तेलंगाना के सुरंग में पांच दिनों से फंसी हैं आठ जिंदगियां, रैट माइनर्स को सौंपा गया रेस्क्यू का काम
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हैदराबाद से 132 किमी दूर नागरकुर्नूल में बन रही 42 किमी की दुनिया की सबसे लंबी पानी की टनल में 8 कर्मचारियों को फंसे हुए आज पांचवा दिन है। इन 8 जिंदगियों को बचाने के लिए सेना, नौसेना,एनडीआरफ, एसडीआरएफ, आईआईटी चेन्नई और एलएनटी कंपनी के एक्सपर्ट्स शामिल हैं। लेकिन अब तक फंसे हुए कर्मचारियों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है। इसके बाद अब यह काम 12 रैट माइनर्स (चूहों की तरह खदान खोदने वाले मजदूर) को सौंपा गया है। इन्होंने ही 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को सही-सलामत बाहर निकाला था।
6 रैट माइनर्स की एक टीम सोमवार दोपहर को पहुंच चुकी है। 6 लोगों की बाकी टीम कल (बुधवार) पहुंचेगी। अभी यह टीम अंदर जाकर सिर्फ हालात का जायजा लेगी। एनडीआरफ और एसडीआरएफ के साथ रैट माइनर्स टीम की मीटिंग के बाद रेस्क्यू शुरू होगा। नौसेना के जवान इस काम में रैट माइनर्स टीम की मदद करेंगे। ये आईआईटी चेन्नई के स्पेशल पुश कैमरे और रोबोट की मदद से खुदाई का सही रास्ता बताएंगे। पानी की वजह से रेस्क्यू में ज्यादा वक्त लग सकता है।
सुरंग से पानी और कीचड़ निकालने का काम चल रहा है, लेकिन जैसे-जैसे समय निकल रहा है श्रमिकों की कुशलता को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। सेना और एनडीआरएफ के सदस्य पहले से ही बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे नागरकुर्नूल के जिला कलेक्टर बी संतोष ने कहा कि आगे कोई भी कदम उठाने से पहले सुरंग की स्थिरता को ध्यान में रखा गया है। सुरंग से जल निकासी का काम भी चल रहा है। जीएसआई और एनजीआरआई की सलाह ले रहे हैं। स्थिति का आकलन करने के लिए एलएंडटी से जुड़े ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञों को भी बुलाया गया है। कीचड़ और मलबा भरने के कारण हम आखिर के 40-50 मीटर के अंदर नहीं जा पा रहे हैं, जहां श्रमिक फंसे हुए हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, तेलंगाना के डिप्टी सीएम भट्टी विक्रमारक ने कहा कि राज्य सरकार तब तक हार नहीं मानेगी, जब तक सुरंग के अंदर फंसे आठों लोग नहीं मिल जाते। शनिवार सुबह सुरंग का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे आठ मजदूर अंदर फंस गए थे। रेस्क्यू टीम 13.85 किलोमीटर लंबी सुरंग के 13.79 किलोमीटर तक का दायरा खंगाल चुके हैं। लेकिन आखिरी हिस्से में पानी और कीचड़ जमा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आ रही है। इसका मतलब है कि उन आठ जिंदगियों की सलामती के लिए महज 0.06 किलोमीटर का फासला है।
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