पश्चिम बंगाल में ओवैसी की एंट्री, ममता की बढ़ाएंगे मुश्किल, इस पार्टी से मिलाया हाथ
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पश्चिम बंगाल की राजनीतिक बिसात पर एक ऐसी चाल चली गई है, जिसने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ा दी हैं। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी) के साथ मिलकर बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया।
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औवैसी ने ममता बनर्जी को निशाने पर लिया
ओवैसी ने ईद के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए ममता बनर्जी को निशाने पर लिया और कहा कि राज्य में मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी है लेकिन धर्मनिरपेक्ष होकर उनसे वोट तो लेते हैं लेकिन उन्हें उनका हक और भागीदारी नहीं देते हैं। ओवैसी ने लोगों से लगा कि दुआ करें कि मजलिस और मजबूत हो।
25 मार्च को कोलकाता में होगा संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा हमारा नुमायेंदे मुल्क के कोने कोने में कामयाब होकर गरीब की आवाज उठाएं। ममता बनर्जी बंगाल में हैं, 30 फीसदी मुस्लिम की आबादी है, लेकिन 5 लाख के करीब बैकवर्ड क्लास सर्टिफिकेट को कैंसिल कर दिया गया। बहुत सी नाइंसाफियों की कहानियां भी हैं, मालदा में पंचायत इलेक्शन में मजलिस को 60 हजार वोट मिले थे, हम इस कहानी को आगे बढ़ाएंगे। ओवैसी 25 मार्च को कोलकाता में हुमायूं कबीर के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गठबंधन की रूपरेखा पेश करेंगे।
हुमायूं कबीर की पार्टी 182 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार
हुमायूं कबीर ने कहा कि उनकी पार्टी 2026 के विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इस गठबंधन में AIMIM भी साझेदार है। ओवैसी की पार्टी लगभग 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार सकती है। इधर, कबीर की पार्टी ने 18 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। हुमायूं ने भगवानगोला, नौदा, राजीनगर और मुर्शिदाबाद की सीट पर अपने प्रत्याशी के नामों का ऐलान कर दिया है।
ममता के “M” फैक्टर में सेंधमारी
ओवैसी का यह दांव सिर्फ एक चुनावी गठबंधन नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बंगाल के उस ‘मुस्लिम वोटबैंक’ के किले में सेंधमारी की कोशिश है, जिसे ममता बनर्जी की अजेय सत्ता की सबसे बड़ी रीढ़ माना जाता है। पश्चिम बंगाल में लगभग 27 से 30 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है. राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 100 से ज्यादा सीटें ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक मतदाता सीधे तौर पर हार-जीत का फैसला करते हैं। मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना जैसे जिलों में यह आबादी बहुसंख्यक की भूमिका में है।
बीजेपी के लिए खुशी की खबर
पिछले कई चुनावों से यह वोटबैंक एकमुश्त होकर टीएमसी के पक्ष में मतदान करता आ रहा है, जिसने बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद ममता बनर्जी को सत्ता के शिखर पर बनाए रखा है। लेकिन अब ओवैसी और हुमायूं कबीर के एक साथ आने से इस वोटबैंक में बिखराव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। अगर यह गठबंधन इन इलाकों में 10 से 15 हजार वोट भी काट ले जाता है, तो दर्जनों सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार औंधे मुंह गिर सकते हैं। इसलिए ओवैसी का यह बयान बीजेपी को भी खुश करने वाला है।








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