शशि थरूर ने फिर किया सरकार का समर्थन, बोले- ईरान-इजरायल युद्ध पर चुप्पी कायरता नहीं रणनीति

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पश्चिम एशिया में जंग को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार की चुप्पी पर नैतिक कायरता का आरोप लग रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए संकट पर भारत सरकार के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। 

कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय

अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत सरकार पर भी देश में “सियासी हमले” हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है।

भारतीय नीति पर सवाल खड़े करने वालों को दिखाया आईना

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनियक शशि थरूर ने एक लेख लिखकर उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को जमीनी हालात और राष्ट्रहित में अपनी गई रणनीति के बारे में समझाने की कोशिश की है। उनका यह लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है।

हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं-थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है। इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होता है। थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, और कई बार बिना बयान दिए भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं

थरूर के मुताबिक उनके जैसे जिन लोगों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं की, लिबरल्स उन्हीं पर निशाना साधने लगे हैं। वे इसे नैतिक कायरता कह रहे हैं। वे हमसे चाहते हैं कि हम यह मांग करें कि भारत नैतिक श्रेष्ठता दिखाते हुए युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन घोषित करे। लेकिन, मैं इस संघर्ष पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं करूंगा।

लाखों भारतीयों के हितों पर होने वाले असर की दिलाई याद

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पश्चिम एशिया में बड़े हित जुड़े हैं करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और लगभग 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी, ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक भाषण देकर इन संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका-थरूर

जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है। 

सोवियत संघ के समय अपनाए गए रणनीति का उदाहरण

थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है। इसके लिए उन्होंने सोवियत संघ के द्वारा हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968) और अफगानिस्तान (1979) में किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों का उदाहरण दिया है, जिसकी निंदा करने में हमने बचने की कोशिश की। क्योंकि, मास्को के साथ अपने रिश्तों को हम खतरे में डालने का जोखिम नहीं ले सकते थे।

सोनिया गांधी ने की थी भारत सरकार की तीखी आलोचना

बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

चैत नवरात्रि और ईद पर नगर पालिका की व्यापक तैयारियाँ,सफाई व जलापूर्ति व्यवस्था सुदृढ़।
                                
                                    
बलरामपुर। चैत नवरात्रि एवं ईद जैसे पावन पर्वों को देखते हुए आदर्श नगर पालिका परिषद बलरामपुर द्वारा शहर में व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की जा रही हैं। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरु’ के निर्देशन में मंदिरों,ईदगाहों और मस्जिदों की विशेष साफ-सफाई के साथ-साथ नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके साथ ही जूना (नालियों की सफाई) का कार्य भी लगातार जारी है,ताकि कहीं भी जलभराव या गंदगी की समस्या उत्पन्न न हो।

उन्होंने बताया कि अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्य द्वारा नगर पालिका के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सफाई कर्मियों,जलकल विभाग एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पर्वों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम नागरिकों की सुविधा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं,ताकि श्रद्धालु एवं रोजेदार दोनों ही अपने-अपने पर्व शांतिपूर्ण और स्वच्छ वातावरण में मना सकें।

नगरवासियों ने भी नगर पालिका की इस पहल की सराहना की है और प्रशासन से अपील की है कि यह व्यवस्था पूरे पर्व काल तक इसी प्रकार सुचारु रूप से जारी रखी जाए।
सीवर लाइन बिछाने से क्षतिग्रस्त सड़कों के पूर्ण निर्माण के निर्देश,अध्यक्ष के आग्रह पर डीएम सख्त।   
                          
                                        
बलरामपुर। नगर क्षेत्र में सीवर जल पाइप लाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के पुनर्निर्माण को लेकर अब प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। आदर्श नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी से वार्ता की और नगरवासियों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया।

अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से मांग की कि जहां-जहां सीवर लाइन के कार्य के चलते सड़कें खोदी गई हैं,वहां केवल मरम्मत नहीं बल्कि पूरी सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधूरी और खराब सड़कों के कारण आम जनता को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अधूरी या खराब गुणवत्ता वाली सड़क स्वीकार नहीं की जाएगी। जहां भी सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं,उन्हें पूरी तरह से बनवाया जाए और कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जल निगम विभाग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नगर क्षेत्र की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

नगरवासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब उन्हें बेहतर और सुगम सड़क सुविधा मिल
मां के दरबार में भक्तों की भीड़, जमकर लगे जयकारे


रिपोर्ट - नितेश श्रीवास्तव

भदोही।नवरात्रि के प्रथम दिन मां के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। वासंतिक नवरात्र के प्रथम दिवस मां शैलपुत्री की अराधना की गई। महिलाओं ने घरों में कलश स्थापना कर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की नौ दिवसीय अराधना आरंभ की। इस दौरान मंदिरों से लेकर बाजारों तक खुब रौनक देखी गई।वासंतिक नवरात्र के प्रथम दिवस देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ज्ञानपुर के द्दोपाइला माता मंदिर, दुर्गागंज तिराहे पर स्थित दुर्गा मंदिर, हरिहरनाथ स्थित मां शीतला, मां काली मंदिर के साथ ही जोरई, ककराही, भुड़की, औराई, सुरियावां, सीमामढ़ी और गोपीगंज के प्राचीन दुर्गा माता मंदिर सदर महाल,  सुबह ही आस्थावानों की कतारें लगनी शुरू हो गई। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठे। खासकर महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। व्रती महिलाएं मां की अराधना को पहुंची और विधिवत पूजन-अर्चन किया। भक्तों ने मां से मुरादें मांगी। इसके अलावा घरों में कलश स्थापना की गई। जहां मां भक्त नौ दिनों का पूजन-अर्चन करेंगे। नवरात्र के कारण बाजार में भी अच्छी रौनक देखने को मिली। दर्शन-पूजन को निकली महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। गोपीगंज स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर के पुजारी धनेश पंडा ने कहा कि नवरात्र में मां की अराधना का विशेष महत्व है। इस पूरे नौ दिनों तक मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं।
अयोध्या में इतिहास रचा गया: राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना
लखनऊ । अयोध्या आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना और पूजन किया।राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिजीत मुहूर्त में इस अनुष्ठान में भाग लिया। इससे पहले उन्होंने राम दरबार के दर्शन कर आरती उतारी और मंदिर परिसर में पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की। इस आयोजन को राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।इस मौके पर योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और कई संत-धर्माचार्य मौजूद रहे। वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूरे विधि-विधान से श्रीराम यंत्र की स्थापना संपन्न कराई गई।

देशभर से जुटे श्रद्धालु और संत

कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, संत और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए। विशेष रूप से विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनकर आध्यात्मिक वातावरण को और भी भव्य बना दिया।

सुरक्षा के बीच सीमित रहे दर्शन

राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक लगाई गई। हालांकि, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के दर्शन समय को बढ़ाया गया।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

पूरे आयोजन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। शहर को कई जोन और सेक्टर में बांटकर लगभग 3000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। एयरपोर्ट से लेकर मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी गई।

यातायात व्यवस्था में बदलाव

आवागमन को सुचारु रखने के लिए भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और रूट डायवर्जन लागू किया गया, जिससे वीआईपी मूवमेंट और आम जनता दोनों को सुविधा मिल सके।राष्टपति का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े लंबे आंदोलन के एक अहम पड़ाव के रूप में भी याद किया जाएगा।
खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

डॉ .मंजू लोढ़ा को साहित्यिक योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
मुंबई।आज के समय में जहाँ लोगों का ध्यान तेजी से बदलता है और सामग्री क्षण भर में आगे बढ़ जाती है, वहीं कविता आज भी अपनी शांत और गहरी प्रभावशीलता बनाए हुए है। इसी कड़ी में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में डॉ. मंजू लोढ़ा ने 500 कविताएँ लिखकर एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो समकालीन साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की साधना, अनुशासन और भाषा के प्रति गहरे जुड़ाव का परिणाम है। प्रत्येक कविता एक विचार, अनुभव या भावना का प्रतिबिंब है, जिसे शब्दों में संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया है। इन 500 कविताओं का संग्रह उनके साहित्यिक समर्पण और रचनात्मकता का सशक्त प्रमाण है। भारत में कविता सदियों से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम रही है—प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक रचनाओं तक। ऐसे में इस प्रकार की उपलब्धियाँ न केवल व्यक्तिगत प्रयास का सम्मान करती हैं, बल्कि साहित्यिक परंपरा को जीवित और प्रासंगिक बनाए रखने में भी योगदान देती हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को मान्यता देते हुए ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने डॉ. मंजू लोढ़ा को राष्ट्रीय रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल उनकी रचनाओं की संख्या का नहीं, बल्कि उनके निरंतर प्रयास, समर्पण और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, जो कला, शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अनूठी उपलब्धियों को दर्ज करने के लिए जाना जाता है, ऐसे प्रेरणादायक कार्यों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संस्था उन व्यक्तियों को पहचान देती है, जो अपने क्षेत्र में सीमाओं को पार करते हुए नई मिसाल कायम करते हैं। इस सम्मान की खास बात यह है कि यह वास्तविक मानवीय कहानियों को महत्व देता है—संघर्ष, निरंतरता और जुनून की कहानियाँ। डॉ. लोढ़ा की यह यात्रा भी शब्दों के माध्यम से एक अद्भुत साहित्यिक मुकाम तक पहुँचने की कहानी है।
साहित्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक लेखक की असली परीक्षा उसकी निरंतरता में होती है। प्रेरणा शुरुआत कर सकती है, लेकिन निरंतर प्रयास ही उस यात्रा को आगे बढ़ाता है। 500 कविताएँ लिखना केवल रचनात्मकता नहीं, बल्कि लंबे समय तक समर्पित रहने की क्षमता को दर्शाता है। डिजिटल युग में जहाँ लेखन के स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसी उपलब्धियाँ यह याद दिलाती हैं कि लेखन का मूल तत्व आज भी वही है—अभिव्यक्ति, जुड़ाव और पाठकों को भावनात्मक रूप से स्पर्श करने की शक्ति। डॉ. मंजू लोढ़ा की यह उपलब्धि उभरते लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह संदेश देती है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से जुनून को पहचान और सम्मान में बदला जा सकता है। साथ ही, यह एसीई बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैसे मंचों के महत्व को भी रेखांकित करती है, जो सार्थक योगदानों को पहचान देते हैं। यह केवल एक रिकॉर्ड की कहानी नहीं, बल्कि समर्पण, सृजनात्मकता और शब्दों की अमर शक्ति की कहानी है।
भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर कवि सम्मेलन, सनातन संदेश से गूंजा सभागार,स्वामी के संबोधन ने बढ़ाई सम्मेलन की शोभा*
सुल्तानपुर,चैत्र नवरात्र एवं भारतीय नववर्ष के पावन पर्व पर पं.रामनरेश त्रिपाठी सभागार में भव्य विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ऐतिहासिक मनाया गया। 17वर्षो से लगातार आयोजित वर्ष 2008 से हो रहा यह कवि सम्मेलन इस बार हजारों श्रोताओं की उपस्थिति से पूरी तरह खचा- खच भरा रहा सभागार। दूर-दराज से आए लोगों ने देश के नामचीन कवियों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और पूरे समय सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा। कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। नगर पालिका अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने सनातन धर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं,बल्कि यह हमारी संस्कृति-परंपरा और जीवनशैली का आधार है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं,बल्कि नई पीढ़ी को भी उससे जोड़ने का कार्य करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कवि सम्मेलन जैसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और भारतीय नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र जैसे पावन अवसरों पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं,उन्होंने सभी कहा कि हमारा प्रयास है सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाना,ऐसे भव्य आयोजनों को निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया और सभी उपस्थित भक्तजनों का आभार व्यक्त किया। विशेष अतिथि स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने अपने संबोधन कहा कि “लिखकर रख लीजिए,मैं यह बात जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह कोई नई बात नहीं है,बल्कि पहले भी कई मंचों पर इस विषय पर चर्चा हो चुकी है।”वर्तमान परिस्थितियां संघर्ष जैसी स्थितियों की ओर संकेत कर रही हैं और यह आसानी से रुकने वाली नहीं हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा पिछले चार महीनों में देशभर का दौरा किया और हालात को करीब से देखा हूँ। श्री स्वामी जी ने कहाकि दुनिया की अर्थव्यवस्था कई बड़े कारकों पर आधारित है,जिनमें हथियार और अवैध गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्था भी शामिल है। उनका मानना है कि जब तक हथियारों का निर्माण जारी रहेगा,तब तक संघर्ष की स्थितियां बनी रह सकती हैं। साथ ही उन्होंने कहाकि भारत की सांस्कृतिक शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि मंदिरों और त्योहारों के माध्यम से देश में एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था संचालित होती है। काशी और अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी संख्या इसका उदाहरण है।
अयोध्या में आज ऐतिहासिक अनुष्ठान, राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी राष्ट्रपति मुर्मू

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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज आस्था और इतिहास का संगम बनने जा रहा है। वर्ष प्रतिपदा के शुभ क्षण में बृहस्पतिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक नए इतिहास का साक्षी बनेगा। द्रौपदी मुर्मू यहां श्रीराम यंत्र की स्थापना कर एक नई परंपरा को आगे बढ़ाएंगी। इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालु और अतिथि इस दिव्य क्षण के साक्षी बनेंगे।

राष्ट्रपति करेंगी श्रीराम यंत्र की स्थापना

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह लगभग 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगी, जहां से वे सड़क मार्ग द्वारा मंदिर परिसर पहुंचेंगी। अयोध्या में उनके चार घंटे के प्रवास के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वे आद्य शंकराचार्य द्वार से मंदिर में प्रवेश कर सबसे पहले रामलला का आशीर्वाद लेंगी।श्री राम जन्मभूमि मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:55 बजे मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना। श्रीराम यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार का दर्शन-पूजन एवं आरती करेंगी।

देशभर से 7 हजार विशेष मेहमान शामिल होंगे

समारोह का साक्षी बनने के लिए करीब सात हजार मेहमान मौजूद रहेंगे। श्रीराम यंत्र पूजन के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ और तीन आचार्य उपस्थित रहेंगे। केरल की धर्मगुरु माता अमृतानंदमयी और दत्तात्रेय होसबोले भी समारेाह में शामिल रहेंगे।

श्रीराम यंत्र की खासियत

श्रीराम यंत्र की खासियत मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित होने वाला यह 'श्रीराम यंत्र' वैदिक गणित और ज्यामितीय पैटर्न पर आधारित है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, यह पवित्र यंत्र दो वर्ष पूर्व एक भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया था। मान्यता है कि यह यंत्र दिव्य ऊर्जाओं का केंद्र है और सकारात्मक आध्यात्मिक स्पंदन आकर्षित करता है। स्थापना के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य मौजूद रहेंगे।

13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति के आगमन पर जिले की सुरक्षा व्यवस्था को 13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई है। एसपी/एएसपी स्तर के अधिकारी को जोन व सीओ व निरीक्षकों को सेक्टरों का नोडल बनाया गया है। उच्चाधिकारी जोन और सेक्टरों की निगरानी कर रहे हैं। राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या दौरा होना है। वह लगभग चार घंटे तक अयोध्या में मौजूद रहेंगी। इस दौरान पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, उनकी फ्लीट के मार्ग, राम मंदिर परिसर, राम मंदिर में परकोटा, सभा स्थल, अतिथियों के आने के मार्ग, रूफटॉप, आंतरिक मार्गों के डायवर्जन की व्यवस्था, हनुमानगढ़ी मंदिर, हेलीपैड रामकथा पार्क व अयोध्या धाम की कानून व मार्ग व्यवस्था को अलग-अलग जोन में बांटा गया है।

तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

आयोजन को लेकर सभी जोन और सेक्टरों में सुरक्षाकर्मियों का जाल बिछाया गया है। सभी जगहों पर लगभग तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 18 एसपी/एएसपी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक, 400 उप निरीक्षक, 50 महिला उपनिरीक्षक, 1800 आरक्षी व महिला आरक्षी, 90 यातायात पुलिस, 550 मुख्य आरक्षी और यातायात आरक्षी शामिल हैं।

कोटेदार और पूर्ति निरीक्षक की मिली भगत से  जमकर की जा रही है कालाबाजारी
लखनऊ। - राशनिंग क्षेत्र हशनगंज में कोटेदार  मुनींद्र कुमार और पूर्ति निरीक्षक राजनरायन मिश्रा की मिली भगत से राशन की बिक्री मे  कालाबाजरी करके जमकर धन उगाही की जा रही है। बताते चले हशनगंज   राशनिंग क्षेत्र के अंतर गत आने वाली राशन की दुकान जो मुनेन्द्र केनाम अवांटित है उसपर मानक से ज्यादा राशनकार्ड  बनवाने व वितरण मे धांधली की चर्चा आम होना सुना जा रहा है  हो क्यो न जब युक्त दुकान्दार के  ऊपर  पूर्ति निरीक्षण राज रायण मिश्रा का बरद हस्त प्राप्त है ।

राजनारायण मिश्रा घूस खोरी और अवैध धन उगाही के  चक्कर मे बाराबंकी से हटाये गए है  लखनऊ मे आकर दुकानदारों से बितरण रजिस्टर बेरीफीकेसन का 1500 रुपये प्रतेक - रजिस्टर के हिसाब से रेट फिक्स कर दिये है  और तो और राशनकार्ड बनवाने के नाम पर हजार रुपये  के साथ साथ रजनी गंधा तो देना ही पड़ेगा   साहब तो रजनी गंधा के दीवाने जो है। क्षेत्र की  जनता पूरी तरह उड्डेलित  है यदि आपूर्ति निरीक्षक को युक्त  बितरण क्षेत्र से अविलंब हटाये  जाने की मांग किये है।
शशि थरूर ने फिर किया सरकार का समर्थन, बोले- ईरान-इजरायल युद्ध पर चुप्पी कायरता नहीं रणनीति

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पश्चिम एशिया में जंग को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध पर भारत की नरेन्द्र मोदी सरकार की चुप्पी पर नैतिक कायरता का आरोप लग रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध की वजह से पैदा हुए संकट पर भारत सरकार के स्टैंड का खुलकर समर्थन किया है। 

कांग्रेस के भीतर ही अलग-अलग राय

अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत सरकार पर भी देश में “सियासी हमले” हो रहे हैं। सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी। उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे। हालांकि, अब कांग्रेस पार्टी के ही सांसद शशि थरूर ने सरकार के रुख का बचाव करते हुए इसे जिम्मेदार कूटनीति बताया है।

भारतीय नीति पर सवाल खड़े करने वालों को दिखाया आईना

केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व राजनियक शशि थरूर ने एक लेख लिखकर उन्होंने मोदी सरकार पर सवाल उठाने वालों को जमीनी हालात और राष्ट्रहित में अपनी गई रणनीति के बारे में समझाने की कोशिश की है। उनका यह लेख इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है। कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है।

हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं-थरूर

थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है। यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है। इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती। उन्होंने कहा कि भारत को अपने राष्ट्रीय हित, रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को ध्यान में रखते हुए संतुलित रुख अपनाना होता है। थरूर के मुताबिक, सरकार की चुप्पी कायरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है, और कई बार बिना बयान दिए भी कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जा सकते हैं।

सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं

थरूर के मुताबिक उनके जैसे जिन लोगों ने पश्चिम एशिया युद्ध पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं की, लिबरल्स उन्हीं पर निशाना साधने लगे हैं। वे इसे नैतिक कायरता कह रहे हैं। वे हमसे चाहते हैं कि हम यह मांग करें कि भारत नैतिक श्रेष्ठता दिखाते हुए युद्ध को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन घोषित करे। लेकिन, मैं इस संघर्ष पर सरकार की चुप्पी की निंदा नहीं करूंगा।

लाखों भारतीयों के हितों पर होने वाले असर की दिलाई याद

थरूर ने यह भी कहा कि भारत के पश्चिम एशिया में बड़े हित जुड़े हैं करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और लगभग 90 लाख भारतीयों की मौजूदगी, ऐसे में किसी भी कड़े सार्वजनिक बयान से इन हितों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ भारत के रक्षा और तकनीकी संबंधों का भी जिक्र करते हुए कहा कि नैतिक भाषण देकर इन संबंधों को खतरे में डालना समझदारी नहीं होगी।

राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका-थरूर

जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था। आज के बहुध्रुवीय विश्व में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है। 

सोवियत संघ के समय अपनाए गए रणनीति का उदाहरण

थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है। इसके लिए उन्होंने सोवियत संघ के द्वारा हंगरी (1956), चेकोस्लोवाकिया (1968) और अफगानिस्तान (1979) में किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघनों का उदाहरण दिया है, जिसकी निंदा करने में हमने बचने की कोशिश की। क्योंकि, मास्को के साथ अपने रिश्तों को हम खतरे में डालने का जोखिम नहीं ले सकते थे।

सोनिया गांधी ने की थी भारत सरकार की तीखी आलोचना

बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि ईरान के शीर्ष नेता की हत्या जैसे गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भारत का मौन रहना तटस्थता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से पीछे हटना है। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं वैश्विक व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए गंभीर चुनौती हैं और भारत जैसे देश को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

चैत नवरात्रि और ईद पर नगर पालिका की व्यापक तैयारियाँ,सफाई व जलापूर्ति व्यवस्था सुदृढ़।
                                
                                    
बलरामपुर। चैत नवरात्रि एवं ईद जैसे पावन पर्वों को देखते हुए आदर्श नगर पालिका परिषद बलरामपुर द्वारा शहर में व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की जा रही हैं। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष डॉ.धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरु’ के निर्देशन में मंदिरों,ईदगाहों और मस्जिदों की विशेष साफ-सफाई के साथ-साथ नियमित जलापूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।

अध्यक्ष प्रतिनिधि डीपी सिंह बैस ने जानकारी देते हुए बताया कि नगर के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों पर साफ-सफाई का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। इसके साथ ही जूना (नालियों की सफाई) का कार्य भी लगातार जारी है,ताकि कहीं भी जलभराव या गंदगी की समस्या उत्पन्न न हो।

उन्होंने बताया कि अधिशासी अधिकारी लाल चन्द्र मौर्य द्वारा नगर पालिका के सभी कर्मचारियों की ड्यूटी निर्धारित कर दी गई है। सफाई कर्मियों,जलकल विभाग एवं अन्य संबंधित कर्मचारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पर्वों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम नागरिकों की सुविधा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं,ताकि श्रद्धालु एवं रोजेदार दोनों ही अपने-अपने पर्व शांतिपूर्ण और स्वच्छ वातावरण में मना सकें।

नगरवासियों ने भी नगर पालिका की इस पहल की सराहना की है और प्रशासन से अपील की है कि यह व्यवस्था पूरे पर्व काल तक इसी प्रकार सुचारु रूप से जारी रखी जाए।
सीवर लाइन बिछाने से क्षतिग्रस्त सड़कों के पूर्ण निर्माण के निर्देश,अध्यक्ष के आग्रह पर डीएम सख्त।   
                          
                                        
बलरामपुर। नगर क्षेत्र में सीवर जल पाइप लाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों के पुनर्निर्माण को लेकर अब प्रशासन सख्त नजर आ रहा है। आदर्श नगरपालिका परिषद के अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने इस गंभीर समस्या को लेकर जिलाधिकारी से वार्ता की और नगरवासियों को हो रही परेशानियों से अवगत कराया।

अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से मांग की कि जहां-जहां सीवर लाइन के कार्य के चलते सड़कें खोदी गई हैं,वहां केवल मरम्मत नहीं बल्कि पूरी सड़क का गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि अधूरी और खराब सड़कों के कारण आम जनता को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

इस पर संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने जल निगम के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में अधूरी या खराब गुणवत्ता वाली सड़क स्वीकार नहीं की जाएगी। जहां भी सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं,उन्हें पूरी तरह से बनवाया जाए और कार्य शीघ्र पूरा किया जाए।

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद जल निगम विभाग में हलचल तेज हो गई है और संबंधित अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही नगर क्षेत्र की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

नगरवासियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब उन्हें बेहतर और सुगम सड़क सुविधा मिल
मां के दरबार में भक्तों की भीड़, जमकर लगे जयकारे


रिपोर्ट - नितेश श्रीवास्तव

भदोही।नवरात्रि के प्रथम दिन मां के दरबार में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां के जयकारे से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। वासंतिक नवरात्र के प्रथम दिवस मां शैलपुत्री की अराधना की गई। महिलाओं ने घरों में कलश स्थापना कर शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की नौ दिवसीय अराधना आरंभ की। इस दौरान मंदिरों से लेकर बाजारों तक खुब रौनक देखी गई।वासंतिक नवरात्र के प्रथम दिवस देवी मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ज्ञानपुर के द्दोपाइला माता मंदिर, दुर्गागंज तिराहे पर स्थित दुर्गा मंदिर, हरिहरनाथ स्थित मां शीतला, मां काली मंदिर के साथ ही जोरई, ककराही, भुड़की, औराई, सुरियावां, सीमामढ़ी और गोपीगंज के प्राचीन दुर्गा माता मंदिर सदर महाल,  सुबह ही आस्थावानों की कतारें लगनी शुरू हो गई। मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठे। खासकर महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली। व्रती महिलाएं मां की अराधना को पहुंची और विधिवत पूजन-अर्चन किया। भक्तों ने मां से मुरादें मांगी। इसके अलावा घरों में कलश स्थापना की गई। जहां मां भक्त नौ दिनों का पूजन-अर्चन करेंगे। नवरात्र के कारण बाजार में भी अच्छी रौनक देखने को मिली। दर्शन-पूजन को निकली महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। गोपीगंज स्थित प्राचीन दुर्गा माता मंदिर के पुजारी धनेश पंडा ने कहा कि नवरात्र में मां की अराधना का विशेष महत्व है। इस पूरे नौ दिनों तक मां अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं।
अयोध्या में इतिहास रचा गया: राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना
लखनऊ । अयोध्या आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण का साक्षी बना, जब द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की विधिवत स्थापना और पूजन किया।राष्ट्रपति ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अभिजीत मुहूर्त में इस अनुष्ठान में भाग लिया। इससे पहले उन्होंने राम दरबार के दर्शन कर आरती उतारी और मंदिर परिसर में पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की। इस आयोजन को राम मंदिर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।इस मौके पर योगी आदित्यनाथ, आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी और कई संत-धर्माचार्य मौजूद रहे। वैदिक आचार्यों के निर्देशन में पूरे विधि-विधान से श्रीराम यंत्र की स्थापना संपन्न कराई गई।

देशभर से जुटे श्रद्धालु और संत

कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालु, संत और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए। विशेष रूप से विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनकर आध्यात्मिक वातावरण को और भी भव्य बना दिया।

सुरक्षा के बीच सीमित रहे दर्शन

राष्ट्रपति के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा कारणों से कुछ समय के लिए आम श्रद्धालुओं के दर्शन पर रोक लगाई गई। हालांकि, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के दर्शन समय को बढ़ाया गया।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

पूरे आयोजन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। शहर को कई जोन और सेक्टर में बांटकर लगभग 3000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई। एयरपोर्ट से लेकर मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों तक कड़ी निगरानी रखी गई।

यातायात व्यवस्था में बदलाव

आवागमन को सुचारु रखने के लिए भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई और रूट डायवर्जन लागू किया गया, जिससे वीआईपी मूवमेंट और आम जनता दोनों को सुविधा मिल सके।राष्टपति का यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राम मंदिर के निर्माण और उससे जुड़े लंबे आंदोलन के एक अहम पड़ाव के रूप में भी याद किया जाएगा।
खतरनाक स्थिति में पहुंची मिडिल ईस्ट में चल रही जंग, अब सऊदी अरब ने दी ईरान को खुली चेतावनी

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मिडिल ईस्ट में चल रही जंग अब खतरनाक स्थिति में पहुंच गई है। ईरान कई देशों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले कर रहा है और गैस-तेल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। ईरान ने सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को उनके बड़े तेल और गैस ठिकाने खाली करने की चेतावनी दी है। इससे पूरे क्षेत्र में डर और तनाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बीच सऊदी अरब ने तेहरान को चेतावनी दी है।

सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि ईरान को अपने पड़ोसियों पर किए गए हमलों के परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान को लगता है कि खाड़ी देश जवाब देने में असमर्थ हैं, तो तेहरान गलत है। उन्होंने ईरान पर हद पार करने का आरोप लगाया और कहा कि जरूरत पड़ने पर खाड़ी देशों के पास सैन्य कार्रवाई करने का अधिकार सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि ईरान के आगे न तो ब्लैकमेल होंगे और न ही डरेंगे।

रियाद में अरब विदेश मंत्रियों की बैठक

प्रिंस फैसल ने रियाद में अरब और इस्लामिक देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक के बाद ये बात कही है। उन्होंने कहा कि ईरान को अपने रवैये पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा कि ईरान की कार्रवाइयों का उसे राजनीतिक और नैतिक रूप से उल्टा असर झेलना पड़ेगा। प्रिंस फैसल ने कहा कि ईरान के बार-बार के हमलों से उस पर से भरोसा टूट गया है। खास बात है कि जब बैठक चल रही थी, उसी दौरान ईरान ने रियाद और कतर के रास लफान इंडस्टिरयल सिटी पर हमला कर दिया।

क्या सीधे जंग में उतरेगा सऊदी अरब?

हाल के दिनों में सऊदी अरब पहले ही ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना कर चुका है। रियाद में अमेरिकी दूतावास, प्रिंस सुल्तान एयरबेस और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि सऊदी अमेरिका का कितना साथ देगा और क्या वह सीधे जंग में उतरेगा।

पाकिस्तान की भी होगी एंट्री!

सऊदी अरब के तेल को अगर टार्गेट किया गया तो वह इस युद्ध में खुलकर उतर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल होना पड़ेगा। इसका कारण है सऊदी और पाकिस्तान के बीच हुआ रक्षा समझौता। इस युद्ध के बाद से ही पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई बार सऊदी का दौरा कर चुके हैं। यह दिखाता है कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच पर्दे के पीछे नया खेल चल रहा है।

डॉ .मंजू लोढ़ा को साहित्यिक योगदान के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान
मुंबई।आज के समय में जहाँ लोगों का ध्यान तेजी से बदलता है और सामग्री क्षण भर में आगे बढ़ जाती है, वहीं कविता आज भी अपनी शांत और गहरी प्रभावशीलता बनाए हुए है। इसी कड़ी में एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में डॉ. मंजू लोढ़ा ने 500 कविताएँ लिखकर एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है, जो समकालीन साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान है।यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि वर्षों की साधना, अनुशासन और भाषा के प्रति गहरे जुड़ाव का परिणाम है। प्रत्येक कविता एक विचार, अनुभव या भावना का प्रतिबिंब है, जिसे शब्दों में संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया है। इन 500 कविताओं का संग्रह उनके साहित्यिक समर्पण और रचनात्मकता का सशक्त प्रमाण है। भारत में कविता सदियों से सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम रही है—प्राचीन ग्रंथों से लेकर आधुनिक रचनाओं तक। ऐसे में इस प्रकार की उपलब्धियाँ न केवल व्यक्तिगत प्रयास का सम्मान करती हैं, बल्कि साहित्यिक परंपरा को जीवित और प्रासंगिक बनाए रखने में भी योगदान देती हैं। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को मान्यता देते हुए ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने डॉ. मंजू लोढ़ा को राष्ट्रीय रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल उनकी रचनाओं की संख्या का नहीं, बल्कि उनके निरंतर प्रयास, समर्पण और सृजनात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। ACE बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, जो कला, शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अनूठी उपलब्धियों को दर्ज करने के लिए जाना जाता है, ऐसे प्रेरणादायक कार्यों को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह संस्था उन व्यक्तियों को पहचान देती है, जो अपने क्षेत्र में सीमाओं को पार करते हुए नई मिसाल कायम करते हैं। इस सम्मान की खास बात यह है कि यह वास्तविक मानवीय कहानियों को महत्व देता है—संघर्ष, निरंतरता और जुनून की कहानियाँ। डॉ. लोढ़ा की यह यात्रा भी शब्दों के माध्यम से एक अद्भुत साहित्यिक मुकाम तक पहुँचने की कहानी है।
साहित्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक लेखक की असली परीक्षा उसकी निरंतरता में होती है। प्रेरणा शुरुआत कर सकती है, लेकिन निरंतर प्रयास ही उस यात्रा को आगे बढ़ाता है। 500 कविताएँ लिखना केवल रचनात्मकता नहीं, बल्कि लंबे समय तक समर्पित रहने की क्षमता को दर्शाता है। डिजिटल युग में जहाँ लेखन के स्वरूप बदल रहे हैं, ऐसी उपलब्धियाँ यह याद दिलाती हैं कि लेखन का मूल तत्व आज भी वही है—अभिव्यक्ति, जुड़ाव और पाठकों को भावनात्मक रूप से स्पर्श करने की शक्ति। डॉ. मंजू लोढ़ा की यह उपलब्धि उभरते लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह संदेश देती है कि निरंतर प्रयास और समर्पण से जुनून को पहचान और सम्मान में बदला जा सकता है। साथ ही, यह एसीई बुक ऑफ रिकॉर्ड्स जैसे मंचों के महत्व को भी रेखांकित करती है, जो सार्थक योगदानों को पहचान देते हैं। यह केवल एक रिकॉर्ड की कहानी नहीं, बल्कि समर्पण, सृजनात्मकता और शब्दों की अमर शक्ति की कहानी है।
भारतीय नववर्ष के पावन अवसर पर कवि सम्मेलन, सनातन संदेश से गूंजा सभागार,स्वामी के संबोधन ने बढ़ाई सम्मेलन की शोभा*
सुल्तानपुर,चैत्र नवरात्र एवं भारतीय नववर्ष के पावन पर्व पर पं.रामनरेश त्रिपाठी सभागार में भव्य विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी ऐतिहासिक मनाया गया। 17वर्षो से लगातार आयोजित वर्ष 2008 से हो रहा यह कवि सम्मेलन इस बार हजारों श्रोताओं की उपस्थिति से पूरी तरह खचा- खच भरा रहा सभागार। दूर-दराज से आए लोगों ने देश के नामचीन कवियों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और पूरे समय सभागार तालियों की गूंज से सराबोर रहा। कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का नगरपालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। नगर पालिका अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने सनातन धर्म की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि हमारा सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं,बल्कि यह हमारी संस्कृति-परंपरा और जीवनशैली का आधार है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम न केवल अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं,बल्कि नई पीढ़ी को भी उससे जोड़ने का कार्य करते हैं।" उन्होंने आगे कहा कि कवि सम्मेलन जैसे आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और भारतीय नववर्ष एवं चैत्र नवरात्र जैसे पावन अवसरों पर इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन कर समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं,उन्होंने सभी कहा कि हमारा प्रयास है सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों को आगे बढ़ाना,ऐसे भव्य आयोजनों को निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया और सभी उपस्थित भक्तजनों का आभार व्यक्त किया। विशेष अतिथि स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने अपने संबोधन कहा कि “लिखकर रख लीजिए,मैं यह बात जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यह कोई नई बात नहीं है,बल्कि पहले भी कई मंचों पर इस विषय पर चर्चा हो चुकी है।”वर्तमान परिस्थितियां संघर्ष जैसी स्थितियों की ओर संकेत कर रही हैं और यह आसानी से रुकने वाली नहीं हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा पिछले चार महीनों में देशभर का दौरा किया और हालात को करीब से देखा हूँ। श्री स्वामी जी ने कहाकि दुनिया की अर्थव्यवस्था कई बड़े कारकों पर आधारित है,जिनमें हथियार और अवैध गतिविधियों से जुड़ी व्यवस्था भी शामिल है। उनका मानना है कि जब तक हथियारों का निर्माण जारी रहेगा,तब तक संघर्ष की स्थितियां बनी रह सकती हैं। साथ ही उन्होंने कहाकि भारत की सांस्कृतिक शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि मंदिरों और त्योहारों के माध्यम से देश में एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था संचालित होती है। काशी और अयोध्या में श्रद्धालुओं की भारी संख्या इसका उदाहरण है।
अयोध्या में आज ऐतिहासिक अनुष्ठान, राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना करेंगी राष्ट्रपति मुर्मू

#ayodhyathepresidentwillcreatehistorybyinstallingtheramyantra

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज आस्था और इतिहास का संगम बनने जा रहा है। वर्ष प्रतिपदा के शुभ क्षण में बृहस्पतिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक नए इतिहास का साक्षी बनेगा। द्रौपदी मुर्मू यहां श्रीराम यंत्र की स्थापना कर एक नई परंपरा को आगे बढ़ाएंगी। इस पावन अवसर पर देशभर से आए हजारों श्रद्धालु और अतिथि इस दिव्य क्षण के साक्षी बनेंगे।

राष्ट्रपति करेंगी श्रीराम यंत्र की स्थापना

राष्ट्रपति मुर्मू सुबह लगभग 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगी, जहां से वे सड़क मार्ग द्वारा मंदिर परिसर पहुंचेंगी। अयोध्या में उनके चार घंटे के प्रवास के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। वे आद्य शंकराचार्य द्वार से मंदिर में प्रवेश कर सबसे पहले रामलला का आशीर्वाद लेंगी।श्री राम जन्मभूमि मंदिर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:55 बजे मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की स्थापना। श्रीराम यंत्र स्थापना के बाद राष्ट्रपति प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार का दर्शन-पूजन एवं आरती करेंगी।

देशभर से 7 हजार विशेष मेहमान शामिल होंगे

समारोह का साक्षी बनने के लिए करीब सात हजार मेहमान मौजूद रहेंगे। श्रीराम यंत्र पूजन के विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, सदस्य जगद्गुरु विश्व प्रसन्न तीर्थ और तीन आचार्य उपस्थित रहेंगे। केरल की धर्मगुरु माता अमृतानंदमयी और दत्तात्रेय होसबोले भी समारेाह में शामिल रहेंगे।

श्रीराम यंत्र की खासियत

श्रीराम यंत्र की खासियत मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित होने वाला यह 'श्रीराम यंत्र' वैदिक गणित और ज्यामितीय पैटर्न पर आधारित है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, यह पवित्र यंत्र दो वर्ष पूर्व एक भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या लाया गया था। मान्यता है कि यह यंत्र दिव्य ऊर्जाओं का केंद्र है और सकारात्मक आध्यात्मिक स्पंदन आकर्षित करता है। स्थापना के समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख सदस्य मौजूद रहेंगे।

13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई सुरक्षा व्यवस्था

राष्ट्रपति के आगमन पर जिले की सुरक्षा व्यवस्था को 13 जोन और 37 सेक्टर में बांटी गई है। एसपी/एएसपी स्तर के अधिकारी को जोन व सीओ व निरीक्षकों को सेक्टरों का नोडल बनाया गया है। उच्चाधिकारी जोन और सेक्टरों की निगरानी कर रहे हैं। राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अयोध्या दौरा होना है। वह लगभग चार घंटे तक अयोध्या में मौजूद रहेंगी। इस दौरान पुलिस-प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट, उनकी फ्लीट के मार्ग, राम मंदिर परिसर, राम मंदिर में परकोटा, सभा स्थल, अतिथियों के आने के मार्ग, रूफटॉप, आंतरिक मार्गों के डायवर्जन की व्यवस्था, हनुमानगढ़ी मंदिर, हेलीपैड रामकथा पार्क व अयोध्या धाम की कानून व मार्ग व्यवस्था को अलग-अलग जोन में बांटा गया है।

तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात

आयोजन को लेकर सभी जोन और सेक्टरों में सुरक्षाकर्मियों का जाल बिछाया गया है। सभी जगहों पर लगभग तीन हजार सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 18 एसपी/एएसपी, 33 सीओ, 130 निरीक्षक, 400 उप निरीक्षक, 50 महिला उपनिरीक्षक, 1800 आरक्षी व महिला आरक्षी, 90 यातायात पुलिस, 550 मुख्य आरक्षी और यातायात आरक्षी शामिल हैं।

कोटेदार और पूर्ति निरीक्षक की मिली भगत से  जमकर की जा रही है कालाबाजारी
लखनऊ। - राशनिंग क्षेत्र हशनगंज में कोटेदार  मुनींद्र कुमार और पूर्ति निरीक्षक राजनरायन मिश्रा की मिली भगत से राशन की बिक्री मे  कालाबाजरी करके जमकर धन उगाही की जा रही है। बताते चले हशनगंज   राशनिंग क्षेत्र के अंतर गत आने वाली राशन की दुकान जो मुनेन्द्र केनाम अवांटित है उसपर मानक से ज्यादा राशनकार्ड  बनवाने व वितरण मे धांधली की चर्चा आम होना सुना जा रहा है  हो क्यो न जब युक्त दुकान्दार के  ऊपर  पूर्ति निरीक्षण राज रायण मिश्रा का बरद हस्त प्राप्त है ।

राजनारायण मिश्रा घूस खोरी और अवैध धन उगाही के  चक्कर मे बाराबंकी से हटाये गए है  लखनऊ मे आकर दुकानदारों से बितरण रजिस्टर बेरीफीकेसन का 1500 रुपये प्रतेक - रजिस्टर के हिसाब से रेट फिक्स कर दिये है  और तो और राशनकार्ड बनवाने के नाम पर हजार रुपये  के साथ साथ रजनी गंधा तो देना ही पड़ेगा   साहब तो रजनी गंधा के दीवाने जो है। क्षेत्र की  जनता पूरी तरह उड्डेलित  है यदि आपूर्ति निरीक्षक को युक्त  बितरण क्षेत्र से अविलंब हटाये  जाने की मांग किये है।