सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के ले जरूरी शर्त’, पीएम मोदी और जिनपिंग मुलाकात में हुई ये बातें

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया।

पीएम मोदी ने कहा-एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता जरूरी

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर अपनी चिंताएं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने रखीं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने यह बयान चीन की ओर से जारी किए गए उस विवरण के जवाब में दिया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में बदलाव नहीं होने की बात कही है। चीन के मुताबिक, मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपनी जमीन पर किसी को चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देता।

रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद सीमा पर शांति-पीएम मोदी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।

ताइवान और तिब्बत पर भारत का रुख

तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार एक जैसी रही है। भारत ने करीब 16 साल पहले सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ को दोहराना बंद कर दिया था। ‘वन चाइना पॉलिसी’ का मतलब है कि दुनिया में एक ही संप्रभु चीन है और ताइवान को चीन का हिस्सा माना जाता है। भारत ताइवान के साथ व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंध बनाए रखता है। तिब्बत को लेकर भी भारत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों और सहयोग को लेकर एक समझौता हुआ था। इसमें भारत ने कहा था कि वह अपनी जमीन से चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा।

पीएम मोदी-शी जिनपिंग

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पिछले हफ्ते नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS सम्मेलन से इतर हुई थी। शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचे थे। जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए। गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा थी। इसी दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। जिसमें दोनों देसों के संबंधों पर बातचीत हुई।

रांची में 16 से 26 सितंबर तक SSC परीक्षा, विधि-व्यवस्था को लेकर धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा जारी

क्षेत्रीय निदेशक, भारत सरकार, कर्मचारी चयन आयोग (पूर्वी क्षेत्र) कोलकाता द्वारा सूचित किया है कि दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक तीन पालियों में प्रातः 08:00 बजे से संध्या 06:30 बजे तक चयन पदों की परीक्षा "चरण XIV/2026" राँची के 03 (तीन) परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की गई है।

परीक्षा के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के आदेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर,रांची, द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया :-

(1) पाँच या पाँच से अधिक

व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक (दिनांक-20.09.2026 को छोड़कर) के प्रातः 05:00 से अपराह्न 9:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केन्द्र का नामः-

(1) Ideal International School, Near Shiv Mandir, Daladili Ranchi, Jharkhand.

(2) Capstone Tech Online Examination Centre, Outer ring road, near nationaol LAW University, Opposite Sunaina Banquet Hall, Kanke, Ranchi, Jharkhand-834006

(3) Cambridge Institute of Technology, Near Milan Chowk, Purulia Road, Tatisilwai, Ranchi, Jharkhand.

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

Homeo Doctor in Hyderabad for Fatigue: Understanding Symptoms and Causes

Find a homeo doctor in Hyderabad for fatigue and learn about common symptoms, possible causes, lifestyle factors and personalized homeopathic care.

Fatigue can make a person feel physically drained or mentally exhausted, even when the day's activities have not been particularly demanding. Occasional tiredness is common, but ongoing fatigue may interfere with concentration, productivity, exercise, and daily responsibilities. If you regularly experience low energy, speaking with a homeo doctor in Hyderabad can help you understand the pattern of your symptoms and overall health.

Understanding Fatigue

Fatigue is a state of reduced energy that can affect the body, mind, or both. It may appear as weakness, lack of motivation, reduced stamina, difficulty concentrating, or a persistent desire to rest. The experience can vary depending on sleep, lifestyle, stress, and general health.

A consultation with a homeo doctor in Hyderabad can provide an opportunity to discuss the duration, intensity, and pattern of fatigue along with other symptoms.

Common Symptoms

People experiencing fatigue may notice:

  • Persistent tiredness
  • Low energy throughout the day
  • Physical weakness
  • Reduced endurance
  • Difficulty focusing
  • Daytime sleepiness
  • Reduced motivation
  • Headaches
  • Irritability or mood changes
  • Mental exhaustion
  • Unrefreshing sleep
  • Difficulty managing routine activities

When fatigue repeatedly affects normal activities, it is advisable to seek professional guidance.

What Can Cause Fatigue?

Fatigue may be influenced by several factors. Insufficient sleep, irregular sleep schedules, prolonged stress, dehydration, poor dietary habits, excessive physical effort, and a sedentary lifestyle may contribute to reduced energy.

Fatigue may also occur with certain health conditions, including anemia, thyroid-related concerns, diabetes, infections, nutritional deficiencies, and sleep disorders. A homeo doctor in Hyderabad can discuss your health history, lifestyle, sleep pattern, stress, diet, and associated symptoms to gain a broader understanding of your concerns.

Homeopathy Treatment for Fatigue

Homeopathic care emphasizes an individualized understanding of the person. During a consultation, a homeo doctor in Hyderabad may evaluate the complete symptom picture, including when fatigue began, changes in energy during the day, sleep quality, physical activity, emotional wellbeing, lifestyle habits, and other associated concerns.

Maintaining healthy daily habits is also important. A regular sleep routine, balanced meals, adequate hydration, appropriate physical activity, and effective stress management can support overall wellbeing.

Persistent fatigue should not be overlooked, especially when it has no obvious explanation or interferes significantly with daily life. Appropriate professional evaluation can help identify possible contributing health concerns.

Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy offers personalized homeopathic consultations for people experiencing fatigue and related health concerns. Its holistic approach considers physical symptoms, lifestyle, sleep, emotional wellbeing, and individual health history. If you are searching for a homeo doctor in Hyderabad, Spiritual Homeopathy provides personalized consultation and guidance.

For appointments and consultation, contact Spiritual Homeopathy at 9069176176.

GAFA and IIRIS Consulting Push Forensic Investigation into the AI Era

NEW DELHI: The growing sophistication of financial fraud and technology-enabled crime is forcing a rethink of how investigations are conducted. Artificial intelligence is increasingly becoming part of the investigator’s toolkit, not simply for automation, but for analysing large volumes of financial data, identifying anomalies and connecting information that may otherwise remain fragmented.

Against this backdrop, the Global Association of Forensic Accountants (GAFA) has joined hands with IIRIS Consulting to develop the Certified AI Investigator (CAII) programme, bringing artificial intelligence directly into the professional investigation curriculum. The programme is positioned at the intersection of forensic accounting, fraud investigation, financial intelligence and applied technology.

The initiative reflects a broader shift in the investigation profession. Fraudsters are increasingly using digital platforms, automated processes, complex transaction structures and technology to conceal financial activity. Investigators, consequently, need to be able to work with data at scale and use technology without losing the fundamentals of evidence-based investigation.

The CAII programme is built around practical application rather than AI theory alone. The current programme includes 48 hours of live instruction across eight modules and eight working platforms, with applications covering AI-assisted investigation, data and transaction analysis, fraud detection and investigative intelligence.

What makes the initiative particularly relevant is its emphasis on the investigator remaining in control. AI can identify patterns and accelerate analysis, but it cannot independently establish whether an unusual transaction is fraudulent, determine the credibility of evidence or replace professional skepticism. Those decisions still require human judgment, corroboration and investigative reasoning.

The collaboration also brings complementary capabilities. The skill enhancement capabilities of Global Association of Forensic Accountants (GAFA) operating across forensic accounting, fraud investigation, AML and financial-crime education, and IIRIS Consulting’s intelligence capabilities across risk advisory, security, intelligence, forensics and due diligence, with operations spanning India, MENA, Asia and Europe.

The development points to a larger transformation within forensic investigation: the next generation of professionals may need to be equally comfortable reading financial statements, interrogating datasets and questioning AI-generated findings. As financial crime continues to evolve, the advantage may increasingly belong not to investigators who simply use AI, but to those who understand when to use it, how to challenge it and how to turn its output into defensible investigative evidence.

पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख किया, जानें इस पैंतरे की पीछे की वजह

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पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(एफआईए) ने अपनी वेबसाइट पर 2026 की "रेड बुक- मोस्ट वॉन्डेट हाई प्रोफ़ाइल टेररिस्ट' लिस्ट जारी की है। इसमें आतंकी मसूद अज़हर का नाम भी है। जिसमें उसकी गिरफ़्तारी के लिए सूचना देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये देने का इनाम भी रखा गया है।

इनाम की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने एफआईए ने अपनी नई 'रेड बुक' में जेश जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है। उसके सिर पर घोषित इनाम को भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। पहले ये इनामी राशि 50 लाख पाकिस्तानी रुपए थी। अजहर को 2021 में भी भगोड़ा घोषित किया था और 50 लाख इनाम रखा था। मसूद अजहर भारत में संसद के अलावा 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा अटैक में भी आरोपी है।

रेड बुक में दी जाती है हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों की जानकारी

रेड बुक पाकिस्तान की एफआईए की ऐसी सूची है, जिसमें देश के मोस्ट वॉन्टेड और हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों के बारे में जानकारी दर्ज की जाती है। इसमें उन लोगों की तस्वीर, पहचान, संगठन से जुड़ाव, मामलों की जानकारी और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी जैसी चीज़ें दी जाती हैं। यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए एक वॉन्टेड-टेररिस्ट डेटाबेस/रिकॉर्ड की तरह काम करती है। एफआईए का काउंटर टेररिज़्म विंग इसे तैयार करता है। एफआईए की नई रेड बुक में 26-11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमले के लिए आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में मदद की, उन्हें आर्थिक सहायता दी या अभियान के प्रबंधन में भूमिका निभाई। इनमें से 17 आतंकियों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26-11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। लेकिन दो मामलों में पाकिस्तान ने अहम जानकारियां हटा दी हैं।

एफएटीएफ की बैठक से मसूद पर कार्रवाई

मसूद अजहर का नाम इस लिस्ट में आने को एफ़एटीएफ़ (फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स) रिव्यू से जोड़कर देखा जा रहा है। एफएटीएफ की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले पाकिस्तान की कार्रवाई दिखावे के तौर पर देखी जा रही है। इससे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश कर सकता है कि वह आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ कदम उठा रहा है। पाकिस्तान पहले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। इस दौरान उस पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक होने वाली है। ऐसे में मसूद अजहर जैसे आतंकी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा पाकिस्तान के लिए अहम मानी जा रही है।

आजमगढ़: श्री राम प्रताप उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुरैला में मनाया गया हिन्दी दिवस, छात्र छात्राओं ने लोगों को खूब रिझाया
जमगढ़।श्री राम प्रताप उच्चतर माध्यमिक विद्यापीठ सुरैल उमरी (जौनपुर ) में हिंदी दिवस धूम धाम मनाया  गया । हिन्दी दिवस छात्र छात्राओं ने आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसे लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  जगदीप कुमार तथा विशिष्ट अतिथि विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक पतिराम मौर्य रहे। हिन्दी दिवस पर विद्यालय के छात्राओं  द्वारा पोस्टर पर कबीरदास, भारतेंदु हरिश्चंद्र,रामधारी सिंह दिनकर, मीराबाई आदि हिंदी के प्रमुख कवि और लेखक के छायाचित्र का चित्रांकन और उनके विषय में महत्वपूर्ण तथ्य को बड़े ही स्पष्ट तरीके से बच्चों के द्वारा बताया गया था।  छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही साथ हिंदी दिवस भाषण , काब्य पाठ प्रस्तुति किया । छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से हिंदी दिवस की प्रासंगिकता को नया आयाम दिया।जिसे लोगों ने खूब सराहा। विगत दिवस विद्यालय में सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान, प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जगदीप कुमार ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध कबीर, तुलसी, महादेव वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि कवियों ने हिंदी को बुलंदियों पर ले गये। जिनकी कृतियां लोगों के मानस पटल पर विराजमान हैं। कार्यक्रम में आगत अतिथियों को अंग वस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर विद्यालय के सह संचालक के द्वारा सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संचालन  आकाश कुमार गर्ग ने किया । कार्यक्रम में  पतिराम मौर्य, अमन कुमार , अवनीश मौर्य,पंकज राजभर,मंजू तिवारी, नीलू सिंह, पूनम सिंह,बेबी बानो, काजल तिवारी ,रोशनी यादव ,पूजा कुमारी ,तृषा सिंह,तनु शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे।

বালিতে জোড়া ট্রফি করণ সিংয়ের, টানা দুই আইটিএফ এম ১৫ খেতাব জয়

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*চণ্ডীগড়, ১৩ সেপ্টেম্বর ২০২৬:* ইন্দোনেশিয়ার বালিতে নিজের দাপট অব্যাহত রাখলেন রাউন্ডগ্লাস টেনিস অ্যাকাডেমির তারকা করণ সিং। বালি বিচ কান্ট্রি ক্লাবে আয়োজিত আইটিএফ এম১৫ আম্মান মেনস ওয়ার্ল্ড টেনিস চ্যাম্পিয়নশিপে টানা দ্বিতীয় সপ্তাহে সিঙ্গলস খেতাব জিতলেন তিনি।

গত সপ্তাহেই একই ভেন্যুতে এম১৫ টুর্নামেন্টের সিঙ্গলস খেতাব জিতেছিলেন করণ। পরপর দুই খেতাব জয়ের সুবাদে তিনি ৩০টি র‍্যাঙ্কিং পয়েন্ট অর্জন করলেন। এই জয়ের ফলে তাঁর কেরিয়ারে সিঙ্গলস খেতাবের সংখ্যা দাঁড়াল পাঁচটি এবং ডাবলসে তিনটি।

২৩ বছর বয়সী ভারতীয় তারকা হার্ড কোর্টের কঠিন ফাইনালে আমেরিকার চ্যাংকে (এটিপি ১২৯৬) ৭-৬(৫), ৭-৫ সেটে হারিয়ে সফলভাবে খেতাব ধরে রাখলেন।

ফাইনালে ওঠার পথে পঞ্চম বাছাই করণ কোয়ার্টার ফাইনালে হেডেন জোন্সকে (এটিপি ১৪৭৫) ৭-৫, ৬-১ সেটে হারান। এরপর সেমিফাইনালে মুখোমুখি হন রাউন্ডগ্লাস অ্যাকাডেমির সতীর্থ তথা চতুর্থ বাছাই দিগ্বিজয় প্রতাপ সিংয়ের (এটিপি ৫৫৭)। সর্বভারতীয় এই সেমিফাইনালে করণ ৬-৪, ৭-৬(২) সেটে সরাসরি জিতে ফাইনালে জায়গা করে নেন।

গত সপ্তাহে প্রথম খেতাব জয়ের পথে তিনি তিন স্থানীয় প্রতিদ্বন্দ্বী — গুনাওয়ান ত্রিসমুয়ান্তারা (৬-৩, ৭-৫), রাফেলেন্টিনো আলি দা কোস্টা (৬-৩, ৬-২) এবং নাথান অ্যান্থনি বার্কিকে (৬-১, ৬-৪) হারিয়েছিলেন। এরপর সেমিফাইনালে জাপানের সপ্তম বাছাই রিওতারো তাগুচিকে ৬-৩, ৬-৩ এবং ফাইনালে নিউজিল্যান্ডের পঞ্চম বাছাই ইশাক বেক্রফ্টকে ৭-৫, ৭-৬(৩) সেটে হারিয়ে প্রথম খেতাবটি জেতেন।

দুই সপ্তাহে করণের পারফরম্যান্স ছিল নিখুঁত। টানা দুটি চ্যাম্পিয়নশিপে তিনি ম্যাচে ১০-০ এবং সেটে ২০-০ এর অবিশ্বাস্য রেকর্ড ধরে রাখেন। দুই সপ্তাহে একটিও সেট হারেননি তিনি।

ইন্দোনেশিয়ায় এই জোড়া জয় ২০২৬ সালে তাঁর ধারাবাহিক সাফল্যেরই প্রতিফলন, যা কাজাখস্তানের আস্তানায় আইটিএফ এম১৫ ডাবলস খেতাব জয়ের কয়েক সপ্তাহ পরেই এল।

আগস্ট মাসে রাশিয়ার মার্টিন বোরিসিয়ুকের সঙ্গে জুটি বেঁধে ফাইনালে স্থানীয় কাজাখ জুটি ড্যানিয়েল রহমাতুল্লায়েভ ও দামির ঝালগাসবেকে ৬-৩, ৬-২ সেটে হারিয়েছিলেন করণ।

ছবি:সংগৃহীত।
14 सितंबर 2026 को होगी चंद्रमा-शुक्र की दुर्लभ खगोलीय नजदीकी।*


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश-दर्शन में रुचि रखने वाले अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए 14 सितंबर 2026 की शाम बेहद खास होगी, इस दिन चंद्रमा और शुक्र ग्रह पश्चिमी से दक्षिण-पश्चिमी आकाश में एक-दूसरे के बहुत करीब दिखाई देंगे,सूर्यास्त के बाद थोड़े समय के लिए बनने वाली यह चमकीली जोड़ी साफ क्षितिज वाले स्थानों से नंगी आंखों से देखी जा सकेगी, और दोनों खगोलीय पिंडों के बीच न्यूनतम कोणीय दूरी लगभग 28.8 आर्कमिनट, यानी करीब 0.48 डिग्री रहेगी , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह दूरी इतनी कम होगी कि चंद्रमा और शुक्र ग्रह कम शक्ति वाली दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप के एक ही दृश्य क्षेत्र में आ सकते हैं, हालांकि,उन्हें देखने के लिए किसी उपकरण की भी आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शुक्र ग्रह अपनी अत्यधिक चमक के कारण आकाश में चमकीले तारे जैसा दिखाई देगा, जबकि चंद्रमा पतले बढ़ते हुए अर्धचंद्र के रूप में नजर आएगा। *सूर्यास्त के बाद कितने समय का अवसर मिलेगा* ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह खगोलीय दृश्य सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा और दोनों खगोलीय पिंड लगभग शाम 6:16 बजे दक्षिण-पश्चिमी क्षितिज से करीब 16 डिग्री ऊपर दिखाई देंगे इसके बाद वे धीरे धीरे से क्षितिज की ओर नीचे जाते हुए नज़र आयेंगे और रात्रि लगभग 7:30 बजे के क़रीब एवं उसके बाद अस्त होते हुए दिखाई देंगे।

*किस तारामण्डल में मौजूद होंगे और कितना होगा चन्द्रमा और शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 14 सितम्बर 2026 को दोनों खगोलीय पिण्ड शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक दुसरे के बहुत नज़दीक होंगे और इनकी दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि सूर्यास्त से लेकर लगभग 7:30 PM तक दिखाई देंगे उसके बाद दोनों पश्चिमी क्षितिज पर नीचे चले जाएंगे। इसीलिए समय का विशेष ध्यान रखें क्योंकि इनकी बेहद शानदार खगोलीय युति देखने के लिए आपको बहुत ही कम समय मिलेगा। इस दौरान चंद्रमा और शुक्र ग्रह दोनों खगोलीय पिण्ड कन्या तारामंडल में ही स्थित होंगे एवं इस दौरान चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 7.63 होगा और शुक्र ग्रह का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.73 के क़रीब होगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने यह भी बताया कि स्थानीय भौगोलिक स्थिति, प्रकाश प्रदूषण, सूर्यास्त के समय, धुंध और क्षितिज की रुकावट के कारण अलग-अलग शहरों में दृश्यता का मैग्नीट्यूड कुछ बदल सकता है, इसलिए खगोल प्रेमियों/आकाश दर्शकों को सूर्यास्त से पहले ही खुले मैदान या ऐसे स्थान पर पहुंचने की सलाह दी जाती है, जहां पश्चिमी क्षितिज भवनों, पेड़ों और पहाड़ियों से बाधित न हो, क्योंकि दोनों पिंड क्षितिज के बहुत करीब होंगे, इसलिए अवलोकन के लिए लगभग एक घंटे का ही व्यावहारिक अवसर मिलेगा। *कैसा होगा दोनों खगोलीय पिंडों का दायाँ आरोहण एवं ऐपल्स*?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान दोनों खगोलीय पिण्ड कन्या तारामंडल में होंगे, या कुछ यूं कहें कि दोनों पिंड
इस अवसर पर चंद्रमा और शुक्र, कन्या तारामंडल की दिशा में ही स्थित होंगे यह विशेषता भी दोनों खगोलीय पिंडों को और भी ख़ास बनाती है,एवं इस दौरान दोनों का right ascension( दायाँ आरोहण) या कुछ यूं कहें कि लगभग उसी समय चंद्रमा और शुक्र का दायाँ आरोहण (Right Ascension) समान होगा,इस स्थिति को खगोलीय भाषा में संयोजन , कंजंक्शन (conjunction) या युति कहा जाता है, या कुछ यूं भी कह सकते हैं कि जब दायाँ आरोहण लगभग समान होता है तो खगोल विज्ञान में इस स्थिति को कंजंक्शन (conjunction) या युति कहा जाता है,और यूं भी समझ सकते हैं कि आकाश में दो पिंडों का बहुत पास दिखाई देना ऐपल्स (appulse) कहलाता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 14 सितंबर 2026 की खगोलीय घटना में दोनों अवधारणाएं लागू होंगी, क्योंकि दोनों पिंड समान (right ascension) दायाँ आरोहण लगभग समान  के निकट होंगे और दृश्य रूप से भी अत्यंत पास नजर आएंगे।
चंद्रमा उस समय लगभग तीन दिन पुराना और करीब 15 प्रतिशत प्रकाशित होगा। यह बढ़ता हुआ अर्धचंद्र होगा। साथ ही इस दौरान शुक्र का दृश्य परिमाण लगभग माइनस 4.73 रहेगा, जिससे वह सूर्यास्त के बाद सबसे चमकीले प्राकृतिक पिंडों में शामिल दिखाई देगा। *कैसा होगा शुक्र का आच्छादन*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विश्व के कुछ भागों में चंद्रमा शुक्र को पूरी तरह ढकता हुआ दिखाई देगा। इस घटना को lunar occultation of Venus, अर्थात या चंद्रमा द्वारा, शुक्र का आच्छादन कहा जाता है, वैसे यह कोई यह चंद्र ग्रहण नहीं होता है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा आम बोलचाल की भाषा में इसको शुक्र ग्रह का चंद्र ग्रहण भी बोल देते हैं,  लेकिन खगोल विज्ञान में ग्रहण की बात करें तो पाते हैं कि जब चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जबकि occultation या आच्छादन में चंद्रमा किसी दूर स्थित पिंड को हमारी दृष्टि से कुछ समय के लिए छिपा देता है इसीलिए इसको खगोल वैज्ञानिक रूप में ऑक्ल्टेशन या आच्छादन कहा जाता है  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर हम बात करें 14 सितंबर 2026 की घटना की तो पाते हैं कि यह ऑक्ल्टेशन या आच्छादन भारत के कुछ या बड़े हिस्सों से दृश्यता संभव है लेकिन संपूर्ण भारत से इस ऑक्ल्टेशन या आच्छादन को नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन शानदार खगोलीय युति को देख सकते हैं। *भारत के बाकी हिस्सों में क्या दिखेगा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जहाँ ऑक्ल्टेशन नहीं दिखाई देगा वहाँ चंद्रमा और शुक्र बेहद करीब (कंजंक्शन/युति) में दिखेंगे, सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज के पास यह शानदार खगोलीय युति को नंगी आँखों/साधारण आँखों से आसानी से दिखने वाला दृश्य होगा,बशर्ते क्षितिज साफ़ हो ।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक शब्द की बात करें तो पाते हैं कि इसे “चंद्र-शुक्र ऑक्ल्टेशन” या “चंद्रमा द्वारा शुक्र का आच्छादन” ही कहा जाता है लेकिन यह भी जानना रुचिकर है कि आम बोलचाल में “चंद्र-शुक्र ग्रहण” भी कहा जाता है, लेकिन इसको तकनीकी रूप से ऑक्ल्टेशन ही कहा जाता है। *ऐपल्स, कंजंक्शन और ऑक्ल्टेशन क्या होता है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐपल्स वह खगोलीय घटना है,जिसमें दो या दो से अधिक खगोलीय पिंड,आमतौर पर ग्रह या चंद्रमा, जब आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देते हैं,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा आकाश में अपेक्षाकृत तेज गति से घूमता है और लगभग हर महीने तारामंडलों के बीच अपनी एक पूरी परिक्रमा पूरी करता है। इसलिए अधिकांश ऐपल्स तब होते हैं, जब चंद्रमा आकाश में किसी अन्य खगोलीय पिंड के पास से गुजरता है और चंद्रमा अपनी कलाओं के चक्र में लगभग समान चरण पर हर महीने लगभग उन्हीं ग्रहों के पास से गुजरता है, इसलिए कई घटनाएं आमतौर पर मासिक आधार पर दोहराई जाती हैं,दो खगोलीय पिंडों के बीच कितनी दूरी होने पर उनके निकट आने को ऐपल्स कहा जाए, इसकी कोई औपचारिक परिभाषा नहीं है, लेकिन खगोलविदों द्वारा उन सभी ऐपल्स को सूचीबद्ध किया जाता है, जिनमें ग्रह या छोटे ग्रह एक-दूसरे से एक डिग्री के भीतर आ जाते हैं, साथ ही नग्न आंखों से दिखाई देने वाले खगोलीय पिंडों के लिए तीन डिग्री तक की दूरी वाले ऐपल्स को शामिल किया जाता है,वहीं,विशेष रूप से चमकीले और नग्न आंखों से आसानी से दिखाई देने वाले पिंडों के लिए पांच डिग्री तक की दूरी को भी ऐपल्स की श्रेणी में रखा जाता है और
कभी-कभी दो खगोलीय पिंडों के बीच होने वाला यह निकट संयोग इतना करीबी होता है कि एक पिंड दूसरे के सामने से गुजरता हुआ दिखाई देता है,इस घटना को पारण या ऑकल्टेशन (Occultation) या आच्छादन भी कहा जाता है,ऐसी अधिकांश घटनाओं में चंद्रमा शामिल होता है, क्योंकि चंद्रमा हर महीने आकाश के बहुत बड़े क्षेत्र से होकर गुजरता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐपल्स और युति को आम बोलचाल में खगोलीय पिंडों के आकाश में एक-दूसरे के पास दिखाई देने को अक्सर युति या कंजंक्शन (Conjunction) ही कहा जाता है,हालांकि, खगोल विज्ञान में कंजंक्शन का अर्थ कुछ अधिक तकनीकी है, यह उस स्थिति को कहा जाता है, जब दो खगोलीय पिंडों का राइट एसेंशन (Right Ascension) या दायां आरोहण समान हो जाता है, या कुछ और भी अधिक
सरल शब्दों में कहें कि ऐपल्स में दो पिंड आकाश में पास-पास दिखाई देते हैं, जबकि कंजंक्शन दो पिंडों की आकाशीय स्थिति से जुड़ी एक विशिष्ट खगोलीय अवस्था है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसको कुछ ऐसे भी समझ सकते हैं कि ऐपल्स वह खगोलीय घटना है जिसमें पृथ्वी से देखने पर दो पिंडों के बीच आकाशीय कोणीय दूरी न्यूनतम हो जाती है,इसके लिए कोई सार्वभौमिक दूरी-सीमा निर्धारित नहीं है, इसके विपरीत, कंजंक्शन एक निर्देशांक-आधारित स्थिति है, जिसमें दो पिंड समान दायाँ आरोहण या ecliptic longitude या क्रांतिक रेखांश, क्रांतिवृत्तीय रेखांश या भोगांश (Bhogansh) भी कहा जाता है ,यह अंतरिक्ष में किसी आकाशीय पिंड (जैसे सूर्य, चंद्रमा या ग्रह) की स्थिति को मापने का एक पैमाना है, जो क्रांतिवृत्त (Ecliptic path) पृथ्वी के चारों ओर सूर्य का आभासी पथ) पर आधारित होता है उसको साझा करते हैं, इसी दौरान यदि कोई पिंड दूसरे को हमारी दृष्टि से ढक देता है, तो घटना को ऑकल्टेशन या आच्छादन कहा जाता है। लेकिन अंतरिक्ष में यह पिंड करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर मौजूद होते हैं यह केवल पृथ्वी से देखने पर दृष्टि प्रभाव होता है,वास्तविक रूप या भौतिक रूप में उपरोक्त से कोई भी खगोलीय पिण्ड एक दुसरे के इतने निकट नहीं होते हैं। *यह आच्छादन का क्षेत्र कौन कौन से देशों से होंगे।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर उत्तर प्रदेश भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 14 सितंबर 2026 से पहले चंद्रमा द्वारा शुक्र के ऑक्ल्टेशन की पिछली प्रमाणित घटना 24 मार्च 2023 को हुई थी,भारत के कुछ हिस्सों में यह घटना लगभग 15:55 से 18:16 IST के बीच हुई, हालांकि शहर के अनुसार समय अलग था। लेकिन इस बार 14 सितंबर 2026 की बात करें तो पाते हैं कि इस आच्छादन का क्षेत्र, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिमी रूस के कुछ हिस्सों तक सीमित रहेगा,खगोलीय गणनाओं के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर शुक्र के छिपने का समय और पुनः दिखाई देने का समय देशों के हिसाब से अलग अलग होता है,लेकिन भारतीय समय के अनुसार यह   आच्छादन बिल्कुल सूर्यास्त के क़रीब पड़ेगा,इसलिए भारत के कई स्थानों पर यह आच्छादन शाम के कुछ उजाले में होगा और उन स्थानों से बिना उपकरण के इस आच्छादन को देखना कुछ कठिन भी हो सकता है, साथ ही कुछ जगहों से सूर्यास्त के बाद भी यह काफ़ी अच्छा दिखाई देगा, लेकिन भारत में अधिकांश लोगों को युति ही दिखेगी, क्योंकि भारत के हर हिस्से से शुक्र का आच्छादन दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं है, जैसा कि दिल्ली सहित कई स्थानों पर यह घटना शाम को क्षितिज के बहुत निकट होगी फिर भी सूर्यास्त के बाद चंद्रमा और शुक्र का निकट संयोग कुछ समय तक भारत के बड़े हिस्से से देखा जा सकेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि या कुछ यूं भी समझ सकते हैं कि उस दौरान सूर्यास्त और शाम का उजाला (Daylight/Twilight) भी होगा एवं भारत के अधिकांश हिस्सों (विशेषकर मध्य और दक्षिणी भारत) में यह खगोलीय घटना शाम के समय और सूर्यास्त के बेहद करीब होगी,कई जगहों पर उस समय आसमान में शाम का कुछ उजाला रहेगा, इसीलिए ख़ास ऑक्ल्टेशन को बिना उपकरण देखना कठिन हो सकता है चूंकि शुक्र और चंद्रमा दोनों ही सूर्यास्त के धुंधलके या हल्के उजाले में  ही दिखना शुरू हो जाएंगे इसलिए शुरुआती चरणों में बिना टेलीस्कोप या दूरबीन (Binoculars) के इसे स्पष्ट देख पाना वाकई कुछ कठिन हो सकता है, लेकिन सूर्यास्त के कुछ ही देर बाद का नजारा भी बेहतरीन होगा और साथ ही अगर जिन स्थानों पर यह आच्छादन दिखेगा और वहाँ का आसमान भी थोड़ा गहरा साफ़ और प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर होने के कारण पतले से हंसिया आकार (Crescent) के चंद्रमा के पीछे चमकीले शुक्र ग्रह को गायब होते देखना बकाई काफी खूबसूरत और स्पष्ट एवं सुंदर दृश्य के साथ ही भव्य नज़ारा होगा। *किधर देखें।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में सावधानी पूर्वक सबसे पहले चमकीले शुक्र को खोजें, इसको खोजना बहुत ही आसान है क्योंकि आज कल पश्चिमी दिशा में सबसे चमकदार तारे जैसा (लेकिन वो तारा नहीं है वह शुक्र ग्रह है) जो दिख रहा है, वही है शुक्र ग्रह एवं उसके निकट पतला चंद्र-वर्धमान दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा पृथ्वी के निकट होने के कारण अलग-अलग स्थानों से उसका आकाशीय स्थान बदलता हुआ दिखाई देता है, यह लंबन' कहलाता है, यह किसी वस्तु की स्थिति में होने वाला वह आभासी परिवर्तन या विस्थापन है, जो उसे दो अलग-अलग जगहों या दृष्टियों से देखने पर महसूस होता है।

*लंबन (विस्थापन) क्या है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने लंबन के बारे में उदाहरण देते हुए बताया कि जब आप अपनी एक आँख बंद करके और फिर बारी-बारी से दूसरी आँख बंद करके सामने किसी उंगली को देखते हैं, तो उंगली अपनी जगह से हिलती हुई/हटती हुई सी प्रतीत होती है। इसे ही लंबन (Parallax) कहते हैं,पास की वस्तुएं दूर की वस्तुओं की तुलना में अधिक लंबन (विस्थापन) दिखाती हैं,इसी लंबन (parallax) पैरालेक्स के कारण occultation या आच्छादन केवल पृथ्वी के एक सीमित क्षेत्र से दिखाई देता है, जबकि निकट युति अधिक बड़े क्षेत्र में नजर आती है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा द्वारा शुक्र के आच्छादन की पिछली विश्वव्यापी घटना 17 जून 2026 को हुई थी, जबकि भारत से ऐसी घटना 24 मार्च 2023 को दिखाई दी थी , साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह ने अपील भी की है कि आकाश दर्शकों को सूर्य को सीधे दूरबीन या विनोकुलर से, बिना प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स या किसी भी अन्य ऑप्टिवल उपकरण से सूर्य को कभी भी सीधे नहीं देखना चाहिए , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फिल्टर युक्त दूरबीन या विनोकुलर एवं फिल्टर युक्त कैमरा आदि ऑप्टिकल उपकरण का ही उपयोग करें और सूर्य को सीधे देखने से बचना चाहिए क्योंकि सूर्य को सीधे देखने पर इस से आँखें खराब हो सकती हैं। इसीलिए सूर्यास्त के समय भी सूर्य की तरफ़ दूरबीन/  टेलीस्कोप लगाते समय इस दौरान भी अति महत्वपूर्ण सावधानी रखना चाहिए और इस शानदार खगोलीय घटना का आनंद उठाएं।

      
Tata Safari: A Premium Family SUV Designed for Comfortable Long-Distance Travel

A Family SUV Built Around Space and ComfortFamily travel often means carrying more passengers, luggage and expectations. For customers planning regular road trips or looking for a spacious SUV for everyday family use, seating capacity, cabin comfort and practicality can become important purchase considerations.

The Tata Safari is positioned as a premium SUV with three-row seating, offering 6- and 7-seater configurations depending on the version. Its larger SUV format makes it relevant for families who want additional passenger space and a comfortable environment for longer journeys.

Designed for Long-Distance Travel

A long drive can involve city traffic, open highways and changing road conditions. A family SUV therefore needs to combine performance with a comfortable driving experience.

The Tata Safari has been offered with a 2.0-litre turbocharged diesel engine producing 170 PS and 350 Nm, with manual and automatic transmission options depending on the variant.

Customers should confirm the latest variant-wise specifications, equipment and availability with an authorised Tata Motors dealer before booking.

Three Rows for Growing Families

One of the key reasons customers consider a larger SUV is the flexibility provided by three rows of seating.

The Tata Safari can accommodate larger families and groups while providing the practicality expected from a premium SUV. The third row can be particularly useful when additional passengers need to travel together, while the cabin layout is designed around passenger comfort.

For families that frequently travel together, a three-row SUV can be useful for holidays, weekend trips, airport travel and other journeys where additional seating is required.

Technology and Convenience on the Road

Modern family SUVs are expected to provide more than space. Infotainment, connectivity and convenience features have become an important part of the in-car experience.

The Tata Safari has been offered with features such as a large touchscreen infotainment system, configurable digital instrumentation, connected-car functions and premium audio options, depending on the variant.

Feature availability can vary between variants, so customers should compare the current specifications of the versions they are considering.

Safety as an Important Family Consideration

Safety remains a key consideration when selecting a family vehicle, particularly for customers who regularly travel on highways.

The Tata Safari has been equipped with a range of safety and driver-support technologies, with equipment varying by variant. Tata Motors has highlighted features and systems designed to support occupants and the driver across different driving situations.

Customers should review the latest safety specification of their preferred variant and discuss the available equipment with the dealership before purchase.

Tata Safari for Delhi-NCR Customers

Customers searching for a Tata Safari showroom in Delhi-NCR can explore the vehicle through Garud Tata Motors.

Tata Cars Showroom - Palam, Dwarka provides access for customers from Palam, Dwarka and nearby areas.

Tata Cars Showroom - Najafgarh serves customers from Najafgarh and surrounding locations.

Tata Cars Showroom - Narela provides another option for customers in Narela and nearby areas.

Customers can enquire about available variants, features, colours, pricing and test-drive opportunities at the nearest showroom.

Why a Tata Safari Test Drive Matters

A larger SUV should ideally be experienced before purchase. A test drive gives customers the opportunity to understand the vehicle's size, driving position, visibility, ride comfort, cabin layout and overall driving experience.

Customers interested in a Tata Safari test drive can contact Garud Tata Motors and enquire about available opportunities. A test drive can also help families assess access to the second and third rows and the practicality of the cabin for their typical journeys.

Service Support for Tata Safari Owners

The ownership experience continues after the vehicle is delivered. Regular maintenance and servicing are important for keeping a vehicle in appropriate operating condition.

Garud Tata Motors provides service support through Tata Cars Service Centre - Matiala, Dwarka and Tata Cars Service Centre - Najafgarh.

Safari owners can contact the relevant service centre for applicable scheduled servicing, maintenance and after-sales requirements.

A Premium SUV for the Complete Family Journey

The Tata Safari's appeal comes from the combination of three-row practicality, performance, comfort, technology and safety-focused equipment.

For customers looking for a premium family SUV in Delhi-NCR, the Safari is worth exploring through a showroom visit and test drive. Comparing variants against individual family and travel requirements can help customers select the configuration that suits them best.

About Garud Tata Motors

Garud Tata Motors provides Tata passenger vehicle sales and service support across its Delhi-NCR network. Customers can explore Tata cars and enquire about test drives at Tata Cars Showroom - Palam, Dwarka, Tata Cars Showroom - Najafgarh and Tata Cars Showroom - Narela. Service support is available through Tata Cars Service Centre - Matiala, Dwarka and Tata Cars Service Centre - Najafgarh.

Contact Garud Tata Motors

Website: www.garudtata.com

 Sales Contact: 9217371211

 Service Contact: 9217371211

 

सीमा पर शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के ले जरूरी शर्त’, पीएम मोदी और जिनपिंग मुलाकात में हुई ये बातें

#modibluntmessagetojinpingpeaceatborderis_essential

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली में ब्रिक्स समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मुलाकात के दौरान चीन के साथ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के संबंध में विदेश मंत्रालय चीनी पक्ष की ओर से जारी बयान पर पूछे गए सवाल का जवाब दिया।

पीएम मोदी ने कहा-एक-दूसरे के प्रति संवेदनशीलता जरूरी

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के साथ भारत के रिश्तों को लेकर अपनी चिंताएं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने रखीं। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे की मूल चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। विदेश मंत्रालय ने यह बयान चीन की ओर से जारी किए गए उस विवरण के जवाब में दिया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति में बदलाव नहीं होने की बात कही है। चीन के मुताबिक, मोदी ने यह भी कहा कि भारत अपनी जमीन पर किसी को चीन विरोधी गतिविधियां करने की अनुमति नहीं देता।

रिश्ते आगे बढ़ाने की बुनियाद सीमा पर शांति-पीएम मोदी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग के साथ बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को तीन पारस्परिक सिद्धांतों- आपसी सम्मान, आपसी हित और आपसी संवेदनशीलता से निर्देशित होना चाहिए।

ताइवान और तिब्बत पर भारत का रुख

तिब्बत और ताइवान को लेकर भारत की स्थिति लगातार एक जैसी रही है। भारत ने करीब 16 साल पहले सार्वजनिक रूप से अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ को दोहराना बंद कर दिया था। ‘वन चाइना पॉलिसी’ का मतलब है कि दुनिया में एक ही संप्रभु चीन है और ताइवान को चीन का हिस्सा माना जाता है। भारत ताइवान के साथ व्यापार, निवेश, पर्यटन और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में संबंध बनाए रखता है। तिब्बत को लेकर भी भारत तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों और सहयोग को लेकर एक समझौता हुआ था। इसमें भारत ने कहा था कि वह अपनी जमीन से चीन विरोधी गतिविधियों की अनुमति नहीं देगा।

पीएम मोदी-शी जिनपिंग

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पिछले हफ्ते नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS सम्मेलन से इतर हुई थी। शी जिनपिंग 12 सितंबर को भारत पहुंचे थे। जिनपिंग करीब 7 साल बाद भारत आए। गलवान घाटी में 2020 में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा थी। इसी दौरान पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। जिसमें दोनों देसों के संबंधों पर बातचीत हुई।

रांची में 16 से 26 सितंबर तक SSC परीक्षा, विधि-व्यवस्था को लेकर धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा जारी

क्षेत्रीय निदेशक, भारत सरकार, कर्मचारी चयन आयोग (पूर्वी क्षेत्र) कोलकाता द्वारा सूचित किया है कि दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक तीन पालियों में प्रातः 08:00 बजे से संध्या 06:30 बजे तक चयन पदों की परीक्षा "चरण XIV/2026" राँची के 03 (तीन) परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की गई है।

परीक्षा के कदाचार मुक्त संचालनार्थ एवं विधि-व्यवस्था संधारणार्थ हेतु उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के आदेश द्वारा पुलिस बल एवं पुलिस पदाधिकारी के साथ दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है। फिर भी ऐसी आशंका है कि परीक्षा केन्द्रों पर असामाजिक तत्वों के द्वारा भीड़ लगाकर विधि-व्यवस्था भंग करने की चेष्टा कर सकते हैं।

जिसको लेकर श्री कुमार रजत, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर,रांची, द्वारा बि०एन०एस०एस० की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन परीक्षा केन्द्रों के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी किया गया :-

(1) पाँच या पाँच से अधिक

व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों / कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर)।

(2) किसी प्रकार का ध्वनि विस्तारक यंत्र का व्यवहार करना।

(3) किसी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र, जैसे-बंदुक, राईफल, रिवाल्वर, बम, बारूद आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

(4) किसी प्रकार का हरवे हथियार जैसे-लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि लेकर चलना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)

(5) किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन करना।

यह निषेधाज्ञा दिनांक-16.09.2026 से 26.09.2026 तक (दिनांक-20.09.2026 को छोड़कर) के प्रातः 05:00 से अपराह्न 9:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

परीक्षा केन्द्र का नामः-

(1) Ideal International School, Near Shiv Mandir, Daladili Ranchi, Jharkhand.

(2) Capstone Tech Online Examination Centre, Outer ring road, near nationaol LAW University, Opposite Sunaina Banquet Hall, Kanke, Ranchi, Jharkhand-834006

(3) Cambridge Institute of Technology, Near Milan Chowk, Purulia Road, Tatisilwai, Ranchi, Jharkhand.

राहुल गांधी ने पीएम मोदी को फिर बताया ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’, बोले- अमेरिकी दबाव के सामने कर रहे सरेंडर

#rahulgandhitargetsmodigovtoverpossibleupicharges

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने के संभावित व्यवस्था को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर देश की शून्य व्यापारी छूट दर नीति को बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

राहुल गांधी ने क्या कहा?

राहुल गांधी ने एक्स पर किए एक पोस्ट में आरोप लगाया कि सरकार ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर चुपचाप एमडीआर ( Merchant Discount Rate)लगाने का रास्ता खोल रही है। राहुल गांधी के मुताबिक, ऐसे लेनदेन की संख्या भले ही यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 5% हो, लेकिन इनका हिस्सा कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में लगभग 65% है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ग्राहक से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदार पर लगने वाली फीस का बोझ आखिरकार किसकी जेब पर पड़ेगा।

राहुल बोले- अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहक की जेब पर पड़ेगा भार

कांग्रेस सांसद ने आगे कहा कि सरकार भले ही कह रही हो कि आम ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन व्यापारी पर लगने वाली फीस का असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ सकता है। उनके मुताबिक, दुकानदार इस अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं और इस तरह अप्रत्यक्ष रूप से इसका भार ग्राहक की जेब पर पड़ेगा।

अमेरिकी कंपनियों के दबाव का भी लगाया आरोप

राहुल गांधी ने अपने बयान में अमेरिकी भुगतान कंपनियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी पेमेंट कंपनियां लंबे समय से भारत की जीरो-एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं। अब मोदी सरकार ऐसी नीति की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जिससे यूपीआई पर शुल्क लगाने का रास्ता खुल सकता है।

बीजेपी ने कांग्रेस के दावे को बताया गलत

वहीं, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर राहुल गांधी और कांग्रेस के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2,000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर 0.5% टैक्स या चार्ज लगाने का कोई सरकारी आदेश नहीं है। उनके मुताबिक, 5,000 रुपये के भुगतान पर 25 रुपये और 10,000 पर 50 रुपये वसूले जाने की बात काल्पनिक 0.5% दर के आधार पर कही जा रही है।

Homeo Doctor in Hyderabad for Fatigue: Understanding Symptoms and Causes

Find a homeo doctor in Hyderabad for fatigue and learn about common symptoms, possible causes, lifestyle factors and personalized homeopathic care.

Fatigue can make a person feel physically drained or mentally exhausted, even when the day's activities have not been particularly demanding. Occasional tiredness is common, but ongoing fatigue may interfere with concentration, productivity, exercise, and daily responsibilities. If you regularly experience low energy, speaking with a homeo doctor in Hyderabad can help you understand the pattern of your symptoms and overall health.

Understanding Fatigue

Fatigue is a state of reduced energy that can affect the body, mind, or both. It may appear as weakness, lack of motivation, reduced stamina, difficulty concentrating, or a persistent desire to rest. The experience can vary depending on sleep, lifestyle, stress, and general health.

A consultation with a homeo doctor in Hyderabad can provide an opportunity to discuss the duration, intensity, and pattern of fatigue along with other symptoms.

Common Symptoms

People experiencing fatigue may notice:

  • Persistent tiredness
  • Low energy throughout the day
  • Physical weakness
  • Reduced endurance
  • Difficulty focusing
  • Daytime sleepiness
  • Reduced motivation
  • Headaches
  • Irritability or mood changes
  • Mental exhaustion
  • Unrefreshing sleep
  • Difficulty managing routine activities

When fatigue repeatedly affects normal activities, it is advisable to seek professional guidance.

What Can Cause Fatigue?

Fatigue may be influenced by several factors. Insufficient sleep, irregular sleep schedules, prolonged stress, dehydration, poor dietary habits, excessive physical effort, and a sedentary lifestyle may contribute to reduced energy.

Fatigue may also occur with certain health conditions, including anemia, thyroid-related concerns, diabetes, infections, nutritional deficiencies, and sleep disorders. A homeo doctor in Hyderabad can discuss your health history, lifestyle, sleep pattern, stress, diet, and associated symptoms to gain a broader understanding of your concerns.

Homeopathy Treatment for Fatigue

Homeopathic care emphasizes an individualized understanding of the person. During a consultation, a homeo doctor in Hyderabad may evaluate the complete symptom picture, including when fatigue began, changes in energy during the day, sleep quality, physical activity, emotional wellbeing, lifestyle habits, and other associated concerns.

Maintaining healthy daily habits is also important. A regular sleep routine, balanced meals, adequate hydration, appropriate physical activity, and effective stress management can support overall wellbeing.

Persistent fatigue should not be overlooked, especially when it has no obvious explanation or interferes significantly with daily life. Appropriate professional evaluation can help identify possible contributing health concerns.

Spiritual Homeopathy

Spiritual Homeopathy offers personalized homeopathic consultations for people experiencing fatigue and related health concerns. Its holistic approach considers physical symptoms, lifestyle, sleep, emotional wellbeing, and individual health history. If you are searching for a homeo doctor in Hyderabad, Spiritual Homeopathy provides personalized consultation and guidance.

For appointments and consultation, contact Spiritual Homeopathy at 9069176176.

GAFA and IIRIS Consulting Push Forensic Investigation into the AI Era

NEW DELHI: The growing sophistication of financial fraud and technology-enabled crime is forcing a rethink of how investigations are conducted. Artificial intelligence is increasingly becoming part of the investigator’s toolkit, not simply for automation, but for analysing large volumes of financial data, identifying anomalies and connecting information that may otherwise remain fragmented.

Against this backdrop, the Global Association of Forensic Accountants (GAFA) has joined hands with IIRIS Consulting to develop the Certified AI Investigator (CAII) programme, bringing artificial intelligence directly into the professional investigation curriculum. The programme is positioned at the intersection of forensic accounting, fraud investigation, financial intelligence and applied technology.

The initiative reflects a broader shift in the investigation profession. Fraudsters are increasingly using digital platforms, automated processes, complex transaction structures and technology to conceal financial activity. Investigators, consequently, need to be able to work with data at scale and use technology without losing the fundamentals of evidence-based investigation.

The CAII programme is built around practical application rather than AI theory alone. The current programme includes 48 hours of live instruction across eight modules and eight working platforms, with applications covering AI-assisted investigation, data and transaction analysis, fraud detection and investigative intelligence.

What makes the initiative particularly relevant is its emphasis on the investigator remaining in control. AI can identify patterns and accelerate analysis, but it cannot independently establish whether an unusual transaction is fraudulent, determine the credibility of evidence or replace professional skepticism. Those decisions still require human judgment, corroboration and investigative reasoning.

The collaboration also brings complementary capabilities. The skill enhancement capabilities of Global Association of Forensic Accountants (GAFA) operating across forensic accounting, fraud investigation, AML and financial-crime education, and IIRIS Consulting’s intelligence capabilities across risk advisory, security, intelligence, forensics and due diligence, with operations spanning India, MENA, Asia and Europe.

The development points to a larger transformation within forensic investigation: the next generation of professionals may need to be equally comfortable reading financial statements, interrogating datasets and questioning AI-generated findings. As financial crime continues to evolve, the advantage may increasingly belong not to investigators who simply use AI, but to those who understand when to use it, how to challenge it and how to turn its output into defensible investigative evidence.

पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाकर 70 लाख किया, जानें इस पैंतरे की पीछे की वजह

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पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है। पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी(एफआईए) ने अपनी वेबसाइट पर 2026 की "रेड बुक- मोस्ट वॉन्डेट हाई प्रोफ़ाइल टेररिस्ट' लिस्ट जारी की है। इसमें आतंकी मसूद अज़हर का नाम भी है। जिसमें उसकी गिरफ़्तारी के लिए सूचना देने पर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये देने का इनाम भी रखा गया है।

इनाम की राशि 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख किया

पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने एफआईए ने अपनी नई 'रेड बुक' में जेश जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को भगोड़ा घोषित किया है। उसके सिर पर घोषित इनाम को भी बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपए कर दिया गया है। पहले ये इनामी राशि 50 लाख पाकिस्तानी रुपए थी। अजहर को 2021 में भी भगोड़ा घोषित किया था और 50 लाख इनाम रखा था। मसूद अजहर भारत में संसद के अलावा 2016 पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 पुलवामा अटैक में भी आरोपी है।

रेड बुक में दी जाती है हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों की जानकारी

रेड बुक पाकिस्तान की एफआईए की ऐसी सूची है, जिसमें देश के मोस्ट वॉन्टेड और हाई-प्रोफ़ाइल आतंकवादियों के बारे में जानकारी दर्ज की जाती है। इसमें उन लोगों की तस्वीर, पहचान, संगठन से जुड़ाव, मामलों की जानकारी और उनकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी जैसी चीज़ें दी जाती हैं। यह कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए एक वॉन्टेड-टेररिस्ट डेटाबेस/रिकॉर्ड की तरह काम करती है। एफआईए का काउंटर टेररिज़्म विंग इसे तैयार करता है। एफआईए की नई रेड बुक में 26-11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। ये वे लोग हैं, जिन्होंने हमले के लिए आतंकियों को समुद्री रास्ते से मुंबई पहुंचाने में मदद की, उन्हें आर्थिक सहायता दी या अभियान के प्रबंधन में भूमिका निभाई। इनमें से 17 आतंकियों के नाम के साथ उनकी तस्वीर और 26-11 हमले में उनकी भूमिका का विवरण दिया गया है। लेकिन दो मामलों में पाकिस्तान ने अहम जानकारियां हटा दी हैं।

एफएटीएफ की बैठक से मसूद पर कार्रवाई

मसूद अजहर का नाम इस लिस्ट में आने को एफ़एटीएफ़ (फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स) रिव्यू से जोड़कर देखा जा रहा है। एफएटीएफ की अक्टूबर में होने वाली प्लीनरी से पहले पाकिस्तान की कार्रवाई दिखावे के तौर पर देखी जा रही है। इससे पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह दिखाने की कोशिश कर सकता है कि वह आतंकवाद और आतंकी फंडिंग के खिलाफ कदम उठा रहा है। पाकिस्तान पहले एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में रह चुका है। इस दौरान उस पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था। अक्टूबर 2022 में एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर कर दिया था। अब अक्टूबर में एफएटीएफ की बैठक होने वाली है। ऐसे में मसूद अजहर जैसे आतंकी के खिलाफ कार्रवाई की घोषणा पाकिस्तान के लिए अहम मानी जा रही है।

आजमगढ़: श्री राम प्रताप उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुरैला में मनाया गया हिन्दी दिवस, छात्र छात्राओं ने लोगों को खूब रिझाया
जमगढ़।श्री राम प्रताप उच्चतर माध्यमिक विद्यापीठ सुरैल उमरी (जौनपुर ) में हिंदी दिवस धूम धाम मनाया  गया । हिन्दी दिवस छात्र छात्राओं ने आकर्षक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जिसे लोगों ने खूब सराहा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि  जगदीप कुमार तथा विशिष्ट अतिथि विद्यालय के वरिष्ठ अध्यापक पतिराम मौर्य रहे। हिन्दी दिवस पर विद्यालय के छात्राओं  द्वारा पोस्टर पर कबीरदास, भारतेंदु हरिश्चंद्र,रामधारी सिंह दिनकर, मीराबाई आदि हिंदी के प्रमुख कवि और लेखक के छायाचित्र का चित्रांकन और उनके विषय में महत्वपूर्ण तथ्य को बड़े ही स्पष्ट तरीके से बच्चों के द्वारा बताया गया था।  छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही साथ हिंदी दिवस भाषण , काब्य पाठ प्रस्तुति किया । छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से हिंदी दिवस की प्रासंगिकता को नया आयाम दिया।जिसे लोगों ने खूब सराहा। विगत दिवस विद्यालय में सामान्य ज्ञान की परीक्षा आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान, प्राप्त करने वाले छात्र छात्राओं को सम्मानित किया गया ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जगदीप कुमार ने हिंदी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध कबीर, तुलसी, महादेव वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य रामचंद्र शुक्ल आदि कवियों ने हिंदी को बुलंदियों पर ले गये। जिनकी कृतियां लोगों के मानस पटल पर विराजमान हैं। कार्यक्रम में आगत अतिथियों को अंग वस्त्रम एवं स्मृति चिन्ह देकर विद्यालय के सह संचालक के द्वारा सम्मानित किया गया । कार्यक्रम का संचालन  आकाश कुमार गर्ग ने किया । कार्यक्रम में  पतिराम मौर्य, अमन कुमार , अवनीश मौर्य,पंकज राजभर,मंजू तिवारी, नीलू सिंह, पूनम सिंह,बेबी बानो, काजल तिवारी ,रोशनी यादव ,पूजा कुमारी ,तृषा सिंह,तनु शुक्ला आदि लोग मौजूद रहे।

বালিতে জোড়া ট্রফি করণ সিংয়ের, টানা দুই আইটিএফ এম ১৫ খেতাব জয়

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*চণ্ডীগড়, ১৩ সেপ্টেম্বর ২০২৬:* ইন্দোনেশিয়ার বালিতে নিজের দাপট অব্যাহত রাখলেন রাউন্ডগ্লাস টেনিস অ্যাকাডেমির তারকা করণ সিং। বালি বিচ কান্ট্রি ক্লাবে আয়োজিত আইটিএফ এম১৫ আম্মান মেনস ওয়ার্ল্ড টেনিস চ্যাম্পিয়নশিপে টানা দ্বিতীয় সপ্তাহে সিঙ্গলস খেতাব জিতলেন তিনি।

গত সপ্তাহেই একই ভেন্যুতে এম১৫ টুর্নামেন্টের সিঙ্গলস খেতাব জিতেছিলেন করণ। পরপর দুই খেতাব জয়ের সুবাদে তিনি ৩০টি র‍্যাঙ্কিং পয়েন্ট অর্জন করলেন। এই জয়ের ফলে তাঁর কেরিয়ারে সিঙ্গলস খেতাবের সংখ্যা দাঁড়াল পাঁচটি এবং ডাবলসে তিনটি।

২৩ বছর বয়সী ভারতীয় তারকা হার্ড কোর্টের কঠিন ফাইনালে আমেরিকার চ্যাংকে (এটিপি ১২৯৬) ৭-৬(৫), ৭-৫ সেটে হারিয়ে সফলভাবে খেতাব ধরে রাখলেন।

ফাইনালে ওঠার পথে পঞ্চম বাছাই করণ কোয়ার্টার ফাইনালে হেডেন জোন্সকে (এটিপি ১৪৭৫) ৭-৫, ৬-১ সেটে হারান। এরপর সেমিফাইনালে মুখোমুখি হন রাউন্ডগ্লাস অ্যাকাডেমির সতীর্থ তথা চতুর্থ বাছাই দিগ্বিজয় প্রতাপ সিংয়ের (এটিপি ৫৫৭)। সর্বভারতীয় এই সেমিফাইনালে করণ ৬-৪, ৭-৬(২) সেটে সরাসরি জিতে ফাইনালে জায়গা করে নেন।

গত সপ্তাহে প্রথম খেতাব জয়ের পথে তিনি তিন স্থানীয় প্রতিদ্বন্দ্বী — গুনাওয়ান ত্রিসমুয়ান্তারা (৬-৩, ৭-৫), রাফেলেন্টিনো আলি দা কোস্টা (৬-৩, ৬-২) এবং নাথান অ্যান্থনি বার্কিকে (৬-১, ৬-৪) হারিয়েছিলেন। এরপর সেমিফাইনালে জাপানের সপ্তম বাছাই রিওতারো তাগুচিকে ৬-৩, ৬-৩ এবং ফাইনালে নিউজিল্যান্ডের পঞ্চম বাছাই ইশাক বেক্রফ্টকে ৭-৫, ৭-৬(৩) সেটে হারিয়ে প্রথম খেতাবটি জেতেন।

দুই সপ্তাহে করণের পারফরম্যান্স ছিল নিখুঁত। টানা দুটি চ্যাম্পিয়নশিপে তিনি ম্যাচে ১০-০ এবং সেটে ২০-০ এর অবিশ্বাস্য রেকর্ড ধরে রাখেন। দুই সপ্তাহে একটিও সেট হারেননি তিনি।

ইন্দোনেশিয়ায় এই জোড়া জয় ২০২৬ সালে তাঁর ধারাবাহিক সাফল্যেরই প্রতিফলন, যা কাজাখস্তানের আস্তানায় আইটিএফ এম১৫ ডাবলস খেতাব জয়ের কয়েক সপ্তাহ পরেই এল।

আগস্ট মাসে রাশিয়ার মার্টিন বোরিসিয়ুকের সঙ্গে জুটি বেঁধে ফাইনালে স্থানীয় কাজাখ জুটি ড্যানিয়েল রহমাতুল্লায়েভ ও দামির ঝালগাসবেকে ৬-৩, ৬-২ সেটে হারিয়েছিলেন করণ।

ছবি:সংগৃহীত।
14 सितंबर 2026 को होगी चंद्रमा-शुक्र की दुर्लभ खगोलीय नजदीकी।*


खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि आकाश-दर्शन में रुचि रखने वाले अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए 14 सितंबर 2026 की शाम बेहद खास होगी, इस दिन चंद्रमा और शुक्र ग्रह पश्चिमी से दक्षिण-पश्चिमी आकाश में एक-दूसरे के बहुत करीब दिखाई देंगे,सूर्यास्त के बाद थोड़े समय के लिए बनने वाली यह चमकीली जोड़ी साफ क्षितिज वाले स्थानों से नंगी आंखों से देखी जा सकेगी, और दोनों खगोलीय पिंडों के बीच न्यूनतम कोणीय दूरी लगभग 28.8 आर्कमिनट, यानी करीब 0.48 डिग्री रहेगी , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह दूरी इतनी कम होगी कि चंद्रमा और शुक्र ग्रह कम शक्ति वाली दूरबीन या छोटे टेलीस्कोप के एक ही दृश्य क्षेत्र में आ सकते हैं, हालांकि,उन्हें देखने के लिए किसी उपकरण की भी आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि शुक्र ग्रह अपनी अत्यधिक चमक के कारण आकाश में चमकीले तारे जैसा दिखाई देगा, जबकि चंद्रमा पतले बढ़ते हुए अर्धचंद्र के रूप में नजर आएगा। *सूर्यास्त के बाद कितने समय का अवसर मिलेगा* ?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह खगोलीय दृश्य सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा और दोनों खगोलीय पिंड लगभग शाम 6:16 बजे दक्षिण-पश्चिमी क्षितिज से करीब 16 डिग्री ऊपर दिखाई देंगे इसके बाद वे धीरे धीरे से क्षितिज की ओर नीचे जाते हुए नज़र आयेंगे और रात्रि लगभग 7:30 बजे के क़रीब एवं उसके बाद अस्त होते हुए दिखाई देंगे।

*किस तारामण्डल में मौजूद होंगे और कितना होगा चन्द्रमा और शुक्र ग्रह का मैग्नीट्यूड?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 14 सितम्बर 2026 को दोनों खगोलीय पिण्ड शुक्र ग्रह और चंद्रमा एक दुसरे के बहुत नज़दीक होंगे और इनकी दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि सूर्यास्त से लेकर लगभग 7:30 PM तक दिखाई देंगे उसके बाद दोनों पश्चिमी क्षितिज पर नीचे चले जाएंगे। इसीलिए समय का विशेष ध्यान रखें क्योंकि इनकी बेहद शानदार खगोलीय युति देखने के लिए आपको बहुत ही कम समय मिलेगा। इस दौरान चंद्रमा और शुक्र ग्रह दोनों खगोलीय पिण्ड कन्या तारामंडल में ही स्थित होंगे एवं इस दौरान चंद्रमा का मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 7.63 होगा और शुक्र ग्रह का दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 4.73 के क़रीब होगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने यह भी बताया कि स्थानीय भौगोलिक स्थिति, प्रकाश प्रदूषण, सूर्यास्त के समय, धुंध और क्षितिज की रुकावट के कारण अलग-अलग शहरों में दृश्यता का मैग्नीट्यूड कुछ बदल सकता है, इसलिए खगोल प्रेमियों/आकाश दर्शकों को सूर्यास्त से पहले ही खुले मैदान या ऐसे स्थान पर पहुंचने की सलाह दी जाती है, जहां पश्चिमी क्षितिज भवनों, पेड़ों और पहाड़ियों से बाधित न हो, क्योंकि दोनों पिंड क्षितिज के बहुत करीब होंगे, इसलिए अवलोकन के लिए लगभग एक घंटे का ही व्यावहारिक अवसर मिलेगा। *कैसा होगा दोनों खगोलीय पिंडों का दायाँ आरोहण एवं ऐपल्स*?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान दोनों खगोलीय पिण्ड कन्या तारामंडल में होंगे, या कुछ यूं कहें कि दोनों पिंड
इस अवसर पर चंद्रमा और शुक्र, कन्या तारामंडल की दिशा में ही स्थित होंगे यह विशेषता भी दोनों खगोलीय पिंडों को और भी ख़ास बनाती है,एवं इस दौरान दोनों का right ascension( दायाँ आरोहण) या कुछ यूं कहें कि लगभग उसी समय चंद्रमा और शुक्र का दायाँ आरोहण (Right Ascension) समान होगा,इस स्थिति को खगोलीय भाषा में संयोजन , कंजंक्शन (conjunction) या युति कहा जाता है, या कुछ यूं भी कह सकते हैं कि जब दायाँ आरोहण लगभग समान होता है तो खगोल विज्ञान में इस स्थिति को कंजंक्शन (conjunction) या युति कहा जाता है,और यूं भी समझ सकते हैं कि आकाश में दो पिंडों का बहुत पास दिखाई देना ऐपल्स (appulse) कहलाता है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 14 सितंबर 2026 की खगोलीय घटना में दोनों अवधारणाएं लागू होंगी, क्योंकि दोनों पिंड समान (right ascension) दायाँ आरोहण लगभग समान  के निकट होंगे और दृश्य रूप से भी अत्यंत पास नजर आएंगे।
चंद्रमा उस समय लगभग तीन दिन पुराना और करीब 15 प्रतिशत प्रकाशित होगा। यह बढ़ता हुआ अर्धचंद्र होगा। साथ ही इस दौरान शुक्र का दृश्य परिमाण लगभग माइनस 4.73 रहेगा, जिससे वह सूर्यास्त के बाद सबसे चमकीले प्राकृतिक पिंडों में शामिल दिखाई देगा। *कैसा होगा शुक्र का आच्छादन*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि विश्व के कुछ भागों में चंद्रमा शुक्र को पूरी तरह ढकता हुआ दिखाई देगा। इस घटना को lunar occultation of Venus, अर्थात या चंद्रमा द्वारा, शुक्र का आच्छादन कहा जाता है, वैसे यह कोई यह चंद्र ग्रहण नहीं होता है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा आम बोलचाल की भाषा में इसको शुक्र ग्रह का चंद्र ग्रहण भी बोल देते हैं,  लेकिन खगोल विज्ञान में ग्रहण की बात करें तो पाते हैं कि जब चंद्र ग्रहण में पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जबकि occultation या आच्छादन में चंद्रमा किसी दूर स्थित पिंड को हमारी दृष्टि से कुछ समय के लिए छिपा देता है इसीलिए इसको खगोल वैज्ञानिक रूप में ऑक्ल्टेशन या आच्छादन कहा जाता है  खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अगर हम बात करें 14 सितंबर 2026 की घटना की तो पाते हैं कि यह ऑक्ल्टेशन या आच्छादन भारत के कुछ या बड़े हिस्सों से दृश्यता संभव है लेकिन संपूर्ण भारत से इस ऑक्ल्टेशन या आच्छादन को नहीं देखा जा सकेगा, लेकिन शानदार खगोलीय युति को देख सकते हैं। *भारत के बाकी हिस्सों में क्या दिखेगा?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जहाँ ऑक्ल्टेशन नहीं दिखाई देगा वहाँ चंद्रमा और शुक्र बेहद करीब (कंजंक्शन/युति) में दिखेंगे, सूर्यास्त के बाद पश्चिमी क्षितिज के पास यह शानदार खगोलीय युति को नंगी आँखों/साधारण आँखों से आसानी से दिखने वाला दृश्य होगा,बशर्ते क्षितिज साफ़ हो ।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक शब्द की बात करें तो पाते हैं कि इसे “चंद्र-शुक्र ऑक्ल्टेशन” या “चंद्रमा द्वारा शुक्र का आच्छादन” ही कहा जाता है लेकिन यह भी जानना रुचिकर है कि आम बोलचाल में “चंद्र-शुक्र ग्रहण” भी कहा जाता है, लेकिन इसको तकनीकी रूप से ऑक्ल्टेशन ही कहा जाता है। *ऐपल्स, कंजंक्शन और ऑक्ल्टेशन क्या होता है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐपल्स वह खगोलीय घटना है,जिसमें दो या दो से अधिक खगोलीय पिंड,आमतौर पर ग्रह या चंद्रमा, जब आकाश में एक-दूसरे के बहुत पास दिखाई देते हैं,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा आकाश में अपेक्षाकृत तेज गति से घूमता है और लगभग हर महीने तारामंडलों के बीच अपनी एक पूरी परिक्रमा पूरी करता है। इसलिए अधिकांश ऐपल्स तब होते हैं, जब चंद्रमा आकाश में किसी अन्य खगोलीय पिंड के पास से गुजरता है और चंद्रमा अपनी कलाओं के चक्र में लगभग समान चरण पर हर महीने लगभग उन्हीं ग्रहों के पास से गुजरता है, इसलिए कई घटनाएं आमतौर पर मासिक आधार पर दोहराई जाती हैं,दो खगोलीय पिंडों के बीच कितनी दूरी होने पर उनके निकट आने को ऐपल्स कहा जाए, इसकी कोई औपचारिक परिभाषा नहीं है, लेकिन खगोलविदों द्वारा उन सभी ऐपल्स को सूचीबद्ध किया जाता है, जिनमें ग्रह या छोटे ग्रह एक-दूसरे से एक डिग्री के भीतर आ जाते हैं, साथ ही नग्न आंखों से दिखाई देने वाले खगोलीय पिंडों के लिए तीन डिग्री तक की दूरी वाले ऐपल्स को शामिल किया जाता है,वहीं,विशेष रूप से चमकीले और नग्न आंखों से आसानी से दिखाई देने वाले पिंडों के लिए पांच डिग्री तक की दूरी को भी ऐपल्स की श्रेणी में रखा जाता है और
कभी-कभी दो खगोलीय पिंडों के बीच होने वाला यह निकट संयोग इतना करीबी होता है कि एक पिंड दूसरे के सामने से गुजरता हुआ दिखाई देता है,इस घटना को पारण या ऑकल्टेशन (Occultation) या आच्छादन भी कहा जाता है,ऐसी अधिकांश घटनाओं में चंद्रमा शामिल होता है, क्योंकि चंद्रमा हर महीने आकाश के बहुत बड़े क्षेत्र से होकर गुजरता है, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ऐपल्स और युति को आम बोलचाल में खगोलीय पिंडों के आकाश में एक-दूसरे के पास दिखाई देने को अक्सर युति या कंजंक्शन (Conjunction) ही कहा जाता है,हालांकि, खगोल विज्ञान में कंजंक्शन का अर्थ कुछ अधिक तकनीकी है, यह उस स्थिति को कहा जाता है, जब दो खगोलीय पिंडों का राइट एसेंशन (Right Ascension) या दायां आरोहण समान हो जाता है, या कुछ और भी अधिक
सरल शब्दों में कहें कि ऐपल्स में दो पिंड आकाश में पास-पास दिखाई देते हैं, जबकि कंजंक्शन दो पिंडों की आकाशीय स्थिति से जुड़ी एक विशिष्ट खगोलीय अवस्था है,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसको कुछ ऐसे भी समझ सकते हैं कि ऐपल्स वह खगोलीय घटना है जिसमें पृथ्वी से देखने पर दो पिंडों के बीच आकाशीय कोणीय दूरी न्यूनतम हो जाती है,इसके लिए कोई सार्वभौमिक दूरी-सीमा निर्धारित नहीं है, इसके विपरीत, कंजंक्शन एक निर्देशांक-आधारित स्थिति है, जिसमें दो पिंड समान दायाँ आरोहण या ecliptic longitude या क्रांतिक रेखांश, क्रांतिवृत्तीय रेखांश या भोगांश (Bhogansh) भी कहा जाता है ,यह अंतरिक्ष में किसी आकाशीय पिंड (जैसे सूर्य, चंद्रमा या ग्रह) की स्थिति को मापने का एक पैमाना है, जो क्रांतिवृत्त (Ecliptic path) पृथ्वी के चारों ओर सूर्य का आभासी पथ) पर आधारित होता है उसको साझा करते हैं, इसी दौरान यदि कोई पिंड दूसरे को हमारी दृष्टि से ढक देता है, तो घटना को ऑकल्टेशन या आच्छादन कहा जाता है। लेकिन अंतरिक्ष में यह पिंड करोड़ों किलोमीटर की दूरी पर मौजूद होते हैं यह केवल पृथ्वी से देखने पर दृष्टि प्रभाव होता है,वास्तविक रूप या भौतिक रूप में उपरोक्त से कोई भी खगोलीय पिण्ड एक दुसरे के इतने निकट नहीं होते हैं। *यह आच्छादन का क्षेत्र कौन कौन से देशों से होंगे।*

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर उत्तर प्रदेश भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत में 14 सितंबर 2026 से पहले चंद्रमा द्वारा शुक्र के ऑक्ल्टेशन की पिछली प्रमाणित घटना 24 मार्च 2023 को हुई थी,भारत के कुछ हिस्सों में यह घटना लगभग 15:55 से 18:16 IST के बीच हुई, हालांकि शहर के अनुसार समय अलग था। लेकिन इस बार 14 सितंबर 2026 की बात करें तो पाते हैं कि इस आच्छादन का क्षेत्र, एशिया, अफ्रीका, यूरोप और पश्चिमी रूस के कुछ हिस्सों तक सीमित रहेगा,खगोलीय गणनाओं के अनुसार अलग-अलग स्थानों पर शुक्र के छिपने का समय और पुनः दिखाई देने का समय देशों के हिसाब से अलग अलग होता है,लेकिन भारतीय समय के अनुसार यह   आच्छादन बिल्कुल सूर्यास्त के क़रीब पड़ेगा,इसलिए भारत के कई स्थानों पर यह आच्छादन शाम के कुछ उजाले में होगा और उन स्थानों से बिना उपकरण के इस आच्छादन को देखना कुछ कठिन भी हो सकता है, साथ ही कुछ जगहों से सूर्यास्त के बाद भी यह काफ़ी अच्छा दिखाई देगा, लेकिन भारत में अधिकांश लोगों को युति ही दिखेगी, क्योंकि भारत के हर हिस्से से शुक्र का आच्छादन दिखाई दे, यह आवश्यक नहीं है, जैसा कि दिल्ली सहित कई स्थानों पर यह घटना शाम को क्षितिज के बहुत निकट होगी फिर भी सूर्यास्त के बाद चंद्रमा और शुक्र का निकट संयोग कुछ समय तक भारत के बड़े हिस्से से देखा जा सकेगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि या कुछ यूं भी समझ सकते हैं कि उस दौरान सूर्यास्त और शाम का उजाला (Daylight/Twilight) भी होगा एवं भारत के अधिकांश हिस्सों (विशेषकर मध्य और दक्षिणी भारत) में यह खगोलीय घटना शाम के समय और सूर्यास्त के बेहद करीब होगी,कई जगहों पर उस समय आसमान में शाम का कुछ उजाला रहेगा, इसीलिए ख़ास ऑक्ल्टेशन को बिना उपकरण देखना कठिन हो सकता है चूंकि शुक्र और चंद्रमा दोनों ही सूर्यास्त के धुंधलके या हल्के उजाले में  ही दिखना शुरू हो जाएंगे इसलिए शुरुआती चरणों में बिना टेलीस्कोप या दूरबीन (Binoculars) के इसे स्पष्ट देख पाना वाकई कुछ कठिन हो सकता है, लेकिन सूर्यास्त के कुछ ही देर बाद का नजारा भी बेहतरीन होगा और साथ ही अगर जिन स्थानों पर यह आच्छादन दिखेगा और वहाँ का आसमान भी थोड़ा गहरा साफ़ और प्रकाश प्रदूषण से पूर्णतः दूर होने के कारण पतले से हंसिया आकार (Crescent) के चंद्रमा के पीछे चमकीले शुक्र ग्रह को गायब होते देखना बकाई काफी खूबसूरत और स्पष्ट एवं सुंदर दृश्य के साथ ही भव्य नज़ारा होगा। *किधर देखें।?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसे देखने के लिए सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में सावधानी पूर्वक सबसे पहले चमकीले शुक्र को खोजें, इसको खोजना बहुत ही आसान है क्योंकि आज कल पश्चिमी दिशा में सबसे चमकदार तारे जैसा (लेकिन वो तारा नहीं है वह शुक्र ग्रह है) जो दिख रहा है, वही है शुक्र ग्रह एवं उसके निकट पतला चंद्र-वर्धमान दिखाई देगा। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा पृथ्वी के निकट होने के कारण अलग-अलग स्थानों से उसका आकाशीय स्थान बदलता हुआ दिखाई देता है, यह लंबन' कहलाता है, यह किसी वस्तु की स्थिति में होने वाला वह आभासी परिवर्तन या विस्थापन है, जो उसे दो अलग-अलग जगहों या दृष्टियों से देखने पर महसूस होता है।

*लंबन (विस्थापन) क्या है?*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने लंबन के बारे में उदाहरण देते हुए बताया कि जब आप अपनी एक आँख बंद करके और फिर बारी-बारी से दूसरी आँख बंद करके सामने किसी उंगली को देखते हैं, तो उंगली अपनी जगह से हिलती हुई/हटती हुई सी प्रतीत होती है। इसे ही लंबन (Parallax) कहते हैं,पास की वस्तुएं दूर की वस्तुओं की तुलना में अधिक लंबन (विस्थापन) दिखाती हैं,इसी लंबन (parallax) पैरालेक्स के कारण occultation या आच्छादन केवल पृथ्वी के एक सीमित क्षेत्र से दिखाई देता है, जबकि निकट युति अधिक बड़े क्षेत्र में नजर आती है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि चंद्रमा द्वारा शुक्र के आच्छादन की पिछली विश्वव्यापी घटना 17 जून 2026 को हुई थी, जबकि भारत से ऐसी घटना 24 मार्च 2023 को दिखाई दी थी , साथ ही खगोलविद अमर पाल सिंह ने अपील भी की है कि आकाश दर्शकों को सूर्य को सीधे दूरबीन या विनोकुलर से, बिना प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स या किसी भी अन्य ऑप्टिवल उपकरण से सूर्य को कभी भी सीधे नहीं देखना चाहिए , खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फिल्टर युक्त दूरबीन या विनोकुलर एवं फिल्टर युक्त कैमरा आदि ऑप्टिकल उपकरण का ही उपयोग करें और सूर्य को सीधे देखने से बचना चाहिए क्योंकि सूर्य को सीधे देखने पर इस से आँखें खराब हो सकती हैं। इसीलिए सूर्यास्त के समय भी सूर्य की तरफ़ दूरबीन/  टेलीस्कोप लगाते समय इस दौरान भी अति महत्वपूर्ण सावधानी रखना चाहिए और इस शानदार खगोलीय घटना का आनंद उठाएं।

      
Tata Safari: A Premium Family SUV Designed for Comfortable Long-Distance Travel

A Family SUV Built Around Space and ComfortFamily travel often means carrying more passengers, luggage and expectations. For customers planning regular road trips or looking for a spacious SUV for everyday family use, seating capacity, cabin comfort and practicality can become important purchase considerations.

The Tata Safari is positioned as a premium SUV with three-row seating, offering 6- and 7-seater configurations depending on the version. Its larger SUV format makes it relevant for families who want additional passenger space and a comfortable environment for longer journeys.

Designed for Long-Distance Travel

A long drive can involve city traffic, open highways and changing road conditions. A family SUV therefore needs to combine performance with a comfortable driving experience.

The Tata Safari has been offered with a 2.0-litre turbocharged diesel engine producing 170 PS and 350 Nm, with manual and automatic transmission options depending on the variant.

Customers should confirm the latest variant-wise specifications, equipment and availability with an authorised Tata Motors dealer before booking.

Three Rows for Growing Families

One of the key reasons customers consider a larger SUV is the flexibility provided by three rows of seating.

The Tata Safari can accommodate larger families and groups while providing the practicality expected from a premium SUV. The third row can be particularly useful when additional passengers need to travel together, while the cabin layout is designed around passenger comfort.

For families that frequently travel together, a three-row SUV can be useful for holidays, weekend trips, airport travel and other journeys where additional seating is required.

Technology and Convenience on the Road

Modern family SUVs are expected to provide more than space. Infotainment, connectivity and convenience features have become an important part of the in-car experience.

The Tata Safari has been offered with features such as a large touchscreen infotainment system, configurable digital instrumentation, connected-car functions and premium audio options, depending on the variant.

Feature availability can vary between variants, so customers should compare the current specifications of the versions they are considering.

Safety as an Important Family Consideration

Safety remains a key consideration when selecting a family vehicle, particularly for customers who regularly travel on highways.

The Tata Safari has been equipped with a range of safety and driver-support technologies, with equipment varying by variant. Tata Motors has highlighted features and systems designed to support occupants and the driver across different driving situations.

Customers should review the latest safety specification of their preferred variant and discuss the available equipment with the dealership before purchase.

Tata Safari for Delhi-NCR Customers

Customers searching for a Tata Safari showroom in Delhi-NCR can explore the vehicle through Garud Tata Motors.

Tata Cars Showroom - Palam, Dwarka provides access for customers from Palam, Dwarka and nearby areas.

Tata Cars Showroom - Najafgarh serves customers from Najafgarh and surrounding locations.

Tata Cars Showroom - Narela provides another option for customers in Narela and nearby areas.

Customers can enquire about available variants, features, colours, pricing and test-drive opportunities at the nearest showroom.

Why a Tata Safari Test Drive Matters

A larger SUV should ideally be experienced before purchase. A test drive gives customers the opportunity to understand the vehicle's size, driving position, visibility, ride comfort, cabin layout and overall driving experience.

Customers interested in a Tata Safari test drive can contact Garud Tata Motors and enquire about available opportunities. A test drive can also help families assess access to the second and third rows and the practicality of the cabin for their typical journeys.

Service Support for Tata Safari Owners

The ownership experience continues after the vehicle is delivered. Regular maintenance and servicing are important for keeping a vehicle in appropriate operating condition.

Garud Tata Motors provides service support through Tata Cars Service Centre - Matiala, Dwarka and Tata Cars Service Centre - Najafgarh.

Safari owners can contact the relevant service centre for applicable scheduled servicing, maintenance and after-sales requirements.

A Premium SUV for the Complete Family Journey

The Tata Safari's appeal comes from the combination of three-row practicality, performance, comfort, technology and safety-focused equipment.

For customers looking for a premium family SUV in Delhi-NCR, the Safari is worth exploring through a showroom visit and test drive. Comparing variants against individual family and travel requirements can help customers select the configuration that suits them best.

About Garud Tata Motors

Garud Tata Motors provides Tata passenger vehicle sales and service support across its Delhi-NCR network. Customers can explore Tata cars and enquire about test drives at Tata Cars Showroom - Palam, Dwarka, Tata Cars Showroom - Najafgarh and Tata Cars Showroom - Narela. Service support is available through Tata Cars Service Centre - Matiala, Dwarka and Tata Cars Service Centre - Najafgarh.

Contact Garud Tata Motors

Website: www.garudtata.com

 Sales Contact: 9217371211

 Service Contact: 9217371211