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100 से 125 दिन रोजगार की गारंटी, फर्जीवाड़े पर लगेगा लगाम: औरंगाबाद में भाजपा एमएलसी

ग्रामीण रोजगार को स्थायी आजीविका से जोड़ने की पहल

,औरंगाबाद। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू किया है। इस बदलाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से औरंगाबाद के दानी बिगहा स्थित सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता में भाजपा के विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह, विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह सहित एनडीए के घटक दलों के जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। एमएलसी दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि यह नया कानून केवल नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार को अल्पकालिक राहत से निकालकर स्थायी विकास और आजीविका सृजन से जोड़ने की एक व्यापक पहल है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में लंबे समय से मौसमी बेरोजगारी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और आय की अनिश्चितता बड़ी चुनौती रही है। वर्ष 2006 में लागू मनरेगा ने मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देकर लाखों परिवारों को सहारा दिया, लेकिन समय के साथ इसमें भ्रष्टाचार, कमजोर परिसंपत्ति निर्माण, भुगतान में देरी और निगरानी की कमी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। इन्हीं कमियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने VB-G RAM G अधिनियम को विकसित भारत 2047 के रोडमैप से जोड़ा है

विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिनों तक कार्य विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है, ताकि कृषि श्रम बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

उन्होंने दावा किया कि तकनीक को पहली बार कानून का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और एआई आधारित निगरानी से फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सकेगा। इस प्रेसवार्ता में जदयु जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ,बीजेपी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र चंद्रवंशी लोजपा जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह भाजपा मीडिया प्रभारी दीपक कुमार सहित अन्य नेता उपस्थित है

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

अयोध्या के श्रीराम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ रहा था कश्मीरी शख्स, पुलिस ने हिरासत में लिया

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अयोध्या के राम मंदिर परिसर में एक शख्स को नमाज पढ़ने की कोशिश में हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिया गया आरोपी कश्मीर का है। यह शख्स राम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का प्रयास कर रहा था। नमाज पढ़ने से रोके जाने के बाद वो संप्रदाय विशेष के नारे लगाने लगा। जिसके बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने उसे हिरासत में ले लिया।

राम मंदिर परिषद के दक्षिणी परकोटे पर कश्मीरी शख्स नमाज पढ़ रहा था। तभी कुछ लोगों की नजर पड़ गई। फिर बवाल होने पर सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया। पकड़े गए युवक से खुफिया एजेंसी, पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक डिटेन किया गया शख्स शोपियां का रहने वाला है और उसका नाम अबू अहमद शेख है। हालांकि, इस बारे में जिला प्रशासन कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर रहा है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट ने भी मौन साधा हुआ है।

उत्तराखंड कांग्रेस का ऐलान: मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन

देहरादून, उत्तराखंड। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर VB–G RAM-G किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा की आत्मा और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने बताया कि एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया गया। कुमारी शैलजा ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई मनरेगा योजना दुनिया की एक ऐतिहासिक और पाथ ब्रेकिंग योजना रही है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी दी। इस योजना ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार इस जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। * आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम 10 जनवरी: प्रत्येक जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मनरेगा का नाम बदले जाने की सच्चाई जनता के सामने रखी जाएगी। 11 जनवरी: महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर जिला स्तर पर एक दिवसीय अनशन। इसमें पार्टी नेता और मनरेगा से जुड़े ग्रामीण शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को योजना की स्थिति और बदलावों की जानकारी दी जाएगी। 30 जनवरी (शहीदी दिवस): शांतिपूर्ण धरना देकर अमन, चैन, शांति और काम करने के अधिकार का संदेश। 31 जनवरी से 6 फरवरी: सभी जिला मुख्यालयों पर “मनरेगा बचाओ” धरना। 7 से 15 फरवरी: तिथि तय कर विधानसभा घेराव। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और आम जनता तक पहुंचाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर जन-जन तक पहुंचकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाएगी और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
कन्नौज में मंत्रियों की मौजूदगी में मनाई गयी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जन्म जयंती
पंकज कुमार श्रीवास्तव/विवेक कुमार

कन्नौज शहर के पर्यटन आवास ग्रह यूपीटी मे आज गुरूवार को मंत्रियों की उपस्थिति मे बाबू कल्याण सिंह  जी की जयंती मनाई गयो इस अवसर पर की पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। मंत्री असीम अरुण ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया देश का आदर्श थे और उनके बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। जिले की प्रभारी मंत्री रजनी तिवारी ने केंद्र के जी राम जी अधिनियम की दी जानकारी। कहा गांवो के विकास के लिये अधिनियम बहुत जरूरी है। विकसित भारत और गांवो में सामान विकास के लिये जी रामनजी योजनाओं बेहद कारगर। विपक्ष जनता को गुमराह करने के लिये भ्रान्तियां फैला रहा है।

प्रभारी मंत्री कन्नौज व राज्य मंत्री उच्च शिक्षा विभाग रजनी तिवारी एवं समाज कल्याण विभाग के मा0 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार  असीम अरुण जी ने संयुक्त रूप से राही पर्यटन आवाज जी0टी0 रोड कन्नौज में प्रेस संवाद के दौरान विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।


प्रभारी मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को केवल एक कल्याणकारी योजना न मानकर, विकास से जुड़ी कानूनी गारंटी के रूप में स्थापित करता है, जो विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि VB-G-RAM-G का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। यह अधिनियम पूर्ववर्ती मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए तकनीक आधारित निगरानी, मजबूत जवाबदेही तंत्र, स्थायी संसाधनों के निर्माण तथा दीर्घकालीन ग्रामीण उत्पादन पर विशेष बल देता है।
         
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मिलने वाले सुनिश्चित रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो 25 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अतिरिक्त कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए खेतीहर कार्यों के लिए 60 दिन का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार यह अधिनियम कुल 185 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है, जो एक निश्चित और मानक अधिकार बन गया है।
          
उन्होंने कहा कि अनुमन्य कार्यों की सूची को सरल और प्रभावी बनाते हुए 260 से अधिक बिखरे हुए कार्यों को अब केवल चार प्रमुख क्षेत्रों में समाहित किया गया है—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्ति निर्माण तथा जलवायु संरक्षण। इससे कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास सुनिश्चित होगा। किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि फसल बोने और काटने के प्रमुख मौसमों में सार्वजनिक कार्यों को कानूनी रूप से रोका जाएगा, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों। इससे एक ओर किसानों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त 60 दिनों की मजदूरी की गारंटी भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ता अब एक स्पष्ट और समयबद्ध कानूनी अधिकार के रूप में निर्धारित किया गया है। यदि किसी ग्रामीण परिवार को कार्य मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की समय-सीमा और जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय की गई है।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए ए आई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली, जीपीएस एवं मोबाइल ट्रैकिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकाशन, वर्ष में अनिवार्य दो सामाजिक अंकेक्षण तथा निरंतर निगरानी एवं सुधार हेतु केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है।

समाज कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण जी ने कहा कि अब कार्य का भुगतान अनिवार्य रूप से 7 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि किसी कारणवश भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा। इससे ग्रामीण श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक प्राप्त होगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों की गरिमा, मजबूत गांव, टिकाऊ संसाधन और प्रभावी शासन के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मजदूरों व ग्रामीण नागरिकों का विरोध: VB-G RAM G कानून मनरेगा को पुनःलागू करने के संदर्भ में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा*
सुल्तानपुर,देश भर के मजदूर, श्रमिक एवं नागरिक VB-G RAM G बिल, 2025 का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मनरेगा, 2005 एक कानूनूनी, मांग-आधारित और विकेंद्रीकृत अधिकार है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों-विशेषकर महिलाओं,दलितों,आदिवासियों और भूमिहीन मजदूरों को आजीविका की सुरक्षा दी है। प्रस्तावित VB-G RAM G कानून इस अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को बजट-नियंत्रित "योजना" में बदल देता है। इससे काम,बजट और प्राथमिकताएं केंद्र से तय होंगी,जिससे गरीब राज्यों में काम ठप होगा, बेरोजगारी और अप्लायन बढ़ेगा। मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों की प्रमुख मांगें हैं: 1.-VB-G RAM G बिल, 2025* को तुरंत वापस लिया जाए।
2.-मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पूरी तरह पुनः लागू किया जाए।
3.-मनरेगा में काम के दिन बढ़ाए जाएं और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई जाए।...............…. यह विरोध प्रदर्शन संदीप पांडेय के नेतृत्व में पंकज पांडेय,चंदन सिंह,हैप्पी दुबे,सतीश ओसामा,अजय तिवारी,अंगद एवं अन्य लोगों सहित डीएम कार्यालय में संबंधित अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सोपा। संदीप पांडेय ने कहा लोगों मजदूरों,एवं ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों के परामर्श के बिना लाए गए विधेयक के खिलाफ है। वे मांग करते हैं कि कानून का नाम बदला जाए और अधिकारों को संरक्षित किया जाए।
गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (G RAM G) विधेयक पर राज्य सभा में बोले प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू

भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू ने राज्य सभा में (G RAM G) गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत विधेयक के समर्थन में अपनी बातें रखी।

श्री साहू ने कहा कि जो गरीबी ने जन्म लेता है, पलता है और बढ़ता है वही गरीबी का दर्द जनता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे ही मसीहा हैं। प्रधानमंत्री जी गरीब मां बाप के बेटे हैं वहीं कृषि मंत्री जी किसान परिवार से हैं। दोनों ने गरीबी को नजदीक से महसूस किया है।

कहा कि मनरेगा कांग्रेस के शासन के 2007 में शुरू हुआ था,लेकिन लंबे समय के बाद भी इसके जो उद्देश्य थे वे पूरे नहीं हुए। यह योजना पूरी तरह लूट खसोट ,भ्रष्टाचार का जरिया बन गया था। झारखंड में तो इस योजना में लूट मची है। राज्य सरकार के संरक्षण में योजनाओं में भ्रष्टाचार हुआ, मजदूरों को काम न देकर जेसीबी ,डंफर से काम कराए गए जिसे किसी भी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराई जा सकती है।

कहा कि ऐसी लूट और भ्रष्टाचार को रोकने तथा मजदूरों ,गरीबों को धरातल पर रोजगार उपलब्ध कराने केलिए ही नई योजना जी राम जी को लाया गया है।

कहा कि इस योजना की जानकारी फैलते ही गांव,गरीब में उत्साह है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नई सोच से गांव, गरीब किसान को लाभ होने वाला है। अब 100 की जगह 125 दिन रोजगार मिलेंगे। लाभ मिलेगा।

कहा कि गांव गरीब के आशीर्वाद से ही दुनियां में भारत का यश फैल रहा।

कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण में आकंठ डूबी है। इसे राम और हिंदुत्व से चिढ़ है। इसीलिए राम मंदिर का विरोध किया, राम मंदिर के उद्घाटन के निमंत्रण को ठुकरा दिया।

कहा कि कांग्रेस को पता है कि महात्मा गांधी ने भी अपने अंत समय में हे राम ही कहा था।

कहा कि राम भारत की आत्मा हैं,पहचान हैं।इसलिए भाजपा सरकार ने टेंट से निकालकर भव्य मंदिर में रामलाला को विराजित किया।

कहा कि रोजगार और आजीविका मिशन में बदलते ग्रामीण आवश्यकताओं पर बल दिया गया है।कांग्रेस का नेतृत्व सोने की चम्मच लेकर जन्म लिया है इसलिए उन्हें गांव की स्थिति का अंदाज नहीं। आज इसी के कारण कांग्रेस मुक्त भारत बन रहा है।

कहा कि जब गांव के विकास की बात होती है तो कांग्रेस विरोध करती है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में मनरेगा की स्थिति अत्यंत खराब है, फर्जी निकासी आम बात है,50% से अधिक पैसे दलाल बिचौलिए खा जाते हैं।

कहा कि नई योजना में लूट रोकने का पूरा प्रावधान है।योजनाओं को जीपीएस,मोबाइल से जोड़ा जाएगा।जनता को योजनाओं की पूरी जानकारी रहेगी,हर पंचायत में साल में दो बार जांच होगी। भ्रष्टाचार का पता लगाने केलिए एआई का प्रावधान है।

कहा कि कांग्रेस पार्टी बताए क्या 125 दिन का रोजगार देना क्या सिर्फ नाम बदलना है,डिजिटल पारदर्शिता क्या सिर्फ नाम बदलना है,साप्ताहिक भुगतान करना क्या सिर्फ नाम बदलना है।

कहा कि गांव की गरीब जनता सब जानती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को योजना केलिए आभार प्रकट किया।

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ जी राम जी बिल, विरोध में देर रात विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

#vbgramgbillapprovedbyparliamentpassingrajyasabha

लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी ‘द विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2025' यानी वीबी-जी राम जी बिल को पारित हो गया है। ये बिल 20 साल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा। ये बिल हर साल 125 दिन के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देगा। वहीं, विपक्ष ने बिल को लेकर जमकर हंगामा किया।

विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट

बिल पास होने के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया, बिल वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने बिल के पन्ने भी फाड़ दिए, जिस पर चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें ट्रेजरी बेंच की तरफ न जाने की चेतावनी दी।

संसद परिसर में धरना

सदन के भीतर विरोध के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर स्थित संविधान सदन के बाहर धरना दिया। विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति को भेजा जाए, ताकि इसकी गहराई से जांच हो सके। विपक्ष का कहना है कि बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के इस तरह का बड़ा बदलाव ग्रामीण गरीबों के हित में नहीं है।

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन ने इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं। उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।

लोकसभा में विरोध के बीच जी राम जी बिल पास, शिवराज ने अटल की कविता से दिया विपक्ष को जवाब

#gramgbillpassedfromloksabhaoppositiontearscopyofbillshivrajsingh_chauhan

मनरेगा का नाम बदलकर भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल यानी 'जी राम जी' करने वाला बिल लोकसभा में आज विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच पास हो गया है। विपक्ष ने बिल पास होने पर जमकर हंगामा किया और बिल के कागज फाड़कर फेंक दिए। सदन का माहौल इतना बिगड़ गया कि कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

शिवराज सिंह ने विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पर दिया जवाब

विपक्षी दलों के हंगामे के बीच शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार का जवाब सुनना ही नहीं चाहता। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सरकार की तरफ से जारी आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने फंड का दुरुपयोग किया, लेकिन हमारी सरकार ने विकास कार्यों पर खर्च करने पर जोर दिया।

किसानों के साथ-साथ गरीबों के कल्याण के लिए विधेयक

शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि सरकार किसानों के साथ-साथ गरीबों के कल्याण के लिए विधेयक लाई है, जिसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा, सबसे पहले इस पवित्र सदन में मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। सभापति महोदय को धन्यवाद देना चाहता हूं। इस विषय पर हमने माननीय सदस्यों के विचार सुने हैं। अब जवाब देना मेरा अधिकार है। मैं आपसे संरक्षण चाहता हूं। मैंने रात के डेढ़ बजे तक माननीय सदस्यों की बात सुनी है। अपनी बात सुना देना और फिर जवाब न सुनना ये लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार करना है।

कृषि मंत्री ने कहा- यह गांवों के विकास का विधायक

कृषि मंत्री ने कहा, यह गांवों के विकास का विधायक है। माननीय प्रतिपक्षी सदस्यों ने कई तरह के आरोप लगाए। एक बात यह कही कि हम भेदभाव करते हैं। सारा देश हमारे लिए एक है। चेन्नई हो या गुवाहाटी, अपना देश-अपनी माटी। अलग भाषा-अलग वेष, फिर भी अपना एक देश। उन्होंने आगे कहा, मैं इनको बताना चाहता हूं कि अटल जी ने क्या कहा था। माननीय अध्यक्ष महोदय, हम देश के किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करते। हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था - यह देश हमारे लिए जमीन का टुकड़ा नहीं है, जीता-जाता राष्ट्र पुरुष है।

कांग्रेस को नाम रखने की सनक

शिवराज सिंह ने आगे कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, कितनी योजनाओ का नाम नेहरू परिवार पर रखा गया। राजीव जी के नाम पर 55 राज्य सरकार की योजनाओं के नाम रखे गए। 74 सड़कों के नाम राजीव पर, 15 नेशनल पार्क नेहरू जी के नाम पर रखे गए. नाम रखने की सनक कांग्रेस की है।

बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने 16 दिसंबर को कहा कि हम इस बिल का विरोध करते हैं। हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती है।

नहीं रहे दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के डिजाइनर, मूर्तिकार राम सुतार का निधन

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प्रसिद्ध मूर्तिकार और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वनजी सुतार का बुधवार देर रात नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। राम सुतार 100 साल के थे। वह काफी समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। उनके बेटे अनिल सुतार ने ये जानकारी दी।

बेटे अनिल सुतार ने बयान में कहा कि गहन दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे पिता राम वंजी सुतार का 17 दिसंबर की मध्यरात्रि को हमारे निवास पर निधन हो गया। राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदुर गांव में हुआ था। बचपन से ही मूर्तिकला की ओर आकर्षित सुतार ने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर से गोल्ड मेडल हासिल किया।

राम मंदिर में 300 फीट ऊंची जटायु मूर्ति को दिया आकार

राम सुतार की मूर्तिकला की दुनिया महापुरुषों से भरी रही। महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, दीन दयाल उपाध्याय, छत्रपति शिवाजी महाराज उनकी कृतियों में इतिहास, विचार और राष्ट्र की आत्मा एक साथ सांस लेते नजर आते हैं। अयोध्या के राम मंदिर में कांसे से बनी 300 फीट ऊंची जटायु की कुबेर टीला पर स्थापित की गई है मूर्ति है, सुतार ने ही बनाई। संसद परिसर में स्थापित गांधी की ध्यानमग्न प्रतिमा हो या घोड़े पर सवार शिवाजी महाराज की भव्य आकृति, हर रचना में उन्होंने व्यक्तित्व से पहले विचार को उकेरा।

93 वर्ष की उम्र में बनाई ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’

राम सुतार की सबसे बड़ी उपलब्धि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति- गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (182 मीटर ऊंची) को डिजाइन करना है। यह मूर्ति भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार पटेल को समर्पित है। सुतार ने इस मूर्ति को आकार देकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। करीब 93 वर्ष की उम्र में सुतार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा किया था, जो उनके अथक परिश्रम का प्रतीक है।

नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती…” मनरेगा की जगह “विकसित भारत जी राम जी” वाले नाम पर भड़कीं प्रियंका

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लोकसभा में मंगलवार को मनरेगा की जगह ग्रामीण रोजगार की गारंटी के लिए लाया जा रहा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बिल पेश किया है। इस नए बिल में सरकार मनरेगा में कई अहम बदलाव करने जा रही है जिसमें मजदूरों के काम को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) पर कहा, इस विधेयक में बदलाव करने पर अपनी आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। MGNREGA पिछले 20 वार्षों से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह कितना क्रांतिकारी कानून है कि जब इसे बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी सहमती दी थी। इसके द्वारा 100 दिन का रोजगार देश के गरीब से गरीब लोगों को मिलता आया है। यह बिल उस अधिकार को कमज़ोर करेगा।

बिना चर्चा और बिना सदन की सलाह के बिल पेश करने पर आपत्ति

कांग्रेस नेता ने कहा, मुझे नाम बदलने की यह सनक समझ नहीं आती। इसमें खर्चा बहुत होता है इसलिए मुझे समझ नहीं आता कि वे बेवजह ऐसा क्यों कर रहे हैं। बिना चर्चा के और बिना सदन की सलाह लिए इस तरह जल्दी-जल्दी में विधेयक को पास नहीं कराना चाहिए। ये विधेयक वापस लिया जाना चाहिए, इसके बदले में सरकार को एक नया विधेयक पेस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भले ही मेरे परिवार के नहीं थे लेकिन मेरे परिवार जैसे ही हैं और पूरे देश की यही भावना है। इसे गहन चर्चा और जांच पड़ताल के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए। और कोई भी विधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, पूर्वाग्रह और सनक के आधार पर पेश नहीं होना चाहिए।

केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा-प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा में 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र से आता था, इस विधेयक के तहत अब ज्यादातर प्रदेशों में यह 60 प्रतिशत आएगा। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत भार पड़ेगा खासतौर से उन राज्यों के लिए जो पहले से ही केंद्र से जीएसटी के बकाए के इंतजार में है। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जा रही है।

ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा-प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी आगे कहा कि ने दिनों की संख्या तो बढ़ा दी है लेकिन मज़दूरी नहीं बढ़ाई है। पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि मनरेगा का काम कहां और किस तरह का होगा, लेकिन यह बिल कहता है कि केंद्र सरकार तय करेगी कि फंड कहां और कब देना है, इसलिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है। हमें यह बिल हर तरह से गलत लगता है।

100 से 125 दिन रोजगार की गारंटी, फर्जीवाड़े पर लगेगा लगाम: औरंगाबाद में भाजपा एमएलसी

ग्रामीण रोजगार को स्थायी आजीविका से जोड़ने की पहल

,औरंगाबाद। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G अधिनियम, 2025 लागू किया है। इस बदलाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से औरंगाबाद के दानी बिगहा स्थित सर्किट हाउस में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता में भाजपा के विधान परिषद सदस्य दिलीप कुमार सिंह, विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह सहित एनडीए के घटक दलों के जिला अध्यक्ष उपस्थित रहे। एमएलसी दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि यह नया कानून केवल नाम परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्रामीण रोजगार को अल्पकालिक राहत से निकालकर स्थायी विकास और आजीविका सृजन से जोड़ने की एक व्यापक पहल है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में लंबे समय से मौसमी बेरोजगारी, कृषि पर अत्यधिक निर्भरता और आय की अनिश्चितता बड़ी चुनौती रही है। वर्ष 2006 में लागू मनरेगा ने मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी देकर लाखों परिवारों को सहारा दिया, लेकिन समय के साथ इसमें भ्रष्टाचार, कमजोर परिसंपत्ति निर्माण, भुगतान में देरी और निगरानी की कमी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आईं। इन्हीं कमियों को दूर करने के उद्देश्य से सरकार ने VB-G RAM G अधिनियम को विकसित भारत 2047 के रोडमैप से जोड़ा है

विधायक त्रिविक्रम नारायण सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली रोजगार गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। साथ ही किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बुआई और कटाई के मौसम में 60 दिनों तक कार्य विराम घोषित करने का अधिकार दिया गया है, ताकि कृषि श्रम बाजार पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

उन्होंने दावा किया कि तकनीक को पहली बार कानून का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। बायोमेट्रिक सत्यापन, जियो-टैगिंग, सैटेलाइट इमेजरी, मोबाइल ऐप और एआई आधारित निगरानी से फर्जी जॉब कार्ड, फर्जी हाजिरी और भुगतान घोटालों पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे वास्तविक लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से लाभ मिल सकेगा। इस प्रेसवार्ता में जदयु जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह ,बीजेपी जिलाध्यक्ष बिजेंद्र चंद्रवंशी लोजपा जिला अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह उर्फ सोनू सिंह बीजेपी के पूर्व जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम सिंह भाजपा मीडिया प्रभारी दीपक कुमार सहित अन्य नेता उपस्थित है

औरंगाबाद से धीरेन्द्र पाण्डेय

अयोध्या के श्रीराम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ रहा था कश्मीरी शख्स, पुलिस ने हिरासत में लिया

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अयोध्या के राम मंदिर परिसर में एक शख्स को नमाज पढ़ने की कोशिश में हिरासत में लिया गया है। हिरासत में लिया गया आरोपी कश्मीर का है। यह शख्स राम मंदिर परिसर में नमाज पढ़ने का प्रयास कर रहा था। नमाज पढ़ने से रोके जाने के बाद वो संप्रदाय विशेष के नारे लगाने लगा। जिसके बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने उसे हिरासत में ले लिया।

राम मंदिर परिषद के दक्षिणी परकोटे पर कश्मीरी शख्स नमाज पढ़ रहा था। तभी कुछ लोगों की नजर पड़ गई। फिर बवाल होने पर सुरक्षा बलों ने हिरासत में ले लिया। पकड़े गए युवक से खुफिया एजेंसी, पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक डिटेन किया गया शख्स शोपियां का रहने वाला है और उसका नाम अबू अहमद शेख है। हालांकि, इस बारे में जिला प्रशासन कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर रहा है। वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट ने भी मौन साधा हुआ है।

उत्तराखंड कांग्रेस का ऐलान: मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन

देहरादून, उत्तराखंड। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर VB–G RAM-G किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस ने 10 जनवरी से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार मनरेगा की आत्मा और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार को खत्म करना चाहती है। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकारों को कमजोर करने की साजिश है। उन्होंने बताया कि एआईसीसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में हुई कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में इस मुद्दे पर आंदोलन का निर्णय लिया गया। कुमारी शैलजा ने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई मनरेगा योजना दुनिया की एक ऐतिहासिक और पाथ ब्रेकिंग योजना रही है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी दी। इस योजना ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और कोविड-19 जैसी महामारी के दौरान लाखों लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार इस जनकल्याणकारी योजना को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही है। * आंदोलन का चरणबद्ध कार्यक्रम 10 जनवरी: प्रत्येक जिले में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर मनरेगा का नाम बदले जाने की सच्चाई जनता के सामने रखी जाएगी। 11 जनवरी: महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर जिला स्तर पर एक दिवसीय अनशन। इसमें पार्टी नेता और मनरेगा से जुड़े ग्रामीण शामिल होंगे। 12 से 29 जनवरी: पंचायत स्तर पर गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को योजना की स्थिति और बदलावों की जानकारी दी जाएगी। 30 जनवरी (शहीदी दिवस): शांतिपूर्ण धरना देकर अमन, चैन, शांति और काम करने के अधिकार का संदेश। 31 जनवरी से 6 फरवरी: सभी जिला मुख्यालयों पर “मनरेगा बचाओ” धरना। 7 से 15 फरवरी: तिथि तय कर विधानसभा घेराव। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों, रोजगार सेवकों और आम जनता तक पहुंचाएंगे। कांग्रेस का कहना है कि वह बड़े पैमाने पर जन-जन तक पहुंचकर केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाएगी और ग्रामीणों के रोजगार के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
कन्नौज में मंत्रियों की मौजूदगी में मनाई गयी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जन्म जयंती
पंकज कुमार श्रीवास्तव/विवेक कुमार

कन्नौज शहर के पर्यटन आवास ग्रह यूपीटी मे आज गुरूवार को मंत्रियों की उपस्थिति मे बाबू कल्याण सिंह  जी की जयंती मनाई गयो इस अवसर पर की पत्रकार वार्ता का आयोजन किया गया। मंत्री असीम अरुण ने पूर्व मुख्यमंत्री को बताया देश का आदर्श थे और उनके बताये गये रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। जिले की प्रभारी मंत्री रजनी तिवारी ने केंद्र के जी राम जी अधिनियम की दी जानकारी। कहा गांवो के विकास के लिये अधिनियम बहुत जरूरी है। विकसित भारत और गांवो में सामान विकास के लिये जी रामनजी योजनाओं बेहद कारगर। विपक्ष जनता को गुमराह करने के लिये भ्रान्तियां फैला रहा है।

प्रभारी मंत्री कन्नौज व राज्य मंत्री उच्च शिक्षा विभाग रजनी तिवारी एवं समाज कल्याण विभाग के मा0 राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार  असीम अरुण जी ने संयुक्त रूप से राही पर्यटन आवाज जी0टी0 रोड कन्नौज में प्रेस संवाद के दौरान विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।


प्रभारी मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को केवल एक कल्याणकारी योजना न मानकर, विकास से जुड़ी कानूनी गारंटी के रूप में स्थापित करता है, जो विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि VB-G-RAM-G का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना है। यह अधिनियम पूर्ववर्ती मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए तकनीक आधारित निगरानी, मजबूत जवाबदेही तंत्र, स्थायी संसाधनों के निर्माण तथा दीर्घकालीन ग्रामीण उत्पादन पर विशेष बल देता है।
         
उन्होंने बताया कि इस अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को मिलने वाले सुनिश्चित रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है, जो 25 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अतिरिक्त कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए खेतीहर कार्यों के लिए 60 दिन का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार यह अधिनियम कुल 185 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है, जो एक निश्चित और मानक अधिकार बन गया है।
          
उन्होंने कहा कि अनुमन्य कार्यों की सूची को सरल और प्रभावी बनाते हुए 260 से अधिक बिखरे हुए कार्यों को अब केवल चार प्रमुख क्षेत्रों में समाहित किया गया है—जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संपत्ति निर्माण तथा जलवायु संरक्षण। इससे कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ विकास सुनिश्चित होगा। किसानों के हितों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह प्रावधान किया गया है कि फसल बोने और काटने के प्रमुख मौसमों में सार्वजनिक कार्यों को कानूनी रूप से रोका जाएगा, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों। इससे एक ओर किसानों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त 60 दिनों की मजदूरी की गारंटी भी प्राप्त होगी। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ता अब एक स्पष्ट और समयबद्ध कानूनी अधिकार के रूप में निर्धारित किया गया है। यदि किसी ग्रामीण परिवार को कार्य मांगने के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों की समय-सीमा और जवाबदेही भी स्पष्ट रूप से तय की गई है।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए ए आई आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली, जीपीएस एवं मोबाइल ट्रैकिंग, साप्ताहिक सार्वजनिक डेटा प्रकाशन, वर्ष में अनिवार्य दो सामाजिक अंकेक्षण तथा निरंतर निगरानी एवं सुधार हेतु केन्द्रीय एवं राज्य स्तर पर स्टेयरिंग कमेटियों के गठन का प्रावधान किया गया है।

समाज कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण जी ने कहा कि अब कार्य का भुगतान अनिवार्य रूप से 7 दिनों के भीतर किया जाएगा। यदि किसी कारणवश भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिकों को ब्याज सहित भुगतान किया जाएगा। इससे ग्रामीण श्रमिकों को समय पर पारिश्रमिक प्राप्त होगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि कार्यस्थलों की गरिमा, मजबूत गांव, टिकाऊ संसाधन और प्रभावी शासन के माध्यम से ग्रामीण आजीविका में ठोस और सकारात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
मजदूरों व ग्रामीण नागरिकों का विरोध: VB-G RAM G कानून मनरेगा को पुनःलागू करने के संदर्भ में राष्ट्रपति को सम्बोधित ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा*
सुल्तानपुर,देश भर के मजदूर, श्रमिक एवं नागरिक VB-G RAM G बिल, 2025 का कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मनरेगा, 2005 एक कानूनूनी, मांग-आधारित और विकेंद्रीकृत अधिकार है, जिसने करोड़ों ग्रामीण परिवारों-विशेषकर महिलाओं,दलितों,आदिवासियों और भूमिहीन मजदूरों को आजीविका की सुरक्षा दी है। प्रस्तावित VB-G RAM G कानून इस अधिकार को समाप्त कर मनरेगा को बजट-नियंत्रित "योजना" में बदल देता है। इससे काम,बजट और प्राथमिकताएं केंद्र से तय होंगी,जिससे गरीब राज्यों में काम ठप होगा, बेरोजगारी और अप्लायन बढ़ेगा। मजदूरों और ग्रामीण नागरिकों की प्रमुख मांगें हैं: 1.-VB-G RAM G बिल, 2025* को तुरंत वापस लिया जाए।
2.-मनरेगा को उसके मूल अधिकार-आधारित स्वरूप में पूरी तरह पुनः लागू किया जाए।
3.-मनरेगा में काम के दिन बढ़ाए जाएं और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई जाए।...............…. यह विरोध प्रदर्शन संदीप पांडेय के नेतृत्व में पंकज पांडेय,चंदन सिंह,हैप्पी दुबे,सतीश ओसामा,अजय तिवारी,अंगद एवं अन्य लोगों सहित डीएम कार्यालय में संबंधित अधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सोपा। संदीप पांडेय ने कहा लोगों मजदूरों,एवं ग्राम सभाओं और श्रमिक संगठनों के परामर्श के बिना लाए गए विधेयक के खिलाफ है। वे मांग करते हैं कि कानून का नाम बदला जाए और अधिकारों को संरक्षित किया जाए।
गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (G RAM G) विधेयक पर राज्य सभा में बोले प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू

भाजपा प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सांसद आदित्य साहू ने राज्य सभा में (G RAM G) गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रस्तुत विधेयक के समर्थन में अपनी बातें रखी।

श्री साहू ने कहा कि जो गरीबी ने जन्म लेता है, पलता है और बढ़ता है वही गरीबी का दर्द जनता है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ऐसे ही मसीहा हैं। प्रधानमंत्री जी गरीब मां बाप के बेटे हैं वहीं कृषि मंत्री जी किसान परिवार से हैं। दोनों ने गरीबी को नजदीक से महसूस किया है।

कहा कि मनरेगा कांग्रेस के शासन के 2007 में शुरू हुआ था,लेकिन लंबे समय के बाद भी इसके जो उद्देश्य थे वे पूरे नहीं हुए। यह योजना पूरी तरह लूट खसोट ,भ्रष्टाचार का जरिया बन गया था। झारखंड में तो इस योजना में लूट मची है। राज्य सरकार के संरक्षण में योजनाओं में भ्रष्टाचार हुआ, मजदूरों को काम न देकर जेसीबी ,डंफर से काम कराए गए जिसे किसी भी उच्च स्तरीय कमेटी से जांच कराई जा सकती है।

कहा कि ऐसी लूट और भ्रष्टाचार को रोकने तथा मजदूरों ,गरीबों को धरातल पर रोजगार उपलब्ध कराने केलिए ही नई योजना जी राम जी को लाया गया है।

कहा कि इस योजना की जानकारी फैलते ही गांव,गरीब में उत्साह है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नई सोच से गांव, गरीब किसान को लाभ होने वाला है। अब 100 की जगह 125 दिन रोजगार मिलेंगे। लाभ मिलेगा।

कहा कि गांव गरीब के आशीर्वाद से ही दुनियां में भारत का यश फैल रहा।

कहा कि कांग्रेस तुष्टीकरण में आकंठ डूबी है। इसे राम और हिंदुत्व से चिढ़ है। इसीलिए राम मंदिर का विरोध किया, राम मंदिर के उद्घाटन के निमंत्रण को ठुकरा दिया।

कहा कि कांग्रेस को पता है कि महात्मा गांधी ने भी अपने अंत समय में हे राम ही कहा था।

कहा कि राम भारत की आत्मा हैं,पहचान हैं।इसलिए भाजपा सरकार ने टेंट से निकालकर भव्य मंदिर में रामलाला को विराजित किया।

कहा कि रोजगार और आजीविका मिशन में बदलते ग्रामीण आवश्यकताओं पर बल दिया गया है।कांग्रेस का नेतृत्व सोने की चम्मच लेकर जन्म लिया है इसलिए उन्हें गांव की स्थिति का अंदाज नहीं। आज इसी के कारण कांग्रेस मुक्त भारत बन रहा है।

कहा कि जब गांव के विकास की बात होती है तो कांग्रेस विरोध करती है।

श्री साहू ने कहा कि झारखंड में मनरेगा की स्थिति अत्यंत खराब है, फर्जी निकासी आम बात है,50% से अधिक पैसे दलाल बिचौलिए खा जाते हैं।

कहा कि नई योजना में लूट रोकने का पूरा प्रावधान है।योजनाओं को जीपीएस,मोबाइल से जोड़ा जाएगा।जनता को योजनाओं की पूरी जानकारी रहेगी,हर पंचायत में साल में दो बार जांच होगी। भ्रष्टाचार का पता लगाने केलिए एआई का प्रावधान है।

कहा कि कांग्रेस पार्टी बताए क्या 125 दिन का रोजगार देना क्या सिर्फ नाम बदलना है,डिजिटल पारदर्शिता क्या सिर्फ नाम बदलना है,साप्ताहिक भुगतान करना क्या सिर्फ नाम बदलना है।

कहा कि गांव की गरीब जनता सब जानती है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को योजना केलिए आभार प्रकट किया।

लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी पारित हुआ जी राम जी बिल, विरोध में देर रात विपक्षी सांसदों का प्रदर्शन

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लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी ‘द विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) 2025' यानी वीबी-जी राम जी बिल को पारित हो गया है। ये बिल 20 साल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा। ये बिल हर साल 125 दिन के ग्रामीण रोजगार की गारंटी देगा। वहीं, विपक्ष ने बिल को लेकर जमकर हंगामा किया।

विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट

बिल पास होने के दौरान विपक्ष के कई सदस्यों ने राज्यसभा से वॉकआउट किया, बिल वापस लेने की मांग की और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने बिल के पन्ने भी फाड़ दिए, जिस पर चेयरमैन सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें ट्रेजरी बेंच की तरफ न जाने की चेतावनी दी।

संसद परिसर में धरना

सदन के भीतर विरोध के बाद विपक्षी दलों ने संसद परिसर स्थित संविधान सदन के बाहर धरना दिया। विपक्ष ने मांग की कि इस बिल को वापस लिया जाए या फिर संसदीय समिति को भेजा जाए, ताकि इसकी गहराई से जांच हो सके। विपक्ष का कहना है कि बिना पर्याप्त चर्चा और सहमति के इस तरह का बड़ा बदलाव ग्रामीण गरीबों के हित में नहीं है।

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा

राज्यसभा में विधेयक पर छह घंटे से अधिक चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। सदन ने इस विधेयक पर विपक्ष के कई सदस्यों की ओर से लाये गये संशोधन प्रस्तावों को नामंजूर कर दिया। चर्चा का जवाब देते हुए चौहान ने कहा कि देश में 1960-61 में ग्रामीण जनशक्ति कार्यक्रम बनने से लेकर मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) तक समय-समय पर विभिन्न योजनाएं बनती रही हैं। उन्होंने कहा कि इनसे उद्देश्य पूरा नहीं होता या थोड़ा ही लक्ष्य पूरा होता है तो नयी योजनाएं लाई जाती हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस ने बापू के आदर्शों की हत्या की, जबकि मोदी सरकार ने उन्हें जिंदा रखा है। मनरेगा योजना की जगह नया विधेयक लाने और उसमें से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर विपक्ष के आरोपों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार महात्मा गांधी के आदर्शों को लागू करने और विकसित गांव की बुनियाद पर विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।

लोकसभा में विरोध के बीच जी राम जी बिल पास, शिवराज ने अटल की कविता से दिया विपक्ष को जवाब

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मनरेगा का नाम बदलकर भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल यानी 'जी राम जी' करने वाला बिल लोकसभा में आज विपक्ष के जोरदार हंगामे के बीच पास हो गया है। विपक्ष ने बिल पास होने पर जमकर हंगामा किया और बिल के कागज फाड़कर फेंक दिए। सदन का माहौल इतना बिगड़ गया कि कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

शिवराज सिंह ने विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पर दिया जवाब

विपक्षी दलों के हंगामे के बीच शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत जी-राम-जी विधेयक पर विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार का जवाब सुनना ही नहीं चाहता। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सरकार की तरफ से जारी आंकड़े पेश करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने फंड का दुरुपयोग किया, लेकिन हमारी सरकार ने विकास कार्यों पर खर्च करने पर जोर दिया।

किसानों के साथ-साथ गरीबों के कल्याण के लिए विधेयक

शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि सरकार किसानों के साथ-साथ गरीबों के कल्याण के लिए विधेयक लाई है, जिसका विरोध किया जा रहा है। उन्होंने कहा, सबसे पहले इस पवित्र सदन में मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं। सभापति महोदय को धन्यवाद देना चाहता हूं। इस विषय पर हमने माननीय सदस्यों के विचार सुने हैं। अब जवाब देना मेरा अधिकार है। मैं आपसे संरक्षण चाहता हूं। मैंने रात के डेढ़ बजे तक माननीय सदस्यों की बात सुनी है। अपनी बात सुना देना और फिर जवाब न सुनना ये लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार करना है।

कृषि मंत्री ने कहा- यह गांवों के विकास का विधायक

कृषि मंत्री ने कहा, यह गांवों के विकास का विधायक है। माननीय प्रतिपक्षी सदस्यों ने कई तरह के आरोप लगाए। एक बात यह कही कि हम भेदभाव करते हैं। सारा देश हमारे लिए एक है। चेन्नई हो या गुवाहाटी, अपना देश-अपनी माटी। अलग भाषा-अलग वेष, फिर भी अपना एक देश। उन्होंने आगे कहा, मैं इनको बताना चाहता हूं कि अटल जी ने क्या कहा था। माननीय अध्यक्ष महोदय, हम देश के किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करते। हमारे नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था - यह देश हमारे लिए जमीन का टुकड़ा नहीं है, जीता-जाता राष्ट्र पुरुष है।

कांग्रेस को नाम रखने की सनक

शिवराज सिंह ने आगे कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, कितनी योजनाओ का नाम नेहरू परिवार पर रखा गया। राजीव जी के नाम पर 55 राज्य सरकार की योजनाओं के नाम रखे गए। 74 सड़कों के नाम राजीव पर, 15 नेशनल पार्क नेहरू जी के नाम पर रखे गए. नाम रखने की सनक कांग्रेस की है।

बता दें कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने 16 दिसंबर को कहा कि हम इस बिल का विरोध करते हैं। हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती है।

नहीं रहे दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के डिजाइनर, मूर्तिकार राम सुतार का निधन

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प्रसिद्ध मूर्तिकार और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वनजी सुतार का बुधवार देर रात नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। राम सुतार 100 साल के थे। वह काफी समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। उनके बेटे अनिल सुतार ने ये जानकारी दी।

बेटे अनिल सुतार ने बयान में कहा कि गहन दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि मेरे पिता राम वंजी सुतार का 17 दिसंबर की मध्यरात्रि को हमारे निवास पर निधन हो गया। राम सुतार का जन्म 19 फरवरी 1925 को महाराष्ट्र के धुले जिले के गोंदुर गांव में हुआ था। बचपन से ही मूर्तिकला की ओर आकर्षित सुतार ने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्चर से गोल्ड मेडल हासिल किया।

राम मंदिर में 300 फीट ऊंची जटायु मूर्ति को दिया आकार

राम सुतार की मूर्तिकला की दुनिया महापुरुषों से भरी रही। महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, दीन दयाल उपाध्याय, छत्रपति शिवाजी महाराज उनकी कृतियों में इतिहास, विचार और राष्ट्र की आत्मा एक साथ सांस लेते नजर आते हैं। अयोध्या के राम मंदिर में कांसे से बनी 300 फीट ऊंची जटायु की कुबेर टीला पर स्थापित की गई है मूर्ति है, सुतार ने ही बनाई। संसद परिसर में स्थापित गांधी की ध्यानमग्न प्रतिमा हो या घोड़े पर सवार शिवाजी महाराज की भव्य आकृति, हर रचना में उन्होंने व्यक्तित्व से पहले विचार को उकेरा।

93 वर्ष की उम्र में बनाई ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’

राम सुतार की सबसे बड़ी उपलब्धि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति- गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ (182 मीटर ऊंची) को डिजाइन करना है। यह मूर्ति भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार पटेल को समर्पित है। सुतार ने इस मूर्ति को आकार देकर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई। करीब 93 वर्ष की उम्र में सुतार ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को पूरा किया था, जो उनके अथक परिश्रम का प्रतीक है।

नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती…” मनरेगा की जगह “विकसित भारत जी राम जी” वाले नाम पर भड़कीं प्रियंका

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लोकसभा में मंगलवार को मनरेगा की जगह ग्रामीण रोजगार की गारंटी के लिए लाया जा रहा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह बिल पेश किया है। इस नए बिल में सरकार मनरेगा में कई अहम बदलाव करने जा रही है जिसमें मजदूरों के काम को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है।

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) पर कहा, इस विधेयक में बदलाव करने पर अपनी आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। MGNREGA पिछले 20 वार्षों से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह कितना क्रांतिकारी कानून है कि जब इसे बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी सहमती दी थी। इसके द्वारा 100 दिन का रोजगार देश के गरीब से गरीब लोगों को मिलता आया है। यह बिल उस अधिकार को कमज़ोर करेगा।

बिना चर्चा और बिना सदन की सलाह के बिल पेश करने पर आपत्ति

कांग्रेस नेता ने कहा, मुझे नाम बदलने की यह सनक समझ नहीं आती। इसमें खर्चा बहुत होता है इसलिए मुझे समझ नहीं आता कि वे बेवजह ऐसा क्यों कर रहे हैं। बिना चर्चा के और बिना सदन की सलाह लिए इस तरह जल्दी-जल्दी में विधेयक को पास नहीं कराना चाहिए। ये विधेयक वापस लिया जाना चाहिए, इसके बदले में सरकार को एक नया विधेयक पेस करना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भले ही मेरे परिवार के नहीं थे लेकिन मेरे परिवार जैसे ही हैं और पूरे देश की यही भावना है। इसे गहन चर्चा और जांच पड़ताल के लिए स्थायी समिति के पास भेजा जाना चाहिए। और कोई भी विधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, पूर्वाग्रह और सनक के आधार पर पेश नहीं होना चाहिए।

केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा-प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा में 90 प्रतिशत अनुदान केंद्र से आता था, इस विधेयक के तहत अब ज्यादातर प्रदेशों में यह 60 प्रतिशत आएगा। इससे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर बहुत भार पड़ेगा खासतौर से उन राज्यों के लिए जो पहले से ही केंद्र से जीएसटी के बकाए के इंतजार में है। इस विधेयक द्वारा केंद्र का नियंत्रण बढ़ाया जा रहा है और जिम्मेदारी घटाई जा रही है।

ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा-प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी आगे कहा कि ने दिनों की संख्या तो बढ़ा दी है लेकिन मज़दूरी नहीं बढ़ाई है। पहले ग्राम पंचायत तय करती थी कि मनरेगा का काम कहां और किस तरह का होगा, लेकिन यह बिल कहता है कि केंद्र सरकार तय करेगी कि फंड कहां और कब देना है, इसलिए ग्राम पंचायत का अधिकार छीना जा रहा है। हमें यह बिल हर तरह से गलत लगता है।