शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि पर हर्ष: बलिया में बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर में आज दिनांक 14-5-2026 को सामूहिक रुद्राभिषेक और भंडारा का आयोजन

संजीव सिंह बलिया। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सहयोग से उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि का शुभ कार्य संपन्न हो गया है। यह समाचार समस्त शिक्षक बंधुओं के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उम्मीद है कि शीघ्र ही स्थाईकरण का भी सुखद समाचार प्राप्त होगा।इस पावन उपलब्धि की सफलता में श्री बाबा बालेश्वर नाथ जी महादेव की असीम कृपा, अनुकंपा और आशीर्वाद का विशेष योगदान रहा है। इसी दिव्य कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु उ.प्र. प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ, बलिया द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है:दिनांक: 14 मई 2026 (गुरुवार)
स्थान: श्री बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर, बलिया सामूहिक रुद्राभिषेक: दोपहर 2:00 बजेप्रसाद वितरण (भंडारा): सायं 5:00 बजे से इस पुण्य अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के समस्त सम्मानित अधिकारीगण, कर्मचारी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया आदि सादर आमंत्रित हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि उपस्थित होकर बाबा भोलेनाथ का

आशीर्वाद प्राप्त करें।
सादर निवेदक,
उ.प्र. प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ, बलिया
डोभी को मिली आधुनिक सौगात: गरीबों के बजट में मिलेगा लग्जरी सुविधा का आनंद, जहानाबाद सांसद ने किया “होटल राज रिजॉर्ट” का उद्घाटन

गया: गया-डोभी रोड स्थित बजौरा में संत मलिक बी.एड कॉलेज के सामने बने “होटल राज रिजॉर्ट” का भव्य उद्घाटन जहानाबाद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में बोधगया विधायक कुमार सर्वजीत, एमएलसी रिंकू यादव, बाराचट्टी पूर्व विधायिक समता देवी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। रिजॉर्ट के शुरू होने से अब डोभी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रमों के लिए गया शहर नहीं जाना पड़ेगा।

उद्घाटन के बाद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि होटल राज रिजॉर्ट शानदार और बेहतरीन तरीके से बनाया गया है। इसमें गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में बड़े-बड़े होटल जरूर हैं, लेकिन वहां आम लोग आसानी से कार्यक्रम नहीं कर पाते। यह रिजॉर्ट कम खर्च में बेहतर सुविधा देने वाला साबित होगा। सांसद ने कहा कि शादी-विवाह जैसे आयोजनों में लोगों को काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब डोभी क्षेत्र के लोगों को अपने ही इलाके में आधुनिक सुविधा मिल सकेगी।

होटल राज रिजॉर्ट के प्रोपराइटर राजीव कुमार यादव उर्फ राजू यादव ने बताया कि क्षेत्र के लोगों को पहले शादी-विवाह के लिए गया शहर जाना पड़ता था, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता था। इसी परेशानी को देखते हुए उन्होंने रिजॉर्ट बनाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि यह रिजॉर्ट खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि होटल राज रिजॉर्ट में बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल, एसी और नॉन-एसी कमरे, 24 घंटे साउंड प्रूफ जनरेटर, पार्किंग और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। रिजॉर्ट में कुल 25 कमरे बनाए गए हैं। इसके अलावा 4000 स्क्वायर फीट का हॉल, 3800 स्क्वायर फीट का रेस्टोरेंट और 1800 स्क्वायर फीट का रिसेप्शन एरिया भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि शादी के लिए बुकिंग कराने वाले परिवारों को विशेष छूट दी जाएगी तथा असहाय गरीब परिवारों को हर संभव मदद की जाएगी।

इस मौके पर जन अधिकार पार्टी के नेता संतोष लाल यादव ने कहा कि डोभी क्षेत्र में इस तरह का आधुनिक रिजॉर्ट खुलना लोगों के लिए बड़ी सौगात है। उन्होंने राजू यादव की मेहनत और सोच की सराहना करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से निकलकर उन्होंने क्षेत्र के लोगों को नई सुविधा देने का काम किया है।

नीट यूजी पेपर लीक के विरोध में आम आदमी पार्टी ने किया विरोध प्रदर्शन

आप के जिलाध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

भोपाल। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक [NEET UG] 2026 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक, अनियमितताओं और जांच एजेंसियों द्वारा साझा किए गए ठोस इनपुट के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, यह बात आम आदमी पार्टी के भोपाल जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया से कही।

आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा कि 

आम आदमी पार्टी इस घोटाले की कड़े शब्दों में निंदा करती है। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होना शिक्षा व्यवस्था की नाकामी और केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। छात्रों के सपनों, उनके परिवारों की उम्मीदों और वर्षों की मेहनत को इस तरह कुचला जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बुधवार शाम शहर के ज्योति सिनेमा चौराहे पर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने NEET परीक्षा पेपर लीक मामले के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाने, दोषी अधिकारियों, कोचिंग माफिया और संलिप्त व्यक्तियों पर तत्काल कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करने, प्रभावित छात्रों के हित में नई परीक्षा की तारीख शीघ्र घोषित की जाए और परीक्षा प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाया जाने तथा शिक्षा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस नीतिगत सुधार लागू किए जाने की मांग की।  

वहीं प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मिन्हाज़ आलम ने कहा कि शिक्षा किसी के भी सपनों से खिलवाड़ करने का साधन नहीं बन सकती। हम छात्रों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के 22 लाख छात्रों ने नीट की तैयारी की थी पेपर लीक होने के कारण इन लाखों बच्चों का भविष्य तबाह हो गया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के तमाम कार्यकर्ताओ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में प्रदर्शन किया ।

देवघर-में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 70 वां जन्मोत्सव पर ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित।
देवघर: 13 मई : आज आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव के अवसर पर देवघर में विभिन्न सेवा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग, देवघर द्वारा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी देवघर शाखा के ब्लड डोनेशन ऑन व्हील्स कार्यक्रम के तहत देवघर सदर ब्लड बैंक (टावर चौक) में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें गुरु भक्तों एवं युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार द्वारा कुल 11 यूनिट रक्तदान कर मानव सेवा एवं परोपकार का संदेश दिया गया। रक्तदाताओं के रूप में निशांत कुमार, नीलम कुमार, कन्हैया, रचना झा, गीता सिंह, देबाशीष रॉय, राम शंकर , गुरु प्रसाद, देवरत्न सिन्हा, अभय कुमार सिंह, किरणजीत मन्ना सहित अनेक गुरु भक्तों ने रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया। रक्तदान शिविर में भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी देवघर के चेयरमैन जितेश राजपाल, वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल, कोषाध्यक्ष राजकुमार बरनवाल, कार्यकारिणी सदस्य विजय प्रताप सनातन एवं अर्चना भगत विशेष रूप से उपस्थित रहे और सभी रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत टावर चौक पर आमजन के बीच फल, जूस, मिल्कशेक एवं चॉकलेट का वितरण किया गया। संध्या में शहर के मध्य स्थित मंगलम इन रिसॉर्ट में सत्संग, भजन, संगीत एवं ध्यान कार्यक्रम के साथ गुरुदेव का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बैंगलोर से आए गायक एवं संगीतज्ञों ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैकड़ों की संख्या में गुरु भक्तों ने कार्यक्रम में भाग लेकर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आर्ट ऑफ लिविंग विश्व की एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक एवं सेवा संस्था है, जिसकी स्थापना गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने की है। संस्था ध्यान, योग, सुदर्शन क्रिया एवं मानव सेवा के माध्यम से विश्वभर में शांति, प्रेम एवं तनावमुक्त जीवन का संदेश दे रही है। आज यह संस्था 183 देशों में सक्रिय है और करोड़ों लोगों तक आध्यात्मिकता एवं सेवा का संदेश पहुँचा चुकी है। आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, नशामुक्ति अभियान, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण एवं युवाओं के व्यक्तित्व विकास जैसे अनेक सामाजिक एवं सेवा कार्य संचालित किए जाते हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य तनावमुक्त एवं हिंसामुक्त समाज का निर्माण करना है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में लाखों स्वयंसेवक सेवा, साधना और मानव कल्याण के कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिनिधि निशांत कुमार ने बताया कि गुरुदेव के 70वें जन्मोत्सव को विश्वभर में सेवा, साधना एवं सत्संग के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने करोड़ों लोगों को ध्यान, मौन एवं सुदर्शन क्रिया के माध्यम से जीवन जीने की नई दिशा दी है। आज विश्वभर में करोड़ों लोग उनके साथ ध्यान कर जन्मोत्सव को सेवा दिवस के रूप में मना रहे हैं। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, देवघर के चेयरमैन जितेश राजपाल ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है और आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा गुरुजी के जन्मोत्सव पर इस प्रकार का सेवा कार्य अत्यंत प्रेरणादायक है। वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल ने कहा कि समाज में सेवा, सद्भाव एवं मानवता की भावना को मजबूत करने में इस प्रकार के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्तदान जैसे पुनीत कार्य से अनेक लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। कार्यक्रम की तैयारी एवं सफलता में निशांत कुमार, नीलम, राम शंकर, गुरु प्रसाद, गौतम, कन्हैया, रणधीर, गीता, रीना, रचना सहित अनेक गुरु भक्तों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि पर हर्ष: बलिया में बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर में आज दिनांक 14-5-2026 को सामूहिक रुद्राभिषेक और भंडारा का आयोजन

संजीव सिंह बलिया। माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के सहयोग से उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि का शुभ कार्य संपन्न हो गया है। यह समाचार समस्त शिक्षक बंधुओं के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है। उम्मीद है कि शीघ्र ही स्थाईकरण का भी सुखद समाचार प्राप्त होगा।इस पावन उपलब्धि की सफलता में श्री बाबा बालेश्वर नाथ जी महादेव की असीम कृपा, अनुकंपा और आशीर्वाद का विशेष योगदान रहा है। इसी दिव्य कृपा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने हेतु उ.प्र. प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ, बलिया द्वारा निम्नलिखित कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है:दिनांक: 14 मई 2026 (गुरुवार)
स्थान: श्री बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर, बलिया सामूहिक रुद्राभिषेक: दोपहर 2:00 बजेप्रसाद वितरण (भंडारा): सायं 5:00 बजे से इस पुण्य अवसर पर बेसिक शिक्षा विभाग के समस्त सम्मानित अधिकारीगण, कर्मचारी, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया आदि सादर आमंत्रित हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है कि उपस्थित होकर बाबा भोलेनाथ का

आशीर्वाद प्राप्त करें।
सादर निवेदक,
उ.प्र. प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ, बलिया
डोभी को मिली आधुनिक सौगात: गरीबों के बजट में मिलेगा लग्जरी सुविधा का आनंद, जहानाबाद सांसद ने किया “होटल राज रिजॉर्ट” का उद्घाटन

गया: गया-डोभी रोड स्थित बजौरा में संत मलिक बी.एड कॉलेज के सामने बने “होटल राज रिजॉर्ट” का भव्य उद्घाटन जहानाबाद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने फीता काटकर किया। उद्घाटन समारोह में बोधगया विधायक कुमार सर्वजीत, एमएलसी रिंकू यादव, बाराचट्टी पूर्व विधायिक समता देवी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। रिजॉर्ट के शुरू होने से अब डोभी एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शादी-विवाह और अन्य कार्यक्रमों के लिए गया शहर नहीं जाना पड़ेगा।

उद्घाटन के बाद सांसद सुरेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि होटल राज रिजॉर्ट शानदार और बेहतरीन तरीके से बनाया गया है। इसमें गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में बड़े-बड़े होटल जरूर हैं, लेकिन वहां आम लोग आसानी से कार्यक्रम नहीं कर पाते। यह रिजॉर्ट कम खर्च में बेहतर सुविधा देने वाला साबित होगा। सांसद ने कहा कि शादी-विवाह जैसे आयोजनों में लोगों को काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब डोभी क्षेत्र के लोगों को अपने ही इलाके में आधुनिक सुविधा मिल सकेगी।

होटल राज रिजॉर्ट के प्रोपराइटर राजीव कुमार यादव उर्फ राजू यादव ने बताया कि क्षेत्र के लोगों को पहले शादी-विवाह के लिए गया शहर जाना पड़ता था, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता था। इसी परेशानी को देखते हुए उन्होंने रिजॉर्ट बनाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि यह रिजॉर्ट खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि होटल राज रिजॉर्ट में बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल, एसी और नॉन-एसी कमरे, 24 घंटे साउंड प्रूफ जनरेटर, पार्किंग और रेस्टोरेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। रिजॉर्ट में कुल 25 कमरे बनाए गए हैं। इसके अलावा 4000 स्क्वायर फीट का हॉल, 3800 स्क्वायर फीट का रेस्टोरेंट और 1800 स्क्वायर फीट का रिसेप्शन एरिया भी तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि शादी के लिए बुकिंग कराने वाले परिवारों को विशेष छूट दी जाएगी तथा असहाय गरीब परिवारों को हर संभव मदद की जाएगी।

इस मौके पर जन अधिकार पार्टी के नेता संतोष लाल यादव ने कहा कि डोभी क्षेत्र में इस तरह का आधुनिक रिजॉर्ट खुलना लोगों के लिए बड़ी सौगात है। उन्होंने राजू यादव की मेहनत और सोच की सराहना करते हुए कहा कि एक किसान परिवार से निकलकर उन्होंने क्षेत्र के लोगों को नई सुविधा देने का काम किया है।

नीट यूजी पेपर लीक के विरोध में आम आदमी पार्टी ने किया विरोध प्रदर्शन

आप के जिलाध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं

भोपाल। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा स्नातक [NEET UG] 2026 में बड़े पैमाने पर पेपर लीक, अनियमितताओं और जांच एजेंसियों द्वारा साझा किए गए ठोस इनपुट के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार ने लाखों मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, यह बात आम आदमी पार्टी के भोपाल जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने विरोध प्रदर्शन के दौरान मीडिया से कही।

आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष हरीश पाठक ने कहा कि 

आम आदमी पार्टी इस घोटाले की कड़े शब्दों में निंदा करती है। NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बार-बार पेपर लीक होना शिक्षा व्यवस्था की नाकामी और केंद्र सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। छात्रों के सपनों, उनके परिवारों की उम्मीदों और वर्षों की मेहनत को इस तरह कुचला जाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बुधवार शाम शहर के ज्योति सिनेमा चौराहे पर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने NEET परीक्षा पेपर लीक मामले के विरोध में भोपाल में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाने, दोषी अधिकारियों, कोचिंग माफिया और संलिप्त व्यक्तियों पर तत्काल कठोर कार्यवाही सुनिश्चित करने, प्रभावित छात्रों के हित में नई परीक्षा की तारीख शीघ्र घोषित की जाए और परीक्षा प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शी बनाया जाने तथा शिक्षा में भ्रष्टाचार रोकने के लिए ठोस नीतिगत सुधार लागू किए जाने की मांग की।  

वहीं प्रदर्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मिन्हाज़ आलम ने कहा कि शिक्षा किसी के भी सपनों से खिलवाड़ करने का साधन नहीं बन सकती। हम छात्रों के साथ खड़े हैं और उनकी आवाज को सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे। उन्होंने कहा कि देश के 22 लाख छात्रों ने नीट की तैयारी की थी पेपर लीक होने के कारण इन लाखों बच्चों का भविष्य तबाह हो गया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी मध्य प्रदेश के तमाम कार्यकर्ताओ ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख शहरों में प्रदर्शन किया ।

देवघर-में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के 70 वां जन्मोत्सव पर ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित।
देवघर: 13 मई : आज आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के 70वें जन्मोत्सव के अवसर पर देवघर में विभिन्न सेवा एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग, देवघर द्वारा भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी देवघर शाखा के ब्लड डोनेशन ऑन व्हील्स कार्यक्रम के तहत देवघर सदर ब्लड बैंक (टावर चौक) में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें गुरु भक्तों एवं युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार द्वारा कुल 11 यूनिट रक्तदान कर मानव सेवा एवं परोपकार का संदेश दिया गया। रक्तदाताओं के रूप में निशांत कुमार, नीलम कुमार, कन्हैया, रचना झा, गीता सिंह, देबाशीष रॉय, राम शंकर , गुरु प्रसाद, देवरत्न सिन्हा, अभय कुमार सिंह, किरणजीत मन्ना सहित अनेक गुरु भक्तों ने रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया। रक्तदान शिविर में भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी देवघर के चेयरमैन जितेश राजपाल, वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल, कोषाध्यक्ष राजकुमार बरनवाल, कार्यकारिणी सदस्य विजय प्रताप सनातन एवं अर्चना भगत विशेष रूप से उपस्थित रहे और सभी रक्तदाताओं का उत्साहवर्धन किया। इसके उपरांत टावर चौक पर आमजन के बीच फल, जूस, मिल्कशेक एवं चॉकलेट का वितरण किया गया। संध्या में शहर के मध्य स्थित मंगलम इन रिसॉर्ट में सत्संग, भजन, संगीत एवं ध्यान कार्यक्रम के साथ गुरुदेव का जन्मोत्सव श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बैंगलोर से आए गायक एवं संगीतज्ञों ने अपनी प्रस्तुतियों से भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैकड़ों की संख्या में गुरु भक्तों ने कार्यक्रम में भाग लेकर गुरुदेव के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। आर्ट ऑफ लिविंग विश्व की एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक एवं सेवा संस्था है, जिसकी स्थापना गुरुदेव श्री श्री रविशंकर ने की है। संस्था ध्यान, योग, सुदर्शन क्रिया एवं मानव सेवा के माध्यम से विश्वभर में शांति, प्रेम एवं तनावमुक्त जीवन का संदेश दे रही है। आज यह संस्था 183 देशों में सक्रिय है और करोड़ों लोगों तक आध्यात्मिकता एवं सेवा का संदेश पहुँचा चुकी है। आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, नशामुक्ति अभियान, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण एवं युवाओं के व्यक्तित्व विकास जैसे अनेक सामाजिक एवं सेवा कार्य संचालित किए जाते हैं। संस्था का मुख्य उद्देश्य तनावमुक्त एवं हिंसामुक्त समाज का निर्माण करना है। गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में लाखों स्वयंसेवक सेवा, साधना और मानव कल्याण के कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के प्रतिनिधि निशांत कुमार ने बताया कि गुरुदेव के 70वें जन्मोत्सव को विश्वभर में सेवा, साधना एवं सत्संग के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने करोड़ों लोगों को ध्यान, मौन एवं सुदर्शन क्रिया के माध्यम से जीवन जीने की नई दिशा दी है। आज विश्वभर में करोड़ों लोग उनके साथ ध्यान कर जन्मोत्सव को सेवा दिवस के रूप में मना रहे हैं। भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, देवघर के चेयरमैन जितेश राजपाल ने कहा कि रक्तदान मानवता की सबसे बड़ी सेवा है और आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा गुरुजी के जन्मोत्सव पर इस प्रकार का सेवा कार्य अत्यंत प्रेरणादायक है। वाइस चेयरमैन पीयूष जायसवाल ने कहा कि समाज में सेवा, सद्भाव एवं मानवता की भावना को मजबूत करने में इस प्रकार के आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रक्तदान जैसे पुनीत कार्य से अनेक लोगों का जीवन बचाया जा सकता है। कार्यक्रम की तैयारी एवं सफलता में निशांत कुमार, नीलम, राम शंकर, गुरु प्रसाद, गौतम, कन्हैया, रणधीर, गीता, रीना, रचना सहित अनेक गुरु भक्तों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*ताप बिजली घरों का परिचालन और रख-रखाव ठेके पर देने के फैसले के विरोध में 13 मई को काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे एवं विरोध प्रदर्शन करेंगे बिजली


लखनऊ।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर 13 मई को प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी समस्त जनपदों और परियोजनाओं पर पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे तथा कार्यालय समय के उपरांत परियोजनाओं एवं कार्यस्थलों पर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे।

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि काली पट्टी बांधने का निर्णय पनकी ताप बिजली घर एवं जवाहरपुर ताप बिजली घर के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनी को दिए जाने के विरोध में लिया गया है। कल सभी ऊर्जा निगमों में कार्यरत बिजली कर्मी, जूनियर इंजीनियर, अभियंता एवं संविदा कर्मी पूरे दिन काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के ताप बिजली घरों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद बिजली घरों के संचालन एवं रख-रखाव को निजी कंपनियों को सौंपने की कोशिश की जा रही है। इससे स्पष्ट है कि प्रबंधन की रुचि सुधार में नहीं, बल्कि निजीकरण में है।

संघर्ष समिति ने बताया कि जवाहरपुर ताप बिजली घर लगभग 14,000 करोड़ रुपये तथा पनकी ताप बिजली घर लगभग 8,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किए गए हैं। यह जनता की गाढ़ी कमाई का धन है। इतनी बड़ी सार्वजनिक धनराशि खर्च करने के बाद इन बिजली घरों को 25 वर्षों के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। ध्यान देने योग्य है कि ताप बिजली घरों की सामान्य आयु लगभग 25 वर्ष मानी जाती है।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि मार्च 2023 से शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे बिजली कर्मचारियों पर की गई समस्त उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक जन-जागरण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत आज शाहजहांपुर एवं बरेली में विरोध सभाएं आयोजित की गईं।

विरोध सभाओं को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, सुहेल आबिद तथा राजेंद्र प्रसाद घिल्डियाल ने मुख्य रूप से संबोधित किया।

13 मई को राजधानी लखनऊ में शक्ति भवन पर अपराह्न 02 बजे विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
94150 06225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*भोगनीपुर लैंड स्कैम ने निजी कंपनियों का असली चरित्र उजागर किया : बिजली कर्मियों ने काली पट्टी बांधकर जताया विरोध :पूर्वांचल व दक्षिणांचल डिस्कॉ


भोगनीपुर में सामने आए लगभग 400 करोड़ रुपये के भूमि घोटाले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक संसाधनों और जनहित से जुड़े क्षेत्रों का नियंत्रण सौंपना कितना खतरनाक हो सकता है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग, नियमों की खुलेआम अनदेखी, बैंक अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत तथा चीटिंग, फर्जीवाड़ा और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप निजीकरण मॉडल की वास्तविकता को उजागर करते हैं।

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि जब निजी कंपनियां सरकारी जमीन और सार्वजनिक संसाधनों के साथ इस प्रकार की अनियमितताओं में लिप्त पाई जा रही हैं, तब प्रदेश के बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में सौंपना जनता, किसानों और कर्मचारियों — तीनों के हितों के खिलाफ होगा।

संघर्ष समिति ने मांग की है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही पनकी तथा जवाहरपुर ताप बिजलीघरों के परिचालन एवं अनुरक्षण का कार्य 25 वर्षों के लिए निजी कंपनियों को देने का निर्णय भी सिरे से खारिज किया जाए।

संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली व्यवस्था कोई व्यावसायिक उत्पाद नहीं बल्कि जनता को दी जाने वाली मूलभूत सार्वजनिक सेवा है। निजी कंपनियों का मुख्य उद्देश्य अधिकतम लाभ कमाना होता है, जबकि सरकारी बिजली संस्थानों का उद्देश्य प्रदेश की जनता को सुरक्षित, सस्ती और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराना है।

आज प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों, बिजलीघरों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारियों, संविदा कर्मियों, जूनियर इंजीनियरों तथा अभियंताओं ने पूरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्य किया तथा कार्यालय समय के उपरांत व्यापक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। विरोध कार्यक्रमों में पनकी और जवाहरपुर ताप बिजली घरों के निजीकरण, आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मियों की छंटनी के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई गई।
संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि भोगनीपुर लैंड स्कैम में जिस प्रकार हिमावत पावर कंपनी एवं लैंको अनपरा पावर कंपनी पर चीटिंग, फर्जीवाड़ा और क्रिमिनल कांस्पिरेसी के आरोप सामने आए हैं, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि उत्तर प्रदेश के पावर सेक्टर में निजी क्षेत्र का असली चरित्र क्या है और उनका वास्तविक उद्देश्य केवल निजी लाभ अर्जित करना है।

उन्होंने निजी कंपनियों, बैंक अधिकारियों तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री से अपील की कि निजी कंपनियों के इस चरित्र के उजागर होने के बाद उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में निजीकरण संबंधी किसी भी प्रस्ताव को आगे न बढ़ाया जाए।

संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह निजीकरण की नीति पर पुनर्विचार करे, सरकारी बिजली संस्थानों को मजबूत बनाए, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करे तथा सार्वजनिक क्षेत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।

निजीकरण और उत्पीड़न के विरोध में चल रहे जनजागरण अभियान के अंतर्गत आज संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने सीतापुर और हरदोई में विरोध सभा की । विरोध सभा को संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारी मुख्यतया जितेन्द्र सिंह गुर्जर और महेन्द्र राय ने संबोधित किया।
     उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां के विरोध में 14 मई को लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के मुख्यालय पर अपराह्न 2:00 बजे  से शाम 5:00 बजे तक विरोध सभा होगी।

शैलेन्द्र दुबे
संयोजक
9425006225
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।
*आईआईटी मद्रास बीएस डिग्री प्रोग्राम के आगामी बैच के लिए प्रवेश प्रारंभ, 31 मई आवेदन करने की अंतिम तिथि*

* आईआईटी मद्रास की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमियों के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है

*लखनऊ, मई, 2026:* भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के बीएस डिग्री प्रोग्राम ने शैक्षणिक सत्र-2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दिया है। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 है। आईआईटी की उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा अधिक से अधिक और विभिन्न पृष्ठभूमि के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए सुलभ बनाने का यह प्रोग्राम कक्षा 12 की पढ़ाई पूरी कर चुके सभी उम्मीदवारों के लिए है और इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है।
बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लिकेशंस, बीएस इन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स, बीएस इन मैनेजमेंट एंड डेटा साइंस और बीएस इन एरोनॉटिक्स एंड स्पेस टेक्नोलॉजी नाम से चार अलग-अलग प्रोग्राम उपलब्ध हैं। इनकी संरचना इस तरह की गई है कि विद्यार्थी स्वतंत्र डिग्री के रूप में या किसी नियमित कॉलेज डिग्री के साथ भी इस प्रोग्राम का लाभ उठाएँ।
इन प्रोग्राम्स में पढ़ाई मुख्य रूप से ऑनलाइन होती है, जबकि शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए पूरे भारत में मौजूद परीक्षा केंद्रों पर व्यक्तिगत उपस्थिति में परीक्षाएँ आयोजित होती हैं। विद्यार्थी अपनी गति से पढ़ाई कर सकते हैं तथा उन्हें सर्टिफिकेट, डिप्लोमा या डिग्री समेत कई एग्जिट ऑप्शन दिए जाते हैं, ताकि वे शिक्षा और करियर के अपने लक्ष्यों के अनुसार इस सुविधा का लाभ उठाएँ।
आवेदन करने के इच्छुक विद्यार्थी और उनके अभिभावक अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल विजिट कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई, 2026 की नजदीक आ गई है। इसलिए इच्छुक विद्यार्थी https://study.iitm.ac.in  के माध्यम से आवेदन कर दें।
इन प्रोग्राम्स के बारे में प्रो. प्रताप हरिदोस, डीन (अकादमिक कोर्स), आईआईटी मद्रास ने कहा, “ये बीएस डिग्री प्रोग्राम शिक्षा की गुणवत्ता कायम रखते हुए विद्यार्थियों को अपनी सुविधा से पढ़ाई करने का अवसर देते हैं। हम यह देख रहे हैं कि विद्यार्थियों को डेटा, प्रौद्योगिकी और अंतःविषयी सोच का मजबूत आधार देने की जरूरत बढ़ रही है चाहे वे मुख्य रूप से जिस डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे हों। इस प्रोग्राम के माध्यम से विद्यार्थी अन्य शैक्षणिक या प्रोफेशनल कोर्स के साथ-साथ आईआईटी मद्रास की उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर अच्छे करियर के अवसर बढ़ा सकते हैं।” ‘भविष्य के लिए तैयार कौशल’
आईआईटी मद्रास चाहता है कि विद्यार्थी भविष्य के लिए तैयार कौशल का विकास करें। यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि करियर के अवसर तेजी से बदल रहे हैं और उम्मीदवारों से उद्योगों की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं। इसके मद्देनजर इस शिक्षा मॉडल में सब की सुविधा का ध्यान रखा गया है। यह भौगोलिक सीमाओं, पारंपरिक प्रवेश प्रक्रियाओं और कठोर शिक्षण संरचनाओं जैसी बाधाओं को दूर करता है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम में प्रवेश के लिए आम इंजीनियरिंग प्रोग्राम की तरह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) उत्तीर्ण करना आवश्यक नहीं है। विद्यार्थी एक क्वालिफायर प्रक्रिया के माध्यम से प्रवेश प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह आईआईटी मद्रास की शिक्षा पूरे देश के अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो गई है।
बीएस डिग्री प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी खूबी इनका अन्य अंडरग्रैजुएट कोर्सेस के साथ तालमेल होना है। बीकॉम, बीएससी, बीबीए या इंजीनियरिंग डिग्री के विद्यार्थी इसके साथ-साथ आईआईटी मद्रास के बीएस प्रोग्राम में नामांकन कर सकते हैं। ये उन्हें मुख्य शिक्षा कोर्स करने के साथ-साथ विश्लेषण, प्रौद्योगिकी और निर्णय लेने की क्षमताएं बढ़ाने में सक्षम बनाते हैं।
आज के रोजगार परिदृश्य में डुअल-डिग्री का यह लचीलापन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि आम तौर पर संगठन ऐसे ग्रैजुएट चाहते हैं, जो क्षेत्रीय विशेषज्ञता को डेटा के अनुसार काम करने की विशेषज्ञता से जोड़ने में सक्षम हों। साथ ही, उम्मीदवारों से यह अपेक्षा रखते हैं कि उनके पास विभिन्न विषयों को परस्पर जोड़ कर समस्या-समाधान करने का कौशल हो।
आईआईटी मद्रास के बीएस डिग्री प्रोग्राम्स में पूरे भारत के लाखों विद्यार्थी नामांकित हैं। इस तरह जन-जन तक आईआईटी मद्रास की विश्वस्तरीय शिक्षा पहुँचाने का सपना पूरा हो रहा  है। संस्थान सब के विकास पर जोर देते हुए कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि के योग्य उम्मीदवारों को 75 प्रतिशत तक शुल्क सहायता भी प्रदान करता है। यह सुनिश्चित करता है कि अर्थाभाव किसी की पढ़ाई में बाधक नहीं हो।
इन प्रोग्राम्स के करिकुलम उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किए गए हैं। इनमें व्यावहारिक शिक्षा, वास्तविक जन-जीवन के उपयोगों और नवोदित प्रौद्योगिकियों पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को अच्छे करियर के उभरते अवसरों के लिए तैयार करने के लिए डेटा विश्लेषण, व्यावसायिक निर्णय, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों जैसे जरूरी शिक्षा क्षेत्रों का अनुभव मिलता है।