कांग्रेस ने वंदे मारतम् के दो टुकड़े किए...” अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- 1937 वाली नीति नहीं चलेगी

#congresssplitvandemataramintwoamit_shah

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के दो टुकड़ किए हैं। यह देश विरोधी फैसला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का महान वंदेमातरम गीत के दो ही छंद गाने का फैसला तुष्टिकरण की राजनीति है।

वंदे मातरम के दो टुकड़े कर विभाजन की नींव डाली

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने 1937 के अपने प्रस्ताव को आधार बनाते हुए वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में मुसलमानों को खुश करने के लिए वंदे मातरम को बांटने का फैसला किया गया था और इससे देश के विभाजन की नींव पड़ी।

1937 के गलत फैसले को 80 साल बाद सुधारा-अमित शाह

अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति में लिए गए फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि देश में तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी। उनके 1937 में लिए गए फैसले को पीएम मोदी ने आजादी के 80 साल बाद सुधारा है। गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस की उस गलती को सुधारा है और इसे कानूनी आधार भी दिया है।

कानून को नकार रही कांग्रेस-अमित शाह

शाह ने कहा कि कांग्रेस एक तरफ अपने 1937 के प्रस्ताव को लागू कर रही है, जबकि दूसरी तरफ संसद द्वारा बनाए गए कानून को नकार रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, देश एक बार वंदे मातरम को दो हिस्सों में बंटने देने की गलती कर चुका है और हमने इसके नतीजे भुगते हैं। शाह ने लोगों से कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की

क्या है वंदे मातरम् पर कांग्रेस का फैसला?

दरअसल, कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि वह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी। इसी के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे। वंदे मातरम् में 6 अंतरा हैं। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसको लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े जो महान नेताओं की मौजूदगी में पारित हुआ था और जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था।

बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

#whyamitmalviyaoutfrombjpit_cell

बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे*

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

देवघर: इनर व्हील क्लब ऑफ देवघर ने वृक्षारोपण, डायलिसिस मरीज को सहयोग एवं Doctor's. & CA सम्मान  के साथ नए सत्र का जोरदार आगाज किया गया l
देवघर: 1 जुलाई 2026 इनर व्हील क्लब ऑफ देवघर ने सत्र 2026–27 का शुभारंभ समाजसेवा एवं जनकल्याण के उद्देश्य से विभिन्न सेवा परियोजनाओं के साथ किया। कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण अभियान से हुई, जो St.Mary's School में की गयी. जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य का संदेश दिया गया। क्लब की सदस्यों ने पौधारोपण कर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी देखभाल का संकल्प लिया। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्लब ने सदर अस्पताल, देवघर में एक डायलिसिस मरीज को गोद लेकर उसके उपचार हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने की पहल की। यह सेवा कार्य जरूरतमंद मरीजों के प्रति क्लब की संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचायक है। इस अवसर पर समाज के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 10  चिकित्सकों (Doctors) का सम्मान किया गया। साथ ही, अपने पेशे में उत्कृष्ट योगदान एवं ईमानदारी के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (Chartered Accountants) को भी सम्मानित किया गया। क्लब की अध्यक्ष डॉ. ममता किरण ने कहा कि इनर व्हील क्लब का उद्देश्य सेवा, मित्रता एवं मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए सत्र में क्लब की पूरी टीम समाजहित में अनेक जनकल्याणकारी कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित करेगी। कार्यक्रम में क्लब की पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही  जिसमें।  Sushma Rani, Chandra Prabha, Arpana Sinha Archana Sinha ,Kanchan Murti ,Namita Bhagat ,Rashmi Ranjan jha , Archana Bhagat,Anita Gupta ,Gyani Mishra, Nisha Jaiswal,Savitri Gupta की उपस्थिति रही  सभी ने समाजसेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। जारीकर्ता:सुषमा रानी  संपादक  (2026–27)
अब एक ही शिवसेना बची...’, अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर बड़ा तंज

#amitshahtakesjibeonuddhavthackeray

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के दो गुटों में चल रही कलह के बीच तीखा तंज कसा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ही उद्धव खेमे पर तंज कसा और कहा कि अब एक ही शिवसेना है, कोई गुट नहीं बचा है। शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला।

अब केवल एक ही 'शिवसेना'-अमित शाह

अमित शाह ने वहां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर परिसर में विकास कार्यों की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है।' अमित शाह ने एकनाथ शिंदे का परिचय देते हुए यह टिप्पणी की। जब शाह ने यह कहा तो मंच पर एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। 

12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की-अमित शाह

अमित शाह ने कोल्हापुर में कहा कि कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि मोदी के नेतृत्व में 12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की, विकास किया और अपनी संस्कृति को संजोकर रखा। उन्होंने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार की तारीफ की। शाह ने कहा कि हमारे लिए पश्चिम बंगाल को बहुत मुश्किल लक्ष्य बताय जा रहा था लेकिन अंतिम चुनाव में वहां भी बीजेपी की सरकार बनी है। 

शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच कलह

बता दें कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच फिर से कलह मची हुई है। उद्धव सेना के 6 सांसदों के बारे में चर्चा है कि वे किसी भी दिन एकनाथ शिदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन सभी को संभालने के लिए दिल्ली में उद्धव सेना की एक मीटिंग भी हुई थी, लेकिन ये लोग नहीं पहुंचे थे। ऐसे में साफ है कि सभी 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं। इस बीच शुक्रवार को दोनों गुटों ने शिवसेना की स्थापना के 60 सालों पर अलग-अलग आयोजन किए। कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति भी दोनों गुटों के बीच देखी गई।

STF के एनकाउंटर में ढेर हुआ कुख्यात कॉन्ट्रैक्ट किलर भानु प्रताप सिंह, 40 से अधिक मामलों में था वांछित

अयोध्या। उत्तर प्रदेश एसटीएफ को रविवार देर रात बड़ी सफलता मिली, जब प्रयागराज एसटीएफ यूनिट ने अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान कुख्यात बदमाश और कॉन्ट्रैक्ट किलर भानु प्रताप सिंह को मार गिराया। मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए भानु प्रताप सिंह को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अयोध्या ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, भानु प्रताप सिंह मूल रूप से गोरखपुर जिले के बेलघाट थाना क्षेत्र के विधनापार गांव का निवासी था। वह लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था और हत्या, डकैती, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग सहित विभिन्न गंभीर अपराधों के 40 से अधिक मामलों में वांछित चल रहा था। उसके खिलाफ गोरखपुर, आजमगढ़ और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मुकदमे दर्ज थे।

सूत्रों के मुताबिक, भानु प्रताप सिंह पर अलग-अलग जनपदों की पुलिस द्वारा कुल 1 लाख 65 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इसमें एक लाख रुपये, 50 हजार रुपये और 15 हजार रुपये के इनाम शामिल थे। वह कई वर्षों से फरार चल रहा था और अदालत में भी लगातार गैरहाजिर रहता था।

बताया जा रहा है कि प्रयागराज एसटीएफ को सूचना मिली थी कि भानु प्रताप सिंह अयोध्या क्षेत्र में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर जे.पी. राय के नेतृत्व में एसटीएफ की टीम ने महाराजगंज थाना क्षेत्र में घेराबंदी की। खुद को घिरता देख भानु प्रताप सिंह ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोली चलाई, जिसमें उसके सीने में गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

मुठभेड़ के बाद देर रात करीब 12 बजे के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अयोध्या पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस और एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू की। सुरक्षा व्यवस्था को भी एहतियातन बढ़ा दिया गया।

दर्शन नगर चौकी प्रभारी बृजभूषण ने बताया कि मुठभेड़ में घायल अवस्था में भानु प्रताप सिंह को मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) Amitabh Yash ने बताया कि भानु प्रताप सिंह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों के 40 से अधिक मामलों में वांछित था। प्रयागराज एसटीएफ यूनिट के साथ हुई मुठभेड़ में वह घायल हुआ था और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

पूर्वांचल क्षेत्र में भानु प्रताप सिंह की पहचान एक खतरनाक सुपारी किलर के रूप में थी। पुलिस को कई चर्चित आपराधिक मामलों में उसकी तलाश थी। उसके मारे जाने को प्रदेश पुलिस की अपराधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
कांग्रेस ने वंदे मारतम् के दो टुकड़े किए...” अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- 1937 वाली नीति नहीं चलेगी

#congresssplitvandemataramintwoamit_shah

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कांग्रेस के रुख पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के दो टुकड़ किए हैं। यह देश विरोधी फैसला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का महान वंदेमातरम गीत के दो ही छंद गाने का फैसला तुष्टिकरण की राजनीति है।

वंदे मातरम के दो टुकड़े कर विभाजन की नींव डाली

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने 1937 के अपने प्रस्ताव को आधार बनाते हुए वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 में मुसलमानों को खुश करने के लिए वंदे मातरम को बांटने का फैसला किया गया था और इससे देश के विभाजन की नींव पड़ी।

1937 के गलत फैसले को 80 साल बाद सुधारा-अमित शाह

अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति में लिए गए फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि देश में तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी। उनके 1937 में लिए गए फैसले को पीएम मोदी ने आजादी के 80 साल बाद सुधारा है। गृह मंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए कांग्रेस की उस गलती को सुधारा है और इसे कानूनी आधार भी दिया है।

कानून को नकार रही कांग्रेस-अमित शाह

शाह ने कहा कि कांग्रेस एक तरफ अपने 1937 के प्रस्ताव को लागू कर रही है, जबकि दूसरी तरफ संसद द्वारा बनाए गए कानून को नकार रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, देश एक बार वंदे मातरम को दो हिस्सों में बंटने देने की गलती कर चुका है और हमने इसके नतीजे भुगते हैं। शाह ने लोगों से कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की

क्या है वंदे मातरम् पर कांग्रेस का फैसला?

दरअसल, कांग्रेस ने बुधवार को कहा था कि वह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर 1937 में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और उस समय के अन्य प्रमुख नेताओं द्वारा किए गए फैसले का पूरी तरह पालन करेगी। इसी के अनुरूप पार्टी कार्यकर्ता राष्ट्रगीत के सिर्फ दो अंतरे ही गाएंगे। वंदे मातरम् में 6 अंतरा हैं। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में इसको लेकर चर्चा हुई और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 1937 के सीडब्ल्यूसी के उस प्रस्ताव के कुछ अंश भी पढ़े जो महान नेताओं की मौजूदगी में पारित हुआ था और जिसमें वंदे मातरम् के दो अंतरों के गायन का निर्णय लिया गया था।

बीजेपी ने अमित मालवीय को IT सेल से क्यों हटाया, क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का है असर?

#whyamitmalviyaoutfrombjpit_cell

बारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को अपनी नई टीम का एलान किया। इस टीम में बहुत भारी फेरबदल किया गया है। 65 लोगों की बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 53 नए चेहरों को शामिल किया है। लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा है तो बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय की छुट्टी का।

11 सालों तक संभाली बीजेपी आईटी सेल की जिम्मेदारी

बीजेपी ने अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान करते हुए पार्टी के आईटी और सोशल मीडिया विभाग में बड़ा बदलाव किया है। करीब 11 साल तक इस ज़िम्मेदारी को संभालने वाले अमित मालवीय को अब इस पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह छत्तीसगढ़ से आने वाले दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। बीजेपी ने अमित मालवीय को हटाने की कोई वजह सार्वजनिक तौर पर नहीं बताई है। पार्टी की ओर से इसे संगठन में बदलाव के तौर पर ही पेश किया गया है। हालांकि, सवाल करने वाले तो सवाल करेंगे ही।

क्या जेन-ज़ी प्रोटेस्ट का असर पड़ा?

मालवीय को हटाए जाने की टाइमिंग पर खास ध्यान दिया जा रहा है। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब हाल में हुए छात्र और युवा प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही। जानकारों की माने तो हाल ही में हुए स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान बीजेपी युवाओं से जुड़ने में नाकाम रही। बीजेपी के इस बदलाव को हालिया युवा प्रदर्शनों के बाद पार्टी की डिजिटल रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा है।

कभी सोशल मीडिया पर थी बीजेपी की पकड़

जंतर-मंतर समेत देश के कई हिस्सों में हुए स्टूडेंट और जेन जी प्रोटेस्ट के दौरान सोशल मीडिया मुख्य रूप से प्रदर्शनकारियों के लिए एकजुट होने का बड़ा माध्यम बन गया। उन्होंने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रैप, गानों और वीडियो के जरिए पीएम मोदी और उनकी सरकार का मजाक उड़ाने के लिए किया। दिलचस्प बात यह है कि इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बीजेपी लंबे समय से अपने समर्थकों तक पहुंचने और अपने राजनीतिक संदेश को आकार देने के लिए करती रही है। लेकिन इस बार बीजेपी से चूक हो गई। जिसकी बहुत बड़ी कीमत धर्मेद्र प्रधान का इस्तीफा माना जा सकता है।

कहां चूक गई बीजेपी?

सक्रॉल के एक लेख के मुताबिक बीजेपी ने पिछले डेढ़ दशक में एक्स (पहले ट्विटर), फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप जैसे टैक्स्ट-बेस्ड प्लेटफ़ॉर्म्स पर जिस तरह का मज़बूत डिजिटल नेटवर्क बनाया था, वही रणनीति इंस्टाग्राम और खासकर रील्स की दुनिया में उतना असर नहीं छोड़ पाई। लेख के मुताबिक जेन-ज़ी का सोशल मीडिया इस्तेमाल और राजनीतिक संवाद करने का तरीका पुरानी पीढ़ियों से काफी अलग है। लेख कहता है कि जेन-ज़ी का का मुख्य प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम है, जबकि एक्स, और फ़ेसबुक को युवा अपेक्षाकृत उम्रदराज़ लोगों के प्लेटफॉर्म के तौर पर देखते हैं। जेन-ज़ी आंदोलन में इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की भूमिका काफी अहम रही थी।

जेन ज़ी आंदोलन से सीख

जानकारों का मानना है कि अमित मालवीय को हटाया जाना सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि यह बीजेपी की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। सीजेपी के आंदोलन से सीख लेते हुए बीजेपी युवाओं को साधने की कोशिश कर रही है। सोशल मीडिया की रणनीति बदल रही है। जेन ज़ी आंदोलन से सीख लेकर नए प्लेटफॉर्म और नए चेहरों पर फोकस कर रही है।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे*

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

कल 3 बजे विरोधियों को जवाब दूंगा', विपक्ष की मांग पर बोले शाह, राहुल गांधी ने कहा- हम नहीं सुनेंगे

#amitshahiwillanswerallquestionsthursday3pmopposition_demand

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस एक्शन के बाद से ही इस मुद्दे पर विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह को लगातार निशाना बनाता रहा है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी इस मामले में कई बार गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांग चुके हैं। राहुल गांधी ने कई बार सवाल किया है कि छात्रों की पिटाई और प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था। ऐसे में अमित शाह ने इस मुद्दे पर मीडिया से बात करते हुए पहली बार बयान दिया है। उनका कहना है कि आइए सदन में बहस शुरू करते हैं और इसके बाद मैं सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हूं। दूसरी तरफ, विपक्ष की तरफ से कहा गया कि हम नहीं सुनेंगे।

'लापता', 'भगोड़े जैसे शब्दों पर क्या कहा?

पिछले दो-तीन दिनों से विपक्ष संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहा है। इस पर अमित शाह ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि सबसे पहले तो 'लापता', 'भाग गए', 'भगोड़े हैं', इस प्रकार की भाषा भारत की सार्वजनिक जीवन में और संसदीय जीवन में अभी-अभी सुनाई पड़ती है। जब से संसद सत्र शुरू हुआ तब से लगातार मैं संसद में आता हूं, मेरी चैंबर में बैठा हूं। चूंकि संसद भवन के अंदर विपक्ष संसद को चलने ही नहीं दे रहा है दोनों गृहों में तो कोई जाकर क्या करेगा? जहां तक चर्चा का सवाल है, सरकार की ओर से किरण रिजिजू ने, जो हमारे पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर हैं, बहुत स्पष्ट कर दिया है कि जो NEET आंदोलन के छात्र प्रदर्शन पर सभी प्रकार की चर्चा करने के लिए सरकार तैयार है। चर्चा के लिए समय सुनिश्चित किया जाए और विपक्ष तैयार हो जाए।

किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार-शाह

गृह मंत्री ने आगे कहा कि पहले तो ये यही मांग (चर्चा की) कर रहे थे, हमने 'हां' बोल दिया। मेरी ओर से भी मैंने कह दिया है कि मैं किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए संसद में तैयार हूं। मगर वो चर्चा ही नहीं होने देना चाहते। अब जनता तय करे कौन भाग रहा है? आज भी मैं कहता हूं, आज 3 बजे तक स्पीकर साहब को वो पत्र दे दें, 3 बजे से लेकर कल 3 बजे तक सभी प्रकार की चर्चा के लिए हम तैयार हैं। मैं सदन में ही बैठूंगा, सबको सुनूंगा और सब चीजों का जवाब दूंगा। सरकार के पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है।

हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का साफ कहना है कि हम अमित शाह के भाषण को सुनना ही नहीं चाहते। मेरा 'हम' से मतलब देश की युवा पीढ़ी से है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, 'हम बस जानना चाहते हैं कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोलियां किसने चलवाईं? किसने इसके आदेश दिए? लाठीचार्ज के आदेश किसने दिए? वो आदेश गृह मंत्रालय से दिए गए। क्या अमित शाह ने आदेश दिए या नहीं। अगर उन्होने इसके आदेश दिए तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे दोषी हैं और अगर उन्होंने आदेश नहीं दिए तो भी उन्हें इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि वे पद के योग्य नहीं हैं।

देवघर: इनर व्हील क्लब ऑफ देवघर ने वृक्षारोपण, डायलिसिस मरीज को सहयोग एवं Doctor's. & CA सम्मान  के साथ नए सत्र का जोरदार आगाज किया गया l
देवघर: 1 जुलाई 2026 इनर व्हील क्लब ऑफ देवघर ने सत्र 2026–27 का शुभारंभ समाजसेवा एवं जनकल्याण के उद्देश्य से विभिन्न सेवा परियोजनाओं के साथ किया। कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण अभियान से हुई, जो St.Mary's School में की गयी. जिसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य का संदेश दिया गया। क्लब की सदस्यों ने पौधारोपण कर अधिक से अधिक वृक्ष लगाने एवं उनकी देखभाल का संकल्प लिया। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में क्लब ने सदर अस्पताल, देवघर में एक डायलिसिस मरीज को गोद लेकर उसके उपचार हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करने की पहल की। यह सेवा कार्य जरूरतमंद मरीजों के प्रति क्लब की संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचायक है। इस अवसर पर समाज के प्रति उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 10  चिकित्सकों (Doctors) का सम्मान किया गया। साथ ही, अपने पेशे में उत्कृष्ट योगदान एवं ईमानदारी के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (Chartered Accountants) को भी सम्मानित किया गया। क्लब की अध्यक्ष डॉ. ममता किरण ने कहा कि इनर व्हील क्लब का उद्देश्य सेवा, मित्रता एवं मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नए सत्र में क्लब की पूरी टीम समाजहित में अनेक जनकल्याणकारी कार्यों को सफलतापूर्वक संचालित करेगी। कार्यक्रम में क्लब की पदाधिकारियों एवं सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही  जिसमें।  Sushma Rani, Chandra Prabha, Arpana Sinha Archana Sinha ,Kanchan Murti ,Namita Bhagat ,Rashmi Ranjan jha , Archana Bhagat,Anita Gupta ,Gyani Mishra, Nisha Jaiswal,Savitri Gupta की उपस्थिति रही  सभी ने समाजसेवा के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। जारीकर्ता:सुषमा रानी  संपादक  (2026–27)
अब एक ही शिवसेना बची...’, अमित शाह का उद्धव ठाकरे पर बड़ा तंज

#amitshahtakesjibeonuddhavthackeray

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शिवसेना के दो गुटों में चल रही कलह के बीच तीखा तंज कसा है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए ही उद्धव खेमे पर तंज कसा और कहा कि अब एक ही शिवसेना है, कोई गुट नहीं बचा है। शनिवार को उन्होंने कोल्हापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे पर बड़ा हमला बोला।

अब केवल एक ही 'शिवसेना'-अमित शाह

अमित शाह ने वहां महालक्ष्मी अंबाबाई मंदिर परिसर में विकास कार्यों की शुरुआत की। इसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'पहले एकनाथ शिंदे के नाम के आगे 'शिंदे गुट' लगाना पड़ता था, लेकिन अब केवल एक ही 'शिवसेना' रह गई है, अब कोई अन्य गुट बाकी नहीं रहा है।' अमित शाह ने एकनाथ शिंदे का परिचय देते हुए यह टिप्पणी की। जब शाह ने यह कहा तो मंच पर एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद थे। 

12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की-अमित शाह

अमित शाह ने कोल्हापुर में कहा कि कहा कि इतिहास इस बात को याद रखेगा कि मोदी के नेतृत्व में 12 सालों के दौरान भारत ने तरक्की की, विकास किया और अपनी संस्कृति को संजोकर रखा। उन्होंने महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली सरकार की तारीफ की। शाह ने कहा कि हमारे लिए पश्चिम बंगाल को बहुत मुश्किल लक्ष्य बताय जा रहा था लेकिन अंतिम चुनाव में वहां भी बीजेपी की सरकार बनी है। 

शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच कलह

बता दें कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना और उद्धव गुट के बीच फिर से कलह मची हुई है। उद्धव सेना के 6 सांसदों के बारे में चर्चा है कि वे किसी भी दिन एकनाथ शिदे गुट का दामन थाम सकते हैं। इन सभी को संभालने के लिए दिल्ली में उद्धव सेना की एक मीटिंग भी हुई थी, लेकिन ये लोग नहीं पहुंचे थे। ऐसे में साफ है कि सभी 6 सांसद बागी होने को तैयार हैं। इस बीच शुक्रवार को दोनों गुटों ने शिवसेना की स्थापना के 60 सालों पर अलग-अलग आयोजन किए। कुछ जगहों पर तनाव की स्थिति भी दोनों गुटों के बीच देखी गई।

STF के एनकाउंटर में ढेर हुआ कुख्यात कॉन्ट्रैक्ट किलर भानु प्रताप सिंह, 40 से अधिक मामलों में था वांछित

अयोध्या। उत्तर प्रदेश एसटीएफ को रविवार देर रात बड़ी सफलता मिली, जब प्रयागराज एसटीएफ यूनिट ने अयोध्या के महाराजगंज थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के दौरान कुख्यात बदमाश और कॉन्ट्रैक्ट किलर भानु प्रताप सिंह को मार गिराया। मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल हुए भानु प्रताप सिंह को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अयोध्या ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जानकारी के अनुसार, भानु प्रताप सिंह मूल रूप से गोरखपुर जिले के बेलघाट थाना क्षेत्र के विधनापार गांव का निवासी था। वह लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ था और हत्या, डकैती, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग सहित विभिन्न गंभीर अपराधों के 40 से अधिक मामलों में वांछित चल रहा था। उसके खिलाफ गोरखपुर, आजमगढ़ और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में मुकदमे दर्ज थे।

सूत्रों के मुताबिक, भानु प्रताप सिंह पर अलग-अलग जनपदों की पुलिस द्वारा कुल 1 लाख 65 हजार रुपये का इनाम घोषित था। इसमें एक लाख रुपये, 50 हजार रुपये और 15 हजार रुपये के इनाम शामिल थे। वह कई वर्षों से फरार चल रहा था और अदालत में भी लगातार गैरहाजिर रहता था।

बताया जा रहा है कि प्रयागराज एसटीएफ को सूचना मिली थी कि भानु प्रताप सिंह अयोध्या क्षेत्र में छिपा हुआ है। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर जे.पी. राय के नेतृत्व में एसटीएफ की टीम ने महाराजगंज थाना क्षेत्र में घेराबंदी की। खुद को घिरता देख भानु प्रताप सिंह ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एसटीएफ ने भी गोली चलाई, जिसमें उसके सीने में गोली लग गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

मुठभेड़ के बाद देर रात करीब 12 बजे के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अयोध्या पहुंचाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस और एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल शुरू की। सुरक्षा व्यवस्था को भी एहतियातन बढ़ा दिया गया।

दर्शन नगर चौकी प्रभारी बृजभूषण ने बताया कि मुठभेड़ में घायल अवस्था में भानु प्रताप सिंह को मेडिकल कॉलेज लाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

उत्तर प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) Amitabh Yash ने बताया कि भानु प्रताप सिंह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग, डकैती और अन्य गंभीर अपराधों के 40 से अधिक मामलों में वांछित था। प्रयागराज एसटीएफ यूनिट के साथ हुई मुठभेड़ में वह घायल हुआ था और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

पूर्वांचल क्षेत्र में भानु प्रताप सिंह की पहचान एक खतरनाक सुपारी किलर के रूप में थी। पुलिस को कई चर्चित आपराधिक मामलों में उसकी तलाश थी। उसके मारे जाने को प्रदेश पुलिस की अपराधियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में बड़ी सफलता माना जा रहा है।