजेब की तारीफ

बता दें कि हाल ही में सपा विधायक अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ थी। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। हालांकि, अबू आजमी ने विवाद बढ़ने पर अपने बयान को वापस ले लिया था। इसके बावजूद उन्होंने मौजूदा विधानसभा सत्र से निलंबित कर दिया गया था। सपा नेता ने मौजूदा सत्र से निलंबन को राजनीति से प्रेरित बताया था। सपा नेता ने वीडियो बयान में कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष ने मुझे पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। मुझे ताज्जुब हुआ कि मैंने विधानसभा के अंदर कोई गलत बात नहीं की थी। वहीं, बाहर हमने किसी महापुरुष के बारे में अपशब्द नहीं कहे। मैंने केवल इतिहास में वर्णित बातों का संदर्भ दिया था। इसके बाद भी विधानसभा अध्यक्ष ने हमें निलंबित कर दिया, जिसका हमें अफसोस है।

क्या भारत टैरिफ कटौती पर सहमत हो गया? जानें सरकार का जवाब


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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था भारत टैरिफ कटौती पर राजी हो गया है। वहीं, केंद्र सरकार ने अमेरिका राष्ट्रपति के उस दावे को खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि अब तक ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं।सरकार ने सोमवार को एक संसदीय पैनल को बताया कि इस मुद्दे पर अमेरिका से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। साथ ही सरकार ने इस मुद्दे को हल करने के लिए सितंबर तक का समय मांगा है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार उठा रहे हैं।

बता दें कि, डोनाल्ड ट्रंप बार-बार टैरिफ का मुद्दा उठा रहे हैं। ट्रंप ने पिछले दिनों दावा किया था कि भारत टैरिफ कटौती पर सहमत हो गया है। जब कि भारत का कहना है कि इस मुद्दे पर अमेरिका संग अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है, दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। ट्रंप के दावे के दो दिन बाद भारत सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को ये बात बताई। सरकार ने कहा कि व्यापार शुल्क को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मुद्दे के हल के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है। 

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने वाणिज्य सचिव और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को अपने समक्ष उपस्थित होकर हाल के घटनाक्रमों के बारे में बताने को कहा था, जिसमें ट्रंप के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स शामिल हैं कि भारत अपने टैरिफ कम करने पर सहमत हो गया है। विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए, वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। ये केवल तत्काल टैरिफ समायोजन की मांग करने के बजाय दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ कार्रवाइयों पर चिंताओं को दूर करने की भी कोशिश की।

वाणिज्य सचिव का तर्क था कि नई दिल्ली चीन, कनाडा और मैक्सिको के विपरीत, भारत वाशिंगटन के साथ एक व्यापार सौदे पर लगा हुआ है, जहां ट्रंप ने टैरिफ कार्रवाइयों की घोषणा की है, जिनमें से कुछ लागू भी हो गई हैं। सूत्रों ने बताया कि बर्थवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत फिलहाल पारस्परिक टैरिफ से बच सकता है, जिसकी धमकी ट्रंप ने 2 अप्रैल से दी है।

सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि व्यापार वार्ताओं के दौरान देश के हितों का ध्यान रखा जाएगा। भारत मुक्त और उदार व्यापार के पक्ष में है जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। टैरिफ वॉर से अमेरिका समेत किसी भी देश को फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे मंदी आ सकती है।

कुछ सदस्यों ने जब सवाल किया कि कनाडा और मेक्सिको की तरह भारत शुल्कों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद क्यों नहीं कर रहा है, तो वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों देशों से कोई तुलना नहीं हो सकती क्योंकि उनके साथ अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं एवं सीमा आव्रजन के मुद्दे हैं।

बर्थवाल ने कहा कि भारत पारस्परिक लाभ के समझौते पर हस्ताक्षर करेगा और उन उद्योगों को संरक्षित करेगा जो उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विकासशील देश हर चीज पर शुल्क कम नहीं कर सकते। भारत पारस्परिक व द्विपक्षीय तरीके से शुल्कों में कमी कर सकता है, लेकिन बहुपक्षीय रूप से नहीं, इसीलिए द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता हो रही है।

तिरपाल का हिजाब पहन लें मुस्लिम मर्द...” योगी के मंत्री की ये कैसी सलाह


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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री रघुराज सिंह ने होली और नमाजियों को लेकर विवादित बयान दिया है।रघुराज सिंह ने कहा है कि होली पर सफेद टोपी वाले घर से बाहर तिरपाल का हिजाब पहनकर निकलें। योगी सरकार में श्रम एवं सेवायोजना विभाग के दर्जा प्राप्त मंत्री ने कहा है कि तिरपाल के हिजाब पहननेसे उनकी टोपी और शरीर बचा रहेगा।

दरअसल, इस बार होली का पर्व और जुमे एक ही दिन पड़ रहा है। जुमे की नाम के समय को लेकर यूपी में घमासान मचा है। रघुराज सिंह ने इसी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है की होली में जिसको रंग से बचना है वह तिरपाल का हिजाब पहने जैसे मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं वैसे पुरुष भी पहनें ताकि उनकी टोपी और शरीर बचा रहे अन्यथा वह घर पर रहे। उन्होंने कहा कि होली में व्यवधान उत्पन्न करने वालों की तीन जगह हैं, जेल या प्रदेश छोड़ दे अन्यथा यमराज के पास अपना नाम लिखवा दे। 

रघुराज सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने राज्य स्थित अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंदिर बनने की मांग का समर्थन किया। रघुराज सिंह ने यह भी कहा कि एएमयू में मंदिर बनेगा इन लोगों को बहुसंख्यकों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एएमयू में राममंदिर बने इसकी मांग करता हूं. अगर बनता है तो सबसे पहली ईंट मैं रखूंगा। वहां मंदिर के लिये अपना सबकुछ न्योछावर कर सकते हैं।

अनुज चौधरी के बयान पर भी विवाद

इससे पहले यूपी पुलिस के अधिकारी अनुज चौधरी ने होली और रमजान को लेकर बयान दिया था। जिसपर काफी विवाद भी हुआ। संभल के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी ने कहा था कि होली एक ऐसा त्योहार है जो साल में एक बार आता है, जबकि जुमे की नमाज साल में 52 बार होती है। सीओ चौधरी ने कहा था कि अगर किसी को होली के रंगों से असहजता महसूस होती है, तो उन्हें उस दिन घर के अंदर ही रहना चाहिए, जो लोग बाहर निकलते हैं, उन्हें व्यापक सोच रखनी चाहिए, क्योंकि त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाने चाहिए।

कुश्ती महासंघ पर लगा निलंबन हटा, 15 महीने बाद खेल मंत्रालय का अहम फैसला

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भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को बड़ी राहत मिली है। खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई पर से बैन हटा लिया है। डब्ल्यूएफआई में पिछले कुछ वर्षों से विवाद चल रहा था। डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण द्वारा महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों और उनके निलंबन के बाद उनके करीबी संजय सिंह के अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर विवाद था। जिसके बाद दिसंबर 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ को खेल मंत्रालय द्वारा निलंबित कर दिया गया था। अब तक स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एडहॉक कमेटी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाल रही थी। अब बैन हटने के बाद घरेलू टूर्नामेंटों के आयोजन और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए राष्ट्रीय टीमों के चयन का रास्ता साफ हो गया है।

डब्ल्यूएफआई को 24 दिसंबर को बैन कर दिया था। दरअसल, डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के नेतृत्व वाली समिति ने 21 दिसंबर 2023 को चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने अंडर-15 और अंडर-20 वर्ग के राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराने की घोषणा की थी। हालांकि, इस चैंपियनशिप का आयोजन स्थल गोंडा के नंदिनी नगर में रखा था जो बृजभूषण का गढ़ है। यह बात सरकार को चुभी थी। जिसके बाद खेल मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए डब्ल्यूएफआई को निलंबित करने का फैसला किया था। 

बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों का धरना

साल 2023 में 16 जनवरी को ओलिंपिक मेडलिस्ट साक्षी महिल, विनेश फोगाट सहित कई महिलाओं पहलवानों ने उस समय के डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण सिंह शरण के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाते हुए जंतर मंतर पर धरना शुरू किया था। उनके समर्थन में ओलिंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया भी धरने में शामिल हुए थे। उस समय खेल मंत्रालय के आश्वासन के बाद पहलवानों ने धरना खत्म कर दिया था और फिर से अप्रैल में धरना प्रदर्शन किया था।

खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत

निलंबन हटने से घरेलू टूर्नामेंट आयोजित करने के रास्ते खुल गए हैं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के चयन के लिए भी अब दुविधा नहीं होगी। मंत्रालय ने अपने आदेश में बताया कि डब्ल्यूएफआई ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं जिस कारण उस पर लगे निलंबन को हटाया जाता है। खेल मंत्रालय ने इस तरह करीब 15 महीने बाद डब्ल्यूएफआई पर लगा निलंबन हटाया।

मॉरिशस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, प्रधानमंत्री-स्पीकर समेत सभी मंत्री तक पहुंचे एयरपोर्ट


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार की सुबह मॉरीशस पहुंचे। पीएम मोदी का मॉरीशस दौरा दो दिनों का है। इन दो दिनों में भारत और मॉरीशस के बीच रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा। पीएम मोदी 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी समारोह में भाग लेगी। पीएम मोदी अपने इस दौरे के दौरान भारत और मॉरीशस क्षमता निर्माण, व्यापार और सीमा पार वित्तीय अपराधों से निपटने के क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मॉरिशस पहुंचने पर एयरपोर्ट पर काफी गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया गया।मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम समेत शीर्ष हस्तियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। पीएम नवीन ने पीएम मोदी को माला पहनाई और गले लगाकर उनका अपने देश में अभिनंदन किया। इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।

पीएम मोदी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर 200 गणमान्य लोग

पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के साथ उप प्रधानमंत्री, मॉरीशस के मुख्य न्यायाधीश, नेशनल असेंबली के स्पीकर, विपक्ष के नेता, विदेश मंत्री, कैबिनेट सचिव, ग्रैंड पोर्ट डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अध्यक्ष और कई अन्य लोग भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट पर कुल 200 गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे, जिनमें सांसद, विधायक, राजनयिक दल और धार्मिक नेता शामिल थे।

क्यों खास है पीएम मोदी का मॉरिशस दौरा?

पीएम मोदी का मॉरिशस का दौरा काफी ज्यादा अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में और भी गहराई आने की उम्मीद है। साथ ही, पीएम मोदी और मॉरिशस के प्रधानमंत्री के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों अहम है मॉरीशस

भारत मॉरीशस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। सिंगापुर के बाद मॉरीशस 2023-24 के लिए भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत और मॉरीशस के बीच व्यापार को और अधिक मजबूत करने के लिए इस यात्रा के दौरान कई नई परियोजनाओं की शुरुआत की जा सकती है। भारत मॉरीशस में बुनियादी ढांचे, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश कर रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।

घुसपैठियों की अब खैर नहीःआज लोकसभा में पेश होगा ये बिल


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#amit_shah_represent_new_immigration_bill_2025

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पेश करेंगे। इस कानून के लागू होने के बाद भारत में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की होगी। इस बिल के कानून बनने के बाद इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े चार पुराने कानूनों को खत्म कर दिया जाएगा। इनमें फॉरेनर्स एक्ट 1946, पासपोर्ट एक्ट 1920, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939 और इमिग्रेशन एक्ट 2000 शामिल हैं।

यह बिल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निवास को कड़े नियमों के दायरे में लाने का प्रस्ताव करता है। इसमें प्रावधान किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति की मौजूदगी देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनती है या फिर वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में अवैध रूप से नागरिकता प्राप्त करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

इसके अलावा, अगर किसी विदेशी नागरिक के प्रवेश से भारत के किसी अन्य देश के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं, तो उसे देश में आने से रोका जा सकता है। जाली या धोखाधड़ी से प्राप्त पासपोर्ट या दूसरे ट्रेवल डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल या देने वाले पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है, जिसे बढ़ाकर सात साल किया जा सकता है।

विधेयक में कम से कम एक लाख का जुर्माना, जो 10 लाख रुपये तक हो सकता है. इसका भी प्रस्ताव किया जा सकता है। वीजा अवधि से ज्यादा समय तक रुकने पर तीन साल की कैद और 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

क्या वक्फ बिल के खिलाफ CAA-NRC की तरह बनाया जाएगा दबाव? जमीयत ने किया विरोध प्रदर्शन का समर्थन

वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। यही नहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य संगठनों द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन का समर्थन किया है। संगठन ने दावा किया है कि मुसलमानों को अपने अधिकारों को वापस लेने के लिए सड़कों पर आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से लेकर जमियत उलेमा-ए-हिंद सहित तमाम मुस्लिम संगठनों 13 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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मोदी सरकार वक्फ बिल को इसी सत्र में पास करने की तैयारी की है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी जैसे सहयोगी दल संसद की संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) की ओर से मंजूर किए गए संशोधनों के साथ वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करेंगे। मोदी कैबिनेट ने भी संशोधनों को मंजूरी दे दी है। ये तय माना जा रहा है कि सरकार इसी सत्र में वक्फ बिल को पास कराएगी। इस तरह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार से आर पार का ऐलान कर दिया है।

जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि 13 मार्च से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में मदनी ने कहा ‘वक्फ हमारा मजहबी मामला है। सियासी पार्टियां इसमें छोटा-मोटा संशोधन करके वक्फ बिल को लाने की तैयारी कर रही हैं। हम इसका विरोध कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इस्लाम के खिलाफ वाली पार्टियां बिल को लाना चाहती हैं। गैर जिम्मेदार पार्टियां चाह रही हैं कि इस देश में मुस्लिमों को जिंदा नहीं रहने दिया जाए, हम इसके खिलाफ हैं।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने लिखित बयान जारी कर कहा कि मुसलमानों को अपने अधिकारों की बहाली के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पिछले बारह वर्षों से मुसलमान धैर्य और संयम का परिचय दे रहे हैं, लेकिन अब जब वक्फ संपत्तियों के संबंध में मुसलमानों की चिंताओं और आपत्तियों को नजरअंदाज कर जबरन असंवैधानिक कानून लाया जा रहा है, तो फिर विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। खासकर अपने धार्मिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने ये भी कहा अगर ये विधेयक कानून बनता है, तो जमीयत की सभी प्रांतीय इकाइयां अपने-अपने राज्यों के उच्च न्यायालयों में इस कानून को चुनौती देंगी।मदनी ने कहा कि 12 फरवरी, 2025 को संगठन की कार्यकारी समिति की बैठक में ये फैसला लिया गया कि यदि विधेयक पारित होता है तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की सभी स्टेट यूनिट्स अपने संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में इस कानून को चुनौती देंगी। इसके अलावा जमीयत इस विश्वास के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी कि न्याय मिलेगा, क्योंकि अदालतें ही हमारे लिए अंतिम सहारा हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि सीएए-एनआरसी की तरह आंदोलन खड़ा कर मुस्लिम तंजीमें क्या मोदी सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हो पाएंगी?