भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल : बाबूलाल मरांडी
नेता प्रतिपक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की जीत को चुनाव आयोग की मेहरबानी बतलाने वाले दलों को अपनी तथ्यपरक उदाहरणों के साथ आईना दिखाने का काम किया है। उन्होंने सोशल मीडिया के एक्स पर लिखा है कि चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं, बल्कि हमारे कार्यकर्ताओं के 'लहू' से बंगाल का कमल सींचा गया है।
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श्री मरांडी ने कहा कि कुछ लोग आज भी इस मुगालते में जी रहे हैं कि बंगाल में भाजपा की सत्ता चुनाव आयोग का 'गिफ्ट' है। जिन्हें लगता है कि EVM की मशीनें, केंद्रीय बल या दिल्ली का दखल भाजपा को सत्ता की दहलीज तक लाया है, वे शायद बंगाल की तासीर से वाकिफ नहीं हैं। सुन लीजिये! बंगाल में कमल बैलेट बॉक्स से पहले कार्यकर्ताओं के खून से खिला है।
श्री मरांडी ने अपने पोस्ट में कुल चार पार्ट में "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने, चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी, 15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर एवं यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है!" पर क्रमवार शीर्षक देकर पार्टी के उतार चढ़ाव वाले सियासी सफरनामे, भाजपा कार्यकर्ताओं की शहादत, सत्तारूढ़ दल वामपंथियों और तृणमूल कांग्रेस के जुल्म को विस्तार से व्याख्या की है।
श्री मरांडी ने "लाशों का अंबार और जलते हुए आशियाने" वाले पहले शीर्षक में लिखा है कि 2011 से 2025 तक का सफर कोई राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि एक महायज्ञ था जिसमें भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। यहाँ लोकतंत्र की बात करने वालों को पेड़ों से लटकाया गया। किसी को बम से उड़ाया गया, तो किसी का शव क्षत-विक्षत हालत में तालाबों में मिला। नंदीग्राम से बीरभूम और कूचबिहार से बशीरहाट तक—सिर्फ भाजपा को वोट देने के अपराध में पूरे-पूरे गाँव खाक कर दिए गए। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटने की सलाह देते हुए कहा कि वह मंजर याद कीजिए, जब महिलाओं की अस्मत को राजनीतिक हथियार बनाया गया ताकि दहशत पैदा की जा सके। यह सत्ता किसी थाली में परोसकर नहीं मिली, इसके पीछे हाई कोर्ट की फटकार और CBI जांचों के वो पन्ने हैं जो TMC के 'खूनी खेल' की गवाही देते हैं।
श्री मरांडी ने अपने दूसरे शीर्षक "चट्टान जैसा मनोबल: मौत भी जिसे डरा न सकी" में लिखा है कि सोचिए! जिस बूथ अध्यक्ष की लाश सुबह पेड़ पर लटकी मिलती है, दोपहर को उसका बेटा कलेजे पर पत्थर रखकर उसी बूथ पर पोलिंग एजेंट बनकर खड़ा हो जाता है— यह हिम्मत EVM से नहीं, स्वाभिमान से आती है। जिस माँ का घर जला दिया गया, वह अगले दिन फिर हाथ में भगवा झंडा थामे गलियों में ललकारती है— यह हौसला चुनाव आयोग नहीं देता। वामपंथियों के 34 साल के दमन, तानाशाही और दीदी के 15 साल के खौफनाक, रक्तरंजित दहशतगर्दों की राजनीति को भाजपा के कार्यकर्ताओं ने अपनी छाती पर झेला है। फर्जी मुकदमे, जेल की सलाखें और सामाजिक बहिष्कार भी उनके कदम को नहीं डगमगा सके।
श्री मरांडी ने तीसरे शीर्षक "15 साल की तपस्या: शून्य से शिखर तक का रक्तरंजित सफर" में लिखा है कि यह ग्राफ किसी आंकड़ों का खेल नहीं, यह उन माँओं के आँसुओं का हिसाब है। 2011 में सिर्फ 1 विधायक जीतने पर मजाक उड़ाया गया। 2016 में 3 विधायक जीते, यह संघर्ष की शुरुआत थी। 2019 में 18 सांसद जीते, ममता के गढ़ में सेंध लग चुकी थी। 2021 में 77 विधायक जीतकर पार्टी मुख्य विपक्ष की ताकत बनी।
2024 में 12 सीटें मिली, भयंकर दमन के बावजूद टिके रहे। आज 2026 में पूर्ण बहुमत की प्रचंड विजय। यह जीत उन बेटों के नाम है जिनकी 'तेरहवीं' पर उनकी माताओं ने विलाप नहीं किया, बल्कि कसम खाई थी कि जब तक सत्ता परिवर्तन नहीं होगा, लड़ाई जारी रहेगी। यह उन रिलीफ कैंपों में सड़ रहे परिवारों के सब्र की जीत है।
अपने चौथे शीर्षक यह 'गिफ्ट' नहीं, शहीदों का बलिदान है! में श्री मरांडी ने लिखा है कि जो लोग आज इसे "चुनाव आयोग की सेटिंग" कहते हैं, वे एक बार उन गुमनाम कब्रों और श्मशानों में जाकर देखें जहाँ भाजपा का झंडा ओढ़े हमारे भाई सो रहे हैं। उन जले हुए घरों की राख को हाथ लगाकर देखें, जहाँ आज भी चीखें सुनाई देती हैं। बंगाल में सत्ता किसी मशीन ने नहीं दी है। यहाँ हर एक वोट के पीछे एक शहादत छिपी है। 15 साल तक खून-पसीना बहाने के बाद, अपनों की लाशें ढोने के बाद और हर जुल्म सहने के बाद आज बंगाल की गलियों से यह हुंकार निकली है। इसे 'मेहरबानी' कहना उन शहीदों का अपमान है जिन्होंने लोकतंत्र को ज़िंदा रखने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। यह बंगाल के आत्मसम्मान की जीत है, यह कार्यकर्ताओं के 'बलिदान' की जीत है!






Thane came alive with unstoppable energy as over 12,000 runners — elite athletes, corporate teams, students, seniors and fitness lovers — stormed the streets on Sunday, 8th February 2026.
Flagged off by fitness legend Milind Soman and Mr. Asheesh Pandey, MD & CEO, Union Bank of India, the race exploded with electric energy at TMC Ground, Hiranandani Estate, Thane. Adding to the thrill, both icons laced up and hit the roads themselves — Milind powering through the 10 km challenge with his signature grit, while Mr. Pandey inspired thousands by completing the 4 km. The momentum carried into fierce battles on the 21 km Half Marathon and 10 km routes — elite performances that lit up the morning!
46 min ago
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