चीन को क्यों सताने लगी भारत के साथ संबंध सुधारने की चिंता? जयशंकर के बयान के बाद बदले सुर

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हाल के दिनों में वैश्विक समीकरणों में तेजी से बदलाव आया है। यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच बढ़ी नजदीकियों के बाद दुनिया के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। इस बीच चीन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा है कि दोनों देशों को साझा सफलता हासिल करने के लिए मिलकर काम करने पर ध्यान देने की जरूरत है। वांग ने शुक्रवार को नई दिल्ली से रिश्ते के सवाल पर कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए, ना कि एक-दूसरे को कमजोर करने की कोशिश करनी चाहिए।

शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वांग यी ने कहा, "इस साल चीन-भारत राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ है। ऐसे में चीन भारत के साथ मिलकर पिछले अनुभवों को समेटने, आगे का रास्ता बनाने और चीन-भारत संबंधों को मजबूत और स्थिर विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए तैयार है।"

वांग यी ने कहा, "पिछले एक साल में चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। पिछले अक्टूबर में कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सफल बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों के सुधार और विकास के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया। दोनों पक्षों ने हमारे नेताओं की महत्वपूर्ण आम समझ का ईमानदारी से पालन किया है। सभी स्तरों पर आदान-प्रदान और व्यावहारिक सहयोग को मजबूत किया है और कई सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं।"

भारत और चीन को "एक दूसरे का सबसे बड़ा पड़ोसी" बताते हुए, वांग यी ने कहा-दोनों को ऐसे साझेदार होने चाहिए जो एक दूसरे की सफलता में योगदान दें। ड्रैगन और हाथी का एक सहयोगात्मक कदम दो दोनों पक्षों के लिए एकमात्र सही विकल्प है।"उन्होंने कहा कि चीन और भारत के पास दोनों देशों के विकास और पुनरोद्धार में तेजी लाने का साझा कार्य है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक-दूसरे का समर्थन करने के लिए हर कारण मौजूद है।

वांग ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीन और भारत को ग्लोबल साउथ के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक साथ आना चाहिए और दोनों देशों के बीच सीमा विवाद ही उनके द्विपक्षीय संबंधों को निर्धारित करने वाला एकमात्र कारक नहीं होना चाहिए। वांग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे के खिलाफ सावधानी बरतने के बजाय मिलकर सहयोग करना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्री का ये बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन दौरे पर गए जयशंकर ने लंदन के चैथम हाउस में एक पैनल चर्चा में चीन से रिश्ते पर बोलते हुए कहा कि एक स्थिर संतुलन बनाया जाने की जरूरत है। हम एक स्थिर रिश्ता चाहते हैं। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत चीन के साथ स्थिर संबंध चाहता है, जिसमें नई दिल्ली के हितों का सम्मान किया जाए। यही हमारे रिश्ते में मुख्य चुनौती है।

बता दें कि अमेरिका जहां रूस से दोस्ती बढ़ाकर चीन को अलग-थलग करना चाहता है तो वहीं भारत को भी अपने साथ लेकर चीन पर दबाव को बढ़ाना चाह रहा है। मगर चीन भी अमेरिका से कम नहीं है, वह उसके इस मर्म को समझ गया है। लिहाजा चीन ने भी अब अपना पाला बदलते हुए सबसे बड़ा ऐलान कर दिया है। चीन ने भारत के साथ मजबूत रिश्ते बनाने की इच्छा व्यक्त की है।

तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल शिक्षा शुरू कर दो...', भाषा विवाद के बीच अमित शाह का स्टालिन पर तंज

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भाषा को लेकर तमिलनाडु और केन्द्र सरकार आमने-सामने हैं। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पिछले कुछ दिनों से लगातार केंद्र सरकार पर नेशनल एजूकेशन पॉलिसी के जरिए तमिलनाडु में हिंदी को अनिवार्य करने और तमिल भाषा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगा रहे हैं। अब तक शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने स्टालिन के हमले को लेकर मोर्टा समभाल रखा था। ब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर पलटवार किया। उन्होंने स्टालिन से राज्य में तमिल में इंजीनियरिंग और मेडिकल की शिक्षा शुरू करने की बात कही है।

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भाषा के मुद्दे विशेष रूप से स्टालिन के हिंदी विरोध को लेकर मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बदलाव किए और अब यह सुनिश्चित किया है कि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के उम्मीदवार अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा दे सकें।

शाह ने दावा किया कि एमके स्टालिन ने तमिल भाषा के विकास के संबंध में पर्याप्त काम नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने क्षेत्रीय भाषाओं के विकास के लिए अपनी भर्ती नीतियों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। शाह ने कहा, अभी तक सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (सीएपीएफ) भर्ती में मातृभाषा के लिए कोई जगह नहीं थी। पीएम मोदी ने फैसला किया है कि हमारे युवा अब तमिल सहित आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में सीएपीएफ परीक्षा दे सकेंगे। मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से भी आग्रह करना चाहता हूं कि वे जल्द से जल्द तमिल भाषा में मेडिकल और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में कदम उठाएं।

क्या है केंद्र और राज्य के बीच विवाद?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन के बीच पिछले कई दिनों से जुबानी जंग चल रही है। बीते दिनों राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तमिलनाडु में लागू करने से स्टालिन के इनकार पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नाराजगी जाहिर की थी। वहीं स्टालिन, केंद्र सरकार पर जबरन राज्य में इसे लागू करने का आरोप लगा रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने कहा था कि जब तक तमिलनाडु राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और तीन भाषा फार्मूले को स्वीकार नहीं कर लेता, तब तक केंद्र सरकार की तरफ से उसे फंड नहीं दिया जाएगा।

स्टालिन ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार जबरन तमिलनाडु पर हिंदी थोपना चाह रही है। इसके कारण कई क्षेत्रीय भाषाएं पहले ही खत्म हो चुकी हैं, हम अपने यहां की भाषाएं खत्म नहीं होने देंगे।

राहुल गांधी का गुजरात दौराः 9 घंटे में करेंगे 5 बैठकें, आखिर क्या है कांग्रेस की रणनीति?

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2027 में गुजरात विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले लगातार हार का झेल रही कांग्रेस वे एक बार फिर खुद को नए सिरे से तैयार किया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के सीनियर लीडर राहुल गांधी दो दिन के दौरे पर गुजरात पहुंच गए हैं। वे 7 और 8 मार्च को यहां रहेंगे। इस दौरान वे अहमदाबाद में पार्टी पदाधिकारियों, वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा करेंगे। दिलचस्प यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक हफ्ते में दूसरी बार आज गुजरात पहुंच रहे हैं।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा के लिए जिला और राज्य स्तरीय पार्टी कार्यकर्ताओं और राज्य के नेताओं से मिलेंगे। सुबह अहमदाबाद पहुंचने के बाद यहां पूर्व पीसीसी अध्यक्षों और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा करेंगेष इसके बाद राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक होगी। दोपहर में आराम के बाद वह 2 बजे फिर से जिला कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठेंगे। 3 बजे से राहुल गांधी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों के साथ चर्चा करने वाले हैं।

गुजरात में 8-9 अप्रैल को अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक होने वाली है। 64 साल बाद ऐसी बैठक गुजरात में होने जा रही है। इससे पहले 1961 में भावनगर, सौराष्ट्र में बैठक की गई थी। इस तरह गुजरात में 64 साल बाद कांग्रेस का अधिवेशन होने जा रहा है। इसलिए अधिवेशन से पहले राहुल गांधी 7 और 8 मार्च को गुजरात कांग्रेस की संगठनात्मक तैयारी की समीक्षा करेंगे। अधिवेशन से पहले राहुल गांधी का दो दिनी अहमदाबाद दौरा साफ संदेश देता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी अभी से एक्टिव मोड में है।

राहुल का दौरा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर कांग्रेस नेतृत्व पर यह सवाल उठते रहते हैं कि वह राज्य को इग्नोर करता रहता है और भाजपा की लगातार सफलता की वजह यही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह इवेंट पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस तीन दशक से भी ज्यादा समय से राज्य की सत्ता से दूर है। उसे भाजपा का काउंटर करने के लिए रणनीति पर काम करना होगा और मजबूत चुनौती देनी होगी।

तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने भी नहीं सुनी गुहार

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मुंबई आतंकवादी हमले के आरोपी आतंकी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने तहव्वुर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने भारत प्रत्यर्पण के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी। राणा ने अपनी अर्जी में कहा था कि पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम होने के कारण भारत में उसे यातना दी जाएगी।

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तहव्वुर राणा को अमेरिकी सरकार ने भारत को सौंपने का फैसला लिया है। राणा इस फैसले रोक के लिए अदालत से स्टे चाहता था। तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उसके प्रत्यर्पण पर इमरजेंसी स्टे लगा दिया जाए। तहव्वुर ने कहा था कि अगर मुझे भारत प्रत्यर्पित किया गया तो मुझे प्रताड़ित किया जाएगा और मैं वहां ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाऊंगा।

आतंकवादी तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में अपने बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया है। उसने दावा किया है कि उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हैं। उसके पेट में बीमारी है, जिसके फटने का खतरा है। इसके साथ ही उसने बताया है कि उसे पार्किंसंस नाम की बीमारी है, जिसकी वजह से वो चीजों को भूल जाता है। इसके अलावा उसने कहा है कि उसे कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, कि उसके मूत्राशय में कैंसर होने का खतरा है। तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में आगे कहा है कि "उसे उस देश में नहीं भेजा जा सकता है, जहां उसे उसकी राष्ट्रीयता, उसके धर्म, उसकी संस्कृति और उसके मूल देश (पाकिस्तान) से दुश्मनी की वजह से उसे निशाना बनाया जाएगा।

राणा की याचिका खारिज होने के बाद अब उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि अभी उसकी वापसी की तारीख निश्चित नहीं है। उम्मीद की जा रही है कि जल्दी ही वह भारत आ सकता है। भारत सरकार लंबे समय से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रही थी। भारत आने के बाद उस पर मुकदमा चलाया जाएगा।

अमेरिकी यात्रा पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में बोलते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया था कि मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मेरे प्रशासन ने दुनिया के सबसे बुरे लोगों और मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं में से एक को भारत में न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने को मंजूरी दे दी है। इसलिए भारत वापस जा रहा है।

26 नवंबर 2008 को 10 पाकिस्तानी आतंकियों के एक समूह ने अरब सागर में समुद्री मार्ग के जरिए भारत की वित्तीय राजधानी में घुसने के बाद एक रेलवे स्टेशन, दो होटलों और एक यहूदी केंद्र पर हमला किया था। लगभग 60 घंटे तक चले इस हमले में 166 लोग मारे गए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। हमले के बाद आतंकी अजमल आमिर कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। नवंबर 2012 में अजमल आमिर कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था।

एस जयशंकर की सुरक्षा में चूक की गूंज ब्रिटिश संसद में, विपक्षी सांसद बॉब ब्लैकमैन ने उठाया मुद्दा

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विदेश मंत्री एस जयशंकर की लंदन यात्रा के दौरान सुरक्षा में चूक का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। लंदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर की सुरक्षा में चूक का मुद्दा ब्रिटिश पार्लियामेंट में भी गूंजा। ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने हाउस ऑफ कॉमन्स में इस मामले को उठाया। ब्लैकमैन ने इसे ‘खालिस्तानी गुंडों’ की ओर से हमला बताया। बता दें कि 6 मार्च यानी बुधवार की शाम को सेंट्रल लंदन में चैथम हाउस के बाहर खालुस्तानी समर्थक ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद जयशंकर के बाहर निकलते समय उनकी कार के सामलने आने की कोशिश की थी।

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न्यूज एंजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ब्लैकमैन ने कहा, कल भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर पर उस समय हमला हुआ, जब वो एक सार्वजनिक जगह पर भारतीय लोगों को संबोधित करने के बाद निकल रहे थे। उन पर खालिस्तानी गुंडों ने हमला किया। यह जिनेवा कन्वेंशन के खिलाफ है। ऐसा लगता है कि पुलिस और सुरक्षा बल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहे। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसा दोबारा ना हो।

विपक्षी सांसद के जवाब में सरकार की ओर हाउस ऑफ कॉमन्स की नेता लूसी पॉवेल ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, मुझे यह सुनकर बहुत दुख हुआ कि भारतीय संसद के सदस्य पर लंदन में हमला हुआ। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और हम अपने देश में आने वाले नेताओं के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं चाहते हैं। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय की ओर से भी इसकी निंदा की गई थी, जिसमें कहा गया, सार्वजनिक कार्यक्रमों को डराने, धमकाने या बाधित करने का कोई भी प्रयास पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

भारत ने जताई आपत्ति

इससे पहले भारत ने विदेश मंत्री की सुरक्षा में चूक पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। भारत ने कहा था कि वह उम्मीद करता है कि मेजबान सरकार ऐसे मामलों में अपने राजनयिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगी।भारत ने खालिस्तानियों को जिक्र करते हुए कहा था कि वह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग की निंदा करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने विदेश मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान सुरक्षा में सेंध की फुटेज देखी है। हम अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की भड़काऊ गतिविधियों की निंदा करते हैं।

पहले भी हुई थी घटना

खालिस्तानी तत्वों द्वारा सुरक्षा भंग करने की यह पहली घटना नहीं थी। इसके पहले मार्च 2023 में खालिस्तानी तत्वों ने लंदन में भारतीय उच्चायोग पर राष्ट्रीय ध्वज उतार दिया था, जिस पर भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया जताई गई थी।घटना के बाद, भारत ने दिल्ली में सबसे वरिष्ठ ब्रिटिश राजनयिक को तलब किया था। भारत ब्रिटेन से ब्रिटिश धरती से सक्रिय खालिस्तानी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लंबे वक्त से कह रहा है।

मायावती के बाद ममता भी भतीजे को करेंगी “आउट”, पार्टी की बैठक से अभिषेक बनर्जी ने बनाई दूरी

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बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हाल में अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ठीक ऐसे हा हालात तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी में भी दिख रही है। बीते कुछ दिनों से ममता दीदी से दूरी बना चुके उनके भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी पार्टी की एक अहम बैठक भी दूर दिखे। जिसके बाद से कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी में भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की बृहस्पतिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में हुई महत्वपूर्ण मतदाता सूची सत्यापन बैठक से अनुपस्थिति रहे। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के समाधान के लिए पिछले सप्ताह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की यह पहली बैठक थी। वैसे तो इस समिति में अभिषेक बनर्जी का नाम तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के तुरंत बाद दूसरे नंबर पर था लेकिन वह बैठक में नहीं पहुंचे।

बैठक से उनकी अनुपस्थिति के बाद पार्टी के भीतरी समीकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। पार्टी में पहले भी शीर्ष स्तर पर तनाव के कयास लगाए जाते रहे हैं। ममता बनर्जी की अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी से बढ़ती दूरियों की चर्चा भी होती रही है।ऐसे में अभिषेक के बैठक से दूर रहने के बाद पार्टी में हलचल तेज होती दिख रही है।

तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने बैठक में अभिषेक बनर्जी की अनुपस्थिति को मामूली बताया तो कुछ नेताओं का कहना था कि ममता बनर्जी ने पहले ही स्पष्ट तौर पर कहा था कि चुनाव से संबंधित सभी कार्य पार्टी मुख्यालय में होंगे, कहीं और नहीं। ऐसे में अभिषेक बनर्जी की बैठक में अनुपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वैसे पार्टी के कुछ सूत्रों का कहना है कि अभिषेक बनर्जी अपने विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर में सेवाश्रय कल्याण शिविरों के अंतिम चरण की तैयारी में व्यस्त होने के कारण बैठक में हिस्सा नहीं ले सके।

वहीं दूसरी ओर कुछ जानकारों का कहना है कि गुरुवार को अभिषेक बनर्जी कोलकाता में ही थे मगर इसके बावजूद उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। गुरुवार की बैठक के दौरान टीएमसी नेताओं को विभिन्न जिलों में वोटर लिस्ट की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी को दक्षिण कोलकाता का जिम्मा सौंपा गया है तो अभिषेक बनर्जी को दक्षिण 24 परगना की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

बुध ग्रह को निहारने का मौका जल्द पृथ्वी से होगी इतनी दूरी

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रिपोर्ट -नितेश श्रीवास्तव

सूर्य के सबसे करीब रहने वाला सौर परिवार का छुटकू सदस्य बुध ग्रह आठ मार्च को धरती के काफी करीब आ आएगा। इतना कि इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकेगा।‌ सूर्य से बुध ग्रह के दूरे जाने की इस प्रक्रिया को ग्रेटेस्ट एलाॅग्गेशन कहते हैं। बीएचयू के भौतिक विभाग स्थित आईयूका अध्ययन केंद्र के वैज्ञानिकों ने इस खगोलीय घटना के अध्ययन के लिए तैयारी कर ली है। युवा खगोल वैज्ञानिक वेदांत पांडेय ने बताया कि इस साल 8 मार्च को बुध ग्रह को सबसे साफ देख पाने का मौका होगा। इस समय बुध ग्रह पृथ्वी से लगभग 84 मिलियन मील (135 मिलियन किमी) की दूरी पर होगा।

पश्चिमी दिशा में आएगा नजर

आठ मार्च शनिवार को बुध अपनी कक्षा में सूर्य से सबसे दूरी पर होगा। इसकी वजह से पृथ्वी से इसकी दूरी कम हो जाएगी। ऐसे में यह सूर्यास्त के तुरंत बाद क्षितिज पर नजर आएगा। आसमान में हल्की रोशनी के बीच बुध पश्चिमी क्षितिज पर 15 डिग्री की ऊंचाई पर दिखाई देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्यास्त के करीब 30 से 45 मिनट के बाद यह ग्रह देखने के लिए सर्वोत्तम समय है। यह मौका खास इसलिए भी क्योंकि सूर्य के काफी करीब होने के कारण बुध आमतौर पर नजर नहीं आता।

परिसीमन के लिए नए फॉर्मूले की जरूरत, जानें कांग्रेस नेता मनीष तिवारी का सुझाव

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देश में इस वक्त परिसीमन का मामला गरमाया हुआ है। दक्षिण भारत के राज्य परिसीमन को लेकर खासी नाराजगी जता रहे हैं। इसकी वजह यह है कि नए परिसीमन के तहत दक्षिण भारत की लोकसभा सीटों में कमी हो सकती है। यही, वजह है कि राजनीतिक दलों और नेताओं में नाराजगी बढ़ गई है। इस बीच कांग्रेस नेता मनीष तिवारी परिसीमन के लिए नया फॉर्मूला तैयार करने का सुझाव दिया है।

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कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने गुरुवार को कहा कि अगर परिसीमन प्रक्रिया ‘एक वोट, एक मूल्य’ के सिद्धांत पर होती है तो सिर्फ मध्य भारत के राज्यों को ही इसका फायदा होगा, जबकि वे जनसंख्या कंट्रोल के मामले में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि परिसीमन के लिए नया फॉर्मूला तैयार करने की जरूरत है।

मनीष तिवारी ने इसको लेकर सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट डाला। उन्होंने कहा, 'अगर परिसीमन ‘एक वोट, एक मूल्य’ के मौजूदा सिद्धांत पर किया जाता है, तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों में लोकसभा सीट तुलनात्मक रूप से हो जाएंगी और केवल मध्य भारत के राज्यों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए परिसीमन के बाद पंजाब और हरियाणा दोनों की लोकसभा सीट की संख्या 18 होगी, जबकि वर्तमान में, पंजाब में 13 और हरियाणा में 10 सीट हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि परिसीमन के लिए नया फॉर्मूला तैयार करने की जरूरत है।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि हमारी सीमा पाकिस्तान और चीन दोनों से लगती है. ऐसी परिस्थितियों में, इस परिसीमन को करने के लिए एक नया तरीका खोजना होगा। इसलिए, भारतीय संघ बनाने वाले राज्यों की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं नए सदन की संरचना में उचित रूप से परिलक्षित हों। नहीं तो सभी की संख्याएं स्थिर होनी चाहिए। यदि मौजूदा सिद्धांतों का पालन किया जाता है, तो केवल उन्हीं राज्यों को पुरस्कृत किया जाएगा जिन्होंने बर्थ कंट्रोल या जनसंख्या कंट्रोल का अभ्यास नहीं किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, देश में साल 2026 में नया परिसीमन होना है। कहा जा रहा है कि इस परिसीमन से पूरे देश में लोकसभा सीटों का बढ़ना तय है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चिंता जताई है कि परिसीमन से दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा।

पाकिस्तानी मुस्लिम हूं, मुझे वहां...', भारत प्रत्यार्पण से पहले तहव्वुर राणा का एक और दावं

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मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण किए जाने से बचने के लिए फिर नया दांव चला है। राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उनके प्रत्यर्पण पर इमरजेंसी स्टे लगाया जाए। राणा ने भारत में टॉर्चर मिलने का दावा करते हुए कहा कि अगर उसे प्रत्यर्पित किया गया, तो वह जिंदा नहीं रहेगा। बता दें कि इस महीने व्हाइट हाउस में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात के वक्त डोनाल्ड ट्रंप ने तहव्वुर राणा को भारत भेजने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि उनका प्रशासन मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत भेजने के लिए तैयार है।

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समाचार एजेंसी एएनआई ने तहव्वुर राणा की याचिका के हवाले से बताया है कि उसकी याचिका में कहा गया है कि यदि प्रत्यर्पण के आदेश को रोका नहीं गया तो कोई समीक्षा नहीं होगी और अमेरिकी अदालतें अपना अधिकार क्षेत्र खो देंगी और याचिकाकर्ता (राणा) जल्द ही मर जाएगा। उसने अपनी याचिका में कहा है कि उसके मुस्लिम धर्म, पाकिस्तानी मूल, आरोपों और पाकिस्तान से उसके संबंध की वजह से उसे भारत में यातनाएं दी जाएगी, जिससे उनकी जल्दी ही मौत हो जाएगी।

आतंकवादी तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में अपने बिगड़ते स्वास्थ्य का भी हवाला दिया है। उसने दावा किया है कि उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हैं। उसके पेट में बीमारी है, जिसके फटने का खतरा है। इसके साथ ही उसने बताया है कि उसे पार्किंसंस नाम की बीमारी है, जिसकी वजह से वो चीजों को भूल जाता है। इसके अलावा उसने कहा है कि उसे कुछ ऐसे संकेत मिले हैं, कि उसके मूत्राशय में कैंसर होने का खतरा है। तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में आगे कहा है कि "उसे उस देश में नहीं भेजा जा सकता है, जहां उसे उसकी राष्ट्रीयता, उसके धर्म, उसकी संस्कृति और उसके मूल देश (पाकिस्तान) से दुश्मनी की वजह से उसे निशाना बनाया जाएगा।

राणा अभी कनाडा का नागरिक है, लेकिन उसकी जड़ें पाकिस्तान से जुड़ी हैं। तहव्वुर राणा का जन्म पाकिस्तान में हुआ था। उसने आर्मी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई की और पाकिस्तान आर्मी में 10 साल तक बतौर डॉक्टर काम काम किया। लेकिन बाद में उसने नौकरी छोड़ दी। भारत सरकार उसे 2008 के मुंबई हमले में शामिल होने के कारण प्रत्यर्पित करना चाहती है। राणा पर आरोप है कि उसने डेविड हेडली (जिसका असली नाम दाऊद गिलानी था) की मदद की थी। राणा हेडली के लश्कर-ए-तैयबा से संबंधों को जानता था और उसने उसे फर्जी दस्तावेज मुहैया कराए थे। इनकी मदद से हेडली भारत आया और मुंबई हमले के लिए संभावित ठिकानों की रेकी की। यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने किया था। इस हमले में 174 लोगों की मौत हुई थी।

पूरी तरह से अस्वीकार्य': यू.के. ने जयशंकर की लंदन यात्रा के दौरान सुरक्षा उल्लंघन की निंदा की

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यूनाइटेड किंगडम ने गुरुवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सुरक्षा उल्लंघन की निंदा की, जब खालिस्तान समर्थक एक प्रदर्शनकारी ने बुधवार शाम लंदन के चैथम हाउस में एक अवरोधक को तोड़कर मंत्री के काफिले के पास पहुंच गया।

विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (एफसीडीओ) के प्रवक्ता ने कहा कि सार्वजनिक कार्यक्रमों को "डराने, धमकाने या बाधित करने" के ऐसे प्रयास "पूरी तरह से अस्वीकार्य" हैं। पीटीआई के अनुसार, एफसीडीओ के प्रवक्ता ने कहा, "हम विदेश मंत्री की यूके यात्रा के दौरान कल (बुधवार) चैथम हाउस के बाहर हुई घटना की कड़ी निंदा करते हैं।" "हालांकि यू.के. शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का समर्थन करता है, लेकिन पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए तेजी से कार्रवाई की, और हम अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप अपने सभी राजनयिक आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं," प्रवक्ता ने कहा।

चैथम हाउस में सुरक्षा भंग

रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स के मुख्यालय चैथम हाउस में यह घटना जयशंकर की यू.के. और आयरलैंड की लगभग एक सप्ताह लंबी यात्रा के दूसरे दिन हुई। सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में चैथम हाउस के सामने सड़क के दूसरी तरफ खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों का एक छोटा समूह इकट्ठा हुआ और धातु की बाधाओं के पीछे पीले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहा था, जबकि जयशंकर इमारत के अंदर बोल रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने "खालिस्तान जिंदाबाद" जैसे नारे लगाए।

जब जयशंकर अपने कार्यक्रम के बाद इमारत से बाहर निकले और अपने वाहन में बैठने वाले थे, जो कि एक काफिले का हिस्सा था, तो एक लंबा आदमी भारतीय झंडा लेकर बाधाओं के पीछे से निकला, पुलिस की घेराबंदी को तोड़कर जयशंकर के काफिले की ओर भागा। वह पुलिस कर्मियों से भिड़ गया और भारतीय ध्वज को फाड़ने से पहले वाहन के सामने खड़ा हो गया। बाद में पुलिस उसे ले गई।

भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने लंदन में चैथम हाउस के बाहर सुरक्षा भंग की कड़ी निंदा की है और कहा है कि वह उम्मीद करता है कि यू.के. सरकार "अपने राजनयिक दायित्वों का पालन करेगी"। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह घटना मंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाने के बराबर है और उन्होंने खालिस्तान समर्थक तत्वों की “भड़काऊ गतिविधियों” की निंदा की। “हमने विदेश मंत्री की ब्रिटेन यात्रा के दौरान सुरक्षा में सेंध लगाने की फुटेज देखी है। हम अलगाववादियों और चरमपंथियों के इस छोटे समूह की भड़काऊ गतिविधियों की निंदा करते हैं,” जायसवाल ने कहा। “हम ऐसे तत्वों द्वारा लोकतांत्रिक स्वतंत्रता के दुरुपयोग की निंदा करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि ऐसे मामलों में मेजबान सरकार अपने राजनयिक दायित्वों का पूरी तरह से पालन करेगी।”