मगध विश्वविद्यालय में वैचारिक टकराव गहराया, जातीय उन्माद और हिंदू विरोधी विचारों के प्रसार के आरोप
गया-बोधगया। मगध विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध कॉलेजों में हाल के दिनों में हो रही कुछ गतिविधियों ने शैक्षणिक वातावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ व्यक्तियों द्वारा वामपंथी विचारधारा के नाम पर छात्रों के बीच जातीय उन्माद फैलाने तथा हिंदू विरोधी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संतुलन प्रभावित होता प्रतीत हो रहा है, जो चिंता का विषय है।एबीवीपी के छात्र नेता सूरज सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान के केंद्र होते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सुनियोजित ढंग से छात्रों को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर छात्रों को बांटना तथा हिंदू आस्था, परंपरा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध नकारात्मक वातावरण तैयार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल छात्र एकता कमजोर होती है, बल्कि उनके शैक्षणिक विकास और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सूरज सिंह ने आगे आरोप लगाया कि कुछ तत्व एकतरफा विचारधारा और भ्रामक प्रचार के माध्यम से छात्रों व ख़ास कर छात्राओं को गुमराह कर रहे हैं, जिससे परिसर में अविश्वास और तनाव का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के मंदिर में किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति या वैचारिक उन्माद को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सूरज सिंह ने सभी छात्र संगठनों, शिक्षकों और समाज के जिम्मेदार नागरिकों से भी अपील की कि वे छात्रों को जोड़ने, आपसी सद्भाव बढ़ाने और सकारात्मक, समावेशी एवं शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने की दिशा में कार्य करें।
इधर छात्र समुदाय के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई छात्रों का मानना है कि विचारों की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है, लेकिन किसी भी विचारधारा के नाम पर समाज या किसी धर्म विशेष के खिलाफ माहौल बनाना तथा छात्रों को विभाजित करना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है।

गया-बोधगया। मगध विश्वविद्यालय एवं उससे संबद्ध कॉलेजों में हाल के दिनों में हो रही कुछ गतिविधियों ने शैक्षणिक वातावरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सामने आ रहे हैं कि कुछ व्यक्तियों द्वारा वामपंथी विचारधारा के नाम पर छात्रों के बीच जातीय उन्माद फैलाने तथा हिंदू विरोधी सोच को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे विश्वविद्यालय का शैक्षणिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संतुलन प्रभावित होता प्रतीत हो रहा है, जो चिंता का विषय है।एबीवीपी के छात्र नेता सूरज सिंह ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज विचारों के स्वस्थ आदान-प्रदान के केंद्र होते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति में सुनियोजित ढंग से छात्रों को विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर छात्रों को बांटना तथा हिंदू आस्था, परंपरा एवं सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध नकारात्मक वातावरण तैयार करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे न केवल छात्र एकता कमजोर होती है, बल्कि उनके शैक्षणिक विकास और भविष्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। सूरज सिंह ने आगे आरोप लगाया कि कुछ तत्व एकतरफा विचारधारा और भ्रामक प्रचार के माध्यम से छात्रों व ख़ास कर छात्राओं को गुमराह कर रहे हैं, जिससे परिसर में अविश्वास और तनाव का माहौल बनता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के मंदिर में किसी भी प्रकार की विभाजनकारी राजनीति या वैचारिक उन्माद को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।


भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने भाजपा जिला कार्यालय देवघर में प्रेस वार्ता के माध्यम से महिलाओं के बीच नारी शक्ति बंधन अधिनियम बिल को बारे में बतायी की किस तरह कांग्रेस इंडी गठबंधन के नेताओं ने महिला बिल का विरोध किया और सदन में उसे पास नहीं होने दिया अब देश की महिला या अच्छी तरह से जान चुकी है।
कि कांग्रेस जय में हिंदी गठबंधन के नेता पहले से ही महिला वीर का विरोध करते आया है और अब जब सम्मान देने की बात आई थी उसे बिल का सदन में विरोध करने का काम किया देश की यशस्वी प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा की महिलाओं को सदन में हिस्सेदारी के लिए आने दीजिए महिलाओं को आगे बढ़ाने दीजिए इसको नेतृत्व करने का अधिकार दीजिए ताकि महिलाओं के लिए जो आधी आबादी कहते हैं।
इसको पूर्ण रूप से हक अधिकार मिल सके लेकिन कांग्रेस के लोग महिलाओं के आगे बढ़ना अच्छा नहीं लग रहा है। यह हमेशा महिला आरक्षण हो या ओबीसी आरक्षण हो इसका हमेशा यह कांग्रेस के लोग विरोध करते रहे हैं और सदन में भी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी इसका पुरजोर विरोध किया था मंडल कमीशन जो बिहार ओबीसी आरक्षण के लिए मंडल कमीशन लागू किया गया था उसको भी दबाने का काम कांग्रेस के लोगों ने किया था आज महिला आरक्षण का भी विरोध करके सदन में बिल पास नहीं होने दिया है।
देश की महिला जान चुकी है और इसकी नियत पहचान चुकी है आने वाले समय में देश की महिला इनको हर जगह हर रास्ते पर हिंदी के नेताओं को विरोध करने का काम करेगी। देश के प्रधानमंत्री ने कहा है कि महिलाओं के लिए हम जो लड़ाई झाडे हैं वह आगे तक भी हम इसको ले जाएंगे हम चुप नहीं बैठेंगे।
महिलाओं की हिस्सेदारी की बात जो हमने रखा है वह आगे भी हम इसको करेंगे सभी जगह कांग्रेस गठबंधन के प्रति महिलाओं का कड़ा विरोध हो रहा है। प्रेस वार्ता में जिला अध्यक्ष सचिन रवानी, ममता देवी पूर्व महिला आयोग सदस्य रीता चौरसिया विशाखा सिंह विजया सिंह मुकेश पाठक धनंजय तिवारी उमाशंकर एवं काफी संख्या में महिला उपस्थित थी।
एलपीजी वितरकों की बैठक मे दिए गए सख्त निर्देश



ठाणे । साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगीत साहित्य मंच की 130 वीं मासिक काव्यगोष्ठी अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर रविवार 19 अप्रैल 2026 को आनलाइन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ गीतकार सदाशिव चतुर्वेदी मधुर के मधुर स्वर में सरस्वती वंदना से हुआ।जिसकी अध्यक्षता उत्कृष्ट लेखक अमरनाथ दुबे ने किया तथा मुख्य अतिथि के रूप में कवि एवं पत्रकार विनय शर्मा दीप उपस्थित थे।मंच का खूबसूरत संचालन शिक्षाविद् साहित्यकार उमेश मिश्र प्रभाकर ने किया।आमंत्रित साहित्यकारों में वरिष्ठ साहित्यकार भारतीय जनभाषा प्रचार समिति चेयरमैन रामप्यारे रघुवंशी,संस्थापक अध्यक्ष एवं संयोजक रामजीत गुप्ता, ओमप्रकाश सिंह,डॉ शारदा प्रसाद दुबे शरतचंद्र,हृदयांगन अध्यक्ष विधु भूषण त्रिवेदी,बाल साहित्यकार लविन त्रिवेदी, अरुण मिश्र अनुरागी,सदाशिव चतुर्वेदी मधुर की सराहनीय उपस्थिति रही। उपस्थित सभी साहित्यकारों ने श्रृंगार के गीत, अवधि गीत,छंद,मुक्तक से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।अंत में विनय शर्मा दीप ने सभी की समीक्षा करते हुए उत्कृष्ट लेखनी की सराहना किया तथा सह संयोजक सदाशिव चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी का समापन किया।

1 hour and 20 min ago
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