पुस्तक पढ़ने से विकसित होता है मस्तिष्क-प्रो.सत्यकाम

मुक्त विश्वविद्यालय में पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन

संजय द्विवेदी प्रयागराज।उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के केन्द्रीय पुस्तकालय में एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारम्भ मंगलवार को किया गया।पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में पुस्तक पढ़ने की आदत जरूर डालनी चाहिए।जिससे मानस पटल विकसित होता है तथा व्यक्तित्व में गम्भीरता आती है। डिजिटल युग में लोगों में पुस्तक पढ़ने की प्रवृत्ति कम हो रही है जो कि चिंता जनक है।लोगों में पुस्तक पढ़ने की रुचि जगाने के लिए जगह-जगह पुस्तक मेले लगाए जा रहे हैं।उन्होंने कई महान साहित्यकारों की पुस्तको का वर्णन करते हुए कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में इन ग्रन्थों का अध्ययन कर युवा पीढ़ी ज्ञानार्जन कर सकती है।पुस्तक प्रदर्शनी में आये हुए अतिथियों का स्वागत उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ आर0 जे0 मौर्य ने पुष्प-गुच्छ से किया। इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, वित्त अधिकारी पूनम मिश्रा एवं विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।इस एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी में विश्वविद्वालय के अधिकारियो शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओ का आवागमन लगा रहा।पुस्तक प्रदर्शनी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित प्रकाशको/आपूर्तिकर्ताओं ने अपनी स्टाल लगाई।विश्वविद्यालय के पुस्तक प्रेमियो विद्यार्थियो ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें सभी प्रकार की पुस्तकें प्रकाशकों आपूर्तिकर्ताओं द्वारा मेले में प्रदर्शित की गई।पुस्तक प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय पुस्तकालय के लिए निदेशको प्राध्यापको परामर्शदाताओ विषय विशेषज्ञों द्वारा पुस्तकों का चयन किया गया।जिनका क्रय पुस्तकालय में किया जायेगा।शिक्षको एवं छात्रो के अकादमिक दृष्टिकोण से यह पुुस्तक मेला अत्यन्त ही लाभप्रद साबित हुआ जिसमें विभिन्न प्रकाशकों की पुस्तके एक स्थान पर उपलब्ध हो सकी। इस एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का समापन सायं 05ः00 बजे हुआ।

कानपुर में गंगा पर नए सेतु निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी
* ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए बनेंगे दो-दो लेन के दो पुल, परियोजना पर ₹753 करोड़ खर्च

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में जनपद कानपुर में गंगा नदी पर नए सेतु के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह सेतु ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए बनाया जाएगा।
सरकार के अनुसार यह परियोजना अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत संचालित की जाएगी। इसके तहत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु तथा उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
प्रस्तावित स्थल पर उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) द्वारा ट्रांसगंगा सिटी विकसित की जा रही है। यहां कानपुर और आसपास की औद्योगिक इकाइयों को स्थानांतरित करने की योजना है। इसके विकसित होने के बाद गंगा नदी पार करने वाले भारी और हल्के वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है।
सरकार के मुताबिक वर्तमान में गंगा बैराज मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक है और भविष्य में इसके और बढ़ने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक चार लेन पुल के बजाय दो-दो लेन के दो अलग-अलग सेतु बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि यातायात का दबाव विभाजित हो सके और आवागमन सुचारु बना रहे।
परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 753.13 करोड़ रुपये है। इसमें से 460 करोड़ रुपये अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से वहन करेगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और शहर तथा ट्रांसगंगा सिटी के बीच यातायात व्यवस्था में भी बड़ा सुधार होगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस, जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि

* सीएम से मिले एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंगलवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर में बन रहे इस एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
प्रतिनिधिमंडल में एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है।
बताया गया कि एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम फिलहाल ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन की तिथि तय करेगा।
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हवाई अड्डा होगा। एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और यात्री टर्मिनल बनाया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में यह क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी, जबकि तीसरे और चौथे चरण के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल करीब 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है।
एयरपोर्ट में डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही इसे नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
डीएम ने जनपद के शतप्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से आच्छादित किए जाने के उद्देश्य से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

*गेहूं क्रय केन्द्रों पर भी होगी फार्मर रजिस्ट्री की सुविधा*


*गोण्डा 10 मार्च,2026*।जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन  ने जनपद के शतप्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से आच्छादित किए जाने के उद्देश्य से फार्मर्स रजिस्ट्री के प्रचार वाहन को कलेक्ट्रेट परिसर से रवाना किया। उन्होंने बताया है कि यह प्रचार वाहन जिले के समस्त विकासखण्डों में फार्मर्स रजिस्ट्री के लाभ के संबंध में सभी कृषकों को जागरूक करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के साथ साथ धान एवं गेहूं का क्रय, फसल बीमा का लाभ, किसान क्रेडिट कार्ड सहित खेती से संबंधित सभी प्रकार के लाभ भविष्य में किसानों को फार्मर्स रजिस्ट्री के आधार पर ही अनुमन्य होंगें। फार्मर्स रजिस्ट्री जनसेवा केंद्र के माध्यम से कराने के साथ साथ कृषि, राजस्व या पंचायत विभाग के कर्मचारी का सहयोग लेकर भी कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान स्वयं भी अपने मोबाइल से फार्मर्स रजिस्ट्री का लिंक डाउनलोड करके इसे स्वयं भी कर सकते हैं। जिलाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के अधिक प्रयासों से अब तक जनपद में 70 प्रतिशत से अधिक किसानों का फार्मर्स रजिस्ट्री कराया जा चुका है। जब कि माह अगस्त में जनपद में फार्मर्स रजिस्ट्री की प्रगति 49 प्रतिशत थी जो की अब बढ़कर 70.36 प्रतिशत हो चुकी है। पिछले 06 माह में जनपद में लगभग 01 लाख अतिरिक्त किसान के द्वारा फार्मर्स रजिस्ट्री कराया गया है, एवं प्रतिदिन इसमें वृद्धि हो रही है।

इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी श्रीमती रिंकी जायसवाल, उपनिदेशक कृषि प्रेम कुमार ठाकुर, एसडीओ कृषि शिव शंकर चौधरी सहित अन्य सभी अधिकारी उपस्थित रहे।
योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जाए डीएम
फर्रूखाबाद l नगर पंचायत शमसाबाद कार्यालय का जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय में अभिलेखों के रख-रखाव, जन्म–मृत्यु पंजीकरण, स्वच्छता व्यवस्था तथा नगर पंचायत क्षेत्र में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में अभिलेखों का अद्यतन एवं सुव्यवस्थित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए तथा जन्म–मृत्यु पंजीकरण से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा नियमित साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की और कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए।
उन्होंने निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुके विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इस मौके पर अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत शमसाबाद सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
योजनाओं की ग्रांट को योजनाओं पर खर्च करने के दिए खड़े निर्देश डीएम
फर्रूखाबाद l मंगलवार को विकासखंड कार्यालय शमसाबाद का जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विकासखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली, अभिलेखों के रख-रखाव, जनसुनवाई व्यवस्था, साफ-सफाई तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रख-रखाव तथा कार्यों की नियमित समीक्षा एवं निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विकासखंड को प्राप्त केंद्रीय वित्त योजना एवं राज्य वित्त योजना की ग्रांट का शत-प्रतिशत उपभोग करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी कर्मियों की सेवा पुस्तिकाओं एवं कैशबुक को अद्यतन रखने, फार्मर रजिस्ट्री के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने तथा स्पेशल क्लोज एवं असंतुष्ट आई0जी0आर0एस0 प्रकरणों की समीक्षा कर उनका समाधान सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया।
इस मौके पर जिला विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, सहायक खंड विकास अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती, विशेष अभियान में 409 वाहनों की जांच
* ओवरलोडिंग पर 29.65 लाख रुपये की वसूली, सीमावर्ती जिलों में निगरानी और कड़ी करने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उपखनिजों के अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाकर सघन कार्रवाई की गई। इस दौरान 409 वाहनों की जांच की गई और ओवरलोडिंग व अनियमितता पाए जाने पर लगभग 29.65 लाख रुपये का अधिरोपण कर धनराशि राजकोष में जमा कराई गई।
यह विशेष अभियान 6 से 8 मार्च 2026 तक गोपनीय और आकस्मिक रूप से संचालित किया गया। अभियान सचिव/निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग उत्तर प्रदेश माला श्रीवास्तव के निर्देश पर निदेशालय स्तर से चलाया गया।
जांच के दौरान उपखनिजों का परिवहन करने वाले 409 वाहनों की सघन जांच की गई। अधिकांश वाहन वैध परिवहन प्रपत्रों के साथ पाए गए, जबकि जिन वाहनों में अवैध परिवहन या ओवरलोडिंग पाई गई, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की गई।
अभियान की समीक्षा करते हुए माला श्रीवास्तव ने अंतर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों से आने वाले उपखनिजों का परिवहन आईएसटीपी के साथ ही सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्थिति में ओवरलोडिंग न होने दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनपदों के खनन क्षेत्रों में स्रोत बिंदु पर ही लोडिंग मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर वहीं कार्रवाई की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थापित आईओटी आधारित पीटीजेड और एएनपीआर कैमरों से युक्त चेकगेट्स को 24×7 संचालित रखा जाए, ताकि वाहनों की लगातार निगरानी की जा सके।
सचिव/निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म ने सभी जनपदीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में अवैध खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए और शासन की मंशा के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उच्च शिक्षा के शिक्षकों को मिलेगी 5 लाख तक की नकदरहित चिकित्सा सुविधा

* कैबिनेट की मंजूरी के बाद 2 लाख से अधिक शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी होंगे लाभान्वित

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। योजना के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल किए जाएंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
इस योजना के तहत लाभार्थियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी नकदरहित उपचार की सुविधा मिलेगी। प्रति शिक्षक और कर्मचारी पर 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च होगा। प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे, जिस पर सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके अंतर्गत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की नकदरहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से आच्छादित होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील निर्णय ले रही है। यह योजना उनके और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
यूजीसी काला कानून के विरोध में स्वर्ण समाज प्रयागराज से भारतीय किसान यूनियन भानू की टीम दिल्ली पहुंची
विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ।जनपद प्रयागराज से भारतीय किसान यूनियन भानू की टीम यूजीसी काला कानून के विरोध में दिल्ली पहुंची। इस टीम में राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर बीके सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री राकेश सिंह , प्रदेश महामंत्री ठाकुर कृष्णराज सिंह , जिलाध्यक्ष पंकज प्रताप सिंह और हजारों की संख्या में संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल थे।

यह जानकारी देते हुए संगठन के नेताओं ने बताया कि यूजीसी काला कानून के विरोध में यह टीम दिल्ली में प्रदर्शन करेगी और सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग करेगी। उन्होंने बताया कि यह कानून छात्रों और शिक्षकों के हित में नहीं है और इसे वापस लेना आवश्यक है।

संगठन के नेताओं ने बताया कि वे दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों और अधिकारियों से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराएंगे। उन्होंने बताया कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

इस बीच, संगठन के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और यूजीसी काला कानून को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे इस कानून को वापस लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

स्वर्ण समाज का आरोप यूजीसी काला कानून से छात्रों का भविष्य होगा बर्बाद

प्रयागराज,स्वर्ण समाज के नेताओं ने यूजीसी काला कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह कानून छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर देगा। उन्होंने सरकार से इस कानून को वापस लेने की अपील की है।

भाजपा नेताओं पर आरोप यूजीसी काला कानून के पीछे है भाजपा की राजनीति

प्रयागराज, स्वर्ण समाज के नेताओं ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया है कि यूजीसी काला कानून के पीछे भाजपा की राजनीति है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने पर तुली हुई है।
आगामी त्योहारों और परीक्षाओं के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए
प्रयागराज में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू, 16 अप्रैल तक रहेगा प्रभावी


विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ,अपर पुलिस आयुक्त, कानून एवं व्यवस्था, कमिश्नरेट- प्रयागराज द्वारा मंगलवार से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के अन्तर्गत सम्पूर्ण कमिश्नरेट प्रयागराज मे 9 मार्च 2026 से 16 अप्रैल 2026 तक निषेधाज्ञा जारी की गई है।

निषेधाज्ञा में निम्नलिखित प्रतिबंध लगाए गए हैं:

कोई भी वक्ता/व्यक्ति/राजनैतिक दल किसी धर्म, जाति एवं व्यक्ति विशेष की आलोचना न तो अपने वक्तव्य में करेगा और न ही साम्प्रदायिक उन्माद व जातिगत संघर्ष उत्पन्न करने वाले आपत्तिजनक कैसेट ही बजायेगा।
कोई भी वाहन सार्वजनिक स्थानों पर जाति के नाम अथवा जाति को महिमामंडित करने सम्बन्धी स्लोगन/स्टिकर आदि लगाकर नहीं चलेगा।
कोई भी कस्बों, तहसीलों और जिला मुख्यालय में जातिगत या अभिमान के कारण जाति को महिमामंडित करने वाले तथा भौगोलिक क्षेत्रों को जातिगत क्षेत्र या जागीर घोषित करने वाले न तो कोई साइनबोर्ड्स लगायेगा और न ही किसी प्रकार की कोई जातिगत घोषणा करेगा।
जाति आधारित रैलियों तथा समाज में जाति संघर्ष को बढ़ावा देने वाली "लोक-व्यवस्था" और "राष्ट्रीय एकता" के विपरीत किसी भी प्रकार के जातिगत कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जायेगा।
कोई भी सोशल मीडिया पर किसी जाति को महिमामंडित करने तथा किसी जाति की निंदा तथा जातिगत द्वेष फैलाने वाले संदेश प्रसारित नहीं करेगा।
कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रास्ते में अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेगा। यातायात तथा आवागमन में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं करेगा।
किसी भी सार्वजनिक स्थल पर पाँच या पाँच से अधिक व्यक्ति बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के धरना, जुलूस प्रदर्शन आदि के लिए एकत्रित नहीं होंगे और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेंगे।
कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का अग्नेयास्त्र विष्फोटक पदार्थ या ऐसी वस्तु जिनका प्रयोग आक्रमण किये जाने में किया जा सकता है यथा चाकू, भाला, बरछी, तलवार, छुरा आदि लेकर नहीं चलेगा और न ही इनको किसी स्थान पर एकत्रित करेगा और न ही इनका सार्वजनिक प्रदर्शन करेगा।

इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।
पुस्तक पढ़ने से विकसित होता है मस्तिष्क-प्रो.सत्यकाम

मुक्त विश्वविद्यालय में पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन

संजय द्विवेदी प्रयागराज।उ.प्र. राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज के केन्द्रीय पुस्तकालय में एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का भव्य शुभारम्भ मंगलवार को किया गया।पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर सत्यकाम ने किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में पुस्तक पढ़ने की आदत जरूर डालनी चाहिए।जिससे मानस पटल विकसित होता है तथा व्यक्तित्व में गम्भीरता आती है। डिजिटल युग में लोगों में पुस्तक पढ़ने की प्रवृत्ति कम हो रही है जो कि चिंता जनक है।लोगों में पुस्तक पढ़ने की रुचि जगाने के लिए जगह-जगह पुस्तक मेले लगाए जा रहे हैं।उन्होंने कई महान साहित्यकारों की पुस्तको का वर्णन करते हुए कहा कि मुक्त विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में इन ग्रन्थों का अध्ययन कर युवा पीढ़ी ज्ञानार्जन कर सकती है।पुस्तक प्रदर्शनी में आये हुए अतिथियों का स्वागत उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ आर0 जे0 मौर्य ने पुष्प-गुच्छ से किया। इस अवसर पर कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, वित्त अधिकारी पूनम मिश्रा एवं विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।इस एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी में विश्वविद्वालय के अधिकारियो शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओ का आवागमन लगा रहा।पुस्तक प्रदर्शनी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित प्रकाशको/आपूर्तिकर्ताओं ने अपनी स्टाल लगाई।विश्वविद्यालय के पुस्तक प्रेमियो विद्यार्थियो ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें सभी प्रकार की पुस्तकें प्रकाशकों आपूर्तिकर्ताओं द्वारा मेले में प्रदर्शित की गई।पुस्तक प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय पुस्तकालय के लिए निदेशको प्राध्यापको परामर्शदाताओ विषय विशेषज्ञों द्वारा पुस्तकों का चयन किया गया।जिनका क्रय पुस्तकालय में किया जायेगा।शिक्षको एवं छात्रो के अकादमिक दृष्टिकोण से यह पुुस्तक मेला अत्यन्त ही लाभप्रद साबित हुआ जिसमें विभिन्न प्रकाशकों की पुस्तके एक स्थान पर उपलब्ध हो सकी। इस एक दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का समापन सायं 05ः00 बजे हुआ।

कानपुर में गंगा पर नए सेतु निर्माण को कैबिनेट की मंजूरी
* ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए बनेंगे दो-दो लेन के दो पुल, परियोजना पर ₹753 करोड़ खर्च

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में जनपद कानपुर में गंगा नदी पर नए सेतु के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। यह सेतु ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने के लिए बनाया जाएगा।
सरकार के अनुसार यह परियोजना अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत संचालित की जाएगी। इसके तहत गंगा नदी पर चार लेन का उच्च स्तरीय सेतु तथा उससे जुड़े पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाएगा।
प्रस्तावित स्थल पर उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीसीडा) द्वारा ट्रांसगंगा सिटी विकसित की जा रही है। यहां कानपुर और आसपास की औद्योगिक इकाइयों को स्थानांतरित करने की योजना है। इसके विकसित होने के बाद गंगा नदी पार करने वाले भारी और हल्के वाहनों की संख्या में काफी वृद्धि होने की संभावना है।
सरकार के मुताबिक वर्तमान में गंगा बैराज मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक है और भविष्य में इसके और बढ़ने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक चार लेन पुल के बजाय दो-दो लेन के दो अलग-अलग सेतु बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि यातायात का दबाव विभाजित हो सके और आवागमन सुचारु बना रहे।
परियोजना की कुल स्वीकृत लागत लगभग 753.13 करोड़ रुपये है। इसमें से 460 करोड़ रुपये अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि शेष राशि संबंधित प्राधिकरण अपने संसाधनों से वहन करेगा। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से कानपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और शहर तथा ट्रांसगंगा सिटी के बीच यातायात व्यवस्था में भी बड़ा सुधार होगा।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मिला एयरोड्रम लाइसेंस, जल्द तय होगी उद्घाटन तिथि

* सीएम से मिले एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन, पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मंगलवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर भारत सरकार की ओर से जारी एयरोड्रम लाइसेंस प्रस्तुत किया। इसके साथ ही जेवर में बन रहे इस एयरपोर्ट के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
प्रतिनिधिमंडल में एयरपोर्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टोफ श्नेलमैन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को परियोजना की प्रगति और आगामी चरणों की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार एयरोड्रम लाइसेंस मिलने के बाद अब नियामकीय स्वीकृतियों की अंतिम प्रक्रिया जारी है।
बताया गया कि एयरपोर्ट का एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम फिलहाल ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के पास समीक्षा के लिए लंबित है। सुरक्षा मंजूरी मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय कर उद्घाटन और वाणिज्यिक उड़ानों के संचालन की तिथि तय करेगा।
गौतमबुद्ध नगर के जेवर में विकसित हो रहा यह ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश-दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण हवाई अड्डा होगा। एयरपोर्ट को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में एक रनवे और यात्री टर्मिनल बनाया गया है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। दूसरे चरण में यह क्षमता बढ़ाकर 3 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जाएगी, जबकि तीसरे और चौथे चरण के बाद कुल क्षमता 7 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
पहले चरण में टर्मिनल भवन का क्षेत्रफल करीब 1.38 लाख वर्गमीटर है, जिसमें 48 चेक-इन काउंटर, 9 सुरक्षा जांच लेन और 9 इमिग्रेशन काउंटर बनाए गए हैं। इसके अलावा 10 एयरोब्रिज और 28 विमान पार्किंग स्टैंड की व्यवस्था की गई है। रनवे पर प्रति घंटे लगभग 30 उड़ानों के संचालन की क्षमता विकसित की गई है। एयरपोर्ट परिसर में आधुनिक कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब भी तैयार किया जा रहा है, जिसकी प्रारंभिक क्षमता लगभग 2.5 लाख टन कार्गो प्रतिवर्ष होगी, जिसे आगे चलकर 15 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है।
एयरपोर्ट में डिजीयात्रा आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और डिजिटल पैसेंजर प्रोसेसिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। साथ ही इसे नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें सौर ऊर्जा, वर्षा जल संचयन और इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर में हवाई यातायात का दबाव कम होगा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में निवेश, पर्यटन तथा रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
डीएम ने जनपद के शतप्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से आच्छादित किए जाने के उद्देश्य से प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

*गेहूं क्रय केन्द्रों पर भी होगी फार्मर रजिस्ट्री की सुविधा*


*गोण्डा 10 मार्च,2026*।जिलाधिकारी श्रीमती प्रियंका निरंजन  ने जनपद के शतप्रतिशत किसानों को फार्मर रजिस्ट्री से आच्छादित किए जाने के उद्देश्य से फार्मर्स रजिस्ट्री के प्रचार वाहन को कलेक्ट्रेट परिसर से रवाना किया। उन्होंने बताया है कि यह प्रचार वाहन जिले के समस्त विकासखण्डों में फार्मर्स रजिस्ट्री के लाभ के संबंध में सभी कृषकों को जागरूक करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के साथ साथ धान एवं गेहूं का क्रय, फसल बीमा का लाभ, किसान क्रेडिट कार्ड सहित खेती से संबंधित सभी प्रकार के लाभ भविष्य में किसानों को फार्मर्स रजिस्ट्री के आधार पर ही अनुमन्य होंगें। फार्मर्स रजिस्ट्री जनसेवा केंद्र के माध्यम से कराने के साथ साथ कृषि, राजस्व या पंचायत विभाग के कर्मचारी का सहयोग लेकर भी कराया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसान स्वयं भी अपने मोबाइल से फार्मर्स रजिस्ट्री का लिंक डाउनलोड करके इसे स्वयं भी कर सकते हैं। जिलाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों के अधिक प्रयासों से अब तक जनपद में 70 प्रतिशत से अधिक किसानों का फार्मर्स रजिस्ट्री कराया जा चुका है। जब कि माह अगस्त में जनपद में फार्मर्स रजिस्ट्री की प्रगति 49 प्रतिशत थी जो की अब बढ़कर 70.36 प्रतिशत हो चुकी है। पिछले 06 माह में जनपद में लगभग 01 लाख अतिरिक्त किसान के द्वारा फार्मर्स रजिस्ट्री कराया गया है, एवं प्रतिदिन इसमें वृद्धि हो रही है।

इस अवसर पर मुख्य राजस्व अधिकारी श्रीमती रिंकी जायसवाल, उपनिदेशक कृषि प्रेम कुमार ठाकुर, एसडीओ कृषि शिव शंकर चौधरी सहित अन्य सभी अधिकारी उपस्थित रहे।
योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाया जाए डीएम
फर्रूखाबाद l नगर पंचायत शमसाबाद कार्यालय का जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय में अभिलेखों के रख-रखाव, जन्म–मृत्यु पंजीकरण, स्वच्छता व्यवस्था तथा नगर पंचायत क्षेत्र में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया कि कार्यालय में अभिलेखों का अद्यतन एवं सुव्यवस्थित रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए तथा जन्म–मृत्यु पंजीकरण से संबंधित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण किया जाए। उन्होंने नगर पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा नियमित साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने नगर पंचायत क्षेत्र में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की और कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक पारदर्शिता एवं समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए।
उन्होंने निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुके विकास कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष जोर देते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
इस मौके पर अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत शमसाबाद सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
योजनाओं की ग्रांट को योजनाओं पर खर्च करने के दिए खड़े निर्देश डीएम
फर्रूखाबाद l मंगलवार को विकासखंड कार्यालय शमसाबाद का जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी द्वारा निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विकासखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली, अभिलेखों के रख-रखाव, जनसुनवाई व्यवस्था, साफ-सफाई तथा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की।
जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
जिलाधिकारी ने लंबित प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रख-रखाव तथा कार्यों की नियमित समीक्षा एवं निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विकासखंड को प्राप्त केंद्रीय वित्त योजना एवं राज्य वित्त योजना की ग्रांट का शत-प्रतिशत उपभोग करने के निर्देश दिए।
उन्होंने सभी कर्मियों की सेवा पुस्तिकाओं एवं कैशबुक को अद्यतन रखने, फार्मर रजिस्ट्री के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण करने तथा स्पेशल क्लोज एवं असंतुष्ट आई0जी0आर0एस0 प्रकरणों की समीक्षा कर उनका समाधान सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया।
इस मौके पर जिला विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी, सहायक खंड विकास अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती, विशेष अभियान में 409 वाहनों की जांच
* ओवरलोडिंग पर 29.65 लाख रुपये की वसूली, सीमावर्ती जिलों में निगरानी और कड़ी करने के निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उपखनिजों के अवैध खनन, अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाकर सघन कार्रवाई की गई। इस दौरान 409 वाहनों की जांच की गई और ओवरलोडिंग व अनियमितता पाए जाने पर लगभग 29.65 लाख रुपये का अधिरोपण कर धनराशि राजकोष में जमा कराई गई।
यह विशेष अभियान 6 से 8 मार्च 2026 तक गोपनीय और आकस्मिक रूप से संचालित किया गया। अभियान सचिव/निदेशक, भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग उत्तर प्रदेश माला श्रीवास्तव के निर्देश पर निदेशालय स्तर से चलाया गया।
जांच के दौरान उपखनिजों का परिवहन करने वाले 409 वाहनों की सघन जांच की गई। अधिकांश वाहन वैध परिवहन प्रपत्रों के साथ पाए गए, जबकि जिन वाहनों में अवैध परिवहन या ओवरलोडिंग पाई गई, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की गई।
अभियान की समीक्षा करते हुए माला श्रीवास्तव ने अंतर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि अन्य राज्यों से आने वाले उपखनिजों का परिवहन आईएसटीपी के साथ ही सुनिश्चित किया जाए और किसी भी स्थिति में ओवरलोडिंग न होने दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जनपदों के खनन क्षेत्रों में स्रोत बिंदु पर ही लोडिंग मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए और आवश्यकता पड़ने पर वहीं कार्रवाई की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अवैध परिवहन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के लिए स्थापित आईओटी आधारित पीटीजेड और एएनपीआर कैमरों से युक्त चेकगेट्स को 24×7 संचालित रखा जाए, ताकि वाहनों की लगातार निगरानी की जा सके।
सचिव/निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म ने सभी जनपदीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में अवैध खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई लगातार जारी रखी जाए और शासन की मंशा के अनुरूप सख्ती से कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उच्च शिक्षा के शिक्षकों को मिलेगी 5 लाख तक की नकदरहित चिकित्सा सुविधा

* कैबिनेट की मंजूरी के बाद 2 लाख से अधिक शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी होंगे लाभान्वित

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाएगी।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने उच्च शिक्षा के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अब तक उन्हें चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।
मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री ने 5 सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों को नकदरहित चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। योजना के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षक तथा राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल किए जाएंगे। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी इस योजना का लाभ दिया जाएगा।
इस योजना के तहत लाभार्थियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ संबद्ध निजी अस्पतालों में भी नकदरहित उपचार की सुविधा मिलेगी। प्रति शिक्षक और कर्मचारी पर 2479.70 रुपये का प्रीमियम खर्च होगा। प्रदेश में लगभग 2 लाख से अधिक शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी इस योजना से लाभान्वित होंगे, जिस पर सरकार को प्रतिवर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे।
योजना का संचालन राज्य समग्र स्वास्थ्य एवं एकीकृत सेवा एजेंसी (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। इसके अंतर्गत लाभार्थियों को 5 लाख रुपये तक की नकदरहित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी, जिसकी दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
मंत्री ने बताया कि लाभार्थियों और उनके आश्रितों का विवरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रतिवर्ष 30 जून तक साचीज को उपलब्ध कराया जाएगा। जो व्यक्ति पहले से केंद्र या राज्य सरकार की अन्य स्वास्थ्य योजनाओं से आच्छादित होंगे, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के सम्मान और उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए लगातार संवेदनशील निर्णय ले रही है। यह योजना उनके और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
यूजीसी काला कानून के विरोध में स्वर्ण समाज प्रयागराज से भारतीय किसान यूनियन भानू की टीम दिल्ली पहुंची
विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ।जनपद प्रयागराज से भारतीय किसान यूनियन भानू की टीम यूजीसी काला कानून के विरोध में दिल्ली पहुंची। इस टीम में राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर बीके सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री राकेश सिंह , प्रदेश महामंत्री ठाकुर कृष्णराज सिंह , जिलाध्यक्ष पंकज प्रताप सिंह और हजारों की संख्या में संगठन के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शामिल थे।

यह जानकारी देते हुए संगठन के नेताओं ने बताया कि यूजीसी काला कानून के विरोध में यह टीम दिल्ली में प्रदर्शन करेगी और सरकार से इस कानून को वापस लेने की मांग करेगी। उन्होंने बताया कि यह कानून छात्रों और शिक्षकों के हित में नहीं है और इसे वापस लेना आवश्यक है।

संगठन के नेताओं ने बताया कि वे दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों और अधिकारियों से मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और सरकार को अपनी मांगों से अवगत कराएंगे। उन्होंने बताया कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती है, तो वे आगे भी आंदोलन जारी रखेंगे।

इस बीच, संगठन के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में रैली निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और यूजीसी काला कानून को वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे इस कानून को वापस लेने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

स्वर्ण समाज का आरोप यूजीसी काला कानून से छात्रों का भविष्य होगा बर्बाद

प्रयागराज,स्वर्ण समाज के नेताओं ने यूजीसी काला कानून को वापस लेने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह कानून छात्रों के भविष्य को बर्बाद कर देगा। उन्होंने सरकार से इस कानून को वापस लेने की अपील की है।

भाजपा नेताओं पर आरोप यूजीसी काला कानून के पीछे है भाजपा की राजनीति

प्रयागराज, स्वर्ण समाज के नेताओं ने भाजपा नेताओं पर आरोप लगाया है कि यूजीसी काला कानून के पीछे भाजपा की राजनीति है। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने पर तुली हुई है।
आगामी त्योहारों और परीक्षाओं के मद्देनजर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए
प्रयागराज में धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू, 16 अप्रैल तक रहेगा प्रभावी


विश्वनाथ प्रताप सिंह

प्रयागराज ,अपर पुलिस आयुक्त, कानून एवं व्यवस्था, कमिश्नरेट- प्रयागराज द्वारा मंगलवार से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा-163 के अन्तर्गत सम्पूर्ण कमिश्नरेट प्रयागराज मे 9 मार्च 2026 से 16 अप्रैल 2026 तक निषेधाज्ञा जारी की गई है।

निषेधाज्ञा में निम्नलिखित प्रतिबंध लगाए गए हैं:

कोई भी वक्ता/व्यक्ति/राजनैतिक दल किसी धर्म, जाति एवं व्यक्ति विशेष की आलोचना न तो अपने वक्तव्य में करेगा और न ही साम्प्रदायिक उन्माद व जातिगत संघर्ष उत्पन्न करने वाले आपत्तिजनक कैसेट ही बजायेगा।
कोई भी वाहन सार्वजनिक स्थानों पर जाति के नाम अथवा जाति को महिमामंडित करने सम्बन्धी स्लोगन/स्टिकर आदि लगाकर नहीं चलेगा।
कोई भी कस्बों, तहसीलों और जिला मुख्यालय में जातिगत या अभिमान के कारण जाति को महिमामंडित करने वाले तथा भौगोलिक क्षेत्रों को जातिगत क्षेत्र या जागीर घोषित करने वाले न तो कोई साइनबोर्ड्स लगायेगा और न ही किसी प्रकार की कोई जातिगत घोषणा करेगा।
जाति आधारित रैलियों तथा समाज में जाति संघर्ष को बढ़ावा देने वाली "लोक-व्यवस्था" और "राष्ट्रीय एकता" के विपरीत किसी भी प्रकार के जातिगत कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जायेगा।
कोई भी सोशल मीडिया पर किसी जाति को महिमामंडित करने तथा किसी जाति की निंदा तथा जातिगत द्वेष फैलाने वाले संदेश प्रसारित नहीं करेगा।
कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक रास्ते में अवरोध उत्पन्न नहीं करेगा और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेगा। यातायात तथा आवागमन में कोई व्यवधान उत्पन्न नहीं करेगा।
किसी भी सार्वजनिक स्थल पर पाँच या पाँच से अधिक व्यक्ति बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के धरना, जुलूस प्रदर्शन आदि के लिए एकत्रित नहीं होंगे और न ही ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करेंगे।
कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का अग्नेयास्त्र विष्फोटक पदार्थ या ऐसी वस्तु जिनका प्रयोग आक्रमण किये जाने में किया जा सकता है यथा चाकू, भाला, बरछी, तलवार, छुरा आदि लेकर नहीं चलेगा और न ही इनको किसी स्थान पर एकत्रित करेगा और न ही इनका सार्वजनिक प्रदर्शन करेगा।

इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा-223 के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।