टिहरी गढ़वाल में शिक्षक संघ अध्यक्ष पर शिक्षिका के गंभीर आरोप
टिहरी गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जिले में एक शिक्षिका ने शिक्षक संघ के अध्यक्ष पर मानसिक शोषण और गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए थाना नई टिहरी में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि उसे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है और उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। मामले में एसएसपी ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है।

शिक्षिका द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने फोन कॉल और व्हाट्सएप के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक बातें कीं। आरोप है कि आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने की मांग की, कई बार पैसों की डिमांड की और अश्लील फोटो व वीडियो भी भेजे। इन हरकतों से वह और उसका परिवार लंबे समय से भय और मानसिक तनाव में जी रहा है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले चार महीनों से उसका वेतन रोक दिया गया है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। शिक्षिका का कहना है कि उसने इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

पीड़िता ने यह भी बताया कि उसका समायोजन जानबूझकर दूरस्थ विद्यालय में कर दिया गया है, जबकि वह पिछले 29 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देती आ रही है। लगातार हो रही प्रताड़ना और वेतन न मिलने के कारण वह पिछले एक साल से डिप्रेशन में है।

मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन में हलचल मच गई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित शिक्षिका ने प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की मांग की है।
उत्तराखंड : चकराता में सेब के बगीचे में लगी आग, 300 पेड़ जलकर खाक
* बागवान को भारी आर्थिक नुकसान, सरकार से लगाई मदद की गुहार

विकासनगर। देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में आग की एक बड़ी घटना सामने आई है। विकासनगर–जौनसार क्षेत्र के अस्टाड़ गांव में एक सेब के बगीचे में अचानक आग लग गई, जिससे करीब 300 से अधिक सेब के पेड़ जलकर नष्ट हो गए। इस घटना से बागवान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और वह गहरे सदमे में है।

जानकारी के अनुसार अस्टाड़–मंगरौली मोटर मार्ग के किनारे सूखी घास की पट्टी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। तेज लपटों और हवा के झोंकों के चलते आग पास में स्थित अस्टाड़ निवासी ब्रह्म दत्त जोशी के सेब के बगीचे तक पहुंच गई और कुछ ही समय में पूरे बगीचे को अपनी चपेट में ले लिया।

पीड़ित बागवान ब्रह्म दत्त जोशी ने बताया कि उनके बगीचे में लगे करीब 300 सेब के पेड़ों में कई पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए, जबकि कुछ पेड़ आंशिक रूप से झुलस गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से यह सेब का बगीचा तैयार किया था और इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन आग की इस घटना ने उनकी सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

ब्रह्म दत्त जोशी के अनुसार आग लगने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। संभव है कि किसी छोटी सी चिंगारी से सूखी घास में आग लगी हो, जो तेजी से फैलती चली गई। उन्होंने इस घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी है और नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण घास पूरी तरह सूख चुकी है। दिन में तेज धूप निकलने से सूखी घास आग को तुरंत पकड़ लेती है, जिससे छोटी चिंगारी भी बड़ी आग में तब्दील हो जाती है। इसी वजह से क्षेत्र में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका असर बागवानी और अन्य फसलों पर भी पड़ रहा है।

गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में किसान लगातार बागवानी को बढ़ावा दे रहे हैं। युवा भी सेब की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बागवान किसानों के हौसले टूट रहे हैं।

चकराता क्षेत्र की ठंडी जलवायु और पहाड़ी ढलान सेब उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। चकराता–मसूरी मार्ग पर रामताल उद्यान सहित आसपास के क्षेत्रों में सेब के बगीचे हैं, जिनके सेब काफी प्रसिद्ध हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर बुल्हाड़ सहित कई गांवों में सेब की बागवानी की जा रही है। ऐसे में इस तरह की आग की घटनाएं सेब उत्पादकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण: हरिद्वार में भजन-कीर्तन से विरोध, प्रयागराज प्रशासन से माफी की मांग

हरिद्वार। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट के विरोध में देशभर में आक्रोश फैलता जा रहा है। इसी क्रम में हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में राम नाम भजन-कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया गया।

शंकराचार्य मठ में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य शामिल हुए। इस दौरान राम नाम का जप किया गया और प्रयागराज प्रशासन पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई। संतों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र माफी नहीं मांगी तो खून से पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया जाएगा और प्रयागराज कूच किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शांतिपूर्वक गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रयागराज प्रशासन ने उन्हें जबरन रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ लात-घूंसों से बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। यहां तक कि 85 वर्षीय संत के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि प्रयागराज में धरने पर बैठे शंकराचार्य से प्रशासन तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संतों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर से संत और श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचकर आंदोलन करेंगे।

वहीं, पंडित विष्णुदास ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में एक संत के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। गंगा स्नान से रोकने का तरीका पूरी तरह गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राम नाम जप कर ईश्वर से प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी प्रयागराज माघ मेले की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के शिष्यों को घसीटा गया, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।

पंडित अधीर कौशिक ने ऐलान किया कि मंगलवार को प्रयागराज प्रशासन के विरोध में खून से पत्र लिखा जाएगा और राष्ट्रपति को संबोधित कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट जाने से रोक दिया था। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई थी। इस घटना के बाद शंकराचार्य मौन उपवास पर बैठ गए हैं, जबकि देशभर में उनके समर्थक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने दी धार्मिक परीक्षा
मुंबई।  श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ द्वारा आयोजित वार्षिक धार्मिक परीक्षा में इस वर्ष मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि यह परीक्षा पहली बार पूरे भारत में एक ही दिन, एक ही समय पर, 100 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 1 से 36 तक आयोजित की गई। यह आयोजन जैन धार्मिक शिक्षा के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। इस शुभ अवसर का आरंभ संस्था के उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह तथा कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला एवं जवाहरलाल मोतीलाल शाह के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। शक्तितला स्कूल में आयोजित परीक्षा के दौरान संस्था के पदाधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का दौरा कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन किया। पदाधिकारियों ने कहा, कि पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है। पाठशाला में संस्कारित बच्चे आगे चलकर साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका, जैन ट्रस्टी, स्वयंसेवक एवं जैन रक्षक बनकर शासन को सुदृढ़ करते हैं। जिनागम अर्थात श्रुतज्ञान है, और यह श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है।
गौरतलब हो कि डिजिटल युग में बच्चों को पाठशाला से जोड़ना एक चुनौती बन गया है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा जैन डिजिटल पाठशाला कार्यक्रम आरंभ किया गया है, जिसके माध्यम से 5 से 14 वर्ष के बच्चों को आधुनिक तकनीक के सहारे धार्मिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में संघ के मार्गदर्शन में मुंबई में 655 से अधिक पाठशालाओं में 1,400 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं सेवा दे रही हैं तथा 75,000 से अधिक बच्चे नियमित रूप से धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह ने कहा, कि बच्चों में धार्मिक संस्कारों का रोपण करना संस्था का मुख्य उद्देश्य है, और इसकी शुरूआत पाठशाला से ही होती है। जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांत-अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद-जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति सिखाते हैं। जिन बच्चों में धार्मिक संस्कार होते हैं, उनका सर्वांगीण विकास निश्चित होता है और वही जैन शासन को मजबूत बनाते हैं। महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह ने कहा, कि श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ का मुख्य लक्ष्य बच्चों में संस्कारों का रोपण करना है, और इसका प्रथम चरण पाठशाला ही है। पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है।
कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला ने कहा, कि श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है। बच्चों के जीवन निर्माण के लिए पाठशाला सर्वोत्तम साधन है। सम्यक ज्ञान की पर्व समान पाठशाला से जुड़े बच्चों का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होता है।
इस राष्ट्रव्यापी धार्मिक परीक्षा के अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहरलाल मोतीलाल शाह, अध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, कोषाध्यक्ष अशोक नरसिंह चरला तथा महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम में जैन ट्रस्टी, पाठशाला के विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे।
शंकराचार्य के अपमान के विरोध में मैदान में उतरी शिवसेना
सत्ता के अहंकार में डूबी योगी सरकार : आनंद दुबे

मुंबई। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान को लेकर शिवसेना यूबीटी ने योगी सरकार पर हमला बोला है। यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने आज सांताक्रूज़ पूर्व स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के बगल, हनुमान मंदिर पर साधु संतों और शिवसैनिकों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। आनंद दुबे ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी योगी सरकार की पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अंधी हो चुकी है। सनातन और हिंदुत्व के नाम पर सरकार बनने वाली भाजपा शासित राज्यों में सनातन और हिंदुत्व का जितना अपमान हो रहा है, उतना शायद ही कहीं हो। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन के जुल्म के खिलाफ शंकराचार्य जी और साधु संत धरने पर बैठे हैं और सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने कहा कि आखिर सनातन और हिंदुत्व कहां सुरक्षित रहेगा? पालघर की घटना का उदाहरण देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि पालघर में साधु संतों की निर्मम हत्या करने वाले लोगों को जहां उद्धव सरकार ने सलाखों के पीछे पहुंचाया, वहीं भाजपा ने एक आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी में प्रवेश कराया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की चुप्पी पर निशाना  साधते हुए उन्होंने कहा कि किस विवशता से वे मौनी बाबा बने हुए हैं?
संगीत साहित्य मंच के वार्षिकोत्सव में संगीत और साहित्य महाकुंभ
ठाणे। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगीत साहित्य मंच ठाणे के वार्षिकोत्सव में रविवार 18 जनवरी 2026 को वर्धमान हाल,गोकुल नगर ठाणे पश्चिम में संगीत के साथ साहित्य महाकुंभ का आयोजन किया गया।संगीत साहित्य मंच के संस्थापक एवं संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत गुप्ता के संयोजन एवं सदाशिव चतुर्वेदी मधुर के सह संयोजन में भव्य आयोजन हुआ। उक्त समारोह की अध्यक्षता अनिल कुमार सिंह - प्रबंध निदेशक यस आर डिग्री कॉलेज बांसपार गोरखपुर ने किया तथा स्वागताध्यक्ष रामप्यारे सिंह रघुवंशी चेयरमैन भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ने किया। विशिष्ट अतिथियों में के पी मिश्रा, गुलाब चंद दूबे, देवेन्द्र तिवारी, उमाशंकर पाण्डेय, शंकर सिंह, लाल सिंह, आनंदप्रकाश सिंह, संजय दूबे,गुलाब धर दूबे, तिलकराज खुराना,डॉ कृपाशंकर मिश्र,हौसला प्रसाद अन्वेषी, विधु भूषण त्रिवेदी, शिव कुमार सिंह, डॉ रामस्वरूप साहू,पं शिवप्रकाश पाण्डेय जमदग्निपुरी,अनिल कुमार राही,श्रीधर मिश्र,नंदलाल क्षितिज,अंजनी कुमार द्विवेदी, पत्रकार नामदार राही,डॉ कनक लता तिवारी,सीमा त्रिवेदी, शिल्पा सोनटक्के उपस्थित थे।मंच का खूबसूरत संचालन अतिथि सत्कार सदाशिव चतुर्वेदी मधुर एवं कवि सम्मेलन उमेशचंद्र मिश्र प्रभाकर ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना से किया गया।संगीत के साथ गीतकार शिवम पाण्डेय,नंदिनी तिवारी, सुरेश आनंद ने सभी को मनमोहक अवधि गीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतों पर संगीत आर्गन पर दीपक उपाध्याय,ढोलक रत्नाकर शर्मा,पैड पर धीरेन्द्र सिंह ने दिया।संस्था संरक्षक वरिष्ठ समाजसेवी दयाशंकर सिंह की उपस्थिति में यादगार कवि सम्मेलन हुआ जिसमें वरिष्ठ गज़लकार एन बी सिंह नादान, कमलेश पाण्डेय तरुण, जयप्रकाश मिलिंद,राजीव मिश्रा, राजेश दुबे अल्हड़ असरदार, संतोष सिंह,त्रिलोचन सिंह अरोरा,विनय शर्मा दीप,अन्नपूर्णा गुप्ता,किरण तिवारी,नेहा मिश्र नेह के साथ सभागृह में
सत्यभामा सिंह,लक्ष्मी यादव, पत्रकार संतोष पाण्डेय,डॉ प्रमोद पल्लवित,एडवोकेट अनिल शर्मा,वाचस्पति तिवारी,डॉ मृदुला तिवारी महक,अरुण मिश्र अनुरागी, लालबहादुर यादव कमल,डॉ शारदा प्रसाद दुबे शरदचन्द्र, ओमप्रकाश तिवारी, सुशील शुक्ला नाचीज, आनंद पाण्डेय केवल,डॉ वफा वारसी उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार नामदार राही के संपादक में प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक समाचार पत्र हरित जीवन का लोकार्पण उपस्थित साहित्यकारों की उपस्थिति में किया गया।अंत में संयोजक ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार व्यक्त किया।
बदलता झारखंड: क्षेत्रीय भागीदारी से वैश्विक सहभागिता की ओर बढ़ा राज्य; टिकाऊ निवेश और भविष्य की तकनीकी उन्नति पर मुख्यमंत्री का फोकस।

दावोस/रांची: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 की वार्षिक बैठक के उद्घाटन समारोह के साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए वैश्विक स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिषदों और संस्थागत भागीदारों के साथ सुनियोजित वार्ताओं की एक श्रृंखला शुरू कर रहा है।

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प्रमुख कंपनियों के साथ उच्च स्तरीय संवाद:

बैठक के पहले दिन मुख्यमंत्री कई बड़ी ग्लोबल कंपनियों के प्रमुखों और रणनीतिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे:

टाटा स्टील: भारत के औद्योगीकरण में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका और टिकाऊ विनिर्माण (Sustainable Manufacturing) पर चर्चा।

हिताची इंडिया: बुनियादी ढांचे के विकास, ऊर्जा प्रणालियों और आधुनिक तकनीकी समाधानों पर विमर्श।

टेक महिंद्रा: आईटी हब के रूप में झारखंड का विकास, डिजिटल नवाचार और तकनीकी इकोसिस्टम की स्थापना।

वैश्विक मंचों के साथ संस्थागत सहयोग:

मुख्यमंत्री ब्लूमबर्ग APAC, स्वीडन इंडिया बिजनेस काउंसिल और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेंगे। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश को सुगम बनाना और झारखंड को वैश्विक बाजार के साथ एकीकृत करना है।

समावेशी विकास और तकनीक पर जोर:

झारखंड केवल भारी उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और समावेशी नेतृत्व को भी शासन के अभिन्न अंग के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री टेक्नोलॉजी पवेलियनों का दौरा कर भविष्य के उन नवाचारों को समझेंगे जिन्हें झारखंड के औद्योगिक विकास के साथ जोड़ा जा सकता है।

विजन 2050 की ओर बढ़ते कदम:

25 वर्ष पूरे करने के बाद, झारखंड अब 'Vision 2050' की ओर अग्रसर है। दावोस में हो रही ये बैठकें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य अब जिम्मेदार निवेश आकर्षित करने और अपनी अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अपर्णा यादव को तलाक देंगे अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक, इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट ने मचाई हलचल

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समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर सियासी और पारिवारिक घमासान सामने आया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और बीजेपी नेता अपर्णा यादव से तलाक लेने का ऐलान कर दिया है।

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प्रतीक यादव का यह बयान उनके इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पोस्ट में प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतीक ने कहा कि मैं इस स्वार्थी महिला से जल्द से जल्द तलाक लूंगा, इन्होंने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया।

प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पोस्ट से सनसनी

अखिलेश के भाई प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लिखा, "मैं इस मतलबी औरत को जल्द से जल्द तलाक देने जा रहा हूँ, उसने मेरे परिवार के रिश्ते खराब कर दिए। वह बस मशहूर और असरदार बनना चाहती है। अभी मेरी मेंटल हेल्थ बहुत खराब है और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उसे सिर्फ अपनी ही चिंता है। मैंने इतनी बुरी औरत कभी नहीं देखी और मैं बदकिस्मत था कि मेरी शादी उससे हुई।"

कौन हैं अपर्णा यादव

अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं। उनके पिता अरविंद सिंह पत्रकार रहे हैं और उनकी मां लखनऊ नगर निगम में अधिकारी के पद पर हैं। अपर्णा यादव ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंटोनमेंट सीट से सपा (समाजवादी पार्टी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गईं थीं।

यूपी राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष हैं अपर्णा यादव

अपर्णा ने जनवरी 2022 में अचानक समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। अपर्णा यादव का यह फैसला अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। हालांकि अपर्णा यादव ने बीजेपी में शामिल होने पर कहा था कि वह पारिवारिक राजनीति नहीं, राष्ट्रवाद को चुनती हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से प्रभावित हैं। बीजेपी नेता अपर्णा यादव इस समय यूपी राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष भी हैं।

2011 में हुई थी शादी

सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव का इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट तेजी के साथ वायरल हो रहा है। लोग इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। बता दें कि अपर्णा यादव और प्रतीक ने एक दूसरे को 11 साल तक डेट किया। इसके बाद साल 2011 में परिवार की रजामंदी से दोनों की लव मैरिज हुई थी। अपर्णा और प्रतीक की शादी बेहद हाई प्रोफाइल शादी थी।

रेत माफिया चंबल नदी को कर रहे खोखला

राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में 350 ट्रॉली अवैध रेत जब्त


श्योपुर, मध्य प्रदेश। चंबल अंचल में रेत माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। अवैध खनन इस कदर बढ़ गया है कि प्रशासन और पुलिस की टीमें भी कई बार कार्रवाई से कतराती नजर आती हैं। रेत माफिया खुलेआम जेसीबी मशीनों से खनन कर चंबल नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ताजा मामला श्योपुर जिले के वीरपुर क्षेत्र का है, जहां राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। रविवार को वीरपुर थाना क्षेत्र के श्यामपुर गांव के पास चंबल नदी से अवैध रूप से निकाली गई करीब 350 ट्रॉली रेत को जब्त कर जेसीबी मशीनों के माध्यम से नष्ट किया गया। इस कार्रवाई से रेत माफिया में हड़कंप मच गया।

एसडीओपी राघवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वीरपुर थाना प्रभारी महाराज सिंह बघेल और वन विभाग के रेंजर दीपक शर्मा को लंबे समय से क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण की शिकायतें मिल रही थीं। लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद पुलिस और राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए अवैध भंडारण स्थल पर दबिश दी।

वहीं, वीरपुर थाना प्रभारी महाराज सिंह बघेल ने बताया कि सूचना मिली थी कि चंबल नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकालकर उसका भंडारण किया गया है। इसके बाद गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीनों से रेत को नष्ट कराया।

स्थानीय लोगों में रेत माफिया को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। नदी में मौजूद जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं रेत से भरे तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया न केवल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से जहां रेत माफिया पर अस्थायी लगाम लगी है, वहीं स्थानीय लोग अब अवैध खनन पर स्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

सागर मैराथन में हंगामा: मेडल-इनाम न मिलने पर भड़के खिलाड़ी, चक्काजाम के बाद बांटे गए पुरस्कार

सागर। संभागीय खेल परिसर में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता उस समय विवादों में घिर गई, जब प्रतिभागियों ने आयोजकों पर मेडल और नगद इनाम राशि न देने के गंभीर आरोप लगाए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मैराथन में सागर सहित दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया था।

प्रतियोगिता समाप्त होते ही खिलाड़ियों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि IMA अध्यक्ष डॉ. तल्हा शाद मेडल और नगद पुरस्कार लेकर कार्यक्रम स्थल से चले गए। इससे आक्रोशित प्रतिभागियों ने हंगामा शुरू कर दिया। हालात उस समय और बिगड़ गए, जब एक खिलाड़ी संभागीय खेल परिसर के मुख्य गेट पर चढ़ गया और अन्य प्रतियोगियों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया।

प्रतिभागियों का कहना था कि 10-10 किलोमीटर की दौड़ के बाद न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था की गई और न ही प्रमाण पत्र, मेडल व घोषित इनाम राशि दी गई। प्रतिभागी राकेश ने बताया कि वह 90 किलोमीटर दूर से 500 रुपये खर्च कर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आया था, लेकिन आयोजक बिना मेडल और सर्टिफिकेट दिए ही चले गए। वहीं अमिता ने आरोप लगाया कि टॉप-50 प्रतिभागियों को मेडल देने की घोषणा की गई थी, लेकिन किसी को भी कुछ नहीं मिला।

भाजपा नेता कैलाश यादव ने भी आयोजन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं तक की व्यवस्था नहीं की गई और बाद में आयोजक मेडल, प्रमाण पत्र और इनाम राशि दिए बिना मौके से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे खिलाड़ियों को समझाया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद IMA अध्यक्ष को वापस बुलाया गया। इसके बाद खिलाड़ियों को नगद राशि, मेडल और पुरस्कार वितरित किए गए, तब जाकर स्थिति सामान्य हो सकी।

हालांकि हंगामा शांत हो गया, लेकिन इस घटना ने आयुष मंत्रालय और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की आयोजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगियों और स्थानीय नागरिकों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की मांग की है।

टिहरी गढ़वाल में शिक्षक संघ अध्यक्ष पर शिक्षिका के गंभीर आरोप
टिहरी गढ़वाल। टिहरी गढ़वाल जिले में एक शिक्षिका ने शिक्षक संघ के अध्यक्ष पर मानसिक शोषण और गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए थाना नई टिहरी में शिकायत दर्ज कराई है। शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि उसे लंबे समय से मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है और उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया। मामले में एसएसपी ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की है।

शिक्षिका द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में कहा गया है कि शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने फोन कॉल और व्हाट्सएप के जरिए अश्लील और आपत्तिजनक बातें कीं। आरोप है कि आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाने की मांग की, कई बार पैसों की डिमांड की और अश्लील फोटो व वीडियो भी भेजे। इन हरकतों से वह और उसका परिवार लंबे समय से भय और मानसिक तनाव में जी रहा है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पिछले चार महीनों से उसका वेतन रोक दिया गया है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। शिक्षिका का कहना है कि उसने इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।

पीड़िता ने यह भी बताया कि उसका समायोजन जानबूझकर दूरस्थ विद्यालय में कर दिया गया है, जबकि वह पिछले 29 वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवा देती आ रही है। लगातार हो रही प्रताड़ना और वेतन न मिलने के कारण वह पिछले एक साल से डिप्रेशन में है।

मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन में हलचल मच गई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित शिक्षिका ने प्रशासन से न्याय और सुरक्षा की मांग की है।
उत्तराखंड : चकराता में सेब के बगीचे में लगी आग, 300 पेड़ जलकर खाक
* बागवान को भारी आर्थिक नुकसान, सरकार से लगाई मदद की गुहार

विकासनगर। देहरादून जिले के चकराता क्षेत्र में आग की एक बड़ी घटना सामने आई है। विकासनगर–जौनसार क्षेत्र के अस्टाड़ गांव में एक सेब के बगीचे में अचानक आग लग गई, जिससे करीब 300 से अधिक सेब के पेड़ जलकर नष्ट हो गए। इस घटना से बागवान को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और वह गहरे सदमे में है।

जानकारी के अनुसार अस्टाड़–मंगरौली मोटर मार्ग के किनारे सूखी घास की पट्टी में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। तेज लपटों और हवा के झोंकों के चलते आग पास में स्थित अस्टाड़ निवासी ब्रह्म दत्त जोशी के सेब के बगीचे तक पहुंच गई और कुछ ही समय में पूरे बगीचे को अपनी चपेट में ले लिया।

पीड़ित बागवान ब्रह्म दत्त जोशी ने बताया कि उनके बगीचे में लगे करीब 300 सेब के पेड़ों में कई पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए, जबकि कुछ पेड़ आंशिक रूप से झुलस गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने वर्षों की मेहनत से यह सेब का बगीचा तैयार किया था और इस साल अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन आग की इस घटना ने उनकी सालों की मेहनत पर पानी फेर दिया।

ब्रह्म दत्त जोशी के अनुसार आग लगने के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। संभव है कि किसी छोटी सी चिंगारी से सूखी घास में आग लगी हो, जो तेजी से फैलती चली गई। उन्होंने इस घटना की सूचना तहसील प्रशासन को दे दी है और नुकसान का आंकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण घास पूरी तरह सूख चुकी है। दिन में तेज धूप निकलने से सूखी घास आग को तुरंत पकड़ लेती है, जिससे छोटी चिंगारी भी बड़ी आग में तब्दील हो जाती है। इसी वजह से क्षेत्र में आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिसका असर बागवानी और अन्य फसलों पर भी पड़ रहा है।

गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में किसान लगातार बागवानी को बढ़ावा दे रहे हैं। युवा भी सेब की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन आग और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बागवान किसानों के हौसले टूट रहे हैं।

चकराता क्षेत्र की ठंडी जलवायु और पहाड़ी ढलान सेब उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। चकराता–मसूरी मार्ग पर रामताल उद्यान सहित आसपास के क्षेत्रों में सेब के बगीचे हैं, जिनके सेब काफी प्रसिद्ध हैं। इन्हीं से प्रेरित होकर बुल्हाड़ सहित कई गांवों में सेब की बागवानी की जा रही है। ऐसे में इस तरह की आग की घटनाएं सेब उत्पादकों के लिए बड़ी चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण: हरिद्वार में भजन-कीर्तन से विरोध, प्रयागराज प्रशासन से माफी की मांग

हरिद्वार। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को रोके जाने और उनके शिष्यों के साथ कथित मारपीट के विरोध में देशभर में आक्रोश फैलता जा रहा है। इसी क्रम में हरिद्वार के कनखल स्थित शंकराचार्य मठ में राम नाम भजन-कीर्तन कर विरोध दर्ज कराया गया।

शंकराचार्य मठ में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्य शामिल हुए। इस दौरान राम नाम का जप किया गया और प्रयागराज प्रशासन पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई। संतों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र माफी नहीं मांगी तो खून से पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराया जाएगा और प्रयागराज कूच किया जाएगा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भगवताचार्य पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शांतिपूर्वक गंगा स्नान के लिए जा रहे थे, लेकिन प्रयागराज प्रशासन ने उन्हें जबरन रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ लात-घूंसों से बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई। यहां तक कि 85 वर्षीय संत के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि प्रयागराज में धरने पर बैठे शंकराचार्य से प्रशासन तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। संतों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो देशभर से संत और श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचकर आंदोलन करेंगे।

वहीं, पंडित विष्णुदास ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में एक संत के साथ इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है। गंगा स्नान से रोकने का तरीका पूरी तरह गलत है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने राम नाम जप कर ईश्वर से प्रशासन को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की।

श्री अखंड परशुराम अखाड़े के अध्यक्ष पंडित अधीर कौशिक ने भी प्रयागराज माघ मेले की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के शिष्यों को घसीटा गया, जो अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने सभी धार्मिक और सामाजिक संगठनों से एकजुट होकर शंकराचार्य के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की।

पंडित अधीर कौशिक ने ऐलान किया कि मंगलवार को प्रयागराज प्रशासन के विरोध में खून से पत्र लिखा जाएगा और राष्ट्रपति को संबोधित कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

गौरतलब है कि मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के काफिले को पुलिस ने संगम तट जाने से रोक दिया था। इसके बाद समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की हुई थी। इस घटना के बाद शंकराचार्य मौन उपवास पर बैठ गए हैं, जबकि देशभर में उनके समर्थक लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने दी धार्मिक परीक्षा
मुंबई।  श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ द्वारा आयोजित वार्षिक धार्मिक परीक्षा में इस वर्ष मुंबई की पाठशालाओं के 27,000 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विशेष रूप से उल्लेखनीय यह रहा कि यह परीक्षा पहली बार पूरे भारत में एक ही दिन, एक ही समय पर, 100 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर कक्षा 1 से 36 तक आयोजित की गई। यह आयोजन जैन धार्मिक शिक्षा के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। इस शुभ अवसर का आरंभ संस्था के उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह तथा कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला एवं जवाहरलाल मोतीलाल शाह के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। शक्तितला स्कूल में आयोजित परीक्षा के दौरान संस्था के पदाधिकारियों ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का दौरा कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन एवं मार्गदर्शन किया। पदाधिकारियों ने कहा, कि पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है। पाठशाला में संस्कारित बच्चे आगे चलकर साधु-साध्वी, श्रावक-श्राविका, जैन ट्रस्टी, स्वयंसेवक एवं जैन रक्षक बनकर शासन को सुदृढ़ करते हैं। जिनागम अर्थात श्रुतज्ञान है, और यह श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है।
गौरतलब हो कि डिजिटल युग में बच्चों को पाठशाला से जोड़ना एक चुनौती बन गया है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए संघ द्वारा जैन डिजिटल पाठशाला कार्यक्रम आरंभ किया गया है, जिसके माध्यम से 5 से 14 वर्ष के बच्चों को आधुनिक तकनीक के सहारे धार्मिक शिक्षा प्रदान की जा रही है। वर्तमान में संघ के मार्गदर्शन में मुंबई में 655 से अधिक पाठशालाओं में 1,400 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं सेवा दे रही हैं तथा 75,000 से अधिक बच्चे नियमित रूप से धार्मिक शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह ने कहा, कि बच्चों में धार्मिक संस्कारों का रोपण करना संस्था का मुख्य उद्देश्य है, और इसकी शुरूआत पाठशाला से ही होती है। जैन धर्म के शाश्वत सिद्धांत-अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद-जीवन जीने की श्रेष्ठ पद्धति सिखाते हैं। जिन बच्चों में धार्मिक संस्कार होते हैं, उनका सर्वांगीण विकास निश्चित होता है और वही जैन शासन को मजबूत बनाते हैं। महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह ने कहा, कि श्री जैन धार्मिक शिक्षा संघ का मुख्य लक्ष्य बच्चों में संस्कारों का रोपण करना है, और इसका प्रथम चरण पाठशाला ही है। पाठशाला ही जैन शासन का प्राण है।
कोषाध्यक्ष-ट्रस्टी अशोक नरसिंह चरला ने कहा, कि श्रुतज्ञान पाठशाला से ही प्राप्त होता है। बच्चों के जीवन निर्माण के लिए पाठशाला सर्वोत्तम साधन है। सम्यक ज्ञान की पर्व समान पाठशाला से जुड़े बच्चों का भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होता है।
इस राष्ट्रव्यापी धार्मिक परीक्षा के अवसर पर संस्था के संस्थापक अध्यक्ष जवाहरलाल मोतीलाल शाह, अध्यक्ष सुरेश देवचंद संघवी, उपाध्यक्ष संजयभाई जीवनलाल शाह, कोषाध्यक्ष अशोक नरसिंह चरला तथा महिला विभाग की उपाध्यक्ष अल्पाबेन संजयभाई शाह का विशेष सम्मान किया गया। कार्यक्रम में जैन ट्रस्टी, पाठशाला के विद्यार्थी एवं बड़ी संख्या में जैन समाज के गणमान्यजन उपस्थित रहे।
शंकराचार्य के अपमान के विरोध में मैदान में उतरी शिवसेना
सत्ता के अहंकार में डूबी योगी सरकार : आनंद दुबे

मुंबई। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान को लेकर शिवसेना यूबीटी ने योगी सरकार पर हमला बोला है। यूबीटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आनंद दुबे ने आज सांताक्रूज़ पूर्व स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के बगल, हनुमान मंदिर पर साधु संतों और शिवसैनिकों के साथ विरोध प्रदर्शन किया। आनंद दुबे ने कहा कि सत्ता के अहंकार में डूबी योगी सरकार की पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अंधी हो चुकी है। सनातन और हिंदुत्व के नाम पर सरकार बनने वाली भाजपा शासित राज्यों में सनातन और हिंदुत्व का जितना अपमान हो रहा है, उतना शायद ही कहीं हो। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन के जुल्म के खिलाफ शंकराचार्य जी और साधु संत धरने पर बैठे हैं और सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है। उन्होंने कहा कि आखिर सनातन और हिंदुत्व कहां सुरक्षित रहेगा? पालघर की घटना का उदाहरण देते हुए आनंद दुबे ने कहा कि पालघर में साधु संतों की निर्मम हत्या करने वाले लोगों को जहां उद्धव सरकार ने सलाखों के पीछे पहुंचाया, वहीं भाजपा ने एक आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपनी पार्टी में प्रवेश कराया। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की चुप्पी पर निशाना  साधते हुए उन्होंने कहा कि किस विवशता से वे मौनी बाबा बने हुए हैं?
संगीत साहित्य मंच के वार्षिकोत्सव में संगीत और साहित्य महाकुंभ
ठाणे। साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगीत साहित्य मंच ठाणे के वार्षिकोत्सव में रविवार 18 जनवरी 2026 को वर्धमान हाल,गोकुल नगर ठाणे पश्चिम में संगीत के साथ साहित्य महाकुंभ का आयोजन किया गया।संगीत साहित्य मंच के संस्थापक एवं संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार रामजीत गुप्ता के संयोजन एवं सदाशिव चतुर्वेदी मधुर के सह संयोजन में भव्य आयोजन हुआ। उक्त समारोह की अध्यक्षता अनिल कुमार सिंह - प्रबंध निदेशक यस आर डिग्री कॉलेज बांसपार गोरखपुर ने किया तथा स्वागताध्यक्ष रामप्यारे सिंह रघुवंशी चेयरमैन भारतीय जनभाषा प्रचार समिति ने किया। विशिष्ट अतिथियों में के पी मिश्रा, गुलाब चंद दूबे, देवेन्द्र तिवारी, उमाशंकर पाण्डेय, शंकर सिंह, लाल सिंह, आनंदप्रकाश सिंह, संजय दूबे,गुलाब धर दूबे, तिलकराज खुराना,डॉ कृपाशंकर मिश्र,हौसला प्रसाद अन्वेषी, विधु भूषण त्रिवेदी, शिव कुमार सिंह, डॉ रामस्वरूप साहू,पं शिवप्रकाश पाण्डेय जमदग्निपुरी,अनिल कुमार राही,श्रीधर मिश्र,नंदलाल क्षितिज,अंजनी कुमार द्विवेदी, पत्रकार नामदार राही,डॉ कनक लता तिवारी,सीमा त्रिवेदी, शिल्पा सोनटक्के उपस्थित थे।मंच का खूबसूरत संचालन अतिथि सत्कार सदाशिव चतुर्वेदी मधुर एवं कवि सम्मेलन उमेशचंद्र मिश्र प्रभाकर ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण दीप प्रज्ज्वलित कर वंदना से किया गया।संगीत के साथ गीतकार शिवम पाण्डेय,नंदिनी तिवारी, सुरेश आनंद ने सभी को मनमोहक अवधि गीतों से मंत्रमुग्ध कर दिया। गीतों पर संगीत आर्गन पर दीपक उपाध्याय,ढोलक रत्नाकर शर्मा,पैड पर धीरेन्द्र सिंह ने दिया।संस्था संरक्षक वरिष्ठ समाजसेवी दयाशंकर सिंह की उपस्थिति में यादगार कवि सम्मेलन हुआ जिसमें वरिष्ठ गज़लकार एन बी सिंह नादान, कमलेश पाण्डेय तरुण, जयप्रकाश मिलिंद,राजीव मिश्रा, राजेश दुबे अल्हड़ असरदार, संतोष सिंह,त्रिलोचन सिंह अरोरा,विनय शर्मा दीप,अन्नपूर्णा गुप्ता,किरण तिवारी,नेहा मिश्र नेह के साथ सभागृह में
सत्यभामा सिंह,लक्ष्मी यादव, पत्रकार संतोष पाण्डेय,डॉ प्रमोद पल्लवित,एडवोकेट अनिल शर्मा,वाचस्पति तिवारी,डॉ मृदुला तिवारी महक,अरुण मिश्र अनुरागी, लालबहादुर यादव कमल,डॉ शारदा प्रसाद दुबे शरदचन्द्र, ओमप्रकाश तिवारी, सुशील शुक्ला नाचीज, आनंद पाण्डेय केवल,डॉ वफा वारसी उपस्थित थे। वरिष्ठ पत्रकार नामदार राही के संपादक में प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक समाचार पत्र हरित जीवन का लोकार्पण उपस्थित साहित्यकारों की उपस्थिति में किया गया।अंत में संयोजक ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए आभार व्यक्त किया।
बदलता झारखंड: क्षेत्रीय भागीदारी से वैश्विक सहभागिता की ओर बढ़ा राज्य; टिकाऊ निवेश और भविष्य की तकनीकी उन्नति पर मुख्यमंत्री का फोकस।

दावोस/रांची: स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 की वार्षिक बैठक के उद्घाटन समारोह के साथ ही झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए वैश्विक स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय व्यापार परिषदों और संस्थागत भागीदारों के साथ सुनियोजित वार्ताओं की एक श्रृंखला शुरू कर रहा है।

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प्रमुख कंपनियों के साथ उच्च स्तरीय संवाद:

बैठक के पहले दिन मुख्यमंत्री कई बड़ी ग्लोबल कंपनियों के प्रमुखों और रणनीतिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे:

टाटा स्टील: भारत के औद्योगीकरण में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका और टिकाऊ विनिर्माण (Sustainable Manufacturing) पर चर्चा।

हिताची इंडिया: बुनियादी ढांचे के विकास, ऊर्जा प्रणालियों और आधुनिक तकनीकी समाधानों पर विमर्श।

टेक महिंद्रा: आईटी हब के रूप में झारखंड का विकास, डिजिटल नवाचार और तकनीकी इकोसिस्टम की स्थापना।

वैश्विक मंचों के साथ संस्थागत सहयोग:

मुख्यमंत्री ब्लूमबर्ग APAC, स्वीडन इंडिया बिजनेस काउंसिल और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक करेंगे। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य राज्य में निवेश को सुगम बनाना और झारखंड को वैश्विक बाजार के साथ एकीकृत करना है।

समावेशी विकास और तकनीक पर जोर:

झारखंड केवल भारी उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और समावेशी नेतृत्व को भी शासन के अभिन्न अंग के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री टेक्नोलॉजी पवेलियनों का दौरा कर भविष्य के उन नवाचारों को समझेंगे जिन्हें झारखंड के औद्योगिक विकास के साथ जोड़ा जा सकता है।

विजन 2050 की ओर बढ़ते कदम:

25 वर्ष पूरे करने के बाद, झारखंड अब 'Vision 2050' की ओर अग्रसर है। दावोस में हो रही ये बैठकें इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि राज्य अब जिम्मेदार निवेश आकर्षित करने और अपनी अर्थव्यवस्था को भविष्य के लिए तैयार (Future-Ready) बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अपर्णा यादव को तलाक देंगे अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक, इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट ने मचाई हलचल

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समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के परिवार में एक बार फिर सियासी और पारिवारिक घमासान सामने आया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव ने अपनी पत्नी और बीजेपी नेता अपर्णा यादव से तलाक लेने का ऐलान कर दिया है।

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प्रतीक यादव का यह बयान उनके इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए सामने आया, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंस्टाग्राम पोस्ट में प्रतीक यादव ने अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रतीक ने कहा कि मैं इस स्वार्थी महिला से जल्द से जल्द तलाक लूंगा, इन्होंने मेरे पारिवारिक रिश्तों को बर्बाद कर दिया।

प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पोस्ट से सनसनी

अखिलेश के भाई प्रतीक यादव ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर लिखा, "मैं इस मतलबी औरत को जल्द से जल्द तलाक देने जा रहा हूँ, उसने मेरे परिवार के रिश्ते खराब कर दिए। वह बस मशहूर और असरदार बनना चाहती है। अभी मेरी मेंटल हेल्थ बहुत खराब है और उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि उसे सिर्फ अपनी ही चिंता है। मैंने इतनी बुरी औरत कभी नहीं देखी और मैं बदकिस्मत था कि मेरी शादी उससे हुई।"

कौन हैं अपर्णा यादव

अपर्णा यादव समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू हैं। उनके पिता अरविंद सिंह पत्रकार रहे हैं और उनकी मां लखनऊ नगर निगम में अधिकारी के पद पर हैं। अपर्णा यादव ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में लखनऊ कैंटोनमेंट सीट से सपा (समाजवादी पार्टी) के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह हार गईं थीं।

यूपी राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष हैं अपर्णा यादव

अपर्णा ने जनवरी 2022 में अचानक समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली थी। अपर्णा यादव का यह फैसला अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा था। हालांकि अपर्णा यादव ने बीजेपी में शामिल होने पर कहा था कि वह पारिवारिक राजनीति नहीं, राष्ट्रवाद को चुनती हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली से प्रभावित हैं। बीजेपी नेता अपर्णा यादव इस समय यूपी राज्‍य महिला आयोग की उपाध्‍यक्ष भी हैं।

2011 में हुई थी शादी

सोशल मीडिया पर प्रतीक यादव का इंस्‍टाग्राम पोस्‍ट तेजी के साथ वायरल हो रहा है। लोग इसको लेकर तरह-तरह की चर्चा कर रहे हैं। बता दें कि अपर्णा यादव और प्रतीक ने एक दूसरे को 11 साल तक डेट किया। इसके बाद साल 2011 में परिवार की रजामंदी से दोनों की लव मैरिज हुई थी। अपर्णा और प्रतीक की शादी बेहद हाई प्रोफाइल शादी थी।

रेत माफिया चंबल नदी को कर रहे खोखला

राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में 350 ट्रॉली अवैध रेत जब्त


श्योपुर, मध्य प्रदेश। चंबल अंचल में रेत माफिया के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं। अवैध खनन इस कदर बढ़ गया है कि प्रशासन और पुलिस की टीमें भी कई बार कार्रवाई से कतराती नजर आती हैं। रेत माफिया खुलेआम जेसीबी मशीनों से खनन कर चंबल नदी और उसके आसपास के पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ताजा मामला श्योपुर जिले के वीरपुर क्षेत्र का है, जहां राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने बड़ी कार्रवाई की। रविवार को वीरपुर थाना क्षेत्र के श्यामपुर गांव के पास चंबल नदी से अवैध रूप से निकाली गई करीब 350 ट्रॉली रेत को जब्त कर जेसीबी मशीनों के माध्यम से नष्ट किया गया। इस कार्रवाई से रेत माफिया में हड़कंप मच गया।

एसडीओपी राघवेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि वीरपुर थाना प्रभारी महाराज सिंह बघेल और वन विभाग के रेंजर दीपक शर्मा को लंबे समय से क्षेत्र में अवैध रेत भंडारण की शिकायतें मिल रही थीं। लगातार मिल रही सूचनाओं के बाद पुलिस और राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए अवैध भंडारण स्थल पर दबिश दी।

वहीं, वीरपुर थाना प्रभारी महाराज सिंह बघेल ने बताया कि सूचना मिली थी कि चंबल नदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकालकर उसका भंडारण किया गया है। इसके बाद गठित टीम ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी मशीनों से रेत को नष्ट कराया।

स्थानीय लोगों में रेत माफिया को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे अवैध उत्खनन से पर्यावरण को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। नदी में मौजूद जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं रेत से भरे तेज रफ्तार वाहनों के कारण सड़क हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया न केवल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर मारपीट तक पर उतारू हो जाते हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से जहां रेत माफिया पर अस्थायी लगाम लगी है, वहीं स्थानीय लोग अब अवैध खनन पर स्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

सागर मैराथन में हंगामा: मेडल-इनाम न मिलने पर भड़के खिलाड़ी, चक्काजाम के बाद बांटे गए पुरस्कार

सागर। संभागीय खेल परिसर में आयोजित मैराथन प्रतियोगिता उस समय विवादों में घिर गई, जब प्रतिभागियों ने आयोजकों पर मेडल और नगद इनाम राशि न देने के गंभीर आरोप लगाए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और आयुष मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस मैराथन में सागर सहित दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने हिस्सा लिया था।

प्रतियोगिता समाप्त होते ही खिलाड़ियों का गुस्सा फूट पड़ा। आरोप है कि IMA अध्यक्ष डॉ. तल्हा शाद मेडल और नगद पुरस्कार लेकर कार्यक्रम स्थल से चले गए। इससे आक्रोशित प्रतिभागियों ने हंगामा शुरू कर दिया। हालात उस समय और बिगड़ गए, जब एक खिलाड़ी संभागीय खेल परिसर के मुख्य गेट पर चढ़ गया और अन्य प्रतियोगियों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया।

प्रतिभागियों का कहना था कि 10-10 किलोमीटर की दौड़ के बाद न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था की गई और न ही प्रमाण पत्र, मेडल व घोषित इनाम राशि दी गई। प्रतिभागी राकेश ने बताया कि वह 90 किलोमीटर दूर से 500 रुपये खर्च कर प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आया था, लेकिन आयोजक बिना मेडल और सर्टिफिकेट दिए ही चले गए। वहीं अमिता ने आरोप लगाया कि टॉप-50 प्रतिभागियों को मेडल देने की घोषणा की गई थी, लेकिन किसी को भी कुछ नहीं मिला।

भाजपा नेता कैलाश यादव ने भी आयोजन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं तक की व्यवस्था नहीं की गई और बाद में आयोजक मेडल, प्रमाण पत्र और इनाम राशि दिए बिना मौके से फरार हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हंगामा कर रहे खिलाड़ियों को समझाया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद IMA अध्यक्ष को वापस बुलाया गया। इसके बाद खिलाड़ियों को नगद राशि, मेडल और पुरस्कार वितरित किए गए, तब जाकर स्थिति सामान्य हो सकी।

हालांकि हंगामा शांत हो गया, लेकिन इस घटना ने आयुष मंत्रालय और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की आयोजन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगियों और स्थानीय नागरिकों ने भविष्य में ऐसे आयोजनों में पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने की मांग की है।