तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर, बदल गया दशकों का इतिहास, विजय की आंधी में स्टालिन उड़े

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तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती जारी है। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूझानों में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) की आंधी दिख रही है। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले 49 वर्षों से केवल दो ही द्रविड़ पार्टियों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दबदबा रहा है। लेकिन दशकों बाद ऐसी आंधी दिख रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।

टीवीके इतिहास रचने की ओर बढ़ रही

सिनेमाई पर्दे के हीरो से असल जिंदगी के राजनेता बने विजय ने 49 साल की मजबूत द्रविड़ सत्ता को हिला कर रख दिया है। ताजा रुझानों के विजय की पार्टी टीवीके सबसे आगे चल रही है और इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है। अब तक मिले रुझानों में टीवीके करीब 109 सीटों पर आगे है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि अगर यही रुझान जारी रहे, तो विजय की पार्टी आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है।

अपने गढ़ में पिछड़े स्टालिन

एक्टर विजय की लहर है में एमके स्टालिन झुलस गए हैं। कोलाथुर विधानसभा सीट से एमके स्टालिन खुद पीछे चल रहे हैं। कोलाथुर सीट एमके स्टालिन का गढ़ रही है, जिसे वह 2011 से लगातार जीतते आए हैं। 2021 में उन्होंने यहाँ 70 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

50 सीटों पर सिमटती दिख रही डीएमके

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित होगा और विजय की पार्टी महज दो साल में इतिहास रच सकती है। ऐसे में डीएमके दफ्तर से लेकर डीएमके नेताओं तक के घर पर सन्नाटा पसरा है। 2021 में 133 सीटें जीतने वाली पार्टी 2026 में 50 सीटों पर सिमटती दिख रही है। ऐसे में हर तरफ सन्नाटा पसरा है।

बृजभूषण के शोषण की मैं भी विक्टिम”, विनेश फोगाट ने लगाया गंभीर आरोप, जारी किया भावुक वीडियो

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भारतीय कुश्ती में एख बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। ओलिंपियन विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। विनेश पोगाट ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली छह महिला पहलवानों में से एक हैं।

पिछले डेढ़ साल से मैट से दूर थी-विनेश

विनेश ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए कहा, 'जैसा की सभी को पता है कि पिछले डेढ़ साल से मैं रेस्लिंग मैट से काफी दूर थी। लेकिन अब कुछ महीनों से मैं रेस्लिंग की तैयारियां कर रह रही हूं। बड़ी मेहनत और ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं। जैसे मैंने पहले देश के लिए मेडल जीते, परमात्मा के आशीर्वाद से, आप सबके सहयोग से फिर से रेस्लिंग मैट पर जाऊं और देश के लिए ढेर सारे मेडल जीतूं और देश के तिरंगे का मान बनाए रखूं।'

मैं भी बृजभूषण के शोषण पीड़ित-विनेश

विनेश ने आगे कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि मैं अपना 100% दे पाऊंगी। एक लड़की के लिए ये काफी मुश्किल होगा।' उन्होंने कहा, आज कुछ मजबूरियों के चलते मैं कहना चाहती हूं कि बृजभूषण शरण के खिलाफ कंप्लेंट करने वाले उन 6 विक्टिम में मैं भी शामिल हूं। मेरी गवाही भी कोर्ट में चल रही है।'

पहचान उजागर करने की वजह बताई

विनेश फोगाट ने कहा कि 'वह पहले इस मामले में अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहती थीं, क्योंकि मामला अभी अदालत में लंबित है।' उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन कहती है कि किसी भी पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि यह उसकी गरिमा और सम्मान से जुड़ा मामला है। लेकिन आज कुछ परिस्थितियों के कारण मैं आप सबको कुछ बताना चाहती हूं।' विनेश फोगाट ने खुलासा किया कि उनकी पहचान उजागर करने की सबसे बड़ी वजह WFI का गोंडा, उत्तर प्रदेश में रैंकिंग टूर्नामेंट और ट्रायल कराने का फैसला है। दरअसल, गोंडा में 'सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट' होने जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रतियोगिता बृजभूषण शरण सिंह के निजी कॉलेज में कराई जा रही है, जिससे निष्पक्ष मुकाबले की उम्मीद करना मुश्किल है।

सरकार और खेल मंत्रालय पर भी साधा निशाना

विनेश ने कहा, कौन रेफरी, किसके मैच में जाएगा। कौन रेफरी कितने पॉइंट देगा, कौन मैच चेयरमैन कहां पर बैठेगा, किसको जितवाना है, किसको हरवाना है। ये सब बृजभूषण और उसके लोगों द्वारा कंट्रोल किया जाएगा। सरकार और हमारा खेल मंत्रालय मूक दर्शक बनकर इस चीज को देख रहा है। कोई खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा, मानो बृजभूषण को फ्री हैंड दिया हुआ है कि तुम जो मर्जी करो। चाहे तुम महिला पहलवानों के साथ कुछ करो या तुम कुश्ती जगत के साथ कुछ भी करो। हम तुम्हारे साथ में खड़े हैं।

3 साल पहले बृजभूषण पर लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप

बता दें कि करीब 3 साल पहले विनेश ने बृजभूषण पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विनेश फोगाट ने रोते हुए कहा था- बृजभूषण शरण सिंह और कोच नेशनल कैंप में महिला रेसलर्स का यौन उत्पीड़न करते हैं। इसे लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ धरना भी दिया था

दिल्ली में बिल्डिंग में भड़की आग में 9 जिंदगियां खाक, एसी ब्लास्ट से चार मंजिला इमारत में भीषण अग्निकांड

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दिल्ली के शाहदरा स्थित विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के एक रिहायशी इमारत में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, दमकल की टीम ने करीब 15 लोगों को बचाया भी है।

ज्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे

यह घटना तड़के करीब 3:30 बजे हुई, जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आग की लपटें तुरंत फैल गईं और तीसरी मंजिल तक पहुंच गईं। जब आग लगी, तो कई निवासियों ने बचने की कोशिश की। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए छत की ओर भागे, लेकिन दुर्भाग्यवश, छत का दरवाजा बंद होने के कारण वे वहीं फंस गए और सीढ़ियों पर ही झुलसकर उनकी मौत हो गई। जिस मंजिल पर आग लगी थी, वहां मौजूद चार लोग भी इस अग्निकांड का शिकार हो गए।

एसी में धमाके ककी वजह से लगी आग

विवेक विहार फेज-1 में चार मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना तड़के करीब तीन बजकर 48 मिनट पर मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंचे। तुरंत ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया। कुल 14 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और लोगों को बचाने का काम शुरू किया। जानकारी के मुताबिक हादसे का कारण एसी में धमाका होना है।

15 लोगों को बचाया गया

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि इस आग की घटना में 9 लोगों की मौत हो गई है। आग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर बने फ्लैटों में लगी थी। बचाव और आग बुझाने के काम के दौरान, बिल्डिंग से 10-15 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल ले जाया गया।

सीएम रेखा गुप्ता ने जताया शोक

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हादसे में 9 लोगों की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘विवेक विहार की एक इमारत में लगी आग की घटना अत्यंत दुखद है। इस हादसे में 9 लोगों की मृत्यु से मन व्यथित है। हादसे में घायल हुए लोगों का नजदीकी अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें यह कठिन समय सहने की शक्ति प्रदान करें।

RXO and the Rise of the Truth Economy: A New Foundation for the Digital Age

In an era defined by artificial intelligence and exponential data creation, a new paradigm is beginning to take shape—one that places truth at the center of the digital economy. At the forefront of this shift is RXO, a protocol that is not merely building infrastructure, but advancing what it calls a Truth Economy.

The premise behind RXO is both simple and profound: while data has become abundant, verified truth remains scarce. As machines increasingly generate content at scale, the ability to distinguish authenticity from synthesis is rapidly eroding. RXO identifies this not as a marginal issue, but as a systemic failure—one that demands a new architectural response.

This is where the concept of the Truth Economy becomes critical.

Under this model, RXO transforms human verification into a measurable and incentivized activity. Instead of treating truth as an abstract ideal, RXO positions it as an economic asset—something that can be validated, recorded, and rewarded. In the Truth Economy, accuracy is no longer passive; it becomes productive.

At the center of RXO is Torobekova Aizhamal Torobekovna, whose vision reflects a clear departure from conventional Web3 thinking. Rather than building within existing categories, she has focused on a more foundational question: how can trust be sustained in a world increasingly dominated by artificial systems?

“Information is no longer the problem—authenticity is,” she explains. “RXO exists to ensure that truth remains verifiable, even at scale.”

Through its token model, RXO aligns economic incentives with informational integrity. Organizations that require verified data—particularly in artificial intelligence—use RXO tokens to access the network. At the same time, participants contribute to the Truth Economy by validating information and are rewarded for accuracy.

This creates a direct relationship between demand for truth and supply of human verification.

The implications are significant. In AI development, RXO acts as a grounding layer, enabling systems to integrate high-quality, human-verified input. Without such mechanisms, AI risks becoming increasingly detached from real-world context. Within the Truth Economy, RXO ensures that machine intelligence remains anchored to human judgment.

Equally important is the upcoming RXO blockchain, designed specifically for what the platform defines as cognitive settlement. Unlike traditional networks that process financial transactions, the RXO blockchain records verification itself—creating an immutable ledger of truth.

This transforms RXO from a protocol into infrastructure.

“The future of digital systems will depend on verification,” Torobekovna notes. “The Truth Economy is not optional—it is inevitable.”

Participation within RXO reflects this shift. Individuals are no longer passive consumers of information; they become active contributors to the Truth Economy, earning through verification, staking, and network growth. In doing so, RXO redefines human judgment as a valuable digital resource.

As the digital landscape continues to evolve, RXO stands at the intersection of artificial intelligence and decentralized systems, advancing a model where truth is not assumed, but systematically proven.

In the emerging Truth Economy, RXO is not just a participant—it is the foundation. For more details you can visit https://www.rxoworld.org/

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मार्केट बंद होने में दो कानून नहीं चलेगा, पुलिस को सख्‍ती से अंकुश लगाना आवश्‍यक : आलोक शर्मा


सांसद ने कहा - भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

भोपाल। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल में मार्केट बंद होने के दो कानून प्रचलित है, जिस पर पुलिस को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने कहा पुराने भोपाल शहर में रातभर दुकानें खुली रहती है, जहां पर आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने रात सोने के लिए बनाई है। घर पर अब्बू, अम्मी इंतजार करते हैं कि बेटा आएगा और हमें दवाई देगा लेकिन बेटा तो रातभर बिरयानी की दुकान और मार्केट में ही बिताता है। ये चिंता आज कई परिवारों की है। युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। शनिवार को सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का एक पत्र सौंपा है जिसमें भोपाल के सभी मार्केट एक समय पर बंद करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे सांसद शर्मा पूर्व में भी कई बार ये मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पुलिस की सख्ती न होने के कारण आज भी व्यवस्था वैसी ही है। सांसद शर्मा ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान बताया कि अभी भोपाल शहर में दो कानून प्रचलित हैं, न्यू मार्केट, एमपी नगर, संत हिरदाराम नगर, बीएचईएल बरखेड़ा, इंद्रपुरी सोनागिरि, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, लखेरापुरा, सराफा चौक आदि रात में 10 बजे तक बंद हो जाते हैं। जबकि पुराने भोपाल शहर के मार्केट्स काजीकैंप, लक्ष्मी टॉकीज, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, रॉयल मार्केट जीपीओ, इमामी गेट, राजू टी-स्टाल, जिंसी-जहांगीराबाद, सब्बन चौराहा, इतवारा, बुधवारा में दुकानें रातभर खुली रहती हैं जिससे आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है और शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। सांसद शर्मा को पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने शहर के सभी मार्केट्स एक समय पर बंद कराने की कार्यवाही सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।

* भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। शहर में कहीं भी डेवलपमेंट के काम करने जाएं तो खड़े हो जाते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। महापौर रहते जब हम पॉलिटेक्निक से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड बनाने गए तो रोड़ा अटकाया। बोले कि यह वक्फ की जमीन है जबकि आज वहां स्मार्ट रोड बन जाने के बाद मुसलमान भी उस रोड पर निकलता है, हिंदू भी उस पर रोड पर निकलता है, सभी वर्ग के लोग उस स्मार्ट रोड का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार श्यामला हिल्स पर मानस भवन के पीछे की झुग्गियां का हटाने का मामला भी है। वहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को आवास का पैसा जमा किया गया है। किसी को बेघर नहीं किया जाएगा लेकिन शहर के अंदर सरकारी जमीन पर किसी को भी अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वक्फ के नाम पर किसी को भी अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

6 मई को भव्य होगा रामनिवास रावत का कार्यभार ग्रहण समारोह

- वन विकास निगम के अध्यक्ष पद की संभालेंगे जिम्मेदारी, समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

भोपाल। आगामी 6 मई 2026 को प्रातः 10 बजे पूर्व मंत्री रामनिवास रावत मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर वन भवन में आयोजित होने वाले समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

समारोह की रूपरेखा तय करने के लिए मप्र मीना समाज सेवा संगठन की बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री एड. संतोष मीना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ जनों ने व्यापक चर्चा करते हुए कार्यक्रम को यादगार बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष लीलेन्द्र सिंह मारण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लखन सिंह मीना सहित समाजसेवी विमल सिंह मारण, ब्रजेश मीणा, हरभजन मीना, रामसेवक मीना, रामजीवन मीना, सुदेश मारण, जीवन मारण, जगदीश मारण, पर्वत सिंह मारण, सत्यम मीना और भैयालाल मारण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रामनिवास रावत के कार्यभार ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

पीवीयूएनएल, पतरातू में डीएवी पब्लिक स्कूल का भव्य उद्घाटन

पीवीयूएनएल टाउनशिप, पतरातू में डीएवी पब्लिक स्कूल का शुभारंभ माननीय श्री अशोक कुमार सहगल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), पीवीयूएनएल के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर श्रीमती रेनू सहगल, अध्यक्ष, स्वर्णरेखा महिला समिति, श्री अनुपम मुखर्जी, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना), श्री जे. सी. पात्रा, महाप्रबंधक (O&C), श्री मनीष खेतरपाल, महाप्रबंधक (O&M), श्री जियाउर रहमान, प्रमुख (मानव संसाधन) सहित झारखंड के पांचों जोन के एरिया रीजनल अधिकारी, NEAP, EWA, SC & ST एसोसिएशन एवं SMS के कार्यकारी सदस्यगण भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न डीएवी स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

नवस्थापित डीएवी पब्लिक स्कूल में प्रारंभिक चरण में नर्सरी से कक्षा पाँचवीं तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के महत्व पर बल दिया तथा डीएवी प्रबंधन को विद्यालय में उच्चतम स्तर की शिक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी।

पीवीयूएनएल द्वारा स्थापित यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों को उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा।

Digital Abhishek Abhi | Digital Marketing Expert

More Than Twenty Year Experience in Digital Marketing, SEO, SMO, PPC & Website Maintenance.

Specialties: Leading the overall digital marketing function, including digital marketing strategy & optimization, campaign strategy & optimization, conversion optimization, ROI management, SEO optimization, PPC campaign management & optimization, social media marketing, creative strategy, content marketing, brand strategy, and digital plan strategy.

For More Details: https://www.linkedin.com/in/digitalabhishekabhi/

तमिलनाडु चुनाव में बड़ा उलटफेर, बदल गया दशकों का इतिहास, विजय की आंधी में स्टालिन उड़े

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तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती जारी है। तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रूझानों में अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी टीवीके (तमिलगा वेत्री कड़गम) की आंधी दिख रही है। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले 49 वर्षों से केवल दो ही द्रविड़ पार्टियों, द्रमुक और अन्नाद्रमुक का दबदबा रहा है। लेकिन दशकों बाद ऐसी आंधी दिख रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है।

टीवीके इतिहास रचने की ओर बढ़ रही

सिनेमाई पर्दे के हीरो से असल जिंदगी के राजनेता बने विजय ने 49 साल की मजबूत द्रविड़ सत्ता को हिला कर रख दिया है। ताजा रुझानों के विजय की पार्टी टीवीके सबसे आगे चल रही है और इतिहास रचने की ओर बढ़ रही है। अब तक मिले रुझानों में टीवीके करीब 109 सीटों पर आगे है। तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का जादुई आंकड़ा चाहिए। ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि अगर यही रुझान जारी रहे, तो विजय की पार्टी आसानी से बहुमत हासिल कर सकती है।

अपने गढ़ में पिछड़े स्टालिन

एक्टर विजय की लहर है में एमके स्टालिन झुलस गए हैं। कोलाथुर विधानसभा सीट से एमके स्टालिन खुद पीछे चल रहे हैं। कोलाथुर सीट एमके स्टालिन का गढ़ रही है, जिसे वह 2011 से लगातार जीतते आए हैं। 2021 में उन्होंने यहाँ 70 हजार से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है।

50 सीटों पर सिमटती दिख रही डीएमके

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो यह तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित होगा और विजय की पार्टी महज दो साल में इतिहास रच सकती है। ऐसे में डीएमके दफ्तर से लेकर डीएमके नेताओं तक के घर पर सन्नाटा पसरा है। 2021 में 133 सीटें जीतने वाली पार्टी 2026 में 50 सीटों पर सिमटती दिख रही है। ऐसे में हर तरफ सन्नाटा पसरा है।

बृजभूषण के शोषण की मैं भी विक्टिम”, विनेश फोगाट ने लगाया गंभीर आरोप, जारी किया भावुक वीडियो

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भारतीय कुश्ती में एख बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। ओलिंपियन विनेश फोगाट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। विनेश पोगाट ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा है कि वह भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाली छह महिला पहलवानों में से एक हैं।

पिछले डेढ़ साल से मैट से दूर थी-विनेश

विनेश ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो शेयर करते हुए कहा, 'जैसा की सभी को पता है कि पिछले डेढ़ साल से मैं रेस्लिंग मैट से काफी दूर थी। लेकिन अब कुछ महीनों से मैं रेस्लिंग की तैयारियां कर रह रही हूं। बड़ी मेहनत और ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं। जैसे मैंने पहले देश के लिए मेडल जीते, परमात्मा के आशीर्वाद से, आप सबके सहयोग से फिर से रेस्लिंग मैट पर जाऊं और देश के लिए ढेर सारे मेडल जीतूं और देश के तिरंगे का मान बनाए रखूं।'

मैं भी बृजभूषण के शोषण पीड़ित-विनेश

विनेश ने आगे कहा कि, 'मुझे नहीं लगता कि मैं अपना 100% दे पाऊंगी। एक लड़की के लिए ये काफी मुश्किल होगा।' उन्होंने कहा, आज कुछ मजबूरियों के चलते मैं कहना चाहती हूं कि बृजभूषण शरण के खिलाफ कंप्लेंट करने वाले उन 6 विक्टिम में मैं भी शामिल हूं। मेरी गवाही भी कोर्ट में चल रही है।'

पहचान उजागर करने की वजह बताई

विनेश फोगाट ने कहा कि 'वह पहले इस मामले में अपनी पहचान सामने नहीं लाना चाहती थीं, क्योंकि मामला अभी अदालत में लंबित है।' उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन कहती है कि किसी भी पीड़िता की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि यह उसकी गरिमा और सम्मान से जुड़ा मामला है। लेकिन आज कुछ परिस्थितियों के कारण मैं आप सबको कुछ बताना चाहती हूं।' विनेश फोगाट ने खुलासा किया कि उनकी पहचान उजागर करने की सबसे बड़ी वजह WFI का गोंडा, उत्तर प्रदेश में रैंकिंग टूर्नामेंट और ट्रायल कराने का फैसला है। दरअसल, गोंडा में 'सीनियर ओपन रैंकिंग कुश्ती टूर्नामेंट' होने जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रतियोगिता बृजभूषण शरण सिंह के निजी कॉलेज में कराई जा रही है, जिससे निष्पक्ष मुकाबले की उम्मीद करना मुश्किल है।

सरकार और खेल मंत्रालय पर भी साधा निशाना

विनेश ने कहा, कौन रेफरी, किसके मैच में जाएगा। कौन रेफरी कितने पॉइंट देगा, कौन मैच चेयरमैन कहां पर बैठेगा, किसको जितवाना है, किसको हरवाना है। ये सब बृजभूषण और उसके लोगों द्वारा कंट्रोल किया जाएगा। सरकार और हमारा खेल मंत्रालय मूक दर्शक बनकर इस चीज को देख रहा है। कोई खिलाड़ियों की मदद के लिए आगे नहीं आ रहा, मानो बृजभूषण को फ्री हैंड दिया हुआ है कि तुम जो मर्जी करो। चाहे तुम महिला पहलवानों के साथ कुछ करो या तुम कुश्ती जगत के साथ कुछ भी करो। हम तुम्हारे साथ में खड़े हैं।

3 साल पहले बृजभूषण पर लगाया था यौन उत्पीड़न का आरोप

बता दें कि करीब 3 साल पहले विनेश ने बृजभूषण पर महिला खिलाड़ियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। 18 जनवरी 2023 को रेसलर विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पूनिया ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देकर बृजभूषण पर महिला रेसलर्स के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। विनेश फोगाट ने रोते हुए कहा था- बृजभूषण शरण सिंह और कोच नेशनल कैंप में महिला रेसलर्स का यौन उत्पीड़न करते हैं। इसे लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ धरना भी दिया था

दिल्ली में बिल्डिंग में भड़की आग में 9 जिंदगियां खाक, एसी ब्लास्ट से चार मंजिला इमारत में भीषण अग्निकांड

#majortragedyindelhiacblastinvivekvihar

दिल्ली के शाहदरा स्थित विवेक विहार इलाके में रविवार तड़के एक रिहायशी इमारत में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। इस हादसे में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई। हालांकि, दमकल की टीम ने करीब 15 लोगों को बचाया भी है।

ज्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे

यह घटना तड़के करीब 3:30 बजे हुई, जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आग की लपटें तुरंत फैल गईं और तीसरी मंजिल तक पहुंच गईं। जब आग लगी, तो कई निवासियों ने बचने की कोशिश की। कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए छत की ओर भागे, लेकिन दुर्भाग्यवश, छत का दरवाजा बंद होने के कारण वे वहीं फंस गए और सीढ़ियों पर ही झुलसकर उनकी मौत हो गई। जिस मंजिल पर आग लगी थी, वहां मौजूद चार लोग भी इस अग्निकांड का शिकार हो गए।

एसी में धमाके ककी वजह से लगी आग

विवेक विहार फेज-1 में चार मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना तड़के करीब तीन बजकर 48 मिनट पर मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंचे। तुरंत ही बड़े पैमाने पर बचाव अभियान शुरू किया गया। कुल 14 फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और लोगों को बचाने का काम शुरू किया। जानकारी के मुताबिक हादसे का कारण एसी में धमाका होना है।

15 लोगों को बचाया गया

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में पता चला है कि इस आग की घटना में 9 लोगों की मौत हो गई है। आग दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर बने फ्लैटों में लगी थी। बचाव और आग बुझाने के काम के दौरान, बिल्डिंग से 10-15 लोगों को बचाया गया, जिनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आईं, जिन्हें इलाज के लिए गुरु तेग बहादुर हॉस्पिटल ले जाया गया।

सीएम रेखा गुप्ता ने जताया शोक

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हादसे में 9 लोगों की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ हर परिस्थिति में मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘विवेक विहार की एक इमारत में लगी आग की घटना अत्यंत दुखद है। इस हादसे में 9 लोगों की मृत्यु से मन व्यथित है। हादसे में घायल हुए लोगों का नजदीकी अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करती हूं। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें यह कठिन समय सहने की शक्ति प्रदान करें।

RXO and the Rise of the Truth Economy: A New Foundation for the Digital Age

In an era defined by artificial intelligence and exponential data creation, a new paradigm is beginning to take shape—one that places truth at the center of the digital economy. At the forefront of this shift is RXO, a protocol that is not merely building infrastructure, but advancing what it calls a Truth Economy.

The premise behind RXO is both simple and profound: while data has become abundant, verified truth remains scarce. As machines increasingly generate content at scale, the ability to distinguish authenticity from synthesis is rapidly eroding. RXO identifies this not as a marginal issue, but as a systemic failure—one that demands a new architectural response.

This is where the concept of the Truth Economy becomes critical.

Under this model, RXO transforms human verification into a measurable and incentivized activity. Instead of treating truth as an abstract ideal, RXO positions it as an economic asset—something that can be validated, recorded, and rewarded. In the Truth Economy, accuracy is no longer passive; it becomes productive.

At the center of RXO is Torobekova Aizhamal Torobekovna, whose vision reflects a clear departure from conventional Web3 thinking. Rather than building within existing categories, she has focused on a more foundational question: how can trust be sustained in a world increasingly dominated by artificial systems?

“Information is no longer the problem—authenticity is,” she explains. “RXO exists to ensure that truth remains verifiable, even at scale.”

Through its token model, RXO aligns economic incentives with informational integrity. Organizations that require verified data—particularly in artificial intelligence—use RXO tokens to access the network. At the same time, participants contribute to the Truth Economy by validating information and are rewarded for accuracy.

This creates a direct relationship between demand for truth and supply of human verification.

The implications are significant. In AI development, RXO acts as a grounding layer, enabling systems to integrate high-quality, human-verified input. Without such mechanisms, AI risks becoming increasingly detached from real-world context. Within the Truth Economy, RXO ensures that machine intelligence remains anchored to human judgment.

Equally important is the upcoming RXO blockchain, designed specifically for what the platform defines as cognitive settlement. Unlike traditional networks that process financial transactions, the RXO blockchain records verification itself—creating an immutable ledger of truth.

This transforms RXO from a protocol into infrastructure.

“The future of digital systems will depend on verification,” Torobekovna notes. “The Truth Economy is not optional—it is inevitable.”

Participation within RXO reflects this shift. Individuals are no longer passive consumers of information; they become active contributors to the Truth Economy, earning through verification, staking, and network growth. In doing so, RXO redefines human judgment as a valuable digital resource.

As the digital landscape continues to evolve, RXO stands at the intersection of artificial intelligence and decentralized systems, advancing a model where truth is not assumed, but systematically proven.

In the emerging Truth Economy, RXO is not just a participant—it is the foundation. For more details you can visit https://www.rxoworld.org/

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मार्केट बंद होने में दो कानून नहीं चलेगा, पुलिस को सख्‍ती से अंकुश लगाना आवश्‍यक : आलोक शर्मा


सांसद ने कहा - भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

सांसद आलोक शर्मा ने पुलिस आयुक्त से की मुलाकात

भोपाल। सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल में मार्केट बंद होने के दो कानून प्रचलित है, जिस पर पुलिस को सख्ती से अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने कहा पुराने भोपाल शहर में रातभर दुकानें खुली रहती है, जहां पर आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर ने रात सोने के लिए बनाई है। घर पर अब्बू, अम्मी इंतजार करते हैं कि बेटा आएगा और हमें दवाई देगा लेकिन बेटा तो रातभर बिरयानी की दुकान और मार्केट में ही बिताता है। ये चिंता आज कई परिवारों की है। युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। शनिवार को सांसद आलोक शर्मा ने भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस आशय का एक पत्र सौंपा है जिसमें भोपाल के सभी मार्केट एक समय पर बंद करने का आग्रह किया है। ज्ञात रहे सांसद शर्मा पूर्व में भी कई बार ये मुद्दा उठाते रहे हैं लेकिन पुलिस की सख्ती न होने के कारण आज भी व्यवस्था वैसी ही है। सांसद शर्मा ने पुलिस आयुक्त से मुलाकात के दौरान बताया कि अभी भोपाल शहर में दो कानून प्रचलित हैं, न्यू मार्केट, एमपी नगर, संत हिरदाराम नगर, बीएचईएल बरखेड़ा, इंद्रपुरी सोनागिरि, 6 नंबर मार्केट, 10 नंबर मार्केट, लखेरापुरा, सराफा चौक आदि रात में 10 बजे तक बंद हो जाते हैं। जबकि पुराने भोपाल शहर के मार्केट्स काजीकैंप, लक्ष्मी टॉकीज, बसस्टैंड, रेलवे स्टेशन, रॉयल मार्केट जीपीओ, इमामी गेट, राजू टी-स्टाल, जिंसी-जहांगीराबाद, सब्बन चौराहा, इतवारा, बुधवारा में दुकानें रातभर खुली रहती हैं जिससे आपराधिक गतिविधियों को बल मिलता है और शहर की कानून व्यवस्था बिगड़ती है। सांसद शर्मा को पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने शहर के सभी मार्केट्स एक समय पर बंद कराने की कार्यवाही सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया है।

* भोपाल वक्फ की जागीर नहीं

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल वक्फ की जागीर नहीं है। शहर में कहीं भी डेवलपमेंट के काम करने जाएं तो खड़े हो जाते हैं कि यह वक्फ की जमीन है। महापौर रहते जब हम पॉलिटेक्निक से भारत माता चौराहे तक स्मार्ट रोड बनाने गए तो रोड़ा अटकाया। बोले कि यह वक्फ की जमीन है जबकि आज वहां स्मार्ट रोड बन जाने के बाद मुसलमान भी उस रोड पर निकलता है, हिंदू भी उस पर रोड पर निकलता है, सभी वर्ग के लोग उस स्मार्ट रोड का उपयोग करते हैं। इसी प्रकार श्यामला हिल्स पर मानस भवन के पीछे की झुग्गियां का हटाने का मामला भी है। वहां पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सभी को आवास का पैसा जमा किया गया है। किसी को बेघर नहीं किया जाएगा लेकिन शहर के अंदर सरकारी जमीन पर किसी को भी अतिक्रमण करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वक्फ के नाम पर किसी को भी अवैध कब्जा नहीं करने दिया जाएगा।

6 मई को भव्य होगा रामनिवास रावत का कार्यभार ग्रहण समारोह

- वन विकास निगम के अध्यक्ष पद की संभालेंगे जिम्मेदारी, समारोह को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी तेज

भोपाल। आगामी 6 मई 2026 को प्रातः 10 बजे पूर्व मंत्री रामनिवास रावत मध्यप्रदेश वन विकास निगम के अध्यक्ष पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस अवसर पर वन भवन में आयोजित होने वाले समारोह को भव्य और ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

समारोह की रूपरेखा तय करने के लिए मप्र मीना समाज सेवा संगठन की बैठक प्रदेश संगठन महामंत्री एड. संतोष मीना की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में संगठन के पदाधिकारियों और समाज के वरिष्ठ जनों ने व्यापक चर्चा करते हुए कार्यक्रम को यादगार बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष लीलेन्द्र सिंह मारण, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष लखन सिंह मीना सहित समाजसेवी विमल सिंह मारण, ब्रजेश मीणा, हरभजन मीना, रामसेवक मीना, रामजीवन मीना, सुदेश मारण, जीवन मारण, जगदीश मारण, पर्वत सिंह मारण, सत्यम मीना और भैयालाल मारण सहित कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे।

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रामनिवास रावत के कार्यभार ग्रहण समारोह को भव्य स्वरूप दिया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में समाज के लोग और गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।

RSF की प्रेस स्वतंत्रता रिपोर्ट: वैश्विक पैमाना या भारत की अधूरी तस्वीर?

डॉ. पंकज सोनी

Reporters Without Borders (RSF) की सालाना रिपोर्ट पर भरोसा करने से पहले एक बुनियादी सवाल है—यह बनती कैसे है? किसके संसाधनों से, किन स्रोतों के आधार पर और किस दृष्टिकोण के साथ? 140 करोड़ की आबादी, दर्जनों भाषाओं और सैकड़ों संस्कृतियों वाले भारत की प्रेस स्वतंत्रता क्या पेरिस में बैठकर तैयार प्रश्नावलियों से मापी जा सकती है?

हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पेरिस स्थित एक NGO Reporters Without Borders (RSF) अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है। इस रिपोर्ट में भारत का स्थान प्रायः 150 के बाद ही दिखाई देता है। 2026 की रिपोर्ट में भारत 157वें स्थान पर है, जबकि 2025 में भी यही रैंक और 2024 में 159वां स्थान था।

रिपोर्ट आते ही देश का एक वर्ग चिंतित स्वर में कहता है—“लोकतंत्र खतरे में है”, “पत्रकारिता समाप्त हो रही है”, “प्रेस पर दबाव बढ़ गया है।” लेकिन इन प्रतिक्रियाओं के बीच एक मूल प्रश्न अक्सर अनदेखा रह जाता है—यह सूचकांक तैयार कैसे होता है? भारत इसमें लगातार पीछे क्यों रहता है?

दरअसल, RSF एक फ्रांसीसी गैर-सरकारी संगठन है, जिसकी फंडिंग के स्रोत पूरी तरह पारदर्शी नहीं माने जाते। यूरोपीय सरकारें और कुछ निजी फाउंडेशन इसे सहयोग देते हैं। इसका प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक मुख्यतः सर्वेक्षण, धारणाओं और सीमित केस स्टडी पर आधारित होता है। यह कोई पूर्णतः वैज्ञानिक या वस्तुनिष्ठ मापदंड नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों की राय का संकलन है, जिसमें पश्चिमी उदारवादी मूल्यों को पत्रकारिता का मानक मान लिया जाता है।

यहीं एक महत्वपूर्ण प्रश्न खड़ा होता है—क्या इतने विशाल और विविध देश की मीडिया स्वतंत्रता का आकलन सीमित प्रश्नावलियों के आधार पर किया जा सकता है? भारत में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन यहाँ के संविधान, न्यायपालिका और नागरिक अधिकारों के संदर्भ में होना चाहिए, न कि केवल किसी बाहरी संस्था के आकलन से।

इस रिपोर्ट का एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को कई बार भारत से बेहतर स्थान दिया गया है। पाकिस्तान में पत्रकारों के लापता होने, मीडिया पर सैन्य दबाव और वरिष्ठ पत्रकार Arshad Sharif की हत्या जैसी घटनाएं व्यापक रूप से सामने आ चुकी हैं। वहीं बांग्लादेश में डिजिटल सुरक्षा कानून के तहत पत्रकारों पर कार्रवाई के मामले भी सामने आए हैं। ऐसे में यह तुलना स्वाभाविक रूप से प्रश्न खड़े करती है।

वैश्विक स्तर पर भी मीडिया स्वतंत्रता की स्थिति जटिल है। अमेरिका में Julian Assange के खिलाफ लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चली। पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने मीडिया को “एनिमी ऑफ द पीपल” तक कहा। रूस और चीन में मीडिया पर राज्य का प्रभाव जगजाहिर है। इसके बावजूद RSF रैंकिंग में इन देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम आलोचनात्मक दिखाई देती है, जिससे भू-राजनीतिक पूर्वाग्रह की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

International Federation of Journalists (IFJ) के अनुसार 2025 में दुनिया भर में 128 पत्रकारों की हत्या हुई, जिनमें अधिकांश मध्य-पूर्व और संघर्ष क्षेत्रों से थे। भारत में ऐसे मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही, और हर घटना पर न्यायिक व प्रशासनिक प्रक्रिया सक्रिय होती है।

भारत की जमीनी तस्वीर देखें तो यहाँ 900 से अधिक सैटेलाइट चैनल, 17,000 से ज्यादा पंजीकृत समाचारपत्र और लाखों डिजिटल प्लेटफॉर्म सक्रिय हैं। अनेक मीडिया संस्थान सरकार की खुलकर आलोचना करते हैं और निर्बाध रूप से कार्य कर रहे हैं। संसद, न्यायपालिका और सोशल मीडिया—तीनों स्तरों पर अभिव्यक्ति की विविधता स्पष्ट दिखाई देती है।

हालाँकि, भारतीय पत्रकारिता की एक चुनौती यह भी है कि बिना प्रशिक्षण या मान्यता के बड़ी संख्या में लोग मीडिया के नाम पर सक्रिय हो गए हैं। कुछ मामलों में यह स्थिति अव्यवस्था और अविश्वसनीयता को जन्म देती है, जो समग्र तस्वीर को प्रभावित करती है।

RSF की निष्पक्षता पर सवाल केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। The GuardianGlobal Times और अन्य संस्थानों द्वारा इसके वित्तीय स्रोतों व दृष्टिकोण पर प्रश्न उठाए गए हैं। यहाँ तक कि Encyclopaedia Britannica में भी कुछ संदर्भों में इसके संभावित पक्षपात का उल्लेख मिलता है।

स्पष्ट है कि RSF का सूचकांक एक उपयोगी संकेतक हो सकता है, लेकिन इसे अंतिम सत्य मानना उचित नहीं। उतना ही गलत इसे पूरी तरह खारिज कर देना भी होगा।

भारत जैसे विशाल और विविध लोकतंत्र में प्रेस स्वतंत्रता का मूल्यांकन बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है—जहाँ वैश्विक सूचकांक, स्थानीय वास्तविकता और संस्थागत अनुभव, तीनों को संतुलित रूप से समझा जाए।

(लेखक जनसंपर्क विभाग भोपाल में सहायक मीडिया सलाहकार हैं और यह इनके व्यक्तिगत विचार हैं।)

पीवीयूएनएल, पतरातू में डीएवी पब्लिक स्कूल का भव्य उद्घाटन

पीवीयूएनएल टाउनशिप, पतरातू में डीएवी पब्लिक स्कूल का शुभारंभ माननीय श्री अशोक कुमार सहगल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), पीवीयूएनएल के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस गरिमामय अवसर पर श्रीमती रेनू सहगल, अध्यक्ष, स्वर्णरेखा महिला समिति, श्री अनुपम मुखर्जी, मुख्य महाप्रबंधक (परियोजना), श्री जे. सी. पात्रा, महाप्रबंधक (O&C), श्री मनीष खेतरपाल, महाप्रबंधक (O&M), श्री जियाउर रहमान, प्रमुख (मानव संसाधन) सहित झारखंड के पांचों जोन के एरिया रीजनल अधिकारी, NEAP, EWA, SC & ST एसोसिएशन एवं SMS के कार्यकारी सदस्यगण भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न डीएवी स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिन्होंने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।

नवस्थापित डीएवी पब्लिक स्कूल में प्रारंभिक चरण में नर्सरी से कक्षा पाँचवीं तक की शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा के महत्व पर बल दिया तथा डीएवी प्रबंधन को विद्यालय में उच्चतम स्तर की शिक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी।

पीवीयूएनएल द्वारा स्थापित यह विद्यालय क्षेत्र के बच्चों को उत्कृष्ट शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उनके सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा।

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