*चक्रवात बिपोर्जॉय को लेकर मौसम विभाग का अलर्ट, अगले छह घंटे में बेहद खतरनाक रूप लेगा तूफान, इन राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी

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चक्रवात तूफान बिपोर्जॉय अगले छह घंटे में एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने वाला है।भारत मौसम विज्ञान विभाग ने रविवार को कहा है कि अरब सारब में बना चक्रवाती तूफान 'बिपरजॉय' 5 किमी प्रति घंटे की गति के साथ उत्तर की ओर बढ़ गया और अगले 6 घंटों के दौरान और भी ज्यादा तीव्र हो सकता है। इस तूफान का असर कई तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है। इस दौरान यहां तूफान व तेज बारिश होने की आशंका है।

गुजरात-महाराष्ट्र में मचा सकता है बड़ी तबाही

आईएमडी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर ट्वीट किया, अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान बिपोर्जॉय फिलहाल मुंबई से 600 किलोमीटर, पोरबंदर से 530 किलोमीटर कराची से 830 किलोमीटर पर केंद्रित है। चक्रवात यहां से गंभीर रूप अख्तियार करेगा और फिर पाकिस्तान, सौराष्ट्र और कच्छ सहित 15 जून तक आसपास के क्षेत्रों में पहुंचेगा। आने वाले दिनों में राजस्थान के कई क्षेत्रों में बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि अरब सागर में पिछले छह घंटे में पांच किलोमीटर की गति से चक्रवात तूफान बिपोर्जॉय फिलहाल मुंबई, पोरबंदर के दक्षिण-दक्षिण पश्चिम, द्वारका से 580 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम, नलिया से 670 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में और कराची से 830 किमी दक्षिण में 10 जून से केंद्रित हुआ है।

भारी बारिश की संभावना

आईएमडी के अनुसार, बिपरजॉय उत्तर-पूर्वोत्तर की ओर बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण भारतीय क्षेत्र में अगले चार दिनों में बारिश होने की संभावना है। जहां केरल और तटीय कर्नाटक में सोमवार तक भारी बारिश होने की संभावना है, वहीं लक्षद्वीप में रविवार तक बारिश होगी। एक रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई, रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों सहित महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में अगले 24 घंटों में तेज हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है। 

पाकिस्तान तक दिखेगा असर

इस तूफान का असर पाकिस्तान तक देखा जाएगा। 15 जून तक यह खतरनाक बिपरजॉय पाकिस्तान और उससे सटे तट तक पहुंच जाएगा। पाकिस्तान स्थित एआरवाई न्यूज ने शनिवार को बताया कि महानगर के दक्षिण में लगभग 900 किलोमीटर दूर होने का अनुमान था। कराची पोर्ट ट्रस्ट ने वीएससीएस "बिपरजॉय" के कारण जहाजों और बंदरगाह सुविधाओं की सुरक्षा के लिए 'आपातकालीन दिशानिर्देश' जारी किए हैं। एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, केपीटी ने एक बयान में कहा कि शिपिंग गतिविधियां निलंबित रहेंगी।

एक बयान में, ट्रस्ट ने घोषणा की कि 25 समुद्री मील से ऊपर तेज हवाओं के मामले में शिपिंग गतिविधियां निलंबित रहेंगी। आगे कहा गया है कि अगर हवा की गति 35 समुद्री मील से ऊपर है, तो मालवाहक जहाजों की आवाजाही निलंबित रहेगी। कराची पोर्ट ट्रस्ट ने जहाजों से संपर्क करने के लिए दो आपातकालीन फ्रीक्वेंसी भी जारी की हैं। इसमें कहा गया, 'तूफान के प्रभाव को देखते हुए रात के समय जहाजों की आवाजाही निलंबित रहेगी।' ट्रस्ट ने अधिकारियों को हार्बर क्राफ्ट को चौकी में सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का भी निर्देश दिया।

*केंद्र के अध्यादेश के विरोध में आज दिल्ली के रामलीला मैदान में आप की महारैली, मोदी सरकार के खिलाफ हुंकार भरेंगे केजरीवाल*

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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल आज रामलीला मैदान में अपनी ताकत दिखाने वाले हैं।12 साल बाद रामलीला मैदान में एक बार फिर अरविंद केजरीवाल किसी राजनीतिक रैली को संबोधित करेंगे। रामलीला मैदान से ही राजनीति में एंट्री लेने वाले केजरीवाल आज केंद्र की बीजेपी सरकार के अध्यादेश खिलाफ रैली में हुंकार भरने वाले हैं।

1 लाख लोगों के के रैली में आने का दावा

दिल्ली सरकार में अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के विरोध में आम आदमी पार्टी की रविवार को रामलीला मैदान में महारैली होगी। इस महारैली के जरिये आप शक्ति प्रदर्शन भी करेगी। केंद्र सरकार के ट्रांसफर पोस्टिंग वाले अध्यादेश के खिलाफ होने वाली इस रैली में 1 लाख लोगों के आने का दावा किया जा रहा है।

कपिल सिब्बल भी रैली में होंगे शामिल

वहीं, पूर्व कांग्रेस नेता और समाजवादी पार्टी के सहयोग से राज्यसभा सांसद बने कपिल सिब्बल भी इस रैली में शामिल होने वाले हैं। इसे लेकर पार्टी ने ट्वीट कर उन्हें धन्यवाद किया है। इस महारैली को 'आप' के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पंजाब के सीएम भगवंत मान के अलावा दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री और कई नेता संबोधित करेंगे। 

दिल्ली पुलिस ने किए सुरक्षा के कड़े इंतजाम

आम आदमी पार्टी की रामलीला मैदान में होने वाली रैली के लिए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। दिल्ली पुलिस का कहना है कि 12 लेयर की सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा में दिल्ली पुलिस के अलावा पारा मिलिट्री की भी तैनाती की गई है। महारैली को देखते हुए यातायात पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने सलाह दी है कि रामलीला मैदान आने वाले मार्गों की बजाय वैकल्पिक मार्गों का प्रयोग करें। महाराजा रंजीत सिंह मार्ग, मीर दर्द चौक अजमेरी गेट जवाहरलाल नेहरू मार्ग भवभूति मार्ग, मिंटो रोड, दिल्ली गेट, कमला मार्केट से हमदर्द चौक और पहाड़गंज चौक पर महारैली में आने वाले लोगों की अधिक भीड़ हो सकती है।

अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा केंद्र

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को अपने आदेश के जरिए दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और विजिलेंस पर चुनी हुई सरकार का नियंत्रण दे दिया था, लेकिन केंद्र सरकार ने अध्यादेश लाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट दिया। इसके विरोध में आम आदमी पार्टी की ओर से यह महारैली की जा रही है। पार्टी का दावा है कि महारैली में भारी तादाद में दिल्ली की जनता शामिल होकर इसे ऐतिहासिक बनाएगी।

केजरीवाल के मिशन 2024 का आगाज?

दिल्ली में आठ वर्ष से सत्तासीन आप की यह पहली महारैली है। इसे सफल बनाने के लिए पार्टी ने पूरी ताकत झोंक रखी है।रैली की वजह तो ट्रांसफर पोस्टिंग वाला अध्यादेश बताया गया है लेकिन एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ये रैली केजरीवाल के मिशन 2024 का आगाज है।

चक्रवात का असरःकेरल में दस्तक देकर ठहर गया मानसून, पूर्वी उत्तर के कुछ हिस्सों अगले चार दिनों तक चलेगी लू, जाने कब मिलेगी भीषण गर्मी से राहत


अरब सागर में सक्रिय चक्रवात अगर नहीं डालता,तो अब तक बिहार - झारखंड एवं बंगाल समेत पूर्वोत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश हो रही होती। मानसून में विलंब का ही असर है कि इन राज्यों में अभी लू चल रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिनों तक ऐसी ही स्थिति बनी रहेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों को भी चपेट में ले सकता है। 13 जून के बाद से लू की स्थिति कमजोर होने लगी। 

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भारतीय मौसम विभाग ने लू को लेकर बिहार - झारखंड ओडिशा एवं सिक्किम के लोगों को सतर्क किया है। उधर केरल में दस्तक देकर मानसून ठहर - सा गया है। तमिलनाडु के कुछ हिस्से में प्रवेश करते हुए बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ेगा। 12 जून तक सिक्किम समेत उत्तर पूर्वी राज्यों के अधिकांश हिस्से तक मानसून बारिश होने लग जाएगी। इस बीच अरब सागर का चक्रवात बिपरजाॅय धीरे-धीरे प्रचंड होता जा रहा है। गोवा, कनार्टक, महाराष्ट्र एवं गुजरात को अलर्ट पर रखा गया है। 

आईएमडी का कहना कि रविवार तक इसकी हवाओं गति 150-165 किमी प्रति घंटे तक आगे बढ़ने की रफ्तार पांच से छह किमी प्रति घंटा रह सकती है। अभी यह गुजरात के करीब आता जा रहा है। 13-14 जून को चार सौ किमी दूर रह जाएगा। इसके असर से पांच दिनों के दौरान गुजरात के क‌ई स्थानों में बारिश हो सकती है।

रिपोर्ट -नितेश श्रीवास्तव

भारत ने ठुकराया अमेरिका का ऑफर, नाटो में शामिल होने से इनकार

#indiarejectsussproposaltojoin_nato

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भारत ने अमेरिका के ऑफर को ठुकरा दिया है।भारत ने अमेरिका के नाटो में शामिल होने की पेशकश को मना कर दिया है। भारत ने साफ कर दिया है, कि पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल होने का उसका कोई इरादा नहीं है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है, कि नाटो सैन्य गठबंधन "भारत के लिए उपयुक्त नहीं है।

इससे पहले अमेरिका ‘नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) प्लस’ में भारत को शामिल करने की सिफारिश कर चुका है। भारत ने नाटो में शामिल होने से उस वक्त इनकार किया है, जब अमेरिकी कांग्रेस की एक शक्तिशाली कमेटी ने भारत को नाटो प्लस में शामिल करने की मजबूत सिफारिश की थी। अमेरिकी कांग्रेस की कमेटी ने कहा था कि एशिया में नाटो प्लस में भारत को शामिल करने की मजबूत कोशिश की जानी चाहिए। नाटो प्लस, नाटो का ही एक एक्सटेंशन है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इजरायल और दक्षिण कोरिया हैं और ये एक सुरक्षा व्यवस्था है, जिसे नाटो से टेक्नोलॉजिकल, खुफिया और हथियारों की मदद मिलती है। 

नाटो प्लस में भारत को शामिल करने से हिंद प्रशात क्षेत्र में सीसीपी की आक्रामकता को रोकने और वैश्विक सुरक्षा मजबूत करने में अमेरिका तथा भारत की करीबी साझेदारी बढ़ेगी।अमेरिकी समिति ने कहा, 'नाटो प्लस में भारत को शामिल करने से हिंद प्रशात क्षेत्र में सीसीपी की आक्रामकता को रोकने और वैश्विक सुरक्षा मजबूत करने में अमेरिका तथा भारत की करीबी साझेदारी बढ़ेगी।

दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य संगठन है नाटो

नाटो दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन संगठन है। नाटो की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद 4 अप्रैल 1949 में की गई। विश्व युद्ध में दुनिया के बहुत सारे देशों को गहरा जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में सभी देश चिंतित थे कि ऐसी कोई घटना फिर कभी ना हो। इसी समस्या के हल के लिए युद्ध के समाप्त होने पर नाटो का निर्माण किया गया। जिसमें बहुत सारे देशों ने अपने सैन्य बल को साझा किया।नाटो उस समय और भी चर्चा में आया, जब रूस और उक्रेन के बीच युद्ध की बातें सामने आने लगीं। नाटो संगठन के अंतर्गत एक देश दूसरे देश में अपनी सेना भेजता है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ट्रेनिंग भी दी जाती है। मुख्य रूप से नाटो का उद्देश्य विश्व में शांति को कायम रखना है।

नाटो में शामिल देश

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 15 के तहत उत्तर अटलांटिक संधि प्रस्ताव की पेशकश की, इस संधि पर दुनिया के 12 अलग अलग देशों ने हस्ताक्षर किये। संधि में अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, बेल्जियम, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, फ्रांस, कनाडा और इटली जैसे कई देश शामिल थे। बाद में शीत युद्ध से कुछ समय पहले स्पेन, पश्चिम जर्मनी, टर्की और यूनान ने इसकी सदस्य्ता ली। शीत युद्ध खत्म होने के बाद हंगरी, पोलैंड और चेक गणराज्य देशों को भी नाटो में शामिल किया गया। इसके अलावा साल 2004 में 7 और देशों ने इसकी सदस्य्ता ली।

भारत ने ठुकराया अमेरिका का ऑफर, नाटो में शामिल होने से इनकार

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भारत ने अमेरिका के ऑफर को ठुकरा दिया है।भारत ने अमेरिका के नाटो में शामिल होने की पेशकश को मना कर दिया है। भारत ने साफ कर दिया है, कि पश्चिमी देशों के नेतृत्व वाले उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) में शामिल होने का उसका कोई इरादा नहीं है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है, कि नाटो सैन्य गठबंधन "भारत के लिए उपयुक्त नहीं है।

इससे पहले अमेरिका ‘नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन) प्लस’ में भारत को शामिल करने की सिफारिश कर चुका है। भारत ने नाटो में शामिल होने से उस वक्त इनकार किया है, जब अमेरिकी कांग्रेस की एक शक्तिशाली कमेटी ने भारत को नाटो प्लस में शामिल करने की मजबूत सिफारिश की थी। अमेरिकी कांग्रेस की कमेटी ने कहा था कि एशिया में नाटो प्लस में भारत को शामिल करने की मजबूत कोशिश की जानी चाहिए। नाटो प्लस, नाटो का ही एक एक्सटेंशन है, जिसमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान, इजरायल और दक्षिण कोरिया हैं और ये एक सुरक्षा व्यवस्था है, जिसे नाटो से टेक्नोलॉजिकल, खुफिया और हथियारों की मदद मिलती है। 

नाटो प्लस में भारत को शामिल करने से हिंद प्रशात क्षेत्र में सीसीपी की आक्रामकता को रोकने और वैश्विक सुरक्षा मजबूत करने में अमेरिका तथा भारत की करीबी साझेदारी बढ़ेगी।अमेरिकी समिति ने कहा, 'नाटो प्लस में भारत को शामिल करने से हिंद प्रशात क्षेत्र में सीसीपी की आक्रामकता को रोकने और वैश्विक सुरक्षा मजबूत करने में अमेरिका तथा भारत की करीबी साझेदारी बढ़ेगी।

दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य संगठन है नाटो

नाटो दुनिया का सबसे बड़ा सैन्य गठबंधन संगठन है। नाटो की शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद 4 अप्रैल 1949 में की गई। विश्व युद्ध में दुनिया के बहुत सारे देशों को गहरा जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा। ऐसे में सभी देश चिंतित थे कि ऐसी कोई घटना फिर कभी ना हो। इसी समस्या के हल के लिए युद्ध के समाप्त होने पर नाटो का निर्माण किया गया। जिसमें बहुत सारे देशों ने अपने सैन्य बल को साझा किया।नाटो उस समय और भी चर्चा में आया, जब रूस और उक्रेन के बीच युद्ध की बातें सामने आने लगीं। नाटो संगठन के अंतर्गत एक देश दूसरे देश में अपनी सेना भेजता है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय ट्रेनिंग भी दी जाती है। मुख्य रूप से नाटो का उद्देश्य विश्व में शांति को कायम रखना है।

नाटो में शामिल देश

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के अनुच्छेद 15 के तहत उत्तर अटलांटिक संधि प्रस्ताव की पेशकश की, इस संधि पर दुनिया के 12 अलग अलग देशों ने हस्ताक्षर किये। संधि में अमेरिका के अलावा ब्रिटेन, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, बेल्जियम, आइसलैंड, लक्जमबर्ग, फ्रांस, कनाडा और इटली जैसे कई देश शामिल थे। बाद में शीत युद्ध से कुछ समय पहले स्पेन, पश्चिम जर्मनी, टर्की और यूनान ने इसकी सदस्य्ता ली। शीत युद्ध खत्म होने के बाद हंगरी, पोलैंड और चेक गणराज्य देशों को भी नाटो में शामिल किया गया। इसके अलावा साल 2004 में 7 और देशों ने इसकी सदस्य्ता ली।

शरद पवार ने सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को दी बड़ी जिम्मेदारी, दोनों बनाए गए कार्यकारी अध्यक्ष, अजीत के हाथ खाली

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महाराष्ट्र में विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनाव से पहले एनसीपी में बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की बेटी व लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा पार्टी में कद्दावर नेता प्रफुल्ल पटेल का कद भी बढ़ा हैं, उन्हें भी कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसका ऐलान खुद शरद पवार की ओर से किया गया है।

क्या है पवार का प्लान?

एनसीपी की 25 वीं सालगिरह के मौके पर शरद पवार ने दो बड़े ऐलान किए।शरद पवार ने अपनी सांसद बेटी सुप्रिया सुले और प्रफुल्ल पटेल को एनसीपी का वर्किंग प्रेसिडेंट बनाने का ऐलान कर दिया।उन्हें महाराष्ट्र, पंजाब और हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है।यही नहीं, शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल के हाथ मध्यप्रदेश, गुजरात, गोवा, राजस्थान और झारखंड की कमान दी है।जबकि अजित के लिए ऐसा कोई एलान नहीं किया गया है।एनसीपी में शरद पवार के भतीजे अजित पवार को यह अहम पद न देना अपने आप में कई सियासी संकेत देता है।शरद पवार के ऐलान से साफ हो गया कि राज्य की कमान भी धीरे-धीरे पूरी तरह से सुप्रिया सुले को देने का उनका प्लान है।

अजीत पवार के लिए बड़ा झटका

शरद पवार की ओर से यह फैसला उनके ही भतीजे और एनसीपी के कद्दावर नेता अजीत पवार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, शरद पवार के बाद अजीत पवार को पार्टी का सबसे बड़ा नेता माना जाता था। एनसीपी अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में उनका नाम सबसे आगे था। हालांकि, अब राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने इस फैसले से सभी को हैरान कर दिया है। 

पार्टी हाईकमान की ओर से यह फैसला शरद पवार के इस्तीफे के कुछ दिन बाद किया गया है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले शरद पवार ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर चौंका दिया था। हालांकि, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और मनाने के बाद उन्होंने इस्तीफा वापस ले लिया था। हालांकि, अब उन्होंने अपने बेटी को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर सभी को चौंका दिया है।

महाराष्ट्र में टीपू सुल्तान के अवैध स्मारक पर चला बुलडोजर, हिंदू संगठनों के शिकायत के बाद कार्रवाई

#tipu_sultan_memorial_removed_in_dhule_city  

महाराष्ट्र में औरंगजेब और टीपू सुल्तान पर सियासी विवाद और तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। टीपू सुल्तान को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। धुले शहर में शुक्रवार को टीपू सुल्तान के नाम पर बन रहा एक अवैध चबूतरा तोड़ दिया गया है।स्थानीय हिंदू संगठनों की ओर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिकायत की थी कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के स्थानीय विधायक फारूक अनवर शाह ने धुले चौक में बीच सड़क पर टीपू सुल्तान का अवैध रूप से स्मारक बनवा दिया था। इस शिकायत के बाद स्मारक पर बुलडोजर चला दिया गया है।

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धुले के एसपी संजय बारकुंड के मुताबिक, टीपू सुल्तान का स्मारक मुख्य सड़क पर ही बना था, जबकि इसकी कोई मंजूरी नहीं थी। हमें खबर मिली थी कि यह अवैध स्मारक है। हमने इसे हटवाने के लिए बैठक की। इस घटना के सामने आने के बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी के विधायक फारुख शाह खुद विवाद वाले स्थल पर पहुंचे और टीपू सुल्तान का स्मारक हटवाया। 

भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इस स्मारक को हटाने की मांग करते हुए गृहमंत्री और राज्य के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा गया था। इसी के साथ एसपी और नगर निगम धुले के आयुक्त को भी पत्र लिखा था। शिकायत के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कार्रवाई के बाद शहर में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है। स्मारक के तोड़े जाने के बाद शहर में कोई बवाल ना मचे इसको देखते हुए कलेक्टर जलज शर्मा और पुलिस अधीक्षक संजय बरकुंड ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

दरअसल, सड़क के बीच में बनवाए गए इस अवैध स्मारक को लेकर कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध जताया था। उन्हीं की शिकायत के बाद प्रशासन ने इस पर दो दिन पहले अपनी कार्रवाई की। वैसे, राज्य में टीपू को लेकर यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। पिछले दो-तीन महीनों में टीपू और औरंगजेब को लेकर सूबे में काफी जगह तनाव की स्थिति देखने को मिली और इसी कड़ी में यह ताजा मामला था

उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से भारतीय सेना को मिली 331 युवा अफसरों टोली, कड़ा प्रशिक्षण लेकर देश सेवा में होंगे तैनात

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 देश के भावी सैन्य अफसर सरहद की निगाहबानी को तैयार हैं। भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में आज होने वाली पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय सेना को 331 युवा अफसरों की टोली मिल गई है। इसके अलावा सात मित्र देशों के 42 कैडेट भी आइएमए से कड़ा प्रशिक्षण लेकर अपनी-अपनी सेना का हिस्सा बने हैं। सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने बतौर निरीक्षण अधिकारी परेड की सलामी ली।

भारतीय सैन्य अकादमी के एतिहासिक चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर सुबह परेड हुई। 6 बजकर 47 मिनट एडवास कॉल के साथ ही छाती ताने देश के भावी कर्णधार असीम हिम्मत और हौसले के साथ कदम बढ़ाते परेड के लिए पहुंचे। परेड कमांडर मेहर बनर्जी ने ड्रिल स्क्वायर पर जगह ली।

कैडेट्स ने शानदार मार्चपास्ट से दर्शक दीर्घा में बैठे हर शख्स को मंत्रमुग्ध किया। इधर, युवा सैन्य अधिकारी अंतिम पग भर रहे थे, तो आसमान से हेलीकाप्टरों के जरिए उन पर पुष्प वर्षा हो रही थी। परेड के बाद आयोजित होने वाली पीपिंग व ओथ सेरेमनी के बाद पासिंग आउट बैच के 373 जेंटलमैन कैडेट देश-विदेश की सेना में बतौर अफसर शामिल हो गए। इनमें 331 युवा सैन्य अधिकारी भारतीय थलसेना को मिले।

भूटान के 19, तजाकिस्तान के 17, श्रीलंका के दो और मालदीव, सुडान, सेशेल्स व वियतमान का एक-एक कैडेट भी पासआउट हुए। कुल मिलाकर शनिवार को सैन्य अकादमी के नाम देश-विदेश की सेना को 64 हजार 862 युवा सैन्य अधिकारी देने का गौरव जुड़ गया इनमें मित्र देशों को 2885 सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। पासिंग आउट परेड के मद्देनजर अकादमी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई थी।

इन्हें मिला अवार्ड

स्वार्ड आफ आनर- मेहर बनर्जी

स्वर्ण पदक – अभिमन्यु सिंह

रजत पदक- मेहर बनर्जी

रजत पदक टीजी – सूर्यभान सिंह

कांस्य पदक – कमलप्रीत सिंह

चीफ आफ आर्मी स्टाफ बैनर-कैसिनो कंपनी

सर्वश्रेष्ठ विदेशी कैडेट- किंगा लहेंडूप भूटान

किस राज्य से कितने कैडेट

उत्तर प्रदेश- 63

बिहार- 33

हरियाणा -32

महाराष्ट्र-26

उत्तराखंड -25

पंजाब-23

हिमाचल प्रदेश-17

राजस्थान -19

मध्यप्रदेश-19

दिल्ली-12

कर्नाटक-11

झारखंड-08

तमिलनाडु-08

जम्मू-कश्मीर-06

छत्तीसगढ़-05

केरल-05

तेलंगाना-03

पश्चिम बंगाल-03

गुजरात-02

नेपाली मूल के भारतीय कैडेट -02 (त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, असम, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, ओडिशा व पांडिचेरी से एक-एक कैडेट हैं)

पासिंग आउट परेड से घोड़ा-बग्घी की विदाई

भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में अब घोड़ा-बग्घी नहीं दिखाई देगी। बता दें, अभी तक निरीक्षण अधिकारी चार घोड़ों वाली बग्घी (पटियाला कोच) में परेड मैदान में पहुंचते थे। पटियाला के पूर्व महाराज ने यह बग्घी 1969 में आइएमए को भेंट की थी।

पटियाला कोच (घोड़ा-बग्गी) के अलावा आइएमए में जयपुर के पूर्व महाराज की ओर से उपहार स्वरूप दी गई जयपुर कोच, विक्टोरिया कोच व कमान्डेंट्स फ्लैग कोच भी चलन में रही है।

दरअसल, भारतीय सेना ने औपनिवेशिक या पुरानी प्रथाओं जैसे बग्घी, पाइप बैैंड आदि को समाप्त कर दिया है। रक्षा मंत्रालय के आदेश के तहत इस बार आइएमए पासिंग आउट परेड से भी घोड़ा-बग्घी की विदाई हो गई है।

पीएम को लिखे खड़गे के पत्र का भाजपा सांसदों ने दिया जवाब, भड़के चिदंबरम ने कहा- असहिष्णुता का उदाहरण

# bjp_s_response_on_kharge_s_letter_to_modi_example_of_intolerance_chidambaram 

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ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे का जख्म अभी भरा नहीं है, ना ही इस हादसे के बाद से जारी सियासत कम हुई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी क्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कई सवाल उठाए थे। जिसका जवाब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पत्र का जवाब प्रधानमंत्री के बजाए चार बीजेपी सांसदों ने दिया। जिसको लेकर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने एक ट्वीट कर पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने पीएम मोदी पर लोकतांत्रिक और सहिष्णु नहीं होने का आरोप लगाया है।

पी चिदंबरम ने कहा, माननीय प्रधानमंत्री को कांग्रेस अध्यक्ष श्री खरगे के पत्र पर बीजेपी के चार सांसदों की प्रतिक्रिया किसी भी आलोचना के प्रति बीजेपीई असहिष्णुता का एक और उदाहरण है। उन्होंने कहा, मल्लिकार्जुन खरगे राज्यसभा में विपक्ष के नेता हैं और इस नेता उनको पीएम मोदी को पत्र लिखने का अधिकार है। उन्होंने कहा, हम एक लोकतंत्र में ऐसे सवालों के जवाब में माननीय प्रधानमंत्री से पत्र के उत्तर की अपेक्षा करते हैं।

चिदंबरम ने कहा, खड़गे राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी हैं। उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का अधिकार है। एक कार्यशील लोकतंत्र में लोग प्रधानमंत्री से पत्र के उत्तर की अपेक्षा करते हैं। लेकिन हमारा लोकतंत्र ऐसा है कि प्रधानमंत्री इसे जवाब देने के लायक नहीं समझेंगे। इसके बजाय, बीजेपी के चार सांसद खुद जवाब भेजने की जिम्मेदारी लेते हैं, जो तथ्यों पर सतही और तर्को पर खोखला होता है। दिसंबर 2022 में प्रस्तुत दो कैग रिपोर्ट खड़गे की तर्कपूर्ण आलोचना को पूरी तरह से सही साबित करती हैं।

पीएम मोदी की जगह बीजेपी सांसदों के मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखे जाने पर चिदंबरम ने हैरानी जताई। उन्होंने कहा, बीजेपी के चार सांसद पीएम को लिखे गये पत्र का खुद जवाब भेजने की जिम्मेदारी ले लेते हैं, जो तथ्यों के आधार पर सतही और खोखला है। अपनी बात को रखने के लिए चिदंबरम ने आगे कहा, दिसंबर 2022 में रेलवे सुरक्षा को लेकर जारी की गई कैग की रिपोर्ट मल्लिकार्जु खरगे के तर्कपूर्ण रवैये की आलोचना को पूरी तरह से सही साबित करती है।

बता दें कि तेजस्वी सूर्य सहित चार भाजपा सांसदों ने मोदी को खड़गे के पत्र पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से प्राप्त तथ्यों के आधार पर पीएम को पत्र लिखना आपके कद के नेता को शोभा नहीं देता है। खड़गे को लिखे चार पन्नों के पत्र में, भाजपा सांसदों ने कहा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपके हालिया पत्र के जवाब में हमें यह कहना है कि पत्र में सिर्फ बयानबाजी थी और उसमें तथ्यों की कमी थी।रोजगार को लेकर खड़गे के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में रेलवे ने 4.58 लाख नई नियुक्तियां की हैं और वर्तमान में लगभग 1.52 लाख उम्मीदवारों को नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।सांसदों ने कहा, इस प्रकार, हमारे 10 वर्षों में, हम 6.1 लाख से अधिक युवाओं को नियुक्त करेंगे, जो यूपीए के 10 वर्षों के दौरान नियुक्त किए गए 4.11 लाख उम्मीदवारों से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।

इन बीजेपी सांसदों ने लिखा था पत्र

दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा और तेजस्वी सूर्य सहित कर्नाटक के चार भाजपा सांसदों ने शुक्रवार को बालासोर ट्रेन दुर्घटना के सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को एक पत्र लिखा था। भाजपा सांसदों ने तर्क दिया कि खरगे का पत्र बयानबाजी ज्यादा और कम तथ्यों पर आधारित है। पत्र में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आपके द्वारा लिखे गए पत्र के जवाब में हमें यह कहना है कि आपके पत्र में राजनीतिक बयानबाजी ज्यादा है, आपने जो सवाल उठाए हैं उसमें तथ्यों की कमी है। एक पूर्व रेल मंत्री होने के नाते आपसे गहराई और समझ को दिखाने की आशा की जाती है, फिर भी हमारे साथ आपका हाल ही में किया गया पत्र-व्यवहार तथ्यपरक सुझाव नहीं देते हैं। इसलिए, हम आपके लिए वास्तविकता के साथ आपके अनुमानों के तथ्यात्मक जवाब दे रहे हैं। बता दें, पत्र लिखने वाले भाजपा सांसदों में तेजस्वी सूर्या, पीसी मोहन, एस मुनिस्वामी और सदानंद गौड़ा शामिल हैं।

*बिहार में विपक्ष का महाजुटान, नीतीश के “निमंत्रण” को इन्होंने किया “ना”*

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लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी दल एकजुट होने के प्रयास में लगे हैं। इसी क्रम में बिहार की राजधानी पटना में नीतीश कुमार की अगुआई में विपक्षी दलों का जमावड़ा लगने वाला है। इस बैठक में 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। पार्टियों की आगे की रणनीति को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 23 जून को पटना में बैठक बुलाई है। विपक्षी दलों की मीटिंग में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के चीफ शरद पवार सहित कई नेता शामिल होंगे। हालांकि, इस बैठक से बीआरएस, बीएसपी, बीजेडी, वाईएसआर कांग्रेस, शिअद, सुभासपा, बीजद, एआईएमआईएम, जेडीएस, एलजेपी, टीडीपी दूरी बनाएगी।

बीआरएस ने कहा- देश में तीसरा या चौथा मोर्चा काम नहीं करने वाला

विपक्षी एकता की कवायद में लगे नीतीश कुमार को केसीआर का समर्थन नहीं मिलेगा। केसीआर की पार्टी ने इससे दूरी बना ली है। बीआरएस की तरफ से बयान आया है- किसी एक व्यक्ति या किसी एक पार्टी को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्ष को एक करने की नीति से वह सहमत नहीं हैं। केसीआर की पार्टी बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने कहा कि केवल नरेंद्र मोदी को हटाने का एजेंडा नहीं होना चाहिए। हमारी पार्टी साकारात्मक राजनीति में भरोसा करती है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि देश में तीसरा या चौथा मोर्चा काम नहीं करने वाला है क्योंकि देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियां है।

नीतीश को नवीन पहले ही कर चुके हैं ना

इससे पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार को नवीन पटनायक ने भी ना कह दिया था। पटनायक ने विपक्षी एकता के मंच पर आने से इंकार करते हुए कहा था कि उनकी पार्टी 2024 में अकेले चुनाव लड़ेगी यह उनकी हमेशा से योजना रही है। नवीन पटनायक ने नीतीश कुमार से मुलाकात को निजी मुलाकात बताया था और किसी तरह की राजनीतिक बात से इंकार कर दिया था जबकि इस मुलाकात से कुछ दिन पहले तक नीतीश कुमार उन्हें बीजेपी के खिलाफ साथ लाने की बात कह रहे थे।

नीतीश ने इन दिग्गज नेताओं से की मुलाकात

बता दें कि हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों को 'एकजुट' करने के लिए दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और कर्नाटक समेत कई राज्यों का दौरा किया था। नीतीश ने पहली बार 12 अप्रैल को कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी, जिसके बाद राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात को विपक्षी एकता की दिशा में एक 'ऐतिहासिक कदम' बताया था। उन्होंने लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी और डी राजा से भी मुलाकात की थी। नीतीश ने अप्रैल में अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक से भी मुलाकात की थी। 31 अप्रैल को तेलंगाना के सीएम केसीआर से मुलाकात हुई थी। नीतीश ने मई में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और सेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे से संपर्क किया था। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला, आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी, ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता मौलाना बदरुद्दीन अजमल समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात हुई है।

मीटिंग 23 जून को क्यों हो रही है?

विपक्षी दलों की मीटिंग पहले पटना में 12 जून को होनी थी लेकिन कांग्रेस और द्रविड मुनेत्र कषगम (डीएमके) सहित कुछ दलों ने तारीख में बदलाव का अनुरोध किया था। कांग्रेस ने इसके पीछे कारण पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रेसिडेंट खरगे की अनुपलब्धता बताया था।न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि हम चाहते थे कि बैठक में पार्टियों के नेता शामिल हो ना कि प्रतिनिधि ताकि निर्णय निकल सके।