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स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस में कांग्रेस यूथ प्रेसिडेंट उदय भानु चिब को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत

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एआई इम्पैक्ट समिट में के दौरान भारत मंडपम में हुए 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन मामले में इंडिया यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने उदय को आज सुबह जमानत दे दी है।

रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज

देर रात सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की 7 दिन की रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज कर दी, क्योंकि उदय के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। उदय को पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट से जमानत तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए उदय को कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी। जमानत शर्तों में 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड का भुगतान ज़रूरी है। इसके साथ ही उदय को कोर्ट में अपने पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डिवासेज़ भी सरेंडर करने होंगे।

रिमांड बढ़ाने की मांग

इससे पहले चिब के वकील एडवोकेट सुलेमान मोहम्मद खान ने बताया कि 'दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उदय भानु की पुलिस कस्टडी बढ़ाने के लिए एक एप्लीकेशन दी है। उन्होंने रिमांड को 7 दिन बढ़ाने की मांग की है, और एक आरोपी की पांच दिन और दूसरे की दो दिन की रिमांड के लिए दो एप्लीकेशन भी दी हैं।

क्या है मामला?

दिल्ली पुलिस ने एआई इम्पैक्ट समिट में भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों के एक गुट की ओर से कमीज उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन के संबंध में संगठन के अध्यक्ष उदय भानु चिब को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार देते हुए गिरफ्तार किया था। एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 20 फरवरी को यूथ कांग्रेस ने 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने उदय के साथ कृष्ण हरि, कुन्दन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय कुमार यादव और कुछ अन्य यूथ कांग्रेस सदस्यों को गिरफ्तार किया था और उदय को मुख्य साजिशकर्ता बताया था।

एआई समिट को गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बनाया', कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर पीएम मोदी का तीखा वार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन को कांग्रेस की गंदी राजनीति का स्वरूप बताया। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के पहले नमो भारत RRTS का उद्घाटन किया, पूरा दिल्ली-मेरठ नमो भारत पूरा कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो (मेरठ साउथ-मोदीपुरम) देश को समर्पित किया। इस दौरान अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ने कहा, 'एक तरफ आज देशवासी भारत को विकसित बनाने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन देश में ही कुछ राजनैतिक दल हैं जो भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ, दुनिया भर के 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिल्ली आए। पूरा देश गर्व से भर गया लेकिन कांग्रेस और इसके इकोसिस्टम ने क्या किया?'

वैश्विक आयोजन को राजनीति का अखाड़ा बनाया-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए।'

कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी -पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने नेताओं ने AI समिट में जो कुछ किया वह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कितनी दिवालिया, कितनी दरिद्र हो गई है। कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है।'

पूरे देश में कांग्रेस की रीति-नीति पर थू-थू-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है, ये मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, मेरी मां को गाली देने से इन्हें कोई परहेज नहीं है, उन्हें बीजेपी, NDA से विरोध है लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए था कि AI ग्लोबल समिट यह बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था। यह देश का, देश के सम्मान का कार्यक्रम था लेकिन कांग्रेस ने परसो सारी मर्यादाएं तोड़ दी। पूरे देश में कांग्रेस की इस रीति-नीति पर थू-थू हो रही है लेकिन दुर्भाग्य देखिए इतनी पुरानी पार्टी के नेता लजाने की बजाय गाजते हैं। देश की बेइज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं।'

समाजवादी पार्टी पर भी सादा निशाना

नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस, समाजवादी पार्टी की जब दिल्ली में सरकार थी तब यह सब संभव ही नहीं था क्योंकि तब इंफ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाएं घोटालों में ही गुम हो जाती थी। मेट्रो जैसी और उससे जुड़ी अधिकतर तकनीक भी हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थी। हमने घोटाले भी बंद किए और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी आगे बढ़ाया।'

AI समिट में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, टी-शर्ट उतारकर पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी

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राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में एआई इंपैक्ट समिट चल रहा है। समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत मंडपम में टॉपलेस होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मोदी विरोधी नारे भी लगाए। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह बिना शर्ट के प्रदर्शन किया उसे लेकर राजनीति गरमा गई है।

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पुलिस ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद यूथ कांग्रेस कार्यकता AI समिट में घुस आए। उन्होंने अपने टीशर्ट उतार कर प्रदर्शन किया। अचानक नारेबाजी शुरू होने से कुछ समय के लिए कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल किया और स्थिति को सामान्य किया। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सभी को हिरासत में ले लिया गया है और FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों ने गिरफ्तार किया है।

सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया

इंडियन यूथ कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और उनकी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। यूथ कांग्रेस ने कहा, 'जब विदेश नीति में झुकाव, कॉरपोरेट दबाव और चुप्पी हावी हो तो साफ है पीएम मोदी COMPROMISED हैं। इसी सच्चाई को बेनकाब करने भारतीय युवा कांग्रेस के जाबांज कार्यकर्ता AI Summit पहुंचे और Compromised PM के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। देश की अस्मिता से कोई समझौता नहीं। इंकलाब जिंदाबाद।'

बीजेपी का कांग्रेस पर करारा वार

बीजेपी ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर सवाल उठाए बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट में कांग्रेस पर करारा वार किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'राष्ट्रीय शर्म, ऐसे समय में जब भारत एक प्रतिष्ठित वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने नवाचार और नेतृत्व का प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस पार्टी ने गरिमा की जगह व्यवधान का रास्ता चुना है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिखर सम्मेलन स्थल पर नग्न होकर हंगामा किया, जो स्पष्ट रूप से भारत को विश्व मंच पर शर्मिंदा करने के उद्देश्य से किया गया कृत्य था।

कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में घुसकर स्पीकर को गालियां दीं”, रिजिजू का बड़ा आरोप

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद स्पीकर के कक्ष में गए और उनके साथ गाली गलौज की।

20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चैंबर में घुसे-रिजिजु

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने आज यानी बुधवार को कांग्रेस सांसदों पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुसकर उन्हें गालियां देने का आरोप लगाया। किरेन रिजिजू ने कहा, ‘कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। मैं भी वहां था। स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो सख्त कार्रवाई होती। प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत सीनियर कांग्रेस लीडर भी अंदर मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे।’

'घटना से स्पीकर बहुत दुखी'

रिजिजू ने कहा कि स्पीकर इस घटना से "बहुत दुखी" हैं और उन्होंने खुद उनसे बात की है। रिजिजू ने सदन में बोलने को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने एक फैसला दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और वे अपनी इच्छा से बोलेंगे।

बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई सदस्य नहीं बोल सकता-रिजिजु

रिजिजू ने कहा कि संसद में नियम बहुत साफ हैं, बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई भी सदस्य नहीं बोल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री भी तभी बोलते हैं जब अध्यक्ष अनुमति देते हैं। हर सदस्य को नियमों का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर का स्वभाव बहुत शांत है, वरना इस तरह की घटना पर सख्त कार्रवाई हो सकती थी।

लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए नोटिस

यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को हो सकती है। बताया जा रहा है कि नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया है, जो नियमों के अनुसार तकनीकी आपत्ति का कारण बन सकता था। हालांकि, स्पीकर ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में जो भी कमियां हैं, उन्हें ठीक कराया जाए और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।

शशि थरूर फिर कांग्रेस की अहम बैठक से रहे गायब, जानें क्‍या बताई वजह

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केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी। लेकिन इसमें थरूर नहीं पहुंचे।

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शशि थरूर के ऑफिस की तरफ से इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि शशि थरूर आज यानी 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके कार्यालय ने कहा, ‘वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए कालीकट में हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। वह अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।’

क्या है थरूर की नाराजगी की वजह?

शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच के मतभेद की खबरें लंबे समय से आ रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने से थरूर नाराज हैं।

राहुल गांधी ने थरूर का नाम भी नहीं लिया

कुछ दिन पहले कोच्चि में कांग्रेस ने महापंचायत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले यह तय किया गया कि वरिष्ठता को देखते हुए शशि थरूर के भाषण के बाद सिर्फ राहुल गांधी का भाषण होगा। महापंचायत में वक्ताओं का क्रम भी तय था, इसके बावजूद शशि थरूर के भाषण के बाद अन्य वक्ताओं की लाइन लगा दी। राहुल गांधी भी अंत में बोले, मगर उन्होंने मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम भी नहीं लिया। यह राहुल गांधी की चूक थी या संकेत, इस घटनाक्रम ने शशि थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

बैठक से दूर लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल

बताया जाता है कि महापंचायत में बैठने के क्रम में भी कांग्रेस सांसद की सीनियॉरिटी को दरकिनार किया गया था। शशि थरूर ने इसे अपमान बताते हुए केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए पार्टी हाईकमान की बुलाई गई बैठक से दूर रहने फैसला किया है। वह इस दौरान कालीकट में हो रहे केरल लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल होंगे।

बता दें कि बीते कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी नेतृत्व को असहज करने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। इसकी शुरुआत पहलगाम हमले से हुई, जब थरूर ने इंटेलिजेंस चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर के चयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।

हिंदू धर्म और हिंदुत्व पर ऐसा क्या बोले मणिशंकर अय्यर ? भड़की भाजपी का कांग्रेस पर हमला

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हिंदू धर्म और हिंदुत्व को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने रविवार को एक सार्वजनिक चर्चा के दौरान हिंदुत्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ‘उन्माद की स्थिति में पहुंचा हुआ हिंदू धर्म’ करार दिया। इस बयान पर सत्ताधारी बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा- अय्यर

कोलकाता डिबेटिंग सर्कल में 'हिंदुत्व से हिंदू धर्म को बचाना चाहिए' विषय पर बहस हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म एक आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में सामने आया है।

हिंदू धर्म को संरक्षण की आवश्यकता नहीं

अय्यर ने दावा किया कि हिंदुत्व 1023 में अस्तित्व में आया। जबकि हिंदुत्व से पहले हजारों वर्षों तक हिंदू धर्म ने तमान संघर्षों और कठिनाइयों का सामना किया। फिर भी यह फलता-फूलता रहा। उसे हिंदुत्व के संरक्षण की आवश्यकता नहीं थी।

हिंदुत्व बहुसंख्यक हिंदुओं को डराता है-अय्यर

इस दौरान अय्यर ने कहा कि हिंदुत्व बहुसंख्यक हिंदुओं के भीतर डर का माहौल पैदा करता है। कि बीजेपी का कोई नेता एक अंधे, भूखे आदिवासी लड़की को इसलिए थप्पड़ मारे क्योंकि वह चर्च में क्रिसमस लंच में शामिल हुई थी। अय्यर ने यह भी कहा कि हिंदुत्व 80% हिंदुओं को 14% मुसलमानों से डरने को कहता है।

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

महाराष्ट्र में गजब का सियासी खेल! भाजपा ने कांग्रेस ने मिला लिया हाथ

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कहा जाता है राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा ही कुछ देखा जा रहा है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली।

भाजपा और कांग्रेस का दुर्लभ गठबंधन

हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस का एक दुर्लभ गठबंधन सामने आया है। इस गठबंधन ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया है। भाजपा ने कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पार्षदों के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया है और मुंबई क्षेत्र की एक नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस गठबंधन से शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है।

शिवसेना सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का साथ

भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है।

किसे कितनी सीटें मिलीं

चुनाव पिछले महीने हुए थे, जिसमें शिवसेना और बीजेपी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद, अलग-अलग चुनाव लड़े थे। 60 सदस्यीय परिषद में, शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 27 सीटें जीतीं। लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। भाजपा को 14 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने चार सीटें जीतीं और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

"अंबरनाथ विकास अघाड़ी" का गठन

शिवसेना को नगर निगम अध्यक्ष पद के चुनाव में झटका लगा, जहां उसकी उम्मीदवार मनीषा वालेकर भाजपा उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल से हार गईं। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करना का फैसला लिया गया। इस गठबंधन को "अंबरनाथ विकास अघाड़ी" नाम दिया गया है।

ये है गठबंधन का गणित

अंबरनाथ में घोषित गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, भाजपा समर्थित नगर अध्यक्ष, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। गठबंधन की कुल संख्या 32 हो गई है, जो 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा पार कर जाती है।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में रोष

भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का निधन, 82 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 82 साल के थे और बीमारी के कारण उन्हें पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पार्थिव शरीर को दोपहर 2 बजे तक पुणे शहर के कलमाड़ी हाउस, एरंडवणे में रखा जाएगा। कलमाड़ी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3.30 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान भूमि, नवी पेठ में होगा।

1982 में राजनीतिक करियर की शुरूआत

राजनीति में आने से पहले 6 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा की। वायु सेना से रिटायर होने के बाद, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उनका राजनीतिक करियर 1982 से शुरू हुआ था। वह 1982 से 1996 तक तीन बार और फिर 1998 में राज्यसभा के मेंबर रहे।

1977 में इंडियन यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने

कलमाडी को 1977 में इंडियन यूथ कांग्रेस और पुणे के प्रेसिडेंट बनाया गया। अगले ही साल यूथ कांग्रेस महाराष्ट्र के प्रेसिडेंट बन गए। यह पद उन्होंने 1978 से 1980 तक संभाला। 1980 में, महाराष्ट्र एथलेटिक्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के तौर पर कलमाडी ने मॉस्को ओलंपिक्स में देश को रिप्रेजेंट करने के लिए मैराथन टीम के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लिया था। इसकी वजह से ही पुणे में इंटरनेशनल मैराथन की शुरुआत हुई थी। कलमाडी 1981-1986 तक इंडियन यूथ कांग्रेस (सोशलिस्ट) के प्रेसिडेंट बने रहे।

भारत के खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका

कलमाड़ी एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और खेल प्रशासक थे, जिन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और कई वर्षों तक भारत के खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स ) में हुए भ्रष्टाचार मामले के चलते वे राष्ट्रीय स्तर पर जांच के दायरे में आए और खेलों के फंड के कथित दुरुपयोग के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया। उन्हें अप्रैल 2011 में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।

स्पीकर के खिलाफ मजबूरी में लाना पड़ा प्रस्ताव, लेकिन हमारा धर्म संसद की मर्यादा बचाना, अविश्वास प्रस्ताव पर बोले गौरव गोगोई

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विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक संकल्प मंगलवार को सदन में पेश किया। इस पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने अपनी बात रखी। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने अपने भाषण के दौरान सरकार पर बड़े आरोप लगाए। गौरव ने कहा कि स्पीकर को निष्पक्ष होना चाहिए। उसके लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं हो। लेकिन स्पीकर निष्पक्ष नहीं है।

माइक भी अस्त्र बन गया है-गोगोई

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़े हुए। उन्होंने कहा कि सदन के अंदर पहले भी तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आया है। जब यह हुआ तब डिप्टी स्पीकर चेयर पर थे। आज विपक्ष के 200 सांसद होने के बावजूद यहां डिप्टी स्पीकर नहीं है। देश को पता चलना चाहिए कि सदन कैसे चल रहा है। माइक भी अस्त्र बन गया है। यह सुविधा के अनुसार सत्ता पक्ष को दिया जाता है। जबकि विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं दिया जाता। संसद के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।

स्पीकर पर यह निजी हमला नहीं-गोगोई

गोगोई ने कहा, यह रेजोलयूशन किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। हमें खुशी नहीं है कि हम इसे लाए। क्योंकि ओम बिरला का हर किसी के साथ निजी तौर पर बहुत अच्छा है। लेकिन हम मजबूर हैं कि हमें यह प्रस्ताव लाना पड़ रहा है। लेकिन हमारा धर्म है संसद की मर्यादा को बचाना। क्योंकि हर सदस्य का कर्तव्य है कि संसद की गरिमा मर्यादा कानून को बचाए। यह निजी हमला नहीं है। देश के लोगों का विश्वास लोकतंत्र में कायम रहे इसलिए हम अविश्वास प्रस्ताव लाए हैं।

गोगोई ने कहा-आज देश का नेतृत्व कमजोर है

कांग्रेस नेता ने कहा, फरवरी में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जब नेता प्रतिपक्ष बोलने के लिए खड़े हुए तब 20 बार व्यवधान पैदा किया गया। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि वह कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे उठाना चाहते थे। उन्होंने कहा, जब भारत की सीमा पर पड़ोसी देश के टैंक आ रहे थे तो सेना राजनीतिक नेतृत्व की तरफ देखा रही थी, लेकिन उस समय देश के मुखिया कहते हैं कि जो उचित लगे वो कर लो। उन्होंने आरोप लगाया कि आज देश का नेतृत्व कमजोर है।

AI समिट शर्टलेस प्रोटेस्ट केस में कांग्रेस यूथ प्रेसिडेंट उदय भानु चिब को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी जमानत

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एआई इम्पैक्ट समिट में के दौरान भारत मंडपम में हुए 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन मामले में इंडिया यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने उदय को आज सुबह जमानत दे दी है।

रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज

देर रात सुनवाई के बाद कोर्ट ने पुलिस की 7 दिन की रिमांड बढ़ाने की अर्जी खारिज कर दी, क्योंकि उदय के खिलाफ ठोस सबूत नहीं मिले। उदय को पटियाला हाउस कोर्ट के ड्यूटी मजिस्ट्रेट से जमानत तो मिल गई है, लेकिन इसके लिए उदय को कुछ शर्तें माननी पड़ेंगी। जमानत शर्तों में 50 हजार रुपये के पर्सनल बॉन्ड का भुगतान ज़रूरी है। इसके साथ ही उदय को कोर्ट में अपने पासपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक डिवासेज़ भी सरेंडर करने होंगे।

रिमांड बढ़ाने की मांग

इससे पहले चिब के वकील एडवोकेट सुलेमान मोहम्मद खान ने बताया कि 'दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने उदय भानु की पुलिस कस्टडी बढ़ाने के लिए एक एप्लीकेशन दी है। उन्होंने रिमांड को 7 दिन बढ़ाने की मांग की है, और एक आरोपी की पांच दिन और दूसरे की दो दिन की रिमांड के लिए दो एप्लीकेशन भी दी हैं।

क्या है मामला?

दिल्ली पुलिस ने एआई इम्पैक्ट समिट में भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों के एक गुट की ओर से कमीज उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन के संबंध में संगठन के अध्यक्ष उदय भानु चिब को ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार देते हुए गिरफ्तार किया था। एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान 20 फरवरी को यूथ कांग्रेस ने 'शर्टलेस' विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने उदय के साथ कृष्ण हरि, कुन्दन यादव, नरसिम्हा यादव, अजय कुमार यादव और कुछ अन्य यूथ कांग्रेस सदस्यों को गिरफ्तार किया था और उदय को मुख्य साजिशकर्ता बताया था।

एआई समिट को गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बनाया', कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर पीएम मोदी का तीखा वार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के मेरठ से कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पीएम मोदी ने एआई इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस द्वारा किए गए शर्टलेस प्रदर्शन को कांग्रेस की गंदी राजनीति का स्वरूप बताया। उन्होंने कहा, कांग्रेस ने वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत के पहले नमो भारत RRTS का उद्घाटन किया, पूरा दिल्ली-मेरठ नमो भारत पूरा कॉरिडोर और मेरठ मेट्रो (मेरठ साउथ-मोदीपुरम) देश को समर्पित किया। इस दौरान अपने संबोधन के दौरान उन्होंने ने कहा, 'एक तरफ आज देशवासी भारत को विकसित बनाने के लिए काम कर रहे हैं लेकिन देश में ही कुछ राजनैतिक दल हैं जो भारत की सफलता को पचा नहीं पा रहे। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ, दुनिया भर के 80 से अधिक देशों के प्रतिनिधि दिल्ली आए। पूरा देश गर्व से भर गया लेकिन कांग्रेस और इसके इकोसिस्टम ने क्या किया?'

वैश्विक आयोजन को राजनीति का अखाड़ा बनाया-पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए।'

कांग्रेस अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी -पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'कांग्रेस ने नेताओं ने AI समिट में जो कुछ किया वह दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कितनी दिवालिया, कितनी दरिद्र हो गई है। कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है।'

पूरे देश में कांग्रेस की रीति-नीति पर थू-थू-पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है, ये मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, मेरी मां को गाली देने से इन्हें कोई परहेज नहीं है, उन्हें बीजेपी, NDA से विरोध है लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए था कि AI ग्लोबल समिट यह बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था। यह देश का, देश के सम्मान का कार्यक्रम था लेकिन कांग्रेस ने परसो सारी मर्यादाएं तोड़ दी। पूरे देश में कांग्रेस की इस रीति-नीति पर थू-थू हो रही है लेकिन दुर्भाग्य देखिए इतनी पुरानी पार्टी के नेता लजाने की बजाय गाजते हैं। देश की बेइज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं।'

समाजवादी पार्टी पर भी सादा निशाना

नमो भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के बाद पीएम मोदी ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'कांग्रेस, समाजवादी पार्टी की जब दिल्ली में सरकार थी तब यह सब संभव ही नहीं था क्योंकि तब इंफ्रास्ट्रक्चर की परियोजनाएं घोटालों में ही गुम हो जाती थी। मेट्रो जैसी और उससे जुड़ी अधिकतर तकनीक भी हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थी। हमने घोटाले भी बंद किए और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी आगे बढ़ाया।'

AI समिट में यूथ कांग्रेस का प्रदर्शन, टी-शर्ट उतारकर पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी

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राष्ट्रीय राजधानी के भारत मंडपम में एआई इंपैक्ट समिट चल रहा है। समिट के दौरान इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत मंडपम में टॉपलेस होकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मोदी विरोधी नारे भी लगाए। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जिस तरह बिना शर्ट के प्रदर्शन किया उसे लेकर राजनीति गरमा गई है।

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पुलिस ने 4 लोगों को किया गिरफ्तार

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद यूथ कांग्रेस कार्यकता AI समिट में घुस आए। उन्होंने अपने टीशर्ट उतार कर प्रदर्शन किया। अचानक नारेबाजी शुरू होने से कुछ समय के लिए कार्यक्रम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल किया और स्थिति को सामान्य किया। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि सभी को हिरासत में ले लिया गया है और FIR दर्ज की जाएगी। पुलिस ने इस मामले में 4 लोगों ने गिरफ्तार किया है।

सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया

इंडियन यूथ कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा और उनकी सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाया। यूथ कांग्रेस ने कहा, 'जब विदेश नीति में झुकाव, कॉरपोरेट दबाव और चुप्पी हावी हो तो साफ है पीएम मोदी COMPROMISED हैं। इसी सच्चाई को बेनकाब करने भारतीय युवा कांग्रेस के जाबांज कार्यकर्ता AI Summit पहुंचे और Compromised PM के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। देश की अस्मिता से कोई समझौता नहीं। इंकलाब जिंदाबाद।'

बीजेपी का कांग्रेस पर करारा वार

बीजेपी ने विपक्षी पार्टी कांग्रेस पर सवाल उठाए बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर पोस्ट में कांग्रेस पर करारा वार किया। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'राष्ट्रीय शर्म, ऐसे समय में जब भारत एक प्रतिष्ठित वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने नवाचार और नेतृत्व का प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस पार्टी ने गरिमा की जगह व्यवधान का रास्ता चुना है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिखर सम्मेलन स्थल पर नग्न होकर हंगामा किया, जो स्पष्ट रूप से भारत को विश्व मंच पर शर्मिंदा करने के उद्देश्य से किया गया कृत्य था।

कांग्रेस सांसदों ने चेंबर में घुसकर स्पीकर को गालियां दीं”, रिजिजू का बड़ा आरोप

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कई सांसद स्पीकर के कक्ष में गए और उनके साथ गाली गलौज की।

20-25 कांग्रेस सांसद स्पीकर के चैंबर में घुसे-रिजिजु

केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने आज यानी बुधवार को कांग्रेस सांसदों पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के चैंबर में घुसकर उन्हें गालियां देने का आरोप लगाया। किरेन रिजिजू ने कहा, ‘कम से कम 20-25 कांग्रेस सांसद लोकसभा स्पीकर के चैंबर में घुस गए और उन्हें गालियां दीं। मैं भी वहां था। स्पीकर बहुत नरम इंसान हैं, नहीं तो सख्त कार्रवाई होती। प्रियंका गांधी वाड्रा और केसी वेणुगोपाल समेत सीनियर कांग्रेस लीडर भी अंदर मौजूद थे, और वे उन्हें लड़ने के लिए उकसा रहे थे।’

'घटना से स्पीकर बहुत दुखी'

रिजिजू ने कहा कि स्पीकर इस घटना से "बहुत दुखी" हैं और उन्होंने खुद उनसे बात की है। रिजिजू ने सदन में बोलने को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्पीकर ने एक फैसला दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें बोलने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है और वे अपनी इच्छा से बोलेंगे।

बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई सदस्य नहीं बोल सकता-रिजिजु

रिजिजू ने कहा कि संसद में नियम बहुत साफ हैं, बिना अध्यक्ष की अनुमति कोई भी सदस्य नहीं बोल सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कि प्रधानमंत्री भी तभी बोलते हैं जब अध्यक्ष अनुमति देते हैं। हर सदस्य को नियमों का पालन करना होता है। उन्होंने कहा कि स्पीकर का स्वभाव बहुत शांत है, वरना इस तरह की घटना पर सख्त कार्रवाई हो सकती थी।

लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए नोटिस

यह पूरा विवाद उस समय सामने आया है जब कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को हो सकती है। बताया जा रहा है कि नोटिस में फरवरी 2025 की घटनाओं का चार बार उल्लेख किया गया है, जो नियमों के अनुसार तकनीकी आपत्ति का कारण बन सकता था। हालांकि, स्पीकर ने लोकसभा सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में जो भी कमियां हैं, उन्हें ठीक कराया जाए और आगे की प्रक्रिया पूरी की जाए।

शशि थरूर फिर कांग्रेस की अहम बैठक से रहे गायब, जानें क्‍या बताई वजह

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केरल विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच एक बार फिर शशि थरूर की नाराजगी की खबर सामने आई है। चुनावी तैयारियों को लेकर आज होने वाली कांग्रेस की अहम बैठक में थरूर शामिल नहीं हुए। आज राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ दिल्ली में बैठक प्रस्तावित थी। लेकिन इसमें थरूर नहीं पहुंचे।

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शशि थरूर के ऑफिस की तरफ से इस बाबत बयान जारी किया गया है, जिसमें स्‍पष्‍ट तौर पर कहा गया है कि शशि थरूर आज यानी 23 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली केरल कांग्रेस की अहम चुनावी तैयारी बैठक में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनके कार्यालय ने कहा, ‘वे केरल लिटरेचर फेस्टिवल के लिए कालीकट में हैं, जो एशिया का सबसे बड़ा साहित्य महोत्सव है। वह अपनी नवीनतम पुस्तक पर बोल रहे हैं, जो श्री नारायण गुरु पर आधारित है। उन्होंने पार्टी को पहले ही सूचित कर दिया था कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सकेंगे।’

क्या है थरूर की नाराजगी की वजह?

शशि थरूर और कांग्रेस पार्टी के बीच के मतभेद की खबरें लंबे समय से आ रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी एक बार फिर चर्चा में है। सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी के हालिया कोच्चि दौरे के दौरान उन्हें अपेक्षित सम्मान न मिलने से थरूर नाराज हैं।

राहुल गांधी ने थरूर का नाम भी नहीं लिया

कुछ दिन पहले कोच्चि में कांग्रेस ने महापंचायत कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद थे। कार्यक्रम से पहले यह तय किया गया कि वरिष्ठता को देखते हुए शशि थरूर के भाषण के बाद सिर्फ राहुल गांधी का भाषण होगा। महापंचायत में वक्ताओं का क्रम भी तय था, इसके बावजूद शशि थरूर के भाषण के बाद अन्य वक्ताओं की लाइन लगा दी। राहुल गांधी भी अंत में बोले, मगर उन्होंने मंच पर मौजूद शशि थरूर का नाम भी नहीं लिया। यह राहुल गांधी की चूक थी या संकेत, इस घटनाक्रम ने शशि थरूर की नाराजगी को और बढ़ा दिया।

बैठक से दूर लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल

बताया जाता है कि महापंचायत में बैठने के क्रम में भी कांग्रेस सांसद की सीनियॉरिटी को दरकिनार किया गया था। शशि थरूर ने इसे अपमान बताते हुए केरल विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा के लिए पार्टी हाईकमान की बुलाई गई बैठक से दूर रहने फैसला किया है। वह इस दौरान कालीकट में हो रहे केरल लिटरेचल फेस्टिवल में शामिल होंगे।

बता दें कि बीते कुछ महीनों में थरूर के कुछ बयान और सोशल मीडिया पोस्ट पार्टी नेतृत्व को असहज करने वाले रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के कुछ कदमों की सराहना करते हुए उन्होंने सार्वजनिक मंचों पर ऐसी टिप्पणियां कीं, जिन्हें कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया। इसकी शुरुआत पहलगाम हमले से हुई, जब थरूर ने इंटेलिजेंस चूक के आरोपों पर मोदी सरकार को क्लीन चिट दे दी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले संसदीय प्रतिनिधिमंडल में शशि थरूर के चयन पर कांग्रेस ने सवाल उठाए।

हिंदू धर्म और हिंदुत्व पर ऐसा क्या बोले मणिशंकर अय्यर ? भड़की भाजपी का कांग्रेस पर हमला

#congressleadermanishankaraiyarcontroversial_statement

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हिंदू धर्म और हिंदुत्व को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने रविवार को एक सार्वजनिक चर्चा के दौरान हिंदुत्व पर तीखी टिप्पणी करते हुए इसे ‘उन्माद की स्थिति में पहुंचा हुआ हिंदू धर्म’ करार दिया। इस बयान पर सत्ताधारी बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा- अय्यर

कोलकाता डिबेटिंग सर्कल में 'हिंदुत्व से हिंदू धर्म को बचाना चाहिए' विषय पर बहस हुई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अय्यर ने हिंदू धर्म और हिंदुत्व के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए कहा कि हिंदू धर्म एक आध्यात्मिक और दार्शनिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा के रूप में सामने आया है।

हिंदू धर्म को संरक्षण की आवश्यकता नहीं

अय्यर ने दावा किया कि हिंदुत्व 1023 में अस्तित्व में आया। जबकि हिंदुत्व से पहले हजारों वर्षों तक हिंदू धर्म ने तमान संघर्षों और कठिनाइयों का सामना किया। फिर भी यह फलता-फूलता रहा। उसे हिंदुत्व के संरक्षण की आवश्यकता नहीं थी।

हिंदुत्व बहुसंख्यक हिंदुओं को डराता है-अय्यर

इस दौरान अय्यर ने कहा कि हिंदुत्व बहुसंख्यक हिंदुओं के भीतर डर का माहौल पैदा करता है। कि बीजेपी का कोई नेता एक अंधे, भूखे आदिवासी लड़की को इसलिए थप्पड़ मारे क्योंकि वह चर्च में क्रिसमस लंच में शामिल हुई थी। अय्यर ने यह भी कहा कि हिंदुत्व 80% हिंदुओं को 14% मुसलमानों से डरने को कहता है।

थरूर बोले- नेहरू की गलतियां स्वीकारना जरूरी, लेकिन हर समस्या के लिए दोषी ठहराना गलत

#congressmpshashitharoorbig_statement

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे कांग्रेस के अंदर खलबली मच सकती है। थरूर ने कहा है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भारतीय लोकतंत्र का संस्थापक मानते हैं, लेकिन उनकी तारीफ आलोचना से खाली नहीं है। थरूर ने इस बात पर जोर दिया कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन भारत की सभी समस्याओं के लिए उन्हें दोषी ठहराना ठीक नहीं है।

थरूर ने कहा- मैं नेहरू का गहरा प्रशंसक

कांग्रेस सांसद ने कहा कि मैं भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विचारों और दृष्टिकोण की गहरी प्रशंसा करता हूं मैं उनके विचारों और सोच का बहुत सम्मान करता हूं, हालांकि मैं उनके सभी विश्वासों और नीतियों से 100% सहमत नहीं हो सकता। उन्होंने जो बहुत सी चीजें कीं, वे बहुत सराहनीय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नेहरू ने ही भारत में लोकतंत्र को मजबूती से स्थापित किया था।

मोदी सरकार लोकतंत्र विरोधी नहीं पर नेहरू विरोधी-थरूर

थरूर ने आगे कहा कि मैं यह नहीं कहूंगा कि वे (मोदी सरकार) लोकतंत्र विरोधी हैं, लेकिन वे निश्चित रूप से नेहरू विरोधी हैं। नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना दिया गया है।

नेहरू को हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते-थरूर

नेहरू की हर मान्यता और नीति का बिना आलोचना समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि नेहरू की गलतियों को स्वीकार करना आवश्यक है, लेकिन हर चीज के लिए सिर्फ उन्हें जिम्मेदार ठहरा देना गलत है। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में नेहरू की ओर से लिए गए कुछ फैसले गलत हो सकते हैं, लेकिन हम उन्हें हर चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते हैं।

1962 में हार के लिए नेहरू के फैसले कुछ हद तक जिम्मेदारर-थरूर

1962 के भारत-चीन युद्ध को याद करते हुए, थरूर ने कहा कि वर्तमान सरकार की नेहरू की आलोचना में कुछ सच्चाई हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उदाहरण के लिए, 1962 में चीन के खिलाफ हार के लिए कुछ हद तक नेहरू के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।' उन्होंने आगे कहा, 'लेकिन वे अब जो करते हैं वह यह है कि किसी भी मुद्दे पर नेहरू को हर चीज के लिए दोषी ठहराते हैं।'

महाराष्ट्र में गजब का सियासी खेल! भाजपा ने कांग्रेस ने मिला लिया हाथ

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कहा जाता है राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा ही कुछ देखा जा रहा है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली।

भाजपा और कांग्रेस का दुर्लभ गठबंधन

हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस का एक दुर्लभ गठबंधन सामने आया है। इस गठबंधन ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया है। भाजपा ने कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पार्षदों के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया है और मुंबई क्षेत्र की एक नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस गठबंधन से शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है।

शिवसेना सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का साथ

भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है।

किसे कितनी सीटें मिलीं

चुनाव पिछले महीने हुए थे, जिसमें शिवसेना और बीजेपी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद, अलग-अलग चुनाव लड़े थे। 60 सदस्यीय परिषद में, शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 27 सीटें जीतीं। लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। भाजपा को 14 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने चार सीटें जीतीं और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

"अंबरनाथ विकास अघाड़ी" का गठन

शिवसेना को नगर निगम अध्यक्ष पद के चुनाव में झटका लगा, जहां उसकी उम्मीदवार मनीषा वालेकर भाजपा उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल से हार गईं। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करना का फैसला लिया गया। इस गठबंधन को "अंबरनाथ विकास अघाड़ी" नाम दिया गया है।

ये है गठबंधन का गणित

अंबरनाथ में घोषित गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, भाजपा समर्थित नगर अध्यक्ष, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। गठबंधन की कुल संख्या 32 हो गई है, जो 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा पार कर जाती है।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में रोष

भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुरेश कलमाड़ी का निधन, 82 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

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पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कलमाड़ी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 82 साल के थे और बीमारी के कारण उन्हें पुणे के दीनानाथ मंगेशकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पार्थिव शरीर को दोपहर 2 बजे तक पुणे शहर के कलमाड़ी हाउस, एरंडवणे में रखा जाएगा। कलमाड़ी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3.30 बजे पुणे के वैकुंठ श्मशान भूमि, नवी पेठ में होगा।

1982 में राजनीतिक करियर की शुरूआत

राजनीति में आने से पहले 6 वर्षों से अधिक समय तक भारतीय वायु सेना में पायलट के रूप में सेवा की। वायु सेना से रिटायर होने के बाद, उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। उनका राजनीतिक करियर 1982 से शुरू हुआ था। वह 1982 से 1996 तक तीन बार और फिर 1998 में राज्यसभा के मेंबर रहे।

1977 में इंडियन यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट बने

कलमाडी को 1977 में इंडियन यूथ कांग्रेस और पुणे के प्रेसिडेंट बनाया गया। अगले ही साल यूथ कांग्रेस महाराष्ट्र के प्रेसिडेंट बन गए। यह पद उन्होंने 1978 से 1980 तक संभाला। 1980 में, महाराष्ट्र एथलेटिक्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के तौर पर कलमाडी ने मॉस्को ओलंपिक्स में देश को रिप्रेजेंट करने के लिए मैराथन टीम के सिलेक्शन ट्रायल्स में हिस्सा लिया था। इसकी वजह से ही पुणे में इंटरनेशनल मैराथन की शुरुआत हुई थी। कलमाडी 1981-1986 तक इंडियन यूथ कांग्रेस (सोशलिस्ट) के प्रेसिडेंट बने रहे।

भारत के खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका

कलमाड़ी एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और खेल प्रशासक थे, जिन्होंने भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और कई वर्षों तक भारत के खेल प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स ) में हुए भ्रष्टाचार मामले के चलते वे राष्ट्रीय स्तर पर जांच के दायरे में आए और खेलों के फंड के कथित दुरुपयोग के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन पर मामला दर्ज किया गया। उन्हें अप्रैल 2011 में गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया।