11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त 2026 की भोर तक दिखाई देगा 6 ग्रहों का आकाशीय संरेखण/परेड
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12 अगस्त 2026 क्यों है खास? 11 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक मिलेगा ख़ास खगोलीय नजारों का सिलसिला।
जानिए सही समय और तरीका।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस बार यह अगस्त 2026 खगोल प्रेमियों को बहुत बड़ी एवं कुछ विशेष सौगात लेकर आई है। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो सम्पूर्ण अगस्त 2026 का महीना की विशेष होने वाला है लेकिन 12 अगस्त 2026 खगोल-विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण दिन है। छह ग्रहों का दृश्य संरेखण 11 अगस्त की देर रात से 12 अगस्त की भोर में दिखाई देगा, जबकि 12 अगस्त की रात से 13 अगस्त की भोर तक पर्सिड उल्का-वर्षा अपने अधिकतम सक्रिय चरण में होगी, और 12 अगस्त 2026 की इसी तारीख को वैश्विक स्तर पर पूर्ण सूर्य ग्रहण भी होगा, हालांकि वह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा।
*क्या है छह ग्रहों का पूर्व-सूर्योदय दृश्य संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त 2026 की भोर में छह ग्रह, शनि, वरुण, अरुण, मंगल, बुध और बृहस्पति, क्रांतिवृत्त के आसपास आकाश में एक विस्तृत पट्टी में दिखाई देंगे। खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह कोई भौतिक सीधी रेखा नहीं, बल्कि पृथ्वी से दिखाई देने वाला आकाशीय परिप्रेक्ष्य है। इनमें बृहस्पति, शनि और मंगल नग्न आंखों से अपेक्षाकृत आसानी से दिख सकते हैं, जबकि बुध ग्रह को क्षितिज के निकट होने के कारण देखना थोड़ा सा कठिन होगा, लेकिन प्रयास करने पर दिखाई दे सकता है जबकि अरुण और वरुण को अति विशेष (binoculars) विनोकुलर या अच्छी दूरबीन से ही देखना पड़ेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस खगोलीय संरेखण का भारत में सर्वोत्तम अवलोकन स्थानीय सूर्योदय से लगभग 30 से 60 मिनट पहले, खुले और कम प्रकाश-प्रदूषित स्थान से अच्छा हो सकता है।*क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ग्रहों की परेड या संरेखण (Planetary Alignment) वह खगोलीय स्थिति है जब सौरमंडल के कई ग्रह पृथ्वी से देखने पर आकाश के एक ही हिस्से में एक सीधी रेखा या चाप (Arc) में नजर आते हैं। अंतरिक्ष में ये ग्रह वास्तव में एक सीध में नहीं होते, बल्कि अपनी अलग कक्षाओं में घूमते हुए पृथ्वी के दृष्टिकोण से एक कतार में दिखते हैं। या कुछ यूं कहें कि प्लैनेट परेड खगोल विज्ञान का औपचारिक तकनीकी शब्द नहीं है बल्कि यह लोकप्रिय नाम उस स्थिति के लिए प्रयोग किया जाता है जब पृथ्वी से देखने पर कई ग्रह क्रांतिवृत्तीय पट्टी के आसपास एक साथ दिखाई देते हैं। ग्रह अंतरिक्ष में भौतिक रूप से एक सीधी रेखा नहीं बनाते, लेकिन कतार जैसा दृश्य पृथ्वी के दृष्टिकोण और सौरमंडल के लगभग समतलीय कक्षीय विन्यास के कारण दिखाई देता है।
*ग्रहों की परेड के कितने प्रकार होते हैं।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि सामान्य बोलचाल की भाषा में ग्रहों की परेड या संरेखण चार प्रकार की होती हैं,जैसे कि-
1.मिनी संरेखण (Mini)- जब 3 ग्रह एक साथ दिखाई देते हैं तो इसे मिनी संरेखण कहा जाता है।
2.छोटा संरेखण (Small)- जब 4 ग्रह एक कतार में आते हैं तो इसको छोटा संरेखण कहा जाता है।
3.बड़ा संरेखण (Large)- जब 5 या 6 ग्रह एक साथ दिखते हैं तब इसे बड़ा संरेखण कहा जाता है।
और 12 अगस्त 2026 को यही बड़ा संरेखण घटित होने जा रहा है इसीलिए देखना न भूलें।
4.महान संरेखण (Great)- जब सौरमंडल के लगभग सभी मुख्य ग्रह (8 ग्रह) एक साथ एक ही दिशा में नजर आते हैं तब एक महान संरेखण घटित होता है जोकि एक बहुत ही बड़ी खगोलीय घटनाओं में से एक होती है एवं ऐसा संरेखण अत्यंत ही ज्यादा दुर्लभ संरेखण होता है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह एक आभासी दृश्य होता है जिसे प्लैनेटरी अलाइनमेंट भी कहा जाता है और यह अंतरिक्ष में कोई भौतिक रेखा नहीं बनाता, बल्कि यह पृथ्वी के दृष्टिकोण और परिप्रेक्ष्य का परिणाम होता है, इसके दौरान नग्न आंखों से दिखाई देने वाले ग्रहों की दृश्यता की बात करें तो पाते हैं कि हमारे सौर मण्डल के पांच ग्रहों को साधारण आँखों से देखा जा सकता है जैसे कि उनमें से कुछ इस प्रकार हैं जैसे कि बृहस्पति, शुक्र, बुध, मंगल और शनि ग्रह जैसे चमकीले ग्रह बिना किसी दूरबीन के केवल थोड़ा सा नियमित प्रयास करने भर से आसानी से देखे एवं पहचाने जा सकते हैं, जबकि यूरेनस और नेप्च्यून के लिए किसी विशेष अच्छी दूरबीन की जरूरत होती ही है।*कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 12 अगस्त की भोर में बुध ग्रह लगभग 04:28 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा और सूर्योदय तक दिखाई देगा, इस दौरान बुध ग्रह कर्क तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा एवं इसका मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 0.89 होगा जो थोड़ी मेहनत करने एवं खोजने पर इसको साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर में ही बृहस्पति ग्रह भी लगभग 4:50 (AM) बजे पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू कर देगा एवं सूर्योदय तक दिखाई देगा इस दौरान बृहस्पति ग्रह भी कर्क तारामंडल क्षेत्र में ही स्थिति होगा एवं इसका दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग माइनस 1.63 होगा, जो इसे साधारण आंखों से आसानी से देखने योग्य बनायेगा। और अब बात करें शनि ग्रह की तो पाते हैं कि शनि ग्रह 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 9:30 (PM) बजे पूर्वी क्षितिज पर मीन तारामंडल क्षेत्र के साथ ही ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर अपने दृश्य मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 0.58 की चमक साथ लिए हुए 12 अगस्त 2026 की भोर/सूर्योदय तक दिखाई देगा, इसे भी साधारण आंखों से ही देखा जा सकता है, अब अगर हम बात करें हमारे सौर मण्डल के लाल ग्रह की तो हम पाते हैं कि मंगल ग्रह 11 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद लगभग 1:50 (AM) पर पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा इस दौरान मंगल ग्रह,वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 1.29 के क़रीब होगा जो इसे साधारण आंखों से देखने योग्य बनायेगा और 12 अगस्त की भोर सुबह तक दिखाई देगा,अगर अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सातवें ग्रह अरुण ग्रह की तो पाते हैं कि 11 अगस्त की रात्रि में लगभग 12 बजकर 15 मिनट (AM) बजे यह पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और इस दौरान यह वृषभ तारामण्डल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 5.74 के क़रीब होगा जो इसको किसी साधारण विनोकुलर एवं दूरबीन से भी देखना मुश्किल बनायेगा इसीलिए इसको देखने के लिए आपको किसी विशेष विनाकुलर एवं अच्छी दूरबीन/टेलीस्कोप की आवश्यकता होगी ही क्योंकि यह साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता है। और अब हम बात करें हमारे सौर मण्डल के सबसे ज्यादा दूर के ग्रह वरुण ग्रह की तो पाते हैं कि वरुण ग्रह 11 अगस्त 2026 की रात्रि में लगभग 9:00 (PM) IST से पूर्वी क्षितिज पर ऊपर आना शुरू करेगा और पूरी रात भर आकाश में रहते हुए 12 अगस्त 2026 की भोर तक बना रहेगा एवं इस दौरान यह मीन तारामंडल क्षेत्र में स्थित होगा और इसका मैग्नीट्यूड लगभग प्लस 7.83 होगा, इसीलिए वरुण ग्रह को इतने अधिक मैग्नीट्यूड के कारण,साधारण आंखों से देखना हमेशा ही नामुमकिन ही नहीं बल्कि असंभव ही है। इसीलिए इसको देखने के लिए साफ़ मौसम एवं पूर्णतः प्रकाश प्रदूषण से दूर होते हुए आपको किसी विशेष अच्छी दूरबीन की आवश्यकता होगी। तभी वरुण ग्रह को देखा जा सकता है अन्यथा नहीं।*आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश, भारत के खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष खगोलीय सलाह देते हुए बताया कि सबसे पहले पूर्वी क्षितिज को देखें, यहीं पर बृहस्पति और बुध सूर्योदय के समय से कुछ पहले दिखाई देंगे और मंगल ग्रह को देखने के लिए और ऊपर देखें एवं शनि ग्रह को खोजने के लिए आकाश में क्रांतिवृत्त का अनुसरण करें क्योंकि इस दौरान यह सभी ग्रह उत्तरी गोलार्ध में यह दक्षिण-पश्चिम की ओर जाते हुए दिखाई देंगे, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष ज़ोर देते हुए कहा है कि यूरेनस और नेपच्यून को देखने के लिए किसी सटीक स्काई चार्ट या उच्च आकाश मानचित्र के साथ ही किसी अच्छी एवं विशेष टेलीस्कोप/ दूरबीन का उपयोग करें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि ये ग्रह आकाश के एक बड़े हिस्से में दिखाई देंगे, इसलिए ऐसी जगह चुनें जहाँ से खुला और विस्तृत दृश्य दिखाई दे। पूर्वी क्षितिज सबसे महत्वपूर्ण है और सूर्योदय से ठीक पहले बुध और बृहस्पति बहुत नीचे दिखाई देंगे, और उन्हें देखने का समय भी सीमित ही होगा इसलिए साथ ही यह भी विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि दृश्य संयोजन के सामने,प्रकाश प्रदूषण, आंधी, पानी, बरसात, तूफ़ान, या अन्य आकस्मिक स्थितियों या इमारतें, पेड़, पहाड़ियाँ या धुंध आकाश के उस हिस्से को कहीं ढक न लें, अगर दृश्य संयोजन के दौरान ऐसा कुछ भी विघ्न उत्पन्न होता है तो इन ग्रहों को देखना मुश्किल हो सकता है,इसीलिए पूर्व दिशा की ओर स्पष्ट दृश्य वाले खुले मैदान, समुद्र तट, पहाड़ियों की चोटियाँ, छतें और बालकनियाँ जैसी जगहों पर पूर्ण सावधानीपूर्वक रहते हुए अवलोकन के लिए अच्छी जगहें हो सकती हैं, साथ ही सूर्योदय की दिशा के निकट पेड़ों, इमारतों, पहाड़ियों या धुंध एवं प्रकाश प्रदूषण वाले स्थानों से पूर्णतः बचें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन/टेलीस्कोप या ज़ूम लेंस को बिना अंतर्राष्ट्रीय प्रमाणित सोलर फ़िल्टर्स के कभी भी सूर्य के सीधे सामने न रखें, यह भी जानना आवश्यक है कि यदि 12 अगस्त 2026 की भोर में आसमान में बादल छाए हों, तो उससे पहले या बाद की भोर सुबह में भी इन ग्रहों को देखने की कोशिश कर सकते हैं क्योंकि यह ग्रहीय अलाइनमेंट थोड़ा दूर एवं इधर उधर होते हुए भी आप देख सकते हैं।
*12 अगस्त 2026 को और क्या ख़ास है*
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इसी तारीख के आसपास दो अन्य प्रमुख खगोलीय घटनाएँ भी घटित होंगी। जो इस प्रकार हैं।
1.बर्ष भर की सबसे ज्यादा मशहूर एवं बहुप्रतीक्षित उल्का वर्षाओंं में से प्रमुख जिसे पर्सिड उल्का वृष्टि भी कहा जाता है,उसी पर्सिड उल्का वर्षा का चरम समय भी 12-13 अगस्त 2026 की दरम्यानी रात में देखना सबसे अच्छा होगा।
2.12 अगस्त, 2026 को दिन में पूर्ण सूर्य ग्रहण भी घटित होने वाला है लेकिन अफ़सोस कि यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा, यह सूर्य ग्रहण केवल दुनियां के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों से ही पूर्ण सूर्य ग्रहण एवं आंशिक सूर्य ग्रहण आदि के रूप में दिखाई देगा।![]()
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*क्या होती है ग्रहों की परेड या संरेखण।*
*कब और कितने बजे से दिखाई देना शुरू होगा इस परेड/संरेखण में कौन कौन सा ग्रह।*
*आसानी से कैसे देखें यह ग्रहीय संरेखण।*





मुंबई | विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर गौतम आदिवासी शासकीय छात्रावास, गोरेगांव (मुंबई) में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास, शिक्षा, संवैधानिक अधिकारों तथा युवा नेतृत्व के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ॲड. प्रेम कुमार राष्ट्रीय प्रवक्ता, प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत (भाजपा), ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आदिवासी संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक मूल्यों तथा जीवन में ईमानदारी के महत्व पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन, आत्मविश्वास और चरित्र निर्माण ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।


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