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दिल्ली विधानसभा में आप का विश्वास मत प्रस्ताव, केजरीवाल का दावा-बीजेपी लाना चाहती थी अविश्वास प्रस्ताव, डराने-धमकाने के बाद भी नहीं जुटी विधायकों की संख्या


दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए विश्वास प्रस्ताव रखा।इस दौरान केजरीवाल ने दावा किया कि विपक्षी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते थे लेकिन पर्याप्त विधायकों का समर्थन हासिल नहीं कर सके। 

सीएम केजरीवाल ने विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कहा, हमें पता चला कि विपक्षी सदस्य हमारे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहते हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदन के 20 प्रतिशत सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। दिल्ली विधानसभा में 70 सदस्य हैं यानी 14 सदस्यों के हस्ताक्षर की जरूरत है।मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दावा किया कि विपक्षी सदस्य 14 विधायकों का समर्थन हासिल नहीं कर पाए। उन्होंने कहा, उन्होंने, उन्हें धमकाया, प्रलोभन दिया, लेकिन कुछ काम नहीं आया। फिर उन्होंने यह विचार छोड़ दिया। केजरीवाल ने कहा, इसके जवाब में, मैं विश्वास प्रस्ताव पेश कर रहा हूं।

बीजेपी का आरोप है कि सरकार के पास संख्या बल नहीं-केजरीवाल

सदन को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि अगर वह विश्वास प्रस्ताव खो देते हैं तो उन्हें सरकार में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। इसी के साथ उन्होंने बीजेपी के विधायकों को भी सदन में आने की अपील की। कहा कि वो भी आएं और अपनी बात रखें। केजरीवाल ने कहा कि ये सदन मंत्री परिषद में विश्वास व्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का आरोप है कि सरकार के पास संख्या बल नहीं है।

ऑपरेशन लोटस फिर से फेल- सौरभ भारद्वाज

वहीं दिल्ली सरकार में मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा, बीजेपी ने अविश्वास प्रस्ताव लाने पर प्रस्ताव रखा, मीडिया बुला कर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। नियम अनुसार क्या बीजेपी के पास विधानसभा का 1/5 यानी 14 MLA थे? बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व बताए- विधायक खरीद रहे थे क्या? आप विधायकों को डरा रहे थे? ऑपरेशन लोटस फिर से फेल।

आप का आरोप-विधायकों को सीबीआई व ईडी का डर दिखाया जा रहा

आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लाने वाली थी, मगर आज अविश्वास प्रस्ताव लाने से भाजपा पीछे हट गई है. बजट सत्र की शुरुआत में ही दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामबीर बिधूड़ी ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्पीकर को दिया था. तब स्पीकर ने कहा था कि बजट के बाद नियमों के तहत इस पर विचार करेंगे. रामबीर बिधूड़ी के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने कहा था कि भाजपा के पक्ष में वोट करने के लिए हमारे विधायकों को लालच दिया जा रहा है और सीबीआई व ईडी का डर दिखाया जा रहा है।

भारत में घटिया दवा बेचने वाली 18 कंपनियों के लाइसेंस रद , वहीं 26 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी, एक साथ 20 राज्यों में हुई कार्रवाई

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भारत में घटिया व नकली दवा निर्माताओं के खिलाफ सरकार की सख्ती बढ़ती जा रही है और इस पर लगाम के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत पिछले 15 दिनों में 18 दवा निर्माता कंपनियों के लाइसेंस रद कर दिए गए और 26 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ये कंपनियां घटिया दवा का निर्माण में लिप्त पाई गई। देश के 20 राज्यों में यह कार्रवाई की गई।

दवा निर्माता कंपनियों के निरीक्षण का काम जारी

सूत्रों के मुताबिक दवा निर्माता कंपनियों के निरीक्षण का काम जारी है। मंत्रालय के मुताबिक ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया ने पिछले 15 दिनों 76 दवा निर्माता कंपनियों का निरीक्षण किया। मंत्रालय के मुताबिक इन कंपनियों के खिलाफ खबरों के आधार पर केंद्र व राज्य सरकार की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का उद्देश्य नकली व मिलावटी दवा के उत्पादन को रोकने के साथ गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस के पालन को सुनिश्चित करना था।

203 फार्मा कंपनियों की पहचान 

मंत्रालय के मुताबिक औचक निरीक्षण के लिए 203 फार्मा कंपनियों की पहचान की गई और कार्रवाई के पहले चरण में 76 दवा कंपनियों का निरीक्षण किया गया। 18 कंपनियों के लाइसेंस को रद करने के साथ तीन कंपनियों के प्रोडक्ट मंजूरी को भी रद कर दिया गया। जिन 26 कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, उन्हें निर्धारित समय में जवाब देने के लिए कहा गया है। संतोषप्रद जवाब नहीं होने पर इन कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

 औचक निरीक्षण की कार्रवाई रहेगी जारी

मंत्रालय का कहना है कि दवा की गुणवत्ता को कायम रखने के लिए औचक निरीक्षण की यह कार्रवाई चलती रहेगी। हाल ही में उजेबकिस्तान में भारत में निर्मित खांसी की दवा पीने से बच्चों की मौत की खबर आई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कुछ माह पहले नोएड स्थित कंपनी में बनी दवा पर सवाल उठाए थे। मंत्रालय के मुताबिक दिल्ली, बिहार, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र व तेलंगाना समेत 20 राज्यों में दवा निर्माताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई।

भारत की छवि को धक्का

सूत्रों के मुताबिक दवा की गुणवत्ता खराब होने से मरीजों को नुकसान होने के साथ दवा के अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की छवि को धक्का लगता है। सूत्रों के मुताबिक बिना लाइसेंस के ऑनलाइन दवा बेचने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

राष्ट्रगान के अपमान मामले में बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झटका, बॉम्बे हाईकोर्ट ने राहत देने से किया इनकार

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका मिला है। राष्ट्रगान का अपमान करने को लेकर ममता बनर्जी के खिलाफ कार्रवाई की मांग संबंधी मामले में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है। वहीं, इस मामले में मुंबई की एक विशेष अदालत ने निचली अदालत द्वारा सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ जारी समन को निरस्त कर इस मामले की सुनवाई फिर से करने के आदेश दिए थे।

बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 3 दिसंबर 2021 को मुंबई में एक कार्यक्रम में जब राष्ट्रगान बजाया जा रहा था, तो वह वहां से उठकर चली गई थीं। यह आरोप विवेकानंद गुप्ता भाजपा की मुंबई इकाई के सचिव ने लगाया था। इसका वीडियो भी बनाया गया था। डीवीडी के वीडियो क्लिप और यू-ट्यूब लिंक के वीडियो क्लिप से पता चला था कि ममता बनर्जी ने राष्ट्रगान गाया और अचानक रुक गईं और मंच से चली गई थी। बता दें कि ममता बनर्जी उस समय उद्धव ठाकरे की शिवसेना और एनसीपी के नेताओं के निमंत्रण पर एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आई थीं। इस कार्यक्रम में ही राष्ट्रगान बजाया गया था।

केंद्र सरकार ने पैन और आधार को लिंक करने की तारीख बढ़ाई, अब 31 मार्च की जगह 30 जून तक एक हजार रुपए शुल्क के साथ करें लिंक

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 पैन कार्ड को अपने आधार कार्ड से लिंक करने की तिथि केंद्र सरकार ने बढ़ा दी है। 

देश के नागरिक अब 30 जून 2023 तक आधार कार्ड को पैन कार्ड से लिंक कर सकते हैं। अभी तक आधार को पैन से लिंक करने की तारीख 31 मार्च 2023 निर्धारित था। वित्त मंत्रालय ने स्थायी खाता संख्या (पैन) और आधार को जोड़ने की अंतिम तिथि 31 मार्च से बढ़ाकर 30 जून 2023 कर तय कर दी है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सम्बंधित व्यक्ति जून के आखिर तक पैन को आधार कार्ड से निर्धारित शुल्क एक हजार रुपए देकर लिंक कर सकते हैं। इस दौरान लोगों को किसी प्रकार की कोई समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।  

 

आयकर विभाग कई बार पैन को आधार कार्ड से लिंक करने के बारे में कह चुका है। विभाग का कहना है कि आईटी अधिनियम 1961 के अनुसार सभी पैन धारकों के लिए जो छूट की श्रेणी में नहीं आते हैं। उन्हें अपने पैन को आधार से जोड़ना अनिवार्य है नहीं तो अनलिंक्ड पैन निष्क्रिय हो जाएगा।

 

पहले 31 मार्च 2022 से पहले पैन को आधार से लिंक करना मुफ्त था। उसके बाद 01 अप्रैल 2022 से 30 जून 2022 के बीच यह 500 रुपये था। हालांकि अब 1000 रुपये का फाइन देकर 31 मार्च 2023 तक आधार पैन को लिंक कर सकते हैं लेकिन अब यह तारीख बढ़कर 30 जून 2023 कर दी गई है। यदि आप ऐसा करने में विफल रहते हैं तो आपका पैन निष्क्रिय हो जाएगा। आधार को पैन से लिंक करने की प्रक्रिया सीधी है। आप इसे अपने घर से ऑनलाइन कर सकते हैं अथवा इस मामले में साइबर कैफे की मदद ले सकते हैं।

बीजेपी के दिग्गज नेता गिरीश बापट का निधन, 73 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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पुणे के बीजेपी सांसद गिरीश बापट का निधन हो गया है। बीजेपी सांसद गिरीश बापट का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उनका पिछले कुछ दिनों से पुणे के दीनानाथ अस्पताल में इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।पुणे भाजपा अध्यक्ष जगदीश मुलिक ने यह जानकारी दी।

तबियत बिगड़ने पर बापट को आज ही दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था। अस्पताल ने जानकारी दी थी कि उनकी हालत बेहद नाजुक थी जिसके बाद उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर पुणे सांसद को श्रद्धांजलि दी है। पीएम ने कहा कि बापट जी काफी सभ्य और मेहनती कार्यकर्ता थे। उन्होंने महाराष्ट्र के विकास के लिए लगातार काम किया है। पुणे के विकास के लिए वह हमेशा सजग रहते थे। भाजपा को महाराष्ट्र में मजबूती दिलाने के लिए बापट जी ने काफी काम किया। वे ऐसे विधायक थे, जो हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया करते थे। मंत्री और पुणे सांसद होते हुए उन्होंने काफी अच्छा काम किया है। वे कई लोगों के लिए प्रेरणादाई रहेंगे। उनका जाना दुखदाई है। मैं उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं। ओम शांति।

1973 से राजनीति में सक्रिय थे। पुणे में बीजेपी के सफल आंदोलन में उनकी अहम भूमिका रही है। उन्होंने पुणे और कसबा निर्वाचन क्षेत्र में बीजेपी पार्टी को विकसित करने के लिए कड़ी मेहनत की थी। 2019 चुनाव में गिरीश बापट ने कांग्रेस नेता मोहन जोशी को 324628 वोटों से हराया था। उनकी गिनती महाराष्ट्र के दिग्गज भाजपा नेताओं में होती थी।

क्या सरेंडर करेगा अमृतपाल सिंह? पंजाब में पुलिस की बढ़ी हलचल

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पुलिस से भाग रहाखालिस्‍तानी समर्थक अमृतपाल सिंह सरेंडर कर सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वारिस पंजाब दे का प्रमुख और खलिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह आज आत्मसमर्पण कर सकता है। अमृतपाल सिंह के श्री हरमंदिर साहिब से आत्मसमर्पण करने की चर्चा है। वहीं, सिखों के पांच तख़्तों में से एक भटिंडा स्थित श्री दमदमा साहिब में भी अमृतपाल के सरेंडर करने की खबर आ रही है।इस तरह की सूचना के बाद पंजाब में अचानक पुलिस की गतिविधियां बढ़ गई। बता दें कि वह 11 दिन से फरार चल रहा है।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्वर्ण मंदिर और अकाल तख्त के आसपास करीब 500 पुलिसकर्मी सादी वर्दी में तैनात किए गए हैं। स्वर्ण मंदिर के नजदीक के बाजारों और होटलों पर भी पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है।गांव को पूरी तरह से छावनी में तब्दील किया गया है। हर जगह पुलिस ही पुलिस दिख रही है। सभी रास्तों पर बड़ी नाकेबंदी कर दी गई है। चार पहिया वाहन जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। लोग पैदल और दो पहिया वाहन पर ही जा सकते हैं।लोग भी डर के कारण सहमे हुए हैं।

इससे पहले पूर्वी दिल्ली के रमेश पार्क इलाके में 'वारिश पंजाब दे' का प्रमुख अमृतपाल सिंह देखा गया था। उसका एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें वो बिना पगड़ी के चश्मा पहने चल रहा है, जबकि उसका साथी पप्‍पलप्रीत उसके पीछे चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अमृतपाल, रमेश पार्क इलाके में 21 मार्च को एक महिला के यहां रुका था,जो पप्‍पलप्रीत की जानकार है और दोनों की मुलाकात किसान आंदोलन के दौरान हुई थी।

बता दें कि 18 मार्च को पुलिस ने खालिस्तान समर्थक ‘वारिस पंजाब दे' के अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। अमृतपाल उसके बाद से ही फरार है। वह 18 मार्च को जालंधर जिले से भाग निकला था। अमृतपाल और उसके सहयोगियों के खिलाफ वैमनस्य फैलाने, हत्या के प्रयास, पुलिसकर्मियों पर हमले और लोकसेवकों के कर्तव्य निर्वहन में बाधा उत्पन्न करने से संबंधित कई आपराधिक आरोपों के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।

बहाल हुई लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की सदस्यता, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले लोकसभा का फैसला, राहुल गांधी की तरह ही गई थी सांसदी

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लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद फैजल की लोकसभा सदस्यता फिर से बहाल हो गई है।लोकसभा सचिवालय ने नोटिफिकेशन जारी कर इस बात की जानकारी दी। बता दें कि इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी फैजल ने याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई जारी है।यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब लोकसभा से राहुल गांधी की सदस्यता रद्द किए जाने का मुद्दा गर्म है। 

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इससे पहले कवारत्ती की सत्र अदालत ने एनसीपी के लक्षद्वीप सांसद मोहम्मद फैजल पीपी को हत्या के प्रयास मामले में दस साल जेल की सजा सुनाई थी। जिसके चलते उनकी लोकसभा सदस्यता चली गई थी। हालांकि फैजल ने इसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जिसके बाद सजा माफ कर दी गई थी। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद फैजल की लोकसभा सदस्यता को बहाल कर दिया गया है। 

सांसद फैजल समेत तीन लोग 2009 में एक व्यक्ति की हत्या के प्रयास से जुड़े केस में आरोपी थे। 11 जनवरी 2023 को लक्षद्वीप की एक सेशन कोर्ट ने इस केस में उन्हें 10 साल कैद की सजा सुनाई। इसके बाद फैजल को संसद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इतना ही नहीं चुनाव आयोग ने 27 जनवरी को कावारत्ती सीट पर उपचुनाव की घोषणा भी कर दी थी। निचली अदालत के इस फैसले के बाद फैजल ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया। केरल हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को फैजल की सजा पर रोक लगा दी थी।

इधर, 'मोदी सरनेम' टिप्पणी को लेकर दाखिल एक मामले में सुनवाई करते हुए गुजरात की सूरत कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी। जिसके बाद लोकसभा सचिवालय की ओर से राहुल गांधी को नोटिफिकेशन जारी कर लोकसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया गया था। राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता जाने के बाद कांग्रेस पार्टी ने देश भर में विरोध प्रदर्शन कर इसे बीजेपी की साजिश बताया था।

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव की तारीख का एलान, 10 मई को मतदान, 13 मई को नतीजे

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कर्नाटक में आगामी विधानसभा चुनाव 2023 के लिए चुनाव आयोग ने तारीखों का एलान कर दिया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को मतदान होगा और 13 मई को नतीजे आएंगे। कर्नाटक में 1 चरण में ही चुनाव होंगे।

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चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार की ओर से संबोधित किया गया। उन्होंने बताया कि कर्नाटक में कुल 224 विधानसभा सीटों में से 36 सीटें एससी के लिए और 15 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। इस चुनाव में कुल 5,21,73,579 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।चुनाव के लिए 13 अप्रैल को नोटिफिकेशन जारी होगा। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही कर्नाटक में आज से चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है। बता दें कि कर्नाटक विधानसभा का कार्यकाल 25 मई को खत्म हो रहा है

चुनाव आयोग के मुताबिक, इस चुनाव के लिए कर्नाटक में कुल 224 विधानसभा सीटों पर 58,282 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। हर पोलिंग स्टेशन पर लगभग 883 मतदाताओं का औसत होगा। इतना ही नहीं 1320 मतदान केंद्रों का प्रबंधन महिला अधिकारियों के पास होगा। आयोग ने इस बार कर्नाटक में 240 मॉडल मतदान केंद्र बनाने की बात कही है। चुनाव आयुक्त ने कहा कि कर्नाटक में नए मतदाताओं को जोड़ने का लक्ष्य रहा है। हालांकि, बुजुर्ग मतदाताओं के लिए भी सुविधाएं बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि 80 साल से ज्यादा उम्र के लोग घर से ही वोट कर सकेंगे।राजीव कुमार ने बताया कि 18 से 19 साल के बीच के पहली बार वोट करने वाले 9,17,241 मतदाता राज्य में हैं। इतना ही नहीं 17 साल की उम्र के 1,25,406 युवाओं ने एडवांस एप्लीकेशन देकर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव को 2024 का सेमीफाइनल माना जा रहा। साल 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। वहीं इस बार भी बीजेपी सत्ता में काबिज रहना चाहेगी। वहीं, कांग्रेस मिशन-साउथ के तहत कर्नाटक की सत्ता में वापसी के लिए बेताब है। कर्नाटक में कुल 224 सीटे हैं, जहां पूर्ण बहुमत के लिए लगभग 113 सीटों पर जीत हासिल करना जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, कहा- देश पर शासन करना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं

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देश में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। पहला राहुल गांधी के कैंब्रिज भाषण को लेकर अब उनकी सांसदी जाने के बाद माहौल और गरमा गया है। इसे लेकर दोनों पार्टियां एक दूसरे पर हमले का कोई मौका नहीं चूक रही हैं। इस बीच रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राहुल गांधी को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी खुद को अदालत और संविधान से ऊपर समझते हैं।

राहुल गांधी खुद को संविधान, अदालत और संसद से ऊपर समझते हैं- वैष्णव

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि राहुल गांधी ने ओबीसी समुदाय का अपमान किया और जब कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया तो उन्होंने कहा कि कोर्ट ही गलत है। राहुल गांधी को लगता है कि इस देश पर शासन करना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने कहा, राहुल गांधी हक की राजनीति करते हैं। वे सोचते हैं कि चूंकि वह एक निश्चित परिवार में पैदा हुए हैं, इसलिए वह संविधान, अदालत और संसद से ऊपर हैं। राहुल ये भी सोचते हैं कि वे भारत के संविधान से ऊपर हैं।

संविधान के आधार पर बने सभी संस्थान उनसे नीचे

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि राहुल गांधी मानते हैं कि बाबा साहेब के बनाए संविधान के आधार पर बने सभी संस्थान उनसे नीचे हैं। संस्थानों की बात करने वाले देश को बताएं कि क्या जब प्रधानमंत्री विदेश में थे तो एक अध्यादेश को फाड़ना संस्थाओं का सम्मान करना नहीं था। उन्होंने कहा कि बीजेपी देश के विकास के लिए नए जोश के साथ काम कर रही है। वर्तमान सरकार को अस्त-व्यस्त करने के एक ही लक्ष्य के साथ सारे भ्रष्टाचारी एक हो गए हैं।

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने भीड़ पर लुटाए 500-500 के नोट, वायरल हो रहा वीडियो

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कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार एक चुनावी जुलूस के दौरान लोगों पर पैसे उड़ाते दिखे। इसका वीडियो भी सामने आया है। कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने मंगलवार को मांड्या में एक रैली के दौरान लोगों पर 500 रुपए के नोट उड़ाए। 

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कर्नाटक में आने वाले महीने में विधानसभा चुनाव होने हैं। हालांकि चुनाव की तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है, लेकिन सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्ष कांग्रेस समेत अन्य पार्टियों ने अपना जोर लगाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस की ‘प्रजा ध्वनि यात्रा’ के दौरान कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार को रैली में 500 रुपये के नोट की बौछार करते देखा गया। इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।वे श्रीरंगापट्ना में कांग्रेस की तरफ से आयोजित प्रजा ध्वनि यात्रा में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने बेविनाहल्ली में बस के ऊपर से कलाकारों पर पैसे बरसाए। 

इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।ये वायरल वीडियो मंगलवार का बताया जा रहा है।इसमें डीके शिवकुमार एक बस पर दिखाई दे रहे हैं। उनके साथ पार्टी के कुछ अन्य लोग भी मौजूद हैं। नारेबाजी चल रही है। नगाड़ा बज रहा है। झंडे लहराए जा रहे हैं। तभी डीके शिवकुमार दाईं तरफ हल्का सा झुकते हैं। उनके हाथ में 500 रुपये के कई नोट दिखाई देते हैं। इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बस के नीचे खड़े लोगों की तरफ इशारा करते हुए 500-500 के नोट उन पर उछाल देते हैं। इसके बाद चुनावी काफिला आगे बढ़ जाता है।

डीके शिवकुमार इसके पहले भी काफी विवादित रह चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने राज्य के डीजीपी प्रवीण सूद को नालायक कहा था। दावा किया था कि प्रवीण राज्य की भाजपा सरकार का बचाव कर रहे हैं और उनकी पार्टी के नेताओं के खिलाफ केस दर्ज कर रहे हैं। शिवकुमार ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कांग्रेस नेता ने प्रवीण पर नन्जे गौड़ा और उरी गौड़ा के नाम पर प्रवेश द्वार बनाने की अनुमति देने का आरोप लगाया था। हिन्दू कार्यकर्ताओं के मुताबिक, नन्जे और उरी ने मैसूरु के शासक टीपू सुल्तान की हत्या की थी।