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ईडी की रेड पर बिफरीं ममता, बीजेपी ने पूछा-इतनी घबराहट क्यों?

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कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 जनवरी यानी शुक्रवार को राज्य की राजधानी कोलकाता में विरोध मार्च निकाला। इस बीच बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार किया

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि गुरुवार को बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। सीएम ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।

रविशंकर ने पूछा- ममता क्यों घबरा गई हैं

बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, रेड निजी कंपनी के दफ्तर पर थी। हमें नहीं समझ आता कि इसमें ममता क्यों घबरा गई हैं। उन्हें डर है कि उनके घोटालों के राज खुल जाएंगे। जांच को रोकना कानून का उल्लंघन है। ममता का हिसाब जनता करेगी।'

ED के अधिकारियों को धमकाने का आरोप

रविशंकर ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। उन्होंने ED के अधिकारियों को भी धमकाया है। रविशंकर ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि ये रेड न तो ममता बनर्जी के घर पर थी, न उनके दफ्तर में, न ही टीएमसी के दफ्तर में और न ही टीएमसी के किसी नेता या मंत्री के घर पर थी। ये रेड एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिसके यहां करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत आई थी। ऐसे में ममता बनर्जी अपने पुलिस अधिकारियों के साथ जाती हैं और ईडी के लोगों को धमकाया जाता है। ममता बनर्जी उनसे बहस करती हैं और पेपर छीन कर चली जाती हैं। उनका आचरण न केवल अमर्यादित और शर्मनाक है, बल्कि उन्होंने इससे संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।

बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट

बीजेपी सांसद ने आगे कहा, ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल का हाल बेहाल हो गया है। आपको मालूम है कि बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट है, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं।

कर्नाटक में हिरासत के दौरान बीजेपी महिला कार्यकर्ता से बदसलूकी, पुलिस पर सनसनीखेज आरोप

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कर्नाटक के हुब्बली शहर में मंगलवार को पुलिस हिरासत के दौरान एक भाजपा महिला कार्यकर्ता से मारपीट का मामला सामने आया। महिला ने कपड़े फाड़े जाने का भी आरोप लगाया है। बीजेपी कार्यकर्ता को कांग्रेस पार्षद की शिकायत पर हिरासत में लिया गया था।

घटना से जुड़ा वीडियो सामने आया है, जिसमें महिला कार्यकर्ता को बस के अंदर पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों से घिरा देखा जा सकता है। आरोप है कि हिरासत के दौरान महिला ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और विरोध किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। इस दौरान उसके कपड़े भी फट गए।

विरोध करने पर काउंटर केस दर्ज

पुलिस का कहना है कि हिरासत के दौरान महिला ने विरोध किया और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ काउंटर शिकायत दर्ज की।पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ दर्ज मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत मामला भी शामिल है।

कांग्रेस पार्षद की शिकायत के बाद गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्षद सुवर्णा कल्लाकुंतला की शिकायत के आधार पर महिला को हिरासत में लिया गया था। यह विवाद राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पहले भी टकराव हुआ था। सूत्रों के अनुसार, महिला पूर्व में कांग्रेस कार्यकर्ता रही हैं और हाल ही में उन्होंने बीजेपी जॉइन किया था। आरोप है कि उन्होंने कुछ मतदाताओं के नाम हटाने में अधिकारियों की मदद की, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ा।

बीजेपी ने महिला सुरक्षा पर उठाया सवाल

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कर्नाटक में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी महिला की मर्यादा भंग की जाए, उसके कपड़े फाड़े जाएं और पुलिस द्वारा इस तरह से मारपीट की जाए, तो यह साफ दिखाता है कि कांग्रेस शासन में महिलाओं की सुरक्षा की क्या हालत है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "क्या यही है ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’?" क्या यही राजनीतिक असहमति का अधिकार है कि एक भाजपा की महिला कार्यकर्ता के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए? शहजाद पूनावाला ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के शासन में महिलाएं अब सुरक्षित नहीं हैं और इस तरह की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं।

महाराष्ट्र में गजब का सियासी खेल! भाजपा ने कांग्रेस ने मिला लिया हाथ

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कहा जाता है राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा ही कुछ देखा जा रहा है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली।

भाजपा और कांग्रेस का दुर्लभ गठबंधन

हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस का एक दुर्लभ गठबंधन सामने आया है। इस गठबंधन ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया है। भाजपा ने कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पार्षदों के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया है और मुंबई क्षेत्र की एक नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस गठबंधन से शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है।

शिवसेना सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का साथ

भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है।

किसे कितनी सीटें मिलीं

चुनाव पिछले महीने हुए थे, जिसमें शिवसेना और बीजेपी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद, अलग-अलग चुनाव लड़े थे। 60 सदस्यीय परिषद में, शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 27 सीटें जीतीं। लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। भाजपा को 14 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने चार सीटें जीतीं और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

"अंबरनाथ विकास अघाड़ी" का गठन

शिवसेना को नगर निगम अध्यक्ष पद के चुनाव में झटका लगा, जहां उसकी उम्मीदवार मनीषा वालेकर भाजपा उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल से हार गईं। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करना का फैसला लिया गया। इस गठबंधन को "अंबरनाथ विकास अघाड़ी" नाम दिया गया है।

ये है गठबंधन का गणित

अंबरनाथ में घोषित गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, भाजपा समर्थित नगर अध्यक्ष, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। गठबंधन की कुल संख्या 32 हो गई है, जो 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा पार कर जाती है।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में रोष

भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है।

बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश बनाने की कोशिश…मिथुन चक्रवर्ती का ममता सरकार पर बड़ा आरोप

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भारतीय जनता पार्टी के नेता और फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कूचबिहार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि बंगाल में हालात जानबूझकर ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो फिल्म द कश्मीर फाइल्स में दिखाए गए घटना की याद दिलाते हैं।

ममता बनर्जी की शाह पर की गई टिप्पणी की तीखी आलोचना

कूच बिहार की रैली में मिथुन ने ममता बनर्जी कर जमकर हमला बोला। मिथुन ने कहा कि बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और कहा कि उन्होंने ही उन्हें कोलकाता के उस होटल से बाहर आने दिया जहां वे ठहरे हुए थे। काश वे स्पष्ट रूप से कह देतीं कि गृह मंत्री को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वह दिन विनाशकारी होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी।

पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की साजिश-मिथुन

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा 'क्या आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखी है? क्या आपने देखा कि कश्मीरी पंडितों को कैसे वहां से खदेड़ा गया? आज बंगाल में भी वैसी ही स्थिति पैदा की जा रही है। एक साजिश के तहत पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की कोशिश हो रही है।'

भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं-मिथुन

भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का एकमात्र तरीका यह है कि सभी लोग एक साथ आएं। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल के विवेकशील समर्थकों से आगामी चुनावों में सरकार बदलने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि राज्य में कोई उद्यम, उद्योग, रोजगार या उचित स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं है।

लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं-मिथुन

भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं है और लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए, क्योंकि यह उनका ही पैसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल योजनाओं से विकास नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना से देशभर में लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे लागू नहीं होने दे रहीं, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार होगा। मिथुन ने आरोप लगाया कि बंगाल में न नौकरियां हैं, न कारखाने, न विकास- हर तरफ सिर्फ भ्रष्टाचार है।

4 सितंबर को बिहार बंद: बैंक-स्कूल से ट्रैफिक तक, जानिए क्या रहेगा चालू और क्या होगा बंद|

Ranchi | 04-09-2024: बिहार की राजनीति में 4 सितंबर 2025 का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक पांच घंटे का बिहार बंद करने जा रहा है. यह बंद खासतौर पर BJP महिला मोर्चा की अगुवाई में आयोजित होगा, जिसे NDA ने ‘मातृशक्ति का आक्रोश’ करार दिया है.



केरल की राजनीति में बीजेपी ने रचा इतिहास, पहली बार मेयर पद किया हासिल

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केरल की राजनीति में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। केरल में पहली बार भाजपा का मेयर चुना गया है। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव में भाजपा के वीवी राजेश को 51 वोट मिले। इस जीत को वामपंथियों के गढ़ केरल में भगवा पार्टी की दस्तक के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के केरल सचिव और कोडुंगनूर वार्ड के पार्षद वीवी राजेश को शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम निगम का मेयर चुना गया, जो केरल की शहरी राजनीति में बीजेपी की बड़ी सफलता है। बीजेपी के वीवी राजेश तिरुवनंतपुरम निगम के पहले मेयर बने हैं, जिन्हें 50 बीजेपी पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन मिला और कुल 51 वोट मिले। यूडीएफ के केएस सबरीनाथन को 17 वोट और एलडीएफ के आरपी शिवाजी को 29 वोट मिले।

गुरुवार को भाजपा ने राज्य सचिव वीवी राजेश को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया था। साथ ही पार्टी ने करुमम वार्ड से पार्षद जीएस आशानाथ को पार्टी की ओर से उप-महापौर पद का उम्मीदवार बनाया।

दरअसल 9 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों का रिजल्ट आया था। जिसमें से 50 वार्डों पर भाजपा को जीत मिली थी। पिछले 45 साल से यहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का कब्जा था। एलडीएफ को 29 और कांग्रेस गठबंधन (यूडीएफ) को 17 वार्डों में जीत मिली थी। केरल के 1,199 स्थानीय निकायों के लिए दो फेज 9 और 11 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। इनमें 6 कॉर्पोरेशन, 86 नगर पालिकाएं, 14 डिस्ट्रिक्ट काउंसिल, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

राज्य में छह नगर निगमों, 14 जिला पंचायतों, 87 नगर पालिकाओं, 152 ब्लॉक पंचायतों और 941 ग्राम पंचायत में चुनाव हुए थे। इनमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बड़ी जीत दर्ज की। यूडीएफ ने चार नगर निगमों, 7 जिला पंचायतों, 54 नगर पालिकाओं, 79 ब्लॉक पंचायतों और 505 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की है। एलडीएफ को महज एक नगर निगम, सात जिला पंचायतों, 28 नगर पालिकाओं, 63 ब्लॉक पंचायतों और 340 ग्राम पंचायतों में जीत मिली है।

बता दें कि केरल में बीजेपी सालों से संघर्ष करती आ रही है, लेकिन लेफ्ट के इस अभेद किले को अभी तक भेदने में नाकामयाब रही थी। केरल में पार्टी का अभी तक केवल एक ही विधायक रहा है, जिनका नाम ओ राजगोपाल रहा है। उन्होंने 2016 में नेमोम सीट जीती थी। राज्य में बीजेपी के एक सांसद हैं अभिनेता सुरेश गोपी, जिन्होंने साल 2024 में त्रिशूर सीट जीती है।

भारत में लोकतंत्र पर हो रहा हमला; सीबीआई-ईडी का हथियार की तरह इस्तेमाल, बर्लिन में बोले राहुल गांधी

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लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेशी धरती से केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने जर्मनी में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश के संस्थागत ढांचे पर बीजेपी का पूरी तरह से कब्जा हो गया है, लेकिन विपक्ष को इसका मुकाबला करने के लिए रास्ता निकालना होगा।

हमारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चौतरफा हमला-राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हर्टी स्कूल के कार्यक्रम 'पॉलिटिक्स इज़ द आर्ट ऑफ़ लिसनिंग' में शामिल हुए। राहुल गांधी ने इस संवाद कार्यक्रम का एक वीडियो सोमवार को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया। उन्होंने कहा, ‘हम भारत में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं… हमारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चौतरफा हमला हो रहा है।’ उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि हरियाणा की मतदाता सूची में ब्राजील की मॉडल का नाम 22 जगह पर था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘हम जो सवाल उठा रहे हैं उसका जवाब निर्वाचन आयोग की तरफ से नहीं मिल रहा है।

चुनावी मशीनरी में बुनियादी समस्या-राहुल गांधी

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष ने कहा, भारत में चुनावी मशीनरी में कुछ बुनियादी समस्या है। संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है, जब आप हमारी खुफिया एजेंसियों, सीबीआई और ईडी को देखते हैं तो पाते हैं कि इन्हें पूरी तरह से हथियार में तब्दील कर दिया गया है।'

राहुल ने पूछा- भाजपा के लोगों के खिलाफ कितने मामले?

राहुल गांधी ने आगे कहा,'देखिए, भाजपा के लोगों के खिलाफ ईडी और सीबीआई के कितने मामले हैं? जवाब यह होगा कि एक भी नहीं।' उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामले विपक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि अगर आप बड़े उद्योगपति हैं और कांग्रेस का सहयोग करने का इरादा रखते हैं, तो आपको धमकाया जाएगा। ईडी सीबीआई आ जाएगी।'

चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बीजेपी पर बरसा पैसा, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अकेले दिए 2180 करोड़

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15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताते हुए बंद करने का आदेश दिया था। अदालत का साफ कहना था कि लोकतंत्र में चंदे की गोपनीयता नहीं, बल्कि पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बारतीय जनता पार्टी पर पैसों की बरसात हो रही है।

कुल चंदे का 83 फीसदी बीजेपी के पास

इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद पहले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट ने राजनीतिक पार्टियों को करोड़ों रुपए दान दिए। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कुल 4,276 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें से 83.6% यानी सबसे बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिला। यह पिछले साल के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है।

कांग्रेस को मिले 299 करोड़ रुपए

कांग्रेस को इस रास्ते से 7.3% चंदा मिला, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 3.6% मिला। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को 299 करोड़ रुपए चंदा मिला। अन्य सभी पार्टियों के हिस्से में बाकी बचे 400 करोड़ रुपए आए।

किन ट्रस्टों से कितना मिला बीजेपी को?

2024-25 में बीजेपी को इलेक्टोरल ट्रस्ट से कुल 3,577.5 करोड़ रुपये मिले। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' से आया, जो 2,180.7 करोड़ रुपये था। 'प्रोग्रेसिव ईटी' से 757.6 करोड़ रुपये, 'ए बी जनरल ईटी' से 460 करोड़ रुपये, 'न्यू डेमोक्रेटिक ईटी' से 150 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा 'हार्मनी ईटी' से 30.1 करोड़ रुपये, 'ट्रायम्फ ईटी' से 21 करोड़ रुपये, 'जयभारत ईटी' से 5 करोड़ रुपये, 'समाज ईटी' से 3 करोड़ रुपये, 'जन कल्याण ईटी' से 9.5 लाख रुपये और 'एन्जिगार्टिक ईटी' से 7.75 लाख रुपये मिले।

क्या है इलेक्टोरल ट्रस्ट

दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लेकर आई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 में असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। अब कॉर्पोरेट कंपनियां चेक, DD या UPI के जरिए पार्टियों को डोनेशन दे सकती हैं। इसके साथ ही इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए भी चंदा दे सकती हैं। इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कोई कंपनी या फिर व्यक्ति एक ट्रस्ट को डोनेशन दे सकता है, जो आगे पार्टियों को डोनेट करता है

संजय सरावगी बने बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दरभंगा सदर से लगातार 5 बार हैं विधायक

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बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए संजय सरावगी को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मिथिलांचल में पार्टी का चर्चित और पुराना चेहरा

निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के स्थान पर सरावगी की ताजपोशी को पार्टी की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। संजय सरावगी का संबंध राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र (दरभंगा) से है, जिसे बीजेपी ने आने वाले समय में अपने मुख्य फोकस में रखा है। संजय सरावगी दरभंगा शहर के विधायक हैं और इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ये इलाका पारंपरिक रूप से अन्य दलों का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे भेदने के लिए बीजेपी ने एक मजबूत चेहरा आगे किया है। पार्टी का मानना है कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में मिथिलांचल की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों में जरूर दिखेगा।

2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए

संजय सरावगी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी रहे, जो कि बीजेपी का विद्यार्थी संगठन है। संजय ने साल 1995 में बीजेपी की सदस्यता ली। 2003 में उन्होंने दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। संजय साल 2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए।

लगातार पांचवीं बार बने विधायक

2005 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। 2025 के विधानसभा चुनाव में संजय ने उमेश सहनी को बड़े अंतर से हराया।

दिलीप जायसवाल की जगह पार्टी की कमान

बता दें कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला चलता है। इसके तहत वर्तमान में उद्योग मंत्री बने दिलीप कुमार जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा है। अब बीजेपी ने दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

नितिन नबीन ने बने बीजेपी के सबसे युवा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, जाने बीजेपी ने क्या दिया संदेश?

#nitin _

भारतीय जनता पार्टी बिहार के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट) नियुक्त किया है। यह फैसला पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया है और वर्तमान राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) अरुण सिंह द्वारा जारी आदेश से यह निर्णय सार्वजनिक किया गया है।

14 जनवरी के बाद नितिन नवीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा हो सकती है। ऐसे में वो बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगले साल जनवरी में जब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे, तब उनकी उम्र केवल साढ़े 45 साल रहेगी। इससे पहले अमित शाह 49 वर्ष की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, जबकि नितिन गडकरी ने 52 साल की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था।

युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत

नितिन नवीन को फिलहाल जेपी नड्डा की जगह पार्टी की कमान सौंपी गई है। नितिन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी यूं ही नहीं सौंपी। नितिन नबीन दिल्ली के जमे-जमाए राजनीतिक गलियारों का हिस्सा बने बिना शीर्ष संगठनात्मक पद संभालने जा रहे हैं। जाहिर है वर्षों से दिल्ली में संगठन से लेकर सरकार में जमें भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल जैसों के बजाए कम उम्र और दिल्ली के बाहर के नेता का चयन मौजूदा पीढ़ी के लिए भी संदेश है कि अब सरकार और संगठन में बड़े बदलाव होंगे और नई पीढ़ी आगे आएगी। यानी 45 वर्ष के नितिन नबीन का यह प्रमोशन युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत है

नितिन नवीन पर भरोसे की वजह?

अब सवाल उठ रहा है, क्या वे अगले पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं? नितिन नवीन का बीजेपी में सफर संघर्षपूर्ण और तेजी से ऊपर उठने वाला रहा है। पार्टी ने उन्हें हमेशा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं जो उनकी संगठनात्मक क्षमता और चुनावी सफलता का प्रमाण हैं। वे दो बार राष्ट्रीय महामंत्री (युवा मोर्चा) रह चुके हैं जहां उन्होंने युवाओं को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। बिहार में वे प्रदेश अध्यक्ष (युवा मोर्चा) के रूप में सक्रिय रहे, जिससे राज्य स्तर पर बीजेपी की युवा शाखा मजबूत हुई। इसके अतिरिक्त वे सिक्किम के प्रभारी और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं जहां उन्होंने पूर्वोत्तर और मध्य भारत में पार्टी का विस्तार किया।

ईडी की रेड पर बिफरीं ममता, बीजेपी ने पूछा-इतनी घबराहट क्यों?

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कोलकाता में I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के घर और दफ्तरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 9 जनवरी यानी शुक्रवार को राज्य की राजधानी कोलकाता में विरोध मार्च निकाला। इस बीच बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधा।

ममता बनर्जी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार किया

केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि गुरुवार को बंगाल में जो हुआ, वह आजाद भारत में पहले कभी नहीं हुआ। सीएम ममता बनर्जी का पूरा काम न सिर्फ अनैतिक, गैर-जिम्मेदार और असंवैधानिक है, बल्कि उन्होंने पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है।

रविशंकर ने पूछा- ममता क्यों घबरा गई हैं

बीजेपी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा, रेड निजी कंपनी के दफ्तर पर थी। हमें नहीं समझ आता कि इसमें ममता क्यों घबरा गई हैं। उन्हें डर है कि उनके घोटालों के राज खुल जाएंगे। जांच को रोकना कानून का उल्लंघन है। ममता का हिसाब जनता करेगी।'

ED के अधिकारियों को धमकाने का आरोप

रविशंकर ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बंगाल में कोई जांच नहीं होने देती हैं। उन्होंने ED के अधिकारियों को भी धमकाया है। रविशंकर ने कहा कि मैं आपको बता दूं कि ये रेड न तो ममता बनर्जी के घर पर थी, न उनके दफ्तर में, न ही टीएमसी के दफ्तर में और न ही टीएमसी के किसी नेता या मंत्री के घर पर थी। ये रेड एक निजी कंसल्टेंसी फर्म पर थी, जिसके यहां करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत आई थी। ऐसे में ममता बनर्जी अपने पुलिस अधिकारियों के साथ जाती हैं और ईडी के लोगों को धमकाया जाता है। ममता बनर्जी उनसे बहस करती हैं और पेपर छीन कर चली जाती हैं। उनका आचरण न केवल अमर्यादित और शर्मनाक है, बल्कि उन्होंने इससे संवैधानिक मर्यादाओं को भी तार-तार किया है।

बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट

बीजेपी सांसद ने आगे कहा, ममता बनर्जी के राज में पश्चिम बंगाल का हाल बेहाल हो गया है। आपको मालूम है कि बंगाल कोयले की स्मगलिंग का एक बहुत बड़ा हॉट स्पॉट है, जिसमें सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल हैं।

कर्नाटक में हिरासत के दौरान बीजेपी महिला कार्यकर्ता से बदसलूकी, पुलिस पर सनसनीखेज आरोप

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कर्नाटक के हुब्बली शहर में मंगलवार को पुलिस हिरासत के दौरान एक भाजपा महिला कार्यकर्ता से मारपीट का मामला सामने आया। महिला ने कपड़े फाड़े जाने का भी आरोप लगाया है। बीजेपी कार्यकर्ता को कांग्रेस पार्षद की शिकायत पर हिरासत में लिया गया था।

घटना से जुड़ा वीडियो सामने आया है, जिसमें महिला कार्यकर्ता को बस के अंदर पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों से घिरा देखा जा सकता है। आरोप है कि हिरासत के दौरान महिला ने पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और विरोध किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। इस दौरान उसके कपड़े भी फट गए।

विरोध करने पर काउंटर केस दर्ज

पुलिस का कहना है कि हिरासत के दौरान महिला ने विरोध किया और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया। इसके बाद पुलिस ने महिला के खिलाफ काउंटर शिकायत दर्ज की।पुलिस ने बताया कि महिला के खिलाफ दर्ज मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत मामला भी शामिल है।

कांग्रेस पार्षद की शिकायत के बाद गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, कांग्रेस पार्षद सुवर्णा कल्लाकुंतला की शिकायत के आधार पर महिला को हिरासत में लिया गया था। यह विवाद राज्य में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान शुरू हुआ, जिसमें बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पहले भी टकराव हुआ था। सूत्रों के अनुसार, महिला पूर्व में कांग्रेस कार्यकर्ता रही हैं और हाल ही में उन्होंने बीजेपी जॉइन किया था। आरोप है कि उन्होंने कुछ मतदाताओं के नाम हटाने में अधिकारियों की मदद की, जिससे राजनीतिक तनाव बढ़ा।

बीजेपी ने महिला सुरक्षा पर उठाया सवाल

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कर्नाटक में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी महिला की मर्यादा भंग की जाए, उसके कपड़े फाड़े जाएं और पुलिस द्वारा इस तरह से मारपीट की जाए, तो यह साफ दिखाता है कि कांग्रेस शासन में महिलाओं की सुरक्षा की क्या हालत है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, "क्या यही है ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’?" क्या यही राजनीतिक असहमति का अधिकार है कि एक भाजपा की महिला कार्यकर्ता के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए? शहजाद पूनावाला ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी के शासन में महिलाएं अब सुरक्षित नहीं हैं और इस तरह की घटनाएं बेहद निंदनीय हैं।

महाराष्ट्र में गजब का सियासी खेल! भाजपा ने कांग्रेस ने मिला लिया हाथ

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कहा जाता है राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है। महाराष्ट्र की सियासत में ऐसा ही कुछ देखा जा रहा है। कांग्रेस-मुक्त भारत का नारा लगाने वाली भाजपा ने ठाणे में अंबरनाथ नगर परिषद में सीधे कांग्रेस से हाथ मिला लिया है। कांग्रेस से गठबंधन कर भाजपा ने अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता हासिल कर ली।

भाजपा और कांग्रेस का दुर्लभ गठबंधन

हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा और कांग्रेस का एक दुर्लभ गठबंधन सामने आया है। इस गठबंधन ने राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया है। भाजपा ने कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के पार्षदों के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी का गठन किया है और मुंबई क्षेत्र की एक नगर परिषद पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस गठबंधन से शिवसेना सत्ता से बाहर हो गई है।

शिवसेना सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का साथ

भाजपा-कांग्रेस के इस सियासी खेल ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ में हाशिए पर धकेल दिया है। चौंकाने वाली बात है कि भाजपा ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अंबरनाथ नगर परिषद में सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस का समर्थन लिया है।

किसे कितनी सीटें मिलीं

चुनाव पिछले महीने हुए थे, जिसमें शिवसेना और बीजेपी, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर सहयोगी होने के बावजूद, अलग-अलग चुनाव लड़े थे। 60 सदस्यीय परिषद में, शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उसने 27 सीटें जीतीं। लेकिन बहुमत से थोडा दूर रह गई। भाजपा को 14 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें जीतीं। अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने चार सीटें जीतीं और दो निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

"अंबरनाथ विकास अघाड़ी" का गठन

शिवसेना को नगर निगम अध्यक्ष पद के चुनाव में झटका लगा, जहां उसकी उम्मीदवार मनीषा वालेकर भाजपा उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल से हार गईं। शिंदे सेना सोच रही थी की बीजेपी उनके साथ मिलकर नगर परिषद में सरकार बनाएगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बीजेपी ने शिंदे सेना के बजाय कांग्रेस से हाथ मिला लिया और नगर परिषद में सत्ता स्थापित कर ली। स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता स्थापित करना का फैसला लिया गया। इस गठबंधन को "अंबरनाथ विकास अघाड़ी" नाम दिया गया है।

ये है गठबंधन का गणित

अंबरनाथ में घोषित गठबंधन में 14 भाजपा पार्षद, भाजपा समर्थित नगर अध्यक्ष, 12 कांग्रेस पार्षद, चार एनसीपी (अजीत पवार गुट) पार्षद और एक निर्दलीय पार्षद शामिल हैं। गठबंधन की कुल संख्या 32 हो गई है, जो 60 सदस्यीय परिषद में बहुमत का आंकड़ा पार कर जाती है।

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में रोष

भाजपा की ओर से मिले इस झटके के बाद शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में काफी रोष नजर आ रहा है। इस मामले पर शिवसेना (शिंदे गुट) के सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस का गठबंधन हुआ है, तो इसका जवाब भी उनके ही नेताओं को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह फैसला शिवसेना का नहीं है और न ही इस पर शिवसेना को सफाई देने की जरूरत है।

बंगाल को पश्चिमी बांग्लादेश बनाने की कोशिश…मिथुन चक्रवर्ती का ममता सरकार पर बड़ा आरोप

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भारतीय जनता पार्टी के नेता और फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। कूचबिहार में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दावा किया कि बंगाल में हालात जानबूझकर ऐसे बनाए जा रहे हैं, जो फिल्म द कश्मीर फाइल्स में दिखाए गए घटना की याद दिलाते हैं।

ममता बनर्जी की शाह पर की गई टिप्पणी की तीखी आलोचना

कूच बिहार की रैली में मिथुन ने ममता बनर्जी कर जमकर हमला बोला। मिथुन ने कहा कि बांकुड़ा जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत के गृह मंत्री को धमकी दी और कहा कि उन्होंने ही उन्हें कोलकाता के उस होटल से बाहर आने दिया जहां वे ठहरे हुए थे। काश वे स्पष्ट रूप से कह देतीं कि गृह मंत्री को बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। वह दिन विनाशकारी होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह कोई अलग देश नहीं है जैसा कि वह सोच रही होंगी।

पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की साजिश-मिथुन

मिथुन चक्रवर्ती ने कहा 'क्या आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखी है? क्या आपने देखा कि कश्मीरी पंडितों को कैसे वहां से खदेड़ा गया? आज बंगाल में भी वैसी ही स्थिति पैदा की जा रही है। एक साजिश के तहत पश्चिम बंगाल को ‘वेस्ट पाकिस्तान’ में बदलने की कोशिश हो रही है।'

भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं-मिथुन

भाजपा नेता ने कहा कि राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार को उखाड़ फेंकने का एकमात्र तरीका यह है कि सभी लोग एक साथ आएं। उन्होंने कांग्रेस, वामपंथी और तृणमूल के विवेकशील समर्थकों से आगामी चुनावों में सरकार बदलने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया कि राज्य में कोई उद्यम, उद्योग, रोजगार या उचित स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के अलावा इस राज्य में और कुछ नहीं है।

लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं-मिथुन

भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती ने आगे कहा कि लक्ष्मी भंडार योजना खराब नहीं है और लोगों को इसका लाभ लेना चाहिए, क्योंकि यह उनका ही पैसा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल योजनाओं से विकास नहीं होता। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना से देशभर में लोग लाभान्वित हो रहे हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसे लागू नहीं होने दे रहीं, क्योंकि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रचार होगा। मिथुन ने आरोप लगाया कि बंगाल में न नौकरियां हैं, न कारखाने, न विकास- हर तरफ सिर्फ भ्रष्टाचार है।

4 सितंबर को बिहार बंद: बैंक-स्कूल से ट्रैफिक तक, जानिए क्या रहेगा चालू और क्या होगा बंद|

Ranchi | 04-09-2024: बिहार की राजनीति में 4 सितंबर 2025 का दिन बेहद अहम माना जा रहा है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस दिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक पांच घंटे का बिहार बंद करने जा रहा है. यह बंद खासतौर पर BJP महिला मोर्चा की अगुवाई में आयोजित होगा, जिसे NDA ने ‘मातृशक्ति का आक्रोश’ करार दिया है.



केरल की राजनीति में बीजेपी ने रचा इतिहास, पहली बार मेयर पद किया हासिल

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केरल की राजनीति में भाजपा ने इतिहास रच दिया है। केरल में पहली बार भाजपा का मेयर चुना गया है। तिरुवनंतपुरम कॉर्पोरेशन में शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव में भाजपा के वीवी राजेश को 51 वोट मिले। इस जीत को वामपंथियों के गढ़ केरल में भगवा पार्टी की दस्तक के तौर पर देखा जा रहा है।

बीजेपी के केरल सचिव और कोडुंगनूर वार्ड के पार्षद वीवी राजेश को शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम निगम का मेयर चुना गया, जो केरल की शहरी राजनीति में बीजेपी की बड़ी सफलता है। बीजेपी के वीवी राजेश तिरुवनंतपुरम निगम के पहले मेयर बने हैं, जिन्हें 50 बीजेपी पार्षदों और एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन मिला और कुल 51 वोट मिले। यूडीएफ के केएस सबरीनाथन को 17 वोट और एलडीएफ के आरपी शिवाजी को 29 वोट मिले।

गुरुवार को भाजपा ने राज्य सचिव वीवी राजेश को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के मेयर पद का उम्मीदवार घोषित किया था। साथ ही पार्टी ने करुमम वार्ड से पार्षद जीएस आशानाथ को पार्टी की ओर से उप-महापौर पद का उम्मीदवार बनाया।

दरअसल 9 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों का रिजल्ट आया था। जिसमें से 50 वार्डों पर भाजपा को जीत मिली थी। पिछले 45 साल से यहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) का कब्जा था। एलडीएफ को 29 और कांग्रेस गठबंधन (यूडीएफ) को 17 वार्डों में जीत मिली थी। केरल के 1,199 स्थानीय निकायों के लिए दो फेज 9 और 11 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। इनमें 6 कॉर्पोरेशन, 86 नगर पालिकाएं, 14 डिस्ट्रिक्ट काउंसिल, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

राज्य में छह नगर निगमों, 14 जिला पंचायतों, 87 नगर पालिकाओं, 152 ब्लॉक पंचायतों और 941 ग्राम पंचायत में चुनाव हुए थे। इनमें कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बड़ी जीत दर्ज की। यूडीएफ ने चार नगर निगमों, 7 जिला पंचायतों, 54 नगर पालिकाओं, 79 ब्लॉक पंचायतों और 505 ग्राम पंचायतों में जीत हासिल की है। एलडीएफ को महज एक नगर निगम, सात जिला पंचायतों, 28 नगर पालिकाओं, 63 ब्लॉक पंचायतों और 340 ग्राम पंचायतों में जीत मिली है।

बता दें कि केरल में बीजेपी सालों से संघर्ष करती आ रही है, लेकिन लेफ्ट के इस अभेद किले को अभी तक भेदने में नाकामयाब रही थी। केरल में पार्टी का अभी तक केवल एक ही विधायक रहा है, जिनका नाम ओ राजगोपाल रहा है। उन्होंने 2016 में नेमोम सीट जीती थी। राज्य में बीजेपी के एक सांसद हैं अभिनेता सुरेश गोपी, जिन्होंने साल 2024 में त्रिशूर सीट जीती है।

भारत में लोकतंत्र पर हो रहा हमला; सीबीआई-ईडी का हथियार की तरह इस्तेमाल, बर्लिन में बोले राहुल गांधी

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लोकसभा मे नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर विदेशी धरती से केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने जर्मनी में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि देश के संस्थागत ढांचे पर बीजेपी का पूरी तरह से कब्जा हो गया है, लेकिन विपक्ष को इसका मुकाबला करने के लिए रास्ता निकालना होगा।

हमारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चौतरफा हमला-राहुल गांधी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में हर्टी स्कूल के कार्यक्रम 'पॉलिटिक्स इज़ द आर्ट ऑफ़ लिसनिंग' में शामिल हुए। राहुल गांधी ने इस संवाद कार्यक्रम का एक वीडियो सोमवार को अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया। उन्होंने कहा, ‘हम भारत में चुनाव की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहे हैं… हमारे देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चौतरफा हमला हो रहा है।’ उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि हरियाणा की मतदाता सूची में ब्राजील की मॉडल का नाम 22 जगह पर था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘हम जो सवाल उठा रहे हैं उसका जवाब निर्वाचन आयोग की तरफ से नहीं मिल रहा है।

चुनावी मशीनरी में बुनियादी समस्या-राहुल गांधी

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष ने कहा, भारत में चुनावी मशीनरी में कुछ बुनियादी समस्या है। संस्थागत ढांचे पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है, जब आप हमारी खुफिया एजेंसियों, सीबीआई और ईडी को देखते हैं तो पाते हैं कि इन्हें पूरी तरह से हथियार में तब्दील कर दिया गया है।'

राहुल ने पूछा- भाजपा के लोगों के खिलाफ कितने मामले?

राहुल गांधी ने आगे कहा,'देखिए, भाजपा के लोगों के खिलाफ ईडी और सीबीआई के कितने मामले हैं? जवाब यह होगा कि एक भी नहीं।' उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामले विपक्ष के लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि अगर आप बड़े उद्योगपति हैं और कांग्रेस का सहयोग करने का इरादा रखते हैं, तो आपको धमकाया जाएगा। ईडी सीबीआई आ जाएगी।'

चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बीजेपी पर बरसा पैसा, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अकेले दिए 2180 करोड़

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15 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक बताते हुए बंद करने का आदेश दिया था। अदालत का साफ कहना था कि लोकतंत्र में चंदे की गोपनीयता नहीं, बल्कि पारदर्शिता जरूरी है। हालांकि, इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद भी बारतीय जनता पार्टी पर पैसों की बरसात हो रही है।

कुल चंदे का 83 फीसदी बीजेपी के पास

इलेक्टोरल बॉन्ड खत्म होने के बाद पहले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट ने राजनीतिक पार्टियों को करोड़ों रुपए दान दिए। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कुल 4,276 करोड़ रुपये का चंदा मिला। इसमें से 83.6% यानी सबसे बड़ा हिस्सा बीजेपी को मिला। यह पिछले साल के मुकाबले चार गुना से भी ज्यादा है।

कांग्रेस को मिले 299 करोड़ रुपए

कांग्रेस को इस रास्ते से 7.3% चंदा मिला, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 3.6% मिला। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस को 299 करोड़ रुपए चंदा मिला। अन्य सभी पार्टियों के हिस्से में बाकी बचे 400 करोड़ रुपए आए।

किन ट्रस्टों से कितना मिला बीजेपी को?

2024-25 में बीजेपी को इलेक्टोरल ट्रस्ट से कुल 3,577.5 करोड़ रुपये मिले। इसमें से सबसे ज्यादा पैसा 'प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट' से आया, जो 2,180.7 करोड़ रुपये था। 'प्रोग्रेसिव ईटी' से 757.6 करोड़ रुपये, 'ए बी जनरल ईटी' से 460 करोड़ रुपये, 'न्यू डेमोक्रेटिक ईटी' से 150 करोड़ रुपये मिले। इसके अलावा 'हार्मनी ईटी' से 30.1 करोड़ रुपये, 'ट्रायम्फ ईटी' से 21 करोड़ रुपये, 'जयभारत ईटी' से 5 करोड़ रुपये, 'समाज ईटी' से 3 करोड़ रुपये, 'जन कल्याण ईटी' से 9.5 लाख रुपये और 'एन्जिगार्टिक ईटी' से 7.75 लाख रुपये मिले।

क्या है इलेक्टोरल ट्रस्ट

दरअसल, केंद्र की मोदी सरकार चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम लेकर आई थी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने साल 2024 में असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था। अब कॉर्पोरेट कंपनियां चेक, DD या UPI के जरिए पार्टियों को डोनेशन दे सकती हैं। इसके साथ ही इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए भी चंदा दे सकती हैं। इलेक्टोरल ट्रस्ट के जरिए कोई कंपनी या फिर व्यक्ति एक ट्रस्ट को डोनेशन दे सकता है, जो आगे पार्टियों को डोनेट करता है

संजय सरावगी बने बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष, दरभंगा सदर से लगातार 5 बार हैं विधायक

#bjpappointssanjaysarawgiasbiharpradesh_adhyaksh

बिहार बीजेपी में बड़ा बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बिहार संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए संजय सरावगी को बिहार का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

मिथिलांचल में पार्टी का चर्चित और पुराना चेहरा

निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप जायसवाल के स्थान पर सरावगी की ताजपोशी को पार्टी की सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। संजय सरावगी का संबंध राज्य के मिथिलांचल क्षेत्र (दरभंगा) से है, जिसे बीजेपी ने आने वाले समय में अपने मुख्य फोकस में रखा है। संजय सरावगी दरभंगा शहर के विधायक हैं और इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ये इलाका पारंपरिक रूप से अन्य दलों का मजबूत गढ़ रहा है, जिसे भेदने के लिए बीजेपी ने एक मजबूत चेहरा आगे किया है। पार्टी का मानना है कि नए अध्यक्ष के नेतृत्व में मिथिलांचल की ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत सुनिश्चित की जा सकती है, जिसका असर आगामी चुनावों में जरूर दिखेगा।

2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए

संजय सरावगी छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय रहे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी रहे, जो कि बीजेपी का विद्यार्थी संगठन है। संजय ने साल 1995 में बीजेपी की सदस्यता ली। 2003 में उन्होंने दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद का चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी। संजय साल 2005 में पहली बार दरभंगा सीट से विधायक चुने गए।

लगातार पांचवीं बार बने विधायक

2005 के बाद 2010, 2015, 2020 और 2025 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। 2025 के विधानसभा चुनाव में संजय ने उमेश सहनी को बड़े अंतर से हराया।

दिलीप जायसवाल की जगह पार्टी की कमान

बता दें कि बीजेपी में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ का फॉर्मूला चलता है। इसके तहत वर्तमान में उद्योग मंत्री बने दिलीप कुमार जायसवाल को प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा है। अब बीजेपी ने दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी को बिहार बीजेपी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

नितिन नबीन ने बने बीजेपी के सबसे युवा कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष, जाने बीजेपी ने क्या दिया संदेश?

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भारतीय जनता पार्टी बिहार के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष (नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट) नियुक्त किया है। यह फैसला पार्टी के संसदीय बोर्ड द्वारा मंजूर किया गया है और वर्तमान राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) अरुण सिंह द्वारा जारी आदेश से यह निर्णय सार्वजनिक किया गया है।

14 जनवरी के बाद नितिन नवीन के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने की औपचारिक घोषणा हो सकती है। ऐसे में वो बीजेपी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे। अगले साल जनवरी में जब वे राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे, तब उनकी उम्र केवल साढ़े 45 साल रहेगी। इससे पहले अमित शाह 49 वर्ष की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे, जबकि नितिन गडकरी ने 52 साल की उम्र में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था।

युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत

नितिन नवीन को फिलहाल जेपी नड्डा की जगह पार्टी की कमान सौंपी गई है। नितिन को इतनी बड़ी जिम्मेदारी यूं ही नहीं सौंपी। नितिन नबीन दिल्ली के जमे-जमाए राजनीतिक गलियारों का हिस्सा बने बिना शीर्ष संगठनात्मक पद संभालने जा रहे हैं। जाहिर है वर्षों से दिल्ली में संगठन से लेकर सरकार में जमें भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल जैसों के बजाए कम उम्र और दिल्ली के बाहर के नेता का चयन मौजूदा पीढ़ी के लिए भी संदेश है कि अब सरकार और संगठन में बड़े बदलाव होंगे और नई पीढ़ी आगे आएगी। यानी 45 वर्ष के नितिन नबीन का यह प्रमोशन युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने का संकेत है

नितिन नवीन पर भरोसे की वजह?

अब सवाल उठ रहा है, क्या वे अगले पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने की दौड़ में हैं? नितिन नवीन का बीजेपी में सफर संघर्षपूर्ण और तेजी से ऊपर उठने वाला रहा है। पार्टी ने उन्हें हमेशा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी हैं जो उनकी संगठनात्मक क्षमता और चुनावी सफलता का प्रमाण हैं। वे दो बार राष्ट्रीय महामंत्री (युवा मोर्चा) रह चुके हैं जहां उन्होंने युवाओं को पार्टी से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। बिहार में वे प्रदेश अध्यक्ष (युवा मोर्चा) के रूप में सक्रिय रहे, जिससे राज्य स्तर पर बीजेपी की युवा शाखा मजबूत हुई। इसके अतिरिक्त वे सिक्किम के प्रभारी और वर्तमान में छत्तीसगढ़ के प्रभारी के रूप में भी काम कर चुके हैं जहां उन्होंने पूर्वोत्तर और मध्य भारत में पार्टी का विस्तार किया।