राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच अहम बैठक, TMC की अंदरूनी बगावत के बीच क्यों खास है ये मुलाकात

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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान ने सियासी तापमान बढ़ा रखा है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच मुलाकात हुई है। करीब डेढ़ घंटे तक चली मुलाकात ने नई अटकलों को जन्म दिया है।

टीएमसी में सियासी खींचतान के बीच मुलाकात

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नई दिल्ली में 10 जनपथ पर मुलाकात की।यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर कुछ नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए हैं।

कांग्रेस-चीएमसी संबंधों पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंधों को लेकर गंभीर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि भविष्य में दोनों दल भाजपा के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपना सकते हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले संभावित उपचुनावों में तालमेल या सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने का मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में रहा।

एक दिन पहले हुई थी ममता-सोनिया की मुलाकात

यह बैठक ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के ठीक एक दिन बाद हुई है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी के आवास पर जाकर उनसे बात की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने विपक्षी गठबंधन को और ज्यादा मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा की थी।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 13 लोगों की हुई मौत

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पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान में घातक हमले किए हैं। दोनों देशों की सीमा के पास अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। इन हमलों में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।

हमलों में 11 बच्चों की मौत

अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखकर जानकारी दी है कि पाकिस्तानी सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पकतिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बमबारी की। इन हमलों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई।

अफगानिस्तान ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई

खोस्त प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि स्पेरा जिले में एक घर पर हुए हमले में 9 लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। पक्तिका प्रांत में एक अलग हमले में 3 लोगों की मौत हुई। अफगानिस्तान के इन आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अभी तक इन हमलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पाकिस्तानी हमले की निंदा

तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि 'पाकिस्तानी तालिबान' (TTP) के आतंकवादी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बड़े आत्मघाती और आतंकी हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है जिसे काबुल खारिज करता रहा है।

पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव बना हुआ है। फरवरी के अंत से दोनों देशों के बीच लगातार संघर्ष और जवाबी कार्रवाइयां हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में हुए संघर्ष में 372 आम नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए थे।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

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दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में विश्व खाद्य सुरक्षा सप्ताह 2026 का शुभारंभ
रमेश दूबे
सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रमोटर्स एवं वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में समूह की सभी इकाइयों—एसडीपीएल (SDPL), एनडीपीएल (NDPL), यूबीएल (UBL), आईईबीएल (IEBL), एसपीआईपीएल (SPIPL), एसआईएल (SIL), सीपीपीएल (CPPL) एवं एसटीआईएसपीएल (STISPL) में विश्व खाद्य सुरक्षा सप्ताह 2026 का भव्य शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया गया। इसके उपरांत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह, खाद्य सुरक्षा शपथ ग्रहण तथा सप्ताह भर आयोजित होने वाली विभिन्न खाद्य सुरक्षा गतिविधियों की घोषणा की गई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं वैश्विक खाद्य सुरक्षा समुदाय द्वारा प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

यह आयोजन सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की गुणवत्ता, नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक, नैतिक व्यावसायिक मूल्यों तथा विधिक अनुपालन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समूह सदैव अपने ग्राहकों को सर्वोच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद एवं उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए समर्पित रहा है।

इस अवसर पर निदेशक – मानव संसाधन, कॉर्पोरेट अफेयर्स एवं लीगल, डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने सभी कर्मचारियों, अधिकारियों एवं हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एकता, समर्पण और निरंतर उत्कृष्टता के बल पर सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज आने वाले समय में अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगा तथा विश्व बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करेगा।

कार्यक्रम का समापन खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता उत्कृष्टता एवं संगठनात्मक नैतिकता को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
जनगणना 2026 में OBC कॉलम जोड़ने की मांग, राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

जनगणना 2026 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, झारखंड प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि राष्ट्रीय जनगणना 2026 के House Listing Schedule में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का भी अलग कॉलम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4), 340 एवं 46 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश की लगभग 52 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी समुदाय को “अन्य” श्रेणी में रखना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया कि इस मांग को अपनी सशक्त अनुशंसा के साथ महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं माननीय प्रधानमंत्री महोदय के समक्ष अग्रसारित किया जाए।

ज्ञापन पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्यपाल महोदय ने इसे तत्काल राष्ट्रपति भवन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली में भी अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का सुझाव दिया।

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने इसे वर्ष 1931 की जनगणना के बाद ओबीसी समुदाय से संबंधित आंकड़ों की कमी को दूर करने तथा सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। मोर्चा का मानना है कि जनगणना में ओबीसी वर्ग की स्पष्ट गणना से नीतिगत निर्णयों और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

यह जानकारी राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, हजारीबाग के प्रदेश सचिव सुरेश ठाकुर ने दी।

मिडिल ईस्ट में फिर बिगड़े हालात, ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें

#middleeastiranisraelwar

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए गए। यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने इसकी जानकारी दी है।

यमन की ओर से इस्राइल पर दागी गई मिसाइल

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि यमन की दिशा से उसकी सीमा की ओर एक मिसाइल दागी गई है। सेना के अनुसार मिसाइल का पता लगते ही रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम काम में लगाए गए। इजराइली सेना ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

बेरूत में इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार

ये ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए थे और उसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर दिए। ईरान के हमले के बाद इजरायल ने भी ईरान में कम से कम तीन जगहों पर हमले किए हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी हमला कर दिया है।

इस्फहान-तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज

जवाबी हमले के बाद इस्फहान, तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इजराइल के मुताबिक ईरान ने सोमवार को उसके कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागीं। हाइफा और नाजरेथ को निशाना बनाए जाने की खबर है। इजराइली सेना ने कहा कि उसके रक्षा तंत्र ने खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बताया कि देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाने के निर्देश दिए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

फिर गूंजी सायरनों की आवाज

इजराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया कि गुश दान, यरूशलम और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित हमले के खतरे को देखते हुए इस्राइल ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा प्रणाली पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप तनाव रोकने में रहे नाकाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे। नेतन्याहू को उन्होंने फोन किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, ‘मैं अभी बीबी को फोन कर रहा हूं और कह रहा हूं कि जवाबी हमला मत करो। दोनों अपना हमला कर चुके हैं। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ईरानी हमलों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। उम्मीद है कि इजराइल पलटवार नहीं करेगा। अगर बीबी फिर हमला करते हैं तो यह सिलसिला अगले 47 साल या 3000 साल तक चलता रहेगा।’

मत्स्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र लाभार्थी 8 जून से ऑनलाइन आवेदन करें
फर्रुखाबाद l मत्स्य विभाग की विभिन्न राज्य सेक्टर योजनाओं हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
मत्स्य विभाग द्वारा संचालित राज्य सेक्टर की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु पात्र लाभार्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभागीय पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया 08 जून से 28 जून 2026 तक संचालित की जाएगी।
जनपद के इच्छुक मत्स्य पालक, मत्स्य व्यवसायी एवं पात्र व्यक्ति विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर निम्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं l उन्होंने कहा कि
मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना
निषादराज बोट सब्सिडी योजना
सघन मत्स्य पालन हेतु एरेशन सिस्टम की स्थापना योजना
मत्स्य विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि उपरोक्त योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदकों को प्रत्येक योजना हेतु पृथक-पृथक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। योजनाओं के अंतर्गत अनुमन्य परियोजनाओं का विवरण, इकाई लागत, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की सूची तथा अन्य विस्तृत दिशा-निर्देश विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
आवेदक विभागीय वेबसाइट http://fisheries.up.gov.in पर जाकर योजनाओं से संबंधित समस्त जानकारी प्राप्त कर सकते हैं l साथ ही निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
विभाग ने यह भी अवगत कराया है कि यदि योजनाओं के प्रावधानों में भविष्य में कोई संशोधन किया जाता है, तो संशोधित नियम एवं शर्तें स्वतः लागू होंगी। इसके अतिरिक्त पूर्व वर्षों में किसी कारणवश निरस्त अथवा प्रतीक्षारत रहे आवेदक भी पुनः आवेदन करने के पात्र होंगे।
योजनाओं के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्ति मत्स्य विभाग के जनपदीय कार्यालय, मण्डलीय कार्यालय अथवा मत्स्य निदेशालय के कार्यालय से किसी भी कार्यदिवस में संपर्क कर सकते हैं।
मत्स्य विभाग ने जनपद के अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों से इन योजनाओं का लाभ उठाने हेतु समय से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर ऑनलाइन सत्र: लॉन्च हुआ 'ग्रीन विजन 2027', जुटे IIT और पर्यावरण क्षेत्र के दिग्गज

ग्रीष्मावकाश होने के कारण 'ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया' द्वारा 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' पर एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'जलवायु परिवर्तन - धरती के संकेतों का जवाब' पर केंद्रित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल परिसर में निदेशक डॉ. एस. खालिद, चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन एवं प्राचार्या श्रीमती चाँदनी त्रिगुणायत द्वारा वृक्षारोपण से किया गया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

सत्र में शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हुए:

- मुख्य अतिथि: प्रो. प्रमोद पाठक, IIT(ISM)

- विशिष्ट अतिथि: प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित, प्राचार्य, बी.एड. कॉलेज, पुरुलिया

- चेयरपर्सन: डॉ. निखत परवीन

- मैनेजर: डॉ. ममता सिन्हा

- डायरेक्टर: डॉ. एस. खालिद

- प्रिंसिपल: श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

उद्घाटन संबोधन

चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने स्कूल की ग्रीन इनिशिएटिव्स की जानकारी दी। 'Clean Campus-Green Campus' के साथ ही उन्होंने बच्चों से 'Clean Home-Green Home' पर अमल करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

प्रो. प्रमोद पाठक ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला और युवाओं से 'क्लाइमेट एक्शन' में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को 'Change Agent' के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने Reduce, Reuse और Recycle का महत्वपूर्ण फॉर्मूला भी साझा किया।

विशेषज्ञ व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित ने पर्यावरण अध्ययन को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए कहा, "छात्र ही पर्यावरण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। NSS के माध्यम से हमने हजारों छात्रों को पर्यावरण से जोड़ा है। हर स्कूल को अपना 'ईको-क्लब' बनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने Activity Based Teaching Method के द्वारा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स देने की सलाह दी।

प्रिंसिपल का संदेश

प्रिंसिपल चांदनी त्रिगुणायत ने स्कूल का 'ग्रीन विजन 2027' लॉन्च किया, जिसके तहत 500 पेड़ लगाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना और परिसर को जीरो वेस्ट बनाना शामिल है।

डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने अपने वक्तव्य में कहा, "आज का यह सत्र सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है।"

कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक श्री अरविंद कुमार रजक, श्री राकेश अरोरा,ताहिर अंसारी तथा IT हेड इंजी. काशिफ खान की सराहनीय भूमिका रही।

How Karma, Kundali and Living Spaces Are Connected – Insights by Vastu Vid Rahul Parse

Ancient Indian knowledge systems never viewed human life as isolated from nature, space, or cosmic energies. Astrology and Vastu Shastra were developed as interconnected sciences based upon Karma, Prarabdh (destined karmic results), planetary influences, and environmental energies. While modern science may use different terminology, the underlying principle remains similar — every action creates an energetic impact, and every environment influences human life.According to ancient philosophy, birth itself is not accidental. A soul takes birth under specific planetary alignments based upon accumulated karmas from previous lives. This planetary arrangement becomes the individual’s birth chart or Kundali, which acts like an energetic blueprint of life tendencies, strengths, challenges, health patterns, relationships, and psychological behavior.

Vastu Shastra, on the other hand, governs the external energy field in which a person lives or works. If Astrology represents the “inner cosmic design,” then Vastu represents the “outer environmental reflection” of that design.

One of the most fascinating observations made by experienced Vastu and Astrology practitioners is that defects repeatedly appear in those directions of a property that are connected with afflicted planetary energies in the Kundali. This creates a strong philosophical and practical connection between human consciousness and living space.

For example, in many cases where severe Pitru Dosha, afflicted Rahu, or karmic ancestral disturbances are observed in the horoscope, the South-West zone of the house or commercial property is often found imbalanced. This may appear as cuts, missing corners, heavy defects, underground water tanks, toilets, clutter, depression in level, cracks, or structural instability in that particular direction.

From a Vastu perspective, the South-West direction represents stability, ancestral energy, control, maturity, and karmic grounding. Scientifically, this can also be interpreted psychologically and environmentally. Disturbed spaces create disturbed emotional patterns. Continuous exposure to imbalance in important zones of a property can subconsciously influence decision-making, stress levels, emotional security, and family harmony.

Similarly, repeated defects in the North-East zone are frequently observed in individuals facing confusion, spiritual blockage, emotional instability, or poor clarity in life direction. Afflictions related to Jupiter, Moon, or Ketu often symbolically reflect through this zone. The East relates to growth and social opportunities, while the North governs financial movement and mental flow.

This does not necessarily mean that planets physically damage buildings. Rather, ancient sciences suggest resonance between human karmic energies and surrounding environments. Just as modern science acknowledges magnetic fields, frequencies, vibrations, and environmental psychology, ancient Vastu observed that spaces absorb and radiate subtle energetic influences over time.

Interestingly, today’s scientific disciplines are slowly moving toward similar understandings. Environmental psychology studies how spaces influence human emotions and behavior. Geopathic stress research studies the effect of underground disturbances on health and mental peace. Electromagnetic field studies analyze invisible energetic interactions within living environments. Quantum theories also suggest that observation, consciousness, and energy are deeply interconnected.

The digital era has further strengthened this research potential. Satellite mapping, digital compass systems, energy analysis applications, and astronomical software now allow precise correlation between property layouts and astrological patterns. Consultants can scientifically study directional imbalance, land energy, surrounding structures, and planetary influences with greater accuracy than ever before.

However, the true purpose of Astrology and Vastu should not be fear creation. These sciences were originally intended for awareness, balance, and corrective living. Every defect does not destroy life, and every good direction does not guarantee success. Human effort, discipline, ethics, and conscious action remain equally important.

Astrology reveals karmic tendencies. Vastu reflects environmental resonance. Science studies measurable patterns. Together, they form a deeper understanding of how human life interacts with both visible and invisible energies.

The future of these ancient sciences lies not in blind belief, but in responsible research, practical observation, and scientific interpretation. When understood correctly, Astrology and Vastu are not against science — they are complementary systems attempting to understand the same universal intelligence through different dimensions. For more information you can visit Instagram

 

 

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

#mamatabanerjeetmccrisis50mlasmayquitparty

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।

राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच अहम बैठक, TMC की अंदरूनी बगावत के बीच क्यों खास है ये मुलाकात

#rahulgandhiabhishekbanerjeedelhi_meeting

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर मचे घमासान ने सियासी तापमान बढ़ा रखा है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच मुलाकात हुई है। करीब डेढ़ घंटे तक चली मुलाकात ने नई अटकलों को जन्म दिया है।

टीएमसी में सियासी खींचतान के बीच मुलाकात

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को नई दिल्ली में 10 जनपथ पर मुलाकात की।यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर कुछ नेताओं ने बगावती तेवर दिखाए हैं।

कांग्रेस-चीएमसी संबंधों पर चर्चा

सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के संबंधों को लेकर गंभीर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि भविष्य में दोनों दल भाजपा के खिलाफ किस तरह की रणनीति अपना सकते हैं। बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में होने वाले संभावित उपचुनावों में तालमेल या सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। इंडिया गठबंधन को मजबूत करने और विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय बनाने का मुद्दा भी बातचीत के केंद्र में रहा।

एक दिन पहले हुई थी ममता-सोनिया की मुलाकात

यह बैठक ममता बनर्जी और सोनिया गांधी की मुलाकात के ठीक एक दिन बाद हुई है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी के आवास पर जाकर उनसे बात की थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने विपक्षी गठबंधन को और ज्यादा मजबूत करने के रास्तों पर चर्चा की थी।

पाकिस्तान की अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक, 13 लोगों की हुई मौत

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पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान में घातक हमले किए हैं। दोनों देशों की सीमा के पास अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हमलों में कम से कम 13 लोग मारे गए हैं। इन हमलों में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ज्यादातर बच्चे शामिल हैं।

हमलों में 11 बच्चों की मौत

अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखकर जानकारी दी है कि पाकिस्तानी सेना ने कल रात एक बार फिर अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया और कुनार, खोस्त तथा पकतिका प्रांतों में आम नागरिकों के घरों पर बमबारी की। इन हमलों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत हो गई।

अफगानिस्तान ने कहा- नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई

खोस्त प्रांत के एक अधिकारी ने बताया कि स्पेरा जिले में एक घर पर हुए हमले में 9 लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। पक्तिका प्रांत में एक अलग हमले में 3 लोगों की मौत हुई। अफगानिस्तान के इन आरोपों पर पाकिस्तान की सेना ने अभी तक इन हमलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पाकिस्तानी हमले की निंदा

तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे नागरिकों को निशाना बनाने वाली कार्रवाई बताया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या पुष्टि नहीं की गई है। पाकिस्तान का कहना है कि 'पाकिस्तानी तालिबान' (TTP) के आतंकवादी अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बड़े आत्मघाती और आतंकी हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान लंबे समय से अफगान तालिबान से इन आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है जिसे काबुल खारिज करता रहा है।

पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच पिछले कई महीनों से सीमा पर तनाव बना हुआ है। फरवरी के अंत से दोनों देशों के बीच लगातार संघर्ष और जवाबी कार्रवाइयां हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस साल के पहले तीन महीनों में अफगानिस्तान में हुए संघर्ष में 372 आम नागरिक मारे गए और 397 घायल हुए थे।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

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दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज में विश्व खाद्य सुरक्षा सप्ताह 2026 का शुभारंभ
रमेश दूबे
सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज के प्रमोटर्स एवं वरिष्ठ नेतृत्व के मार्गदर्शन में समूह की सभी इकाइयों—एसडीपीएल (SDPL), एनडीपीएल (NDPL), यूबीएल (UBL), आईईबीएल (IEBL), एसपीआईपीएल (SPIPL), एसआईएल (SIL), सीपीपीएल (CPPL) एवं एसटीआईएसपीएल (STISPL) में विश्व खाद्य सुरक्षा सप्ताह 2026 का भव्य शुभारंभ किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किया गया। इसके उपरांत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन समारोह, खाद्य सुरक्षा शपथ ग्रहण तथा सप्ताह भर आयोजित होने वाली विभिन्न खाद्य सुरक्षा गतिविधियों की घोषणा की गई।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं वैश्विक खाद्य सुरक्षा समुदाय द्वारा प्रतिवर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।

यह आयोजन सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की गुणवत्ता, नवाचार, अत्याधुनिक तकनीक, नैतिक व्यावसायिक मूल्यों तथा विधिक अनुपालन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समूह सदैव अपने ग्राहकों को सर्वोच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद एवं उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने के लिए समर्पित रहा है।

इस अवसर पर निदेशक – मानव संसाधन, कॉर्पोरेट अफेयर्स एवं लीगल, डॉ. सुनील कुमार मिश्र ने सभी कर्मचारियों, अधिकारियों एवं हितधारकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एकता, समर्पण और निरंतर उत्कृष्टता के बल पर सुपीरियर ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज आने वाले समय में अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाएगा तथा विश्व बाजार में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करेगा।

कार्यक्रम का समापन खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता उत्कृष्टता एवं संगठनात्मक नैतिकता को बढ़ावा देने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
जनगणना 2026 में OBC कॉलम जोड़ने की मांग, राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

जनगणना 2026 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, झारखंड प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि राष्ट्रीय जनगणना 2026 के House Listing Schedule में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का भी अलग कॉलम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4), 340 एवं 46 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश की लगभग 52 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी समुदाय को “अन्य” श्रेणी में रखना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया कि इस मांग को अपनी सशक्त अनुशंसा के साथ महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं माननीय प्रधानमंत्री महोदय के समक्ष अग्रसारित किया जाए।

ज्ञापन पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्यपाल महोदय ने इसे तत्काल राष्ट्रपति भवन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली में भी अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का सुझाव दिया।

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने इसे वर्ष 1931 की जनगणना के बाद ओबीसी समुदाय से संबंधित आंकड़ों की कमी को दूर करने तथा सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। मोर्चा का मानना है कि जनगणना में ओबीसी वर्ग की स्पष्ट गणना से नीतिगत निर्णयों और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

यह जानकारी राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, हजारीबाग के प्रदेश सचिव सुरेश ठाकुर ने दी।

मिडिल ईस्ट में फिर बिगड़े हालात, ईरान ने इजराइल पर दागीं मिसाइलें

#middleeastiranisraelwar

पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इजरायल पर देर रात से ईरान और यमन की तरफ से हमले किए गए। यमन के बाद ईरान ने एक बार फिर इजरायल की तरफ बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने इसकी जानकारी दी है।

यमन की ओर से इस्राइल पर दागी गई मिसाइल

इजराइल की सेना ने दावा किया है कि यमन की दिशा से उसकी सीमा की ओर एक मिसाइल दागी गई है। सेना के अनुसार मिसाइल का पता लगते ही रक्षा प्रणाली को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और खतरे को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम काम में लगाए गए। इजराइली सेना ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इस हमले ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

बेरूत में इजरायली हमले के बाद ईरान का पलटवार

ये ताजा संघर्ष तब शुरू हुआ जब लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायल ने हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए थे और उसके बाद ईरान ने पलटवार करते हुए इजरायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमले कर दिए। ईरान के हमले के बाद इजरायल ने भी ईरान में कम से कम तीन जगहों पर हमले किए हैं। अप्रैल में लागू हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान ने सीधे इजराइल पर मिसाइलों की बौछार कर दी। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी हमला कर दिया है।

इस्फहान-तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज

जवाबी हमले के बाद इस्फहान, तेहरान में जोरदार धमाकों की आवाज सुनाई दी है। इजराइल के मुताबिक ईरान ने सोमवार को उसके कई इलाकों की तरफ मिसाइलें दागीं। हाइफा और नाजरेथ को निशाना बनाए जाने की खबर है। इजराइली सेना ने कहा कि उसके रक्षा तंत्र ने खतरे को रोकने के लिए कार्रवाई की और मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया। इजराइली रक्षा बल (IDF) ने बताया कि देश के कई हिस्सों में सायरन बजाए गए और लोगों को सुरक्षित स्थानों में जाने के निर्देश दिए गए। शुरुआती रिपोर्ट्स में किसी बड़े नुकसान या हताहत की सूचना नहीं है।

फिर गूंजी सायरनों की आवाज

इजराइल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मध्य इजराइल के कई इलाकों में सायरन बजाए गए। चैनल 12 की रिपोर्ट में कहा गया कि गुश दान, यरूशलम और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक संभावित हमले के खतरे को देखते हुए इस्राइल ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां और रक्षा प्रणाली पूरी तरह अलर्ट पर हैं। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

ट्रंप तनाव रोकने में रहे नाकाम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों पक्षों को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रहे। नेतन्याहू को उन्होंने फोन किया था, लेकिन उनकी बात नहीं मानी। ट्रंप ने एक्सियोस से कहा, ‘मैं अभी बीबी को फोन कर रहा हूं और कह रहा हूं कि जवाबी हमला मत करो। दोनों अपना हमला कर चुके हैं। हमें एक और हमले की जरूरत नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘ईरानी हमलों में किसी को नुकसान नहीं पहुंचा। उम्मीद है कि इजराइल पलटवार नहीं करेगा। अगर बीबी फिर हमला करते हैं तो यह सिलसिला अगले 47 साल या 3000 साल तक चलता रहेगा।’

मत्स्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र लाभार्थी 8 जून से ऑनलाइन आवेदन करें
फर्रुखाबाद l मत्स्य विभाग की विभिन्न राज्य सेक्टर योजनाओं हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
मत्स्य विभाग द्वारा संचालित राज्य सेक्टर की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु पात्र लाभार्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। विभागीय पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया 08 जून से 28 जून 2026 तक संचालित की जाएगी।
जनपद के इच्छुक मत्स्य पालक, मत्स्य व्यवसायी एवं पात्र व्यक्ति विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर निम्न योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकते हैं l उन्होंने कहा कि
मुख्यमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना
निषादराज बोट सब्सिडी योजना
सघन मत्स्य पालन हेतु एरेशन सिस्टम की स्थापना योजना
मत्स्य विभाग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि उपरोक्त योजनाओं में लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदकों को प्रत्येक योजना हेतु पृथक-पृथक ऑनलाइन आवेदन करना होगा। योजनाओं के अंतर्गत अनुमन्य परियोजनाओं का विवरण, इकाई लागत, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, आवश्यक अभिलेखों की सूची तथा अन्य विस्तृत दिशा-निर्देश विभागीय पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
आवेदक विभागीय वेबसाइट http://fisheries.up.gov.in पर जाकर योजनाओं से संबंधित समस्त जानकारी प्राप्त कर सकते हैं l साथ ही निर्धारित अवधि के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
विभाग ने यह भी अवगत कराया है कि यदि योजनाओं के प्रावधानों में भविष्य में कोई संशोधन किया जाता है, तो संशोधित नियम एवं शर्तें स्वतः लागू होंगी। इसके अतिरिक्त पूर्व वर्षों में किसी कारणवश निरस्त अथवा प्रतीक्षारत रहे आवेदक भी पुनः आवेदन करने के पात्र होंगे।
योजनाओं के संबंध में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्ति मत्स्य विभाग के जनपदीय कार्यालय, मण्डलीय कार्यालय अथवा मत्स्य निदेशालय के कार्यालय से किसी भी कार्यदिवस में संपर्क कर सकते हैं।
मत्स्य विभाग ने जनपद के अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों से इन योजनाओं का लाभ उठाने हेतु समय से ऑनलाइन आवेदन कर सकते है।
ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर ऑनलाइन सत्र: लॉन्च हुआ 'ग्रीन विजन 2027', जुटे IIT और पर्यावरण क्षेत्र के दिग्गज

ग्रीष्मावकाश होने के कारण 'ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया' द्वारा 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' पर एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'जलवायु परिवर्तन - धरती के संकेतों का जवाब' पर केंद्रित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल परिसर में निदेशक डॉ. एस. खालिद, चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन एवं प्राचार्या श्रीमती चाँदनी त्रिगुणायत द्वारा वृक्षारोपण से किया गया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

सत्र में शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हुए:

- मुख्य अतिथि: प्रो. प्रमोद पाठक, IIT(ISM)

- विशिष्ट अतिथि: प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित, प्राचार्य, बी.एड. कॉलेज, पुरुलिया

- चेयरपर्सन: डॉ. निखत परवीन

- मैनेजर: डॉ. ममता सिन्हा

- डायरेक्टर: डॉ. एस. खालिद

- प्रिंसिपल: श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

उद्घाटन संबोधन

चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने स्कूल की ग्रीन इनिशिएटिव्स की जानकारी दी। 'Clean Campus-Green Campus' के साथ ही उन्होंने बच्चों से 'Clean Home-Green Home' पर अमल करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

प्रो. प्रमोद पाठक ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला और युवाओं से 'क्लाइमेट एक्शन' में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को 'Change Agent' के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने Reduce, Reuse और Recycle का महत्वपूर्ण फॉर्मूला भी साझा किया।

विशेषज्ञ व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित ने पर्यावरण अध्ययन को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए कहा, "छात्र ही पर्यावरण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। NSS के माध्यम से हमने हजारों छात्रों को पर्यावरण से जोड़ा है। हर स्कूल को अपना 'ईको-क्लब' बनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने Activity Based Teaching Method के द्वारा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स देने की सलाह दी।

प्रिंसिपल का संदेश

प्रिंसिपल चांदनी त्रिगुणायत ने स्कूल का 'ग्रीन विजन 2027' लॉन्च किया, जिसके तहत 500 पेड़ लगाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना और परिसर को जीरो वेस्ट बनाना शामिल है।

डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने अपने वक्तव्य में कहा, "आज का यह सत्र सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है।"

कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक श्री अरविंद कुमार रजक, श्री राकेश अरोरा,ताहिर अंसारी तथा IT हेड इंजी. काशिफ खान की सराहनीय भूमिका रही।

How Karma, Kundali and Living Spaces Are Connected – Insights by Vastu Vid Rahul Parse

Ancient Indian knowledge systems never viewed human life as isolated from nature, space, or cosmic energies. Astrology and Vastu Shastra were developed as interconnected sciences based upon Karma, Prarabdh (destined karmic results), planetary influences, and environmental energies. While modern science may use different terminology, the underlying principle remains similar — every action creates an energetic impact, and every environment influences human life.According to ancient philosophy, birth itself is not accidental. A soul takes birth under specific planetary alignments based upon accumulated karmas from previous lives. This planetary arrangement becomes the individual’s birth chart or Kundali, which acts like an energetic blueprint of life tendencies, strengths, challenges, health patterns, relationships, and psychological behavior.

Vastu Shastra, on the other hand, governs the external energy field in which a person lives or works. If Astrology represents the “inner cosmic design,” then Vastu represents the “outer environmental reflection” of that design.

One of the most fascinating observations made by experienced Vastu and Astrology practitioners is that defects repeatedly appear in those directions of a property that are connected with afflicted planetary energies in the Kundali. This creates a strong philosophical and practical connection between human consciousness and living space.

For example, in many cases where severe Pitru Dosha, afflicted Rahu, or karmic ancestral disturbances are observed in the horoscope, the South-West zone of the house or commercial property is often found imbalanced. This may appear as cuts, missing corners, heavy defects, underground water tanks, toilets, clutter, depression in level, cracks, or structural instability in that particular direction.

From a Vastu perspective, the South-West direction represents stability, ancestral energy, control, maturity, and karmic grounding. Scientifically, this can also be interpreted psychologically and environmentally. Disturbed spaces create disturbed emotional patterns. Continuous exposure to imbalance in important zones of a property can subconsciously influence decision-making, stress levels, emotional security, and family harmony.

Similarly, repeated defects in the North-East zone are frequently observed in individuals facing confusion, spiritual blockage, emotional instability, or poor clarity in life direction. Afflictions related to Jupiter, Moon, or Ketu often symbolically reflect through this zone. The East relates to growth and social opportunities, while the North governs financial movement and mental flow.

This does not necessarily mean that planets physically damage buildings. Rather, ancient sciences suggest resonance between human karmic energies and surrounding environments. Just as modern science acknowledges magnetic fields, frequencies, vibrations, and environmental psychology, ancient Vastu observed that spaces absorb and radiate subtle energetic influences over time.

Interestingly, today’s scientific disciplines are slowly moving toward similar understandings. Environmental psychology studies how spaces influence human emotions and behavior. Geopathic stress research studies the effect of underground disturbances on health and mental peace. Electromagnetic field studies analyze invisible energetic interactions within living environments. Quantum theories also suggest that observation, consciousness, and energy are deeply interconnected.

The digital era has further strengthened this research potential. Satellite mapping, digital compass systems, energy analysis applications, and astronomical software now allow precise correlation between property layouts and astrological patterns. Consultants can scientifically study directional imbalance, land energy, surrounding structures, and planetary influences with greater accuracy than ever before.

However, the true purpose of Astrology and Vastu should not be fear creation. These sciences were originally intended for awareness, balance, and corrective living. Every defect does not destroy life, and every good direction does not guarantee success. Human effort, discipline, ethics, and conscious action remain equally important.

Astrology reveals karmic tendencies. Vastu reflects environmental resonance. Science studies measurable patterns. Together, they form a deeper understanding of how human life interacts with both visible and invisible energies.

The future of these ancient sciences lies not in blind belief, but in responsible research, practical observation, and scientific interpretation. When understood correctly, Astrology and Vastu are not against science — they are complementary systems attempting to understand the same universal intelligence through different dimensions. For more information you can visit Instagram

 

 

बंगाल में होगा महाराष्ट्र जैसा ‘खेला’! उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसा ना हो जाए ममता बनर्जी का हाल

#mamatabanerjeetmccrisis50mlasmayquitparty

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार और सत्ता हाथ से जाने के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। पार्टी के अंदर काफी उथल-पुथल मची हुई है। कुछ नेता खुले तौर पर बगावत पर उतर आए हैं। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं, जैसे तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी।

बागी नेताओं की सीक्रेट मीटिंग

विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है।

50 से ज़्यादा विधायकों की बैठक

टीएमसी 80 विधायकों में से 50 से ज़्यादा विधायकों ने होटल गेटवे में बागी और पार्टी से निकाले गए नेताओं ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा से मुलाकात की। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा दोनों वे विधायक हैं जिन पर ममता बनर्जी ने कार्रवाई की है और उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है।

टीएमसी की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक

वहीं, दूसरी तरफ रविवार को ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई बैठक में करीब 60 विधायक नदारद रहे। रविवार को, पीशी-भाईपो की बुलाई गई एक बैठक में केवल 20 विधायक ही शामिल हुए। विभिन्न नगर निकायों के लगभग 100 TMC पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। कई नेता BJP के साथ बातचीत कर रहे हैं।

अभिषेक बनर्जी को लेकर नाराजगी

हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है। चुनाव के बाद हुई समीक्षा बैठक में कम से कम तीन चुने हुए विधायकों ने खुलकर पार्टी नेतृत्व का विरोध किया। उन्होंने चुनाव में मिली करारी हार के लिए अभिषेक बनर्जी की पसंद को जबरदस्ती थोपे जाने को जिम्मेदार ठहराया।

खुलकर उठे विरोध के स्वर

कुछ नेता खुले तौर पर पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं कि 15 साल सत्ता में रहने के बाद पार्टी जमीनी हकीकत से कट गई है। सिंडिकेट और 'कट-मनी' (कमीशन) की आदी हो गई है, और हिंसक रूप से अहंकारी हो गई है। वे जवाबदेही और आत्म-मंथन की मांग कर रहे हैं, जिसका ममता बनर्जी ने जिद के साथ विरोध किया है।

ऋतब्रत और संदीपन ने ममता के खिलाफ खोला मोर्चा

दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत और संदीपन के नेतृत्व में एक नई तृणमूल बन सकती है। पार्टी से निकाले जाने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने ममता बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वह टीएमसी में कथित भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को पत्र लिखेंगे। ऋतब्रत ने कहा कि उनके पास कई ऐसी जानकारियां हैं जिन्हें वह सार्वजनिक कर सकते हैं।