पहले की औरंगजेब की तारीफ, अब संभाजी महाराज का गुणगान, सपा नेता अबू आजमी के बदले सुर


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#abuazmipaidtributetochhatrapatisambhaji 

महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी के औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान पर विवाद अभी थमा नहीं है। औरंगजेब की तारीफ करने पर विवादों में घिरे सपा नेता अबू आजमी ने अब छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उनको श्रद्धांजलि दी है और उनका गुणगान किया है।

सपा विधायक अबू आजमी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर छत्रपति संभाजी महाराज को फोटो पोस्ट किया। सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने संभाजी महाराज को पराक्रमी योद्धा और धर्मवीर छत्रपती बताया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, स्वराज के दूसरे छत्रपति, पराक्रमी योद्धा, धर्मवीर छत्रपति संभाजी महाराज के शहादत दिन पर विनम्र श्रद्धांजलि।

औरंगजेब ने कराई थी संभाजी महाराज की हत्या

आज 11 मार्च को छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि है। आज ही के दिन औरंगजेब ने संभाजी महाराज की हत्या करवा दी थी। कुछ दिन पहले अबू आसिम आजमी ने औरंगजेब को अच्छा शासक बताया था। वहीं आज छत्रपति संभाजी महाराज की पुण्यतिथि पर भी अबू आसिम आजमी ने पोस्ट किया है और श्रद्धांजलि ही है।

आजमी ने की थी औरंगजेब की तारीफ

बता दें कि हाल ही में सपा विधायक अबू आजमी ने मुगल शासक औरंगजेब की तारीफ थी। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनकी आलोचना की थी। हालांकि, अबू आजमी ने विवाद बढ़ने पर अपने बयान को वापस ले लिया था। इसके बावजूद उन्होंने मौजूदा विधानसभा सत्र से निलंबित कर दिया गया था। सपा नेता ने मौजूदा सत्र से निलंबन को राजनीति से प्रेरित बताया था। सपा नेता ने वीडियो बयान में कहा था कि विधानसभा अध्यक्ष ने मुझे पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया। मुझे ताज्जुब हुआ कि मैंने विधानसभा के अंदर कोई गलत बात नहीं की थी। वहीं, बाहर हमने किसी महापुरुष के बारे में अपशब्द नहीं कहे। मैंने केवल इतिहास में वर्णित बातों का संदर्भ दिया था। इसके बाद भी विधानसभा अध्यक्ष ने हमें निलंबित कर दिया, जिसका हमें अफसोस है।

क्या भारत टैरिफ कटौती पर सहमत हो गया? जानें सरकार का जवाब


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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था भारत टैरिफ कटौती पर राजी हो गया है। वहीं, केंद्र सरकार ने अमेरिका राष्ट्रपति के उस दावे को खारिज कर दिया है। भारत का कहना है कि अब तक ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं।सरकार ने सोमवार को एक संसदीय पैनल को बताया कि इस मुद्दे पर अमेरिका से कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई गई है। साथ ही सरकार ने इस मुद्दे को हल करने के लिए सितंबर तक का समय मांगा है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार उठा रहे हैं।

बता दें कि, डोनाल्ड ट्रंप बार-बार टैरिफ का मुद्दा उठा रहे हैं। ट्रंप ने पिछले दिनों दावा किया था कि भारत टैरिफ कटौती पर सहमत हो गया है। जब कि भारत का कहना है कि इस मुद्दे पर अमेरिका संग अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है, दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। ट्रंप के दावे के दो दिन बाद भारत सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को ये बात बताई। सरकार ने कहा कि व्यापार शुल्क को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मुद्दे के हल के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है। 

कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने वाणिज्य सचिव और विदेश सचिव विक्रम मिसरी को अपने समक्ष उपस्थित होकर हाल के घटनाक्रमों के बारे में बताने को कहा था, जिसमें ट्रंप के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स शामिल हैं कि भारत अपने टैरिफ कम करने पर सहमत हो गया है। विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए, वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि भारत और अमेरिका पारस्परिक रूप से लाभकारी द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। ये केवल तत्काल टैरिफ समायोजन की मांग करने के बजाय दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने भारत के खिलाफ टैरिफ कार्रवाइयों पर चिंताओं को दूर करने की भी कोशिश की।

वाणिज्य सचिव का तर्क था कि नई दिल्ली चीन, कनाडा और मैक्सिको के विपरीत, भारत वाशिंगटन के साथ एक व्यापार सौदे पर लगा हुआ है, जहां ट्रंप ने टैरिफ कार्रवाइयों की घोषणा की है, जिनमें से कुछ लागू भी हो गई हैं। सूत्रों ने बताया कि बर्थवाल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत फिलहाल पारस्परिक टैरिफ से बच सकता है, जिसकी धमकी ट्रंप ने 2 अप्रैल से दी है।

सूत्रों ने बताया कि वाणिज्य सचिव ने यह भी कहा कि व्यापार वार्ताओं के दौरान देश के हितों का ध्यान रखा जाएगा। भारत मुक्त और उदार व्यापार के पक्ष में है जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। टैरिफ वॉर से अमेरिका समेत किसी भी देश को फायदा नहीं होगा, बल्कि इससे मंदी आ सकती है।

कुछ सदस्यों ने जब सवाल किया कि कनाडा और मेक्सिको की तरह भारत शुल्कों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद क्यों नहीं कर रहा है, तो वाणिज्य सचिव ने कहा कि दोनों देशों से कोई तुलना नहीं हो सकती क्योंकि उनके साथ अमेरिका की सुरक्षा चिंताएं एवं सीमा आव्रजन के मुद्दे हैं।

बर्थवाल ने कहा कि भारत पारस्परिक लाभ के समझौते पर हस्ताक्षर करेगा और उन उद्योगों को संरक्षित करेगा जो उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि विकासशील देश हर चीज पर शुल्क कम नहीं कर सकते। भारत पारस्परिक व द्विपक्षीय तरीके से शुल्कों में कमी कर सकता है, लेकिन बहुपक्षीय रूप से नहीं, इसीलिए द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर वार्ता हो रही है।

तिरपाल का हिजाब पहन लें मुस्लिम मर्द...” योगी के मंत्री की ये कैसी सलाह


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#upministerraghurajsinghcontroversial_statement

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्री रघुराज सिंह ने होली और नमाजियों को लेकर विवादित बयान दिया है।रघुराज सिंह ने कहा है कि होली पर सफेद टोपी वाले घर से बाहर तिरपाल का हिजाब पहनकर निकलें। योगी सरकार में श्रम एवं सेवायोजना विभाग के दर्जा प्राप्त मंत्री ने कहा है कि तिरपाल के हिजाब पहननेसे उनकी टोपी और शरीर बचा रहेगा।

दरअसल, इस बार होली का पर्व और जुमे एक ही दिन पड़ रहा है। जुमे की नाम के समय को लेकर यूपी में घमासान मचा है। रघुराज सिंह ने इसी को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है की होली में जिसको रंग से बचना है वह तिरपाल का हिजाब पहने जैसे मुस्लिम महिलाएं पहनती हैं वैसे पुरुष भी पहनें ताकि उनकी टोपी और शरीर बचा रहे अन्यथा वह घर पर रहे। उन्होंने कहा कि होली में व्यवधान उत्पन्न करने वालों की तीन जगह हैं, जेल या प्रदेश छोड़ दे अन्यथा यमराज के पास अपना नाम लिखवा दे। 

रघुराज सिंह यहीं नहीं रुके। उन्होंने राज्य स्थित अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंदिर बनने की मांग का समर्थन किया। रघुराज सिंह ने यह भी कहा कि एएमयू में मंदिर बनेगा इन लोगों को बहुसंख्यकों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एएमयू में राममंदिर बने इसकी मांग करता हूं. अगर बनता है तो सबसे पहली ईंट मैं रखूंगा। वहां मंदिर के लिये अपना सबकुछ न्योछावर कर सकते हैं।

अनुज चौधरी के बयान पर भी विवाद

इससे पहले यूपी पुलिस के अधिकारी अनुज चौधरी ने होली और रमजान को लेकर बयान दिया था। जिसपर काफी विवाद भी हुआ। संभल के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज चौधरी ने कहा था कि होली एक ऐसा त्योहार है जो साल में एक बार आता है, जबकि जुमे की नमाज साल में 52 बार होती है। सीओ चौधरी ने कहा था कि अगर किसी को होली के रंगों से असहजता महसूस होती है, तो उन्हें उस दिन घर के अंदर ही रहना चाहिए, जो लोग बाहर निकलते हैं, उन्हें व्यापक सोच रखनी चाहिए, क्योंकि त्योहार एक साथ मिलकर मनाए जाने चाहिए।

कुश्ती महासंघ पर लगा निलंबन हटा, 15 महीने बाद खेल मंत्रालय का अहम फैसला

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#wfisuspensionremoval

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को बड़ी राहत मिली है। खेल मंत्रालय ने डब्ल्यूएफआई पर से बैन हटा लिया है। डब्ल्यूएफआई में पिछले कुछ वर्षों से विवाद चल रहा था। डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण द्वारा महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों और उनके निलंबन के बाद उनके करीबी संजय सिंह के अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर विवाद था। जिसके बाद दिसंबर 2023 में भारतीय कुश्ती महासंघ को खेल मंत्रालय द्वारा निलंबित कर दिया गया था। अब तक स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एडहॉक कमेटी प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभाल रही थी। अब बैन हटने के बाद घरेलू टूर्नामेंटों के आयोजन और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए राष्ट्रीय टीमों के चयन का रास्ता साफ हो गया है।

डब्ल्यूएफआई को 24 दिसंबर को बैन कर दिया था। दरअसल, डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के नेतृत्व वाली समिति ने 21 दिसंबर 2023 को चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने अंडर-15 और अंडर-20 वर्ग के राष्ट्रीय चैंपियनशिप कराने की घोषणा की थी। हालांकि, इस चैंपियनशिप का आयोजन स्थल गोंडा के नंदिनी नगर में रखा था जो बृजभूषण का गढ़ है। यह बात सरकार को चुभी थी। जिसके बाद खेल मंत्रालय ने कार्रवाई करते हुए डब्ल्यूएफआई को निलंबित करने का फैसला किया था। 

बृजभूषण सिंह के खिलाफ महिला पहलवानों का धरना

साल 2023 में 16 जनवरी को ओलिंपिक मेडलिस्ट साक्षी महिल, विनेश फोगाट सहित कई महिलाओं पहलवानों ने उस समय के डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष बृजभूषण सिंह शरण के खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाते हुए जंतर मंतर पर धरना शुरू किया था। उनके समर्थन में ओलिंपिक मेडलिस्ट बजरंग पूनिया भी धरने में शामिल हुए थे। उस समय खेल मंत्रालय के आश्वासन के बाद पहलवानों ने धरना खत्म कर दिया था और फिर से अप्रैल में धरना प्रदर्शन किया था।

खिलाड़ियों के लिए बड़ी राहत

निलंबन हटने से घरेलू टूर्नामेंट आयोजित करने के रास्ते खुल गए हैं और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के चयन के लिए भी अब दुविधा नहीं होगी। मंत्रालय ने अपने आदेश में बताया कि डब्ल्यूएफआई ने सुधारात्मक कदम उठाए हैं जिस कारण उस पर लगे निलंबन को हटाया जाता है। खेल मंत्रालय ने इस तरह करीब 15 महीने बाद डब्ल्यूएफआई पर लगा निलंबन हटाया।

मॉरिशस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत, प्रधानमंत्री-स्पीकर समेत सभी मंत्री तक पहुंचे एयरपोर्ट


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#pmmodimauritius_visit

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार की सुबह मॉरीशस पहुंचे। पीएम मोदी का मॉरीशस दौरा दो दिनों का है। इन दो दिनों में भारत और मॉरीशस के बीच रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा। पीएम मोदी 12 मार्च को मॉरीशस के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ भारतीय रक्षा बलों की एक टुकड़ी समारोह में भाग लेगी। पीएम मोदी अपने इस दौरे के दौरान भारत और मॉरीशस क्षमता निर्माण, व्यापार और सीमा पार वित्तीय अपराधों से निपटने के क्षेत्रों में सहयोग के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मॉरिशस पहुंचने पर एयरपोर्ट पर काफी गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया गया।मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम समेत शीर्ष हस्तियों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। पीएम नवीन ने पीएम मोदी को माला पहनाई और गले लगाकर उनका अपने देश में अभिनंदन किया। इस दौरान पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।

पीएम मोदी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर 200 गणमान्य लोग

पीएम मोदी का स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री नवीन रामगुलाम के साथ उप प्रधानमंत्री, मॉरीशस के मुख्य न्यायाधीश, नेशनल असेंबली के स्पीकर, विपक्ष के नेता, विदेश मंत्री, कैबिनेट सचिव, ग्रैंड पोर्ट डिस्ट्रिक्ट काउंसिल के अध्यक्ष और कई अन्य लोग भी मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए एयरपोर्ट पर कुल 200 गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे, जिनमें सांसद, विधायक, राजनयिक दल और धार्मिक नेता शामिल थे।

क्यों खास है पीएम मोदी का मॉरिशस दौरा?

पीएम मोदी का मॉरिशस का दौरा काफी ज्यादा अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान दोनों देशों के रिश्तों में और भी गहराई आने की उम्मीद है। साथ ही, पीएम मोदी और मॉरिशस के प्रधानमंत्री के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

भारत के लिए क्यों अहम है मॉरीशस

भारत मॉरीशस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। सिंगापुर के बाद मॉरीशस 2023-24 के लिए भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत था। यह प्रधानमंत्री मोदी की 2015 के बाद पहली मॉरीशस यात्रा है। प्रधानमंत्री मोदी की वर्तमान यात्रा से विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भारत और मॉरीशस के बीच व्यापार को और अधिक मजबूत करने के लिए इस यात्रा के दौरान कई नई परियोजनाओं की शुरुआत की जा सकती है। भारत मॉरीशस में बुनियादी ढांचे, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश कर रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंध और मजबूत होंगे।

घुसपैठियों की अब खैर नहीःआज लोकसभा में पेश होगा ये बिल


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#amit_shah_represent_new_immigration_bill_2025

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज लोकसभा में इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल 2025 पेश करेंगे। इस कानून के लागू होने के बाद भारत में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की होगी। इस बिल के कानून बनने के बाद इमिग्रेशन और विदेशी नागरिकों से जुड़े चार पुराने कानूनों को खत्म कर दिया जाएगा। इनमें फॉरेनर्स एक्ट 1946, पासपोर्ट एक्ट 1920, रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट 1939 और इमिग्रेशन एक्ट 2000 शामिल हैं।

यह बिल भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को प्राथमिकता देते हुए विदेशी नागरिकों के प्रवेश और निवास को कड़े नियमों के दायरे में लाने का प्रस्ताव करता है। इसमें प्रावधान किया गया है कि अगर किसी व्यक्ति की मौजूदगी देश की सुरक्षा के लिए खतरा बनती है या फिर वह फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारत में अवैध रूप से नागरिकता प्राप्त करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

इसके अलावा, अगर किसी विदेशी नागरिक के प्रवेश से भारत के किसी अन्य देश के साथ संबंध प्रभावित हो सकते हैं, तो उसे देश में आने से रोका जा सकता है। जाली या धोखाधड़ी से प्राप्त पासपोर्ट या दूसरे ट्रेवल डॉक्यूमेंट का इस्तेमाल या देने वाले पर दो साल की कैद की सजा हो सकती है, जिसे बढ़ाकर सात साल किया जा सकता है।

विधेयक में कम से कम एक लाख का जुर्माना, जो 10 लाख रुपये तक हो सकता है. इसका भी प्रस्ताव किया जा सकता है। वीजा अवधि से ज्यादा समय तक रुकने पर तीन साल की कैद और 3 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।

क्या वक्फ बिल के खिलाफ CAA-NRC की तरह बनाया जाएगा दबाव? जमीयत ने किया विरोध प्रदर्शन का समर्थन

वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ विरोध तेज होता जा रहा है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने इस कानून को कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। यही नहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य संगठनों द्वारा बुलाए गए प्रदर्शन का समर्थन किया है। संगठन ने दावा किया है कि मुसलमानों को अपने अधिकारों को वापस लेने के लिए सड़कों पर आने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से लेकर जमियत उलेमा-ए-हिंद सहित तमाम मुस्लिम संगठनों 13 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

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मोदी सरकार वक्फ बिल को इसी सत्र में पास करने की तैयारी की है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी जैसे सहयोगी दल संसद की संयुक्त समिति (जॉइंट कमेटी) की ओर से मंजूर किए गए संशोधनों के साथ वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करेंगे। मोदी कैबिनेट ने भी संशोधनों को मंजूरी दे दी है। ये तय माना जा रहा है कि सरकार इसी सत्र में वक्फ बिल को पास कराएगी। इस तरह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार से आर पार का ऐलान कर दिया है।

जमीयत के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि 13 मार्च से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।न्यूज एजेंसी IANS के साथ बातचीत में मदनी ने कहा ‘वक्फ हमारा मजहबी मामला है। सियासी पार्टियां इसमें छोटा-मोटा संशोधन करके वक्फ बिल को लाने की तैयारी कर रही हैं। हम इसका विरोध कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इस्लाम के खिलाफ वाली पार्टियां बिल को लाना चाहती हैं। गैर जिम्मेदार पार्टियां चाह रही हैं कि इस देश में मुस्लिमों को जिंदा नहीं रहने दिया जाए, हम इसके खिलाफ हैं।

जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने लिखित बयान जारी कर कहा कि मुसलमानों को अपने अधिकारों की बहाली के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया जा रहा है। पिछले बारह वर्षों से मुसलमान धैर्य और संयम का परिचय दे रहे हैं, लेकिन अब जब वक्फ संपत्तियों के संबंध में मुसलमानों की चिंताओं और आपत्तियों को नजरअंदाज कर जबरन असंवैधानिक कानून लाया जा रहा है, तो फिर विरोध प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। खासकर अपने धार्मिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना देश के हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

संगठन के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने ये भी कहा अगर ये विधेयक कानून बनता है, तो जमीयत की सभी प्रांतीय इकाइयां अपने-अपने राज्यों के उच्च न्यायालयों में इस कानून को चुनौती देंगी।मदनी ने कहा कि 12 फरवरी, 2025 को संगठन की कार्यकारी समिति की बैठक में ये फैसला लिया गया कि यदि विधेयक पारित होता है तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद की सभी स्टेट यूनिट्स अपने संबंधित राज्यों के हाईकोर्ट में इस कानून को चुनौती देंगी। इसके अलावा जमीयत इस विश्वास के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी कि न्याय मिलेगा, क्योंकि अदालतें ही हमारे लिए अंतिम सहारा हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि सीएए-एनआरसी की तरह आंदोलन खड़ा कर मुस्लिम तंजीमें क्या मोदी सरकार पर दबाव बनाने में कामयाब हो पाएंगी?

राज ठाकरे ने गंगाजल को लेकर ऐसा क्या बोला, मच गया बवाल

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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने गंगाजल पर भड़काऊ बयान दिया। मनसे की 9 मार्च को 19वीं वर्षगांठ है। इस मौके पर पुणे के चिंचवड में रामकृष्ण मोरे ऑडिटोरियम में बड़ा समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान अपने संबोधन में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने प्रयागराज महाकुंभ के पवित्र स्नान का मजाक उड़ाया। उन्होंने गंगाजल को लेकर भी आपत्तिजनक बातें कही है। राज ठाकरे के बयान पर बीजेपी और शिवसेना के दोनों गुटों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

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राज ठाकरे ने महाकुंभ के गंगा के प्रदूषित पानी को लेकर भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कुंभ के पानी को गंदा बताया है। उन्होंने कहा कि वह इतना प्रदूषित है कि पीना तो छोड़िए, वह पानी पीने लायक भी नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ पदाधिकारी कुंभ मेले में गए थे। बाला नांदगांवकर वहां से एक छोटे बर्तन में पानी लेकर आये थे। मैंने कहा कि मैं हड्डी नहीं पीऊंगा। मैं सोशल मीडिया पर लोगों को बहुत लोगों को बकवास करते हुए देखता हूं।

ठाकरे ने कहा कि मैंने सोशल मीडिया पर गंगा नदी की स्थिति के कई वीडियो देखे हैं। जिनमें लोग नदी में नहाते हुए और शरीर खुजलाते हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में भला यह पानी पीने लायक कैसे हो सकता है? मनसे प्रमुख ने आगे कहा कि भारत में कोई भी नदी पूरी तरह स्वच्छ नहीं है। उन्होंने कहा कि जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब से मैं सुनता आ रहा हूं कि गंगा जल्द ही साफ हो जाएगी। लेकिन यह बस एक मिथक बनकर रह गया है। अब इस भ्रम से बाहर आने का समय आ गया है।

ठाकरे ने नदी को मां कहने पर भी मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि हम तो नदी को मां कहते हैं। मगर विदेशों में देखिए, नदियां कितनी साफ हैं। विदेशों में लोग नदी को तो अपनी मां नहीं मानते हैं। अंधविश्वास से थोड़ा मुक्त हो जाइए, बाहर निकलिये और सिर थोड़ा घुमाकर देखिये।

गोल्ड स्मगलिंग केस मामले में एक और बड़ा खुलासा, स्टील प्लांट के लिए 12 एकड़ जमीन हुई थी आवंटित

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हाल ही में कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव को दुबई से सोने की तस्करी दुबई से सोने की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में नया खुलासा हुआ है। रान्या राव उर्फ हर्षवर्धिनी रान्या स्टील प्लांट लगाने वाली थी। कर्नाटक सरकार ने उसे फरवरी 2023 में 12 एकड़ जमीन भी अलॉट कर दी थी।

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कर्नाटक इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड (केआईएडीबी) ने पुष्टि की है कि फरवरी 2023 में रान्या को स्टील प्लांट कंपनी लगाने के लिए पिछली सरकार ने जमीन आवंटित की थी। खबरों में ये सामने आया था कि रान्या की कंपनी को 12 एकड़ इंडस्ट्रियल जमीन मिली थी। ‘केआईएडीबी’ के सीईओ महेश ने रविवार को कहा कि क्षीरोदा इंडिया को पिछली सरकार ने 2 जनवरी 2023 को 12 एकड़ जमीन आवंटित की थी।

मध्यम और बड़े उद्योग मंत्री एमबी पाटिल के कार्यालय ने तुमकुरु जिले के सिरा औद्योगिक क्षेत्र में रान्या की फर्म क्सीरोडा इंडिया को भूमि आवंटन के संबंध में 22 फरवरी 2023 को जारी सरकार की अंतिम अधिसूचना साझा की। कार्यालय द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में, ‘केआईएडीबी’ ने कहा कि राव से जुड़ी कंपनी को आवंटन जनवरी 2023 में किया गया था।इसके लिए वह 138 करोड़ रुपए निवेश करने वाली थी। इससे 160 लोगों को रोजगार मिलता।

मामले के राजनीतिक मोड़ लेता देख कर्नाटक के उद्योग मंत्री एमबी पाटिल के ऑफिस से रान्या के जमीन आवंटन से जुड़ी जानकारी शेयर की गई है। इसमें बताया गया कि भाजपा सरकार में रान्या को जमीन दी गई। दो महीने बाद राज्य में कांग्रेस की सरकार बन गई।

कन्नड़ एक्ट्रेस रान्या राव को 3 मार्च को 14.2 किलो सोने के साथ बेंगलुरु के केंपागौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दुबई से लौटने के दौरान गिरफ्तार किया गया था। रान्या ने इसे अपने बेल्ट में छिपाकर लाई थी। उन पर स्मगलिंग का केस दर्ज किया गया है।

इससे पहले पुलिस ने 6 मार्च को रान्या के लावेल रोड स्थित अपार्टमेंट की तलाशी ली थी। यहां से 2.1 करोड़ रुपए की ज्वेलरी और 2.7 करोड़ रुपए नकद बरामद किए। सोने की कीमत 12.56 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस तरह रान्या से कुल 17.29 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं।

कश्मीर में रमजान के बीच ऐसा क्या हा भड़क गए सीएम अब्दुल्ला, दिए जांच के आदेश

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कश्मीर के गुलमर्ग में 8 मार्च को एक फैशन शो हुआ था। शो में कई अर्धनग्न मॉडलों ने बर्फ पर रैंप वॉक किया। इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। जिसके बाद रमजान के पवित्र महीने में अश्लीलता फैलाने का आरोप लगा।इस मामले में सियासत भी गरमा गई है। मामले पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी हंगामा हुआ। नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के विधायकों ने चर्चा की मांग की। मामले की गंभीरता देखते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने फैशन शो की जांच के आदेश दिए हैं।

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दरअसल, गुलमर्ग में बर्फ के बीच एक आउटडोर फैशन शो हुआ। आयोजित फैशन शो स्की एंड एप्रेस स्की 2025 उत्सव का हिस्सा था, जिसे 7 मार्च को प्रमुख डिजाइनर लेबल “शिवन एंड नरेश” ने अपनी 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित किया था। रमजान के पवित्र महीने के दौरान इस कार्यक्रम में मॉडल्स के खुले कपड़ों में प्रदर्शन से भारी आक्रोश फैल गया, कई लोगों ने इसे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं का अनादर बताया। लोगों का कहना है कि सरकार रमजान में ऐसे फैशन शो के आयोजन की अनुमति कैसे दे सकती है?

हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख धार्मिक नेता मीरवाइज उमर फारूक ने फैशन शो को लेकर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए इसे अपमानजनक बताया और सवाल किया कि इसे करने की अनुमति कैसे दी गई।

पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन ने एक्स पर लिखा, गुलमर्ग में फैशन शो रमजान के पवित्र महीने के बीच में एक बेहद निंदा जनक घटना थी। मैं खुद को उदार व्यक्ति मानता हूं और सम्मानित और पारस्परिक रूप से सम्मानजनक सह-अस्तित्व में विश्वास करता हूं, लेकिन इस तरह के आयोजन की मेजबानी करने का यह सबसे अच्छा समय नहीं था।

विवाद बढ़ता देख जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने इसका संज्ञान लेते हुए इस मामले में एक जांच के आदेश जारी किए। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री कार्यालय ने नॉर्थ कश्मीर के विश्व प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट में आयोजित इस फैशन शो पर आश्चर्य और चिंता व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया। मुख्यमंत्री ने लोगों के आक्रोश को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया है और 24 घंटे के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सीएम उमर अब्दुल्लाह ने उनके कार्यालय के संचालित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के हैंडल एक्स से लिखा, आश्चर्य और गुस्सा पूरी तरह से समझ में आता है। मैंने जो तस्वीरें देखी हैं, वे स्थानीय संवेदनशीलता के प्रति पूरी तरह से उपेक्षा दिखाती हैं और वह भी इस पवित्र महीने (रमजान) के दौरान। मेरा कार्यालय स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और मैंने अगले 24 घंटों के अंदर एक रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई, जैसा उचित होगा वो की जाएगी।