भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मैं दखल न देता तो खतरे में थी शहबाज शरीफ की जान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूकवाने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। कांग्रेस के जॉइंट सेशन में भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया है। यह न्यूक्लियर वॉर हो सकती थी, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाते। अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मारे जाते।

10 महीनों में आठ युद्ध रोकने का दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए फिर भारत और पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए।

‘35 मिलियन लोग मारे गए होते’

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। उन्होंने देश की संसद में दावा किया कि शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर वह दखल नहीं देते तो पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 35 मिलियन लोग मारे गए होते।

बार-बार भारत-पाक जंग रूकवाने का दावा

ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को लेकर इस तरह का दावा किया है। हां, शहबाज शरीफ को लेकर ये दावा बिल्कुल नया है। हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान टकराव को रोका है। उन्होंने लगातार कहा है कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ़ उपायों का इस्तेमाल किया।

भारत ने हमेशा ट्रंप के दावों को नकारा

हालांकि, भारत ने हमेशा से डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकारा है। जबकि पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान युद्ध रूकवाने के लिए क्रेडिट दिया है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों बोर्ड ऑफ गाजा पीस के दौरान भी ट्रंप की तारिफ की थी और कहा था कि ट्रंप की वजह से 35 मिलियन लोगों की जान बच गई।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को लगा झटका, तिलमिलाए यूएस प्रेसिडेंट ने 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का किया ऐलान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को पलट दिया है। इसके बाद से ट्रंप भड़के हुए हैं। ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत दुनिया पर 10 परसेंट टैरिफ लगाया है।

मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश साइन किया। यह शुल्क मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा और 24 फरवरी से लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ट्रंप का फैसला

ट्रंप ने यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद उठाया है, जिसमें टॉप कोर्ट ने दुनिया भर में लगाए गए उनके टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए टैरिफ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर हस्ताक्षर कर दिया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा।' ट्रंप की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए वॉइट हाउस के एक्स हैंडल पर लिखा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया है।

भारत समेत सभी देशों पर असर

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत सहित सभी देशों पर यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा। यह पहले से वसूले जा रहे शुल्कों के ऊपर जोड़ा जाएगा। यानी मौजूदा टैरिफ के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त देना होगा।

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

क्या भारत पर लगेगा 500% टैरिफ? रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रंप के मंत्री का बड़ा बयान

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भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर बयान दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन उन देशों पर 500 प्रतिशत तक का कड़ा दंडात्मक शुल्क लगाने पर विचार रहा है, जो अभी भी रूसी कच्चा तेल खरीद रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस बार टैरिफ की धमकी का मुख्य निशाना चीन है, न कि भारत। बेसेंट ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है।

भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया?

स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है और उसे बंद कर दिया है।'

धमकी का मुख्य निशाना चीन

स्कॉट बेसेंट ने चीन पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन चीन जैसे अन्य खरीदारों पर कहीं ज्यादा बड़ा दंड लगाने पर विचार कर रहा है। स्कॉट बेसेंट ने चीन को रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बताया और कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर 500% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है क्योंकि वह रूस से सस्ता तेल खरीदकर युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है।

रूसी तेल खरीदने वालों पर 500 प्रतिशत टैरिफ प्रस्ताव

रूस प्रतिबंध बिल पर बेसेंट ने कहा, रूसी तेल खरीदने वालों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेट (लिंडसे) ग्राहम ने सीनेट के सामने रखा है। हमें नहीं लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप को उस अथॉरिटी की जरूरत है। वह IEPA के तहत ऐसा कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्हें अधिकार देना चाहती है।

रूस प्रतिबंध बिल पर ट्रंप की सहमति

अमेरिकी सीनेट में रखे गए बिल को ट्रंप के करीबी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया है। इसमें रूसी तेल खरीदने वाले पर देशों से आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाने की बात कही गई है। रूस प्रतिबंध बिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही अपनी सहमति जता दी है।

ट्रंप ने पीएम मोदी को भेजा पत्र, गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का भेजा आमंत्रण*

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है।

डोनाल्‍ड ट्रंप के बेहद भरोसेमंद और भारत में अमेर‍िका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया में शेयर की है। पत्र में लिखा है, “भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे आपको मध्य पूर्व में शांति को सुदृढ़ करने और साथ ही वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण को अपनाने के इस ऐतिहासिक और भव्य प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है”।

गाजा पीस समझौता 20 सूत्री प्रस्ताव पर आधारित

ट्रंप ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने की एक व्यापक योजना की अपनी 29 सितंबर की घोषणा का उल्लेख किया है। “29 सितंबर, 2025 को, मैंने गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा की, जो एक असाधारण 20-सूत्रीय रोडमैप है जिसे अरब जगत, इजराइल और यूरोप के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों सहित सभी विश्व नेताओं ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए, 17 नवंबर को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से संकल्प 2803 पारित किया, जिसमें इस दृष्टिकोण का स्वागत और समर्थन किया गया”।

सपनों को वास्तविकता में बदलने का समय

ट्रंप ने लिखा, “अब समय आ गया है कि इन सभी सपनों को वास्तविकता में बदला जाए। योजना के केंद्र में शांति बोर्ड है, सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बोर्ड, जिसे एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और संक्रमणकालीन शासी प्रशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा”।

बोर्ड ऑफ पीस में इनके नाम शामिल

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन, अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल का नाम है। इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को हर हाल में क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस द्वीप पर कब्जे की धमकी दे चुके हैं। वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप खेल कर चुके हैं। निकोलस मादुरो को उठवाकर अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना कब्जा जमा चुका है। अब अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है।

रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।'

डेनमार्क के दावे पर उठाया सवाल

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता। हमने भी कई नावें भेजी थीं। लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं।'

ट्रंप को किस बात का सता रहा डर

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चीन या रूस वहां अपनी मजबूत मौजूदगी बना सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। मौजूदा सैन्य समझौते अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

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बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।

भारत-पाक तनाव पर ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- मैं दखल न देता तो खतरे में थी शहबाज शरीफ की जान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आए दिन भारत-पाकिस्तान संघर्ष रूकवाने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने एक बार फिर दोनों देशों को लेकर चौंकाने वाला दावा किया है। कांग्रेस के जॉइंट सेशन में भारत और पाकिस्तान संघर्ष पर ट्रंप ने फिर कहा कि भारत और पाकिस्तान का युद्ध उन्होंने रुकवाया है। यह न्यूक्लियर वॉर हो सकती थी, करीब साढ़े तीन करोड़ लोग मारे जाते। अगर मैं इसमें शामिल नहीं होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मारे जाते।

10 महीनों में आठ युद्ध रोकने का दावा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी संसद में संबोधन देते हुए फिर भारत और पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अपने कार्यकाल के पहले 10 महीनों में उन्होंने आठ युद्ध समाप्त किए।

‘35 मिलियन लोग मारे गए होते’

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर हो गए थे कि स्थिति परमाणु संघर्ष तक पहुंच सकती थी। उन्होंने देश की संसद में दावा किया कि शहबाज़ शरीफ ने उनसे कहा था कि अगर वह दखल नहीं देते तो पिछले साल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में 35 मिलियन लोग मारे गए होते।

बार-बार भारत-पाक जंग रूकवाने का दावा

ये पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष को लेकर इस तरह का दावा किया है। हां, शहबाज शरीफ को लेकर ये दावा बिल्कुल नया है। हाल के महीनों में डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि उन्होंने ही भारत-पाकिस्तान टकराव को रोका है। उन्होंने लगातार कहा है कि उनके एडमिनिस्ट्रेशन ने दोनों देशों को तनाव बढ़ाने से रोकने के लिए ट्रेड एग्रीमेंट और टैरिफ़ उपायों का इस्तेमाल किया।

भारत ने हमेशा ट्रंप के दावों को नकारा

हालांकि, भारत ने हमेशा से डोनाल्ड ट्रंप के दावों को नकारा है। जबकि पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को भारत-पाकिस्तान युद्ध रूकवाने के लिए क्रेडिट दिया है। पाकिस्तान ने डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया है। शहबाज शरीफ ने पिछले दिनों बोर्ड ऑफ गाजा पीस के दौरान भी ट्रंप की तारिफ की थी और कहा था कि ट्रंप की वजह से 35 मिलियन लोगों की जान बच गई।

सुप्रीम कोर्ट से ट्रंप को लगा झटका, तिलमिलाए यूएस प्रेसिडेंट ने 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ का किया ऐलान

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ लगाने के फैसले को पलट दिया है। इसके बाद से ट्रंप भड़के हुए हैं। ट्रंप ने सेक्शन 122 के तहत दुनिया पर 10 परसेंट टैरिफ लगाया है।

मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए सभी देशों पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सभी देशों पर 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश साइन किया। यह शुल्क मौजूदा टैरिफ के अतिरिक्त होगा और 24 फरवरी से लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ लगभग तुरंत प्रभाव से लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ट्रंप का फैसला

ट्रंप ने यह कदम अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ घंटे बाद उठाया है, जिसमें टॉप कोर्ट ने दुनिया भर में लगाए गए उनके टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नए टैरिफ के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लिखा, 'यह मेरे लिए बहुत गर्व की बात है कि मैंने ओवल ऑफिस से सभी देशों पर ग्लोबल 10% टैरिफ पर हस्ताक्षर कर दिया है, जो लगभग तुरंत लागू होगा।' ट्रंप की पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए वॉइट हाउस के एक्स हैंडल पर लिखा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया है।

भारत समेत सभी देशों पर असर

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि भारत सहित सभी देशों पर यह 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा। ट्रंप ने कहा कि यह टैरिफ अगले 150 दिनों तक लागू रहेगा। यह पहले से वसूले जा रहे शुल्कों के ऊपर जोड़ा जाएगा। यानी मौजूदा टैरिफ के अलावा 10 प्रतिशत अतिरिक्त देना होगा।

हां मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन…”, दावोस में ट्रंप का सनसनीखेज कबूलनामा

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और उनके आक्रामक अंदाज से वैश्विक स्तर पर हलचल मची हुई है। डोनाल्ड ट्रंप जबसे दोबारा सत्ता में आए हैं, उन्होंने अपने फैसलों और बयानों से पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। वेनेजुएला और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर अमेरिका के रुख के बाद ट्रंप पर तानाशाही रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने खुद को लेकर चौंकाने वाला बयान दिया है।

स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को ‘तानाशाह’ बताया है। हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी जोड़ दिया कि हर हाल में नहीं, लेकिन कभी-कभी तानाशाह होना जरूरी हो जाता है।

कभी-कभी एक तानाशाह की जरूरत होती है-ट्रंप

डब्ल्यूईएफ को संबोधित करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण पर आई प्रतिक्रियाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके भाषण को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। ट्रंप ने कहा, “हमने एक अच्छा भाषण दिया, हमें बहुत अच्छे रिव्यू मिले। मुझे खुद इस पर भरोसा नहीं हो रहा है।” अपनी आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा, “आमतौर पर लोग कहते हैं कि वह एक भयानक तानाशाह जैसा व्यक्ति है। हां, मैं एक तानाशाह हूं, लेकिन कभी-कभी आपको एक तानाशाह की जरूरत होती है।”

अपने फैसलों को लेकर क्या बोले ट्रंप?

ट्रंप ने अपने फैसलों को लेकर कहा, “उनके फैसले किसी विचारधारा से नहीं, बल्कि सामान्य समझ से निकलते हैं। यह न तो कंजरवेटिव है, न लिबरल। यह करीब 95 फीसदी कॉमन सेंस पर आधारित है।”

उनके इरादों को गलत समझा जाता है-ट्रंप

इससे पहले भी ट्रंप ने माना कि उनकी भाषा कई बार तनाव पैदा करती है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके इरादों को गलत समझा जाता है। उन्होंने कहा, “लोगों को लगा कि मैं ताकत का इस्तेमाल करूंगा। लेकिन मुझे ताकत इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है। मैं ताकत नहीं चाहता और न ही करूंगा।”

क्या भारत पर लगेगा 500% टैरिफ? रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रंप के मंत्री का बड़ा बयान

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भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका ने एक बार फिर बयान दिया है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वॉशिंगटन उन देशों पर 500 प्रतिशत तक का कड़ा दंडात्मक शुल्क लगाने पर विचार रहा है, जो अभी भी रूसी कच्चा तेल खरीद रहे हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि इस बार टैरिफ की धमकी का मुख्य निशाना चीन है, न कि भारत। बेसेंट ने दावा किया कि ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद कर दी है।

भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया?

स्कॉट बेसेंट ने मंगलवार को दावा किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना बंद कर दिया है। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल खरीदना शुरू किया। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से 25 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है और उसे बंद कर दिया है।'

धमकी का मुख्य निशाना चीन

स्कॉट बेसेंट ने चीन पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन चीन जैसे अन्य खरीदारों पर कहीं ज्यादा बड़ा दंड लगाने पर विचार कर रहा है। स्कॉट बेसेंट ने चीन को रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार बताया और कहा कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर 500% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है क्योंकि वह रूस से सस्ता तेल खरीदकर युद्ध को आर्थिक मदद दे रहा है।

रूसी तेल खरीदने वालों पर 500 प्रतिशत टैरिफ प्रस्ताव

रूस प्रतिबंध बिल पर बेसेंट ने कहा, रूसी तेल खरीदने वालों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सीनेट (लिंडसे) ग्राहम ने सीनेट के सामने रखा है। हमें नहीं लगता कि राष्ट्रपति ट्रंप को उस अथॉरिटी की जरूरत है। वह IEPA के तहत ऐसा कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्हें अधिकार देना चाहती है।

रूस प्रतिबंध बिल पर ट्रंप की सहमति

अमेरिकी सीनेट में रखे गए बिल को ट्रंप के करीबी रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने तैयार किया है। इसमें रूसी तेल खरीदने वाले पर देशों से आने वाले सामान पर 500 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाने की बात कही गई है। रूस प्रतिबंध बिल पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही अपनी सहमति जता दी है।

ट्रंप ने पीएम मोदी को भेजा पत्र, गाजा बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का भेजा आमंत्रण*

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा शांति बोर्ड का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है।

डोनाल्‍ड ट्रंप के बेहद भरोसेमंद और भारत में अमेर‍िका के राजदूत सर्जियो गोर ने इसकी जानकारी सोशल मीडिया में शेयर की है। पत्र में लिखा है, “भारत गणराज्य के प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे आपको मध्य पूर्व में शांति को सुदृढ़ करने और साथ ही वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण को अपनाने के इस ऐतिहासिक और भव्य प्रयास में शामिल होने के लिए आमंत्रित करते हुए अत्यंत गर्व हो रहा है”।

गाजा पीस समझौता 20 सूत्री प्रस्ताव पर आधारित

ट्रंप ने गाजा संघर्ष को समाप्त करने की एक व्यापक योजना की अपनी 29 सितंबर की घोषणा का उल्लेख किया है। “29 सितंबर, 2025 को, मैंने गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा की, जो एक असाधारण 20-सूत्रीय रोडमैप है जिसे अरब जगत, इजराइल और यूरोप के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों सहित सभी विश्व नेताओं ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इस योजना को आगे बढ़ाते हुए, 17 नवंबर को, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से संकल्प 2803 पारित किया, जिसमें इस दृष्टिकोण का स्वागत और समर्थन किया गया”।

सपनों को वास्तविकता में बदलने का समय

ट्रंप ने लिखा, “अब समय आ गया है कि इन सभी सपनों को वास्तविकता में बदला जाए। योजना के केंद्र में शांति बोर्ड है, सबसे प्रभावशाली और महत्वपूर्ण बोर्ड, जिसे एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और संक्रमणकालीन शासी प्रशासन के रूप में स्थापित किया जाएगा”।

बोर्ड ऑफ पीस में इनके नाम शामिल

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों की सूची जारी की। यह बोर्ड गाजा में शांति, स्थिरता, पुनर्निर्माण और लंबे समय तक विकास की निगरानी करेगा। इस बोर्ड के चेयरमैन खुद डोनाल्ड ट्रंप होंगे। व्हाइट हाउस के अनुसार, बोर्ड में कई बड़े और प्रभावशाली नाम शामिल हैं, जिनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन, अमेरिका के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल का नाम है। इसके अलावा, तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान और कतर के राजनयिक अली अल थवाड़ी को भी गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड में शामिल किया गया है।

आखिर ट्रंप को मिला नोबेल पुरस्कार! वेनेजुएला की विपक्षी नेता मचाडो ने अपना अवार्ड किया भेंट

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वेनेजुएला की विपक्ष की नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अपना नोबेल शांति पुरस्कार मेडल डोनाल्ड ट्रंप को भेंट किया है। मचाडो ने अपने देश के भविष्य पर चर्चा के लिए गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से वॉइट हाउस में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रतीकात्मक तौर पर अपना नोबेल शांति पुरस्कार दिया।

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दक्षिणी अमेरिकी देश में उथल पुथल है। ऐसे में वेनेजुएलाई नेता मारिया माचाडो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात किया। उन्होंने दावा किया कि मीटिंग में उन्होंने ट्रंप को अपना नोबेल शांति पुरस्कार पदक भेंट किया। मुलाकात के बाद मचाडो ने कहा, मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति को नोबेल शांति पुरस्कार मेडल पुरस्कार दिया। उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के प्रति उनकी (ट्रंप) अनोखी प्रतिबद्धता के पहचान के तौर पर उठाया गया कदम बताया।

मचाडो ने क्या कहा?

मेडल देने के बारे में जानकारी देते हुए मचाडो ने लैटिन अमेरिका के महान क्रांतिकारी सिमोन बोलिवर का एक किस्सा सुनाया। मचाडो ने कहा कि दो साल पहले जनरल (मार्क्विस डी) लायाफेट ने सिमोन बोलिवर को एक मेडल दिया था, जिस पर जॉर्ज वॉशिंगटन का चेहरा बना हुआ था। बोलिवर ने वह मेडल अपनी बाकी जिंदगी अपने पास रखा। उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में दो साल बाद, बोलिवर के लोग वॉशिंगटन के वारिस को एक मेडल वापस दे रहे हैं। इस बार नोबेल शांति पुरस्कार का मेडल, हमारी आजादी के प्रति उनकी अनोखी प्रतिबद्धता की पहचान के तौर पर।

ट्रंप ने नोबेल स्वीकार किया या नहीं?

हालांकि, मचाडो ने यह नहीं बताया कि क्या डोनाल्ड ट्रंप ने उनका नोबेल स्वीकार किया या नहीं। वहीं, नोबेल शांति पुरस्कार देने वाली संस्था पहले ही साफ कर चुकी है कि नियमों के अनुसार पुरस्कार को हस्तांतरित या साझा नहीं किया जा सकता है।

ट्रंप को नोबेल पुरस्कार की ख्वाहिश

बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चाहत है कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिले। वह साल 2025 में नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर कई बार बयान भी दे चुके थे। उन्होंने उस दौरान कहा था कि वह भारत-पाकिस्तान सैन्य झड़प सहित कई जंग रोके, इसलिए वह शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन, उनके दावों को खारिज करते हुए नोबेल पीस प्राइज समिति ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को चुना। अब मारिया ने ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार भेंट किया है।

ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर लगाया 25% टैरिफ, जानें भारत पर क्या होगा असर?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि जो भी देश ईरान से कारोबार करेगा, उस पर अमेरिका टैरिफ बढ़ाएगा। इस कदम को ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

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डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा, 'ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को तत्काल प्रभाव से अमेरिका के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के व्यापार पर 25 प्रतिशत का टैरिफ देना होगा।'

भारत और चीन होंगे प्रभावित

ट्रंप के इस फैसले का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ सकता है, जिनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। भारत पर अमेरिका ने पहले ही 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। नया टैरिफ भारत-अमेरिका के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत ईरान का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसलिए इस टैरिफ का सीधा असर हमारे देश पर पड़ सकता है। पहले से ही भारत पर अमेरिकी टैरिफ 50 फीसदी (बेसिक 25 फीसदी और रूसी तेल के लिए 25 फीसदी) है। अब अगर ट्रंप का यह 25 फीसदी ईरान वाला टैरिफ विशेष तौर पर भारत के साथ भी लगाया जाता है तो यह टैरिफ 75 फीसदी हो सकता है।

भारत-ईरान के बीच 1.68 अरब डॉलर का व्यापार

ईरान में भारतीय दूतावास के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि ईरान से 0.44 अरब डॉलर का आयात किया। इस तरह दोनों देशों के बीच कुल व्यापार 1.68 अरब डॉलर (करीब 14,000 से 15,000 करोड़ रुपये) रहा।

किन सामानों का सबसे ज्यादा कारोबार

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के ईरान को निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा ऑर्गेनिक केमिकल्स का रहा, जिसकी कीमत 512.92 मिलियन डॉलर थी। इसके बाद खाने योग्य फल, मेवे, खट्टे फलों के छिलके और खरबूजे करीब 311.60 मिलियन डॉलर के रहे। वहीं मिनरल फ्यूल, तेल और डिस्टिलेशन से जुड़े उत्पादों का कारोबार 86.48 मिलियन डॉलर का रहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का “एक्टिंग प्रेसिडेंट”, क्यूबा पर भी खास पोस्ट

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सनसनी मचा दी है। ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया, अब खुद को वेनेजुएला का कार्यकारी राष्ट्रपति तक घोषित कर डाला है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई कर और उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर पूरी दुनिया में भूचाल ला गया था। वहीं अब वेनेजुएला से जुड़ा एक पोस्ट कर नई सनसनी फैला दी है। अपने ट्रूथ सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट कर ट्रंप ने खुद को वेनेजुएला का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया है।

विकिपीडिया पर एडिट की हुई इमेज पोस्ट

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पोस्ट करते हुए डिजिटल रूप से बदली हुई तस्वीर शेयर किया है। ट्रुथ सोशल पर प्लेटफॉर्म पर डोनाल्ड ट्रंप ने विकिपीडिया के ऑफिशियल पेज के साथ यह एडिट की हुई इमेज पोस्ट की है, जिसमें उनका ऑफिशियल पोर्ट्रेट इस्तेमाल किया गया है। इसके नीचे "वेनेजुएला के एक्टिंग प्रेसिडेंट" लिखा हुआ है।

अमेरिका से वेनेजुएला सरकार का 'संचालन'

तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप को जनवरी 2026 तक वेनेजुएला के वर्तमान राष्ट्रपति के रूप में दर्शाया गया। बता दें कि वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने यह भी दावा किया कि है जब तक सुरक्षित, उचित और विवेकपूर्ण सत्ता हस्तांतरण सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अमेरिका वेनेजुएला सरकार का 'संचालन' करेगा।

क्यूबा को लेकर चौंकाने वाला दावा

इसी बीच ट्रंप ने एक और चौंकाने वाला कदम उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट रीशेयर की, जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो को क्यूबा का अगला राष्ट्रपति बताया गया था। ट्रंप ने एक पोस्ट शेयर किया जिसमें ऐसे दावे किए गए थे और कैप्शन में लिखा था, "मुझे यह अच्छा लग रहा है।"

इससे पहले एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला से क्यूबा को अब और तेल या पैसा नहीं जाएगा और दोनों देशों के बीच दूरी बनाए रखने में यूनाइटेड स्टेट्स की सेना शामिल होगी। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला को अब उन गुंडों और जबरन वसूली करने वालों से सुरक्षा की जरूरत नहीं है जिन्होंने उन्हें इतने सालों तक बंधक बनाकर रखा था। वेनेजुएला के पास अब यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका है, जो दुनिया की सबसे पावरफुल सेना है और हम उनकी रक्षा करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप को हर हाल में क्यों चाहिए ग्रीनलैंड?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा करना चाहते हैं। वह अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान कई बार डेनमार्क के नियंत्रण वाले इस द्वीप पर कब्जे की धमकी दे चुके हैं। वेनेजुएला में डोनाल्ड ट्रंप खेल कर चुके हैं। निकोलस मादुरो को उठवाकर अमेरिका वेनेजुएला के तेल भंडार पर अपना कब्जा जमा चुका है। अब अमेरिका की नजर ग्रीनलैंड पर है।

रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे-ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार देर रात फिर ग्रीनलैंड पर कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि अमेरिका को 'कुछ करना ही होगा', वरना रूस और चीन इस आर्कटिक क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे। ट्रंप ने साफ कहा, 'हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं बनने देंगे।'

डेनमार्क के दावे पर उठाया सवाल

तेल और गैस कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान ट्रंप ने डेनमार्क के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, '500 साल पहले वहां नाव उतारने से जमीन की मालिकाना हक नहीं मिलता। हमने भी कई नावें भेजी थीं। लेकिन हमें यह जमीन चाहिए क्योंकि ग्रीनलैंड के आसपास आज रूसी और चीनी जहाज और पनडुब्बियां मौजूद हैं।'

ट्रंप को किस बात का सता रहा डर

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो चीन या रूस वहां अपनी मजबूत मौजूदगी बना सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा होगा। रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। मौजूदा सैन्य समझौते अमेरिका के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

भारत पर अब 500 फीसदी टैरिफ लगाने की तैयारी में ट्रंप! रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे बिल को मंजूरी दे दी है, जिससे रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग हो सकती है। बिल को मंजूरी मिलने पर भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है।

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बिल पर अगले सप्ताह वोटिंग

सीनेटर ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ उनकी हालिया बैठक के बाद इस विधेयक को मंजूरी मिली। उन्होंने कहा कि यह बिल अगले सप्ताह तक वोटिंग के लिए पेश किया जा सकता है।इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) 500 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है।

रूसी तेल खरीदने वाले देशों को सजा देने की अनुमति

ग्राहम ने कहा कि यह बिल राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों को सजा देने की अनुमति देगा जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्राहम ने बताया कि इस बिल पर वह सीनेटर ब्लूमथल और कई दूसरे लोगों के साथ महीनों से काम कर रहे थे।

सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025

अमेरिकी कांग्रेस की आधिकारी वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बिल का नाम सैंक्शनिंग ऑफ रशिया एक्ट 2025 है। इसमें व्यक्तियों और संस्थाओं पर जुर्माने के साथ ही रूस से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों और सेवाओं पर ड्यूटी को कीमत के कम से कम 500% तक बढ़ाना शामिल है।