ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम से पूछ लिया ऐसा सवाल, हक्का-बक्का हो गए स्टार्मर

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डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिका का राष्ट्रपति चुने जाने के बाद वैश्विक नेताओं का वॉशिंगटन जाना शुरू हो गया है। इसी क्रम में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर अमेरिका दौरे पर पहुंचे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक की। बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान ट्रंप ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर को चैलेंज करते हुए पूछ लिया कि क्या वे अकेले रूस का मुकाबला कर पाएंगे? पत्रकारों के सामने ट्रंप का यह सवाल सुनकर स्टार्मर चौंक गए।

गुरुवार को ट्रंप से मुलाकात के बाद दोनों ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान ट्रंप से सवाल पूछा गया था कि यदि यूक्रेन में ब्रिटिश सेना तैनात होती है तो क्या अमेरिका उनकी मदद करेगा? ट्रं ने पहले ‘नहीं’ कहा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश अपना ख्याल बहुत अच्छे से रख सकते हैं। कुछ ही देर बाद उन्होंने कहा कि यदि ब्रिटेन को मदद की जरूरत होगी तो अमेरिका उनका साथ देगा। फिर ट्रम्प, स्टार्मर की तरफ मुड़े और उनसे पूछ लिया- क्या आप अकेले रूस का मुकाबला कर पाएंगे? इस पर स्टार्मर कोई जवाब नहीं दे सके और मुस्कुराकर रह गए।

दरअसल, ओवल में व्हाइट हाउस में ब्रिटिश पीएम और अमेरिकी राष्ट्रपति प्रेस को संबोधित कर रहे थे और सवालों के जवाब दे रहे थे। इसी दौरान स्टारमर ने कहा, इतिहास को शांति स्थापित करने वाले के पक्ष में होना चाहिए, ना कि आक्रमणकारी के पक्ष में। यूके किसी समझौते का समर्थन करने के लिए जमीन पर सैनिक और एयरफोर्स विमान भेजने के लिए तैयार है। हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं क्योंकि यही एकमात्र तरीका है जिससे शांति बनी रहेगी। इसी दौरान ट्रंप ने सवाल किया, ‘…क्या आप अकेले रूस से मुकाबला कर सकते हैं? सवाल सुनते ही स्टार्मर झेंप जाते हैं।

वहीं, बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन जंग रोकने के लिए शुरू हुई बातचीत अब बहुत आगे बढ़ चुकी है। वहीं, स्टार्मर ने कहा कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि जंग पूरी तरह स्थायी हो और किसी एक पक्ष को इसका फायदा न हो।

स्टार्मर ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, शांति वैसी नहीं हो सकती जो हमलावर को फायदा पहुंचाती हो या फिर ईरान जैसी शासन व्यवस्था को बढ़ावा देती हो। इतिहास को शांति निर्माता के पक्ष में होना चाहिए, आक्रमणकारी के पक्ष में नहीं।

रूस और यूक्रेन का हिंसक संघर्ष खत्म करने के मुद्दे पर स्टार्मर ने कहा, अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ आज एक योजना पर चर्चा हुई। इससे यूक्रेन को मदद मिलेगी। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में कार्रवाई के लिए वापस आने से रोकने के लिए यूक्रेन योजना बनाएगा। ब्रिटेन और अमेरिका पूरी ताकत के साथ मदद करेंगे।

अब दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों की खुली पोले,CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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दिल्ली विधानसभा सत्र का आज चौथा दिन है। दिल्ली विधानसभा का आज का दिन भी अहम है। आज यानी शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की कैग रिपोर्ट पेश होगी। यह रिपोर्ट एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की परेशानी बढ़ा सकती है।दरअसल दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं पर कैग की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जिसे लेकर आज विधानसभा में एक बार फिर से हंगामे के आसार हैं।

सूत्रों का कहना है कि कैग रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। कैग रिपोर्ट की मानें तो दिल्ली के अस्पतालों में बिस्तरों की भारी कमी है। साथ ही कोविड के दौरान जितने पैसे मिले थे, उतने खर्च भी नहीं हुए। रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 से निपटने के लिए केंद्र सरकार से मिले 787.91 करोड़ रुपये में से सिर्फ 582.84 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, जबकि बाकी राशि बिना उपयोग के रह गई। इसके चलते कोरोना संकट के दौरान जरूरी सुविधाओं की भारी कमी रही।

सरकारी अस्पतालों में बेड की भारी कमी

दिल्ली सरकार ने 2016-17 से 2020-21 के बीच 32,000 नए बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 बेड ही जोड़े गए, जो कि कुल लक्ष्य का मात्र 4.24% है। राजधानी के कई अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई, जहां बेड ऑक्यूपेंसी 101% से 189% तक रही, यानी एक ही बेड पर दो-दो मरीजों को रखा गया या मरीजों को फर्श पर इलाज कराना पड़ा।

डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी

रिपोर्ट में अस्पतालों में मेडिकल स्टाफ की भारी कमी का भी जिक्र किया गया है। इतना ही नहीं, इसमें साफ-साफ कहा गया है कि मोहल्ला क्लीनिक आने वाले मरीजों को देखने के लिए डॉक्टर एक मिनट से ज्यादा वक्त नहीं देते थे। इतना ही नहीं, इनमें से कई क्लीनिक में पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोमीटर, एक्स-रे व्यूअर, थर्मामीटर और ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग डिवाइस जैसी बुनियादी चिकित्सा उपकरण भी नहीं थे। ऑडिट में यह भी सामने आया है कि जिन क्लीनिक का मूल्यांकन किया गया, उनमें से 18% क्लीनिक 15 दिनों से लेकर 23 महीनों तक बंद रहे। इसकी मुख्य वजह डॉक्टरों की अनुपलब्धता, इस्तीफे और डी-एम्पैनलमेंट रही।

बड़े पैमाने पर खाली पद भरे ही नहीं गए*

दिल्ली के स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर खाली पद भरे ही नहीं गए, जिससे आधारभूत ढांचा खराब हुआ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 3268 पद DGHS में 1532 पद स्टेट हेल्थ मिशन में 1036 पद ड्रग कंट्रोल डिपार्टमेंट में 75 पद खाली हैं। भर्तियां नहीं होने की वजह से दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में 503 पद, लोक नायक अस्पताल में 581 पद, RGSSH में 579 पद खाली रह गए। पद खाली होने से मरीजों के इलाज में देरी होने लगी सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और जलने वाली सर्जरी में लोकनायक जय प्रकाश जैसे अस्पताल में 12 महीने की वेटिंग है जबकि बच्चों की सर्जरी में साल भर की वेटिंग चाचा नेहरु बाल चिकित्सालय में है।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली शराब नीति पर कैग रिपोर्ट पेश की जा चुकी है। कैग रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दिल्ली सरकार के राजस्व को 2002 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।

ट्रंप की धमकियों के बाद बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच दिल्ली पहुंचीं यूरोपीय संघ की प्रमुख, भारत को बताया भरोसेमंद देश

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डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्‍ट्रपति बनने के बाद जिस तेजी से दुनिया बदली है, यूरोप खुद को अलग-थलग पा रहा है। ऐसे समय में वैश्विक व्यापार और कूटनीति में अस्थिरता देखी जा रही है। ऐसे में यूरोप अब भारत की ओर उम्मीदों की निगाह से देख रहा है। इसी उम्मीद के साथ यूरोपीय संघ (ईयू) की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन गुरुवार को भारत पहुंचीं। भारत आने के बाद यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला ने एक्स पर लिखा कि संघर्ष और कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में भरोसेमंद मित्रों की जरूरत होती है और यूरोप के लिए भारत एक ऐसा ही मित्र और रणनीतिक सहयोगी है।

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दो दिवसीय भारत दौरे पर गुरुवार को दिल्ली पहुंचीं। दिल्ली हवाई अड्डे पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने उनका स्वागत किया। दिल्ली पहुंचने के बाद लिएन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा की।

नई दिल्ली पहुंचने के बाद उर्सुला लेयेन ने साफ किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ धमकियों के बीच यूरोप को भारत में एक भरोसेमंद मित्र नजर आ रहा है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने लिखा कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इस बात पर चर्चा करूंगी कि हमारी रणनीतिक साझेदारी को अगले स्तर पर कैसे ले जाया जाए।

भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर होगी बात

लिएन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ व्यापक बातचीत करेंगी। इस मुलाकात में दोनों नेता महत्वाकांक्षी भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए जारी बातचीत का जायजा लेंगे। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार को होने वाली व्यापक वार्ता में लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को मजबूत करने और रक्षा, प्रौद्योगिकी और जलवायु परिवर्तन सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दोनों पक्ष रूस-यूक्रेन संघर्ष, भारत-प्रशांत की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं। मोदी और ईयू प्रतिनिधियों की वार्ता के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की भी उम्मीद है।

ट्रंप ने ईयू को चेतावनी दी

बता दें कि ट्रंप ने हाल में यूरोपीय संघ से आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी देते हुए कहा था कि ईयू की गठन ही अमेरिका को परेशान करने के लिए किया गया था। वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप यूक्रेन-रूस युद्ध में यूरोपीय देशों की मदद करने की अमेरिकी नीति को पूरी तरह से बदलते हुए अब रूस के साथ खड़े होते दिख रहे हैं।

यूरोपीय संघ भारत के साथ संबंधों को महत्व दे रहा

यूरोपीय आयोग की प्रेसीडेंट उर्सला वोन डेर लेयेन के साथ यूरोपीय आयोग के 22 देशों के आयुक्त भी भारत आ रहे हैं। यह पहला मौका है, जब 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के इतने सारे देशों के आयुक्त एक साथ किसी देश की यात्रा पर हैं। इससे यह पता चलता है कि यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने संबंधों को कितना महत्व दे रहा है।

दिल्ली के बाद पश्चिम बंगाल में ‘फर्जी वोटर’ बनेगा मुद्दा, ममता बनर्जी ने शुरू किया “खेला”

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दिल्ली में हाल ही में विधानसभा चुनाव खत्म हुए हैं। इस चुनाव में बीजेपी ने 27 साल के बाद वापसी करते हुए अरविंद केजरीवाल की पार्टी को करारी शिकस्त दी। हालांकि सरकार गठन के बाद बीजेपी पर बड़ा आरोप लगा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा ने दिल्ली और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव फर्जी वोटों के जरिए जीता। इसमें चुनाव आयोग ने मदद की। बता दें कि चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी ने वोटर लिस्ट में फर्जी नामों का मुद्दा जोर शोर से उठाया था। अब पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को बड़ा दावा किया। कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में तृणमूल कांग्रेस के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में फर्जी वोटर कार्ड बनाने के लिए दो एजेंसियां भेजी गई हैं।

दो एजेंसियों का लिया नाम

दो संगठनों का सीधे तौर पर नाम लेते हुए ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा ने उन्हें मतदाता पहचान पत्र में धोखाधड़ी के लिए राज्य में भेजा गया। उन्होंने एक कागज हाथ में लिया और एक उदाहरण देकर समझाया कि क्या हो रहा है? तृणमूल सुप्रीमो ने कहा, जहां तक मुझे खबर मिली है। ‘एसोसिएशन ऑफ बिलियन माइंड्स’ और ‘कंपनी इंडिया 360 सब्सिडियरी’ नामक दो एजेंसियां हैं। कई लोगों ने उन्हें यहां भेजा है। ऑनलाइन हेरफेर किया गया। इसी एपिक कार्ड में बाहरी लोगों के नाम भी थे। उन्होंने कहा, ममता का दावा है कि जब बंगाल के लोग वोट देने जाएंगे तो कोई बाहर से आकर उनके लिए वोट देगा।

एक उदाहरण देते हुए ममता ने बताया कि मुर्शिदाबाद के रानीनगर के सैदुल इस्लाम और हरियाणा की सोनिया देवी नामक एक अन्य मतदाता के मतदाता पहचान पत्र का ईपीआईसी नंबर एक ही नाम है। इसी तरह से बंगाल के मोहम्मद अली हुसैन और हरियाणा के मंजीत के मतदाता पहचान पत्र का ईपीआईसी नंबर एक जैसा है। ममता का सवाल, “पश्चिम बंगाल वोट देगा या हरियाणा?” एक लंबी सूची दिखाते हुए ममता ने कहा, “सभी हरियाणा के मतदाता है। यह भाजपा का काम है। हरियाणा ही नहीं, गुजरात के मतदाताओं के नाम भी सूची में हैं।

बीजेपी के साथ चुनाव आयोग को भी लपेटा

ममता ने कहा- भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग के ऑफिस में बैठकर ऑनलाइन फर्जी मतदाता सूची बनाई है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के हर जिले में फर्जी मतदाताओं को जोड़ा है। ज्यादातर वोटर गुजरात और हरियाणा से हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली में विपक्ष इन तथ्यों का पता नहीं लगा पाया।

उन्होंने कहा- मैं बंगाल के लोगों से अपील करती हूं कि वे वोटर लिस्ट की जांच करें। किसी भी दिन एनआरसी और सीएए के नाम पर सही वोटर्स के नाम हटाए जा सकते हैं। भाजपा ऐसा करके किसी तरह टीएमसी को हराना चाहती है। ममता ने वोटर लिस्ट की जांच के लिए पार्टी स्तर पर कमेटी भी बनाई है।

इस मुद्दे पर आक्रामक हो रही टीएमसी

बता दें कि कुछ दिनों पहले भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कहने पर राज्य में फर्जी तरीके से वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम जोड़े जा रहे हैं। साथ ही कहा कि महाराष्ट्र और दिल्ली में बीजेपी ने इसी तरह जीत हासिल की, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं चलेगा। अब टीएमसी के नेता इस मुद्दे पर आक्रामक हो रहे हैं। उनका का कहना है कि चुनाव आयोग के कुछ अधिकारी बीजेपी को लाभ पहुंचाने के लिए पश्चिम बंगाल के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों को नाम जोड़ रहे हैं।

कौन हैं प्रोफेसर शाइजा? गोडसे को महान बताने वाली NIT कालीकट की प्रोफेसर में मिला अहम पद, विवाद शुरू

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महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रशंसा कर विवादों में आईं एनआईटी कालीकट की महिला प्रोफेसर शाइजा ए को अहम पद दिया गया है। उन्हें NIT-कालीकट में योजना और विकास विभाग का डीन नियुक्त किया गया है। उधर इस नियुक्ति के बाद विवाद छिड़ गया है। इस फैसले पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की है। दरअसल, प्रोफेसर शाइजा ए पर महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर नाथूराम गोडसे की प्रशंसा का आरोप है। इसी मामले को लेकर फरवरी 2024 में शाइजा को गिरफ्तार भी किया गया था।हालांकि कुछ समय बाद उनको जमानत मिल गई।

प्रोफेसर शाइजा ए को योजना एवं विकास विभाग का डीन बनाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता दिख रहा है। इस नियुक्ति को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल राव ने भी इस पर आपत्ति जताया है और फैसले को वापस लिए जाने की मांग की है।

राहुल गांधी के बेहद करीबी नेताओं में गिने वाले वेणुगोपाल राव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नियुक्ति पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बार-बार अपना असली रंग दिखाती है। यह फैसला एक तरह से गांधी-विरोधी विचारों का खुला-खुला समर्थन है, और यह गोडसे को बढ़ावा देने तथा हमारे सार्वजनिक विमर्श में उनके नफरत भरे एजेंडे को मुख्यधारा में लाने का उनका तरीका है।

नियुक्ति को रद्द करने की मांग करते हुए वेणुगोपाल ने कहा कि महात्मा गांधी के हत्यारों की तारीफ करने वाले ऐसे लोगों को सार्वजनिक जीवन में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए, राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में जिम्मेदारी के पदों पर प्रमोट किया जाना तो दूर की बात है। इस फैसले को वापस लिया जाना चाहिए।

बता दें कि 2024 में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर प्रोफेसर शाइजा ए ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए नाथूराम गोडसे की प्रशंसा की थी। उन्होंने एक वकील की ओर से किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा था कि, उन्हें महात्मा गांधी की हत्या के लिए गोडसे पर गर्व है, इस घटना की वजह से ही भारत बच पाया। उसमें लिखा था कि हिंदू महासभा कार्यकर्ता नाथूराम गोडसे भारत में कई लोगों के नायक है। विवाद बढ़ता देख शैजा ने टिप्पणी हटा ली थी, लेकिन इसका स्क्रीनशॉट वायरल हो गया था।

इसी पोस्ट के खिलाफ कांग्रेस और वाम दलों की ओर से प्रोफेसर शाइजा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी। जिसके बाद उनको गिरफ्तार कर लिया गया था। उनके ऊपर दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाने का मामला दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें जमानत दे दी गई।

अमेरिका में एक्सीडेंट के बाद कोमा में भारतीय छात्रा, परिवार को नहीं मिल रहा वीजा

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महाराष्ट्र के सतारा जिले की रहने वाली 35 वर्षीय नीलम शिंदे अमेरिका में जिदंगी और मौत के बीच जूझ रही है। अमेरिका में 14 फरवरी को एक रोड एक्सीडेंट के बाद नीलम शिंदे कोमा में है। नीलम के मस्तिक का ऑपरेशन होना है। मगर नीलम के परिवार को अमेरिका का वीजा नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, अमेरिका में बिना रक्त संबंधियों की अनुमति के बगैर ऑपरेशन नहीं होता है। महाराष्ट्र में रहने वाले उसके पिता अमेरिका जाने के लिए अर्जेंट वीजा चाहते हैं और केंद्र सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं।

नीलम तानाजी शिंदे वर्तमान में कैलिफोर्निया के अस्पताल में कोमा की हालत में भर्ती हैं। नीलम शिंदे के पिता तानाजी शिंदे ने कहा कि हमें 16 फरवरी को दुर्घटना के बारे में पता चला और तब से हम वीजा के लिए प्रयास कर रहे हैं। लेकिन हमें अभी तक वीजा नहीं मिला है। एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने शिंदे को वीजा दिलाने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर से मदद मांगी है। उन्होंने कहा कि यह बहुत चिंताजनक मामला है और हम सभी को एकजुट होकर इसे सुलझाने में मदद करनी चाहिए।

नीलम के परिवार के अनुसार, 14 फरवरी को वह शाम की सैर पर निकली थी, जब हादसे का शिकार हो गई। परिवार ने बताया कि यह हिट-एंड-रन मामला था। एक कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मारी, जिससे उनके दोनों हाथ, पैर, सिर और छाती में गंभीर चोटें आईं हैं। दुर्घटना के बाद भारतीय छात्रा को कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो में सी डेविस मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

नीलम शिंदे उच्च शिक्षा हासिल करने अमेरिका गई थी। वे वहां कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी में चौथे वर्ष की छात्रा थीं। नीलम शिंदे पिछले चार साल से अमेरिका में रह रही हैं। वे मास्टर ऑफ साइंस के अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही थीं। एक साल पहले ही ब्रेन ट्यूमर से नीलम की मां का निधन हो चुका है।

बांग्लादेश में आंदोलनाकारी छात्र बनाएंगे नई पार्टी, अंतरिम सरकार में शामिल नाहिद का इस्तीफा दिया

#bangladesh_student_group_leader_nahid_islam_to_launch_new_political_party

बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। पिछले साल अगस्त में शेख हसीने के सत्ता गंवाने के बाद भी हालात बदले नहीं है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सलाहकार नाहिद इस्लाम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नाहिद इस्लाम यूनुस कैबिनेट में सूचना सलाहकार के पद पर तैनात थे। उन्होंने मंगलवार को मोहम्मद यूनुस को अपना इस्तीफा दिया। दरअसल हसीना को सत्ता से बेदखल करने वाले आंदोलनकारी छात्र नई पार्टी बनाने का ऐलान का है। छात्र संगठन शुक्रवार को ढाका में नई राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे।

संसद भवन के पास मानिक मिया एवेन्यू पर रैली करते हुए पार्टी की शुरुआत की जाएगी। इस नई राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व नाहिद इस्लाम करेंगे। नाहिद नई पार्टी बनाने के लिए मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार से इस्तीफा दे चुके हैं। नई पार्टी के ऐलान के साथ ही छात्रों ने मोहम्मद यूनुस से दूरी बनाते हुए कहा कि वह राजनीतिक प्रतिनिध नहीं हैं। वह भी दूसरे लोगों की तरह बीते साल के विरोध आंदोलन का प्रतिनिधित्व करते हैं।

जातियो नागरिक कमिटी की प्रवक्ता सामंता शरमीन ने कहा कि पिछले साल के जुलाई 2024 विद्रोह के बाद बांग्लादेश में नई आशाओं का जन्म हुआ है। छात्रों ने इस नई पार्टी का गठन इसलिए किया है क्योंकि उनका मानना है कि मौजूदा राजनीतिक दल (मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार) देश के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। शरमीन के अनुसार, नई पार्टी बांग्लादेश को एक आधुनिक देश बनाने के लिए काम करेगी और देश को दक्षिण एशिया में एक प्रमुख स्थान पर लाना चाहेगी। उनका उद्देश्य बांग्लादेश को दुनियाभर से जोड़ना और नए विचारों को शामिल करना है।

सामंता शरमीन ने कहा कि बांग्लादेश पिछले 53 वर्षों से सरकारी दमन का शिकार रहा है और सरकारी संस्थानों का दुरुपयोग किया गया है। इस नई पार्टी का लक्ष्य अधिकारों पर आधारित राजनीति की नींव रखना है। शरमीन ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के लोगों के मूल अधिकारों के आधार पर पार्टी की राजनीति चलेगी। साथ ही, देश के सभी देशों के साथ निष्पक्ष और समानता पर आधारित संबंध बनाए जाएंगे।

महाशिवरात्रि पर सद्गुरु के बुलावे पर ईशा योगा सेंटर पहुंचे डीके शिवकुमार, बढ़ती दिख रही नाराजगी

#shivkumar_for_attending_mahashivratri_event_of_sadhguru

कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। इस बीच कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश समिति के अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की एक बात से फिर पार्टी की नाराजगी सामने आई है। दरअसल, कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने पहले प्रयागराज महाकुंभ में स्नान किया और फिर यूपी की योगी सरकार की तारीफ की। इसके बाद बुधवार को महाशिवरात्रि के उत्सव पर सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा योगा सेंटर में गए। इस कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह भी पहुंचे हुए थे। ऑल इंडिया कांग्रेस समिति के सचिव पीवी मोहन ने इस बात को लेकर नाराजगी जाहिर की है।

पीवी मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने शिवकुमार के महाशिवरात्रि के मौक पर ईशा फाउंडेशन के समारोह में शामिल होने और इसके लिए सद्गुरु को धन्यवाद करने पर उनकी आलोचना की। अपने पोस्ट में पीवी मोहन ने डीके शिवकुमार को टैग करते हुए लिखा, वह एक सेक्यूलर पार्टी के अध्यक्ष होकर राहुल गांधी का मजाक उड़ाने वाले शख्स का कैसे धन्यवाद कर सकते हैं।

पीवी मोहन ने कहा कि वह आलोचना नहीं कर रहे बल्कि अपने विचार साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जग्गी वसुदेव और ईशा फाउंडेशन की विचारधारा भाजपा और आरएसएस से मिलती है। हम इस विचारधारा के बिल्कुल विपरीत हैं। राहुल गांधी ने भी कई बार कहा है कि जो आरएसएस की विचारधारा को फॉलो करता है वह पार्टी छोड़ सकता है आरएसएस उन्होंने कहा कि उन्हें डीके शिवकुमार के वहां जाने से कोई समस्या नहीं है, लेकिन उनके एक्शन में पार्टी की वैल्यू झलकनी चाहिए।

दरअसल डीके शिवकुमार ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में महाशिवरात्रि के मौके पर कोयंबटूर के ईशा योगा सेंटर में उन्हें आमंत्रित करने पर सद्गुरु का आभार जताया। उन्होंने इस दौरान वहां अपना अनुभव शेयर किया और इन्विटेशन लेटर का एक फोटो पोस्ट किया।

वहीं, शिवकुमार महाशिवरात्रि के उत्सव पर सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा योगा सेंटर में गए। इस कार्यक्रम में गृहमंत्री अमित शाह भी पहुंचे हुए थे। इसके बाद से अटकलें लगाई जा रही हैं कि डीके शिवकुमार भी अब बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, डीके शिवकुमार ने मीडिया में आई उन खबरों को खारिज कर दिया। डीके शिवकुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'ईशा फाउंडेशन आने के लिए मेरी पहले ही आलोचना हो चुकी है। मुझे सद्गुरु ने आमंत्रित किया था, इसलिए मैं यहां आया। मैं जन्म से हिंदू हूं, जो सभी धर्मों से प्यार करता है। इसका मतलब यह नहीं है कि मैं बीजेपी के करीब आ रहा हूं।

बता दें कि पहले ही कर्नाटक कांग्रेस के भीतर इस समय शिवकुमार और सिद्धारमैया गुटों में जबरदस्त खींचतान चल रही है। कर्नाटक कांग्रेस में जारी पावर स्ट्रगल के बीच कई मंत्री शिवकुमार को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। इनमें गणेश परमेश्वर, केएन राजन्ना और सतीश जारकीहोली जैसे मंत्री शामिल हैं, जो हाल ही में दिल्ली जाकर हाईकमान से मिलेइन मंत्रियों की मांग है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलकर कोई नया चेहरा लाया जाए, क्योंकि शिवकुमार की कार्यशैली से कई नेता नाराज़ हैं। ये सभी सीएम सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं और पार्टी हाईकमान पर दबाव बना रहे हैं।

भारत में कोई घर और जमीन नहीं, कभी सैलरी नहीं ली, क्यों पड़ी सैम पित्रोदा को ऐसा बोलने की जरूरत?

#sampitrodadismissesbjpleader_allegations

भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा पर 150 करोड़ की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का आप लगा है। सैम पित्रोदा पर कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने 150 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया है। इस पर पित्रोदा ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा- भारत में मेरे पास कोई जमीन, घर या शेयर नहीं है।

भाजपा नेता एनआर रमेश ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के अधिकारियों समेत पांच सीनियर सरकारी अधिकारियों की मदद से सैम पित्रोदा ने बेंगलुरु के येलहंका में 150 करोड़ रुपये की 12.35 एकड़ क सरकारी जमीन अवैध रूप से हासिल की है। उन्होंने लीज की अवधि खत्म होने के बाद भी जमीन वापस नहीं की। जमीन की वैल्यू 150 करोड़ रुपए है। बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) के पूर्व पार्षद रमेश ने ईडी और कर्नाटक लोकायुक्त से इस मामले में शिकायत की है।

भारतीय ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने भाजपा नेता एन आर रमेश के आरोप का जवाब दिया है। पित्रोदा ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर एक बयान में कहा, हाल ही में भारतीय मीडिया में टेलीविजन और प्रिंट दोनों पर आई खबरों के मद्देनजर, मैं साफ तौर पर कहना चाहता हूं कि मेरे पास भारत में कोई जमीन, घर या शेयर नहीं है।

कभी भी कोई रिश्वत नहीं दी या स्वीकारी-पित्रोदा

अमेरिका में रह रहे कांग्रेस नेता ने कहा, इसके अलावा भारत सरकार के साथ काम करने के दौरान- चाहे 1980 के दशक में प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ या 2004 से 2014 तक डॉ मनमोहन सिंह के साथ- मैंने कभी कोई सैलरी नहीं ली। पित्रोदा ने कहा, मैं साफ तौर पर यह बात रिकॉर्ड में रखना चाहता हूं कि मैंने अपने पूरे जीवन में - 83 साल में - भारत में या किसी अन्य देश में कभी भी कोई रिश्वत नहीं दी या स्वीकार नहीं की। यह पूर्ण सत्य है।

भाजपा नेता का आरोप

बीजेपी नेता रमेश ने अपनी शिकायत में कहा कि पित्रोदा ने 23 अक्टूबर 1993 को मुंबई महाराष्ट्र के को-ऑपरेटिव सोसाइटी के रजिस्ट्रार ऑफिस में फाउंडेशन फॉर रिवाइटलाइजेशन ऑफ लोकल हेल्थ ट्रेडिशन (एफआरएलएचटी) नाम से एक ऑर्गनाइजेशन रजिस्टर किया था। पित्रोदा ने कर्नाटक राज्य वन विभाग से औषधीय जड़ी-बूटियों के संरक्षण और रिसर्च के लिए एक रिजर्व वन क्षेत्र को लीज पर देने का अनुरोध किया।

पित्रोदा के अनुरोध पर विभाग ने 1996 में बेंगलुरु के येलहंका के पास जरकबांडे कवल में बी ब्लॉक में 12.35 एकड़ आरक्षित वन भूमि को पांच साल की लीज पर दे दिया। एफआरएलएचटी को दी गई शुरुआती पांच साल की लीज 2001 में खत्म हो गई थी, जिसके बाद कर्नाटक वन विभाग ने इसे अगले 10 सालों के लिए बढ़ा दिया।

पित्रोदा के मुंबई में एफआरएलएचटी को दी गई लीज 2 दिसंबर 2011 को खत्म हो गई थी और इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। जब लीज समाप्त हो गई, तो राज्य वन विभाग को इस 12.35 एकड़ की बहुमूल्य सरकारी जमीन को वापस लेना था, जिसकी अब कीमत 150 करोड़ रुपए से ज्यादा है। रमेश ने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारियों ने पिछले 14 सालों में इस जमीन को वापस लेने का कोई प्रयास नहीं किया।

क्या बुआ ममता बनर्जी से नाराज हैं भतीजे अभिषेक बनर्जी? बीजेपी ज्वाइन करने की अटकलों पर भी दिया जवाब

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तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की चर्चा है। इस बीच ऐसी अफवाहें थीं कि अभिषेक बनर्जी भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन करने वाले हैं। इस बीच अभिषेक ने बड़ा बयान दिया है। अभिषेक बनर्जी ने अपनी बुआ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मतभेद की अटकलों को महज अफवाह करार दिया है। उन्होंने ममता के प्रति अपनी वफादारी का दावा किया। उन्होंने कोलकाता में पार्टी सम्मेलन में कहा, मैं टीएमसी का वफादार सिपाही हूं और मेरी नेता ममता बनर्जी हैं।

भाजपा का दिमाग ठिकाने नहीं आया- अभिषेक

अभिषेक ने कहा कि बाजार में फैलाया जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी भाजपा में जा रहे हैं। कहा यह भी जा रहा है कि अभिषेक बनर्जी नई पार्टी ला रहे हैं। ये सब बेकार की बातें हैं। मेरा गला काट भी दिया जाए तो भी ममता बनर्जी ज़िंदाबाद की आवाज निकलेगी। भाजपा 18 से 12 पर आ गयी है पर दिमाग ठिकाने नहीं आया, अभी तक बंगाल के लोगों के पैसे नहीं दे रहे हैं।

अभिषेक का बीजेपी पर तंज

अभिषेक ने कहा कि बीजेपी के पास ईडी, सीबीआई, आईटी है, लेकिन बीजेपी के पास टीएमसी जैसा समर्थक नहीं है। हमने वोटर लिस्ट देखी है, हम लोगों को वोटर लिस्ट के बारे में चेतावनी दे रहे हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि हम 197 वोटों से जीतेंगे। मेरा मानना है कि हम 215 सीटों से जीतेंगे। लोगों के पास जाओ, पार्टी सुप्रीमो के आदेश का इंतजार मत करो। सोचो और मानो कि पार्टी तुम्हारी है। ममता चौथी बार सीएम बनेंगी।

अभी मैदान में उतरो, मैं मैदान में रहूंगा। हमें अपनी सीटें बढ़ानी हैं। साजिश मत करो, व्हाट्सएप की राजनीति का कोई फायदा नहीं है। हम विपक्ष को एक चुटकी भी जमीन नहीं देंगे। हम 215 से ज्यादा सीटों से जीतेंगे।