इस देश में 99 फीसदी मुसलमान, फिर क्यों जनता से बकरीद पर कुर्बानी ना करने की अपील

#muslimcountrymoroccourgespeopletonotbuysheepforeid

Image 2Image 3

उत्तर अफ्रीकी देश मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने आम जनता से ईद उल-अजहा यानी बकरीद के दौरान भेड़ों की कुर्बानी न देने की अपील की है। मोरक्को जहां मुसलमानों की आबादी करीब 99 फीसदी है, वहां ईद उल-अजहा के दौरान भेड़ों की कुर्बानी एक लंबी परंपरा है, लेकिन इस बार देश के राजा ने ही भेड़ों की कुर्बानी न देने की गुजारिश की है। दरअसल, मोरक्को भेड़ों की कमी से जूझ रहा है।

भेड़ों की कमी की वजह से मोरक्को के राजा मोहम्मद VI ने परंपरा से हटकर लोगों से ईद-उल-अजहा पर भेड़ नहीं खरीदने की अपील की है। मोरक्को के इस्लामी मामलों के मंत्री अहमद तौफीक ने कहा कि आर्थिक और जलवायु संबंधी चुनौतियों के कारण सालाना कुर्बानी और दावत देशवासियों की पहुंच से दूर हो गई है। सरकारी टेलीविजन ‘अल औला’ पर सुल्तान का पत्र पढ़ते हुए तौफीक ने कहा कि यह मोरक्को का कर्तव्य है कि वह यह स्वीकार करे कि पशुधन की कमी के कारण कीमतें आसमान छू रही हैं। सुल्तान की ओर से जारी पत्र में कहा गया है, कठिन परिस्थिति में कुर्बानी से खास तौर पर उन लोगों की भावनाओं को ठेस लगेगी जिनकी आय सीमित है।

भेड़ों की संख्या में 38% कमी

बता दें कि मोरक्को में भेड़ों की संख्या पिछले दशक में 38% कम हो गई है। इस साल बारिश औसत से 53% कम रही, जिससे चरागाहों की स्थिति खराब हो गई। इससे मवेशियों के चारे की समस्या गहरी हो गई है। इस कारण भेड़ और मवेशियों की संख्या में कमी आई है।

कुर्बानी का त्यौहार है ईद अल अजहा

ईद उल-अजहा, इस साल जून के पहले हफ्ते में मनाई जाएगी, मुसलमानों द्वारा मनाया जाने वाला एक बड़ा “कुर्बानी का त्योहार” है। इस दिन मुसलमान जानवरों की कुर्बानी करते हैं। इस परंपरा में इतनी गहरी पैठ है कि कई परिवार भेड़ खरीदने के लिए कर्ज लेने तक को मजबूर हो जाते हैं।

भगवान भरोसे हिमाचल की सरकार, आर्थिक संकट से जूझ रही सरकार ने मंदिरों से मांगी मदद

#shimla_himachal_economic_crisis_sukhu_govt_seek_help_from_temples 

Image 2Image 3

हिमाचल प्रदेश आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है। वहीं अब कांग्रेस सरकार इस आर्थिक संकट से उबरने के लिए “भगवान की शरण” में हैं। हिमाचल प्रदेश में आर्थिक संकट के बीच सुक्खू सरकार के पास अपनी योजनाओं को चलाने के लिए पैसा नहीं है। इसी के चलते अब सरकार ने प्रदेश के बड़े मंदिरों से पैसा मांगा है। सरकार ने मंदिरों को मिलने वाले चढ़ावे से धन की मांग की है। सीएम ने राज्य सरकार के तहत आने वाले सभी मंदिरों और उनको संभाल रहे स्थानीय डीसी को पत्र लिखा है और चढ़ावे के पैसे में से दो सरकारी योजनाओं के लिए पैसे देने का आग्रह किया है।

29 जनवरी को हिमाचल प्रदेश सरकार के भाषा एवं संस्कृति विभाग ने मंदिर ट्रस्ट को एक पत्र लिखा था और मंदिर कमेटियों से जरूरतमंद बच्चों की मदद का आग्रह किया। सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दो योजनाओं के लिए मंदिरों से आर्थिक सहायता मांगी है। इन दो सरकारी योजनाओं में पहली योजना का नाम है मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना और दूसरी मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना।

सरकार की अपील पर डीसी ने मंदिर न्यास को आर्थिक मदद करने के लिए पत्र जारी किए हैं। पत्र में लिखा गया है कि मुख्यमंत्री सुखाश्रय और सुख शिक्षा योजना की मदद सरकार के अधीन आने वाले मंदिरों के ट्रस्ट भी करेंगे। भाषा एवं संस्कृति विभाग ने मंदिर कमेटियों से जरूरतमंद बच्चों की मदद का आग्रह किया है।

मुख्य आयुक्त मंदिर, सचिव भाषा एवं संस्कृति की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि प्रदेश के सभी मंदिर न्यासों में चढ़ावे से हो रही आय के अनुरूप मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना के लिए धन जुटाया जाए। इस पत्र के संदर्भ में उपायुक्तों ने मंदिर न्यास के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिवों को आदेश जारी किए हैं कि न्यास की बैठकें बुलाकर इस योजना के लिए धन का प्रावधान किया जाए।

हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की इस कमजोरी पर सवाल उठाया है।हिमाचल प्रदेश विधानसभा एलओपी ने कहा कि राज्य सरकार के नियंत्रण में लगभग 36 प्रमुख मंदिर हैं, और इन मंदिरों से सरकारी योजना को चलाने के लिए धन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है।एक तरफ, सुख सरकार सनातन धर्म का विरोध करती है, हिंदू विरोधी बयान देती रहती है और दूसरी तरफ, वह मंदिरों से पैसा लेकर सरकार की प्रमुख योजना चलाना चाहती है। सरकार मंदिरों से पैसा मांग रही है, और अधिकारियों पर पैसा सरकार को भेजने का दबाव डाला जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी सरकार के इस फैसले का विरोध करती है।

नीलम शिंदे के परिवार को मिला अमेरिका का वीजा, सड़क हादसे के बाद से कोमा में है भारतीय छात्रा

#father_of_indian_student_in_coma_gets_us_visa

अमेरिका में दुर्घटना के बाद कोमा में गई महाराष्ट्र की छात्रा के परिवार को वीजा मिल गया है। इससे पहले भारतीय छात्रा के परिवार ने केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। उनके पिता ने विदेश मंत्रालय से इमरजेंसी वीजा की अपील की थी। नीलम शिंदे कैलिफोर्निया में सड़क दुर्घटना के बाद जीवन के लिए संघर्ष कर रही है। नीलम महाराष्ट्र के सातारा जिले की रहने वाली हैं। 4 साल से अमेरिका में रह रही हैं।

Image 2Image 3

नीलम शिंदे को 14 फरवरी को कैलिफोर्निया में कार ने टक्कर मार दी थी।उनके हाथ-पैर में फ्रैक्चर हैं। सिर में गंभीर चोट है।नीलम तानाजी शिंदे वर्तमान में कैलिफोर्निया के अस्पताल में कोमा की हालत में भर्ती हैं।नीलम के मस्तिक का ऑपरेशन होना है। इसके लिए परिवार का होना जरूरी है। ऐसे में महाराष्ट्र में रहने वाले उसके पिता अमेरिका जाने के लिए अर्जेंट वीजा की मांग की थी और केंद्र सरकार से मदद की मांगी थी।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले ने बुधवार को इस मामले को उठाया था। उन्होंने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा था, छात्रा नीलम शिंदे अमेरिका में दुर्घटना में घायल हो गई हैं और उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुले ने कहा, उनके पिता तानाजी शिंदे, सतारा, महाराष्ट्र से हैं, चिकित्सकीय आपातकाल स्थिति के कारण उन्हें अपनी बेटी से मिलने की तत्काल आवश्यकता है। तानाजी शिंदे ने अमेरिका जाने के लिए तत्काल वीजा के वास्ते आवेदन किया है और उन्हें सहायता की आवश्यकता है।

नीलम के परिवार के अनुसार, 14 फरवरी को वह शाम की सैर पर निकली थी, जब हादसे का शिकार हो गई। परिवार ने बताया कि यह हिट-एंड-रन मामला था। एक कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी, जिससे उनके दोनों हाथ, पैर, सिर और छाती में गंभीर चोटें आईं हैं। दुर्घटना के बाद भारतीय छात्रा को कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में सी डेविस मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

नीलम शिंदे उच्च शिक्षा हासिल करने अमेरिका गई थी। वे वहां कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष की छात्रा थीं। नीलम शिंदे पिछले चार साल से अमेरिका में रह रही हैं। वे मास्टर ऑफ साइंस के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं। एक साल पहले ही ब्रेन ट्यूमर से नीलम की मां का निधन हो चुका है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन भगदड़ मामलाः सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, मांगा 200 मौतों के दावे का सबूत

#scdismissespleaonnewdelhirailwaystationstampede

Image 2Image 3

15 फरवरी को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ हुई थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आज सुनवाई की और इसे खारिज कर दिया। साथ ही कोर्ट ने 200 मौतों के दावे का सबूत भी मांगा। दरअसल, आनंद लीगल एड फोरम ट्रस्ट की तरफ से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि मौतों का वास्तविक आंकड़ा रेलवे प्रशासन छिपा रहा है। जनहित याचिका में भगदड़ में करीब 200 लोगों की मौत का आरोप लगाया गया। याचिका में ये भी दावा किया गया कि रेलवे प्रशासन ने सिर्फ 18 मौतों की बात कही, जो गलत है।

महाकुंभ में संगम स्नान के लिए प्रयागराज जाने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के दौरान नई दिल्ली स्टेशन पर भगदड़ मच गई थी। जिसमे कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी। जिसके बाद ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दावा किया था कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भगदड़ के दौरान करीब 200 मौतें हुई थीं।याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने रेलवे अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की। साथ ही रेलवे स्टेशन और अस्पतालों के सभी सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने की मांग की।

15 फरवरी की घटना

दरअसल, 15 फरवरी की रात करीब साढ़े नौ बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी। मरने वालों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे। स्टेशन पर महाकुंभ जाने वाले लोगों की भारी भीड़ थी साथ ही अन्य यात्री भी थे। दो ट्रेनों के लेट होने के चलते भीड़ नियंत्रण से बाहर हो गई और भगदड़ मच गई। यह पूरी घटना महज 10 मिनट में घटी और प्रशासन की लापरवाही और यात्रियों में दुविधा के चलते इतना बड़ा हादसा हो गया।

ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम से पूछ लिया ऐसा सवाल, हक्का-बक्का हो गए स्टार्मर

#donald_trump_pm_starmer_joint_statement

Image 2Image 3

डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद वैश्विक नेताओं का वॉशिंगटन जाना शुरू हो गया है। इसी क्रम में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर अमेरिका दौरे पर पहुंचे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक की। बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को चैलेंज करते हुए पूछ लिया कि क्या वे अकेले रूस का मुकाबला कर पाएंगे? पत्रकारों के सामने ट्रंप का यह सवाल सुनकर स्टार्मर चौंक गए।

गुरुवार को ट्रंप से मुलाकात के बाद दोनों ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान ट्रंप से सवाल पूछा गया था कि यदि यूक्रेन में ब्रिटिश सेना तैनात होती है तो क्या अमेरिका उनकी मदद करेगा? ट्रं ने पहले ‘नहीं’ कहा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश अपना ख्याल बहुत अच्छे से रख सकते हैं। कुछ ही देर बाद उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटेन को मदद की जरूरत होगी तो अमेरिका उनका साथ देगा। फिर ट्रम्प, स्टार्मर की तरफ मुड़े और उनसे पूछ लिया- क्या आप अकेले रूस का मुकाबला कर पाएंगे? इस पर स्टार्मर कोई जवाब नहीं दे सके और मुस्कुराकर रह गए।

दरअसल, ओवल में व्हाइट हाउस में ब्रिटिश पीएम और अमेरिकी राष्ट्रपति प्रेस को संबोधित कर रहे थे और सवालों के जवाब दे रहे थे। इसी दौरान स्टारमर ने कहा, इतिहास को शांति स्थापित करने वाले के पक्ष में होना चाहिए, ना कि आक्रमणकारी के पक्ष में। यूके किसी समझौते का समर्थन करने के लिए जमीन पर सैनिक और एयरफोर्स विमान भेजने के लिए तैयार है। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे शांति बनी रहेगी। इसी दौरान ट्रंप ने सवाल किया, ‘…क्या आप अकेले रूस से मुकाबला कर सकते हैं? सवाल सुनते ही स्टार्मर झेंप जाते हैं।

वहीं, बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन जंग रोकने के लिए शुरू हुई बातचीत अब बहुत आगे बढ़ चुकी है। वहीं, स्टार्मर ने कहा कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि जंग पूरी तरह स्थायी हो और किसी एक पक्ष को इसका फायदा न हो।

स्टार्मर ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, शांति वैसी नहीं हो सकती जो हमलावर को फायदा पहुंचाती हो या फिर ईरान जैसी शासन व्यवस्था को बढ़ावा देती हो। इतिहास को शांति निर्माता के पक्ष में होना चाहिए, आक्रमणकारी के पक्ष में नहीं।

रूस और यूक्रेन का हिंसक संघर्ष खत्म करने के मुद्दे पर स्टार्मर ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ आज एक योजना पर चर्चा हुई। इससे यूक्रेन को मदद मिलेगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में कार्रवाई के लिए वापस आने से रोकने के लिए यूक्रेन योजना बनाएगा। ब्रिटेन और अमेरिका पूरी ताकत के साथ मदद करेंगे।

अब दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों की खुली पोले,CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

#cagreportonhealthservicesmohallaclinicaapgovt

दिल्ली विधानसभा सत्र का आज चौथा दिन है। दिल्ली विधानसभा का आज का दिन भी अहम है। आज यानी शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की कैग रिपोर्ट पेश होगी। यह रिपोर्ट एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की परेशानी बढ़ा सकती है।दरअसल दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर कैग की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसे लेकर आज विधानसभा में एक बार फिर से हंगामे के आसार हैं।

Image 2Image 3

सूत्रों का कहना है कि कैग रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। कैग रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली के अस्पतालों में बिस्तरों की भारी कमी है। साथ ही कोविड के दौरान जितने पैसे मिले थे, उतने खर्च भी नहीं हुए। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई। इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही।

सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी

दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 4.24% है। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई, जहां बेड ऑक्यूपेंसी 101% से 189% तक रही, यानी एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा।

डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी

रिपोर्ट में अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की भारी कमी का भी जिक्र किया गया है। इतना ही नहीं, इसमें साफ-साफ कहा गया है कि मोहल्ला क्लीनिक आने वाले मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर एक मिनट से ज्यादा वक्त नहीं देते थे। इतना ही नहीं, इनमें से कई क्लीनिक में पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग डिवाइस जैसी बुनियादी चिकित्सा उपकरण भी नहीं थे। ऑडिट में यह भी सामने आया है कि जिन क्लीनिक का मूल्यांकन किया गया, उनमें से 18% क्लीनिक 15 दिनों से लेकर 23 महीनों तक बंद रहे। इसकी मुख्य वजह डॉक्टरों की अनुपलब्धता, इस्तीफे और डी-एम्पैनलमेंट रही।

बड़े पैमाने पर खाली पद भरे ही नहीं गए*

दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर खाली पद भरे ही नहीं गए, जिससे आधारभूत ढांचा खराब हुआ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 3268 पद DGHS में 1532 पद स्टेट हेल्थ मिशन में 1036 पद ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट में 75 पद खाली हैं। भर्तियां नहीं होने की वजह से दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में 503 पद, लोक नायक अस्पताल में 581 पद, RGSSH में 579 पद खाली रह गए। पद खाली होने से मरीजों के इलाज में देरी होने लगी सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और जलने वाली सर्जरी में लोकनायक जय प्रकाश जैसे अस्पताल में 12 महीने की वेटिंग है जबकि बच्चों की सर्जरी में साल भर की वेटिंग चाचा नेहरु बाल चिकित्सालय में है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली शराब नीति पर कैग रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। कैग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दिल्ली सरकार के राजस्व को 2002 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

ट्रंप की धमकियों के बाद बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच दिल्ली पहुंचीं यूरोपीय संघ की प्रमुख, भारत को बताया भरोसेमंद देश

#indiaandeuropeanunionleadershipmeetingursulavonderleyenarrivedindelhi

Image 2Image 3

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने के बाद जिस तेजी से दुनिया बदली है, यूरोप खुद को अलग-थलग पा रहा है। ऐसे समय में वैश्विक व्यापार और कूटनीति में अस्थिरता देखी जा रही है। ऐसे में यूरोप अब भारत की ओर उम्मीदों की निगाह से देख रहा है। इसी उम्मीद के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन गुरुवार को भारत पहुंचीं। भारत आने के बाद यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला ने एक्स पर लिखा कि संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में भरोसेमंद मित्रों की जरूरत होती है और यूरोप के लिए भारत एक ऐसा ही मित्र और रणनीतिक सहयोगी है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दो दिवसीय भारत दौरे पर गुरुवार को दिल्ली पहुंचीं। दिल्ली हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका स्वागत किया। दिल्ली पहुंचने के बाद लिएन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की।

नई दिल्ली पहुंचने के बाद उर्सुला लेयेन ने साफ किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच यूरोप को भारत में एक भरोसेमंद मित्र नजर आ रहा है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने लिखा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बात पर चर्चा करूंगी कि हमारी रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर कैसे ले जाया जाए।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर होगी बात

लिएन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ व्यापक बातचीत करेंगी। इस मुलाकात में दोनों नेता महत्वाकांक्षी भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए जारी बातचीत का जायजा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को होने वाली व्यापक वार्ता में लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को मजबूत करने और रक्षा, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों पक्ष रूस-यूक्रेन संघर्ष, भारत-प्रशांत की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। मोदी और ईयू प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की भी उम्मीद है।

ट्रंप ने ईयू को चेतावनी दी

बता दें कि ट्रंप ने हाल में यूरोपीय संघ से आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देते हुए कहा था कि ईयू की गठन ही अमेरिका को परेशान करने के लिए किया गया था। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन-रूस युद्ध में यूरोपीय देशों की मदद करने की अमेरिकी नीति को पूरी तरह से बदलते हुए अब रूस के साथ खड़े होते दिख रहे हैं।

यूरोपीय संघ भारत के साथ संबंधों को महत्व दे रहा

यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सला वोन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय आयोग के 22 देशों के आयुक्त भी भारत आ रहे हैं। यह पहला मौका है, जब 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के इतने सारे देशों के आयुक्त एक साथ किसी देश की यात्रा पर हैं। इससे यह पता चलता है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व दे रहा है।

दिल्ली के बाद पश्चिम बंगाल में ‘फर्जी वोटर’ बनेगा मुद्दा, ममता बनर्जी ने शुरू किया “खेला”

#mamatabanerjeeidentifyfakevoters

Image 2Image 3

दिल्ली में हाल ही में विधानसभा चुनाव खत्म हुए हैं। इस चुनाव में बीजेपी ने 27 साल के बाद वापसी करते हुए अरविंद केजरीवाल की पार्टी को करारी शिकस्त दी। हालांकि सरकार गठन के बाद बीजेपी पर बड़ा आरोप लगा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा ने दिल्ली और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव फर्जी वोटों के जरिए जीता। इसमें चुनाव आयोग ने मदद की। बता दें कि चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने वोटर लिस्ट में फर्जी नामों का मुद्दा जोर शोर से उठाया था। अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को बड़ा दावा किया। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में तृणमूल कांग्रेस के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में फर्जी वोटर कार्ड बनाने के लिए दो एजेंसियां भेजी गई हैं।

दो एजेंसियों का लिया नाम

दो संगठनों का सीधे तौर पर नाम लेते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा ने उन्हें मतदाता पहचान पत्र में धोखाधड़ी के लिए राज्य में भेजा गया। उन्होंने एक कागज हाथ में लिया और एक उदाहरण देकर समझाया कि क्या हो रहा है? तृणमूल सुप्रीमो ने कहा, जहां तक मुझे खबर मिली है। ‘एसोसिएशन ऑफ बिलियन माइंड्स’ और ‘कंपनी इंडिया 360 सब्सिडियरी’ नामक दो एजेंसियां हैं। कई लोगों ने उन्हें यहां भेजा है। ऑनलाइन हेरफेर किया गया। इसी एपिक कार्ड में बाहरी लोगों के नाम भी थे। उन्होंने कहा, ममता का दावा है कि जब बंगाल के लोग वोट देने जाएंगे तो कोई बाहर से आकर उनके लिए वोट देगा।

एक उदाहरण देते हुए ममता ने बताया कि मुर्शिदाबाद के रानीनगर के सैदुल इस्लाम और हरियाणा की सोनिया देवी नामक एक अन्य मतदाता के मतदाता पहचान पत्र का ईपीआईसी नंबर एक ही नाम है। इसी तरह से बंगाल के मोहम्मद अली हुसैन और हरियाणा के मंजीत के मतदाता पहचान पत्र का ईपीआईसी नंबर एक जैसा है। ममता का सवाल, “पश्चिम बंगाल वोट देगा या हरियाणा?” एक लंबी सूची दिखाते हुए ममता ने कहा, “सभी हरियाणा के मतदाता है। यह भाजपा का काम है। हरियाणा ही नहीं, गुजरात के मतदाताओं के नाम भी सूची में हैं।

बीजेपी के साथ चुनाव आयोग को भी लपेटा

ममता ने कहा- भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग के ऑफिस में बैठकर ऑनलाइन फर्जी मतदाता सूची बनाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हर जिले में फर्जी मतदाताओं को जोड़ा है। ज्यादातर वोटर गुजरात और हरियाणा से हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली में विपक्ष इन तथ्यों का पता नहीं लगा पाया।

उन्होंने कहा- मैं बंगाल के लोगों से अपील करती हूं कि वे वोटर लिस्ट की जांच करें। किसी भी दिन एनआरसी और सीएए के नाम पर सही वोटर्स के नाम हटाए जा सकते हैं। भाजपा ऐसा करके किसी तरह टीएमसी को हराना चाहती है। ममता ने वोटर लिस्ट की जांच के लिए पार्टी स्तर पर कमेटी भी बनाई है।

इस मुद्दे पर आक्रामक हो रही टीएमसी

बता दें कि कुछ दिनों पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कहने पर राज्य में फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं। साथ ही कहा कि महाराष्ट्र और दिल्ली में बीजेपी ने इसी तरह जीत हासिल की, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं चलेगा। अब टीएमसी के नेता इस मुद्दे पर आक्रामक हो रहे हैं। उनका का कहना है कि चुनाव आयोग के कुछ अधिकारी बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिए पश्चिम बंगाल के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों को नाम जोड़ रहे हैं।

कौन हैं प्रोफेसर शाइजा? गोडसे को महान बताने वाली NIT कालीकट की प्रोफेसर में मिला अहम पद, विवाद शुरू

#professor_dr_shaija_praised_nathuram_godse_given_important_post

महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रशंसा कर विवादों में आईं एनआईटी कालीकट की महिला प्रोफेसर शाइजा ए को अहम पद दिया गया है। उन्हें NIT-कालीकट में योजना और विकास विभाग का डीन नियुक्त किया गया है। उधर इस नियुक्ति के बाद विवाद छिड़ गया है। इस फैसले पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की है। दरअसल, प्रोफेसर शाइजा ए पर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर नाथूराम गोडसे की प्रशंसा का आरोप है। इसी मामले को लेकर फरवरी 2024 में शाइजा को गिरफ्तार भी किया गया था।हालांकि कुछ समय बाद उनको जमानत मिल गई।

Image 2Image 3

प्रोफेसर शाइजा ए को योजना एवं विकास विभाग का डीन बनाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता दिख रहा है। इस नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल राव ने भी इस पर आपत्ति जताया है और फैसले को वापस लिए जाने की मांग की है।

राहुल गांधी के बेहद करीबी नेताओं में गिने वाले वेणुगोपाल राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नियुक्ति पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बार-बार अपना असली रंग दिखाती है। यह फैसला एक तरह से गांधी-विरोधी विचारों का खुला-खुला समर्थन है, और यह गोडसे को बढ़ावा देने तथा हमारे सार्वजनिक विमर्श में उनके नफरत भरे एजेंडे को मुख्यधारा में लाने का उनका तरीका है।

नियुक्ति को रद्द करने की मांग करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारों की तारीफ करने वाले ऐसे लोगों को सार्वजनिक जीवन में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए, राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में जिम्मेदारी के पदों पर प्रमोट किया जाना तो दूर की बात है। इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।

बता दें कि 2024 में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर प्रोफेसर शाइजा ए ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए नाथूराम गोडसे की प्रशंसा की थी। उन्होंने एक वकील की ओर से किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा था कि, उन्हें महात्मा गांधी की हत्या के लिए गोडसे पर गर्व है, इस घटना की वजह से ही भारत बच पाया। उसमें लिखा था कि हिंदू महासभा कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे भारत में कई लोगों के नायक है। विवाद बढ़ता देख शैजा ने टिप्पणी हटा ली थी, लेकिन इसका स्क्रीनशॉट वायरल हो गया था।

इसी पोस्ट के खिलाफ कांग्रेस और वाम दलों की ओर से प्रोफेसर शाइजा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके ऊपर दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाने का मामला दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत दे दी गई।

अमेरिका में एक्सीडेंट के बाद कोमा में भारतीय छात्रा, परिवार को नहीं मिल रहा वीजा

#indian_student_from_maharashtra_battling_for_life_in_us_hospital

महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली 35 वर्षीय नीलम शिंदे अमेरिका में जिदंगी और मौत के बीच जूझ रही है। अमेरिका में 14 फरवरी को एक रोड एक्सीडेंट के बाद नीलम शिंदे कोमा में है। नीलम के मस्तिक का ऑपरेशन होना है। मगर नीलम के परिवार को अमेरिका का वीजा नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, अमेरिका में बिना रक्त संबंधियों की अनुमति के बगैर ऑपरेशन नहीं होता है। महाराष्ट्र में रहने वाले उसके पिता अमेरिका जाने के लिए अर्जेंट वीजा चाहते हैं और केंद्र सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं।

Image 2Image 3

नीलम तानाजी शिंदे वर्तमान में कैलिफोर्निया के अस्पताल में कोमा की हालत में भर्ती हैं। नीलम शिंदे के पिता तानाजी शिंदे ने कहा कि हमें 16 फरवरी को दुर्घटना के बारे में पता चला और तब से हम वीजा के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें अभी तक वीजा नहीं मिला है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने शिंदे को वीजा दिलाने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर से मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि यह बहुत चिंताजनक मामला है और हम सभी को एकजुट होकर इसे सुलझाने में मदद करनी चाहिए।

नीलम के परिवार के अनुसार, 14 फरवरी को वह शाम की सैर पर निकली थी, जब हादसे का शिकार हो गई। परिवार ने बताया कि यह हिट-एंड-रन मामला था। एक कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी, जिससे उनके दोनों हाथ, पैर, सिर और छाती में गंभीर चोटें आईं हैं। दुर्घटना के बाद भारतीय छात्रा को कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में सी डेविस मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

नीलम शिंदे उच्च शिक्षा हासिल करने अमेरिका गई थी। वे वहां कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष की छात्रा थीं। नीलम शिंदे पिछले चार साल से अमेरिका में रह रही हैं। वे मास्टर ऑफ साइंस के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं। एक साल पहले ही ब्रेन ट्यूमर से नीलम की मां का निधन हो चुका है।