एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

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रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

एक मंच पर दिखेंगे पीएम मोदी-पुतिन और जिनपिंग, SCO में मुलाकात, दुनियाभर की टिकी नजरें

#scosummit2026inkyrgyzstanpmmodixijinpingputinmeet

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान पहुंचे किर्गिस्तान में मोदी वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे और कई द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक बार फिर एक साथ नजर आने वाले हैं। यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले महीने नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन में भी तीनों नेता एक बार फिर साथ नजर आ सकते हैं।

मोदी-पुतिन की अहम मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे हैं। यहां वह शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी की पुतिन से द्विपक्षीय मुलाकात तय है। करीब 50 मिनट निर्धारित इस बैठक में भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। मोदी-पुतिन की बातचीत में ऊर्जा सहयोग प्रमुख मुद्दा हो सकता है। रूस भारत के लिए कच्चे तेल और उर्वरक का बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ऐसे में दोनों नेता तेल और गैस की आपूर्ति, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग की समीक्षा कर सकते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच भारत के लिए रूसी ऊर्जा आपूर्ति अहम है।

पीएम मोदी और जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की नजर

पीएम मोदी की इससे इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय मुलाकात होने की संभावना है। बिश्केक में दुनिया की नजर मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होने वाली मुलाकात पर रहेगी। एससीओ के इतर यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब भारत-चीन संबंधों में संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में सीमा विवाद, सीमा पर शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात इसलिए भी अहम है क्योंकि यह दिल्ली में सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रस्तावित बड़ी मुलाकात से ठीक पहले होगी।

भारत के लिए क्यों अहम है?

मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य अहम खनिजों का बड़ा भंडार है। भारत लंबे अर्से से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्य एशिया के देशों के साथ सहयोग और व्यापार बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह नए व्यापार के साथ ही परिवहन मार्ग भी विकसित करने पर काम कर रहा है।

क्या है एसओसी ?

10 सदस्यों वाला शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। जो 25 साल पूरे होने का जश्न मना रहा है। चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने 2001 में एससीओ की स्थापना की थी। 2017 में भारत और पाकिस्तान एससीओ के पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद 2023 में ईरान और 2024 में बेलारूस इसमें शामिल हुए। संगठन का मुख्य काम सुरक्षा, आतंकवाद, अलगाववाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर साथ काम करना है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।

पुतिन ने भारत के पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को बनाया अपना वकील, सुलझाएंगे यूक्रेन से जुड़ा ये विवाद

#formercjichandrachudhasnowemergedasapotentialsaviorfor_putin

रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ को यूक्रेन के एक सरकारी बैंक के साथ चल रहे विवाद में अपना मध्यस्थ बनाया है। बार एंड बेंच के अनुसार, यह विवाद रूस की सैन्य कार्रवाई से प्रभावित यूक्रेनी इलाकों में बैंक की संपत्ति और कामकाज से जुड़े दावों से संबंधित है।

'बार एंड बेंच' की रिपोर्ट के मुताबिक 'ग्लोबल आर्बिट्रेशन रिव्यू' ने बताया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ एक इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में रूस का प्रतिनिधित्व करेंगे। यह ट्रिब्यूनल यूक्रेन के सरकारी बैंक 'ओशदबैंक' की तरफ से लाए गए एक विवाद की सुनवाई कर रहा है।

चंद्रचूड़ की भूमिका क्या होगी?

रूस ने इस तीन सदस्यीय टीम में अपने पक्ष से जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ को चुना है। यानी वह इस मामले में रूस की ओर से नियुक्त मध्यस्थ होंगे। तीन सदस्यों वाले इस ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता कोस्टा रिका की आर्बिट्रेटर और पूर्व ट्रेड मिनिस्टर दयाला जिमेनेज़ करेंगी, जिन्हें रूस और ओशादबैंक ने संयुक्त रूप से चुना था। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीक आर्बिट्रेटर और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सिंगापुर के प्रोफ़ेसर स्टावरोस ब्रेकोउलाकिस को ओशादबैंक ने ट्रिब्यूनल के तीसरे सदस्य के तौर पर नियुक्त किया है।

सैकड़ों करोड़ डॉलर का है विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला यूक्रेन के डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में 'ओशादबैंक' की संपत्ति और बिजनेस ऑपरेशन्स पर उसके दावे से जुड़ा है। बैंक का कहना है कि 2022 में रूस के बड़े पैमाने पर हमले और उसके बाद यूक्रेन में सैन्य कार्रवाई के कारण उसने ये संपत्तियां और कामकाज खो दिए। ओशचादबैंक ने रूस से हुए नुकसान की भरपाई की मांग की है। इस दावे की रकम सैकड़ों करोड़ डॉलर बताई जा रही है।