राष्ट्रपति मुर्मू ने फहराया तिरंगा, कर्तव्‍य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर की झलक

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भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरंगा फहराया। इस दौरान गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और सैंटोस कोस्टा भी मौजूद रहे।

शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक्र चक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया है। शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं।

सेना के हेलिकॉप्टरों ने बनाई शानदार फॉर्मेशन

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों द्वारा ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गई। हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत किया।

सेना ने किया भीष्म टैंक का प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने टी-90 टैंक का प्रदर्शन किया। इसे भारतीय सेना ने 'भीष्म' नाम दिया है। रूस में निर्मित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। यह टैंक 2001 से भारतीय सेना का हिस्सा है और इसे राजस्थान, पंजाब में पाकिस्तान सीमा और लेह में चीन सीमा पर तैनात किया गया है। 2005 में इनकी बड़ी खेप भारत आई। शुरुआत में यह पूरी तरह रूसी तकनीक से बना था, लेकिन अब इसके कई पुर्जे भारत में ही बनाए जाते हैं। तमिलनाडु के अवाडी में इन टैंकों को तैयार किया जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर किया मार्च

दिव्यास्त्र और अग्निबाण टुकड़ी ने परेड की। साथ ही रॉकेट टुकड़ी सूर्यास्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल की टुकड़ी ने भी कर्तव्य पथ पर परेड की और हर भारतीय के सीने को गर्व से भर दिया। आकाश मिसाइल और ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के पशु दस्ते ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन हर्षिता यादव ने किया।

अरुणाचल स्काउट और राजपूत रेजीमेंट का मार्च

ऊंचे और पहाड़ी इलाकों पर युद्ध में विशेषज्ञा रखने वाले अरुणाचल स्काउट ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इसके बाद सेना की राजपूत रेजीमेंट ने मार्च किया। यह सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट में से एक है। इसके बाद असम रेजीमेंट के जवानों ने मार्च किया। सेना की जम्मू कश्मीर लाइट इंफेंट्री के दस्ते ने मार्च किया। साथ ही कंबाइंड मिलिट्री बैंड ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व सूबेदार एए खान ने किया। सिख लाइट इंफेंट्री के मार्चिंग दस्ते ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इंडियन नेवी बैंड ने सामंजस्य और भव्यता को दिखाते हुए जय भारती की धुन बजाई।

संविधान, लोकतंत्र और सुशासन के रास्ते विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की सर्वाेच्चता और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे प्रदेश में हर्षाेल्लास, देशभक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। उन्होंने शहीद सैनिकों एवं पुलिस जवानों के परिजनों को सम्मानित किया तथा छत्तीसगढ़ पुलिस बल को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का संविधान हमारी लोकतांत्रिक आस्था, समानता और सामाजिक न्याय का मजबूत आधार है। छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा, विकास और समृद्धि के लिए राज्य सरकार पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने गणतंत्र दिवस संदेश में राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, नक्सल उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति, किसानों-श्रमिकों-महिलाओं के सशक्तीकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य-औद्योगिक विकास और सुशासन की विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को स्मरण करने का दिन भी है। उन्होंने संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि संविधान सामाजिक समरसता, समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को संविधान की आत्मा बताया और कहा कि भारतीय गणतंत्र ने ऐसा खुला समाज निर्मित किया है, जहां हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने हाल ही में राज्य स्थापना की रजत जयंती मनाई है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित इस राज्य ने 25 वर्षों में विकास की सशक्त यात्रा तय की है। उन्होंने बताया कि संविधान के मंदिर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से संपन्न हुआ। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से सुसज्जित यह भवन छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती राज्यभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के सीतामढ़ी हरचौका तक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डिजिटल संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जो आज की पीढ़ी को जनजातीय नायकों के बलिदान से परिचित कराता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माओवादी हिंसा लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने निर्णायक रणनीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि जवानों के अदम्य साहस और सतत अभियानों के परिणामस्वरूप माओवादी हिंसा अब अंतिम चरण में है और मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य पूर्ण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, बस्तर कैफे जैसी पहलों और नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती अन्नदाता की समृद्धि रही है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का देश में सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। बीते दो वर्षों में किसानों के खातों में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किए गए हैं। अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए गए हैं और प्रतिदिन लगभग 2 हजार आवासों का निर्माण हो रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य विद्युत उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और शीघ्र ही प्रथम स्थान की ओर अग्रसर है। सौर ऊर्जा, गैस आधारित परियोजनाओं और शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य पर तेजी से काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान किए जाने की जानकारी दी। अब तक 14,948 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने श्रमिकों के लिए ईएसआई, श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बात कही।

मुख्यमंत्री ने बताया कि युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की कमी दूर की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, 9 हजार स्मार्ट क्लास और 22 हजार कंप्यूटर की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नए मेडिकल कालेजों की स्वीकृति से अब इनकी संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बिलासपुर में मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नवा रायपुर को आईटी, एआई, फार्मा और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य एआई का है और छत्तीसगढ़ इसकी धुरी बनेगा।

मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, बस्तर पंडुम, चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सरगुजा और जशपुर पर्यटन के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने ई-ऑफिस, जेम पोर्टल, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन की मजबूती पर बल दिया।

समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा योजनाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिन्होंने प्रदेश की विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

विकसित छत्तीसगढ़ का आह्वान

मुख्यमंत्री ने स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया की कविता की पंक्तियों के माध्यम से जनभागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने अंत में प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।

राजधानी में हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया 77 वां गणतंत्र दिवस, राज्यपाल रमेन डेका ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर ली परेड की सलामी

रायपुर- गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका द्वारा आज यहां राजधानी रायपुर में पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और परेड की सलामी ली गई। परेड निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव विकास शील और पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम भी उपस्थित थे।

राज्यपाल श्री डेका ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता हैं। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

*18 सालों तक 26 जनवरी को मनाया गया गणतंत्र दिवस, जानिए इस दिन का ऐतिहासिक महात्व

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आज पूरा देश बड़े ही धूमधान से 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हम भारतीय 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते है। इसी दिन हमें हमारा संविधान मिला था। देश की आजादी के करीब ढाई साल के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था।

18 वर्ष तक 26 जनवरी को मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

दरअसल आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। करीब 18 वर्ष तक 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) मनाया जाता रहा। दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने की थी। अधिवेशन में पंडित नेहरु ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को उसका प्रभुत्व (डोमिनियन का पद) नहीं देती है तो भारत खुद को स्वतंत्र घोषित कर देगा। इसलिए कांग्रेस ने 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) घोषित किया।

1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी दिन जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था। फिर देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 को अधिकारिक रूप से स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव लागू होने की तिथि को महत्व देने के लिए ही 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। इसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्रता दिवस ?

बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन किया गया। फिर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने तकरीबन दो साल, 11 महीने और 18 दिन में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया। सन 1948 के शुरूआत में ही डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा में पहली बार संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। लेकिन इनमें कुछ संशोधनों के बाद नवंबर 1949 में इसे स्वीकार कर लिया गया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इसके बाद हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र का जश्न मनाते हैं।

बता दें कि संविधान के लागू होने के बाद इसके निर्माताओं को ये विचार आया कि इस दिन को ऐसे अवसर पर मनाया जाना चाहिए जिसका संबंद्ध राष्ट्रीय गौरव से हो। इसके बाद ये फैसला लिया गया कि गणतंत्रता दिवस ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ यानी 26 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

अन्नपूर्णा भोजनालय में शराबियों ने मचाया उत्पात, व्यवसाई से भी की मारपीट

- गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बस स्टेशन के व्यस्ततम इलाके से भी नदारद रही पुलिस
- पूर्व में होटल मालिक अमित गुप्ता को गोली मारकर की गई थी लूटपाट

सुल्तानपुर। शहर का बस स्टेशन स्थित अन्नपूर्णा भोजनालय एक बार फिर चर्चा में है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीन शराबियों ने नशे में जमकर उत्पात मचाया। भोजनालय के मालिक के भतीजे की कॉलर पकड़ कर थप्पड़ जड़े। बगल से गुजर रहे व्यवसाई से भी मारपीट और गाली गलौज की। मामले में पीड़ित ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

रविवार की शाम तकरीबन 5:30 बजे तीन शराबी अन्नपूर्णा भोजनालय में घुसे और खाने का ऑर्डर दिया। इसके बाद बैठकर शराब पीने लगे। अन्नपूर्णा भोजनालय के अवधेश गुप्ता ने शराब पीने से मना किया तो उनसे गाली-गलौज की। इसके बाद खाने का पैसा मांगने पर भतीजे मोलू गुप्ता का भी कॉलर पकड़ कर थप्पड़ मारा। इसी दौरान उधर से गुजर रहे व्यवसाई अरविंद चौरसिया ने बीच बचाव करने का प्रयास किया तो तीनों शराबी उत्पातियों ने उनसे ना सिर्फ गाली गलौज की बल्कि मारपीट भी करने लगे। लोगों ने किसी तरह बीच बचाव किया। उत्पात मचा रहे तीनों ने जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में अरविंद चौरसिया ने कोतवाली नगर में तहरीर दी है।
NH-119 भूमि मुआवजा विवाद: किसानों का उग्र प्रदर्शन, नजरबंदी के आरोपों से भड़का आक्रोश
बहसूमा।NH-119 बहसूमा बायपास झुनझुनी रोड स्थित जेएसएस पब्लिक स्कूल के पास चार ग्रामों—राजूपुर, फतेहपुर हंसापुर, मोड़ कला एवं मोहम्मदपुर शाकिस्त—की कृषि भूमि के अधिग्रहण में बाजार दर से कम मुआवजा दिए जाने को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। बीते पाँच वर्षों से मुआवजा बढ़ोतरी की मांग कर रहे किसानों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित कर प्रशासन के रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ आगमन के दौरान 21 जनवरी की रात संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कैप्टन एवं कोषाध्यक्ष व प्रवक्ता कपिल चहल को पुलिस प्रशासन द्वारा घर में नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

किसानों ने बताया कि लगभग आठ माह पूर्व मेरठ के जिलाधिकारी द्वारा एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि किसानों को बाजार मूल्य से बेहद कम मुआवजा दिया गया है तथा 540 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से ब्याज सहित मुआवजा दिया जाना न्यायोचित है। इसके बावजूद अब तक समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया, जिससे किसानों में गहरी निराशा और आक्रोश बना हुआ है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर समिति की रिपोर्ट को शीघ्र लागू कराएं और प्रभावित किसानों को उनका वाजिब हक दिलाया जाए। मौके पर बिजनौर लोकसभा सांसद चंदन चौहान के प्रतिनिधि युगांश राणा भी उपस्थित रहे और किसानों की समस्याओं को सुना।

इस अवसर पर किसान कपिल चहल, पूर्व चेयरमैन विनोद चाहल, सुभाष कैप्टन, नरेंद्र सिंह चाहल, प्रवेश जेनर, प्रवेश अहलावत, पिंटू देशवाल, शोकिंद्र, जोगेंद्र सिंह, सुनीत कुमार, राहुल देशवाल, मनीष, योगेंद्र, हरेंद्र चहल, पप्पू जैनर, मूलचंद सैनी, राजीव जैनर, मुखिया, राजकुमार, बबलू, दिनेश कुमार, मारुत देशवाल, श्रवण कुमार सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन
गणतंत्र दिवस पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने फहराया तिरंगा, संविधान के प्रति निष्ठा का दिलाया संकल्प
लखनऊ।  गणतंत्र दिवस के अवसर पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने सूचना भवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संविधान के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर उन्होंने सूचना भवन परिसर में आयोजित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें विभागीय गतिविधियों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। अपने संबोधन में विशाल सिंह ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र देश में जन्म लिया है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल भावनाओं को आत्मसात कर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, वहीं उत्साह और उल्लास के प्रतीक रूप में रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़े गए।


पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर बगलें क्यों झांकने लगते हैं भाजपा नेता : विनोद पांडेय

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झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह रवैया पूरी तरह राजनीतिक हताशा और दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।

श्री पांडेय ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विदेश यात्राएं करते हैं, तब भाजपा नेताओं को न तो संविधान की याद आती है और न ही राष्ट्रीय स्वाभिमान की। लेकिन वही भाजपा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राज्यहित में किए जा रहे विदेश दौरे को लेकर अनर्गल आरोप लगा रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस और यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर झारखंड में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों को लेकर गए हैं। यह दौरा पूरी तरह राज्य के आर्थिक विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, न कि किसी निजी या राजनीतिक उद्देश्य से।

विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अपने रांची लौटने के बाद दावोस और यूके दौरे से जुड़ी उपलब्धियों, निवेश प्रस्तावों और हुई बैठकों की पूरी जानकारी स्वयं सार्वजनिक रूप से देंगे। उन्होंने कहा कि झामुमो पारदर्शिता में विश्वास करता है और जनता को भ्रमित करने की भाजपा की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा को ट्रिब्यूट करने हेमंत जी उनके लंदन स्थित कॉलेज गए। दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिए सहमति बनी है। बाबूलाल जी को यूके जाकर झारखंड सरकार के शत प्रतिशत छात्रवृत्ति की मदद से वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों से मक भेंट करना चाहिए। बाबूलाल जी को गर्व होगा और शायद उनको एहसास होगा हेमंत जी के वजन का।

श्री पांडेय ने कहा कि झारखंड की जनता समझदार है और वह जानती है कि कौन राज्य के विकास के लिए काम कर रहा है और कौन केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान देकर उनको बरगला रहा है।

झामुमो ने किया 'पद्म भूषण' का स्वागत, पर दोहराई 'भारत रत्न' की मांग: "हाशिये की आवाज थे दिशोम गुरु"

राँची, 26 जनवरी 2026: झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा का झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्वागत किया है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि गुरुजी का कद और उनका संघर्ष 'भारत रत्न' के योग्य है और यह मांग निरंतर जारी रहेगी।

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संघर्षों का रहा है लंबा इतिहास

11 जनवरी 1944 को नेमरा (रामगढ़) में जन्मे गुरुजी का जीवन महाजनी प्रथा, शोषण और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए समर्पित रहा। झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि गुरुजी ने न केवल झारखंड को अलग पहचान दिलाई, बल्कि नशा मुक्ति और शिक्षा जैसे सामाजिक सुधारों से आदिवासी-मूलवासी समाज के जीवन को बदला।

"बाबा भारत के अनमोल रत्न थे" - विनोद पांडेय

पद्म भूषण की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए विनोद पांडेय ने केंद्र सरकार को साधुवाद दिया, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया:

"गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे। मेरी नजर में बाबा भारत के अनमोल रत्न थे। क्या आदिवासी समाज में अब तक कोई नायक भारत रत्न के योग्य नहीं हुआ? सच्चाई यह है कि आदिवासी समाज को अब तक मुख्यधारा का हिस्सा ही नहीं माना गया है। करोड़ों समर्थकों की भावना है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।"

विधानसभा से पारित हो चुका है प्रस्ताव

उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से शिबू सोरेन को 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। 4 अगस्त 2025 को उनके निधन के बाद से ही राज्यभर में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग जोर पकड़ रही है।

गुरुजी की राजनीतिक विरासत:

मुख्यमंत्री: तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।

सांसद: दुमका से 8 बार लोकसभा सांसद चुने गए।

आंदोलन: पृथक झारखंड राज्य के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका।

आकर्षक हेडलाइंस (विकल्प):

विकल्प 1: पद्म भूषण पर झामुमो का साधुवाद, लेकिन 'भारत रत्न' की मांग पर अडिग; विनोद पांडेय बोले- "बाबा रत्न नहीं, महा रत्न थे।"

विकल्प 2: "आदिवासी नायक को मिले सर्वोच्च सम्मान"; गुरुजी को पद्म भूषण मिलने पर झामुमो ने जताई खुशी, भारत रत्न की मांग तेज।

विकल्प 3: दिशोम गुरु के संघर्षों का सम्मान: केंद्र ने दी पद्म भूषण की घोषणा, समर्थकों को अब 'भारत रत्न' का इंतजार।

ऑक्सफोर्ड के सोमरविल कॉलेज पहुँचे मुख्यमंत्री: क्लाइमेट एक्शन और एनवायरमेंटल पॉलिसी पर विशेषज्ञों के साथ साझा किया झारखंड का विजन

ऑक्सफोर्ड / रांची, 26 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अपने यूके दौरे के क्रम में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सोमरविल कॉलेज का दौरा किया। कॉलेज की प्रिंसिपल कैथरीन रॉयल और 'ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' (OICSD) की डायरेक्टर प्रो. राधिका खोसला ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। इस दौरान झारखंड और ऑक्सफोर्ड के बीच जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर गहरे सहयोग की नींव रखी गई।

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सतत विकास और जलवायु नीति पर चर्चा

बैठक का मुख्य केंद्र पर्यावरण नीति और क्लाइमेट एक्शन रहा। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी कल्याण और न्यायसंगत परिवर्तन (Just Transition) के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों के साथ चर्चा की कि कैसे वैश्विक शोध का लाभ उठाकर झारखंड की सार्वजनिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

ऐतिहासिक विरासत और भारतीय जुड़ाव

वर्ष 1879 में स्थापित सोमरविल कॉलेज भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। यह भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पहली भारतीय महिला बैरिस्टर कॉर्नेलिया सोराबजी की शैक्षणिक स्थली रहा है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि झारखंड और ऑक्सफोर्ड के बीच का यह बौद्धिक सेतु भविष्य में राज्य की विकास नीतियों को वैश्विक पहचान दिलाएगा।

झारखंड के अधिकारियों का वैश्विक शोध

कार्यक्रम में एक गर्व का क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने ऑक्सफोर्ड में पढ़ रहे भारतीय विद्वानों से संवाद किया। इनमें झारखंड सरकार के अधिकारी रवि शंकर शुक्ला भी शामिल थे, जो वर्तमान में OICSD स्कॉलर के रूप में 'शहरी जल नीति एवं प्रबंधन' पर शोध कर रहे हैं। यह राज्य सरकार की क्षमता निर्माण (Capacity Building) की दिशा में की गई मेहनत का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री को कार्यशाला के लिए विशेष आमंत्रण

ऑक्सफोर्ड के छात्रों और शोधकर्ताओं ने झारखंड के शासन (Governance) मॉडल और नीति निर्माण के अनुभवों को समझने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने और उन्हें संबोधित करने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया, ताकि झारखंड के धरातलीय अनुभवों से वैश्विक शोध समुदाय सीख सके।

राष्ट्रपति मुर्मू ने फहराया तिरंगा, कर्तव्‍य पथ पर ऑपरेशन सिंदूर की झलक

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भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस समारोह का आयोजन किया गया। राष्ट्रपति मुर्मू ने तिरंगा फहराया। इस दौरान गणतंत्र दिवस समारोह की मुख्य अतिथि यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और सैंटोस कोस्टा भी मौजूद रहे।

शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक्र चक्र

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया है। शुभांशु भारत के सबसे सम्मानित शांति काल का वीरता पुरस्कार पाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री बन गए हैं।

सेना के हेलिकॉप्टरों ने बनाई शानदार फॉर्मेशन

दिल्ली में कर्तव्य पथ पर 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के चार Mi-17 1V हेलीकॉप्टरों द्वारा ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियां बरसाई गई। हेलीकॉप्टरों के इस फॉर्मेशन का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत किया।

सेना ने किया भीष्म टैंक का प्रदर्शन

गणतंत्र दिवस परेड में भारत ने टी-90 टैंक का प्रदर्शन किया। इसे भारतीय सेना ने 'भीष्म' नाम दिया है। रूस में निर्मित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। यह टैंक 2001 से भारतीय सेना का हिस्सा है और इसे राजस्थान, पंजाब में पाकिस्तान सीमा और लेह में चीन सीमा पर तैनात किया गया है। 2005 में इनकी बड़ी खेप भारत आई। शुरुआत में यह पूरी तरह रूसी तकनीक से बना था, लेकिन अब इसके कई पुर्जे भारत में ही बनाए जाते हैं। तमिलनाडु के अवाडी में इन टैंकों को तैयार किया जाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल टुकड़ी ने कर्तव्य पथ पर किया मार्च

दिव्यास्त्र और अग्निबाण टुकड़ी ने परेड की। साथ ही रॉकेट टुकड़ी सूर्यास्त्र और ब्रह्मोस मिसाइल की टुकड़ी ने भी कर्तव्य पथ पर परेड की और हर भारतीय के सीने को गर्व से भर दिया। आकाश मिसाइल और ड्रोन शक्ति ईगल प्रहार ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना के पशु दस्ते ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व कैप्टन हर्षिता यादव ने किया।

अरुणाचल स्काउट और राजपूत रेजीमेंट का मार्च

ऊंचे और पहाड़ी इलाकों पर युद्ध में विशेषज्ञा रखने वाले अरुणाचल स्काउट ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इसके बाद सेना की राजपूत रेजीमेंट ने मार्च किया। यह सेना की सबसे पुरानी रेजीमेंट में से एक है। इसके बाद असम रेजीमेंट के जवानों ने मार्च किया। सेना की जम्मू कश्मीर लाइट इंफेंट्री के दस्ते ने मार्च किया। साथ ही कंबाइंड मिलिट्री बैंड ने मार्च किया, जिसका नेतृत्व सूबेदार एए खान ने किया। सिख लाइट इंफेंट्री के मार्चिंग दस्ते ने कर्तव्य पथ पर मार्च किया। इंडियन नेवी बैंड ने सामंजस्य और भव्यता को दिखाते हुए जय भारती की धुन बजाई।

संविधान, लोकतंत्र और सुशासन के रास्ते विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का संकल्प : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की सर्वाेच्चता और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प के साथ आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे प्रदेश में हर्षाेल्लास, देशभक्ति और गौरवपूर्ण वातावरण में मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संयुक्त परेड की सलामी ली। उन्होंने शहीद सैनिकों एवं पुलिस जवानों के परिजनों को सम्मानित किया तथा छत्तीसगढ़ पुलिस बल को राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ का पदक देने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मौके पर प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत का संविधान हमारी लोकतांत्रिक आस्था, समानता और सामाजिक न्याय का मजबूत आधार है। छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा, विकास और समृद्धि के लिए राज्य सरकार पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने गणतंत्र दिवस संदेश में राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं, नक्सल उन्मूलन की दिशा में हुई प्रगति, किसानों-श्रमिकों-महिलाओं के सशक्तीकरण, शिक्षा-स्वास्थ्य-औद्योगिक विकास और सुशासन की विस्तार से जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले महापुरुषों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को स्मरण करने का दिन भी है। उन्होंने संविधान निर्माताओं, विशेषकर बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि संविधान सामाजिक समरसता, समान अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का प्रतीक है। उन्होंने बाबा गुरु घासीदास जी के “मनखे-मनखे एक समान” के संदेश को संविधान की आत्मा बताया और कहा कि भारतीय गणतंत्र ने ऐसा खुला समाज निर्मित किया है, जहां हर नागरिक राष्ट्र निर्माण में सहभागी बन सकता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने हाल ही में राज्य स्थापना की रजत जयंती मनाई है। पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा गठित इस राज्य ने 25 वर्षों में विकास की सशक्त यात्रा तय की है। उन्होंने बताया कि संविधान के मंदिर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के नवनिर्मित भवन का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करकमलों से संपन्न हुआ। धान की बालियों की डिजाइन और बस्तर-सरगुजा की लोककला से सुसज्जित यह भवन छत्तीसगढ़ी अस्मिता का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की 150वीं जयंती राज्यभर में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। सुकमा जिले के कोंटा से लेकर मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर के सीतामढ़ी हरचौका तक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। यह बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को सच्ची श्रद्धांजलि है।

मुख्यमंत्री ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकार्पित शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डिजिटल संग्रहालय देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जो आज की पीढ़ी को जनजातीय नायकों के बलिदान से परिचित कराता है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि माओवादी हिंसा लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने निर्णायक रणनीति अपनाई है। उन्होंने बताया कि जवानों के अदम्य साहस और सतत अभियानों के परिणामस्वरूप माओवादी हिंसा अब अंतिम चरण में है और मार्च 2026 तक प्रदेश को नक्सलमुक्त करने का लक्ष्य पूर्ण होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, बस्तर कैफे जैसी पहलों और नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती अन्नदाता की समृद्धि रही है। आज छत्तीसगढ़ के किसान को धान का देश में सर्वाधिक मूल्य मिल रहा है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी 5 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 149 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुकी है। बीते दो वर्षों में किसानों के खातों में डेढ़ लाख करोड़ रुपए अंतरित किए गए हैं। अटल सिंचाई योजना के तहत 115 लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश में 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए गए हैं और प्रतिदिन लगभग 2 हजार आवासों का निर्माण हो रहा है, जो देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि राज्य विद्युत उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और शीघ्र ही प्रथम स्थान की ओर अग्रसर है। सौर ऊर्जा, गैस आधारित परियोजनाओं और शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य पर तेजी से काम हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की सम्मान राशि प्रदान किए जाने की जानकारी दी। अब तक 14,948 करोड़ रुपए की राशि वितरित की जा चुकी है। उन्होंने श्रमिकों के लिए ईएसआई, श्रम संहिताओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की बात कही।

मुख्यमंत्री ने बताया कि युक्तियुक्तकरण से शिक्षकों की कमी दूर की गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषाओं में शिक्षा, 9 हजार स्मार्ट क्लास और 22 हजार कंप्यूटर की व्यवस्था की जा रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में नए मेडिकल कालेजों की स्वीकृति से अब इनकी संख्या बढ़कर 15 हो गई है। बिलासपुर में मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और हिंदी में एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक 7.83 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नवा रायपुर को आईटी, एआई, फार्मा और मेडिकल हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य एआई का है और छत्तीसगढ़ इसकी धुरी बनेगा।

मुख्यमंत्री ने रामलला दर्शन योजना, मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना, बस्तर पंडुम, चित्रकोट जलप्रपात, मैनपाट, सरगुजा और जशपुर पर्यटन के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने ई-ऑफिस, जेम पोर्टल, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से सुशासन की मजबूती पर बल दिया।

समारोह में स्कूली बच्चों द्वारा राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। विभिन्न शासकीय विभागों द्वारा योजनाओं पर आधारित आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिन्होंने प्रदेश की विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।

विकसित छत्तीसगढ़ का आह्वान

मुख्यमंत्री ने स्व. लक्ष्मण मस्तूरिया की कविता की पंक्तियों के माध्यम से जनभागीदारी का आह्वान करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सभी की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने अंत में प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी।

राजधानी में हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया 77 वां गणतंत्र दिवस, राज्यपाल रमेन डेका ने राष्ट्रीय ध्वज फहरा कर ली परेड की सलामी

रायपुर- गणतंत्र दिवस के अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका द्वारा आज यहां राजधानी रायपुर में पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और परेड की सलामी ली गई। परेड निरीक्षण के दौरान मुख्य सचिव विकास शील और पुलिस महानिदेशक अरूण देव गौतम भी उपस्थित थे।

राज्यपाल श्री डेका ने प्रदेशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता हैं। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।

*18 सालों तक 26 जनवरी को मनाया गया गणतंत्र दिवस, जानिए इस दिन का ऐतिहासिक महात्व

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आज पूरा देश बड़े ही धूमधान से 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। हम भारतीय 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाते है। इसी दिन हमें हमारा संविधान मिला था। देश की आजादी के करीब ढाई साल के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था।

18 वर्ष तक 26 जनवरी को मनाया गया स्वतंत्रता दिवस

दरअसल आजादी से पहले 26 जनवरी को ही स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता था। करीब 18 वर्ष तक 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) मनाया जाता रहा। दिसंबर 1929 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लाहौर में अधिवेशन हुआ था। इस अधिवेशन की अध्यक्षता देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने की थी। अधिवेशन में पंडित नेहरु ने पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अंग्रेजी हुकूमत 26 जनवरी 1930 तक भारत को उसका प्रभुत्व (डोमिनियन का पद) नहीं देती है तो भारत खुद को स्वतंत्र घोषित कर देगा। इसलिए कांग्रेस ने 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस (स्वतंत्रता दिवस) घोषित किया।

1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया

26 जनवरी 1930 को पहली बार स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। इसी दिन जवाहर लाल नेहरु ने तिरंगा फहराया था। फिर देश को आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त 1947 को अधिकारिक रूप से स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया। 26 जनवरी 1930 को पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव लागू होने की तिथि को महत्व देने के लिए ही 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया था। इसके बाद 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस घोषित किया गया।

26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्रता दिवस ?

बता दें कि 15 अगस्त 1947 को भारत के आजाद होने के बाद संविधान सभा का गठन किया गया। फिर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर ने तकरीबन दो साल, 11 महीने और 18 दिन में दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान तैयार किया। सन 1948 के शुरूआत में ही डॉ अंबेडकर ने संविधान सभा में पहली बार संविधान की रूपरेखा प्रस्तुत की थी। लेकिन इनमें कुछ संशोधनों के बाद नवंबर 1949 में इसे स्वीकार कर लिया गया और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू कर दिया गया। इसके बाद हर साल 26 जनवरी को हम गणतंत्र का जश्न मनाते हैं।

बता दें कि संविधान के लागू होने के बाद इसके निर्माताओं को ये विचार आया कि इस दिन को ऐसे अवसर पर मनाया जाना चाहिए जिसका संबंद्ध राष्ट्रीय गौरव से हो। इसके बाद ये फैसला लिया गया कि गणतंत्रता दिवस ‘पूर्ण स्वराज दिवस’ यानी 26 जनवरी को ही मनाया जाएगा।

अन्नपूर्णा भोजनालय में शराबियों ने मचाया उत्पात, व्यवसाई से भी की मारपीट

- गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बस स्टेशन के व्यस्ततम इलाके से भी नदारद रही पुलिस
- पूर्व में होटल मालिक अमित गुप्ता को गोली मारकर की गई थी लूटपाट

सुल्तानपुर। शहर का बस स्टेशन स्थित अन्नपूर्णा भोजनालय एक बार फिर चर्चा में है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर तीन शराबियों ने नशे में जमकर उत्पात मचाया। भोजनालय के मालिक के भतीजे की कॉलर पकड़ कर थप्पड़ जड़े। बगल से गुजर रहे व्यवसाई से भी मारपीट और गाली गलौज की। मामले में पीड़ित ने कोतवाली नगर में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

रविवार की शाम तकरीबन 5:30 बजे तीन शराबी अन्नपूर्णा भोजनालय में घुसे और खाने का ऑर्डर दिया। इसके बाद बैठकर शराब पीने लगे। अन्नपूर्णा भोजनालय के अवधेश गुप्ता ने शराब पीने से मना किया तो उनसे गाली-गलौज की। इसके बाद खाने का पैसा मांगने पर भतीजे मोलू गुप्ता का भी कॉलर पकड़ कर थप्पड़ मारा। इसी दौरान उधर से गुजर रहे व्यवसाई अरविंद चौरसिया ने बीच बचाव करने का प्रयास किया तो तीनों शराबी उत्पातियों ने उनसे ना सिर्फ गाली गलौज की बल्कि मारपीट भी करने लगे। लोगों ने किसी तरह बीच बचाव किया। उत्पात मचा रहे तीनों ने जान से मारने की धमकी भी दी। मामले में अरविंद चौरसिया ने कोतवाली नगर में तहरीर दी है।
NH-119 भूमि मुआवजा विवाद: किसानों का उग्र प्रदर्शन, नजरबंदी के आरोपों से भड़का आक्रोश
बहसूमा।NH-119 बहसूमा बायपास झुनझुनी रोड स्थित जेएसएस पब्लिक स्कूल के पास चार ग्रामों—राजूपुर, फतेहपुर हंसापुर, मोड़ कला एवं मोहम्मदपुर शाकिस्त—की कृषि भूमि के अधिग्रहण में बाजार दर से कम मुआवजा दिए जाने को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। बीते पाँच वर्षों से मुआवजा बढ़ोतरी की मांग कर रहे किसानों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित कर प्रशासन के रवैये के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।

बैठक में किसानों ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मेरठ आगमन के दौरान 21 जनवरी की रात संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कैप्टन एवं कोषाध्यक्ष व प्रवक्ता कपिल चहल को पुलिस प्रशासन द्वारा घर में नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई से किसानों में भारी रोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने का प्रयास किया गया, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

किसानों ने बताया कि लगभग आठ माह पूर्व मेरठ के जिलाधिकारी द्वारा एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। समिति की रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया कि किसानों को बाजार मूल्य से बेहद कम मुआवजा दिया गया है तथा 540 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से ब्याज सहित मुआवजा दिया जाना न्यायोचित है। इसके बावजूद अब तक समिति की रिपोर्ट को लागू नहीं किया गया, जिससे किसानों में गहरी निराशा और आक्रोश बना हुआ है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर समिति की रिपोर्ट को शीघ्र लागू कराएं और प्रभावित किसानों को उनका वाजिब हक दिलाया जाए। मौके पर बिजनौर लोकसभा सांसद चंदन चौहान के प्रतिनिधि युगांश राणा भी उपस्थित रहे और किसानों की समस्याओं को सुना।

इस अवसर पर किसान कपिल चहल, पूर्व चेयरमैन विनोद चाहल, सुभाष कैप्टन, नरेंद्र सिंह चाहल, प्रवेश जेनर, प्रवेश अहलावत, पिंटू देशवाल, शोकिंद्र, जोगेंद्र सिंह, सुनीत कुमार, राहुल देशवाल, मनीष, योगेंद्र, हरेंद्र चहल, पप्पू जैनर, मूलचंद सैनी, राजीव जैनर, मुखिया, राजकुमार, बबलू, दिनेश कुमार, मारुत देशवाल, श्रवण कुमार सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और अधिक उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन
गणतंत्र दिवस पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने फहराया तिरंगा, संविधान के प्रति निष्ठा का दिलाया संकल्प
लखनऊ।  गणतंत्र दिवस के अवसर पर सूचना निदेशक विशाल सिंह ने सूचना भवन परिसर में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को संविधान के प्रति निष्ठा एवं कर्तव्यपरायणता की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर उन्होंने सूचना भवन परिसर में आयोजित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें विभागीय गतिविधियों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदर्शित की गई। अपने संबोधन में विशाल सिंह ने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि स्वतंत्र देश में जन्म लिया है। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल भावनाओं को आत्मसात कर अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करने की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, वहीं उत्साह और उल्लास के प्रतीक रूप में रंग-बिरंगे गुब्बारे आकाश में छोड़े गए।


पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर बगलें क्यों झांकने लगते हैं भाजपा नेता : विनोद पांडेय

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झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय ने भाजपा नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश दौरे को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह रवैया पूरी तरह राजनीतिक हताशा और दोहरे मापदंडों को दर्शाता है।

श्री पांडेय ने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार विदेश यात्राएं करते हैं, तब भाजपा नेताओं को न तो संविधान की याद आती है और न ही राष्ट्रीय स्वाभिमान की। लेकिन वही भाजपा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के राज्यहित में किए जा रहे विदेश दौरे को लेकर अनर्गल आरोप लगा रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दावोस और यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर झारखंड में निवेश, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों को लेकर गए हैं। यह दौरा पूरी तरह राज्य के आर्थिक विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़ा हुआ है, न कि किसी निजी या राजनीतिक उद्देश्य से।

विनोद पांडेय ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री अपने रांची लौटने के बाद दावोस और यूके दौरे से जुड़ी उपलब्धियों, निवेश प्रस्तावों और हुई बैठकों की पूरी जानकारी स्वयं सार्वजनिक रूप से देंगे। उन्होंने कहा कि झामुमो पारदर्शिता में विश्वास करता है और जनता को भ्रमित करने की भाजपा की कोशिशें सफल नहीं होंगी।

उन्होंने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा को ट्रिब्यूट करने हेमंत जी उनके लंदन स्थित कॉलेज गए। दोनों देशों के बीच शिक्षा के क्षेत्र में परस्पर सहयोग के लिए सहमति बनी है। बाबूलाल जी को यूके जाकर झारखंड सरकार के शत प्रतिशत छात्रवृत्ति की मदद से वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों से मक भेंट करना चाहिए। बाबूलाल जी को गर्व होगा और शायद उनको एहसास होगा हेमंत जी के वजन का।

श्री पांडेय ने कहा कि झारखंड की जनता समझदार है और वह जानती है कि कौन राज्य के विकास के लिए काम कर रहा है और कौन केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बयान देकर उनको बरगला रहा है।

झामुमो ने किया 'पद्म भूषण' का स्वागत, पर दोहराई 'भारत रत्न' की मांग: "हाशिये की आवाज थे दिशोम गुरु"

राँची, 26 जनवरी 2026: झारखंड आंदोलन के प्रणेता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिबू सोरेन (दिशोम गुरु) को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा का झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्वागत किया है। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया है कि गुरुजी का कद और उनका संघर्ष 'भारत रत्न' के योग्य है और यह मांग निरंतर जारी रहेगी।

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संघर्षों का रहा है लंबा इतिहास

11 जनवरी 1944 को नेमरा (रामगढ़) में जन्मे गुरुजी का जीवन महाजनी प्रथा, शोषण और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए समर्पित रहा। झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि गुरुजी ने न केवल झारखंड को अलग पहचान दिलाई, बल्कि नशा मुक्ति और शिक्षा जैसे सामाजिक सुधारों से आदिवासी-मूलवासी समाज के जीवन को बदला।

"बाबा भारत के अनमोल रत्न थे" - विनोद पांडेय

पद्म भूषण की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए विनोद पांडेय ने केंद्र सरकार को साधुवाद दिया, लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया:

"गुरुजी भारतीय मिट्टी के सच्चे सपूत थे। मेरी नजर में बाबा भारत के अनमोल रत्न थे। क्या आदिवासी समाज में अब तक कोई नायक भारत रत्न के योग्य नहीं हुआ? सच्चाई यह है कि आदिवासी समाज को अब तक मुख्यधारा का हिस्सा ही नहीं माना गया है। करोड़ों समर्थकों की भावना है कि उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।"

विधानसभा से पारित हो चुका है प्रस्ताव

उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से शिबू सोरेन को 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। 4 अगस्त 2025 को उनके निधन के बाद से ही राज्यभर में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान देने की मांग जोर पकड़ रही है।

गुरुजी की राजनीतिक विरासत:

मुख्यमंत्री: तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे।

सांसद: दुमका से 8 बार लोकसभा सांसद चुने गए।

आंदोलन: पृथक झारखंड राज्य के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका।

आकर्षक हेडलाइंस (विकल्प):

विकल्प 1: पद्म भूषण पर झामुमो का साधुवाद, लेकिन 'भारत रत्न' की मांग पर अडिग; विनोद पांडेय बोले- "बाबा रत्न नहीं, महा रत्न थे।"

विकल्प 2: "आदिवासी नायक को मिले सर्वोच्च सम्मान"; गुरुजी को पद्म भूषण मिलने पर झामुमो ने जताई खुशी, भारत रत्न की मांग तेज।

विकल्प 3: दिशोम गुरु के संघर्षों का सम्मान: केंद्र ने दी पद्म भूषण की घोषणा, समर्थकों को अब 'भारत रत्न' का इंतजार।

ऑक्सफोर्ड के सोमरविल कॉलेज पहुँचे मुख्यमंत्री: क्लाइमेट एक्शन और एनवायरमेंटल पॉलिसी पर विशेषज्ञों के साथ साझा किया झारखंड का विजन

ऑक्सफोर्ड / रांची, 26 जनवरी 2026: मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अपने यूके दौरे के क्रम में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सोमरविल कॉलेज का दौरा किया। कॉलेज की प्रिंसिपल कैथरीन रॉयल और 'ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' (OICSD) की डायरेक्टर प्रो. राधिका खोसला ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। इस दौरान झारखंड और ऑक्सफोर्ड के बीच जलवायु परिवर्तन और सतत विकास पर गहरे सहयोग की नींव रखी गई।

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सतत विकास और जलवायु नीति पर चर्चा

बैठक का मुख्य केंद्र पर्यावरण नीति और क्लाइमेट एक्शन रहा। ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं ने झारखंड सरकार द्वारा आदिवासी कल्याण और न्यायसंगत परिवर्तन (Just Transition) के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों के साथ चर्चा की कि कैसे वैश्विक शोध का लाभ उठाकर झारखंड की सार्वजनिक नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

ऐतिहासिक विरासत और भारतीय जुड़ाव

वर्ष 1879 में स्थापित सोमरविल कॉलेज भारत के लिए विशेष महत्व रखता है। यह भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पहली भारतीय महिला बैरिस्टर कॉर्नेलिया सोराबजी की शैक्षणिक स्थली रहा है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिहासिक जुड़ाव को रेखांकित करते हुए कहा कि झारखंड और ऑक्सफोर्ड के बीच का यह बौद्धिक सेतु भविष्य में राज्य की विकास नीतियों को वैश्विक पहचान दिलाएगा।

झारखंड के अधिकारियों का वैश्विक शोध

कार्यक्रम में एक गर्व का क्षण तब आया जब मुख्यमंत्री ने ऑक्सफोर्ड में पढ़ रहे भारतीय विद्वानों से संवाद किया। इनमें झारखंड सरकार के अधिकारी रवि शंकर शुक्ला भी शामिल थे, जो वर्तमान में OICSD स्कॉलर के रूप में 'शहरी जल नीति एवं प्रबंधन' पर शोध कर रहे हैं। यह राज्य सरकार की क्षमता निर्माण (Capacity Building) की दिशा में की गई मेहनत का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री को कार्यशाला के लिए विशेष आमंत्रण

ऑक्सफोर्ड के छात्रों और शोधकर्ताओं ने झारखंड के शासन (Governance) मॉडल और नीति निर्माण के अनुभवों को समझने में गहरी रुचि दिखाई। उन्होंने मुख्यमंत्री को एक विशेष कार्यशाला आयोजित करने और उन्हें संबोधित करने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया, ताकि झारखंड के धरातलीय अनुभवों से वैश्विक शोध समुदाय सीख सके।