सिमडेगा के आम्रपाली आम पहुंचे लंदन, CM हेमन्त सोरेन की बिरसा हरित ग्राम योजना ने रचा इतिहास


रांची/सिमडेगा:

झारखण्ड के सुदूरवर्ती जिले सिमडेगा ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की दूरगामी सोच और विजन का नतीजा है कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उपजे उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम की पहली व्यावसायिक निर्यात खेप यूनाइटेड किंगडम (लंदन) के लिए रवाना कर दी गई है।

कोरोना काल की आपदा को बदला अवसर में

यह ऐतिहासिक सफलता उस नीति की परिणति है, जिसकी नींव कोरोना महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में मुख्यमंत्री द्वारा रखी गई थी। जब गांवों में रोजगार का संकट था, तब ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फलदार बागवानी से जोड़ने वाली बिरसा हरित ग्राम योजना (BHGY) की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक सिर्फ सिमडेगा जिले के 12,000 से अधिक किसानों ने लगभग 10,500 एकड़ भूमि पर मुख्य रूप से आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा आम की बागवानी की। आज उसी सामूहिक मेहनत का मीठा फल वैश्विक बाजार के रूप में सामने आया है।

विगत वर्ष सिमडेगा में आम का बंपर उत्पादन हुआ था, लेकिन मार्केट लिंकेज की कमी के कारण किसान स्थानीय बाजार में औने-पौने दाम पर आम बेचने को मजबूर थे। इस वर्ष जिला प्रशासन ने लगातार 'बायर्स-सेलर्स मीट' आयोजित कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला। कृषि और प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के तकनीकी सहयोग से सिमडेगा के आमों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया। निर्यात के लिए जरूरी 'फायटोसैनिटरी स्टैंडर्ड्स' को पूरा करने के लिए महिला किसानों को विशेष ट्रेनिंग भी दी गई।

महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

सिमडेगा जिले में वर्तमान में 7,500 सखी मंडल सक्रिय हैं, जिनसे 93,000 महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। आम बागवानी से जुड़ी इन महिलाओं को जिला प्रशासन ने व्यापार की नई दिशा दी है। प्रारंभिक तौर पर 6 FPOs के 300 किसान इस एक्सपोर्ट चेन से जुड़े हैं। इस पहली अंतर्राष्ट्रीय खेप (1.32 टन) के लिए सिमडेगा सदर प्रखंड की 'महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' तथा बानो प्रखंड की 'बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' ने मुख्य भूमिका निभाई।

81 टन का बड़ा लक्ष्य, अब यूरोप और रिलायंस मार्ट की बारी

अकेले सिमडेगा ने इस सीजन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में कुल 81 टन आम विक्रय का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसी हफ्ते आम की एक और खेप यूके (UK) के लिए और दूसरी खेप यूरोप के लिए भेजी जाएगी। इसके साथ ही घरेलू कॉर्पोरेट बाजार को मजबूत करने के लिए 'रिलायंस मार्ट' के साथ भी सफल लिंकेज स्थापित किया गया है। आने वाले दिनों में जिले से रागी और इमली के निर्यात की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

2.15 लाख ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

सिमडेगा की इस सफलता के पीछे बिरसा हरित ग्राम योजना का राज्यव्यापी नेटवर्क है, जिसने पूरे झारखण्ड के ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत अब तक राज्य का 1.86 लाख एकड़ का एक बड़ा हिस्सा बागवानी वृक्षारोपण के दायरे में आ चुका है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोजगार मिला है। योजना की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 तक किए गए वृक्षारोपण में से 52,000 एकड़ क्षेत्र अब पूरी तरह फल हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो चुका है। प्रशासन का अनुमान है कि इस हार्वेस्ट-रेडी एरिया से इस बार 50,000 मीट्रिक टन का बंपर न्यूनतम फल उत्पादन होगा, जो आने वाले दिनों में झारखण्ड को फलों के निर्यात का एक बड़ा हब बनाने की राह तैयार कर रहा है।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

#indiafirsttimedeployedreadytofirenuclearmissiles

दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

गयाजी में टीवीएस रेडर की मेगा डिलीवरी, 51+ ग्राहकों को मिली नई मोटरसाइकिल

गयाजी। शहर के एक निजी होटल में एबी टीवीएस एवं मां मुंडेश्वरी टीवीएस के संयुक्त तत्वावधान में टीवीएस रेडर की मेगा डिलीवरी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक ही दिन में 51 से अधिक ग्राहकों को नई टीवीएस रेडर मोटरसाइकिल की चाबी सौंपकर वाहन डिलीवरी की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्राहकों एवं उनके परिजनों ने भाग लिया।

समारोह के दौरान कंपनी के टीएम अमन सिन्हा ने बताया कि टीवीएस रेडर अपने आकर्षक स्पोर्टी लुक, दमदार प्रदर्शन और आधुनिक तकनीक के कारण युवाओं की पसंदीदा मोटरसाइकिल बन गई है। यह बाइक स्टाइल, आराम और दैनिक उपयोगिता का बेहतरीन संतुलन प्रदान करती है, जिससे कम्यूटर मोटरसाइकिल श्रेणी में इसकी अलग पहचान बनी है।

अधिकारियों ने कहा कि गयाजी में आयोजित यह मेगा डिलीवरी कार्यक्रम टीवीएस रेडर की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। बिहार में इस मोटरसाइकिल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका परिष्कृत इंजन, उन्नत फीचर्स और युवाओं को आकर्षित करने वाला डिजाइन ग्राहकों को खूब पसंद आ रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद ग्राहकों ने नई बाइक प्राप्त कर खुशी व्यक्त की और टीवीएस की गुणवत्ता तथा सेवा की सराहना की। डिलीवरी के बाद ग्राहकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें कंपनी के प्रतिनिधियों ने बाइक की विशेषताओं और रखरखाव से संबंधित जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राहकों के लिए विशेष उपहार की भी व्यवस्था की गई थी। सभी बाइक खरीदने वाले ग्राहकों को उपहार स्वरूप वीआईपी सफारी का ट्रॉली बैग प्रदान किया गया, जिसे पाकर ग्राहकों में खासा उत्साह देखने को मिला।

कंपनी के अनुसार, टीवीएस रेडर बिहार में 83,567 रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। इस मेगा डिलीवरी कार्यक्रम के माध्यम से कंपनी ने क्षेत्र में अपने बढ़ते ग्राहक विश्वास और मजबूत बाजार उपस्थिति को रेखांकित किया। मां मुंडेश्वरी के प्रोपराइटर पीयूष सिंह, एबी टीवीएस के जनरल मैनेजर जितेंद कुमार सिन्हा उर्फ डब्लू, मुख्यातिथि तौर पर रामाधार सिंह, कलाकार गुलशन राजपूत आदि उपस्थित थे।

मुख्य विकास अधिकारी महोदय की अध्यक्षता में योग सप्ताह 2026 एवं 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक हुई आयोजित
         
सुलतानपुर,मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन स्थित प्रेरणा सभागार में योग सप्ताह 2026 (15 जून से 21 जून, 2026) एवं 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून, 2026) के सफल आयोजन के संबंध में बैठक आयोजित की गई।
      
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा बताया गया कि जनपद स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम 21 जून, 2026 को पर्यावरण पार्क, सीताकुण्ड के निकट आयोजित किया जाएगा। इसके पूर्व 15 जून, 2026 से जनपद में योग सप्ताह का शुभारम्भ किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को योग सप्ताह एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम *“Yoga for Healthy Ageing”*  निर्धारित है।
     
मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि उनके अधीन संचालित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग सप्ताह के दौरान नियमित योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को अधीनस्थ विद्यालयों में 15 जून से 21 जून तक योग सप्ताह मनाए जाने के निर्देश दिए। 14 दिवसीय योग अभ्यास कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु विशेष लिंक https://mo.habit.yoga/red=uttarpradesh
एवं समर्पित टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 के माध्यम से पंजीकरण एवं योगाभ्यास कार्यक्रम संचालित है। योग सप्ताह के दौरान आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रमों तथा परिवार के साथ किए गए योग के छायाचित्र एवं वीडियो ‘आयुष कवच’ ऐप पर अपलोड कर प्रतिभागिता दर्ज कराई जा सकती है।
         
मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने सभी संबंधित विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिकाधिक लोगों को योग सप्ताह एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों से जोड़ने का आह्वान किया।
       
बैठक में अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला क्रीड़ाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, प्रबंधक (आयुष), क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, मास्टर ट्रेनर सुनील दत्त तिवारी, चेयरमैन रेड क्रॉस सोसाइटी सहित पतंजलि योग संस्थान, आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मकुमारी एवं अन्य योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जनगणना 2026 में OBC कॉलम जोड़ने की मांग, राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

जनगणना 2026 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, झारखंड प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि राष्ट्रीय जनगणना 2026 के House Listing Schedule में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का भी अलग कॉलम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4), 340 एवं 46 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश की लगभग 52 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी समुदाय को “अन्य” श्रेणी में रखना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया कि इस मांग को अपनी सशक्त अनुशंसा के साथ महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं माननीय प्रधानमंत्री महोदय के समक्ष अग्रसारित किया जाए।

ज्ञापन पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्यपाल महोदय ने इसे तत्काल राष्ट्रपति भवन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली में भी अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का सुझाव दिया।

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने इसे वर्ष 1931 की जनगणना के बाद ओबीसी समुदाय से संबंधित आंकड़ों की कमी को दूर करने तथा सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। मोर्चा का मानना है कि जनगणना में ओबीसी वर्ग की स्पष्ट गणना से नीतिगत निर्णयों और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

यह जानकारी राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, हजारीबाग के प्रदेश सचिव सुरेश ठाकुर ने दी।

" Sunday on Cycles" কর্মসূচি

নিজস্ব প্রতিনিধি:আজ উত্তর ২৪ পরগনা জেলা প্রশাসনের উদ্যোগে আয়োজনে করা হয়েছিল " Sunday on Cycles" কর্মসূচির।এর শুভ সূচনা করেন পশ্চিমবঙ্গ সরকারের ভারপ্রাপ্ত পঞ্চায়েত ও গ্রাম উন্নয়ন বিভাগের মন্ত্রী দিলীপ ঘোষ। তিনি ফ্লাগ নাড়িয়ে নিউটাউন ইসকন মন্দির প্রাঙ্গণ থেকে এর সূচনা করেন।এই সাইকেল র‍্যালী টি শেষ হয় ইকো পার্কে।

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर ऑनलाइन सत्र: लॉन्च हुआ 'ग्रीन विजन 2027', जुटे IIT और पर्यावरण क्षेत्र के दिग्गज

ग्रीष्मावकाश होने के कारण 'ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया' द्वारा 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' पर एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'जलवायु परिवर्तन - धरती के संकेतों का जवाब' पर केंद्रित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल परिसर में निदेशक डॉ. एस. खालिद, चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन एवं प्राचार्या श्रीमती चाँदनी त्रिगुणायत द्वारा वृक्षारोपण से किया गया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

सत्र में शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हुए:

- मुख्य अतिथि: प्रो. प्रमोद पाठक, IIT(ISM)

- विशिष्ट अतिथि: प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित, प्राचार्य, बी.एड. कॉलेज, पुरुलिया

- चेयरपर्सन: डॉ. निखत परवीन

- मैनेजर: डॉ. ममता सिन्हा

- डायरेक्टर: डॉ. एस. खालिद

- प्रिंसिपल: श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

उद्घाटन संबोधन

चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने स्कूल की ग्रीन इनिशिएटिव्स की जानकारी दी। 'Clean Campus-Green Campus' के साथ ही उन्होंने बच्चों से 'Clean Home-Green Home' पर अमल करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

प्रो. प्रमोद पाठक ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला और युवाओं से 'क्लाइमेट एक्शन' में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को 'Change Agent' के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने Reduce, Reuse और Recycle का महत्वपूर्ण फॉर्मूला भी साझा किया।

विशेषज्ञ व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित ने पर्यावरण अध्ययन को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए कहा, "छात्र ही पर्यावरण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। NSS के माध्यम से हमने हजारों छात्रों को पर्यावरण से जोड़ा है। हर स्कूल को अपना 'ईको-क्लब' बनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने Activity Based Teaching Method के द्वारा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स देने की सलाह दी।

प्रिंसिपल का संदेश

प्रिंसिपल चांदनी त्रिगुणायत ने स्कूल का 'ग्रीन विजन 2027' लॉन्च किया, जिसके तहत 500 पेड़ लगाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना और परिसर को जीरो वेस्ट बनाना शामिल है।

डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने अपने वक्तव्य में कहा, "आज का यह सत्र सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है।"

कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक श्री अरविंद कुमार रजक, श्री राकेश अरोरा,ताहिर अंसारी तथा IT हेड इंजी. काशिफ खान की सराहनीय भूमिका रही।

How Karma, Kundali and Living Spaces Are Connected – Insights by Vastu Vid Rahul Parse

Ancient Indian knowledge systems never viewed human life as isolated from nature, space, or cosmic energies. Astrology and Vastu Shastra were developed as interconnected sciences based upon Karma, Prarabdh (destined karmic results), planetary influences, and environmental energies. While modern science may use different terminology, the underlying principle remains similar — every action creates an energetic impact, and every environment influences human life.According to ancient philosophy, birth itself is not accidental. A soul takes birth under specific planetary alignments based upon accumulated karmas from previous lives. This planetary arrangement becomes the individual’s birth chart or Kundali, which acts like an energetic blueprint of life tendencies, strengths, challenges, health patterns, relationships, and psychological behavior.

Vastu Shastra, on the other hand, governs the external energy field in which a person lives or works. If Astrology represents the “inner cosmic design,” then Vastu represents the “outer environmental reflection” of that design.

One of the most fascinating observations made by experienced Vastu and Astrology practitioners is that defects repeatedly appear in those directions of a property that are connected with afflicted planetary energies in the Kundali. This creates a strong philosophical and practical connection between human consciousness and living space.

For example, in many cases where severe Pitru Dosha, afflicted Rahu, or karmic ancestral disturbances are observed in the horoscope, the South-West zone of the house or commercial property is often found imbalanced. This may appear as cuts, missing corners, heavy defects, underground water tanks, toilets, clutter, depression in level, cracks, or structural instability in that particular direction.

From a Vastu perspective, the South-West direction represents stability, ancestral energy, control, maturity, and karmic grounding. Scientifically, this can also be interpreted psychologically and environmentally. Disturbed spaces create disturbed emotional patterns. Continuous exposure to imbalance in important zones of a property can subconsciously influence decision-making, stress levels, emotional security, and family harmony.

Similarly, repeated defects in the North-East zone are frequently observed in individuals facing confusion, spiritual blockage, emotional instability, or poor clarity in life direction. Afflictions related to Jupiter, Moon, or Ketu often symbolically reflect through this zone. The East relates to growth and social opportunities, while the North governs financial movement and mental flow.

This does not necessarily mean that planets physically damage buildings. Rather, ancient sciences suggest resonance between human karmic energies and surrounding environments. Just as modern science acknowledges magnetic fields, frequencies, vibrations, and environmental psychology, ancient Vastu observed that spaces absorb and radiate subtle energetic influences over time.

Interestingly, today’s scientific disciplines are slowly moving toward similar understandings. Environmental psychology studies how spaces influence human emotions and behavior. Geopathic stress research studies the effect of underground disturbances on health and mental peace. Electromagnetic field studies analyze invisible energetic interactions within living environments. Quantum theories also suggest that observation, consciousness, and energy are deeply interconnected.

The digital era has further strengthened this research potential. Satellite mapping, digital compass systems, energy analysis applications, and astronomical software now allow precise correlation between property layouts and astrological patterns. Consultants can scientifically study directional imbalance, land energy, surrounding structures, and planetary influences with greater accuracy than ever before.

However, the true purpose of Astrology and Vastu should not be fear creation. These sciences were originally intended for awareness, balance, and corrective living. Every defect does not destroy life, and every good direction does not guarantee success. Human effort, discipline, ethics, and conscious action remain equally important.

Astrology reveals karmic tendencies. Vastu reflects environmental resonance. Science studies measurable patterns. Together, they form a deeper understanding of how human life interacts with both visible and invisible energies.

The future of these ancient sciences lies not in blind belief, but in responsible research, practical observation, and scientific interpretation. When understood correctly, Astrology and Vastu are not against science — they are complementary systems attempting to understand the same universal intelligence through different dimensions. For more information you can visit Instagram

 

 

गया के ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल ने रचा इतिहास: जेईई एडवांस 2026 के ऑल इंडिया टॉपर शुभम कुमार समेत 18 छात्रों ने लहराया सफलता का परचम

गया। शिक्षा के क्षेत्र में गया जिले के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। जेईई एडवांस 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर पूरे देश में बिहार का नाम रोशन करने वाले शुभम कुमार के सम्मान में गया शहर के बिसार तालाब स्थित ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में जेईई एडवांस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 18 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल विद्यालय बल्कि पूरे गया जिले को गौरवान्वित किया है।

कार्यक्रम के दौरान ऑल इंडिया टॉपर शुभम कुमार के अलावा आयुष कुमार (रैंक 5140), समीर राज (रैंक 737), सचिन प्रकाश (रैंक 1602), विनय कुमार (रैंक 2011), मुकेश कुमार (रैंक 2775) सहित अन्य सफल छात्रों को मंच पर सम्मानित किया गया। छात्रों की सफलता पर विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस उपलब्धि को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल बताया। विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने कहा कि यह सफलता किसी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन, समर्पण और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों से विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विशेष शैक्षणिक माहौल तैयार किया गया है, जिसका परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने शुभम कुमार की सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि जब शुभम नौवीं कक्षा में था, तब वह विद्यालय के सुपर-30 कार्यक्रम को दर्शक के रूप में देखा करता था। उसी दौरान उसकी बहन श्रेया कुमारी ने विद्यालय में नामांकन लिया था। श्रेया ने यहां दो वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद आईआईटी में सफलता हासिल की। बहन की उपलब्धि से प्रेरित होकर शुभम ने भी इसी संस्थान में प्रवेश लिया और अपनी मेहनत के बल पर देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने बताया कि शुभम शुरू से ही एक असाधारण छात्र था। उसकी पढ़ाई के प्रति लगन, जिज्ञासा और कठिन परिश्रम ने उसे अन्य छात्रों से अलग पहचान दिलाई। विद्यालय के शिक्षकों ने उसकी क्षमता को पहचानते हुए उसे विशेष मार्गदर्शन और अतिरिक्त समय दिया। यही कारण है कि उसने जेईई एडवांस जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में इतिहास रचते हुए ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। उन्होंने कहा कि विद्यालय से इस वर्ष कुल 46 छात्रों ने जेईई एडवांस परीक्षा दी थी, जिनमें से 18 छात्रों ने सफलता प्राप्त की है। यह सफलता दर्शाती है कि यदि छात्रों को सही दिशा, बेहतर संसाधन और समर्पित शिक्षक मिलें तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 

विद्यालय के छात्र लगातार आईआईटी, नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। समारोह के दौरान सफल छात्रों ने भी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को दिया। छात्रों ने कहा कि यहां उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने की प्रेरणा भी मिली। नियमित टेस्ट, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और अनुशासित दिनचर्या ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया। 

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने घोषणा की कि इस वर्ष से कक्षा 8 और 9 के विद्यार्थियों के लिए सुपर-30 कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। जुलाई माह से शुरू होने वाले इस विशेष कार्यक्रम के तहत चयनित छात्रों को छात्रवृत्ति के माध्यम से रहने, खाने और पढ़ाई की पूरी सुविधा पांच वर्षों तक निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।

निदेशक भीमराज ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब गया के छात्र देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। विद्यालय का लक्ष्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। जेईई एडवांस 2026 के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। यदि सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो गया जैसे शहर से भी देश का नंबर-1 छात्र निकल सकता है। ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और बिहार की शैक्षणिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

Top 10-Rated Implant Specialists for Natural-Looking Smile Restoration in Delhi NCR

Understanding Your Options: Natural-Looking Smile Restoration demands specialized skills and modern technology. We've identified 10 accomplished implantologists in Delhi NCR who combine clinical precision with patient-centered approaches.The following practitioners represent diverse approaches to implant dentistry, from immediate-load protocols to bone-sparing techniques. Each brings distinct clinical philosophies and patient engagement models.

Profiles of Leading Practitioners

1. Dr. Rohit Sharma

Dr. Rohit Sharma is a highly trusted dental implant practitioner at Ganpati Dental Clinic, known for delivering life-changing smile transformations. He specializes in full-mouth rehabilitation and advanced restorative dentistry using modern digital-guided implant systems. Ganpati Dental Clinic in Rohini is highly recognized for making premium, painless implant treatments accessible and affordable, earning strong community trust across Delhi NCR.

Specialty: Full Mouth Rehabilitation, Digital Implantology, and Affordable Advanced Dentistry.

Clinic Location: Rohini, Delhi NCR.

Ganpati Dental Clinic Patient Rating: Rated 4.9/5 stars by 500+ patients in Delhi NCR for natural-looking teeth restoration.

2. Dr. Neeraj Singh

Dr. Neeraj Singh at Private Implant Practice specializes in Modern implant practice. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

3. Dr. Barun

Dr. Barun at Dr. Barun's Multispeciality Dental Centre specializes in Multispeciality implant support. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

4. Dr. Vivek Gaur

Dr. Vivek Gaur at SimpliSmile (Simpladent) specializes in Cortical implantology, immediate load. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

5. Dr. Neeraj Verma

Dr. Neeraj Verma at Indraprastha Apollo Hospitals specializes in Complex periodontal and implant cases. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

6. Dr. Kunal Shet

Dr. Kunal Shet at Orthosquare Dental Clinics specializes in All-on-4, cortical implantology, clear aligners. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

7. Dr. Rajat Sachdeva

Dr. Rajat Sachdeva at Dr. Rajat Sachdeva's Dental Institute specializes in Basal and pterygoid implants. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

8. Dr. Sachisn Bansal

Dr. Sachin Bansal at Implant & Braces Centre specializes in Affordable implants and braces. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

9. Dr. A. K. Agarwal

Dr. A. K. Agarwal practices at Aesthetic Dental Practice, where he specializes in computer-guided aesthetic implantology. He is highly recognized for using minimally invasive dental lasers and advanced 3D surgical guides, which ensure maximum placement precision, faster healing, and minimal post-operative discomfort for patients seeking natural-looking tooth restorations.

10. Dr. Jatin Kalra

Dr. Jatin Kalra at Shine & Smile / Dr. Lal Dental Clinic specializes in Complex oral surgery and implants. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

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Author Bio

Dr Rohit Sharma is a dental implant practitioner at Ganpati Dental Clinic, Delhi NCR, with experience in full mouth rehabilitation and restorative dentistry. He regularly writes about dental implants, oral rehabilitation, and modern dental technologies.

सिमडेगा के आम्रपाली आम पहुंचे लंदन, CM हेमन्त सोरेन की बिरसा हरित ग्राम योजना ने रचा इतिहास


रांची/सिमडेगा:

झारखण्ड के सुदूरवर्ती जिले सिमडेगा ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन की दूरगामी सोच और विजन का नतीजा है कि बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत उपजे उच्च गुणवत्ता वाले आम्रपाली आम की पहली व्यावसायिक निर्यात खेप यूनाइटेड किंगडम (लंदन) के लिए रवाना कर दी गई है।

कोरोना काल की आपदा को बदला अवसर में

यह ऐतिहासिक सफलता उस नीति की परिणति है, जिसकी नींव कोरोना महामारी के चुनौतीपूर्ण दौर में मुख्यमंत्री द्वारा रखी गई थी। जब गांवों में रोजगार का संकट था, तब ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए फलदार बागवानी से जोड़ने वाली बिरसा हरित ग्राम योजना (BHGY) की शुरुआत की गई थी। वर्ष 2019-20 से 2024-25 तक सिर्फ सिमडेगा जिले के 12,000 से अधिक किसानों ने लगभग 10,500 एकड़ भूमि पर मुख्य रूप से आम्रपाली, मल्लिका और लंगड़ा आम की बागवानी की। आज उसी सामूहिक मेहनत का मीठा फल वैश्विक बाजार के रूप में सामने आया है।

विगत वर्ष सिमडेगा में आम का बंपर उत्पादन हुआ था, लेकिन मार्केट लिंकेज की कमी के कारण किसान स्थानीय बाजार में औने-पौने दाम पर आम बेचने को मजबूर थे। इस वर्ष जिला प्रशासन ने लगातार 'बायर्स-सेलर्स मीट' आयोजित कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाला। कृषि और प्रसंस्करण खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के तकनीकी सहयोग से सिमडेगा के आमों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया। निर्यात के लिए जरूरी 'फायटोसैनिटरी स्टैंडर्ड्स' को पूरा करने के लिए महिला किसानों को विशेष ट्रेनिंग भी दी गई।

महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

सिमडेगा जिले में वर्तमान में 7,500 सखी मंडल सक्रिय हैं, जिनसे 93,000 महिलाएँ जुड़ी हुई हैं। आम बागवानी से जुड़ी इन महिलाओं को जिला प्रशासन ने व्यापार की नई दिशा दी है। प्रारंभिक तौर पर 6 FPOs के 300 किसान इस एक्सपोर्ट चेन से जुड़े हैं। इस पहली अंतर्राष्ट्रीय खेप (1.32 टन) के लिए सिमडेगा सदर प्रखंड की 'महिला जागृति फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' तथा बानो प्रखंड की 'बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' ने मुख्य भूमिका निभाई।

81 टन का बड़ा लक्ष्य, अब यूरोप और रिलायंस मार्ट की बारी

अकेले सिमडेगा ने इस सीजन में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों में कुल 81 टन आम विक्रय का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इसी हफ्ते आम की एक और खेप यूके (UK) के लिए और दूसरी खेप यूरोप के लिए भेजी जाएगी। इसके साथ ही घरेलू कॉर्पोरेट बाजार को मजबूत करने के लिए 'रिलायंस मार्ट' के साथ भी सफल लिंकेज स्थापित किया गया है। आने वाले दिनों में जिले से रागी और इमली के निर्यात की भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।

2.15 लाख ग्रामीण परिवारों की बदली तकदीर

सिमडेगा की इस सफलता के पीछे बिरसा हरित ग्राम योजना का राज्यव्यापी नेटवर्क है, जिसने पूरे झारखण्ड के ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया है। इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत अब तक राज्य का 1.86 लाख एकड़ का एक बड़ा हिस्सा बागवानी वृक्षारोपण के दायरे में आ चुका है, जिससे 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को सीधे तौर पर स्थायी आजीविका और रोजगार मिला है। योजना की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 तक किए गए वृक्षारोपण में से 52,000 एकड़ क्षेत्र अब पूरी तरह फल हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो चुका है। प्रशासन का अनुमान है कि इस हार्वेस्ट-रेडी एरिया से इस बार 50,000 मीट्रिक टन का बंपर न्यूनतम फल उत्पादन होगा, जो आने वाले दिनों में झारखण्ड को फलों के निर्यात का एक बड़ा हब बनाने की राह तैयार कर रहा है।

रेडी टू फायर’ मोड में भारत, पहली बार 12 परमाणु हथियार किए तैनात, रिपोर्ट में खुलासा

#indiafirsttimedeployedreadytofirenuclearmissiles

दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली वैश्विक संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) ने भारत में परमाणु हथियार को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। SIPRI ने अपनी ताजा रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार ऑपरेशनल यानी तैयार स्थिति में तैनात किए हैं।

दशकों से चली आ रही नीति में बड़ा बदलाव

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह पहली बार है कि भारत के इन हथियारों को ऑपरेशनली डिप्लॉयड के तौर पर वर्गीकृत रखा गया है। यह दशकों से चली आ रही उस नीति से एक बड़ा बदलाव है, जिसके तहत परमाणु हथियारों और उन्हें पहुंचाने वाले सिस्टम को अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। भूमिगत मिसाइल भंडारगृहों और नई परमाणु पनडुब्बियों में दागने के लिए तैयार इन परमाणु हथियारों की तैनाती भारत की तैयारी का संकेत देती है।

परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर क्या है भारत की नीति?

भारत की परमाणु हथियारों के पहले इस्तेमाल न करने की नीति है। ऐतिहासिक रूप से भारत ने 'डी-मेटेड न्यूक्लियर पॉलिसी' अपनाई थी। इसका मतलब था कि शांति के समय परमाणु हथियारों को मिसाइल या विमान से अलग रखा जाता था और सिर्फ गंभीर संकट के समय ही मिसाइल या विमान में असेंबल किया जाता था। SIPRI की रिपोर्ट भारत की इस नीति में बदलाव की ओर इशारा करती है। इसलिए पहली बार परमाणु हथियारों की तैनाती शायद भारत के परमाणु शक्ति बनने के बाद से सबसे बड़ा बदलाव है।

भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड

SIPRI की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले साल भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, साथ ही बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) पर कुछ वॉरहेड तैनात किए गए हैं और डेटरेंस पेट्रोलिंग (रोकथाम के लिए गश्त) की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड हैं। इनमें से 12 परमाणु वॉरहेड मिसाइलों, पनडुब्बियों या लड़ाकू विमानों जैसे डिलीवरी सिस्टम के साथ जोड़े गए हैं या ऑपरेशनल फोर्स वाले ठिकानों पर तैनात किए गए हैं।

2024 से INS अरिघात और अरिदमन ऑपरेशनल

रिपोर्ट के अनुसार अगस्त 2024 से भारत ने परमाणु मिसाइल ले जाने वाली दो पनडुब्बियों INS अरिघात और INS अरिदमन को ऑपरेशनल कर दिया है। दोनों पनडुब्बियां परमाणु मिसाइल ले जाने में सक्षम हैं और उन्हें डेटरेंस पेट्रोल यानी सुरक्षा और जवाबी क्षमता बनाए रखने वाली गश्त के लिए मंजूरी मिल चुकी है। परमाणु मिसाइलों से लैस ऐसी पनडुब्बियों को लंबी दूरी की गश्त पर भेजा जाता है, जो कई महीनों तक समुद्र में रह सकती हैं। इस दौरान वे सैन्य नेतृत्व के साथ समय-समय पर संपर्क बनाए रखती हैं।

गयाजी में टीवीएस रेडर की मेगा डिलीवरी, 51+ ग्राहकों को मिली नई मोटरसाइकिल

गयाजी। शहर के एक निजी होटल में एबी टीवीएस एवं मां मुंडेश्वरी टीवीएस के संयुक्त तत्वावधान में टीवीएस रेडर की मेगा डिलीवरी समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक ही दिन में 51 से अधिक ग्राहकों को नई टीवीएस रेडर मोटरसाइकिल की चाबी सौंपकर वाहन डिलीवरी की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्राहकों एवं उनके परिजनों ने भाग लिया।

समारोह के दौरान कंपनी के टीएम अमन सिन्हा ने बताया कि टीवीएस रेडर अपने आकर्षक स्पोर्टी लुक, दमदार प्रदर्शन और आधुनिक तकनीक के कारण युवाओं की पसंदीदा मोटरसाइकिल बन गई है। यह बाइक स्टाइल, आराम और दैनिक उपयोगिता का बेहतरीन संतुलन प्रदान करती है, जिससे कम्यूटर मोटरसाइकिल श्रेणी में इसकी अलग पहचान बनी है।

अधिकारियों ने कहा कि गयाजी में आयोजित यह मेगा डिलीवरी कार्यक्रम टीवीएस रेडर की बढ़ती लोकप्रियता का प्रमाण है। बिहार में इस मोटरसाइकिल की मांग लगातार बढ़ रही है। इसका परिष्कृत इंजन, उन्नत फीचर्स और युवाओं को आकर्षित करने वाला डिजाइन ग्राहकों को खूब पसंद आ रहा है।

कार्यक्रम में मौजूद ग्राहकों ने नई बाइक प्राप्त कर खुशी व्यक्त की और टीवीएस की गुणवत्ता तथा सेवा की सराहना की। डिलीवरी के बाद ग्राहकों के साथ विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें कंपनी के प्रतिनिधियों ने बाइक की विशेषताओं और रखरखाव से संबंधित जानकारी दी। इस अवसर पर ग्राहकों के लिए विशेष उपहार की भी व्यवस्था की गई थी। सभी बाइक खरीदने वाले ग्राहकों को उपहार स्वरूप वीआईपी सफारी का ट्रॉली बैग प्रदान किया गया, जिसे पाकर ग्राहकों में खासा उत्साह देखने को मिला।

कंपनी के अनुसार, टीवीएस रेडर बिहार में 83,567 रुपये (एक्स-शोरूम) की शुरुआती कीमत पर उपलब्ध है। इस मेगा डिलीवरी कार्यक्रम के माध्यम से कंपनी ने क्षेत्र में अपने बढ़ते ग्राहक विश्वास और मजबूत बाजार उपस्थिति को रेखांकित किया। मां मुंडेश्वरी के प्रोपराइटर पीयूष सिंह, एबी टीवीएस के जनरल मैनेजर जितेंद कुमार सिन्हा उर्फ डब्लू, मुख्यातिथि तौर पर रामाधार सिंह, कलाकार गुलशन राजपूत आदि उपस्थित थे।

मुख्य विकास अधिकारी महोदय की अध्यक्षता में योग सप्ताह 2026 एवं 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के सम्बन्ध में बैठक हुई आयोजित
         
सुलतानपुर,मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की अध्यक्षता में विकास भवन स्थित प्रेरणा सभागार में योग सप्ताह 2026 (15 जून से 21 जून, 2026) एवं 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून, 2026) के सफल आयोजन के संबंध में बैठक आयोजित की गई।
      
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महोदय द्वारा बताया गया कि जनपद स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम 21 जून, 2026 को पर्यावरण पार्क, सीताकुण्ड के निकट आयोजित किया जाएगा। इसके पूर्व 15 जून, 2026 से जनपद में योग सप्ताह का शुभारम्भ किया जाएगा। उन्होंने सभी विभागों को योग सप्ताह एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम *“Yoga for Healthy Ageing”*  निर्धारित है।
     
मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया कि उनके अधीन संचालित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग सप्ताह के दौरान नियमित योगाभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं जिला विद्यालय निरीक्षक को अधीनस्थ विद्यालयों में 15 जून से 21 जून तक योग सप्ताह मनाए जाने के निर्देश दिए। 14 दिवसीय योग अभ्यास कार्यक्रम में प्रतिभाग करने हेतु विशेष लिंक https://mo.habit.yoga/red=uttarpradesh
एवं समर्पित टोल-फ्री नंबर 1800-315-7008 के माध्यम से पंजीकरण एवं योगाभ्यास कार्यक्रम संचालित है। योग सप्ताह के दौरान आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रमों तथा परिवार के साथ किए गए योग के छायाचित्र एवं वीडियो ‘आयुष कवच’ ऐप पर अपलोड कर प्रतिभागिता दर्ज कराई जा सकती है।
         
मुख्य विकास अधिकारी महोदय ने सभी संबंधित विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर अधिकाधिक लोगों को योग सप्ताह एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों से जोड़ने का आह्वान किया।
       
बैठक में अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला क्रीड़ाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, प्रबंधक (आयुष), क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी, मास्टर ट्रेनर सुनील दत्त तिवारी, चेयरमैन रेड क्रॉस सोसाइटी सहित पतंजलि योग संस्थान, आर्ट ऑफ लिविंग, ब्रह्मकुमारी एवं अन्य योग के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
जनगणना 2026 में OBC कॉलम जोड़ने की मांग, राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

जनगणना 2026 में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम जोड़ने की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, झारखंड प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि राष्ट्रीय जनगणना 2026 के House Listing Schedule में अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का भी अलग कॉलम अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।

ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 15(4), 16(4), 340 एवं 46 का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देश की लगभग 52 प्रतिशत आबादी वाले ओबीसी समुदाय को “अन्य” श्रेणी में रखना सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना के विपरीत है। प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया कि इस मांग को अपनी सशक्त अनुशंसा के साथ महामहिम राष्ट्रपति महोदया एवं माननीय प्रधानमंत्री महोदय के समक्ष अग्रसारित किया जाए।

ज्ञापन पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए राज्यपाल महोदय ने इसे तत्काल राष्ट्रपति भवन एवं प्रधानमंत्री कार्यालय भेजने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, नई दिल्ली में भी अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का सुझाव दिया।

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने इसे वर्ष 1931 की जनगणना के बाद ओबीसी समुदाय से संबंधित आंकड़ों की कमी को दूर करने तथा सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। मोर्चा का मानना है कि जनगणना में ओबीसी वर्ग की स्पष्ट गणना से नीतिगत निर्णयों और कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

यह जानकारी राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा, हजारीबाग के प्रदेश सचिव सुरेश ठाकुर ने दी।

" Sunday on Cycles" কর্মসূচি

নিজস্ব প্রতিনিধি:আজ উত্তর ২৪ পরগনা জেলা প্রশাসনের উদ্যোগে আয়োজনে করা হয়েছিল " Sunday on Cycles" কর্মসূচির।এর শুভ সূচনা করেন পশ্চিমবঙ্গ সরকারের ভারপ্রাপ্ত পঞ্চায়েত ও গ্রাম উন্নয়ন বিভাগের মন্ত্রী দিলীপ ঘোষ। তিনি ফ্লাগ নাড়িয়ে নিউটাউন ইসকন মন্দির প্রাঙ্গণ থেকে এর সূচনা করেন।এই সাইকেল র‍্যালী টি শেষ হয় ইকো পার্কে।

ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया में 'विश्व पर्यावरण दिवस' पर ऑनलाइन सत्र: लॉन्च हुआ 'ग्रीन विजन 2027', जुटे IIT और पर्यावरण क्षेत्र के दिग्गज

ग्रीष्मावकाश होने के कारण 'ग्लोबल स्कूल ऑफ इंडिया' द्वारा 'विश्व पर्यावरण दिवस 2026' पर एक विशेष ऑनलाइन सत्र का आयोजन किया गया। इस वर्ष की थीम 'जलवायु परिवर्तन - धरती के संकेतों का जवाब' पर केंद्रित रही। कार्यक्रम का शुभारंभ स्कूल परिसर में निदेशक डॉ. एस. खालिद, चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन एवं प्राचार्या श्रीमती चाँदनी त्रिगुणायत द्वारा वृक्षारोपण से किया गया।

गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

सत्र में शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र के जाने-माने विशेषज्ञ शामिल हुए:

- मुख्य अतिथि: प्रो. प्रमोद पाठक, IIT(ISM)

- विशिष्ट अतिथि: प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित, प्राचार्य, बी.एड. कॉलेज, पुरुलिया

- चेयरपर्सन: डॉ. निखत परवीन

- मैनेजर: डॉ. ममता सिन्हा

- डायरेक्टर: डॉ. एस. खालिद

- प्रिंसिपल: श्रीमती चांदनी त्रिगुणायत

कार्यक्रम की मुख्य झलकियां

उद्घाटन संबोधन

चेयरपर्सन डॉ. निखत परवीन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है। डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने स्कूल की ग्रीन इनिशिएटिव्स की जानकारी दी। 'Clean Campus-Green Campus' के साथ ही उन्होंने बच्चों से 'Clean Home-Green Home' पर अमल करने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि का वक्तव्य

प्रो. प्रमोद पाठक ने जलवायु परिवर्तन के खतरों पर प्रकाश डाला और युवाओं से 'क्लाइमेट एक्शन' में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने जोर दिया कि बच्चों को 'Change Agent' के रूप में तैयार किया जाए। उन्होंने Reduce, Reuse और Recycle का महत्वपूर्ण फॉर्मूला भी साझा किया।

विशेषज्ञ व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) दिनकर कुमार दीक्षित ने पर्यावरण अध्ययन को पाठ्यक्रम से जोड़ते हुए कहा, "छात्र ही पर्यावरण के सबसे बड़े दूत बन सकते हैं। NSS के माध्यम से हमने हजारों छात्रों को पर्यावरण से जोड़ा है। हर स्कूल को अपना 'ईको-क्लब' बनाना चाहिए।" साथ ही उन्होंने Activity Based Teaching Method के द्वारा बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के टिप्स देने की सलाह दी।

प्रिंसिपल का संदेश

प्रिंसिपल चांदनी त्रिगुणायत ने स्कूल का 'ग्रीन विजन 2027' लॉन्च किया, जिसके तहत 500 पेड़ लगाना, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देना और परिसर को जीरो वेस्ट बनाना शामिल है।

डायरेक्टर डॉ. एस. खालिद ने अपने वक्तव्य में कहा, "आज का यह सत्र सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक आंदोलन की शुरुआत है।"

कार्यक्रम को सफल बनाने में वरीय शिक्षक श्री अरविंद कुमार रजक, श्री राकेश अरोरा,ताहिर अंसारी तथा IT हेड इंजी. काशिफ खान की सराहनीय भूमिका रही।

How Karma, Kundali and Living Spaces Are Connected – Insights by Vastu Vid Rahul Parse

Ancient Indian knowledge systems never viewed human life as isolated from nature, space, or cosmic energies. Astrology and Vastu Shastra were developed as interconnected sciences based upon Karma, Prarabdh (destined karmic results), planetary influences, and environmental energies. While modern science may use different terminology, the underlying principle remains similar — every action creates an energetic impact, and every environment influences human life.According to ancient philosophy, birth itself is not accidental. A soul takes birth under specific planetary alignments based upon accumulated karmas from previous lives. This planetary arrangement becomes the individual’s birth chart or Kundali, which acts like an energetic blueprint of life tendencies, strengths, challenges, health patterns, relationships, and psychological behavior.

Vastu Shastra, on the other hand, governs the external energy field in which a person lives or works. If Astrology represents the “inner cosmic design,” then Vastu represents the “outer environmental reflection” of that design.

One of the most fascinating observations made by experienced Vastu and Astrology practitioners is that defects repeatedly appear in those directions of a property that are connected with afflicted planetary energies in the Kundali. This creates a strong philosophical and practical connection between human consciousness and living space.

For example, in many cases where severe Pitru Dosha, afflicted Rahu, or karmic ancestral disturbances are observed in the horoscope, the South-West zone of the house or commercial property is often found imbalanced. This may appear as cuts, missing corners, heavy defects, underground water tanks, toilets, clutter, depression in level, cracks, or structural instability in that particular direction.

From a Vastu perspective, the South-West direction represents stability, ancestral energy, control, maturity, and karmic grounding. Scientifically, this can also be interpreted psychologically and environmentally. Disturbed spaces create disturbed emotional patterns. Continuous exposure to imbalance in important zones of a property can subconsciously influence decision-making, stress levels, emotional security, and family harmony.

Similarly, repeated defects in the North-East zone are frequently observed in individuals facing confusion, spiritual blockage, emotional instability, or poor clarity in life direction. Afflictions related to Jupiter, Moon, or Ketu often symbolically reflect through this zone. The East relates to growth and social opportunities, while the North governs financial movement and mental flow.

This does not necessarily mean that planets physically damage buildings. Rather, ancient sciences suggest resonance between human karmic energies and surrounding environments. Just as modern science acknowledges magnetic fields, frequencies, vibrations, and environmental psychology, ancient Vastu observed that spaces absorb and radiate subtle energetic influences over time.

Interestingly, today’s scientific disciplines are slowly moving toward similar understandings. Environmental psychology studies how spaces influence human emotions and behavior. Geopathic stress research studies the effect of underground disturbances on health and mental peace. Electromagnetic field studies analyze invisible energetic interactions within living environments. Quantum theories also suggest that observation, consciousness, and energy are deeply interconnected.

The digital era has further strengthened this research potential. Satellite mapping, digital compass systems, energy analysis applications, and astronomical software now allow precise correlation between property layouts and astrological patterns. Consultants can scientifically study directional imbalance, land energy, surrounding structures, and planetary influences with greater accuracy than ever before.

However, the true purpose of Astrology and Vastu should not be fear creation. These sciences were originally intended for awareness, balance, and corrective living. Every defect does not destroy life, and every good direction does not guarantee success. Human effort, discipline, ethics, and conscious action remain equally important.

Astrology reveals karmic tendencies. Vastu reflects environmental resonance. Science studies measurable patterns. Together, they form a deeper understanding of how human life interacts with both visible and invisible energies.

The future of these ancient sciences lies not in blind belief, but in responsible research, practical observation, and scientific interpretation. When understood correctly, Astrology and Vastu are not against science — they are complementary systems attempting to understand the same universal intelligence through different dimensions. For more information you can visit Instagram

 

 

गया के ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल ने रचा इतिहास: जेईई एडवांस 2026 के ऑल इंडिया टॉपर शुभम कुमार समेत 18 छात्रों ने लहराया सफलता का परचम

गया। शिक्षा के क्षेत्र में गया जिले के लिए मंगलवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ। जेईई एडवांस 2026 में ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल कर पूरे देश में बिहार का नाम रोशन करने वाले शुभम कुमार के सम्मान में गया शहर के बिसार तालाब स्थित ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल में भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में जेईई एडवांस परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले 18 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल विद्यालय बल्कि पूरे गया जिले को गौरवान्वित किया है।

कार्यक्रम के दौरान ऑल इंडिया टॉपर शुभम कुमार के अलावा आयुष कुमार (रैंक 5140), समीर राज (रैंक 737), सचिन प्रकाश (रैंक 1602), विनय कुमार (रैंक 2011), मुकेश कुमार (रैंक 2775) सहित अन्य सफल छात्रों को मंच पर सम्मानित किया गया। छात्रों की सफलता पर विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। अभिभावकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने इस उपलब्धि को शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल बताया। विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने कहा कि यह सफलता किसी एक दिन की नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन, समर्पण और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों से विद्यालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर विशेष शैक्षणिक माहौल तैयार किया गया है, जिसका परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने शुभम कुमार की सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि जब शुभम नौवीं कक्षा में था, तब वह विद्यालय के सुपर-30 कार्यक्रम को दर्शक के रूप में देखा करता था। उसी दौरान उसकी बहन श्रेया कुमारी ने विद्यालय में नामांकन लिया था। श्रेया ने यहां दो वर्षों तक पढ़ाई करने के बाद आईआईटी में सफलता हासिल की। बहन की उपलब्धि से प्रेरित होकर शुभम ने भी इसी संस्थान में प्रवेश लिया और अपनी मेहनत के बल पर देशभर में पहला स्थान हासिल कर लिया

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने बताया कि शुभम शुरू से ही एक असाधारण छात्र था। उसकी पढ़ाई के प्रति लगन, जिज्ञासा और कठिन परिश्रम ने उसे अन्य छात्रों से अलग पहचान दिलाई। विद्यालय के शिक्षकों ने उसकी क्षमता को पहचानते हुए उसे विशेष मार्गदर्शन और अतिरिक्त समय दिया। यही कारण है कि उसने जेईई एडवांस जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में इतिहास रचते हुए ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की। उन्होंने कहा कि विद्यालय से इस वर्ष कुल 46 छात्रों ने जेईई एडवांस परीक्षा दी थी, जिनमें से 18 छात्रों ने सफलता प्राप्त की है। यह सफलता दर्शाती है कि यदि छात्रों को सही दिशा, बेहतर संसाधन और समर्पित शिक्षक मिलें तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। 

विद्यालय के छात्र लगातार आईआईटी, नीट और अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। समारोह के दौरान सफल छात्रों ने भी अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और विद्यालय के सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण को दिया। छात्रों ने कहा कि यहां उन्हें सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि लक्ष्य निर्धारित करने और उसे हासिल करने की प्रेरणा भी मिली। नियमित टेस्ट, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और अनुशासित दिनचर्या ने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया। 

विद्यालय के निदेशक भीमराज प्रसाद ने घोषणा की कि इस वर्ष से कक्षा 8 और 9 के विद्यार्थियों के लिए सुपर-30 कार्यक्रम की शुरुआत की जाएगी। जुलाई माह से शुरू होने वाले इस विशेष कार्यक्रम के तहत चयनित छात्रों को छात्रवृत्ति के माध्यम से रहने, खाने और पढ़ाई की पूरी सुविधा पांच वर्षों तक निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है।

निदेशक भीमराज ने कहा कि अब वह समय आ गया है जब गया के छात्र देश के बड़े शैक्षणिक संस्थानों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। विद्यालय का लक्ष्य केवल परीक्षा में सफलता दिलाना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। जेईई एडवांस 2026 के परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती। यदि सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो गया जैसे शहर से भी देश का नंबर-1 छात्र निकल सकता है। ब्रिटिश इंग्लिश स्कूल की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और बिहार की शैक्षणिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

Top 10-Rated Implant Specialists for Natural-Looking Smile Restoration in Delhi NCR

Understanding Your Options: Natural-Looking Smile Restoration demands specialized skills and modern technology. We've identified 10 accomplished implantologists in Delhi NCR who combine clinical precision with patient-centered approaches.The following practitioners represent diverse approaches to implant dentistry, from immediate-load protocols to bone-sparing techniques. Each brings distinct clinical philosophies and patient engagement models.

Profiles of Leading Practitioners

1. Dr. Rohit Sharma

Dr. Rohit Sharma is a highly trusted dental implant practitioner at Ganpati Dental Clinic, known for delivering life-changing smile transformations. He specializes in full-mouth rehabilitation and advanced restorative dentistry using modern digital-guided implant systems. Ganpati Dental Clinic in Rohini is highly recognized for making premium, painless implant treatments accessible and affordable, earning strong community trust across Delhi NCR.

Specialty: Full Mouth Rehabilitation, Digital Implantology, and Affordable Advanced Dentistry.

Clinic Location: Rohini, Delhi NCR.

Ganpati Dental Clinic Patient Rating: Rated 4.9/5 stars by 500+ patients in Delhi NCR for natural-looking teeth restoration.

2. Dr. Neeraj Singh

Dr. Neeraj Singh at Private Implant Practice specializes in Modern implant practice. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

3. Dr. Barun

Dr. Barun at Dr. Barun's Multispeciality Dental Centre specializes in Multispeciality implant support. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

4. Dr. Vivek Gaur

Dr. Vivek Gaur at SimpliSmile (Simpladent) specializes in Cortical implantology, immediate load. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

5. Dr. Neeraj Verma

Dr. Neeraj Verma at Indraprastha Apollo Hospitals specializes in Complex periodontal and implant cases. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

6. Dr. Kunal Shet

Dr. Kunal Shet at Orthosquare Dental Clinics specializes in All-on-4, cortical implantology, clear aligners. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

7. Dr. Rajat Sachdeva

Dr. Rajat Sachdeva at Dr. Rajat Sachdeva's Dental Institute specializes in Basal and pterygoid implants. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

8. Dr. Sachisn Bansal

Dr. Sachin Bansal at Implant & Braces Centre specializes in Affordable implants and braces. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

9. Dr. A. K. Agarwal

Dr. A. K. Agarwal practices at Aesthetic Dental Practice, where he specializes in computer-guided aesthetic implantology. He is highly recognized for using minimally invasive dental lasers and advanced 3D surgical guides, which ensure maximum placement precision, faster healing, and minimal post-operative discomfort for patients seeking natural-looking tooth restorations.

10. Dr. Jatin Kalra

Dr. Jatin Kalra at Shine & Smile / Dr. Lal Dental Clinic specializes in Complex oral surgery and implants. Known for clinical excellence in their specialty area, this practitioner represents an important option in the Delhi NCR implant landscape.

Making Your Decision

Natural-Looking Smile Restoration represents a significant investment in your oral health and quality of life. The selection above provides diverse options across Delhi NCR, each with distinct advantages.

Consider scheduling consultations with practitioners whose approach aligns with your priorities—whether that's cutting-edge technology, affordability, specialized surgical skills, or patient communication style.

A qualified implantologist should be transparent about treatment timelines, costs, and realistic outcomes. They should also discuss alternatives to implants when appropriate.

"Confused about which advanced implant treatment or budget is right for your case? Get a FREE Expert Consultation today at Ganpati Dental Clinic, Rohini, Delhi.

Let us restore your permanent, beautiful smile with international standards."

Call / WhatsApp: +91-9811088269

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Author Bio

Dr Rohit Sharma is a dental implant practitioner at Ganpati Dental Clinic, Delhi NCR, with experience in full mouth rehabilitation and restorative dentistry. He regularly writes about dental implants, oral rehabilitation, and modern dental technologies.