अम्बेडकरनगर हत्याकांड का खुलासा: मां नहीं, सनकी आशिक निकला कातिल, पुलिस मुठभेड़ में ढेर

* चार मासूमों समेत महिला की हत्या का राज खुला, संपत्ति और शादी की चाहत बनी वजह—एसपी प्राची सिंह का बयान

अम्बेडकरनगर। जिले में दो दिन पहले हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जिस मामले में शुरुआत में मां पर ही अपने चार बच्चों की हत्या का शक जताया जा रहा था, उसमें नया मोड़ सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस जघन्य वारदात को आमिर नाम के युवक ने अंजाम दिया था।

एसपी प्राची सिंह ने बताया कि आरोपी आमिर महिला से शादी करना चाहता था और उसकी संपत्ति पर भी उसकी नजर थी। इसी लालच और जुनून में उसने महिला और उसके चारों मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद शुरुआती जांच में यह माना गया कि महिला ने ही अपने बच्चों की हत्या कर फरार हो गई है। लेकिन अगले ही दिन महिला का शव नाले में मिलने से मामला पूरी तरह पलट गया और पुलिस ने गहन जांच शुरू की।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान देर रात आमिर की लोकेशन मिलने पर घेराबंदी की गई। मुठभेड़ के दौरान आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी है और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 IAS अधिकारियों का तबादला, 8 जिलों में नए डीएम तैनात

* देवरिया, जौनपुर, मऊ, महाराजगंज समेत कई जिलों में बदले जिलाधिकारी

 • शासन और विकास प्राधिकरणों में भी बड़े स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर तबादले करते हुए 38 आईएएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। इस फेरबदल के तहत 8 जिलों में नए जिलाधिकारियों (डीएम) की तैनाती की गई है, जबकि कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों और विकास प्राधिकरणों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

देवरिया के नए जिलाधिकारी के रूप में मधुसूदन हुलगी की नियुक्ति की गई है, जो पहले विशेष सचिव मुख्यमंत्री और अपर आवास आयुक्त के पद पर तैनात थे। वहीं, सैमुअल पाल एन को जौनपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। मऊ जिले की कमान अब आनंद वर्धन संभालेंगे, जबकि गौरव सिंह सुगरवाल को महाराजगंज का डीएम नियुक्त किया गया है।

संतोष कुमार शर्मा को महाराजगंज से फिरोजाबाद का जिलाधिकारी बनाया गया है। राजेंद्र पेंसिया को संभल से मुरादाबाद भेजा गया है, जबकि अंकित खंडेलवाल को आगरा नगर निगम से संभल का डीएम बनाया गया है। अभिषेक पांडे को प्रतापगढ़ का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

प्रशासनिक फेरबदल में कई अधिकारियों को शासन स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। अनुज सिंह को मुरादाबाद के डीएम पद से हटाकर विशेष सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया है। अभिनव गोयल को गाजियाबाद के मुख्य विकास अधिकारी पद से हटाकर गोरखपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

अजय जैन को लखनऊ के मुख्य विकास अधिकारी पद से हटाकर नगर आयुक्त, गोरखपुर बनाया गया है। डॉ. अल्का वर्मा को वित्त विभाग में विशेष सचिव के साथ रजिस्ट्रार चिट्स फंड एवं सोसाइटी की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, निधि बंसल को निदेशक प्रशासन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं नियुक्त किया गया है।

डॉ. दिनेश चंद्र को जौनपुर के डीएम पद से हटाकर लोक निर्माण विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है, जबकि प्रवीण मिश्रा को मऊ से हटाकर समाज कल्याण विभाग में भेजा गया है। दिव्या मित्तल को देवरिया से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

नेहा जैन को केस्को का प्रबंध निदेशक बनाया गया है, जबकि इंदुमती को महिला कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कई अधिकारियों के विभागों में अदला-बदली करते हुए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

यह व्यापक तबादला सूची प्रदेश में प्रशासनिक कसावट और बेहतर शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, जिससे विभिन्न जिलों और विभागों में कार्यकुशलता बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

आंधी-तूफान और बारिश से थमा लखनऊ, दिन में छाया घुप्प अंधेरा

घने बादलों की चादर, तेज हवाओं ने बढ़ाई दहशत; जनजीवन प्रभावित, तापमान में आई गिरावट

लखनऊ । राजधानी लखनऊ में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शहर को आंधी, तूफान और भारी बारिश की चपेट में ले लिया। सुबह 8.30 बजे के समय ही आसमान में घने काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही घुप्प अंधेरा जैसा माहौल बन गया।

तेज हवाओं के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने सड़कों पर पानी भर दिया, जिससे यातायात की रफ्तार थम गई। कई इलाकों में पेड़ और होर्डिंग गिरने की भी खबरें सामने आई हैं।

मौसम के इस अचानक बदले मिजाज से जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर जनजीवन भी प्रभावित हुआ। तेज आंधी और बारिश के चलते लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आज, बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मतगणना जारी

#assemblyelection2026_result

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आज, सोमवार को घोषित होंगे। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में किसकी सरकार बनेगी, अब इसका फैसला हो रहा है। कहां-किसकी सरकार बनेगी, आज यह साफ हो जाएगा। जिसके लिए पांचों राज्यों में डाले गे वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इन परिणाम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। ये चुनाव नतीजे ममता बनर्जी, हिमंत बिस्व सरमा, स्टालिन और पी. विजयन जैसे कद्दावर मुख्यमंत्रियों की किस्मत का भी फैसला करेंगे।

बंगाल के रिजल्ट पर देशभर की नजर

आज पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के नतीजे आ रहे हैं। मगर सबसे अधिक नजर देश और दुनिया की बंगाल पर है। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के जेहन में फिलहाल एक ही सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता बरकरार रख पाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक जीत हासिल करके पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाएगी। बंगाल में एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में रहे हैं। अब ऐसे में दिखने वाली बात है कि ये एग्जिट पोल रिजल्ट की भविष्यवाणी सही साबित होती है या नहीं। अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो ममता बनर्जी को झटका लग सकता है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ करेगी गेम?

केरल में पिछले दस साल से एलडीएफ की सरकार है। एग्जिट पोल की मानें तो कांग्रेस नीत यूडीएफ इस बार सत्ता में आ सकता है। पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश कर रहा है, जो अब तक कभी नहीं हुआ। लेकिन यहां मुकाबला कड़ा है और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ करीब 72 सीटें जीत सकता है। अगर यूडीएफ अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत होगी और यह दिखाएगा कि वह बड़े गठबंधन का नेतृत्व कर सकती है।

तमिलनाडु में क्या स्टालिन करेंगे वापसी?

तमिलनाडु में अगली सरकार किसकी बनेगी बस कुछ देर में नतीजे आने पर तस्वीर साफ हो जाएगी। राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान 85.1 फीसदी मतदान हुआ है, जो रिकॉर्ड है। यहां आमतौर पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होता है, लेकिन इस बार अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी मैदान में है। अनुमान बताते हैं कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है और उसे 120 से 145 सीटें मिल सकती हैं। वहीं विजय की पार्टी तीसरी ताकत बनकर उभरी है और चेन्नई व मदुरै जैसे शहरों में करीब 30 प्रतिशत वोट पा सकती है। इससे राज्य की पारंपरिक राजनीति बदल सकती है।

असम में क्या एनडीए करेगी कमाल?

वहीं, पूर्वोत्तर के असम में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन मजबूत स्थिति में दिख रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए लगातार तीसरी बार जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार एनडीए को 126 में से 85 से 100 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मिलकर मोर्चा बनाया है, लेकिन उनके सामने भाजपा की मजबूत संगठन क्षमता की चुनौती है।

जहानाबाद में लगा मगही चौपाल, अष्टम अनुसूची में शामिल करने की उठी मांग
जनगणना में “मगही” दर्ज कराने को लेकर लोगों से अपील

जहानाबाद के अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का भव्य आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने और जनगणना के दौरान मातृभाषा के रूप में “मगही” दर्ज कराने के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, बुद्धिजीवी और भाषा प्रेमी शामिल हुए। चौपाल के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मगही भाषा मगध की पहचान है और इसे उसका संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुधाकर राजेंद्र ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा होती है, इसलिए मगही को उसका उचित सम्मान मिलना जरूरी है। वहीं विश्वजीत कुमार अलबेला ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को मगही भाषा के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर सन्नी कुमार कश्यप ने मगध के इतिहास और मगही भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही संजय कुमार, अजय विश्वकर्मा और मगही के गोल्ड मेडलिस्ट कमलेश कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में मगही को ही दर्ज कराएं, ताकि इस भाषा को उसका उचित अधिकार मिल सके। कार्यक्रम का सफल आयोजन गौतम पाराशर के संयोजन में किया गया। आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा गया। चौपाल के अंत में यह संकल्प लिया गया कि मगही भाषा को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे की कोशिश नाकाम, प्रशासन ने तोड़ा शौचालय टैंक
* अंबेडकरनगर में दबंगों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई, मार्ग हुआ बहाल

अंबेडकरनगर/बसखारी। जिले के बसखारी क्षेत्र में दबंगों द्वारा सार्वजनिक रास्ते को अवैध निर्माण के जरिए बाधित करने की कोशिश प्रशासन की तत्परता से विफल कर दी गई। मामला वार्ड नंबर 10 का है, जहां कुछ लोगों ने रास्ते के बीचों-बीच शौचालय टैंक का निर्माण कर आवागमन रोकने का प्रयास किया था।
जानकारी के अनुसार, राकेश कुमार मौर्य, प्रभावती, उमेश मौर्य और भारती समेत अन्य लोगों द्वारा हिंदी प्रचार-प्रसार सेवा संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सम्राट अशोक मौर्य के आवास के सामने सार्वजनिक मार्ग पर अवैध निर्माण कराया जा रहा था। इससे स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तत्काल प्रशासन से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही नगर पंचायत बसखारी, टांडा तहसील और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता, अधिशासी अधिकारी, उप जिलाधिकारी डॉ. शशि शेखर, क्षेत्राधिकारी अकबरपुर, थाना अध्यक्ष बसखारी सुनील कुमार पांडेय सहित वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए अवैध शौचालय टैंक को ध्वस्त कर दिया गया और मार्ग को आमजन के लिए पुनः खोल दिया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रास्तों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है और उन्हें संबंधित धाराओं में पाबंद किया गया है।
स्थानीय निवासियों—रमेश मौर्य, रामजीत मौर्य, संतोष मौर्य, मंतोष मौर्य, जोगिंदर मौर्य, महेंद्र मौर्य सहित अन्य लोगों ने प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो दैनिक आवागमन और निर्माण कार्यों में भारी परेशानी होती।
भव्य समारोह में R.V. फिलिंग स्टेशन का उद्घाटन, मंत्री के.पी. मलिक ने किया लोकार्पण
मेरठ/बहसूमा। थाना क्षेत्र बहसूमा अंतर्गत NH-34 पर ग्राम झुंनझुनी के सामने रविवार को R.V. फिलिंग स्टेशन का भव्य उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व फिलिंग स्टेशन के मालिक राहुल बालियान निवासी किनोनी बरवाला, जनपद मुजफ्फरनगर द्वारा किया गया, जिसमें करीब 50-60 लोगों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री माननीय के.पी. मलिक रहे। मंत्री के.पी. मलिक सुबह लगभग 11:15 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और 11:20 बजे विधिवत फीता काटकर R.V. फिलिंग स्टेशन का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के बाद मंत्री जी ने उपस्थित लोगों से संक्षिप्त वार्ता की तथा क्षेत्र के विकास में इस तरह की सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों के लिए सूक्ष्म जलपान की भी व्यवस्था की गई।

कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत मंत्री के.पी. मलिक करीब 11:58 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष के निष्कासन के बाद सुभासपा का डैमेज कंट्रोल तेज
* अनुशासनहीनता पर सख्त रुख, जल्द होगा नए नेतृत्व का ऐलान

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोपरि मानते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रेमचंद कश्यप को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई उन्हें कथित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के बाद की गई।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, प्रेमचंद कश्यप की गतिविधियां संगठन के हितों के विपरीत पाई गईं, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लिया गया। सुभासपा नेतृत्व को पिछले कुछ समय से उनके कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आंतरिक जांच के बाद निष्कासन की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया गया। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठन की विचारधारा और नीतियों के खिलाफ जाने वाले नेताओं पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी। सुभासपा ने यह भी दोहराया कि वह अतिपिछड़ों, अति दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी सक्रियता से विपक्षी दल असहज हैं, लेकिन किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
महिला आरक्षण पर झारखंड में सियासत तेज: विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र।

जैसा कि आपको विदित है कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक सदन के 3 दिनों का विशेष सत्र आहूत कर देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण हेतु 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' प्रस्तुत किया गया। दुर्भाग्यवश, विपक्ष के साथियों का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण सदन में यह 'बिल' पारित नहीं हो पाया। इस बिल के पारित हो जाने से जहां पूरे देश की आधी आबादी को 2029 से ही प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता, वहीं झारखंड प्रदेश में भी 14 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 21 हो जाती, जिसमें 7 लोकसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी प्रकार विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व को अवसर मिल पाता।

झारखंड की संस्कृति एवं झारखंडी इतिहास में सदैव महिलाओं को प्रतिनिधित्व सहित सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया, चाहे वह सामाजिक हो या राजनैतिक में महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान दिया है। वीरांगना फूलो-झानो की इस धरती पर निवासरत झारखंड की बहनों की यह आशा है कि मा. मुख्यमंत्री जी, आप स्वयं महिला सशक्तिकरण के सशक्त पैरोकार रहे हैं। अतः इस झारखंड की भूमि पर इतिहास रचने का कार्य करें एवं मा. राज्यपाल की अनुमति से झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कराकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' को पारित कर केन्द्र सरकार से पुनः इसे सदन में पारित कराने का आग्रह करें। आपके इस ऐतिहासिक कदम से झारखंड की आधी आबादी के लिए बहुप्रतिक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त संभव हो सकेगा।

आशा है कि आप दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

इतने गंभीर विषय के लिए मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण : बाबूलाल मरांडी*

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे गंभीर विषय पर वार्तालाप के लिए पार्टी द्वारा हेमंत सोरेन से मिलने के लिए लगातार समय मांगे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देने के मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र बुलाने और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने के लिए उनसे आग्रह करना चाहती थी, बावजूद समय नहीं दिया गया। श्री मरांडी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास था कि तीन मई का कोई समय मिल जाए परंतु बड़ा दुर्भाग्य है कि लगातार समय मांगने के बाद भी समय नहीं मिल पाया और ना ही उधर से कोई स्पष्ट उत्तर दिया गया। जबकि पार्टी ने विषय वस्तु पूछने पर भी स्पष्ट रूप से विषय वस्तु के संबंध में स्पष्ट रूप से बता दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने समय देना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए तय किया गया कि सीएम के पास अगर समय नहीं है उनको एक पत्र लिखकर ही उन्हें सारी बातों से अवगत करा दिया जाए। इसलिए इस विषय पर उन्हें पत्र लिखा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि 16, 17, 18 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सदन में लाया गया था। इससे देश की आधी आबादी काफी प्रसन्न हुई कि लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। केवल 33% सीट ही रिजर्व नहीं होती बल्कि लोकसभा विधानसभा की सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ती। झारखंड के संदर्भ में देखा जाए तो यहां 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें 7 महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। जिसमें 41 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती। झारखंड की लगभग सभी सरकारों द्वारा भारत सरकार को संकल्प भेजा गया था कि झारखंड में विधानसभा की सीटें बढ़नी चाहिए। आज सीटें बढ़ती तो और लोगों को भी अवसर मिलता।

श्री मरांडी ने कहा कि उम्मीद थी कि हेमंत सोरेन इन चीजों को समझेंगे और इस बिल का वह समर्थन करेंगे लेकिन उन्होंने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजें ताकि फिर से भारत सरकार इस बिल को ला सके। इससे महिलाओं को ही नहीं बल्कि और लोगों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पार्टी द्वारा लिखे पत्र को भी साझा किया।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहे।

अम्बेडकरनगर हत्याकांड का खुलासा: मां नहीं, सनकी आशिक निकला कातिल, पुलिस मुठभेड़ में ढेर

* चार मासूमों समेत महिला की हत्या का राज खुला, संपत्ति और शादी की चाहत बनी वजह—एसपी प्राची सिंह का बयान

अम्बेडकरनगर। जिले में दो दिन पहले हुए दिल दहला देने वाले हत्याकांड का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। जिस मामले में शुरुआत में मां पर ही अपने चार बच्चों की हत्या का शक जताया जा रहा था, उसमें नया मोड़ सामने आया है। पुलिस के अनुसार, इस जघन्य वारदात को आमिर नाम के युवक ने अंजाम दिया था।

एसपी प्राची सिंह ने बताया कि आरोपी आमिर महिला से शादी करना चाहता था और उसकी संपत्ति पर भी उसकी नजर थी। इसी लालच और जुनून में उसने महिला और उसके चारों मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी। घटना के बाद शुरुआती जांच में यह माना गया कि महिला ने ही अपने बच्चों की हत्या कर फरार हो गई है। लेकिन अगले ही दिन महिला का शव नाले में मिलने से मामला पूरी तरह पलट गया और पुलिस ने गहन जांच शुरू की।

पुलिस की कार्रवाई के दौरान देर रात आमिर की लोकेशन मिलने पर घेराबंदी की गई। मुठभेड़ के दौरान आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की, जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी है और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।

यूपी में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 38 IAS अधिकारियों का तबादला, 8 जिलों में नए डीएम तैनात

* देवरिया, जौनपुर, मऊ, महाराजगंज समेत कई जिलों में बदले जिलाधिकारी

 • शासन और विकास प्राधिकरणों में भी बड़े स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर तबादले करते हुए 38 आईएएस अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। इस फेरबदल के तहत 8 जिलों में नए जिलाधिकारियों (डीएम) की तैनाती की गई है, जबकि कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों और विकास प्राधिकरणों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

देवरिया के नए जिलाधिकारी के रूप में मधुसूदन हुलगी की नियुक्ति की गई है, जो पहले विशेष सचिव मुख्यमंत्री और अपर आवास आयुक्त के पद पर तैनात थे। वहीं, सैमुअल पाल एन को जौनपुर का जिलाधिकारी बनाया गया है। मऊ जिले की कमान अब आनंद वर्धन संभालेंगे, जबकि गौरव सिंह सुगरवाल को महाराजगंज का डीएम नियुक्त किया गया है।

संतोष कुमार शर्मा को महाराजगंज से फिरोजाबाद का जिलाधिकारी बनाया गया है। राजेंद्र पेंसिया को संभल से मुरादाबाद भेजा गया है, जबकि अंकित खंडेलवाल को आगरा नगर निगम से संभल का डीएम बनाया गया है। अभिषेक पांडे को प्रतापगढ़ का जिलाधिकारी नियुक्त किया गया है।

प्रशासनिक फेरबदल में कई अधिकारियों को शासन स्तर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। अनुज सिंह को मुरादाबाद के डीएम पद से हटाकर विशेष सचिव मुख्यमंत्री बनाया गया है। अभिनव गोयल को गाजियाबाद के मुख्य विकास अधिकारी पद से हटाकर गोरखपुर विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

अजय जैन को लखनऊ के मुख्य विकास अधिकारी पद से हटाकर नगर आयुक्त, गोरखपुर बनाया गया है। डॉ. अल्का वर्मा को वित्त विभाग में विशेष सचिव के साथ रजिस्ट्रार चिट्स फंड एवं सोसाइटी की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, निधि बंसल को निदेशक प्रशासन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं नियुक्त किया गया है।

डॉ. दिनेश चंद्र को जौनपुर के डीएम पद से हटाकर लोक निर्माण विभाग में विशेष सचिव बनाया गया है, जबकि प्रवीण मिश्रा को मऊ से हटाकर समाज कल्याण विभाग में भेजा गया है। दिव्या मित्तल को देवरिया से हटाकर राजस्व विभाग में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है।

नेहा जैन को केस्को का प्रबंध निदेशक बनाया गया है, जबकि इंदुमती को महिला कल्याण विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कई अधिकारियों के विभागों में अदला-बदली करते हुए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

यह व्यापक तबादला सूची प्रदेश में प्रशासनिक कसावट और बेहतर शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, जिससे विभिन्न जिलों और विभागों में कार्यकुशलता बढ़ाने की उम्मीद जताई जा रही है।

आंधी-तूफान और बारिश से थमा लखनऊ, दिन में छाया घुप्प अंधेरा

घने बादलों की चादर, तेज हवाओं ने बढ़ाई दहशत; जनजीवन प्रभावित, तापमान में आई गिरावट

लखनऊ । राजधानी लखनऊ में सोमवार को मौसम ने अचानक करवट लेते हुए शहर को आंधी, तूफान और भारी बारिश की चपेट में ले लिया। सुबह 8.30 बजे के समय ही आसमान में घने काले बादल छा गए, जिससे दिन में ही घुप्प अंधेरा जैसा माहौल बन गया।

तेज हवाओं के साथ शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने सड़कों पर पानी भर दिया, जिससे यातायात की रफ्तार थम गई। कई इलाकों में पेड़ और होर्डिंग गिरने की भी खबरें सामने आई हैं।

मौसम के इस अचानक बदले मिजाज से जहां एक ओर गर्मी से राहत मिली, वहीं दूसरी ओर जनजीवन भी प्रभावित हुआ। तेज आंधी और बारिश के चलते लोग सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो गए। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ घंटों तक इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजे आज, बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में मतगणना जारी

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देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आज, सोमवार को घोषित होंगे। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में किसकी सरकार बनेगी, अब इसका फैसला हो रहा है। कहां-किसकी सरकार बनेगी, आज यह साफ हो जाएगा। जिसके लिए पांचों राज्यों में डाले गे वोटों की गिनती शुरू हो चुकी है। इन परिणाम पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। ये चुनाव नतीजे ममता बनर्जी, हिमंत बिस्व सरमा, स्टालिन और पी. विजयन जैसे कद्दावर मुख्यमंत्रियों की किस्मत का भी फैसला करेंगे।

बंगाल के रिजल्ट पर देशभर की नजर

आज पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी के नतीजे आ रहे हैं। मगर सबसे अधिक नजर देश और दुनिया की बंगाल पर है। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले हर व्यक्ति के जेहन में फिलहाल एक ही सवाल है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता बरकरार रख पाएगी या फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ऐतिहासिक जीत हासिल करके पहली बार राज्य में अपनी सरकार बनाएगी। बंगाल में एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में रहे हैं। अब ऐसे में दिखने वाली बात है कि ये एग्जिट पोल रिजल्ट की भविष्यवाणी सही साबित होती है या नहीं। अगर एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो ममता बनर्जी को झटका लग सकता है।

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ करेगी गेम?

केरल में पिछले दस साल से एलडीएफ की सरकार है। एग्जिट पोल की मानें तो कांग्रेस नीत यूडीएफ इस बार सत्ता में आ सकता है। पिनराई विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा लगातार तीसरी बार जीतने की कोशिश कर रहा है, जो अब तक कभी नहीं हुआ। लेकिन यहां मुकाबला कड़ा है और कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ करीब 72 सीटें जीत सकता है। अगर यूडीएफ अच्छा प्रदर्शन करता है, तो यह कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी राहत होगी और यह दिखाएगा कि वह बड़े गठबंधन का नेतृत्व कर सकती है।

तमिलनाडु में क्या स्टालिन करेंगे वापसी?

तमिलनाडु में अगली सरकार किसकी बनेगी बस कुछ देर में नतीजे आने पर तस्वीर साफ हो जाएगी। राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान 85.1 फीसदी मतदान हुआ है, जो रिकॉर्ड है। यहां आमतौर पर डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सीधा मुकाबला होता है, लेकिन इस बार अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके भी मैदान में है। अनुमान बताते हैं कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे है और उसे 120 से 145 सीटें मिल सकती हैं। वहीं विजय की पार्टी तीसरी ताकत बनकर उभरी है और चेन्नई व मदुरै जैसे शहरों में करीब 30 प्रतिशत वोट पा सकती है। इससे राज्य की पारंपरिक राजनीति बदल सकती है।

असम में क्या एनडीए करेगी कमाल?

वहीं, पूर्वोत्तर के असम में भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन मजबूत स्थिति में दिख रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए लगातार तीसरी बार जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। एग्जिट पोल के अनुसार एनडीए को 126 में से 85 से 100 सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने मिलकर मोर्चा बनाया है, लेकिन उनके सामने भाजपा की मजबूत संगठन क्षमता की चुनौती है।

जहानाबाद में लगा मगही चौपाल, अष्टम अनुसूची में शामिल करने की उठी मांग
जनगणना में “मगही” दर्ज कराने को लेकर लोगों से अपील

जहानाबाद के अरवल मोड़ पर मगही चौपाल का भव्य आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मगही भाषा को संविधान की अष्टम अनुसूची में शामिल कराने और जनगणना के दौरान मातृभाषा के रूप में “मगही” दर्ज कराने के प्रति जागरूकता फैलाना था। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, बुद्धिजीवी और भाषा प्रेमी शामिल हुए। चौपाल के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि मगही भाषा मगध की पहचान है और इसे उसका संवैधानिक अधिकार मिलना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुधाकर राजेंद्र ने कहा कि भाषा हमारी संस्कृति की आत्मा होती है, इसलिए मगही को उसका उचित सम्मान मिलना जरूरी है। वहीं विश्वजीत कुमार अलबेला ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को मगही भाषा के प्रति जागरूक किया। इस अवसर पर सन्नी कुमार कश्यप ने मगध के इतिहास और मगही भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही संजय कुमार, अजय विश्वकर्मा और मगही के गोल्ड मेडलिस्ट कमलेश कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे जनगणना के दौरान अपनी मातृभाषा के रूप में मगही को ही दर्ज कराएं, ताकि इस भाषा को उसका उचित अधिकार मिल सके। कार्यक्रम का सफल आयोजन गौतम पाराशर के संयोजन में किया गया। आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में काफी उत्साह देखा गया। चौपाल के अंत में यह संकल्प लिया गया कि मगही भाषा को उसका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे की कोशिश नाकाम, प्रशासन ने तोड़ा शौचालय टैंक
* अंबेडकरनगर में दबंगों की मनमानी पर सख्त कार्रवाई, मार्ग हुआ बहाल

अंबेडकरनगर/बसखारी। जिले के बसखारी क्षेत्र में दबंगों द्वारा सार्वजनिक रास्ते को अवैध निर्माण के जरिए बाधित करने की कोशिश प्रशासन की तत्परता से विफल कर दी गई। मामला वार्ड नंबर 10 का है, जहां कुछ लोगों ने रास्ते के बीचों-बीच शौचालय टैंक का निर्माण कर आवागमन रोकने का प्रयास किया था।
जानकारी के अनुसार, राकेश कुमार मौर्य, प्रभावती, उमेश मौर्य और भारती समेत अन्य लोगों द्वारा हिंदी प्रचार-प्रसार सेवा संस्थान के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. सम्राट अशोक मौर्य के आवास के सामने सार्वजनिक मार्ग पर अवैध निर्माण कराया जा रहा था। इससे स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने तत्काल प्रशासन से शिकायत की।
शिकायत मिलते ही नगर पंचायत बसखारी, टांडा तहसील और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। नगर पंचायत अध्यक्ष ओमकार गुप्ता, अधिशासी अधिकारी, उप जिलाधिकारी डॉ. शशि शेखर, क्षेत्राधिकारी अकबरपुर, थाना अध्यक्ष बसखारी सुनील कुमार पांडेय सहित वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर कार्रवाई करते हुए अवैध शौचालय टैंक को ध्वस्त कर दिया गया और मार्ग को आमजन के लिए पुनः खोल दिया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रास्तों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है और उन्हें संबंधित धाराओं में पाबंद किया गया है।
स्थानीय निवासियों—रमेश मौर्य, रामजीत मौर्य, संतोष मौर्य, मंतोष मौर्य, जोगिंदर मौर्य, महेंद्र मौर्य सहित अन्य लोगों ने प्रशासन का आभार जताया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो दैनिक आवागमन और निर्माण कार्यों में भारी परेशानी होती।
भव्य समारोह में R.V. फिलिंग स्टेशन का उद्घाटन, मंत्री के.पी. मलिक ने किया लोकार्पण
मेरठ/बहसूमा। थाना क्षेत्र बहसूमा अंतर्गत NH-34 पर ग्राम झुंनझुनी के सामने रविवार को R.V. फिलिंग स्टेशन का भव्य उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व फिलिंग स्टेशन के मालिक राहुल बालियान निवासी किनोनी बरवाला, जनपद मुजफ्फरनगर द्वारा किया गया, जिसमें करीब 50-60 लोगों की उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री माननीय के.पी. मलिक रहे। मंत्री के.पी. मलिक सुबह लगभग 11:15 बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे और 11:20 बजे विधिवत फीता काटकर R.V. फिलिंग स्टेशन का उद्घाटन किया।

उद्घाटन के बाद मंत्री जी ने उपस्थित लोगों से संक्षिप्त वार्ता की तथा क्षेत्र के विकास में इस तरह की सुविधाओं को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों के लिए सूक्ष्म जलपान की भी व्यवस्था की गई।

कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत मंत्री के.पी. मलिक करीब 11:58 बजे अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए। आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
प्रदेश अध्यक्ष के निष्कासन के बाद सुभासपा का डैमेज कंट्रोल तेज
* अनुशासनहीनता पर सख्त रुख, जल्द होगा नए नेतृत्व का ऐलान

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने संगठनात्मक अनुशासन को सर्वोपरि मानते हुए बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष प्रेमचंद कश्यप को तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई उन्हें कथित रूप से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के बाद की गई।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, प्रेमचंद कश्यप की गतिविधियां संगठन के हितों के विपरीत पाई गईं, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लिया गया। सुभासपा नेतृत्व को पिछले कुछ समय से उनके कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आंतरिक जांच के बाद निष्कासन की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया गया। पार्टी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संगठन की विचारधारा और नीतियों के खिलाफ जाने वाले नेताओं पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, संगठन को मजबूत बनाए रखने के लिए जल्द ही नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा की जाएगी। सुभासपा ने यह भी दोहराया कि वह अतिपिछड़ों, अति दलितों, वंचितों और शोषित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई मजबूती से लड़ती रहेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी सक्रियता से विपक्षी दल असहज हैं, लेकिन किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
महिला आरक्षण पर झारखंड में सियासत तेज: विशेष सत्र बुलाने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र।

जैसा कि आपको विदित है कि केन्द्र सरकार द्वारा विगत 16 से 18 अप्रैल, 2026 तक सदन के 3 दिनों का विशेष सत्र आहूत कर देश की आधी आबादी के सशक्तिकरण हेतु 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' प्रस्तुत किया गया। दुर्भाग्यवश, विपक्ष के साथियों का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण सदन में यह 'बिल' पारित नहीं हो पाया। इस बिल के पारित हो जाने से जहां पूरे देश की आधी आबादी को 2029 से ही प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक अवसर मिलता, वहीं झारखंड प्रदेश में भी 14 लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 21 हो जाती, जिसमें 7 लोकसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा। इसी प्रकार विधानसभा सीटों की संख्या 81 से बढ़कर 121 हो जाती, जिसमें 41 विधानसभा क्षेत्रों में महिला जनप्रतिनिधित्व को अवसर मिल पाता।

झारखंड की संस्कृति एवं झारखंडी इतिहास में सदैव महिलाओं को प्रतिनिधित्व सहित सभी प्रकार की निर्णय प्रक्रिया, चाहे वह सामाजिक हो या राजनैतिक में महत्वपूर्ण स्थान और सम्मान दिया है। वीरांगना फूलो-झानो की इस धरती पर निवासरत झारखंड की बहनों की यह आशा है कि मा. मुख्यमंत्री जी, आप स्वयं महिला सशक्तिकरण के सशक्त पैरोकार रहे हैं। अतः इस झारखंड की भूमि पर इतिहास रचने का कार्य करें एवं मा. राज्यपाल की अनुमति से झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कराकर 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल' को पारित कर केन्द्र सरकार से पुनः इसे सदन में पारित कराने का आग्रह करें। आपके इस ऐतिहासिक कदम से झारखंड की आधी आबादी के लिए बहुप्रतिक्षित न्याय का मार्ग प्रशस्त संभव हो सकेगा।

आशा है कि आप दलगत भावना से ऊपर उठकर इस महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार के विषय पर गंभीरता से निर्णय लेने का कष्ट करेंगे।

इतने गंभीर विषय के लिए मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देना दुर्भाग्यपूर्ण : बाबूलाल मरांडी*

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम जैसे गंभीर विषय पर वार्तालाप के लिए पार्टी द्वारा हेमंत सोरेन से मिलने के लिए लगातार समय मांगे जाने के बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा समय नहीं देने के मामले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विशेष सत्र बुलाने और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजने के लिए उनसे आग्रह करना चाहती थी, बावजूद समय नहीं दिया गया। श्री मरांडी प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे।

श्री मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा है। प्रयास था कि तीन मई का कोई समय मिल जाए परंतु बड़ा दुर्भाग्य है कि लगातार समय मांगने के बाद भी समय नहीं मिल पाया और ना ही उधर से कोई स्पष्ट उत्तर दिया गया। जबकि पार्टी ने विषय वस्तु पूछने पर भी स्पष्ट रूप से विषय वस्तु के संबंध में स्पष्ट रूप से बता दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री ने समय देना मुनासिब नहीं समझा। इसलिए तय किया गया कि सीएम के पास अगर समय नहीं है उनको एक पत्र लिखकर ही उन्हें सारी बातों से अवगत करा दिया जाए। इसलिए इस विषय पर उन्हें पत्र लिखा गया है।

श्री मरांडी ने कहा कि 16, 17, 18 अप्रैल को भारत सरकार द्वारा नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सदन में लाया गया था। इससे देश की आधी आबादी काफी प्रसन्न हुई कि लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। केवल 33% सीट ही रिजर्व नहीं होती बल्कि लोकसभा विधानसभा की सीटें भी उसी अनुपात में बढ़ती। झारखंड के संदर्भ में देखा जाए तो यहां 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें 7 महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। जिसमें 41 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती। झारखंड की लगभग सभी सरकारों द्वारा भारत सरकार को संकल्प भेजा गया था कि झारखंड में विधानसभा की सीटें बढ़नी चाहिए। आज सीटें बढ़ती तो और लोगों को भी अवसर मिलता।

श्री मरांडी ने कहा कि उम्मीद थी कि हेमंत सोरेन इन चीजों को समझेंगे और इस बिल का वह समर्थन करेंगे लेकिन उन्होंने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और इस आशय का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजें ताकि फिर से भारत सरकार इस बिल को ला सके। इससे महिलाओं को ही नहीं बल्कि और लोगों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। प्रेस वार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पार्टी द्वारा लिखे पत्र को भी साझा किया।

इस दौरान प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया सह प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज भी मौजूद रहे।