नेपाल में क्यों फैली हिंसा? हालात बेकाबू, भारत में सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा

#nepalborderriotsmosquevandalismvideoviral

नेपाल के पर्सा और धनुषा जिलों में धार्मिक विवाद के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की कथित घटना की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो कुछ ही समय में हिंसक रूप ले बैठा है। चिंताजनक स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने एहतियाती कर्फ्यू लगाने का एलान किया। पड़ोसी देश में तनाव और उथल-पुथल के बीच भारत में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ा

पर्सा जिले के बीरगंज शहर में धनुषा की मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की घटना के बाद हालात बेकाबू हैं। सोशल मीडिया पर धार्मिक सामग्री वाला वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ गया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लागू कर दिया है।

सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार

हालात की समीक्षा के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बस पार्क, नागवा, इनारवा (पूर्व); सिरसिया नदी (पश्चिम); गंडक चौक (उत्तर) और शंकराचार्य गेट (दक्षिण) को संवेदनशील इलाके के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, 'कर्फ्यू के दौरान, सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार दिया गया है। इसलिए नागरिकों से अनुरोध है कि बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। बाहर निकलने की विवशता होने पर निकटतम सुरक्षाकर्मी से संपर्क करें। मोबाइल से 100 पर कॉल करें।

भारत-नेपाल सीमा सील

भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मैत्री पुल समेत सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर आवागमन रोक दिया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की कड़ी जांच की जा रही है।

Homeopathy Clinic in Hyderabad for Natural PCOD Care

Looking for a trusted homeopathy clinic in Hyderabad for PCOD? Spiritual Homeopathy provides holistic care to restore hormonal balance and women’s wellness.

What is PCOD?

Polycystic Ovarian Disease (PCOD) is a hormonal disorder commonly seen in women of reproductive age. It affects ovarian function and leads to hormonal imbalance that disrupts menstrual cycles, fertility, metabolism, and emotional health. Many women seek support from a reliable homeopathy clinic in Hyderabad to manage PCOD naturally and safely.

Common Symptoms of PCOD

PCOD symptoms differ from person to person but often include:

  • Irregular or missed periods
  • Weight gain and difficulty losing weight
  • Acne and oily skin
  • Hair fall or thinning hair
  • Excess facial or body hair
  • Difficulty in conceiving

If these symptoms are ignored, PCOD can increase the risk of diabetes, thyroid disorders, and long-term fertility concerns.

Causes and Risk Factors

The exact cause of PCOD is not fully known, but common contributing factors include hormonal imbalance, insulin resistance, stress, sedentary lifestyle, and genetic predisposition. Women with a family history of PCOD or metabolic issues are at higher risk. Early consultation at a trusted homeopathy clinic in Hyderabad helps in managing the condition effectively.

How Homeopathy Helps in PCOD

Homeopathy follows a holistic approach that addresses the root cause of PCOD rather than only controlling symptoms. Treatment at an experienced homeopathy clinic in Hyderabad focuses on regulating menstrual cycles, balancing hormones, improving metabolism, supporting fertility, and enhancing emotional well-being. Each treatment plan is personalized, ensuring safe and long-lasting improvement.

Why Choose Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy is a reputed homeopathy clinic in Hyderabad, offering specialized care for women with PCOD. With branches in KPHB, Dilsukhnagar, Chandanagar, and Nallagandla, the clinic provides professional consultations, personalized care plans, and continuous guidance. The focus remains on holistic healing, lifestyle balance, and overall wellness.

Take the Next Step

If PCOD is affecting your health, confidence, or daily life, consult Spiritual Homeopathy, a trusted homeopathy clinic in Hyderabad, and begin your journey toward hormonal balance and better quality of life.

सोमनाथ, 1026 से 2026: ग्लानि से गौरव तक के हजार वर्ष ✍️डॉ. विद्यासागर उपाध्याय संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से
संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से मंदिरों की दीवारें तो गिराई जा सकती हैं, लेकिन राष्ट्र की चेतना को कभी कुचला नहीं जा सकता। 1026 में सोमनाथ के खंडहरों पर खड़ा होकर महमूद जिस जीत का अट्टहास कर रहा था, 2026 के कालखंड ने उसे इतिहास की धूल में मिला दिया है। आज सोमनाथ का स्वर्ण-शिखर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि इस सत्य की उद्घोषणा है कि—अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सूर्य का उदय अटल है। अफगानिस्तान की उन अभेद्य और धूसर पर्वत कंदराओं के मध्य स्थित गजनी की गोद में, सन् 971 ईस्वी में महमूद का प्रादुर्भाव हुआ। नियति ने उसके अंतस में पिता सुबुक्तगीन से विरासत में मिली साम्राज्यवादी पिपासा और मजहबी कट्टरता के हलाहल का सम्मिश्रण कर दिया था। सिंहासनारूढ़ होते ही उसकी महत्वाकांक्षी दृष्टि ने मध्य एशिया के क्षितिज पर स्वयं को एक अप्रतिम सुल्तान के रूप में स्थापित करने का स्वप्न बुना। किंतु इस महात्वाकांक्षा के स्वर्ण-महल को निर्मित करने हेतु जिस अपार वैभव की आधारशिला चाहिए थी, उसकी प्राप्ति हेतु उसने एक विनाशकारी मार्ग चुना। उस युग का आर्यावर्त अपनी समृद्धि की पराकाष्ठा पर था—एक ऐसी 'स्वर्णमयी चिड़िया', जिसके देवालयों के शिखर सूर्य की रश्मियों से स्पर्धा करते थे और जिनकी अंतहीन मणियाँ विश्व को चकाचौंध करने हेतु पर्याप्त थीं। भारत के इसी अतुलनीय और अलौकिक वैभव ने महमूद की लुटेरी वृत्ति को एक हिंसक शिकारी की भाँति उकसाया। उसने आर्यावर्त की पवित्र धरा को लहूलुहान करने का एक वीभत्स संकल्प लिया। सन् 1000 से 1027 ईस्वी का वह कालखंड गवाह है, जब उसने भारत के हृदय पर एक-दो नहीं, अपितु सत्रह बार भीषण प्रहार किए। ये आक्रमण मात्र भौगोलिक विजय की लालसा नहीं थे, अपितु सभ्यता और संस्कृति पर बर्बरता का वह नंगा नाच था, जिसने इतिहास के पन्नों को सदा के लिए रक्तरंजित कर दिया। जब महमूद की बर्बर सेना ने कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली मथुरा की परिधि में प्रवेश किया, तो वहां की स्थापत्य कला की दिव्यता देख वह पाषाण-हृदय लुटेरा भी एक क्षण के लिए स्तब्ध रह गया। यमुना के तट पर स्थित वे गगनचुंबी देवालय और उनमें जड़ित नीलमणि एवं हीरक खंड उसे स्वर्ग की साक्षात उपस्थिति जान पड़े। स्वयं महमूद ने इस नगर की उपमा देते हुए स्वीकार किया था— 'यदि कोई इस सदृश नगर का निर्माण करना चाहे, तो उसे एक लाख स्वर्ण दीनार व्यय करने होंगे और इसमें दो शताब्दी का समय लगेगा।' किंतु, उसकी मजहबी कट्टरता ने शीघ्र ही इस सराहना को विनाशकारी उन्माद में बदल दिया। मथुरा की वे गलियां, जहाँ कभी दिव्य वेणु-नाद गूंजता था, वहां अब केवल तलवारों की पैशाचिक खनक और निहत्थे नागरिकों का कारुणिक क्रंदन शेष था। महमूद के आदेश पर उन कलात्मक विग्रहों को हथौड़ों से खंडित किया गया, जिनके दर्शन मात्र से भक्त कृतार्थ हो जाते थे। समकालीन इतिहासकार अल-उतबी लिखता है कि— 'सुल्तान ने आदेश दिया कि सभी मंदिरों को जला दिया जाए और उन्हें भूमिसात कर दिया जाए।' मंदिरों के वे गर्भगृह, जो कभी चंदन और पारिजात की सुगंध से महकते थे, अब निर्दोष ब्राह्मणों और रक्षार्थ खड़े योद्धाओं के तप्त रक्त की गंध से भर गए। उस मुख्य भव्य मंदिर को, जिसकी सुंदरता का गुणगान सुल्तान ने स्वयं किया था, निर्दयतापूर्वक अग्नि के हवाले कर दिया गया। स्वर्णमयी प्रतिमाओं को गलियों में घसीटा गया और उनकी आँखों में जड़े बहुमूल्य रत्नों को क्रूरता से उखाड़ लिया गया। वह पावन नगरी, जो सहस्रों वर्षों से भारतीय संस्कृति का प्रखर दीप-स्तंभ थी, कुछ ही प्रहरों में धुएं और भस्म के ढेर में परिवर्तित कर दी गई। अल-उतबी के अनुसार, उस दिन पाँच हजार स्वर्ण की मूर्तियाँ और अनगिनत स्वर्ण-मुद्राएं लूट ली गईं। यमुना का जल, जो कभी नील वर्ण का था, उस दिन अपने पुत्रों के रक्त से लाल होकर बह रहा था। मथुरा का वह ध्वंस मात्र एक नगर की लूट नहीं थी, बल्कि एक जीवंत सभ्यता के हृदय पर किया गया सबसे वीभत्स और अमिट आघात था। सन् 1026 की वह शीतल प्रभात, जब अरब सागर की लहरें सोमनाथ के चरणों को पखार रही थीं, क्षितिज पर महमूद की बर्बर सेना के धूल के बादल मँडराने लगे। मंदिर की प्राचीर पर खड़े योद्धाओं ने जब शत्रु की विशाल वाहिनी को देखा, तो उनके मुख से केवल एक ही उद्घोष निकला— 'हर-हर महादेव!'। वह युद्ध मात्र दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था, वह आततायी की राक्षसी प्रवृत्ति और भक्त की अडिग आस्था के मध्य एक धर्मयुद्ध था। गुजरात के दुर्गम पथों से होता हुआ जब महमूद मंदिर के सिंहद्वार तक पहुँचा, तो उसे उस प्रतिरोध का सामना करना पड़ा जिसकी उसने कल्पना भी न की थी। राजा भीमदेव प्रथम और उनके नेतृत्व में एकत्र हुए राजपूत योद्धाओं ने शौर्य की वह पराकाष्ठा दिखाई, जिसे देख शत्रु के दांत खट्टे हो गए। इतिहास साक्षी है कि मंदिर की रक्षा हेतु पचास सहस्र से अधिक निहत्थे ब्राह्मणों, संन्यासियों और वीर योद्धाओं ने स्वयं को वेदी पर अर्पित कर दिया। मंदिर के प्रांगण में रक्त की सरिता प्रवाहित होने लगी, किंतु एक भी शीश श्रद्धा के पथ से विचलित नहीं हुआ। सोमनाथ की अभेद्य प्रतीत होने वाली प्राचीरें केवल महमूद गजनवी के बाहरी प्रहारों से नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वासघात और रणनीतिक क्षरण के आत्मघाती प्रहारों से ढह गई थीं, जिसका विवरण अल-बिरूनी और समकालीन इतिहासकारों ने अत्यंत पैनी दृष्टि से किया है। इस पतन की पटकथा में पहला प्रहार 'रणनीतिक चूक' के रूप में हुआ, जहाँ मंदिर के प्रबंधकों और पुजारियों के भीतर घर कर गई इस अव्यवहारिक और अति-धार्मिक धारणा ने कि देवता स्वयं प्रकट होकर म्लेच्छों का संहार करेंगे, वास्तविक सैन्य मोर्चाबंदी और सुरक्षा तैयारियों को पूरी तरह कुंद कर दिया। इसके समानांतर, 'राजनीतिक भूल' ने राष्ट्र की रीढ़ तोड़ दी, जब उत्तर भारत के शक्तिशाली राजा आपसी द्वेष और संकीर्ण अहम् के कारण राजा भीमदेव प्रथम के आह्वान पर एकजुट नहीं हुए, जिससे महमूद को वह खंडित प्रतिरोध मिला जिसने उसकी राह आसान कर दी। किंतु सबसे मर्मभेदी सत्य वह 'पेशेवर विश्वासघात' था, जिसके तहत महमूद की सेना में 'तिलक' जैसे उच्चपदस्थ हिंदू सेनापति और 'सालार-ए-हिंदुवान' जैसी पेशेवर हिंदू सैनिक टुकड़ियाँ शामिल थीं; ये भारतीय गद्दार भाड़े के सैनिक अपनी ही साझी विरासत और पवित्र देवालय के विरुद्ध मात्र वेतन और लूट के माल के लोभ में तलवारें भांज रहे थे, जो इस ऐतिहासिक त्रासदी को विश्वासघात की एक ऐसी पराकाष्ठा बना देता है जहाँ अपनों के ही हाथों अपनों का ही सर्वस्व विनष्ट हो गया। अंततः, संख्याबल और विश्वासघात की कतरनी ने वीरता के उस कवच को भेद दिया। काज़विनी लिखते हैं, "इस लड़ाई में 50 हज़ार से अधिक स्थानीय लोग मारे गए। इसके बाद महमूद ने मंदिर में प्रवेश किया। पूरा मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका हुआ था, लेकिन स्थापत्य कला का सबसे बड़ा आश्चर्य था मंदिर की मुख्य मूर्ति जो कि बिना किसी सहारे के हवा में लटकी हुई थी। महमूद ने मूर्ति को आश्चर्य से देखा।" अल-बरूनी ने भी मंदिर का वर्णन करते हुए लिखा, "मंदिर के मुख्य भगवान शिव थे। ज़मीन से दो मीटर की ऊँचाई पर पत्थर का शिव लिंग रखा हुआ था.। उसके बग़ल में सोने और चाँदी से बनी कुछ और मूर्तियाँ थीं." महमूद जब गर्भगृह में प्रविष्ट हुआ, तो उसकी आँखों में दानवीय लोलुपता थी। वह दृश्य अत्यंत वीभत्स और हृदयविदारक था—जिस ज्योतिर्लिंग की पूजा युगों से देवता और गंधर्व करते आए थे, उस पर महमूद ने अपनी गदा से प्रहार किया। अल-बिरूनी के साक्ष्य बताते हैं कि लिंग के खंडित होते ही उसके भीतर छिपे बहुमूल्य रत्न बिखर गए। लूट का वह दृश्य मानवीय कल्पना से परे था। मंदिर के स्वर्णद्वार उखाड़ लिए गए, नीलमणि से जड़ित झूमर काट दिए गए और खंभों में जड़े हीरों को बर्बरता से कुरेदा गया। उसने चालीस मन वज़न की सोने की ज़ंजीर, जिससे महाघंट लटकता था तोड़ डाली। किवाड़ों, चौखटों और छत से चाँदी के पत्तर छुड़ा लिए। फिर भी उसे संतोष नहीं हुआ, और उसने गुप्त कोष की तलाश में पूरे गर्भगृह को खुदवा डाला. इतिहासकार सिराज ने 'तबाकत-ए-नासिरी' में लिखा, "महमूद सोमनाथ की मूर्तियों को अपने साथ ग़ज़नी ले गया जहाँ उसे तोड़ कर चार हिस्सों में बाँटा गया। उसका एक हिस्सा जुमे को होने वाली नमाज़ की जगह पर लगाया गया, दूसरा हिस्सा शाही महल के प्रवेश द्वार पर लगाया गया. तीसरे हिस्से को उसने मक्का और चौथे हिस्से को मदीना भिजवा दिया." अल-बिरूनी ने लिखा, "महमूद के हमलों ने भारत में आर्थिक तबाही मचा दी. शुरू के हमलों का मुख्य उद्देश्य मवेशियों को लूटना होता था. बाद में इन हमलों का उद्देश्य शहरी ख़ज़ाने को लूटना और युद्ध बंदी बनाना हो गया ताकि उन्हें ग़ुलामों की तरह बेचा या सेना में भर्ती किया जा सके." अल-उतबी अपनी पुस्तक 'तारीख-ए-यामिनी' में उस वीभत्सता का प्रमाण देते हुए लिखता है कि सोमनाथ, मथुरा और कन्नौज के अभियानों के बाद महमूद लगभग एक लाख भारतीय बंदियों को जंजीरों में जकड़कर गजनी ले गया था। बंदियों की संख्या इतनी अधिक थी कि गजनी के बाजारों में 'गुलामों' की भरमार हो गई और माँग से अधिक आपूर्ति के कारण उनकी कीमत गिरकर मात्र कुछ दिरहम रह गई। यह केवल आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक सभ्यता के अपमान की पराकाष्ठा थी। अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहर स्थित वह विशाल चौक और वहाँ बना वह पत्थर का चबूतरा आज भी उस बर्बरता का मूक गवाह है, जहाँ भारत की मर्यादा को कौड़ियों के भाव तौला गया था। इतिहास की सबसे खौफ़नाक और हृदयविदारक गूँज ''दुख्तरे हिन्दोस्तान.. नीलामे दो दीनार'' (अर्थात् हिंदुस्तान की बेटियाँ, दो दीनार में नीलाम) उसी चौक से उठी थी। वह चबूतरा साक्ष्य है उस दारुण कालखंड का, जब आर्यावर्त के अबलाओं को पशुओं की भाँति सार्वजनिक रूप से खड़ा किया गया और मात्र दो दीनार के तुच्छ मूल्य पर उनकी बोलियाँ लगाई गईं। यह कृत्य केवल एक आर्थिक विनिमय नहीं, बल्कि एक महान प्राचीन सभ्यता को मानसिक और सांस्कृतिक रूप से कुचलने का सुनियोजित प्रयास था। वह चीत्कार आज भी भारतीय इतिहास की सबसे भयावह चेतावनी बनकर गूँजती है कि जब-जब राष्ट्र अपनी आंतरिक एकता और सामरिक शक्ति को खोता है, तब-तब उसकी संतानों को ऐसी अमानवीय और रूह कँपा देने वाली नियति का सामना करना पड़ता है। अल-बिरूनी ने अपनी कालजयी कृति 'किताब-उल-हिंद' में सोमनाथ के ध्वंस और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों का अत्यंत सूक्ष्म एवं हृदयविदारक चित्रण करते हुए लिखा है कि महमूद के भीषण प्रहारों ने भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को समूल नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ का सुसंस्कृत हिंदू समाज भय और असुरक्षा के कारण 'धूल के कणों' की भाँति दिशा-हीन होकर बिखर गया। वह आगे अत्यंत स्पष्टता से स्वीकार करता है कि महमूद की इन पैशाचिक क्रूरताओं और देवालयों के अपमान ने भारतीय जनमानस के अंतस में विदेशी आक्रांताओं के प्रति एक ऐसी अमिट और 'अगाध घृणा' को जन्म दे दिया, जिसे शब्दों की परिधि में बांधना असंभव है, और इसी विद्वेष ने आगे चलकर दोनों संस्कृतियों के मध्य एक कभी न भरने वाली खाई का निर्माण कर दिया। वह ध्वंस केवल पत्थरों का गिरना नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर हुआ वह आघात था जिसकी गूँज आज एक सहस्राब्दी बाद भी इतिहास के गलियारों में सुनाई देती है। जिस महमूद ने हज़ारों हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ा, देव-प्रतिमाओं को पैरों तले रौंदा और आर्यावर्त की पवित्र धरा को निर्दोषों के रक्त से सिंचित किया, नियति ने उसके लिए एक ऐसा अंत चुना जो किसी भी नरक की कल्पना से अधिक भयावह था। सन् 1030 ईस्वी के आते-आते वह महाबली सुल्तान, जिसका नाम सुनकर कभी सीमाएँ कांपती थीं, स्वयं अपनी ही काया के भीतर कैद होकर रह गया। वह शरीर, जिसने कभी युद्ध की प्रत्यंचा चढ़ाई थी, अब तपेदिक (टीबी) और पक्षाघात (Paralysis) की अग्नि में तिल-तिल कर जल रहा था। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार स्टेनली लेनपूल ने अपनी चर्चित कृति 'मिडीवल इंडिया' (Medieval India) में महमूद के अंतिम क्षणों की वह मर्मस्पर्शी और दुःखद झाँकी प्रस्तुत की है, जो 'बुरा काम का बुरा नतीजा' का जीवंत साक्ष्य है। लेनपूल लिखते हैं कि मृत्यु से मात्र दो दिन पूर्व, जब सुल्तान को यह आभास हुआ कि 'मलकुल-मौत' (मौत का फरिश्ता) उसके प्राण हरने हेतु द्वार पर आ खड़ा है, तब उसने एक अत्यंत विचित्र और हृदयविदारक आज्ञा दी। उसने आदेश दिया कि मथुरा, कन्नौज और सोमनाथ के पवित्र मंदिरों से लूटा गया वह समस्त स्वर्ण, मणिक्य और हीरकों का अथाह भंडार उसके शयनकक्ष के सम्मुख बिछा दिया जाए। लेनपूल के अनुसार, जब वह सारा वैभव उसकी आँखों के सामने चमक रहा था, तब वह विजेता का गर्व करने के बजाय एक निरीह अपराधी की भाँति फूट-फूट कर रोने लगा। वह दृश्य चीख-चीख कर कह रहा था कि जिस रक्त-रंजित दौलत के लिए उसने मानवता का संहार किया, वही दौलत उसे कब्र के उस सन्नाटे और ईश्वर के न्याय से बचाने में लेशमात्र भी सहायक नहीं थी। इतिहासकार अल-उतबी के संकेतों और बाद के वृत्तांतों के अनुसार, जब वह अथाह स्वर्ण-राशि उसके सामने सूर्य की भांति चमक रही थी, तब महमूद विजेता की मुस्कान नहीं, बल्कि एक पराजित अपराधी की चीखें मार रहा था। वह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा अपनी आँखों से उन रत्नों को देख रहा था और फूट-फूट कर रो रहा था। वह रो रहा था क्योंकि वह जान चुका था कि—जिस संपत्ति के लिए उसने हज़ारों माँओं की गोद सूनी की, हज़ारों सुहागिनों का सिंदूर पोंछा और पवित्र मंदिरों को अपवित्र किया, वह दौलत उसे मौत के दर्द से एक क्षण की भी मुक्ति नहीं दिला सकती थी। इतिहासकार अबुल फजल बैहाकी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'तारीख-ए-बैहाकी' में महमूद गजनवी के जीवन के अंतिम कालखंड का अत्यंत मार्मिक और वीभत्स विवरण प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि अपने अंतिम दिनों में सुल्तान शारीरिक व्याधियों और मानसिक संताप के कारण अत्यंत एकाकी, हताश और चिड़चिड़ा हो गया था। बैहाकी, जो उस समय के राजकीय घटनाक्रमों का सूक्ष्म दृष्टा था, उल्लेख करता है कि वह क्रूर विजेता रातों की नींद खो चुका था और अक्सर एकांत कक्ष में अपनी लूटी हुई धन-संपदा तथा बेशकीमती रत्नों के ढेरों को निहारते हुए स्वयं से ही बड़बड़ाता था। उस समय उसकी आँखों में जीत का गर्व नहीं, बल्कि एक गहरी रिक्तता और बेबसी झलकती थी। 'तारीख-ए-बैहाकी' के ये पन्ने उस अहंकारी सत्ता के पतन का साक्षात प्रमाण हैं, जहाँ महमूद को अपनी ढलती सांसों के साथ यह कटु बोध हो रहा था कि जिस वैभव हेतु उसने रक्तपात का तांडव रचा, वह उसकी आत्मा को शांति देने और मृत्यु के पाश से मुक्त कराने में सर्वथा असमर्थ था। उसकी पीड़ा इतनी असहनीय थी कि वह हमेशा कराहता रहता था, लेकिन उसका साथ देने वाला कोई न था। वह एकाकीपन का दंश झेल रहा था। वह धन जिसे उसने अपना खुदा माना था, वही उसकी आँखों के सामने एक मौन बोझ बन गया था। इतिहासकारों के अनुसार, उसने उन रत्नों को अंतिम विदा देते हुए कहा था— 'हाय! यह सब यहीं रह जाएगा और मैं अपने साथ केवल अपने कुकर्मों का बोझ लेकर जा रहा हूँ।' अंततः, 30 अप्रैल 1030 को, वह अत्यंत अपमानजनक और कष्टप्रद स्थिति में मृत्यु को प्राप्त हुआ। महमूद गजनवी की कब्र अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी शहर के पास रौज़ा गाँव में खोदी गई, जिसे फ़िरोज़ी बाग़ के नाम से भी जाना जाता था,उसका अंत चीख-चीख कर कह रहा था कि प्रकृति का न्याय भले ही देर से आए, परंतु वह निष्पक्ष और अत्यंत कठोर होता है। जो वैभव रक्त की नींव पर खड़ा होता है, उसका अंत अंततः राख और आँसुओं के सागर में ही होता है। इतिहास का चक्र अनवरत घूमता है और समय हर अन्याय का हिसाब चुकता करता है। महमूद गजनवी का वह क्रूर अट्टहास, जिसने 1026 में सोमनाथ की दीवारों को हिला दिया था, आज 2026 की गूँज में विलीन हो चुका है। महमूद ने सोचा था कि वह मूर्तियों को तोड़कर एक संस्कृति का अंत कर देगा, किंतु वह भूल गया था कि भारत की आत्मा पत्थरों में नहीं, उसके जन-मानस की अटूट श्रद्धा में बसती है। आज वर्ष 2026 में, महमूद के उस आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर, दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ गजनी आज अपने ही कर्मों के मलबे के नीचे दरिद्रता और अशांति की धूल फांक रहा है, वहीं भारत विश्वपटल पर एक अजेय आर्थिक और सामरिक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। सरदार वल्लभभाई पटेल के उस कालजयी संकल्प से निर्मित आज का सोमनाथ मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का पुनर्जन्म है। समुद्र की लहरें आज भी सोमनाथ के चरणों को पखारती हैं, लेकिन अब उनमें पराजय का क्रंदन नहीं, बल्कि 'नए भारत' की विजय का गर्जन है। वह स्वर्ण-शिखर, जिसे महमूद ने कभी लूटा था, आज पहले से कहीं अधिक भव्यता के साथ सूर्य की किरणों को परावर्तित कर रहा है। सोमनाथ की यह गाथा हमें स्मरण कराती है कि सभ्यताएं शस्त्रों से नहीं, संस्कारों और धैर्य से जीवित रहती हैं। आतातायी आते हैं और धूल में मिल जाते हैं, लेकिन जो संस्कृति 'सत्य' और 'शिव' पर आधारित है, वह सदैव अजेय रहती है। आज का सशक्त भारत अपनी विरासत का रक्षक भी है और भविष्य का निर्माता भी। 'सोमनाथ 1026 से 2026' की यह यात्रा साक्ष्य है कि सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है, पराजित नहीं। गजनी का पतन और सोमनाथ का यह गौरवशाली उत्थान ही नियति का अंतिम और पूर्ण न्याय है।
Homeopathy in Hyderabad for BPPV: Natural Relief for Vertigo and Dizziness

Get safe and effective homeopathy in Hyderabad for BPPV. Reduce dizziness, restore balance, and improve daily life naturally and holistically.

Benign Paroxysmal Positional Vertigo (BPPV) is a common inner ear disorder that causes sudden dizziness, spinning sensations, and balance problems. People with BPPV often face difficulty performing everyday activities such as walking, turning in bed, or driving. While BPPV is not life-threatening, it can significantly affect quality of life and increase the risk of falls, especially among older adults.

BPPV occurs when tiny calcium crystals in the inner ear, called otoconia, become dislodged and move into the semicircular canals. This disrupts the normal signals sent to the brain, leading to vertigo. Typical symptoms include sudden spinning, nausea, lightheadedness, occasional vomiting, and brief episodes of dizziness lasting a few seconds to minutes. Common causes include age-related changes in the inner ear, head injuries, infections, or prolonged inactivity.

Homeopathy in Hyderabad offers a gentle and effective approach to managing BPPV. Homeopathic treatment focuses on restoring balance, reducing the frequency and intensity of vertigo episodes, and improving overall well-being. Unlike conventional treatments, homeopathy addresses the root cause of imbalance rather than only relieving symptoms. Each patient receives a personalized treatment plan that may include lifestyle guidance, dietary recommendations, and balance-supporting exercises to maintain inner ear health and prevent recurring episodes.

Spiritual Homeopathy in Hyderabad specializes in holistic care for patients with BPPV. Our experienced homeopathy practitioners provide individualized treatment plans designed to reduce dizziness, improve balance, and enhance quality of life. Homeopathy in Hyderabad at Spiritual Homeopathy emphasizes natural, safe, and professional care, helping patients regain confidence and mobility while minimizing discomfort.

If you are dealing with BPPV, contact Spiritual Homeopathy today at 9069176176. Take the first step toward a vertigo-free life with expert homeopathy in Hyderabad.

बासुकीनाथ धाम में CEC ज्ञानेश कुमार ने टेका मत्था: देश की तरक्की की कामना की, अब BLOs के साथ करेंगे चुनावी चर्चा।

दुमका/देवघर: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार अपने दो दिवसीय संथाल परगना प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को पूरी तरह प्रशासनिक और आध्यात्मिक रंग में नजर आए। सुबह उन्होंने सपरिवार दुमका स्थित बासुकीनाथ धाम (फौजदारी बाबा) में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बाबा से देश की सुख, समृद्धि और तरक्की की मंगलकामना की है।

सुरक्षा व्यवस्था और गार्ड ऑफ ऑनर मुख्य चुनाव आयुक्त के बासुकीनाथ आगमन पर दुमका जिला प्रशासन की ओर से उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया गया। मंदिर परिसर पहुंचने पर दुमका के निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और पुलिस अधीक्षक (SP) ने उनका औपचारिक स्वागत किया। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में कड़े प्रबंध किए गए थे।

तपोवन में BLO संवाद और SIR पर चर्चा बासुकीनाथ से प्रस्थान कर मुख्य चुनाव आयुक्त सीधे देवघर के तपोवन पहुंचेंगे। उनके आज के कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

तपोवन पहाड़ी निरीक्षण: सुबह करीब 10:30 बजे वे पहाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे और चुनावी बुनियादी ढांचे की समीक्षा करेंगे।

BLOs के साथ संवाद: सुबह 11:00 बजे मोहनानंद प्लस-2 उच्च विद्यालय, तपोवन में बूथ लेवल अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

SIR पर विमर्श: इस बैठक के दौरान झारखंड में आगामी SIR (Special Information Report/Revision) प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

मीडिया इंटरैक्शन: दोपहर 12:00 बजे वे मीडिया प्रतिनिधियों से मुखातिब होंगे, जिसके बाद 1:20 बजे देवघर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

रविवार का घटनाक्रम विदित हो कि रविवार को देवघर पहुंचने के बाद उन्होंने बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा की थी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की कामना की थी। इसके उपरांत उन्होंने नौलखा मंदिर और एम्स (AIIMS) देवघर का निरीक्षण कर मतदाता सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए थे।

डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी, बोले-रूसी तेल छोड़ो वरना…पीएम मोदी को लेकर कही बड़ी बात

#uscouldraisetariffsonindiaiftheydonthelponrussianoil

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। ट्रंप की ओर से सोमवार को की गई सख्त टिप्पणी में कहा गया है कि अगर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर दिल्ली का रुख हमारे साथ मेल नहीं खाता है तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।’

पहले की पीएम मोदी की तारीफ

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी ऑडियो संदेश में ट्रंप ने अपने विशेष सैन्य विमान- एयरफोर्स वन में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद के दौरान पीएम मोदी पर टिप्पणियां कीं। उन्होंने भारत में रूसी तेल आयात से जुड़े एक सवाल के संदर्भ में कहा, 'वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे...प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे नेक इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत-रूस) व्यापार करते हैं, उन्हें यह बात भलीभांति पता थी कि अमेरिका उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है।’

ट्रेड डील पर बातचीत के बीच बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत के बीच आया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अब वह तेल नहीं खरीद रहे हैं। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज किया था। अब उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और हम टैरिफ बढ़ाएंगे।

पहले भी लगा चुके हैं भारी टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारतीय सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लगा चुका है। ट्रंप के मुताबिक, इसमें से 25% टैरिफ तो केवल इसलिए लगाया गया है ताकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की सजा दी जा सके। इस भारी-भरकम टैक्स का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के डेटा के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 37.5% तक गिर गया है। जो निर्यात पहले 8.8 अरब डॉलर का हुआ करता था, वह घटकर केवल 5.5 अरब डॉलर रह गया है।

Homeo Doctor in Hyderabad Offering Effective Headache Management Naturally

Consult a trusted homeo doctor in Hyderabad for headache care. Understand headache symptoms, causes, and holistic homeopathy treatment options.

Understanding Headache and Its Daily Impact

Headache is a common health concern that affects people across all age groups. Whether it appears occasionally or becomes a frequent problem, headache pain can interfere with work performance, sleep quality, and emotional well-being. Due to rising lifestyle stress and work pressure, many individuals seek guidance from an experienced homeo doctor in Hyderabad for safe and long-term headache management.

In metropolitan areas, factors such as prolonged screen exposure, irregular eating habits, mental stress, and lack of proper rest often contribute to headaches. Instead of depending on short-term relief measures, consulting a qualified homeo doctor in Hyderabad helps identify underlying causes and supports lasting improvement.

Symptoms and Causes of Headache

Common Symptoms

  • Continuous or throbbing pain in the head
  • Pressure around the forehead or temples
  • Sensitivity to light and sound
  • Nausea, fatigue, or irritability
  • Difficulty concentrating

Common Causes

  • Stress, anxiety, and emotional tension
  • Disturbed or insufficient sleep
  • Dehydration and skipped meals
  • Hormonal imbalance
  • Sinus-related issues
  • Poor posture and long working hours

A skilled homeo doctor in Hyderabad carefully evaluates these factors before planning treatment.

Role of Homeopathy in Headache Care

Homeopathy follows a holistic and personalized approach, focusing on the individual rather than just the headache. A qualified homeo doctor in Hyderabad studies the nature, frequency, triggers, and impact of headaches along with the patient’s overall health.

Homeopathy helps to:

  • Reduce the frequency and intensity of headaches
  • Address stress-related and lifestyle-induced triggers
  • Improve sleep patterns and emotional balance
  • Support the body’s natural healing process

This approach makes homeopathy suitable for long-term headache care without suppressing symptoms.

Spiritual Homeopathy – Trusted Support in Hyderabad

Spiritual Homeopathy is a well-established clinic known for patient-centered homeopathic care. With experienced doctors and a holistic treatment approach, the clinic supports individuals seeking a reliable homeo doctor in Hyderabad for headache management. The focus remains on identifying root causes and improving overall quality of life.

Call to Action

Don’t let headaches disrupt your routine. Choose natural and holistic care today.

दीदारगंज के डीहपुर में धूमधाम से मनाया गया माता सावित्री बाई फुले की जन्म जयन्ती।
सत्येन्द्र यादव
मार्टीनगंज-आज़मगढ़
दीदारगंज थाना क्षेत्र के डीहपुर गांव में संचालित माता सावित्री बाई फुले सेवा समिति के द्वारा शनिवार को प्राथमिक विद्यालय डीहपुर में सावित्री बाई फूले की जन्म जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यअतिथि राजकुमार एवं समिति के अध्यक्ष राम किशोर मौर्य एडवोकेट ने संयुक्त रूप से माता सावित्रीबाई फूले के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। समिति के लोगों द्वारा वर्ष 2025 की हाईस्कूल की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले गांव के कुल 6 मेधावी छात्र- छात्राओं तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कक्षा 5 के  26 बच्चों को प्रसस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। समाजसेवी रामकिशोर मौर्य एडवोकेट, राम मिलान यादव, राजकुमार एवं मृगांक शेखर आदि वक्ताओं ने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक समय महिलाएं सामाजिक शोषण और दोहरी मार से पीड़ित थीं। ऐसे कठिन दौर में सावित्रीबाई फूले ने समाज सुधारक के रूप में महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने और उन्हें सामाजिक शोषण से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था।   इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राममिलन यादव एवं संचालन मिठ्ठू लाल यादव ने किया। कार्यक्रम में  ग्राम प्रधान छविराम यादव, संतोष कुमार, प्रधानाध्यापक मृगांक शेखर, कैलाश नाथ, डॉ बृजेश , सुधाकर मौर्या, शिवकुमार यादव आदि लोग उपस्थित रहे।
बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश बनाने की कोशिश…मिथुन चक्रवर्ती का ममता सरकार पर बड़ा आरोप

#westbengalwillbecomewestpakistanallegesbjpleadermithunchakraborty

भारतीय जनता पार्टी के नेता और फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कूचबिहार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि बंगाल में हालात जानबूझकर ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो फिल्म द कश्मीर फाइल्स में दिखाए गए घटना की याद दिलाते हैं।

ममता बनर्जी की शाह पर की गई टिप्पणी की तीखी आलोचना

कूच बिहार की रैली में मिथुन ने ममता बनर्जी कर जमकर हमला बोला। मिथुन ने कहा कि बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और कहा कि उन्होंने ही उन्हें कोलकाता के उस होटल से बाहर आने दिया जहां वे ठहरे हुए थे। काश वे स्पष्ट रूप से कह देतीं कि गृह मंत्री को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वह दिन विनाशकारी होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी।

पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की साजिश-मिथुन

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा 'क्या आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखी है? क्या आपने देखा कि कश्मीरी पंडितों को कैसे वहां से खदेड़ा गया? आज बंगाल में भी वैसी ही स्थिति पैदा की जा रही है। एक साजिश के तहत पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की कोशिश हो रही है।'

भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं-मिथुन

भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का एकमात्र तरीका यह है कि सभी लोग एक साथ आएं। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल के विवेकशील समर्थकों से आगामी चुनावों में सरकार बदलने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि राज्य में कोई उद्यम, उद्योग, रोजगार या उचित स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं है।

लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं-मिथुन

भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं है और लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए, क्योंकि यह उनका ही पैसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल योजनाओं से विकास नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना से देशभर में लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे लागू नहीं होने दे रहीं, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार होगा। मिथुन ने आरोप लगाया कि बंगाल में न नौकरियां हैं, न कारखाने, न विकास- हर तरफ सिर्फ भ्रष्टाचार है।

Homeopathy Clinic in Hyderabad for Soft Palate Problems – Gentle & Holistic Care

Looking for a dependable homeopathy clinic in Hyderabad for soft palate problems? Get safe, natural, and holistic treatment at Spiritual Homeopathy.

Soft palate problems, often called “Soft P,” affect the soft muscular tissue located at the back of the roof of the mouth. This part of the mouth plays an important role in swallowing, speech, and breathing. When the soft palate becomes irritated or inflamed, it can cause ongoing discomfort and interfere with everyday life. Consulting a trusted homeopathy clinic in Hyderabad can help manage these concerns naturally and safely.

Symptoms and Causes of Soft Palate Problems

Common symptoms of soft palate problems include pain or soreness in the throat, difficulty swallowing, voice changes, redness, swelling, dryness, and frequent throat clearing. Some individuals may also experience snoring or disturbed sleep. These symptoms may appear mild at first but can become persistent without proper care.

Soft palate problems can be caused by repeated throat infections, allergies, acid reflux, smoking, excessive voice strain, stress, nutritional deficiencies, and weakened immunity. Treating only the symptoms often gives short-term relief, while the underlying imbalance remains.

Homeopathy Treatment for Soft Palate Problems

Homeopathy offers a holistic approach that focuses on treating the person as a whole. At an experienced homeopathy clinic in Hyderabad, treatment is personalized after a detailed assessment of symptoms, lifestyle, immunity, and overall health. Homeopathy helps reduce inflammation, supports the body’s natural healing response, strengthens immunity, and improves throat health. Its gentle nature makes it suitable for people of all age groups.

Spiritual Homeopathy – A Reliable Homeopathy Clinic in Hyderabad

Spiritual Homeopathy is a well-known homeopathy clinic in Hyderabad, recognized for its ethical practice and patient-focused care. The clinic follows holistic principles aimed at long-term wellness and balance. Through individualized consultations and natural treatment plans, Spiritual Homeopathy helps patients manage chronic soft palate problems effectively.

If you are searching for a dependable homeopathy clinic in Hyderabad, Spiritual Homeopathy offers professional guidance and holistic support for lasting relief.

Call to Action

Choose natural care for better throat health.

नेपाल में क्यों फैली हिंसा? हालात बेकाबू, भारत में सीमा पर बढ़ाई गई सुरक्षा

#nepalborderriotsmosquevandalismvideoviral

नेपाल के पर्सा और धनुषा जिलों में धार्मिक विवाद के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की कथित घटना की खबर फैलते ही विरोध प्रदर्शन शुरू हुए, जो कुछ ही समय में हिंसक रूप ले बैठा है। चिंताजनक स्थिति को देखते हुए स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने एहतियाती कर्फ्यू लगाने का एलान किया। पड़ोसी देश में तनाव और उथल-पुथल के बीच भारत में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ा

पर्सा जिले के बीरगंज शहर में धनुषा की मस्जिद में तोड़फोड़ और पवित्र ग्रंथ जलाने की घटना के बाद हालात बेकाबू हैं। सोशल मीडिया पर धार्मिक सामग्री वाला वीडियो वायरल होने से तनाव और बढ़ गया। हिंसक प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को हालात संभालने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। स्थिति को काबू में करने के लिए प्रशासन ने बीरगंज में कर्फ्यू लागू कर दिया है।

सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार

हालात की समीक्षा के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन ने बस पार्क, नागवा, इनारवा (पूर्व); सिरसिया नदी (पश्चिम); गंडक चौक (उत्तर) और शंकराचार्य गेट (दक्षिण) को संवेदनशील इलाके के रूप में चिह्नित किया है। प्रशासन ने लोगों को चेतावनी देते हुए कहा, 'कर्फ्यू के दौरान, सुरक्षाकर्मियों को देखते ही गोली मारने का अधिकार दिया गया है। इसलिए नागरिकों से अनुरोध है कि बहुत जरूरी होने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें। बाहर निकलने की विवशता होने पर निकटतम सुरक्षाकर्मी से संपर्क करें। मोबाइल से 100 पर कॉल करें।

भारत-नेपाल सीमा सील

भारत-नेपाल सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। मैत्री पुल समेत सभी बॉर्डर पॉइंट्स पर आवागमन रोक दिया गया है। केवल आपातकालीन सेवाओं को सीमा पार करने की अनुमति दी जा रही है। सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने अतिरिक्त जवानों की तैनाती कर दी है और हर आने-जाने वाले व्यक्ति की कड़ी जांच की जा रही है।

Homeopathy Clinic in Hyderabad for Natural PCOD Care

Looking for a trusted homeopathy clinic in Hyderabad for PCOD? Spiritual Homeopathy provides holistic care to restore hormonal balance and women’s wellness.

What is PCOD?

Polycystic Ovarian Disease (PCOD) is a hormonal disorder commonly seen in women of reproductive age. It affects ovarian function and leads to hormonal imbalance that disrupts menstrual cycles, fertility, metabolism, and emotional health. Many women seek support from a reliable homeopathy clinic in Hyderabad to manage PCOD naturally and safely.

Common Symptoms of PCOD

PCOD symptoms differ from person to person but often include:

  • Irregular or missed periods
  • Weight gain and difficulty losing weight
  • Acne and oily skin
  • Hair fall or thinning hair
  • Excess facial or body hair
  • Difficulty in conceiving

If these symptoms are ignored, PCOD can increase the risk of diabetes, thyroid disorders, and long-term fertility concerns.

Causes and Risk Factors

The exact cause of PCOD is not fully known, but common contributing factors include hormonal imbalance, insulin resistance, stress, sedentary lifestyle, and genetic predisposition. Women with a family history of PCOD or metabolic issues are at higher risk. Early consultation at a trusted homeopathy clinic in Hyderabad helps in managing the condition effectively.

How Homeopathy Helps in PCOD

Homeopathy follows a holistic approach that addresses the root cause of PCOD rather than only controlling symptoms. Treatment at an experienced homeopathy clinic in Hyderabad focuses on regulating menstrual cycles, balancing hormones, improving metabolism, supporting fertility, and enhancing emotional well-being. Each treatment plan is personalized, ensuring safe and long-lasting improvement.

Why Choose Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy is a reputed homeopathy clinic in Hyderabad, offering specialized care for women with PCOD. With branches in KPHB, Dilsukhnagar, Chandanagar, and Nallagandla, the clinic provides professional consultations, personalized care plans, and continuous guidance. The focus remains on holistic healing, lifestyle balance, and overall wellness.

Take the Next Step

If PCOD is affecting your health, confidence, or daily life, consult Spiritual Homeopathy, a trusted homeopathy clinic in Hyderabad, and begin your journey toward hormonal balance and better quality of life.

सोमनाथ, 1026 से 2026: ग्लानि से गौरव तक के हजार वर्ष ✍️डॉ. विद्यासागर उपाध्याय संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से
संजीव सिंह बलिया!समय गवाह है कि तलवारों की धार से मंदिरों की दीवारें तो गिराई जा सकती हैं, लेकिन राष्ट्र की चेतना को कभी कुचला नहीं जा सकता। 1026 में सोमनाथ के खंडहरों पर खड़ा होकर महमूद जिस जीत का अट्टहास कर रहा था, 2026 के कालखंड ने उसे इतिहास की धूल में मिला दिया है। आज सोमनाथ का स्वर्ण-शिखर केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि इस सत्य की उद्घोषणा है कि—अंधकार कितना भी गहरा क्यों न हो, सूर्य का उदय अटल है। अफगानिस्तान की उन अभेद्य और धूसर पर्वत कंदराओं के मध्य स्थित गजनी की गोद में, सन् 971 ईस्वी में महमूद का प्रादुर्भाव हुआ। नियति ने उसके अंतस में पिता सुबुक्तगीन से विरासत में मिली साम्राज्यवादी पिपासा और मजहबी कट्टरता के हलाहल का सम्मिश्रण कर दिया था। सिंहासनारूढ़ होते ही उसकी महत्वाकांक्षी दृष्टि ने मध्य एशिया के क्षितिज पर स्वयं को एक अप्रतिम सुल्तान के रूप में स्थापित करने का स्वप्न बुना। किंतु इस महात्वाकांक्षा के स्वर्ण-महल को निर्मित करने हेतु जिस अपार वैभव की आधारशिला चाहिए थी, उसकी प्राप्ति हेतु उसने एक विनाशकारी मार्ग चुना। उस युग का आर्यावर्त अपनी समृद्धि की पराकाष्ठा पर था—एक ऐसी 'स्वर्णमयी चिड़िया', जिसके देवालयों के शिखर सूर्य की रश्मियों से स्पर्धा करते थे और जिनकी अंतहीन मणियाँ विश्व को चकाचौंध करने हेतु पर्याप्त थीं। भारत के इसी अतुलनीय और अलौकिक वैभव ने महमूद की लुटेरी वृत्ति को एक हिंसक शिकारी की भाँति उकसाया। उसने आर्यावर्त की पवित्र धरा को लहूलुहान करने का एक वीभत्स संकल्प लिया। सन् 1000 से 1027 ईस्वी का वह कालखंड गवाह है, जब उसने भारत के हृदय पर एक-दो नहीं, अपितु सत्रह बार भीषण प्रहार किए। ये आक्रमण मात्र भौगोलिक विजय की लालसा नहीं थे, अपितु सभ्यता और संस्कृति पर बर्बरता का वह नंगा नाच था, जिसने इतिहास के पन्नों को सदा के लिए रक्तरंजित कर दिया। जब महमूद की बर्बर सेना ने कृष्ण की पावन क्रीड़ास्थली मथुरा की परिधि में प्रवेश किया, तो वहां की स्थापत्य कला की दिव्यता देख वह पाषाण-हृदय लुटेरा भी एक क्षण के लिए स्तब्ध रह गया। यमुना के तट पर स्थित वे गगनचुंबी देवालय और उनमें जड़ित नीलमणि एवं हीरक खंड उसे स्वर्ग की साक्षात उपस्थिति जान पड़े। स्वयं महमूद ने इस नगर की उपमा देते हुए स्वीकार किया था— 'यदि कोई इस सदृश नगर का निर्माण करना चाहे, तो उसे एक लाख स्वर्ण दीनार व्यय करने होंगे और इसमें दो शताब्दी का समय लगेगा।' किंतु, उसकी मजहबी कट्टरता ने शीघ्र ही इस सराहना को विनाशकारी उन्माद में बदल दिया। मथुरा की वे गलियां, जहाँ कभी दिव्य वेणु-नाद गूंजता था, वहां अब केवल तलवारों की पैशाचिक खनक और निहत्थे नागरिकों का कारुणिक क्रंदन शेष था। महमूद के आदेश पर उन कलात्मक विग्रहों को हथौड़ों से खंडित किया गया, जिनके दर्शन मात्र से भक्त कृतार्थ हो जाते थे। समकालीन इतिहासकार अल-उतबी लिखता है कि— 'सुल्तान ने आदेश दिया कि सभी मंदिरों को जला दिया जाए और उन्हें भूमिसात कर दिया जाए।' मंदिरों के वे गर्भगृह, जो कभी चंदन और पारिजात की सुगंध से महकते थे, अब निर्दोष ब्राह्मणों और रक्षार्थ खड़े योद्धाओं के तप्त रक्त की गंध से भर गए। उस मुख्य भव्य मंदिर को, जिसकी सुंदरता का गुणगान सुल्तान ने स्वयं किया था, निर्दयतापूर्वक अग्नि के हवाले कर दिया गया। स्वर्णमयी प्रतिमाओं को गलियों में घसीटा गया और उनकी आँखों में जड़े बहुमूल्य रत्नों को क्रूरता से उखाड़ लिया गया। वह पावन नगरी, जो सहस्रों वर्षों से भारतीय संस्कृति का प्रखर दीप-स्तंभ थी, कुछ ही प्रहरों में धुएं और भस्म के ढेर में परिवर्तित कर दी गई। अल-उतबी के अनुसार, उस दिन पाँच हजार स्वर्ण की मूर्तियाँ और अनगिनत स्वर्ण-मुद्राएं लूट ली गईं। यमुना का जल, जो कभी नील वर्ण का था, उस दिन अपने पुत्रों के रक्त से लाल होकर बह रहा था। मथुरा का वह ध्वंस मात्र एक नगर की लूट नहीं थी, बल्कि एक जीवंत सभ्यता के हृदय पर किया गया सबसे वीभत्स और अमिट आघात था। सन् 1026 की वह शीतल प्रभात, जब अरब सागर की लहरें सोमनाथ के चरणों को पखार रही थीं, क्षितिज पर महमूद की बर्बर सेना के धूल के बादल मँडराने लगे। मंदिर की प्राचीर पर खड़े योद्धाओं ने जब शत्रु की विशाल वाहिनी को देखा, तो उनके मुख से केवल एक ही उद्घोष निकला— 'हर-हर महादेव!'। वह युद्ध मात्र दो सेनाओं का संघर्ष नहीं था, वह आततायी की राक्षसी प्रवृत्ति और भक्त की अडिग आस्था के मध्य एक धर्मयुद्ध था। गुजरात के दुर्गम पथों से होता हुआ जब महमूद मंदिर के सिंहद्वार तक पहुँचा, तो उसे उस प्रतिरोध का सामना करना पड़ा जिसकी उसने कल्पना भी न की थी। राजा भीमदेव प्रथम और उनके नेतृत्व में एकत्र हुए राजपूत योद्धाओं ने शौर्य की वह पराकाष्ठा दिखाई, जिसे देख शत्रु के दांत खट्टे हो गए। इतिहास साक्षी है कि मंदिर की रक्षा हेतु पचास सहस्र से अधिक निहत्थे ब्राह्मणों, संन्यासियों और वीर योद्धाओं ने स्वयं को वेदी पर अर्पित कर दिया। मंदिर के प्रांगण में रक्त की सरिता प्रवाहित होने लगी, किंतु एक भी शीश श्रद्धा के पथ से विचलित नहीं हुआ। सोमनाथ की अभेद्य प्रतीत होने वाली प्राचीरें केवल महमूद गजनवी के बाहरी प्रहारों से नहीं, बल्कि आंतरिक विश्वासघात और रणनीतिक क्षरण के आत्मघाती प्रहारों से ढह गई थीं, जिसका विवरण अल-बिरूनी और समकालीन इतिहासकारों ने अत्यंत पैनी दृष्टि से किया है। इस पतन की पटकथा में पहला प्रहार 'रणनीतिक चूक' के रूप में हुआ, जहाँ मंदिर के प्रबंधकों और पुजारियों के भीतर घर कर गई इस अव्यवहारिक और अति-धार्मिक धारणा ने कि देवता स्वयं प्रकट होकर म्लेच्छों का संहार करेंगे, वास्तविक सैन्य मोर्चाबंदी और सुरक्षा तैयारियों को पूरी तरह कुंद कर दिया। इसके समानांतर, 'राजनीतिक भूल' ने राष्ट्र की रीढ़ तोड़ दी, जब उत्तर भारत के शक्तिशाली राजा आपसी द्वेष और संकीर्ण अहम् के कारण राजा भीमदेव प्रथम के आह्वान पर एकजुट नहीं हुए, जिससे महमूद को वह खंडित प्रतिरोध मिला जिसने उसकी राह आसान कर दी। किंतु सबसे मर्मभेदी सत्य वह 'पेशेवर विश्वासघात' था, जिसके तहत महमूद की सेना में 'तिलक' जैसे उच्चपदस्थ हिंदू सेनापति और 'सालार-ए-हिंदुवान' जैसी पेशेवर हिंदू सैनिक टुकड़ियाँ शामिल थीं; ये भारतीय गद्दार भाड़े के सैनिक अपनी ही साझी विरासत और पवित्र देवालय के विरुद्ध मात्र वेतन और लूट के माल के लोभ में तलवारें भांज रहे थे, जो इस ऐतिहासिक त्रासदी को विश्वासघात की एक ऐसी पराकाष्ठा बना देता है जहाँ अपनों के ही हाथों अपनों का ही सर्वस्व विनष्ट हो गया। अंततः, संख्याबल और विश्वासघात की कतरनी ने वीरता के उस कवच को भेद दिया। काज़विनी लिखते हैं, "इस लड़ाई में 50 हज़ार से अधिक स्थानीय लोग मारे गए। इसके बाद महमूद ने मंदिर में प्रवेश किया। पूरा मंदिर लकड़ी के 56 खंभों पर टिका हुआ था, लेकिन स्थापत्य कला का सबसे बड़ा आश्चर्य था मंदिर की मुख्य मूर्ति जो कि बिना किसी सहारे के हवा में लटकी हुई थी। महमूद ने मूर्ति को आश्चर्य से देखा।" अल-बरूनी ने भी मंदिर का वर्णन करते हुए लिखा, "मंदिर के मुख्य भगवान शिव थे। ज़मीन से दो मीटर की ऊँचाई पर पत्थर का शिव लिंग रखा हुआ था.। उसके बग़ल में सोने और चाँदी से बनी कुछ और मूर्तियाँ थीं." महमूद जब गर्भगृह में प्रविष्ट हुआ, तो उसकी आँखों में दानवीय लोलुपता थी। वह दृश्य अत्यंत वीभत्स और हृदयविदारक था—जिस ज्योतिर्लिंग की पूजा युगों से देवता और गंधर्व करते आए थे, उस पर महमूद ने अपनी गदा से प्रहार किया। अल-बिरूनी के साक्ष्य बताते हैं कि लिंग के खंडित होते ही उसके भीतर छिपे बहुमूल्य रत्न बिखर गए। लूट का वह दृश्य मानवीय कल्पना से परे था। मंदिर के स्वर्णद्वार उखाड़ लिए गए, नीलमणि से जड़ित झूमर काट दिए गए और खंभों में जड़े हीरों को बर्बरता से कुरेदा गया। उसने चालीस मन वज़न की सोने की ज़ंजीर, जिससे महाघंट लटकता था तोड़ डाली। किवाड़ों, चौखटों और छत से चाँदी के पत्तर छुड़ा लिए। फिर भी उसे संतोष नहीं हुआ, और उसने गुप्त कोष की तलाश में पूरे गर्भगृह को खुदवा डाला. इतिहासकार सिराज ने 'तबाकत-ए-नासिरी' में लिखा, "महमूद सोमनाथ की मूर्तियों को अपने साथ ग़ज़नी ले गया जहाँ उसे तोड़ कर चार हिस्सों में बाँटा गया। उसका एक हिस्सा जुमे को होने वाली नमाज़ की जगह पर लगाया गया, दूसरा हिस्सा शाही महल के प्रवेश द्वार पर लगाया गया. तीसरे हिस्से को उसने मक्का और चौथे हिस्से को मदीना भिजवा दिया." अल-बिरूनी ने लिखा, "महमूद के हमलों ने भारत में आर्थिक तबाही मचा दी. शुरू के हमलों का मुख्य उद्देश्य मवेशियों को लूटना होता था. बाद में इन हमलों का उद्देश्य शहरी ख़ज़ाने को लूटना और युद्ध बंदी बनाना हो गया ताकि उन्हें ग़ुलामों की तरह बेचा या सेना में भर्ती किया जा सके." अल-उतबी अपनी पुस्तक 'तारीख-ए-यामिनी' में उस वीभत्सता का प्रमाण देते हुए लिखता है कि सोमनाथ, मथुरा और कन्नौज के अभियानों के बाद महमूद लगभग एक लाख भारतीय बंदियों को जंजीरों में जकड़कर गजनी ले गया था। बंदियों की संख्या इतनी अधिक थी कि गजनी के बाजारों में 'गुलामों' की भरमार हो गई और माँग से अधिक आपूर्ति के कारण उनकी कीमत गिरकर मात्र कुछ दिरहम रह गई। यह केवल आर्थिक आँकड़ा नहीं, बल्कि एक सभ्यता के अपमान की पराकाष्ठा थी। अफगानिस्तान के गजनी शहर के बाहर स्थित वह विशाल चौक और वहाँ बना वह पत्थर का चबूतरा आज भी उस बर्बरता का मूक गवाह है, जहाँ भारत की मर्यादा को कौड़ियों के भाव तौला गया था। इतिहास की सबसे खौफ़नाक और हृदयविदारक गूँज ''दुख्तरे हिन्दोस्तान.. नीलामे दो दीनार'' (अर्थात् हिंदुस्तान की बेटियाँ, दो दीनार में नीलाम) उसी चौक से उठी थी। वह चबूतरा साक्ष्य है उस दारुण कालखंड का, जब आर्यावर्त के अबलाओं को पशुओं की भाँति सार्वजनिक रूप से खड़ा किया गया और मात्र दो दीनार के तुच्छ मूल्य पर उनकी बोलियाँ लगाई गईं। यह कृत्य केवल एक आर्थिक विनिमय नहीं, बल्कि एक महान प्राचीन सभ्यता को मानसिक और सांस्कृतिक रूप से कुचलने का सुनियोजित प्रयास था। वह चीत्कार आज भी भारतीय इतिहास की सबसे भयावह चेतावनी बनकर गूँजती है कि जब-जब राष्ट्र अपनी आंतरिक एकता और सामरिक शक्ति को खोता है, तब-तब उसकी संतानों को ऐसी अमानवीय और रूह कँपा देने वाली नियति का सामना करना पड़ता है। अल-बिरूनी ने अपनी कालजयी कृति 'किताब-उल-हिंद' में सोमनाथ के ध्वंस और उसके दूरगामी सामाजिक प्रभावों का अत्यंत सूक्ष्म एवं हृदयविदारक चित्रण करते हुए लिखा है कि महमूद के भीषण प्रहारों ने भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि को समूल नष्ट कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप यहाँ का सुसंस्कृत हिंदू समाज भय और असुरक्षा के कारण 'धूल के कणों' की भाँति दिशा-हीन होकर बिखर गया। वह आगे अत्यंत स्पष्टता से स्वीकार करता है कि महमूद की इन पैशाचिक क्रूरताओं और देवालयों के अपमान ने भारतीय जनमानस के अंतस में विदेशी आक्रांताओं के प्रति एक ऐसी अमिट और 'अगाध घृणा' को जन्म दे दिया, जिसे शब्दों की परिधि में बांधना असंभव है, और इसी विद्वेष ने आगे चलकर दोनों संस्कृतियों के मध्य एक कभी न भरने वाली खाई का निर्माण कर दिया। वह ध्वंस केवल पत्थरों का गिरना नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर हुआ वह आघात था जिसकी गूँज आज एक सहस्राब्दी बाद भी इतिहास के गलियारों में सुनाई देती है। जिस महमूद ने हज़ारों हँसते-खेलते परिवारों को उजाड़ा, देव-प्रतिमाओं को पैरों तले रौंदा और आर्यावर्त की पवित्र धरा को निर्दोषों के रक्त से सिंचित किया, नियति ने उसके लिए एक ऐसा अंत चुना जो किसी भी नरक की कल्पना से अधिक भयावह था। सन् 1030 ईस्वी के आते-आते वह महाबली सुल्तान, जिसका नाम सुनकर कभी सीमाएँ कांपती थीं, स्वयं अपनी ही काया के भीतर कैद होकर रह गया। वह शरीर, जिसने कभी युद्ध की प्रत्यंचा चढ़ाई थी, अब तपेदिक (टीबी) और पक्षाघात (Paralysis) की अग्नि में तिल-तिल कर जल रहा था। प्रसिद्ध ब्रिटिश इतिहासकार स्टेनली लेनपूल ने अपनी चर्चित कृति 'मिडीवल इंडिया' (Medieval India) में महमूद के अंतिम क्षणों की वह मर्मस्पर्शी और दुःखद झाँकी प्रस्तुत की है, जो 'बुरा काम का बुरा नतीजा' का जीवंत साक्ष्य है। लेनपूल लिखते हैं कि मृत्यु से मात्र दो दिन पूर्व, जब सुल्तान को यह आभास हुआ कि 'मलकुल-मौत' (मौत का फरिश्ता) उसके प्राण हरने हेतु द्वार पर आ खड़ा है, तब उसने एक अत्यंत विचित्र और हृदयविदारक आज्ञा दी। उसने आदेश दिया कि मथुरा, कन्नौज और सोमनाथ के पवित्र मंदिरों से लूटा गया वह समस्त स्वर्ण, मणिक्य और हीरकों का अथाह भंडार उसके शयनकक्ष के सम्मुख बिछा दिया जाए। लेनपूल के अनुसार, जब वह सारा वैभव उसकी आँखों के सामने चमक रहा था, तब वह विजेता का गर्व करने के बजाय एक निरीह अपराधी की भाँति फूट-फूट कर रोने लगा। वह दृश्य चीख-चीख कर कह रहा था कि जिस रक्त-रंजित दौलत के लिए उसने मानवता का संहार किया, वही दौलत उसे कब्र के उस सन्नाटे और ईश्वर के न्याय से बचाने में लेशमात्र भी सहायक नहीं थी। इतिहासकार अल-उतबी के संकेतों और बाद के वृत्तांतों के अनुसार, जब वह अथाह स्वर्ण-राशि उसके सामने सूर्य की भांति चमक रही थी, तब महमूद विजेता की मुस्कान नहीं, बल्कि एक पराजित अपराधी की चीखें मार रहा था। वह बिस्तर पर पड़ा-पड़ा अपनी आँखों से उन रत्नों को देख रहा था और फूट-फूट कर रो रहा था। वह रो रहा था क्योंकि वह जान चुका था कि—जिस संपत्ति के लिए उसने हज़ारों माँओं की गोद सूनी की, हज़ारों सुहागिनों का सिंदूर पोंछा और पवित्र मंदिरों को अपवित्र किया, वह दौलत उसे मौत के दर्द से एक क्षण की भी मुक्ति नहीं दिला सकती थी। इतिहासकार अबुल फजल बैहाकी ने अपनी प्रसिद्ध कृति 'तारीख-ए-बैहाकी' में महमूद गजनवी के जीवन के अंतिम कालखंड का अत्यंत मार्मिक और वीभत्स विवरण प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि अपने अंतिम दिनों में सुल्तान शारीरिक व्याधियों और मानसिक संताप के कारण अत्यंत एकाकी, हताश और चिड़चिड़ा हो गया था। बैहाकी, जो उस समय के राजकीय घटनाक्रमों का सूक्ष्म दृष्टा था, उल्लेख करता है कि वह क्रूर विजेता रातों की नींद खो चुका था और अक्सर एकांत कक्ष में अपनी लूटी हुई धन-संपदा तथा बेशकीमती रत्नों के ढेरों को निहारते हुए स्वयं से ही बड़बड़ाता था। उस समय उसकी आँखों में जीत का गर्व नहीं, बल्कि एक गहरी रिक्तता और बेबसी झलकती थी। 'तारीख-ए-बैहाकी' के ये पन्ने उस अहंकारी सत्ता के पतन का साक्षात प्रमाण हैं, जहाँ महमूद को अपनी ढलती सांसों के साथ यह कटु बोध हो रहा था कि जिस वैभव हेतु उसने रक्तपात का तांडव रचा, वह उसकी आत्मा को शांति देने और मृत्यु के पाश से मुक्त कराने में सर्वथा असमर्थ था। उसकी पीड़ा इतनी असहनीय थी कि वह हमेशा कराहता रहता था, लेकिन उसका साथ देने वाला कोई न था। वह एकाकीपन का दंश झेल रहा था। वह धन जिसे उसने अपना खुदा माना था, वही उसकी आँखों के सामने एक मौन बोझ बन गया था। इतिहासकारों के अनुसार, उसने उन रत्नों को अंतिम विदा देते हुए कहा था— 'हाय! यह सब यहीं रह जाएगा और मैं अपने साथ केवल अपने कुकर्मों का बोझ लेकर जा रहा हूँ।' अंततः, 30 अप्रैल 1030 को, वह अत्यंत अपमानजनक और कष्टप्रद स्थिति में मृत्यु को प्राप्त हुआ। महमूद गजनवी की कब्र अफ़ग़ानिस्तान के ग़ज़नी शहर के पास रौज़ा गाँव में खोदी गई, जिसे फ़िरोज़ी बाग़ के नाम से भी जाना जाता था,उसका अंत चीख-चीख कर कह रहा था कि प्रकृति का न्याय भले ही देर से आए, परंतु वह निष्पक्ष और अत्यंत कठोर होता है। जो वैभव रक्त की नींव पर खड़ा होता है, उसका अंत अंततः राख और आँसुओं के सागर में ही होता है। इतिहास का चक्र अनवरत घूमता है और समय हर अन्याय का हिसाब चुकता करता है। महमूद गजनवी का वह क्रूर अट्टहास, जिसने 1026 में सोमनाथ की दीवारों को हिला दिया था, आज 2026 की गूँज में विलीन हो चुका है। महमूद ने सोचा था कि वह मूर्तियों को तोड़कर एक संस्कृति का अंत कर देगा, किंतु वह भूल गया था कि भारत की आत्मा पत्थरों में नहीं, उसके जन-मानस की अटूट श्रद्धा में बसती है। आज वर्ष 2026 में, महमूद के उस आक्रमण के एक हजार वर्ष पूर्ण होने पर, दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। जहाँ गजनी आज अपने ही कर्मों के मलबे के नीचे दरिद्रता और अशांति की धूल फांक रहा है, वहीं भारत विश्वपटल पर एक अजेय आर्थिक और सामरिक महाशक्ति के रूप में उभर चुका है। सरदार वल्लभभाई पटेल के उस कालजयी संकल्प से निर्मित आज का सोमनाथ मंदिर केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान का पुनर्जन्म है। समुद्र की लहरें आज भी सोमनाथ के चरणों को पखारती हैं, लेकिन अब उनमें पराजय का क्रंदन नहीं, बल्कि 'नए भारत' की विजय का गर्जन है। वह स्वर्ण-शिखर, जिसे महमूद ने कभी लूटा था, आज पहले से कहीं अधिक भव्यता के साथ सूर्य की किरणों को परावर्तित कर रहा है। सोमनाथ की यह गाथा हमें स्मरण कराती है कि सभ्यताएं शस्त्रों से नहीं, संस्कारों और धैर्य से जीवित रहती हैं। आतातायी आते हैं और धूल में मिल जाते हैं, लेकिन जो संस्कृति 'सत्य' और 'शिव' पर आधारित है, वह सदैव अजेय रहती है। आज का सशक्त भारत अपनी विरासत का रक्षक भी है और भविष्य का निर्माता भी। 'सोमनाथ 1026 से 2026' की यह यात्रा साक्ष्य है कि सत्य को प्रताड़ित किया जा सकता है, पराजित नहीं। गजनी का पतन और सोमनाथ का यह गौरवशाली उत्थान ही नियति का अंतिम और पूर्ण न्याय है।
Homeopathy in Hyderabad for BPPV: Natural Relief for Vertigo and Dizziness

Get safe and effective homeopathy in Hyderabad for BPPV. Reduce dizziness, restore balance, and improve daily life naturally and holistically.

Benign Paroxysmal Positional Vertigo (BPPV) is a common inner ear disorder that causes sudden dizziness, spinning sensations, and balance problems. People with BPPV often face difficulty performing everyday activities such as walking, turning in bed, or driving. While BPPV is not life-threatening, it can significantly affect quality of life and increase the risk of falls, especially among older adults.

BPPV occurs when tiny calcium crystals in the inner ear, called otoconia, become dislodged and move into the semicircular canals. This disrupts the normal signals sent to the brain, leading to vertigo. Typical symptoms include sudden spinning, nausea, lightheadedness, occasional vomiting, and brief episodes of dizziness lasting a few seconds to minutes. Common causes include age-related changes in the inner ear, head injuries, infections, or prolonged inactivity.

Homeopathy in Hyderabad offers a gentle and effective approach to managing BPPV. Homeopathic treatment focuses on restoring balance, reducing the frequency and intensity of vertigo episodes, and improving overall well-being. Unlike conventional treatments, homeopathy addresses the root cause of imbalance rather than only relieving symptoms. Each patient receives a personalized treatment plan that may include lifestyle guidance, dietary recommendations, and balance-supporting exercises to maintain inner ear health and prevent recurring episodes.

Spiritual Homeopathy in Hyderabad specializes in holistic care for patients with BPPV. Our experienced homeopathy practitioners provide individualized treatment plans designed to reduce dizziness, improve balance, and enhance quality of life. Homeopathy in Hyderabad at Spiritual Homeopathy emphasizes natural, safe, and professional care, helping patients regain confidence and mobility while minimizing discomfort.

If you are dealing with BPPV, contact Spiritual Homeopathy today at 9069176176. Take the first step toward a vertigo-free life with expert homeopathy in Hyderabad.

बासुकीनाथ धाम में CEC ज्ञानेश कुमार ने टेका मत्था: देश की तरक्की की कामना की, अब BLOs के साथ करेंगे चुनावी चर्चा।

दुमका/देवघर: भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार अपने दो दिवसीय संथाल परगना प्रवास के दूसरे दिन सोमवार को पूरी तरह प्रशासनिक और आध्यात्मिक रंग में नजर आए। सुबह उन्होंने सपरिवार दुमका स्थित बासुकीनाथ धाम (फौजदारी बाबा) में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बाबा से देश की सुख, समृद्धि और तरक्की की मंगलकामना की है।

सुरक्षा व्यवस्था और गार्ड ऑफ ऑनर मुख्य चुनाव आयुक्त के बासुकीनाथ आगमन पर दुमका जिला प्रशासन की ओर से उन्हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' देकर सम्मानित किया गया। मंदिर परिसर पहुंचने पर दुमका के निर्वाचन पदाधिकारी-सह-उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और पुलिस अधीक्षक (SP) ने उनका औपचारिक स्वागत किया। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में कड़े प्रबंध किए गए थे।

तपोवन में BLO संवाद और SIR पर चर्चा बासुकीनाथ से प्रस्थान कर मुख्य चुनाव आयुक्त सीधे देवघर के तपोवन पहुंचेंगे। उनके आज के कार्यक्रम के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

तपोवन पहाड़ी निरीक्षण: सुबह करीब 10:30 बजे वे पहाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे और चुनावी बुनियादी ढांचे की समीक्षा करेंगे।

BLOs के साथ संवाद: सुबह 11:00 बजे मोहनानंद प्लस-2 उच्च विद्यालय, तपोवन में बूथ लेवल अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।

SIR पर विमर्श: इस बैठक के दौरान झारखंड में आगामी SIR (Special Information Report/Revision) प्रक्रिया पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

मीडिया इंटरैक्शन: दोपहर 12:00 बजे वे मीडिया प्रतिनिधियों से मुखातिब होंगे, जिसके बाद 1:20 बजे देवघर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगे।

रविवार का घटनाक्रम विदित हो कि रविवार को देवघर पहुंचने के बाद उन्होंने बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा की थी और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की कामना की थी। इसके उपरांत उन्होंने नौलखा मंदिर और एम्स (AIIMS) देवघर का निरीक्षण कर मतदाता सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए थे।

डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी, बोले-रूसी तेल छोड़ो वरना…पीएम मोदी को लेकर कही बड़ी बात

#uscouldraisetariffsonindiaiftheydonthelponrussianoil

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की है। ट्रंप की ओर से सोमवार को की गई सख्त टिप्पणी में कहा गया है कि अगर रूसी तेल खरीद के मुद्दे पर दिल्ली का रुख हमारे साथ मेल नहीं खाता है तो भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाया सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका भारत पर टैरिफ बढ़ा सकता है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘अगर भारत रूस के तेल के मुद्दे पर सहयोग नहीं करता है, तो हम उस पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं।’

पहले की पीएम मोदी की तारीफ

व्हाइट हाउस की तरफ से जारी ऑडियो संदेश में ट्रंप ने अपने विशेष सैन्य विमान- एयरफोर्स वन में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद के दौरान पीएम मोदी पर टिप्पणियां कीं। उन्होंने भारत में रूसी तेल आयात से जुड़े एक सवाल के संदर्भ में कहा, 'वे मूल रूप से मुझे खुश करना चाहते थे...प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वे नेक इंसान हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं। मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत-रूस) व्यापार करते हैं, उन्हें यह बात भलीभांति पता थी कि अमेरिका उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत ने रूस से तेल की खरीद में काफी हद तक कटौती की है।’

ट्रेड डील पर बातचीत के बीच बड़ा बयान

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ बढ़ाने का यह बयान भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत के बीच आया है। कुछ समय पहले ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद कर देगा और अब वह तेल नहीं खरीद रहे हैं। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज किया था। अब उन्होंने कहा है कि भारत ने रूस से तेल खरीद जारी रखी है और हम टैरिफ बढ़ाएंगे।

पहले भी लगा चुके हैं भारी टैरिफ

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की बात कही है। ट्रंप प्रशासन पहले ही भारतीय सामानों पर कुल 50% तक टैरिफ लगा चुका है। ट्रंप के मुताबिक, इसमें से 25% टैरिफ तो केवल इसलिए लगाया गया है ताकि भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की सजा दी जा सके। इस भारी-भरकम टैक्स का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के डेटा के मुताबिक, मई से सितंबर 2025 के बीच भारत का अमेरिका को होने वाला एक्सपोर्ट लगभग 37.5% तक गिर गया है। जो निर्यात पहले 8.8 अरब डॉलर का हुआ करता था, वह घटकर केवल 5.5 अरब डॉलर रह गया है।

Homeo Doctor in Hyderabad Offering Effective Headache Management Naturally

Consult a trusted homeo doctor in Hyderabad for headache care. Understand headache symptoms, causes, and holistic homeopathy treatment options.

Understanding Headache and Its Daily Impact

Headache is a common health concern that affects people across all age groups. Whether it appears occasionally or becomes a frequent problem, headache pain can interfere with work performance, sleep quality, and emotional well-being. Due to rising lifestyle stress and work pressure, many individuals seek guidance from an experienced homeo doctor in Hyderabad for safe and long-term headache management.

In metropolitan areas, factors such as prolonged screen exposure, irregular eating habits, mental stress, and lack of proper rest often contribute to headaches. Instead of depending on short-term relief measures, consulting a qualified homeo doctor in Hyderabad helps identify underlying causes and supports lasting improvement.

Symptoms and Causes of Headache

Common Symptoms

  • Continuous or throbbing pain in the head
  • Pressure around the forehead or temples
  • Sensitivity to light and sound
  • Nausea, fatigue, or irritability
  • Difficulty concentrating

Common Causes

  • Stress, anxiety, and emotional tension
  • Disturbed or insufficient sleep
  • Dehydration and skipped meals
  • Hormonal imbalance
  • Sinus-related issues
  • Poor posture and long working hours

A skilled homeo doctor in Hyderabad carefully evaluates these factors before planning treatment.

Role of Homeopathy in Headache Care

Homeopathy follows a holistic and personalized approach, focusing on the individual rather than just the headache. A qualified homeo doctor in Hyderabad studies the nature, frequency, triggers, and impact of headaches along with the patient’s overall health.

Homeopathy helps to:

  • Reduce the frequency and intensity of headaches
  • Address stress-related and lifestyle-induced triggers
  • Improve sleep patterns and emotional balance
  • Support the body’s natural healing process

This approach makes homeopathy suitable for long-term headache care without suppressing symptoms.

Spiritual Homeopathy – Trusted Support in Hyderabad

Spiritual Homeopathy is a well-established clinic known for patient-centered homeopathic care. With experienced doctors and a holistic treatment approach, the clinic supports individuals seeking a reliable homeo doctor in Hyderabad for headache management. The focus remains on identifying root causes and improving overall quality of life.

Call to Action

Don’t let headaches disrupt your routine. Choose natural and holistic care today.

दीदारगंज के डीहपुर में धूमधाम से मनाया गया माता सावित्री बाई फुले की जन्म जयन्ती।
सत्येन्द्र यादव
मार्टीनगंज-आज़मगढ़
दीदारगंज थाना क्षेत्र के डीहपुर गांव में संचालित माता सावित्री बाई फुले सेवा समिति के द्वारा शनिवार को प्राथमिक विद्यालय डीहपुर में सावित्री बाई फूले की जन्म जयंती बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यअतिथि राजकुमार एवं समिति के अध्यक्ष राम किशोर मौर्य एडवोकेट ने संयुक्त रूप से माता सावित्रीबाई फूले के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। समिति के लोगों द्वारा वर्ष 2025 की हाईस्कूल की परीक्षा में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले गांव के कुल 6 मेधावी छात्र- छात्राओं तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले कक्षा 5 के  26 बच्चों को प्रसस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। समाजसेवी रामकिशोर मौर्य एडवोकेट, राम मिलान यादव, राजकुमार एवं मृगांक शेखर आदि वक्ताओं ने माता सावित्रीबाई फुले के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक समय महिलाएं सामाजिक शोषण और दोहरी मार से पीड़ित थीं। ऐसे कठिन दौर में सावित्रीबाई फूले ने समाज सुधारक के रूप में महिलाओं को शिक्षा का अधिकार दिलाने और उन्हें सामाजिक शोषण से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था।   इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता राममिलन यादव एवं संचालन मिठ्ठू लाल यादव ने किया। कार्यक्रम में  ग्राम प्रधान छविराम यादव, संतोष कुमार, प्रधानाध्यापक मृगांक शेखर, कैलाश नाथ, डॉ बृजेश , सुधाकर मौर्या, शिवकुमार यादव आदि लोग उपस्थित रहे।
बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश बनाने की कोशिश…मिथुन चक्रवर्ती का ममता सरकार पर बड़ा आरोप

#westbengalwillbecomewestpakistanallegesbjpleadermithunchakraborty

भारतीय जनता पार्टी के नेता और फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कूचबिहार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि बंगाल में हालात जानबूझकर ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो फिल्म द कश्मीर फाइल्स में दिखाए गए घटना की याद दिलाते हैं।

ममता बनर्जी की शाह पर की गई टिप्पणी की तीखी आलोचना

कूच बिहार की रैली में मिथुन ने ममता बनर्जी कर जमकर हमला बोला। मिथुन ने कहा कि बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और कहा कि उन्होंने ही उन्हें कोलकाता के उस होटल से बाहर आने दिया जहां वे ठहरे हुए थे। काश वे स्पष्ट रूप से कह देतीं कि गृह मंत्री को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वह दिन विनाशकारी होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी।

पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की साजिश-मिथुन

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा 'क्या आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखी है? क्या आपने देखा कि कश्मीरी पंडितों को कैसे वहां से खदेड़ा गया? आज बंगाल में भी वैसी ही स्थिति पैदा की जा रही है। एक साजिश के तहत पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की कोशिश हो रही है।'

भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं-मिथुन

भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का एकमात्र तरीका यह है कि सभी लोग एक साथ आएं। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल के विवेकशील समर्थकों से आगामी चुनावों में सरकार बदलने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि राज्य में कोई उद्यम, उद्योग, रोजगार या उचित स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं है।

लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं-मिथुन

भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं है और लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए, क्योंकि यह उनका ही पैसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल योजनाओं से विकास नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना से देशभर में लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे लागू नहीं होने दे रहीं, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार होगा। मिथुन ने आरोप लगाया कि बंगाल में न नौकरियां हैं, न कारखाने, न विकास- हर तरफ सिर्फ भ्रष्टाचार है।

Homeopathy Clinic in Hyderabad for Soft Palate Problems – Gentle & Holistic Care

Looking for a dependable homeopathy clinic in Hyderabad for soft palate problems? Get safe, natural, and holistic treatment at Spiritual Homeopathy.

Soft palate problems, often called “Soft P,” affect the soft muscular tissue located at the back of the roof of the mouth. This part of the mouth plays an important role in swallowing, speech, and breathing. When the soft palate becomes irritated or inflamed, it can cause ongoing discomfort and interfere with everyday life. Consulting a trusted homeopathy clinic in Hyderabad can help manage these concerns naturally and safely.

Symptoms and Causes of Soft Palate Problems

Common symptoms of soft palate problems include pain or soreness in the throat, difficulty swallowing, voice changes, redness, swelling, dryness, and frequent throat clearing. Some individuals may also experience snoring or disturbed sleep. These symptoms may appear mild at first but can become persistent without proper care.

Soft palate problems can be caused by repeated throat infections, allergies, acid reflux, smoking, excessive voice strain, stress, nutritional deficiencies, and weakened immunity. Treating only the symptoms often gives short-term relief, while the underlying imbalance remains.

Homeopathy Treatment for Soft Palate Problems

Homeopathy offers a holistic approach that focuses on treating the person as a whole. At an experienced homeopathy clinic in Hyderabad, treatment is personalized after a detailed assessment of symptoms, lifestyle, immunity, and overall health. Homeopathy helps reduce inflammation, supports the body’s natural healing response, strengthens immunity, and improves throat health. Its gentle nature makes it suitable for people of all age groups.

Spiritual Homeopathy – A Reliable Homeopathy Clinic in Hyderabad

Spiritual Homeopathy is a well-known homeopathy clinic in Hyderabad, recognized for its ethical practice and patient-focused care. The clinic follows holistic principles aimed at long-term wellness and balance. Through individualized consultations and natural treatment plans, Spiritual Homeopathy helps patients manage chronic soft palate problems effectively.

If you are searching for a dependable homeopathy clinic in Hyderabad, Spiritual Homeopathy offers professional guidance and holistic support for lasting relief.

Call to Action

Choose natural care for better throat health.