ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

चर्चा में बंगाल की IPS अफसर बुशरा बानो, 'अस्सलामु अलैकुम' कहने पर ट्रांसफ़र का आरोप, जानें पूरा मामला

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पश्चिम बंगाल की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो का ट्रांसफर पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते दिनों सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उनके 'अस्सलामु अलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जज़ाकल्लाह' जैसे इस्लामी अभिवादन और शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ। इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया।

वायरल वीडियो से ट्रांसफर का कनेक्शन!

14 सितंबर को होम एंड हिल अफेयर्स डिपार्टमेंट के तहत पुलिस सर्विस सेल ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर काम कर रही थीं। उनका ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन का डिप्टी कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इससे पहले 13 सितंबर को बानो ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था, जिससे काफी बवाल मचा था। उनका ट्रांसफर इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो के ट्रांसफर पर पूर्व क्रिकेटर और सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन सवाल उठाए। उन्होंने कहा- यह बेहद ही चिंताजनक है कि 'अस्सलाम वालेकुम' और 'इंशाल्लाह' कहने पर एक आईपीएस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। उन्होंने आगे लिखा- जब अभिवादन किसी लोक सेवक को निशाना बनाने का आधार बन जाता है तो हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि हम अल्पसंख्यकों को किस तरह का मैसेज दे रहे हैं? भारत की ताकत उसकी विविधता में है न कि पहचान पर नियंत्रण रखने में।

सरकार ने कहा- 'रूटीन ट्रांसफ़र'

हालांकि, सरकार ने इसे 'रूटीन ट्रांसफ़र' बता रही है। लेकिन इंडियन सेक्युलर फ़्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीक़ी का आरोप है कि बुशरा बानो को गलत तरीके से 'गैरेज पोस्टिंग' दी गई है। यानी उन्हें ऐसी ज़िम्मेदारी दी गई है, जिसे उनकी पिछली पोस्टिंग की तुलना में कम अहम माना जा रहा है।

क्या था बुशरा बानो के वीडियो में

बुशरा बानो ने UPSC की तैयारी करने वालों का हौसला बढ़ाया था। इसे लेकर उन्होंने एक वीडियो बनाया। 13 सितंबर के वीडियो में, 2021 बैच की IPS अधिकारी बानो ने बताया था कि कैसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी ने उन्हें UPSC की तैयारी में मदद की। इस वीडियो में उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि वर्दी पहने एक सरकारी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर 'अस्सलामु अलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जज़ाकल्लाह' जैसे धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल कर सकती हैं या नहीं।

প্রধানমন্ত্রীর জন্মদিনে প্রথম 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালন রাজ্যে, বাল্যবিবাহ ও মাদকের বিরুদ্ধে জিরো টলারেন্সের হুঁশিয়ারি মুখ্যমন্ত্রীর

*কলকাতা, ১৭ সেপ্টেম্বর:* প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর জন্মদিন উপলক্ষ্যে রাজ্যজুড়ে প্রথমবার 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালন করা হলো। 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালনের মঞ্চ থেকেই রাজ্যের সামাজিক সংস্কারের বার্তা দিলেন  মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী।

তিনি বলেন, "এই সরকার শুধু ভাতা দিতে আসেনি, এই রাজ্যে সংস্কার করতে এসেছে।" ভাতা ও আর্থিক সহায়তার পাশাপাশি বেআইনি মাদক ব্যবসা বন্ধ এবং বাল্যবিবাহের মতো সামাজিক ব্যাধি নির্মূলে জিরো টলারেন্স নীতি নেওয়ার কথা ঘোষণা করেন তিনি।

*বাল্যবিবাহ রুখতে কড়া পদক্ষেপ:*
শুভেন্দু অধিকারী জানান, গত ছয় মাসে রাজ্যে প্রায় ৬০ হাজার বাল্যবিবাহ ও টিনএজ ডেলিভারির ঘটনা ঘটেছে, যার মধ্যে মুর্শিদাবাদে ১৩ হাজার এবং দক্ষিণ ২৪ পরগনায় ৭ হাজার। তিনি হুঁশিয়ারি দেন, ১৮ বছরের নিচে মেয়েদের বিয়ে দিলে অভিভাবকদের পাশাপাশি বিয়ে দেওয়া কাজি কিংবা পুরোহিতকেও জেল যেতে হবে। পাশাপাশি রাজ্যকে নেশামুক্ত করতে সমস্ত বেআইনি মাদক কেন্দ্র গুঁড়িয়ে দেওয়ার ডাক দেন তিনি।

*মহিলাদের জন্য বড় ঘোষণা:*
প্রধানমন্ত্রীর গ্যারান্টি অনুযায়ী চালু হওয়া 'অন্নপূর্ণা যোজনা'য় ইতিমধ্যেই ১ কোটি ৬০ লক্ষ মহিলার ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্টে সরাসরি টাকা পাঠানো শুরু হয়েছে বলে দাবি করেন তিনি।

- *বেতন বৃদ্ধি:* আগস্ট থেকে ICDS ও আশা কর্মীদের বেতন ৫,০০০ টাকা বাড়ানো হয়েছে। প্রাণীমিত্রাদের বেতন ২,০০০ টাকা বাড়িয়ে তাঁদেরও অন্নপূর্ণা যোজনার আওতায় আনা হয়েছে। ৬০ বছরের ঊর্ধ্বে বিধবা মহিলাদের পেনশন ১,০০০ থেকে বাড়িয়ে ১,৫০০ টাকা করা হয়েছে।
- *শিক্ষা ও পুষ্টি:* ICDS কেন্দ্রে গর্ভবতী মায়েদের খাদ্য বরাদ্দ ১২ টাকা থেকে ১৪ টাকা করা হয়েছে। ১৪ আগস্ট 'কন্যারাষ্ট্র দিবসে' ২০ লক্ষ ১৩ হাজার ছাত্রীর অ্যাকাউন্টে ১,০০০ টাকা করে পাঠানো হয়েছে, যা ২০২৭ সালে ২,০০০ টাকা করা হবে। স্নাতক স্তরের ছাত্রীদের জন্য তিন বছরে মোট ৫০,০০০ টাকার আর্থিক সহায়তা দেওয়া হবে।
- *আবাস ও নিরাপত্তা:* প্রধানমন্ত্রী আবাস যোজনায় নতুন ৫০ লক্ষ বাড়ির মালিকানা মহিলাদের নামে দেওয়া হবে। নারী সুরক্ষায় হাইকোর্টের অবসরপ্রাপ্ত বিচারপতি সমাপ্তি চট্টোপাধ্যায় ও IPS দময়ন্তী সেনের নেতৃত্বে বিশেষ কমিশন গঠনের কথা জানান তিনি।

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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

JPSC परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने के साथ परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है।

जेपीएससी के अलावा कई परीक्षाओं में गड़बड़ी

सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि झारखंड में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मामला कई परीक्षाओं से जुड़ा है। वकील ने बताया कि एक मामला जेपीएससी और दूसरा झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की परीक्षा से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा का भी जिक्र हुआ। सीजेआई ने पूछा कि क्या ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा भी लोक सेवा आयोग कराता है। कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू को भी देखेगा कि यह परीक्षा कैसे आयोजित होती है।

याचिका में क्या हैं मांगे

याचिकाकर्ता ने झारखंड के बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, आईटी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सामने आए विवाद के बीच दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठे। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित उम्मीदवार ने प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म, सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम, जांच नहीं होने पर फिर होगा जुटान

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झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार की ओर से छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 25 जुलाई से जारी आंदोलन खत्म हो गया।

सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। इससे एक दिन पहले सोमवार देर शाम देवेंद्रनाथ गुट ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। अब छात्रों ने राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। मंच ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र फिर बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और इस बार सीबीआई जांच उनकी मुख्य मांग होगी।

जांच पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया गया। छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, इसलिए उसे मामले की जांच पूरी करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि सरकार को दो महीने के भीतर जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मंच दोबारा बड़ी संख्या में छात्रों को एकजुट करेगा और राजधानी रांची में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उस समय सीबीआई जांच की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा होगी।

25 जुलाई से धरने पर बैठे थे छात्र

बता दें कि छात्र पिछले 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा था। लगातार कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला और सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।

ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, पूरा देश देखेगा’ केंद्र के माइनिंग बिल पर सीएम हेमंत की चेतावनी

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केंद्र सरकार के खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलन के ऐलान एक्स पर किए एक पोस्ट में दी।

हेमंत सोरेन ने पूछा- हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा, झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा- खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम सोरेन ने बताई आंदोलन की वजह

अपने पोस्ट में सीएम सोरेन ने आंदोलन की वजह भी बताई। उन्होंने लिखा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है। यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। सीएम ने पोस्ट में यह भी लिखा कि इस बिल के कारण झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।

हर जिला-प्रखंड और पंचायत में होगा कड़ा विरो- हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। पोस्ट के आखिर में सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।

माइनिंग बिल के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों, विधायकों और पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई।

10 साल में 152 पेपर लीक...', राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा

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नीट पेपर लीक और इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

लोकसबा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ी स्क्रीन पर 20 जुलाई के कुछ फुटेज दिखाए और कहा कि सुरक्षाबलों ने छात्रों के साथ बर्बरता की है। उन्होंने कहा, छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। वे सिर्फ एक निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का हक है कि उन्हें ऐसी व्यवस्था मिले, जहां मेहनत और योग्यता का सम्मान हो। लेकिन उन्हें सुरक्षा बलों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने छात्रों पर अत्याचार किया है।

10 वर्षों में 152 बार पेपर लीक-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया की सबसे बेहतर व्यवस्थाओं में गिनी जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 बार प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि हर बार लाखों छात्रों को फिर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और उन्हें दोबारा उसी मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है।

धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के तौर पर फेल-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की इस परेशानी को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की है। नीट परीक्षा पर खर्च शिक्षा के बजट के बराबर। 1.32 लाख करोड़ रुपये नीट पर छात्र खर्च करते हैं। 1.4 लाख करोड़ रुपये शिक्षा बजट है। धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के तौर पर फेल हैं।

राहुल गांधी की तीन प्रमुख मांगें

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन मांगें रखी। उन्होंने कहा, 'पहली मांग- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दूसरा- छात्रों पर बर्बरता करने वालों को सजा हो। ये आतंकवादी नहीं है, हमारे देश के छात्र हैं। तीसरी मांग- पीएम मोदी खेद जताएं।

आसाराम को अंतरिम राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस

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धर्मगुरु आसाराम बापू को र नाबालिग दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने आसाराम की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राजस्थान सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट का जमानत देने से इनकार

शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और कहा है कि यदि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है या जान को खतरा होता है, तभी जमानत पर विचार किया जाएगा। याचिका में उन्होंने 2013 में एक नाबालिग के रेप केस में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सजा और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।

पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू शामिल हैं। इस बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभी जमानत पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा और उसके बाद ही आगे विचार किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के मामलों में यह देखा जाता है कि क्या कोई गंभीर आवश्यकता है, जैसे जीवन पर खतरा आदि।

ये सरकार जाएगी, फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत', राहुल गांधी का हमला

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश का सियासी पारा हाई है। विपक्ष लगातार सीईसी पर हमलावर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक टकराव के बीच विपक्षी गठबंधन लगातार हमलावर है।इसी बीच लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए एक बार फिर ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'ज्ञानेश कुमार जाएंगे। यह सरकार जाएगी। फिर शुरू होगी लोकतंत्र की मरम्मत।' राहुल गांधी का यह बयान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष के जारी विरोध प्रदर्शन के बीच आया है।

मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी-राहुल गांधी

इससे पहले शुक्रवार को राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार से भी कहीं ज़्यादा गंभीर समस्या है और इसके लिए मौजूदा सरकार को हटाना जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर विपक्ष ने पिछले कुछ दिनों की तरह ही दबाव बनाना जारी रखा, तो सरकार गिर जाएगी। गांधी ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में इंडिया ब्लॉक के सांसदों से कहा था कि विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों ने इस सरकार की नींव हिला दी है और अब वह डरी हुई है।

राष्ट्रपति से मिला विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल

वहीं, शुक्रवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका से जुड़ी अपनी चिंताओं को उठाया।

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का बड़ा आरोप, कारोबारियों को घेरा तो सरकार ने दिया जवाब

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भारत में स्टारलिंक की एंट्री को लेकर दुनिया के सबसे रईस लोगों में एलन मस्क ने बड़ा गंभीर आरोप लगाया है। मस्क का दावा है कि कुछ ताकतवर कारोबारी स्टारलिंक को भारत में आने से रोक रहे हैं। मस्क का कहना है कि ये कारोबारी अपनी मोनोपॉली बनाए रखना चाहते हैं। भारत के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। अब भारत सरकार ने इसका जवाब दिया है।

एक्स पर एलन मस्क ने क्या लिखा?

मस्क ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म 'एक्‍स' पर एक पोस्ट में कहा, 'दुर्भाग्य से कुछ ताकतवर उद्योगपति भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखने के लिए हमें रोक रहे हैं। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं...'। टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख ने आगे कहा, 'यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है!' उन्होंने उन लोगों या कंपनियों का नाम नहीं लिया जिन पर उन्होंने भारतीय बाजार में स्टारलिंक की एंट्री को रोकने का आरोप लगाया।

सरकार ने दिया ये जवाब

केंद्रीय संचार मंत्रालय ने गुरुवार को मस्क का नाम न लेते हुए एक पोस्ट के जरिए कहा कि भारत में सभी टेलीकॉम और सैटेलाइट सेवाओं के लिए समान और पारदर्शी नियम हैं। यानी कि नियम सभी कंपनियों के लिए एक हैं। भारत में इस वक्त सैटेलाइट इंटरनेट की सर्विस देने के लिए तीन टेलीकॉम कंपनियों को लाइसेंस दिए गए हैं। इनमें से एक है रिलायंस जियो, दूसरी कंपनी है भारती एयरटेलऔर तीसरी कंपनी खुद एलन मस्क की है- स्टारलिंक।

सरकार ने बताया कि लाइसेंस की शर्तों के मुताबिक, हर कंपनी के लिए यह साबित करना जरूरी है कि वह भारत की सुरक्षा और यूजर्स के डेटा की गोपनीयता से जुड़ी गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन कर रही है और इस वक्त इन तीनों ही कंपनियों के सुरक्षा मानकों की जांच चल रही है। अब जैसे ही कोई कंपनी सुरक्षा जांच की इस प्रक्रिया को पूरा कर लेगी, उसे स्पेक्ट्रम अलॉटमेंट के अगले चरण में जाने की इजाजत दे दी जाएगी इसलिए भारत के सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विस के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की निष्पक्षता पर सवाल उठाना अनुचित, पूरी तरह से बेबुनियाद और गलतफहमी पर आधारित है।

चर्चा में बंगाल की IPS अफसर बुशरा बानो, 'अस्सलामु अलैकुम' कहने पर ट्रांसफ़र का आरोप, जानें पूरा मामला

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पश्चिम बंगाल की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो का ट्रांसफर पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। बीते दिनों सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उनके 'अस्सलामु अलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जज़ाकल्लाह' जैसे इस्लामी अभिवादन और शब्दों के इस्तेमाल को लेकर विवाद हुआ। इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया।

वायरल वीडियो से ट्रांसफर का कनेक्शन!

14 सितंबर को होम एंड हिल अफेयर्स डिपार्टमेंट के तहत पुलिस सर्विस सेल ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। IPS अधिकारी डॉ. बुशरा बानो पश्चिम मेदिनीपुर के खड़गपुर में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के तौर पर काम कर रही थीं। उनका ट्रांसफर कर दिया गया है। उन्हें स्टेट आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन का डिप्टी कमांडेंट नियुक्त किया गया है। इससे पहले 13 सितंबर को बानो ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया था, जिससे काफी बवाल मचा था। उनका ट्रांसफर इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो के ट्रांसफर पर पूर्व क्रिकेटर और सांसद मोहम्मद अजहरुद्दीन सवाल उठाए। उन्होंने कहा- यह बेहद ही चिंताजनक है कि 'अस्सलाम वालेकुम' और 'इंशाल्लाह' कहने पर एक आईपीएस अधिकारी का तबादला कर दिया गया। उन्होंने आगे लिखा- जब अभिवादन किसी लोक सेवक को निशाना बनाने का आधार बन जाता है तो हमें यह सवाल पूछना चाहिए कि हम अल्पसंख्यकों को किस तरह का मैसेज दे रहे हैं? भारत की ताकत उसकी विविधता में है न कि पहचान पर नियंत्रण रखने में।

सरकार ने कहा- 'रूटीन ट्रांसफ़र'

हालांकि, सरकार ने इसे 'रूटीन ट्रांसफ़र' बता रही है। लेकिन इंडियन सेक्युलर फ़्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीक़ी का आरोप है कि बुशरा बानो को गलत तरीके से 'गैरेज पोस्टिंग' दी गई है। यानी उन्हें ऐसी ज़िम्मेदारी दी गई है, जिसे उनकी पिछली पोस्टिंग की तुलना में कम अहम माना जा रहा है।

क्या था बुशरा बानो के वीडियो में

बुशरा बानो ने UPSC की तैयारी करने वालों का हौसला बढ़ाया था। इसे लेकर उन्होंने एक वीडियो बनाया। 13 सितंबर के वीडियो में, 2021 बैच की IPS अधिकारी बानो ने बताया था कि कैसे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की रेजिडेंशियल कोचिंग एकेडमी ने उन्हें UPSC की तैयारी में मदद की। इस वीडियो में उनकी बातों को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि वर्दी पहने एक सरकारी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर 'अस्सलामु अलैकुम', 'इंशाअल्लाह' और 'जज़ाकल्लाह' जैसे धार्मिक शब्दों का इस्तेमाल कर सकती हैं या नहीं।

প্রধানমন্ত্রীর জন্মদিনে প্রথম 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালন রাজ্যে, বাল্যবিবাহ ও মাদকের বিরুদ্ধে জিরো টলারেন্সের হুঁশিয়ারি মুখ্যমন্ত্রীর

*কলকাতা, ১৭ সেপ্টেম্বর:* প্রধানমন্ত্রী নরেন্দ্র মোদীর জন্মদিন উপলক্ষ্যে রাজ্যজুড়ে প্রথমবার 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালন করা হলো। 'অন্নপূর্ণা দিবস' পালনের মঞ্চ থেকেই রাজ্যের সামাজিক সংস্কারের বার্তা দিলেন  মুখ্যমন্ত্রী শুভেন্দু অধিকারী।

তিনি বলেন, "এই সরকার শুধু ভাতা দিতে আসেনি, এই রাজ্যে সংস্কার করতে এসেছে।" ভাতা ও আর্থিক সহায়তার পাশাপাশি বেআইনি মাদক ব্যবসা বন্ধ এবং বাল্যবিবাহের মতো সামাজিক ব্যাধি নির্মূলে জিরো টলারেন্স নীতি নেওয়ার কথা ঘোষণা করেন তিনি।

*বাল্যবিবাহ রুখতে কড়া পদক্ষেপ:*
শুভেন্দু অধিকারী জানান, গত ছয় মাসে রাজ্যে প্রায় ৬০ হাজার বাল্যবিবাহ ও টিনএজ ডেলিভারির ঘটনা ঘটেছে, যার মধ্যে মুর্শিদাবাদে ১৩ হাজার এবং দক্ষিণ ২৪ পরগনায় ৭ হাজার। তিনি হুঁশিয়ারি দেন, ১৮ বছরের নিচে মেয়েদের বিয়ে দিলে অভিভাবকদের পাশাপাশি বিয়ে দেওয়া কাজি কিংবা পুরোহিতকেও জেল যেতে হবে। পাশাপাশি রাজ্যকে নেশামুক্ত করতে সমস্ত বেআইনি মাদক কেন্দ্র গুঁড়িয়ে দেওয়ার ডাক দেন তিনি।

*মহিলাদের জন্য বড় ঘোষণা:*
প্রধানমন্ত্রীর গ্যারান্টি অনুযায়ী চালু হওয়া 'অন্নপূর্ণা যোজনা'য় ইতিমধ্যেই ১ কোটি ৬০ লক্ষ মহিলার ব্যাঙ্ক অ্যাকাউন্টে সরাসরি টাকা পাঠানো শুরু হয়েছে বলে দাবি করেন তিনি।

- *বেতন বৃদ্ধি:* আগস্ট থেকে ICDS ও আশা কর্মীদের বেতন ৫,০০০ টাকা বাড়ানো হয়েছে। প্রাণীমিত্রাদের বেতন ২,০০০ টাকা বাড়িয়ে তাঁদেরও অন্নপূর্ণা যোজনার আওতায় আনা হয়েছে। ৬০ বছরের ঊর্ধ্বে বিধবা মহিলাদের পেনশন ১,০০০ থেকে বাড়িয়ে ১,৫০০ টাকা করা হয়েছে।
- *শিক্ষা ও পুষ্টি:* ICDS কেন্দ্রে গর্ভবতী মায়েদের খাদ্য বরাদ্দ ১২ টাকা থেকে ১৪ টাকা করা হয়েছে। ১৪ আগস্ট 'কন্যারাষ্ট্র দিবসে' ২০ লক্ষ ১৩ হাজার ছাত্রীর অ্যাকাউন্টে ১,০০০ টাকা করে পাঠানো হয়েছে, যা ২০২৭ সালে ২,০০০ টাকা করা হবে। স্নাতক স্তরের ছাত্রীদের জন্য তিন বছরে মোট ৫০,০০০ টাকার আর্থিক সহায়তা দেওয়া হবে।
- *আবাস ও নিরাপত্তা:* প্রধানমন্ত্রী আবাস যোজনায় নতুন ৫০ লক্ষ বাড়ির মালিকানা মহিলাদের নামে দেওয়া হবে। নারী সুরক্ষায় হাইকোর্টের অবসরপ্রাপ্ত বিচারপতি সমাপ্তি চট্টোপাধ্যায় ও IPS দময়ন্তী সেনের নেতৃত্বে বিশেষ কমিশন গঠনের কথা জানান তিনি।

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राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

JPSC परीक्षा विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को नोटिस

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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जेपीएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में 19 अप्रैल 2026 को आयोजित 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और व्यापक जांच कराने के साथ परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा आयोजित करने की मांग की गई है।

जेपीएससी के अलावा कई परीक्षाओं में गड़बड़ी

सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि झारखंड में छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि क्या मामला कई परीक्षाओं से जुड़ा है। वकील ने बताया कि एक मामला जेपीएससी और दूसरा झारखंड स्टाफ सेलेक्शन कमीशन (जेएसएससी) की परीक्षा से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा का भी जिक्र हुआ। सीजेआई ने पूछा कि क्या ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा भी लोक सेवा आयोग कराता है। कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू को भी देखेगा कि यह परीक्षा कैसे आयोजित होती है।

याचिका में क्या हैं मांगे

याचिकाकर्ता ने झारखंड के बाहर के किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित समिति में फोरेंसिक विज्ञान, आईटी, परीक्षा सुरक्षा, OMR मूल्यांकन, साइबर सुरक्षा और लोक प्रशासन के विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। इसके साथ ही OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग भी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

याचिका दो जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद सामने आए विवाद के बीच दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, एक सफल उम्मीदवार की OMR उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी वायरल होने के बाद परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर सवाल उठे। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित उम्मीदवार ने प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से केवल 48 सवालों के जवाब दिए थे, इसके बावजूद उसे सफल घोषित किया गया। इन कथित अनियमितताओं को लेकर रांची में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे।

झारखंड में छात्रों का आंदोलन खत्म, सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम, जांच नहीं होने पर फिर होगा जुटान

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झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। सरकार की ओर से छात्रों की लगभग सभी प्रमुख मांगें मान लिए जाने के बाद राजधानी के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 25 जुलाई से जारी आंदोलन खत्म हो गया।

सरकार को दो महीने का अल्टीमेटम

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने मंगलवार को आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया। इससे एक दिन पहले सोमवार देर शाम देवेंद्रनाथ गुट ने भी अपना आंदोलन खत्म कर दिया था। अब छात्रों ने राज्य सरकार को मामले की उच्चस्तरीय जांच पूरी करने के लिए दो महीने का समय दिया है। मंच ने साफ कर दिया है कि अगर तय समय में निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र फिर बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और इस बार सीबीआई जांच उनकी मुख्य मांग होगी।

जांच पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का फैसला लिया गया। छात्रों का कहना है कि राज्य सरकार ने उनकी मांगों को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं, इसलिए उसे मामले की जांच पूरी करने के लिए थोड़ा समय दिया जाना चाहिए। छात्रों ने कहा कि सरकार को दो महीने के भीतर जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो मंच दोबारा बड़ी संख्या में छात्रों को एकजुट करेगा और राजधानी रांची में जोरदार आंदोलन किया जाएगा। उस समय सीबीआई जांच की मांग आंदोलन का मुख्य मुद्दा होगी।

25 जुलाई से धरने पर बैठे थे छात्र

बता दें कि छात्र पिछले 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आंदोलन झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहा था। लगातार कई दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत का रास्ता खुला और सरकार ने छात्रों की कई प्रमुख मांगों को स्वीकार किया।

ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, पूरा देश देखेगा’ केंद्र के माइनिंग बिल पर सीएम हेमंत की चेतावनी

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केंद्र सरकार के खान और खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ झारखंड सरकार ने मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। सीएम हेमंत सोरेन ने आंदोलन के ऐलान एक्स पर किए एक पोस्ट में दी।

हेमंत सोरेन ने पूछा- हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम हेमंत सोरेन ने लिखा, झारखंड ऐसा बड़ा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा- खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?

सीएम सोरेन ने बताई आंदोलन की वजह

अपने पोस्ट में सीएम सोरेन ने आंदोलन की वजह भी बताई। उन्होंने लिखा कि लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जल्दबाजी में खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पास करा केंद्र सरकार ने झारखंड के हाथ-पैरों को काटने का काम किया है। यह काला बिल झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय है, उनके विकास और भविष्य पर बहुत बड़ा कुठाराघात है। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। सीएम ने पोस्ट में यह भी लिखा कि इस बिल के कारण झारखंड में करोड़ों लोगों के सामाजिक सुरक्षा जैसे मईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदि योजनाएं बंद होने के कगार पर आ जाएगी।

हर जिला-प्रखंड और पंचायत में होगा कड़ा विरो- हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने लिखा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इसका पुरजोर विरोध करता है। पोस्ट के आखिर में सीएम हेमंत ने लिखा कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक प्रखंड, प्रत्येक पंचायत, प्रत्येक शहर में इसका कड़ा विरोध किया जाएगा। अगर केंद्र सरकार नहीं चेती, और झारखंड तथा झारखंडियों को उसका हक-अधिकार वापस नहीं किया गया तो झारखंड निर्णायक और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने से पीछे भी नहीं हटेगा।

माइनिंग बिल के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सांसदों, विधायकों और पार्टी कोटे से सरकार में शामिल मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की गई।

10 साल में 152 पेपर लीक...', राहुल गांधी ने सरकार को घेरा, धर्मेंद्र प्रधान का मांगा इस्तीफा

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नीट पेपर लीक और इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की अगुवाई में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राहुल गांधी केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को इस संबंध में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

लोकसबा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक बड़ी स्क्रीन पर 20 जुलाई के कुछ फुटेज दिखाए और कहा कि सुरक्षाबलों ने छात्रों के साथ बर्बरता की है। उन्होंने कहा, छात्र शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। वे सिर्फ एक निष्पक्ष शिक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का हक है कि उन्हें ऐसी व्यवस्था मिले, जहां मेहनत और योग्यता का सम्मान हो। लेकिन उन्हें सुरक्षा बलों की सख्ती का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस ने छात्रों पर अत्याचार किया है।

10 वर्षों में 152 बार पेपर लीक-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया की सबसे बेहतर व्यवस्थाओं में गिनी जाती थी, लेकिन अब यह पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में 152 बार प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, यानी औसतन हर महीने एक पेपर लीक हुआ। उन्होंने कहा कि हर बार लाखों छात्रों को फिर से परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है और उन्हें दोबारा उसी मानसिक दबाव से गुजरना पड़ता है।

धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के तौर पर फेल-राहुल गांधी

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की इस परेशानी को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि करीब 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार इन घटनाओं से प्रभावित हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की है। नीट परीक्षा पर खर्च शिक्षा के बजट के बराबर। 1.32 लाख करोड़ रुपये नीट पर छात्र खर्च करते हैं। 1.4 लाख करोड़ रुपये शिक्षा बजट है। धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के तौर पर फेल हैं।

राहुल गांधी की तीन प्रमुख मांगें

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन मांगें रखी। उन्होंने कहा, 'पहली मांग- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। दूसरा- छात्रों पर बर्बरता करने वालों को सजा हो। ये आतंकवादी नहीं है, हमारे देश के छात्र हैं। तीसरी मांग- पीएम मोदी खेद जताएं।

आसाराम को अंतरिम राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, राजस्थान सरकार को जारी किया नोटिस

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धर्मगुरु आसाराम बापू को र नाबालिग दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। अदालत ने आसाराम की विशेष अनुमति याचिका पर नोटिस जारी करते हुए राजस्थान सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट का जमानत देने से इनकार

शीर्ष अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और कहा है कि यदि आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर होती है या जान को खतरा होता है, तभी जमानत पर विचार किया जाएगा। याचिका में उन्होंने 2013 में एक नाबालिग के रेप केस में हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी सजा और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।

पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और शील नागू शामिल हैं। इस बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभी जमानत पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि पहले राज्य सरकार का पक्ष सुना जाएगा और उसके बाद ही आगे विचार किया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि जमानत के मामलों में यह देखा जाता है कि क्या कोई गंभीर आवश्यकता है, जैसे जीवन पर खतरा आदि।