भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
बूढनपुर भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महान सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके शासनकाल और उनके द्वारा अपनाए गए बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।समारोह की अध्यक्षता कांता प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बासदेव मौर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लालचंद मौर्य ने किया। संयोजक के रूप में अमन मौर्य, नागेश मौर्य, मनीष मौर्य और आर्यन सम्राट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर एडवोकेट राजेश मौर्य, एडवोकेट जयप्रकाश मौर्य, अर्जुन मौर्य, अनिल मौर्य, जिम्मी सिंह, सुशील उपाध्याय, सागर मौर्य, अजय मौर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति, एकता एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
हर दिन की हेल्दी स्नैकिंग का पूरक बनेगा न्यूट्रिका का पीनट बटर
नई दिल्ली, 26 मार्च, 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखना चाहते हैं, लेकिन सही और आसान विकल्प की तलाश करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में, रोजमर्रा के खानपान में छोटा-सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।

इसी सोच के साथ, बीएन एग्रीटेक के लाइफस्टाइल और वेलनेस ब्रांड न्यूट्रिका ने अपनी नई पीनट बटर रेंज लॉन्च की है। यह सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक ऐसा विकल्प है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हेल्दी खाने को थोड़ा आसान और थोड़ा स्वादिष्ट बना देता है।

न्यूट्रिका के डायरेक्टर और बिज़नेस हेड- एफएमसीजी, स्पर्श सचर ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे आसानी से हेल्दी विकल्प चुन सकें और सेहत को अपनी रोज की आदत बना लें।"

न्यूट्रिका पीनट बटर दो वैरिएंट्स- क्रंची और क्रीमी में आता है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है, 100 प्रतिशत शाकाहारी सामग्री से बना है और इसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

यह रेंज दिल्ली, मुंबई, पुणे और चंडीगढ़ समेत 14 शहरों में जनरल ट्रेड स्टोर्स पर उपलब्ध है और 300 ग्राम, 750 ग्राम व 900 ग्राम के पैक में मिलती है। अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे से लेकर बड़े तक, पूरा परिवार अपनी रोज की डाइट में आसानी से शामिल कर सकता है।

इससे पहले न्यूट्रिका बी हनी और विटामिन युक्त कुकिंग ऑइल्स के जरिए ब्रांड लोगों के बीच अपनी जगह बना चुका है। अब यह नया पीनट बटर उसी सफर को आगे बढ़ाते हुए, हेल्दी लाइफस्टाइल को और भी आसान बनाने की कोशिश है।
*लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस, बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने में जमीनी साझेदारियों के प्रभाव को किया प्रदर्शित*

लखनऊ, 25 मार्च, 2026: एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं। किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”




एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।

उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करना और गहरी जड़ें जमाए सामाजिक दृष्टिकोणों को बदलना, यह सम्मान अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”

इस आयोजन में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणादायक कहानियाँ और प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जिन्होंने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर किया। बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।

इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है। अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
तपोवन मंदिर पहुँचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन: श्री राम जानकी के चरणों में टेका मत्था, राज्य की खुशहाली की मांगी दुआ

रांची | 27 मार्च 2026: रामनवमी के पावन अवसर पर राजधानी रांची के ऐतिहासिक श्री राम जानकी तपोवन मंदिर, निवारणपुर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस भक्तिमय समागम में मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अपनी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री दंपत्ति ने मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरणों में शीश नवाकर राज्य की उन्नति, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

"प्रभु श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारें"

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने समस्त राज्यवासियों को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा:

"आज आस्था के इस भव्य समागम में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भगवान श्री राम के आदर्श हमें धर्म और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। हमें उनके मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। मेरी मंगलकामना है कि प्रभु श्री राम आप सभी की मनोकामनाएं पूरी करें।"

सामाजिक समरसता और सद्भाव की अपील

मुख्यमंत्री ने रांची की गौरवशाली परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न अखाड़ों की शोभायात्राओं का तपोवन मंदिर में मिलन एक ऐतिहासिक दृश्य होता है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस महापर्व को पूरी श्रद्धा, उमंग और आपसी भाईचारे के साथ मनाएं। सामाजिक सद्भाव और समरसता के साथ इस आयोजन को यादगार बनाने का आह्वान किया।

तपोवन मंदिर के सौंदर्यीकरण पर जोर

मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन मंदिर की अपनी एक अलग पहचान है। राज्य सरकार इस पहचान को और सुदृढ़ करने के लिए मंदिर के सौंदर्यीकरण और भव्यता की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही मंदिर को एक नया और भव्य स्वरूप प्रदान करने का कार्य पूर्ण हो जाएगा।

भक्तिमय रहा माहौल

पूजा के दौरान तपोवन मंदिर परिसर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित महंत और मंदिर समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मुख्यमंत्री ने आम श्रद्धालुओं का अभिवादन भी स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री आवास में गूँजी 'जय श्री राम' की गूँज: हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने की रामनवमी पूजा-अर्चना

राँची | 27 मार्च 2026: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, रामनवमी के पावन अवसर पर आज पूरा झारखंड भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। इसी कड़ी में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने भी अपनी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ मिलकर मुख्यमंत्री आवास स्थित मंदिर में पूरी आस्था और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

विधि-विधान से हुआ पूजन

मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन ने रामनवमी के शुभ मुहूर्त पर मंदिर में भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और भक्त हनुमान की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की और भगवान को भोग लगाकर आरती की। इस दौरान पूरा मुख्यमंत्री आवास 'जय श्री राम' और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।

राज्य की सुख-समृद्धि की कामना

पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने भगवान राम से झारखंड के सवा तीन करोड़ जनता के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने विशेष रूप से राज्य के सर्वांगीण विकास, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान राम का आशीर्वाद सभी राज्यवासियों पर बना रहे और प्रदेश उन्नति की नई ऊंचाइयों को छुए।

पारिवारिक और आध्यात्मिक माहौल

यह आयोजन अत्यंत निजी और आध्यात्मिक रहा, जिसमें मुख्यमंत्री परिवार के अन्य सदस्य और सीमित कर्मचारी भी शामिल हुए। पूजा के बाद सभी उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी सभी राज्यवासियों को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपील की है कि यह महापर्व आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया जाए।

300 जरूरतमंद महिलाओं को किचन सेट भेंटकर सीमा सिंह ने मनाया अपना जन्मदिन
मेघाश्रेय फाउंडेशन की तरफ से किया फ्री एंबुलेंस का उद्घाटन

मुंबई। देश की जानी-मानी समाजसेवी तथा मेघाश्रेय फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कल  बांद्रा के  ताज लैंडसन होटल में प्रेरणादायक जन्मदिन मनाया। उन्होंने करीब 300 महिलाओं को किचन सेट सामग्री तथा संस्था से जुड़े सैकड़ो बच्चों को शैक्षणिक सामग्री तथा स्पोर्ट्स किट प्रदान किया। यही नहीं उन्होंने अपने जन्मदिन पर जरूरतमंद मरीजों के लिए संस्था की तरफ से फ्री एम्बुलेंस का उद्घाटन भी किया।

उनके जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए इस अवसर पर बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता डिनू मारिया तथा विक्रांत मैसी उपस्थित रहे। सीमा सिंह ने कहा कि उनके जन्मदिन मनाने का उद्देश्य महिलाओं को कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जागरूक करना तथा बच्चों को शिक्षा तथा खेलकूद के प्रति प्रेरित करना है।

सीमा सिंह की सराहना करते हुए डिनू मारिया ने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में सीमा सिंह द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय होने के साथ-साथ प्रेरणादायक हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों को जागरूक करने की दिशा में मेघाश्रेय फाउंडेशन रचनात्मक कार्य कर रही है। विक्रांत मैसी ने कहा कि सीमा सिंह के कार्यों  से प्रेरणा लेकर समाज के अन्य सक्षम लोगों को भी महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। सीमा सिंह ने दोनों अभिनेताओं का संस्था की तरफ से स्वागत सम्मान किया।

हवन-कन्या पूजन के साथ नवरात्र संपन्न, अंतिम दिन सिद्धिदात्री की हुई उपासना
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन होता है। यह दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। पूरे नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन यदि किसी कारणवश कोई साधक पूरे नौ दिनों तक व्रत या पूजा नहीं कर पाता, तो वह नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से मां सिद्धिदात्री की आराधना करके भी विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों के जीवन से कष्टों और बाधाओं को दूर करती हैं और उनके सभी कार्यों को सफल बनाती हैं।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और कन्या पूजन के साथ शुक्रवार को चैत्र नवरात्र संपन्न हो गया। अंतिम दिन जगत-जननी के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना की गई। श्रद्धालुओं ने घरों में हवन किया और कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर लोक कल्याण की कामना की। इस दौरान घरों में रघुकुलतिलक श्रीरामचंद्र का जन्मोत्सव भी मनाया गया।माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन होता है। यह दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। पूरे नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन यदि किसी कारणवश कोई साधक पूरे नौ दिनों तक व्रत या पूजा नहीं कर पाता, तो वह नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से मां सिद्धिदात्री की आराधना करके भी विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों के जीवन से कष्टों और बाधाओं को दूर करती हैं और उनके सभी कार्यों को सफल बनाती हैं।पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से देवता अत्यंत परेशान हो गए थे, तब वे भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास सहायता के लिए पहुंचे। इसके बाद सभी देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य हुआ। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसी कारण उनका आधा शरीर देवी के स्वरूप में परिवर्तित हो गया और वे अर्धनारीश्वर के रूप में पूजित हुए।
क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

#lockdown_in_india_due_to_iran_us_war_energy_crisis_union_minister_hardeep_puri_reaction

पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी का जनता दर्शन, समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए सख्त निर्देश
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में आम लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें और मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं।
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार आम जनता की समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है और शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
बूढनपुर भरौली टोडर गांव में सम्राट अशोक की 2330वीं जयंती के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर गांव के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर महान सम्राट को श्रद्धांजलि अर्पित की।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सम्राट अशोक के जीवन, उनके शासनकाल और उनके द्वारा अपनाए गए बौद्ध धर्म के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। बताया गया कि सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्यागकर शांति, अहिंसा और मानवता का संदेश पूरे विश्व में फैलाया।समारोह की अध्यक्षता कांता प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बासदेव मौर्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन लालचंद मौर्य ने किया। संयोजक के रूप में अमन मौर्य, नागेश मौर्य, मनीष मौर्य और आर्यन सम्राट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इस अवसर पर एडवोकेट राजेश मौर्य, एडवोकेट जयप्रकाश मौर्य, अर्जुन मौर्य, अनिल मौर्य, जिम्मी सिंह, सुशील उपाध्याय, सागर मौर्य, अजय मौर्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के अंत में सम्राट अशोक के आदर्शों को अपनाने और समाज में शांति, एकता एवं सद्भाव बनाए रखने का संकल्प लिया गया।
हर दिन की हेल्दी स्नैकिंग का पूरक बनेगा न्यूट्रिका का पीनट बटर
नई दिल्ली, 26 मार्च, 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग सेहत का ध्यान तो रखना चाहते हैं, लेकिन सही और आसान विकल्प की तलाश करना चुनौती बन जाता है। ऐसे में, रोजमर्रा के खानपान में छोटा-सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।

इसी सोच के साथ, बीएन एग्रीटेक के लाइफस्टाइल और वेलनेस ब्रांड न्यूट्रिका ने अपनी नई पीनट बटर रेंज लॉन्च की है। यह सिर्फ एक नया प्रोडक्ट नहीं, बल्कि एक ऐसा विकल्प है, जो रोजमर्रा की जिंदगी में हेल्दी खाने को थोड़ा आसान और थोड़ा स्वादिष्ट बना देता है।

न्यूट्रिका के डायरेक्टर और बिज़नेस हेड- एफएमसीजी, स्पर्श सचर ने कहा, "हम चाहते हैं कि लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे आसानी से हेल्दी विकल्प चुन सकें और सेहत को अपनी रोज की आदत बना लें।"

न्यूट्रिका पीनट बटर दो वैरिएंट्स- क्रंची और क्रीमी में आता है। यह प्रोटीन और फाइबर से भरपूर है, 100 प्रतिशत शाकाहारी सामग्री से बना है और इसमें किसी तरह का आर्टिफिशियल प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया गया है। यानि स्वाद के साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

यह रेंज दिल्ली, मुंबई, पुणे और चंडीगढ़ समेत 14 शहरों में जनरल ट्रेड स्टोर्स पर उपलब्ध है और 300 ग्राम, 750 ग्राम व 900 ग्राम के पैक में मिलती है। अच्छी बात यह है कि इसे बच्चे से लेकर बड़े तक, पूरा परिवार अपनी रोज की डाइट में आसानी से शामिल कर सकता है।

इससे पहले न्यूट्रिका बी हनी और विटामिन युक्त कुकिंग ऑइल्स के जरिए ब्रांड लोगों के बीच अपनी जगह बना चुका है। अब यह नया पीनट बटर उसी सफर को आगे बढ़ाते हुए, हेल्दी लाइफस्टाइल को और भी आसान बनाने की कोशिश है।
*लखनऊ में एजुकेट गर्ल्स ने मनाया 18वाँ स्थापना दिवस, बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने में जमीनी साझेदारियों के प्रभाव को किया प्रदर्शित*

लखनऊ, 25 मार्च, 2026: एजुकेट गर्ल्स, जिसे 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, ने 25 मार्च 2026 को लखनऊ में अपना 18वाँ स्थापना दिवस मनाया। इस पुरस्कार को व्यापक रूप से एशिया का नोबेल पुरस्कार माना जाता है। इस महत्वपूर्ण आयोजन में 300 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए, जिनमें टीम बालिका स्वयंसेवक, फील्ड स्टाफ, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, सिविल सोसाइटी साझेदार और शिक्षा क्षेत्र के हितधारक शामिल थे। इस अवसर पर संस्था की यात्रा पर विचार किया गया और भारत भर में बालिका शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया गया।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्य संबोधन दिया और राज्य में प्रत्येक बालिका के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के सतत प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “देशव्यापी पहलों जैसे बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ से लेकर उत्तर प्रदेश में एजुकेट गर्ल्स जैसे साझेदारों के माध्यम से निरंतर प्रयासों तक, हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। वर्ष 2017 के बाद से राज्य में बुनियादी, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में व्यापक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिनमें बेहतर बुनियादी ढाँचा, संसाधनों में वृद्धि और ड्रॉपआउट दर को कम करने के लिए केंद्रित प्रयास शामिल हैं। कायाकल्प योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के विस्तार जैसी सरकारी योजनाओं ने बालिकाओं को स्कूल में वापस लाने और उनकी शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अधिकांश बालिकाएँ कक्षाओं में हैं और ड्रॉपआउट दर लगातार घट रही है। मिशन शक्ति के माध्यम से हम बालिकाओं को गरिमा, अवसर और समानता के साथ जीवन जीने में सक्षम बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम एजुकेट गर्ल्स के साथ मिलकर बालिका शिक्षा और सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के हर प्रयास में दृढ़ता से साथ खड़े हैं।”

माध्यमिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने राज्यभर में सामुदायिक भागीदारी और पुनःसमावेशन प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई प्रगति को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “लगातार प्रयासों के माध्यम से हम लगभग 23 जिलों में बालिकाओं की पहचान कर उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने में सफल हुए हैं, साथ ही जोखिमग्रस्त छात्रों को विद्यालय में बनाए रखने में भी सहयोग किया है। विद्या कार्यक्रम के अंतर्गत टीम बालिका स्वयंसेवक गाँव-गाँव जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं को पुनः शिक्षा से जोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और सामाजिक या आर्थिक कारणों से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं के लिए ओपन स्कूलिंग के माध्यम से निरंतरता सुनिश्चित कर रहे हैं। किशोर बालिकाओं को पुनः मुख्यधारा में लाना एक जटिल चुनौती बनी हुई है, लेकिन एजुकेट गर्ल्स ने मजबूत सामुदायिक जुड़ाव और साझेदारियों के माध्यम से इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके जमीनी अनुभवों ने हमारी योजना और क्रियान्वयन को मजबूत किया है, जिससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि कोई भी बालिका पीछे न रह जाए। हम इस सहयोग और एजुकेट गर्ल्स, टीम बालिका तथा सभी साझेदारों की बालिका शिक्षा को आगे बढ़ाने की निरंतर प्रतिबद्धता को अत्यंत महत्व देते हैं।”




एजुकेट गर्ल्स की सीईओ गायत्री नायर लोबो ने संस्था की जमीनी पहल से राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तनकारी शक्ति बनने की यात्रा पर प्रकाश डाला और 2025 के रेमन मैग्सेसे पुरस्कार का श्रेय अग्रिम पंक्ति में कार्यरत स्वयंसेवकों और फील्ड टीमों के सामूहिक साहस को दिया।

उन्होंने कहा, “एजुकेट गर्ल्स यह दर्शाता है कि मजबूत साझेदारियाँ किस प्रकार बड़े स्तर पर सार्थक परिवर्तन ला सकती हैं। ज्ञान का पिटारा जैसे हमारे रेमेडियल लर्निंग कार्यक्रमों के माध्यम से हम सबसे वंचित बालिकाओं तक पहुँचते हैं, उन्हें स्कूल में वापस लाने और सीखने की राह पर बनाए रखने में सहयोग करते हैं। रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, जिसे एशिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है हमारी टीम बालिका स्वयंसेवकों, फील्ड टीमों और साझेदारों के सामूहिक प्रयासों को मान्यता देता है और सेवा, ईमानदारी तथा जमीनी नेतृत्व की उस भावना को दर्शाता है, जो हमारे कार्य को आगे बढ़ाती है। घर-घर जाकर स्कूल से बाहर बालिकाओं की पहचान करना और गहरी जड़ें जमाए सामाजिक दृष्टिकोणों को बदलना, यह सम्मान अग्रिम पंक्ति में काम कर रहे लोगों के असाधारण साहस और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। हम अपने कार्य में निरंतर सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।”

इस आयोजन में शिक्षार्थियों और स्वयंसेवकों की प्रेरणादायक कहानियाँ और प्रस्तुतियाँ भी शामिल थीं, जिन्होंने शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को उजागर किया। बिहार की प्रगति टीम से जुड़ी शिक्षार्थी हलीमा सादिया भी इस कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। संचालन निदेशक विक्रम सिंह सोलंकी द्वारा संचालित टीम बालिका पैनल चर्चा में 55,000 से अधिक स्वयंसेवकों के प्रभाव को दर्शाया गया, जो घर-घर जाकर समुदायों में परिवर्तन ला रहे हैं और बाल विवाह, घरेलू जिम्मेदारियों तथा सामाजिक मान्यताओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जो अक्सर बालिकाओं के स्कूल छोड़ने का कारण बनती हैं।

इन्हीं में से बदायूं की सोनम ने साझा किया कि पिछले दो वर्षों में एजुकेट गर्ल्स के साथ उनकी यात्रा ने उन्हें अधिक आत्मविश्वासी बनाया है और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति को समझने में मदद की है। सोनभद्र की प्रांचल गुप्ता ने बताया कि ड्रॉपआउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ना उन्हें अपार खुशी और उद्देश्य देता है। अंकित मौर्य ने अपने गाँव में जागरूकता बढ़ाने के प्रयासों को साझा किया, जहाँ वे सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवारों को, विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करते हैं। निर्मला यादव की कहानी विशेष रूप से प्रेरणादायक रही। कम उम्र में विवाह और विरोध का सामना करने के बावजूद उन्होंने अपनी शिक्षा जारी रखी, यहाँ तक कि उनकी किताबें नष्ट कर दी गईं, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और बीए तथा एमएसडब्ल्यू की पढ़ाई पूर्ण की, जिससे वे कई लोगों के लिए प्रेरणा बनीं।
अस्पताल जाने से पहले इन बातों का खास ध्यान रखकर बनें 'मरीज के लिए सबसे बड़ी मदद' - डॉ अतुल मलिकराम (राजनीतिक रणनीतिकार)

जब परिवार का कोई सदस्य बीमार होकर अस्पताल में भर्ती होता है, तो रिश्तेदार और जान-पहचान वाले उसे देखने जरूर जाते हैं। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है कि हम मुश्किल समय में एक-दूसरे के साथ खड़े रहें। लेकिन कई बार हमारी यही अच्छी भावना मरीज और उसके परिवार के लिए परेशानी भी बन जाती है। इसलिए अस्पताल जाते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

अस्पताल में मरीज पहले से ही शारीरिक और मानसिक तनाव में होता है, इसलिए सबसे जरूरी है कि हम संवेदनशीलता और समझदारी के साथ व्यवहार करें। हमारी मौजूदगी से उसे सुकून मिलना चाहिए, न कि उसका तनाव बढ़ना चाहिए। ऐसे समय में यदि हम आर्थिक रूप से थोड़ी मदद कर सकें, तो यह परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकती है। जैसे हम खुशी के अवसरों पर सहयोग करते हैं, वैसे ही मुश्किल समय में किया गया छोटा-सा सहयोग भी बहुत मायने रखता है, क्योंकि इलाज, दवाइयाँ और जांच का खर्च परिवार पर भारी बोझ डाल देता है।

आजकल एक आम समस्या यह भी है कि लोग बिना जानकारी के डॉक्टर बनने की कोशिश करने लगते हैं। इंटरनेट या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर सलाह देना मरीज और उसके परिवार के तनाव को और बढ़ा देता है। इलाज डॉक्टर का काम है, इसलिए हमें केवल भावनात्मक सहारा देना चाहिए। मरीज के सामने हमेशा सकारात्मक बातें करनी चाहिए। “सब ठीक हो जाएगा”, “आप जल्दी ठीक हो जाएंगे” जैसे शब्द मरीज का मनोबल बढ़ाते हैं, जबकि नकारात्मक उदाहरण देना उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। अस्पताल में साफ-सफाई और संक्रमण से बचाव का विशेष ध्यान रखना चाहिए। हाथ साफ रखना, मास्क पहनना और अस्पताल के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि वहां भर्ती मरीजों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर खुद को खांसी-जुकाम या बुखार जैसी समस्या हो, तो अस्पताल जाने से बचना ही बेहतर है।

मरीज को सबसे ज्यादा जरूरत आराम की होती है, इसलिए ज्यादा देर तक उसके पास बैठना या बातचीत करना सही नहीं है। थोड़ी देर मिलकर हौसला बढ़ाना और फिर वापस आ जाना ही सही तरीका है। अक्सर लोग ज्यादा देर बैठना अपनापन समझते हैं, जबकि इससे मरीज थक जाता है। इसी तरह एक साथ ज्यादा लोगों का जाना भी सही नहीं है। भीड़ होने से मरीज, अन्य मरीजों और अस्पताल स्टाफ को परेशानी होती है, इसलिए सीमित संख्या में ही लोगों को जाना चाहिए।

अस्पताल में शांति बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। तेज आवाज में बात करना, हँसना या मोबाइल पर जोर से बातचीत करना दूसरों के लिए असुविधाजनक होता है। मोबाइल को साइलेंट रखना और धीरे बोलना ही सही व्यवहार है। साथ ही, मरीज की निजता का सम्मान करना भी जरूरी है। हर व्यक्ति अपनी बीमारी के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहता, इसलिए अनावश्यक सवाल पूछना या रिपोर्ट देखने की जिद करना उचित नहीं है। डॉक्टर और अस्पताल स्टाफ अपने काम में प्रशिक्षित होते हैं, इसलिए उनके काम में दखल देना या उनसे बहस करना गलत है। इससे इलाज में बाधा आ सकती है और कई बार स्थिति बिगड़ भी सकती है। यदि कोई शंका हो, तो उसे शांत तरीके से समझना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।

खाने-पीने की चीजें ले जाते समय भी सावधानी जरूरी है। हर मरीज की डाइट अलग होती है, इसलिए बिना पूछे कुछ भी देना नुकसानदायक हो सकता है। परिवार या डॉक्टर से पूछकर ही कुछ ले जाना चाहिए। मरीज के साथ व्यवहार करते समय दया दिखाने के बजाय उसे भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना अधिक जरूरी है। “बेचारा” जैसे शब्द उसकी हिम्मत कम करते हैं, जबकि भरोसा और सकारात्मकता उसे ताकत देती है। सिर्फ मिलने जाना ही काफी नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर प्रैक्टिकल मदद करना भी उतना ही जरूरी है। दवा लाना, रिपोर्ट लेना, ब्लड की व्यवस्था करना या परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों में सहयोग करना वास्तव में बड़ी मदद साबित होती है।

अंत में यही समझना जरूरी है कि अस्पताल जाना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। हमारा व्यवहार, हमारी बात और हमारा सहयोग ही मरीज के लिए सबसे बड़ी दवा बन सकता है। जब भी अस्पताल जाएं, इस बात का ध्यान रखें कि आपका उद्देश्य मरीज को राहत देना होना चाहिए, न कि परेशानी। आपकी छोटी-सी समझदारी और संवेदनशीलता किसी के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
तपोवन मंदिर पहुँचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन: श्री राम जानकी के चरणों में टेका मत्था, राज्य की खुशहाली की मांगी दुआ

रांची | 27 मार्च 2026: रामनवमी के पावन अवसर पर राजधानी रांची के ऐतिहासिक श्री राम जानकी तपोवन मंदिर, निवारणपुर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस भक्तिमय समागम में मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन अपनी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री दंपत्ति ने मंदिर में पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के चरणों में शीश नवाकर राज्य की उन्नति, सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

"प्रभु श्री राम के आदर्शों को जीवन में उतारें"

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने समस्त राज्यवासियों को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा:

"आज आस्था के इस भव्य समागम में शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। भगवान श्री राम के आदर्श हमें धर्म और सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। हमें उनके मूल्यों को अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए। मेरी मंगलकामना है कि प्रभु श्री राम आप सभी की मनोकामनाएं पूरी करें।"

सामाजिक समरसता और सद्भाव की अपील

मुख्यमंत्री ने रांची की गौरवशाली परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि विभिन्न अखाड़ों की शोभायात्राओं का तपोवन मंदिर में मिलन एक ऐतिहासिक दृश्य होता है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस महापर्व को पूरी श्रद्धा, उमंग और आपसी भाईचारे के साथ मनाएं। सामाजिक सद्भाव और समरसता के साथ इस आयोजन को यादगार बनाने का आह्वान किया।

तपोवन मंदिर के सौंदर्यीकरण पर जोर

मंदिर की ऐतिहासिक महत्ता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तपोवन मंदिर की अपनी एक अलग पहचान है। राज्य सरकार इस पहचान को और सुदृढ़ करने के लिए मंदिर के सौंदर्यीकरण और भव्यता की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही मंदिर को एक नया और भव्य स्वरूप प्रदान करने का कार्य पूर्ण हो जाएगा।

भक्तिमय रहा माहौल

पूजा के दौरान तपोवन मंदिर परिसर 'जय श्री राम' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री ने वहां उपस्थित महंत और मंदिर समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच मुख्यमंत्री ने आम श्रद्धालुओं का अभिवादन भी स्वीकार किया।

मुख्यमंत्री आवास में गूँजी 'जय श्री राम' की गूँज: हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने की रामनवमी पूजा-अर्चना

राँची | 27 मार्च 2026: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव, रामनवमी के पावन अवसर पर आज पूरा झारखंड भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है। इसी कड़ी में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने भी अपनी धर्मपत्नी और गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन के साथ मिलकर मुख्यमंत्री आवास स्थित मंदिर में पूरी आस्था और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।

विधि-विधान से हुआ पूजन

मुख्यमंत्री और विधायक कल्पना सोरेन ने रामनवमी के शुभ मुहूर्त पर मंदिर में भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और भक्त हनुमान की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की और भगवान को भोग लगाकर आरती की। इस दौरान पूरा मुख्यमंत्री आवास 'जय श्री राम' और भक्ति गीतों से गुंजायमान रहा।

राज्य की सुख-समृद्धि की कामना

पूजा-अर्चना के उपरांत मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने भगवान राम से झारखंड के सवा तीन करोड़ जनता के लिए आशीर्वाद मांगा। उन्होंने विशेष रूप से राज्य के सर्वांगीण विकास, सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रार्थना की कि भगवान राम का आशीर्वाद सभी राज्यवासियों पर बना रहे और प्रदेश उन्नति की नई ऊंचाइयों को छुए।

पारिवारिक और आध्यात्मिक माहौल

यह आयोजन अत्यंत निजी और आध्यात्मिक रहा, जिसमें मुख्यमंत्री परिवार के अन्य सदस्य और सीमित कर्मचारी भी शामिल हुए। पूजा के बाद सभी उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।

इससे पहले, मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी सभी राज्यवासियों को रामनवमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपील की है कि यह महापर्व आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाया जाए।

300 जरूरतमंद महिलाओं को किचन सेट भेंटकर सीमा सिंह ने मनाया अपना जन्मदिन
मेघाश्रेय फाउंडेशन की तरफ से किया फ्री एंबुलेंस का उद्घाटन

मुंबई। देश की जानी-मानी समाजसेवी तथा मेघाश्रेय फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने कल  बांद्रा के  ताज लैंडसन होटल में प्रेरणादायक जन्मदिन मनाया। उन्होंने करीब 300 महिलाओं को किचन सेट सामग्री तथा संस्था से जुड़े सैकड़ो बच्चों को शैक्षणिक सामग्री तथा स्पोर्ट्स किट प्रदान किया। यही नहीं उन्होंने अपने जन्मदिन पर जरूरतमंद मरीजों के लिए संस्था की तरफ से फ्री एम्बुलेंस का उद्घाटन भी किया।

उनके जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए इस अवसर पर बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता डिनू मारिया तथा विक्रांत मैसी उपस्थित रहे। सीमा सिंह ने कहा कि उनके जन्मदिन मनाने का उद्देश्य महिलाओं को कैंसर तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जागरूक करना तथा बच्चों को शिक्षा तथा खेलकूद के प्रति प्रेरित करना है।

सीमा सिंह की सराहना करते हुए डिनू मारिया ने कहा कि समाज सेवा के क्षेत्र में सीमा सिंह द्वारा किए जा रहे कार्य सराहनीय होने के साथ-साथ प्रेरणादायक हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों को जागरूक करने की दिशा में मेघाश्रेय फाउंडेशन रचनात्मक कार्य कर रही है। विक्रांत मैसी ने कहा कि सीमा सिंह के कार्यों  से प्रेरणा लेकर समाज के अन्य सक्षम लोगों को भी महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। सीमा सिंह ने दोनों अभिनेताओं का संस्था की तरफ से स्वागत सम्मान किया।

हवन-कन्या पूजन के साथ नवरात्र संपन्न, अंतिम दिन सिद्धिदात्री की हुई उपासना
नितेश श्रीवास्तव

भदोही। माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन होता है। यह दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। पूरे नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन यदि किसी कारणवश कोई साधक पूरे नौ दिनों तक व्रत या पूजा नहीं कर पाता, तो वह नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से मां सिद्धिदात्री की आराधना करके भी विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों के जीवन से कष्टों और बाधाओं को दूर करती हैं और उनके सभी कार्यों को सफल बनाती हैं।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन और कन्या पूजन के साथ शुक्रवार को चैत्र नवरात्र संपन्न हो गया। अंतिम दिन जगत-जननी के सिद्धिदात्री स्वरूप की उपासना की गई। श्रद्धालुओं ने घरों में हवन किया और कुंवारी कन्याओं को भोजन कराकर लोक कल्याण की कामना की। इस दौरान घरों में रघुकुलतिलक श्रीरामचंद्र का जन्मोत्सव भी मनाया गया।माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को नवरात्रि का समापन होता है। यह दिन मां भगवती के नौवें स्वरूप, मां सिद्धिदात्री की उपासना के लिए समर्पित होता है। पूरे नवरात्रि में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन यदि किसी कारणवश कोई साधक पूरे नौ दिनों तक व्रत या पूजा नहीं कर पाता, तो वह नवमी के दिन श्रद्धा और भक्ति से मां सिद्धिदात्री की आराधना करके भी विशेष कृपा प्राप्त कर सकता है।

धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री भक्तों के जीवन से कष्टों और बाधाओं को दूर करती हैं और उनके सभी कार्यों को सफल बनाती हैं।पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महिषासुर के अत्याचारों से देवता अत्यंत परेशान हो गए थे, तब वे भगवान विष्णु और भगवान शिव के पास सहायता के लिए पहुंचे। इसके बाद सभी देवताओं के तेज से मां सिद्धिदात्री का प्राकट्य हुआ। यह भी मान्यता है कि भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठ सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसी कारण उनका आधा शरीर देवी के स्वरूप में परिवर्तित हो गया और वे अर्धनारीश्वर के रूप में पूजित हुए।
क्या कोरोना की तरह देश में लगेगा लॉकडाउन? मोदी सरकार ने दूर की आशंकाएं, कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं

#lockdown_in_india_due_to_iran_us_war_energy_crisis_union_minister_hardeep_puri_reaction

पश्चिम एशिया में संकट के चलते दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मच गया है। भारत में भी इसका असर देखा जा रहा है। ईरान जंग के बीच भारत में लॉकडाउन की अफवाहें तेजी से फैल रही हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से ऐसी खबरें फैल रही हैं। जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या देश में कोविड जैसी स्थिति फिर से आ गई है? क्या देश में लॉकडाउन लगने वाला है?

लॉकडाउन की अफवाहों को खारिज किया

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस तरफ की अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है। हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को साफ किया कि देशव्यापी लॉकडाउन की अफवाहें पूरी तरह से झूठी हैं। सरकार के सामने फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति की स्थिति नियंत्रण में है। देश में कहीं भी पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कमी नहीं है। वहीं, खुदरा दुकानों के पास पर्याप्त स्टॉक है। वे बिना किसी रुकावट के ईंधन वितरित कर रहे हैं।

तेल की कीमतों को लेकर हरदीप पुरी का पोस्ट

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। इस कारण दुनियाभर में उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में कीमतों में लगभग 30%-50% की वृद्धि हुई है, उत्तरी अमेरिकी देशों में 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% की वृद्धि हुई है।

अपने वित्त पर बोझ उठाने का फैसला किया-पुरी

हरदीप पुरी ने बताया कि मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे या तो अन्य सभी देशों की तरह भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाएं ताकि भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से सुरक्षित रहें। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद से पिछले 4 वर्षों से अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को निभाते हुए भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बार फिर वित्तीय स्थिति को लेकर बोझ उठाने का फैसला किया है।

गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी का जनता दर्शन, समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए सख्त निर्देश
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में आम लोगों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे फरियादियों ने अपनी शिकायतें और मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं।
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जनता से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेश सरकार आम जनता की समस्याओं के शीघ्र निस्तारण के लिए प्रतिबद्ध है और शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।