ग्रामीण वित्तीय क्रांति: JSLPS और इंडियन बैंक मिलकर बनाएंगे देश का पहला CLF पेमेंट गेटवे


रांची: झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी एवं इंडियन बैंक के बीच आज क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLFs) के लिए अत्याधुनिक पेमेंट गेटवे एप्लीकेशन के विकास हेतु एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल ग्रामीण वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को डिजिटल, सुरक्षित एवं अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यह पहल देश में अपनी तरह की पहली है और झारखंड स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन पूरे देश में CLF स्तर पर इस प्रकार का पेमेंट गेटवे लागू करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है, जो इसे एक अभिनव एवं मॉडल पहल के रूप में स्थापित करता है।

यह MoU जेएसएलपीएस के मुख्य परिचालन पदाधिकारी, बिष्णु चरण परिदा एवं इंडियन बैंक के क्षेत्र महाप्रबंधक, महेंद्र बाजपेयी द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

इस साझेदारी के अंतर्गत इंडियन बैंक द्वारा विकसित पेमेंट गेटवे एप्लीकेशन के माध्यम से CLFs, VOs, SHGs, विक्रेताओं एवं कैडरों के बीच सुरक्षित एवं रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रणाली में मेकर–चेकर–अप्रूवर आधारित अनुमोदन प्रक्रिया, डिजिटल सिग्नेचर (DSC) एवं बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, रियल-टाइम ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग, MIS रिपोर्टिंग तथा PFMS, eFMS, LokOS एवं Swalekha जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, राज्य से लेकर CLF स्तर तक भूमिका-आधारित (Role-based) एक्सेस सुनिश्चित किया जाएगा।

इस प्रणाली को प्रारंभिक चरण में 6 CLFs में पायलट रूप में लागू किया जाएगा, जिसमें CLFs एवं VOs के बीच ऋण वितरण एवं भुगतान से संबंधित लेन-देन को शामिल किया जाएगा। पायलट के सफल क्रियान्वयन के पश्चात इसे विस्तारित करते हुए सभी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

इस अवसर पर JSLPS के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंडियन बैंक, कॉर्पोरेट कार्यालय, चेन्नई के महाप्रबंधक श्री अन्बु कामराज पी, अंचल प्रबंधक श्री राजेश शरण, श्री अमित जैन, कार्यक्रम प्रबंधक जेएसएलपीएस, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक, श्रीमती पूर्णिमा मुखर्जी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहल झारखंड में ग्रामीण वित्तीय तंत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति प्रदान करेगी।

विश्व पृथ्वी दिवस पर दशमेश पब्लिक स्कूल में हुआ पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
मेरठ। बहसूमा। रामराज स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल के प्रांगण में 22 अप्रैल 2026 को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक विस्तृत एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने किया, जिसमें समस्त शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रबंधक सरदार जसवंत सिंह सहोता ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने बच्चों को अपने घर और आसपास कम से कम पांच-पांच पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया।

प्रधानाचार्य आमिर खान ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भविष्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को “Reduce, Reuse और Recycle” के मंत्र को अपने जीवन में अपनाने की सलाह दी और पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर कोऑर्डिनेटर स्वाति अरोड़ा, मनजोत कौर, हर्षिका अरोड़ा, कोमल राणा, दीप्ति शर्मा, गुरजीत कौर, ज्योति, खुशबू, मोनिका, धनवीर सिंह, प्रशांत कुमार, प्रवेश कुमार, सुशील कुमार, सूरज जैन, विजय कुमार, निखिल आर्य, अशोक कुमार सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता का भाव उत्पन्न किया।
बोधगया के ज्ञान भारती रेजिडेंशियल कंपलेक्स विद्यालय में पढ़ाई के साथ तैराकी की नई शुरुआत, स्विमिंग पूल का विधिवत हुआ उद्घाटन

गया: बोधगया की पावन ज्ञानभूमि से ज्ञान भारती रेजिडेंशियल कंपलेक्स विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ खेल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ तैराकी का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी कड़ी में विद्यालय परिसर में बने नए स्विमिंग पूल का बुधवार को विधिवत उद्घाटन किया गया।

विद्यालय की निदेशक मधु प्रिया ने इस अवसर पर बताया कि उनके विद्यालय के छात्र पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। अब उद्देश्य यह है कि वे खेल, विशेषकर तैराकी में भी अपनी पहचान बनाएं और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेलों का संतुलन बेहद जरूरी है।इस उद्घाटन समारोह में राजेश पांडे और ऋतु डालमिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने में सहायक होते हैं। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि निजी स्कूलों में अक्सर खेल सुविधाओं की कमी देखी जाती है, खासकर तैराकी जैसी गतिविधियाँ बहुत कम उपलब्ध होती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए यह स्विमिंग पूल तैयार किया गया है, ताकि छात्र न केवल शारीरिक रूप से फिट रहें, बल्कि प्रतियोगी स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें। विद्यालय द्वारा बच्चों को पेशेवर प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई गई है, जिससे वे आने वाले वर्षों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले सकें। प्रबंधन को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में विद्यालय के छात्र तैराकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करेंगे।

MinersMe Cloud Mining Explained: How to Access Bitcoin Mining Without Hardware

In recent years, cryptocurrency adoption has grown rapidly across the world, with Bitcoin leading the conversation. Most individuals entering the crypto space are familiar with trading or long-term holding. However, there is another fundamental layer of this ecosystem that often goes unnoticed Bitcoin mining.Bitcoin mining is the process through which transactions are verified and added to the blockchain. It also plays a critical role in introducing new Bitcoin into circulation. This process is powered by complex computational systems that solve mathematical problems to secure the network.

Traditionally, mining required significant investment in high-performance hardware, access to continuous electricity, advanced cooling systems, and technical expertise. Setting up and maintaining such an environment made mining accessible primarily to large-scale operators and industrial players.

This is where cloud mining has transformed the landscape.

Cloud mining enables individuals to access mining infrastructure without owning or managing physical machines. Instead of building a setup from scratch, users can participate in mining operations through professionally managed systems hosted in large-scale data centers.

These data centers are powered by ASIC (Application-Specific Integrated Circuit) machines, which are specifically designed for efficient mining performance. Combined with optimized cooling systems and stable energy environments, these infrastructures ensure consistent and reliable operations.

Platforms like MinersMe are part of this evolving digital infrastructure ecosystem.

MinersMe focuses on providing access to real mining infrastructure through managed systems. Instead of dealing with hardware setup, maintenance, or operational complexity, users can explore participation through simplified models designed for accessibility and scalability.

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The approach is centered around:

• Access to real ASIC-powered systems

• Managed infrastructure environments

• Simplified participation models

• Scalable entry options

This reflects a broader shift in the industry from hardware ownership to infrastructure access.

Much like how cloud computing transformed traditional IT systems, cloud mining is changing how individuals engage with mining. It removes technical barriers and allows users to interact with complex systems through simplified access points.

However, it is important to understand that the cryptocurrency ecosystem is dynamic. Factors such as market conditions, network difficulty, and technological advancements continue to influence the mining landscape. This makes it essential for individuals to approach the space with awareness and proper research.

As digital infrastructure continues to evolve, platforms like MinersMe represent a growing trend toward making mining more structured, accessible, and scalable.

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Cloud mining is not just about convenience it is about redefining how individuals connect with the underlying infrastructure of the crypto ecosystem.

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Digital Abhishek Abhi focuses on data-driven strategies, ensuring that every campaign delivers maximum ROI and long-term visibility. His core strengths include search engine optimization (SEO), Google Business Profile optimization, website development, paid advertising, and brand building.

As a digital marketing expert, Abhishek Abhi believes in staying updated with the latest industry trends and Google algorithm updates to deliver modern and effective marketing solutions. His goal is to help businesses increase traffic, improve conversions, and build strong online authority.

Expertise Areas

Search Engine Optimization (SEO)

Google Ads & PPC Campaigns

Social Media Marketing

Website Development & Optimization

Google Business Profile Optimization

Lead Generation Strategy

Content Marketing & Branding

Digital Abhishek Abhi is dedicated to helping businesses grow digitally with innovative strategies and performance-focused marketing solutions.

महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

#womenreservationbill2026whyitfailedinlok_sabha

महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।

सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा 6 जनपदों में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के 09 विषयों—Asian Culture, Music Tabla, Physical Education, Urdu, English, Sociology, Chemistry, Education एवं Zoology—की लिखित पुनर्परीक्षा आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में प्रातः 09:30 बजे से सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो गई।

यह परीक्षा प्रदेश के 6 जनपदों—आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी—के कुल 48 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है। सभी केन्द्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

आयोग द्वारा स्थापित Integrated Control Command Room के माध्यम से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

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ग्रामीण वित्तीय क्रांति: JSLPS और इंडियन बैंक मिलकर बनाएंगे देश का पहला CLF पेमेंट गेटवे


रांची: झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी एवं इंडियन बैंक के बीच आज क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLFs) के लिए अत्याधुनिक पेमेंट गेटवे एप्लीकेशन के विकास हेतु एक गैर-वित्तीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पहल ग्रामीण वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को डिजिटल, सुरक्षित एवं अधिक जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि यह पहल देश में अपनी तरह की पहली है और झारखंड स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन पूरे देश में CLF स्तर पर इस प्रकार का पेमेंट गेटवे लागू करने वाला एकमात्र राज्य बन गया है, जो इसे एक अभिनव एवं मॉडल पहल के रूप में स्थापित करता है।

यह MoU जेएसएलपीएस के मुख्य परिचालन पदाधिकारी, बिष्णु चरण परिदा एवं इंडियन बैंक के क्षेत्र महाप्रबंधक, महेंद्र बाजपेयी द्वारा हस्ताक्षरित किया गया।

इस साझेदारी के अंतर्गत इंडियन बैंक द्वारा विकसित पेमेंट गेटवे एप्लीकेशन के माध्यम से CLFs, VOs, SHGs, विक्रेताओं एवं कैडरों के बीच सुरक्षित एवं रियल-टाइम डिजिटल लेन-देन सुनिश्चित किया जाएगा।

प्रणाली में मेकर–चेकर–अप्रूवर आधारित अनुमोदन प्रक्रिया, डिजिटल सिग्नेचर (DSC) एवं बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, रियल-टाइम ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग, MIS रिपोर्टिंग तथा PFMS, eFMS, LokOS एवं Swalekha जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकरण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, राज्य से लेकर CLF स्तर तक भूमिका-आधारित (Role-based) एक्सेस सुनिश्चित किया जाएगा।

इस प्रणाली को प्रारंभिक चरण में 6 CLFs में पायलट रूप में लागू किया जाएगा, जिसमें CLFs एवं VOs के बीच ऋण वितरण एवं भुगतान से संबंधित लेन-देन को शामिल किया जाएगा। पायलट के सफल क्रियान्वयन के पश्चात इसे विस्तारित करते हुए सभी प्रकार के वित्तीय लेन-देन को इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।

इस अवसर पर JSLPS के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंडियन बैंक, कॉर्पोरेट कार्यालय, चेन्नई के महाप्रबंधक श्री अन्बु कामराज पी, अंचल प्रबंधक श्री राजेश शरण, श्री अमित जैन, कार्यक्रम प्रबंधक जेएसएलपीएस, राज्य कार्यक्रम प्रबंधक, श्रीमती पूर्णिमा मुखर्जी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

यह पहल झारखंड में ग्रामीण वित्तीय तंत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ महिला स्वयं सहायता समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति प्रदान करेगी।

विश्व पृथ्वी दिवस पर दशमेश पब्लिक स्कूल में हुआ पौधारोपण, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
मेरठ। बहसूमा। रामराज स्थित दशमेश पब्लिक स्कूल के प्रांगण में 22 अप्रैल 2026 को विश्व पृथ्वी दिवस के अवसर पर एक विस्तृत एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रधानाचार्य आमिर खान ने किया, जिसमें समस्त शिक्षकगण और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विद्यालय की डायरेक्टर डॉ. सिम्मी सहोता एवं प्रबंधक सरदार जसवंत सिंह सहोता ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने बच्चों को अपने घर और आसपास कम से कम पांच-पांच पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया तथा पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया।

प्रधानाचार्य आमिर खान ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन भविष्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को “Reduce, Reuse और Recycle” के मंत्र को अपने जीवन में अपनाने की सलाह दी और पृथ्वी को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक रहने का संदेश दिया।

इस अवसर पर कोऑर्डिनेटर स्वाति अरोड़ा, मनजोत कौर, हर्षिका अरोड़ा, कोमल राणा, दीप्ति शर्मा, गुरजीत कौर, ज्योति, खुशबू, मोनिका, धनवीर सिंह, प्रशांत कुमार, प्रवेश कुमार, सुशील कुमार, सूरज जैन, विजय कुमार, निखिल आर्य, अशोक कुमार सहित समस्त स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता का भाव उत्पन्न किया।
बोधगया के ज्ञान भारती रेजिडेंशियल कंपलेक्स विद्यालय में पढ़ाई के साथ तैराकी की नई शुरुआत, स्विमिंग पूल का विधिवत हुआ उद्घाटन

गया: बोधगया की पावन ज्ञानभूमि से ज्ञान भारती रेजिडेंशियल कंपलेक्स विद्यालय ने शिक्षा के साथ-साथ खेल को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब इस विद्यालय में बच्चों को पढ़ाई के साथ तैराकी का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसी कड़ी में विद्यालय परिसर में बने नए स्विमिंग पूल का बुधवार को विधिवत उद्घाटन किया गया।

विद्यालय की निदेशक मधु प्रिया ने इस अवसर पर बताया कि उनके विद्यालय के छात्र पहले से ही शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। अब उद्देश्य यह है कि वे खेल, विशेषकर तैराकी में भी अपनी पहचान बनाएं और राष्ट्रीय स्तर पर विद्यालय का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पढ़ाई के साथ खेलों का संतुलन बेहद जरूरी है।इस उद्घाटन समारोह में राजेश पांडे और ऋतु डालमिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

सभी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने में सहायक होते हैं। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि निजी स्कूलों में अक्सर खेल सुविधाओं की कमी देखी जाती है, खासकर तैराकी जैसी गतिविधियाँ बहुत कम उपलब्ध होती हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए यह स्विमिंग पूल तैयार किया गया है, ताकि छात्र न केवल शारीरिक रूप से फिट रहें, बल्कि प्रतियोगी स्तर पर भी अपनी प्रतिभा दिखा सकें। विद्यालय द्वारा बच्चों को पेशेवर प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई गई है, जिससे वे आने वाले वर्षों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले सकें। प्रबंधन को उम्मीद है कि अगले दो वर्षों में विद्यालय के छात्र तैराकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल करेंगे।

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महिला आरक्षण से जुड़े बिलों का गिरना बीजेपी के लिए झटका है या 'मास्टरस्ट्रोक'?

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महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधन विधेयकों पर गुरुवार और शुक्रवार को लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। सरकार ने पूरी तरीके से विपक्ष का साथ पाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष ने एक न सुनी और अंत में सरकार बिल पर दो तिहाई वोट पाने में नाकामयाब रही और विधेयक लोकसभा में गिर गया।

बीजेपी के लिए झटका या मिलेगा राजनीतिक फायदा?

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। मोदी सरकार के लिए संसद में हाल के समय में यह बड़ा झटका माना जा रहा है, लेकिन कुछ जानकार यह भी कह रहे हैं कि सरकार विपक्ष को महिला आरक्षण विरोधी बताकर इसका राजनीतिक फायदा उठाएगी।

क्या विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है?

विश्लेषक मान रहे हैं कि विधेयक का गिरना सरकार के लिए झटका है। जानकारों का मानना है कि यह सरकार के लिए झटका है क्योंकि उन्हें दिख रहा था कि उनके पास संख्या नहीं है फिर भी चुनावों के बीच वो इसे लेकर आई क्योंकि वो इसके ज़रिए पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोट अधिक संख्या में हासिल करना चाहती थी। विधेयक का गिरना सरकार की साख के लिए तो झटका है। माना जा रहा है कि सरकार अपने मंसूबो में नाकाम हो गई है। विश्लेषक कई राज्यों में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर भी सवाल उठा रहे हैं। चुनाव के बीच में वो इसको सिर्फ़ इसलिए लाए थे जिससे कि चुनाव में कहा जा सके कि हम बंगाल की महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहते थे लेकिन विपक्ष ने हमें करने नहीं दिया।

सरकार ने चला मास्टरस्ट्रोक?

वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि सरकार को पहले से ही मालूम था कि लोकसभा में बिल का पास कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, बावजूद इसक केंद्र सरकार ने इसको सदन की पटल पर रखा और बिल के साथ आगे बढ़े। हालांकि, बिल गिर गया। पश्चिम बंगाल चुनाव में इसका फायदा चाहें, जिसे भी मिले, लेकिब बीजेपी संदेश पहुंचाने में कामयाब हो गई। इसके साथ ही तमिलनाडु में परिसीमन पर डीएमके का पलड़ा भले भारी हो, लेकिन महिलाओं के मामले में बीजेपी ने कहीं न कहीं अपना पक्ष मजबूत करने का काम किया है। इस सब पहलुओं को समझें, तो पता चलता है कि बीजेपी ने हार में भी एक बड़ी जीत खोज ली है। भाजपा अब खुल कर कह सकेगी कि हमने महिला हित में अपने प्रयास में कोई कोताही नहीं की। विपक्ष ने ही साथ नहीं दिया।

भाजपा महिला बिल को भुनाएगी

करीब 4 दशक पहले से ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की चर्चा चल रही है। किसी को अपने हित और हक की बात समझने के लिए इतना वक्त कम नहीं होता। बिल पेश होने के पहले से ही भाजपा यह संदेश गांव-गांव तक पहुंचाने के अभियान में लग गई है। अब तो वह महिलाओं को यह कह सकेगी कि उसने तो पूरी कोशिश की, पर विपक्ष ने ही पानी फेर दिया। जहां 1.5 करोड़ के अंतर से एनडीए की सरकार बन गई वहां 20-21 करोड़ कामकाजी महिलाओं में 10 प्रतिशत को भी भाजपा ने अपने प्रभाव में ले लिया तो विपक्ष की परेशानी बढ़ सकती है।

लोकसभा में ज्यादा वोट पाकर भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिला, जानें अब आगे क्या?

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महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित नहीं हो सका। सदन में 'संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026', पर हुए मत विभाजन के दौरान इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। मतदान के समय सदन में कुल 528 सांसद मौजूद थे। ऐसे में विधेयक पारित कराने के लिए सत्ता पक्ष को 352 वोटों की जरूरत थी। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। जिसके कारण अधिक वोट मिलने के बाद भी बिल फेल हो गया।

पिछले 12 सालों में पहली बार गिरा कोई संशोधन विधेयक

पिछले 12 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार का कोई संविधान संशोधन बिल सदन में गिरा है। देश की आधी आबादी को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए शुक्रवार शाम लोकसभा में वोटिंग हुई। सरकार ने इस बिल को पारित कराने के लिए हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन यह बिल पारित कराने के लिए जरूरी आंकड़ा, 352 से 54 वोट पीछे रह गई। कुल मौजूद सदस्य 352 में बिल के खिलाफ 230 वोट पड़े और कहानी यहीं पर समाप्त हो गई।

विपक्ष ने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया-रिजिजू

किरेन रिजिजू ने महिला आरक्षण विधेयक के सदन में गिरने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मौका गंवा दिया गया है। रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे।

बाकी दो विधेयकों पर क्यों नहीं हुई वोटिंग

सरकार ने इस विधेयक के साथ 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को भी सदन में चर्चा और पारित कराने के लिए रखा था, लेकिन उन्हें भी आगे नहीं बढ़ाया जा सका। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने के बाद अब इससे संबंधित दोनों विधेयकों 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026' को आगे नहीं बढ़ा सकते।

बिल में क्या था प्रस्ताव?

संविधान संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रस्ताव था। साथ ही 2029 के आम चुनावों से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की योजना शामिल थी। इसके अलावा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए सीटें बढ़ाने का प्रावधान रखा गया था, ताकि आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके।

विपक्ष क्यों है नाराज?

इस पूरे मामले में एक और बड़ा मुद्दा परिसीमन यानी डिलीमिटेशन को लेकर भी सामने आया। सरकार चाहती थी कि लोकसभा की सीटों का पुनर्निर्धारण करके महिला आरक्षण को लागू किया जाए, जबकि विपक्ष ने इसका विरोध किया। विपक्ष का तर्क था कि परिसीमन के जरिए कुछ राज्यों को फायदा और कुछ को नुकसान हो सकता है, इसलिए इसे तुरंत लागू करना उचित नहीं होगा। इसी मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया और बिल को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल सका।

सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) की पुनर्परीक्षा 6 जनपदों में शांतिपूर्ण ढंग से शुरू

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित सहायक आचार्य (विज्ञापन संख्या-51) के 09 विषयों—Asian Culture, Music Tabla, Physical Education, Urdu, English, Sociology, Chemistry, Education एवं Zoology—की लिखित पुनर्परीक्षा आज दिनांक 18 अप्रैल 2026 को प्रथम पाली में प्रातः 09:30 बजे से सफलतापूर्वक प्रारम्भ हो गई।

यह परीक्षा प्रदेश के 6 जनपदों—आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर एवं वाराणसी—के कुल 48 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है। सभी केन्द्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित हो रही है।

आयोग द्वारा स्थापित Integrated Control Command Room के माध्यम से सभी परीक्षा केन्द्रों की सतत निगरानी की जा रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

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